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‘अमीर कैसे बनें, आमिर खान के बारे में जानिए’: अब रतन टाटा हुए डीपफेक के शिकार, सट्टेबाजी को प्रमोट करते दिखाया

AI तकनीक पर आधारित डीपफेक (DeepFake) अब दुनिया भर के लोगों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। रश्मिका मंदाना, कैटरीना कैफ, सारा तेंदुलकर, ऐश्वर्या राय, काजोल सहित विभिन्न हस्तियों के बाद अब रतन टाटा का डीपफेक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में भारत के प्रसिद्ध उद्योगपति रतन टाटा को ऑनलाइन सट्टेबाजी का समर्थन करते दिखाया गया है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में रतन टाटा को ऑनलाइन सट्टेबाजी कोच का समर्थन करते हुए दिखाया गया है। इसके साथ ही आमिर खान नाम के एक शख्स के टेलीग्राम चैनल से जुड़ने के लिए लोगों से कहा जा रहा है। इसके माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को फँसाने की कोशिश की जा रही है।

इस फेक वीडियो में रतन टाटा कहते हुए दिख रहे हैं, “लोग मुझसे हर समय पूछते रहते हैं कि अमीर कैसे बनें और मैं उन्हें अपने दोस्त आमिर खान के बारे में बताना चाहता हूँ। भारत में कई लोगों ने एविएटर खेलकर लाखों रुपए कमाए हैं। उनके प्रोग्रामरों, विश्लेषकों, AI और Chat GPT को धन्यवाद कि इसमें जीतने की संभावना 90 प्रतिशत है।”

इस फर्जी वीडियो में रतन टाटा का वीडियो प्रयोग किया गया है और उसमें छेड़छाड़ करके उसे स्कैमर द्वारा अपने प्रयोग के लिए बनाया गया है। रतन टाटा का यह मूल वीडियो संभवत: जून 2015 का है। इसमें वे एचईसी पेरिस बिजनेस स्कूल में मानद डिग्री प्राप्त करने के बाद बोलते हुए नजर आए थे।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आमिर खान एक घोटालेबाज है, जो @aviator_ultrawin नाम से टेलीग्राम चैनल चलाता है। आमिर खान का दावा है कि लोग उसका ‘एविएटर’ बेटिंग गेम खेलकर हर दिन कम से कम एक लाख रुपए कमा सकते हैं। गेम खेलने के लिए वह यूजर्स से ‘एविएटर’ पर रजिस्ट्रेशन करने के लिए बोलता है।

दिए गए लिंक पर क्लिक करने के बाद ‘1विन’ नाम का एक अलग खेल सट्टेबाजी और कैसीनो प्लेटफ़ॉर्म खुलता है। यहाँ पर यूजर का फोन नंबर और ईमेल आईडी माँगा जाता है। आमतौर पर मोबाइल और ईमेल आईडी जैसी व्यक्तिगत जानकारी हासिल करने के लिए घोटालेबाजों द्वारा इस तरह की रणनीति अपनाई जाती है।

बता दें कि कुछ दिन पहले ही बॉलीवुड अभिनेत्री काजोल का एक अश्लील वीडियो सामने आया था। डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल करके बनाए गए इस वीडियो में वो कैमरे के सामने कपड़े बदलती नजर आ रही हैं। दरअसल, रोजी ब्रीन नाम की एक सोशल एंफ्लुएंसर का वीडियो में रोजी के चेहरे से छेड़छाड़ करके काजोल का चेहरा लगा दिया गया था।

इसी तरह बॉलीवुड अभिनेत्री रश्मिका मंदाना का वीडियो शेयर किया गया था। इसमें जारा पटेल नाम की एक ब्रिटिश-इंडियन इन्फ्लुएंसर के वीडियो में छेड़छाड़ करके रश्मिका का चेहरा लगा दिया गया था। जारा अक्सर अंतरंग वस्त्रों में तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड करती रहती हैं। इसके बाद रश्मिका ने दिल्ली पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

रश्मिका मामले के बाद केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं टेक्नोलॉजी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने भी कहा था कि इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे सभी डिजिटल नागरिकों की सुरक्षा एवं भरोसे को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। पीएम मोदी ने भी दिवाली मिलन समारोह में डीपफेक पर चिंता जताई थी और देश के लिए खतरा बताया था।

अब केन्द्रीय रेल और सूचना प्रोद्यौगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार (23 नवंबर 2023) डीपफेक पर बढ़ती चिंताओं पर कहा है कि इन्हें रोकने के लिए केंद्र सरकार नया क़ानून लाएगी या फिर जरूरत के अनुसार पुराने क़ानून में संशोधन करेगी। उन्होंने ऐसे वीडियो बनाने वालों पर भी कार्रवाई करने की बात कही है।

अब, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने शुक्रवार (24 नवंबर 2023) को कहा कि सरकार ऑनलाइन प्लेटफार्मों पर डीपफेक कॉन्टेंट की निगरानी के लिए एक विशेष अधिकारी को नियुक्त करेगी। यह अधिकारी डीपफेक के मामलों में एफआईआर दर्ज करने में नागरिकों की सहायता करेगा।

डीपफेक क्या होता है?

डीपफेक तकनीक से वीडियो बनाना एक लम्बी प्रक्रिया है। सबसे पहले जिन दो लोगों के चेहरे आपस में बदले जाने हैं उनके हजारों फोटो वीडियो ‘एनकोडर’ नाम के एक AI आधारित प्रोग्राम पर चलाए जाते हैं। यह तकनीक इन दो चेहरों की समानताएँ परखती है। इसके बाद यह तकनीक इन चेहरों को केवल उनकी समानताओं के आधार पर सीमित कर देती है और एक कंप्रेस्ड इमेज बनाती है।

इसके पश्चात एक और AI तकनीक ‘डीकोडर’ से चेहरा तलाशने को कहा जाता है। आसान भाषा में समझे तो इनकोडर को ‘A’ का चेहरा पढ़ने के लिए तैयार किया जाता और डीकोडर को ‘B’ का चेहरा पढ़ने के लिए तैयार किया जाता है। इसके पश्चात दोनों मशीनों से यह चेहरा बनाने को कहा जाता है लेकिन इस स्थिति में इनकोडर को B का और डीकोडर को A का चेहरा बनाने को कहा जाएगा। ऐसे में मान लीजिए कि B उस फोटो में रो रहा है तो नई फोटो में A रोता हुआ दिखेगा।

इसके अलावा एक अन्य तकनीक जिसका नाम ‘जनरेटिव एड्वर्सियल नेटवर्क’ (GAN) है उसके जरिए भी बनाई जाती हैं। इसमें एक गड़बड़ तस्वीर और एक सही तस्वीर डाली जाती है। AI तकनीक इन दोनों के कोड डिकोड करके फोटो को आपस में मिलाती है। इसमें समय लगता है।

रिटायर फौजियों को कश्मीर में आतंकवादी बनाकर भेज रहा पाकिस्तान, स्थानीय लोगों की नहीं कर पा रहा भर्ती: नॉर्दर्न आर्मी के कमांडर

जम्मू-कश्मीर में अब पाकिस्तान को स्थानीय आतंकी नहीं मिल रहे। लिहाजा वह अपने रिटायर फौजियों को आतंकवादी बनाकर कश्मीर भेज रहा है। यह जानकारी सेना के नॉर्दर्न आर्मी के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने दी है।

राजौरी एनकाउंटर में बलिदान हुए सेना के अधिकारियों और जवानों को श्रद्धांजलि देने के बाद लेफ्टिनेंट जनरल द्विवेदी ने शुक्रवार (24 नवंबर 2023) को मीडिया से बात करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सीमा पार से भारत में घुसे कुछ आतंकवादी रिटायर्ड पाकिस्तानी फौजी हैं।

उन्होंने बताया कि पाकिस्तान स्थानीय लोगों की भर्ती नहीं कर पा रहा है। वह बाहर से आतंकियों को लाकर कश्मीर में दहशत फैलाना चाहता है। सेना ने पाया है कि कुछ आतंकी पाकिस्तान के रिटायर फौजी हैं। लिहाजा हमारी प्राथमिकता इन विदेशी आतंकवादियों का खात्मा करने की है।

लेफ्टिनेंट जनरल द्विवेदी ने कहा, “जहाँ हमने मुठभेड़ में अपने 5 बहादुर सैनिकों को खो दिया, वहीं हमने दो खूंखार आतंकवादियों को भी मार गिराया। हमारे लड़के अपनी निजी सुरक्षा की परवाह किए बगैर अच्छे से प्रशिक्षित और आधुनिक उपकरणों से लैस विदेशी आतंकवादियों के पीछे चले गए।”

उन्होंने आगे कहा, “इन खूंखार आतंकवादियों के मारे जाने से आतंकी इको सिस्टम और पाकिस्तान को एक बड़ा झटका दिया है। हमारे अनुमान के मुताबिक 20-25 आतंकवादी अभी भी क्षेत्र में सक्रिय हो सकते हैं। स्थानीय लोगों की मदद से एक साल में हम हालात को काबू में करने सक्षम हो जाएँगे।”

लेफ्टिनेंट जनरल द्विवेदी नेराजौरी में कालाकोटे क्षेत्र का दौरा किया और ऑपरेशन की समीक्षा की। आर्मी कमांडर ने सबसे मुश्किल इलाके और प्रतिकूल मौसम के बावजूद ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए वीर सैनिकों और आर्मी डॉग ‘डोमिनोज़’ की सराहना की और उन्हें सम्मानित किया।

मीडिया रिपोर्ट के आधार पर फैसला नहीं ले सकता SEBI, सुप्रीम कोर्ट ने अडानी मामले में फैसला सुरक्षित रखा: हिंडनबर्ग किया था वित्तीय हेरफेर का दावा

अमेरिका की शॉर्टसेलिंग फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा अडानी ग्रुप पर लगाए गए वित्तीय हेराफेरी के आरोपों से संबंधित एक जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (24 नवंबर, 2023) को सुनवाई की। न्यायालय ने कहा कि बाजार नियामक संस्था सेबी (SEBI) को मीडिया रिपोर्टों के आधार पर निर्णय लेने के लिए नहीं कहा जा सकता। सेबी की जाँच और विशेषज्ञ समिति के सदस्यों की निष्पक्षता पर संदेह करने लायक कोई सामग्री नहीं मिली। इस मामले में कोर्ट ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है।

दरअसल याचिकाकर्ता ने अडानी समूह द्वारा की गई कथित धोखाधड़ी के आरोपों की जाँच की माँग करने के लिए जनहित याचिकाएँ दायर की गई थीं। इस मामले पर बहस करने के बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की खंडपीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (SEBI) से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह अडानी के कथित आचरण के बारे में निर्णय लेने के लिए अखबारों की रिपोर्टों का पालन करेगा। दरअसल, एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश होते हुए वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी कि इस मामले में सेबी का आचरण विश्वसनीय नहीं था।

प्रशांत भूषण ने कहा, “हम इस नतीजे पर पहुँचे हैं कि सेबी की जाँच विश्वसनीय नहीं है। उनका कहना है कि 13 से 14 एंट्री अडानी से जुड़ी हैं, लेकिन वे इस पर गौर नहीं कर सकते, क्योंकि एफपीआई दिशानिर्देशों में संशोधन किया गया है।” उन्होंने कहा कि साल 2014 से SEBI अडानी ग्रुप की हेरफेर को नजरअंदाज कर रहा है।

इस संबंध में वकील भूषण ने राजस्व खुफिया निदेशालय के निदेशक नजीब शाह द्वारा जनवरी 2014 में सेबी के तत्कालीन निदेशक यूके सिन्हा को लिखे एक पत्र का हवाला भी दिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कोयला आयात में मूल्य को अधिक दिखाकर पैसों की हेराफेरी की जा रही है।

इस पर सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा, “मिस्टर भूषण, मुझे नहीं लगता कि आप किसी वित्तीय नियामक से अखबार में छपी किसी बात को स्वीकार करने के लिए कह सकते हैं.. इससे सेबी की बदनामी नहीं होती.. क्या सेबी को अब पत्रकारों का पीछा करना चाहिए?” कोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई दस्तावेज नहीं है, जिससे सेबी की जाँच या विशेषज्ञ समिति की जाँच की निष्पक्षता पर संदेह किया जा सके।

जवाब में वकील प्रशांत भूषण ने कहा, “अगर पत्रकारों को ये दस्तावेज़ मिल रहे हैं तो सेबी को ये कैसे नहीं मिल सकते, जिससे पता चलता है कि श्री विनोद अडानी इन फंडों को नियंत्रित कर रहे थे? इतने सालों तक उन्हें ये दस्तावेज़ कैसे नहीं मिले? OCCRP, द गार्जियन आदि ने दिखाया है कि अधिकांश अदानी शेयरों में निवेश करने वाली इन ऑफशोर कंपनियों को विनोद अदानी द्वारा नियंत्रित किया गया था।”

इस पर मुख्य न्यायाधीश ने फिर कहा, “न्याय के प्राकृतिक सिद्धांतों का अनुपालन करते हुए इसका कोई साक्ष्यात्मक मूल्य कैसे हो सकता है? ऐसे मामले में कारण बताओ कैसे हो सकता है? हम यह धारणा नहीं बना सकते कि यह विश्वसनीय है या इसमें विश्वसनीयता की कमी है।”

वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि मीडिया रिपोर्ट अब भारत के कार्यों को प्रभावित करने के लिए ‘प्लांट’ की जा रही हैं। उन्होंने कहा, “भारत के भीतर फैसलों को प्रभावित करने के लिए भारत के बाहर कहानियां गढ़ने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। इसका एक उदाहरण ओसीसीआरपी रिपोर्ट है।”

याचिकाकर्ताओं में से एक अनामिका जयसवाल ने सेबी पर हितों के टकराव और तथ्यों को छिपाने का आरोप लगाया था। जयसवाल ने कहा था कि सेबी की कॉर्पोरेट गवर्नेंस कमेटी में सिरिल श्रॉफ सदस्य थे, जिनकी बेटी की शादी गौतम अडानी के बेटे से हुई है।

बार एंड बेंच के अनुसार, सॉलिसिटर जनरल मेहता ने अनामिका जयसवाल के हलफनामे का जिक्र करते हुए कहा, “मैं इसका जवाब देकर इसे विश्वसनीयता नहीं देना चाहता था। अगर हम ऐसी रिपोर्टों को देखना शुरू कर देंगे तो सेबी निरर्थक हो जाएगा।”

इस बीच, वकील प्रशांत भूषण ने विशेषज्ञ समिति में शामिल वकील सोमशेखर सुंदरेसन, जो अब बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायाधीश नियुक्त हुए हैं और न्यायमूर्ति ओपी भट्ट को शामिल किए जाने पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सोमशेखर ने अपनी कानूनी प्रैक्टिस के दौरान सेबी के समक्ष अडानी का प्रतिनिधित्व किया था। वहीं, जस्टिस भट्ट उस कंपनी के अध्यक्ष थे, जिसने अडानी समूह के साथ साझेदारी की थी।

इस पर सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा, “वह (सोमशेखर) इन-हाउस वकील नहीं थे, वह एक वकील थे। वह 2006 में पेश हुए थे। यह मामला 17 साल बाद आया है। आपने कोई और उदाहरण भी संलग्न नहीं किया है, फिर हम इन अप्रमाणित आरोपों को रिकॉर्ड पर कैसे ले सकते हैं?”

बताते चलें कि हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट आने के बाद देश भर में सवाल उठने लगे थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सेबी को इस मामले की स्वतंत्र रूप से जाँच करने के अलावा सेवानिवृत्त न्यायाधीश एएम सप्रे की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति गठित करने को कहा था। विशेषज्ञ समिति ने मई में अपनी रिपोर्ट दे दी थी। इसमें कहा था कि प्रथम दृष्टया इस मामले में सेबी की ओर से कोई चूक नहीं पाई गई।

केरल के मदरसे में बच्चों से कुकर्म, 3 उस्ताद गिरफ्तार: 1 साल से बच्चे का यौन शोषण कर रहा मौलवी भी पकड़ा गया

केरल में मौलानाओं के हाथों बच्चों के यौन शोषण और कुकर्म के दो चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। पहली घटना में, तीन मदरसा शिक्षकों को, जिनमें से एक उत्तर प्रदेश का है, नेदुमंगड पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वहीं दूसरा मामला भी यौन शोषण का ही है। दरअसल, अधिकारियों ने बताया कि नाबालिग छात्रों पर यौन उत्पीड़न के मामले में 18 नवंबर, 2023 को ही मदरसा शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया गया था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पहले मामले में आरोपितों की पहचान कडक्कल कांजीराथुम्मुडु बिस्मी भवन के 24 वर्षीय एल सिद्दीकी, करीबा ऑडिटोरियम के पास जैस्मीन विला के 28 वर्षीय एस मुहम्मद शमीर और उत्तर प्रदेश के खीरी जिले के गणेशपुर के 30 वर्षीय मुहम्मद रसलाल हक के रूप में हुई। तीनों पर आरोप है कि मदरसे में किशोरों के साथ अप्राकृतिक सेक्स किया। 

इस मामले में बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई। दोषियों के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए किशोर न्याय अधिनियम, यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम और प्रासंगिक भारतीय दंड संहिता की धाराएँ लागू की गईं।

रिपोर्ट के अनुसार, तीनों आरोपित पिछले एक साल से नेदुमंगड (Nedumangad) में एक मदरसा चला रहे थे। वहीं शिकायत के बाद कट्टक्कडा के पुलिस उपाधीक्षक (डीवाईएसपी) एन शिबू, नेदुमंगड स्टेशन हाउस अधिकारी (एसएचओ) ए सुनील, उप-निरीक्षक (एसआई) सुरेश कुमार, सहायक उप-निरीक्षक (एएसआई), जिला पुलिस अधीक्षक किरण नारायणन ने अपराधियों की गिरफ्तारी को सुनिश्चित किया।

दरअसल, वरिष्ठ सिविल पुलिस अधिकारी (एससीपीओ) सी बीजू, दीपा और सिविल पुलिस अधिकारी (सीपीओ) अजीत मोहन को सीडब्ल्यूसी से आरोपितों के खिलाफ उनके भयानक अपराधों के बारे में एक पीड़ितों द्वारा की गई एक शिकायत की सूचना मिली, जो दीनी तालीम के लिए मदरसे में आए थे। फ़िलहाल,अब तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने के बाद रिमांड पर भेज दिया गया।

इस बीच, वाज़िकादावु पुलिस ने 22 नवंबर, 2023 को मलप्पुरम में पुथुक्कादावु मुहम्मद शाकिर नामक एक मौलवी को भी गिरफ्तार किया है, जिसे शाकिर बाक्वावी ममपाद के नाम से भी जाना जाता है, उस पर भी एक साल तक एक बच्चे से छेड़छाड़ करने का आरोप था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित ने 21 नवंबर, 2023 को अपने मदरसा शिक्षक को दुर्व्यवहार के बारे में बताया और शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में वाज़िकादावु पुलिस स्टेशन के हाउस ऑफिसर, मनोज परायट्टा ने बताया, “हमें मंगलवार को शाकिर के खिलाफ शिकायत मिली। लड़के ने अपने शिक्षक शाकिर के दुर्व्यवहार के बारे में पुलिस को बताया। और हमने बिना देर किए आरोपित को उसके घर से पकड़ लिया था।”

हालाँकि, यौन उत्पीड़न के इस मामले में मदरसे के शिक्षक द्वारा करीब एक साल से बच्चे का यह उत्पीड़न चल रहा था। मदरसे के शिक्षकों ने पीड़ितों को द्वारा इस मामले के बारे में खुलासा करने पर भयंकर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी। इसके अलावा, जाँच दल इस एंगल से भी जाँच कर रही है कि और कितने समय से इन आरोपितों ने मदरसे के बच्चों को शिकार बनाया। 

बता दें कि इस्लामी प्रचारक यौन उत्पीड़न के आरोपित मुहम्मद शाकिर के फेसबुक पेज पर 23,000 से अधिक फेसबुक फॉलोअर्स और 8,000 से अधिक यूट्यूब सब्सक्राइबर्स है। उसके ज़्यादातर वीडियो इस्लामी प्रचार से जुड़े हैं। 

‘हिंदू सिर्फ धर्म नहीं, जीने का तरीका है’: जानिए कौन हैं डॉक्टर मिहिर मेघानी, अमेरिका में ‘सनातन’ के लिए दान करेंगे ₹33 करोड़

अमेरिका में हिंदू धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए एक भारतीय मूल के एक अमेरिकी डॉक्टर ने 40 लाख डॉलर ( 33 करोड़ रुपए से ज्यादा) देने का वादा किया है। डॉक्टर का नाम मिहिर मेघानी है। दो दशक पहले डॉ मेघानी ने ही हिंदू अमेरिका फाउंडेशन की स्थापना की थी। उनका कहना है कि हिंदू सिर्फ एक धर्म नहीं है बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने इस महीने की शुरुआत में ही सालाना सिलिकॉन वैली समारोह में अगले 8 वर्षों में हिंदू हित के लिए 15 लाख डॉलर देने का वादा किया। उनके हिंदू हित में किए गए इस योगदान के बाद कुल राशि 40 लाख डॉलर हो जाएगी।

पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा- “मेरी पत्नी तन्वी और मैंने, अब तक ‘हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन’ को 15 लाख डॉलर का योगदान दिया है। हमने पिछले 15 वर्षों में अन्य हिंदू और भारतीय संगठनों को इस उद्देश्यों के लिए 10 लाख डॉलर से भी अधिक का योगदान दिया है। अगले 8 वर्षों में हम भारत समर्थक और हिंदू संगठनों को 15 लाख डॉलर देने का संकल्प ले रहे हैं।”

वह लोगों को बताते हैं, “मेरी कोई स्टार्टअप कंपनी नहीं है, मेरा कोई साइड बिजनेस नहीं है, मैं वेतन पर एक आपातकालीन डॉक्टर हूँ। मेरी पत्नी एक फिटनेस प्रशिक्षक और आभूषण डिजाइनर हैं। हम प्रतिवर्ष लाखों डॉलर नहीं कमा रहे हैं। हमारे पास शेयर के विकल्प नहीं है। हम ऐसा कर रहे हैं क्योंकि ये हमारा धर्म है।”

हिंदुत्व के बारे में किए गए सवाल पर डॉ मेघानी कहते हैं कि हिंदू धर्म वो नहीं है जिसे अमेरिकी लोग आसानी से समझें क्योंकि यहाँ ज्यादातर ईसाई हैं। वह इब्राहिमिक पृष्ठभूमि से बाते हैं। वो जब अलग-अलग धर्म देखते हैं तो उन्हें समझ नहीं आता कि हिंदू धर्म सिर्फ एक धर्म नहीं है बल्कि ये जीने के संस्कार हैं। ये जिंदगी को जीने की सोच है।

वह कहते हैं, “हम हिंदुओं को बतौर भारतीय मजबूत होना होगा। ये हमारी सभ्यता की पहचान है। हमें हमारी हिंदू सभ्यता को लेकर गौरवान्वित महसूस करना गोगा। तभी सहकर्मी, दोस्त और पड़ोसी हमें बेहतर जान पाएँगे।”

बता दें कि डॉक्टर मेघानी की संस्था जो शुरुआती सालों में केवल वॉल्यूटरों पर आधारित थी अब उसका वार्षिक बजट 2.5 मिलियन डॉलर हो गया है। आने वाले समय में इसका लक्ष्य 5 मिलियन डॉलर तक पहुँचना है और दशक तक लक्ष्य 20 मिलियन डॉलर पहुँचना है।

मिशेल मार्श के खिलाफ पुलिस में शिकायत, PM मोदी से डिमांड- भारत में खेलने पर लगाएँ बैन: वर्ल्ड कप पर ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर ने रखा था पैर, मोहम्मद शमी ने कहा- इससे ठेस पहुँची

ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर मिशेल मार्श के खिलाफ अलीगढ़ के एक आरटीआई एक्टिविस्ट ने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई है। बताया जा रहा है मिशेल मार्श के ट्रॉफी पर पैर रखने वाली फोटो देखने के बाद एक्टिविस्ट नाराज हुए और उन्होंने थाने में शिकायत दी। पुलिस के समक्ष इस मामले में शिकायत दर्ज कराई गई है।

आरटीआई एक्टिविस्ट का नाम पंडित केशव देव है। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा कि उन्होंने इंटरनेट पर एक फोटो देखी जिसमें ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ने वर्ल्ड कप ट्रॉफी पर पैर रखा था। उनके मुताबिक इस तस्वीर से 140 करोड़ लोगों के सम्मान को ठेंस पहुँचा इसलिए उन्होंने थाना देहली गेट पर इस मामले में तहरीर दी।

अपनी शिकायत में पंडित केशव देव ने कहा कि पहले तो मिशेल मार्श के खिलाफ FIR दर्ज की जाए और दूसरा उसके भारत खेलने पर आजीवन प्रतिबंध लगाया जाए।

शिकायतकर्ता ने कहा कि वर्ल्ड कप फाइनल जीतने पर प्रधानमंत्री ने पैट कमिंस को ट्रॉफी देकर सम्मानित किया था लेकिन मिशेल मार्श ने इसका अपमान कर दिया। यह देख उनको (पंडित केशव देव) को बहुत पीड़ा हुई। इसलिए उन्होंने शिकायत देते हुए माँग की कि मिशेल के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया जाए।

अपनी शिकायत की कॉपी पंडित केशव देव ने प्रधानमंत्री व खेलमंत्री को भी दी। उनकी माँग है कि अब के बाद कभी भी ऑस्ट्रेलियन क्रिकेटर मिशेल मार्श को न खेलने दिया जाए।

गौरतलब है कि वर्ल्ड कप के बाद सामने आई मिशेल मार्श की तस्वीर से कई भारतीय उनसे नाराज हैं। इसी क्रम में भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी और एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला ने भी बताया कि कैसे उन्हें इस हरकत से दुख पहुँचा है।

शमी ने जहाँ मीडिया से बातचीत में इस फोटो के बारे में कहा, “मुझे ठेस पहुँची। वह ट्रॉफी जिसके लिए दुनियाभर की टीमें लड़ रही थी, ट्रॉफी जिसे आप अपने सिर पर रखकर उठाना चाहते हैं, उस पर पैर रखना वाकई दुखी करने वाला था।”

इसी तरह उर्वशी रौतेला ने कहा- मिशेल मार्श वर्ल्ड कप ट्रॉफी की कुछ तो इज्जत करो। सिर्फ कूल दिखने के लिए मिशेल मार्श ने ट्रॉफी पर पैर रखा है।”

103 KM का पुल तैयार, 251 किमी के रास्ते पर पिलर खड़ा… देश के पहले बुलेट ट्रेन की रफ्तार कैसी, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताई

देश के पहले बुलेट ट्रेन परियोजना का काम तेजी से चल रहा है। पहली बुलेट ट्रेन अहमदाबाद से मुंबई के बीच दौड़ेगी। इस परियोजना के तहत करीब 100 किलोमीटर का एलिवेटेड स्ट्रक्चर और करीब 250 किमी रूट में पिलर तैयार हो चुका है। इसकी जानकारी केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी है।

नेशनल हाईस्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) इस प्रोजेक्ट के प्रबंधन का काम देख रही है। अश्विनी वैष्णव ने 23 नवंबर 2023 को एक्स/ट्विटर पर किए एक पोस्ट में बताया है कि 21 नवंबर तक 251.40 किमी रास्ते में पिलर खड़ा करने का काम पूरा हो चुका है। साथ ही 103.24 किमी का एलिवेटेड सुपर स्ट्रक्चर भी तैयार हो गया है।

एलि​वेटेड सुपर स्ट्रक्चर को वायाडक्ट भी कहते हैं। यह एक खास तरह का पुल होता है घाटी या खाई को पार करने के लिए बनाया जाता है। इसे मेहराबों, खंभों और तटबंधों सहारे खड़ा कर उस पर सड़क या रेलवे ट्रैक बिछाया जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक NHSRCL ने एक बयान में बताया है कि 100 किलोमीटर लंबे वायाडक्ट के निर्माण को पूरा करने के लिए 40 मीटर लंबे ‘फुल स्पैन बॉक्स गर्डर्स’ और ‘सेगमेंटल गर्डर्स’ लगाने जरूरी थे।

गुजरात में वायाडक्ट इस रूट में कई नदियों को परा किया जाना है। ये नदियाँ नवसारी और वलसाड जिले में हैं। इनके नाम पूर्णा, मिंधोला, अंबिका, वेंगानिया, पार और औरंगा हैं। एनएचएसआरसीएल ने बयान में कहा है, “प्रोजेक्ट का पहला गर्डर (निर्माण में इस्तेमाल होने वाला बीम) 25 नवंबर 2021 को लॉन्च किया गया था। वायाडक्ट का पहला एक किलोमीटर 30 जून 2022 को छह महीने में बनकर तैयार हो गया था। 22 अप्रैल 2023 को 50 किलोमीटर वायाडक्ट का निर्माण पूरा किया गया। इसके बाद छह महीने में 100 किलोमीटर का वायाडक्ट पूरा हो गया।”

एनएचएसआरसीएल का कहना है कि वायाडक्ट्स के निर्माण के साथ-साथ 250 किलोमीटर का घाट का काम पूरा हो चुका है। इसके अतिरिक्त, वायडक्ट्स के किनारे शोर अवरोधक लगाए गए हैं। इसके अलावा जापान के शिंकानसेन जैसा ही पहला रेनफोर्सड कंक्रीट (आरसी) ट्रैक बेड सूरत में बिछाया जा रहा है।

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की नींव सितंबर 2017 में अहमदाबाद में रखी गई थी। उम्मीद जताई जा रही है कि ये ट्रेन लगभग दो घंटे में 500 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करेगी। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर प्रोजेक्ट की कुल लागत 1.08 लाख करोड़ रुपए है। इसके लिए 10,000 करोड़ रुपए केंद्र सरकार और 5,000 करोड़ रुपए गुजरात और महाराष्ट्र सरकार दे रही है।

पंजाब में खाटू श्याम की शोभा यात्रा में शामिल महिलाओं पर मुस्लिम बच्चों ने फेंके टॉयलेट क्लीनर, पड़े चकत्ते

पंजाब के पटियाला जिले के नाभा क्षेत्र में गुरुवार (23 नवंबर, 2023) को खाटू श्याम शोभा यात्रा में भाग लेने वाली हिंदू महिलाओं के साथ मुस्लिम समुदाय के बच्चों के एक समूह ने दुर्व्यवहार किया। बच्चों ने महिलाओं पर टॉयलेट क्लीनर फेंक दिया जिसके बाद बताया जा रहा है कि महिलाओं को कुछ गंभीर एलर्जी और चकत्ते की समस्या सामने आई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नाभा में हिंदू समुदाय ने खाटू श्याम जन्मोत्सव के मौके पर शोभा यात्रा का आयोजन किया था। इस अवसर पर निकाली गई रैली में सैकड़ों हिंदुओं ने भाग लिया और वे इसे उत्सव के रूप में मना रहे थे लेकिन जैसे ही शोभा यात्रा सदर बाज़ार क्षेत्र में पहुँची तो उसमें भाग लेने वाली कुछ महिलाओं के साथ मुस्लिम बच्चों द्वारा दुर्व्यवहार किया गया। उन पर टॉयलेट क्लीनर फेंक दिया गया।

दरअसल, इस मामले में मुस्लिम समुदाय के एक व्यक्ति की दुकान के बच्चों ने पास के शौचालय से टॉयलेट क्लीनर उठाया और महिलाओं पर फेंक दिया, जिससे उन्हें चकत्ते और एलर्जी हो गई। वहीं इस मामले में शिकायत के बाद नाभा पुलिस ने घटना का संज्ञान लिया और शिकायत दर्ज की।

पंजाब के नाभा SHO ने पटियाला पुलिस द्वारा पोस्ट किए गए एक वीडियो में घटना की पुष्टि की और कहा कि बच्चे मुस्लिम समुदाय के थे।

इस मामले में एसएचओ ने कहा, “रैली शांतिपूर्वक सदर बाजार क्षेत्र से गुजर रही थी। मुस्लिम समुदाय के कुछ बच्चों ने रैली में आई महिलाओं पर टॉयलेट क्लीनर फेंक दिया। बच्चों ने टॉयलेट क्लीनर को एक मुस्लिम व्यक्ति की दुकान से बाहर फेंका था। माना जाता है कि बच्चे उसके रिश्तेदार थे। जिससे महिलाओं को गंभीर एलर्जी हो गई है। फ़िलहाल, कोई अफवाह नहीं फैलानी चाहिए। इस मामले में जाँच चल रही है।”

उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा कुछ होने पर तुरंत पुलिस को सूचित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “मैं लोगों से शांति बनाए रखने और इस मामले में कोई भी अफवाह न फैलाने का अनुरोध करता हूँ।”

नई दिल्ली में अफगानिस्तान का दूतावास बंद, कहा- वैध सरकार बनने तक हमारा झंडा लहराने दे भारत: तालिबानी शासन के बाद से था निष्प्रभावी

राष्ट्रपति अशरफ घनी के नेतृत्व वाली अफगानिस्तान की पूर्ववर्ती सरकार से संबंधित दूतावास ने दिल्ली में स्थित अपने राजनयिक मिशन को स्थायी तौर पर बंद करने की घोषणा कर दी है। ‘इस्लामी रिपब्लिक ऑफ अफगानिस्तान’ के दूतावास के नाम से जारी किए गए बयान में कहा गया है कि भारत और तालिबान सरकार की ओर से लगातार मिल रही चुनौतियों के कारण यह निर्णय लिया गया है।

बता दें कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद तालिबान ने 15 अगस्त 2021 को अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद अशरफ घनी ने अफगानिस्तान छोड़ दिया था। वहीं, घनी सरकार में उपराष्ट्रपति रहे अमरुल्लाह सालेह ने कहा था कि तालिबान के साथ उनका संघर्ष अंतिम साँस तक जारी रहेगा।

भारत में अफगानिस्तान का दूतावास पूर्ववत जारी रहा। कब्जे के बाद तालिबान ने अफगानिस्तान नाम ‘इस्लामी रिपब्लिक ऑफ अफगानिस्तान’ से बदलकर ‘इस्लामिक एमिरेट्स ऑफ अफगानिस्तान’ कर दिया था। हालाँकि, भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के साथ राजनयिक संबंध रखने की घोषणा अब तक नहीं की है।

दरअसल, पूर्ववर्ती सरकार से संबंधित अफगान दूतावास ने 30 सितंबर 2023 को दिल्ली में अपने दूतावास का संचालन बंद कर दिया था और अब इसे स्थायी तौर पर बंद कर दिया है। दूतावास ने अपने बयान में कहा कि उसे अपेक्षित समर्थन नहीं मिल रहा है। पिछले 2 वर्षों 3 महीनों में भारत में अफगान समुदाय की संख्या में भारी गिरावट देखी गई है।

दूतावास ने कहा कि इस अवधि में अफगानिस्तान छोड़ने की कोशिश करने वाले लोगों को बहुत ही सीमित नए वीजा जारी किए गए। इस कारण से अफगान शरणार्थियों, छात्रों और व्यापारियों के देश छोड़ने के कारण अगस्त 2021 के बाद से यह संख्या लगभग आधी रह गई है।

अफगान दूतावास ने आगे कहा कि मिशन बंद करने के निर्णय को कुछ लोग आंतरिक संघर्ष के रूप में लेबल करने का प्रयास कर सकते हैं। दूतावास ने यह भी कहा कि कुछ लोग यह भी कह सकते हैं कि राजनयिकों ने तालिबान के प्रति अपनी निष्ठा बदल ली है, लेकिन यह निर्णय नीति और हितों में व्यापक बदलाव का परिणाम है।

दूतावास ने आगे कहा, “नई दिल्ली में हमारे मिशन के दौरान अफगान नागरिकों के समर्थन के लिए हम भारत के प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। काबुल में वैध सरकार की अनुपस्थिति और सीमित संसाधनों एवं शक्तियों के बावजूद हमने भारत में मौजूद अपने नागरिकों की बेहतरी के लिए अथक प्रयास किए।”

इससे पहले 30 सितंबर 2023 को दूतावास ने कहा था, “हम मेजबान सरकार (भारत) से अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने, संसाधनों एवं कार्मिकों की कमी के कारण अफगानिस्तान के सर्वोत्तम हितों की सेवा करने की अपेक्षाओं को पूरा करने में सफल नहीं हो रहे हैं। इसलिए हम 1 अक्टूबर 2023 से अपना परिचालन बंद कर रहे हैं।”

तालिबान की वर्तमान सरकार को लेकर नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास ने कहा, “जो लोग किसी अन्य समूह का प्रतिनिधित्व करते हैं, वे तालिबान का समर्थन करते हैं तो यह भारत सरकार का निर्णय होगा। हालाँकि, हमने भारत सरकार से कहा है कि जब तक अफगानिस्तान में कोई वैध सरकार नहीं आती है, तब तक हमारे गौरवशाली झंडे को फहराते रहने का सम्मान दिया जाए।”

दूतावास ने यह भी कहा, “हमने भारत सरकार से यह भी कहा कि राजनयिक संबंधों पर वियना कन्वेंशन 1961 के मानदंडों के आधार पर दूतावास को तब तक बंद रखा जाए, जब तक अफगानिस्तान में कोई वैध सरकार काबिज नहीं होती। आज से भारत में ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ अफगानिस्तान’ का प्रतिनिधित्व करने वाला कोई राजनयिक नहीं होगा। अगर कोई ऐसा दावा करता है तो उसे ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ अफगानिस्तान’ का प्रतिनिधि नहीं माना जाए।”

दूतावास ने यह भी कहा कि भारत साल 2001 से अफगानिस्तान की पूर्ववर्ती सरकार का रणनीतिक साझेदार रहा है। हालाँकि, बदली हुई भू-राजनीतिक स्थितियों में शक्तियों के संतुलन के लिए की आवश्यकता को वह समझता है। इसलिए वह अपने मिशन को बंद करते हुए इसकी संपत्तियों को भारत को सौंपने का निर्णय लिया है। उसने भारत से इन संपत्तियों और भारत में रह रहे लोगों की सुरक्षा की अपील की।

दूतावास ने कहा कि अगर कोई उसके मिशन में अब वहीं लोग बचे हो सकते हैं, जो तालिबान के संबद्ध या उसके प्रतिनिधि होंगे। दूतावास ने यह भी कहा कि अपनी संपत्तियों को भारत सरकार के हवाले कर दिया है और यह भारत पर निर्भर है कि इसे वह अपने पास रखता है या उसे तालिबान से संबद्ध राजनयिकों के हवाले करता है।

पाकिस्तानी हिरोइन शादी करके बन गई भारत की बहू, अल्लाह और इस्लाम के नाम पर कट्टर मुस्लिम दे रहे गाली

पाकिस्तान की मशहूर अदाकाराओं में से एक मदीहा इमाम ने पिछले दिनों एक भारतीय फिल्म मेकर से शादी की थी। उनके पति का नाम ‘मोजी बासर’ है जो नॉर्थ-ईस्ट इंडिया से ताल्लुक रखते हैं। शादी के बाद हाल में मदीहा अपने ससुराल पहली बार अरुणाचल प्रदेश (जिला- लेपा-राड़ा, शहर-बासर) आईं। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर ससुराल में हुए वेलकम की तस्वीरों को साझा किया जिसे देख कई यूजर्स ने उनकी तारीफ की जबकि इस्लामी कट्टरपंथी इसे देख बिदक गए।

यासिर खान की इंस्टा आई डी से उनके लिए लिखा गया- इस्लाम को बदनाम करने वालों का ठिकाना जहन्नुम है।

शिजा जमशेद ने मदीहा की फोटो पर लिखा- “बहुत बेगैरत है तू। जब निकाह ही नहीं हुआ तो शाह कैसे हुई। ये बस जिना है शर्म आनी चाहिए। जहन्नुम में सड़ोगे।”

खान नादिम ने पूछा- मुस्लिम मर गए थे क्या, हिंदू से शादी कर ली।

गुलफिशां ने कहा- “सैयद भी हैं आप मुस्लिम भी फिर हिंदू से शादी क्यों की। अपने यहाँ गैर मुस्लिम से तो निकाह जायज नहीं। सैयदजादी की शादी सैयद के अलावा किसी से नहीं हो सकती। आप सैयद नहीं हो।”

इसपर एक यूजर ने कहा कि गूगल चेक करो जरा ये हिंदू बन गई है। दूसरे ने कहा- उफ्फ अल्लाह जिसको न चाहे उसे ऐसे ही खुद से दूर कर देता है।

अयात पठान ने कहा, “इसने भारतीय से शादी क्यों की। मुझे नहीं पता था कि इसका पति इंडियन हैं। ये पागल है या फिर कुछ और। मैं तुमको अनफॉलो कर रहा हूँ। हैरान हूँ कि इसने मुस्लिम से शादी क्यों नहीं की।”

गौरतलब है कि पाकिस्तानी एक्ट्रेस मदीहा ने इसी साल मई महीने में मोजी बासर से शादी की थी। इसकी तस्वीरें भी उन्होंने सोशल मीडिया पर डाली थी। उन्होंने लिखा था- “1 मई 2023 को शादी कर ली। हमें अपनी दुआओं में याद रखिएगा क्योंकि हम जीवन का नया अध्याय शुरू करने जा रहे हैं।” इसके बाद उन्होंने पिछले माह दुबई में अपना वलीमा भी याच में आयोजित किया था।