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जिस कन्हैया लाल की अस्थियों की खत्म नहीं हो रही प्रतीक्षा, उनके हत्यारों पर CM अशोक गहलोत के बेतुके दावे: क्या राजस्थान में सरेंडर कर चुकी है कॉन्ग्रेस

200 सदस्यीय राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए 25 नवंबर 2023 को मतदान होना है। पर ऐसा लगता है कि कॉन्ग्रेस वोट पड़ने से पहले ही परास्त हो चुकी है। शायद इसी खीझ में कन्हैयालाल तेली के हत्यारों को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बेतुके दावों पर उतर आए हैं।

जोधपुर में चुनावी प्रचार के दौरान 12 नवंबर 2023 को गहलोत ने कन्हैयालाल के हत्यारों को ‘बीजेपी के लोग‘ बताया। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी चुनाव से पहले तनाव पैदा करने की नीयत से इस हत्याकांड का जिक्र कर रही है।

उल्लेखनीय है कि 28 जून 2022 को उदयपुर के कन्हैयालाल का गला उनके ही दुकान में घुसकर मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने काट दिया था। उनकी अस्थियों को आज भी विसर्जन का इंतजार है, क्योंकि हत्यारों को आज तक सजा नहीं हुई है।

भले कन्हैयालाल की बर्बर हत्या के बाद हत्यारों ने इसका वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। भले इस बर्बरता से पूरा देश स्तब्ध रह गया था। लेकिन सीएम गहलोत की माने तो इस केस में कई रहस्य हैं।

वैसे जिस मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश की कानून व्यवस्था गर्त में जा चुकी है उससे यह उम्मीद करना बेमानी है कि वह इस बर्बरता की नैतिक जिम्मेदारी लेगा। खासकर तब जब जमीन पर साफ दिख रहा हो कि कन्हैयालाल की हत्या बड़ा चुनावी मुद्दा है। उदयपुर के लोग कॉन्ग्रेस से पीछा छुड़ाने को छटपटा रहे हैं।

पीएम नरेंद्र मोदी ने भी 10 नवंबर 2023 को उदयपुर में एक रैली में इस हत्याकांड का जिक्र किया था। यह खिसकती जमीन का ही असर है कि गहलोत कह रहे हैं, “कन्हैया लाल की हत्या करने वाले कौन लोग थे? ये बीजेपी के लोग थे। उन्हें (मोदी) इस बारे में जानकारी नहीं दी गई होगी। जब उन्हें (आरोपितों को) से 4-5 दिन पहले एक मामले में पुलिस स्टेशन ले जाया गया तो यह भाजपा के लोग ही थे जिन्होंने उन्हें जमानत दिलाई थी। क्या वह ये नहीं जानते? फिर वह (मोदी) कैसे बोल सकते हैं?”

गहलोत इस हत्याकांड की NIA जाँच से भी बौखलाए हुए हैं। उनका कहना है कि यदि जाँच राजस्थान पुलिस का स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप करता तो कुछ सही नतीजे निकलते। उन्होंने कहा, ” हमने घटना के दो-तीन घंटे के भीतर ही आरोपितों को पकड़ लिया था, लेकिन NIA ने उसी रात मामले को अपने हाथ में ले लिया। तब से यह पता नहीं चल पाया है कि मामले में क्या हुआ।”

बीजेपी ने गहलोत के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि वे हताश हैं। चुनाव हारने वाले हैं। राजस्थान बीजेपी प्रवक्ता लक्ष्मीकांत भारद्वाज ने कहा कि कन्हैयालाल ने पुलिस सुरक्षा माँगी थी। लेकिन उन्हें कोई सुरक्षा नहीं दी गई, इसलिए आतंकवादियों ने उनका सिर काट दिया।

उन्होंने कहा, “इतना जघन्य अपराध हुआ जिसमें आतंकवादी शामिल थे और उन्होंने प्रधानमंत्री को जान से मारने की धमकी भी दी। कानून-व्यवस्था एक सीएम की जिम्मेदारी है, लेकिन इसके बजाय अगर वह ऐसा बेशर्म, गैर-जिम्मेदाराना और आधारहीन बयान देते हैं, तो इससे बुरा कुछ नहीं हो सकता।”

भारद्वाज ने जो कुछ कहा है उसकी तस्दीक तथ्य भी करते हैं। कन्हैयालाल को हत्या के पहले धमकी दी गई थी। उन्होंने इसकी शिकायत भी की थी। लेकिन राजस्थान की पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। हत्या के बाद यह बात सामने आई थी कि बकायदा रेकी कर पूरे प्लान के साथ इस बर्बर हत्या को अंजाम दिया गया था।

न्यूज 18 की हालिया ग्राउंड रिपोर्ट भी बताती है कि इस हत्याकांड के कारण जमीन पर कॉन्ग्रेस सरकार से भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि अगर प्रशासनिक व्यवस्था अच्छी होती तो न ही पेपर लीक जैसे कांड लगातार होते और न ही कन्हैया लाल जैसों की जान जाती।

भले यह नाराजगी सत्ता परिवर्तन के तौर पर भले 3 दिसंबर को सामने आएगी, लेकिन अशोक गहलोत के बेतुके दावों से प्रतीत होता है कि कॉन्ग्रेस मतदान से पहले ही सरेंडर कर चुकी है।

8 साल के बच्चे को बाँधकर मौलाना ने पीटा, ‘चोर’ बताकर ताऊ ने भी दिया साथ: फिर जंजीर में जकड़कर ले गए मदरसा, सहारनपुर की घटना

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में 8 साल के एक बच्चे को बाँधकर पीटा गया। फिर जंजीर में जकड़कर उसे मदरसे ले जाया गया। बच्चे को पीटने का आरोप मदरसे के मौलाना तनवीर और पीड़ित के ताऊ अरशद पर लगा है।

चोरी का आरोप लगा दोनों ने बच्चे के साथ यह बर्बरता की। आरोपित मौलाना और पीड़ित के ताऊ के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। सोमवार (13 नवंबर 2023) को दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना सहारनपुर जिले के तीतरो थाना क्षेत्र की है। यहाँ के गाँव बालू में फैज़ अशरफ उल मदरसा है। मदरसे में मौलाना तनवीर दीनी तालीम देता है। वह मूल रूप से सहारनपुर के ही रामपुर मनिहारन इलाके का रहने वाला है। 12 नवंबर को इसी गाँव से एक वीडियो वायरल हुआ था।

वीडियो में एक बच्चे को बाँध कर बुरी तरह से पिटाई करते देखा गया। बच्चे की पीठ पर चोट के निशान पड़ गए। हालाँकि इससे पिटाई करने वालों को कोई फर्क नहीं पड़ा। बाद में दोनों आरोपित बच्चे को जंजीर में बाँध कर मदरसे में छोड़ आए।

ऑपइंडिया को स्थानीय निवासियों ने बताया है कि मदरसे से जैसे-तैसे निकल कर बच्चा पास के गाँव में जा रहा था। इस दौरान उसे रास्ते में कुछ स्थानीय लोग मिले। इन्होंने बच्चे से बात की और चुपके से उसकी वीडियो बना ली। वीडियो में बच्चे ने खुद को तनवीर और अरशद से मिली प्रताड़ना के बारे में बताया। थोड़ी देर में यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। एक स्थानीय समाचार पत्र ने इस बावत खबर भी प्रकाशित कर दी। इस खबर का संज्ञान सहारनपुर पुलिस प्रशासन ने लिया।

स्थानीय समाचार पत्रों से जब इसकी जानकारी प्रशासन को मिली तो उन्होंने जाँच करवाई। जाँच के लिए इलाके के SDM और डिप्टी SP की टीम घटनास्थल पर गई। बताया जा रहा है कि पीड़ित छात्र के परिजनों ने पुलिस को दिए गए अपने बयान में आरोपितों को बचाने की पूरी कोशिश की। उन्होंने बच्चे की चोरी की आदत से उसकी पिटाई होने की बात कही। लेकिन जब पुलिस ने बच्चे से पूछताछ की तो सारा भेद खुल गया। बच्चे ने मौलाना और अपने ताऊ द्वारा पिटाई की जानकारी दी।

पीड़ित के बयान के आधार पर पुलिस ने मौलाना और पीड़ित के ताऊ पर FIR दर्ज की। सहारनपुर पुलिस के एडिशनल एसपी सागर जैन ने बताया कि जाँच में आरोप सही पाए जाने के बाद तनवीर और अरशद को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में जाँच और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। क्षेत्र के SDM ने भी जाँच में बच्चे की पिटाई के आरोप सही पाए जाने की पुष्टि की है। हालाँकि बालू गाँव के पूर्व प्रधान नियाज़ इस मामले में मदरसे को बेवजह घसीटे जाने का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि इस मामले से मदरसे का कोई लेना-देना नहीं है।

भारतीय उत्पाद, सबका उस्ताद: इस दीपावली ₹3.75 लाख करोड़ का कारोबार, ‘वोकल फॉर लोकल’ से चीन को ₹1 लाख करोड़ का नुकसान

दीपावली के इस त्योहारी सीजन में देश में करीब 3.75 लाख करोड़ रुपए का रिकॉर्ड कारोबार हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘वोकल फॉर लोकल’ अपील के असर से चीन को एक लाख करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ है।

देश के व्यापारियों की सबसे बड़ी संस्था कन्फेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने कारोबार का यह आँकड़ा दिया है। यह आँकड़ा धनतेरस, छोटी दीवाली और दीवाली तक के कारोबार का है। भाई दूज और छठ के आँकड़े आने के बाद इसमें करीब 50 हजार करोड़ रुपए का और इजाफा होने की संभावना है। इसी तरह चीन को होने वाले नुकसान में भी वृद्धि की संभावना है।

CAIT ने बताया है कि इस वर्ष बाजार में चीन की हिस्सेदारी घटी है। उसके उत्पादों की बिक्री काफी घट गई है। गौरतलब है कि देश भर में धनतेरस से लेकर दीवाली तक सजावट के सामान, सोना-चाँदी, खाने-पीने के समान और गाड़ियों की बम्पर बिक्री होती है। इसके कारण कुछ ही दिनों में लाखों करोड़ का व्यापार हो जाता है।

CAIT का कहना है कि कुछ वर्ष पहले चीन के सस्ते उत्पादों का कब्जा बाजार पर था। दीवाली के दौरान बिकने वाले लगभग 70% उत्पादों पर चीन ने कब्ज़ा कर लिया था। बीते कुछ वर्षों में यह स्थिति बदली है। CAIT ने इस बार यह स्थिति बदलने के लिए ‘भारतीय उत्पाद-सबका उस्ताद’ जैसी मुहिम चलाई थी।

इस स्थिति के बदलने में भारत के ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहल को बढ़ाने और प्रधानमंत्री मोदी के स्थानीय उत्पादों को खरीदने की अपील सबसे ज्यादा कारगर सिद्ध हुई है। अब लोग चीन से बनकर आने वाली लड़ियाँ और मूर्तियाँ तथा अन्य सजावट के सामान ना खरीद कर भारतीय सामान पसंद कर रहे हैं।

CAIT ने बताया है कि इस खरीददारी में से 13% खाने-पीने के सामान पर, 9% सोने-चाँदी और गहनों पर, 12% कपड़ों पर तथा बाकी छोटे-छोटे हिस्सों में मिठाइयों, सजावट के सामान, बर्तन और मोबाइल जैसे उत्पादों का हिस्सा रहा।

CAIT का कहना है कि अभी भाई दूज और छठ जैसे त्यौहारों में ₹50,000 करोड़ का और व्यापार होने की आशा है। इस प्रकार इस त्योहारी सीजन का यह आँकड़ा 4.25 लाख करोड़ के पार पहुँच जाएगा। इसके अलावा 23 नवम्बर से चालू हो रहे शादियों के सीजन में भी लगभग ₹4 लाख करोड़ का व्यापार होने की उम्मीद है।

जमुई में दिवाली पर लक्ष्मी पूजा के बाद मौज-मस्ती, कमरिया करे लपा-लप पर नवनियुक्त ट्रेनी शिक्षिकाओं ने लगाए ठुमके: वीडियो वायरल

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें कुछ लड़कियाँ ठुमके लगाती हुईं नजर आ रही हैं। यह वीडियो बिहार के जमुई में शिक्षिकाओं के ट्रेनिंग का बताया जा रहा है। जिसमें कमरिया करे लपा-लप और और लगावे लू तू लिपस्टिक… जैसे गाने बजाए जा रहे हैं।

कहा जा रहा है कि राज्य शिक्षा शोध और प्रशिक्षण केंद्र (डायट) पर ट्रेनिंग ले रहीं लड़कियाँ दिवाली की रात में लक्ष्मी पूजा के बाद भोजपुरी गानों पर मौज-मस्ती कर रही हैं जिसका वीडियो अब वायरल है। 

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, जमुई में बीपीएससी के द्वारा आयोजित बिहार शिक्षक नियोजन में सफल अभ्यर्थियों को ट्रेनिंग दी जा रही है। यह ट्रेनिंग दिवाली से लेकर छठ तक आयोजित है।

बताया जा रहा है कि दिवाली पर घर जाने से जब भावी शिक्षिकाओं को रोका गया तो वह ट्रेनिंग सेण्टर में ही मौज मस्ती करने लगीं। दिवाली सेलिब्रेशन में जमकर भोजपुरी गाने बजाए गए और ठुमके लगाए गए। 

बता दें कि पहले भी बिहार सरकार का यह आदेश चर्चा का विषय बना हुआ था वहीं अब दिवाली मनाते हुए ठुमके लगाने का यह वीडियो वायरल होने के बाद किरकिरी हो रही है।

वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा है कि ट्रेनिंग ले रहीं दो अभ्यर्थी भोजपुरी गाने पर ठुमके लगा रही हैं तो वहीं दर्जनों चारो तरफ खड़ी होकर तालियाँ बजा रहीं हैं। 

गौरतलब है कि वीडियो जमुई के गिद्धौर स्थित राज्य शिक्षा शोध और प्रशिक्षण केंद्र (डायट) का है। इस सेण्टर पर 292 नियोजित शिक्षकों को ट्रेनिंग दी जा रही है। इसी सेण्टर से यह वीडियो वायरल है। वहीं इस मामले में इंचार्ज ने किसी जानकारी से इनकार किया है।

पटाखे जलाने पर मोहम्मद वली ने चाकू घोंप कर हिन्दू युवक को मार डाला: सरकारी जमीन पर कर रखा है अवैध कब्जा, हिन्दू संगठनों में आक्रोश

हाल ही में गुजरात के मोरबी में पटाखे जलाने को लेकर हुए झगड़े के बाद मोहम्मद वली जाम नाम के एक मुस्लिम व्यक्ति ने एक हिंदू युवक की हत्या कर दी। इस हत्या से मोरबी क्षेत्र में स्थानीय हिंदू समुदाय और संगठनों में भी काफी आक्रोश है।

बहुत ही मामूली बात पर एक व्यक्ति की हत्या करने के मामले में अब हिंदू संगठनों ने कलेक्टर के यहाँ याचिका पेश कर आरोपितों को कड़ी सजा देने की माँग की है। साथ ही इस याचिका में माँग की गई है कि आरोपितों को सरकारी जमीन पर कब्जा करने और अवैध रूप से निर्माण करने के लिए दंडित किया जाए। 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आरोपित व्यक्ति की पहचान मोहम्मद वली जाम के रूप में हुई है और मृतक व्यक्ति की पहचान राजेश गडवी के रूप में हुई है। प्राप्त जानकारी के आधार पर, 7 नवंबर, 2023 को मोरबी के लाभनगर इलाके का निवासी मुहम्मद वली जाम एक हिंदू परिवार के घर के बाहर पटाखे जला रहा था। मोहम्मद वली लाखा गढ़वी के घर के बाहर पटाखे फोड़ रहा था, लेकिन उसकी पत्नी ने उसे मना किया क्योंकि उसकी तबीयत ठीक नहीं थी।

तभी पटाखों के तेज़ शोर के कारण मोहम्मद और लाखा गडवी में बहस होने लगी। जब पास के निवासी राजेश गढ़वी बीच-बहस में समझौते की पेशकश करने के लिए आगे आए, तो मोहम्मद वली और अधिक आक्रामक हो गया। 

इतना ही नहीं मोहम्मद वली ने अपना चाकू निकालकर राजेश गढ़वी के सीने में घोंप दिया। इसके बाद, गंभीर हालत में गढ़वी को शुरू में मोरबी के नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। लेकिन स्थिति अधिक गंभीर होने के कारण, ऑन-कॉल डॉक्टरों ने राजेश को आगे के इलाज के लिए राजकोट भेज दिया। हालाँकि, राजकोट पहुँचने के बाद भी राजेश की हालत में सुधार नहीं हुआ और अंततः, इलाज के दौरान ही उनका निधन हो गया।

हालाँकि इस मामले में हत्या के बाद ही पुलिस ने घटना का संज्ञान लिया और राजेश गढ़वी की हत्या के आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही, घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने आगे किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए लाभनगर में कुछ सुरक्षा कर्मचारियों को तैनात किया। वहीं घटना से नाराज स्थानीय हिंदू सदस्यों ने इस बीच कलेक्टर से मुलाकात कर याचिका दी जिसमें आरोपितों के खिलाफ GUJCTOC (गुजरात आतंकवाद और संगठित अपराध नियंत्रण) के तहत सख्त सजा की माँग की गई।

आरोपित के खिलाफ पहले से ही कई आपराधिक मामले दर्ज 

बता दें कि इस मामले में विस्तृत जानकारी पाने के लिए ऑपइंडिया ने स्थानीय हिंदू संगठन के प्रमुख सदस्य कमलेश अहीर से संपर्क किया। उन्होंने ऑपइंडिया को बताया, “आरोपित गंभीर आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहा है। इलाके के स्थानीय लोगों में उसकी छवि एक झगड़ालू व्यक्ति के रूप में है और लोग उससे डरते हैं। उसके खिलाफ पहले भी मारपीट समेत कई अन्य आपराधिक मामले दर्ज हो चुके हैं। समाज के लिए खतरा जैसी मानसिकता वाले व्यक्ति के खिलाफ GUJCTOC के तहत कार्रवाई करने के लिए हिंदू संगठनों ने जिला कलेक्टर को एक याचिका दी है। इसके अलावा कमलेश अहीर ने यह भी कहा कि इससे पहले आरोपितों ने एक हिंदू मंदिर पर भी हमला किया था। 

सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा 

मामले के बारे में और अधिक जानकारी देते हुए कमलेश ने ऑपइंडिया को बताया कि आरोपितों ने समाकंठा क्षेत्र में सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया था। हिंदू युवा वाहिनी और बजरंग दल जैसे संगठनों ने इस मुद्दे को लेकर कलेक्टर को शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने इस शिकायत में दावा किया है कि आरोपित सरकारी जमीन पर अवैध रूप से रह रहा है। इसके अतिरिक्त, उसने सार्वजनिक संपत्ति पर अवैध रूप से कई इमारतें बनाई हैं। हम निर्णायक कार्रवाई चाहते हैं।”

कमलेश अहीर का दावा है कि आरोपितों के खिलाफ पहले भी कई शिकायत किए गए हैं, लेकिन इन प्रयासों को नजरअंदाज कर दिया गया। कमलेश के मुताबिक, अगर आरोपित को उसके पिछले अपराधों के लिए कड़ी सजा मिली होती तो आज राजेश की हत्या नहीं होती। ऑपइंडिया के पास उन दोनों याचिकाओं की प्रतियाँ हैं जो हिंदू संगठनों ने दायर की हैं।

यह लेख मूल रूप से क्रुणाल सिंह राजपूत द्वारा गुजराती में लिखा गया था। मूल लेख का लिंक यहाँ है।

जिस डॉक्टर को सुरक्षाकर्मियों ने पीटा, उसके घर पहुँच कुमार विश्वास ने मनाई दिवाली: भेंट की भगवान श्रीराम की प्रतिमा, माफ़ी माँग दूर किए गिले-शिकवे

कवि कुमार विश्वास की सुरक्षा में तैनात जवानों और डॉक्टर पल्लव वाजपेयी के बीच मारपीट का मामला सामने आया था। जिसमें कुमार विश्वास के सुरक्षकर्मियों पर डॉ पल्लव की पिटाई का आरोप लगा था। वहीं दीपावली पर कुमार विश्वास डॉक्टर पल्लव बाजपेयी के घर पहुँचकर उन्हें दिवाली की बधाई दी, उनसे माफी माँगी। इसके साथ ही कुमार विश्वास ने डॉक्टर के घर पर ही दीपावली मनाई। 

रिपोर्ट के अनुसार, कुमार विश्वास डॉ. पल्लव वाजपेयी से मिलने रविवार (12 नवंबर, 2023) की शाम गाजियाबाद उनके घर गए वहाँ उन्होंने भगवान राम की मूर्ति भेंटकर डॉक्टर के परिजनों से मुलाकात कर माफ़ी माँगी एवं दिवाली की बधाई दी।

कुमार विश्वास ने डॉक्टर से मिलकर उन्हें गले लगा लिया, साथ ही अपने सभी गले-शिकवे मिटाकर रिश्तों को रोशनी से भरने का प्रयास किया। इसके बाद दोनों पक्षों में मेल मिलाप के साथ ही इस मामले में सुलह होने की बात सामने आई है। 

बता दें कि सुरक्षाकर्मियों द्वारा माँ-पिटाई के विवाद में दोनों तरफ से मुकदमा दर्ज हुआ था। वहीं इस मामले को सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कुमार विश्वास ने माफी माँग ली थी। जबकि डॉक्टर की पिटाई के इस मामले में कुमार विश्वास मामले में सीधे तौर पर आरोपित नहीं थे।

दरअसल, विवाद उनके सुरक्षाकर्मियों और डॉक्टर पल्लव वाजपेयी के बीच हुआ था। इस मामले में जहाँ शुरू में कुमार विश्वास ने जहाँ डॉक्टर के काफिले में घुस आने का आरोप लगाया था वहीं डॉक्टर पल्लव का एक वीडियो सामने आया तह जिसमें उनके नाक से खून बह रहा था। वहीं डॉक्टर ने अपनी शिकायत में कहा था कि  9 नवंबर, 2023 की शाम को उनके कार को रोककर कुमार विश्वास के सुरक्षाकर्मियों ने उनकी पिटाई की थी।

गौरतलब है कि मशहूर कवि डॉक्टर कुमार विश्वास ने 9 नवंबर, 2023 की शाम को सोशल मीडिया एक पर पोस्ट किया था कि उनके सुरक्षाकर्मियों की कार को एक कार ने आगे-पीछे से धक्का मार दिया। जब सुरक्षाकर्मी उतरकर उससे बात करने लगे तो कार चालक ने सुरक्षाकर्मियों की पिटाई कर दी। इस मामले में कुमार विश्वास ने आरोप लगाया है कि दूसरी कार में सवार व्यक्ति ने यूपी पुलिस के सिपाही और केंद्रीय सुरक्षाकर्मियों पर हमला कर दिया।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर घटना की जानकारी दी थी। वहीं कुमार विश्वास के आरोप के थोड़ी ही देर बाद डॉक्टर पल्लव वाजपेयी ने भी दावा किया था कि कुमार विश्वास के सुरक्षाकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की है। डॉक्टर पल्लव का कहना था कि वह वैशाली के आरोग्य अस्पताल से विजयनगर के निजी अस्पताल में आपात स्थिति के लिए जा रहे थे तभी कुमार विश्वास के सुरक्षकर्मियों ने उनकी पिटाई कर दी।

जिसके बाद दोनों पक्षों ने एक दूसरे के खिलाफ हमला करने की पुलिस से शिकायत की थी। हालाँकि, पुलिस ने इस मामले की जाँच की तो पुलिस ने भी यही कहा था कि कुमार विश्वास के काफिले पर हमले का कोई सुबूत नहीं मिला है। हालाँकि, घटना के अगले दिन कुमार विश्वास के सुरक्षा में व्यस्था में लगे CRPF के कमांडो को बदल दिया गया था। 

‘4 लाख वर्षों से अयोध्या आ रहे श्रद्धालु’: जहाँगीर के समय ही अंग्रेज यात्री ने लिख दिया पर वामपंथियों ने छिपाया – ‘यहाँ हुआ था रामचंद्र का जन्म, दुनिया का तमाशा देखने के लिए अवतार’

अयोध्या में राम मंदिर का सपना साकार हो रहा है और 22 जनवरी, 2023 को उद्घाटन के साथ ही हिन्दुओं के 500 वर्षों के संघर्ष का परिणाम उनके समक्ष भव्य स्वरूप में उपस्थित होगा। इस संघर्ष के पीछे कई हिन्दुओं का बलिदान है, जिन्होंने इस्लामी आक्रांताओं, अंग्रेजों और फिर सेक्युलर सत्ताधीशों के सामने सीना ठोक कर अपने अधिकार की लड़ाई लड़ी। आज उन बलिदानों को याद करने का समय है, लेकिन फिर से ये याद करने का भी समय है कि कैसे एक मंदिर को मस्जिद में परिवर्तित करने के लिए इस्लामी आक्रांताओं ने पूरा इतिहास ही अपने हिसाब से बदल डाला।

उनके जाने के बाद वामपंथी इतिहासकारों ने इसका बीड़ा उठाया और ये साबित करने की कोशिश की कि अयोध्या में कभी राम मंदिर था ही नहीं। ऐसे वामपंथी इतिहासकारों को सुप्रीम कोर्ट तक की फटकार मिली। आज फिर से समय है इतिहास को देखने का, जो हमें भूलना नहीं है। आइए, चलते हैं 17वीं शताब्दी में जानते हैं कि कैसे अयोध्या सदियों से भगवान श्रीराम की भूमि रही है। वामपंथी इतिहासकार तो रामायण और रामचरितमानस तक को नहीं मानते, लेकिन अंग्रेजों के लिखे पर वो क्या कहेंगे?

अगस्त 1608 में विलियम फिंच नाम का एक यात्री भारत आया था। सूरत में वो कैप्टन हॉकिंस के साथ पहुँचा था। बड़ी बात ये है कि वो जब 1608-11 में अयोध्या पहुँचा तो उसने लिखा है कि कैसे यहाँ के लोग भगवान श्रीराम की पूजा करते हैं और प्राचीन काल से ही ये नगर उनसे जुड़ा हुआ है। बता दें कि सर विलियन हॉकिंस ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ के प्रतिनिधि थे। 24 अगस्त, 1608 को जो अंग्रेजों का पहला जहाज सूरत में उतरा था, उसका नाम ‘हेक्टर’ था और विलियम हॉकिंस ही उसके कैप्टन थे।

विलियम हॉकिंग्स ने ही तत्कालीन बादशाह जहाँगीर को पत्र लिख कर भारत में फैक्ट्री स्थापित करने की अनुमति माँगी थी। वो अपने साथ इंग्लैंड के तत्कालीन राजा जेम्स प्रथम का एक पत्र जहाँगीर के लिए लेकर आए थे। उन्हीं के साथ आए विलियम फिंच ने आगरा और अन्य शहरों में रह कर यहाँ की रीति-रिवाज को समझा और मुगलों के काम करने की प्रक्रिया को जाना। उस समय भारत में पुर्तगाली अक्सर कारोबार करते थे और इंग्लैंग को उनके विरोध का सामना करना पड़ा।

खम्भात के सूबेदार से विलियम फिंच ने अनुमति ले ली कि वो अपना माल सूरत में उतार सकता है। बाद में उसके बीमार पड़ने के कारण ही विलियम हॉकिंस को अकेले मुग़ल दरबार में जाना पड़ा था। अंग्रेजों को कपड़ों का व्यापार करने की अनुमति मिली थी। विलियम हॉकिंस को तुर्की भाषा आती थी और इस कारण मुगलों से बातचीत में उन्हें कोई समस्या नहीं हुई। हालाँकि, तब जहाँगीर के करीबी मुक़र्रब खान (जो बाद में कन्वर्ट होकर रोमन कैथोलिक बन गया था) ने ने पुर्तगालियों के इशारे पर अंग्रेजों के काम में अड़ंगा लगाया।

हालाँकि, जहाँगीर को विलियम हॉकिंग्स काफी पसंद आए थे और उसने उन्हें अपने दरबार में रहने का ऑफर दिया। उनके लिए न सिर्फ मासिक वेतन तय किया गया, बल्कि 400 घोड़े भी उनके कमांड में आए गए। हालाँकि, हॉकिंस को मनपसंद अनुमति नहीं मिली और उन्हें वापस जाना पड़ा। हालाँकि, बाद में अंग्रेजों की नौसेना ने लाल सागर में भारत का कारोबार रोका और फिर मुगलों के साथ उनकी डील हुई। फिर सन् 1615 में सर थॉमस रो जहाँगीर के साथ तोहफे लेकर अजमेर पहुँचे।

ये तो थी अंग्रेजों के सूरत और जहाँगीर के दरबार में पहुँचने की कहानी। अब बात करते हैं कि विलियम फिंच ने अयोध्या के बारे में क्या लिखा था, “अयोध्या यहाँ 50 ईसापूर्व से स्थित है। ये एक प्राचीन नगर है। ये एक पवित्र राजा का स्थल है। हालाँकि, अभी इसके अवशेष ही बचे हैं। यहाँ 400 वर्ष पूर्व बने रामचंद्र के महलों और घरों के खँडहर अभी तक हैं। भारतीय उन्हें भगवान मानते हैं, जिन्होंने दुनिया का तमाशा देखने के लिए शरीर धारण किया था।”

विलियम फिंच आगे लिखता है कि वहाँ कई ब्राह्मण रहते हैं, जिनके पास वहाँ आने वाले श्रद्धालुओं के नाम-पता की सूची दर्ज है। उसने ये जिक्र भी किया है कि पवित्र सरयू नदी में स्नान करने के लिए वहाँ हिन्दू आते हैं। वो लिखता है कि कैसे हिन्दू बताते हैं कि इस पवित्र स्नान की प्रक्रिया 4 लाख वर्षों से चली आ रही है। उसने नदी से 2 कोस की दूरी पर स्थित गुफाओं का जिक्र भी किया है, जो काफी संकरी हैं और माना जाता है कि वहाँ भगवान श्रीराम के शरीर का भस्म भूमि को समर्पित किया गया था।

बाबरी ढाँचा तो आपको याद होगा? इसे कारसेवकों ने 1992 में ध्वस्त कर दिया, लेकिन इस ढाँचे की तस्वीर आपने देखी होगी। उस ज़माने की अधिकतर संरचनाएँ आर्किटेक्चर के मामले में समृद्ध होती थी। लेकिन, बाबरी ढाँचा को देख कर ऐसा लगता था जैसे बाबर के सेनापति मेरे बाक़ी ने आनन-फानन में इसे बनवा दिया होगा, क्योंकि इसका प्रारूप बड़ा ही बेकार नज़र आता था। राम मंदिर को ध्वस्त कर उसके ही मलबों से इसे तैयार कर दिया गया।

बग़दाद में विलियम फिंच का संक्रामक पानी पीने के कारण मौत हो गई थी। विलियम फिंच तो छोड़िए, यहाँ तक कि आइन-ए-अकबरी में भी भगवान विष्णु के 10 अवतारों का जिक्र है और इसमें भी लिखा है कि श्रीराम का जन्म अयोध्या में हुआ था। विलियन फिंच ने श्रद्धालुओं की सूची और उनका विवरण रखने वाले ब्राह्मणों का जिक्र किया है। इन्हें हम पंडा कहते हैं। पंडा बड़े धार्मिक स्थलों पर होते ही होते हैं। आज भी आप देवघर चले जाइए, वहाँ पंडों के पास सारे डिटेल्स होंगे आपके पूर्वजों के अगर वो वहाँ जाते रहे होंगे। ये सिर्फ एक उदाहरण है।

‘अर्ली ट्रेवल्स टू इंडिया 1583-1619’ नामक पुस्तक में विलियन फिंच का लिखा हुआ दर्ज है। राम मंदिर के वकील CS वैद्यनाथन ने भी सुप्रीम कोर्ट में इसका जिक्र किया था। इस पुस्तक को इतिहासकार विलियम फोस्टर ने लिखा था। विलियम फिंच के बारे में बता दें कि अंग्रेजी में कश्मीर के बारे में लिखने वाले पहले यात्रियों में उसका नाम आता है। पंजाब, पूर्वी तुर्किस्तान और पश्चिमी चीन को जोड़ने वाले व्यापारिक रूट के बारे में भी उसने लिखा था।

उसने काले बारूद की तरह दिखने वाले चावलों का भी जिक्र किया है। विलियम फिंच ने लिखा है कि देश के अलग-अलग हिस्सों से यहाँ आने वाले श्रद्धालु अपने साथ ऐसे चावल के कुछ दाने प्रसाद के रूप में लेकर जाते हैं। उनका मानना है कि ये हमेशा से चलता आ रहा है। उसने रामचंद्र के खँडहरों में बड़ी मात्रा में सोना होने का दावा भी किया है। उसने ये भी लिखा है कि व्यापारिक दृष्टिकोण से भी अयोध्या समृद्ध है। साफ़ है, ये कारोबार का भी बड़ा स्थल था।

बकौल विलियम फिंच, अयोध्या में घोड़े के सींग बहुतायत में मिलते थे और उनका इस्तेमाल कर के ढाल बनाई जाती थी। साथ ही तरह-तरह के पीने के प्याले बनाने में भी उनका इस्तेमाल किया जाता था। उसने कुछ भारतीयों के हवाले से लिखा है कि इनमें से कुछ सींग काफी दुर्लभ हैं, यहाँ तक कि आभूषणों की तुलना भी उनसे नहीं हो सकती। इसका अर्थ है कि अयोध्या एक महत्वपूर्ण जगह हुआ करती थी, आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए भी और आर्थिक गतिविधियों के लिए भी।

पढ़ें विलियम फिंच ने अयोध्या के बारे में क्या लिखा था

इन सबके बावजूद 500 से भी अधिक वर्षों तक हिन्दुओं को अपने आराध्य देव के जगह पर अपना अधिकार साबित करने के लिए लड़ना पड़ा, बलिदान देना पड़ा और दूसरे पक्ष की क्रूरता का सामना भी करना पड़ा। आज हमें दिवाली पर जगमगाती अयोध्या देखनी है, खुश होना है, लेकिन इसके पीछे का बलिदान और इसका इतिहास नहीं भूलना है। वामपंथी इतिहासकारों को अब जब तथ्यों के साथ जवाब दिया जा रहा है और वो झूठे साबित हो रहे हैं, हमें भी तथ्यों से लैस रहना है।

भजन-कीर्तन में घुस मुस्लिम भीड़ ने महिलाओं-बच्चों को लाठी-डंडों से पीटा, पुजारी को भी मारा: ‘लैंड जिहाद’ से समाधि को हड़पने की साजिश, पिछले साल प्रसाद को मारी थी लात

महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में पूजा करने गए हिन्दू श्रद्धालुओं पर हमला होने की खबर है। इस हमले में मंदिर के पुजारी सहित कुछ महिलाओं को चोटें आई हैं। हमले का आरोप राजू शेख, रज्जाक, सत्तार, नासिर और इब्राहिम के साथ इनके लगभग 40 साथियों पर लगा है। घटना के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। पीड़ित हिन्दू पक्ष ने पुलिस में तहरीर दी है जिस पर केस दर्ज कर के जाँच की जा रही है। घटना सोमवार (13 नवम्बर, 2023) की है। ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़ित पक्ष ने इस घटना को ‘लैंड जिहाद’ की साजिश करार दिया है।

एक स्थानीय पत्रकार बाबूलाल राठौर ने ऑपइंडिया को बताया कि घटना अहमदनगर राहुरी तालुका की है। यहाँ के गुहा गाँव में एक प्राचीन धर्मस्थल है। हिन्दू पक्ष इसे संत कनिफनाथ महाराज की समाधि बताता है। इसी गाँव और आसपास के मुस्लिम इसे वक्फ बोर्ड द्वारा रिजर्व मुस्लिमों की जमीन बताते हुए पीर की दरगाह होने का दावा करते हैं। हिन्दू पक्ष का आरोप है कि लगभग 1 साल पहले मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने संत कनिफनाथ की समाधि पर डाली गई भगवा चादर को हटा दिया और उसके बदले हरे रंग की चादर बिछा दी।

तब से इस स्थान को ले कर तनाव बना रहता है। हालाँकि, हिन्दू पक्ष ने अपना दावा नहीं छोड़ा। सोमवार (13 नवंबर, 2023) को अमावस्या होने की वजह से हिन्दू पक्ष ने अपनी पारम्परिक प्रथा बताते हुए इस स्थान पर कीर्तन-भजन और भंडारे का आयोजन किया था। इस आयोजन में महिलाओं और बच्चों की अच्छी-खासी तादाद थी। आरोप है कि सुबह 8:30 से 9:00 के बीच में लगभग 40 की संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग प्रार्थना स्थल में घुस गए। इस भीड़ का नेतृत्व राजू दगु शेख, रज़्ज़ाक दगु शेख, सत्तार बशीर शेख, नासिर फतू शेख और इब्राहिम इस्माइल शेख कर रहे थे।

इन सभी ने बिना कुछ बताए कीर्तन-भजन कर रहे लोगों पर हमला बोल दिया। हमलावरों के पास लाठी-डंडे होने का भी दावा किया जा रहा है। इस हमले में महिलाओं और बच्चों के साथ पुजारी शंकर किशन माज़रे की भी पिटाई की गई। अचानक हुई इस घटना में कुछ श्रद्धालु घायल भी हो गए हैं। पुलिस इन सभी का मेडिकल करवा रही है। इस मारपीट का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में भगवा वस्त्र में पुजारी को पीटती भीड़ ‘मार इसको मार’ चिल्लाती सुनाई दे रही है। एक अन्य वीडियो में महिलाओं को चीखते सुना जा सकता है।

मामले की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची। पुलिस को देख कर हमलावर भाग खड़े हुए। घटना की जानकारी आसपास और हिन्दू समाज के लोगों को हुई तो उन्होंने हमलावरों पर कड़ी कार्रवाई की माँग शुरू कर दी। सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी राहुरी पुलिस थाने में जमा हो गए। पुलिस ने दी गई शिकायत पर केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। अभी तक किसी भी गिरफ्तारी की जानकारी नहीं है। पुलिस का कहना है कि आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। गाँव में फिलहाल शांति है।

मंदिर से जुड़ी जमीन हथियाने की साजिश

ऑपइंडिया ने थाने पर मौजूद हिन्दू संगठन के एक कार्यकर्ता ऋषिकेश से बात की। ऋषिकेश ने हमें बताया कि संत कनिफनाथ समाधि मंदिर लगभग 400 साल पुराना है जो लम्बे समय से हिन्दू आस्था का केंद्र रहा है। उनका दावा है कि महज 10 साल पहले ही मुस्लिमों ने इसे रमजानी शाह की दरगाह बताना शुरू किया था। मुस्लिम पक्ष के इस दावे को ऋषिकेश बांगरे ने समाधि स्थल की लगभग 40 बीघा जमीन को हथियाने की साजिश बता रहे हैं।

बकौल ऋषिकेश, पिछले साल जनवरी 2022 में भी मुस्लिमों ने मंदिर के भंडारे वाले प्रसाद को पैर से मार कर माहौल को साम्प्रदायिक रूप से तनावपूर्ण कर दिया था। ऋषिकेश ने हमें आगे बताया कि मंदिर में पुजारी शंकर किशन माजरे पिछले कई वर्षों से पूजा-पाठ करते आ रहे हैं। वो गुहा गाँव के ही रहने वाले हैं। ऋषिकेश का यह भी दावा है कि 10 साल पहले मुस्लिमों ने इस पर अपना दावा ठोका और हर साल वो अपने विवाद को बड़ा रूप देते जा रहे हैं।

पटाखे जलाने पर 581 FIR! चेन्नई पुलिस ने दिवाली पर धड़ाधड़ दर्ज किए मामले, सनातन को खत्म करने की बात कह चुके हैं DMK के मंत्री उदयनिधि स्टालिन

चेन्नई पुलिस ने तयशुदा घंटों के अतिरिक्त पटाखे जलाने पर 581 FIR दर्ज की हैं। चेन्नई पुलिस ने सुबह 6-7 बजे और शाम को 7-8 बजे के बीच पटाखे जलाने को कहा था लेकिन आरोप है कि कई लोगों ने इस समय के अलावा भी पटाखे जलाए जिसके कारण यह मामले दर्ज किए गए। राज्य के मंत्री और सीएम स्टालिन के बेटे उदयनिधि ने सनातन धर्म को डेंगू-मलेरिया बता कर इसे खत्म करने की बात की थी और तमाम विरोधों के बावजूद अभी तक वो अपने इस बयान पर कायम हैं।

तमिलनाडु की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी कि लोगों को दीपावली के दिन मात्र 2 घंटे पटाखे जलाने की अनुमति दी जाए। इसी के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि पटाखे जलाने का समय यही होगा।

चेन्नई पुलिस द्वारा जारी किए गए बयान में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर पटाखों से जुड़े हुए कुल 581 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से 554 मामले समय सीमा के बाहर पटाखे जलाने, 19 मामले ज्यादा आवाज वाले पटाखे जलाने और 8 मामले पटाखे बेचने को लेकर दर्ज किए गए हैं।

जहाँ तमिलनाडु से पटाखे जलाने पर लोगों के खिलाफ मामले दर्ज करने की खबरें सामने आई हैं वहीं उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से ऐसा कुछ सुनने को नहीं मिला है। तमिलनाडु पुलिस के इस कदम पर उनकी अब सोशल मीडिया पर आलोचना भी हो रही है।

एक वेबसाइट के अनुसार, चेन्नई पुलिस ने पटाखे जलाने वालों को पकड़ने के लिए ‘स्पेशल यूनिट’ का गठन किया था। हर पुलिस थाने में एक सब इंस्पेक्टर और दो कॉन्स्टेबल को इसमें शामिल किया गया था और यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी कि वो पटाखे जलाने वालों को पकड़ें।

सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवम्बर को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए पूरे देश में बेरियम पटाखों पर बैन लगा दिया था। यह आदेश सिर्फ दिल्ली-एनसीआर तक सीमित ना होकर पूरे देश पर लागू किया गय था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पटाखों से होने वाला प्रदूषण गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। 

महुआ मोइत्रा को TMC ने दी नई जिम्मेदारी, बनाया जिलाध्यक्ष: कैश-तोहफे लेकर संसद में सवाल पूछने का है आरोप, सांसदी जाने की भी अटकलें

रुपए व उपहार लेकर संसद में प्रश्न पूछने के मामले में घिरीं लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा को तृणमूल कॉन्ग्रेस ने नई जिम्मेदारी दी है। TMC ने सांसद महुआ मोइत्रा को सोमवार (13 नवंबर, 2023 ) को कृष्णानगर (नादिया उत्तर) का पार्टी जिला अध्यक्ष नियुक्त किया है। कहीं न कहीं यह जिम्मेदारी देकर मुख्यमंत्री व तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने परोक्ष रूप से संकेत दे दिया है कि पार्टी महुआ मोइत्रा के साथ खड़ी हैं।

दरअसल, TMC ने सोमवार को राज्य के विभिन्न जिलों में संगठनात्मक बदलाव की सूची प्रकाशित की। और इसी लिस्ट में सांसद महुआ मोइत्रा को कृष्णानगर संगठनात्मक जिले का अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं चोपड़ा के विधायक रुकबानुर रहमान को भी अध्यक्ष बनाया गया है। 

इस नियुक्ति पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए महुआ मोइत्रा ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को धन्यवाद देते हुए कहा कि वह कृष्णानगर के लोगों के लिए हमेशा पार्टी के साथ काम करती रहेंगी।

बता दें कि यह ऐसे समय में हुआ है जब लोकसभा आचार समिति ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की शिकायत के बाद महुआ मोइत्रा को निष्कासित करने की माँग की है कि उन्होंने उद्योगपति गौतम अडानी के खिलाफ सवाल पूछने के लिए व्यवसायी दर्शन हीरानंदानी से रिश्वत ली थी, जिससे विवाद पैदा हो गया था।

क्यों विवादों में हैं सांसद महुआ मोइत्रा

बता दें कि महुआ मोइत्रा संसद में रुपए और उपहार लेकर सवाल पूछने के आरोप में विवादों में घिरी हैं। जब संसद में ‘रिश्वत के बदले सवाल’ को लेकर हंगामा चल रहा है तो तृणमूल महुआ के साथ है इसे लेकर कोई सीधा बयान नहीं दिया गया था, बल्कि महुआ के मुद्दे को पार्टी ने उनकी अपनी ‘अपनी’ लड़ाई बताया था।

ऐसे में विपक्ष के कई लोग सवाल उठा रहे थे कि आखिर पार्टी महुआ के साथ क्यों नहीं खड़ी है? वहीं अब पार्टी यह बड़ी जिम्मेदारी देकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी महुआ के पक्ष में है।

क्या महुआ मोइत्रा के खिलाफ होगी कार्रवाई?

लोकसभा आचार समिति की रिपोर्ट को लेकर TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने असहमति जताई थी। लोकसभा आचार समिति ने स्पीकर ओम बिरला से रिश्वत मामले में महुआ मोइत्रा को निष्कासित करने की सिफारिश की थी।