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आधार कार्ड पर्सनल, पत्नी भी नहीं माँग सकती पति की जानकारी: हाई कोर्ट ने रिश्तों में बताई प्राइवेसी की अहमियत

कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि केवल शादीशुदा होने के आधार पर एक पत्नी अकेले अपने पति का आधार डेटा हासिल नहीं कर सकती है, क्योंकि कानून के वैधानिक ढाँचे के मुताबिक ये किसी भी शख्स के गोनिजता के अधिकारों की स्वायत्तता और सुरक्षा के तहत आता है ये मामला। और इसके उल्लंघन की इजाजत किसी को नहीं है।

जस्टिस एस सुनील दत्त यादव और जस्टिस विजयकुमार ए पाटिल की बेंच ने कहा कि महज शादी करने से आधार कार्डधारक की निजता का अधिकार कम करके नहीं आँका जा सकता। इसलिए उसके कार्ड के डेटा तक पहुँच के लिए भी निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।

दरअसल, कर्नाटक हाई कोर्ट ने ये फैसला हुबली की एक महिला की याचिका पर सुनाया था। इस महिला ने अपने अलग हो चुके पति का आधार नंबर, नामांकन विवरण और फोन नंबर माँगा था।

महिला ने दलील दी थी कि पति की डिटेल न होने से उसके खिलाफ पारिवारिक अदालत के भरण-पोषण के आदेश को लागू करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के मुताबिक इस जोड़े की साल 2005 में शादी हुई थी। इस शादी से उनकी एक बेटी भी है।

महिला ने इस रिश्ते में दिक्कतें पेश आने की वजह से कानून का सहारा लिया था। इसके बाद पारिवारिक अदालत ने महिला के पति से उन्हें भरण-पोषण के तौर पर 10,000 रुपए और उनकी बेटी के लिए अतिरिक्त 5,000 रुपए देने का फैसला दिया था।

उसने अपने पति के नामालूम ठिकाने और उसके भाग जाने की वजह से पारिवारिक अदालत के आदेश को लागू करने में चुनौतियाँ पैदा होने की खबर अदालत को दी।

इस वजह से महिला ने मदद की माँग करते हुए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) से संपर्क साधा था। लेकिन यूआईडीएआई ने उसका आवेदन 25 फरवरी, 2021 को खारिज कर दिया।

महिला को उसके पति के आधार डाटा की जानकारी देने से इंकार करने के पीछे यूआईडीएआई ने आधार अधिनियम की धारा 33 के तहत हाईकोर्ट के जस्टिस के दिए फैसले का हवाला दिया।

इसके बाद महिला ने कोर्ट की सिंगल बेंच का रूख किया। महिला के लिए 8 फरवरी, 2023 को इस सिंगल बेंच की तरफ से राहत वाला फैसला आया। इसके बाद डिविजन बेंच यानी कर्नाटक हाईकोर्ट की बेंच ने यूआईडीएआई को महिला के पति को सुनने के बाद दोबारा से उसके आवेदन पर आरटीआई के तहत पुर्नविचार करने का निर्देश दिया।

इस मामले में, डिवीजन बेंच ने निष्कर्ष निकाला कि सिंगल जज इस मामले को यूआईडीएआई को नहीं भेज सकते थे क्योंकि धारा 33 के तहत सुनवाई करने और फैसले पर पहुँचने की शक्ति किसी ऐसे अदालत के पास है जो हाईकोर्ट से कमतर नहीं है।

इसे लेकर महिला ने कोर्ट में तर्क दिया था कि विवाह का मतलब दोनों की एक पहचान होना है। इस वजह से जीवनसाथी की हर तरह की जानकारी तक पहुँच जायज है। डिवीजन बेंच ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी खुलासे से पहले दूसरे शख्स को भी अपना पक्ष रखने का हक है।

कर्नाटक हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने आगे कहा, “विवाह का संबंध जो दो भागीदारों का मिलन है, लेकिन ये दोनों में से किसी के भी निजता के अधिकार पर हावी नहीं हो सकता, क्योंकि ये एक व्यक्ति का मौलिक अधिकार है और व्यक्ति के इस अधिकार को धारा 33 के तहत सुनवाई के लिए स्वायत्तता, मान्यता और संरक्षित किया गया है। विवाह अपने आप में आधार अधिनियम की धारा 33 के तहत प्रदत्त सुनवाई की प्रक्रिया के इस अधिकार को ख़त्म नहीं करता है।”

कर्नाटक हाईकोर्ट ने जोर देकर कहा कि धारा 33 के तहत बगैर दूसरा पक्ष सुने बगैर आधार डेटा तक पहुँच नहीं हो सकती। कर्नाटक हाईकोर्ट ने मामले को नए सिरे से विचार करने के लिए सिंगल बेंच को वापस भेज दिया।

केरल में बवासीर का इलाज, ‘डॉक्टर’ बंगाल वाले… कलेक्टर ऑफिस से बस 4 किलोमीटर दूर: पुलिस ने क्यों कर लिया अरेस्ट

केरल पुलिस ने त्रिशूर में 2 बंगाली झोलाछाप डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है। यह दोनों बिना किसी डॉक्टरी की पढ़ाई किए दशकों से लोगों को इलाज के नाम पर मूर्ख बना रहे थे। साथ ही ये कई गंभीर रोगों का इलाज करने का दावा करते थे।

इनमें से एक बंगाली व्यक्ति तो जिलाधिकारी के दफ्तर से मात्र 4 किलोमीटर दूर ही बैठ कर यह झोलाछाप डॉक्टर क्लिनिक चला रहा था, इसका नाम इसने ‘चाँदसी क्लीनिक’ रखा हुआ था। इसका नाम दिलीप कुमार सिकदर है और यह बंगाल का रहने वाला है। हैरानी की बात यह है कि वह पिछले तीन दशकों से यह क्लीनिक चला रहा था।

इसके खिलाफ एक शिकायत आई थी जिस पर जिले की मेडिकल टीम ने छापा मारा और इसे गिरफ्तार किया। उसके पास से यूनानी, एलोपैथिक और होम्योपैथिक दवाइयाँ बरामद हुई हैं। उसके पास से एक ऐसा फर्जी प्रमाण पत्र भी प्राप्त हुआ है जिसमें लिखा था कि वह किसी भी तरह की मेडिकल प्रैक्टिस कर सकता है। सिकदर गंभीर रोगों जैसे कि भगंदर और बवासीर का इलाज करने का दावा करता था और काफी बड़ा क्लीनिक बना रखा था। त्रिशूर से ही एक और फर्जी बंगाली डॉक्टर त्रिदीप कुमार रॉय को पकड़ा गया है। वह भी एक ऐसा ही क्लिनिक चला रहा था।

गौरतलब है कि मात्र केरल ही नहीं बल्कि पूरे देश में ऐसे डॉक्टर बड़ी संख्या में हैं। गाँवों में इनका प्रभाव और भी ज्यादा है। वर्ष 2016 में आई WHO की एक रिपोर्ट बताती है कि देश में 57 प्रतिशत डॉक्टर फर्जी हैं। हालाँकि, बीते कुछ वर्षों में इनकी संख्या में कमी आई है।

स्थानीय स्तर पर अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएँ ना हों और जिला मुख्यालय पर स्थित अस्पतालों का दूर होना भी ऐसे फर्जी झोलाछाप डॉक्टरों के लिए मुफीद स्थिति पैदा करता है। जिस तरह के डॉक्टर त्रिशूर में पकड़े गए हैं, यह अधिकांश गंभीर बीमारियों को सस्ते में ठीक करने का दावा करते हैं। स्वास्थ्य के लिए अधिक पैसा ना लगाने में सक्षम गरीब जनता इनके चंगुल में आती है।

बिल्ली को बचाने की कोशिश कर रही थी अंजना, खुद आठवीं मंजिल से गिरी, दो इमारतों के बीच खून से लथपथ लाश मिली

जानवरों के इंसान से प्यार करने और इंसान के लिए जानवरों के जान कुर्बान करने के कई किस्से आपने सुने होंगे। आज एक किस्सा कोलकाता की 33 साल की महिला का भी सुने। ये महिला अपनी प्यारी पालतू बिल्ली को बचाने के चक्कर में सोमवार (27 नवंबर 2023) 8वें फ्लोर से गिरी और उनके प्राण पखेरू उड़ गए।

रिपोर्ट के मुताबिक अंजना दास नाम की ये महिला कोलकाता शहर के टॉलीगंज इलाके में एक अपार्टमेंट में रहती थी। सोमवार तड़के वो इसी इमारत की ऊपरी मंजिल पर संकरे कंक्रीट के शामियाने से अपने पालतू बिल्ली के बच्चे को बचाने की कोशिश कर रही थी। इस कोशिश में वो नीचे गिर पड़ी।

उनके गिरने की जोरदार आवाज वहाँ रहने वाले लोगों और सुरक्षा गार्डों ने सुनी। अंजना दास का खून से लथपथ लेक एवेन्यू रोड पर दो इमारतों के बीच दरार में पाया गया। महिला यहाँ किराए पर रहती थी और उन्हें इस अपार्टमेंट में आए हुए महज एक महीना ही हुआ था।

अंजना को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। हालाँकि जिस बिल्ली को बचाने के चक्कर में अंजना की जान गई उस बिल्ली को कंक्रीट के शामियाने से सुरक्षित नीचे लाया गया।

पड़ोसियों के मुताबिक, अंजना बीती शाम यानी रविवार (26 नवंबर 2023) से अपने लापता बिल्ली के बच्चे की तलाश कर रही थी। उन्हें सोमवार को पता चला कि बिल्ली कंक्रीट वाले शामियाने में फँसी हुई थी। पुलिस के मुताबिक, इस अपार्टमेंट में फर्स्ट फ्लोर पर रहने वाले एक शख्स ने बताया कि उन्होंने अंजना को अपनी चप्पल उतार कर छत से कंक्रीट के शामियाने पर जाने की कोशिश करते हुए देखा था। इसी दौरान उनका पैर फिसला और वो नीचे गिर पड़ी।

जानकारी के मुताबिक, अंजना ने डेढ़ महीने पहले एक बिल्ली को गोद लिया था। इस बिल्ली ने कुछ हफ़्ते पहले तीन बच्चों को जन्म दिया था। अंजना अपनी बुजुर्ग माँ के साथ यहाँ रहती थी।

वहीं एक पड़ोसी ने कहा, “मृतका की पैतृक संपत्ति का नवीनीकरण का काम चल रहा है और प्रमोटर ने उनके 11 महीने के लिए इस अपार्टमेंट में रहने के इंतजाम किए थे।” संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं संगठन) सैयद वकार रजा ने कहा कि महिला की दुखद मौत में किसी साजिश का कोई संकेत नहीं है।

UP में मस्जिद-इबादतगाहों से उतरवाए गए 3238 लाउडस्पीकर, 7288 की कम करवाई आवाज: 22 दिसंबर तक चलेगा अभियान

उत्तर प्रदेश पुलिस ने 23 नवंबर, 2023 से पूरे राज्य की इबादतगाहों और मस्जिदों में लगे अवैध लाउडस्पीकरों के खिलाफ अभियान चला रखा है। इस अभियान के तहत 3000 से अधिक लाउडस्पीकरों को उतरवाया गया है। ये लाउडस्पीकर विभिन्न मत-मज़हबों को मानने वाले लोगों की इबादतगाहों पर लगे थे। इसके अलावा 7 हजार से अधिक माइकों की आवाजों को कम करवाया गया। नियमों की अनदेखी करने के चलते 2 जिलों में FIR भी दर्ज हुई है जबकि कई जगहों पर चालान भी काटा गया है।

TOI के मुताबिक इबादतगाहों पर अवैध लाउडस्पीकर के खिलाफ 23 नवंबर से शुरू हुआ ये अभियान 1 महीने यानी 22 दिसंबर तक जारी रहेगा। इस अभियान के तहत अब तक 61399 ऐसी जगहों को चेक किया गया है जहाँ लाउडस्पीकर लगाए गए हैं। अधिकारियों को सुबह 5 से 7 बजे के बीच इबादतगाहों और मस्जिदों की चेकिंग करने के निर्देश दिए गए हैं।

उत्तर प्रदेश पुलिस के विशेष DG लॉ एंड आर्डर IPS प्रशांत कुमार ने बताया कि जिले से हर दिन ध्वनि प्रदूषण कम करने लिए किए जा रही प्रयासों की आख्या मँगवाई जा रही है।

प्रशांत कुमार ने बताया कि अब तक कुल 3238 लाउडस्पीकरों को विभिन्न इबादतगाहों और मस्जिदों से हटवाया जा चुका है। इसके अलावा 7288 माइकों की आवाज तय मानक से तेज थी जिन्हें कम करवाया गया है। आदेशों की अनदेखी करने के चलते आगरा और प्रतापगढ़ जिले में 1-1 FIR दर्ज की गई है।

वहीं गौतमबुद्ध नगर जिले में 21 लोगों का चालान किया गया है। ज़ोन के हिसाब से सबसे अधिक 698 लाउडस्पीकर गोरखपुर में हटाए गए। बता दें कि बरेली ज़ोन में सबसे अधिक 1975 माइकों की आवाज कम की गई। राजधानी लखनऊ में 538 लाउडस्पीकर विभिन्न इबादतगाहों से हटाए गए।

जिला स्तर पर सबसे अधिक नियम विरुद्ध 283 लाउडस्पीकर अम्बेडकरनगर में बज रहे थे। वहीं 195 माइकों के साथ बहराइच जिला दूसरे नंबर पर रहा। इसके अलावा 100 से अधिक इबादतगाहों को नोटिस जारी कर के नियमों का पालन करने की नसीहत दी गई है।

‘मस्जिदों को कर दो ध्वस्त, इस्लाम से लड़ने का यही उपाय’: घुसपैठियों पर भी बरसे स्वीडन के सत्ताधारी नेता, PM ने की निंदा

स्वीडन के दक्षिणपंथी नेता जिम्मी अकेस्सन ने कहा है कि पुलिस को उन मस्जिदों की खोज के लिए अभियान चलाना चाहिए और उन्हें ध्वस्त कर देना चाहिए जहाँ लोकतंत्र विरोधी बातें की जा रही है। उनके इस बयान का देश के प्रधानमंत्री उल्फ़ क्रिस्टरसन ने विरोध किया है।

जिम्मी अकेस्सन का कहना है कि ऐसी मस्जिदों को खोजने और फिर उन्हें तोड़ कर ही बढ़ते इस्लामीकरण से लड़ा जा सकता है। जिम्मी अकेस्सन का कहना है कि नई मस्जिदों को बनाने की अनुमति बिल्कुल भी नहीं दी जानी चाहिए। उनका यह भी कहना है कि देश में बाहर से आने वाले अवैध घुसपैठियों को मस्जिदें बनाने का कोई अधिकार नहीं होना चाहिए।

अकेस्सन ने कहा, “हमारे लिए यह आवश्यक है कि हम न मस्जिदों को तोड़ना और सीज करना चालू करें जहाँ से सर्वाधिक लोकतंत्र-विरोधी, स्वीडन-विरोधी, सेमेटिक विरोधी, होमोफोबिक-विरोधी और स्वीडिश समाज विरोधी प्रोपेगंडा निकलता है।”

जिम्मी अकेस्सन स्वीडन की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी स्वीडन डेमोक्रेट के नेता हैं। वह सरकार के साथ गठबंधन में भी शामिल हैं। उनकी पार्टी के पास स्वीडन की संसद रिक्स्दाग में 72 सीटें हैं। उनके बयान का स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ़ क्रिस्टरसन ने विरोध किया है।

प्रधानमंत्री उल्फ़ क्रिस्टरसन ने कहा है कि अकेस्सन का बयान निंदनीय है। उल्फ़ क्रिस्टरसन ने कहा है कि स्वीडन के अंदर हम इबादतगाहों को गिराते नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जो अकेस्सन ने कहा है वह स्वीडिश मूल्यों का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। उन्होंने कहा है कि हमें कट्टरपंथ से लड़ना चाहिए लेकिन लोकतांत्रिक फ्रेमवर्क में रहकर लड़ना चाहिए।

प्रधानमंत्री अकेस्सन ने इस बात पर भी चिंता जताई है कि ये हमारे NATO में शामिल होने के मौके भी कम करता है। गौरतलब है कि स्वीडन NATO में शामिल होना चाहता है लेकिन तुर्की उसे समर्थन नहीं दे रहा है। तुर्की का कहना है कि स्वीडन में इस्लामोफोबिया बढ़ रहा है इसलिए हम उसका समर्थन नहीं करेंगे। स्वीडन में इससे पहले कुरान जलाने की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं।

दौड़ रहा था खिलाड़ी, सुन्न हो गया लिंग, ठीक करने के लिए करना पड़ा गर्म: कहा – अच्छा हुआ दूसरा बच्चा होने ही वाला है…

स्वीडन के एक खिलाड़ी के साथ अजीब सी समस्या आ गई है। क्रॉस-कंट्री स्कीअर कैले हाफवर्सन इस वीकेंड फिनलैंड में एक स्कीइंग टूर्नामेंट में हिस्सा लेने गए थे। बर्फ के बीच चल रहे इस खेल के दौरान बेहद कम तापमान के बीच कुछ ऐसा हो गया, जो शायद ही आज तक किसी ने सुना हो। कूसामो में 20 किलोमीटर के एक वर्ल्ड कप इवेंट में हिस्सा लेने के बाद उन्होंने बताया है कि उनका गुप्तांग ही जम गया था, जिसके बाद उन्हें एक गर्म जगह पर शरण लेनी पड़ी।

बता दें कि जब रेस शुरू हुई थी, उस दौरान वहाँ का तापमान 5 डिग्री फारेनहाइट (-15°C) पहुँच गया था। कैले हाफवर्सन ने कहा कि बर्फ के कारण उनका लिंग सचमुच जम गया है। उन्हें खिलाड़ियों के टेंट में जाकर 10 मिनट तक लेटना पड़ा, ताकि वो इसे गर्म कर सकें। उन्होंने कहा कि उन्हें बहुत दर्द हुआ, ये डरावना था। उन्होंने मजाक करते हुए कहा कि वो सौभाग्यशाली हैं कि उनके दूसरे बच्चे का जन्म अगले कुछ ही दिनों में होने वाला है, वरना बाद में उनके लिए ये शायद संभव न हो।

ये रेस रविवार (26 नवंबर, 2023) को आयोजित की गई थी। इसमें वो 18वें स्थान पर रहे। बता दें कि इस खेल में उन्हें रेसिंग सूट पहननी होती है, जो शरीर में एकदम चुपकी हुई और टाइट होती है। इसके भीतर एक पतली सी परत होती है। बहुत ज़्यादा ठण्ड में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। 2022 में बीजिंग में हुए ओलंपिक खेलों में फिनलैंड के रेमी लिंडहोल्म को 50 किलोमीटर की रेस के दौरान इसी समस्या का सामना करना पड़ा था, जब उनके प्राइवेट पार्ट के सुन्न होने के बाद वहाँ हीट पैक का इस्तेमाल करना पड़ा था।

ब्रिटेन के प्रिंस हैरी ने भी इस तरह का अनुभव होने की बात बताई थी। 2011 में वो नॉर्थ पोल में एक खोज पर गए थे, जहाँ से वो अपने भाई विलियम और केट मिडलटन की शादी में पहुँचे थे। उस दौरान उन्होंने जमे हुए लिंग का अनुभव किया था। स्कीइंग एक कठिन खेल है, खासकर बर्फ में। कैले हाफवर्सन को 2021 में फिनलैंड में ही इसी समस्या का सामना करना पड़ा था। उन्होंने बताया कि फिनिश लाइन के करीब पहुँचने पर उन्हें इसका पता चला और वो असमंजस में पड़ गए थे कि आगे बढ़ते रहें या नहीं।

सवाल- क्या गैर मुस्लिम से करवा सकते हैं मेहंदी-मेकअप, बुर्के वाली का जवाब- गीले हाथों से काफिर जहाँ टच करे उसे पाक करें: Video वायरल

सोशल मीडिया पर एक मुस्लिम महिला का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक बुर्कानशीं महिला बाकी मुस्लिम महिलाओं को सलाह दे रही है कि उनके शरीर के जिस भी हिस्से को कोई गैर-मुस्लिम छू दे उसे अच्छे से साफ़ करो। यह नसीहत मेहंदी और मेकअप किसी गैर-मुस्लिम व्यक्ति से करवाने के सवाल पर दी गई। इस वीडियो को @RightWingBoy_ नाम के हैंडल ने सोमवार (27 नवंबर, 2023) को शेयर किया है।

लगभग 17 सेकेंड के इस वीडियो में बड़े फ्रेम का चश्मा लगाए एक मुस्लिम लड़की माइक के आगे बैठी दिख रही है। महिला ने चेहरे को छोड़ कर अपने पूरे शरीर को काले लिबास से ढक रखा है। वीडियो की शुरुआत में महिला खुद से ही सवाल करती है कि क्या गैर मुस्लिम से मेहंदी, मेकअप या वैक्स करवा सकते हैं? बाद में वो अपने सवाल का खुद ही जवाब देने लगी। महिला ने शुरू में तो कहा, “आप ये तमाम अमल एक नॉन मुस्लिम से भी करा सकते हैं। इसमें कोई प्रॉब्लम नहीं है।” हालाँकि, अगली ही लाइन में उसने नसीहत देना शुरू कर दिया।

महिला ने वीडियो में 10 वें सेकेंड से आगे कहा, “लेकिन बाद में आपको उन तमाम एरिया या पार्ट्स को पाक करना होगा। जिस भी जगह को एक काफिर ने गीले हाथों से टच किया था।” यहाँ ये जानना जरूरी है कि काफिर गैर-मुस्लिमों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक अमानवीय शब्द है।

ऑपइंडिया की पड़ताल में यह सलाह देने वाली इस मुस्लिम महिला ने इस वीडियो के पूरे अंश को 19 नवंबर को इंस्टाग्राम हैंडल ‘शियाफिक’ पर शेयर किया था। वहीं खबर लिखे जाने तक इस वीडियो पर 3512 लाइक्स मिल चुके हैं। वीडियो को शेयर करने वाले इंस्टाग्राम चैनल ‘शियाफिक’ पर 638 से अधिक पोस्ट हैं। इसके 2.29 लाख फॉलोअर्स भी हैं। इस इंस्टाग्रम हैंडल के कई अन्य वीडियो में भी बुर्का पहने महिलाओं को गैर-मुस्लिमों के लिए भेदभाव वाली बातों को करते हुए सुना जा सकता है। साथ ही इस हैंडल को फॉलो करने वाले कई मुस्लिमों को इसकी विचारधारा का समर्थन करते भी देखा जा सकता है।

दीपिका पादुकोण का JNU जाना, गुमसुम गुड़िया बन ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ को देखना… ‘छपाक’ को हुआ नुकसान, ‘सैम बहादुर’ से पहले छलका दर्द

एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण के 2020 की फिल्म ‘छपाक’ की रिलीज से पहले जेएनयू पहुँचने से इस फिल्म को नुकसान झेलना पड़ा था। इस बात का खुलासा फिल्म की निर्देशक मेघना गुलजार ने किया है। दरअसल, इस फिल्म की रिलीज से ठीक 3 दिन पहले ‘बाजीराव मस्तानी’ फेम एक्ट्रेस जेएनयू पहुँची थी। वहाँ वह CAA के विरोध में प्रदर्शन करने वाले टुकड़े-टुकड़े गैंग के साथ एकजुटता दिखाई थी। जिसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी खूब आलोचना हुई थी और फिल्म के बहिष्कार की माँग ट्रेंड होने लगी थी।

बता दें कि ‘छपाक’ फिल्म एसिड अटैक सर्वाइवर और एसिड अटैक पीड़ितों के हकों के लिए आवाज उठाने वाली लक्ष्मी अग्रवाल की जिंदगी पर बनी थी। फिल्म का डायरेक्शन मेघना गुलज़ार ने किया था। हालाँकि, इसके बाद भी ‘छपाक’ बॉक्स ऑफिस पर कोई खास कमाल नहीं दिखा पाई थी।

अब फिल्म की डायरेक्टर मेघना गुलजार ने सोमवार (27 अक्टूबर, 2023) को एक्सप्रेस अड्डा में स्वीकार किया है कि फिल्म की रिलीज से ठीक तीन दिन पहले दीपिका की विवादास्पद जेएनयू यात्रा ने फिल्म पर असर डाला। उन्होंने माना कि दीपिका के जेएनयू जाने से फिल्म को देखने वाले दर्शकों ने इसे लेकर पहले ही धारणाएँ बना लीं। इस वजह ने फिल्म के बिजनेस को नुकसान हुआ।

मेघना ने आगे कहा, “मुझे यकीन है कि जवाब बिल्कुल साफ है। हाँ, बिल्कुल, इसने फिल्म पर असर डाला। क्योंकि बातचीत एसिड हिंसा से कहीं और चली गई, तो जाहिर तौर पर इसका असर फिल्म पर पड़ा। इसमें कोई शक नहीं है।”

बता दें कि 2020 के जेएनयू हमले और नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के जवाब में छपाक की रिलीज़ से तीन दिन पहले, 7 जनवरी, 2020 को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में एक विरोध प्रदर्शन में दीपिका पादुकोण ने हिस्सा लिया था।

वहाँ वो खुलकर वामपंथी छात्रों के समर्थन में उतरी थीं। उन्होंने जेएनयू के विरोध प्रदर्शन में भी भाग लिया था। पादुकोण ने यहाँ तक कह डाला था कि उन्हें इस बात से गर्व होता है कि आज लोग बगैर-डरे अपनी आवाज़ उठ रहे हैं।

इसने सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया था। तब ट्विटर पर हैशटैग #BoycottChhapaak और #BlockDeepika अच्छा खासा ट्रेंड किया था। इसे लेकर अच्छा खासा बवाल होने के एक साल बाद ही दीपिका पादुकोण ने 2021 में नए साल के पहले ही दिन अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स के सभी पोस्ट डिलीट कर दिए गए थे।

गौरतलब है कि फॉक्स स्टार स्टूडियोज, गोविंद सिंह संधू और मेघना गुलज़ार के साथ सह-निर्माता के तौर पर दीपिका पादुकोण ने ‘छपाक’ के साथ फिल्म प्रोडक्शन में पहला कदम रखा था। ये फिल्म 50 करोड़ रुपए की लागत से बनी थी, लेकिन ये अपनी लागत वसूल करने में भी नाकाम रही। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर महज 55.44 करोड़ रुपए की कमाई की थी।

शायद उस वक्त दीपिका को लगा हो कि जेएनयू जाने से उनकी इस फिल्म को फायदा पहुँचेगा, लेकिन उनकी ये रणनीति फिल्म पर ही भारी पड़ गई। फिल्म की निर्देशक मेघना गुलजार के खुलासे से तो यही साबित हो रहा है।

बता दें कि मेघना गुलज़ार की आगामी फिल्म फिल्म ‘सैम बहादुर’ 1 दिसंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है और यह रणबीर कपूर की एनिमल से टकराएगी। इस फिल्म में विक्की कौशल फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ की भूमिका में हैं। फिल्म 1971 के युद्ध के दौरान भारत की जीत में मानेकशॉ के अहम किरदार को दिखाती है। इस जंग के बाद ही बांग्लादेश पाकिस्तान से अलग होकर एक नया देश बना।

उत्तरकाशी की सुरंग से 16 दिन बाद निकाले जा रहे मजदूर: जिस तकनीक को बताया अवैध, जब मशीनें हुईं फेल तो वही आया काम

आखिरकार 16 दिनों बाद सिलक्यारा सुरंग में फँसे श्रमिकों को निकालने की प्रक्रिया सफल हो पाई है। ये मजदूर 12 नवंबर से ही अंदर फँसे हुए थे। इन्हें एक-एक कर निकाला जा रहा है। मजदूरों के परिजनों को पहले से ही कपड़े और बैग्स तैयार रखने को कह दिया गया था। स्ट्रेचर भी मँगा लिए गए थे, जिसके सहारे श्रमिकों को बाहर निकाला गया। पाइप के जरिए एक-एक कर मजदूरों को बाहर निकाला गया। इस दौरान CM पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय सड़क एवं परिवहन और नागरिक विमानन मंत्री जनरल (रिटायर्ड) VK सिंह वहाँ मौजूद रहे।

उन श्रमिकों को ऋषिकेश स्थित AIIMS ले जाया जा सकता है, जिनका इलाज उत्तरकाशी स्थित जिला अस्पताल में नहीं हो पाएगा। एम्स ऋषिकेश के ट्रॉमा सेंटर में इसके लिए तैयारियाँ हैं। मजदूरों को इन दोनों से पहले भी चिन्यालीसौर के कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में लाया गया। वहाँ 41 बेड्स पहले से ही तैयार रखे गए थे।

उत्तरकाशी के सुरंग में फँसे 41 मजदूरों को सफलतापूर्वक बाहर निकाला जा रहा है और इसकी प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए सबसे पहले टनल में पाइप डालने का काम पूरा किया गया। सबसे पहले खुदाई की गई और NDRF की टीम के जवान पाइप के जरिए फँसे हुए श्रमिकों तक पहुँचे। फिर उन्हें बाहर निकाला गया। जब 55.30 मीटर पाइप अंदर डाली जा चुकी थी, उसके बाद अंदर एक और पाइप डाली गई और फिर काम हो गया।

वेल्डिंग के लिए अंतिम पाइल डालने में ही 2-3 घंटे का समय लग गया। सुरंग से श्रमिकों को निकालने के लिए गद्दे भी पहुँचाए गए। श्रमिकों को अस्पताल ले जाया जा रहा है, जिसके लिए पहले से ही एंबुलेंसों को तैयार रखा गया था। कुल दूरी 59 मीटर की थी, जिसके लिए पाइपों की आवश्यकता पड़ी। इसके कुछ ही देर पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को फोन कॉल कर के सुरंग में फँसे श्रमिकों के राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी ली थी।

सुरंग के बाहर एक अस्थायी मंदिर भी बनाई गई थी, जिसमें अंतरराष्ट्रीय रेस्क्यू टीम के मुखिया अरनॉल्ड डिक्स ने पुजारी के साथ पूजा-अर्चना की। रैट होल खनन तकनीक माइनर्स के माध्यम से खुदाई की प्रक्रिया पूरी की गई। 800 mm के व्यास वाले पाइपों को अंदर डाला गया था। इसी के सहारे मजदूरों को बाहर लाया गया। बता दें कि 48 मीटर की ड्रिलिंग के बाद ऑगर मशीन फँस गई थी। इसके बाद मैन्युअल माइनिंग के लिए 2 टीमों को लगाया था, एक में 5 एक्सपर्ट्स थे और एक में 7 एक्सपर्ट्स।

संकीर्ण सुरंगों में या सैकड़ों फ़ीट निचे उतरने के लिए माइनर्स इसी तकनीक का इस्तेमाल करते हैं और कोयला खनन में ये प्रभावी रहा है। मेघालय में इसका विशेष तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। हालाँकि, NGT (राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण) ने इस पर प्रतिबंध लगाया हुआ है, लेकिन ये तकनीक अब भी जारी है। उत्तरकाशी के जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर ब्रह्मखाल-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर बन रही 4.5 किलोमीटर की ये सुरंग सिलक्यारा में स्थित है, जो ‘चारधाम ऑल वेदर रूट’ का हिस्सा है।

बैकफुट पर नीतीश सरकार, अब बिहार में उर्दू और गैर-उर्दू स्कूलों में अलग-अलग छुट्टी: बिहार के मंत्री बोले- गलती हुई, CM लेंगे एक्शन

बिहार के सरकारी स्कूलों में छुट्टियों को लेकर आया महागठबंधन सरकार के फरमान को मुस्लिम तुष्टिकरण के रूप में देखा जा रहा है, जिसके तहत हिन्दुओं की छुट्टियों में कटौती की गई थी और मुस्लिमों की छुट्टियों को बढ़ा दिया गया था। इस मामले में अब दूसरा कैलेंडर सामने आया है। उर्दू स्कूलों के लिए अलग कैलेंडर है जबकि गैर-उर्दू स्कूलों के लिए अलग। ऐसा पहली बार हुआ है। इससे पहले राज्य का शिक्षा विभाग दोनों के लिए एक ही कैलेंडर जारी किया करता था।

इस कैलेंडर में कम से कम वर्ष में 220 दिन के अध्यापन वाली बात कही गई है। इसे सन् 2024 के लिए जारी किया गया है। इसमें 27 छुट्टियाँ हैं – गुरु गोविंद सिंह जयंती, गणतंत्र दिवस, वसंत पंचमी, संत रविदास जयंती, शब-ए-बरात, महाशिवरात्रि, बिहार दिवस, होली, गुड फ्राइडे, ईद-उल-फितर, भीमराव आंबेडकर जयंती, 1 महीने का ग्रीष्मकालीन अवकाश, जानकी नवमी, बुध पूर्णिमा, ईद-उल-जोहा, कबीर जयंती, मुहर्रम, स्वतंत्रता दिवस, चेहल्लुम, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, हजरत मुहम्मद जयंती, दुर्गा पूजा (3 दिन की 2 छुट्टियाँ), दीपावली, चित्रगुप्त पूजा, छठ, क्रिसमस।

उर्दू स्कूलों के लिए ईद का 3 दिन का अवकाश रखा गया है, जबकि गैर-उर्दू स्कूलों के लिए 1 दिन का। बकरीद पर भी ऐसा ही किया गया है। उर्दू स्कूलों में महाशिवरात्रि, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और जानकी नवमी की छुट्टी नहीं होगी। जबकि चेहल्लुम की छुट्टी दोनों में एक दिन की रहेगी। दोनों में 60-60 दिन की छुट्टी साल में रखी गई है। मुहर्रम पर उर्दू स्कूलों में 2 दिन की छुट्टी होगी जबकि गैर-उर्दू स्कूलों में 1 दिन की। गैर-उर्दू स्कूलों में भी रक्षाबंधन, तीज और जितिया की कोई छुट्टी नहीं होगी।

केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह ने तो ये तक सलाह दे दी थी कि अब नीतीश कुमार और लालू यादव को अपने नाम में ‘मोहम्मद’ लगा लेना चाहिए। जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा था कि शिक्षा विभाग विवाद पर स्पष्टीकरण देगा। राज्य के भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी ने भी माना है कि परंपरा का पालन किया जाना चाहिए और छुट्टियों वाला कैलेंडर गलत है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संज्ञान में आते ही इसमें सुधार किया जाएगा, ऐसा एक बार और हुआ था।

बता दें कि इससे पहले सितंबर में छुट्टियों में कटौती कर 23 से 11 कर दिया गया था, लेकिन विरोध के बाद इसे वापस लेना पड़ा था। अब नए कैलेंडर की सरकारी स्तर पर फिर से समीक्षा की बात कही जा रही है। राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी ने भी इसे तुगलकी फरमान करार दिया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा – “तुष्टिकरण के सरदार, बिहार के कुर्सी कुमार।” जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने भी माना है कि रक्षाबंधन की छुट्टी न दिया जाना गलत है।