Home Blog Page 1395

बेहतर होगा जीवन, पूरी होगी हर बुनियादी जरूरत: जनजातीय समुदाय को PM मोदी देंगे ₹24 हजार करोड़ की सौगात, शुरू करेंगे PVTG विकास मिशन

देश के जनजातीय वर्ग को सशक्त बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी PVTG (विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह) विकास मिशन लॉन्च करने जा रहे हैं। इस मिशन की शुरुआत जनजातीय गौरव दिवस यानी कि 15 नवंबर से होगी। इस दिन भगवान बिरसा मुंडा की जयंती होती है।

मोदी सरकार जनजातीय समूह के समग्र विकास को सुनिश्चित करने के लिए 24 हजार करोड़ रुपए की योजना शुरू करेगी। इससे पहले 2023-24 के बजट में, विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए प्रधानमंत्री पीवीटीजी विकास मिशन की घोषणा की गई थी।

जानकारी के मुताबिक इस मिशन को 9 मंत्रालयों की 11 योजनाओं के जरिए लागू किया जाएगा। योजना की कुछ शर्तों में भी ढील दी जाएगी। बताया जा रहा है कि मिशन के तहत इन जनजातीय इलाकों में सड़क और टेलिकॉम कनेक्टिविटी, बिजली, हाउसिंग, साफ पेयजल और सफाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। साथ ही उनके लिए आजीविका के मौके भी दिए जाएँगे।

बता दें कि 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 75 पीवीटीजी हैं जो 22,544 गाँवों (220 जिलों) में रहते हैं और जिनकी आबादी लगभग 28 लाख है। विशेष रूप से इनमें से भी ज्यादातर घने जंगलों में रहते हैं। यही कारण है कि इनकी बुनियादी जरूरतों की पूर्ति के लिए यह योजना बनाई गई है।

पटाखे ही क्यों, रवीश कुमार चाहते हैं हिन्दुओं का साँस लेना भी कर दिया जाए बैन: पराली पर नहीं फूटा बकार, दिवाली पर घृणा की बौछार

एक पत्रकार है, जो पहले NDTV में था लेकिन जैसे ही गौतम अडानी ने इस मीडिया संस्थान को खरीदा वो पत्रकार वहाँ से भाग खड़ा हुआ और यूट्यूबर बन गया। अब उस पत्रकार को प्रदूषण काट रहा है। प्रदूषण के भी 2 प्रकार हैं। पहले, पंजाब के किसानों द्वारा पराली जलाने के कारण होने वाला प्रदूषण जो पूरे 2 महीने चलता है। ये रवीश कुमार को नहीं काटता था। दूसरा, दिवाली के दिन कुछ घंटे पटाखे फोड़े जाने के कारण हुआ हल्का-फुल्का प्रदूषण। ये रवीश कुमार को बहुत काटता है।

इसका कारण है। कारण ये है कि पराली जलाने वाले वो किसान होते हैं जिन्होंने आंदोलन के नाम पर 3 कृषि कानूनों के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी को 1 वर्ष से भी अधिक समय तक बंधक बना कर रखा था। दिल्ली की सीमाएँ घेर ली गई थीं और दलालों को बचाने के लिए किसानों की आय बढ़ाने के लिए लाए गए कानूनों का विरोध हुआ। दूसरा कारण ये है कि पंजाब में AAP की सरकार है। भाजपा के खिलाफ जो लोग हैं, वो पूरी धरती में आग लगा दें तो भी रवीश कुमार को ठंडक ही महसूस होगी।

वहीं दिवाली पर प्रदूषण का राग अलापने के पीछे कारण है कि ये एक हिन्दू त्योहार है और नरेंद्र मोदी के युग को हिन्दू राष्ट्रवाद के पुनरुत्थान की अवधि के रूप में जाना जाता है। अयोध्या में राम मंदिर का भी उद्घाटन होना है, वहाँ दिवाली पर 22 लाख से भी अधिक दीये जला कर गिलीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया गया। दिवाली पर हर एक पटाखे की चमक रवीश कुमार के लिए महाप्रलय से भी ज़्यादा खतरनाक है, इसका कारण यही है।

सुप्रीम कोर्ट पर तंज, रवीश कुमार के लिए दिवाली से होता है फेफड़ों का रोग

रवीश कुमार लिखते हैं कि AQI की हालत भी संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव जैसी हो गई है। वाह, एकदम सही बात है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र पर तंज कसा है कि युद्ध की विभीषिका को लेकर चेतावनी दी जाती है, निंदा होती है मगर बम बरसते रहते हैं। एक तरह से उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को संयुक्त राष्ट्र बता दिया है और दावा किया है कि उसके आदेश का पालन नहीं हो रहा। इसीलिए, वो सुझाव देते हैं कि सुप्रीम कोर्ट को अब अपना नाम बदल कर ‘टिप्पणी कोर्ट’ रख लेना चाहिए और पटाखे फोड़ने की पूरी छूट दे देनी चाहिए।

उन्होंने हिन्दुओं को दोषी बताने के लिए लिखा है कि आप लाख फेफड़ों का बुरा हाल बताएँगे, लोग पटाखे फोड़ेंगे ही। रवीश कुमार का मानना है कि फेफड़े के रोग के लिए हिन्दू पर्व-त्योहार ही जिम्मेदार हैं। हाँ, ईद बहुत अच्छा है जहाँ एक दिन में ही करोड़ों बकरों को काट कर मुस्लिम खा जाते हैं, न रहता है शरीर और न बचता है फेफड़ा। सब पेट में। दिवाली में जानवर डर जाते हैं, ईद इसका स्थायी समाधान करता है और जानवर को मार ही डाला जाता है। रवीश कुमार खुश होते हैं। दिवाली वाली नाराज़गी चली जाती है।

फेफड़ों की बात की है रवीश कुमार ने तो उन्हें बताना ज़रूरी है कि औसतन सबसे ज़्यादा लंग कैंसर के मरीज हंगरी में हैं, उसके बाद सर्बिया, फ़्रांस और तुर्की का नंबर आता है। दिवाली से हुआ होगा, नहीं? दिवाली के पटाखों से शायद। इस्लामी मुल्क तुर्की में भी दिवाली के कारण ही हुआ होगा, है न? वैसे दिवाली तो पूरे देश में मनाया जाता है, फिर प्रदूषण सबसे ज़्यादा दिल्ली में ही क्यों बढ़ा रहता है हर साल अक्टूबर-नवंबर-दिसंबर में? दिवाली 3 महीने तो नहीं ही चलती है।

रवीश कुमार क्या चाहते हैं? दुनिया भर में 120 करोड़ से भी अधिक हिन्दू हैं, सबको जेल में ठूँस दिया जाए? दिवाली पर पटाखे बैन कर दिए जाएँ, होली पर रंग, महाशिवरात्रि पर पानी, दशहरा पर रावण जलाना और रक्षाबंधन पर राखी को प्रतिबंधित कर दिया जाए? है कि नहीं? हिन्दुओं की धरती पर, सनातन की समृद्ध भूमि पर रह जाए तो सिर्फ ईद और क्रिसमस। शायद रवीश कुमार यही चाहते हैं। तब शायद दुनिया की सारी समस्याएँ ही खत्म हो जाएँगी।

पहले रवीश कुमार को आँकड़ों से जवाब दे देते हैं। फिर उनका ‘इलाज’ भी किया जाएगा। आँकड़े कहते हैं कि पंजाब में पराली जलाने की घटनाएँ 25,000 के पार चली गई हैं। दिवाली के दिन भी ऐसी 1000 घटनाएँ सामने आईं। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के गृह जिले संगरूर में ही सबसे ज़्यादा मामले सामने आए हैं। दिवाली 12 नवंबर को था, जबकि इससे 10 दिन पहले ही NCR के आनंद विहार में AQI 999 पहुँच गया था। इसके लिए क्या जिम्मेदार था? हिन्दुओं का साँस लेना?

जबकि दिवाली के बाद AQI में बहुत ज़्यादा बदलाव नहीं आया है। हर इलाके में सामान्य बदलाव ही आए हैं। ये एक दिन की बात थी, पराली जलाने की प्रक्रिया पूरे 2 महीने चलती है। लेकिन, मजाल कि रवीश कुमार ने पराली को लेकर एक भी ट्वीट किया हो। अगर दिवाली से प्रदूषण होता है तो दिवाली से पहले AQI बढ़ने का क्या कारण है? रवीश कुमार आगे लिखते हैं कि पटाखे छोड़ने के बाद की हवा को ‘पवित्र पवन’ घोषित किया जाए। हर नागरिक का कर्तव्य होगा कि वह खुले मैदान में जाकर इस ‘पवित्र पवन’ का सेवन करे।

हिन्दुओं के साँस लेने पर ही लगे बैन, तब खुश होंगे रवीश कुमार

मैं तो कहता हूँ कि रवीश कुमार को ये माँग करनी चाहिए कि हिन्दुओं का साँस लेना ही प्रतिबंधित कर दिया जाना चाहिए। हिन्दू साँस लेते हैं, कार्बनडाइऑक्साइड छोड़ते हैं और इससे वातावरण में प्रदूषण फैलता है। सबसे अच्छा उपाय यही रहेगा। दिवाली पर पटाखे क्यों, मैं तो कहता हूँ लक्ष्मी पूजन भी बैन किया जाए। सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने माँ लक्ष्मी पर सवाल उठाते हुए उनका मजाक बना ही दिया है। दिवाली पर दीये जलाने से लेकर पारंपरिक परिधान पहनने तक, सब कुछ बैन कर दिया जाना चाहिए।

मैं इस बहस में नहीं पड़ूँगा कि संयुक्त राष्ट्र कितना सफल है और कितना असफल, लेकिन इजरायल-हमास युद्ध के मामले में शुरुआत तो हमास ने किया था न? इस्लामी आतंकियों ने इजरायल में घुस कर डेढ़ हजार निर्दोषों को मार डाला। बच्चों, बुजुर्गों और जानवरों तक को नहीं बख्शा गया। महिलाओं के साथ बलात्कार कर उनकी लाश को नग्न कर जुलूस निकाला गया ‘अल्लाहु अकबर’ नारे के साथ। अब इजरायल ने जवाब देना चालू किया तो रवीश कुमार का गिरोह पूरा का पूरा एक्टिव हो गया।

साथ ही रवीश कुमार ने ‘विश्वगुरु’ वाला तंज भी कसा है। अगर आपने ‘द वैक्सीन वॉर’ फिल्म देखी होगी तो उसमें दिखाया गया है कि कैसे वामपंथी पत्रकार भारत की सफलताओं पर दुखी होते हैं और किसी छोटी सी असफलता पर भी तुरंत ‘विश्वगुरु’ वाला तंज लेकर आ जाते हैं। यही स्थिति है यहाँ भी। अमेरिका का राष्ट्रपति बाइबिल पर हाथ रख कर शपथ ले सकता है, UK के राजा का शपथग्रहण पादरी करा सकते हैं लेकिन हिन्दुओं के देश में हिन्दू अपना त्योहार नहीं मना सकते।

लोकतंत्र में जनता से ऊपर कोई नहीं

जहाँ तक बात सुप्रीम कोर्ट की है, इस देश का सहिष्णु हिन्दू समाज ही है जिसने 500 वर्षों तक अपने लोगों का लगातार बलिदान दिया लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद ही अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हुआ। ये हिन्दू ही हैं, जिनके सबरीमाला मंदिर में सुप्रीम कोर्ट ने परंपराओं को बदल कर नियम-कानून बदल दिया और जब उन्होंने विरोध प्रदर्शन किया तो केरल की वामपंथी सरकार ने सैकड़ों केस दर्ज कर दिए। और हाँ, ये सुप्रीम कोर्ट ने हिन्दू श्रद्धालुओं नहीं बल्कि हिन्दू धर्म से घृणा करने वाले वामपंथियों की माँग पर किया।

प्रजातंत्र में प्रजा से बड़ा कोई नहीं है। ये वो धरती है जहाँ सदियों से सनातन परंपरा फली-फूली है और इस्लामी आक्रांताओं, अंग्रेजों व कॉन्ग्रेस पार्टी की लाख कोशिशों के बावजूद इसे कोई नहीं रोक पाया। पटाखे जलाना अपराध नहीं है, ये हत्या, बलात्कार, चोरी, लूटपाट या फिर जोर-जबरदस्ती नहीं है। हाँ, सड़क पर नमाज पढ़ कर ट्रैफिक बाधित करना जोर-जबरदस्ती है। गैर-हिन्दुओं को जबरन लाखों मस्जिदों से रोज 5 बार अजान सुनना जोर-जबरदस्ती है। इन सब पर ट्वीट किया कभी रवीश कुमार ने?

जो जनता चाहेगी वही होगा। और हाँ, जनता व भीड़ में अंतर है। हिन्दुओं ने सामूहिक अवज्ञा का प्रदर्शन किया है, कट्टर मुस्लिम भीड़ ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाती है और इसे अंजाम भी दे दिया जाता है। रवीश कुमार पराली जलाने की समस्या का समाधान ढूँढने के लिए कहें पंजाब सरकार को, लेकिन तब सबको पता चल जाएगा कि प्रदूषण का कारण क्या था। सहिष्णु हिन्दुओं की उदारता का बार-बार गलत फायदा नहीं उठाया जाना चाहिए। वो कानून हाथ में नहीं लेते हैं, इसका मतलब ये नहीं कि दुनिया की हर समस्या के लिए कोई भी ऐरा-गैरा उन्हें गाली देकर निकल जाए।

ऋषि सुनक ने गृहमंत्री को हटाया, पूर्व PM को बनाया ब्रिटेन का विदेश मंत्री: सुएला ब्रेवरमैन ने लंदन पुलिस को बताया था फिलिस्तीन समर्थक

ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने अपनी गृहमंत्री सुएला ब्रेवरमैन को उनके पद से हटा दिया है। वह सरकार की वरिष्ठतम मंत्रियों में से एक थी। उनकी जगह पर जेम्स क्लीवरले को इंग्लैंड का नया गृहमंत्री नियुक्त किया गया है। ऋषि सुनक ने अपनी कैबिनेट में कई बदलाव किए हैं।

बताया गया है कि सुएला को लंदन पुलिस की आलोचना करने के कारण कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखाया गया है। वह ऋषि की सरकार में अक्टूबर, 2022 से ही गृह विभाग की जिम्मेदारी सँभाल रही थीं। सुएला भी ऋषि की तरह एक भारतवंशी हैं।

बताया जा रहा है कि सुएला ने बीते सप्ताह एक लेख लिखा था जिसमें उन्होंने लंदन पुलिस पर फिलिस्तीन समर्थकों पर नरम रवैया अपनाने का आरोप लगाया था। उन्होंने गाजा निवासियों के समर्थन में निकलने वाली रैलियों को घृणा से भरे मार्च बताया था। उनके इस लेख के बाद दक्षिणपंथियों ने भी लन्दन में प्रदर्शन किया था।

इसके कारण विपक्ष समेत उनकी स्वयं की कंजर्वेटिव पार्टी में भी उनकी आलोचना हो रही थी। इससे पहले उन्होंने कहा था कि ब्रिटेन में बाहरी देशों से आए अवैध लोग रह रहे हैं। इन सबको लेकर उनकी और ऋषि की सरकार की आलोचना हो रही थी।

सुएला ने इससे पहले भी अक्टूबर, 2022 में एक विवादित बयान दिया था जिसमें उन्होंने कहा था कि भारतीय लोग इंग्लैंड में अपनी वीजा अवधि से अधिक रुकते हैं। उनके इस बयान का भी कड़ा विरोध हुआ था। इसकी काफी आलोचना भी हुई थी।

इन्हीं सब कारणों से आज (13 नवम्बर, 2023) को हुए कैबिनेट फेरबदल में ऋषि सुनक ने उन्हें आज इस्तीफ़ा देने को कहा। उनकी जगह पर तुरंत ब्रिटेन के विदेश मंत्री जेम्स क्लीवरले को नियुक्त कर दिया गया। क्लीवरले की जगह पर इंग्लैंड के पूर्व प्रधानमंत्री डेविड कैमरून को विदेश मंत्री बनाया गया है।

गौरतलब है कि सुएला की जड़ें भी भारत से जुड़ी हुई हैं। उनकी माता एक तमिल हिन्दू हैं जो कि मॉरिशस से इंग्लैंड पहुँची थी। उनके पिता भी भारतीय मूल के थे जो कि केन्या से इंग्लैंड पहुँचे थे। उनकी माँ इंग्लैंड के नेशनल हेल्थ सर्विस में नर्स थीं। सुएला ने कैबिनेट से अपने निष्कासन पर कहा है कि यह उनका सौभाग्य रहा है कि वह ब्रिटेन की गृह मंत्री रहीं।

गौरतलब है कि बीते कुछ समय में इंग्लैंड की राजधानी लंदन में कई बड़े प्रदर्शन हुए हैं। इनमें से कुछ प्रदर्शनों में यहूदियों को धमकियाँ भी दी गईं हैं लेकिन लंदन पुलिस ने इन पर कोई कार्रवाई नहीं की है।

गाजियाबाद के रियाजुद्दीन का बैंक अकाउंट, मोबाइल नंबर बिहार के हुसैन का: ₹70 लाख का ट्रांजेक्शन, टेरर फंडिंग का खुलासा होते ही दोनों फरार

उत्तर प्रदेश पुलिस की ATS विंग ने भारत में आतंकवाद फैलाने के लिए पाकिस्तान से की जा रही फंडिंग का खुलासा किया है। इस मामले में उत्तर प्रदेश गाजियाबाद के रियाजुद्दीन और बिहार के पश्चिम चम्पारण निवासी इजहारुल हुसैन को नामजद किया गया है। दोनों पर भारत सरकार को अस्थिर करने, सेना व अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों की जानकारी पाकिस्तान को भेजने का आरोप है।

ATS ने शुक्रवार (10 नवम्बर 2023) को इजहारुल हुसैन और रियाजुद्दीन पर FIR दर्ज की। FIR के मुताबिक गाजियाबाद के भोजपुर थाना क्षेत्र निवासी रियाजुद्दीन और बिहार के पश्चिम चम्पारण में शिकारपुर थाना क्षेत्र के रहने वाले इजहारुल हुसैन के एक-दूसरे से सम्पर्क में होने की सूचना एजेंसी को मिली थी। रियाजुद्दीन ने गाजियाबाद के फरीदनगर की केनरा बैंक ब्रान्च में एक खाता खुलवा रखा है। इस खाते से इजहारुल का मोबाइल नंबर लिंक है।

इस खाते की जाँच में ATS को पता चला कि मार्च 2022 से अप्रैल 2022 के बीच इस खाते से कुछ अन्य खातों के बीच लगभग 65 से 70 लाख रुपए का संदिग्ध लेन-देन हुआ। ये पैसे रियाजुद्दीन ने इजहारुल हुसैन ने देशी विरोधी साजिश के तहत अलग-अलग खातों में भेजे हैं। इस हरकत में पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI के कुछ एजेंट भी शामिल बताए जा रहे हैं। जाँच एजेंसी के मुताबिक इस पैसे का प्रयोग भारतीय सेना सहित देश के अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की ख़ुफ़िया जानकारियाँ पाकिस्तान भेजने के लिए होना था।

ATS के अनुसार रियाजुद्दीन, इजहारुल और कुछ अन्य ISI एजेंट भारत सरकार को अस्थिर करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करना चाह रहे थे। ये सभी आरोपित पाकिस्तान में मौजूद अपने आकाओं से बात करने के लिए अलग-अलग एप का प्रयोग किया करते थे। इन सभी पर IPC की धारा 121- A के तहत कार्रवाई की गई है।

इस FIR में आरोपितों पर जिस 121- A के तहत कार्रवाई हुई है वो सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने या उसकी साजिश रचने की आशंका के तहत लगाई जाती है। इस धारा के प्रावधान में आजीवन कारावास और मृत्युदंड भी शामिल है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक FIR दर्ज होने के बाद से रियाजुद्दीन और इजहारुल हुसैन फरार हैं। ATS इन दोनों की तलाश में दबिश दे रही है।

इजरायल को अलग-थलग करना चाहते थे इस्लामी मुल्क, पर सऊदी अरब ने नहीं होने दिया ऐसा: UAE समेत 8 और देश भी आए साथ

हमास आतंकियों के खिलाफ इजरायल द्वारा गाजा पर की जा रही कार्रवाई से दुनिया भर के कट्टरपंथी खफा हैं। वह चाहते हैं कि विश्व के सारे मुस्लिम देश एकजुट होकर इजरायल का बहिष्कार करें। इस संबंध में कल (11 नवंबर 2023) रियाद में एक बड़े सम्मेलन का आयोजन भी हुआ। जहाँ प्रस्ताव लाया गया कि इजरायल को अलग-थलग किया जाए।

सम्मेलन में इस्लामिक सहयोग संगठन के 57 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान प्रस्ताव पेश किया गया कि वो लोग इजरायल को मिल रही सैन्य-आर्थिक मदद रोककर अलग-थलग करेंगे। कई देशों ने इसपर हामी भरी। लेकिन जब बात इस्लामिक देशों के नेता माने जाने वाले सऊदी अरब की आई तो उन्होंने इस प्रस्ताव से किनारा ही कर लिया। यानी अप्रत्यक्ष रूप से वो इजरायल से संबंध न तोड़ने के समर्थन में आ खड़े हुए।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि सऊदी अरब के साथ-साथ संयुक्त अरब अमीरात और अन्य 7 मुस्लिम देश भी इस प्रस्ताव के विरोध में खड़े हुए। नतीजा ये निकला कि इजरायल के खिलाफ बुलाई बैठक में इजरायल के विरुद्ध ही प्रस्ताव पास नहीं हो सका। प्रस्ताव का विरोध करने वालों में सऊदी अरब और UAE के अलावा जॉर्डन, इजिप्ट, बहरीन, सुडान, मोरोक्को, मॉरिशानिया और द्जिबूती जैसे देश शामिल थे।

प्रस्ताव में कहा गया था कि इजरायल के साथ इस्लामिक देश सभी प्रकार के राजनयिक और आर्थिक संबंध खत्म कर लें और इजरायली उड़ानों को अरब हवाई क्षेत्र का प्रयोग न करनें दें। इसके अलावा तेल उत्पादक देश उन्हें धमकी दें कि या तो वो युद्ध बंद करें नहीं तो तेल नहीं दिया जाएगा।

हालाँकि 11 नवंबर को इस्लामिक-अरब शिखर सम्मेलन के बाद जारी आधिकारिक विज्ञप्ति में ऐसे किसी प्रस्ताव से संबंधित कोई विवरण साझा नहीं किया गया था। लेकिन, सम्मेलन में भाग लेने वाले दो प्रतिनिधियों ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि अल्जीरिया ने इज़राइल के साथ संबंधों में पूर्ण कटौती की माँग करते हुए एक प्रस्ताव पेश किया था। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि अन्य अरब देशों ने इस माँग का विरोध किया क्योंकि उन्होंने मौजूदा संकट के बीच तेल अवीव के साथ संचार के माध्यमों को खुला रहना जरूरी बताया।

बता दें कि सऊदी अरब पहले 11 नवंबर को इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) की बैठक और 12 नवंबर को अरब लीग शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने वाला था। हालाँकि, बाद में उन्होंने 11 नवंबर को राजधानी रियाद में एक संयुक्त शिखर सम्मेलन करने का फैसला किया।

सम्मेलन की शुरुआत में सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने युद्धविराम की बात की। वहीं ईरानी राष्ट्रपति ने सम्मेलन के दौरान माँग की कि इजरायली सेना को आतंकी संगठन घोषित किया जाए। लेकिन कहा जा रहा है सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान क्षेत्रीय झगड़ों में पड़कर देश के संसाधनों को बर्बाद नहीं होते देखना चाहते। उनका मकसद विजन 2030 में है। यही वजह है कि वो अपनी विदेशी निवेश पर ज्यादा केंद्रित है।

अब नेपाल ने भी लगाया TikTok पर प्रतिबन्ध: प्रचंड सरकार ने दिया चीन को करारा झटका, सामाजिक सौहार्द्र बिगाड़ने और जासूसी का आरोप

नेपाल की सरकार ने चाइनीज शॉर्ट वीडियो ऍप टिकटॉक पर प्रतिबन्ध लगा दिया है। नेपाल, भारत और अफगानिस्तान के बाद दक्षिण एशिया का तीसरा ऐसा देश बन गया है जिसने चीनी मोबाइल ऍप पर प्रतिबन्ध लगाया है। यह निर्णय सोमवार (13 नवंबर, 2023) को हुई नेपाल सरकार की कैबिनेट बैठक में लिया गया।

नेपाल सरकार ने कहा है कि टिकटॉक नेपाल के भीतर सामाजिक एकता और सौहार्द्र को नुकसान पहुँचाता है इसलिए इसे बैन किया जा रहा है। चीन के लिए नेपाल का यह कदम बड़ा झटका है। क्योंकि चीन लगातार पिछले कुछ समय से नेपाल में अपना प्रभाव बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।

सरकार का कहना है कि देश में अभिव्यक्ति की आजादी है लेकिन टिकटॉक के कारण उनके सामाजिक ताने बाने को ठेस पहुँच रही है। दरअसल, नेपाल में बीते चार वर्षों में टिकटॉक पर 1,629 साइबर अपराध के मामले दर्ज किए जा चुके हैं।

हालाँकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि टिकटॉक पर प्रतिबन्ध कब से लागू किया जाएगा। इस बात की संभावना है कि जल्द ही नेपाल में टिकटॉक चलना बंद हो जाएगा। नेपाल में वर्तमान में 22 लाख टिकटॉक यूजर हैं। बीते दिनों यह भी सामने आया था कि टिकटॉक पर नेपाल के भीतर जुआ और सट्टा तक खिलवाया जा रहा है।

वहीं यह भी कहा जा रहा है कि टिकटॉक पर बढ़ती फूहड़ता के चलते नेपाल में कई धार्मिक और सांस्कृतिक स्थानों पर टिकटॉक वीडियो बनाने पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया है। इन जगहों पर ‘नो टिकटॉक’ के साइन बोर्ड लगाए गए हैं। समाज में फूहड़ता और सामाजिक समस्याएँ पैदा करने के अलावा टिकटॉक पर जासूसी के आरोप भी हैं।

नेपाल की पुष्प दहल कमल प्रचंड की सरकार के इस कदम के दक्षिण एशिया की राजनीति में बड़े प्रभाव पड़ने की संभावना है।

गौरतलब है कि भारत ने वर्ष 2021 में और अफगानिस्तान ने 2022 में टिकटॉक पर प्रतिबन्ध लगाया था। वहीं प्रचंड की सरकार लगातार अपने आप को चीन और भारत, दोनों का दोस्त दिखाने की कोशिश में लगी हुई है। हालाँकि, भारत नेपाल की इस नीति से ज्यादा प्रसन्न नहीं है। भारत नेपाल में अपना प्रभाव चीन के हाथों खोना नहीं चाहता है। वहीं चीन की सी जिनपिंग सरकार नेपाल में नया इन्फ्रास्ट्रक्चर बना कर नेपाल को अपने पाले में करना चाहती है।

जिस हैंडल से वीडियो डाल-डाल गुनगुन गुप्ता इंस्टाग्राम पर बनी सनसनी, MMS लीक के बाद वह हैंडल हटाया: 60 लाख थे फॉलोवर्स

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर गुनगुन गुप्ता ने अपना अश्लील वीडियो वायरल होने के बाद अपने इंस्टाग्राम हैंडल को हटा दिया है, जिस पर उनके 60 लाख फॉलोवर्स थे। वीडियो कॉल में जिस लड़के के साथ वो दिखाई दे रही थीं, उसका नाम दीपू चावला है। उक्त वीडियो कॉल में वो कपड़े उतार कर अपने प्राइवेट पार्ट्स दिखाती हुई नज़र आई थीं। लोग धड़ल्ले से इस वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर करने लगे थे, जो कि गलत है। वीडियो वायरल होने के बाद गुनगुन गुप्ता की आत्महत्या की झूठी अफवाह भी उड़ी थी।

गुनगुन गुप्ता इंस्टाग्राम पर ‘gungungupta137’ यूजरनेम के साथ थीं, लेकिन अगर अब आप इस हैंडल पर जाएँगे तो आपको ये सन्देश दिखेगा – “क्षमा करें, ये पेज उपलब्ध नहीं है। जिस लिंक को आप खोज रहे हैं वो या तो हट गया है, या फिर इस पेज को ही हटा दिया गया है। इंस्टाग्राम पर वापस जाएँ।” नीचे संलग्न के गए स्क्रीनशॉट में आप देख सकते हैं कैसे अब गुनगुन गुप्ता का 60 लाख फॉलोवर्स वाला इंस्टाग्राम हैंडल अब या तो डिलीट कर लिया गया है, या डिएक्टिवेट।

गुनगुन गुप्ता ने हटाया अपना इंस्टाग्राम हैंडल

वायरल MMS पर प्रतिक्रिया देते हुए गुनगुन गुप्ता ने कहा है, “बस करो आप सभी। मैं इतनी मजबूत नहीं हूँ। सब बताना है आप सबको। थोड़ा टाइम और। जिन लोगों ने भी इसे एडिट किया है उनका मकसद सिर्फ व्यू हासिल करना और मुझे बदनाम करना है। ऐसे काम किसी की जिंदगी बर्बाद कर देते हैं। और आप लोगों को भी किसी को जज करने का मौक़ा चाहिए। लेकिन कोई बात नहीं। अभी मेरा बुरा समय चल रहा है। जो लोग प्यार करते हैं वो मेरे लिए बहुत कुछ हैं। आशा करती हूँ आप लोग इस दीपावली में खुश होंगे।” उन्होंने रोती हुई इमोजी भी शेयर की।

गुनगुन गुप्ता को TikTok से पहचान मिली थी, लेकिन चीन के एप्स को प्रतिबंधित किए जाने के क्रम में भारत सरकार ने टिकटॉक पर भी बैन लगा दिया, जिसके बाद वो इंस्टाग्राम पर वायरल होने लगीं। ‘बचपन का प्यार नहीं भूल जाना रे’ पर रील बनाने के बाद उन्हें 10 करोड़ व्यूज रिकॉर्ड मिले थे। वायरल वीडियो में वीडियो कॉल पर निजी अंग दिखाती गुनगुन को एक लड़का एक्सप्रेशंस देता दिख रहा था। टेलीग्राम पर इसे शेयर किया जा रहा था।

CM सिद्दारमैया का था कार्यक्रम, झंडा लगाने के लिए हम्पी के मंदिर में कर दिया ड्रिल: कर्नाटक सरकार को ASI का नोटिस

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने कर्नाटक सरकार को हम्पी के विरूपाक्ष मंदिर में कील ठोकने को लेकर नोटिस जारी किया है। यह नोटिस 11 नवम्बर, 2023 को जारी किया गया है। दरअसल, यह मंदिर UNESCO द्वारा संरक्षित स्थान है और यहाँ बिना अनुमति के कोई भी छेड़छाड़ नियमों के विरुद्ध है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हम्पी के विरूपाक्ष मंदिर के एक खम्भे में यह कील कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के दौरे से पहले ठोकी गई। इसका उद्देश्य झंडा लगाना बताया जा रहा है। दरअसल, यह कील ठोकने के लिए ड्रिल मशीन का इस्तेमाल किया गया।

इस नोटिस में ASI के अफसर ने लिखा है, “श्री विरूपाक्ष मंदिर और इसका प्रांगण केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय के हम्पी क्षेत्र के कमालपुर अधिक्षेत्र की देखरेख के अंतर्गत आता है। हमें यह पता चला है कि आपने सीढ़ियों पर बैरीकेडिंग लगाकर इस मंदिर का उत्तरी प्रवेश द्वार बंद कर दिया है।”

आगे इस पत्र में कहा गया, “आपने श्रद्धालुओं के लिए एक अलग रास्ता बनाया और नए रास्ते को बनाने के लिए पाइप लगाए। इन पाइप को लगाने के लिए कील ठोके गए जो कि AMSR एक्ट, 2010 का स्पष्ट उल्लंघन है। इनमें किसी भी काम की अनुमति ASI से नहीं ली गई।”

दरअसल, हम्पी के कई मंदिरों की देखरेख केंद्र सरकार के हाथों में है और मंदिर में किसी भी बदलाव से पहले उसकी अनुमति लेनी होती है। यहाँ पर मात्र श्रद्धालुओं के प्रवेश का रास्ता ही नहीं बदला गया बल्कि मंदिर के ढाँचे से भी छेड़छाड़ की गई।

ASI ने स्पष्ट किया है कि उसके द्वारा संरक्षित किसी भी मंदिर या स्मारक में छेड़छाड़ पर 2 वर्ष की सजा या ₹1 लाख का जुर्माना लगाया जा सकता है। अब ASI के नोटिस का जवाब कर्नाटक सरकार के अंतर्गत स्मारकों की देखरेख करने वाला ‘कर्नाटक एंडोमेंट डिपार्टमेंट’ देगा।

गौरतलब है कि विरूपाक्ष मंदिर का निर्माण विजयनगर राज्य के राजा देव राय द्वितीय के निर्देश पर लक्काना दंदेषा जो कि एक सेनापति थे, ने करवाया था। इसका निर्माण 14वीं शताब्दी में पूरा हुआ था। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह तुंगभद्रा नदी के किनारे स्थित है।

भारत के राजनयिक को करो सिटिजन अरेस्ट, 1 लाख डॉलर दूँगा: SFJ के आतंकी पन्नू ने कनाडा के लोगों को भड़काया

खालिस्तानी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ के गुरपतवंत सिंह पन्नू ने कनाडा में भारतीय राजनयिकों के खिलाफ भड़काऊ बयानबाजी की है। उसने भारतीय हाई कमीश्नर संजय वर्मा को सिटिजन अरेस्ट करने के लिए 1 लाख डॉलर नकद देने की घोषणा की है। पन्नू ने आरोप लगाया कि संजय वर्मा ने एयर इंडिया के लिए आतंकी खतरे का माहौल बनाकर कनाडाई सिखों के खिलाफ नफरत फैलाने की कोशिश की है।

बता दें कि हाल ही में खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने एक वीडियो जारी किया था। इसमें उसने 19 नवंबर को अहमदाबाद में होने वाले ICC वर्ल्ड कप फाइनल के दौरान एयर इंडिया फ्लाइट में सफर नहीं करने की धमकी दी थी।

पन्नू ने कहा था कि फाइनल मैच के दौरान लोग एयर इंडिया के विमान में सफर न करें, अन्यथा घटना के लिए वह खुद जिम्मेदार होंगे। वीडियो सामने आने के बाद कनाडा सरकार ने पुलिस को इस वीडियो की जाँच के आदेश दिए थे। मगर, अब पन्नू का कहना है कि हरदीप सिहं निज्जर की हत्या की जाँच से ध्यान भटकाने के लिए भारत चाल चल रहा है।

भारतीय उच्चायुक्त संजय वर्मा ने 19 नवंबर को ICC वर्ल्ड कप फाइनल के दिन एयर इंडिया विमान पर आतंकी खतरे की झूठी अफवाह उड़ाई, क्योंकि निज्जर की हत्या में भारतीय उच्चायोग की अहम भूमिका है। पन्नू ये फैलाने की कोशिश कर रहा है कि कनाडाई सिखों के खिलाफ भारत की साजिश कनाडाई सिखों के खिलाफ नफरत फैलाने की है।

यहाँ बता दें कि पन्नू ने भारतीय उच्चायुक्त वर्मा के लिए जिस सिटिजन अरेस्ट की माँग की है। वब कुछ देशों में पुराने जमाने से ऐसा कानून चला आ रहा है कि कोई भी नागरिक दूसरे नागरिक को गिरफ्तार कर सकता है। गिरफ्तार करने वाला नागरिक जरूरी नहीं किसी पुलिस या कानून एजेंसी से हो। अगर उसे कोई व्यक्ति कानून तोड़ता या अपराध करता दिखता है तो वो उसे गिरफ्तार कर सकता है। अगर कोई बेवजह ऐसे कानून का फायदा उठाता है तो उसको भी आगे मुकदमों या आपराधिक आरोपों का सामना करना पड़ सकता है।

पत्नी की फोटो दिखा स्वामी प्रसाद मौर्य ने अब माँ लक्ष्मी का किया अपमान, यूजर्स ने ‘माँग का सिंदूर’ दिखा सपा नेता का ‘बवासीर’ निकाला

समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने दिवाली त्योहार और माँ लक्ष्मी का भी मजाक बनाया है। वो अक्सर हिन्दू विरोधी ट्वीट्स के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस को भी भला-बुरा कहा था। अब स्वामी प्रसाद मौर्य ने दिवाली पर अपनी पत्नी की पूजा करते हुए तस्वीरें शेयर की हैं। उन्होंने माँ लक्ष्मी पर भी सवाल खड़ा किए। बता दें कि दिवाली में माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है, जिन्हें धन-धान्य एवं समृद्धि की देवी माना गया है।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, “दीपोत्सव के अवसर पर अपनी पत्नी का पूजा व सम्मान करते हुए कहा कि पूरे विश्व के प्रत्येक धर्म, जाति, नस्ल, रंग व देश में पैदा होने वाले बच्चे के दो हाथ, दो पैर, दो कान, दो आँख, दो छिद्रों वाली नाक के साथ एक सिर, पेट व पीठ ही होती है, चार हाथ, आठ हाथ, दस हाथ, बीस हाथ व हजार हाथ वाला बच्चा आज तक पैदा ही नहीं हुआ तो चार हाथ वाली लक्ष्मी कैसे पैदा हो सकती है?”

इसके साथ ही स्वामी प्रसाद मौर्य ने ये ‘ज्ञान’ भी दिया कि यदि आप लक्ष्मी देवी की पूजा करना ही चाहते हैं तो अपने घरवाली की पूजा व सम्मान करें जो सही मायने में देवी है क्योंकि आपके घर-परिवार का पालन-पोषण, सुख-समृद्धि, खान-पान व देखभाल की जिम्मेदारी बहुत ही निष्ठा के साथ निभाती है। तस्वीरों में स्वामी प्रसाद मौर्य अपनी पत्नी को तोहफे देते हुए दिख रहे हैं। साथ ही कमरे में बुद्ध की एक प्रतिमा भी नज़र आ रही है जिस पर फूल चढ़ाए गए हैं।

इस दौरान लोगों ने स्वामी प्रसाद मौर्य को लताड़ भी लगाई। गिरिराज सैनी नामक व्यक्ति ने उन्हें लिखा, “स्वामी जी, आपकी पत्नी सिंदूर क्यों लगती है, क्या सिंदूर लगाने से ही उसका पति जीवित रहता है? अगर नहीं रहता तो यह क्या ढोंग कर रखा है? सुधारो अपने-आप को नहीं तो प्रजा में क्या मैसेज जाएगा।” बता दें कि तस्वीर में स्वामी प्रसाद मौर्य की पत्नी सिन्दूर लगाई हुई दिख रही हैं, जो हिन्दू परंपरा है जिसे वो अक्सर गाली देते फिरते हैं।

वहीं रूपेश आयुष सराठे नामक व्यक्ति ने लिखा, “सही है पत्नी की पूजा करना, वह कितनी महान महिला है जो तेरे जैसे असुर को झेल रही हैं।” उन्होंने स्वामी प्रसाद मौर्य को ‘राक्षस’ करार दिया। कॉन्ग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान की निंदा करते हुए कहा कि उनके मुँह में बवासीर हो गया है और उन्हें इलाज की बहुत ज़रूरत है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की कि स्वामी प्रसाद मौर्य के बोलने पर पाबन्दी लगाई जाए।

बता दें कि हाल ही में कोर्ट ने भी कहा है कि स्वामी प्रसाद मौर्य को रामचरितमानस की चौपाइयों को समझने की ज़रूरत है। इससे पहले बागेश्वर धाम वाले बाबा पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के बयान का विरोध करते हुए उन्होंने कहा था कि आज तक भारत कभी हिंदू राष्ट्र था ही नहीं। जब आज तक भारत हिंदू राष्ट्र था ही नहीं तो अब हो भी नहीं सकता, क्योंकि भारत का संविधान पंथ निरपेक्ष विचारधारा पर आधारित है, जिसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख ईसाई सब भाई-भाई हैं।

स्वामी प्रसाद मौर्य ये भी कह चुके हैं कि ब्राह्मणवाद की जड़े बहुत गहरी हैं और सारी विषमता का कारण भी ब्राह्मणवाद ही है। उन्होंने दावा किया था कि हिंदू नाम का कोई धर्म है ही नहीं, हिंदू धर्म केवल धोखा है। उन्होंने कहा था कि सही मायने में जो ब्राह्मण धर्म है, उसी ब्राह्मण धर्म को हिंदू धर्म कहकर इस देश के दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों को अपने धर्म के मकड़जाल में फँसाने की एक साजिश है। इस पर लोगों ने उनके मुँह को गटर बताते हुए कहा था कि ये जब भी खुलता है, गंदगी ही निकलती है।