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‘हम जल्द ही आप तक पहुँचेंगे’ : सिल्क्यारा सुरंग में पहली बार गूँजी उम्मीद की एक आवाज, खिल उठे 10 दिनों से फँसे 41 मजदूरों के चेहरे, PM ने भी ली राहत कार्य की जानकारी

सिर पर सफेद, पीली, नारंगी प्लास्टिक की टोपियाँ, चेहरे पर थकान मगर आँखें जीवन की आस की किरणों से चमक रही थीं। उत्तरकाशी के सिलक्यारा में निर्माणाधीन सुरंग में फँसे 41 मजदूरों के पास मंगलवार (21 नवंबर, 2023) को 10 दिनों में पहली बार कैमरा पहुँचा था। दरअसल, भूस्खलन के वजह से बीते 12 नवंबर से ये लोग यहाँ फँसे हुए हैं।

वहाँ राहत और बचाव में लगी टीम के लोगों ने छह इंच के पाइप के जरिए उन तक खाना पहुँचाया। इस पाइप की ही मदद से वहाँ वॉकी-टॉकी और एंडोस्कोपिक फ्लैक्सी कैमरे भेजे गए। इस कैमरे से पहली बार इनकी तस्वीर सामने आई तो वॉकी-टॉकी से इनके बचाव में लगे लोगों से इनकी बाचतीच भी हो पाई।

हालाँकि, अभी भी बचाव दल और फँसे हुए मजदूरों के बीच लगभग 40 मीटर मोटा मलबे का फासला है। हिमालयी क्षेत्र होने और यहाँ की मिट्टी की वजह से इनकों वहाँ से बाहर निकलना बड़ी चुनौती है, लेकिन इसके बाद भी जब मंगलवार सुबह लगभग 3.45 बजे इनके चेहरे कैमरे पर आए तो ये पल बचाव टीमों के लिए कुछ देर के लिए ही सही पर उत्साह का पल रहा।

भले ही इसके बाद बचाव की आगे की रणनीति बनाने के लिए वहाँ माहौल फिर से गंभीर हो गया। मजदूरों को वहाँ से निकालने के अगले कदम की योजना के साथ ही राहत और बचाव दल के लोगों ने मजदूरों को दिलासा दिया कि वो जल्द ही वहाँ उन्हें बचाने के लिए पहुँच रहे हैं। ये सुनते ही इस मुश्किल हालातों में भी मजदूरों के चेहरे खिल उठे।

‘हम जल्द ही आप तक पहुँचेंगे’

जब मजदूरों को वॉकी-टॉकी पर कहा गया, “क्या आप ठीक हैं? यदि आप सभी ठीक हैं, तो कृपया खुद को कैमरे के सामने दिखाएँ। कृपया अपने हाथ उठाएँ और मुस्कुराएँ।” इतना सुनते ही मजदूरों ने कैमरे के सामने लाइन लगाकर इसका जवाब दिया।

इतने वक्त से वहाँ फँसे होने की वजह से उनके छोटी दाढ़ी उग आई थी। उनके सिर सख्त प्लास्टिक की टोपियों से ढके हुए थे। उन्होंने कैमरे की ओर हाथ हिलाकर संकेत दिया कि वे ठीक हैं। इसी बीच एक बचावकर्ता ने कहा, “हम जल्द ही आप तक पहुँचेंगे, कृपया फिक्र न करें। कृपया एक-एक करके कैमरे के सामने आएँ। हम आपके रिश्तेदारों को दिखाना चाहते हैं कि आप ठीक हैं।”

फिर इन मजदूरों को पाइप के अंदर से कैमरा लेने और उनमें से हर एक पर फोकस करने को कहा गया। तब बचाव दल के सदस्यों ने उनसे कहा, “हम आपको बहुत साफ तौर से देख सकते हैं।” इसी दौरान एक बचावकर्ता ने इन मजदूरों से पूछा कि पाइप के जरिए से भेजा गया वॉकी-टॉकी मिला तो इन लोगों ने इशारे से इसके मिलने के बारे में बताया।

इसके बाद इन सब को बचावकर्मियों ने वॉकी-टॉकी चलाने के बारे में बताया। बताते चलें कि कैमरा और वॉकी-टॉकी का कनेक्शन लंबे वक्त तक चलने वाले बचाव अभियान के लिए अहम हैं। मलबे के बीच डाला गया छह इंच का पाइप सुरंग में फँसे इन मजदूरों के लिए जीवन रेखा बन गया है।

इसके जरिए मजदूरों को भोजन और दवाएँ भेजी जा सकती हैं। मंगलवार को मजदूरों को सुरंग में इस पाइप के जरिए 10 दिनों में पहली बार खिचड़ी भेजी गई। वहीं कैमरा और वॉकी-टॉकी कनेक्शन अब बचाव टीमों को मजदूरों का हौसला बढ़ाने उनके घर लौटने के उनके कष्टदायक इंतजार के बीच उन्हें भरोसा दिलाने में मदद करेगा।

पीएम मोदी ने भी ली सुंरग बचाव-राहत कार्य की जानकारी

वहीं राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी राहत की साँस ली है। यही नहीं पीएम मोदी ने फिर से फोन कर सिलक्यारा की निर्माणाधीन सुरंग में फँसे मजदूरों के राहत और बचाव अभियान के बारे में भी अपडेट लिया। सीएम धामी ने पीएम को बताया कि 6 इंच व्यास की पाइप लाइन को मलबे के पार मजदूरों तक पहुँचा दिया गया है।

सीएम धामी ने पीएम को बताया कि इसी के जरिए उन्हें भोजन और अन्य जरूरी सामान पहुँचाया जा रहा है। इसके साथ ही एंडोस्कोपिक फ़्लेक्सी कैमरे की मदद से मजदूरों से हुई बातचीत और उनकी कुशलता की जानकारी भी दी गई। इस पर पीएम ने यह भी कहा कि सभी श्रमिक भाइयों को सुरक्षित निकालना उनकी पहली प्राथमिकता है।

सुरंग में फँसे मजदूरों के सकुशल होने की खबर पाकर उनके परिवारवालों ने भी राहत की साँस ली है। उन्हें खुशी है कि आखिर ये खबर मिली। सुरंग में फँसे एक मजदूर छोटे भाई का कहना है, “टनल में मेरा बड़ा भाई फंँसा हुआ है। उसका नाम विश्वजीत कुमार है। मैं उनसे लगातार संपर्क में हूँ। मेरा एक और रिश्तेदार सुबोध कुमार भी अंदर है। वहाँ सभी लोग ठीक हैं। उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। वे खुश हैं कि दूसरी पाइप मिल गई जिससे खाना भी मिल जाएगा। अभी तक केवल ड्राई फ्रूट्स जा पा रहा था। हमें बहुत राहत महसूस हो रही है।”

उन्होंने आगे कहा, “वो इस बात से ज्यादा खुश हुए है कि उन लोगों को दूसरी पाइप मिल गई। जिससे शायद उनको पूरा खाना मिल पाए। अभी तक वो सूखे मेवे खाकर काम चला रहे थे। दूसरे 6 इंच के पाइप से खाना वगैरह सब जा सकता है। उनको और राहत मिल गई है कि चलो बाहर से प्रोसेस चालू है कि हमें निकालने के लिए कोशिशों की जा रही है। तो वो लोग भी खुश है।”

‘मेरा भाई बाहर आएगा 90 फीसदी सकारात्मक हूँ’

सुरंग के अंदर फँसे विश्वजीत ने अपने छोटे भाई को ये भी बताया, “वैसे तो हमें अंदर कोई दिक्कत महसूस नहीं हो रही है, लेकिन अब थोड़ा अच्छा लग रहा है कि हमें इस दूसरे पाइप के जरिए बात आसानी से हो जाएगी। पहली पाइप में बात आसानी से नहीं हो पा रही थी। इस पाइप के जरिए हम बाहर वाले से आमने-सामने बात कर पा रहे हैं। इससे हमें बहुत राहत महसूस हुई है।

उनका कहना है कि बड़े भाई की सकुशल जानकर हम लोगों को भी काफी राहत मिली है। हम खुश है कि इससे उनके पास पूरा खाना खाने की सुविधा होगी। पाइप के जरिए उन लोगों का वीडियो आ गया यही काफी है। सुंरग में फँसे मजदूर के भाई का कहना था कि वो सब अंदर घूम फिर रहे हैं, सब सुरक्षित हैं। हम सब अब उन्हें लेकर बहुत पॉजीटिव हैं। ये 90 फीसदी सकारात्मक हालात हैं, क्योंकि अब वो सुरक्षित बाहर आएँगे।

उन्होंने आगे कहा कि क्योंकि पहले तनाव बन रहा था कि ये पहली पतली पाइप अंदर किसी वजह से भी कोई दिक्कत पैदा करती है तो फिर क्या उपाय हो सकता है, उस वक्त बाहर के प्रॉसेस में कितना वक्त लगेगा ये कहना मुश्किल था, लेकिन दूसरी पाइप के अंदर जाने से अब कोई दिक्कत नहीं है।

वहीं दूसरी तरफ सुरंग में फँसे एक मजदूर ने अपनी माँ को भावनात्मक संदेश भेजा, “मैं ठीक हूँ माँ, कृपया अपना खाना समय पर खाएँ।” इससे पहले 20 नवंबर को यहाँ अंतरराष्ट्रीय सुरंग विशेषज्ञ अर्नाल्ड डिक्स भी पहुँचे थे। उन्होंने मजदूरों को जल्द निकाल लेने का भरोसा दिलाया था। वहीं रक्षा मंत्रालय से एक रोबोटिक्स टीम भी आई थी।

इस टीम ने बताया था कि वो सुरंग के अंदर वाईफाई कनेक्शन लगाने की भी कोशिश कर रहे हैं। मजदूरों को पाइप के जरिए अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी भेजे गए हैं। इसी के साथ ही मजदूरों के निकालने के लिए ऑगर मशीन की मदद से 900 मिलीमीटर की वाली पाइप को आगे ले जाने का काम भी दोबारा शुरू होने वाला है।

उत्तराखंड में सिल्क्यारा और डंडालगाँव के बीच 12 नवंबर को निर्माणाधीन सुरंग में भूस्खलन के बाद 41 मजदूर फँस गए। ये सुरंग केंद्र की महत्वाकांक्षी चार धाम परियोजनाओं का हिस्सा है और उत्तरकाशी और यमुनोत्री को जोड़ने के लिए प्रस्तावित सड़क पर है।

बिहार में आरक्षण बढ़ कर हुआ 75%, राज्यपाल ने विधेयक को दी मंजूरी: नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में होगा लागू

बिहार के राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर ने 75 प्रतिशत आरक्षण वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस विधेयक के तहत बिहार में सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का कोटा 60 से बढ़ाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया है। इस विधेयक को बिहार विधानसभा ने 13 अक्टूबर, 2023 को पारित किया था। इसके बाद, इसे राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा गया था। राज्यपाल ने इस विधेयक पर 21 नवंबर, 2023 को हस्ताक्षर किए।

आरक्षण विधेयक को राज्यपाल के स्तर से मंजूरी मिलने के बाद गैजेट जारी कर दिया गया है। इस विधेयक को मंजूरी दिए जाने के बाद, बिहार में सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण का कोटा 75 प्रतिशत हो गया है, जिसमें आरक्षित वर्ग के लोगों को 65 फीसदी और 10 फीसदी आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आरक्षण मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

बिहार में अब आरक्षण की सीमा 75 प्रतिशत

अब तक पिछड़ा-अति पिछड़ा वर्ग को 30 प्रतिशत आरक्षण मिल रहा था, लेकिन नए कानून के तहत इस वर्ग को 43 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा। इसी तरह, पहले अनुसूचित जाति (SC) वर्ग को 16 प्रतिशत आरक्षण था, अब 20 प्रतिशत मिलेगा। अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग को पहले एक प्रतिशत आरक्षण था, जो बढ़कर दो प्रतिशत हो गया है। केंद्र सरकार द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लिए दी गई 10 प्रतिशत आरक्षण की सीमा बनी रहेगी। इस तरह से कुल आरक्षण की सीमा अब 75 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है।

हालाँकि, इसे लागू कैसे किया जाएगा, इस को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। इस अधिनियम को लागू करने की राह में कई दिक्कतें हैं। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण की सीमा 50% तय की है। इसके ऊपर आरक्षण को बढ़ाना संवैधानिक रूप से चुनौतीपूर्ण है।

दरअसल, 1992 में सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने इंदिरा साहनी केस के फैसले में तय किया था कि आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकती है। मंडल कमीशन की सिफारिश पर अमल के फैसले के खिलाफ इंदिरा साहनी की अपील पर यह फैसला आया था। फिलहाल तमिलनाडु ही देश का ऐसा इकलौता राज्य है, जहाँ 69 प्रतिशत आरक्षण लागू है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा साहनी फैसले के आधार पर मराठा और जाट आरक्षण को 50 फीसदी की सीमा को लाँघने वाला बताकर खारिज कर दिया था।

इस विधेयक को लेकर बिहार में काफी विवाद हुआ था। विपक्षी पार्टियों ने इस विधेयक को असंवैधानिक बताया था। उन्होंने कहा था कि यह विधेयक बिहार में जातिवाद को बढ़ावा देगा। हालाँकि, सरकार ने इस विधेयक को मंजूरी देकर यह स्पष्ट कर दिया है कि वह पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

फ्लैट से मिली अंजू की सड़ती हुई लाश, बाल-बच्चेदार मनी खान के साथ लिव-इन में रहती थी: असम पुलिस ने गिरफ्तार किया

पूर्वोत्तर भारत के असम से ‘लव जिहाद’ का एक नया मामला सामने आया है। यहाँ के गुवाहाटी में लगभग 26 वर्षीया अंजू दोरजी नाम की महिला की 12 नवंबर 2023 को संदिग्ध मौत हो गई थी। पुलिस की जाँच में यह केस हत्या का निकला था। अब इस केस में पुलिस ने रविवार (19 नवम्बर, 2023) को मनी खान नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। शादीशुदा और बाल-बच्चेदार मनी खान मृतका अंजू दोराजी के साथ लम्बे समय से लिव इन रिलेशनशिप में था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला गुवाहाटी के सिक्स माइल इलाके का है। यहाँ मूल रूप से बोकाजन की निवासिनी अंजू दोराजी नाम की महिला एक किराए के फ़्लैट में रहती थी। अंजू के फ़्लैट में बाहर से काफी समय से ताला लटक रहा था। 12 नवम्बर को घर के अंदर से बदबू आने पर आसपास के लोगों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने फ़्लैट को बाहर से खोला तो अंदर अंजू की लाश पड़ी हुई थी। तफ्शीश में पता चला कि अंजू की हत्या हुई है। हत्या शव बरामद होने से 2-3 दिन पहले हुई थी। तब पुलिस अज्ञात हत्यारे के खिलाफ केस दर्ज कर के जाँच में जुट गई थी।

जाँच के दौरान पुलिस को मूल रूप से बरपेटा जिले के रहने वाले मनी खान के बारे में पता चला। मनी खान मृतका के साथ लम्बे समय से लिव इन रिलेशनशिप में था। घटना के दिन से मनी खान का फोन बंद आ रहा था। तब से वह लौट कर फ़्लैट पर भी नहीं आया था। पुलिस ने फ़्लैट और आसपास लगे CCTV फुटेज को खंगाला। बाद में अन्य साक्ष्यों को जमा कर के मनी खान को दिसपुर से गिरफ्तार किया गया। अंजू के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाला मनी खान पहले से शादीशुदा और 2 बच्चों का अब्बा है।

फिलहाल पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कहीं इस मामले में मनी खान के साथ कोई और शामिल तो नहीं है। साथ ही अंजू का बिसरा परीक्षण के लिए भेज दिया गया है।

थिएटर में ब्लू फिल्म या इंदिरा गाँधी के नाम पर टूर टॉकीज? घिरे कॉन्ग्रेसी उप-मुख्यमंत्री DK शिवकुमार, कर्नाटक में पोस्टर वॉर

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और जनता दल के बड़े नेता एच डी कुमारस्वामी ने राज्य के उपमुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार पर आरोप लगाया है कि वह अपने थिएटर में ‘ब्लू फिल्म’ दिखाया करते थे। वहीं उनके इस बयान पर डीके शिवकुमार ने प्रतिक्रिया दी है।

दरअसल, कुमारस्वामी ने शिवकुमार को लेकर कहा, “उनकी क्या गरिमा है? पोस्टर चिपकाना ही उनकी गरिमा है? वह डोड्डलहल्ली और सथानुर में टेंट थिएटर में ब्लू फिल्म दिखाया करते थे। यह दिखाता है वह कहाँ से आते हैं। यही पार्टी अध्यक्ष की गरिमा है क्या?”

गौरतलब है कि कुछ दिनों से कुमारस्वामी के खिलाफ पोस्टर के माध्यम से जंग छिड़ी हुई है। शिवकुमार के ब्लू फिल्म वाले थिएटर चलाने को लेकर यह बयान भी उसी बीच आए हैं। कुमारस्वामी पर बिजली चोरी का आरोप लगाते हुए कुछ दिन पहले उनके घर के बाहर पोस्टर लगे मिले थे। इसमें कुमारस्वामी को बिजली चोर बताया गया था।

वहीं डीके शिवकुमार ने इन आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कुमारस्वामी अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं। उन्होंने कहा, “मुझे कुमारस्वामी के लिए बड़ा दुःख होता है। वह इतने वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हैं और इस तरह की बातें कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “उनसे कहिए कि वह मेरी विधानसभा में जाएँ और लोगों से पूछे कि क्या उन्होंने मुझे ब्लू फिल्म दिखाने के लिए जिताया है। अगर कुमारस्वामी या और कोई भी यह सिद्ध कर दे तो मैं राजनीति छोड़ दूँगा। कुमारस्वामी को इस तरह बोलने के लिए शर्म आनी चाहिए।”

इससे पहले शिवकुमार ने कहा था, “मैं इंदिरा गाँधी के नाम से 4 टूरिंग टाकीज (जगह बदल कर चलाए जाने वाले टाकीज) चलाता था। केवल एक नहीं बल्कि मैं ऐसे तीन टाकिज चलाता था जो कि डोड्डलहल्ली, हरोबेले और कोडीहल्ली में थे। हुसेनाहल्ली वाला टेंट अब भी चल रहा है। मीडिया वहाँ जा कर देख सकता है कि क्या दिखाया जाता है।”

दरअसल, कुमारस्वामी के बेंगलुरु में जेपी नगर स्थित घर पर दीपावली में हुई सजावट में बिजली एक पोल से अवैध तरीके से ली गई थी। बाद में कुमारस्वामी ने कहा था कि उनकी गैरमौजूदगी में ऐसा हुआ और यह सजावट वाले ने किया है। कुमारस्वामी पर बेंगलुरु में बिजली देने वाले BESCOM ने शिकायत भी दर्ज करवा दी थी।

हालाँकि, कुमारस्वामी ने अपनी गलती मानते हुए इस मामले में माफ़ी भी माँगी थी और ₹68,000 का जुर्माना भी भरा था। इसके बाद भी कुछ शरारती तत्वों ने उनके घर के बाहर उनके कार्टून बनाए और पोस्टर लगाए जिन पर बिजली चोर लिखा हुआ था।

कुमारस्वामी के जुर्माना भरने के बाद भी यह तत्व बाज नहीं आए। उन्होंने दूसरे पोस्टर लगाए जिनमें लिखा हुआ था कि उन्होंने ₹68,000 की फिल्म बनाई है। इनमें यह भी लिखा हुआ था कि आखिर वह ट्रेलर से क्यों घबरा रहे हैं अभी तो पूरी फिल्म बाक़ी है। ऐसे कुछ पोस्टर जेडीएस के दफ्तर के बाहर भी मिले थे। इन्हीं पोस्टर के बाद यह पूरी जुबानी जंग छिड़ी है।

20 दिन और बढ़ाई गई मनीष सिसोदिया की न्यायिक हिरासत, शराब घोटाला में जेल में बंद हैं AAP नेता: वकीलों की धीमी गति पर कोर्ट ने फटकारा

दिल्ली के राउज अवेन्यू कोर्ट ने शराब घोटाले में जेल में बंद आम आदमी पार्टी (AAP) नेता और दिल्ली के पूर्व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की न्यायिक हिरासत को 11 दिसम्बर, 2023 तक बढ़ा दिया है। कोर्ट ने इस मामले की विस्तार से सुनवाई करते हुए पाया कि अभी प्रवर्तन निदेशालय (ED) कुछ और कागज जमा करेगा।

कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय को नोटिस भेजते हुए कहा कि 24 नवम्बर को इसी मामले में जेल में बंद आरोपित बिनय बाबू की अंतरिम जमानत याचिका पर बहस होगी। कोर्ट ने मामले में वकीलों की धीमी गति पर भी चिंता जताई और उन्हें जल्दी प्रक्रिया पूरा करने को कहा।

गौरतलब है कि दिल्ली के पूर्व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को दिल्ली शराब घोटाला नीति मामले में 9 मार्च 2023 में प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था। वह तब से कई बार कोर्ट के समक्ष जमानत के लिए याचिका लगा चुके हैं, लेकिन कोर्ट ने उन्हें कोई राहत नहीं दी है। इसी मामले में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह भी जेल में बंद हैं।

गौरतलब है कि मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपितों पर वर्ष 2021 में लाई गई शराब नीति के जरिए घोटाले का आरोप है। बताया गया है कि दिल्ली सरकार ने नई शराब नीति लाकर निजी शराब विक्रेताओं को बड़ा फायदा पहुँचाया। इन व्यापारियों से फायदे के एवज में सैकड़ों करोड़ रुपए आम आदमी पार्टी को मिले जिन्हें उसने चुनाव लड़ने में उपयोग किया।

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान मनीष सिसोदिया से भी प्रश्न पूछे। सिसोदिया समेत अन्य आरोपियों से कोर्ट ने कहा कि आप अब तक जाँच एजेंसी से कागजों की सॉफ्ट कॉपी माँग रहे थे और अब हार्ड कॉपी माँग रहे हैं। आप इसकी सुनवाई में देर लगाना चाहते हैं क्या?

वहीं इस मामले की जांच एजेंसी ED ने कहा कि उसने सभी आरोपितों के वकीलों को मेल के जरिए कागज उपब्ध करवा दिए हैं। ED का कहना है कि अब उन्हीं कागजों की हार्ड कॉपी माँगी जा रही है जिससे सुनवाई में देरी हो। हाल ही में कोर्ट ने मनीष सिसोदिया को उनकी पत्नी से मिलने की इजाजत दी थी। कोर्ट ने उन्हें 6 घंटे की मोहलत दी थी।

दलित सफाईकर्मी को मुस्लिम युवकों ने पीटा, जयपुर में धरने पर बैठे वाल्मीकि समाज के लोग: भाजपा ने बताया- गहलोत का ‘मुगलकाल’

राजस्थान की राजधानी जयपुर में दलित समुदाय के एक सफाईकर्मी के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। पिटाई का आरोप मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति पर लगा है। वहीं घटना के विरोध में भाजपा प्रत्याशी आचार्य बालमुकुंद ने वाल्मीकि समुदाय के लोगों के साथ हाथों में झाड़ू ले कर प्रदर्शन किया है। इस मामले में पुलिस केस दर्ज कर के जाँच कर रही है। घटना सोमवार (20 नवम्बर, 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना जयपुर के शास्त्री नगर थानाक्षेत्र की है। यहाँ के किशनपोल इलाके के वार्ड नंबर 55 में वाल्मीकि समुदाय के एक सफाईकर्मी के साथ एक मुस्लिम युवक ने मारपीट की। इस हमले में पीड़ित सफाईकर्मी बुरी तरफ से घायल हो गया जिसका इलाज अस्पताल में चल रहा है। पीड़ित के परिजनों का आरोप है कि जब उन्हें घटना की सूचना मिली तो वो शिकायत करने थाने पहुँचे लेकिन पुलिस ने उनकी FIR दर्ज नहीं की। घटना के चलते अन्य सफाईकर्मियों में आक्रोश फ़ैल गया।

हवामहल से भारतीय जनता पार्टी के विधानसभा प्रत्याशी आचार्य बालमुकुंद को जब इस मामले की जानकारी हुई तो वो भी अपने साथियों के साथ थाने पहुँचे। उन्होंने पुलिस पर आरोपितों को बचाने का आरोप लगाते हुए समर्थकों के साथ धरना दिया। इस दौरान जय श्री राम और भारत माता की जय के नारे लगे। जिसके बाद दबाव में आकर पुलिस ने आखिरकार मारपीट करने वाले युवकों पर FIR दर्ज की।

बताया जा रहा है कि कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया गया है जिनसे पूछताछ की जा रही है। वहीं पुलिस ने धरना दे रहे लोगों को कड़ी कार्रवाई का भरोसा दे कर शांत करवाया।

प्रदर्शन के दौरान अन्य सफाईकर्मियों ने आरोप लगाया कि उनके साथ मुस्लिम समुदाय के लोग आए दिन मारपीट करते हैं। साथ ही उन्होंने प्रशासन पर अपनी शिकायतों को अनदेखा करने का भी आरोप लगया। धरने के दौरान आचार्य बालमुकुंद ने आरोप लगाया कि सिर्फ एक ही क्षेत्र में नहीं बल्कि कई इलाकों में वर्ग विशेष के लोगों ने आतंक मचा रखा है। उन्होंने गहलोत सरकार के शासन को ‘मुगलकाल’ का नाम दिया। आचार्य बालमुकुंद का यह भी दावा है कि कॉन्ग्रेस शासन की मुस्लिम तुष्टिकरण नीति से परेशान हो कर उनके हजारों कार्यकर्ता भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन कर रहे हैं।

दिल्ली में वायु के बाद अब ‘जल’ संकट! मंत्री आतिशी ने वित्त सचिव पर फोड़ा ठीकरा, पानी के लिए तरसेगी राजधानी

दिल्ली की जनता अब साफ हवा के बाद साफ पानी के लिए तरसने वाली है। दिल्ली सरकार ने बलि का बकरा भी ढूँढ लिया है। अब दिल्ली सरकार की मंत्री आतिशी ने कहा है कि वित्त सचिव ने दिल्ली जल बोर्ड का पैसा रोक लिया है, वो फंड ही जारी नहीं कर रहे हैं, तो दिल्ली में अब जल संकट आना तय है। आतिशी ने कहा कि चीफ सेक्रेटरी के कहने पर वित्त सचिव आशीष वर्मा ने अगस्त से जल बोर्ड के सारे फण्ड बंद कर दिए हैं। वित्त मंत्री के लिखित आदेश की बाद भी फंड को जारी नहीं कर रहे हैं, जिसकी वजह से इमरजेंसी जैसे हालात को पैदा करता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में आतिशी ने LG को चिट्ठी लिखकर हस्तक्षेप करने को कहा है। चिट्ठी में उन्होंने लिखा है कि दिल्ली में पानी की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि चीफ सेक्रेटरी के कहने पर वित्त सचिव आशीष वर्मा ने अगस्त से जल बोर्ड के सारे फंड बंद कर दिए हैं। जय बोर्ड के पास सैलरी और रूटीन कामों के लिए भी पैसे नहीं बचे हैं।

जल मंत्री आतिशी ने दिल्ली के उप-राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना से तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील करते हुए कहा है कि सभी ठेकेदारों ने काम करने से मना किया गया है। आने वाले दिनों में कई इलाकों में पानी की भारी किल्लत, गंदा पानी और सीवर ओवरफ्लो हो सकते हैं। अगर ऐसा हुआ, तो दिल्ली में महामारी का खतरा बढ़ सकता है। ये समस्या इमरजेंसी जैसे हालात पैदा करता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फंड जारी करने को लेकर वित्त विभाग और दिल्ली जल बोर्ड के बीच पिछले कुछ माह से खींचतान चल रही है। दिल्ली जल बोर्ड आवंटित बजट से 1,800 करोड़ रुपये अधिक मांग रहा है, जिसे जारी करने से वित्त विभाग ने इनकार कर दिया है। इस मामले के सामने आने के बाद दिल्ली की राजनीति भी गरमा सकती है, जिसके बाद विपक्षी पार्टियाँ दिल्ली सरकार को निशाने पर ले सकती हैं।

मदरसे में मौलाना ने नाबालिग छात्र के साथ किया मुख और गुदा मैथुन: अश्लील वीडियो से कई बच्चे बने हवस का शिकार, यूपी पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर जिले में मदरसे के अंदर नाबालिग किशोर से दुष्कर्म का मामला सामने आया है। इस मामले में पुलिस ने दीनी तालीम देने वाले मौलाना इजरायल को गिरफ्तार किया है। वहीं पीड़ित किशोर की उम्र 18 साल बताई जा रही है जिसका आरोपित मौलाना ने अश्लील वीडियो भी बना लिया था। ऐसा आरोप है कि मौलाना ने मदरसे के अन्य छात्रों के साथ भी अश्लील हरकतें की हैं। घटना रविवार (19 नवंबर, 2023) की है।

यह मामला मुज़फ्फरनगर के थानाक्षेत्र खतौली का है। यहाँ मदरसा सिद्दीकचा में आसपास के कई बच्चे दीनी तालीम लेते हैं। बच्चों को तालीम देने का काम मौलाना इजरायल को मिला हुआ है जो मुज़फ्फरनगर के ही सद्दीक नगर मोहल्ले का रहने वाला है। पीड़ित छात्र भी इसी मदरसे में पढ़ता है। 19 नवंबर को पीड़ित छात्र खुद थाने पहुँचा और हयात के बेटे मौलाना इजरायल के खिलाफ तहरीर दी। तहरीर में पीड़ित ने अपने साथ 3 वर्षों से कुकर्म किए जाने की जानकारी दी।

शिकायत में पीड़ित छात्र ने बताया कि लगभग 3 साल पहले जब उसकी उम्र 15 साल थी तब वह मदरसे में पढ़ने गया था। शुरू से ही मौलाना इजरायल पीड़ित पर गंदी नजर रखने लगा था। उसने बच्चे को बहला फुसला कर अपने झाँसे में लिया। बाद में उसने पीड़ित के साथ मुख और गुदा मैथुन किया।

जब पीड़ित छात्र ने मौलाना इजरायल की इस हरकत का विरोध किया तो उसको जान से मारने की धमकियाँ दी गईं। पीड़ित छात्र इन धमकियों से डर कर खामोश रहा और मौलाना 3 साल तक अपनी मनमर्जी करता रहा। बता दें कि ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी भी मौजूद है।

वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपित मौलाना ने पीड़ित छात्र की अश्लील वीडियो भी बना ली थी। इसी वीडियो को दिखा कर वह नाबालिग को ब्लैकमेल करता रहा।

रविवार (19 नवम्बर) को भी इजरायल ने एक बार फिर से पीड़ित को बुला कर कुकर्म किया। तब पीड़ित के सब्र का बाँध टूट गया और आखिरकार पीड़ित ने मौलाना की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई। पुलिस ने मौलाना इजरायल के खिलाफ IPC की धारा 377 और 506 के साथ पॉक्सो एक्ट की धारा 3/4 के तहत FIR दर्ज की है। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए 20 नवम्बर को मौलाना को गिरफ्तार कर लिया। वहीं अब मामले में जाँच और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

हाईकोर्ट ने कहा – ‘मंदिरों में काम नहीं कर सकते गैर-हिन्दू’: ईसाई महिला से शादी कर बदल लिया था धर्म, दलित बता की थी नौकरी

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि हिन्दू मंदिरों में केवल वही लोग काम कर सकते हैं जो हिन्दू हैं। हिन्दू मंदिरों में दी जाने वाले नौकरियों में मुस्लिमों और ईसाइयों या अन्य धर्मों के लोगों को नौकरियाँ नहीं दी जा सकती। आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने यह निर्णय एक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर दिया।

दरअसल, P सुदर्शन बाबू नाम के एक ईसाई व्यक्ति ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के समक्ष यह याचिका दायर की थी कि उसे ईसाई होने के कारण श्रीशैलम देवस्थानम बोर्ड की नौकरी से ना निकाला जाए। हाईकोर्ट ने उसकी यह याचिका रद्द कर दी। दरअसल, ईसाई पी सुदर्शन को वर्ष 2002 में आंध्र प्रदेश के मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का प्रबंधन करने वाले श्रीशैलम देवस्थानम बोर्ड में रिकॉर्ड असिस्टेंट के तौर पर नौकरी दया के आधार पर दी गई थी। जब उसे 2002 में नौकरी मिली तो वह ‘माला’ नाम की अनुसूचित जाति से संबंध रखता था।

जानकारी के अनुसार, नौकरी पाने के कुछ वर्षों के बाद उसने एक ईसाई महिला से विवाह कर लिया। इसके पश्चात उसके खिलाफ लोकायुक्त के पास शिकायत दर्ज करवाई गई कि उसने अपना असली ईसाई मजहब छुपाया है और खुद को हिन्दू बताकर नौकरी हासिल की है। सुदर्शन ने इसके बदले लोकायुक्त को अपने पुराने कागज दिखाए जिसमें उनकी अनुसूचित जाति को लेकर जानकारी दर्ज थी।

हालाँकि, लोकायुक्त के समक्ष होली क्रॉस चर्च के भी कागज लाए गए। लोकायुक्त ने उसके सभी कागजों की जाँच और अन्य सभी बिन्दुओं को देखते हुए स्पष्ट किया कि सुदर्शन ने अपना मजहब छुपाया है। इसी के चलते उसको नौकरी से निकाल दिया गया।

सुदर्शन ने वर्ष 2012 में अपने नौकरी से निकाले जाने के विरुद्ध आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उसका कहना था कि उसने नौकरी लेते समय अपना धर्म नहीं छुपाया है। हालाँकि, उच्च न्यायालय ने उसकी बात नहीं मानी। कोर्ट ने कहा कि उसका विवाह एक ईसाई महिला से हुआ है और यदि उसने बिना धर्म बदले महिला से विवाह किया होता तो यह विशेष विवाह अधिनियम के अंतर्गत आता। इस विवाह के लिए उसे प्रमाण पत्र भी दिया जाता। यह सुदर्शन के मामले में नहीं हुआ। ऐसे में स्पष्ट है कि महिला-पुरुष दोनों का धर्म एक ही था।

कोर्ट ने यह भी कहा कि होली क्रॉस चर्च के रिकॉर्ड में उसके नाम के आगे रिलीजन वाले कॉलम में ईसाई दर्ज है और उसने इस पर हस्ताक्षर किए थे। ऐसे में यह स्पष्ट होता है कि वह ईसाई है। वह श्रीसेलम मंदिर में काम नहीं कर सकता है इसलिए उसकी याचिका खारिज की जाती है।

बागेश्वर धाम सरकार को धमकियाँ दे रहा मुस्लिम से निहंग सिख बना तूफान सिंह: मर गई थी अम्मी, गुरुद्वारे में छोड़ गया था अब्बा

मुस्लिम से निहंग सिख बना तूफ़ान सिंह उर्फ़ हरमनदीप सिंह बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री को धमकियाँ दे रहा है। वह इससे सम्बंधित वीडियो इन्स्टाग्राम पर डाल रहा है। तूफ़ान सिंह ने 1 नवम्बर 2023 को इन्स्टाग्राम पर एक वीडियो डाली थी, जिसमें उसने बागेश्वर धाम सरकार को धमकाया था। धमकी देने से पहले उसने धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की एक वीडियो क्लिप भी अपने वीडियो में चलाई थी। इस वीडियो में वह हिन्दुओं के लिए समस्याएँ खड़ी करने वालों को चेतावनी देते हुए दिखते हैं।

तूफ़ान सिंह इस वीडियो में कहता है, “वो (पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री) सिखों को धमका रहा है। मेरा वीडियो उसे भेज देना, मैं उसे बताना चाहता हूँ कि बेटे तुम किसे धमका रहे हो? वो तुम्हारे जैसे 20 आदमियों पर रोज चलते हैं। हम किसी को भड़काते नहीं लेकिन जब समय आता है तो अपने और दूसरों के धर्म के लिए सर कटा देते हैं। क्या तुम हमें धमका रहे हो? जाकर अपने बाप को धमकाओ। ये सब कहने के बाद पंजाब में घुस कर दिखाओ। हम तुम्हें पीटेंगे और सिखाएँगे कि कैसे धमकी दी जाती है। हम धमकाते नहीं हम एक्शन लेते हैं।”

तूफ़ान सिंह ने पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की जो क्लिप अपने वीडियो में चलाई है, उसमें वह सिखों नहीं बल्कि पंजाब में धर्मांतरण करवाने वाली ईसाई मिशनरियों पर बात कर रहे थे। वह इस वीडियो में कहते हुए दिखते हैं, “मेरा विरोध करने वालों पहले मुझे कभी पढ़ो, मुझे समझो, मुझे सुनो। हम तुम्हारे खिलाफ नहीं है, लेकिन तुम हमारे सनातन को छेड़ोगे तो छोड़ेंगे नहीं। आप बीज मत बोइए, फल आपको नहीं काटना पड़ेगा। मैं पंजाब सरकार से हाथ जोड़ के प्रार्थना करता हूँ कि इस व्यास गद्दी की बात सुनते हुए कड़ा धर्मांतरण कानून लाएँ।”

गौरतलब है कि साल 2023 के अक्टूबर में पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री पंजाब पहुँचे थे और उन्होंने यहाँ तेजी से चल रहे ईसाई धर्मांतरण पर बात की थी। उन्होंने कहा था कि धर्मान्तरण करने वालों को गुरुद्वारों और मंदिरों में घुस कर हिन्दुओं को नहीं बरगलाना चाहिए। उन्होंने कहा था कि वह हालेलुइया चिल्लाने वालों को हिन्दुओं को धर्मान्तरित नहीं करने देंगे।

इसको लेकर उनके खिलाफ एक ईसाई समूह ने शिकायत भी दर्ज करवाई थी। कुल मिलाकर मामला यह है कि तूफ़ान सिंह ने जिस वीडियो के आधार पर पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री को धमकी दी, दरअसल उसमें कथा सुनाने के दौरान सिखों नहीं बल्कि ईसाई मिशनरियों का विरोध किया था। यहाँ यह भी प्रश्न उठता है कि आखिर तूफ़ान सिंह है कौन?

तूफ़ान सिंह: पहले मुस्लिम, फिर निहंग और कट्टरपंथी

जानकारी के अनुसार, तूफ़ान सिंह का जन्म एक मुस्लिम परिवार में हुआ था। उसकी अम्मी की मौत उसके जन्म के समय हो गई थी। उसके अब्बा उसे गुरुद्वारे में छोड़ गए थे। वह यहीं रह कर पला बढ़ा है और बड़े होने पर उसने सिख धर्म अपना लिया। उसने यह जानकारी खुद एक वीडियो में दी थी।

तूफ़ान सिंह केवल इसी कारण से विवादों में नहीं है कि उसने पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री को धमकी दी है। वह पहले भी सोशल मीडिया पर खालिस्तान, अमृतपाल सिंह और जरनैल सिंह भिंडरावाले का समर्थन करते हुए देखा जा चुका है।

फरवरी 2023 में सामने आए एक वीडियो में वह पुलिस वालों से छीनी हुई दंगा रोधी जैकेट पहने भी नजर आया था। उसने इस वीडियो में पुलिस वालों को ‘भइये’ कह कर संबोधित किया। ‘भइये’ पंजाब में हिंदी भाषी राज्यों से आए मजदूरों के लिए अपमानजनक तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है। जिस विरोध प्रदर्शन में वह दिखा था, उसमें 33 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इसके पश्चात उसका नाम और फोटो पुलिस द्वारा जारी की गई वॉन्टेड लिस्ट में भी था।

विरोध-प्रदर्शन करने वाले लोग जेलों में बंद कुछ सिखों की रिहाई की माँग कर रहे थे। इनमें पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के हत्यारे भी थे। पुलिस ने जब इन प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की थी, इन्होंने पुलिस पर हमला बोल दिया था।

तूफ़ान सिंह के कई अन्य वीडियो भी सामने आए हैं। अपने इन्स्टाग्राम अकाउंट पर डाले गए एक वीडियो में वह एक पिस्टल से फायर करते हुए दिखता है। दूसरे पोस्ट में वह भिंडरावाले की फोटो वाले टीशर्ट पहने हुए है।

Chandigarh: Sikh protesters go on a rampage on Chandigarh-Mohali border, 33 cops injured, riot gear looted

एक अन्य वीडियो में वह दावा करता है कि वह पंजाब की सरकार से लड़ रहा है, जो सिखों का दमन कर रही है और बंदी सिखों को नहीं छोड़ रही। गौरतलब है कि कट्टर खालिस्तानी लोग सरकार से लड़ने का बहाना लेकर हिंसात्मक गतिविधियाँ करते रहे हैं। एक अन्य वीडियो में वह खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह का समर्थन करता है, जहाँ वह बताता है कि अमृतपाल दुबई से सिखों का कल्याण करने के लिए वापस आया है।

तूफ़ान सिंह सोशल मीडिया का उपयोग पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री और सरकार के खिलाफ बयानबाजी के लिए कर रहा है। ऐसे अन्य भी कई सोशल मीडिया इन्फ़्लुएन्सर हैं, जो यही करके समाज में घृणा फैला रहे हैं। तूफ़ान सिंह का छोटी उम्र में कट्टरपंथी बन जाना इसका सबूत है।