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राष्ट्रीय शिक्षा नीति का कार्यान्वयन: टूटेगा अंग्रेजी का वर्चस्व – दलित, आदिवासी, पिछड़े, महिलाओं के लिए नई संभावनाओं का द्वार

“शिक्षा का उद्देश्य तथ्यों का नहीं, बल्कि मूल्यों का ज्ञान और कौशल विकास करना है।”

विलियम एडवर्ड्स डेमिंग

नई शिक्षा नीति 1968 और 1986 का लक्ष्य शिक्षा के क्षेत्र में समता और समानता को बढ़ावा देना था। शिक्षा नीति 1968 में जहाँ शैक्षिक ढाँचे में सुधार पर जोर था; वहीं 1986 की शिक्षा नीति में शैक्षिक असमानताओं का उन्मूलन चिंता के केंद्र में था। इसके विपरीत नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP: National Education Policy) अधुनातन शैक्षिक साधनों और नवोन्मेष के माध्यम से समानता और समावेशन को बढ़ावा देती है।

जुलाई 2020 से लागू की गई नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति मुख्यतः उच्च शिक्षण संस्थानों में महत्वपूर्ण सुधारों और विनियमन ढाँचे के सरलीकरण की बात करती है। यह सार्वजनिक और निजी संस्थाओं के लिए एक समान, संतुलित एवं संवेदनशील नियमन की प्रस्तावना करने के साथ-साथ शिक्षा क्षेत्र में लाभरहित निजी भागीदारी को भी प्रोत्साहन देती है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य के प्रति समर्पित है। समृद्ध और उन्नत भारतीय ज्ञान परंपरा की सूक्ष्म समझ, गाँधीजी एवं पंडित दीनदयाल उपाध्याय के दृष्टिकोण से प्रेरित एवं आत्मनिर्भर भारत की आकांक्षा से लैस यह शिक्षा नीति विविध शिक्षण-अधिगम सिद्धांतों का सामंजस्यपूर्ण समावेशन है। जीवनोपयोगी सैद्धांतिक ज्ञान को अपनाते हुए सामाजिक मूल्यों के साथ बहुभाषावाद को प्रतिष्ठापित करती है। इसने पिछले तीन वर्षों में एक उल्लेखनीय परिवर्तन की पीठिका तैयार करते हुए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और पुनरुद्धार की शुरुआत की है।

इसके अंतर्गत पिछले तीन वर्षों में निम्न आवश्यक तत्वों पर ध्यान दिया गया है:

  • हर विद्यार्थी के लिए निष्पक्ष एवं समावेशी शैक्षिक वातावरण का निर्माण।
  • एक बहुमुखी बुनियादी शैक्षिक ढाँचे का निर्माण जो प्रत्येक छात्र के हितों, आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को पूरा करते हुए सर्वसुलभ भी है।
  • महाविद्यालाओं और विश्वविद्यालयों की ढाँचागत क्षमता को क्रमशः विकसित किया जा रहा है।
  • विनियमन व्यवस्था में संगठनात्मक परिवर्तन करते हुए एकीकृत उपक्रम बनाया जा रहा है। उच्च शिक्षा आयोग और राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन ऐसी ही पहल है।
  • एक व्यापक, संस्कारपरक, कौशल आधारित और अंतःविषयी (इंटरडिसिप्लिनरी) शिक्षा प्रदान की जा रही है।
  • बहुभाषावाद को प्रोत्साहित करते हुए मातृभाषा विशेष रूप से भारतीय भाषाओं में शिक्षण-अधिगम क्रिया को संचालित किया जा रहा है। अभियांत्रिकी , चिकित्सा और प्रबंधन जैसे विषयों की पाठ्य-सामग्री हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषाओं में तैयार की जा रही है।
  • शिक्षकों को निरन्तर प्रेरित और प्रोत्साहित करने के लिए समयबद्ध नियुक्ति और प्रोन्नति की जा रही है।
  • व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने के नए व्यावसायिक संस्थान खोलने पर विशेष बल दिया जा रहा है। चिकित्सा शिक्षा संस्थान इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं।
  • राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन के लिए 50000 करोड़ की राशि आवंटित की गई है। इसके माध्यम से गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को प्रोत्साहन देना और शोध को समाज और उद्योग जगत से प्रत्यक्षतः जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
  • गुणवत्तापूर्ण दूरस्थ और मुक्त शिक्षा को बढ़ावा देते हुए सकल नामांकन अनुपात (GER) को निरन्तर बढ़ाया जा रहा है।
  • सकल घरेलू उत्पादन का 6% शिक्षा पर व्यय करने की दिशा में भी विचार-विमर्श हो रहा है। भारत का आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभरना और GST कर की निरन्तर बढ़ती राशि ने आशान्वित किया है कि भारत सरकार शिक्षा बजट बढ़ाकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लिए आवश्यक भौतिक ढाँचा तैयार करेगी।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होने के परिणामस्वरूप समावेशी शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई तरह के प्रयास किये जा रहे हैं, जैसे- अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (ABC), जिसमें उच्च शिक्षा संस्थान (HEIs) छात्रों द्वारा प्राप्त क्रेडिट्स को डिजिटल रूप में जमा कर रहे हैं। छात्र त्रिवर्षीय ऑनर्स प्रोग्राम या चतुर्वर्षीय ऑनर्स प्रोग्राम, अनुसन्धान के साथ चतुर्वर्षीय ऑनर्स प्रोग्राम का चयन कर रहे हैं।

ऑनर्स प्रोग्राम के चयन के साथ ही, छात्र प्रोग्राम के किसी भी वर्ष में प्रवेश ले या छोड़ सकते हैं। उन्हें अध्ययन अवधि के अनुसार प्रमाण-पत्र दिया जाएगा। अब उनका समय, श्रम और संसाधन निष्फल नहीं जाएगा। उच्च शिक्षा में बहु-प्रवेश और निकास प्रणाली के साथ-साथ बहुविषयक पठन-पाठन भी अकादमिक बैंक ऑफ़ क्रेडिट (ABC) के माध्यम से पूरा किया जा रहा है।

भारत सरकार शिक्षा के माध्यम के साथ-साथ भारतीय भाषा, कला और संस्कृति को प्रोत्साहन दे रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति इसे संभव कर रही है। इसके अंतर्गत कई उच्च शिक्षण संस्थान क्षेत्रीय भाषा या मातृभाषा को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ स्थानीय भाषा को शिक्षण का माध्यम बना रहे हैं। इससे वंचित वर्ग- दलित, आदिवासी, पिछड़े, अल्पसंख्यक और महिलाओं के लिए नई संभावनाओं के द्वार खुल रहे हैं।

अध्ययन-अध्यापन में अंग्रेजी भाषा के वर्चस्व ने इन वर्गों की वंचना को कई गुना बढ़ाते हुए उसे स्थायित्व प्रदान किया है। औपनिवेशिक पाठ्यचर्या ने भारतीय मेधा को कुंठित करते हुए अपनी जड़ों से काट डाला है। अब स्थानीयता और अंतरराष्ट्रीयता का समन्वयन करते हुए जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

प्रतिभा पलायन और पूँजी प्रवाह को रोकने के लिए नामी-गिरामी विदेशी विश्वविद्यालयों के परिसर भारत में खोले जा रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है।

सभी वर्गों को समान अवसर प्रदान करने के लिए वित्तीय सहायता, विशेष ऋण, छात्रवृत्तियाँ और पुरस्कार आदि सुनिश्चित किए गए हैं। शिक्षकों को अपनी शिक्षण विधियों को बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रशिक्षण और प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

सूचना-तकनीक यंत्रों और माध्यमों से शिक्षण और अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, समावेशी और सरल बनाया जा रहा है। नवाचार और नवोन्मेष शिक्षा परिदृश्य का वर्तमान है। आज राष्ट्रीय शिक्षा नीति के आलोक में प्रत्येक कक्षाकक्ष वह सुन्दर उपवन है, जहाँ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की रोशनी में क्षमता, प्रतिभा, आकांक्षा और संभावना के बहुरंगी फूल खिल रहे हैं।

भारत के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में से एक, दिल्ली विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (एनईपी) के कार्यान्वयन में अग्रणी भूमिका है। यह कई अंतरराष्ट्रीय समझौता ज्ञापनों, सहयोगी सम्बन्धों को धरातल पर उतार रहा है। यह वसुधैव कुटुंबकम् की भावना के साथ-साथ सर्वजनीनता और सार्वभौमिकता को साकार करने की दिशा में निर्णायक पहल कर रहा है। विश्व के प्रमुख विश्वविद्यालयों के साथ की जा रही रणनीतिक साझेदारियाँ पारस्परिक आदान-प्रदान के साथ-साथ शिक्षण परिदृश्य को गतिशील और समृद्ध बना रही हैं।

देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भावना के अनुरूप पाठ्यक्रमों में आधारभूत परिवर्तन और विषयों के चयन में लचीलापन, बहुविषयकता, गुणवत्तापूर्ण शोध और नवाचार, कॉलेजों की स्वायत्तता और शिक्षक प्रशिक्षण आदि को अपनाया है। सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों और अनेक राज्य विश्वविद्यालयों ने अपने स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों को सीबीसीएस (CBCS: Choice Based Credit System) और एलओसीएफ (LOCF: Learning Outcomes-based Curriculum Framework) फ्रेमवर्क के अंतर्गत परिवर्तित करते हुए अधुनातन कर लिया है।

सीबीसीएस और एलओसीएफ प्रणाली छात्रों को अपने पसंदीदा पाठ्यक्रम चुनने और बुनने की स्वतंत्रता प्रदान करती है। पाठ्यक्रमों के अलावा शिक्षण प्रविधियों और पद्धतियों में भी निर्णायक बदलाव हुए हैं। ये बदलाव यूजीसीएफ पाठ्यक्रम 2022 (UGCF: Undergraduate Curriculum Framework 2022) के अनुरूप हैं। इसका उद्देश्य समग्र शिक्षा सुनिश्चित करना है। यह बदलाव छात्रों के करियर लक्ष्यों के अनुसार कौशल विकास और संस्कार निर्माण में सहयोगी सिद्ध होगा।

बहुविषयक और अंतरविषयक अनुसंधान और पठन-पाठन को प्रोत्साहन देने के लिए अनेक विश्वविद्यालयों ने कई बहुविषयक कार्यक्रमों की शुरुआत की है, जैसे बी.ए (ऑनर्स) इन लिबरल आर्ट्स और एम.ए. इन इंटरडिस्प्लिनरी स्टडीज़। यह कार्यक्रम छात्रों को विभिन्न विषयों का अध्ययन एक साथ करने की अनुमति देते हैं। साथ ही, विचार-विमर्श, समस्या-समाधान क्षमता और संवाद कौशल विकसित करने के उद्देश्य से डिज़ाइन किए गए हैं। ये 21वीं सदी की आवश्यकताओं और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए बनाए गए हैं।

विश्वविद्यालयों में इन्नोवेशन सेंटर, इन्क्यूबेशन सेंटर, स्टार्ट-अप फंड, उद्यमोदय फाउंडेशन, विश्वविद्यालय फाउंडेशन और रिसर्च पार्क आदि की स्थापना जैसी महत्वपूर्ण पहल की जा रही है।

निष्कर्षतः पिछले तीन वर्षों में देश के उच्च शिक्षा तंत्र में महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। इन बदलावों ने उच्च शिक्षा प्रणाली को अधिक छात्र-केंद्रित, शोध-केंद्रित एवं नवाचारी बना दिया है। साथ ही, कई विश्वविद्यालयों को विश्वस्तरीय शैक्षिक प्रतिष्ठा की प्राप्ति हेतु प्रतिस्पर्धी बना दिया है। लेकिन इस लक्ष्य की प्राप्ति और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के कार्यान्वयन की सबसे बड़ी बाधा आर्थिक संसाधनों और ढाँचागत सुविधाओं का अभाव है। सरकार को शिक्षा में निवेश बढ़ाना चाहिए। ऐसा करके ही भारत को एक ज्ञान अर्थ-व्यवस्था (विश्वगुरु) और विश्व शक्ति बनाया जा सकता है।

वाइफ को खोने से डर से अपनी ही शादी में बरसाईं गोलियाँ: पूर्व पैरामिलिट्री जवान और पैराओलम्पिक खिलाड़ी की हरकत: पत्नी, सास, साली को मार कर ली आत्महत्या

थाईलैंड में एक शादी समारोह के दौरान उस समय अफरातफरी मच गई जब दूल्हे ने अपनी दुल्हन और 3 अन्य लोगों को गोलियों से भून दिया। बाद में दूल्हे ने खुद को भी गोली मार कर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान मिस्टर चतुरोंग सुकसुक के तौर पर हुई है। चतुरोंग सुकसुक ने पैरालंपिक खेलों में निशानेबाजी और तैराकी में थाईलैंड का प्रतिनिधित्व किया था। मृतक थाईलैंड की पैरामिलिट्री का पूर्व अर्धसैनिक भी है। घटना शनिवार (25 नवंबर, 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना थाईलैंड के नाखोन रत्चासिमा प्रदेश में आने वाले वांग नाम खियो जिले की है। यहाँ के एक गाँव में 29 साल के चतुरोंग 25 नवंबर की सुबह 44 वर्षीया कंचना पचुनथुएक से शादी के बंधन में बँधे थे। दोनों एक प्रेमी जोड़े के तौर पर पिछले 3 वर्षों से लिव इन रिलेशनशिप में थे। शनिवार को ही इन दोनों की शादी की ख़ुशी में पार्टी आयोजित की गई थी। इस पार्टी में चतुरोंग और उनकी पत्नी के नाते-रिश्तेदारों के अलावा कई दोस्तों ने भी शिरकत की थी।

बताया जा रहा है कि चतुरोंग सुकसुक अपनी शादी की पार्टी में थोड़ा अपसेट और नाराज से दिख रहे थे। थोड़े समय बाद चतुरोंग पार्टी छोड़ कर कहीं बार चले गए। जब चतुरोंग वापस लौटे तो उनके हाथों में 9 MM की एक पिस्टल दिख रही थी। उन्होंने वापस आते ही अचानक समारोह में गोलियाँ बरसानी शुरू कर दीं। ये गोलियाँ उन्होंने अपनी बीवी कंचना, 62 वर्षीया सास और 38 वर्षीया साली को निशाना बना कर चलाईं थीं। हमले में तीनों की मौत हो गई। गोलीबारी की चपेट में शादी समारोह में मौजूद 2 मेहमान भी आए।

इन दोनों मेहमानों को इलाज के के लिए स्थानीय अस्पताल में भर्ती करवाया गया। यहाँ एक मेहमान ने दम तोड़ दिया। वहीं दूसरे घायल का इलाज चल रहा है। हमले के बाद चतुरोंग ने खुद को भी गोली मार ली जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया जा रहा है कि दूल्हा दिव्यांग था और उसको डर था कि कहीं भविष्य में उसकी बीवी उसको छोड़ न दे। कुछ लोगों के अनुसार पार्टी में पति-पत्नी में बहस भी हुई थी। हालाँकि पुलिस मामले की जाँच-पड़ताल में जुटी हुई है।

मृतक चतुरोंग पहले थाईलैंड की पैरामिलिट्री में तैनात थे। ड्यूटी के दौरान हुई एक दुर्घटना में चतुरोंग ने दायाँ पैर खो दिया था। इसके बाद उन्होंने पैरालंपिक खेलों में हिस्सा लिया। साल 2022 में इंडोनेशिया में 11वें आसियान पैरा खेलों में चतुरोंग ने रजत पदक जीता था।

कक्षा 4 के छात्र पर टूट पड़े उसके 3 सहपाठी, राउंडर से किए पैरों में108 वार: मामला पहुँचा थाने, CWC को आशंका- हिंसक गेम खेलना हो सकती है वजह

मध्य प्रदेश के इंदौर में कक्षा 4 में पढ़ने वाले एक छात्र पर उसके 3 सहपाठियों ने हमला किया है। इस हमले के दौरान गणित की पढ़ाई में काम आने वाले ज्योमिट्री कंपास के राउंडर को हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया गया। पीड़ित के पैरों पर इसी राउंडर से 108 बार मारा गया।

फ़िलहाल, हमले के बाद पीड़ित छात्र का इलाज करवाया गया और अब उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। घटना शुक्रवार (24 नवंबर, 2023) की है। इस घटना की पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई गई है। चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) ने इस पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना इंदौर के एयरोड्रम थानाक्षेत्र की है। पीड़ित छात्र यहाँ के एक प्राइवेट स्कूल में कक्षा 4 में पढ़ता है। पीड़ित के पिता ने बताया कि 24 नवंबर को उनका बेटा हर दिन की तरह स्कूल में पढ़ने गया था। दोपहर 2 बजे के आसपास छात्र के 3 सहपाठियों ने अचानक ही उस पर एकजुट हो कर हमला बोल दिया। हथियार के तौर पर ज्योमिट्री बॉक्स में आने वाले राउंडर का इस्तेमाल किया गया। खासतौर पर पीड़ित छात्र के पैरों को ही निशाना बनाया गया। तीनों हमलावर छात्रों ने पीड़ित पर कुल 108 बार वार किया।

पीड़ित छात्र के पिता ने आगे बताया कि उनके बेटे ने घर आ कर उन्हें सारे मामले की जानकारी दी। वो शिकायत ले कर स्कूल पहुँचे तो वहाँ उनको कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। आरोप है कि स्कूल प्रशासन ने घटना का CCTV फुटेज भी पीड़ित के पिता को नहीं दिखाया। आखिरकार हमले के शिकार हुए छात्र पीड़ित के पिता ने इंदौर के एयरोड्रम थाने में शिकायत दर्ज करवाई। उनका कहना है कि उन्हें अब तक पता ही नहीं चल पाया है कि उनके बेटे पर उसके 3 सहपाठियों ने हमला क्यों किया?

इलाके के ACP विक्रम सिंह चौहान का कहना है कि पीड़ित छात्र का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है। पीड़ित और अरोपित सभी छात्र 10 साल से कम उम्र के हैं। बकौल ACP मामले में नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) ने इस मामले की रिपोर्ट तलब की है। कमेटी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इतनी कम उम्र के छात्रों ने इतना हिंसक वर्ताव क्यों किया। कमेटी को इस बात की भी आशंका है कि कहीं हमलावर छात्र हिंसक दृश्यों वाले वीडियो गेम तो नहीं खेलते थे। फ़िलहाल मामले में जाँच जारी है।

85 घाटों पर 12 लाख दीये, 11 टन फूलों से विश्वनाथ मंदिर की सजावट: काशी की देव दीपावली में पहुँचे 70 देशों के प्रतिनिधि, CM योगी बोले – हर हर महादेव

देव दीपावली के मौके पर सोमवार (27 नवंबर, 2023) को वाराणसी प्रकाश से जगमग दिखा। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, “देव दीपावली के पावन अवसर पर आशा, आस्था, आत्मीयता और अंत्योदय के असंख्य दीयों के दिव्य प्रकाश से जगमग अविनाशी काशी।” उन्होंने इस दौरान ‘हर-हर महादेव’ का नारा भी लिखा। शाम के बाद पूरी काशी रंग-बिरंगे प्रकाश से जगमग दिखी। काशी के घाटों पर गजब की चकाचौंध देखने को मिली।

काशी के 85 घाटों पर 12 लाख दीये जलाए गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद इस दौरान वहाँ उपस्थित रहे। पहली बार 70 देशों के राजदूत व प्रतिनिधि भी देव दीपावली के साक्षी बने। 12 लाख में से 1 लाख दीये गाय के गोबर के बनाए गए थे। बता दें कि राक्षस त्रिपुरासुर ने कभी पूरी सृष्टि में आतंक मचाया था। भगवान शिव ने उसका संहार किया और फिर देवताओं ने दिवाली मनाई थी, इसीलिए इसे देव दीपावली के रूप में जाना गया।

देवाधिदेव महादेव के पूजन के रूप में ये परंपरा पुरातन काल से ही चली आ रही है। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर देव दीपावली मनाई जाती है। विश्वनाथ मंदिर को सजाने के लिए 11 टन फूल मँगाए गए थे। केंद्रीय आवासीय, शहरी मामलों, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी समारोह में मौजूद रहे। DM ने खुद तैयारियों का जायजा लिया था। साफ़-सफाई के लिए विशेष निर्देश दिए गए थे। विदेशी मेहमानों के लिए भी विशेष व्यवस्थाएँ की गई थीं।

गंगा नदी के किनारे प्रकाश से सारे घाट जगमग रहे। इस दिन लाखों लोग गंगा में भी स्नान करते हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ ने सभी विदेशी मेहमानों का स्वागत किया। कुल मिला कर 150 विदेशी मेहमान उपस्थित थे। वाराणसी मंडल के कई मजिस्ट्रेट को व्यवस्था बनाने के लिए तैनात किया गया था। इससे पहले अयोध्या भी गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स में शामिल हुआ था। अयोध्या में 22.23 लाख दीये जलाए गए थे। अब वाराणसी जगमग हुआ है।

गाजियाबाद में आसिफ बने आकाश और सुमैया बनीं प्रिया: शंखनाद और हवन के बीच लगाए जय श्री राम के नारे, कहा- सनातन धर्म ही सबसे बढ़िया

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में एक मुस्लिम परिवारों के 2 सदस्यों ने घर वापसी की है। आसिफ नाम का युवक घर वापसी करके अब आकाश चौहान बन चुका है जबकि उनकी बीवी सुमैया खातून अब प्रिया नाम से जानी जाएँगी। इस दम्पति ने मंदिर में शंखनाद और वेदमंत्रों के बीच जय श्री राम के नारे लगाए और आगे का जीवन सनातन पद्धति के अनुसार जीने का संकल्प लिया। घर वापसी का यह कार्यक्रम हिन्दू रक्षा दल नाम के संगठन ने रविवार (26 नवंबर, 2023) को करवाया।

हिन्दू रक्षा दल के अध्यक्ष पिंकी चौधरी ने ऑपइंडिया से बातचीत करते हुए इसके बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि घर वापसी करने वाला आसिफ मूल रूप से लोनी का रहने वाला है। उसका टैक्सी का कारोबार है। आसिफ काफी समय से पिंकी चौधरी से खुद को हिन्दू धर्म में लाने की गुजारिश कर रहा था। हालाँकि, उसकी 5 साल पहले शादी सुमैया खातून नाम की लड़की से हुई थी। दोनों का एक बेटा भी है। सुमैया शुरू से ही हिन्दू धर्म से प्रभावित थी।

आखिरकार 26 नवंबर को पिंकी चौधरी ने गाजियाबाद के ही भोपुरा क्षेत्र में पड़ने वाले एक मंदिर में घर वापसी का कार्यक्रम रखा। यहाँ आसिफ और सुमैया ने विधि-विधान से पूजापाठ किया। इस दौरान शंखनाद और वेदमंत्रों के बीच दोनों ने हवन किया और भविष्य में सनातन पद्धति के हिसाब से ही जीवन जीने का फैसला किया। अब आकाश चौहान बन चुके आसिफ ने कहा, “मुझे सनातन धर्म सबसे बढ़िया और पवित्र धर्म लगा। इस्लाम कोई धर्म नहीं है। आपस में ही शादी-वादी। वो सब बेकार है।” बकौल आसिफ उसने खुद ही पिंकी चौधरी से घर वापसी का आग्रह किया था।

वहीं भगवान राम की जय बोलते हुए आसिफ की पहले सुमैया और अब प्रिया चौहान ने भी खुद को बेहद खुश बताया। उन्होंने कहा, “हिन्दू धर्म ही बढ़िया है। इस्लाम में कोई कुछ नहीं होता। ये 3 बार में तलाक कर देते हैं।” प्रिया ने आगे कहा कि अब उनका घर-परिवार सब सही से रहेगा। हिन्दू रक्षा दल के अध्यक्ष पिंकी चौधरी ने कहा, “पूरा देश इसे देखे और जिसे भी घर वापसी करनी हो वो हमारे पास आए। हम आपकी सुरक्षा और सम्मान की जिम्मेदारी लेते हैं।”

‘लड़ूँगी लोकसभा का चुनाव’: पिता समेत प्रशांत किशोर के ‘जन सुराज’ में शामिल हुईं अभिनेत्री अक्षरा सिंह, बोलीं – शिक्षित एवं विकसित बिहार का है सपना

भोजपुरी अभिनेत्री अक्षरा सिंह प्रशांत किशोर के ‘जन सुराज’ में शामिल हो गई हैं। ‘जन सुराज’ ने जानकारी दी है कि अक्षरा सिंह ने NP मंडल और अफाक अहमद की मौजूदगी में संगठन की संस्थापक सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान उन्होंने कहा कि वो बिहार के भविष्य को उज्जवल देखना चाहती हैं। ‘जन सुराज’ चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर का अभियान है, जिसके तहत वो पूरे बिहार में नेटवर्क तैयार कर रहे हैं और गाँव-गाँव तक पहुँच रहे हैं।

अक्षरा सिंह ने संगठन से जुड़ने के बाद कहा कि हर घर को सँवारने वाला एक बेटा नहीं, बल्कि बेटी होती है। उन्होंने खुद को बिहार की बेटी बताते हुए कहा कि उनकी कल्पना है कि राज्य सही मायनों में शिक्षित बने और खूब तरक्की करे। उन्होंने कहा कि भविष्य में मौका मिलने पर वो लोकसभा चुनाव भी ज़रूर लड़ेंगी। हालाँकि, आरा से चुनाव लड़ने की अटकलों को उन्होंने अफवाह करार दिया। बता दें कि भोजपुरी स्टार पवन सिंह, जिनके साथ उनके करीबी रिश्ते रहे हैं, वो भाजपा की तरफ से आरा से ही दावेदारी ठोक रहे हैं।

अक्षरा सिंह ने कहा कि वो 15 महीने की ‘जन सुराज यात्रा’ से खासी प्रभावित हैं। उन्होंने खुद को प्रशांत किशोर की सोच से प्रभावित बताते हुए कहा कि वो आगे वही करेंगी जिसमें बिहार की जनता का भला होगा। हालाँकि, उन्होंने ये भी साफ़ किया कि वो जल्दबाजी नहीं कर रही हैं। भोजपुरी अभिनेत्री ने सोच बदलने और राजनीति में युवाओं के आने पर जोर दिया। उनके पिता इंद्रजीत सिंह ने भी ‘जन सुराज’ की सदस्यता ली। अभी भी अक्षरा का कहना है कि उन्होंने राजनीति ज्वाइन नहीं की है।

अक्षरा सिंह ने इस दौरान सामाजिक कुरीतियों को बदलने की भी बात की। उन्होंने कहा कि आगे प्रशांत किशोर का जैसा निर्देश होगा उस हिसाब से वो काम करेंगी। वो पदयात्रा में भी शामिल होंगी। इससे पहले उनका रुझान भाजपा की तरफ दिख रहा था, वो केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से भी मिली थीं। अक्षरा सिंह ने इसीलिए कहा कि सभी राजनीतिक दलों से उन्हें सम्मान और प्यार मिलता है। उन्होंने कहा कि वो बिहार को एक विकसित राज्य के रूप में देखना चाहती हैं।

बता दें कि पवन सिंह के साथ करीबी रिश्ते को लेकर अक्षरा सिंह अक्सर चर्चा में रही हैं। भोजपुरी स्टार पवन सिंह के साथ उन्होंने कई फिल्मों में काम किया है। पवन सिंह ने 2017 में ही भाजपा में शामिल होने का निर्णय लिया था और तब से वो पार्टी के कुछ कार्यक्रमों में दिखते भी रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव और 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले अब दोनों ही राजनीति में सक्रिय हो गए हैं। अक्षरा सिंह पटना के कंकड़बाग की रहने वाली हैं।

यूपी ATS ने दो ISI एजेंटों को दबोचा, पंजाब से अमृतपाल सिंह और गाजियाबाद से रियाजुद्दीन गिरफ्तार: पाकिस्तान के लिए कर रहे थे भारतीय सेना की जासूसी

उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने भारत में आतंकवाद फैलाने के लिए पाकिस्तान से की जा रही फंडिंग के मामले में ISI के 2 एजेंटों को गिरफ्तार किया है। इनके नाम रियाजुद्दीन और अमृतपाल सिंह उर्फ़ अमृत गिल हैं। गिरफ्तार आरोपित भारत के सैन्य ठिकानों सहित अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की जानकारियाँ पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI को भेज रहे थे।

इन सभी के खातों में देश विरोधी साजिशों को अंजाम देने के लिए पैसे भी भेजे गए थे। ATS ने शुक्रवार (10 नवंबर, 2023) को इसी साजिश के खिलाफ लखनऊ में FIR दर्ज करवाई थी। इसी केस में नामजद एक अन्य आरोपित इजहारुल हुसैन बिहार के बेतिया जेल में बंद है।

उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा 26 नवंबर (रविवार) को जारी प्रेसनोट के मुताबिक ATS को सूचना मिल रही थी कि कुछ लोगों को संदिग्ध स्रोतों से पैसा प्राप्त हो रहे हैं। इन पैसों का प्रयोग पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI के लिए भारत विरोधी जासूसी गतिविधियों में संलिप्त होने की आशंका जताई गई। जाँच के दौरान इस सूचना की पुष्टि हुई और ATS ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी।

जाँच के दौरान नामजद आरोपित गाजियाबाद के रियाजुद्दीन के बैंक खातो से मार्च 2022 से अप्रैल 2022 के बीच लगभग 70 लाख रुपयों का संदिग्ध लेन-देन सामने आया।

रियाजुद्दीन ने गाजियाबाद के केनरा बैंक में जो खाता खुलवाया था उसमें बिहार के बेतिया के निवासी इजहारुल का मोबाइल नंबर दर्ज था। रियाजुद्दीन और इजहारुल की मुलाकात राजस्थान में हुई थी। यहाँ पर दोनों वेल्डिंग का कार्य करते थे। यहीं से दोनों पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI के एजेंटों के सम्पर्क में आ गए थे। और दोनों मिलकर ISI के लिए काम कर रहे अन्य एजेंटों को पैसे भेजने लगे। ATS ने रियाजुद्दीन को पूछताछ के लिए लखनऊ मुख्यालय तलब किया था।

UP पुलिस प्रेसनोट

पूछताछ में आरोपों की पुष्टि होने के बाद 26 नवम्बर (रविवार) को ATS ने रियाजुद्दीन को गिरफ्तार कर लिया। वह गाजियाबाद के थानाक्षेत्र भोजपुर का निवासी है। रियाजुद्दीन के साथी इजहारुल हुसैन को 8 नवंबर को बिहार की बेतिया पुलिस ने शराब पीने के आरोप में गिरफ्तार किया था। उस पर बिहार शराबबंदी कानून के तहत FIR दर्ज है और फिलहाल वह जेल में है। ATS अब जेल में बंद इजहारुल को वारंट बी के जरिए रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। ATS का दावा है कि इससे इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों को भी चिन्हित करने में मदद मिलेगी।

रियाजुद्दीन ने जिन लोगों को पैसे भेजे हैं उनके बारे में भी ATS बारीकी से जाँच कर रही है। इसी क्रम में पंजाब के बठिंडा निवासी 25 वर्षीय अमृत गिल उर्फ़ अमृत पाल सिंह का नाम भी सामने आया है। बता दें कि अमृत गिल ऑटो चलाता था लेकिन उसके खाते में भी रियाजुद्दीन द्वारा पैसे भेजे गए थे।

ATS का दावा है कि अमृत गिल ने इन पैसों की एवज में पाकिस्तानी खुफिया एजेन्सी को भारतीय सेना के टैंकों आदि से जुड़ी जानकारियाँ भेजीं थीं। अमृत गिल को 23 नवंबर की रात बठिंडा के तलवंडी साबो क्षेत्र से पकड़ा गया। उसको पंजाब से ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ लाया गया है।

CJI के खिलाफ महाभियोग, कपिल सिब्बल और राम मंदिर जजमेंट रोकने की साजिश: पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने आत्मकथा में बताया – कोई दैवीय शक्ति थी जो…

अयोध्या के राम मंदिर के उद्घाटन की घड़ी नज़दीक आ रही है। जैसा कि सर्वविदित है, 40 दिनों की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की पीठ ने 9 नवंबर, 2019 को फैसला सुनाया था और 2.77 एकड़ की जमीन को हिन्दुओं के नाम करने का आदेश दिया था। इस तरह से 450 वर्षों से चले आ रहे विवाद का पटाक्षेप हुए और हिन्दुओं के सदियों पुराने संघर्ष का अंत भी। उस समय रंजन गोगोई देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) हुआ करते थे, जिनकी अध्यक्षता में पीठ ने ये ऐतिहासिक फैसला सुनाया था।

उस समय उनके मन में क्या चल रहा था? सुप्रीम कोर्ट के भीतर क्या सब हो रहा था? रंजन गोगोई ने अपनी आत्मकथा ‘जस्टिस फॉर द जज‘ के 12वें अध्याय में अयोध्या जजमेंट को लेकर विस्तार से बात की है। उन्होंने इस अध्याय की शुरुआत में ही लिखा है कि आस्था और धर्म से जुड़ी चीजें विश्वास का विषय हैं, सबूतों के नहीं – लेकिन वो मानव समाजों को जोड़ते भी है। रंजन गोगोई लिखते हैं कि नेताओं के तमाम दावों के बावजूद समरूपता और एकता मायावी बनी हुई है, कई राष्ट्र धर्म से जुड़े सदियों पुराने विवादों में उलझे हुए हैं।

रंजन गोगोई ने इसी क्रम में अयोध्या वाले विवाद का जिक्र किया और लिखा कि मानव सभ्यताओं में कई बदलाव आए लेकिन ये विवाद बना रहा। उन्होंने बताया है कि इस विवाद का लाखों हिन्दू-मुस्लिमों पर असर है और सरकारों ने समय-समय पर अपने फैसलों से अनिश्चितता का माहौल बनाया। उन्होंने इस जजमेंट के पीछे चुनौतियों की बात की है और साथ ही बताया है कि कैसे ये फैसला दुनिया भर में विभिन्न समुदायों के बीच विवादों को सुलझाने के लिए प्रेरणा का काम करेगा और मानवता के लिए ये एक बड़ा योगदान है।

उन्होंने लिखा है कि विवाद में 2 पक्ष थे – हिन्दू पक्ष का दावा था कि भगवान श्रीराम का जन्म मंदिर के गर्भगृह में हुआ था और दूसरा पक्ष ये था कि बाबर ने बिना किसी मंदिर को ध्वस्त किए यहाँ मंदिर बनवाया। केंद्रीय शिखर के नीचे की भूमि 1500 स्क्वायर यार्ड्स थी, 1 एकड़ से भी कम। उन्होंने याद किया कि सन् 1856-57 में इसे लेकर दंगे हुए, दिसंबर 1949 में इसमें प्रतिमा स्थापित की गई और दिसंबर 1992 में कारसेवकों ने पूरे विवादित ढाँचे (उसे वो मस्जिद कहते थे) को ही ध्वस्त कर दिया।

1950 से 1989 के बीच दायर किए गए 4 सूट पर ये सुनवाई आधारित थी। 1989 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 33 जजों की पीठ को सुनवाई सौंप दी। 30 दिसंबर, 2010 को उच्च न्यायालय ने 4000 पन्नों का फैसला सुनाया। इस मामले में भी 3 अलग-अलग जजमेंट थे। फाइनल जजमेंट में जमीन को 3 हिस्सों में बाँट दिया गया था – निर्मोही अखाड़ा, रामलला विराजमान और मुस्लिम पक्ष। जस्टिस धर्मवीर शर्मा ने पूरी जमीन हिन्दुओं को सौंपने का फैसला सुनाया। जस्टिस सुधीर अग्रवाल ने सेन्ट्रल डोम के अलावा सभी पक्षों की हिस्सेदारी का फैसला सुनाया।

वहीं जस्टिस एसयू खान ने सेन्ट्रल डोम को हिन्दुओं को देकर बाकी सभी भूमि 3 पक्षों को बाँटने का फैसला सुनाया। इसके विरोध में सुप्रीम कोर्ट में 21 याचिकाएँ दायर की गईं, जिन्हें अयोध्या केस के रूप में जाना गया। 5 दिसंबर, 2017 को तत्कालीन CJI दीपक मिश्रा के सामने ये मामला आया लेकिन अधिवक्ता और तब कॉन्ग्रेस नेता रहे कपिल सिब्बल चाहते थे कि मामला 2019 लोकसभा चुनावों के बाद सुना जाए। मुस्लिम पक्ष के राजीव धवन चाहते थे कि एक बड़े संवैधानिक पीठ को फैसला दिया जाए।

रंजन गोगोई ने लिखा है कि दीपक मिश्रा इस केस को 2019 तक नहीं टालना चाहते थे, लेकिन अप्रैल-मई 2018 में महाभियोग वाला हंगामा खड़ा हो गया और कई लोग मानते हैं कि उन्हें अयोध्या केस की सुनवाई से रोकने के लिए ये सब किया गया था। ध्यान दें कि उस समय राफेल विमान डील और NCR के खिलाफ भी सुनवाई चल रही थी। रंजन गोगोई ने लिखा है कि उनके पूर्ववर्ती के दौर में ही अयोध्या केस की सुनवाई शुरू हो चुकी थी, उन्होंने बस इसे आगे बढ़ाया।

बता दें कि कॉन्ग्रेस समेत 7 विपक्षी दलों (सपा, बसपा, NCP, CPI, IUML/मुस्लिम लीग और JMM) ने जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग चलाने के लिए तत्कालीन उप-राष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू के समक्ष 71 सांसदों का हस्ताक्षर पेश किया था। कपिल सिब्बल इसमें बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहे थे। तब केंद्रीय मंत्री रहे अरुण जेटली ने बताया था कि कैसे महाभियोग की प्रक्रिया को एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

जस्टिस रंजन गोगोई ने बताया है कि कैसे उस समय उनकी अनुमति के बिना ही इस केस को 4 जनवरी, 2019 को लिस्ट कर दिया गया था। CJI के रूप में रंजन गोगोई ने ही 5 जजों की पीठ को मामला सौंपने का निर्णय लिया था, जिसमें उनके अलावा SA बोबडे, NV रमना, UU ललित और DY चंद्रचूड़ शामिल थे। लेकिन, राजीव धवन ने UU ललित के नाम पर आपत्ति जता दी और कहा कि वो बतौर वकील कभी इससे जुड़े मामले से जुड़े रहे हैं, वहीं NV रमना ने भी इससे खुद को अलग कर लिया।

अतः, इन दोनों के स्थान पर जस्टिस अब्दुल नज़ीर और जस्टिस अशोक भूषण का नाम तय किया गया। उत्तर प्रदेश सरकार ने मौखिक सबूतों के अनुवाद 13,000 पन्नों में सौंपे। इसपर अनापत्ति के लिए भी दोनों पक्षों पर 2 महीने का समय दिया गया अध्ययन के लिए। इसके बाद समझौते के लिए एक समिति का गठन किया गया, जो असफल साबित हुई। अतः, 6 अगस्त, 2019 को सुबह साढ़े 10 बजे सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई शुरू कर दी।

जस्टिस रंजन गोगोई अपनी आत्मकथा में लिखते हैं कि सुनवाई जैसे-जैसे आगे बढ़ी, कोर्ट में भीड़ बढ़ती चली गई और कई वकील मौजूद रहते थे। शुरू में राजीव धवन ने अधिक समय की माँग की और जजों पर ही टिप्पणी करते हुए कह दिया कि चंद्रचूड़ के अलावा किसी ने सारे दस्तावजों का ठीक से अध्ययन नहीं किया है। ऐसे वाकये होते रहे और कई बार जजों ने जवाब भी दिया। सप्ताह में 5 दिन सुनवाई का निर्णय लिया गया। रंजन गोगोई का रिटायरमेंट नज़दीक आ रहा था, ऐसे में शाम 5 बजे तक सुनवाई चलती थी।

16 अक्टूबर तक ये सुनवाई चली। उन्होंने एक बड़े रोचक वाकये का जिक्र किया है। उस दौरान एक व्यक्ति सुप्रीम कोर्ट की उस सुनवाई में घुसना चाहता था और इसके लिए उसने सेक्रेटरी जनरल के माध्यम से सन्देश भेजा। हालाँकि, उसके इरादे रंजन गोगोई को नेक नहीं लगे और उन्होंने किसी भी कीमत पर से एंट्री न देने को कहा। दोपहर 2 बजे उसने फिर अनुमति माँगी, लेकिन उसे 2 घंटे रुकने को कहा गया। रंजन गोगोई लिखते हैं कि अगर वो बीच में घुस गया होता तो सुनवाई स्थगित करनी पड़ती और नई तारीख़ देनी पड़ती।

अंततः उन्होंने कहा ‘अब बहुत हुआ’ और जजमेंट रिजर्व होने की घोषणा की। ये सुनवाई के अंतिम दिन की बात है। रंजन गोगोई का कहना है कि एक जज के रूप में उनके प्रशिक्षण का कमाल था कि उनका तनाव उनके काम में नहीं दिखता था, लेकिन उन्हें मामला 17 नवंबर को उनके रिटायरमेंट से पहले निपटाना था। कई बार वो ऐसी ही भावनाओं को लिए घर पहुँचते थे। वो अपने भीतर की उथल-पुथल को अपनी पत्नी से साझा करते थे, और ये बता सकते थे कि अदालत में एक शांत व्यक्ति के पीछे वो कितने परेशान चल रहे हैं।

एक दिन तो उन्होंने अदालत जाने से भी इनकार कर दिया, लेकिन पत्नी रुपांजलि ने उन्हें जाने के लिए कहा। वो उस समय 5, कृष्ण मेनन मार्ग में रहते थे। एक दिन और वो कोर्ट नहीं जा रहे थे, लेकिन पत्नी ने उन्हें फिर भेजा। उस दिन वो चैंबर में ही बैठे रहे, ऐसे में जस्टिस बोबडे ने उन्हें अस्वस्थ बता कर सुनवाई स्थगित कर दी। उन्होंने बताया कि अलग-अलग मामलों में एक्टिविस्ट्स और वकीलों की नकारात्मक टिप्पणियाँ आने लगीं, ताकि सुनवाई तेज़ी से आगे नहीं बढ़े।

कौन था जो सुनवाई को बाधित करना चाहता था? – रंजन गोगोई ने आत्मकथा में किया है जिक्र

रिटायर्ड जज और अब राज्यसभा सांसद रंजन गोगोई लिखते हैं कि पूरी सुनवाई के काल में वो 3-4 घंटे से ज़्यादा किसी दिन नहीं सो पाते थे। जस्टिस रंजन गोगोई लिखते हैं कि कैसे उनके साथी जज ही आपस में बातें करते थे कि वो क्यों पागलों की तरह इस मामले को निपटाना चाहते हैं। उन पर सुप्रीम कोर्ट की प्रतिष्ठा दाँव पर लगाने के आरोप लगाए गए। हालाँकि, उनका मानना है कि कोई दैवीय शक्ति थी जो उन्हें इस केस को खत्म करने के लिए प्रेरित कर रही थी।

3 महीने की उस सुनवाई के दौरान पीठ में शामिल किसी भी जज ने एक दिन की भी छुट्टी नहीं ली। किसी जज को बुखार या सर्दी तक नहीं हुई। एक जज ने उस दौरान एक रिश्तेदार के ICU में होने की बात बताते हुए कहा कि उसकी मृत्यु होने पर उन्हें कुछ दिनों की छुट्टी लेनी पड़ सकती है, लेकिन रंजन गोगोई ने आश्वासन दिया कि वो ठीक हो जाएँगे। हालाँकि, इसकी नौबत नहीं आई और शायद वो ठीक हो गए थे तभी ऐसा हुआ। सुनवाई के बाद पाँचों जज CJI के चैंबर में चाय पर मिलते थे।

इस दौरान केस की बहस को लेकर उनमें बात होती थी, लेकिन अंतिम दिनों में चर्चा होने लगी कि हिन्दू पक्ष को विवादित जमीन दे दी जानी चाहिए और मुस्लिमों को मस्जिद के लिए अलग से 5 एकड़ जमीन मिले। अयोध्या मामले में सिर्फ एक जजमेंट लिखा गया और किसने लिखा है ये भी नहीं सार्वजनिक किया गया। पाँचों जजों ने उस पर हस्ताक्षर किए। जस्टिस रंजन गोगोई चाहते थे कि ये एक ऐसा मामला था जिसमें जजमेंट एक मिनट के लिए भी लंबित नहीं रहना चाहिए।

फैसला सुनाए जाने के बाद कोर्ट नंबर एक में जजेज गैलरी में अशोक चक्र के नीचे फोटो सेशन का आयोजन किया गया। शाम को ताज मानसिंह होटल में रंजन गोगोई ने साथी जजों को जश्न मनाने के लिए बुलाया। वहाँ उन्होंने चायनीज भोजन किया और वाइन पिया। अगले दिन वो माँ और पत्नी के साथ सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रकाशित एक पुस्तक के विमोचन के लिए असम के डिब्रूगढ़ निकल गए। वापस दिल्ली लौट कर वो काम पर लौटे और फिर अपने रिटायरमेंट के अंतिम दिन तक काम पर रहे। उन्होंने इस केस को एक चुनौती के रूप में लिया और इसके लिए अपने विदेश दौरे तक रद्द किए।

जस्टिस रंजन गोगोई ने कश्मीर और अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं को समय नहीं दिया, क्योंकि वो अयोध्या केस को पूरा करना चाहते थे। रंजन गोगोई ने लिखा है कि उन्होंने चुनौती का सामना करने का फैसला किया और इस रास्ते में उन्हें व्यक्तिगत रूप से नकारात्मक टिप्पणियाँ कर निशाना बनाया जाना भी आड़े नहीं आया। आज जब राम मंदिर मूर्त रूप ले रहा है, हमें रंजन गोगोई को भी इस साहस के लिए धन्यवाद करना चाहिए।

‘मुझे बिना खाना-पानी के तिरुपति की सीढ़ियाँ चढ़वाईं, तीन बार बेहोश हुई’: गौतम सिंघानिया पर पत्नी नवाज मोदी ने लगाया हिंसा के बाद नया आरोप

भारत के बड़े कारोबारी और रेमंड ब्रांड के मालिक गौतम सिंघानिया की पत्नी नवाज मोदी ने आरोप लगाया है कि गौतम ने उन्हें बिना खाना-पानी के आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर लेकर गए और सीढ़ियाँ चढ़ाया। नवाज मोदी ने आरोप लगाया है कि इस दौरान वो 2-3 बार बेहोश हुईं।

दरअसल, इस समय हाईप्रोफाइल जोड़े के बीच विवाद चल रहा है, जिसमें यह नए आरोप सामने आए हैं। इससे पहले नवाज मोदी ने सिंघानिया पर हिंसा के आरोप लगाए थे, एक अन्य वीडियो वायरल हुई थी जिसमें वह उनके घर के बाहर खड़ी थी।

अब एक ऑडियो सामने आया है जिसमें नवाज सिंघानिया पर नए आरोप लगा रही हैं। नवाज का कहना है कि शादी से पहले सिंघानिया उन्हें आंध्र प्रदेश स्थित तिरुपति मंदिर ले गए और उसकी सीढ़ियाँ बिना कुछ खाए पिए चढ़वाया। वह बेहोश भी हुईं लेकिन सिंघानिया पर कोई फर्क नहीं पड़ा और वह उन्हें मंदिर तक लेकर पहुँचे।

नवाज का कहना है गौतम सिंघानिया ने तिरुपति में यह मन्नत माँगी थी यदि नवाज उनसे शादी के लिए राजी हो जाती है तो वह उन्हें तिरुपति पैदल लेकर आएँगे। बता दें कि गौतम सिंघानिया तिरुपति में असीम विश्वास रखने वाले माने जाते हैं। इंडिया टुडे के अनुसार, उन्होंने मुंबई में तिरुपति मंदिर के लिए ₹100 करोड़ भी दिए थे।

नवाज मोदी का आरोप है कि सिंघानिया तिरुपति के भगवान् वेंकटेश्वरा के इसलिए भक्त हैं क्योंकि वह धन के भगवान हैं। इससे पहले नवाज मोदी ने गौतम सिंघानिया पर उन्हें और उनकी बेटी को 15 मिनट तक पीटने का आरोप लगाया था।

हाल में एक वीडियो भी वायरल हुआ था जिसमें दीपावली के दिन सिंघानिया ने अपनी पत्नी नवाज मोदी को घर के अंदर नहीं घुसने दिया था। इंडिया टुडे से बातचीत में नवाज ने उस घटनाक्रम के बारे में बताया था कि गौतम सिंघानिया ने उनकी और बेटी की पिटाई की थी। नवाज के अनुसार यह घटना 10 सितंबर, 2023 की थी। गौतम के जन्‍मदिन की पार्टी चल रही थी और सुबह के 5 बज चुके थे।

उन्होंने कहा था, “मैं और मेरी दोनों बेटियाँ भी कुछ दोस्‍तों के साथ मौजूद थीं। उसने अचानक से हमला कर दिया और वहाँ से गायब हो गया। मैं केवल कल्‍पना कर सकती थीं कि वह बंदूकें या कोई हथियार लेने गया है।” नवाज ने बताया था कि वह अपनी बेटी को खींचकर दूसरे कमरे में ले गईं और फिर उसकी पीठ को सहारा देने के लिए तौलिया लेने चली गईं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नवाज ने पुलिस को कॉल किया। आरोप है कि गौतम सिंघानिया ने पुलिस को घर में आने से रोक दिया। वह अपनी बीवी को धमकियाँ देते हुए पुलिस को अपनी जेब में रखने की बात बता रहे थे। नवाज के अनुसार इस मामले में अंबानी परिवार ने उनकी मदद की थी। नीता और अनंत ने उनलोगों की जान बचाई। पुलिस कार्रवाई में भी मदद की।

बताते चलें कि नवाज मोदी ने तलाक के बदले अपने पति गौतम सिंघानिया की सम्पत्ति में 75% हिस्सेदारी की माँग की है। दोनों पति-पत्नी के तौर पर 32 वर्षों तक एक साथ रहे।

कुछ वर्षों पहले ही गौतम सिंघानिया का उनके पिता विजयपत सिंघानिया के साथ विवाद सामने आया था। 2015 में उन्होंने कंपनी समूह का स्वामित्व अपने बेटे गौतम को सौंप दिया, लेकिन 36 मंजिला JK टॉवर में रहने के लिए उन्हें एक अदद घर तक नहीं मिला।

गौतम सिंघानिया ने इंस्टाग्राम के जरिए नवाज़ मोदी से अलग होने का ऐलान करते हुए कहा था कि अपनी बेटियों निहारिका और निशा के लिए वो दोनों जो भी सर्वश्रेष्ठ रहेगा वो करते रहेंगे। उन्होंने इसे व्यक्तिगत निर्णय बताते हुए लोगों से इसका सम्मान करने की अपील की थी और कहा था कि ऐसे समय में वो लोगों की शुभकामनाएँ चाहेंगे।

प्रेमिका के निकाह से नाराज़ था दर्जी, सिर और हाथों में मार दिया चाकू: बुलंद मस्जिद इलाके की घटना

राजधानी दिल्ली के थाना शास्त्री पार्क इलाके में स्थित बुलंद मस्जिद से एक खौफनाक मामला सामने आया है, जहाँ बताया जा रहा है कि एक शादीशुदा प्रेमी ने अपनी शादीशुदा प्रेमिका को सिर और हाथ में ताबड़तोड़ चाकू मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया है। मूल रूप से बिहार की रहने वाली पीड़िता की पहचान 22 वर्षीय युवती हसमत जहाँ के रूप में हुई है। पीड़िता का जीटीबी अस्पताल में इलाज चल रहा है। जहाँ उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। वहीं पुलिस ने मौके से आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हसमत जहाँ ने 3 महीने पहले ही अपने दूसरे प्रेमी मोहम्मद मुन्ना के साथ निकाह कर ली थी और शास्त्री पार्क के बुलंद मस्जिद स्थित किराए के मकान में रह रही थी। वहीं पड़ोसियों के मुताबिक रविवार (26 नवंबर, 2023) करीब 2 बजे के आसपास आरोपित शाह बाबू बिहार से दिल्ली आने के बाद हसमत  के घर पहुँचा और किसी बात को लेकर दोनों में झगड़ा हो गया। 

इसके बाद आरोपित ने एक के बाद एक हसमत जहाँ के सिर में और हाथों में चाकू से हमला कर दिया। वहीं पीड़िता के शोर मचाने की आवाज सुनकर आस-पड़ोस के लोग उसे बचाने के लिए तुरंत दौड़े और किसी तरह से आरोपित प्रेमी से बचाया गया। बता दें कि आरोपित शाह पीड़िता को उसके निकाह से पहले से जानता था। आरोपित और पीड़िता दोनों बिहार के किशनगंज में पड़ोसी थे। पीड़िता की शादी करीब चार महीने पहले मोहम्मद मुन्ना से हुई थी। 

आरोपित की पहचान बिहार के किशनगंज निवासी शाह बाबू के रूप में हुई है। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट में उसे इस्माइल भी बताया जा रहा है। उसके पास से वारदात में इस्तेमाल चाकू बरामद कर लिया गया है। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज कर जाँच में जुट गई है। 

क्या कहा पुलिस ने 

इस मामले में पुलिस का कहना है कि दोपहर 3:25 बजे पुलिस कंट्रोल रूम (पीसीआर) को एक कॉल मिली कि एक युवती को चाकू मारा गया है। पुलिस ने घटनास्थल पर पहुँचकर उसे जग प्रवेश चंद्र अस्पताल ले गई। जहाँ से उसे जीटीबी अस्पताल रेफर कर दिया गया।

पूर्वोत्तर के पुलिस उपायुक्त जॉय टिर्की ने कहा, “आरोपित की पहचान बिहार के किशनगंज जिले के रहने वाले 39 वर्षीय शाह बाबू के रूप में हुई है। उसे मौके से  गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके पास से अपराध में इस्तेमाल किया गया चाकू बरामद  हो गया है। 

इस मामले में डीसीपी ने बताया, “आरोपित शाह बाबू हैदराबाद में दर्जी का काम करता है, वह हसमत से मिलने के लिए दिल्ली आया था। आरोपित अपनी प्रेमिका हसमत के निकाह से नाखुश था। वह उससे मिलने के लिए दिल्ली आया था। जहाँ उससे बात करते समय उसने अपना आपा खो दिया और उसे चाकू मार दिया।” फ़िलहाल चाकू से हमले के बाद आरोपित गिरफ्तार है और पुलिस आगे की जाँच कर रही है।