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केजरीवाल के ‘चेहरा चमकाने’ पर सुप्रीम कोर्ट से फटकार, कहा – ‘दिल्ली सरकार का प्रचार वाला बजट फ्रीज करके RRTS में डाल देंगे’: रैपिड रेल के लिए नहीं दे रही पैसे

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को रैपिड रेल प्रोजेक्ट में पैसा नहीं देने के लिए फटकार लगाई और कहा कि आपका प्रचार वाला बजट उसमें डाल देंगे। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार के प्रचार वाले बजट को तुरंत प्रभाव से फ्रीज भी कर दिया है और कहा है कि अगर एक सप्ताह में दिल्ली सरकार ने रैपिड रेल प्रोजेक्ट का पैसा नहीं जारी किया, तो ये (प्रचार वाला) पैसा रैपिड रेल ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट में डाल दिया जाए।

इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली की केजरीवाल सरकार के विज्ञापन पर तीन सालों का बजट 1100 करोड़ रुपए है। सिर्फ इसी साल के लिए इसका बजट 550 करोड़ रुपए है, लेकिन इस प्रोजेक्ट के लिए दिल्ली सरकार 415 करोड़ रुपए नहीं दे रही है। ऐसे में दिल्ली सरकार ये 415 करोड़ रुपए एक सप्ताह में रिलीज करे, वर्ना उसके प्रचार बजट का पैसा हम इस प्रोजेक्ट के लिए ट्रांसफर कर देंगे।

एएनआई ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस मामले की जानकारी देते हुए सुप्रीम कोर्ट के हवाले से कहा, “आरआरटीएस प्रोजेक्ट के लिए फंड नहीं देने पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को चेताया। दिल्ली सरकार ने अदालत के आदेश का पालन क्यों नहीं किया? हम आपके (दिल्ली सरकार के) विज्ञापन बजट पर रोक लगा देंगे। हम इसे अटैच करेंगे और इसे यहाँ ले जाएँगे।”

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि विज्ञापन के लिए दिल्ली सरकार का फंड प्रोजेक्ट के लिए ट्रांसफर किया जाए, हालाँकि, इस आदेश को एक सप्ताह की अवधि के लिए स्थगित रखा है और कहा कि अगर फंड ट्रांसफर नहीं किया गया तो आदेश लागू हो जाएगा।”

अदालत ने राज्य सरकार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि आपकी तरफ से भुगतान का आश्वासन दिया गया। हमने पहले भी कहा था कि आपका प्रचार का पैसा जब्त कर लिया जाएगा। अब हम इसे जब्त करने का आदेश दे रहे हैं। सिर्फ 1 हफ्ते तक यह आदेश स्थगित रहेगा। तब तक आपने कदम नहीं उठाए तो आदेश लागू हो जाएगा। ऐसे में अदालत ने साफ कर दिया है कि अगर फंडिंग नहीं हुई, तो दिल्ली सरकार को विज्ञापन बजट से हाथ धोना पड़ सकता है।

बता दें कि दिल्ली-मेरठ, दिल्ली-अलवर और दिल्ली-पानीपत आरआरटीएस के लिए दिल्ली सरकार पर इस साल के 565 करोड़ रुपए बकाया हैं। यहाँ हैरानी वाली बात ये है कि दिल्ली सरकार का इस साल का विज्ञापन बजट 550 करोड़ रुपए हैं। यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए विज्ञापन बजट को जब्त करने की बात कही है। इस मामले पर अब अगली सुनवाई 28 नवंबर, 2023 को होनी है।

क्या है रैपिड रेल प्रोजेक्ट?

रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) एक नई, सेमी-हाई स्पीड, रेल-आधारित कम्यूटर ट्रांजिट प्रणाली है। आरआरटीएस को हर 15 मिनट में और आवश्यकतानुसार हर 5 मिनट में इंटरसिटी आवागमन के लिए हाई-स्पीड ट्रेनें प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है।

बता दें कि आरआरटीएस की डिजाइन गति 180 किमी प्रति घंटे और परिचालन गति क्षमता 160 किमी प्रति घंटे है। दिल्ली से जुड़े कुल 3 आरआरटीएस प्रोजेक्ट हैं। इसमें से पहला प्रोजेक्ट दिल्ली मेरठ, दूसरा दिल्ली-अलवर और तीसरा दिल्ली-पानीपत के बीच है। इन प्रोजेक्ट्स के जरिए दिल्ली को यूपी, राजस्थान और हरियाणा से जोड़ा जाएगा। वहीं मेरठ वाले प्रोजेक्ट का कुछ हिस्सा पूरा किया जा चुका है।

सूअर की बलि दे रहे थे दलित, विरोध करने लगे मुस्लिम: 7 साल में एक बार आती है रविदास समाज की जो पूजा, उसमें डाला व्यवधान

झारखंड के गोमिया में दलित समाज द्वारा सूअर की बलि देने के एक पारम्परिक कार्यक्रम के दौरान विवाद खड़ा हो गया। यह विवाद मुस्लिम समुदाय द्वारा आपत्ति जताने के बाद हुआ। मुस्लिम पक्ष का आरोप है कि कटे सूअर के कुछ टुकड़े उनके मोहल्ले में भी बिखेरे गए थे। फिलहाल गाँव में तनावपूर्ण शांति है। इलाके में पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। घटना रविवार (19 नवंबर, 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला बोकारो के गोमिया के गाँव अइयर का है। यहाँ रविवार को रविदास समाज के लोगों ने अपनी पारम्परिक पूजा की। इस पूजा के दौरान सूअर की बलि दी गई। बताया जा रहा है कि सूअर की बलि के बाद उसके मांस को आसपास के लोग अपने साथ ले गए। मुस्लिम समुदाय के लोगों का आरोप है कि बलि चढ़ाने वालों ने मांस के टुकड़ों को इधर-उधर बिखेर दिया। कुछ टुकड़े मुस्लिम बस्ती में भी मिले। कुछ ही देर में यह खबर फैल गई और मुस्लिम समुदाय के लोग अपने-अपने घरों से निकल आए।

हालात तनावपूर्ण होता देख कर रविदास समुदाय के लोग भी मोर्चे पर डट गए। दलित समुदाय के लोगों का कहना है कि उनका ये त्योहार 7 साल में एक बार आता है जिसमें वो पारम्परिक तौर पर सूअर की बलि देते हैं। ऐसा वो धान की कटाई से पहले अपने इष्ट देव को खुश करने के लिए करते हैं। रविदास समुदाय के लोग अपनी पूजा में किसी भी प्रकार का व्यवधान नहीं चाहते थे। मामले की जानकारी मिलते ही मौके पर भारी पुलिस बल पहुँचा। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझा-बुझा कर अलग किया।

बाद में रविदास समाज और मुस्लिम पक्ष के बीच जिले के सीनियर प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में बैठक हुई। बैठक में दोनों ही पक्ष खुद को सही और दूसरे को गलत बता रहे थे। आख़िरकार सीनियर अधिकारियों ने दोनों पक्षों को फिलहाल शांति बनाए रखने के लिए कहा। बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच जमीनी विवाद भी निकल कर सामने आया। प्रशासनिक अधिकारियों ने जनजातीय लोगों के धर्म महासम्मेलन के बाद इस मामले का स्थाई समाधान निकालने की बात कही है। गाँव में एहतियातन पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

गौरतलब है कि अगस्त 2021 में बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में इस से मिलता-जुलता विवाद हुआ था। तब देवरिया के रामलीला गाछी बाजार में शुक्रवार (20 अगस्त, 2021) को ताजिया जुलूस और सुअरिया मेला के आयोजन को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हो गया था। तब मुस्लिम पक्ष ने ताजिया जुलूस के दौरान लगने वाले सुअरिया मेले का विरोध किया था।तनाव और तनातनी बढ़ने के चलते दोनों पक्षों के लोग चोटिल हुए थे। आक्रोशित हिन्दुओं की पुलिस के साथ भी झड़प हुई थी।

मर गईं जवाहर लाल नेहरू की ‘वनवासी पत्नी’, जिसके कारण ताउम्र झेला समाज का बहिष्कार, उनके पर-नाती राहुल गाँधी कभी मिलने भी नहीं गए

जवाहरलाल नेहरू की वनवासी जनजाति ‘पत्नी’ बुधनी मंझियाइन (Budhni Mejhan) का शुक्रवार (17 नवंबर, 2023) की देर रात झारखंड में पंचेत के नजदीक अपने घर में निधन हो गया। 80 साल की बुधनी की मौत हार्ट अटैक की वजह से हुई। दरअसल, पंडित नेहरू की वजह से उन्हें अपने संथाली समुदाय से ताउम्र बहिष्कार का सामना करना पड़ा था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रविवार (19 नवंबर, 2023) को उनका अंतिम संस्कार किया गया। वो अपने पीछे अपनी 60 साल की बेटी रत्ना और 35 साल के पोते बापी को छोड़ गई हैं। उनकी मौत के बाद पंचेत पंचायत के मुखिया भैरव मंडल ने जवाहरलाल नेहरू की ‘वनवासी पत्नी’ के सम्मान में एक स्मारक बनाने के लिए दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) को पत्र लिखा है।

उन्होंने रत्ना के लिए घर और पेंशन की भी माँग की है। हालाँकि इसे लेकर डीवीसी के डिप्टी चीफ इंजीनियर सुमेश कुमार ने कहा, “ये फैसला शीर्ष अधिकारियों से सलाह के बाद ही लिए जा सकते हैं।”

पंडित नेहरू बने बुधनी के बहिष्कार की वजह

बता दें कि 6 दिसंबर, 1959 के दिन बुधनी की जिंदगी ने नया मोड़ ले लिया था। उस दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू वहाँ दामोदर नदी पर बनाए गए पंचेत बाँध के उद्घाटन के लिए पहुँचे थे। दामोदर घाटी निगम (DAC) ने पंडित नेहरू के स्वागत के लिए 15 साल की लड़की बुधनी मंझियान को चुना था।

इस दौरान बुधनी बेहद खुश थी, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि इस पल से उनकी जिंदगी एक बेहद परेशानी भरा मोड़ लेने जा रही है। दरअसल, ये पहला बाँध था जिसका उद्घाटन किसी वनवासी महिला से करवाया जा रहा था। यहीं वजह रही की कि जवाहरलाल नेहरू ने बुधनी को सराहना के तौर पर एक माला दे दी।

बस उत्साह और खुशी के मौके पर दी गई यही माला उनको ताउम्र की परेशानी दे गई। पंडित नेहरू चाहते थे कि बाँध का उद्घाटन किसी ऐसे शख्स से कराया जाए जिसने इसे बनाने में योगदान दिया हो। यही वजह रही कि इसके लिए लोकल मजदूर बुधनी को बुलाया गया था।

पंचेत बाँध के उद्घाटन की उसी रात इस घटना की चर्चा के लिए संथाली समाज की पंचायत बुलाई गई। बुधनी को संथाली पंयाचत में जब यह बताया गया कि जनजातीय परंपराओं के हिसाब से अब उनकी शादी जवाहरलाल नेहरू से हो चुकी है, तो वह खौफ में आ गई, क्योंकि एक-दूसरे को माला पहनाई गई थी।

वनवासी परंपराओं के हिसाब से पंचायत ने पंडित नेहरू के बुधनी के पति होने का ऐलान कर दिया। वनवासी रिवाज के मुताबिक, पंडित नेहरू वनवासी नहीं थे इसलिए संथाली समुदाय ने उनका बहिष्कार किया। इस वजह से खुद ब खुद बुधनी का भी समुदाय ने बहिष्कार कर दिया।

हालाँकि, उस वक्त बुधनी ने दामोदर घाटी निगम में काम करना जारी रखा, लेकिन वो वहाँ अधिक दिनों तक नहीं रह सकीं। इस घटना के दो साल बाद ही 1962 में बुधनी को नौकरी से निकाल दिया गया मजबूरन बुधनी बाद में झारखंड चली गईं और वहाँ 7 साल तक जीने के लिए जद्दोजहद करती रहीं।

इसके बाद में उनकी मुलाक़ात सुधीर दत्ता नाम के एक शख्स से हुई। वो उनके करीब आ गईं। दोनों शादी करना चाहते थे, लेकिन नहीं कर सके। उन्हें डर था कि समाज में उन्हें इसके दुष्परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। हालाँकि, इसके बावजूद वो साथ रहे और दोनों के तीन बच्चे भी हुए।

राजीव गाँधी गए थे मिलने

बताया जाता है कि 1985 में जब राजीव गाँधी को बुधनी के बारे में पता चला तो इसके बाद उन्होंने उनका पता लगा लिया और बुधनी उनसे मिलने भी गईं। इसका फायदा ये हुआ कि उन्हें दामोदर घाटी निगम में उनकी नौकरी वापस मिल गई।

वहीं बुधनी से जब 2016 में उनकी उम्मीदों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “मैं राहुल गाँधी से अपील करती हूँ कि वह हमें एक घर और मेरी बेटी के लिए नौकरी दिलाएँ, ताकि हम अपना बाकी जीवन शांति से बिता सकें।”

बुधनी के साथ बाँध का उद्घाटन करने वाले रावोण मांझी ने एक बार बीबीसी से कहा था, ”जवाहरलाल नेहरू ने हमें मुफ्त बिजली और घर देने का वादा किया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ।” जब उनसे बुधनी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह उस घटना को याद नहीं करना चाहते।

PM मोदी ने ऐसा क्या कह दिया कि मुस्कुराने लगे रोहित शर्मा और विराट कोहली: वीडियो में दिखा टीम इंडिया के ड्रेसिंग रूम का नज़ारा, प्रधानमंत्री ने दिया न्योता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खिलाड़ियों से ड्रेसिंग रूम में जाकर मिले और उनका हौसला बढ़ाया। पीएम मोदी द्वारा खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाने का वीडियो अब सामने आया है, जिसमें वो खिलाड़ियों की हौसला-अफजाई करते हुए कहते हैं कि पूरा देश आपके साथ खड़ा है। उन्होंने भारतीय टीम के खिलाड़ियों से एक-एक कर मुलाकात की और सभी का हौसला बढ़ाया। इस दौरान भारतीय क्रिकेट टीम के कोच राहुल द्रविड से भी वो गले मिले और उनसे हौसला बनाए रखने को कहा।

पीएम मोदी का टीम इंडिया के खिलाड़ियों से ड्रेसिंग रूम में मुलाकात का वीडियो सामने आया है। इसमें देखा जा सकता है कि पीएम मोदी टीम के सभी खिलाड़ियों से मुलाकात कर रहे हैं। वह सबसे पहले कप्तान रोहित शर्मा और विराट कोहली से मिलते हैं। वो रोहित शर्मा ने बोलते हैं, “आप लोग 10 मैच जीतकर यहाँ तक आए हैं। ये तो होता रहता है। मुस्कुराइए भाई, देश आप लोगों को देख रहा है।” वीडियों में पीएम मोदी रोहित और विराट के कंधे को थपथपाते हुए भी दिख रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी खिलाड़ियों को दिल्ली आने का भी न्यौता दिया है और उनसे संपर्क करने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि मैं यहाँ बस हौसला बढ़ाने आ गया था, आप लोग दिल्ली आइए, तो जरूर मिलिए। आपसे मुलाकात के लिए समय निकालेंगे।

पीएम मोदी टीम इंडिया के कोच राहुल द्रविड़ से कहते हैं, “आप लोगों ने बहुत मेहनत की है।” इस दौरान पीएम मोदी ने रविंद्र जडेजा से गुजराती में बातचीत की, तो जसप्रीत बुमराह से भी पूछा कि क्या वो गुजराती में बात करते हैं, इसके जवाब में बुमराह कहते हैं “थोड़ो-थोड़ो (थोड़ा-थोड़ा)।” फिर वो श्रेयस अय्यर, सूर्य कुमार यादव, कुलदीप यादव से भी मिलते हैं।

पीएम मोदी ने मोहम्मद शमी को गले से लगा लिया और कहा कि आपने इस बार बहुत अच्छा किया है। वहीं, KL राहुल का नाम लेकर उनका हौसला भी पीएम मोदी बढ़ाते दिखे। समाचार एजेंसी ANI ने पीएमओ के हवाले से ये वीडियो जारी किया है और लिखा है, “19 नवंबर को गुजरात के अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में आईसीसी विश्व कप फाइनल के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीम इंडिया से उनके ड्रेसिंग रूम में मुलाकात की। पीएम ने खिलाड़ियों से बात की और पूरे टूर्नामेंट में उनके प्रदर्शन के लिए उनका हौसला बढ़ाया।”

बता दें कि भारतीय क्रिकेट टीम विश्व कप के फाइनल मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया से 6 विकेट से हार गई। पिछले 10 सालों में भारतीय टीम एक भी आईसीसी ट्रॉफी नहीं जीत पाया है। इस हार के बाद सभी खिलाड़ियों के चेहरे मायूसी से भरे नजर आए थे। खुद पीएम मोदी इस मौके पर स्टेडियम में मौजूद थे और उन्होंने विजेता कप्तान पैट कंमिस को ट्रॉफी भी सौंपी और इसके बाद रात में भारतीय ड्रेसिंग रूप में जाकर उन्होंने फाइनल मुकाबला हारने वाले खिलाड़ियों से मुलाकात की।

2 औरत, दोनों में लेस्बियन संबंध… अब दोनों को हुआ बच्चा, पला भी दोनों की गर्भ में: ‘INVOcell’ तकनीक का प्रयोग पहली बार

इंग्लैंड का एक लेस्बियन कपल दुनिया का ऐसा दूसरा ऐसा जोड़ा बन गया है जिनके बच्चे को पैदा होने से पहले दोनों माँओं के गर्भ में रहने का मौका मिला। इस कपल ने बीते महीने 30 अक्टूबर, 2023 में एक प्यारे से बेटे डेरेक एलॉय को जन्म दिया है।

डेरेक एलॉय के पैदा होने से उसकी पैरेंट्स बनीं 30 साल की एस्टेफ़ानिया और 27 साल की अज़हरा बेहद खुश है। और हों भी क्यों न, उसकी पैदाईशी का दोनों ने काफी बेसब्री से इंतजार किया था। पैदा होते वक्त नन्हें डेरेक एलॉय का वजन 7 पौंड 4 औंस से कुछ अधिक था।

उसके लिए दोनों ने इस साल मार्च में ही फर्टिलिटी क्लिनिक से संपर्क साधा था। एस्टेफेनिया और अज़हारा ने गर्भधारण करने के लिए इनवोसेल नामक एक नए तरह के फर्टिलिटी ट्रीटमेंट INVOcell का इस्तेमाल किया गया। इसमें अँगूठे के आकार का अंडे और शुक्राणु वाला एक छोटा सा कैप्सूल वेजाइना के अंदर रखा जाता है।

ये अंडे और शुक्राणु वाला कैप्सूल सबसे पहले एस्टेफ़ानिया की वेजाइना में रखा गया था। इसे उनके शरीर में 5 दिनों के लिए छोड़ दिया गया ताकि शुक्राणु प्राकृतिक तरीके से अंडों को निषेचित कर सके।

इस कैप्सूल को एस्टेफेनिया के शरीर से निकाल कर आगे के विकास के लिए अज़हरा के गर्भाशय में स्थानांतरित करने से पहले भ्रूण की जाँच की गई। रिपोर्ट के मुताबिक डेरेक को जन्म देने वाला अंडाणु एस्टेफेनिया के गर्भ में निषेचित हुआ था, लेकिन अज़हरा ने उसे नौ महीने तक अपने गर्भ में रखा।

इसके बाद पाल्मा, मेजर्का में सी-सेक्शन से अज़हरा ने बेटे डेरेक एलॉय को जन्म दिया। इसके साथ ही डेरेक INVOcell के जरिए पैदा हुआ पहला यूरोपीय बच्चा बन गया। इस तकनीक का इस्तेमाल इससे पहले के 2018 में अमेरिका के टेक्सास के कपल ब्लिस और एशले कूल्टर के बेटे स्टेटसन के पैदा होने के लिए किया गया था।

डेरेक के जन्म को संभव बनाने वाली टीम की एक डॉक्टर के मुताबिक, “इस प्रक्रिया में नयापन यह है कि दोनों भ्रूण को रख सकते हैं और जब तक जरूरत हो तब तक इसे साझा कर सकते हैं।”

बता दें कि इस कपल को इस इलाज के लिए दवा सहित 5,489 अमेरिकी डॉलर खर्च करने पड़े, लेकिन इसका नतीजा उनकी जिंदगियों में खुशियाँ लेकर आया। एस्टेफ़ानिया ने स्थानीय मीडिया को बताया, “यह हम दोनों को उसके पैदा होने के काबिल बनाने का एक तरीका था। यह बात कि मैं इस तरह से उसे अपने गर्भ में रख सकती हूँ, बड़ी रोमाँचक थी।”

एस्टेफ़ानिया ने आगे कहा, “अब, मैं जब उसे देखती हूँ, तो ख़ुशी से भर जाती हूँ मैं और मेरी साथी एक-दूसरे की देखभाल करते हैं और हमें लगता है कि यह कुछ ऐसा है जो हम दोनों के भीतर पला है, कुछ ऐसा जो हमने एक साथ किया है।”

इससे चार साल पहले भी 2019 में एक ब्रिटिश लेस्बियन कपल ने साझे मातृत्व वाली आईवीएफ तकनीक के जरिए एक बेटे को जन्म दिया था। तब 28 साल की जैस्मीन फ्रांसिस-स्मिथ और उनकी 30 साल की पत्नी डोना ने बेटे ओटिस को जन्म दिया था। उनका ट्रीटमेंट लंदन के वुमन क्लिनिक में हुआ था।

ऑस्ट्रेलिया से वापस ली जाएगी वर्ल्ड कप की ट्रॉफी, 3 मैचों से होगा चैंपियन का फैसला: ‘ICC और BCCI के बीच समझौता’ वाली खबर वायरल, जानिए पूरी बात

सोशल मीडिया पर एक लेख तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें कहा गया है कि अभी ऑस्ट्रेलिया वर्ल्ड कप 2023 का विजेता नहीं बना है। वर्ल्ड कप 2023 के विजेता का निर्णय 2 और मैच के बाद किया जाएगा। इसके लिए भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) ने पहले ही ICC से बात कर ली थी। दावा है कि फाइनल और इन दो मैच में जो जीतेगा वह वर्ल्ड कप विजेता बनेगा। आइए, जानते हैं कि इस वायरल रिपोर्ट में क्या-क्या लिखा गया है।

“ऑस्ट्रेलिया नहीं बना वर्ल्ड कप विजेता, फिर होगा मैच” – व्हाट्सएप्प पर दावा वायरल

गौरतलब है कि 19 नवम्बर, 2023 को ऑस्ट्रेलिया ने वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले में भारत को 6 विकेट से हरा कर जीत हासिल की थी और वर्ल्ड कप अपने नाम किया था। लेकिन, लेख में दावा किया गया है कि ऑस्ट्रेलिया का वर्ल्डकप अब खतरे में है।

लेख में कहा गया है कि पहले से निर्धारित भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाली पाँच मैचों की टी20 सीरीज को आगे बढ़ा दिया गया है। इसकी जगह पर दो और मुकाबले वर्ल्डकप विजेता का निर्धारण करने के लिए खेले जाएँगे। BCCI ने इसके लिए पहले ही ICC से बात कर ली थी। BCCI और ICC के बीच हुए समझौते में इस बात का जिक्र था कि यदि भारत नरेन्द्र मोदी स्टेडियम अहमदाबाद में फाइनल मुकाबला हारता है तो 2 और मुकाबले मुंबई और कोलकाता में खेले जाएँगे।

इसके लिए पिच तैयार करने का काम शुरू हो चुका है। इसके लिए मुंबई की पिच पर केरोसिन डाला जा रहा है। भारत के मेजबान होने के कारण उसे यह छूट मिली है। दावा है कि ऑस्ट्रेलिया की वर्ल्ड कप फाइनल में जीत इस सीरीज में केवल उन्हें 1-0 से बढ़त दिलाने में कामयाब रही है। उनकी ट्रॉफी और खिलाड़ियों के मैडल भी ICC के अधिकारियों द्वारा वापस ले लिए गए हैं।

ICC के चेयरमैन ग्रेग बार्कले के एक बयान का हवाला भी दिया जा रहा है। इस रिपोर्ट की मानें तो ग्रेग बार्कले का बयान है, “नियम नियम हैं। सभी टीमों को इन्हें मानना ही होगा। मैच के दौरान अगर अम्पायर और ICC अधिकारी नियमों को ध्यान से देखते तो वह ऑस्ट्रेलिया को जश्न मनाने ही नहीं देते।” ग्रेग बार्कले के हवाले से कहा गया है कि 2027 में साउथ अफ्रीका, नामीबिया और ज़िम्बाब्वे में होने वाले वर्ल्डकप में भी यह नियम लागू रहेगा। हालाँकि, तीनों टीम में से किसे मेजबान माना जाएगा यह स्पष्ट नहीं है।

2 और फाइनल की सच्चाई क्या?

आइए, अब आपको इस वायरल दावे की सचाई बताते हैं। दरअसल, यह लेख एक व्यंग्य है। इसे द रोर (TheRoar.com.au) नाम की एक ऑस्ट्रेलियन वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है। यह वेबसाइट खेलों के समाचार प्रसारित करती है। इसी ने यह लेख छापा है जिसे लोग जम कर शेयर कर रहे हैं। यह परम्परा रही है कि बड़े मुकाबलों के बाद हारने वाली टीम के फैन्स पर तंज कसने के लिए ऐसे लेख लिखे जाएँ, यह भी उसी का एक हिस्सा है।

वर्ल्डकप के विजेता का निर्णय 19 नवम्बर को हो चुका है और भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाली सीरीज 23 नवम्बर से चालू हो रही है, इसे स्थगित नहीं किया गया है। ना ही कोई दो मैच अब मुंबई और कोलकाता में होने जा रहे हैं। ICC चेयरमैन ने भी ऐसा कोई बयान नहीं दिया है और ना ही BCCI और ICC के बीच ऐसा कोई समझौता था। ऐसे में यह लेख मात्र मजे लेने के लिए है जिसे लोग सच मान रहे हैं। ऐसा कोई भी नियम नहीं आया है जिससे वर्ल्ड कप के निर्णय को बदला जाए। ऑपइंडिया के फैक्ट चेक में यह दावा झूठा साबित हुआ है।

मुझे अपना (प्राइवेट पार्ट) छूने दो, ऊपर से ही सही… वे घुटनों के बल बैठ जाते थे और कहते थे: बिग बॉस वाले हीरो अंकित गुप्ता ने यह सब झेला

बिग बॉस 16 फेम अंकित गुप्ता आज किसी परिचय के मोहताज नहीं है। टीवी सीरियल बालिका वधू और बेगुसराय के बाद ‘उडारियाँ’ ने उन्हें हर घर में एक जाना-पहचाना नाम बना दिया, लेकिन बदकिस्मती से कामयाबी की इस राह में उन्हें कास्टिंग काउच का भी सामना करना पड़ा।

अंकित ने इस वाकये को अपनी जिंदगी का सबसे खराब अनुभव कहा। उन्होंने कहा कि जब ऐसी चीजें हो रही थीं, तो वह हैरान रह गए थे और उन्होंने अपने कदम पीछे खींच लिए थे। जिस्मानी रिश्ते बनाने की इस पहल पर उन्होंने जवाब दिया, ‘मैंने कहा मैं उन लड़कों में नहीं हूँ और अगर मैं हूँ भी, तो मैं ऐसा नहीं कर सकता।”

उन्होंने आगे बताया, “ठीक है, आप इसे नहीं करना चाहते, लेकिन कम से कम मुझे इसे (प्राइवेट पार्ट) छूने तो दो। ऊपर से ही सही। मैं चौंक गया और अपने से कहा आखिर ये क्या हो रहा है?”

एक इंटरव्यू में अंकित ने अपने कास्टिंग काउच के अनुभव के बारे में खुलकर बताया। उन्होंने कहा, “मैं ऐसे-ऐसे लोगों से मिला हूँ, जिनके बारे में मैं आपको बता भी नहीं सकता। ऐसे लोग हैं, जो आपको ऑफर के साथ बुलाते हैं, वे आपको बहुत सारी कहानियाँ सुनाते हैं और वे बहुत सारे नाम लेते हैं। मसलन उसको मैंने बनाया, इसको मैंने लॉन्च किया, आपको समझाने के लिए वे कुछ भी कहेंगे।”

कास्टिंग काउच को लेकर अपने साथ हुए ऐसे ही एक खराब वाकये और इस ‘समझौते’ को मना करने तक हर बात अंकित ने सब कुछ सामने रख दिया। बिग बॉस के पहले सीजन में भी नजर आ चुके टीवी इंडस्ट्री के इस मशहूर एक्टर ने बताया कि उनके साथ काम देने के नाम पर कैसे शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव डाला गया था।

अंकित से कहा गया, “हर कोई ऐसा करता है, अंकित। क्या आप इंडस्ट्री में काम करना चाहते हैं? यहाँ काम इसी तरह से किया जाता है। तू अभी ये नहीं करेगा, लेकिन 2-3 साल बाद आएगा और फिर कहेगा अब कर लो, तुम इस इंडस्ट्री में अपने 2-3 साल बर्बाद तो नहीं करना चाहोगे।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं ऐसे लोगों से मिला हूँ। मुझे नहीं पता कि मुझे कैमरे पर यह कहना चाहिए या नहीं, वे घुटनों के बल बैठ जाते थे और कहते थे, कम से कम मुझे तुम्हारा (प्राइवेट पार्ट) छूने दो। बस इतना ही, इसके सिवाय कुछ भी नहीं।”

इस वक्त अपने एक्टिंग के पेशे में अंकित को जुनूनियत और उडारियाँ शो में अभिनय के लिए सराहा जा रहा है। को-एक्टर और बिग बॉस 16 की साथी प्रियंका चाहर चौधरी के साथ उनका रिश्ता भी सुर्खियों में है।

सिलक्यारा सुरंग के भीतर फँसे सभी मजदूर स्वस्थ, पहली बार सामने आई तस्वीरें: डॉक्टर वाले इंडोस्कोपिक कैमरे से हुआ लाइव सम्पर्क

उत्तरकाशी की सिलक्यारा सुरंग के भीतर फँसे मजदूरों के पास कैमरा पहुँच गया है। सुरंग के भीतर मलबे के बीच फँसे 41 मजदूरों की पहली तस्वीरें सामने आई हैं। सामने आई तस्वीरों में सभी मजदूर स्वस्थ दिख रहे हैं। तस्वीरों में अन्दर आया मलबा भी देखा जा सकता है। यह मजदूर 12 नवम्बर 2023 से सुरंग के भीतर मलबा आने के कारण फँसे हुए हैं।

रेस्क्यू टीम ने इसी के साथ फँसे हुए मजदूरों से लाइव सम्पर्क स्थापित कर लिया है। इससे पहले 20 नवम्बर की शाम को सुरंग के भीतर फँसे मजदूरों तक 6 इंच व्यास का पाइप पहुँचाने में सफलता मिली थी। यह पाइप 90 मीटर से भी अधिक लंबा है।

इस पाइप के जरिए अब खाना, पानी, दवाइयाँ और अन्य सामान भेजा जा रहा है। अब इस पाइप के जरिए खिचड़ी और अन्य पका हुआ भोजन भी मजदूरों को भेजने में सफलता मिली है। इससे पहले उन्हें केवल सूखा भोजन भेजा जा रहा था।

रेस्क्यू टीम इसी पाइप के जरिए सुरंग में अंदर कैमरा भी भेजने में सफल रही है। अन्दर फँसे मजदूरों को निर्देश देने के लिए भी इस पाइप का सहारा लिया जा रहा है। अन्दर मौजूद लोगों में गब्बर सिंह नेगी, सुशील और सहाबा हैं, जो अपने साथी मजदूरों के हौसले को बनाए रखने में सहायता कर रहे हैं।

इस सुंरग के भीतर इंडोस्कोपिक फ्लेक्सी कैमरा भेजा गया है। इसे एक रबर के पाइप के मुहाने पर लगाया गया है, जिससे पाइप के जरिए इसे अन्दर को धकेला जा सके। ऐसे कैमरों का इस्तेमाल तंग जगहों की जानकारी लेने के लिए किया जाता है। ऐसे कैमरों का उपयोग डॉक्टर भी करते हैं।

इससे पहले 20 नवम्बर को घटनास्थल पर अंतरराष्ट्रीय सुरंग विशेषज्ञ अर्नाल्ड डिक्स भी पहुँचे थे। उन्होंने मजदूरों को जल्द निकाल लेने की बात कही थी। सुरंग के जायजे के लिए रक्षा मंत्रालय से एक रोबोटिक्स टीम भी पहुँची थी।

टीम का कहना था कि वह अन्दर एक वाईफाई कनेक्शन लगाने की भी कोशिश कर रहे हैं। पाइप के जरिए अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी भेजे गए हैं। कैमरे से अन्दर मौजूद प्रत्येक मजदूर की स्थिति जानी जा रही है।

इसी के साथ ही मजदूरों के निकालने के लिए 900 मिलीमीटर (.9 मीटर, मतलब 1 मीटर से थोड़ा सा कम) वाली पाइप को आगे धकेलने का काम भी पुनः चालू होने वाला है। मलबे के भीतर से यह पाइप अब ऑगर मशीन की सहायता से भेजा जा रहा है। मशीन के कलपुर्जों की दोबारा मरम्मत हुई है।

सुरंग में ऊपर की तरफ से खुदाई के लिए मशीन भी पहुँच गई हैं। पहाड़ी में ऊपर की तरफ से ड्रिलिंग करके भी मजदूरों को निकालने की योजना बनाई जा रही है। घटना पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार नजर बनाए हुए हैं। प्रधानमंत्री ने कल मुख्यमंत्री पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी भी ली थी।

योगी सरकार के बाँके बिहारी कॉरिडोर परियोजना को इलाहबाद HC की हरी झंडी, हटाए जाएँगे अतिक्रमण: धार्मिक और तीर्थस्थलों को अदालत ने बताया देश की धरोहर

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की बाँके बिहारी कॉरिडोर परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना के तहत बाँके बिहारी मंदिर के चारों तरफ एक कॉरिडोर का निर्माण होना प्रस्तावित है। वहीं अब इस मामले में उच्च न्यायालय के आदेश के बाद अब इस कॉरिडोर की राह में आने वाले अतिक्रमण को हटाने का रास्ता साफ़ हो गया है।

अपने आदेश में हाईकोर्ट ने सरकार से यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि इस परियोजना को पूरा करने के दौरान किसी दर्शनार्थी को दिक्कत न आने पाए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्तर प्रदेश सरकार की बाँके बिहारी कॉरिडोर परियोजना काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की ही तर्ज पर है। इस काम में आने वाला खर्च सरकार को उठाना पड़ेगा। अनंत शर्मा, मधुमंगल दास और कुछ अन्य पुजारियों ने इस कॉरिडोर को गैर जरूरी बताते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी। याचिकाकर्ताओं ने चढ़ावे और चंदे की रकम भी कॉरिडोर में न लगाने की माँग की थी। इस याचिका पर हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को भी नोटिस जारी किया था।

मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर और जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की डिवीजन बेंच में हुई थी। सरकार ने हाईकोर्ट में इस कॉरिडोर को श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जरूरी बताया था।

बता दें कि 8 नवंबर 2023 को अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अपने आदेश में हाईकोर्ट ने UP सरकार से इस बात का ध्यान रखने के लिए भी कहा कि परियोजना पूरा करने के दौरान दर्शनार्थियों को असुविधा न होने पाए। इस मामले की अगली सुनवाई 31 जनवरी, 2024 को होगी।

अपनी टिप्पणी में अदालत ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि मंदिरों और तीर्थस्थलों का उचित प्रबंधन जनता से जुड़े विषय हैं। अदालत ने धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को देश की धरोहर के समान बताया जहाँ जाने के बाद लोगों में अच्छे मनोभाव पैदा होते हैं। फैसले के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि किसी की आपत्ति के चलते मानव जीवन को प्रभावित नहीं किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कॉरिडोर के निर्माण में टेक्निकल एक्सपर्ट की मदद लेने की भी सलाह दी।

कर्नाटक चुनाव के समय राहुल गाँधी ने जिस मठाधीश से ली थी दीक्षा, पॉक्सो एक्ट में फिर गिरफ्तार: अदालत ने दिया था 24 घंटे में पेश करने का आदेश

कर्नाटक पुलिस ने चित्रदुर्ग मुरुगराजेंद्र बृहन मठ के महंत शिवमूर्ति शरण को गिरफ्तार कर लिया है। सोमवार (20 नवंबर, 2023) को यह गिरफ्तारी पॉक्सो एक्ट के तहत हुई है। लिंगायत धर्म के महंत के खिलाफ चित्रदुर्ग की अदालत ने गैरजमानती वारंट जारी किया था। सोमवार को ही जारी हुए इस वारंट में पुलिस को आदेश दिया गया था कि वो मंगलवार (21 नवंबर, 2023) तक महंत को अदालत में पेश करें। महंत शिवमूर्ति शरण पर पहले से ही बच्चों के यौन शोषण के 2 केस दर्ज हैं जिसमें वो जमानत पर चल रहे थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शिवमूर्ति शरण के खिलाफ चित्रदुर्ग में न्यायाधीश बी के कोमला ने गैर जमानती वारंट जारी किया था। लगभग 24 घंटों की मिली मोहलत में पुलिस ने लिंगायत महंत को महज कुछ ही घंटों में गिरफ्तार कर लिया। शिवमूर्ति की गिरफ्तारी दावनगेरे के विरक्ता मठ से हुई है। आरोपित महंत को 4 दिन पहले ही पॉक्सो के एक अन्य केस में कर्नाटक हाईकोर्ट ने कड़े प्रावधानों के तहत जमानत दी थी। इन शर्तों में जाँच पूरी होने तक चित्रदुर्ग में न घुसने, सबूतों के साथ कोई छेड़छाड़ न करने के साथ 2 लाख के मुचलके का भी आदेश दिया था।

जिन महंत शिवमूर्ति शरण को आज कर्नाटक पुलिस ने गिरफ्तार किया है उनके खिलाफ पॉक्सो एक्ट के 2 मामले दर्ज हैं। इन दोनों केसों की जाँच के दौरान पुलिस ने 1 नवंबर, 2022 को शिवमूर्ति शरण को गिरफ्तार कर लिया था। लगभग 1 साल बाद कर्नाटक हाईकोर्ट से पहले केस में जमानत मिलने के बाद महंत 16 नवंबर, 2023 को जेल से रिहा हुए थे। रिहाई के महज 4 दिनों के बाद पॉक्सो के दूसरे मामले में जमानत न होने की वजह से शिवमूर्ति शरण को फिर से गिरफ्तार कर लिया गया है।

पहले भी दर्ज है बच्चों के यौन शोषण की शिकायतें

पहला केस ओदानदी सेवा संस्थान नाम के NGO ने मैसूर के नजरबाद पुलिस स्टेशन में दर्ज करवाया था। इस FIR में शिवमूर्ति पर आरोप लगा था कि उन्होंने हॉस्टल में रहने वाले दलित समुदाय के नाबालिग छात्रों का यौन शोषण किया था। तब पुलिस ने पॉक्सो और SC/ST एक्ट में FIR दर्ज की थी। बाद में यह केस जाँच और कार्रवाई के लिए चित्रदुर्ग ग्रामीण पुलिस स्टेशन में ट्रांसफर कर दिया गया था।

महंत शिवमूर्ति शरण के लिए दूसरा केस 2 नाबालिग लड़कियों की माँ ने दर्ज करवाया था। उनका आरोप था कि साल 2019 से 2022 तक जब उनकी बेटियाँ हॉस्टल में थीं तब शिवमूर्ति शरण ने उनका यौन शोषण किया था। यह केस भी पॉक्सो एक्ट में दर्ज हुआ था। इस केस में शिवमूर्ति के साथ कनिष्ठ द्रष्टा बसवदित्य और परमशिवैया, गंगाधर, महालिंगा और करिबासप्पा भी आरोपित किए गए थे। जाँच में कोई सबूत न मिलने की बात कह कर पुलिस ने बाद में परमशिवैया का नाम केस से निकाल दिया था।

राहुल गाँधी को दी थी दीक्षा

पॉक्सो एक्ट में गिरफ्तारी शिवमूर्ति शरण कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी को कर्नाटक चुनाव के समय दीक्षा भी दे चुके हैं। अपनी मुरुघा मठ की यात्रा के दौरान राहुल गाँधी ने मठ प्रबंधन से निवेदन किया था कि वो वहाँ से किसी को भेज कर उन्हें शिवयोगा की शिक्षा दिलाएँ। तब शिवमूर्ति शरण ने राहुल गाँधी का पारम्परिक तौर पर स्वागत भी किया था।