Home Blog Page 1356

यूपी ATS ने दो ISI एजेंटों को दबोचा, पंजाब से अमृतपाल सिंह और गाजियाबाद से रियाजुद्दीन गिरफ्तार: पाकिस्तान के लिए कर रहे थे भारतीय सेना की जासूसी

उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने भारत में आतंकवाद फैलाने के लिए पाकिस्तान से की जा रही फंडिंग के मामले में ISI के 2 एजेंटों को गिरफ्तार किया है। इनके नाम रियाजुद्दीन और अमृतपाल सिंह उर्फ़ अमृत गिल हैं। गिरफ्तार आरोपित भारत के सैन्य ठिकानों सहित अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की जानकारियाँ पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI को भेज रहे थे।

इन सभी के खातों में देश विरोधी साजिशों को अंजाम देने के लिए पैसे भी भेजे गए थे। ATS ने शुक्रवार (10 नवंबर, 2023) को इसी साजिश के खिलाफ लखनऊ में FIR दर्ज करवाई थी। इसी केस में नामजद एक अन्य आरोपित इजहारुल हुसैन बिहार के बेतिया जेल में बंद है।

उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा 26 नवंबर (रविवार) को जारी प्रेसनोट के मुताबिक ATS को सूचना मिल रही थी कि कुछ लोगों को संदिग्ध स्रोतों से पैसा प्राप्त हो रहे हैं। इन पैसों का प्रयोग पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI के लिए भारत विरोधी जासूसी गतिविधियों में संलिप्त होने की आशंका जताई गई। जाँच के दौरान इस सूचना की पुष्टि हुई और ATS ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी।

जाँच के दौरान नामजद आरोपित गाजियाबाद के रियाजुद्दीन के बैंक खातो से मार्च 2022 से अप्रैल 2022 के बीच लगभग 70 लाख रुपयों का संदिग्ध लेन-देन सामने आया।

रियाजुद्दीन ने गाजियाबाद के केनरा बैंक में जो खाता खुलवाया था उसमें बिहार के बेतिया के निवासी इजहारुल का मोबाइल नंबर दर्ज था। रियाजुद्दीन और इजहारुल की मुलाकात राजस्थान में हुई थी। यहाँ पर दोनों वेल्डिंग का कार्य करते थे। यहीं से दोनों पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI के एजेंटों के सम्पर्क में आ गए थे। और दोनों मिलकर ISI के लिए काम कर रहे अन्य एजेंटों को पैसे भेजने लगे। ATS ने रियाजुद्दीन को पूछताछ के लिए लखनऊ मुख्यालय तलब किया था।

UP पुलिस प्रेसनोट

पूछताछ में आरोपों की पुष्टि होने के बाद 26 नवम्बर (रविवार) को ATS ने रियाजुद्दीन को गिरफ्तार कर लिया। वह गाजियाबाद के थानाक्षेत्र भोजपुर का निवासी है। रियाजुद्दीन के साथी इजहारुल हुसैन को 8 नवंबर को बिहार की बेतिया पुलिस ने शराब पीने के आरोप में गिरफ्तार किया था। उस पर बिहार शराबबंदी कानून के तहत FIR दर्ज है और फिलहाल वह जेल में है। ATS अब जेल में बंद इजहारुल को वारंट बी के जरिए रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। ATS का दावा है कि इससे इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों को भी चिन्हित करने में मदद मिलेगी।

रियाजुद्दीन ने जिन लोगों को पैसे भेजे हैं उनके बारे में भी ATS बारीकी से जाँच कर रही है। इसी क्रम में पंजाब के बठिंडा निवासी 25 वर्षीय अमृत गिल उर्फ़ अमृत पाल सिंह का नाम भी सामने आया है। बता दें कि अमृत गिल ऑटो चलाता था लेकिन उसके खाते में भी रियाजुद्दीन द्वारा पैसे भेजे गए थे।

ATS का दावा है कि अमृत गिल ने इन पैसों की एवज में पाकिस्तानी खुफिया एजेन्सी को भारतीय सेना के टैंकों आदि से जुड़ी जानकारियाँ भेजीं थीं। अमृत गिल को 23 नवंबर की रात बठिंडा के तलवंडी साबो क्षेत्र से पकड़ा गया। उसको पंजाब से ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ लाया गया है।

CJI के खिलाफ महाभियोग, कपिल सिब्बल और राम मंदिर जजमेंट रोकने की साजिश: पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने आत्मकथा में बताया – कोई दैवीय शक्ति थी जो…

अयोध्या के राम मंदिर के उद्घाटन की घड़ी नज़दीक आ रही है। जैसा कि सर्वविदित है, 40 दिनों की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की पीठ ने 9 नवंबर, 2019 को फैसला सुनाया था और 2.77 एकड़ की जमीन को हिन्दुओं के नाम करने का आदेश दिया था। इस तरह से 450 वर्षों से चले आ रहे विवाद का पटाक्षेप हुए और हिन्दुओं के सदियों पुराने संघर्ष का अंत भी। उस समय रंजन गोगोई देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) हुआ करते थे, जिनकी अध्यक्षता में पीठ ने ये ऐतिहासिक फैसला सुनाया था।

उस समय उनके मन में क्या चल रहा था? सुप्रीम कोर्ट के भीतर क्या सब हो रहा था? रंजन गोगोई ने अपनी आत्मकथा ‘जस्टिस फॉर द जज‘ के 12वें अध्याय में अयोध्या जजमेंट को लेकर विस्तार से बात की है। उन्होंने इस अध्याय की शुरुआत में ही लिखा है कि आस्था और धर्म से जुड़ी चीजें विश्वास का विषय हैं, सबूतों के नहीं – लेकिन वो मानव समाजों को जोड़ते भी है। रंजन गोगोई लिखते हैं कि नेताओं के तमाम दावों के बावजूद समरूपता और एकता मायावी बनी हुई है, कई राष्ट्र धर्म से जुड़े सदियों पुराने विवादों में उलझे हुए हैं।

रंजन गोगोई ने इसी क्रम में अयोध्या वाले विवाद का जिक्र किया और लिखा कि मानव सभ्यताओं में कई बदलाव आए लेकिन ये विवाद बना रहा। उन्होंने बताया है कि इस विवाद का लाखों हिन्दू-मुस्लिमों पर असर है और सरकारों ने समय-समय पर अपने फैसलों से अनिश्चितता का माहौल बनाया। उन्होंने इस जजमेंट के पीछे चुनौतियों की बात की है और साथ ही बताया है कि कैसे ये फैसला दुनिया भर में विभिन्न समुदायों के बीच विवादों को सुलझाने के लिए प्रेरणा का काम करेगा और मानवता के लिए ये एक बड़ा योगदान है।

उन्होंने लिखा है कि विवाद में 2 पक्ष थे – हिन्दू पक्ष का दावा था कि भगवान श्रीराम का जन्म मंदिर के गर्भगृह में हुआ था और दूसरा पक्ष ये था कि बाबर ने बिना किसी मंदिर को ध्वस्त किए यहाँ मंदिर बनवाया। केंद्रीय शिखर के नीचे की भूमि 1500 स्क्वायर यार्ड्स थी, 1 एकड़ से भी कम। उन्होंने याद किया कि सन् 1856-57 में इसे लेकर दंगे हुए, दिसंबर 1949 में इसमें प्रतिमा स्थापित की गई और दिसंबर 1992 में कारसेवकों ने पूरे विवादित ढाँचे (उसे वो मस्जिद कहते थे) को ही ध्वस्त कर दिया।

1950 से 1989 के बीच दायर किए गए 4 सूट पर ये सुनवाई आधारित थी। 1989 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 33 जजों की पीठ को सुनवाई सौंप दी। 30 दिसंबर, 2010 को उच्च न्यायालय ने 4000 पन्नों का फैसला सुनाया। इस मामले में भी 3 अलग-अलग जजमेंट थे। फाइनल जजमेंट में जमीन को 3 हिस्सों में बाँट दिया गया था – निर्मोही अखाड़ा, रामलला विराजमान और मुस्लिम पक्ष। जस्टिस धर्मवीर शर्मा ने पूरी जमीन हिन्दुओं को सौंपने का फैसला सुनाया। जस्टिस सुधीर अग्रवाल ने सेन्ट्रल डोम के अलावा सभी पक्षों की हिस्सेदारी का फैसला सुनाया।

वहीं जस्टिस एसयू खान ने सेन्ट्रल डोम को हिन्दुओं को देकर बाकी सभी भूमि 3 पक्षों को बाँटने का फैसला सुनाया। इसके विरोध में सुप्रीम कोर्ट में 21 याचिकाएँ दायर की गईं, जिन्हें अयोध्या केस के रूप में जाना गया। 5 दिसंबर, 2017 को तत्कालीन CJI दीपक मिश्रा के सामने ये मामला आया लेकिन अधिवक्ता और तब कॉन्ग्रेस नेता रहे कपिल सिब्बल चाहते थे कि मामला 2019 लोकसभा चुनावों के बाद सुना जाए। मुस्लिम पक्ष के राजीव धवन चाहते थे कि एक बड़े संवैधानिक पीठ को फैसला दिया जाए।

रंजन गोगोई ने लिखा है कि दीपक मिश्रा इस केस को 2019 तक नहीं टालना चाहते थे, लेकिन अप्रैल-मई 2018 में महाभियोग वाला हंगामा खड़ा हो गया और कई लोग मानते हैं कि उन्हें अयोध्या केस की सुनवाई से रोकने के लिए ये सब किया गया था। ध्यान दें कि उस समय राफेल विमान डील और NCR के खिलाफ भी सुनवाई चल रही थी। रंजन गोगोई ने लिखा है कि उनके पूर्ववर्ती के दौर में ही अयोध्या केस की सुनवाई शुरू हो चुकी थी, उन्होंने बस इसे आगे बढ़ाया।

बता दें कि कॉन्ग्रेस समेत 7 विपक्षी दलों (सपा, बसपा, NCP, CPI, IUML/मुस्लिम लीग और JMM) ने जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग चलाने के लिए तत्कालीन उप-राष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू के समक्ष 71 सांसदों का हस्ताक्षर पेश किया था। कपिल सिब्बल इसमें बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहे थे। तब केंद्रीय मंत्री रहे अरुण जेटली ने बताया था कि कैसे महाभियोग की प्रक्रिया को एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

जस्टिस रंजन गोगोई ने बताया है कि कैसे उस समय उनकी अनुमति के बिना ही इस केस को 4 जनवरी, 2019 को लिस्ट कर दिया गया था। CJI के रूप में रंजन गोगोई ने ही 5 जजों की पीठ को मामला सौंपने का निर्णय लिया था, जिसमें उनके अलावा SA बोबडे, NV रमना, UU ललित और DY चंद्रचूड़ शामिल थे। लेकिन, राजीव धवन ने UU ललित के नाम पर आपत्ति जता दी और कहा कि वो बतौर वकील कभी इससे जुड़े मामले से जुड़े रहे हैं, वहीं NV रमना ने भी इससे खुद को अलग कर लिया।

अतः, इन दोनों के स्थान पर जस्टिस अब्दुल नज़ीर और जस्टिस अशोक भूषण का नाम तय किया गया। उत्तर प्रदेश सरकार ने मौखिक सबूतों के अनुवाद 13,000 पन्नों में सौंपे। इसपर अनापत्ति के लिए भी दोनों पक्षों पर 2 महीने का समय दिया गया अध्ययन के लिए। इसके बाद समझौते के लिए एक समिति का गठन किया गया, जो असफल साबित हुई। अतः, 6 अगस्त, 2019 को सुबह साढ़े 10 बजे सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई शुरू कर दी।

जस्टिस रंजन गोगोई अपनी आत्मकथा में लिखते हैं कि सुनवाई जैसे-जैसे आगे बढ़ी, कोर्ट में भीड़ बढ़ती चली गई और कई वकील मौजूद रहते थे। शुरू में राजीव धवन ने अधिक समय की माँग की और जजों पर ही टिप्पणी करते हुए कह दिया कि चंद्रचूड़ के अलावा किसी ने सारे दस्तावजों का ठीक से अध्ययन नहीं किया है। ऐसे वाकये होते रहे और कई बार जजों ने जवाब भी दिया। सप्ताह में 5 दिन सुनवाई का निर्णय लिया गया। रंजन गोगोई का रिटायरमेंट नज़दीक आ रहा था, ऐसे में शाम 5 बजे तक सुनवाई चलती थी।

16 अक्टूबर तक ये सुनवाई चली। उन्होंने एक बड़े रोचक वाकये का जिक्र किया है। उस दौरान एक व्यक्ति सुप्रीम कोर्ट की उस सुनवाई में घुसना चाहता था और इसके लिए उसने सेक्रेटरी जनरल के माध्यम से सन्देश भेजा। हालाँकि, उसके इरादे रंजन गोगोई को नेक नहीं लगे और उन्होंने किसी भी कीमत पर से एंट्री न देने को कहा। दोपहर 2 बजे उसने फिर अनुमति माँगी, लेकिन उसे 2 घंटे रुकने को कहा गया। रंजन गोगोई लिखते हैं कि अगर वो बीच में घुस गया होता तो सुनवाई स्थगित करनी पड़ती और नई तारीख़ देनी पड़ती।

अंततः उन्होंने कहा ‘अब बहुत हुआ’ और जजमेंट रिजर्व होने की घोषणा की। ये सुनवाई के अंतिम दिन की बात है। रंजन गोगोई का कहना है कि एक जज के रूप में उनके प्रशिक्षण का कमाल था कि उनका तनाव उनके काम में नहीं दिखता था, लेकिन उन्हें मामला 17 नवंबर को उनके रिटायरमेंट से पहले निपटाना था। कई बार वो ऐसी ही भावनाओं को लिए घर पहुँचते थे। वो अपने भीतर की उथल-पुथल को अपनी पत्नी से साझा करते थे, और ये बता सकते थे कि अदालत में एक शांत व्यक्ति के पीछे वो कितने परेशान चल रहे हैं।

एक दिन तो उन्होंने अदालत जाने से भी इनकार कर दिया, लेकिन पत्नी रुपांजलि ने उन्हें जाने के लिए कहा। वो उस समय 5, कृष्ण मेनन मार्ग में रहते थे। एक दिन और वो कोर्ट नहीं जा रहे थे, लेकिन पत्नी ने उन्हें फिर भेजा। उस दिन वो चैंबर में ही बैठे रहे, ऐसे में जस्टिस बोबडे ने उन्हें अस्वस्थ बता कर सुनवाई स्थगित कर दी। उन्होंने बताया कि अलग-अलग मामलों में एक्टिविस्ट्स और वकीलों की नकारात्मक टिप्पणियाँ आने लगीं, ताकि सुनवाई तेज़ी से आगे नहीं बढ़े।

कौन था जो सुनवाई को बाधित करना चाहता था? – रंजन गोगोई ने आत्मकथा में किया है जिक्र

रिटायर्ड जज और अब राज्यसभा सांसद रंजन गोगोई लिखते हैं कि पूरी सुनवाई के काल में वो 3-4 घंटे से ज़्यादा किसी दिन नहीं सो पाते थे। जस्टिस रंजन गोगोई लिखते हैं कि कैसे उनके साथी जज ही आपस में बातें करते थे कि वो क्यों पागलों की तरह इस मामले को निपटाना चाहते हैं। उन पर सुप्रीम कोर्ट की प्रतिष्ठा दाँव पर लगाने के आरोप लगाए गए। हालाँकि, उनका मानना है कि कोई दैवीय शक्ति थी जो उन्हें इस केस को खत्म करने के लिए प्रेरित कर रही थी।

3 महीने की उस सुनवाई के दौरान पीठ में शामिल किसी भी जज ने एक दिन की भी छुट्टी नहीं ली। किसी जज को बुखार या सर्दी तक नहीं हुई। एक जज ने उस दौरान एक रिश्तेदार के ICU में होने की बात बताते हुए कहा कि उसकी मृत्यु होने पर उन्हें कुछ दिनों की छुट्टी लेनी पड़ सकती है, लेकिन रंजन गोगोई ने आश्वासन दिया कि वो ठीक हो जाएँगे। हालाँकि, इसकी नौबत नहीं आई और शायद वो ठीक हो गए थे तभी ऐसा हुआ। सुनवाई के बाद पाँचों जज CJI के चैंबर में चाय पर मिलते थे।

इस दौरान केस की बहस को लेकर उनमें बात होती थी, लेकिन अंतिम दिनों में चर्चा होने लगी कि हिन्दू पक्ष को विवादित जमीन दे दी जानी चाहिए और मुस्लिमों को मस्जिद के लिए अलग से 5 एकड़ जमीन मिले। अयोध्या मामले में सिर्फ एक जजमेंट लिखा गया और किसने लिखा है ये भी नहीं सार्वजनिक किया गया। पाँचों जजों ने उस पर हस्ताक्षर किए। जस्टिस रंजन गोगोई चाहते थे कि ये एक ऐसा मामला था जिसमें जजमेंट एक मिनट के लिए भी लंबित नहीं रहना चाहिए।

फैसला सुनाए जाने के बाद कोर्ट नंबर एक में जजेज गैलरी में अशोक चक्र के नीचे फोटो सेशन का आयोजन किया गया। शाम को ताज मानसिंह होटल में रंजन गोगोई ने साथी जजों को जश्न मनाने के लिए बुलाया। वहाँ उन्होंने चायनीज भोजन किया और वाइन पिया। अगले दिन वो माँ और पत्नी के साथ सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रकाशित एक पुस्तक के विमोचन के लिए असम के डिब्रूगढ़ निकल गए। वापस दिल्ली लौट कर वो काम पर लौटे और फिर अपने रिटायरमेंट के अंतिम दिन तक काम पर रहे। उन्होंने इस केस को एक चुनौती के रूप में लिया और इसके लिए अपने विदेश दौरे तक रद्द किए।

जस्टिस रंजन गोगोई ने कश्मीर और अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं को समय नहीं दिया, क्योंकि वो अयोध्या केस को पूरा करना चाहते थे। रंजन गोगोई ने लिखा है कि उन्होंने चुनौती का सामना करने का फैसला किया और इस रास्ते में उन्हें व्यक्तिगत रूप से नकारात्मक टिप्पणियाँ कर निशाना बनाया जाना भी आड़े नहीं आया। आज जब राम मंदिर मूर्त रूप ले रहा है, हमें रंजन गोगोई को भी इस साहस के लिए धन्यवाद करना चाहिए।

‘मुझे बिना खाना-पानी के तिरुपति की सीढ़ियाँ चढ़वाईं, तीन बार बेहोश हुई’: गौतम सिंघानिया पर पत्नी नवाज मोदी ने लगाया हिंसा के बाद नया आरोप

भारत के बड़े कारोबारी और रेमंड ब्रांड के मालिक गौतम सिंघानिया की पत्नी नवाज मोदी ने आरोप लगाया है कि गौतम ने उन्हें बिना खाना-पानी के आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर लेकर गए और सीढ़ियाँ चढ़ाया। नवाज मोदी ने आरोप लगाया है कि इस दौरान वो 2-3 बार बेहोश हुईं।

दरअसल, इस समय हाईप्रोफाइल जोड़े के बीच विवाद चल रहा है, जिसमें यह नए आरोप सामने आए हैं। इससे पहले नवाज मोदी ने सिंघानिया पर हिंसा के आरोप लगाए थे, एक अन्य वीडियो वायरल हुई थी जिसमें वह उनके घर के बाहर खड़ी थी।

अब एक ऑडियो सामने आया है जिसमें नवाज सिंघानिया पर नए आरोप लगा रही हैं। नवाज का कहना है कि शादी से पहले सिंघानिया उन्हें आंध्र प्रदेश स्थित तिरुपति मंदिर ले गए और उसकी सीढ़ियाँ बिना कुछ खाए पिए चढ़वाया। वह बेहोश भी हुईं लेकिन सिंघानिया पर कोई फर्क नहीं पड़ा और वह उन्हें मंदिर तक लेकर पहुँचे।

नवाज का कहना है गौतम सिंघानिया ने तिरुपति में यह मन्नत माँगी थी यदि नवाज उनसे शादी के लिए राजी हो जाती है तो वह उन्हें तिरुपति पैदल लेकर आएँगे। बता दें कि गौतम सिंघानिया तिरुपति में असीम विश्वास रखने वाले माने जाते हैं। इंडिया टुडे के अनुसार, उन्होंने मुंबई में तिरुपति मंदिर के लिए ₹100 करोड़ भी दिए थे।

नवाज मोदी का आरोप है कि सिंघानिया तिरुपति के भगवान् वेंकटेश्वरा के इसलिए भक्त हैं क्योंकि वह धन के भगवान हैं। इससे पहले नवाज मोदी ने गौतम सिंघानिया पर उन्हें और उनकी बेटी को 15 मिनट तक पीटने का आरोप लगाया था।

हाल में एक वीडियो भी वायरल हुआ था जिसमें दीपावली के दिन सिंघानिया ने अपनी पत्नी नवाज मोदी को घर के अंदर नहीं घुसने दिया था। इंडिया टुडे से बातचीत में नवाज ने उस घटनाक्रम के बारे में बताया था कि गौतम सिंघानिया ने उनकी और बेटी की पिटाई की थी। नवाज के अनुसार यह घटना 10 सितंबर, 2023 की थी। गौतम के जन्‍मदिन की पार्टी चल रही थी और सुबह के 5 बज चुके थे।

उन्होंने कहा था, “मैं और मेरी दोनों बेटियाँ भी कुछ दोस्‍तों के साथ मौजूद थीं। उसने अचानक से हमला कर दिया और वहाँ से गायब हो गया। मैं केवल कल्‍पना कर सकती थीं कि वह बंदूकें या कोई हथियार लेने गया है।” नवाज ने बताया था कि वह अपनी बेटी को खींचकर दूसरे कमरे में ले गईं और फिर उसकी पीठ को सहारा देने के लिए तौलिया लेने चली गईं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नवाज ने पुलिस को कॉल किया। आरोप है कि गौतम सिंघानिया ने पुलिस को घर में आने से रोक दिया। वह अपनी बीवी को धमकियाँ देते हुए पुलिस को अपनी जेब में रखने की बात बता रहे थे। नवाज के अनुसार इस मामले में अंबानी परिवार ने उनकी मदद की थी। नीता और अनंत ने उनलोगों की जान बचाई। पुलिस कार्रवाई में भी मदद की।

बताते चलें कि नवाज मोदी ने तलाक के बदले अपने पति गौतम सिंघानिया की सम्पत्ति में 75% हिस्सेदारी की माँग की है। दोनों पति-पत्नी के तौर पर 32 वर्षों तक एक साथ रहे।

कुछ वर्षों पहले ही गौतम सिंघानिया का उनके पिता विजयपत सिंघानिया के साथ विवाद सामने आया था। 2015 में उन्होंने कंपनी समूह का स्वामित्व अपने बेटे गौतम को सौंप दिया, लेकिन 36 मंजिला JK टॉवर में रहने के लिए उन्हें एक अदद घर तक नहीं मिला।

गौतम सिंघानिया ने इंस्टाग्राम के जरिए नवाज़ मोदी से अलग होने का ऐलान करते हुए कहा था कि अपनी बेटियों निहारिका और निशा के लिए वो दोनों जो भी सर्वश्रेष्ठ रहेगा वो करते रहेंगे। उन्होंने इसे व्यक्तिगत निर्णय बताते हुए लोगों से इसका सम्मान करने की अपील की थी और कहा था कि ऐसे समय में वो लोगों की शुभकामनाएँ चाहेंगे।

प्रेमिका के निकाह से नाराज़ था दर्जी, सिर और हाथों में मार दिया चाकू: बुलंद मस्जिद इलाके की घटना

राजधानी दिल्ली के थाना शास्त्री पार्क इलाके में स्थित बुलंद मस्जिद से एक खौफनाक मामला सामने आया है, जहाँ बताया जा रहा है कि एक शादीशुदा प्रेमी ने अपनी शादीशुदा प्रेमिका को सिर और हाथ में ताबड़तोड़ चाकू मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया है। मूल रूप से बिहार की रहने वाली पीड़िता की पहचान 22 वर्षीय युवती हसमत जहाँ के रूप में हुई है। पीड़िता का जीटीबी अस्पताल में इलाज चल रहा है। जहाँ उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। वहीं पुलिस ने मौके से आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हसमत जहाँ ने 3 महीने पहले ही अपने दूसरे प्रेमी मोहम्मद मुन्ना के साथ निकाह कर ली थी और शास्त्री पार्क के बुलंद मस्जिद स्थित किराए के मकान में रह रही थी। वहीं पड़ोसियों के मुताबिक रविवार (26 नवंबर, 2023) करीब 2 बजे के आसपास आरोपित शाह बाबू बिहार से दिल्ली आने के बाद हसमत  के घर पहुँचा और किसी बात को लेकर दोनों में झगड़ा हो गया। 

इसके बाद आरोपित ने एक के बाद एक हसमत जहाँ के सिर में और हाथों में चाकू से हमला कर दिया। वहीं पीड़िता के शोर मचाने की आवाज सुनकर आस-पड़ोस के लोग उसे बचाने के लिए तुरंत दौड़े और किसी तरह से आरोपित प्रेमी से बचाया गया। बता दें कि आरोपित शाह पीड़िता को उसके निकाह से पहले से जानता था। आरोपित और पीड़िता दोनों बिहार के किशनगंज में पड़ोसी थे। पीड़िता की शादी करीब चार महीने पहले मोहम्मद मुन्ना से हुई थी। 

आरोपित की पहचान बिहार के किशनगंज निवासी शाह बाबू के रूप में हुई है। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट में उसे इस्माइल भी बताया जा रहा है। उसके पास से वारदात में इस्तेमाल चाकू बरामद कर लिया गया है। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज कर जाँच में जुट गई है। 

क्या कहा पुलिस ने 

इस मामले में पुलिस का कहना है कि दोपहर 3:25 बजे पुलिस कंट्रोल रूम (पीसीआर) को एक कॉल मिली कि एक युवती को चाकू मारा गया है। पुलिस ने घटनास्थल पर पहुँचकर उसे जग प्रवेश चंद्र अस्पताल ले गई। जहाँ से उसे जीटीबी अस्पताल रेफर कर दिया गया।

पूर्वोत्तर के पुलिस उपायुक्त जॉय टिर्की ने कहा, “आरोपित की पहचान बिहार के किशनगंज जिले के रहने वाले 39 वर्षीय शाह बाबू के रूप में हुई है। उसे मौके से  गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके पास से अपराध में इस्तेमाल किया गया चाकू बरामद  हो गया है। 

इस मामले में डीसीपी ने बताया, “आरोपित शाह बाबू हैदराबाद में दर्जी का काम करता है, वह हसमत से मिलने के लिए दिल्ली आया था। आरोपित अपनी प्रेमिका हसमत के निकाह से नाखुश था। वह उससे मिलने के लिए दिल्ली आया था। जहाँ उससे बात करते समय उसने अपना आपा खो दिया और उसे चाकू मार दिया।” फ़िलहाल चाकू से हमले के बाद आरोपित गिरफ्तार है और पुलिस आगे की जाँच कर रही है। 

वर्ल्ड कप के बाद पहली बार दिखे रोहित शर्मा, गुजरात टाइटन्स ने नया कप्तान चुनकर लिखा ‘शुभ शुरुआत’: MI की जर्सी में हार्दिक पांड्या

वर्ल्ड कप के बाद इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2024 के लिए टीमों की आपस में खिलाड़ियों की अदला-बदली जारी है। आईपीएल के ट्रेडिंग सिस्टम के तहत कई खिलाड़ी इधर से उधर हुए हैं। सबसे बड़ा नाम हार्दिक पांड्या का है जिन्हें मुंबई इंडियंस ने गुजरात टाइटन्स से लिया है। हार्दिक पहले मुंबई से ही खेला करते थे।

बाद में हार्दिक गुजरात टाइटन्स में गए और कप्तान बने। बताया जा रहा है कि हार्दिक को मुंबई को देने के लिए गुजरात ने बड़ी राशि ली है। गुजरात ने हार्दिक को ₹15 करोड़ में खरीदा था। मुंबई ने हार्दिक को खरीदने के लिए अपने खिलाड़ी कैमरून ग्रीन को भी रिलीज किया है।

मुंबई इंडियंस की मालिक नीता अम्बानी ने हार्दिक के आने पर कहा है, “हम हार्दिक के घर वापस आने पर बहुत खुश हैं। यह परिवार के साथ काफी भावात्मक मिलाप है। मुंबई इंडियंस के संवारे हुए एक युवा जोश से आज भारतीय टीम के स्टार होने की हार्दिक की लम्बी यात्रा रही है। हम उनके और मुंबई इंडियंस के भविष्य को लेकर उत्साहित हैं।”

हार्दिक के रोहित शर्मा की जगह पर मुंबई का कप्तान बनने की भी संभावनाएँ जताई जा रही हैं। गुजरात टाइटन्स ने ट्विटर पर एक पोस्ट करके यह बताया है कि हार्दिक के जाने के बाद अब शुभमन गिल उनके कप्तान होंगे।

12 दिसम्बर तक आईपीएल की सभी टीमों को आपस में खिलाड़ियों को ट्रेड करने की अनुमति दी गई है। हालाँकि, अधिकाँश टीमों ने अपने बड़े खिलाड़ियों को साथ ही रखा है। यह खिलाड़ी आईपीएल की नीलामी में नहीं जाएँगे। यह सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आईपीएल नीलामी की प्रक्रिया चालू होगी।

इन सब के बीच भारतीय टीम के कप्तान रोहित शर्मा सोशल मीडिया पर वापस आ गए हैं। 19 नवम्बर 2023 को ऑस्ट्रेलिया से वर्ल्डकप फाइनल मुकाबले में हार के बाद वह सोशल मीडिया पर अधिक एक्टिव नहीं थे। वह सार्वजनिक रूप से अधिक दिखे भी नहीं थे। अब उन्होंने एक स्टोरी लगाई है जिसमें वह अपनी पत्नी रितिका सज्देह के साथ घूम रहे हैं।

यह स्पष्ट नहीं है कि वह अभी भारत में हैं या नहीं लेकिन वह वर्ल्डकप की हार से उबरने के लिए थोड़ा समय ले रहे हैं।

श्रीराम कॉलेज में बुर्के में लड़कियों का कैटवॉक, गुजरे जमाने की हिरोइन मंदाकिनी रहीं थी निहार: आगबबूला हुआ जमीयत, मुजफ्फरनगर का मामला

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के एक कॉलेज का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें लड़कियाँ बुर्के और हिजाब में कैटवॉक करती दिख रही हैं। वीडियो श्रीराम ग्रुप ऑफ कॉलेज का है। कार्यक्रम में गुजरे जमाने की हिरोइन मंदाकिनी भी मौजूद थी।

जमीयत उलेमा ए हिन्द ने बुर्के में कैटवॉक को मुस्लिमों की भावनाओं को भड़काने की साजिश बताते हुए कार्रवाई की माँग की है। वहीं कॉलेज प्रशासन ने ऑपइंडिया से बातचीत में इसे एक अच्छा इवेंट बताया और विरोध पर हैरानी जताई।

यह कॉलेज मुजफ्फरनगर जिले के नई मंडी थाना क्षेत्र में स्थित है। वायरल वीडियो में रंग बिरंगी लाइटों वाले स्टेज पर लड़कियाँ कैटवॉक करती दिख रही हैं। तेज आवाज में बैकग्राउंड म्यूजिक चल रही रही है। कई लड़कियाँ इस्लामी परिधान में रैम्प पर नजर आती हैं। इनमें से कुछ ने स्कार्फनुमा हिजाब पहना था तो एक ने पूरा शरीर काले बुर्के से ढँक रखा था। ये सभी अलग-अलग अंदाज में दर्शकों के आगे पोज देती दिख रही हैं। एक लड़की ने इस्लामी तरीके से दर्शकों को 2 बार आदाब करती है और फिर इठलाते हुए वापस लौट जाती है।

दर्शकों ने भी गर्मजोशी से इस प्रस्तुति का लुत्फ उठाया। शोरगुल वीडियो में सुना जा सकता है। बाद में इस्लामी परिधान पहने सभी लड़कियों ने सामूहिक कैटवॉक किया। उन्होंने एक साथ दर्शकों का अभिवादन भी कबूल किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जमीयत उलेमा ए हिन्द ने इस आयोजन पर नाराजगी जताई है। जमीयत ने इसे मुस्लिमों की भावनाओं को भड़काने वाली हरकत बताते हुए कॉलेज प्रशासन और और इसके आयोजकों पर कार्रवाई की माँग की है। जमीयत उलेमा ने कॉलेज प्रशासन से दोबारा ऐसा न करने को कहा है।

वहीं इस्लामी परिधान में कैटवॉक करने वाली कॉलेज की छात्राओं ने बताया कि उनको कॉलेज के मनोज सर ने इस तरह की प्रस्तुति देने के निर्देश दिए थे। मनोज इस शो वीडियो भी बना रहे थे। लड़कियों ने बताया कि चूँकि वे मुस्लिम हैं, इसलिए उन्होंने अपनी प्रस्तुति इस्लामी तौर-तरीकों से दी। कैटवॉक करने वाली लड़कियों ने इस प्रस्तुति के पीछे कुछ अलग करने की सोच बताया है। साथ ही उन्होंने कहा कि इससे पहले उन्होंने ऐसा कुछ देखा नहीं था।

बॉलीवुड और TV अभिनेत्रियाँ भी इवेंट में थीं शामिल

ऑपइंडिया ने इस वीडियो की पुष्टि के लिए श्रीराम ग्रुप ऑफ कॉलेज के डायरेक्टर सुभाष चंद्र कुलश्रेष्ठ से सम्पर्क किया। फोन मानिक तोमर नाम के व्यक्ति ने उठाया जिसने खुद को डॉयरेक्टर का PA बताया। मानिक ने इस फैशन शो की पुष्टि करते हुए वायरल हो रहे वीडियो को एक दिन पहले यानी रविवार (26 नवंबर 2023) का बताया। उन्होंने कहा कि श्रीराम कॉलेज में 3 दिनों का इवेंट आयोजित हुआ था। इसमें अलग-अलग दिनों पर विभिन्न मुद्दों पर शो हुए। खासतौर पर लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण प्रमुख थे।

मानिक तोमर को जमीयत उलेमा द्वारा किए जा रहे विरोध की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कॉलेज में हुए इवेंट को अच्छा और सराहनीय बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि उनका कॉलेज ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के स्लोगन पर काफी गंभीर रहता है और उस नारे को साकार करने की दिशा में प्रयासरत भी। श्रीराम कॉलेज को मुस्लिम बहुल इलाके में बताते हुए मानिक तोमर ने हमें यह भी बताया कि उसमें पढ़ने वाले मुस्लिम छात्र-छात्राओं की भी अच्छी-खासी तादाद है।

कॉलेज के जिस इवेंट पर विवाद खड़ा हो रहा है, उसमें मानिक ने कई बड़ी हस्तियों के शामिल होने की भी जानकारी दी। इनमें बॉलीवुड अदाकारा मंदाकिनी, TV अभिनेत्री विंद्या तिवारी और मॉडल महक चहल आदि शामिल हैं। बकौल मानिक तोमर रैम्प पर कैटवॉक में स्कूल की छात्राओं के साथ विदेश की भी मॉडल शामिल हुईं थीं। मानिक तोमर ने पूरे शो में बुर्के वाले इवेंट को खासतौर पर सराहा। हालाँकि उन्होंने जमीयत उलेमा के बयान और माँग पर कॉलेज की तरफ से जवाब के लिए डायरेक्टर सुभाष चंद्र कुलश्रेष्ठ को ही अधिकृत बताया। डॉयरेक्टर का बयान आने पर खबर में अपडेट किया जाएगा।

‘नीम का पत्ता कड़वा है, खालिस्तानी…’ : कनाडा के लक्ष्मी नारायण मंदिर के बाहर कर रहे थे हंगामा, हिंदुओं ने खदेड़ा

कनाडा में खालिस्तानियों ने एक बार फिर एक मंदिर को निशाना बनाया है। खबर है कि कनाडा के सरे शहर में स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर के बाहर खालिस्तानियों ने श्रद्धालुओं को परेशान किया और जमकर बवाल मचाया। हालाँकि जब हिंदू उनका विरोध करने आगे आए तो वो लोग भाग गए।

यह घटना 26 नवम्बर (स्थानीय समय) 2023 की है। खालिस्तानियों के हंगामे और श्रद्धालुओं को परेशान करने की खबर पर हिंदू मंदिर के बाहर इकट्ठा हो गए और खालिस्तानियों का विरोध किया। हिंदुओं ने हाथों में भगवा झंडे ले रखे थे। इन लोगों ने यहाँ साथ में तिरंगा भी लहराया और देशभक्ति वाले गीत चलाए।

खालिस्तानियों की बेइज्जती करने के लिए भीड़ ने नारे भी लगाए। इसी घटना के वायरल वीडियो में खालिस्तानियों को गालियाँ भी पड़ती दिख रही हैं। एक वीडियो में भीड़ नारे लगाते हुए दिखती है,”नीम का पत्ता कड़वा है, खालिस्तानी @&वा है।”

इस घटना के बाद पुलिस ने कुछ खालिस्तानियों को हिरासत में लिया लेकिन मंदिर प्रशासन अभी भी चिंता में है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि वह दोबारा भक्तों को परेशान करने आ सकते हैं ऐसे में समस्या होगी। मंदिर पर हमला करने वाले खालिस्तानी हिंसक भी थे।

जब एक श्रद्धालु ने पुलिस की हिरासत में खालिस्तानी के चेहरे पर से मास्क हटाने को कहा तो वह हिंसक हो गया। उसने पुलिस के सामने ही हिंदुओं पर हमला करने की कोशिश की। मंदिर के एक व्यक्ति ने बताया कि खालिस्तानी लगातार मंदिर के बाहर आकर विरोध करते हैं। इसलिए वह वहाँ अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

इससे पहले भी कनाडा में मंदिरों पर हमले और हंगामा हो चुका है। हाल ही में कनाडा के मिसीसागा में काली बाड़ी मंदिर के बाहर भी खालिस्तानियों ने हंगामा किया था। यह खालिस्तानी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।

सितम्बर 2023 में भी सरे में एक मंदिर में तोड़फोड़ हुई थी। फरवरी 2023 में मिसीसागा में राम मंदिर पर खालिस्तानी भारत विरोधी पेंटिंग बना कर गए थे। सितम्बर 2022 में भी टोरंटो में स्वामीनारायण मंदिर पर हमला हुआ था।

गौरतलब है कि भारत और कनाडा के रिश्ते बीते कुछ महीनों से काफी खराब हैं। कनाडा ने भारत पर खालिस्तानी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या करवाने का आरोप लगाया है। भारत ने इन आरोपों से मना करते हुए कनाडा को कड़ी फटकार लगाई है। भारत ने कनाडा को अपराधियों को शरण देने वाला बताया है।

उत्तरकाशी की जिस सुरंग में 41 मजदूर फँसे उसमें अडानी को भी घसीटा, दावा- निर्माण से जुड़े हुए हैं ‘हित’: कंपनी ने बयान जारी कर बताई सच्चाई

उत्तरकाशी में सुरंग ध्वस्त होने और उसमें 41 मजदूरों के फँसने के मामले में अडानी समूह का नाम घसीटा जा रहा है। यहाँ तक कि सुब्रमण्यन स्वामी ने भी एक ट्वीट कर के लिखा, “उत्तराखंड के टनल को किस कंपनी ने बनाया था? जब सुरंग ध्वस्त हुआ, उस समय वहाँ कौन से हितधारक थे? क्या उनमें अडानी का भी नाम था? मैं पूछ रहा हूँ, बता नहीं रहा।” वहीं सोशल मीडिया पर कुछ अन्य लोग भी कह रहे हैं कि इस मामले में कांट्रेक्टर का लिंक अडानी समूह से है।

उत्तरकाशी सुरंग हादसे में जोड़ा जा रहा अडानी समूह का नाम

मीनाक्षी कुमारी नामक यूजर ने लिखा, “ये गोदी मीडिया नहीं बताएगा कि सुरंग में फँसे मजदूर अडानी की कंपनी ‘नवयुग’ के लिए काम कर रहे हैं।

यहाँ तक कि अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने भी इसमें अडानी का नाम घसीटा। उन्होंने लिखा, “उत्तराखंड में जो टनल ध्वस्त हुआ उसे कौन बना रहा था? ‘नवयुग इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड’ के बारे में कुछ विवरण सामने आए हैं, जिन पर ध्यान देना ज़रूरी है।” इसके साथ ही उन्होंने ‘द वायर’ का एक लिंक भी शेयर किया।

एक यूजर ने तो दावा कर दिया कि सुरंग का निर्माण करने वाली कंपनी का 75% स्वामित्व अडानी समूह के पास है।

इसी रिपोर्ट के आधार पर चीन की फंडिंग लेने वाले न्यूज़क्लिक से जुड़े अभिसार शर्मा ने भी दावा किया कि अडानी के जुड़े होने के कारण इस मामले में जाँच नहीं हो रही है।

उत्तराखंड सुरंग हादसा: अडानी समूह ने जारी किया स्पष्टीकरण

वहीं इस तरह की अफवाहों के फैलने के बाद अब अडानी समूह ने बयान जारी कर के सफाई दी है। सोमवार (27 नवंबर, 2023) को अहमदाबाद से बयान जारी कर के अडानी समूह ने इस तरह की हरकतों को कुटिल करार दिया है। कंपनी ने उत्तरकाशी में सुरंग ध्वस्त होने की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि उसका इससे कोई संबंध नहीं। अडानी समूह ने कहा कि हमारे संज्ञान में आया है कि कुछ तत्व कंपनी का नाम उत्तरकाशी की घटना से जोड़ने में लगे हुए हैं।

अडानी समूह ने आगे कहा, “हम उत्तरकाशी में सुरंग ध्वस्त होने की दुर्भाग्यपूर्ण घटना में अपना नाम जोड़ने जाने के कुटिल प्रयासों और ऐसा करने वालों की कड़ी निंदा करते हैं। हम पूरा जोर देकर स्पष्ट कर रहे हैं कि अडानी समूह या इसकी कोई भी कंपनी या किसी भी प्रकार के सुरंग के निर्माण से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कनेक्शन नहीं है। यहाँ तक कि टनल बनाने में जो कंपनी शामिल है, उसमें भी हमारा न कोई निवेश है और न ही उसके कोई शेयर हमारे पास हैं।”

अडानी समूह ने अपने प्रवक्ता का जरिए बयान जारी कर के साफ़ किया कि सुरंग में फँसे मजदूरों और उनके परिवारों से उसकी पूरी सहानुभूति है।

उत्तरकाशी की सुरंग में महादेव की आकृति उभरने का दावा, पाइप में घुसकर अब हाथों से खुदाई: मोर्चे पर सेना, फँसे हुए हैं 41 मजदूर

उत्तरकाशी में सुरंग में फँसे मजदूरों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन का आज 16वाँ दिन है। सिलक्यारा सुरंग में 12 नवम्बर 2023 से फँसे मजदूरों के बाहर आने की आशाएँ और बढ़ गईं हैं। क्योंकि, मलबे के बीच से डाले गए पाइप में फँसी ऑगर मशीन को निकाल लिया गया है, वर्टिकल ड्रिलिंग भी 36 मीटर पहुँच गई है। वहीं रेस्क्यू के बीच उत्तरकाशी में टनल के बाहर चौंकाने वाली घटना घटित हुई है।

दरअसल, आजतक सहित कई मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि यहाँ टनल के बाहर भगवान शिव जैसी आकृति उभर आई है। टनल के बाहर स्थापित बौखनाग देवता के मंदिर के पीछे भगवान शिव जैसी आकृति उभरी है। जिसकी तस्वीर भी सामने आई है।

बता दें कि ठीक सुरंग के बाहर स्थित बाबा बौखनाग के मंदिर को सुरंग निर्माण से पहले विस्थापित कर दिया गया था वहीं अब इस इस घटना के बाद मंदिर को पुनः अपनी स्थान पर लाया गया है जिसके बाद ही भगवान शिव की आकृति को मंदिर के पीछे की पहाड़ी पर देखने का दावा किया जा रहा है। मंदिर के अंदर भगवान नागराज की मूर्ति है जो वहाँ के कुल देवता माने जाते हैं।

वहीं कुछ लोगों का दावा है कि शिव जी जैसी ये आकृति पानी के रिसाव से बनी है। लेकिन ये पानी कहाँ से आ रहा है, इसका पता नहीं चल पाया है। हालाँकि, यह एकलौती ऐसी जगह नहीं है जहाँ पानी का रिसाव हो रहा है ऐसी और भी कई जगह पर हो रहा है लेकिन इस स्थान पर भगवान शिव की आकृति को देखकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

बता दें कि घटनास्थल पर प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा और गृह सचिव अजय भल्ला भी पहुँचे हैं। 12 नवम्बर 2023 को सिलक्यारा सुरंग में मलबा आ जाने की वजह से 41 मजदूर अन्दर फँस गए थे। तब से ही इन्हें निकालने का रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है।

सबसे पहले मलबा हटाने का प्रयास किया गया था लेकिन वह विफल हो जाने पर मलबे के भीतर ऑगर मशीन की सहायता से 3 फीट व्यास वाले पाइप को डाला जा रहा था। इस काम में अच्छी सफलता भी मिली थी। इसकी सहायता से 60 मीटर मलबे के हिस्से में लगभग 46 मीटर तक पाइप पहुँच गई थी। लेकिन पाइप के सामने लोहे के टुकड़े आने से मशीन अन्दर ही फँस गई है जिसे अब काट कर निकाला गया है।

वहीं अब सुरंग के भीतर पाइप डालने के लिए हाथों से खुदाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि लगभग 9 मीटर खुदाई करनी है, यदि कोई और अड़चन नहीं आई तो जल्द ही रास्ता बना लिया जाएगा।

वहीं विकल्प के तौर पर सुरंग के ऊपर से भी खुदाई का काम चालू है। ऊपर से भी एक ड्रिलिंग मशीन खुदाई कर रही है। इस रास्ते से लगभ 86 मीटर खुदाई होनी है। इस रास्ते से अब तक 36 मीटर खुदाई (वर्टिकल ड्रिलिंग) की जा चुकी है।

अब हाथों से खुदाई के लिए रैट होल माइनिंग एक्सपर्ट को पाइप के अन्दर भेजा जाएगा। बता दें कि रैट माइनिंग का उपयोग कोयले की खुदाई के लिए संकरी सुरंगों में होता है। यहाँ पाइप में जगह नहीं है इसलिए यह विशेषज्ञ अब हाथों से खुदाई के ऑपरेशन को देखेंगे। इसमें सेना भी शामिल है।

वहीं सुरंग के दूसरे मुहाने से भी रास्ता बनाने के प्रयास जारी हैं। इसके लिए सीमा सड़क संगठन (BRO) की सहायता ली जा रही है। अन्दर फँसे सुरंगों तक अभी खाना-पानी और अन्य जरूरत का सामान 6 इंच व्यास वाले पाइप के जरिए ही भेजा जा रहा है।

‘दिल से चाहता था योगी CM न बनें’: दृष्टि IAS वाले विकास दिव्यकीर्ति को तेजस्वी यादव में दिखा ‘बिहार का भविष्य’, माना 2024 में राहुल गाँधी के लिए मौका नहीं

UPSC कोचिंग संस्थान ‘दृष्टि’ के संस्थापक विकास दिव्यकीर्ति ने ‘साहित्य आजतक’ कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को लेकर अपनी बात रखी है। इस दौरान उन्होंने राहुल गाँधी को लेकर भी टिप्पणी की। स्टार शिक्षक माने जाने वाले विकास दिव्यकीर्ति ने कहा कि राहुल गाँधी अपने बेस्ट संस्करण लगातार बन रहे हैं, पहले की तुलना व बेहतर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2024 में तो उन्हें कोई संभावना नज़र नहीं आ रही, लेकिन 2029 में कुछ हो सकता है।

विकास दिव्यकीर्ति ने कहा कि हम क्यों मान कर चलें कि एक ही पार्टी और नेता देश चलाते रहेंगे, अलग-अलग नेताओं को सामने आना चाहिए और देश चलाना चाहिए। वहीं CM योगी आदित्यनाथ के संबंध में उन्होंने कहा कि जब उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की चर्चा चल रही थी तब वो दिल से चाहते थे कि वो सीएम न बनें। लेकिन, पिछले 6-7 साल के परफॉर्मेंस की बात करते हुए उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ एक शानदार मुख्यमंत्री रहे हैं।

विकास दिव्यकीर्ति ने कहा कि पहले उन्हें संदेह था कि मठ से आया हुआ व्यक्ति धर्म से राजनीति में आकर ठीक काम करेगा या नहीं। विकास दिव्यकीर्ति ने इसके बाद बिहार पर भी अपनी राय दी। बिहार पर उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में वो नीतीश कुमार को अच्छे मुख्यमंत्री मानते रहे हैं और नए लोगों में उन्हें तेजस्वी यादव से उम्मीदें हैं। उन्होंने कहा कि इस बार राजद सरकार में आई तो उन्हें लालू यादव वाले जंगलराज को लेकर डर था, लेकिन राजद ने पूरी ताकत लगाई कि वो छवि फिर से न बन जाए।

उन्होंने कहा कि अगर तेजस्वी यादव उन गलतियों से मुक्ति के साथ CM बनने के रास्ते पर हैं तो वो अच्छे नेता साबित होंगे। वहीं UPSC की तैयारी कराने वालों और इसमें चुने जाने वालों को दिए जाने वाले डेमीगॉड स्टेटस को लेकर उन्होंने कहा कि पहले उन्हें यूट्यूब के धुरंधरों ने छोटे वीडियो डालने की सलाह दी थी, लेकिन उनके घंटों के वीडियो भी करोड़ों लोग देखते थे। उन्होंने कहा कि हिंदी समाज भी ज्ञान-पढ़ाई का भूखा है और यदि उनके जैसे कुछ लोग इसमें कुछ भूमिका निभा रहे हैं तो ये स्वागत की बात है।