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छत्तीसगढ़ में नक्सलियों से मुठभेड़ के साथ संपन्न हुआ मतदान, 20 सीट पर 71% पोलिंग: AK-47 रायफल बरामद, दंतेवाड़ा में IED से भरा टिफिन बम मिला

छत्तीसगढ़ में पहले चरण के मतदान के दौरान सुरक्षा बलों की नक्सलियों से मुठभेड़ हुई, जिसमें सुरक्षा बलों ने एक एके-47 बरामद किया है। मुठभेड़ में घायल 3 जवानों को एयरलिफ्ट कर रायपुर लाया गया। सूत्रों का कहना है कि इस मुठभेड़ में कई नक्सली मारे जा सकते हैं। इस बीच, पहले चरण के लिए 70.87% मतदान दर्ज किया गया है। उधर दंतेवाड़ा में भी टिफिन बम मिला है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के पहले चरण में तीन बजे तक 60 प्रतिशत से ज्यादा मतदान हो चुका है। नक्सल प्रभावित इलाकों में भी मतदान की गति अच्छी रही है। हालाँकि, नक्सलियों ने मतदान को बाधित करने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षा बलों ने उन्हें नाकाम कर दिया। नक्सलियों ने तीन से चार जगहों पर सुरक्षा बलों पर हमला किया। इन हमलों में कई नक्सली हताहत हुए हैं। इसमें से एक हमला काँकेर जिले के बांदे थाना इलाके में हुआ।

छत्तीसगढ़ पुलिस ने बताया, “काँकेर जिले के बांदे थाना क्षेत्र में नक्सलियों और बीएसएफ और डीआरजी की टीम के बीच मुठभेड़ हो गई। घटना स्थल से AK-47 बरामद किया गया है। इस पूरे इलाके में सर्चिंग जारी है। इस मुठभेड़ में कई नक्सलियों के घायल होने या मारे जाने की संभावना है।”

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, यह घटना बांदे पुलिस स्टेशन की सीमा के भीतर पनावर गाँव में दोपहर करीब 1 बजे हुई, जब सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) की एक संयुक्त टीम अभियान पर निकली थी। मुठभेड़ वाली जगह से एक एके-47 राइफल जब्त की गई। बांदे अंतागढ़ विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है, जो मंगलवार को राज्य चुनाव के पहले चरण में मतदान करने वाले 20 निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है।

3 बजे तक अच्छा मतदान

चुनाव आयोग के मुताबिक, तीन बजे तक सबसे ज्यादा वोटिंग मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में हुई, यहाँ 73 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान किया। इसके अलावा सबसे कम मतदान तीन बजे तक बीजापुर जिले में हुआ। यहां करीब 30 फीसदी मतदाताओं ने ही मतदान किया। वहीं, ओवर आल ये मतदान प्रतिशत 60 प्रतिशत से अधिक रहा। बता दें कि पहले चरण के मतदान के लिए कुल 223 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें 198 पुरुष और 25 महिलाएँ हैं। पहले चरण में 40 लाख 78 हजार 681 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं।

‘एल्विश यादव हाजिर हों’: YouTuber को नोएडा पुलिस का नोटिस, दूसरे थाने में ट्रांसफर किया गया रेव पार्टी और साँप के ज़हर से नशा वाला केस

एक ताजा घटनाक्रम में नोएडा पुलिस ने बिगबॉस विजेता एल्विश यादव को नोटिस जारी किया है। नोटिस में एल्विश को अपना बयान देने के लिए हाजिर होने का आदेश दिया गया है। इसी मामले में गायक फैज़लपुरिया को पहले ही पुलिस का नोटिस मिल चुका है। एक पुराने वीडियो में फैज़लपुरिया और एल्विश एक साथ नजर आ रहे हैं। मामले की जाँच नोएडा पुलिस के थाना सेक्टर 49 से सेक्टर 20 पुलिस स्टेशन को ट्रांसफर कर दी गई है।

नोएडा पुलिस के एक सीनियर अधिकारी ने ANI से बातचीत के दौरान बताया कि इस केस में जेल में बंद 5 आरोपितों का कस्टडी रिमांड लेने की तैयारी चल रही है। कस्टडी रिमांड के लिए पुलिस जल्द ही अदालत में आवेदन करेगी। रिमांड स्वीकृत हो जाने के बाद सभी आरोपितों से इस केस के बारे में विस्तृत पूछताछ की जाएगी। इसी दौरान उन्होंने केस के थाना 49 से ट्रांसफर होने की जानकारी देते हुए अब विवेचना सेक्टर 20 थाने के एक सीनियर इंस्पेक्टर से कराए जाने की बात कही।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने गायक फैज़लपुरिया को भी नोटिस जारी किया है। फैज़लपुरिया एल्विश यादव के करीबी बताए जा रहे हैं। जाँच कर रही पुलिस को एक वीडियो मिला है जिसमें एल्विश और फैज़लपुरिया एक साथ दिखाई दे रहे हैं। 5 महीने पुराने इस वीडियो में साँपों और सँपेरों के भी सीन हैं। नोएडा पुलिस उन तमाम पार्टियों की वीडियो और CCTV फुटेज में जुटाने में लगी है जिसमें एल्विश यादव मौजूद रहे हों। ये पार्टियाँ राजस्थान और दिल्ली में हुईं थीं।

आरोपितों के खिलाफ इस से पहले गुरुग्राम में भी शिकायत दर्ज होने की जानकारी सामने आ रही है। हालाँकि उस पर कोई ठोस एक्शन नहीं लिया गया था। बताते चलें रेव पार्टी में साँपों के जहर के प्रयोग को ले कर नोएडा के सेक्टर 49 थाने में यूट्यूबर एल्विश यादव सहित कुल 6 आरोपितों पर 3 नवंबर, 2023 को FIR दर्ज हुई है। इस मामले में 5 आरोपितों को पहले ही गिरफ्तार कर के जेल भेजा जा चुका है।

‘पढ़ी-लिखी लड़की घुसाने देगी लेकिन बाहर निकाल देगी’: विधानसभा से विवाहित पुरुषों को CM नीतीश कुमार की सलाह – अंतिम में भीतर मत घुसाओ, बाहर कर दो

बिहार विधानसभा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जनसंख्या वृद्धि पर सेक्स एजुकेशन को समझाने के लिए कुछ ऐसा बयान दे दिया है कि इस पर सोशल मीडिया में उनकी आलोचना होने लगी। उन्होंने इस दौरान पति-पत्नी के सेक्स पर लगभग 1 मिनट तक बात की। बिहार विधानसभा के विधायक इस पर हँसते हुए दिखे।

नीतीश ने यह बयान विधानसभा में जनसंख्या वृद्धि पर चर्चा के दौरान दिया, विधानसभा में आज जातिगत जनगणना के आँकड़े भी रखे गए हैं। इसी दौरान नीतीश कुमार ने यह बयान दिया जिस पर उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव समेत सभी नेता हंसने लगे।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, “कि अगर पढ़ लेगी लड़की, और जब शादी होगा तब लड़का लड़की का तो जो पुरुष है वो तो रोज रात में शदिया होता है उसके साथ करता है ना उसी में और पैदा हो जाता है। और लड़की पढ़ लेती है तो हमको मालूम था कि उ करेगा ठीक है! लेकिन अंतिम में भीतर मत घुसाओ उसको बाहर कर दो! करता तो है।”

आगे नीतीश कुमार ने कहा, “उसी में संख्या घट रही है। अब आप जान लीजिए जो संख्या थी पहले, आप पत्रकार लोग भी ठीक समझिए। याद करिए, पहले क्या था 4.3, अब घटते घटते, लास्ट ईयर के पहले जो रिपोर्ट आई है, अभी तो हम कहे हैं और भी नया रिपोर्ट दे दो। उस रिपोर्ट में आया है 2.9, अब हम लोग बहुत जल्दी 2 पर पहुँच जाएँगे।”

नीतीश कुमार के इस बयान पर सदन में मौजूद सभी विधायक हँसने लगे। सदन में काफी देर नीतीश के इस तर्क पर ठहाके लगते रहे। अब इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। सोशल मीडिया पर इसे शेयर करके लोग अलग अलग तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

एक्स (पहले ट्विटर) पर एक महिला रिनिती चैटर्जी पांडे ने लिखा, “किसी विधानसभा में ऐसी बेहूदा बातें आज़ादी के बाद से किसी ने नहीं कही होगी आज नीतीश कुमार ने सारी हदें पार कर दी थू है।”

अभय प्रताप सिंह ने लिखा, “CM नीतीश कुमार का ये बयान सुनिए… विधानसभा में कोई ऐसा कैसे कह सकता है ?’

ऋषि राजपूत ने लिखा, “नीतीश कुमार ने जो सदन में कहा वह पूरी तरह से अमर्यादित है। मुझे शर्म आ रही है कि नीतीश कुमार मेरे प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं, आज पूरा बिहार शर्मशार हो गया।”

एक डीपफेक वीडियो के पीछे हजारों तस्वीरों की ट्रेनिंग: जानिए उस तकनीक के बारे में जिससे बिकनी मॉडल को बना दिया रश्मिका मंदाना, पॉर्न इंडस्ट्री में भी इस्तेमाल

इन दिनों डीपफेक तकनीक की काफी चर्चा है। यह वही तकनीक है जिसके सहारे एक ब्रिटिश मॉडल ज़ारा पटेल की अंतरंग वीडियो पर भारतीय अभिनेत्री रश्मिका मंदाना का चेहरा लगाया गया। यह वीडियो बाद में खूब वायरल हुआ और रश्मिका ने स्वयं आगे आकर इसकी सच्चाई बताई।

इस वीडियो के बाद से ‘डीपफेक’ शब्द खूब चर्चा में है। डीपफेक दरअसल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित एक ऐसी तकनीक है जिसके जरिए किसी एक व्यक्ति के चेहरे पर दूसरे के चेहरे पर लगाया जाता है। इससे कई फर्जी फोटो, आडियो और वीडियो तैयार होते हैं।

डीपफेक तकनीक का अधिकतर उपयोग फर्जी पॉर्न वीडयो बनाने के लिए होता है। इस तकनीक के जरिए पॉपुलर महिला शख्सियतों की फर्जी पोर्न वीडियो बनाई गई हैं, इस तकनीक का सबसे ज्यादा इसी काम के लिए उपयोग होता है।

कहाँ से आया डीपफेक, कैसे करता है काम?

डीपफेक के सम्बन्ध में ‘द गार्जियन‘ के एक लेख में जानकारी दी गई है कि यह सबसे पहले सोशल मीडिया एप रेडिट (Reddit) पर सामने आया था। तब एक Deepfake नाम के यूजर ने टेलर स्विफ्ट, गल गडोट जैसी अभिनेत्रियों के फर्जी पोर्न क्लिप डाल दिए। इसके बाद से ऐसे वीडियो की बाढ़ आ गई।

डीपफेक तकनीक से वीडियो बनाना एक लम्बी प्रक्रिया है। सबसे पहले जिन दो लोगों के चेहरे आपस में बदले जाने हैं उनके हजारों फोटो वीडियो ‘एनकोडर’ नाम के एक AI आधारित प्रोग्राम पर चलाए जाते हैं। यह तकनीक इन दो चेहरों की समानताएँ परखती है। इसके बाद यह तकनीक इन चेहरों को केवल उनकी समानताओं के आधार पर सीमित कर देती है और एक कंप्रेस्ड इमेज बनाती है।

इसके पश्चात एक और AI तकनीक ‘डीकोडर’ से चेहरा तलाशने को कहा जाता है। आसान भाषा में समझे तो इनकोडर को ‘A’ का चेहरा पढ़ने के लिए तैयार किया जाता और डीकोडर को ‘B’ का चेहरा पढ़ने के लिए तैयार किया जाता है। इसके पश्चात दोनों मशीनों से यह चेहरा बनाने को कहा जाता है लेकिन इस स्थिति में इनकोडर को B का और डीकोडर को A का चेहरा बनाने को कहा जाएगा। ऐसे में मान लीजिए कि B उस फोटो में रो रहा है तो नई फोटो में A रोता हुआ दिखेगा।

इसके अलावा एक अन्य तकनीक जिसका नाम ‘जनरेटिव एड्वर्सियल नेटवर्क’ (GAN) है उसके जरिए भी बनाई जाती हैं। इसमें एक गड़बड़ तस्वीर और एक सही तस्वीर डाली जाती है। AI तकनीक इन दोनों के कोड डिकोड करके फोटो को आपस में मिलाती है। इसमें समय लगता है।

क्या इसे पहचानना नामुमकिन है?

यह बात इस निर्भर करती है कि डीपफेक के जरिए बनाई गई फोटो या वीडियो कितने कौशल से बनाए गए हैं। हालाँकि, इन वीडियो को ध्यान से देखने पर बोलते समय होंठों का मूवमेंट, हाथ-पैर का चलना और चेहरे पर आने वाले अन्य भाव को देख कर पता लगाया जा सकता है कि वीडियो असली है नकली।

समस्या यह है कि अब तकनीक इतनी ज्यादा मजबूत होती जा रही है कि सामान्य व्यक्तियों की पकड़ में कई वीडियो नहीं आने वाली। इनको बहुत ही उच्च क्षमता के कंप्यूटर और आधुनिक तकनीक से लम्बी मेहनत के बाद बनाया जाता है। डीपफेक की समस्या से लड़ने के लिए लगातार बड़े बड़े विश्वविद्यालयों समेत कई कंपनियां रिसर्च कर रही हैं। इसकी कमियों को ढूँढने का लगातार प्रयास किया जाता रहा है जिससे लोग जन सके कि कोई वीडियो फर्जी है नहीं।

‘मेरे पास बाकी थे 5 सेकेंड’: ‘टाइम्ड आउट’ होने वाले एंजिलो मैथ्यूज ने वीडियो शेयर कर ICC से माँगा न्याय, वर्ल्ड कप से बाहर हुए शाकिब अल हसन

श्रीलंका के वरिष्ठ आल राउंडर एंजिलो मैथ्यूज ने दावा किया है कि वो टाइम आउट नहीं थे, बल्कि उनके पास पूरे 5 सेकंड बाकी थे। उन्होंने बाकायदा टीवी फुटेज भी अपने एक्स हैंडल पर शेयर किया है। उन्होंने आईसीसी से ‘न्याय’ की माँग की है। इस बीच, उन्हें आउट करने वाले शाकिब अल हसन विश्वकप से बाहर हो गए हैं। बताया गया है कि वो श्रीलंका के खिलाफ मैच के दौरान ही घायल हो गए थे और अब कम से कम 3-4 सप्ताह के लिए खेल से बाहर हो गए हैं।

मैथ्यूज बोले-मैं तो बेगुनाह था, गलत सजा मिली

श्रीलंका के स्टार ऑल राउंडर एंजेलो मैथ्यूज ने मैच का एक वीडियो शेयर किया। उसमें उन्होंने ये बताने की कोशिश की है कि वो दो मिनट की समय सीमा के अंदर पिच पर पहुँच गए थे और बल्लेबाज़ी के लिए तैयार थे, लेकिन आखिरी वक़्त पर हेलमेट का स्ट्रिप टूट गया था।

अपने दूसरे पोस्ट में मैथ्यूज ने दो तस्वीरें पोस्ट की हैं, जिसमें उन्होंने बताया है कि कैसे वो दो मिनट के अंदर पिच पर पहुँच कर खेलने के लिए तैयार थे, लेकिन इसी बीच उनके हेलमेट का स्ट्रेप टूट गया था। इसमें उन्होंने मैच के फुटेज का टाइम स्टैंप भी दिखाया है।

हर्षा भोगले बोले – मैथ्यूज को आउट दिया जाना सही

इस पूरे विवाद पर जाने-माने क्रिकेट कमेंटेटर और एक्सपर्ट हर्षा भोगले ने विस्तार से चर्चा की है और बताया है कि क्यों मैथ्यूज आउट थे। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, “आपको अंपायरों पर विश्वास करना होगा। यदि वे कहते हैं कि दो मिनट बीत गए थे, तो उन्होंने ऐसा किया था क्योंकि ये बहुत अनुभवी और बहुत अच्छे अंपायर हैं और उनसे ऐसी गलतियाँ करने की संभावना नहीं है। दूसरा, नियम न जानने की बात कहने से काम नहीं चलने वाला। अगर कोई नियम है और आपने उसे तोड़ा है, तो आप को एक मिनट भी वहाँ रुकने का अधिकार नहीं।”

उन्होंने आगे लिखा, “शाकिब को अपील करने का अधिकार था और यह तय करना हमारा काम नहीं है कि उसे अपील करनी चाहिए या नहीं। यह उसका निर्णय है, वह इसी तरह खेलना चाहता है। हालाँकि, यहाँ मैथ्यूज कोई फायदा नहीं उठा रहे थे।” उन्होंने उदाहरण देते हुए अपनी बात को समझाया कि मैच के दौरान कोई बल्लेबाज अगर गेदबाज या फील्डर को देने के लिए बॉल उठाता भी है, तो उसके खिलाफ अपील नहीं की जाती।

हालाँकि, बल्लेबाज अक्सर पूछ लेते हैं कि क्या वो ऐसा कर सकते हैं। टीक इसी तरह से अगर मैथ्यूज ने अंपायरों से पूछा होता कि क्या उसका हेलमेट बदलना ठीक है, तो मुझे यकीन है कि कोई अपील नहीं होती। हर्षा भोगले ने अपनी बात में आगे कहा कि इस मामले में हमें खेल भावना को लाने की जरूरत नहीं है। मैथ्यूज़ और श्रीलंकाई प्रशंसक निराश और नाराज़ हो सकते हैं लेकिन खेल के नियमों के अनुसार, वो आउट थे।

हर्षा ने एक वीडियो भी शेयर किया। उन्होंने बताया, “5 जनवरी 2007 को गांगुली को टाइम आउट कर दिया गया लेकिन ग्रीम ने इसका उपयोग नहीं किया जो उस समय दक्षिण अफ्रीकी टीम के कप्तान थे। विपक्षी टीम के कप्तान के पास खेल की भावना का सम्मान करते हुए अंपायर से टाइम आउट नियम को नजरअंदाज करने का अनुरोध करने का विवेकाधिकार है। अगर आपको लगता है कि बल्लेबाज से वाजिब वजह के चलते देरी हुई।”

इस मामले में स्टार स्पोर्ट्स ने विशेषज्ञों की टीम से भी बातचीत की है। इस पैनल में इयान बिशप, रमीज रजा, संजय मांजरेकर और संजय बांगर जैसे दिग्गज शामिल थे। उन्होंने नियमों के मुताबिक मैथ्यूज को आउट माना।

हालाँकि, एंजिलो मैथ्यूज का ये कहना है कि वो देर नहीं कर रहे थे और 5 सेकंड का समय उनके पास बचा था। ऐसे में ये मामला दिलचस्प मोड़ ले चुका है। क्योंकि, कहा जा रहा है कि जिस नियम का हवाला देकर उन्हें आउट करार दिया गया, वो नियम उन्होंने तोड़ा ही नहीं। वहीं, इस बीच साकिब अल हसन, जिन्होंने मैथ्यूज के टाइम आउट के लिए अपील किया था, वो अब विश्वकप से ही बाहर हो गए हैं। उन्हें श्रीलंका के खिलाफ मैच के दौरान चोट लग गई थी, लेकिन वो पेन किलर्स और बैंडेड की सहायता से खेलते रहे और अपनी टीम को 3 विकेट से जीत दिलाई।

आँगनवाड़ी की महिलाओं पर बिहार पुलिस ने दिखाया दम, कई बेहोश: वादे से मुकरे नीतीश कुमार तो सड़क पर उतरी हैं सेविका-सहायिका, 1 महीने से बंद हैं 1.15 लाख सेंटर

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार अपने ही वादे से फिरने के बाद सत्ता की हनक मजलूम आँगनवाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं पर उतार रही है। राजधानी पटना में मंगलवार (7 नवंबर, 2023) को अपनी पाँच सूत्रीय माँगों को लेकर बिहार विधानसभा का घेराव करने पहुँची इन महिलाओं को तितर-बितर करने के लिए पुलिस प्रशासन ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इस दौरान कई महिलाएँ बेहोश हो गई। बिहार में 1.15 लाख आँगनवाड़ी केंद्र पिछले एक महीने से भी अधिक समय से बंद हैं।

गौरतलब है कि अपनी माँगों को लेकर आँगनवाड़ी सेविका-सहायिका संघ एक महीने से आंदोलनरत है। इन आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से नीतीश बाबू ने उनका मानदेय दोगुना करने का वायदा किया था, लेकिन वादा पूरा करने की जगह बिहार सरकार इन आंदोलनकारी महिलाओं पर सख्ती कर रही है।

सरकार इनके आँगनवाड़ी केंद्रों पर नोटिस चिपका रही हैं कि अगर उन्होंने ये नहीं खोले तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इससे नाराज आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने भी अपना आंदोलन तेज कर दिया।

गौरतलब है कि मंगलवार को बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन ये आँगनवाड़ी कार्यकर्ता विधानसभा का घेराव करने पहुँची थी। विधानसभा के गेट के बाहर सुबह ही सैंकड़ों की संख्या में ये महिलाएँ वहाँ पहुँची थी। प्रदर्शन को रोकने के लिए वहाँ पुलिस प्रशासन का अमला भी पहुँचा था। वाटर कैनन का इस्तेमाल कर प्रदर्शनकारी आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को वहाँ से हटाया गया। गौरतलब है कि बिहार विधानसभा के 6 से 10 नवंबर तक चलने वाले शीतकालीन सत्र के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए वहाँ 70 मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारी तैनात है।

ऐसे में एंट्री पास के बगैर किसी को भी विधानमंडल परिसर में के जाने की इजाजत नहीं है। इस वजह से यहाँ प्रदर्शन की भी मंजूरी नहीं है। इस बीच आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उनकी 5 सूत्रीय माँगें नहीं मानी गई तो वो चुनाव में ऐसे लोगों को वोट नहीं देंगी। उनका कहना है कि जो हमारी बात सुनेगा, वहीं कुर्सी पर राज करेगा।

आँगनवाड़ी सेविका और सहायिकाओं की माँग है कि राज्य सरकार की दी जा रही अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि 10 हजार रुपए की जाए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में गुजरात की तरह ही बिहार में भी ग्रेच्युटी भुगतान करना पक्का किया जाए।

इसके साथ ही उन्हें केंद्र सरकार द्वारा सरकारी कर्मचारी का दर्जा देते हुए ग्रेड सी और ग्रेड डी में समायोजित किया जाए। उनकी माँग है कि जब तक सरकारी कर्मचारी का दर्जा उन्हें नहीं मिल जाता है, तब-तक सेविकाओं को 25 हजार रुपए और सहायिकाओं को 18 हजार मानदेय हर महीने दिया जाए। योग्य सहायिका को सेविका में बहाली के लिए अतिरिक्त 10 बोनस अंक देने का प्रावधान लागू हो। इसके अलावा, सेविका से सुपरवाइजर में प्रमोशन और सेविका और सहायिका के सभी खाली पदों पर बगैर देरी के बहाली पक्की की जाए।

इस दौरान सदन में बिहार विधान सभा में बीजेपी नेता विजय सिन्हा बोले, “गाँव-समाज में शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली आँगनवाड़ी सेविका बहनों पर महागठबंधन सरकार का लाठी चार्ज करवाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। महागठबंधन की सरकार इनकी आवाज को दबाना चाहती है। सरकार विधानसभा में भी आँगनवाड़ी सेविकाओं के विषय पर जवाब देने से पीछे हट रही है।”

गौरतलब है कि बिहार राज्य आंगनबाड़ी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले सेविका और सहायिकाओं ने शनिवार (4 नवंबर,2023) को सांसद सुशील कुमार सिंह को अपनी माँगों का ज्ञापन सौंपा था। सेविका और सहायिकाएँ इस दौरान, ‘लाल साड़ी करे पुकार, हम नहीं सहेंगे अत्याचार’ का नारा लगाती रहीं।

सांसद सिंह ने उन्हें आश्वासन दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सहानुभूति आपके साथ है। लोकसभा का एक सत्र चलने वाला है। वो 17वीं लोकसभा के कार्यकाल में अध्यक्ष से अनुरोध करेंगे। अगर मौका मिलता है, तो मजबूती से उनकी माँग उठाएँगे। इस बारे में सरकार को पत्र लिखेंगे।

गले से क्रॉस निकाला, घर से निकाल दी बाइबिल, उठा ली हनुमान चालीसा… जौनपुर में 310 लोगों ने की घर-वापसी, शुद्धिकरण के लिए हुआ हवन

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में 10 साल पहले हिन्दू से ईसाई बनाए गए 36 परिवारों ने घर वापसी की है। इन सभी का वैदिक विधि-विधान से शुद्धिकरण हुआ। घर वापसी करने वाले कुल लोगों की संख्या 310 बताई जा रही है। इसमें मुस्लिम परम्परा को मानने वाले 5 अन्य परिवार के लोग भी शामिल हैं। सनातन में वापस आने वालों में महिलाएँ, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं। इन सभी ने माना कि उन्होंने किसी के बहकावे में आकर हिन्दू धर्म छोड़ दिए थे। सामूहिक घर वापसी का यह कार्यक्रम रविवार (5 नवम्बर, 2023) को सम्पन्न हुआ।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सामूहिक घर-वापसी का यह कार्यक्रम बरसठी थाना क्षेत्र के गाँव सरसरा में आयोजित हुआ था। कार्यक्रम का आयोजन ‘संत रविदास धर्म रक्षा समिति’ द्वारा किया गया। घर-वापसी करने वाले लोगों ने बताया कि लगभग 10 साल पहले उन्हें राजेंद्र चौहान नाम का पादरी मिला था। इस पादरी के प्रभाव में आ कर धीरे-धीरे गाँव और आसपास के 30 परिवार के 310 लोगों ने हिन्दू धर्म छोड़ कर ईसाइ मत अपना लिया था। इन परिवारों में अधिकतर अनुसूचित जाति (SC) वर्ग से थे।

घर-वापसी कार्यक्रम का आयोजन करने वाले लोगों में स्थानीय निवासियों के अलावा काशी के संत मौजूद थे। उन्होंने बताया कि ईसाई मत अपनाने के बावजूद इन सभी परिवारों का इनके मूल धर्म से जुड़ाव बना रहा। ये सभी दुर्गा पूजा में भी शामिल होते रहे। विश्व हिन्दू परिषद के सदस्यों ने सभी को गंगाजल और हनुमान चालीसा दे कर सनातन धर्म की विशेषताओं के बारे में बताया। आयोजकों और घर-वापसी करने वालों ने मिल कर सामूहिक हवन में भी हिस्सा लिया। इस दौरान सभी ने हिन्दू देवी-देवताओं के जयकारे लगाए।

कार्यक्रम के दौरान घर-वापसी करने वालों ने अपने गले से क्रॉस उतार कर और बाइबिल को घर से निकाल कर अपनी जाति के मुखिया को सौंप दिया। इसी बीच मुस्लिम मत को मानने वाले नट बिरादरी के 5 परिवारों ने सनातन धर्म में आस्था जताई। वो सब भी घर वापसी के लिए हो रहे यज्ञ में शामिल हुए और आगे से हिन्दू धर्म में संस्कारों के मुताबिक जीवन जीने का संकल्प लिया।

ट्रायल में लोगों के आकर्षण के केंद्र बन रही ‘वन्दे साधारण’ एक्सप्रेस, ट्रेन के साथ तस्वीरें ले रहे लोग: पुश-पुल तकनीक वाली इस रेलगाड़ी के बारे में जानिए सब कुछ

भारतीय रेलवे में जल्द ही शामिल होने वाली नई ट्रेन ‘वन्दे साधारण’ गुजरात के वड़ोदरा पहुँची है। रेलवे इस ट्रेन का ट्रायल कर रहा है। इसी संबंध में यह पहले चेन्नई की फैक्ट्री से मुंबई और अब मुंबई से सोलापुर आदि होते हुए वड़ोदरा पहुँची है।

इससे पहले इस वन्दे साधारण ट्रेन की कई नई फोटो भी सामने आ चुकी हैं। यह वन्दे साधारण ट्रेन अन्य ट्रेनों से कहीं अलग है। इसके नई तरह के डिजाइन और आकर्षक लुक के कारण इसे सोशल मीडिया पर भी काफी सराहा जा रहा है। जहाँ भी यह ट्रेन पहुँच रही है वहां लोग इसके फोटो वीडियो बना रहे हैं।

अभी वन्दे साधारण का ट्रायल रन किया जा रहा है, इस दौरान इसकी कमियों को परखा जाएगा। यदि सब कुछ सही रहा तो जल्द ही इस ट्रेन को यात्रियों को सेवा के लिए लाया जाएगा। कहा जा रहा है कि रेलवे इस वर्ष के अंत तक इस ट्रेन को आम जनता के लिए चालू कर देगा।

इस ट्रेन के लिए सोशल मीडिया पर भी माँग हो रही है। लोग अपने-अपने क्षेत्रों से वन्दे साधारण ट्रेनों को चलाने की माँग कर रहे हैं। गौरतलब है कि यह ट्रेन वन्दे भारत की तर्ज पर बनाई गई है लेकिन इसका किराया काफी कम होगा। इस ट्रेन को मुख्यतः उन रूट पर चलाया जाएगा जहाँ यात्री प्रीमियम ट्रेनों के साथ ही साधारण ट्रेनों की माँग कर रहे हैं।

इन ट्रेनों के आने से साधारण ट्रेनों में यात्रा करने वाले यात्रियों को काफी सुविधा होगी। ज्यादा साधारण डिब्बे लगे होने के कारण दिवाली, छठ और भाईदूज पर ट्रेनों के लिए होने वाली समस्याओं को भी कम किया जा सकेगा। हालाँकि, इस बार भी भारतीय रेलवे ने छठ और दिवाली पर घर जाने वालों के लिए 400 से अधिक विशेष ट्रेने चलाई हैं।

भारतीय रेलवे ने साधारण ट्रेनों में यात्रा करने वालों के लिए जुलाई में घोषणा की थी। बताया गया था कि इन ट्रेनों को ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस’ जैसा ही बनाया जाएगा। यह नॉन-AC ट्रेन होंगी और इनका किराया भी ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस’ से कम होगा। इन ट्रेनों को अभी ‘वन्दे साधारण’ ट्रेन कहा जा रहा है।

अब इन ट्रेनों के बारे में और जानकारी सामने आई है। सबसे पहली ट्रेन की कई तस्वीरें भी सामने आई हैं। बताया गया है कि इन ट्रेनों में कुल 22 डिब्बे होंगे। 22 में से 12 डिब्बे स्लीपर, 8 डिब्बे द्वितीय श्रेणी (बैठने वाले) और 2 डिब्बे लगेज रैक के होंगे।

इस ट्रेन में दोनों तरफ एक-एक इंजन लगाया जाएगा। ट्रेन को पुश-पुल तकनीक पर चलाया जाएगा ताकि यह ज्यादा रफ़्तार में चले। पुश-पुल के अंतर्गत आगे वाला इंजन गाड़ी को खींचता है जबकि पीछे लगा हुआ इंजन धक्का लगाता है। यह ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस’ से अलग तकनीक है। वन्दे भारत में इंजन के लिए अलग से कोई कोच नहीं होता बल्कि सभी डिब्बे ‘सेल्फ-प्रोपेल्ड’ (खुद से चलने वाले/स्वचालित) होते हैं।

इस ट्रेन के दोनों इंजन WAP-5 सीरीज के होंगे। यह इंजन भारतीय रेलवे की मध्यम दूरी की तेज चलने वाली गाड़ियों में लगाए जाते हैं। इस ट्रेन की अधिकतम रफ़्तार 130 किलोमीटर/घंटा होगी जबकि ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस’ 160 किलोमीटर/घंटा की रफ़्तार से चलने में सक्षम हैं।

इस ट्रेन का डिजाइन भी अभी चलने वाली अन्य ट्रेनों से अलग होगा। इन ट्रेनों को ‘वन्दे भारत’ की तरह ही अलग तरीके से डिजाइन किया जाएगा। अभी सामने आई तस्वीरों से पता चलता है कि पहली ‘वन्दे साधारण’ ट्रेन को भगवा और ग्रे रंग में रंगा गया है।

भगवा रंग का इस्तेमाल इससे पहले केरल के कासरगोड से तिरुवनंतपुरम के बीच चलने वाली ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस‘ में किया गया था। इसकी सोशल मीडिया पर लोगों ने काफी तारीफ़ की थी। इस ट्रेन का ट्रायल अक्टूबर माह के अंत तक शुरू हो जाने की आशा की जा रही है।

भारत में पहली ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस’ फरवरी 2019 में नई दिल्ली से श्री माता वैष्णो देवी कटरा के बीच चलाई गई थी। इसके पश्चात ट्रेन में और सुधार करके ‘वन्दे भारत 2.0’ लाई गई थी। अब तक 34 ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस’ चलाई जा चुकी हैं। अभी चलाई जाने वाली ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस’ में केवल चेयरकार (कुर्सीयान) ही होते हैं जबकि भविष्य में इसमें स्लीपर डिब्बे भी होंगे। रेलवे ने यह योजना बनाई है कि आने वाले समय में देश में 200 नई ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस’ चलाई जाएँ। इसके लिए निविदाएँ भी जारी कर दी गई हैं।

url: Vande Sadharan train spotted in vadodara to be launched soon

‘ये सनातन परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास’: अब हरिगढ़ के नाम से जाना जाएगा अलीगढ़! सर्वसम्मति से पारित हुआ नाम बदलने वाला प्रस्ताव

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले का नाम बदल कर हरिगढ़ करने की कवायद शुरू हो चुकी है। जिले के सभी पार्षदों ने इस बदलाव के लिए अपनी सहमति दे दी है। महापौर के माध्यम से अब यह प्रस्ताव शासन को अंतिम निर्णय के लिए भेजा जाएगा। अलीगढ़ के जनप्रतिनिधियों ने इसे सनातन परम्परा को आगे बढ़ाने का प्रयास बताया है। यह निर्णय सोमवार (6 नवम्बर, 2023) को लिया गया है।

अलीगढ़ के महापौर प्रशांत सिंघल ने ANI से इस बावत बात की है। उन्होंने बताया कि इस माँग को सोमवार को हुई मीटिंग में पार्षद संजय पंडित ने उठाया था। संजय ने इसका एक प्रस्ताव भी बैठक में पेश किया। अलीगढ़ को हरिगढ़ करने की माँग वाले इस प्रस्ताव को सभी पार्षदों ने सर्वसम्मति से स्वीकार भी कर लिया। महापौर के मुताबिक, अब इस प्रस्ताव पर शासन के अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा है। साथ ही उन्होंने सकारात्मकता से आशा जताई कि शासन इस माँग को स्वीकार कर के अलीगढ़ का नाम हरिगढ़ रखेगा।

अलीगढ़ के महापौर प्रशांत सिंघल ने आगे कहा, “हमारी पुरानी सभ्यता, संस्कृति और सनातन धर्म की परम्परा रही है उसको ही आगे बढ़ाते हुए हम सब जनप्रतिनधियों ने यह माँग उठाई है।” बताते चलें कि अगस्त माह 2023 में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की पुण्यतिथि के कार्यक्रम में शामिल हुए उत्तर प्रदेश के डिप्टी CM केशव प्रसद मौर्य ने भी अलीगढ़ को हरिगढ़ कह कर सम्बोधित किया था। तब उन्होंने लोगों से नारे लगवाने के दौरान कहा था, “आप दोनों हाथ उठाकर बोलिए जय श्री राम, अरे हरिगढ़ वालों और जोर से बोलिए जय श्री राम।”

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार इस से पहले भी कई महत्वपूर्ण स्थानों का नामकरण उनके प्राचीन वैदिक नामों से कर चुकी है। इसमें इलाहाबाद को प्रयागराज और फैज़ाबाद को अयोध्या का दिया गया नाम प्रमुख है। हिन्दू संगठन लम्बे समय से अलीगढ़ नाम नाम बदल कर हरिगढ़ करने की माँग उठाते रहे हैं।

‘किसी तरह रोको पराली जलाना, ये राजनीतिक मसला नहीं’: पंजाब सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने चेताया, केजरीवाल सरकार से पूछा – कब चालू होगा स्मॉग टॉवर?

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (7 नवंबर, 2023) को पराली जलाने को लेकर दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बिगड़ती जा रही हवा की गुणवत्ता के मद्देनजर इन सरकारों सख्त निर्देश दिए।

कोर्ट ने कहा कि इन राज्यों से कहा कि किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएँ। सर्वोच्च न्यायालय ने पराली जलाने को वायु प्रदूषण में अहम योगदान करने के तौर पर गिना है। जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस सुधांशु धूलिया की बेंच ने पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान राज्यों के बीच कल एक बैठक करने का निर्देश भी दिया ताकि पराली का जलाना तुरंत बंद हो।

इस दौरान पंजाब सरकार के कोर्ट में पराली जलाने की तुलना हरियाणा से करने पर से बेंच भड़क गई। पंजाब सरकार ने पराली जलाने के मामले में अपना बचाव करते हुए कहा था कि उनके यहाँ से ज्यादा पराली तो हरियाणा में जलाई जा रही है।

इससे नाराज होकर कोर्ट ने कहा आप राजनीतिक बात कर रहें हैं, जबकि ये राजनीतिक मसला है ही नहीं। जस्टिस ने संजय किशन कौल ने पंजाब सरकार को आड़े हाथों लेते हुए आईना दिखाते हुए कहा कि वो बीते दिनों पंजाब से गुजर रहे थे और उन्होंने सड़क के दोनों तरफ पराली जलती हुई खुद देखी है।

जस्टिस कौल ने कहा कि इसे रोकने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे। उन्होंने पंजाब सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि इसे नजरअंदाज करना पंजाब सरकार को महँगा पड़ सकता है। कोर्ट ने ये भी कहा कि पराली को जलाने से रोकने के लिए हम कल तक का भी कतई इंतजार नहीं कर सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “दिल्ली साल-दर-साल गंभीर वायु प्रदूषण से नहीं जूझ सकती। समाधान क्या है? जो दिल्ली को इससे न गुजरना पड़ेगा।” कोर्ट ने आगे कहा कि दिल्ली और पंजाब दोनों में AAP की सरकार है। पराली जलाने के मामले में राजनीतिक दोष और तुलना करने से फायदा नहीं होगा।

कोर्ट ने पंजाब सरकार से कहा कि इसे रोकना आपका काम है, हम ये नहीं जानते की ये कैसे होगा, लेकिन इस पर रोक लगनी ही चाहिए। इसके लिए आपको तत्काल और प्रभावी कदम उठाने होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक की पूरी निगरानी में स्थानीय राज्य गृह अधिकारी को पराली जलाने से रोकने की जिम्मेदारी दी। कोर्ट ने दिल्ली में स्मॉग टॉवर के बंद होने को लेकर खासी नाराजगी जाहिर की।

कोर्ट ने दिल्ली सरकार से सवाल करते हुए कहा कि स्मॉग टॉवर कब काम करेंगे। हम ये नहीं जानते सरकार कैसे इन्हें शुरू करेगी। इन्हें तुरंत शुरू होना चहिए। कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा कि वो पक्का करें कि खुले में कूड़ा न जले। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और पंजाब से धान की वैकल्पिक फसल तलाशने को कहा।

इसके साथ ही कोर्ट ने दिवाली पर पटाखे जलाने को लेकर भी निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा पर्यावरण को प्रदूषित कर त्योहार नहीं मनाया जा सकता है। अगर आप ऐसा करते हैं तो आप स्वार्थी हैं। कोर्ट ने कहा कि आजकल बच्चों की तुलना में बड़े अधिक पटाखे जला रहे हैं। कोर्ट ने माना कि पटाखे जलाने पर तब-तक पूरी रोक नहीं लग सकती जब-तक की लोग खुद इसके लिए जागरूक न हो। कोर्ट ने ये भी कहा कि राज्य सरकारों को विज्ञापन के जरिए लोगों को पटाखे न जलाने को लेकर जागरूक करना चाहिए।