अंग्रेजों के देश यानी यूनाईटेड किंगडम (ब्रिटेन) ने माना है कि भारत रहने के लिए एक सुरक्षित देश हैं और यहाँ रहने वालों को किसी दूसरे देश में आश्रय या शरण लेने की कतई जरूरत नहीं है। इसी को आधार बनाते हुए यूके अब भारत को अपने सुरक्षित देशों की लिस्ट में शामिल करने का प्लान बना रहा है।
इस फैसले का ऐलान बुधवार (8 नवंबर,2023) को यूके होम ऑफिस ने किया है। इस फैसले का मकसद परदेश में बसने के तौर-तरीकों को कारगर बनाने के साथ ही सीमा नियंत्रण के तरीकों को बढ़ावा देना है, ताकि ऐसे अवैध प्रवासियों को रोका जा सकें।
भारत के भगोड़े के लिए मुश्किल होगा यूके में रहना
यूके के इस कदम से देश यानी भारत से वहाँ जाकर शरण लेने वाले अवैध प्रवासियों के अधिकार सीमित हो जाएँगे। इसके साथ ही देश से चोरी-चुपके भागकर यूके जाने वाले भारतीयों की वापसी की प्रक्रिया तेज हो जाएगी और ब्रिटेन में शरण माँगने की उनकी संभावना खत्म हो जाएगी।
यूके के होम ऑफिस के मुताबिक, बीते साल, ब्रिटेन में भारत और जॉर्जिया से अवैध प्रवासियों की खासी बढ़ोतरी देखी गई थी। यही वजह रही कि यूके की सरकार को इन देशों के शरण चाहने वालें लोगों के लिए अपने नजरिए में बदलाव लाने के लिए दोबारा से सोचने के लिए मजबूर होना पड़ा।
बुधवार को ‘हाउस ऑफ कॉमंस’ में रखे गए मसौदा कानून में भारत और जॉर्जिया को लिस्ट में जोड़े जाने वाले देशों के तौर पर शामिल किया गया है।
गौरतलब है कि अब तक ब्रिटेन के सुरक्षित समझे जाने वाले अन्य देशों में अल्बानिया और स्विट्जरलैंड, यूरोपीय संघ (ईयू) और यूरोपीय आर्थिक क्षेत्र (ईईए) से जुड़े देश शामिल हैं।
ब्रिटेन की गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन ने कहा, “हमें मूल रूप से सुरक्षित देशों से ब्रिटेन के खतरनाक और अवैध सफर करने वाले लोगों को रोकना चाहिए। इस लिस्ट को बढ़ाने से हमें उन लोगों को अधिक तेजी से हटाने में मदद मिलेगी जिनके पास यहाँ रहने का हक नहीं है।”
उन्होंने आगे कहा, “इससे साफ संदेश जाएगा कि यदि आप अवैध रूप से यहाँ आते हैं, तो आप यहाँ नहीं रह सकते। इसके लिए हम अपने अवैध प्रवास अधिनियम में बदलाव करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ये अवैध प्रवास के खिलाफ लड़ाई में एक अहम भूमिका निभाएगा।”
यूके की सेफ लिस्ट में भारत के शामिल होने का मतलब
भारत के यूके की सेफ स्टेट्स यानी सुरक्षित देशों की लिस्ट में शामिल होने का मतलब होगा कि वहाँ कि सरकार हमारे देश को आम तौर पर सुरक्षित, स्थिर और मानवाधिकारों को मानने वाला मानती है। जहाँ मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं किया जाता।
इसका मतलब है कि यहाँ के नागरिकों की ब्रिटेन में शरण माँगने की संभावना खारिज हो जाएगी। नतीजन अवैध तौर पर भारतीयों की ब्रिटेन में शरण माँगने की संभावना कम हो जाएगी। यह ब्रिटेन में अवैध रूप से प्रवेश करने वाले लोगों को हिरासत में लेने और तेजी से उन्हें वापस भेजने की राह आसान करेगा। फिर चाहे उन्हें सीधे उनके देश या फिर किसी तीसरे सुरक्षित देश वापस भेजा जाए।
भारत और जॉर्जिया को यूके की सेफ स्टेट्स लिस्ट में शामिल होने का प्रस्ताव लागू होने से पहले इस पर संसद के दोनों सदनों में बहस होगी। यूके की सरकार ये नया बदलाव अवैध प्रवासन अधिनियम 2023 के तहत कर रही है। इसका मकसद कानून में बदलाव करके ‘अवैध प्रवासियों’ को रोकना है ताकि अवैध रूप से ब्रिटेन में घुसने वाले लोगों को हिरासत में लिया जा सके और फिर तेजी से सुरक्षित तीसरे देश या उनके गृह देश में वापस भेजा जा सके।
असम के करीमगंज के रतबारी इलाके में 200 साल पुराना एक मंदिर जलकर राख हो गया है, जिससे स्थानीय लोगों में तनाव फैल गया है। यह घटना रतबारी के सुदूर आदिवासी गाँव दामसरा में हुई है जो रतबारी के ररेसरा गाँव में स्थित है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रात के अंधेरे में शरारती तत्वों ने सदियों से प्रतिष्ठित प्राचीन मंदिर में आग लगा दी। ऐसा माना जाता है कि 1800 के दशक की शुरुआत में, स्वर्गीय देवी राम बर्मन ने आदिवासी गाँव में इस मंदिर की स्थापना की थी, जहाँ शिव पार्वती और लक्ष्मी नारायण की मूर्तियाँ श्रद्धा का स्थान थीं। पीढ़ियों से यह पवित्र स्थान जनजातीय पूजा का केंद्र रहा है।
करीमगंज के रतबारी में जलाई गई मूर्तियाँ (साभार-seven sisters of assam)
वहीं इस मामले में गाँव की परेशान महिलाओं का आरोप है कि उपद्रवियों ने आदिवासी हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए जानबूझकर मंदिर में आग लगाई है और वे दोषियों के लिए उचित सजा की माँग कर रही हैं। इसके साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि पहले भी दो समुदायों के बीच भूमि विवाद के कारण रतबारी क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव रहा है और दोनों समूह उस भूमि पर अपना दावा करते हैं तो पुलिस इस एंगल से भी जाँच कर रही है।
मंदिर को जलाए जाने की खबर जैसे ही प्रशासन को हुई जिला आयुक्त और पुलिस अधीक्षक सहित पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुँच गए। इसके साथ ही व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने के लिए अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है।
बता दे कि यहाँ आदिवासी वन विभाग की अनुमति से सदियों से गाँव में निवास कर रहे हैं। हालाँकि, स्थानीय लोगों के अनुसार, हाल के वर्षों में तनाव बढ़ गया है क्योंकि अन्य समुदायों के लोग कथित तौर पर जबरन जमीन पर दावा करना चाहते हैं। ऐसे में अज्ञात उपद्रवियों द्वारा भगवान शिव और भगवान लक्ष्मी नारायण का मंदिर में आग लगाने से आदिवासी लोग परेशान हैं।
इस मामले में दुल्लाबचेरा मंडल में भाजपा पार्टी का नेतृत्व करने वाले जीतेंद्र लाल रॉय ने कहा कि यह कृत्य बहुत गलत है। उन्होंने आरोपितों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने के साथ ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए काम करने प्रयास करने की बात कही। साथ ही भाजपा के जिला अध्यक्ष सुब्रत भट्टाचार्य ने कहा कि मंदिर तोड़ने वाले लोगों को जल्द से जल्द पकड़ा जाना चाहिए। उन्होंने पुलिस प्रमुख पार्थ प्रतिम दास से इस मामले में कार्रवाई करने को कहा।
वहीं पुलिस को मंदिर में तीन बड़े डिब्बे मिले हैं। जिससे ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि इन डिब्बों में मंदिर को जलाने के लिए पेट्रोल लाया गया था। पुलिस इस पर हर तरफ से नजर रख रही है और इसमें शामिल सभी लोगों को पकड़ने की कोशिश कर रही है।
एसपी पार्थ प्रतिम दास ने कहा कि वे हर चीज की सावधानीपूर्वक जाँच कर रहे हैं। उन्होंने सभी से कहा कि जो कुछ हुआ उसके बारे में कोई भी अफवाह न फैलाएँ।
दिल्ली क्राइम ब्राँच, एनआईए व अन्य एजेंसियों से मिले इनपुट पर यूपी एटीएस आतंकवादियों के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है। इसी कड़ी में यूपी एटीएस ने छत्तीसगढ़ के दुर्ग से आईएसआईएस (ISIS) समूह के एक और आतंकी वजीहुद्दीन अली खान को गिरफ्तार किया है। वजीहुद्दीन अली खान उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में पीएचडी कर रहा है। इसके साथ ही वह छात्रों को पढ़ाता भी है। उससे जुड़े दो छात्रों को यूपी एटीएस ने कुछ समय पहले ही अलीगढ़ से पकड़ा था। अब वजीहुद्दीन को दुर्ग से गिरफ्तार किया, जहाँ वो छिपने के लिए भागा हुआ था।
ऑपइंडिया को पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तार आतंकी वजीहुद्दीन मूल रूप से छत्तीसगढ़ के दुर्ग का रहने वाला है। वो एएमयू में पीएचडी करने के साथ ही जूनियर छात्रों को सामाजिक विज्ञान विषय (इतिहास, भूगोल और नागरिक शास्त्र) पढ़ाता था। उसके छात्रों में हिंदू छात्र भी शामिल हैं। खास बात ये है कि उसकी विचारधारा से जुड़े हुए लोग वजीहुद्दीन को ‘अमीर’ कहते थे। इसका मतलब ‘शासक’ होता है।
यूपी एटीएस ने इस सप्ताह की शुरुआत में एएमयू से वजीहुद्दीन के दो सहयोगियों- अब्दुल्ला अर्शलान और माज़ बिन तारिक को गिरफ्तार किया था। ये दोनों ISIS के पुणे मॉड्यूल से जुड़े थे। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जब एटीएस अर्शलान और तारिक से पूछताछ कर रही थी तो वजीहुद्दीन का नाम सामने आया था। एटीएस ने बताया है कि वजीहुद्दीन लगातार अपने आईएसआईएस हैंडलर के संपर्क में था और वो आतंकी हमलों की योजना बना रहा था। उस पर और अधिक मुस्लिमों को जिहाद के लिए प्रोत्साहित करने और उन्हें आईएसआईएस से जोड़ने की जिम्मेदारी भी थी।
यूपी एटीएस का दावा है कि एएमयू में वजीहुद्दीन ही आईएसआईएस का मुख्य आतंकी था, जिसने दोनों को ISIS आतंकी बनने के लिए तैयार किया था। वो आईएसआईएस के लिए ओजीडब्ल्यू (ओवर ग्राउंड वर्कर) के तौर पर भी काम कर रहा था। इसमें से अर्शलान पेट्रोलियम और केमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक है और तारिक बीकॉम कर रहा है।
अर्शलान और माज बिन तारिक की गिरफ्तारी के बाद यूपी एटीएस ने जब प्रेस रिलीज जारी की तो उसमें साफ तौर पर बताया गया था कि पुणे आईएसआईएस मॉड्यूल से जुड़े आतंकियों- शाहनवाज आलम उर्फ शफी उज्जमा और रिजवान का एएमयू के SAMU (स्टूडेंट्स ऑफ एएमयू) ग्रुप के साथ गहराई से जुड़ाव था। कट्टरपंथी मुस्लिम युवाओं के ग्रुप सामू (SAMU) से जुड़ा शाहनवाज और रिजवान आईएसआईएस के लिए भर्तियाँ कर रहे थे। SAMU ग्रुप का मुखिया वजीहुद्दीन था। उसे सामू से जुड़े इस्लामिक कट्टरपंथी ‘अमीर’ कहते थे।
वजीहुद्दीन और बाकी दोनों गिरफ्तार आतंकियों के पास से आईएसआईएस के जिहादी साहित्य बरामद हुए हैं। इसे वो अन्य छात्रों के साथ शेयर कर रहे थे। बता दें कि पुणे आईएसआईएस मॉड्यूल में गिरफ्तार शाहनवाज, रिजवान और अरशद वारसी अयोध्या, अक्षरधाम मंदिर और चाबड़ हाउस पर आतंकी हमले की योजना बना रहे थे। ये सभी एक-दूसरे के संपर्क में थे। शाहनवाज, रिजवान और अरशद की गिरफ्तारी के बाद ही यूपी एटीएस ने एएमयू से जुड़े उनके कनेक्शन की जाँच तेज कर दी थी।
ISIS का पुणे मॉड्यूल और दिल्ली दंगों का कनेक्शन: आतंकी अरशद और शरजील इमाम
NIA ने 3 अक्टूबर 2023 को जिन तीन जिहादियों को गिरफ्तार किया था, वो आईएसआईएस के पुणे मॉड्यूल से जुड़े थे। इसमें शाहनवाज पुणे से भागकर दिल्ली में छिपा हुआ था। उसे छिपाया था अरशद वारसी ने, जो शरजील इमाम का साथी है। शाहनवाज झारखंड के हजारीबाद का रहने वाला है। वो आईएसआईएस के हैंडलर के साथ मिलकर देश के अलग-अलग हिस्सों में हमलों की तैयारी कर रहा था। इसके लिए उसने पूरी टीम तैयार कर ली थी। पुणे से भागने के बाद उस पर 3 लाख का ईनाम भी घोषित किया गया था। हिंदू लड़की से शादी करने वाले शाहनवाज के पास से बम और आईईडी बनाने में लगने वाले सामान भी बरामद हुए थे।
शाहनवाज (31) पहली बार 2016 में दिल्ली आया था। वो हिज्ब-उत-तहरीर नाम के रेडिकल संगठन से जुड़ा था और शाहीन बाग जाकर उसकी तकरीरें सुना करता था। शाहीन बाग में आने के बाद वो आईएसआईएस से जुड़ गया। यहाँ पर वह रिजवान से मिला और दोनों दोस्त बन गए। खास बात ये है कि शाहनवाज को पनाह देने वाला अरशद वारसी भी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से बी.टेक की पढ़ाई करने के बाद साल 2016 में ही दिल्ली आया था। फिर दोनों दोस्त बन गए।
अरशद वारसी जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से ‘प्रबंधन में इस्लामी सिद्धांत’ पर पीएचडी कर रहा था। वो शरजील इमाम के साथ दिल्ली दंगों की प्लानिंग में भी शामिल रहा था। उसने शाहनवाज को पनाह दी थी और दोनों एएमयू के आईएसआईएस मॉड्यूल के साथ जुड़े थे। दोनों के पाकिस्तानी हैंडलर भी एक थे और आईएसआईएस का भी हैंडलर एक ही था। दिल्ली पुलिस ने 2020 के हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों में 2700 पन्नों की चार्जशीट में 700 पन्नों पर सिर्फ इन दंगों से इनके जुड़ाव की क्रोनोलॉजी ही समझाई है।
ये क्रोनोलॉजी ऐसे समझें कि- 4 दिसंबर 2019 को सिटिजनशिप एमेंडमेंट बिल (सीएबी) को संसद के दोनों सदनों में रखा गया। इसके अगले ही दिन यानी 5 दिसंबर 2019 को शरजील इमाम ने मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑफ जेएनयू (MSJ) नाम का ग्रुप बनाया। इस पूरे ग्रुप को बनाने का आईडिया भी उसी का था। इस ग्रुप की चैट दिल्ली पुलिस ने हासिल की है, जिसमें साफ पता चला है कि शरजील इमाम और अरशद वारसी (जामिया का ही पीएचडी स्टूडेंट) दोनों लगातार संपर्क में थे। वहीं, शरजील इमाम स्टूडेंट्स ऑफ जामिया (SOJ) नाम के ‘रेडिकल कम्युनल ग्रुप’ से भी जुड़ा था।
दिल्ली जंगों की जाँच और चार्जशीट दायर करने के दौरान भी लगा कि अरशद वारसी एक ‘भटका हुआ मासूम नौजवान’ छात्र है, जो संगत की वजह से ऐसे खूँखार आतंकियों के बीच रह रहा हो। हालाँकि अब साफ हो चुका है कि अरशद वारसी कोई मासूम लड़का नहीं, बल्कि खुद ही आईएसआईएस का खूँखार आतंकी है, जो दिल्ली दंगों की प्लानिंग और हिंसा से जुड़ी चीजों के कोर्डिनेशन में शुरुआत से ही जुड़ा हुआ था।
दिल्ली दंगों को लेकर चार्जशीट में शरजील इमाम और अरशद की चैट शामिल है, इसे यहाँ पढ़ सकते हैं।
कौन है वजीहुद्दीन खान, जिसे यूपी एटीएस ने छत्तीसगढ़ से पकड़ा?
आतंकी वज़ीउद्दीन मूलतः छत्तीसगढ़ के दुर्ग का ही रहने वाला है और वह AMU से पीएचडी कर रहा था। वज़ीउद्दीन अलीगढ़ में अपने जूनियर छात्रों को सामाजिक विज्ञान (इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र) विषय पढ़ाता था। इनमें हिंदू छात्रों की भी अच्छी तादाद होती थी। वज़ीउद्दीन को उसकी विचारधारा से जुड़े लोग ‘अमीर’ कह कर पुकारते थे। अमीर शब्द मुस्लिमों में बादशाह की उपाधि माना जाता है।
ऑपइंडिया ने मई 2023 में ‘अल हया मिन अल्लाह’ नाम के एएमयू ग्रुप के साथ उसके संबंधों को दुनिया के सामने रखा था। वो अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों को एक साथ मिलकर ‘अल्लाह के रास्ते’ पर चल रहा था। ये ग्रुप 2019 में बना और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में ‘हया’ कार्यक्रम के जरिए छात्रों को इस्लाम की शिक्षा दे रहा था, जिसमें पुरुषवादी सोच, सर्वोच्चतावादी और घोर सांप्रदायिक एजेंडा शामिल था। यह एक महीना लंबा कार्यक्रम था, जिसमें लोकतंत्र की खिलाफत की जाती थी।
वजीहुद्दीन पर ऑपइंडिया की बड़ी स्टोरी यहाँ पढ़ें, जो मई 2023 में ही प्रकाशित की गई थी। वजीहुद्दीन ‘हया’ के नाम पर छात्रों को उत्तेजित करता था और ‘अल्लाह’ के दिखाए रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करता था। वह कुरान को ही मुस्लिमों का संविधान बताता था। उसी स्पीच की सामू के फेसबुक पेज पर भी शेयर किया गया था। ये वो समय था, जब दिल्ली में सीएए के खिलाफ कथित प्रदर्शन चल रहे थे। वो एंटी-सीएए प्रदर्शनों में जोर-शोर से शामिल होता था। यही नहीं, वो पीएफआई और शरजील इमाम का भी समर्थक है। 26 सितंबर 2022 की उसकी ये पोस्ट काफी कुछ कहती है।
वजीउद्दीन का फेसबुक पोस्ट
वजीहुद्दीन और अरशद वारसी का कनेक्शन
वजीहुद्दीन का फेसबुक प्रोफाइल अभी या तो लॉक्ड है या फिर उसे यूपी एटीएस की छापेमारी के दौरान बंद कर दिया गया, लेकिन उसका और अरशद वारसी का कनेक्शन साफ तौर पर दिखता है। अरशद वारसी उसे अपने कई पोस्ट में ‘अमीर’ के तौर संबोधित करता है और उसे समर्थन देता है।
अरशद वारसी का फेसबुक पोस्ट, जिसमें वो वजीहुद्दीन को अमीर कहकर संबोधित कर रहा है।
अरशद वारसी ने 6 दिसंबर को वजीहुद्दीन अली खान की स्पीच को शेयर किया और SAMU की तारीफ की। ये वीडियो 6 दिसंबर 2019 का है, जो बाबरी विध्वंस की बरसी का दिन होता है। उसके खिलाफ एएमयू में प्रदर्शन किया गया था। यहाँ पर हिंदुओं के खिलाफ नारेबाजी भी हुई थी और भड़काऊ पोस्ट के मामले में 2 छात्रों पर कार्रवाई भी की गई थी।
इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि चीन के पैसों पर चलने वाला वेबसाइट न्यूजक्लिक, वामपंथी एजेंडा पोषित स्क्रॉल, वायर जैसे संस्थानों ने SAMU के प्रदर्शन का बचाव किया था, जिसमें वजीहुद्दीन ने भाषण दिया था और अरशद वारसी ने जिसे शेयर किया था। फिलहाल दोनों आईएसआईएस आतंकवादी के तौर पर गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
खास बात ये है कि अरशद वारसी इन प्रदर्शनों से पहले भी 4 मई 2019 को वजीहुद्दीन की तारीफ करने वाले पोस्ट फेसबुक पर कर चुका था। ये प्रोफाइल अभी एक्सेस नहीं की जा सकती, लेकिन वारसी ने इसका समर्थन किया था, जिसमें हिंदुओं और यहूदियों को ‘काफिर’ के तौर पर ट्रीट करने की बात कही गई थी।
अरशद वारसी और वजीहुद्दीन सीएए विरोधी प्रदर्शनों से पहले से संपर्क में थे। साल 2018 में वारसी ने वजीहुद्दीन की फेसबुक प्रोफाइल ब्लॉक करने की शिकायत की थी और इसके पीछे की वजह बताई थी कि उसने ‘संघी आतंकवाद’ के खिलाफ जुमा खुतबा का वीडियो शेयर किया था।
मई 2018 में एएमयू में जिन्ना की तस्वीर का मामला सामने आया था, जिसके खिलाफ प्रदर्शन हुए थे और एएमयू में कट्टरपंथियों की पकड़ इतनी है कि उन्होंने प्रदर्शन कर रहे जिन्ना विरोधी छात्रों पर हमला किया था। इसी दौरान एएमयू में ‘आजादी’ वाले आपत्तिजनक नारे लगाए गए थे। वजीहुद्दीन एएमयू के अंदर साप्ताहिक ‘दावा’ मीटिंग में सालों तक शामिल होता रहा है।
ये सारे तथ्य इस बात को चीख-चीख कर बताते हैं कि वजीहुद्दीन और अरशद वारसी सालों से एक-दूसरे से जुड़े हुए थे, कम से कम 2018 से तो खुले तौर पर। दोनों आईएसआईएस के ऑपरेटिव हैं और दोनों ही सीएए-विरोधी आंदोलनों में एएमयू और जामिया में शामिल थे।
वजीहुद्दीन-अरशद वारसी और दिल्ली दंगों का लिंक
उपरोक्त जानकारियों से ये साफ है कि अरशद वारसी दिल्ली में हिंसा की शुरुआत से शरजील के साथ रहा। वो 6 दिसंबर को वजीहुद्दीन के पोस्ट शेयर करता है। ये वही समय है, जब दिल्ली दंगों का बीज बोया जा रहा था। अरशद का पोस्ट ये बताता है कि वो न सिर्फ वजीहुद्दीन का समर्थन कर रहा था, बल्कि वो पर्सनल लेवल पर भी उससे जुड़ा था। यही नहीं, वजीहुद्दीन के दो साथियों- अर्शलान और माज की गिरफ्तारी के दौरान यूपी एटीएस भी इस लिंक को जोड़ चुकी है कि शाहनवाज और अरशद से मिले लिंक के बाद एएमयू और सामू से जुड़े आईएसआईएस आतंकियों की गिरफ्तारी की गई है।
उदाहरण के तौर पर इस लिंक का जुड़ाव इस बात से समझें कि 7 दिसंबर 2019 को शरजील इमाम ने कहा कि वो ‘यूनाइटेड अंगेस्ट हेट’ द्वारा बुलाए गए प्रदर्शनों में शामिल होगा। इसका खुलासा अरशद वारसी के साथ उसकी वॉट्सऐप चैट से भी हुआ है। वैसे प्रदर्शन में शामिल होना गलत नहीं है, लेकिन यहाँ पर 7 दिसंबर को ही शरजील इमाम कहता है कि वो अगले सप्ताह कुछ ‘बड़ा’ प्लान कर रहा है और इसके लिए उसे दिल्ली यूनिवर्सिटी, एएमयू और अन्य जगहों से छात्रों को एमएसजे की मदद से इकट्ठा करना होगा।
इसी के बाद अरशद वारसी टेफला ढाबा पर एमएसजे ग्रुप की कोर कमेटी के सदस्यों की बैठक के मिनट्स शेयर करता है। इसमें सिंपल बात कही गई थी कि यूनाइटेड अगेंट्स हेट के प्रदर्शन को पूरी तरह से सफल बनाना है और इसमें मुस्लिमों के साथ ही गैर-मुस्लिम छात्रों को भी जुटाना है। यहाँ ये ध्यान देने वाली बात है कि उसी सप्ताह जामिया से दंगों की शुरुआत हुआ, तो दिल्ली के अन्य हिस्सों के साथ ही उत्तर प्रदेश तक फैल गई।
हिंसा के दौर की शुरुआत 15 दिसंबर को दिल्ली में हुई, जब मुस्लिमों की भीड़ की अगुवाई ओखला से आम आदमी पार्टी का विधायक और दिल्ली वक्फ बोर्ड का अध्यक्ष अमानतुल्लाह खान ने किया। इस दौरान ‘हिंदुओं से आजादी’ के नारे भी लगाए गए। हिंसक प्रदर्शनों के दौरान बसों को फूँक दिया गया। उसी रात दिल्ली पुलिस ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कैंपस में घुसकर ऑपरेशन चलाया और हिंसक तत्वों को वहाँ से निकलने पर मजबूर कर दिया।
दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगा-2020 में शरजील इमाम, आईएसआईएस, जामिया, एएमयू और आईएसआई कनेक्शन की पूरी क्रोनोलॉजी
इसके दो दिन बाद सीलमपुर में भीषण दंगे भड़क उठे। दिल्ली पूरे युद्ध के मैदान में तब्दील हो गई। स्कूल बसों पर हमले किए गए और उन्हें आग के हवाले कर दिया गया। भीड़ ने पुलिस पर पत्थरबाजी की और अंकित जैसे आईबी अधिकारी को दर्दनाक तरीके से मौत के घाट उतार दिया गया।
खास बात ये है कि 8 दिसंबर को शरजील इमाम, योगेंद्र यादव और अन्य लोगों की एक अंडरग्राउंड मीटिंग हुई थी, जिसके बारे में चार्जशीट में पूरी जानकारी दी गई है। इसमें बताया गया है कि मीटिंग में चक्का जाम करने की योजना को अंतिम रूप दिया गया। यहीं पर ये तय हुआ कि शरजील इमाम दिल्ली और दिल्ली से बाहर के छात्रों के साथ सड़कों पर उतरेगा। इस मीटिंग का खुलासा भी शरजील इमाम और अरशद वारसी की चैट से ही हुई।
इसी मीटिंग के दिन ‘CAB TEAM’ नाम से एक वॉट्सऐप ग्रुप बनाया गया, जिसमें योगेंद्र यादव, उमर खालिद, शरजील इमाम, नदीम खाम, परवेज आलम जैसे लोग थे। इसी के बाद दिल्ली में लगभग हर दिन हिंदुओं के खिलाफ हिंसा बढ़ती चली गई, जिसकी परिणति दिल्ली के साल 2020 के हिंदू-विरोधी दंगों के रुप में हुई।
इस मामले में अभी तक की जानकारी के मुख्य अंश
एनआईए ने 3 अक्टूबर 2023 को तीन आईएसआईएस आतंकवादियों को गिरफ्तार किया – झारखंड के हजारीबाग के निवासी शाहनवाज आलम (31); लखनऊ से मोहम्मद रिज़वान अशरफ (28); और झारखंड के गढ़वा जिले से मोहम्मद अरशद वारसी।
2. यूपी एटीएस ने कहा है कि शाहनवाज और रिजवान SAMU (एएमयू छात्र समूह) से करीबी तौर पर जुड़े हुए थे और आईएसआईएस के लिए भर्ती कर रहे थे।
3. ये तीनों- शाहनवाज, रिजवान और अरशद वारसी अयोध्या, अक्षरधाम मंदिर और चाबड़ हाउस में आतंकी हमले की योजना बना रहे थे।
4. अरशद वारसी के पास अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से बीटेक की डिग्री है और वर्तमान में वह जामिया मिलिया इस्लामिया (जेएमआई) से पीएचडी कर रहा है। वह ‘प्रबंधन में इस्लामिक सिद्धांत’ पर शोध कर रहा है। इसके चलते वो जामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय दोनों से ही जुड़ा है।
5. अरशद वारसी पुणे मॉड्यूल के मास्टरमाइंड शाहनवाज से बेहद करीब से जुड़ा है। ये वारसी ही है, जिसने पुणे से फरार होने के बाद शाहनवाज को दिल्ली में छिपाया, जबकि एनआईए ने उसके सिर पर इनाम रखा था।
6. अरशद वारसी दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के मास्टरमाइंडों में से एक शरजील इमाम से करीबी तौर पर जुड़ा हुआ था।
7. दिल्ली दंगों की चार्जशीट में शरजील इमाम और अरशद वारसी के बीच हुई व्हाट्सएप चैट को शामिल किया गया है।
8. शरजील इमाम और अरशद वारसी 5 दिसंबर 2019 से जुड़े हुए थे, जब सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई जा रही थी। वारसी के साथ इन चैट्स में इमाम ने “कुछ बड़ा करने” खासतौर पर हिंसा के लिए कहा था।
9. अरशद वारसी ने 6 दिसंबर 2019 को ही फेसबुक पर वजीहुद्दीन अली खान और SAMU की तारीफ की थी। ये दिन बाबरी विध्वंस की बरसी का दिन होता है।
10. शरजील इमाम और अरशद वारसी की ओर से जो पर्चे छपवाए जा रहे थे, उनमें इस्लाम और बाबरी को लेकर सांप्रदायिक संदेश भी थे।
11. अरशद वारसी और शरजील इमाम ने 7 दिसंबर 2019 को दिल्ली में हिंसा की योजना बनाने के लिए बैठक की थी।
12. दिल्ली में हिंसा फैलाने के लिए 8 दिसंबर को एक अंडरग्राउंड मीटिंग हुई थी जिसमें उमर खालिद, शरजील इमाम और योगेन्द्र यादव मौजूद थे। उस बैठक में यह निर्णय लिया गया कि शरजील इमाम चक्का जाम का आयोजन और नेतृत्व करेगा।
13. इसी के बाद 15 दिसंबर 2019 से दिल्ली में हिंसा भड़क उठी।
14. इसके बाद से लगभग हर रोज दिल्ली में हिंदुओं पर इस्लामिक कट्टरपंथियों ने हमले किए और फिर फरवरी 2020 में इस हिंसा ने वीभत्स रूप धारण कर लिया।
15. आईएसआईएस आतंकी के तौर पर जिस वजीहुद्दीन अली खान को अब गिरफ्तार किया गया है, वो कुछ समय पहले तक अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से जुड़ा था और पूरी तरह से सक्रिय था। ऑपइंडिया ने मई 2023 में ‘अल हया मिन अल्लाह’ नाम के एएमयू ग्रुप के साथ उसके संबंधों को दुनिया के सामने रखा था।
16. वजीहुद्दीन अली खान ने 26 सितंबर 2022 को भी अपने फेसबुक पोस्ट में शरजील इमाम का समर्थन किया था।
17. अरशद वारसी, वजीहुद्दीन अली खान और अन्य आतंकवादी आईएसआईएस और पाकिस्तान के आईएसआई हैंडलर्स से जुड़े रहे।
इन बातों से ये साफ है कि दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों के तार कई तरह से आईएसआईएस से जुड़ चुके हैं। अब आईएसआईएस आतंकवादी अरशद वारसी की गिरफ्तारी, आईएसआईएस आतंकवादी वजीहुद्दीन अली खान की गिरफ्तारी, उनके कनेक्शन और शरजील इमाम के लिंक जब सामने आ चुके हैं।
ऐसे में ये जरूरी हो जाता है कि दिल्ली पुलिस और एनआईए साल 2020 के हिंदू विरोधी दंगों में आतंकी कनेक्शन और आईएसआईएस की भागीदारी की जाँच करें। साल 2020 में दिल्ली दंगों में कई हिंदुओं ने अपनी जान गँवा दी थी।
मूल रूप से यह रिपोर्ट अंग्रेजी में नुपूर जे शर्मा द्वारा लिखी गई है। इसे पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।
बॉलीवुड गीतकार जावेद अख्तर दीवाली से पहले भगवान राम और माता सीता पर टिप्पणी करके चर्चा में आए हैं। इस बार उन्होंने भगवान राम और माता सीता को सांस्कृतिक विरासत बताया है।
गीतकार जावेद ने मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे द्वारा आयोजित दीपोत्सव कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि उन्हें राम और सीता की भूमि पर पैदा होने पर गर्व है। कार्यक्रम में वह बोले-
“राम और सीता केवल हिंदू देवी-देवता नहीं हैं। यह भारत की सांस्कृतिक विरासत है। हालाँकि मैं नास्तिक हूँ फिर भी मैं राम और सीता को इस देश की संपत्ति मानता हूँ इसलिए मैं यहाँ आया हूँ। रामायण हमारी सांस्कृतिक विरासत है। यह आपकी रुचि का विषय है। मुझे इस बात पर गर्व है कि मैं राम और सीता की भूमि पर पैदा हुआ हूँ, जब हम मर्यादा पुरुषोत्तम की बात करते हैं तो राम और सीता ही याद आते हैं। तो, आज से जय सियाराम।”
इसके बाद जावेद ने वहाँ मौजूद लोगों से 3 बार जय सियाराम के नारे लगवाए। उन्होंने बचपन के दिनों को याद करते हुए कहा कि वो लखनऊ से हैं, जहाँ बचपन में बातें किया करते थे कि ये गुडमॉर्निंग वगैरह बड़े लोगों की बात है। वहाँ तो सब लोग आते-जाते अभिवादन में जय सिया राम ही कहते थे। इसलिए सीता राम को अलग-अलग सोचना पाप है। ये शब्द प्रेम, एकता और गृहस्थ जीवन का प्रतीक है। इन्हें तो एक ने ही अलग किया उसका नाम रावण था। आज जो ऐसा करेगा वह रावण ही होगा।
आगे उन्होंने जनता से कहा- “आप मेरे साथ तीन बार जय सियाराम का नारा लगाए… जय सियाराम…जय सियाराम…जय सियाराम।”
हिंदू संस्कृति को बताया सहिष्णु
दीवाली पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ये भी कहा कि भारत में यदि लोकतंत्र कायम है तो इसकी वजह हिंदू संस्कृति है। उन्होंने कहा कि असहिष्णुता बढ़ रही है। पहले भी कुछ लोग थे जो असहिष्णु थे पर हिंदू वैसे नहीं थे। इनकी सबसे बड़ी खासियत यही थी कि इनकी सोच विशाल थी। अगर इनकी यह खासियत खत्म हो गई तो वे भी दूसरे लोगों जैसे हो जाएँगे। ऐसा नहीं होना चाहिए। हमने तो आपसे ही जीना सीखा है…।
बता दें कि मनसे द्वारा आयोजित दीपोत्सव कार्यक्रम में जावेद अख्तर के साथ सलीम खान और एक्टर रितेश देशमुख भी नजर आए। कार्यक्रम की कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर आई हैं लेकिन जो जावेद अख्तर द्वारा जय श्रीराम के नारे लगवाने की वीडियो हर जगह वायरल है। कुछ लोग इसे देख खुश हैं तो कुछ कह रहे हैं कि अच्छा है जावेद अख्तर की अक्ल ठिकाने आ गई।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इन दिनों मध्य प्रदेश में सपा उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं। इसी दौरान एक पत्रकार के सवाल में ‘टोंटी चोर’ शब्द सुनते ही वे भड़के गए। सवाल पूछने वाले को ‘गंदा पत्रकार, बीजेपी का एजेंट, बेटा’ जैसे विशेषणों से नवाजने लगे।
लेकिन जब पत्रकार का नाम नूर काजी होना पता चला तो शायद सपा सुप्रीमो को वोट बैंक की चिंता होने लगी। लिहाजा डैमेज कंट्रोल की कोशिश करते हुए ‘आप मुस्लिम हो, मुस्लिमों की भाषा ऐसी होती है’ जैसे वाक्यों पर आ गए। फिर पत्रकार की निंदा सामंतवाद, मनुवाद से लड़ाई पर आकर थमी।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है। घटना गुरुवार (9 नवंबर 2023) की है। अखिलेश यादव मध्य प्रदेश के पन्ना से सपा उम्मीदवार महेंद्र के समर्थन में जनसभा करने अजयगढ़ पहुँचे थे।
"ऐसे मत बोल चश्मा लगाए पत्रकार, बहुत गंदे पत्रकार… तुम बीजेपी के एजेंट हो बेटा… अगर बीजेपी के एजेंट नहीं होते तो इतना महंगा Ray-Ban का नकली चश्मा नहीं लगाते…"
मध्य प्रदेश में चुनाव प्रचार के दौरान पत्रकार के 'टोंटी चोर' वाले सवाल को लेकर भड़के अखिलेश यादव, पत्रकार को बताने… pic.twitter.com/4XB92iAsBl
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रैली का जिक्र करते हुए पत्रकार ने उनसे सवाल किया था। इस दौरान टोंटी चोर शब्द सुनते ही अखिलेश यादव भड़क गए। पत्रकार के चश्मे पर तंज किया। उसका फोटो खींचने को कहने लगे।
सपा सुप्रीमो ने कहा, “ऐसे मत बोल चश्मा लगाए पत्रकार, बहुत गंदे पत्रकार। तुम बीजेपी के एजेंट हो बेटा। अगर बीजेपी के एजेंट नहीं होते तो इतना महँगा Ray-Ban का नकली चश्मा नहीं लगाते। इस पत्रकार की फोटो खींचो।”
इसके बाद जब अखिलेश यादव को पता चला कि पत्रकार का नाम नूर काजी है तो उन्होंने कहा, “मुस्लिम हो आप। ऐसी भाषा होती है क्या मुस्लिमों की। तुम बिके हुए हो। तुम आगे मत आना बेटा यहाँ। पता नहीं तुम पत्रकार हो भी की नहीं। अगर मैं मान लेता हूँ कि ये पत्रकार है तो यही तो लड़ाई है सामंतवाद और मनुवाद की।”
अखिलेश यादव ने कहा, “ये लड़ाई हजारों साल पुरानी है, अभी भी इस लड़ाई का कोई रास्ता नहीं निकला है। जब हमने अपना मुख्यमंत्री आवास खाली किया तो उत्तर प्रदेश के जो मुख्यमंत्री योगी जी हैं, उन्होंने उसे गंगाजल से धुलवाया। अगर आप पिछड़ी जाति के हैं तो आपके घर को गंगाजल से धुलवाया जाएगा। सोचो अगर आप पिछड़े, दलित आदिवासी आबादी के होंगे तो आपके साथ क्या होता होगा।”
पुलिस वालों पर भी भड़क चुके हैं साईकिल छाप वाले
ये पहली बार नहीं है कि अखिलेश यादव ने भड़के हो। फरवरी साल 2022 में उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर खासा वायरल हुआ था। तब तिर्वा में उनकी जनसभा के दौरान कुछ सपा कार्यकर्ता बैरीकेडिंग तोड़कर मंच की तरफ बढ़ने लगे। ये देख पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने के लिए डंडा उठाया। इसी लेकर अखिलेश यादव ने मंच से ही गुर्रा उठे, “ऐ… पुलिस, ऐ पुलिस वालों, क्यों कर रहे हो ये तमाशा।”
उन्होंने आगे कहा, “तुमसे ज्यादा बदतमीज कोई नहीं हो सकता, क्यों ऐसा कर रहे हो भाई? ये बीजेपी वाले करवा रहे हैं। ये लगता है बीजेपी वाले करवा रहे हैं। ये बीजेपी वालों ने रेड कार्ड इशू करवाए थे। एक जात के अधिकारी थे, जिन्होंने अन्याय किया था।”
मध्य प्रदेश के अजयगढ़ में पन्ना विधानसभा की सभा में माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी की प्रेस वार्ता में पत्रकार के भेष में पहुंचा अपराधिक किस्म का संदिग्ध व्यक्ति।
इस मामले को लेकर सपा के प्रवक्ता फखरुल हसन चाँद ने अखिलेश की सुरक्षा बढ़ाने की माँग कर डाली है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह शख्स (पत्रकार नूर काजी) अखिलेश यादव के करीब आने की कोशिश कर रहा था। यह उनकी सुरक्षा में भारी चूक है। मध्य प्रदेश की सरकार से सपा इस पूरी घटना की जाँच की माँग करती है।
सपा ने आधिकारिक X हैंडल पर पोस्ट कर कहा है, “मध्य प्रदेश के अजयगढ़ में पन्ना विधानसभा की सभा में राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी की प्रेस वार्ता में पत्रकार के भेष में पहुँचा अपराधिक किस्म का संदिग्ध व्यक्ति। मध्य प्रदेश पुलिस जाँच करे और बताए ये अपराधी प्रेस वार्ता में कहाँ से आया?”
उत्तर प्रदेश के इटावा में आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में कार्डियोलॉजी विभाग के मशहूर डॉक्टर समीर सर्राफ ने पैसों की लालच में कई मरीजों की जानों के साथ खिलवाड़ कर डाला। खबर है कि सर्राफ ने 2017 से 2021 के बीच में 600 हार्ट मरीजों को नकली पेसमेकर लगा दिया, जिनमें से 200 लोगों की मौत की पुष्टि हो गई है। मामले की जाँच के बाद सर्राफ को लखनऊ से पकड़कर जेल में बंद कर दिया गया है।
इस संबंध में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार ने बताया कि पेसमेकर घोटाले में गिरफ्तार डॉक्टर को लखनऊ ले जाया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सर्राफ पर आरोप है कि उसने मरीजों का नाजायज फायदा उठाया और हार्ट मरीजों में सस्ते पेसमेकर लगाकर उनसे अधिक रकम वसूली।
जब उसकी इस हरकत की भनक प्रशासन को लगी तो पहले जाँच एडमिनिस्ट्रेशन लेवल पर शुरू हुई। उस जाँच कमेटी ने पाया कि सर्राफ पर लग रहे इल्जाम सही हैं। उसने सच में फर्जी कंपनियों से सस्ता पेस मेकर लिया और फिर उसे मरीजों के भीतर लगाकर उसकी 9 गुना कीमत वसूली।
कॉलेज प्रशासन लेवल की जाँच के बाद राज्य स्तरीय पर भी एक बड़ी जाँच टीम का गठन हुआ। उस टीम ने भी सर्राफ के खिलाफ सबूत पाए। इसके बाद सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी के तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर आदेश कुमार ने सैफई थाने में केस दर्ज कराया और 7 नवंबर को डॉक्टर को अरेस्ट कर लिया गया।
Big Alert! A famous cardiologist #Sameer_Sarraf who ruined the lives of over 600 patients by fitting pacemakers though they had no heart disease. He earned money from fake pharmaceutical companies for debauchery abroad. He's bn arrested and taken to LKO.#Saifai#Etawah#UPpic.twitter.com/2LIwX8yRpR
उल्लेखनीय है कि समीर सर्राफ पर मरीजों के परिजनों से अवैध रूप से पैसे ऐंठने का भी आरोप है। इसके अलावा उसके ऊपर अस्पताल में सामान होते हुए करोड़ों का सामान मँगाने का आरोप है। साथ ही वित्तीय अनियमितता, पीड़ित मरीजों को वित्तीय हानि पहुँचाने और मरीजों की जान खतरे में डालने के आरोप में भी उनके ऊपर केस दर्ज है।
कुछ रिपोर्ट्स बताती है कि 20 मार्च 2021 को विश्वविद्यालय में वह वित्तीय अनियमितता और सत्यनिष्ठा से कर्तव्यों का पालन न करने के दोषी पाया गया थे। उस समय भी उसे निलंबित किया गया था और उसके खिलाफ जाँच हुई थी।।
धनतेरस, दिवाली या फिर शादियों के लिए सोने के जेवर या गोल्ड खरीद रहे हैं तो अब शुद्धता को लेकर घबराने की जरुरत नहीं है। चाहे दुकान से खरीद रहे हों या भीड़भाड़ से बचने के लिए ऑनलाइन एप से जेवर या गोल्ड का कोई सामान खरीदते हैं तो इसकी शुद्धता की जाँच के लिए BIS ने धनतेरस पर एक मोबाइल ऐप लॉन्च किया है जिससे आप जान सकते हैं कि आपका सोना कितना है खरा।
इस ऐप के जरिए आपको यह भी पता लगेगा कि आपके द्वारा खरीदा गया गोल्ड हॉलमार्क के मानकों पर खरा उतरता है कि नहीं। दरअसल, भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने बीआईएस केयर एप (BIS Care App) बनाया है, जो पलक झपकते ही आपको बता देगा कि सोने के जेवर की हॉलमार्किंग असली है कि नहीं।
— Bureau of Indian Standards (@IndianStandards) April 10, 2023
ये ऐप सभी आईएसआई और हॉलमार्क-सर्टिफिकेट को ट्रैक करने में मदद कर सकता है। ये कस्टमर को हॉलमार्क की शुद्धता सत्यापित करने में मदद करता है। खास बात ये है कि इस एप को एंड्रोइड के साथ ही एप्पल यूजर भी आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं।
कैसे करें BIS Care App डाउनलोड
किसी भी चीज की गुणवत्ता और उसकी प्रमाणिकता बताने वाली संस्था BIS के BIS Care App नाम लॉन्च मोबाइल एप को आप Google Play Store में जाकर सर्च कर डाउनलोड किया जा सकता है।
गुणवत्ता के पैमाने पर भी इस एप को 4 स्टार से अधिक रेटिंग मिली है। मतलब साफ है कि गुणवत्ता परखने में इसका कोई सानी नहीं है। इसकी मदद से आप आसानी से किसी भी सामान की हॉलमार्किंग या ISI मार्क की परख कर सकते हैं।
कैसे करें BIS Care App इस्तेमाल
बीआईएस वेबसाइट में अक्सर पूछे जाने वाले सवालों के तहत छह कैटेगिरी में सोने के आभूषणों की हॉलमार्किंग को मंजूरी दी गई है। ये 14K, 18K, 20K, 22K, 23K और 24K हैं।
बता दें कि सोने के जेवर के खरेपन को परखने के लिए लिए बीआईएस केयर एप में हॉलमार्क विशिष्ट पहचान (HUID) फीचर है। इसका इस्तेमाल करना भी बेहद आसान है। केवल वेरीफाई HUID में इस नंबर या लाइसेंस नंबर डाल कर पता किया जा सकता है कि जेवर कितने खरे हैं।
BIS Care App किसी भी आईटम या प्रोडेक्ट को आईएसआई मार्क, हॉलमार्क और सीआरएस रजिस्ट्रेशन मार्क की कसौटी पर परखने वाला शानदार और एक आसान जरिया है। इस एप के जरिए सामान की क्वालिटी या विश्वसनीयता को लेकर किसी भी तरह का शक होने पर शिकायत भी की जा सकती है।
भारत में वांछित एक इस्लामी आतंकी की पाकिस्तान में गोली मारकर हत्या कर दी गई है। यह आतंकी कोई और नहीं बल्कि कुख्यात अकरम खान उर्फ अकरम गाजी है। अकरम लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का पूर्व कमांडर था। उसे गुरुवार (9 नवंबर 2023) की रात अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। बीते एक सप्ताह में यह दूसरी घटना है, जिसमें अज्ञात हमलावरों ने आतंकी की हत्या की है।
आतंकी अकरम गाजी ने साल 2018 से 2020 तक लश्कर भर्ती सेल का नेतृत्व किया था। वह पाकिस्तान में भारत के विरोध में भड़काऊ भाषण देता था और युवाओं को दहशतगर्दी की राह पर धकेलता था। इसके साथ ही वह उन्हें कश्मीर में घुसपैठ कराकर भारत में आतंक फैलाता था। वह लंबे समय से चरमपंथी गतिविधियों में शामिल था। उसकी हत्या पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में की गई है।
दरअसल, पाकिस्तान के बाजौर इलाके में कुछ बाइक पर सवार कुछ अज्ञात हमलावरों ने अकरम गाजी को गोली मार दी। कहा जा रहा है कि उसके सिर में गोली मारी गई है। हाल के दिनों में लश्कर-ए-तैयबा का ये तीसरा टॉप कमांडर आतंकवादी है, जिसकी हत्या की गई है। इन सभी को अज्ञात हमलावरों द्वारा हत्या की गई है। इन हत्याओं से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI भी सकते में हैं।
रविवार (5 नवंबर 2023) को साल 2018 में जम्मू-कश्मीर के सुंजवान में हुए आतंकी हमले के मास्टरमाइंड में से एक ख्वाजा शाहिद की हत्या कर दी गई थी। ख्वाजा शाहिद का पहले अपहरण कर लिया गया था। इसके बाद पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में नियंत्रण रेखा के पास उसका सिर कटा हुआ मिला था। इस घटना में भी अज्ञात हमलावर शामिल थे।
इसी साल अक्टूबर में पठानकोट हमले के मास्टरमाइंड शाहिद लतीफ की पाकिस्तान में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। साल 2016 में जम्मू-कश्मीर के पठानकोट वायुसेना स्टेशन में आतंकी हमला हुआ था। इस आतंकी घटना में शामिल चार आतंकवादियों का वह हैंडलर था। वहीं, दूसरा आतंकी और ISI का एजेंट मुल्ला बाहौर उर्फ होर्मुज को भी अज्ञात लोगों ने गोली मार दी।
इससे पहले सितंबर में अज्ञात बंदूकधारियों ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के रावलकोट में लश्कर-ए-तैयबा के एक शीर्ष आतंकवादी कमांडर रियाज अहमद उर्फ अबू कासिम की गोली मारकर हत्या कर दी थी। रियाज अहमद कोटली से नमाज अदा करने के लिए अल-कुदुस मस्जिद आया हुआ था। वहीं, हमलावरों ने घुसकर उसके सिर में गोली मार दी। वह भी LeT में लोगों की भर्ती करता था।
उससे पहले पिछले माह ‘लश्कर ए तैयबा’ के प्रमुख हाफिज सईद के करीबी अबु कासिम को रावलकोट में गोली मारी गई थी। खालिस्तान कमांडो फोर्स का दुर्दांत आतंकी और भारत में मोस्ट वॉन्टेड परमजीत सिंह पंजवाड़ की भी पाकिस्तान में अज्ञात लोगों ने गोली मारकर हत्या की थी।
जैश का खूंखार आतंकी जहूर मिस्त्री की भी हत्या हुई थी। जहूर मिस्त्री कंधार विमान अपहरण कांड में शामिल था। वहीं, आतंकी बशीर अहमद मीर उर्फ इम्तियाज आलम को रावलपिंडी में गोली मार दी गई थी। हिजबुल मुजाहिदीन ने उसे लॉन्च पैड सँभालने की जिम्मेदारी थी और वह पाकिस्तान से जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ कराता था।
वहीं, पाकिस्तान के उत्तरी वजीरीस्तान में दाऊद मलिक को अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तरी वजीरीस्तान के मिराली एरिया में कुछ नकाबपोश बंदूकधारियों ने दाऊद मलिक को उस समय गोली मारकर हत्या कर दी, जब वह एक क्लिनिक में गया था। नकाबपोश वहाँ पहले से ही उसका इंतजार कर रहे थे।
वहीं, पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में ही आतंकी सैयद नूर शालोबार की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। शनिवार (04 मार्च 2023) को अज्ञात हमलावरों ने कश्मीर में कई आतंकवादी घटनाओं के लिए जिम्मेदार शालोबार को गोलियों से भून डाला था। नूर शालोबार पाकिस्तानी सेना और ISI के साथ मिलकर कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने का काम कर रहा था।
नूर शालोबार से पहले सैयद खालिद राजा, एजाज अहमद अहंगर और बशीर अहमद नाम के आतंकियों की भी गोली मार कर हत्या हो चुकी है। मारे गए चारों आतंकी भारत में मोस्ट वांटेड थे। इनमें से एक को अफगानिस्तान में ढेर किया गया जबकि 3 का शिकार पाकिस्तान में ही बनाया गया।
ब्राजील की 29 वर्षीय इन्फ्लुएंसर व एक्ट्रेस लुआना एंड्रे का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। बताया जा रहा है कि लुआना घुटनों की पास की चर्बी कम करवाने के लिए लिपोसक्शन करवा रही थीं। लेकिन, ये सर्जरी सफल होती इससे पहले ही मॉडल को 4 बार दिल का दौरा पड़ गया और उनकी वहीं मौत हो गई।
Brazilian influencer #LuanaAndrade dies after liposuction on her knee
ब्राजील के साउथईस्टर्न शहर साओ पाउलो की निवासी एंड्रे वहीं एक अस्पताल में सर्जरी करवाने पहुँची थीं। करीब ढाई घंटे की सर्जरी के बाद उन्हें दिल का दौरा पड़ा जिसके तुरंत बाद सर्जरी को रोक दिया गया। उनके कई टेस्ट किए गए और पता चला कि उनकी रक्तवाहिका में चकत्ते जमने से रक्त के प्रवाह में बाधा आई और सर्जरी के वक्त उन्हें एक के बाद एक 4 दिल के दौरे पड़े।
Influencer Luana Andrade has died after suffering several cardiac arrests during liposuction procedure.
Luana reportedly appeared to be in good health before the surgery and her death has now been listed as a pulmonary embolism. pic.twitter.com/MTfzsbcMnY
डॉक्टरों ने यह भी दावा किया है कि सर्जरी से पहले हुई जाँच में लुआना का स्वास्थ सही था। ऑपरेशन से पहले हर पहलू को मद्देनजर रखते हुए जाँच की गई थी। इसके बाद भी ये हादसा हो गया।
उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया, दवाइयाँ चलाई गईं लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद डॉक्टर उनको बचाने में असफल रहे। लुआना को 7 नवंबर की सुबह 5:30 बजे मृत घोषित किया गया जिसके बाद उनके तमाम फैंस और सेलीब्रिटीज ने सोशल मीडिया पर दुख प्रकट किया।
बता दें कि लिपोसक्शन के दौरान होने वाली ये कोई पहली मौत नहीं है। इसी साल के फरवरी माह में 4 डॉक्टरों को इसी लिए सजा मिली थी क्योंकि उन्होंने एक महिला का लिपोसक्शन किया था लेकिन सर्जरी के वक्त महिला की हालत बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई।
झारखण्ड के दुमका से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जहाँ पहली बीबी के रहते दूसरी स्त्री से निकाह और पहली सास की हत्या का मामला सामने आया है। आरोप के मुताबिक दामाद ने अपनी दूसरी बीबी के घरवालों के साथ मिलकर पहली बीबी की माँ की पहले पिटाई की और फिर गला दबा कर हत्या कर दिया। घटना झारखण्ड के शिकारीपाड़ा थाना क्षेत्र के शिवतल्ला गाँव की है।
दरअसल, इस मामले में मंगलवार (7 नवंबर, 2023) की शाम शिकायत मिलने के बाद ससुराल समझाने गई 55 साल की मोमिन बीबी पर दामाद और सौतन के घरवालों ने पिटाई करने के बाद गला दबा दिया। वहीं पुलिस ने मृतका के बेटे नौशाद अंसारी के बयान पर दामाद नईम अंसारी, कैरामत मियाँ, जियाउल अंसारी, चुनकी खातून, सोनाभन बीबी, पुसिया अंसारी व रिजाउल अंसारी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। वहीं मुख्य आरोपित फरार है। पुलिस आरोपित नईम अंसारी की तलाश कर रही है।
क्या है पूरा मामला
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मृतका रांगा गाँव की रहने वाली थी। मृतका के बेटे नौशाद ने बताया कि उसकी बहन की शादी शिवतल्ला गाँव के नईम अंसारी के साथ हुई थी। चार बच्चे होने के बाद भी नईम ने गाँव की एक दूसरी महिला से निकाह कर लिया।
निकाह करने के बाद बहन को अनाज के लिए तरसाने लगा। मंगलवार को बहन ने माँ को फोन कर बताया कि घर में अनाज नहीं है। नईम अंसारी बच्चों को भूखा रख रहा है, खाने को अनाज तक नहीं दे रहा। जिसके बाद वह बेटे के साथ बेटी की ससुराल दामाद को समझाने गई। इस दौरान 55 साल की मोमिन बीबी पर दामाद नईम अंसारी और दूसरी बीबी के घरवालों ने माँ-बेटे पर हमला कर दिया।
दामाद नईम अंसारी ने पहले तो धक्का-मुक्की की। इसके बाद जीजा नईम ने फोन कर दूसरी बीबी के घरवालों को बुला लिया। उन लोगों ने घर आते ही उसकी और माँ की जमकर पिटाई की। फिर नईम ने माँ का गला दबा दिया, जिससे वह बेहोश हो गई। बाद में उसे अस्पताल ले जाया गया जहाँ उसकी मौत हो गई।
आरोप के मुताबिक वह बस दामाद को समझाने गई थी कि वह अपने बच्चों को भूखा ना रखे। बस इसी बात पर दामाद और सास में विवाद शुरु हुआ जिसके बाद उसने सास का गला दबा कर हत्या कर दी। वहीं पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है।
पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है, पुलिस ने मृतका मोमिन बीबी के बेटे नौशाद अंसारी के बयान पर दामाद नईम अंसारी, कैरामत मियाँ, जियाउल अंसारी, चुनकी खातून, सोनाभन बीबी,पुसिया अंसारी व रिजाउल अंसारी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। इस मामले में पुलिस आगे की कारवाई कर रही है।