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ऑस्ट्रेलिया से वापस ली जाएगी वर्ल्ड कप की ट्रॉफी, 3 मैचों से होगा चैंपियन का फैसला: ‘ICC और BCCI के बीच समझौता’ वाली खबर वायरल, जानिए पूरी बात

सोशल मीडिया पर एक लेख तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें कहा गया है कि अभी ऑस्ट्रेलिया वर्ल्ड कप 2023 का विजेता नहीं बना है। वर्ल्ड कप 2023 के विजेता का निर्णय 2 और मैच के बाद किया जाएगा। इसके लिए भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) ने पहले ही ICC से बात कर ली थी। दावा है कि फाइनल और इन दो मैच में जो जीतेगा वह वर्ल्ड कप विजेता बनेगा। आइए, जानते हैं कि इस वायरल रिपोर्ट में क्या-क्या लिखा गया है।

“ऑस्ट्रेलिया नहीं बना वर्ल्ड कप विजेता, फिर होगा मैच” – व्हाट्सएप्प पर दावा वायरल

गौरतलब है कि 19 नवम्बर, 2023 को ऑस्ट्रेलिया ने वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले में भारत को 6 विकेट से हरा कर जीत हासिल की थी और वर्ल्ड कप अपने नाम किया था। लेकिन, लेख में दावा किया गया है कि ऑस्ट्रेलिया का वर्ल्डकप अब खतरे में है।

लेख में कहा गया है कि पहले से निर्धारित भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाली पाँच मैचों की टी20 सीरीज को आगे बढ़ा दिया गया है। इसकी जगह पर दो और मुकाबले वर्ल्डकप विजेता का निर्धारण करने के लिए खेले जाएँगे। BCCI ने इसके लिए पहले ही ICC से बात कर ली थी। BCCI और ICC के बीच हुए समझौते में इस बात का जिक्र था कि यदि भारत नरेन्द्र मोदी स्टेडियम अहमदाबाद में फाइनल मुकाबला हारता है तो 2 और मुकाबले मुंबई और कोलकाता में खेले जाएँगे।

इसके लिए पिच तैयार करने का काम शुरू हो चुका है। इसके लिए मुंबई की पिच पर केरोसिन डाला जा रहा है। भारत के मेजबान होने के कारण उसे यह छूट मिली है। दावा है कि ऑस्ट्रेलिया की वर्ल्ड कप फाइनल में जीत इस सीरीज में केवल उन्हें 1-0 से बढ़त दिलाने में कामयाब रही है। उनकी ट्रॉफी और खिलाड़ियों के मैडल भी ICC के अधिकारियों द्वारा वापस ले लिए गए हैं।

ICC के चेयरमैन ग्रेग बार्कले के एक बयान का हवाला भी दिया जा रहा है। इस रिपोर्ट की मानें तो ग्रेग बार्कले का बयान है, “नियम नियम हैं। सभी टीमों को इन्हें मानना ही होगा। मैच के दौरान अगर अम्पायर और ICC अधिकारी नियमों को ध्यान से देखते तो वह ऑस्ट्रेलिया को जश्न मनाने ही नहीं देते।” ग्रेग बार्कले के हवाले से कहा गया है कि 2027 में साउथ अफ्रीका, नामीबिया और ज़िम्बाब्वे में होने वाले वर्ल्डकप में भी यह नियम लागू रहेगा। हालाँकि, तीनों टीम में से किसे मेजबान माना जाएगा यह स्पष्ट नहीं है।

2 और फाइनल की सच्चाई क्या?

आइए, अब आपको इस वायरल दावे की सचाई बताते हैं। दरअसल, यह लेख एक व्यंग्य है। इसे द रोर (TheRoar.com.au) नाम की एक ऑस्ट्रेलियन वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है। यह वेबसाइट खेलों के समाचार प्रसारित करती है। इसी ने यह लेख छापा है जिसे लोग जम कर शेयर कर रहे हैं। यह परम्परा रही है कि बड़े मुकाबलों के बाद हारने वाली टीम के फैन्स पर तंज कसने के लिए ऐसे लेख लिखे जाएँ, यह भी उसी का एक हिस्सा है।

वर्ल्डकप के विजेता का निर्णय 19 नवम्बर को हो चुका है और भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाली सीरीज 23 नवम्बर से चालू हो रही है, इसे स्थगित नहीं किया गया है। ना ही कोई दो मैच अब मुंबई और कोलकाता में होने जा रहे हैं। ICC चेयरमैन ने भी ऐसा कोई बयान नहीं दिया है और ना ही BCCI और ICC के बीच ऐसा कोई समझौता था। ऐसे में यह लेख मात्र मजे लेने के लिए है जिसे लोग सच मान रहे हैं। ऐसा कोई भी नियम नहीं आया है जिससे वर्ल्ड कप के निर्णय को बदला जाए। ऑपइंडिया के फैक्ट चेक में यह दावा झूठा साबित हुआ है।

मुझे अपना (प्राइवेट पार्ट) छूने दो, ऊपर से ही सही… वे घुटनों के बल बैठ जाते थे और कहते थे: बिग बॉस वाले हीरो अंकित गुप्ता ने यह सब झेला

बिग बॉस 16 फेम अंकित गुप्ता आज किसी परिचय के मोहताज नहीं है। टीवी सीरियल बालिका वधू और बेगुसराय के बाद ‘उडारियाँ’ ने उन्हें हर घर में एक जाना-पहचाना नाम बना दिया, लेकिन बदकिस्मती से कामयाबी की इस राह में उन्हें कास्टिंग काउच का भी सामना करना पड़ा।

अंकित ने इस वाकये को अपनी जिंदगी का सबसे खराब अनुभव कहा। उन्होंने कहा कि जब ऐसी चीजें हो रही थीं, तो वह हैरान रह गए थे और उन्होंने अपने कदम पीछे खींच लिए थे। जिस्मानी रिश्ते बनाने की इस पहल पर उन्होंने जवाब दिया, ‘मैंने कहा मैं उन लड़कों में नहीं हूँ और अगर मैं हूँ भी, तो मैं ऐसा नहीं कर सकता।”

उन्होंने आगे बताया, “ठीक है, आप इसे नहीं करना चाहते, लेकिन कम से कम मुझे इसे (प्राइवेट पार्ट) छूने तो दो। ऊपर से ही सही। मैं चौंक गया और अपने से कहा आखिर ये क्या हो रहा है?”

एक इंटरव्यू में अंकित ने अपने कास्टिंग काउच के अनुभव के बारे में खुलकर बताया। उन्होंने कहा, “मैं ऐसे-ऐसे लोगों से मिला हूँ, जिनके बारे में मैं आपको बता भी नहीं सकता। ऐसे लोग हैं, जो आपको ऑफर के साथ बुलाते हैं, वे आपको बहुत सारी कहानियाँ सुनाते हैं और वे बहुत सारे नाम लेते हैं। मसलन उसको मैंने बनाया, इसको मैंने लॉन्च किया, आपको समझाने के लिए वे कुछ भी कहेंगे।”

कास्टिंग काउच को लेकर अपने साथ हुए ऐसे ही एक खराब वाकये और इस ‘समझौते’ को मना करने तक हर बात अंकित ने सब कुछ सामने रख दिया। बिग बॉस के पहले सीजन में भी नजर आ चुके टीवी इंडस्ट्री के इस मशहूर एक्टर ने बताया कि उनके साथ काम देने के नाम पर कैसे शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव डाला गया था।

अंकित से कहा गया, “हर कोई ऐसा करता है, अंकित। क्या आप इंडस्ट्री में काम करना चाहते हैं? यहाँ काम इसी तरह से किया जाता है। तू अभी ये नहीं करेगा, लेकिन 2-3 साल बाद आएगा और फिर कहेगा अब कर लो, तुम इस इंडस्ट्री में अपने 2-3 साल बर्बाद तो नहीं करना चाहोगे।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं ऐसे लोगों से मिला हूँ। मुझे नहीं पता कि मुझे कैमरे पर यह कहना चाहिए या नहीं, वे घुटनों के बल बैठ जाते थे और कहते थे, कम से कम मुझे तुम्हारा (प्राइवेट पार्ट) छूने दो। बस इतना ही, इसके सिवाय कुछ भी नहीं।”

इस वक्त अपने एक्टिंग के पेशे में अंकित को जुनूनियत और उडारियाँ शो में अभिनय के लिए सराहा जा रहा है। को-एक्टर और बिग बॉस 16 की साथी प्रियंका चाहर चौधरी के साथ उनका रिश्ता भी सुर्खियों में है।

सिलक्यारा सुरंग के भीतर फँसे सभी मजदूर स्वस्थ, पहली बार सामने आई तस्वीरें: डॉक्टर वाले इंडोस्कोपिक कैमरे से हुआ लाइव सम्पर्क

उत्तरकाशी की सिलक्यारा सुरंग के भीतर फँसे मजदूरों के पास कैमरा पहुँच गया है। सुरंग के भीतर मलबे के बीच फँसे 41 मजदूरों की पहली तस्वीरें सामने आई हैं। सामने आई तस्वीरों में सभी मजदूर स्वस्थ दिख रहे हैं। तस्वीरों में अन्दर आया मलबा भी देखा जा सकता है। यह मजदूर 12 नवम्बर 2023 से सुरंग के भीतर मलबा आने के कारण फँसे हुए हैं।

रेस्क्यू टीम ने इसी के साथ फँसे हुए मजदूरों से लाइव सम्पर्क स्थापित कर लिया है। इससे पहले 20 नवम्बर की शाम को सुरंग के भीतर फँसे मजदूरों तक 6 इंच व्यास का पाइप पहुँचाने में सफलता मिली थी। यह पाइप 90 मीटर से भी अधिक लंबा है।

इस पाइप के जरिए अब खाना, पानी, दवाइयाँ और अन्य सामान भेजा जा रहा है। अब इस पाइप के जरिए खिचड़ी और अन्य पका हुआ भोजन भी मजदूरों को भेजने में सफलता मिली है। इससे पहले उन्हें केवल सूखा भोजन भेजा जा रहा था।

रेस्क्यू टीम इसी पाइप के जरिए सुरंग में अंदर कैमरा भी भेजने में सफल रही है। अन्दर फँसे मजदूरों को निर्देश देने के लिए भी इस पाइप का सहारा लिया जा रहा है। अन्दर मौजूद लोगों में गब्बर सिंह नेगी, सुशील और सहाबा हैं, जो अपने साथी मजदूरों के हौसले को बनाए रखने में सहायता कर रहे हैं।

इस सुंरग के भीतर इंडोस्कोपिक फ्लेक्सी कैमरा भेजा गया है। इसे एक रबर के पाइप के मुहाने पर लगाया गया है, जिससे पाइप के जरिए इसे अन्दर को धकेला जा सके। ऐसे कैमरों का इस्तेमाल तंग जगहों की जानकारी लेने के लिए किया जाता है। ऐसे कैमरों का उपयोग डॉक्टर भी करते हैं।

इससे पहले 20 नवम्बर को घटनास्थल पर अंतरराष्ट्रीय सुरंग विशेषज्ञ अर्नाल्ड डिक्स भी पहुँचे थे। उन्होंने मजदूरों को जल्द निकाल लेने की बात कही थी। सुरंग के जायजे के लिए रक्षा मंत्रालय से एक रोबोटिक्स टीम भी पहुँची थी।

टीम का कहना था कि वह अन्दर एक वाईफाई कनेक्शन लगाने की भी कोशिश कर रहे हैं। पाइप के जरिए अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी भेजे गए हैं। कैमरे से अन्दर मौजूद प्रत्येक मजदूर की स्थिति जानी जा रही है।

इसी के साथ ही मजदूरों के निकालने के लिए 900 मिलीमीटर (.9 मीटर, मतलब 1 मीटर से थोड़ा सा कम) वाली पाइप को आगे धकेलने का काम भी पुनः चालू होने वाला है। मलबे के भीतर से यह पाइप अब ऑगर मशीन की सहायता से भेजा जा रहा है। मशीन के कलपुर्जों की दोबारा मरम्मत हुई है।

सुरंग में ऊपर की तरफ से खुदाई के लिए मशीन भी पहुँच गई हैं। पहाड़ी में ऊपर की तरफ से ड्रिलिंग करके भी मजदूरों को निकालने की योजना बनाई जा रही है। घटना पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार नजर बनाए हुए हैं। प्रधानमंत्री ने कल मुख्यमंत्री पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी भी ली थी।

योगी सरकार के बाँके बिहारी कॉरिडोर परियोजना को इलाहबाद HC की हरी झंडी, हटाए जाएँगे अतिक्रमण: धार्मिक और तीर्थस्थलों को अदालत ने बताया देश की धरोहर

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की बाँके बिहारी कॉरिडोर परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना के तहत बाँके बिहारी मंदिर के चारों तरफ एक कॉरिडोर का निर्माण होना प्रस्तावित है। वहीं अब इस मामले में उच्च न्यायालय के आदेश के बाद अब इस कॉरिडोर की राह में आने वाले अतिक्रमण को हटाने का रास्ता साफ़ हो गया है।

अपने आदेश में हाईकोर्ट ने सरकार से यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि इस परियोजना को पूरा करने के दौरान किसी दर्शनार्थी को दिक्कत न आने पाए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्तर प्रदेश सरकार की बाँके बिहारी कॉरिडोर परियोजना काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की ही तर्ज पर है। इस काम में आने वाला खर्च सरकार को उठाना पड़ेगा। अनंत शर्मा, मधुमंगल दास और कुछ अन्य पुजारियों ने इस कॉरिडोर को गैर जरूरी बताते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी। याचिकाकर्ताओं ने चढ़ावे और चंदे की रकम भी कॉरिडोर में न लगाने की माँग की थी। इस याचिका पर हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को भी नोटिस जारी किया था।

मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर और जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की डिवीजन बेंच में हुई थी। सरकार ने हाईकोर्ट में इस कॉरिडोर को श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जरूरी बताया था।

बता दें कि 8 नवंबर 2023 को अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अपने आदेश में हाईकोर्ट ने UP सरकार से इस बात का ध्यान रखने के लिए भी कहा कि परियोजना पूरा करने के दौरान दर्शनार्थियों को असुविधा न होने पाए। इस मामले की अगली सुनवाई 31 जनवरी, 2024 को होगी।

अपनी टिप्पणी में अदालत ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि मंदिरों और तीर्थस्थलों का उचित प्रबंधन जनता से जुड़े विषय हैं। अदालत ने धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को देश की धरोहर के समान बताया जहाँ जाने के बाद लोगों में अच्छे मनोभाव पैदा होते हैं। फैसले के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि किसी की आपत्ति के चलते मानव जीवन को प्रभावित नहीं किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कॉरिडोर के निर्माण में टेक्निकल एक्सपर्ट की मदद लेने की भी सलाह दी।

कर्नाटक चुनाव के समय राहुल गाँधी ने जिस मठाधीश से ली थी दीक्षा, पॉक्सो एक्ट में फिर गिरफ्तार: अदालत ने दिया था 24 घंटे में पेश करने का आदेश

कर्नाटक पुलिस ने चित्रदुर्ग मुरुगराजेंद्र बृहन मठ के महंत शिवमूर्ति शरण को गिरफ्तार कर लिया है। सोमवार (20 नवंबर, 2023) को यह गिरफ्तारी पॉक्सो एक्ट के तहत हुई है। लिंगायत धर्म के महंत के खिलाफ चित्रदुर्ग की अदालत ने गैरजमानती वारंट जारी किया था। सोमवार को ही जारी हुए इस वारंट में पुलिस को आदेश दिया गया था कि वो मंगलवार (21 नवंबर, 2023) तक महंत को अदालत में पेश करें। महंत शिवमूर्ति शरण पर पहले से ही बच्चों के यौन शोषण के 2 केस दर्ज हैं जिसमें वो जमानत पर चल रहे थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शिवमूर्ति शरण के खिलाफ चित्रदुर्ग में न्यायाधीश बी के कोमला ने गैर जमानती वारंट जारी किया था। लगभग 24 घंटों की मिली मोहलत में पुलिस ने लिंगायत महंत को महज कुछ ही घंटों में गिरफ्तार कर लिया। शिवमूर्ति की गिरफ्तारी दावनगेरे के विरक्ता मठ से हुई है। आरोपित महंत को 4 दिन पहले ही पॉक्सो के एक अन्य केस में कर्नाटक हाईकोर्ट ने कड़े प्रावधानों के तहत जमानत दी थी। इन शर्तों में जाँच पूरी होने तक चित्रदुर्ग में न घुसने, सबूतों के साथ कोई छेड़छाड़ न करने के साथ 2 लाख के मुचलके का भी आदेश दिया था।

जिन महंत शिवमूर्ति शरण को आज कर्नाटक पुलिस ने गिरफ्तार किया है उनके खिलाफ पॉक्सो एक्ट के 2 मामले दर्ज हैं। इन दोनों केसों की जाँच के दौरान पुलिस ने 1 नवंबर, 2022 को शिवमूर्ति शरण को गिरफ्तार कर लिया था। लगभग 1 साल बाद कर्नाटक हाईकोर्ट से पहले केस में जमानत मिलने के बाद महंत 16 नवंबर, 2023 को जेल से रिहा हुए थे। रिहाई के महज 4 दिनों के बाद पॉक्सो के दूसरे मामले में जमानत न होने की वजह से शिवमूर्ति शरण को फिर से गिरफ्तार कर लिया गया है।

पहले भी दर्ज है बच्चों के यौन शोषण की शिकायतें

पहला केस ओदानदी सेवा संस्थान नाम के NGO ने मैसूर के नजरबाद पुलिस स्टेशन में दर्ज करवाया था। इस FIR में शिवमूर्ति पर आरोप लगा था कि उन्होंने हॉस्टल में रहने वाले दलित समुदाय के नाबालिग छात्रों का यौन शोषण किया था। तब पुलिस ने पॉक्सो और SC/ST एक्ट में FIR दर्ज की थी। बाद में यह केस जाँच और कार्रवाई के लिए चित्रदुर्ग ग्रामीण पुलिस स्टेशन में ट्रांसफर कर दिया गया था।

महंत शिवमूर्ति शरण के लिए दूसरा केस 2 नाबालिग लड़कियों की माँ ने दर्ज करवाया था। उनका आरोप था कि साल 2019 से 2022 तक जब उनकी बेटियाँ हॉस्टल में थीं तब शिवमूर्ति शरण ने उनका यौन शोषण किया था। यह केस भी पॉक्सो एक्ट में दर्ज हुआ था। इस केस में शिवमूर्ति के साथ कनिष्ठ द्रष्टा बसवदित्य और परमशिवैया, गंगाधर, महालिंगा और करिबासप्पा भी आरोपित किए गए थे। जाँच में कोई सबूत न मिलने की बात कह कर पुलिस ने बाद में परमशिवैया का नाम केस से निकाल दिया था।

राहुल गाँधी को दी थी दीक्षा

पॉक्सो एक्ट में गिरफ्तारी शिवमूर्ति शरण कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी को कर्नाटक चुनाव के समय दीक्षा भी दे चुके हैं। अपनी मुरुघा मठ की यात्रा के दौरान राहुल गाँधी ने मठ प्रबंधन से निवेदन किया था कि वो वहाँ से किसी को भेज कर उन्हें शिवयोगा की शिक्षा दिलाएँ। तब शिवमूर्ति शरण ने राहुल गाँधी का पारम्परिक तौर पर स्वागत भी किया था।

रोहित को बनाना चाहते थे मुस्लिम, जहर खाकर दे दी जान: हथियारों के साथ घर में घुसे थे सलमान-सत्तार, मोबाइल में मिले Video से खुला राज

उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में धर्मान्तरण के दबाव के चलते एक हिन्दू युवक ने आत्महत्या कर ली। मृतक का नाम रोहित है। रोहित के परिजनों का आरोप है कि इस्लाम न कबूलने की वजह से उस पर सत्तार, सलमान आदि ने पॉक्सो के तहत केस दर्ज करवा दिया था। आरोपितों ने रोहित पर एक मुस्लिम लड़की से निकाह करने का दबाव भी बनाया था।

दरअसल, शनिवार (18 नवंबर, 2023) को जहर खा कर की गई आत्महत्या से पहले रोहित ने वीडियो बना कर अपनी पीड़ा जाहिर करने का प्रयास किया था। फ़िलहाल, पुलिस ने एक आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है और बाकियों की तलाश की जा रही है।

यह मामला औरैया जिले के विधूना थानाक्षेत्र का है। यहाँ के गाँव बरके पुरवा की रहने वाली सरोजनी देवी ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में पीड़िता ने बताया कि उनके बेटे रोहित की औरैया के ही सत्तार से अच्छी दोस्ती थी। इसी दोस्ती के चलते रोहित का सत्तार के घर आना जाना था। घर आने-जाने के दौरान रोहित की जान-पहचान सत्तार की बेटी से हो गई।

आरोप है कि सत्तार अपनी बेटी का निकाह रोहित से करवाना चाहता था। इसलिए उसने सलमान और बंटी खान आदि के साथ मिल कर रोहित पर इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाया। पीड़ितों का आरोप है कि जब रोहित ने हिन्दू धर्म छोड़ने से मना कर दिया तब आरोपितों ने उस पर औरैया के ही सहार थाने में 6 सितंबर, 2023 को FIR दर्ज करवा दी।

इस FIR में सलमान ने अपनी बहन को नाबालिग बताते हुए रोहित पर उसके अपहरण का आरोप लगाया था। इसी केस में रोहित के साथ अनुज और आर्यन खान को भी नामजद किया गया था जिन पर अपहरण में रोहित के सहयोग का आरोप था।

तब इस मामले में पुलिस ने रोहित को गिरफ्तार कर के लड़की को बरामद करने का दावा किया था। हालाँकि, ऑपइंडिया से बात करते हुए मृतक की बहन ने दावा किया है कि उनके भाई पर आरोप लगाने वाली लड़की बालिग़ थी जिसकी उम्र सत्तार और सलमान ने कम कर के लिखवाई थी।

बाद में रोहित पर नाबालिग से रेप की धारा और पॉक्सो एक्ट की बढ़ोत्तरी की गई थी। इस मामले में लगभग डेढ़ माह जेल में रह कर रोहित बाहर निकला। वह ई रिक्शा चला कर अपना गुजरा करने लगा। 15 नवंबर, 2023 को सुबह लगभग 7 बजे सत्तार, सलमान, बंटी खां, दुल्ली खां, टुन्नन खां और वकील खां रोहित के घर पहुँचे। आरोपितों के हाथों में चाकू और गँड़ासे थे जिसे दिखा कर उन्होंने रोहित को इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाया। इस दौरान रोहित को जान से मारने और उसके माता-पिता को जेल भिजवाने की धमकी दी गई।

इस केस में सरोजनी देवी का आरोप है कि गाँव वालों के बीच-बचाव के चलते उनके परिवार की जान बच पाई थी। वहीं गाँव से चले जाने के बाद भी सत्तार अपने साथियों सहित रोहित पर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाता रहा। रोहित की बहन ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि रोहित ने किसी भी हाल में हिन्दू धर्म न छोड़ने का ऐलान कर दिया था।

आखिरकार रोहित ने पता नहीं किस मजबूरी या दबाव में 18 नवंबर को पहले अपनी पूरी आपबीती एक वीडियो में बताई और फिर जहर खा लिया। वीडियो में उसने सत्तार के परिवार वालों पर खुद को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है।

पुलिस ने इस मामले में सत्तार, सलमान, बंटी, वकील, दुल्ली और टुन्नन खां को नामजद करते हुए केस दर्ज कर लिया है। इन सभी पर IPC की धारा 147, 506, 306 के साथ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/5(1) के तहत कार्रवाई की गई है।

बता दें कि ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। औरैया की पुलिस अधीक्षक चारू निगम के मुताबिक एक आरोपित को गिरफ्तार कर के बाकियों की तलाश और मामले में जाँच करवाई जा रही है।

भारत से सटे सीमा पर होने वाले ‘इज्तिमा’ पर नेपाल सरकार ने लगाई रोक, दुनियाभर से 50000+ मुस्लिमों का होना था जमावड़ा, अब 24 घंटे में लाव लश्कर हटाने का आदेश

धार्मिक संवेदनशीलता का हवाला देते हुए नेपाल सरकार ने भारत-नेपाल सीमा पर होने वाली मुस्लिमों की सालाना इस्लामी जलसा इज्तिमा पर रोक लगा दी है। यहाँ इस्लाम पर तकरीरें होनी थीं। कहा जा रहा है इसमें कई प्रतिबंधित मुस्लिम मजहबी नेताओं को भी बुलाया गया था। जिस पर अब नेपाल के गृह मंत्रालय ने रोक लगते हुए इस आयोजन के लिए लगाए गए टेंट और इसके लिए आए लोगों से अपना इलाका 24 घंटे के अंदर खाली करने को कहा है।

दरअसल, जोगबनी सीमा से सटे नेपाल के कोशी के सुनसरी जिले में इज्तिमा की तैयारी जोर-शोर से चल रही थी। नेपाल का ये इलाका भारत के बिहार राज्य के अररिया जिले के शहर जोगबनी से लगा हुआ है।

इस जिले के दुहबी और इटहरी में 21 से 23 नवंबर तक इज्तिमा के लिए 80 एकड़ में टेंट लगाए गए। इसमें आने वाले करीब 50 हजार लोगों के रहने के पूरे इंतजामात भी किए गए थे।

इसके लिए दुनिया भर के कई देशों के मुस्लिमों को बुलावा भेजा गया था। बता दें कि सुनसरी जिला मजहबी तौर से काफी संवेदनशील इलाका है। यहाँ मुस्लिमों के इस बड़े आयोजन से हिंदू बाहुल्य देश नेपाल में धार्मिक भावनाओं के भड़कने की आशंका थी।

गौरतलब है कि बीते महीने अक्टूबर की शुरुआत में ही भारत के इस पड़ोसी देश के बाँके जिला के नेपालगंज में भारी सांप्रदायिक हिंसा भड़की थी। तब यहाँ मुस्लिम भीड़ ने एक फेसबुक पोस्ट को लेकर न सिर्फ ‘सर तन से जुदा’ और ‘लब्बैक-लब्बैक’ के नारे लगाए, जुलुस निकाले बल्कि हिन्दुओं की रैली पर पथराव कर हिंसा की थी।

इसी से बचने के लिए नेपाल ने दुर्घटना से सुरक्षा भली का रवैया अपनाया है। इस वजह से भारत की सीमा के पास होने वाले इस आयोजन को सुरक्षा की दृष्टि से रोक लगा दी गई है। इस मामले में सुनसरी जिला प्रशासन को खबर लगी थी कि इज्तिमा में भारत सहित कई देशों के प्रतिबंधित कट्टर मुस्लिम समर्थक मौलाना, उलेमा और मौलवी शिरकत करने वाले हैं।

इसके आयोजन से नेपाल को पड़ोसी मुल्क भारत से रिश्ते खराब होने का अंदेशा भी था। मुस्लिमों के इस सालाना मजहबी आयोजन को लेकर सुनसरी जिला प्रशासन ने नेपाल सरकार से सलाह माँगी थी। सुनसरी की चीफ जिलाधिकारी हुमकला पाण्डे ने ‘इज्तिमा’ को लेकर गृह मंत्रालय को पत्र लिखा था।

वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए गृह मंत्रालय ने किसी भी कीमत पर इस कार्यक्रम को रोकने का निर्देश जारी कर दिया। जिलाधिकारी पाण्डे ने बताया कि गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद आयोजकों को कार्यक्रम रोकने के लिए लिखित निर्देश जारी कर दिया गया है।

नेपाल ने ये फैसला यहाँ के खुफिया विभाग और कई राजनीतिक दलों के साथ सुनसरी जिले के अधिकारियों के साथ बैठक करने के बाद लिया। इसके मद्देनजर सुनसरी के चीफ जिलाधिकारी जिले के सुरक्षा अधिकारियों के संग आयोजन स्थल का मौका मुआयना करने गए थे।

इस दौरान उन्होंने इज्तिमा के लिए लगाए गए टेंटों को तुंरत हटाने के साथ ही बाहर से वहाँ आए लोगों को 24 घंटे के अंदर जिला छोड़ने का निर्देश भी दिया।

यदि PM मोदी ‘पनौती’ हैं तो भारत को ‘पनौती’ प्रधानमंत्री ही चाहिए

  1. क्या आपको पता है आज भारत का खेल बजट कितना है?
  2. क्या आप ‘TOPS’ यानी टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम के बारे में जानते हैं?
  3. क्या आप ‘खेलो इंडिया’ के तहत देशभर में तैयार हो रहे टैलेंट पूल के बारे में जानते हैं?

इन सवालों का जवाब तीन कारणों से जानना जरूरी है। पहला, इससे आपको पता चलता है कि कैसे मोदी सरकार ने उस देश में स्पोर्टस का एक ‘इको सिस्टम’ तैयार कर दिया है, जो देश मानता था कि पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोगे नवाब, खेलोगे-कूदोगे तो होगे खराब। जिस देश की सरकारें मानती थीं कि खेल ही है, उसके लिए कैसा सिस्टम…

दूसरा, जिस देश में गली-गली में टैलेंट दम तोड़ देते थे, उस देश के गली-गली से निकले टैलेंट अब विश्व स्तरीय प्रशिक्षण पाकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश को गौरवान्वित होने का क्षण दे रहे हैं। इसी साल भारत ने एशियाई खेलों का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। ‘खेलो इंडिया’ अभियान से निकले करीब सवा सौ खिलाड़ी एशियाई खेलों का हिस्सा बने थे। इनमें से 36 ने मेडल भी जीत लिए।

इन सवालों के जवाब जानने का तीसरा कारण तात्कालिक है। क्योंकि 2014 और 2019 के जनादेश से घृणा करने वाला वर्ग क्रिकेट विश्व कप के फाइनल की हार के बाद आपके प्रधानमंत्री को ‘पनौती’ बता आपके वोट को अपमानित करने का काम कर रहा है।

किसी देश में खेल का ‘इको सिस्टम’ कितना बेहतर है, इसका पता ओलंपिक में उस देश की तरफ से क्वालिफाई करने वाली खिलाड़ियों की संख्या से पता चलता है। 2012 में लंदन में हुए ओलंपिक के लिए भारत के 83 एथलीट ने क्वालिफाई किया था। लेकिन, मोदी सरकार के रहते हुए दो ओलंपिक रियो डी जेनेरियो 2016 और टोक्यो 2020 ओलंपिक के लिए क्रमश: 117 और 126 खिलाड़ियों ने क्वालिफाई किया है।

अब मोदी सरकार में खेल का ढाँचा बनाने के लिए उठाए गए कदमों पर गौर करिए। 9 साल पहले के मुकाबले खेल बजट आज तीन गुणा हो चुका है। इस साल के लिए केंद्र सरकार ने युवा और खेल मंत्रालय को 3389.32 करोड़ रुपए का बजट दिया है। लक्ष्य है खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएँ और प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर 2024 के पेरिस ओलंपिक और पैरालंपिक में प्रदर्शन और बेहतर करना।

उल्लेखनीय है कि 2007-08 में भारत का खेल बजट महज 708 करोड़ रुपए का था। हालाँकि 2009-10 में यह बजट 3670 करोड़ रुपए हो गया था। पर इसका कारण खेल का इको सिस्टम विकसित करना न होकर, 2010 के दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी था। इसके बाद से खेल बजट में फिर से कमी आने लगी। लेकिन मोदी सरकार इस क्षेत्र के बजट में लगातार उल्लेखनीय वृद्धि कर रही है।

इस पैसे को खर्च करने के लिए बकायदा एक रोडमैप तैयार किया गया है। खेलो इंडिया, TOPS जैसी योजना तैयार की गई है। इसके तहत स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय के स्तर पर प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान की जा रही है। फिर उनके प्रशिक्षण, डाइट और अन्य चीजों पर सरकार खर्च कर रही है।

खेलो इंडिया के तहत टैलेंट पूल तैयार करने का काम किया जा रहा है। इस समय देशभर के करीब तीन हजार खिलाड़ियों को इस योजना के तहत प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन खिलाड़ियों को 8 साल के लिए सालाना 5 लाख रुपए भी दिए जा रहे हैं। इसी तरह TOPS के तहत यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि देश के शीर्ष खिलाड़ियों को दुनिया का श्रेष्ठ प्रशिक्षण मिले।

इसका फायदा ओलंपिक से लेकर एशियाई खेलों तक भारत के प्रदर्शन में आए सुधार तक में देखने को मिला है। यह सब उस देश में हो रहा है, जहाँ खेल का क्षेत्र हमेशा से सरकारी उपेक्षा और लालफीताशाही का शिकार रहा है। जिसके कारण कभी-कभार किसी अभिनव बिंद्रा ने स्वर्णिम प्रदर्शन किया भी तो वह देश के खेल ढाँचे की सफलता से अधिक उनकी व्यक्तिगत अर्जित सफलता थी।

आज ग्रामीण स्तर तक खेल के ढाँचे को लेकर केंद्र सरकार पैसा दे रही है। राष्ट्रीय खेल महासंघों को सहायता मिल रही है। अंतराष्ट्रीय स्पर्धाओं के विजेता हो या उनके कोच, उन्हें पुरस्कृत किया जा रहा है। राष्ट्रीय खेल पुरस्कार, उत्कृष्ट खिलाड़ियों को पेंशन, पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय खेल कल्याण कोष, राष्ट्रीय खेल विकास कोष, भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के जरिए प्रशिक्षण केंद्रों का संचालन हो रहा है। पैसे का आवंटन योजनाओं के क्रियान्वयन के आधार पर हो रहा न कि राज्यों के राजनीतिक रसूख को नाप-तौल कर।

ऐसा भी नहीं है कि यह सब मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में शुरू हुआ है। खेल को लेकर 2014 में आते ही इस सरकार का विजन स्पष्ट था। इस सरकार का मानना रहा है कि देश की प्रगति इस बात से भी जुड़ी हुई है कि देश में खेल का ढाँचा कितना व्यापक और कितना मजबूत है। यही कारण है कि मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में भी खेल विकास योजनाओं के तहत 6801 करोड़ 30 लाख रुपए जारी किए थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी साल गोवा में 37वें राष्ट्रीय खेलों को संबोधित करते हुए कहा भी था, “किसी भी देश के खेल क्षेत्र की प्रगति का सीधा नाता उस देश की अर्थव्यवस्था की प्रगति से भी जुड़ा होता है। नकारात्मकता और निराशा भले मैदान में ही क्यों न हो, उसका असर जीवन के हर क्षेत्र पर दिखता है। खेल क्षेत्र की सफलता को भारत की सफलता से अलग कर नहीं देखा जा सकता है।”

खेल और अर्थव्यवस्था के बीच जो लिंक प्रधानमंत्री बता रहे हैं, उसे बाजार भी मानता है। क्रिकेट विश्व कप के आयोजन से भारतीय अर्थव्यवस्था में करीब 22 हजार करोड़ रुपए आने का अनुमान है। सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि 2036 के जिस ओलंपिक की मेजबानी हासिल करने को मोदी सरकार प्रयास कर रही है, वह मिलने पर अर्थव्यवस्था को कितना बड़ा बूस्ट मिलेगा।

अब लौटते हैं 19 नवंबर 2023 को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में। 50 ओवर के विश्व कप क्रिकेट के फाइनल में भारत और ऑस्ट्रेलिया की टीम मुकाबिल थी। भारतीय टीम पूरे टूर्नामेंट में अपराजेय रही। फाइनल में खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने प्रधानमंत्री मोदी भी स्टेडियम पहुँचे। इसमें कुछ भी नया नहीं था। पूर्व में भी हम प्रधानमंत्री मोदी को विभिन्न क्षेत्रों के खिलाड़ियों का इस तरह से उत्साहवर्धन करते देख चुके हैं। लेकिन भारतीय टीम की हार के बाद जिस तरह की टिप्पणियाँ की गई, उससे प्रतीत होता है कि मोदी से घृणा करने वाला वर्ग अपने ही देश की हार की प्रतीक्षा में बैठा था।

क्रिकेट वह खेल है, जिसके प्रशासन और ढाँचे में सरकार का कोई दखल नहीं होता है। देश के गली-गली में क्रिकेट को पहुँचाने का श्रेय भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को जाता है। समय-समय पर बीसीसीआई के प्रशासनिक रवैए को लेकर विवाद होते रहे हैं, बावजूद इसके यह खेल देश में समय के साथ अपना असर बढ़ाते गया। 1983 में पहली बार क्रिकेट वर्ल्ड कप जीतना हो या फिर 2011 में दोबारा से 50 ओवर के क्रिकेट का विश्व विजेता बनना, यह बीसीसीआई के ही प्रशासनिक नेतृत्व में हुआ है। यह महज संयोग था कि उस समय प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी और मनमोहन सिंह थे। यदि खेलों को लेकर ये सरकारें गंभीर होती तो 2008 तक मिले 17 ओलंपिक मेडल में से 11 देने वाली हॉकी ही बेसहारा नहीं होती।

खेल के क्षेत्र में किसी सरकार के काम का मूल्यांकन इस बात पर होता है कि उसने कैसा देशव्यापी ढाँचा खड़ा किया। जमीन पर जाकर प्रतिभा की पहचान करने की व्यवस्था किस तरह तैयार की। प्रतिभाओं को कैसे तराशा। उन्हें विश्वस्तरीय मुकाबलों के लिए कैसे तैयार किया। इन्हीं क्षेत्रों में कार्य से कोई देश खेल की महाशक्ति बनता है। लेकिन पूर्व की सरकारों ने इस दिशा में गंभीर कार्यों को लेकर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। इस दिशा में काम 2014 के बाद शुरू हुए हैं।

खेल की दुनिया में महाशक्ति बनने के लिए भारत को अभी लंबी यात्रा करनी होगी। मोदी सरकार इस यात्रा के लिए वह जमीन तैयार कर रही है, जिस पर चलकर अमेरिका, रूस, चीन जैसे देश खेल की महाशक्ति बने। यदि इस जमीन को तैयार करने वाला प्रधानमंत्री ‘पनौती’ है तो वह हमें स्वीकार है। अहमदाबाद की एक खराब शाम या एक कप के हाथ से फिसल जाने से हम किसी ऐसे नेतृत्व को स्वीकार नहीं कर सकते, जिनका किसी कप के हाथ में आने के समय सत्ता में होना महज संयोग था। हम जानते हैं कि संयोग की यात्रा पर एक दिन पूर्णविराम लगता है। पर मजबूत जमीन कई पीढ़ियों का भविष्य बदल देती है। वह तब भी स्वर्णिम मार्ग पर ले जाती है, जब जमीन तैयार करने वाला सूरज अपनी यात्रा पूर्ण कर चुका होता है। वह देश को गौरवान्वित होने के असंख्य क्षण बार-बार प्रदान करता रहता है।

राँची के 4 मंदिरों में तोड़फोड़, कटर से काट दी देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ: 3 दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली

झारखंड की राजधानी राँची में एक साथ कई हिन्दू मंदिरों में तोड़फोड़ की खबर है। तोड़फोड़ के दौरान देवी-देवताओं की मूर्तियों को कटर से काटा गया है। इस घटना के बाद हिन्दू संगठनों ने नाराजगी जताते हुए प्रदर्शन किया है। शुक्रवार (17 नवंबर, 2023) को सामने आई इस घटना में फ़िलहाल पुलिस अभी तक किसी भी आरोपित को गिरफ्तार नहीं कर पाई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना राँची के मांडर इलाके की है। यहाँ शुक्रवार को जब लोग सुबह उठे तो उनको 4 मंदिरों में देवी-देवताओं की प्रतिमाओं के खंडित होने की जानकारी मिली। लोगों को पता चला कि मुड़मा स्थित महावीर मंदिर, छोटा बजरंग बली मंदिर, बूढ़ा महादेव और मड़ई देवी मंडप में किसी असामाजिक तत्व ने न सिर्फ तोड़फोड़ की थी बल्कि मूर्तियों को कटर चला कर काट दिया था। थोड़ी ही देर में क्षतिग्रस्त प्रतिमाओं के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए।

वहीं इस घटना से नाराज लोगों ने सड़क पर उतर कर प्रदर्शन किया। इस दौरान जाम लगाया गया और आरोपितों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की माँग की गई। हालात को सँभालने पहुँचीं पुलिस ने नाराज लोगों को समझाया और शांत करवाया। छठ पर्व होने की वजह से लोगों ने प्रशासन का सहयोग किया। हालाँकि, इस दौरान जल्द कार्रवाई करने का अल्टीमेटम भी दिया गया। पुलिस ने अज्ञात आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज कर जाँच शुरू कर दी। हालाँकि अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने राज्य में मंदिरों को क्षतिग्रस्त होने जैसी घटनाओं के आम बात हो जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने राँची पुलिस द्वारा आरोपितों की जल्द गिरफ्तारी की उम्मीद जताई है। इस मामले में ऑपइंडिया से बात करते हुए स्थानीय भाजपा नेता आनंद सिंह ने इस घटना के पीछे ईसाई मिशनरियों की साजिश की आशंका जताई है। आनंद सिंह ने इस मामले में अब तक कोई गिरफ्तारी न होने की वजह प्रशासनिक अधिकारीयों द्वारा की जा रही ढिलाई को जिम्मेदार बताया।

जिस ऑस्ट्रेलिया ने जीता वर्ल्ड कप उसके कप्तान ICC की टीम में नहीं, रोहित शर्मा के नेतृत्व को किया सलाम: भारत के 6 खिलाड़ी

वर्ल्डकप के फाइनल मुकाबले में भले ही भारत को ऑस्ट्रेलिया के हाथों शिकस्त झेलनी पड़ी है लेकिन उसके दबदबे की कहानी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल (ICC) की टीम बयाँ कर रही है। ICC की 12 सदस्यीय टीम में 6 खिलाड़ी भारतीय हैं।

ICC वर्ल्डकप टूर्नामेंट में खेलने वाली सभी टीमों के खिलाड़ियों में से चुन कर एक टीम तैयार करती है। इस टीम में टूर्नामेंट के दौरान सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को जगह दी जाती है। भारत के 6 खिलाड़ियों का इसमें होना दिखाता है कि भारत ने टूर्नामेंट में कितना मजबूत प्रदर्शन किया है।

इस टीम का कप्तान भारतीय टीम के कप्तान रोहित शर्मा को बनाया गया है। रोहित की कप्तानी और उनकी बल्लेबाजी को देखते हुए उन्हें इस टीम का कप्तान बनाया गया है। उनके शुरूआती ओवर में तेजी से रन बनाने और बड़े स्कोर खड़े करने में उनकी भूमिका देखते हुए उन्हें कप्तान की भूमिका सौंपी गई है।

टीम में रोहित के बाद भारतीय बल्लेबाज विराट कोहली को जगह दी गई है। विराट कोहली इस टूर्नामेंट में सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे हैं। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट के दौरान 765 रन बनाए हैं। वर्ल्डकप के दौरान खेली गई 11 पारियों में से केवल 2 बार ऐसा हुआ है जब वह 50 से कम रन पर आउट हुए हों।

विराट कोहली ने इसी वर्ल्डकप के दौरान एकदिवसीय मैच में सबसे अधिक अर्ध शतक बनाने का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया है। विराट कोहली को इसी लिए इस टीम में जगह मिली है। विराट के साथ ही भारतीय विकेटकीपर केएल राहुल को भी इस टीम में शामिल किया गया है।

राहुल की ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 97 रनों की पारी और उनके कुल 452 रनों को भारतीय टीम के प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए ICC ने उन्हें अपनी टीम में जगह दी है। 4.25 रन/ओवर की दर से गेंदबाजी करने वाले रविन्द्र जडेजा भी इसका हिस्सा हैं।

भारतीय गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की 4.06 रन प्रति ओवर देने के करिश्माई प्रदर्शन के चलते उन्हें भी इस टीम में जगह मिली है। उन्होंने यह कारनामा मैच के शुरूआती ओवर में गेंद डालते हुए किया है जहाँ फील्डिंग से भी उतनी सहायता नहीं मिलती।

टीम में भारतीय गेंदबाज मोहम्मद शमी को भी जगह दी गई है। वह इस वर्ल्डकप टूर्नामेंट के सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज भी हैं। उन्होंने पूरे वर्ल्डकप में 24 विकेट लिए हैं। उनके इस जबरदस्त प्रदर्शन को देखते हुए ICC ने उन्हें अपनी टीम में शामिल किया है। शमी वर्ल्ड कप में तीसरे सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज भी बन गए हैं।

ICC की टीम में कुल 12 खिलाड़ी रखे गए हैं। इनमें से 6 भारतीय, 2 दक्षिण अफ्रीकी, 2 ऑस्ट्रेलिया, 1 श्रीलंका और 1 न्यूजीलैंड से हैं। ऑस्ट्रेलिया की तरफ से एडम जम्पा और ग्लेन मैक्सवेल जबकि दक्षिण अफ्रीका से जेराल्ड कोट्जी और क्विंटन डी कॉक को शामिल किया गया है। श्रीलंका से दिलशान मधुशंका और न्यूजीलैंड से डैरिल मिचेल को शामिल किया गया है।