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हिंदू लगा रहे थे ‘जय माता दी’ के नारे, पाकिस्तानी प्रशासन ने तोड़ दिया हिंगलाज माता का मंदिर: क्रिकेटर दानिश कनेरिया Video शेयर कर बताया

पाकिस्तान में हिंदुओं के धार्मिक स्थलों को तोड़ा जा रहा है। वहाँ के पूर्व क्रिकेटर दानिश कनेरिया ने इस बात की ट्वीट करके जानकारी दी है। उन्होंने बताया है कि अतिक्रमण का हवाला देकर थारपारकर के मिठी में ‘हिंगलाग माता मंदिर’ को ध्वस्त किया गया।

दानिश कनेरिया ने ट्वीट में लिखा, “पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा हिंदू धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई जारी है। मीरपुरखास के अतिक्रमण निरोधक अदालत के आदेश के बाद पाकिस्तान के मिठी, थारपारकर में हिंगलाज माता मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया है।”

अपने दावे के साथ उन्होंने एक वीडियो भी शेयर की। इसमें कुछ हिंदू खड़े होकर जोर-जोर से ‘हिंगलाज माता की जय हो, हिंदू धर्म की जय हो’ जैसे नारे लगा रहे हैं।

बता दें कि पाकिस्तान में हिंदू मंदिरों का अपमान होना नया नहीं है। दानिश कनेरिया ने पिछले साल भी कराची में एक हिंदू मंदिर पर हुए हमले की जानकारी दी थी। इस बार भी वो यही गुहार लगा रहे हैं कि कोई हिंदुओं की पीड़ा सुन ले। लेकिन प्रशासन के कान पर जूँ नहीं रेंग रही।

कुछ अन्य सोशल मीडिया यूजर्स ने भी इस वीडियो को शेयर करके यही दावा किया है। आदित्य राज कौल ने भी बताया है कि सिंध की मीरपुरखास अतिक्रमण निरोधक कोर्ट द्वारा हिंगलाग माता मंदिर को तोड़ने का आदेश दिया गया। आदित्य ने अपने ट्वीट में पूछा कि क्या इस तरीके से पाकिस्तान में किसी मस्जिद के साथ हो सकता है? दुनिया आखिर ऐसे अत्याचारों पर क्यों चुप है।

वीडियो की पड़ताल करते हुए हमें एक पाकिस्तानी का ट्वीट भी मिला। इसमें उसने दावा किया था- “ये कोई ऐतिहासिक मंदिर नहीं है और न ही कोई धार्मिक स्थल। प्लॉट को किसी ने कब्जाया हुआ था जिसने बाद में उस प्रॉपर्टी पर मंदिर बना दिया, जो असल में दूसरे हिंदू की थी। इसीलिए दूसरी पार्टी ने कोर्ट की शरण ली और फैसला आने के बाद अवैध कब्जे को गिरवाया। पाकिस्तानी सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं है।”

कर्नाटक के सरकारी स्कूल में ब्राह्मण छात्रा को अंडा खाने को किया मजबूर: शिकायत के बाद प्रशासन ने मिड डे मील में परोसा जाना कबूला, पर जबर्दस्ती से किया इनकार

कर्नाटक के एक सरकारी स्कूल में एक ब्राह्मण छात्रा को मिड डे मील के दौरान अंडा खाने के लिए मजबूर करने का मामला सामने आया। छात्रा के पिता ने स्कूल के हेडमास्टर और सहायक शिक्षक के खिलाफ शिक्षा विभाग में शिकायत दर्ज कराई है। प्रारंभिक जाँच के बाद प्रशासन ने मिड डे मील में अंडा परोसा जाना तो कबूला है। लेकिन किसी भी छात्र को खाने के लिए मजबूर किए जाने के आरोपों को नकार दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार घटना शिवमोगा जिले के कम्माची गाँव स्थित केपीएस स्कूल का है। पीड़ित बच्ची कक्षा 2 की छात्रा है। इस स्कूल के कक्षा दो में 26 बच्चे पढ़ते हैं। इनमें से 10 शाकाहारी हैं। बच्ची के पिता वी श्रीकांत भी इसी स्कूल में शिक्षक हैं। कई रिपोर्टों में यह स्कूल होसनगरा तालुका के अमृता गाँव में बताया गया है।

छात्रा की पिता की शिकायत के बाद ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर और मिड डे मील परिचारिका ने गुरुवार (23 नवंबर 2023) को स्कूल का दौरा किया। पीड़ित छात्रा के पिता ने शिकायत शिक्षा मंत्री मधु बंगारप्पा, शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव, उप निदेशक और स्थानीय विधायक को भी दी है।

शिकायत में छात्रा के पिता वी श्रीकांत ने कहा कि ब्राह्मण समुदाय से आने वाली उनकी बेटी को स्कूल में जबरदस्ती अंडा खाने के लिए मजबूर किया गया। सात साल की इस बच्ची ने अपने पिता से शिकायत की थी कि शिक्षक पुट्टास्वामी ने उससे कहा था कि अच्छी सेहत के लिए अंडे बहुत ज़रूरी हैं।

गौरतलब है कि राज्य सरकार की तरफ से मिड डे मील में दो बार अंडे और केले बाँटे जाते हैं। श्रीकांत का दावा है कि उनकी बेटी ने कभी मांसाहारी भोजन नहीं किया है, लेकिन उसे स्कूल में अंडा खाने के लिए मजबूर किया गया। शिकायत में कहा है कि उन्होंने स्कूल के अधिकारियों को बताया था कि उनकी बेटी शाकाहारी है, इसलिए उसे अंडे की जगह चिक्की दिया जाए।

उन्होंने कहा है कि इसके बाद भी पुट्टास्वामी ने कक्षा को बताया कि अंडे सेहत के लिए अच्छे हैं। अंडा खाने बाद उनकी बेटी बीमार पड़ गई और मानसिक रूप से परेशान है। इससे उनके परिवार की धार्मिक मान्यताओं को भी ठेस पहुँची है।

श्रीकांत का कहने है कि शिक्षक पुट्टस्वामी ने इसके लिए खेद जताया है। उन्होंने कहा, “मेरा उनसे कोई निजी दुश्मनी नहीं है। मैं इस मुद्दे को खींचना नहीं चाहता।” उधर इस मामले पर शिक्षा विभाग के सीनियर ऑफिसर का कहना है, “प्रारंभिक जाँच में सामने आया है कि ये घटना मिड डे मील परोसे जाने के दौरान हुई। छात्रों का एक समूह भोजन के लिए एक पंक्ति में बैठा था। तभी संबंधित शिक्षक ने छात्रों से पूछा कि कौन अंडे खाना पसंद करेगा? ऐसा लगता है कि इस खास बच्चे ने भी अपने बाकी सहपाठियों से हाथ खड़ा कर दिया थे और इसलिए उसे अंडा परोसा गया। लेकिन, खास तौर पर इस बच्चे या किसी भी छात्र को अंडे खाने के लिए मजबूर नहीं किया गया।”

शिवमोगा के सार्वजनिक निर्देश उप निदेशक परमेश्वरप्पा सीआर के मुताबिक, “हमने इस मुद्दे को बहुत गंभीरता से लिया है। लेकिन हमें मिली जानकारी के आधार पर, छात्र को जबरदस्ती अंडा नहीं खिलाया गया था। हालाँकि, हम दी गई जाँच रिपोर्ट की समीक्षा करेंगे। यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया तो खंड शिक्षा अधिकारी संबंधित शिक्षक के खिलाफ गंभीर कार्रवाई करेंगे।”

आयरलैंड ने जिस अल्जीरियाई को दी ‘शरण’, उसने ही दंगों की आग में झोंका: स्कूल के बाहर बच्चों पर चाकू से किए हमले

आयरलैंड की राजधानी डबलिन में गुरुवार (23 नवंबर,2023) को स्कूल के बाहर चाकूबाजी के हमले में 3 बच्चों और एक महिला सहित 4 लोगों के घायल होने के बाद वहाँ की सड़कों पर हिंसक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। हमला करने वाले की पहचान 50 साल के अल्जीरियाई अप्रवासी के तौर पर हुई है।

इस अप्रवासी के हमले में घायल हुई 5 साल की एक बच्ची और 30 साल की एक औरत की हालत बेहद गंभीर है। हमले के बाद से आयरलैंड के लोगों ने आप्रवासन केंद्रों और बसों को जलाना शुरू कर दिया है। अल्जीरियाई अप्रवासी हिरासत में है, लेकिन आयरिश अधिकारियों का दावा है कि उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है।

इस सबके बीच आयरिश नागरिकों ने प्रवासियों खास तौर से से मध्य पूर्व से आने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की माँग की है। यहाँ के लोग इसलिए नाराज है कि बड़े पैमाने पर आप्रवासन की वजह से होने वाली परेशानियों और जातीय तनाव को आयरिश लिबरल सरकार वर्षों से अब-तक नजरअंदाज करती आ रही है।

यह घटना स्थानीय समयानुसार लगभग दोपहर 1.40 बजे पार्नेल स्क्वायर ईस्ट की भीड़ से भरी रहने वाली ओ’कोनेल स्ट्रीट के पास हुई। यहाँ 5 साल की बच्ची और 30 साल की महिला को चाकू मारने के बाद इस अल्जीरियाई अप्रवासी ने पास के एक स्कूल के बाहर एक छह साल की लड़की और एक 5 साल के लड़के को चाकू मार कर घायल किया।

इस चाकूबाजी के हमले के बाद घटना स्थल के पास उथल-पुथल मच गई क्योंकि प्रदर्शनकारी इलाके में जमा हो गए। इसके बाद वहाँ शाम 6 बजे से पुलिस और भीड़ के बीच हिंसक झड़पें ही शुरुआत हुई। आयरिश लोगों की भीड़ पूरे शहर में हिंसा पर उतर आई।

भीड़ ने गाड़ियों में आग लगाई। दुकानों में भी आगजनी की। अधिकारियों ने इससे निपटने के लिए राइट शील्ड और डंडों का इस्तेमाल किया गया। सोशल मीडिया पर भी आयरिश लोग जमकर अपने गुस्से का इजहार कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर ‘आयरलैंड बिलोंग टू आयरिश’ के हैशटैग चल रहे हैं।

उन्होंने सड़कों पर विरोध कर मोर्चा संभाल लिया है। वो यहाँ शरणार्थियों के शक्ल में आए लोगों के उनके बच्चों पर हमला करने और सभी तरह के अपराध करने से तंग आ चुके हैं और गुस्से में हैं।

वहीं इस बीच आयरलैंड के प्रधानमंत्री ने लियो वराडकर इन हालातों से निपटने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनात करने की बात कही है। पुलिस कमिश्नर ड्रू हैरिस ने इस हिंसा के लिए उन्मादी गुंडे गुट को जिम्मेदार ठहराया है।

इस सबके बीच डबलिन में गुस्से का माहौल है, क्योंकि लोग बच्चों पर चाकू से हमला करने की घटना के बाद जोर-शोर से आप्रवासन के खिलाफ कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। वहाँ लोगों ने आव्रजन केंद्र में आग लगा दी। पुलिस पर भी हमला किया। अप्रवासियों की कुछ संपत्तियों पर हमला किया गया।

हालात यहाँ तक जा पहुँचे हैं कि आयरिश सरकार ने पुलिस की मदद के लिए सेना को बुलाया है। इस बीच आयरलैंड के नेशलिस्ट संगठन सिन फेन पार्टी की नेता सिन फीन मैरी लू मैकडोनाल्ड ने कहा है कि चाकूबाजी से आयरिश सदमे में और डरे हुए हैं।

ब्रिटेन फर्स्ट पार्टी के नेता पॉल गोल्डिंग भी खुल के अपने लोगों के समर्थन में उतर आए हैं। घटना के बाद इलाके में मौजूद लेबर पार्टी की सीनेटर मैरी शेरलॉक ने भी इसकी हमले की निंदा की है।

अनाथों से तालिबानी सलूक किया उजागर तो भड़की कर्नाटक सरकार, NCPCR अध्यक्ष के खिलाफ वारंट: बोले प्रियांक कानूनगो- यतीमखाने में ताला लगेगा

कर्नाटक सरकार ने गुरुवार (23 नवंबर 2023) को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो के खिलाफ वारंट जारी किया है। बताया जा रहा है बेंगलुरु में एक यतीमखाने की विजिट के दौरान प्रियांक कानूनगो ने वहाँ के बच्चों की हालत देख उसकी तुलना तालिबानी जिंदगी से कर दी थी। उसी से नाराज होकर कर्नाटक सरकार ने एक शिकायत पर यह कदम उठाया।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, उसी यतीमखाने के एक सदस्य की शिकायत पर कर्नाटक पुलिस ने प्रियांक कानूनगो के खिलाफ केस को दर्ज किया है। एनसीपीसीआर ने इस एफआईआर के बाद बयान में बताया कि 19 नवंबर प्रियांक कानूनगो ने जिला बाल संरक्षण अधिकारी और अन्य अधिकारियों के साथ एक अवैध यतीमखाने में छापेमारी की थी, जिसका नाम दारुल उलूम सैय्यादिया यतीम खाना है। इस छापेमारी में कई अनियमतताएँ पाईं गई थीं।

एनसीपीसीआर का इस एफआईआर दर्ज होने पर कहना है कि सरकार आयोग की आवाज को दबाना चाहती है जो कि सिर्फ गरीब बच्चों के अधिकार की बात करता है। यतीमखाने में अपने औचक निरीक्षण के बाद उन्होंने बताया था कि कैसे पूरे यतीम खाने में ठूँसकर 200 बच्चों को रखा गया है। इनमें से 8-8 बच्चे तो 100 वर्ग फिट के 5 कमरों में रहते हैं जबकि कॉरिडोर में 16 बच्चे रहते हैं। बाकी बचे 50 बच्चों को मस्जिद के नमाज़ पढ़ने वाले 2 अलग-अलग हाल में रात को सुलाया जाता हैं। ये सभी बच्चे दिन भर इन्हीं नमाज़ वाले हाल में रहकर मदरसे की इस्लामिक दीनी तालीम लेते हैं।

एनसीपीसीआर अध्यक्ष बोले कि छापे के दौरान यतीमखाने में मौजूद लोगों ने उन्हें बताया कि बच्चों को स्कूल नहीं भेजा जाता उन्हें वहीं शिक्षा दी जाती है जो 200 साल पहले दी जाती थी। इतना ही नहीं, वहाँ बच्चों के खेलने का कोई सामान तक नहीं है और न ही कोई टीवी है। निरीक्षण के वक्त कई छोटे बच्चे दिखे जो डरे हुए थे। बस उन्हें सारे वक्त मस्जिद के अंदर रखा जाता है। एक तरह से ये बच्चे मध्ययुगीन तालिबानी जीवन जी रहे हैं। इनके हिस्से में जैसे संविधान में लिखा जीवन है ही नहीं।

प्रियांक कानूनगो कहते हैं कि इस यतीमखाने के छापेमारी के बाद जब आयोग ने नोटिस जारी किया तो कर्नाटक सरकार ने उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया। वो लोग हमारी आवाज को दबाना चाहते हैं। अगर हम गरीब बच्चों के अधिकार की बात करेंगे तो वो इसे मजहब के शीशे से देखेंगे। वो आयोग को दबाना चाहते हैं। उन्हें समझना होगा कि उनके दाँव-पेंच काम नहीं आने वाले। उन्हें इस मामले में एक्शन लेना ही होगा।

बता दें कि इस यतीमखाने के निरीक्षण के बाद एनसीपीसीआर ने कर्नाटक सरकार की क्लास लगाई थी। नका कहना है कि ये राज्य सरकार की लापरवाही का सुबूत और देश के संविधान का उल्लंघन है। आयोग ने इस पर संज्ञान लेते हुए राज्य के चीफ़ सेक्रेटरी को नोटिस जारी किया था। उनसे 7 दिन के भीतर कार्रवाई करके मामले में रिपोर्ट देने को बोला गया था। इसके साथ ही ऐसा नोटिस हर राज्य के मुख्य सचिवों को भेजा गया था ताकि हर अवैध यतीमखाने बंद करवाने पर कार्रवाई हो सके।

चंद्रयान मिशन का मजाक उड़ाने वाले ऐक्टर प्रकाश राज का घोटाले से संबंध, ₹100 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने पूछताछ के लिए बुलाया

हिंदू विरोधी बयानों के लिए कुख्यात दक्षिण भारतीय अभिनेता प्रकाश राज को पोंजी स्कीम घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने समन जारी किया है। इस घोटाले के संबंध में ED उनसे सवाल-जवाब करेगी। ED ने त्रिची स्थित एक ज्वैलर्स ग्रुप के खिलाफ पोंजी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रकाश राज को अगले सप्ताह चेन्नई में ED कार्यालय में पेश होने के लिए कहा है।

ED ने तमिलनाडु के त्रिची स्थित प्रणव ज्वेलर्स के यहाँ 20 नवंबर 2023 को छापा मारा था। प्रणव ज्वेलर्स की एडवरटाइजिंग प्रकाश राज ही करते थे। PMLA के कहत प्रणव ज्वैलर्स के यहाँ छापेमारी में एजेंसी को कई संदिग्ध दस्तावेज मिले हैं, जिनमें संदिग्ध लेनदेन की जानकारी है। रेड में ED ने 23.70 लाख रुपए नकद एवं लेनदेन और 11.60 किलोग्राम सोने के गहने भी जब्त किए हैं।

त्रिची की आर्थिक अपराध शाखा ने प्रणव ज्वेलर्स के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इसके आधार पर ED ने PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है। इस FIR में आरोप है कि प्रणव ज्वेलर्स ने मोटा रिटर्न देने का वादा करके जनता से एक पोंजी स्कीम (गोल्ड स्कीम) में निवेश करवाया। हालाँकि, बाद में प्रणव ज्वेलर्स अपने वादे से मुकर गया और तमिलनाडु में तमाम शोरूम रातोंरात बंद कर दिए।

प्रणव ज्वैलर्स के चेन्नई, इरोड, नागरकोइल, मदुरै, कुंबकोणाम और पुदुच्चेरी जैसे शहरों में बड़े-बड़े शोरूम थे। वहाँ इस गोल्ड स्कीम के नाम से ज्वैलर्स ने लोगों से एक लाख रुपए से लेकर एक करोड़ रुपए तक निवेश कराए थे। बाद में निवेश करने वाले सभी लोग ठगी के शिकार बन गए।

जनता से जुटाए गए लगभग 100 करोड़ रुपए प्रणव ज्वैलर्स से जुड़े लोगों ने कई शेल कंपनियों के जरिए ठिकाने लगाए थे। इसकी जानकारी ED को मिली है। जाँच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय को पता चला है कि प्रणव ज्वैलर्स और उससे जुड़े लोगों ने धोखाधड़ी से हासिल किए इन पैसों को दूसरी शेल कंपनी में डायवर्ट कर दिया था।

ऐक्टर प्रकाश राज इस प्रणव ज्वैलर्स के ब्रांड एम्बेसडर थे। कंपनी के विज्ञापनों में उन्हीं का चेहरा रहता था। जब प्रणव ज्वैलर्स की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ तो प्रकाश राज ने चुप्पी साध ली। इसके बाद वे ED की रडार पर आ गए। अब प्रवर्तन निदेशालय द्वारा उन्हें समन कर पूछताछ के लिए बुलाया गया है।

केंद्रीय एजेंसी ED ने बुधवार (22 नवंबर 2023) को इस मामले में बयान दिया था। अपने बयान में ED ने कहा था कि पुलिस शिकायत के अनुसार प्रणव ज्वैलर्स और अन्य ने उच्च रिटर्न के वादे के साथ सोने की निवेश योजना की आड़ में जनता से 100 करोड़ रुपये एकत्रित किए हैं।

प्रकाश राज ने पिछले दिनों चंद्रयान-3 मिशन का मजाक उड़ाया था। उन्होंने इसको लेकर सोशल मीडिया पर एक कार्टून शेयर किया था। उनके इस पोस्ट को लेकर कर्नाटक के बगलाकोट जिले के बनहट्टी पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ हिंदू संगठनों के लोगों ने केस भी दर्ज कराया गया था।

दरअसल, दक्षिण भारत की अधिकतर फिल्मों में विलेन का रोल करने वाले अभिनेता ने 20 अगस्त 2023 को माइक्रोब्लॉगिंग साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर शर्ट और लुंगी पहने चाय डालते हुए एक व्यक्ति का कैरीकैचर शेयर किया था। इसके साथ ही उन्होंने लिखा था, “चंद्रयान से आई पहला तस्वीर …#विक्रम लैंडर,#जस्टआस्किंग”। इसे ट्वीट के बाद उन्हें भारी आलोचना झेलनी पड़ी थी। 

NCERT ने स्कूली किताबों में रामायण, महाभारत पढ़ाने के दावों से किया इनकार, प्रोफ़ेसर आइजैक की सिफारिशों को बताया उनकी निजी राय

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने रामायण और महाभारत को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने वाली खबरों के दावों को सिरे नकार दिया है। दरअसल, इससे पहले ऐसी खबर आई थी कि NCERT के पैनल ने स्कूलों में बच्चों को रामायण और महाभारत महाकाव्यों को पढ़ाने की सिफारिश की है।

मीडिया रिपोर्टों में कहा गया था कि यह सिफारिश एक उच्च-स्तरीय पैनल ने की थी। इस पैनल के अध्यक्ष और इतिहासकार रिटायर्ड प्रोफेसर सीआई आईजैक के नेतृत्व वाली सामाजिक विज्ञान कमेटी ने कथित तौर पर इतिहास के पाठ्यक्रम को तीन की जगह चार खंडों में करने के साथ ही मौजूदा पाठ्यक्रम में कई संशोधनों का प्रस्ताव दिया था।

अब NCERT ने मीडिया में आई इन रिपोर्ट्स का खंडन किया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, NCERT ने कहा है कि ऐसी कोई कमेटी नहीं है और प्रोफेसर आईजैक ने जो कुछ भी कहा है वह उनकी निजी राय है। शिक्षा निकाय ने उनके ऐसे दावों पर सख्त एतराज जताते हुए इसे सिरे से नकार दिया है।

गौरतलब है कि रिटायर्ड प्रोफेसर आईजैक ने कहा था, “शास्त्रीय काल के तहत, हमने सिफारिश की है कि भारतीय महाकाव्यों-रामायण और महाभारत को पढ़ाया जाए। हमने सिफारिश की है कि छात्रों को राम कौन थे और उनका उद्देश्य क्या था और थोड़ा महाकाव्य के बारे में पता हो।”

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ये सिफारिशें जुलाई में बनाई गई 19 सदस्यीय राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और शिक्षण शिक्षण सामग्री समिति (एनएसटीसी) को भेजी गई थीं। यह समिति हर कक्षा के लिए पाठ्यक्रम, पाठ्यपुस्तकें और शिक्षण सामग्री बनाने की प्रभारी है। हालाँकि, रामायण और महाभारत को पाठ्यक्रम में लाने सम्बन्धी कोई भी आधिकारिक निर्णय अभी नहीं हुआ है।

एनसीईआरटी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के मुताबिक स्कूल पाठ्यक्रम को संशोधित कर रहा है। इसके मुताबिक नई एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकें आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए तैयार होने का अनुमान लगाया गया है।

CM अशोक गहलोत के विधानसभा का खस्ताहाल स्कूल, सच दिखाने गए ‘शाइनिंग इंडिया’ के पत्रकार से कॉन्ग्रेस पार्षद ने की हाथापाई: वीडियो वायरल

राजस्थान में चुनावी सरगर्मी तेज है। ऐसे में राजस्थान के CM अशोक गहलोत की विधानसभा सरदार पुरा में इंग्लिश मीडियम स्कूलों का सच दिखाने गए यू ट्यूब चैनल ‘शाइनिंग इंडिया’ के एक पत्रकार से कॉन्ग्रेस पार्षद और उनके द्वारा बुलाए गए कुछ लोगों द्वारा कैमरे के सामने ही हाथापाई की गई। 

दरअसल, पत्रकार मुख्यमंत्री के विधानसभा के एक स्कूल का सच दिखा रहा था, जिससे कॉन्ग्रेस पार्षद भड़क गया। वहीं सरदार पुरा में जिस खस्ताहाल इंग्लिश मीडियम बालिका विद्यालय का हाल कैमरे पर दिखाया जा रहा था वह CM अशोक गहलोत के घर से मात्र 2 किलोमीटर की दूरी पर बताया जा रहा है। 

वहीं पत्रकार से हाथपाई करने वाले पार्षद का नाम प्रकाश देशबंधु बताया जा रहा है जिन्होंने महिलाओं और बच्चों संग मिलकर पत्रकार प्रभात रंजन मिश्रा पर हमला किया। इसका एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें कैमरे के सामने ही पार्षद पत्रकार को धक्का दे रहा है। यहाँ तक कि स्कूल के बाहर पत्रकार पर पत्थर के टुकड़े भी फेंके गए। 

इस घटना का वीडियो शाइनिंग इंडिया ने अपने एक्स हैंडल से पोस्ट किया है। शाइनिंग इंडिया ने कॉन्ग्रेस पार्षद द्वारा पत्रकार से हाथापाई और धक्का दिए जाने का वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, “विधानसभा चुनाव के दौरान राजस्थान सरकार के शिक्षा मॉडल की सच्चाई दिखाने गए हमारे पत्रकार प्रभात रंजन के साथ जोधपुर दक्षिण के वार्ड नंबर 69 के पार्षद प्रकाश देशबंधु ने कैमरे के सामने इतनी अराजकता की तो ऑफ़ कैमरा राज्य की क्या व्यवस्था होगी?”

अपने इस पोस्ट के साथ ही पत्रकार का एक ही सवाल था कि आखिर अशोक गहलोत क्या छुपाना चाहते थे?  क्योंकि पत्रकार स्कूल के बाहर की गंदगी, बंद टॉयलेट के साथ वहाँ की खस्ताहाल व्यवस्था को दिखा रहा था। जिसका कॉन्ग्रेस के पास कोई जवाब नजर नहीं आ रहा है बल्कि कॉन्ग्रेस पार्षद बीजेपी एजेंट कहते हुए मार-पिटाई पर उतर आया। 

आप ऊपर वह पूरी रिपोर्ट भी देख सकते हैं कि किस तरह से शाइनिंग इण्डिया के पत्रकार ने वहाँ का सच दिखाना चाहा और कैसे कॉन्ग्रेस पार्षद द्वारा दुर्व्यवहार किया गया। 

‘भारत की चेतना पर प्रहार हुआ तो कोई योद्धा बना तो कोई संत…’: मथुरा में बोले पीएम मोदी- मीराबाई रूढ़ियों को तोड़ने वाली समाज सुधारक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार (23 नवंबर 2023) को कृष्ण भक्त मीराबाई के 525वें जन्मोत्सव पर आयोजित ब्रज रज महोत्सव में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने लोगों को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की अनन्य भक्त संत मीराबाई का जीवन सभी के लिए प्रेरणा-शक्ति है। पीएम ने कहा कि मथुरा की पावन धरा पर संत मीराबाई की 525वीं जन्म-जयंती के उत्सव में शामिल होना सौभाग्य की बात है।

ब्रज रज में शामिल होकर पीएम ने कहा, “मेरा सौभाग्य है कि मुझे ब्रज का दर्शन करने का सौभाग्य मिला है। यहाँ वही आता है, जिसे श्रीकृष्ण और श्रीजी बुलाते हैं। यह कोई साधारण धरती नहीं है। ब्रज लालजी और लाडली जी की प्रेम का साक्षात अवतार है। ये ब्रज ही है, जिसका रज भी पूरे संसार में पूजनीय है। इसके रज-रज में राधा रानी और कण-कण में श्रीकृष्ण समाए हुए हैं।”

मीराबाई के चरणों में भी नमन करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “भगवान कृष्ण से लेकर मीराबाई तक ब्रज का गुजरात से एक अलग ही रिश्ता रहा है। ये मथुरा के कान्हा गुजरात जाकर ही द्वारकाधीश बने थे। राजस्थान से आकर मथुरा में प्रेम की धारा बहाने वाली मीरा जी भी अपना अंतिम समय द्वारका में ही बिताया था। मुझे तो माँ गंगा बुलाया और भगवान कृष्ण की कृपा से 2014 से ही आपके बीत आकर बच गया।”

पीएम मोदी आगे बोले, “मीराबाई का जन्मोत्सव नर और नारायण में, जीव और शिव में, भक्त और भगवान में अभेद मानने वाले विचार का भी उत्सव है। मीराबाई राजस्थान की उस वीरभूमि में जन्मी थीं, जिसने देश के सम्मान और संस्कृति के लिए असीम बलिदान दिए। मीराबाई ने भक्ति और आध्यात्म की भक्ति धारा को बहाकर चेतना को सींचा था।”

राजस्थान के बलिदान को याद करते हुए पीएम ने कहा, “यह महोत्सव मीराबाई के प्रेम परंपरा और पराक्रम की भी याद दिलाता है। उस समय मीराबाई के परिवार और राजस्थान ने अपना सब कुछ झोंक दिया था। हमारी आस्था की केंद्रों की रक्षा के लिए ये लोग दिवार बनकर खड़ा रहे, ताकि भारत की आत्मा को, भारत की चेतना को सुरक्षित रखा जा सके। यह महोत्सव प्रेम परंपरा के साथ शौर्य की परंपरा की भी याद दिलाता है।”

उन्होंने भारत को नारी-शक्ति का पूजन करने देश बताया। कृष्ण के पहले भी जब राधा का नाम लगता है, तभी उनका नाम पूरा होता है। मीराबाई का हवाला देते हुए पीएम ने कहा कि इस धरती और आसमान के बीच जो कुछ दिखाई देता है, उसका अंत निश्चित है। पीएम ने कहा कि भारत के मुश्किल समय ने मीराबाई ने समाज को रास्ता दिखाया और संत रविदास को अपना गुरु माना। मीराबाई मध्य काल की एक महान महिला के अलावा एक महान समाज सुधारक रही हैं।

मीराबाई को देश का प्रकाशपूंज बताते हुए पीएम ने कहा कि उन्होंने समाज की रूढ़ियों से मुक्त होने की दृढ़ता दिखाई। भारत की चेतना पर जब-जब प्रहार हुआ, तब-तब भारत के किसी ना किसी कोने में एक प्रकाशपूंज पैदा हुआ और समाज को रास्ता दिखाया। कोई योद्धा बना तो कोई संत बना। इन्होंने भारत को गढ़ा। बता दें कि मीराबाई राजस्थान की एक राजकुमारी थीं और मेवाड़ के राजकुमार भोजराज के साथ उनकी शादी हुई थी। वह कृष्ण भक्ति के लिए विख्यात हैं।  

मथुरा में मीराबाई की स्मृति में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में एक डाक टिकट और 525 रुपए का एक खास स्मारक सिक्का भी जारी किया। 525 रुपए की मूल्य का यह पहला सिक्का है। इस खास सिक्के का कुल वजन 35 ग्राम है। इसमें 50 प्रतिशत चाँदी, 40 प्रतिशत ताँबा और 10 प्रतिशत जस्ता का मिश्रण है। इस सिक्के के एक तरफ अशोक स्तम्भ बना है, जिसके नीचे ₹525 लिखा है।

सिक्के के दूसरी तरफ मीराबाई का चित्र है। इस चित्र के ऊपर हिंदी में और नीचे अंग्रेजी में ‘संत मीराबाई की 525वीं जयंती’ लिखा है। मीराबाई चित्र के दाईं ओर 1498 और बाईं ओर 2023 लिखा है। पीएम को मीराबाई पर आधारित करीब पाँच मिनट की डाक्यूमेंट्री भी दिखाई गई। बता दें कि मीराबाई को भगवान कृष्ण की भक्ति के लिए जाना जाता है। उन्होंने कई भजनों, छंदों और ग्रंथों की रचना की है।

इससे पहले पीएम मोदी ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर जाकर गर्भगृह में पूजा-अर्चना और दर्शन की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यक्रम को देखते हुए श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रही। जगह-जगह पुलिस फोर्स तैनात है और सादे कपड़ों में खुफिया तंत्र निगाह बनाए हुए हैं। आने-जाने वालों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। परिसर में चारों तरफ एवं शाही ईदगाह मस्जिद क्षेत्र में भी पुलिस अलर्ट रही।

5 जवानों के हत्यारे लश्कर कमांडर कारी सहित दो आतंकियों को सुरक्षाबलों ने किया ढेर, मुठभेड़ में हुए 4 जवान बलिदान

जम्मू-कश्मीर के राजौरी के कालाकोट जंगलों में चल रही मुठभेड़ में गुरुवार (23 नवंबर, 2023) को सुरक्षाबलों ने दो आतंकियों को मार गिराया है। इनमें से एक लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडर कारी है। बता दें कि आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच बुधवार (22 नवंबर,2023) से ये मुठभेड़ चल रही है।

बता दें कि राजौरी के कालाकोट में चल रही मुठभेड़ में अब तक दो अफसरों सहित 4 सैनिक शहीद हो चुके हैं। सुरक्षा बलों ने रात भर रुकने के बाद गुरुवार सुबह दोबारा से मुठभेड़ शुरू की। इसी दौरान ये दो पाक आतंकी ढेर किए गए।

कारी डांगरी गाँव में 1 जनवरी में हिंदुओं की हत्या के साथ ही कांडी ऑपरेशन में 5 जवानों की हत्या का मास्टर माइंड था। वह बीते एक साल से राजौरी के इलाके का बारीकी से निरीक्षण कर रहा था।

जानकारी के मुताबिक, दोनों आतंकियों को जम्मू-कश्मीर के राजौरी और पुंछ में फिर से आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए भेजा गया था। मारे गए दोनों आतंकी आईईडी बनाने में और उसे चलाने में माहिर थे। इसके अलावा दोनों ही एक्सपर्ट स्नाइपर थे और दोनों को गुफाओं में छिपने में भी महारत हासिल थी।

जम्मू-कश्मीर में तैनात डिफेंस पीआरओ के मुताबिक, वह एक प्रशिक्षित स्नाइपर भी था। उसे पाकिस्तान और अफगानिस्तान में ट्रेनिंग मिली थी।। सेना और पुलिस ने संयुक्त रूप से एक खुफिया इनपुट के बाद कालाकोट के जंगलों में ये ऑपरेशन शुरू किया गया था।

दरअसल, सुरक्षा बलों को कालाकोट के जंगलों में खतरनाक आंतकियों के छुपे होने की सूचना मिली थी। इसके बाद इस इलाके को घेर लिया गया था। जंगलों से घिरे इस इलाके में आतंकियों पर काबू पाने में समस्याएँ आती है।

जम्मू-कश्मीर में पीर पंजाल के जंगल सुरक्षा बलों के लिए हमेशा से ही चुनौती पैदा करते रहे हैं। अक्सर आतंकी इन जंगलों में ही अपना ठिकाना बनाते हैं। इस वजह से इन आतंकियों को पकड़ने और मार गिराने में मुश्किल पेश आती हैं। 

पंजाब में डॉक्टरों ने दो जिंदा मरीजों को कब्रिस्तान में फेंकवाया, फिर भागने की दर्ज करा दी शिकायत: HIV+ दोनों पीड़ितों में से एक की मौत

मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी शासित पंजाब के एक सरकारी अस्पताल में जिंदा मरीजों को कब्रिस्तान और सुनसान सड़क पर फेंकवाने का शर्मनाक मामला सामने आया है। डॉक्टरों की इस अमानवीय करतूत के कारण एक मरीज की मौत हो गई है। दोनों मरीज लावारिस और HIV पॉजिटिव बताए जा रहे हैं।

कहा जा रहा है कि अस्पताल के डॉक्टरों ने इसके लिए एंबुलेंस चालक को बुलाया इन दो मरीजों को कब्रिस्तान के पास फेंकने के लिए कहा था। इसके लिए डॉक्टरों ने एंबुलेंस चालक को 400 रुपए भी दिए थे। दरअसल, जिन दो मरीजों को फेंका गया वे एड्स (HIV) से पीड़ित थे। अस्पताल में उनकी देखभाल करने वाला भी कोई व्यक्ति नहीं था।

जिस जगह पर इन दोनों मरीजों को फेंका गया था, वहाँ ठंड आदि से एक मरीज की मौत हो गई। वहीं, दूसरा मरीज कब्रिस्तान में मिला। उसे वहाँ से उठाकर फिर से मानसा अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल के इस कारनामे पर इलाके के लोगों में आक्रोश है। समाजसेवियों ने इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की माँग की है।

बताया जा रहा है कि दोनों मरीज HIV पॉजिटिव थे। वे पीलिया और टीबी से पीड़ित थे। डॉक्टर इनका इलाज भी ठीक से नहीं कर रहे थे और इनसे छुटकारा पाने चाहते थे। इसके लिए डॉक्टोरं ने एंबुलेंस चालक को पैसे देकर दोनों मरीजों के फेंकने के लिए कहा। मरीजों को बाहर अलग-अलग जगहों पर फेंकवाने के बाद डॉक्टरों ने इन मरीजों के अस्पताल से भागने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

मरीजों को सुनसान जगह पर छोड़ने वाले एम्बुलेंस चालक ने कहा कि अस्पताल के डॉक्टर आशू और मैडम गुरविंदर कौर ने उनसे मरीज को कहीं छोड़ने के लिए कहा था। इसके लिए आशू ने 400 रुपए दिया था। अब सरकारी अस्पताल के डॉक्टर इस मामले में कुछ भी कहने से इनकार कर रहे हैं। मानसा के सीएमओ ने इस घटना के लिए एक जाँच कमेटी बनाने की बात कही है।