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ED ने ₹752 करोड़ की संपत्ति को किया कुर्क, सोनिया गाँधी और राहुल को बड़ा झटका! ‘नेशनल हेराल्ड’ स्कैम में YIL और AJL के खिलाफ कार्रवाई

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्षों सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी को बड़ा झटका लगा है। नेशनल हेराल्ड केस में ईडी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 751 करोड़ की संपत्तियाँ जब्त कर ली हैं। ईडी ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड और मेसर्स यंग इंडियन की 751.9 करोड़ की संपत्तियाँ जब्त कर ली। इसमें एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड की संपत्ति की कुल कीमत 661.69 करोड़ रुपए है, जो दिल्ली, लखनऊ और मुम्बई जैसे शहरों में फैली हुई हैं। वहीं, मेसर्स यंग इंडियन की प्रॉपर्टी की कीमत 90.21 करोड़ रुपए है, जो शेयरों के रूप में है। इस मामले में ईडी कॉन्ग्रेस के दोनों नेताओं से पूछताछ की थी।

दिल्ली के मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा एक निजी शिकायत पर संज्ञान लेने के बाद जारी प्रक्रिया के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच शुरू की थी। अदालत ने माना था कि यंग इंडियन सहित सात आरोपितों ने प्रथम दृष्टया आईपीसी की धारा 406 के तहत आपराधिक विश्वासघात, आईपीसी की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी और धोखाधड़ी से संपत्ति दिलवाने, आईपीसी की धारा 403 के तहत संपत्ति की बेईमानी से गबन और आईपीसी की धारा 120बी के तहत आपराधिक षड्यंत्र के अपराध का मामला है।

अदालत ने माना था कि आरोपितों ने प्लानिंग के तहत यंग इंडियन के माध्यम से एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड की सैकड़ों करोड़ रुपए की संपत्तियों को हड़पने की आपराधिक साजिश रची थी।

बता दे कि एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड को अखबार प्रकाशित करने के उद्देश्य से भारत के विभिन्न शहरों में रियायती दरों पर जमीन दी गई थी। एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड ने 2008 में अपना प्रकाशन बंद कर दिया और संपत्तियों का उपयोग व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए करना शुरू कर दिया।

एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड को ऑल इंडिया कॉन्ग्रेस कमेटी (एआईसीसी) को 90.21 करोड़ रुपए का ऋण चुकाना था, हालाँकि एआईसीसी ने 90.21 करोड़ रुपए के उक्त ऋण को एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड से वसूली योग्य नहीं माना और इसे 50 लाख रुपए में एक नई बनाई गई कंपनी यंग इंडियन को बेच दिया, जिसके पास 50 लाख रुपए भी देने का कोई स्रोत नहीं था।

अपने इस कृत्य से एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड के शेयरधारकों के साथ-साथ कॉन्ग्रेस पार्टी के दाताओं के साथ भी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड और कॉन्ग्रेस पार्टी के पदाधिकारियों द्वारा धोखाधड़ी की गई।

ईडी की जाँच से पता चला कि एआईसीसी से 90.21 करोड़ रुपए का लोन पाने के बाद यंग इंडियन ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड से या तो लोन का भुगतान करने या फिर एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड के इक्विटी शेयरों को देने की डिमाँड की। इसके बाद एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड ने एक आम बैठक (ईजीएम) आयोजित की और शेयर पूँजी बढ़ाने का प्रस्ताव पास किया, जिसमें यंग इंडियन के लिए 90.21 करोड़ रुपए के नए शेयर जारी करने का प्रस्ताव पारित किया गया।

यंग इंडियन को शेयर मिलने के बाद एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड के 1000 से अधिक वास्तविक शेयर धारकों की कंपनी में हैसियत महज 1 प्रतिशत की रह गई और एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड कंपनी पूरी तरह से यंग इंडियन कंपनी की सहायक कंपनी बन गई।

यही नहीं, एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड की संपत्तियों पर भी यंग इंडियन ने कब्जा कर लिया। इस तरह से महज 50 लाख रुपए में बनाई गई यंग इंडियन नाम की कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड जैसी बड़ी कंपनी की मालिक बन गई। यंग इंडियन के मालिकान, जिसमें राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी हैं, उनके पास उस एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड की पूरी कमान आ गई, जो अब तक 1000 शेयरधारकों की कंपनी थी।

ईडी ने बताया है कि इस पूरे मामले की जाँच अभी जारी है। ये पूरा घोटाला 2000 करोड़ रुपए से अधिक का है।

बिहार में डीएम की गाड़ी ने 4 को रौंदा, माँ-बेटी समेत 3 की मौत: प्रत्यक्षदर्शियों का दावा- गाड़ी में सवार थे डीएम, बाइक से हुए फरार

बिहार के मधेपुरा डीएम की कार ने हाईवे पर चार लोगों को कुचल दिया, जिसमें माँ-बेटी और एक अन्य व्यक्ति की मौत हो गई। इस हादसे में एक व्यक्ति बुरी तरह से घायल हो गया। इस मामले में प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया है कि हादसे के समय कार में मधेपुरा के डीएम भी सवार थे और वो हादसे के बाद एक बाइक पर बैठकर घटनास्थल से फरार हो गए।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ये हादसा सुबह करीब 8 बजे फुलपरास पुरवारी टोला के पास हुआ, जहाँ दरभंगा से मधेपुरा की ओर जा रही कार ने सड़क किनारे महिला और उसकी बेटी को रौंद दिया, फिर पास में ही हाईवे के किनारे काम कर रहे दो मजदूरों को भी रौंद दिया। इसके बाद गाड़ी रेलिंग से टकराकर रुक गई।

बता दें कि ये हादसा राष्ट्रीय राजमार्ग 57 पर फुलपरास थाना इलाके के पुरवारी टोला के पास हुआ। जिसमें बताया जा रहा है कि डीएम के नेमप्लेट वाली कार ने पहले हाईवे के किनारे काम कर रहे मजबूरों को रौंदा, फिर माँ-बेटी को टक्कर मार दी। वहीं हादसे के बाद जब आसपास के लोग मौके पर जुटने लगे, तो कार पर सवार 4 लोग बाइकों से बैठकर मौके से फरार हो गए।

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि सड़क पर लाशें बिछी पड़ी थी। स्थानीय लोगों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया, जिसमें से एक व्यक्ति का गंभीर हालत में इलाज शुरू किया गया, जबकि तीन लोगों की मौत हो चुकी थी।

मृतकों के नाम राजस्थान निवासी अशोक सिंह, स्थानीय गुड़िया देवी और उनकी 7 साल की बेटी शामिल हैं। वहीं इस हादसे में अशोक सिंह नाम के व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि गाड़ी में डीएम विजय प्रकाश मीणा भी सवार थे। उनका वाहन चालक, एक पुलिसकर्मी और एक लड़की भी कार में सवार थी, जो हादसे के बाद बाइक पर बैठकर फरार हो गए। इस हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने न्याय की माँग को लेकर हाईवे को जाम कर दिया।

वहीं इस मामले में आधिकारिक रूप से डीपीआरओ का बयान भी आया है। इस मामले में मधेपुरा डीपीआरओ कुंदन कुमार सिंह का कहना है कि गाड़ी में कुछ तकनीकी खराबी आ गई थी। हादसा कैसे हुआ यह जाँच का विषय है। हादसे के समय डीएम कार में सवार नहीं थे।

मधुबनी पुलिस ने बताया है कि फुलपरास थाना अंतर्गत NH- 57 पर NHAI के कर्मी को बचाने के क्रम में मधेपुरा डीएम का वाहन डिवाइडर से टकरा गया। जिससे 2 लोगों की मृत्यु हो गई एवं 2 व्यक्ति जख्मी हो गए।

हिन्दू बच्चों को खाने में दिया था रहा था गोमांस, कर्नाटक के मिशनरी स्कूल में NCPCR की जाँच में बड़ा खुलासा

कर्नाटक के दावणगिरे स्थित ईसाई मिशनरियों द्वारा संचालित डॉन बॉस्को स्कूल में कई अनियमितताएँ हैं, जिनकी जाँच ‘राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR)’ कर रहा है। इस दौरान बच्चों के आश्रय गृह ओपन सेंटर में भी NCPCR की टीम पहुँची। संस्था के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने इस दौरान मिले एक पर्चे की तस्वीर शेयर की है। इस पर्चे में आइटम के नाम, तारीख़ और उनकी कीमत लिखी हुई हैं। इसमें जिन चीजों के नाम लिखे हैं, उनमें बीफ भी है।

प्रियंक कानूनगो ने इसे हाइलाइट करते हुए अपने ट्वीट में जानकारी दी कि किचन में निरीक्षण के दौरान ये संदिग्ध मांस मिला है। टीम की सदस्य एवं स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉक्टर दिव्या गुप्ता ने कचरे में से गोमांस का ये बिल ढूँढ कर निकाला। होम में बड़ी संख्या हिंदू बच्चों की है, इसके बावजूद सभी बच्चों से ईसाई मजहब की प्रैक्टिस कराई जा रही है तथा गोमांस पकाया जा रहा है। आवश्यक कार्यवाही हेतु संस्था द्वारा नोटिस जारी कर दिया गया है।

कर्नाटक में एनसीपीसीआर की टीम सक्रिय है। बता दें कि इससे पहले निरीक्षण के बाद NCPCR के चेयरमैन प्रियांक कानूनगो ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए लिखा था, “कर्नाटक में डॉन बॉस्को मिशनरी के एक चिल्ड्रेन होम के निरीक्षण में राजस्थान के जोधपुर का एक बालक मिला जो कि घर से भटक कर यहाँ आ गया था और यहाँ कई महीनों से रह रहा था, इसको वापस जोधपुर भेजने का निर्देश दिया है।”

NCPCR अध्यक्ष ने बताया कि नियमों के मुताबिक बच्चे को घर भेजा जाना चाहिए था लेकिन बाल गृह ने इसका पालन नहीं किया। साथ ही वीडियो में वह वहाँ काम करने वाली दो महिलाओं से पूछताछ करते नजर आ रहे हैं। वह महिलाओं से आश्रय गृह में मजहबी शिक्षा को लेकर सवाल कर रहे हैं। मिशनरीज द्वारा बच्चों को उनकी इच्छा के विरुद्ध आश्रय गृहों में रखने की बार-बार आने वाली समस्या पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, “धन के लालच में, कुछ बाल आश्रय गृह बच्चों को उनकी इच्छा के विरुद्ध रखते हैं और उन्हें उनके परिवारों से दूर रखते हैं। यह सब स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत से किया जाता है।”

‘पनौती ने हरवा दिया वर्ल्ड कप’: 2024 के चुनाव से पहले राहुल गाँधी के बिगड़े बोल, 2019 में ‘चौकीदार चोर है’ नारे के बाद हुआ था कॉन्ग्रेस का सफाया

आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप-2023 में भारतीय क्रिकेट टीम की हार के बाद कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पनौती कहने वालों की जमात में शामिल हो गए हैं। मंगलवार (21 नवंबर, 2023) को राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए जालौर में एक रैली को संबोधित करने के दौरान पीएम मोदी को ‘पनौती’ कहा। ठीक ऐसे ही 2019 में चुनाव से पहले राहुल गाँधी ने ‘चौकीदार चोर है’ कहा था जिसके बाद चुनाव में कॉन्ग्रेस का सफाया हो गया था।

देश के पीएम के लिए एक सांसद के तौर पर उनकी इस तरह की भाषा लोकतंत्र को ठेस पहुँचाने वाली है, वो भी तब जब भारतीय क्रिकेट टीम की हार के बाद पीएम मोदी खिलाड़ियों को दिलासा देने और हौसला बढ़ाने के लिए खुद ड्रेसिंग रूम पहुँचे हों। पीएम के इस जज्बे को केवल टीम के क्रिकेटरों ही नहीं बल्कि भारत की जनता ने भी सराहा था।

राहुल गाँधी के पीएम मोदी को ‘पनौती’ कहने का ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। रैली में दिए इस भाषण के दौरान कॉन्ग्रेस नेता आबादी में किसकी कितनी हिस्सेदारी जैसे मुद्दे पर बोल रहे थे।

गौरतलब है कि पार्टी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में सत्ता में वापसी के बाद जातिगत जनगणना कराने का वादा किया है। इसी पर बोलते-बोलते राहुल गाँधी अचानक वर्ल्ड कप फाइनल पर आ गए। राहुल गाँधी ने कहा, ” 50 फीसदी देश में पिछड़ों की आबादी है। तकरीबन 12 फीसदी आबादी आदिवासियों की है और 15 फीसदी दलितों की है, लेकिन सबसे बड़ी आबादी है पिछड़ों की। पहले अपने हर एक भाषण में नरेंद्र मोदी आते थे, कहते थे ‘मैं ओबीसी हूँ’, याद है आपको?”

राहुल के ये कहते ही रैली में लोग पनौती, पनौती चिल्लाने लगते हैं। इसके जवाब में राहुल गाँधी भी पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहते हैं, “याद है क्या पनौती पनौती। वो अच्छा भला वहाँ पर हमारे लड़के वर्ल्ड कप जीत जाते। तो वहाँ पर पनौती हरवा दिया। टीवी वाले ये नहीं कहेंगे, मगर जनता जानती है।”

ऐसा नहीं है कि राहुल गाँधी यह सब गलती से बोल गए बल्कि कॉन्ग्रेस पार्टी भी राहुल गाँधी के इस बयान से इत्तेफाक रखती हुई दिखती है। यही वजह है कि कॉन्ग्रेस प्रवक्ता सुप्रीया श्रीनेत ने उनके वीडियो को अपने एक्स हैंडल पर डाला है। वहीं बीजेपी ने भी इस पर कॉन्ग्रेस को करारा जवाब दिया है।

बीजेपी आईटी सेल के इंचार्ज अमित मालवीय ने उत्तर प्रदेश के देवरिया से बीजेपी विधायक शलभ मणि त्रिपाठी के राहुल गाँधी के बयान पर एक्स हैंडल पर दिए जवाब को रीट्वीट किया है।

शलभ मणि त्रिपाठी ने एक्स हैंडल पर पोस्ट किया, “तुम्हें पनौती ही लगेंगे वो (मतलब पीएम मोदी) क्योंकि तुम्हारे राजतंत्र का सफ़ाया कर दिया, मंत्रियों तक से जूते उठवाने वाले खुलेआम दूसरों के जूते बाँधने लगे, एयरपोर्ट पर राजाओं की तरह घुसने वाले क़तारों में लगने लगे। क्योंकि 2G, 3G वाले दामाद जी का राष्ट्रीय दामाद का ओहदा छिन गया, ज़मीन की दलाली की कलई खुल गई।”

उन्होंने आगे लिखा, “क्योंकि उस नाकाबिल शख़्स की राजनीतिक दुकान बंद कर दी, जिसे चमचों ने रंग पोत कर युवराज बना रखा था, तश्तरी में परोसी गई अमेठी तक जीतने की हैसियत न बची क्योंकि दादी की तरह लगने वाली दीदी की कथित पॉपुलैरिटी की भी पोल खुल गई, भाई तक को चुनाव न जिता सकीं, जहाँ-जहाँ प्रचार किया पार्टी साफ़ हो गई। आज़ादी के दशकों बाद तक जिस ख़ानदान ने खुद को कॉमनमैन का राजा माना, आज एक कॉमनमैन ने देश का अगुआ बन इस खानदान को कॉमनमैन बना दिया तो दरबारियों को तो पनौती लगेंगे ही वो।”

जिस शान-ए-आलम के लिए दलित युवती ने पहना बुर्का, उसने ही वायरल कर दी तस्वीरें और वीडियो: जाति के नाम पर दी गाली, निकाह से इनकार करने पर हत्या की धमकी

उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले से ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। गुरुवार (16 नवंबर, 2023) को यहाँ एक दलित युवती ने शान-ए-आलम पर खुद से निकाह करने का दबाव डालने और इनकार करने पर अपने फोटो-वीडियो वायरल करने का आरोप लगाया है। वायरल फोटो-वीडियो में लड़की बुर्के में दिखाई दे रही है। आरोपित ने पीड़िता को जातिसूचक शब्द भी बोले। पुलिस ने शान-ए-आलम को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया है।

यह मामला अमरोहा के थाना देहात का है। 16 नवंबर, 2023 को को यहाँ एक दलित लड़की ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। जाटव समाज की 19 वर्षीया पीड़िता ने बताया कि 1 साल पहले वह एक यूनिवर्सिटी में प्राइवेट नौकरी करती थी। जब वह ऑफिस आती-जाती थी तब शान-ए-आलम नाम का एक युवक पीड़िता का पीछा करता था। शान-ए-आलम अमरोहा के ही गाँव काकरसराय का रहने वाला है। शिकायत में बताया गया है कि आरोपित पीछा करने के दौरान पीड़िता पर खुद से निकाह करने का दबाव बनाया करता था।

पीड़िता के मुताबिक, कुछ दिनों के बाद शान-ए-आलम ने पीड़िता की मर्जी के खिलाफ उसके फोटो खींच लिए और वीडियो बना डाली। जब लड़की ने इस हरकत का विरोध किया तो पहले तो आरोपित ने उसे जातिसूचक शब्द बोले फिर जान से मार डालने की धमकी भी दी। खुद से निकाह न करने पर आरोपित शान-ए-आलम ने कुछ दिनों बाद युवती के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने शुरू कर दिए। पीड़िता ने अपनी शिकायत में खुद को काफी भयभीत बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपित ने जिन तस्वीरों को वायरल किया है उसमें से एक में पीड़िता बुर्के में दिखाई दे रही है। पीछे खुद शान-ए-आलम खड़ा दिख रहा है। पीड़िता ने अपनी शिकायत के अंत में शान-ए-आलम पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने इस तहरीर पर आरोपित के खिलाफ IPC की धारा 354 (घ) और 504 के साथ IT एक्ट की धारा 67 व SC/ST एक्ट के तहत FIR दर्ज की है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

शान-ए-आलम को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने बताया कि मामले में जाँच व अन्य कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

‘कोई कितना भी बलशाली हो, अकेले बलात्कार नहीं कर सकता’: मदद माँग रहे पीड़िता के परिवार को कॉन्ग्रेस नेता ने बताया झूठा, कहा – रेप में लगते हैं 3-4 लोग

कर्नाटक की सत्ताधारी कॉन्ग्रेस के नेता अमरगौड़ा पाटिल ने कहा है कि कोई अकेला आदमी किसी महिला का बलात्कार कर ही नहीं सकता, इसके लिए 3-4 आदमी लगते हैं। उन्होंने बलात्कार पीड़िता की शिकायत को भी झूठा बता दिया।

अमरगौड़ा पाटिल कर्नाटक में कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और पूर्व विधायक भी हैं। उन्होंने यह शर्मनाक बातें एक बलात्कार पीड़िता और उसके ससुर से कथित तौर पर फ़ोन पर कहीं। यह ऑडियो बाहर आने से अब उनकी जम कर आलोचना हो रही है। बताया गया है कि इस बलात्कार के मामले में आरोपित संगनागौड़ा है जो कि अमरगौड़ा का करीबी है।

बलात्कार पीड़िता और उसके ससुर ने मामले में तेज कार्रवाई के लिए अमरगौड़ा पाटिल का सहारा लेने का प्रयास किया था। पाटिल ने फ़ोन पर कहा, “तुम्हारी खाली में बेइज्जती होगी। बलात्कार करने के लिए कम से कम 2-3 आदमी लगते हैं। इस दुनिया में कोई कितना भी बलशाली क्यों ना हो, अकेला बलात्कार नहीं कर सकता। अगर कोई ऐसा है तो मुझे दिखाओ।”

इस पर पीड़िता का ससुर फ़ोन पर पूछता है, “क्या हम झूठ बोल रहे हैं?” जिस पर पाटिल कहते हैं कि पीड़िता का ससुर झूठ ही बोल रहा है। अगर वह झूठ नहीं बोल रहा तो इस बात को सिद्ध करे कि एक आदमी बलात्कार कर सकता है।

पाटिल यहीं नहीं रुके बल्कि उन्होंने पीड़िता को भी झूठा बता दिया। पीड़िता के ससुर से उन्होंने कहा कि वह बलात्कार की घटना पर बात करके परिवार का नाम डुबा रहे हैं। पाटिल ने कहा कि कोई भी उस गाँव में अपनी लड़की नहीं ब्याहेगा जहाँ लड़कियों से बलात्कार होते हैं। अब उनकी इस बात को लेकर आलोचना हो रही है कि महिलाओं के प्रति यह संवेदनहीन बयान कैसे दे सकते हैं। हालांकि अभी इस ऑडियो की पुष्टि नहीं हुई है। कॉन्ग्रेस की तरफ से भी उनके नेता के इस बयान पर कोई आधिकारिक स्टैंड नहीं लिया गया है।

‘हम जल्द ही आप तक पहुँचेंगे’ : सिल्क्यारा सुरंग में पहली बार गूँजी उम्मीद की एक आवाज, खिल उठे 10 दिनों से फँसे 41 मजदूरों के चेहरे, PM ने भी ली राहत कार्य की जानकारी

सिर पर सफेद, पीली, नारंगी प्लास्टिक की टोपियाँ, चेहरे पर थकान मगर आँखें जीवन की आस की किरणों से चमक रही थीं। उत्तरकाशी के सिलक्यारा में निर्माणाधीन सुरंग में फँसे 41 मजदूरों के पास मंगलवार (21 नवंबर, 2023) को 10 दिनों में पहली बार कैमरा पहुँचा था। दरअसल, भूस्खलन के वजह से बीते 12 नवंबर से ये लोग यहाँ फँसे हुए हैं।

वहाँ राहत और बचाव में लगी टीम के लोगों ने छह इंच के पाइप के जरिए उन तक खाना पहुँचाया। इस पाइप की ही मदद से वहाँ वॉकी-टॉकी और एंडोस्कोपिक फ्लैक्सी कैमरे भेजे गए। इस कैमरे से पहली बार इनकी तस्वीर सामने आई तो वॉकी-टॉकी से इनके बचाव में लगे लोगों से इनकी बाचतीच भी हो पाई।

हालाँकि, अभी भी बचाव दल और फँसे हुए मजदूरों के बीच लगभग 40 मीटर मोटा मलबे का फासला है। हिमालयी क्षेत्र होने और यहाँ की मिट्टी की वजह से इनकों वहाँ से बाहर निकलना बड़ी चुनौती है, लेकिन इसके बाद भी जब मंगलवार सुबह लगभग 3.45 बजे इनके चेहरे कैमरे पर आए तो ये पल बचाव टीमों के लिए कुछ देर के लिए ही सही पर उत्साह का पल रहा।

भले ही इसके बाद बचाव की आगे की रणनीति बनाने के लिए वहाँ माहौल फिर से गंभीर हो गया। मजदूरों को वहाँ से निकालने के अगले कदम की योजना के साथ ही राहत और बचाव दल के लोगों ने मजदूरों को दिलासा दिया कि वो जल्द ही वहाँ उन्हें बचाने के लिए पहुँच रहे हैं। ये सुनते ही इस मुश्किल हालातों में भी मजदूरों के चेहरे खिल उठे।

‘हम जल्द ही आप तक पहुँचेंगे’

जब मजदूरों को वॉकी-टॉकी पर कहा गया, “क्या आप ठीक हैं? यदि आप सभी ठीक हैं, तो कृपया खुद को कैमरे के सामने दिखाएँ। कृपया अपने हाथ उठाएँ और मुस्कुराएँ।” इतना सुनते ही मजदूरों ने कैमरे के सामने लाइन लगाकर इसका जवाब दिया।

इतने वक्त से वहाँ फँसे होने की वजह से उनके छोटी दाढ़ी उग आई थी। उनके सिर सख्त प्लास्टिक की टोपियों से ढके हुए थे। उन्होंने कैमरे की ओर हाथ हिलाकर संकेत दिया कि वे ठीक हैं। इसी बीच एक बचावकर्ता ने कहा, “हम जल्द ही आप तक पहुँचेंगे, कृपया फिक्र न करें। कृपया एक-एक करके कैमरे के सामने आएँ। हम आपके रिश्तेदारों को दिखाना चाहते हैं कि आप ठीक हैं।”

फिर इन मजदूरों को पाइप के अंदर से कैमरा लेने और उनमें से हर एक पर फोकस करने को कहा गया। तब बचाव दल के सदस्यों ने उनसे कहा, “हम आपको बहुत साफ तौर से देख सकते हैं।” इसी दौरान एक बचावकर्ता ने इन मजदूरों से पूछा कि पाइप के जरिए से भेजा गया वॉकी-टॉकी मिला तो इन लोगों ने इशारे से इसके मिलने के बारे में बताया।

इसके बाद इन सब को बचावकर्मियों ने वॉकी-टॉकी चलाने के बारे में बताया। बताते चलें कि कैमरा और वॉकी-टॉकी का कनेक्शन लंबे वक्त तक चलने वाले बचाव अभियान के लिए अहम हैं। मलबे के बीच डाला गया छह इंच का पाइप सुरंग में फँसे इन मजदूरों के लिए जीवन रेखा बन गया है।

इसके जरिए मजदूरों को भोजन और दवाएँ भेजी जा सकती हैं। मंगलवार को मजदूरों को सुरंग में इस पाइप के जरिए 10 दिनों में पहली बार खिचड़ी भेजी गई। वहीं कैमरा और वॉकी-टॉकी कनेक्शन अब बचाव टीमों को मजदूरों का हौसला बढ़ाने उनके घर लौटने के उनके कष्टदायक इंतजार के बीच उन्हें भरोसा दिलाने में मदद करेगा।

पीएम मोदी ने भी ली सुंरग बचाव-राहत कार्य की जानकारी

वहीं राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी राहत की साँस ली है। यही नहीं पीएम मोदी ने फिर से फोन कर सिलक्यारा की निर्माणाधीन सुरंग में फँसे मजदूरों के राहत और बचाव अभियान के बारे में भी अपडेट लिया। सीएम धामी ने पीएम को बताया कि 6 इंच व्यास की पाइप लाइन को मलबे के पार मजदूरों तक पहुँचा दिया गया है।

सीएम धामी ने पीएम को बताया कि इसी के जरिए उन्हें भोजन और अन्य जरूरी सामान पहुँचाया जा रहा है। इसके साथ ही एंडोस्कोपिक फ़्लेक्सी कैमरे की मदद से मजदूरों से हुई बातचीत और उनकी कुशलता की जानकारी भी दी गई। इस पर पीएम ने यह भी कहा कि सभी श्रमिक भाइयों को सुरक्षित निकालना उनकी पहली प्राथमिकता है।

सुरंग में फँसे मजदूरों के सकुशल होने की खबर पाकर उनके परिवारवालों ने भी राहत की साँस ली है। उन्हें खुशी है कि आखिर ये खबर मिली। सुरंग में फँसे एक मजदूर छोटे भाई का कहना है, “टनल में मेरा बड़ा भाई फंँसा हुआ है। उसका नाम विश्वजीत कुमार है। मैं उनसे लगातार संपर्क में हूँ। मेरा एक और रिश्तेदार सुबोध कुमार भी अंदर है। वहाँ सभी लोग ठीक हैं। उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। वे खुश हैं कि दूसरी पाइप मिल गई जिससे खाना भी मिल जाएगा। अभी तक केवल ड्राई फ्रूट्स जा पा रहा था। हमें बहुत राहत महसूस हो रही है।”

उन्होंने आगे कहा, “वो इस बात से ज्यादा खुश हुए है कि उन लोगों को दूसरी पाइप मिल गई। जिससे शायद उनको पूरा खाना मिल पाए। अभी तक वो सूखे मेवे खाकर काम चला रहे थे। दूसरे 6 इंच के पाइप से खाना वगैरह सब जा सकता है। उनको और राहत मिल गई है कि चलो बाहर से प्रोसेस चालू है कि हमें निकालने के लिए कोशिशों की जा रही है। तो वो लोग भी खुश है।”

‘मेरा भाई बाहर आएगा 90 फीसदी सकारात्मक हूँ’

सुरंग के अंदर फँसे विश्वजीत ने अपने छोटे भाई को ये भी बताया, “वैसे तो हमें अंदर कोई दिक्कत महसूस नहीं हो रही है, लेकिन अब थोड़ा अच्छा लग रहा है कि हमें इस दूसरे पाइप के जरिए बात आसानी से हो जाएगी। पहली पाइप में बात आसानी से नहीं हो पा रही थी। इस पाइप के जरिए हम बाहर वाले से आमने-सामने बात कर पा रहे हैं। इससे हमें बहुत राहत महसूस हुई है।

उनका कहना है कि बड़े भाई की सकुशल जानकर हम लोगों को भी काफी राहत मिली है। हम खुश है कि इससे उनके पास पूरा खाना खाने की सुविधा होगी। पाइप के जरिए उन लोगों का वीडियो आ गया यही काफी है। सुंरग में फँसे मजदूर के भाई का कहना था कि वो सब अंदर घूम फिर रहे हैं, सब सुरक्षित हैं। हम सब अब उन्हें लेकर बहुत पॉजीटिव हैं। ये 90 फीसदी सकारात्मक हालात हैं, क्योंकि अब वो सुरक्षित बाहर आएँगे।

उन्होंने आगे कहा कि क्योंकि पहले तनाव बन रहा था कि ये पहली पतली पाइप अंदर किसी वजह से भी कोई दिक्कत पैदा करती है तो फिर क्या उपाय हो सकता है, उस वक्त बाहर के प्रॉसेस में कितना वक्त लगेगा ये कहना मुश्किल था, लेकिन दूसरी पाइप के अंदर जाने से अब कोई दिक्कत नहीं है।

वहीं दूसरी तरफ सुरंग में फँसे एक मजदूर ने अपनी माँ को भावनात्मक संदेश भेजा, “मैं ठीक हूँ माँ, कृपया अपना खाना समय पर खाएँ।” इससे पहले 20 नवंबर को यहाँ अंतरराष्ट्रीय सुरंग विशेषज्ञ अर्नाल्ड डिक्स भी पहुँचे थे। उन्होंने मजदूरों को जल्द निकाल लेने का भरोसा दिलाया था। वहीं रक्षा मंत्रालय से एक रोबोटिक्स टीम भी आई थी।

इस टीम ने बताया था कि वो सुरंग के अंदर वाईफाई कनेक्शन लगाने की भी कोशिश कर रहे हैं। मजदूरों को पाइप के जरिए अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी भेजे गए हैं। इसी के साथ ही मजदूरों के निकालने के लिए ऑगर मशीन की मदद से 900 मिलीमीटर की वाली पाइप को आगे ले जाने का काम भी दोबारा शुरू होने वाला है।

उत्तराखंड में सिल्क्यारा और डंडालगाँव के बीच 12 नवंबर को निर्माणाधीन सुरंग में भूस्खलन के बाद 41 मजदूर फँस गए। ये सुरंग केंद्र की महत्वाकांक्षी चार धाम परियोजनाओं का हिस्सा है और उत्तरकाशी और यमुनोत्री को जोड़ने के लिए प्रस्तावित सड़क पर है।

बिहार में आरक्षण बढ़ कर हुआ 75%, राज्यपाल ने विधेयक को दी मंजूरी: नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में होगा लागू

बिहार के राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर ने 75 प्रतिशत आरक्षण वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस विधेयक के तहत बिहार में सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का कोटा 60 से बढ़ाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया है। इस विधेयक को बिहार विधानसभा ने 13 अक्टूबर, 2023 को पारित किया था। इसके बाद, इसे राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा गया था। राज्यपाल ने इस विधेयक पर 21 नवंबर, 2023 को हस्ताक्षर किए।

आरक्षण विधेयक को राज्यपाल के स्तर से मंजूरी मिलने के बाद गैजेट जारी कर दिया गया है। इस विधेयक को मंजूरी दिए जाने के बाद, बिहार में सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण का कोटा 75 प्रतिशत हो गया है, जिसमें आरक्षित वर्ग के लोगों को 65 फीसदी और 10 फीसदी आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आरक्षण मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

बिहार में अब आरक्षण की सीमा 75 प्रतिशत

अब तक पिछड़ा-अति पिछड़ा वर्ग को 30 प्रतिशत आरक्षण मिल रहा था, लेकिन नए कानून के तहत इस वर्ग को 43 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा। इसी तरह, पहले अनुसूचित जाति (SC) वर्ग को 16 प्रतिशत आरक्षण था, अब 20 प्रतिशत मिलेगा। अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग को पहले एक प्रतिशत आरक्षण था, जो बढ़कर दो प्रतिशत हो गया है। केंद्र सरकार द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लिए दी गई 10 प्रतिशत आरक्षण की सीमा बनी रहेगी। इस तरह से कुल आरक्षण की सीमा अब 75 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है।

हालाँकि, इसे लागू कैसे किया जाएगा, इस को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। इस अधिनियम को लागू करने की राह में कई दिक्कतें हैं। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण की सीमा 50% तय की है। इसके ऊपर आरक्षण को बढ़ाना संवैधानिक रूप से चुनौतीपूर्ण है।

दरअसल, 1992 में सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने इंदिरा साहनी केस के फैसले में तय किया था कि आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकती है। मंडल कमीशन की सिफारिश पर अमल के फैसले के खिलाफ इंदिरा साहनी की अपील पर यह फैसला आया था। फिलहाल तमिलनाडु ही देश का ऐसा इकलौता राज्य है, जहाँ 69 प्रतिशत आरक्षण लागू है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा साहनी फैसले के आधार पर मराठा और जाट आरक्षण को 50 फीसदी की सीमा को लाँघने वाला बताकर खारिज कर दिया था।

इस विधेयक को लेकर बिहार में काफी विवाद हुआ था। विपक्षी पार्टियों ने इस विधेयक को असंवैधानिक बताया था। उन्होंने कहा था कि यह विधेयक बिहार में जातिवाद को बढ़ावा देगा। हालाँकि, सरकार ने इस विधेयक को मंजूरी देकर यह स्पष्ट कर दिया है कि वह पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

फ्लैट से मिली अंजू की सड़ती हुई लाश, बाल-बच्चेदार मनी खान के साथ लिव-इन में रहती थी: असम पुलिस ने गिरफ्तार किया

पूर्वोत्तर भारत के असम से ‘लव जिहाद’ का एक नया मामला सामने आया है। यहाँ के गुवाहाटी में लगभग 26 वर्षीया अंजू दोरजी नाम की महिला की 12 नवंबर 2023 को संदिग्ध मौत हो गई थी। पुलिस की जाँच में यह केस हत्या का निकला था। अब इस केस में पुलिस ने रविवार (19 नवम्बर, 2023) को मनी खान नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। शादीशुदा और बाल-बच्चेदार मनी खान मृतका अंजू दोराजी के साथ लम्बे समय से लिव इन रिलेशनशिप में था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला गुवाहाटी के सिक्स माइल इलाके का है। यहाँ मूल रूप से बोकाजन की निवासिनी अंजू दोराजी नाम की महिला एक किराए के फ़्लैट में रहती थी। अंजू के फ़्लैट में बाहर से काफी समय से ताला लटक रहा था। 12 नवम्बर को घर के अंदर से बदबू आने पर आसपास के लोगों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने फ़्लैट को बाहर से खोला तो अंदर अंजू की लाश पड़ी हुई थी। तफ्शीश में पता चला कि अंजू की हत्या हुई है। हत्या शव बरामद होने से 2-3 दिन पहले हुई थी। तब पुलिस अज्ञात हत्यारे के खिलाफ केस दर्ज कर के जाँच में जुट गई थी।

जाँच के दौरान पुलिस को मूल रूप से बरपेटा जिले के रहने वाले मनी खान के बारे में पता चला। मनी खान मृतका के साथ लम्बे समय से लिव इन रिलेशनशिप में था। घटना के दिन से मनी खान का फोन बंद आ रहा था। तब से वह लौट कर फ़्लैट पर भी नहीं आया था। पुलिस ने फ़्लैट और आसपास लगे CCTV फुटेज को खंगाला। बाद में अन्य साक्ष्यों को जमा कर के मनी खान को दिसपुर से गिरफ्तार किया गया। अंजू के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाला मनी खान पहले से शादीशुदा और 2 बच्चों का अब्बा है।

फिलहाल पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कहीं इस मामले में मनी खान के साथ कोई और शामिल तो नहीं है। साथ ही अंजू का बिसरा परीक्षण के लिए भेज दिया गया है।

थिएटर में ब्लू फिल्म या इंदिरा गाँधी के नाम पर टूर टॉकीज? घिरे कॉन्ग्रेसी उप-मुख्यमंत्री DK शिवकुमार, कर्नाटक में पोस्टर वॉर

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और जनता दल के बड़े नेता एच डी कुमारस्वामी ने राज्य के उपमुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार पर आरोप लगाया है कि वह अपने थिएटर में ‘ब्लू फिल्म’ दिखाया करते थे। वहीं उनके इस बयान पर डीके शिवकुमार ने प्रतिक्रिया दी है।

दरअसल, कुमारस्वामी ने शिवकुमार को लेकर कहा, “उनकी क्या गरिमा है? पोस्टर चिपकाना ही उनकी गरिमा है? वह डोड्डलहल्ली और सथानुर में टेंट थिएटर में ब्लू फिल्म दिखाया करते थे। यह दिखाता है वह कहाँ से आते हैं। यही पार्टी अध्यक्ष की गरिमा है क्या?”

गौरतलब है कि कुछ दिनों से कुमारस्वामी के खिलाफ पोस्टर के माध्यम से जंग छिड़ी हुई है। शिवकुमार के ब्लू फिल्म वाले थिएटर चलाने को लेकर यह बयान भी उसी बीच आए हैं। कुमारस्वामी पर बिजली चोरी का आरोप लगाते हुए कुछ दिन पहले उनके घर के बाहर पोस्टर लगे मिले थे। इसमें कुमारस्वामी को बिजली चोर बताया गया था।

वहीं डीके शिवकुमार ने इन आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कुमारस्वामी अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं। उन्होंने कहा, “मुझे कुमारस्वामी के लिए बड़ा दुःख होता है। वह इतने वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हैं और इस तरह की बातें कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “उनसे कहिए कि वह मेरी विधानसभा में जाएँ और लोगों से पूछे कि क्या उन्होंने मुझे ब्लू फिल्म दिखाने के लिए जिताया है। अगर कुमारस्वामी या और कोई भी यह सिद्ध कर दे तो मैं राजनीति छोड़ दूँगा। कुमारस्वामी को इस तरह बोलने के लिए शर्म आनी चाहिए।”

इससे पहले शिवकुमार ने कहा था, “मैं इंदिरा गाँधी के नाम से 4 टूरिंग टाकीज (जगह बदल कर चलाए जाने वाले टाकीज) चलाता था। केवल एक नहीं बल्कि मैं ऐसे तीन टाकिज चलाता था जो कि डोड्डलहल्ली, हरोबेले और कोडीहल्ली में थे। हुसेनाहल्ली वाला टेंट अब भी चल रहा है। मीडिया वहाँ जा कर देख सकता है कि क्या दिखाया जाता है।”

दरअसल, कुमारस्वामी के बेंगलुरु में जेपी नगर स्थित घर पर दीपावली में हुई सजावट में बिजली एक पोल से अवैध तरीके से ली गई थी। बाद में कुमारस्वामी ने कहा था कि उनकी गैरमौजूदगी में ऐसा हुआ और यह सजावट वाले ने किया है। कुमारस्वामी पर बेंगलुरु में बिजली देने वाले BESCOM ने शिकायत भी दर्ज करवा दी थी।

हालाँकि, कुमारस्वामी ने अपनी गलती मानते हुए इस मामले में माफ़ी भी माँगी थी और ₹68,000 का जुर्माना भी भरा था। इसके बाद भी कुछ शरारती तत्वों ने उनके घर के बाहर उनके कार्टून बनाए और पोस्टर लगाए जिन पर बिजली चोर लिखा हुआ था।

कुमारस्वामी के जुर्माना भरने के बाद भी यह तत्व बाज नहीं आए। उन्होंने दूसरे पोस्टर लगाए जिनमें लिखा हुआ था कि उन्होंने ₹68,000 की फिल्म बनाई है। इनमें यह भी लिखा हुआ था कि आखिर वह ट्रेलर से क्यों घबरा रहे हैं अभी तो पूरी फिल्म बाक़ी है। ऐसे कुछ पोस्टर जेडीएस के दफ्तर के बाहर भी मिले थे। इन्हीं पोस्टर के बाद यह पूरी जुबानी जंग छिड़ी है।