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‘मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराएँ बांग्लादेशी घुसपैठिए, जाकिर भाई से जाकर मिलें’: TMC नेता का वीडियो वायरल, BJP ने कार्रवाई की माँग की

भारत में आगामी लोकसभा चुनावों से पहले तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के एक नेता के बयान ने विवाद पैदा कर दिया है। टीएमसी नेता रत्ना बिस्वास ने पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले की मतदाता सूची में बांग्लादेशियों को शामिल करने की बात कही है। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

वीडियो में टीएमसी नेता एवं पूर्व पंचायत प्रधान रत्ना कह रही हैं, “इस क्षेत्र में कई बांग्लादेशी रहते हैं। जो लोग बांग्लादेश से यहाँ आए हैं और उन्हें मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने में दिक्कत आती है तो उन्हें जाकिर भाई से संपर्क करना चाहिए। ऐसे सभी लोगों को इस कार्यालय से संपर्क करना चाहिए… यह काम तेजी से किया जाना चाहिए।”

यह वीडियो वायरल होने के बाद विवाद हो गया है। विवाद के बाद स्थानीय पंचायत समिति के पूर्व अध्यक्ष जाकिर हुसैन ने दावा किया, “रत्ना बिस्वास का यह मतलब नहीं था। मेरे क्षेत्र में रहने वाले अधिकांश लोग 1960-65 से पहले यहाँ आए थे। 1990 के बाद कई लोगों को मतदाता सूची से हटा दिया गया है। इनके नाम पहले मतदाता सूची में थे।”

जाकिर हुसैन ने आगे कहा, “दरअसल उन्होंने (रत्ना बिस्वास ने) इन्हीं लोगों की मदद करने की बात कही है। हम निश्चित रूप से आम लोगों को मतदाता सूची में सुधार सहित सेवाएँ निःशुल्क प्रदान करते हैं और यह सब कानून के अनुसार किया जाता है। उन्होंने गलत तरीके से उन सभी को बांग्लादेशी बताया है।”

मतदाता सूची में बांग्लादेशियों के नाम जोड़ने की कोशिश पर भाजपा ने तृणमूल कॉन्ग्रेस पर हमला बोला है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कहा, “सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस पहले से ही ऐसे मतदाता पहचान पत्र बनाने का काम कर रही है। घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची में जोड़े जाते हैं।” उन्होंने इस मामले की जाँच की माँग की है।

बता दें कि पिछले साल मई में पता चला कि बनगाँव दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र से तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद अलो रानी सरकार बांग्लादेश की नागरिक हैं। यह खुलासे तब हुए जब उन्होंने चुनाव परिणाम और उक्त निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा नेता स्वपन मजूमदार की जीत को कलकत्ता उच्च न्यायालय में चुनौती दी। याचिका पर न्यायमूर्ति बिबेक चौधरी ने सुनवाई की।

इस पर कोर्ट ने कहा था कि नामांकन दाखिल करने की तारीख, चुनाव की तारीख और परिणाम की घोषणा की तारीख पर अलो रानी सरकार बांग्लादेश की नागरिक थीं। कोर्ट ने आगे कहा, “याचिकाकर्ता के स्वयं के दस्तावेज़ को देखने से पता चलता है कि याचिकाकर्ता को 2021 का विधानसभा चुनाव लड़ने का कोई अधिकार नहीं था।”

मामले की सुनवाई करते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय ने कहा था, “चूँकि वह भारत की नागरिक नहीं हैं, इसलिए वह लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 16 के साथ पढ़े गए संविधान के अनुच्छेद 173 के संदर्भ में किसी राज्य की विधायिका में चुने जाने के योग्य नहीं होगी।” लो रानी ने दावा किया था कि बांग्लादेश में उनके पति के पैतृक स्थान के वोटर लिस्ट में गलत तरीके से उनका नाम शामिल हो गया था।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा था कि टीएमसी नेता अलो रानी सरकार की शादी 1980 के दशक में बांग्लादेश के नागरिक हरेंद्र नाथ सरकार से हुई थी, जिसके बाद वो कुछ वक्त के लिए बांग्लादेश गई थीं। हालाँकि, जब पति से नहीं बनी तो वो फिर से भारत चली आईं। अपने हलफनामे में अलो रानी ने 5 नवंबर 2020 को वोटर लिस्ट और बांग्लादेश के राष्ट्रीय पहचान पत्र (एनआईसी) से अपना नाम कैंसिल कराने के लिए अप्लाई किया था। 29 जून 2021 को वरिष्ठ जिला चुनाव अधिकारी (बरिसाल) ने बांग्लादेश की वोटर लिस्ट से उनका नाम हटाने की सिफारिश की थी।

उल्लेखनीय है कि आलो रानी सरकार ने 31 मार्च 2021 को बनगाँव दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र से अपना नामांकन दाखिल किया था। इसके लिए मतदान 22 अप्रैल 2021 को हुआ था और 2 मई को इसके रिजल्ट आए। चुनाव के दौरान टीएमसी की नेता बांग्लादेशी नागरिक थीं। भारत में दोहरी नागरिकता वाले लोग चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। अ

पाकिस्तान में मीरा स्कूल की स्थापना, जीवन प्रभु को समर्पित: जानें कौन थे साधु वासवानी, जिनके लिए योगी सरकार ने घोषित किया ‘नो नॉन-वेज डे’

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने 25 नवंबर को ‘नो नॉन-वेज डे’ की घोषणा की है। यानी आज के दिन प्रदेश में कहीं नॉन वेज नहीं बिकेगा। हर माँस की दुकानें और बूचड़खाने बंद रहेंगे। सरकार ने यह फैसला साधु टीएल वासवानी की जयंती को देखकर लिया। जिसके बाद विशेष सचिव धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिया।

अब इस फैसले से कुछ लोग बहुत परेशान हैं। शायद जानना भी चाहते हों कि आखिर साधु टीएल वासवानी कौन हैं जिनकी वजह से पूरे प्रदेश में नॉन वेज पर रोक लगा दी गई। तो आइए थोड़ा साधु टीएल वासवानी के बारे में जानते हैं…

कौन थे साधु टीएल वासवानी

साधु टीएल वासवानी का पूरा नाम साधु थानवरदास लीलाराम वासवानी था। वह एक शिक्षाविद् थे। उनका जन्म पाकिस्तान के सिंध में हुआ था। उन्होंने दसवीं पास करके 1899 में बम्बई विश्वविद्यालय से बीए किया और 1902 में वहीं से एमए करके जीवन प्रभु सेवा को समर्पित कर दिया।

इसके बाद उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में मीरा आंदोलन की शुरुआत की। साथ ही पाकिस्तान के हैदराबाद में सेंट मीरा स्कूल की स्थापना की। मगर, विभाजन के बाद वह पुणे चले आए। बाद में उनके जीवन और शिक्षण को समर्पित एक संग्रहालय, दर्शन संग्रहालय को दिया।

हालाँकि उनकी माँ की इच्छा थी कि बेटा सफल हो इसलिए उन्होंने माँ की बात रखने के लिए कोलकाता के मेट्रोपॉलिटन कॉलेज में इतिहास और दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में एक पद स्वीकार कर लिया। लेकिन गृहस्थ जीवन में वह कभी नहीं बसे। कई समय तक मेट्रोपॉलिटन कॉलेज में इतिहास और दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में एक पद स्वीकार किया।

1910 में वह गुरु प्रोमोथोलाल सेन के साथ मुंबई से बर्लिन गए। वहाँ उन्होंने विश्व धर्म कॉन्ग्रेस में भारत के प्रतिनिधि के रूप में सम्मेलनस शांति और भारत की मदद का संदेश दिया। उनके जीवन को समर्पित दर्शन संग्रहालय 2011 में पुणे में खोला गया।

नो नॉन-वेज डे क्यों?

साधु टीएल वासवानी चूँकि अपने शाकाहारी जीवन की हमेशा वकालत करते थे इसलिए ‘साधु वासवानी मिशन’ के जरिए 25 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय माँस रहित दिवस मनाया जाने लगा। अब इसी आधार पर इस पर योगी सरकार ने भी राज्य में 25 नवंबर को नो नॉन वेज डे की घोषणा की है।

B.Tech वाले लारेब हाशमी ने बस कंडक्टर का गला काटा: वीडियो वायरल, कहा – ‘इंशाअल्लाह मार देंगे… हुकूमत मोदी-योगी की लेकिन राज सिर्फ मुस्तफा का’

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में बी-टेक के एक छात्र ने इंजीनियरिंग कॉलेज के बस कंडक्टर की गर्दन धारदार हथियार से काट दी है। आरोपित छात्र का नाम लारेब हाशमी है, जिसे पुलिस ने एक मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। हाशमी के पैर में पुलिस की गोली लगी है।

अपना वीडियो वायरल करके लारेब हाशमी ने कंडक्टर हरकेश विश्वकर्मा पर हमले की वजह उनके द्वारा किया गया इस्लाम का अपमान बताया है। हालाँकि बस ड्राइवर इसे किराए को लेकर हुआ विवाद बता रहे हैं। गंभीर रूप से घायल हरकेश का इलाज अस्पताल में चल रहा है। घटना शुक्रवार (24 नवंबर 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला प्रयागराज जिले के यमुना पार इलाके में थाना औद्योगिक क्षेत्र का है। शुक्रवार को सिविल लाइंस इलाके से एक इलेक्ट्रिक बस सवारी के साथ करछना की तरफ निकली। इस बस को ड्राइवर मंगला प्रसाद यादव चला रहे थे जबकि कंडक्टर के तौर पर 24 वर्षीय हरकेश विश्वकर्मा मौजूद थे। इसी बस में यूनिटेड इंजीनिरिंग कॉलेज में बी-टेक फर्स्ट ईयर का 20 वर्षीय छात्र लारेब हाश्मी भी सवार हुआ। बस चलने के थोड़े समय बाद कंडक्टर ने हाशमी से भाड़ा माँगा। ड्राइवर मंगला प्रसाद के मुताबिक किराया कम ज्यादा-होने के मुद्दे पर हाशमी और कंडक्टर में विवाद हो गया।

कुछ ही समय की बहस के बाद जब बस लारेब हाशमी के कॉलेज गेट पर पहुँची, तब उसने अपने बैग में छिपा हुआ चापड़ (धारधार हथियार) निकाल लिया। उसने सबके आगे ही कंडक्टर हरकेश पर ताबड़तोड़ वार किए। हमले के दौरान खासतौर पर कंडक्टर की गर्दन को निशाना बनाया गया।

अचानक हुए इस हमले से बाकी सवारियाँ दहशत में आ गईं। कोई कुछ समझ पाता, इससे पहले आरोपित अपने कॉलेज के गेट से अंदर घुस गया। बस कंडक्टर मंगला प्रसाद ने कुछ सहयोगियों के साथ हरकेश को अस्पताल में भर्ती करवाया।

फिलहाल हरकेश की हालत गंभीर है। उनका इलाज स्वरूप रानी अस्पताल प्रयागराज में चल रहा है। वहीं मामले की सूचना पर पुलिस ने हमलावर की तलाश शुरू की। उसे चांडी बंदरगाह के पास गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में चापड़ बरामद करने के लिए उसे ले जाने के दौरान उसने छिपा कर रखी एक बंदूक से पुलिस पर हमला किया।

सतकर्ता की वजह से इस हमले में पुलिसकर्मी बाल-बाल बच गए। आरोपित को काबू करने के लिए आत्मरक्षा में चली गोली लारेब के पैर में लगी और वो घायल हो गया। फ़िलहाल लारेब का इलाज भी अस्पताल में करवाया जा रहा है।

वायरल वीडियो में बताया इस्लाम का अपमान

इस घटना के बाद एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जो आरोपित लारेब हाशमी का बताया जा रहा है। वायरल वीडियो में आरोपित इस्लामी वेशभूषा में दिख रहा है और अपने द्वारा किए गए हमले की वजह इस्लाम का अपमान बता रहा है।

वीडियो की शुरुआत में हाशमी ने कहा, “अस्सलाम वाले कुम रहमतुल्लाह बरकात हु। वो मुसलमानों को गाली दे रहा था। हजरत ए खालिद बिन वलीद रज़ी अल्लाह ताला अन्हु की बरकत से मैंने उस हरामजादे को मारा है। इंशाअल्लाह वो बचेगा नहीं। इंशाअल्लाह वो मरेगा।”

इसी वीडियो में आरोपित ने आगे कहा, “यहाँ से फनाज तक, पूरी दुनिया तक ये गरीब नवाज की दर का कुत्ता पैगाम दे रहा कि जिसने हुजूर के खिलाफ बात की है, लब्बैक या रसूलअल्लाह हम जिएँगे आपके लिए, मरेंगे आपके लिए। इंशाअल्लाह मार देंगे। तो ये रसम है कि हुकूमत मोदी की है योगी की है, नहीं हमारे दिलों पर राज सिर्फ मुस्तफा का चलता है। इंशाअल्लाह अंतरिम मारेंगे।”

इसी के साथ हमलावर कई बार लब्बैक का नारा लगाता है। वो बाकी मुस्लिमों से जान और माल हुजूर के लिए कुर्बान करने की भी अपील करता है। वीडियो के अंत में आरोपित अल्लाह हु अकबर के नारे लगाते हुए पंजाबी भाषा में बोलता है। हालाँकि ऑपइंडिया इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता है। DCP यमुनापार के मुताबिक मामले की जाँच की जा रही है। लारेब मूलतः प्रयागराज के ही सोराँव इलाके का रहने वाला है। उसका अब्बा मुर्गी बेचता है।

राजस्थान विधानसभा में ‘भूतों का साया’: श्मशान और बच्चों के कब्रिस्तान का है कनेक्शन, नहीं बैठ सके 200 MLA कभी भी एक साथ

राजस्थान की विधानसभा में कुल 200 सीटें हैं, लेकिन इस बार भी सिर्फ 199 सीटों पर ही मतदान हो रहा है। इसके पीछे कारण यह है कि श्रीगंगानगर जिले के करणपुर विधानसभा सीट से विधायक और कॉन्ग्रेस उम्मीदवार गुरमीत सिंह कुन्नर का निधन हो गया है। इस कारण से चुनाव आयोग ने इस सीट पर मतदान को फिलहाल को स्थगित कर दिया गया है।

गुरमीत सिंह 75 साल के थे। उन्हें 12 नवंबर 2023 को दिल्ली के AIIMS के जेरिएट्रिक मेडिसिन वॉर्ड में भर्ती कराया गया था। उनका सेप्टिक शॉक और गुर्दे की बीमारी के साथ सेप्सिस से मौत हो गई। वे हाई ब्लड प्रेशर से भी पीड़ित थे। गुरमीत सिंह की मौत के बाद अब करणपुर विधानसभा सीट पर बाद में मतदान होगा। इसका निर्णय चुनाव आयोग लेगा।

यह पहली बार नहीं है कि 199 सीटों पर ही मतदान हो रहा है। इससे पहले साल 2018 में रामगढ़ के बासपा प्रत्याशी लक्ष्मण का निधन हो गया था। इसके बाद पहले इस विधानसभा सीट पर मतदान नहीं हुआ था। इसी तरह से साल 2013 में चुरू से बसपा प्रत्याशी जगदीश मेघवाल का निधन हो गया था। इस कारण इस सीट पर मतदान नहीं हुआ था।

इसे संयोग कहें या कुछ और, लेकिन हकीकत यही है कि राजस्थान विधानसभा चुनाव का इतिहास रहा है कि यहाँ कभी भी सभी 200 विधानसभा सीटों पर एक साथ चुनाव नहीं हुए हैं। किसी न किसी प्रत्याशी की मौत के कारण एक ना एक सीट पर मतदान को स्थगित करना ही पड़ा है।

इस प्रथा को लेकर लोगों का एक अलग तर्क है। प्रगतिशील इसे अंधविश्वास से जोड़ सकते हैं। वहीं, परंपरा में विश्वास करने वाले इसके दूसरा तर्क दे सकते हैं। विधानसभा चुनाव में मतदान से पहले किसी न किसी प्रत्याशी की मौत की पीछे लोग राजस्थान के नए विधानसभा भवन को शापित होने की बात कहते हैं।

नए विधानसभा भवन के शापित होने की बात प्रदेश के कई विधायक भी कह चुके हैं। राजस्थान विधानसभा का नया भवन साल 2001 में बना था। इसके बाद से नए भवन 200 विधायक एक साथ कभी नहीं हो पाए। विधायक रहते हुए कई नेताओं की मौत भी हो गई है। पिछले साल विधायक भंवरलाल शर्मा के निधन के बाद भी यह बात उठी थी।

शर्मा के निधन के बाद पूर्व विधायक हबीबुर्रहमान ने कहा था कि राजस्थान विधानसभा का नया भवन ‘शापित’ है और इसमें भूतों का साया है। उन्होंने इस विधानसभा भवन में पूजा-पाठ करने की माँग की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि जिन किसानों की जमीन पर यह भवन बना है, उन्हें ​मुआवजा नहीं दिया गया है। किसानों को जब तक मुआवजा नहीं दिया जाएगा, तब तक भवन में 200 विधायकों की संख्या पूरी नहीं होगी।

हबीबुर्रहमान ने कहा था, “विधानसभा की बिल्डिंग में कोई न कोई ऐसी आत्मा बैठी है, जिसे यह लगता है कि उसके साथ अन्याय हुआ है। इसीलिए यहाँ कभी सभी 200 विधायक एक साथ नहीं बैठ सके। विधानसभा भवन में अनुष्ठान करवाया जाना चाहिए। जो भी आत्मा है, उसकी संतुष्टि के लिए उपाय करना चाहिए।”

इस पूर्व विधायक ने पिछले साल कहा था, “जब हरिशंकर भाभड़ा पुरानी विधानसभा में स्पीकर थे, तब विधानसभा की इस नई बिल्डिंग बनाने के लिए डेलिगेशन ने दौरा किया था। उस डेलिगेशन में मैं भी था। विधानसभा की इस जमीन पर एक तरफ नगर निगम कचरा डालता था। एक तरफ श्मशान था। दूसरी तरफ बच्चों का कब्रिस्तान। एक तरफ लोग खेती करते थे, एक कुंआ भी था।”

हबीबुर्रहमान ने आगे दावा किया था, जब यह जमीन अधिग्रहित की गई थी, उस समय किसानों से मुआवजे का वादा किया गया होगा। जिन किसानों से जमीन ली गई, उन्हें आज तक मुआवजा नहीं दिया गया। उस वक्त हमारे पास कई बुजुर्ग लोग आए थे। बिना मुआवजे के कई लोगों की मौत हो चुकी है।”

उन्होंने कहा था कि यहाँ पर किसी की तो बद्दुआ है। जब विधानसभा भवन बन रहा था, तब निर्माणाधीन भवन की लिफ्ट में गिरने से भी कुछ मजूदरों की मौत हुई थी। बता दें कि मौजूदा कॉन्ग्रेस नेता हबीबुर्रहमान उस वक्त भाजपा से विधायक थे। उन्होंने कहा था कि भवन में पूजा-पाठ करवाया जाना चाहिए और किसानों को मुआवजा देना चाहिए।

तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में भी इस भवन में पूजा पाठ करवाने की माँग उठी थी। फरवरी 2018 में बजट सत्र के दौरान तत्कालीन सरकार के मुख्य सचेतक कालूलाल गुर्जर ने विधानसभा भवन में पूजा-पाठ करवाने की माँग की थी।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नए विधानसभा भवन में कभी भी 200 विधायक साथ नहीं बैठे हैं। कभी किसी विधायक की मृत्यु हो गई तो कभी किसी को जेल जाना पड़ा। कभी ऐसा भी हुआ है कि कोई विधायक संसद सदस्य चुन लिया गया तो कभी किसी विधायक को राज्यपाल बनाकर भेज दिया गया।

दरअसल, राजस्थान विधानसभा के नए भवन का निर्माण साल 1994 में शुरू हुआ था और मार्च 2001 में बनकर तैयार हुआ था। इस भवन को राजधानी जयपुर में लालकोठी के पास 16.96 एकड़ भूमि पर बनाया गया है। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस इस विधानसभा भवन में एक साथ 260 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था की गई है।

साल 2001 में जब इस भवन का उद्घाटन किया जाना था, तब भी अपशगुन हुआ था। 25 फरवरी 2001 को तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायण को इस भवन का उद्घाटन करने के लिए बुलाया गया था, लेकिन उद्घाटन समारोह से ठीक पहले ही राष्ट्रपति बीमार पड़ गए। इस कारण वे उद्घाटन नहीं आ सके और बिना उद्घाटन के लिए नया भवन शुरू हो गया। 

कहा जाता है कि विधानसभा भवन के पास ही एक श्मशान स्थल है। इस श्मशान घाट को लेकर भी लोग भवन पर सवाल उठाते रहे रहे हैं। दूसरी बात भवन की जमीन को लेकर है। कहा जाता है कि जिन किसानों की जमीन लेकर यह भवन बना है, उन्हें आज तक मुआवजा नहीं दिया गया। इस कारण कई किसानों की जीविका हमेशा के लिए छिन गई थी।

खैर, जो भी हो लेकिन सच्चाई यही है कि राजस्थान के इस नए विधानसभा भवन में कभी भी सभी 200 विधायक एक साथ नहीं बैठे। इसके साथ ही पिछले 15 सालों से कभी भी सभी 200 सीटों पर एक साथ मतदान नहीं हो पाया है।

कोरोना के बाद चीन में फैली ‘निमोनिया’ बीमारी, 1 दिन में 7000+ केस: WHO ने रिपोर्ट माँगी, अलर्ट हुई भारत सरकार

कोरोना महामारी के बाद चाइना में फैल रहे H9N2 श्रेणी के निमोनिया वायरस के बारे में सुनकर एक बार फिर दुनिया के अलग-अलग देशों में डर बैठ गया है। 2 दिन पहले ही खबर आई थी कि 24 घंटे में वहाँ इस बीमारी से पीड़ित 13 हजार संदिग्ध मिले और अब भी वहाँ की हालत खराब ही है एक दिन में 7000 से ज्यादा केस आ रहे हैं। अस्पतालों में बीमार बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है। वहाँ की स्थिति देखते हुए डॉक्टरों ने भारतीयों को सचेत करना शुरू कर दिया है।

बच्चों को बचाएँ

NDTV रिपोर्ट के अनुसार, राम मनोहर लोहिया अस्पताल के निदेशक डॉ अजय शुक्ला ने बताया कि चीन में फैली बीमारी से पीड़ित अभी भारत में कोई बच्चा नहीं है। हालाँकि वह लोगों से अपील करते हैं कि सांस संबंधी बीमारी से बच्चों को बचाने के लिए साफ-सफाई पर ध्यान दें।

डॉक्टर शुक्ला ने कहा, “मैं बस लोगों को सावधान रहने की सलाह दूँगा। साफ-सफाई रखें और यदि आपको लगता है कि कोई है, जिसे यह साँस संबंधी बीमारी या संक्रमण है, क्योंकि इनमें से बहुत से मामले वायरल हैं और वे दूसरे इसकी चपेट में आ सकते हैं, तो दूसरों से दूरी बनाए रखने का प्रयास करें।”

डॉक्टरों का कहना है कि साँस संबंधी बीमारी से बचने के लिए आपको N95 और N99 मास्क का उपयोग करना चाहिए। साथ ही समय-समय पर अपने हाथ धोएँ और सुरक्षित, स्वस्थ व्यवहार बनाए रखें। इसी तरह डॉक्टरों का बच्चों को लेकर सलाह है कि अगर बच्चे स्कूल जा रहे हैं, तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि उन्हें खाँसी, जुकाम, बुखार या अन्य कोई लक्षण तो नहीं है? उनसे बात करें और पूछें कि क्या उनकी कक्षा में कोई बच्चा इस बीमारी से पीड़ित है? यदि ऐसा होता है, तो स्कूल टीचर को इसके बारे में सूचित करें और यदि आपका बच्चा बीमार है तो उसे स्कूल न भेजें।

भारत बीमारी से निपटने के लिए तैयार

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी इस विषय पर बैठक कर कहा कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय उत्तरी चीन में बच्चों में एच9एन2 मामलों के फैलने और श्वसन संबंधी बीमारियों के समूहों पर बारीकी से नजर रख रहा है। मंत्रालय ने इस बीमारी के बारे में बताने के साथ यह भी कहा था कि भारत मौजूदा स्थिति से उत्पन्न होने वाली किसी भी प्रकार की आपात स्थिति के लिए तैयार है।

WHO की चिंता

बता दें कि चीन में फैल रही ये रहस्यमयी बीमारी ने WHO की चिंता को भी बढ़ा दिया है। बताया जा रहा है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) चीन पर इसके प्रकोप पर अधिक विवरण प्रदान करने और अप्रत्याशित वृद्धि के परिणामस्वरूप बेहतर प्रतिक्रिया तंत्र की तलाश करने के लिए दबाव डाल रहा है।

चीन ने अक्टूबर में दी थी वायरस की जानकारी

इस बीमारी के बारे में चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने 13 नवंबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सूचना दी थी। बताया गया कि कुछ समय से साँस लेने संबंधी बीमारियों, विशेष रूप से इनफ्लूएँजा, माइकोप्लाज्मा निमोनिया, छोटे बच्चों को प्रभावित करने वाला एक सामान्य जीवाणु संक्रमण और श्वसन सिंकाइटियल वायरस में वृद्धि देखी जा रही है। इसके बाद धीरे-धीरे इस बीमारी पर खबरें आने लगीं। चाइना के नेशनल रेडियो ने भी बताया कि कि बीजिंग चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल में प्रतिदिन औसतन 7,000 मरीज भर्ती होते हैं, जो अस्पताल की क्षमता से अधिक है।

राजस्थान में 199 सीटों पर मतदान जारी, 1862 उम्मीदवारों का भाग्य तय करेंगे 5.25 करोड़ मतदाता: PM मोदी ने की अधिकतम वोटिंग की अपील

200 सीटों वाली राजस्थान की विधानसभा चुनाव के लिए आज शनिवार (25 नवंबर 2023) को मतदान शुरू हो गया है। हालाँकि, मतदान सिर्फ 199 सीटों पर ही हो रहा है। इस चुनाव में भाजपा और राज्य में सत्ताधारी कॉन्ग्रेस के बीच सीधी टक्कर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से अधिक से अधिक संख्या में मतदान करने की अपील की है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कहा, “राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए आज वोट डाले जाएँगे। सभी मतदाताओं से मेरा निवेदन है कि वे अधिक से अधिक संख्या में अपने मताधिकार का प्रयोग कर वोटिंग का नया रिकॉर्ड बनाएँ। इस अवसर पर पहली बार वोट देने जा रहे राज्य के सभी युवा साथियों को मेरी ढेरों शुभकामनाएँ।”

मतदान सुबह 7 बजे से शुरू हुआ, जो शाम को 6 बजे तक जारी रहेगा। इसके नतीजे 3 दिसंबर 2023 को घोषित होंगे। उधर, राज्य के मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता अशोक गहलोत ने उनकी सरकार ने पिछले पाँच सालों में जो विकास किया है और जनता को गारंटियाँ दी हैं, उसको देखते हुए मतदाता कॉन्ग्रेस को फिर से चुनेंगे। उन्होंने कहा कि इस बार राजस्थान में पाँच में सत्ता बदलने का रिवाज टूटेगा।

राजस्थान में कुल 1862 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनके भाग्य का फैसला 5,25,38,105 मतदाता कर रहे हैं। इन मतदाताओं में 18-30 आयु वर्ग के 1,70,99,334 मतदाता हैं। वहीं, 18-19 आयु वर्ग के मतदाताओं की संख्या 22,61,008 है, जो इस बार नए मतदाता के रूप में जुड़े हैं। राज्य में कुल 36,101 स्थानों पर मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इनमें 10,501 मतदान केंद्र शहरी इलाकों में और 41,006 मतदान केंद्र ग्रामीण इलाकों में बनाए गए हैं।

बता दें कि राजस्थान की विधानसभा में कुल 200 सीटें हैं। श्रीगंगानगर की करणपुर सीट पर कॉन्ग्रेस प्रत्याशी एवं मौजूदा विधायक गुरमीत सिंह कूनर का निधन हो गया है। इस कारण से इस सीट पर चुनाव स्थगित कर दिया गया है। इस कारण शनिवार को सिर्फ 199 सीटों पर मतदान हो रहे हैं। दरअसल, राजस्थान में चुनाव के दौरान किसी न किसी प्रत्याशी की मौत हो जाती है। यही कारण है कि हर बार एक सीट पर देर से चुनाव होता है।

कॉफी हाउस के नाम पर पाकिस्तान ने पौराणिक शारदा पीठ की दीवार तोड़ी, हिंगलाज माता के मंदिर को भी कट्टरपंथियों ने किया ध्वस्त

पाकिस्तान में लगातार एक के बाद एक हिन्दू मंदिरों को निशाना बनाया जा रहा है। पाकिस्तानी सेना ने Pok स्थित पौराणिक धर्मस्थल शारदा पीठ की जमीन पर वहाँ कॉफी हाउस बनाकर जबरन कब्जा कर लिया है। वहीं कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ हिंगलाज माता मंदिर को भी नुकसान पहुँचाया गया है।

दरअसल, थारपारकर जिले के अधिकारियों ने पाकिस्तान के सिंध प्रांत के मीठी शहर में स्थित इस मंदिर को तोड़ने के लिए एक अदालती आदेश का हवाला दिया। बताया जा रहा है कि इसे ध्वस्त करने में पाकिस्तान का पूरा प्रशासन शामिल रहा। जबकि यह मंदिर यूनेस्को (UNESCO) की संरक्षण लिस्ट में आता है। 

हालाँकि, पाकिस्तान में हिन्दू मंदिरों को तोड़ना या हिंदुओं पर हमले की यह पहली घटना नहीं है लेकिन इस बार कोर्ट के आदेश का सहारा लेकर जिस तरह से हिंगलाज माता मंदिर को ध्वस्त किया गया है। यह गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों की श्रृंखला में एक और डराने वाली घटना है। 

CNN न्यूज-18 की रिपोर्ट केअनुसार, एलओसी के पास हिंदुओं के जिस धार्मिक स्थल शारदा पीठ मंदिर को तोड़ा गया। उसे सुप्रीम कोर्ट की ओर से सुरक्षा के आदेश के बावजूद तोड़ा गया। दरअसल, यहाँ पाकिस्तानी सेना द्वारा मंदिर के करीब एक कॉफी हाऊस बनाया जा रहा है, जिसका उद्घाटन इसी साल नवंबर में होना है। ऐसे में यहाँ पाकिस्तानी सेना ने शारदा पीठ की जमीन पर जबरन कब्जा कर लिया है।

हालाँकि, यहाँ के स्थानीय लोगों ने पाकिस्तानी सेना की इस तानाशाही के खिलाफ विरोध भी किया और कब्जा हटाने पर भी जोर दिया, लेकिन वे नहीं माने और उन्होंने स्थानीय सीविल सोसाइटी के सदस्यों को ही उल्टा प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। बता दें कि पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, जिसमें टार्गेट करके हिंसा, हत्या और उनकी जमीनों को कब्जा तक शामिल है। 

पाकिस्तान में पहले भी तोड़े गए हैं कई हिन्दू मंदिर 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यूनेस्को साइट होने के बावजूद भी जब शारदा पीठ ध्वस्त होने से नहीं बच पाया तो यह विश्व के लिए चिंता का विषय है। इससे पहले जुलाई में भी पाकिस्तान में एक मंदिर को तोड़ दिया गया था। तब कराची में मरीमाता का मंदिर जमींदोज कर दिया गया था। इस मंदिर को तब ध्वस्त किया गया था जब पूरे इलाके में लाइट नहीं थी। बाहरी दीवार और गेट को छोड़कर अंदर का पूरा ढाँचा ही ढहा  दिया गया था।

बता दें पाकिस्तान में मंदिरों का यह विध्वंस धरोहरों के अंतरराष्ट्रीय संरक्षण के प्रयासों का खंडन करता है और क्षेत्र में सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत की रक्षा के बारे में सवाल उठाता है। ये घटनाएँ पाकिस्तान जैसे देश में हिंदुओं पर लगातार हो रहे उत्पीड़न को उजागर करती हैं।

हमास ने 13 बंधकों को रिहा किया, इनमें अमेरिकी नागरिक नहीं: इजरायल के मंत्री बोले- 4 दिन का युद्धविराम खत्म होने पर शुरू होगी सैन्य कार्रवाई

इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने शुक्रवार (24 नवंबर 2023) को इजरायल में बंधक बनाए गए लगभग 240 लोगों में से 13 बंधकों को रिहा कर दिया। ये बंधक मिस्र में रेड क्रॉस को सुपुर्द किया गया है। वहाँ से वे इजरायल लौट आए हैं। बता दें कि बंधक की रिहाई के लिए इजरायल ने 4 दिनों के लिए युद्धविराम की घोषणा की है।

इजरायल के अधिकारियों का कहना है कि रिहा किए गए बंधकों की सूची इजरायल द्वारा जारी किए गए बंधकों की सूची से मेल खा रही है। बंधकों का हस्तांतरण दक्षिणी गाजा पट्टी के खान यूनिस में किया गया। आईडीएफ के अनुसार, 13 बंधकों के स्वागत के लिए अपनी तैयारी की गई थी।

मिस्र के संचार मंत्रालय के अनुसार, रिहा किए गए 13 बंधकों के अलावा हमास ने 12 थाई लोगों को भी रिहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, हमास और थाईलैंड सरकार के बीच बातचीत इज़रायल के साथ बातचीत से अलग है और इसकी मध्यस्थता ईरान ने की है। थाईलैंड के प्रधानमंत्री ने उनकी रिहाई की पुष्टि की है। इसके पहले कहा गया था कि हमास 23 थाई बंधकों को बिना शर्त रिहा करेगा।

इजरायल की मीडिया के अनुसार, रिहा किए गए बंधकों को पहले अस्पताल ले जाया जाएगा, जहाँ वे अपने परिजनों से भी मिल सकेंगे। इसके लिए इजरायल की सरकार ने एंबुलेंस और अस्पतालों में अपनी तैयारी पूरी कर ली है। बंधकों की रिहाई से संबंधित सारा ऑपरेशन प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू मॉनिटर कर रहे हैं।

उधर, अमेरिका की मीडिया एजेंसी सीएनएन ने एक अनाम अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि गाजा में हमास द्वारा बंधक बनाए गए अमेरिकी रिहा किए जाने वाले बंधकों की सूची में नहीं हैं। हालाँकि, अमेरिका को उम्मीद है कि चार दिवसीय युद्धविराम समझौते के तहत रिहाई के लिए निर्धारित लगभग 50 बंधकों में अमेरिकी भी शामिल होंगे।

इजरायल के युद्ध कैबिनेट मंत्री बेनी गैंट्ज़ ने कहा कि युद्धविराम के चार दिन पूरे होने के बाद गाजा पर कार्रवाई फिर से शुरू होगी। उन्होंने कहा, “मैं सभी बंधकों के परिवारों को आश्वस्त करना चाहता हूँ कि हम रूकेंगे नहीं। हम बंधकों को वापस लाने और निरोध बहाल करने के लिए गाजा में सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू करेंगे।”

उधर, हमास के राजनीतिक प्रमुख इस्माइल हानियेह ने एक छोटा सा वीडियो जारी कर यरूशलम को अपनी राजधानी बनाने का फिर से दावा किया है। इस्लामइल ने कहा कि हमास संघर्ष विराम की शर्तों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है, जब तक कि इज़रायल भी ऐसा करता है।

हनियेह ने आगे कहा, “हमास गाजा पर इजरायली हमले को रोकने, कैदियों की अदला-बदली को पूरा करने, गाजा पट्टी पर इजरायली नाकाबंदी को समाप्त करने और अल-अक्सा मस्जिद पर ‘हमले’ के अलावा फिलिस्तीनी लोगों को जागरूक करने के अपने प्रयास को आगे बढ़ाएगा। यरूशलेम को अपनी राजधानी बनाकर एक स्वतंत्र राज्य स्थापित करेगा।”

बता दें कि इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल में चौतरफा हमला करके 1400 अधिक लोगों की नृशंस हत्या कर दी थी। इनमें महिलाएँ, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल थे। हमास के आतंकियों ने महिलाओं के साथ रेप जैसी घृणित काम किया था और कुछ का गला भी रे दिया था। इसके बाद इजरायल ने गाजा पर हवाई और थल कार्रवाई शुरू कर दी थी।

डीपफेक पर एक्शन में मोदी सरकार: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की निगरानी के लिए स्पेशल ऑफिसर नियुक्त, लोगों को FIR दर्ज कराने में भी करेगा मदद

पत्रकारों से बात करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डीपफेक पर चिंता जताई थी। इसके बाद IT मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने कहा था कि डीपफेक को लेकर मोदी सरकार गंभीर है और इसको लेकर 10 दिनों में कानून बनाएगी। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि डीपफेक की निगरानी के लिए एक अधिकारी को नियुक्त किया गया है और यह अधिकारी इससे संबंधित मामलों में FIR दर्ज कराने में आम लोगों की मदद करेगा।

डीपफेक को लेकर राजीव चंद्रशेखर ने शुक्रवार (24 नवंबर 2023) को कहा, “आज से भारत सरकार का इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय आईटी एक्ट के रूल 7 के तहत एक अधिकारी को नामित करेगा। रूल 7 अफसर एक ऐसा व्यक्ति होगा, जो एक ऐसा मंच तैयार करेगा, जहाँ नागरिकों के लिए प्लेटफार्मों द्वारा कानून के उल्लंघन की रिपोर्ट भारत सरकार के ध्यान में लाना बहुत आसान होगा।”

उन्होंने आगे कहा, “रूल 7 अफसर उस डिजिटल प्लेटफॉर्म की जानकारी लेंगे और उसके अनुसार प्रतिक्रिया देंगे। इस तरह हम नागरिकों के लिए कानून के उल्लंघन की रिपोर्ट करना बहुत सरल बना देंगे। डीपफेक के अलावा भारत में इंटरनेट पर प्रतिबंधित बाल यौन शोषण से संबंधी सामग्री सहित कई अन्य श्रेणियाँ भी शामिल हैं,​ जिनको लेकर लोग रूल 7 अफसर से शिकायत कर सकेंगे।”

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर कहा कि इस मामले में मध्यस्थ के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी और यदि वे बताते हैं कि सामग्री कहाँ से उत्पन्न हुई है तो उस व्यक्ति या इकाई के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी, जिसने सामग्री पोस्ट की है। उन्होंने कहा कि सभी मीडिया प्लेटफॉर्म ने इस नियम को मानने की स्वीकृति दी है।

डीपफेक को लेकर केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सभी महत्वपूर्ण इंटरनेट प्रोवाइडर कंपनियों के साथ एक बैठक की थी। इससे पहले राजीव चंद्रशेखर ने कहा था कि केंद्र सरकार ने 24 नवंबर को गूगल, फेसबुक, यूट्यूब सहित महत्वपूर्ण ऑनलाइन प्लेटफार्मों को तलब किया है। इन सभी को चेतावनी दी गई है कि अगर वे अपनी साइट से डीपफेक कॉन्टेंट नहीं हटाते हैं तो उन पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

इसके पहले आईटी मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव का कहना है कि सरकार अगले 10 दिन के अंदर इसको लेकर कानून लाएगी। वैष्णव ने डीपफेक पर बढ़ती चिंताओं पर कहा था कि इसे रोकने के लिए केंद्र सरकार नया क़ानून लाएगी या पुराने क़ानून में संशोधन करेगी। उन्होंने ऐसे वीडियो बनाने वालों पर कार्रवाई करने की भी बात कही थी।

वैष्णव ने कहा था, “सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्म से यह अपील की गई है कि वह अपने तकनीक का उपयोग करके डीपफेक पर नियंत्रण करें।” उन्होंने कहा कि डीपफेक सोशल मीडिया के जरिए तेजी से फैलते हैं और इनकी जाँच भी नहीं हो पाती है। उन्होंने समाज और लोकतंत्र में विश्वास को बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों पर जल्दी एक्शन लेने की आवश्यकता बताई।

चीन और यूरोपीय यूनियन में कानून

बता दें कि डीपफेक भारत के लिए ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के लिए चुनौती पैदा की है। इससे निपटने के लिए भारत ही नहीं, बल्कि यूरोपीय देश भी कानून बनाने की तैयारी कर रहे हैं। चीन ने तो इसको लेकर कानून जनवरी 2023 से लागू भी कर दिया है। वहीं, यूरोपीय यूनियन इसको लेकर तैयारी कर रहा है।

चीन ने बनाए गए नियम में कहा गया है कि अगर डीपफेक तकनीक से कोई वीडियो बनाया जाता है तो जिसका वीडियो है उसकी अनुमति लेनी जरूरी होगा। अगर कोई डीपफेक वीडियो बनाता है तो उसे बताना होगा कि कंटेंट में इस्तेमाल हुए फोटो या वीडियो से छेड़़छाड़ की गई है। इसको लेकर डिस्क्लेमर लगाना होगा।

वहीं, किसी भी तरह की फेक खबर के उद्देश्य से डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। नियमों को नहीं मानने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। इसकी निगरानी चीन का सायबरस्पेस एडमिनिस्ट्रेशन करता है। चीन में यह कानून 10 जनवरी 2023 से प्रभावी है।

डीपफेक को लेकर यूरोपीय यूनियन ने भी कानून का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव के अनुसार, सोशल मीडिया कंपनियों से ऐसे कंटेंट को अपने प्लेटफॉर्म से हटाने के लिए कहा जाएगा। उन्हें ऐसी जानकारियाँ हटाने के लिए कहा जाएगा, जो भ्रमित करने का काम कर रही हैं। अगर ये प्लेटफॉर्म इन नियमों का पालन नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

इजरायल ने भारत सरकार से की संजय राउत की शिकायत, पत्र लिखकर कहा- उन्हें बताए हम आहत हुए: उद्धव के MP ने यहूदियों के नरसंहार को ठहराया था जायज

हाल ही में शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने हिटलर द्वारा यहूदियों के होलोकॉस्ट अर्थात नरसंहार को जायज ठहराया था। वहीं अब इस मामले में इजरायली दूतावास ने विदेश मंत्रालय और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर शिवसेना नेता संजय राउत की ‘यहूदी विरोधी’ पोस्ट के बारे में शिकायत की है। 

द प्रिंट की खबर के अनुसार, इस मामले में इजरायल ने भारत सरकार से यह अपील की है कि शिवसेना सांसद को बताया जाए कि उनके यहूदी नरसंहार को जायज ठहराने वाले पोस्ट ने उस देश को किस तरह आहत किया है जो हमेशा भारत के साथ खड़ा रहा है। 

इस मामले की जानकारी देते हुए पत्रकार आदित्य राज कौल ने एक्स पर एक पोस्ट करते हुए लिखा, “नई दिल्ली में इजरायली दूतावास ने यहूदी समुदाय के खिलाफ नरसंहार को उचित ठहराने वाली यहूदी विरोधी टिप्पणियों के लिए शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत के खिलाफ विदेश मंत्रालय को कड़े शब्दों में एक वर्बल नोट और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र भेजा है।”

बता दें कि यह मामला दरअसल, 14 नवंबर, 2023 का है। उस दिन शिव सेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने अपने एक्स हैंडल से यहूदियों के खिलाफ हिटलर के नरसंहार को उचित ठहराते हुए एक पोस्ट साझा किया। उन्होंने एक्स हैंडल ‘आर्टिकल19 इंडिया’ की एक पोस्ट शेयर की थी जिसमें समय से पहले जन्मे बच्चों का एक वीडियो शेयर किया गया था और यह दावा किया गया था कि इजरायली सशस्त्र बलों ने इन शिशुओं के इनक्यूबेटर की बिजली काट दी है।

वहीं संजय राउत ने अपने पोस्ट में कहा था कि यहूदियों को हिटलर ने ऐसे ही कार्यों के लिए मार डाला था। उन्होंने पोस्ट शेयर करते हुए कमेंट में यह लिखा था, ”हिटलर को यहूदी समुदाय से इतनी नफरत क्यों थी? क्या यह अब समझ में आ रहा है?”

बता दें कि संजय राउत ने अपने पोस्ट में कहा कि हिटलर ने यहूदियों को नरसंहार में मार डाला क्योंकि उन्होंने ऐसे कृत्य किए थे। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हिटलर द्वारा यहूदियों के नरसंहार को उचित ठहराया। हिटलर ने होलोकॉस्ट में 60 लाख से अधिक यहूदियों की जान ले ली थी, जिसमें उन्हें गैस चैंबर में बंद करके मार दिया गया। हालाँकि, इस पोस्ट के बाद विवाद बढ़ने पर संजय राउत ने पोस्ट हटा दिया था लेकिन तब तक इज़रायली अधिकारियों ने स्क्रीनशॉट ले लिया था। 

गौरतलब है कि आर्टिकल 19 इंडिया ने अपने पोस्ट में लिखा था, ”अल-शिफा अस्पताल में समय से पहले पैदा हुए बच्चे  चीख रहे हैं। जिस इनक्यूबेटर में उन्हें रखा गया था उसकी बिजली इजरायल ने काट दी है। सशस्त्र बलों ने अस्पताल को चारों तरफ से घेर लिया है। अस्पताल के अंदर किसी भी खाद्य पदार्थ, दूध या पानी की अनुमति नहीं है।” पोस्ट में एक वीडियो भी था जिसमें दावा किया गया कि यह अल शिफ़ा अस्पताल का है।

वहीं इस मामले में खबर आई थी कि अल शिफा अस्पताल में 39 बच्चों की मौत नहीं हुई है, बल्कि यह कहा गया था कि ऑक्सीजन और बिजली की कमी के कारण ये खतरे में हैं। जबकि इस मामले में आईडीएफ ने शिफ़ा अस्पताल को ऑक्सीजन और सहायता प्रदान करने की भी पेशकश की थी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

इस मामले में सैन्य प्रवक्ता ने कहा था, “आईडीएफ नागरिकों और हमास आतंकवादियों के बीच अंतर करने की अपनी नैतिक और पेशेवर जिम्मेदारियों को निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। आईडीएफ इनक्यूबेटरों के हस्तांतरण को सुनिश्चित करने के लिए किसी भी विश्वसनीय मध्यस्थ पक्ष के साथ काम करने को तैयार है।”