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जफरुल इस्लाम ने कतर में पूर्व भारतीय नौसैनिकों को मौत की सजा पर दिखाई घृणा, अरबी मुस्लिमों का भी धौंस दिखा चुके हैं दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व चेयरमैन और इस्लामी लेखक ज़फरुल इस्लाम ने भारत के पूर्व नौसैनिकों को कतर द्वारा दी गई फाँसी की सजा को सही ठहराया है। उन्होंने कहा कि इजरायल के लिए जासूसी की गई है तो कतर में मौत की सजा पाए पूर्व भारतीय नौसैनिकों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं होनी चाहिए।

जफरुल ने यह भी कहा कि भारत को क़तर में अपने नौसैनिकों का बचाव करने की बजाय इस मामले की जाँच करनी चाहिए। इस तरह एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर किए उनके ट्वीट से भारतीय नौसैनिकों के प्रति घृणा झलकता है। ज़फरुल को 2017 में अरविन्द केजरीवाल की सरकार ने दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग का चेयरमैन बनाया था।

गौरतलब है कि हाल ही में क़तर में 8 पूर्व भारतीय नौसैनिकों को मौत की सजा सुनाई गई है। इनके ऊपर क़तर द्वारा लगाए गए आरोपों की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन कहा जा रहा है कि यह सजा उन्हें इजरायल के लिए जासूसी करने के आरोप में दी गई है। इस केस के बारे कुछ भी जानकारी क़तर ने नहीं दी है और ना ही कोई सबूत पेश किए हैं।

यह सब होने के बाद भी ज़फरुल इस्लाम ने मान लिया कि भारतीय नौसैनिकों ने इजरायल के लिए जासूसी की है। उन्होंने इन नौसैनिकों के परिवारों के प्रति संवेदनहीनता दिखाते हुए उनके प्रति कोई सहानुभूति ना होने का भी ऐलान कर दिया। देखा जाए तो जफरुल इस्लाम ने क़तर की भाषा बोली है।

ज़फरुल के ट्वीट में यह भी बात ध्यान देने वाली बात है कि वह कह रहे हैं अगर इजरायल के लिए जासूसी की है तो कोई सहानुभूति नहीं होनी चाहिए। ज़फरुल ने यहाँ पर भारत और उसके नौसैनिकों के विरुद्ध अपनी घृणा तो जाहिर की ही, साथ ही इजरायल के प्रति भी अपनी घृणा को दर्शाया है। उन्होंने भारत सरकार से इन नौसैनिकों को सहायता देने के स्थान पर मामले की जाँच करने को कह दिया, जबकि भारत सरकार पहले ही कह चुकी है कि इन नौसैनिकों पर लगाए गए आरोपों में दम नहीं है।

हालाँकि, यह पहली बार नहीं है, जब ज़फरुल ने भारत के बजाय अरब देशों का समर्थन किया हो। ज़फरुल ने इससे पहले वर्ष 2020 में फेसबुक पर एक पोस्ट करके भारतीय मुस्लिमों का साथ देने के लिए कुवैत का धन्यवाद दिया था।

ज़फरुल ने इस पोस्ट में भारतीय हिन्दुओं को ‘धर्मान्ध हिंदुत्व’ वाला बताया था। ज़फरुल ने कहा था कि इन हिन्दुओं ने भारत में मुस्लिमों पर अत्याचार होने की दशा में अरब देशों से आने वाली प्रतिक्रिया का आकलन नहीं किया था।

इसी पोस्ट में उन्होंने इस्लामी जेहादी जाकिर नाइक की तक प्रशंसा की और हिन्दुओं को धमकाया भी। उन्होंने हिन्दुओं को याद दिलाया कि भारतीय मुस्लिमों ने अभी अरबों से भारत में मुस्लिमों से हो रहे अत्याचार की शिकायत नहीं की है। उन्होंने कहा कि जिस दिन यह होगा उस दिन हिंदुत्व के धर्मांध हिमपात का अनुभव करेंगे।

इस मामले में दिल्ली पुलिस ने उन पर कथित तौर पर मामला भी दर्ज किया था। ज़फरुल ने इस मामले में बाद में माफ़ी माँग ली थी और कहा था कि उनका बयान ‘आउट ऑफ़ प्रपोर्शन’ था। अप्रैल 2022 में भी ज़फरुल ने मध्य प्रदेश के खरगौन में रामनवमी के दौरान हिन्दुओं पर हुए हमले को भी झुठलाने की कोशिश की थी।

49 बार दुबई से लॉगिन, 50 बार अडानी के खिलाफ सवाल: IT मंत्रालय ने संसद की एथिक्स कमिटी को बताया, महुआ मोइत्रा बोलीं – पूछताछ से पहले पढ़ लीजिए मेरी चिट्ठी

तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा की संसद की लॉगिन आईडी का इस्तेमाल दुबई से कम से कम 49 बार हुआ है। केन्द्रीय सूचना एवं प्रौद्यिगिकी मंत्रालय (IT Ministry) ने यह जानकारी महुआ मोइत्रा पर पैसे लेकर संसद में प्रश्न पूछने के आरोपों की जाँच कर रही संसदीय आचार समिति को दी है। यह खुलासा अंग्रेजी समाचार चैनल ‘टाइम्स नाउ’ ने किया है।

महुआ मोइत्रा पर आरोप हैं कि उन्होंने दुबई में रहने वाले कारोबारी दर्शन हीरानंदानी से महँगे गिफ्ट और पैसे लेकर संसद में अडानी समूह के विरुद्ध प्रश्न पूछे। उन पर यह भी आरोप है कि प्रश्न पूछने के लिए उन्होंने अपने लॉगिन आईडी और पासवर्ड दर्शन हीरानंदानी के साथ साझा किए। दर्शन ने उनका उपयोग दुबई में बैठ कर महुआ के माध्यम से संसद में प्रश्न उठाने के लिए किया।

गौरतलब है कि भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक पत्र लिख कर बताया था कि महुआ मोइत्रा ने पैसे लेकर संसद में अडानी समूह को निशाना बनाने के लिए प्रश्न पूछती हैं। उन्होंने इन आरोपों की जाँच की माँग की थी। निशिकांत ने बताया था कि उन्हें यह जानकारी सुप्रीम कोर्ट में वकील जय अनंत देहाद्राई ने दी है जो कि महुआ के ‘पूर्व प्रेमी’ हैं। उन्होंने दुबई से प्रश्न पूछे जाने को सुरक्षा खतरा बताया था।

सांसद निशिकांत दुबे ने इस मामले में देश के केन्द्रीय रेल और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव को भी पत्र लिखा था और जाँच की माँग की थी। मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उनके इस पत्र का जवाब देते हुए उनसे कहा था कि NIC (संसद के पोर्टल का रखरखाव करने वाली सरकारी एजेंसी) इस बात का पता लगाएगी।

संसद की आचार समिति ने भी सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से इस मामले में जानकारी माँगी थी। अब उसने आचार समिति को सूचित किया है कि महुआ मोइत्रा के संसद के आईडी से दुबई में बैठ कर कम से कम 49 बार लॉगिन किया गया। गौरतलब है कि लॉगिन की यह संख्या उनके द्वारा संसद में अडानी समूह पर पूछे गए प्रश्नों की संख्या से मेल खाती है। निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया था कि महुआ मोइत्रा द्वारा हाल ही में पूछे गए 61 प्रश्नों में से 50 प्रश्न अडानी समूह से जुड़े हुए थे। दुबई से लॉगिन 49 बार हुआ है।

दर्शन हीरानंदानी ने स्वयं एक पत्र जारी करके कहा था कि महुआ मोइत्रा उनसे महँगे गिफ्ट की माँग करती थीं। दर्शन ने यह भी बताया था कि उनके पास महुआ के संसद पोर्टल की लॉगिन आईडी और पासवर्ड थे जिसका इस्तेमाल उन्होंने अडानी समूह के विरुद्ध प्रश्न पूछने में किया।

महुआ मोइत्रा ने एक अंग्रेजी समाचार टीवी चैनल से बात करते हुए स्वीकार किया था कि उन्होंने अपनी संसद की लॉगिन आईडी दर्शन हीरानंदानी को दी। महुआ ने बताया था कि दर्शन के कर्मचारी सवालों को टाइप करके उनसे पढ़ने को कहते थे और वह आनन-फानन में उसे पढ़ कर अपने फ़ोन पर आई OTP दे देती थीं जो कि सवाल पूछने के लिए आवश्यक थी।

सांसद निशिकांत दुबे के आरोपों के बाद संसद की आचार समिति ने उन्हें और वकील जय अनंत देहाद्राई को 26 अक्टूबर, 2023 को बुलाया था। इसमें उन्होंने मौखिक सबूत समिति के सामने पेश किए थे। समिति ने महुआ को भी 31 अक्टूबर, 2023 को पेश होने को कहा था। हालाँकि, महुआ ने 5 नवम्बर से पहले पेश होने से मना कर दिया था। इसके पश्चात आचार समिति ने उन्हें 2 नवम्बर को पेश होने को कहा था।

वहीं महुआ मोइत्रा ने अब 2 नवम्बर को आचार समिति के समक्ष पेश होने से पहले माँग कर दी है कि उन्हें दर्शन हीरानंदानी से पूछताछ करने का मौका दिया जाए। उन्होंने वकील देहाद्राई से पूछताछ करने की माँग भी आचार समिति के सामने रखी है।

इस बात पर उन्होंने आचार समिति को एक पत्र लिखा है और उसे ‘X’ (पहले ट्विटर) पर भी साझा किया है। महुआ ने यह भी माँग की है दर्शन से यह पूछा जाए कि उन्होंने कब और कितने का गिफ्ट महुआ को दिया और इसकी एक लिस्ट बनाई जाए।

महुआ मोइत्रा के पूर्व ‘सिगार-साथी’ का नया खुलासा: कुत्ते की चोरी, भ्रष्टाचार और देश को धोखा देने से भी भयंकर अपराध – कौन है वो, क्या किया?

सुप्रीम कोर्ट के वकील जय अनंत देहाद्राई ने एक ट्वीट किया है। इनका ट्वीट कोडवर्ड टाइप वाली भाषा में है। पढ़ सकते हैं लेकिन समझने के लिए डिकोड करना पड़ेगा। ट्वीट में उन्होंने भ्रष्टाचार, राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ मतलब देशद्रोह से भी बड़ा दोषी किसी को बताया है – वो भी बिना नाम लिए। जासूसी कहानियों के माफिक बस एक क्लू दिया है जय अनंत ने कि अपने कुत्ते की चोरी के बारे में बात नहीं कर रहे।

जय अनंत देहाद्राई का इशारा आखिर किसकी ओर है? और जिस शख्स की बात वो कर रहे हैं, उस शख्स ने आखिर गुनाह क्या किया है? ऑपइंडिया ने जय अनंत से बात कर जानने की कोशिश की लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। पिछले कुछ दिनों से इनके ट्वीट और आरोपों को देखते हुए कयास लेकिन लगाया जा सकता है कि आखिर राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ से भी बड़ा अपराध और क्या हो सकता है एक टूटे दिल वाले आशिक के लिए!

कयास #1: ‘दिलजले’ चाहे जय अनंत हों या फिल्मी रोल वाले अजय देवगन, कुत्ता-प्रेम से पहले आता है अपने धर्म का मान-सम्मान। ऐसे कोडेड मैसेज लिखने के पीछे का कारण क्या हो सकता है? क्या उनके धर्म के ऊपर किसी ने चोट किया? क्या उनके धर्म को किसी ने नीचा दिखाया?

गुनाह है यह (साभार: सरफरोश)

कयास #2: फोटो देख कर लगता है कि जय अनंत देहाद्राई बहुत बड़े कुत्ता-प्रेमी हैं। कुत्ता चोरी से भी भयंकर अपराध की ओर अगर उन्होंने इशारा किया है तो कहीं यह बेजुबान के साथ सेक्सुअल अब्यूज (साफ शब्दों में कुत्ते का यौन शोषण) का मामला तो नहीं? इस कयास पर बल इसलिए भी क्योंकि कुछ गंदी फिल्मों में बेचारे बेजुबानों के साथ बहुत ही गंदे-गंदे काम करते दिखाया जाता है।

कयास #3: मोबाइल और सोशल मीडिया के दौर में प्राइवेसी को लेकर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। Apple (iPhone/Mac/) हैक वाला मामला अभी गरमाया भी हुआ है। ऐसे में उनका क्या जिनके पासवर्ड ही उनके साथी, प्रेमी-प्रेमिका के पास हो? क्या जय के सारे मेल/सोशल मीडिया/मोबाइल/लैपटॉप आदि के पासवर्ड किसी के पास है और वो उनके सारे राज जानता है, ब्लैकमेल कर रहा/रही है?

गर्लफ्रेंड से मोबाइल पासवर्ड शेयरिंग मीम (साभार: pinterest)

कयास #4: जय अनंत देहाद्राई चूँकि सुप्रीम कोर्ट के वकील हैं, ऐसे में इस कयास में भी बल है कि शायद उनका इशारा न्यायपालिका के भ्रष्टाचार से जुड़ा हो। जैसे लोकसभा में पैसे लेकर सवाल वाला आरोप उन्होंने लगाया था, शायद उनका अगला ट्वीट जज साहेबान लोगों पर टारगेट वाला हो।

कयास #5: कथित महिला-क्रांति और महिला सशक्तीकरण की आड़ में मर्दों के साथ जो जुल्म हो रहे हैं, क्या वही जय अनंत देहाद्राई के साथ भी हुआ? क्या जय ने जिस शख्स की ओर इशारा किया है, वो उनकी मर्दाना ताकत को लेकर तंज कसा? मर्दों को प्रताड़ित करना भी एक रोग है, इससे पूरा विश्व परेशान है… शायद जय भी इनमें से एक हों और वो इसे ही देश को धोखा देने से भी भयंकर अपराध मान रहे हों।

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के वकील जय अनंत देहाद्राई ने TMC सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ उनका कुत्ता चुराने का आरोप लगाया था। इस आरोप के साथ जय ने यह भी कहा था कि संसद में वो पैसे लेकर सवाल करती हैं।

जय के अगले ट्वीट की प्रतीक्षा में!

चंडीगढ़ में स्कूल जाने के लिए के घर से निकला ‘विवेक’, 8 साल बाद मुजफ्फरनगर में मिला: मदरसे में ‘उमर’ बनाया, खतना भी कराया

विवेक करीब आठ साल का था। चंडीगढ़ में रहता था। एक दिन घर से स्कूल के लिए निकला और वापस नहीं लौटा। अब आठ साल बाद वह उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से मिला है। उसका नाम ‘मोहम्मद उमर’ रख दिया गया था।

विवेक को अब उसके परिवार को सौंप दिया गया है। मामले में चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। इनमें एक मौलवी, एक मौलाना, एक ग्राम प्रधान भी शामिल है। इस संबंध में FIR 14 अक्टूबर 2023 को दर्ज हुई थी। बताया जाता है कि आरोपितों में से एक को जमानत मिल चुकी है, जबकि तीन अभी भी फरार हैं।

चंडीगढ़ से लाए जाने के बाद विवेक का धर्मांतरण सहारनपुर जिले के एक मदरसे मे हुआ था। यहीं उसका नाम विवेक से बदल कर मोहम्मद उमर रखा गया था। उसका खतना भी कराया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला मुजफ्फरनगर के चरथावल थाना क्षेत्र का है। मूलतः हरदोई जिले के वीरेंद्र चंडीगढ़ में मजदूरी कर परिवार पालते थे। एक दिन उनका बेटा विवेक चंडीगढ़ के रायपुर कला से लापता हो गया। 17 मार्च 2016 को उन्होंने चंडीगढ़ के मौलीजागरा थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई। तब उनका बेटा कक्षा 4 का छात्र था। पुलिस उनके बेटे का पता लगाने में नाकाम रही।

4 अक्टूबर 2023 को मुजफ्फरनगर के एक आधार कार्ड सेंटर पर मतलूब नाम का व्यक्ति पहुँचा। उसने मोहम्मद उमर को अपना बेटा बताते हुए आधार कार्ड में पता बदलने को कहा। सेंटर चलाने वाले ने आधार कार्ड पर नाम विवेक, पिता का नाम वीरेंद्र कुमार और पता चंडीगढ़ देखा। शक होने पर उसने इसकी जानकारी लुहारी खुर्द गाँव के प्रधान जैकी सैनी को दी।

ग्राम प्रधान जैकी सैनी के मामले की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने विवेक को कस्टडी में लिया और उसके परिजनों को बुलवाया। तब विवेक के धर्म परिवर्तन सहित उसे मदरसे आदि में रखने के मामले का खुलासा हुआ। पूछताछ में पता चला कि विवेक का धर्मान्तरण सहारनपुर जिले के रामपुर मनिहारान में पड़ने वाले जामिया उस्मानिया रहमानिया नाम के मदरसे में वहाँ के मौलवी की मौजूदगी में हुआ था। इस मामले में मुजफ्फरनगर के गाँव नगलाराई के प्रधान अफसरूल को भी नामजद किया गया है।

मुजफ्फरनगर के पत्रकार समर ठाकुर के मुताबिक मदरसे का मौलवी और गाँव के प्रधान आपस में रिश्तेदार हैं। वहीं से उमर बने विवेक को मुजफ्फरनगर भेज दिया गया। पुलिस को दी गई शिकायत में आरोप है कि चंडीगढ़ से युवक को मतलूब नाम का व्यक्ति ही लेकर आया था। धर्मान्तरण के इस मामले में चौथे आरोपित के तौर पर मौलाना मुकर्रम जमाल को नामजद किया गया है। वीरेंद्र की इस तहरीर पर पुलिस ने चारों आरोपितों के खिलाफ IPC की धारा 420 के तहत उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के तहत FIR दर्ज कर ली है।

ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। विवेक को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है। हालाँकि उससे पहले ही इस रैकेट का भंडा फूट गया। मतलूब को जमानत मिल चुकी है। ग्राम प्रधान अफसरूल और जामिया उस्मानिया इस्लामिया मदरसे का मौलवी और अब मौलाना मुकर्रम जमाल फरार बताए जा रहे हैं।

ऑपइंडिया ने इस मामले में विवेक से बात की। विवेक के मुताबिक उन्हें याद नहीं है कि चंडीगढ़ से उन्हें कौन और कैसे लाया था। विवेक को अपने साथ सहारनपुर के बाद की घटनाएँ याद थीं। विवेक ने हमें बताया कि अब वह भैंसे का गोश्त खाते हैं। हमें बताया गया कि उसके निकाह के लिए लड़की भी देखी जा रही थी।

राजस्थान के सरकारी स्कूल में छात्रों का तिलक पोछा, कलावा तोड़ा, पढ़ाई ‘अल्लामा इकबाल की नज्म’: विरोध के बाद ‘सर्वधर्म’ प्रार्थना

राजस्थान के सीकर जिले में एक सरकारी स्कूल के अंदर प्रार्थना के बदले अल्लामा इकबाल की नज़्म पढ़ाने का मामला सामने आया है। स्कूल का नाम ‘हाई सेकेंड्री स्कूल खंडेला’ है। यहाँ के छात्रों को ‘लब पे आती है दुआ’ नज़्म पढ़ाए जाने पर उनके अभिभावकों ने विरोध दर्ज करवाया है। हिन्दू संगठनों ने स्कूल के अंदर सनातन मान्यताओं के अपमान का आरोप लगाया है। छात्रों को विरोध करने या किसी को इस संबंध में बताने पर नाम काटने की धमकी दी गई थी। स्थानीय प्रशासन पर भी विरोध करने वाले हिन्दू संगठन के सदस्यों पर कार्रवाई का आरोप है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला सीकर के खंडेला का है। यहाँ के हायर सेकेंड्री स्कूल में लगभग 80% छात्र हिन्दू समुदाय के हैं। कक्षा 11 के एक छात्र के अनुसार पिछले 1 माह से स्कूल में सर्वधर्म प्रार्थना के बजाय ‘लब पे आती है दुआ’ की नज़्म पढ़ाई जा रही थी। इस दौरान छात्रों को नमाज़ की मुद्रा में हाथ भी जोड़ने के लिए कहा जाता था। ऐसे करने के लिए बाध्य करने वालों में अब तक टीचर प्यारेलाल मीणा और संविदा पर काम कर रहे एक मुस्लिम अध्यापक का नाम सामने आया है। छात्रों ने इसकी जानकारी अपने परिजनों को दी तो उन्होंने सोमवार (23 अक्टूबर 2023) को स्कूल पहुँच कर विरोध जताया।

झलको सीकर नाम के यूट्यूब चैनल की पत्रकार ने इस मामले पर ग्राउंड रिपोर्ट की है। आरोप है कि अभिभावकों की शिकायत का विद्यालय प्रशासन पर कोई फर्क नहीं पड़ा। स्कूल में अल्लामा इक़बाल की नज़्म ज्यों की त्यों जारी रही। यहाँ तक कि अपने घर शिकायत करने वाले हिन्दू छात्रों को ही प्रताड़ित किया जाने लगा। आरोपित टीचरों द्वारा कुछ छात्रों के तिलक पोछे गए जबकि रामस्वरूप नाम के टीचर द्वारा एक छात्र को कलावा उतार कर स्कूल आने के लिए कहा गया। कुछ छात्रों का आरोप है कि जब सर्वधर्म की प्रार्थना हुआ करती थी तब भी मुस्लिम छात्र अपने हाथ दुआ के अंदाज़ में जोड़े रहते थे।

जब इस मामले की जानकारी हिन्दू संगठनों को हुई तो उन्होंने शुक्रवार (27 अक्टूबर 2023) को स्कूल के बाहर धरना दिया। इस धरने को खंडेला के व्यापारी वर्ग का भी समर्थन मिला। हिन्दू संगठन के सदस्यों का आरोप है कि विरोध के बाद उनके कुछ साथियों का पुलिस ने शांति भंग की धाराओं में चालान करवा दिया था। साथ ही सोशल मीडिया पर मुस्लिम समुदाय के लोगों की तरफ से गंदे-गंदे कमेंट भी किए गए। धरने में छात्रों के साथ उनके माता-पिता भी शामिल हुए। सभी ने आरोपित टीचरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग उठाई।

प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत कर के मामले के समाधान का प्रयास किया। फ़िलहाल स्कूल में नज़्म बंद करवा दी गई है और सर्वधर्म की प्रार्थना करवाई जा रही है। कुछ अभिभावकों ने कहा कि ये सब कुछ खंडेला के एक मुस्लिम वकील सदाऊ के कहने पर हुआ है। उन्होंने बताया कि वकील सदाऊ ही सभी टीचरों को दबाव में लिया है। स्कूल के अंदर कुल लगभग 40 टीचर है।

पुलिस बता रही राजनैतिक मामला

झलको सीकर की पत्रकार से बात करते हुए खंडेला के थाना प्रभारी ने इस मामले को राजनैतिक सोच से प्रेरित बताया है। उनका कहना है कि विवाद की जड़ में सोशल मीडिया पर एक धर्म के खिलाफ डाली गई पोस्ट है जिसमें उन्होंने कुछ आरोपितों को हिरासत में लिया था।

SHO के मुताबिक उसी मामले को तूल देने के लिए हंगामे को खड़ा किया गया है। बकौल थाना प्रभारी अगर स्कूल के अंदर कोई दिक्क्त है भी तो उसकी शिकायत शिक्षा विभाग के अधिकारियों से होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि जब पुलिस ने आपत्तिजनक डालने वालों पर उचित एक्शन ले ही लिया है तो विवाद को तूल देने की जरूरत ही क्या है।

ऑपइंडिया से बात करते हुए बजरंग दल सीकर के पदाधिकारी सुनील कटारिया ने बताया कि फिलहाल स्कूल में नज़्म बंद कर दी गई है। साथ ही उन्होंने बताया कि आरोपित टीचरों के खिलाफ जाँच करवाई जा रही है।

पत्नी बन गई ईसाई, घरेलू हिंसा बता माँग रही थी मुआवजा: हाई कोर्ट ने कहा- धर्मांतरण करते ही विवाह समाप्त, नहीं मिलेगा कोई पैसा

कर्नाटक हाई कोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि धर्मांतरण करते ही विवाह स्वत: समाप्त हो जाता है, भले तलाक हुआ हो या नहीं। साथ ही शादी के बाद धर्मांतरण करने वाली महिला की मुआवजे की याचिका ठुकरा दी है। कोर्ट ने कहा कि घरेलू हिंसा प्रमाणित होने पर ही मुआवजा दिया जा सकता है।

महिला अदालत में घरेलू हिंसा साबित करने में असफल रही। इसके बाद हाई कोर्ट ने सत्र न्यायालय के उस फैसले को भी रद्द कर दिया, जिसमें महिला को जीवनयापन के लिए 4 लाख रुपए देने का आदेश दिया गया था। हालाँकि, निचली अदालत ने भी महिला के घरेलू हिंसा के आरोपों को मानने से इनकार किया था। मुआवजा इस आधार पर देने का आदेश दिया था कि महिला अपना जीवनयापन करने में असमर्थ है।

रिपोर्ट के अनुसार कर्नाटक हाई कोर्ट ने कहा, “घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा अधिनियम, 2005 की धारा 22 के अंतर्गत मुआवजा तभी दिया जा सकता है, जब घरेलू हिंसा साबित हो। इस मामले में महिला ने ईसाई धर्मांतरण कर इससे संबंधित सभी अधिकार खो दिए हैं। ऐसी स्थिति में निचली अदालत ने ₹4 लाख का मुआवजा देकर गलती की है। यह न्यायिक विफलता है।”

कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि महिला ने ईसाई बनने की बात स्वीकार की है। लिहाजा उसका विवाह स्वतः ही समाप्त हो जाता है, भले ही उसके अपने पति से उसका तलाक ना हुआ हो। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि इस संबंध में किसी कोर्ट का कोई स्पष्ट आदेश नहीं है। लेकिन यह एक तथ्य है कि महिला धर्मांतरण कर ईसाई बन चुकी है।

महिला के पति ने कोर्ट को बताया कि उसकी पत्नी द्वारा लगाए गए घरेलू हिंसा के आरोप झूठे हैं और उसने स्वयं ही उसका साथ छोड़ दिया था। उसकी पत्नी की लापरवाही की वजह से अपने दूसरे बच्चे की मौत की जानकारी भी दी। कोर्ट को यह भी बताया कि ईसाई बनने के बाद उसकी पत्नी ने बेटी के धर्मांतरण की भी कोशिश की थी। पति ने कोर्ट को यह भी बताया कि लकवा मारने के कारण वह स्वयं की देखभाल करने में भी सक्षम नहीं है।

‘जुमे पर होगी स्कूलों की छुट्टी, दफ्तरों का भी ऑफ होगा”: मणिपुर में ऐसा ऐलान करने वाले छात्र संगठन पर FIR, बदल रहे थे सरकारी संगठनों के नाम

मणिपुर पुलिस ने अवैध रूप से शुक्रवार के दिन को छुट्टी घोषित करने के आरोप में एक छात्र संगठन के विरुद्ध FIR दर्ज की है। मणिपुर के ज्वाइंट स्टूडेंट्स बॉडी नाम के छात्र संगठन ने 26 अक्टूबर 2023 को कहा था कि अब प्रदेश में छुट्टी शुक्रवार को हुआ करेगी।

मणिपुर के चुराचांदपुर जनपद से संबंध रखने वाले इस छात्र संगठन ने इस संबंध में 26 अक्टूबर को एक पत्र प्रसारित किया था। इस पत्र में कहा गया था छात्र संगठनों ने यह निर्णय लिया है कि मणिपुर के सभी राजकीय दफ्तरों और स्कूलों में छुट्टी शुक्रवार को होगी।

इस पत्र में मात्र शिक्षण संस्थाओं में ही नहीं बल्कि सभी जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, मंडलीय शिक्षा अधिकारी और एडिशनल डिप्टी कमिश्नर दफ्तर में भी शुक्रवार को छुट्टी मनाने की बात की गई थी। साथ ही इस पत्र में सरकारी संस्थाओं के नाम भी बदले गए थे।

इस पत्र के सामने आने के बाद राज्य के मुख्य सचिव विनीत जोशी ने कहा था कि यह कृत्य पूर्णतया अवैध है और मणिपुर में सामुदायिक सौहार्द बिगाड़ सकता है। उन्होंने इस संगठन द्वारा संस्थाओं के नाम बदलने के प्रयास पर भी चिंता जताई थी।

अब इस मामले में मणिपुर पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। मणिपुर पुलिस ने इस मामले में सरकारी कामकाज में बाधा पहुँचाने और सरकारी कर्मचारियों को नुकसान पहुँचाने समेत अन्य धाराओं में FIR दर्ज की है।

वहीं दूसरी तरफ मणिपुर में मई माह से चालू हुई हिंसा के कुछ दिनों तक शांत रहने के बाद अब दोबारा हिंसक प्रवृत्तियाँ सामने आई हैं। 31 अक्टूबर 2023 को भारत-म्यांमार अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट मोरेह में एक पुलिस अफसर की गोली मार कर हत्या कर दी गई

मारे जाने वाले अफसर का नाम चिन्गथम आनंद कुमार बताया गया है। वह इस इलाके में स्कूलों के मैदान की साफसफाई का काम देख रहे थे जब कूकी आतंकियों ने उन पर फायरिंग कर दी, जिसमें उनकी मौत हो गई।

मणिपुर की सरकार ने मृतक के परिजनों को ₹50 लाख मुआवजा और एक आश्रित को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया है। इस हमले में दो अन्य पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।

मणिपुर के चुनिंदा वीडियो यूँ ही नहीं किए गए वायरल, असम राइफल्स के DG ने बताई वजह: गायब हथियार सबसे बड़ी टेंशन

देश के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में एक अदालती फैसले के बाद भड़की हिंसा को करीब 6 महीने हो चुके हैं। इस दौरान मैतेई और कुकी समुदाय के बीच कई खौफनाक झड़पें देखने को मिली है। हिंसा से निपटने में असम राइफल्स (Assam Rifles) सबसे आगे रही है।

असम राइफल्स के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल पीसी नायर ने राज्य के मौजूदा हालात को लेकर जानकारी दी है। यह भी बताया है कि चुनिंदा और भड़काऊ वीडियो हिंसा को और बढ़ाने के इरादे से लीक किए गए थे। साथ ही बताया है कि गायब हथियार सबसे बड़ी समस्या हैं, क्योंकि इनके गलत हाथों में पड़ने का डर है।

द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में लेफ्टिनेंट जनरल पीसी नायर ने असम राइफल्स पर लगे पूर्वाग्रह के आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। कहा कि मणिपुर में हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि लंबे वक्त से राज्य में इस तरह के हालात नहीं देखे गए थे। इससे पहले 90 के दशक में नगा और कुकी समुदायों के बीच झड़पें हुई थीं। लेकिन इस तरह की हिंसा का स्तर हैरान कर देने वाला है।

उन्होंने कहा, “मैं सोचता हूँ कि हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती मैतेई और कुकी लोगों के हाथ में पड़ गए हथियारों का बड़ा जखीरा है। इसने हालात को विस्फोटक बना दिया है। जब तक ये हथियार वापस नहीं आ जाते ये हमारे लिए मणिपुर में सबसे बड़ी चुनौती है।” उन्होंने इन हथियारों के गलत हाथों में पड़ जाने को लेकर फिक्र जताई है। उन्होंने कहा, “विभिन्न पुलिस स्टेशनों से गायब हुए हथियारों की संख्या 5000 के करीब है। इनमें से लगभग 1600 हथियार बरामद कर लिए गए हैं। यह एक अच्छी बात है। लेकिन सभी गायब हथियारों की बरामदगी में हमें वक्त लगेगा।”

गौरतलब है कि मणिपुर में मई 2023 में भड़की हिंसा के दौरान पुलिस शस्त्रागारों से लूटे हुए 5600 हथियारों में से राज्य सरकार केवल एक चौथाई ही बरामद कर पाई है। इस दौरान लगभग 6.5 लाख रुपए का गोली-बारूद भी गायब हो गया। इनमें 5 फीसदी से भी कम बरामद किया जा सका है।

लेफ्टिनेंट जनरल नायर ने कहा, “मुझे लगता है कि इसे पहले जैसी स्थिति में वापस आने में कुछ वक्त लगेगा। ऐसे समय के दौरान चुनिंदा और भड़काऊ वीडियो उकसाने के इरादे से वायरल की जाती है। ऐसा निजी एजेंडे के तहत किया जाता है। इस तरह की चीजों से लोगों को बचाना जरूरी है।””

डीजी नायर ने आगे कहा कि मणिपुर में हालात धीरे-धीरे सामान्य होने की तरफ लौट रहे हैं। हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि दोनों समुदायों के बीच एक-दूसरे के प्रति हिंसा की भावनाएँ हैं। उन्होंने यह बताया कि अब सभी सुरक्षाबलों के बीच सहयोग है, लेकिन शुरुआती दिन उथल-पुथल भरे थे।

लेफ्टिनेंट जनरल पीसी नायर ने कहा कि लोगों को ये एहसास होना चाहिए कि शांति की आगे की राह के लिए उन्हें बात करनी होगी। उन्हें समझौते की तरफ बढ़ना होगा। मीडिया में सबने देखा होगा की कैसे हमारी सैन्य दल की रसद रोकी गई। कैसे सड़कों पर अवरोध पैदा किया गया। कई बार सैनिकों की आवाजाही में बाधा पड़ी है। पहले इस स्तर पर जाकर ये सब नहीं हुआ था।

इस दौरान पक्षपात के आरोपों को झूठा बताते हुए लेफ्टिनेंट जनरल नायर ने कहा कि असम राइफल्स को एक समय पर दोनों गुटों, मैतेई और कुकी समुदायों के लोगों ने निशाना बनाया था। उन्होंने कहा कि म्यांमार के कई वीडियो चुनिंदा तरीके से प्रसारित किए गए और पूरी तस्वीर नहीं बताई गई। उन्होंने कहा कि जातीय झड़पें शुरू होने के बाद से ही भारत-म्यांमार सीमा पर निगरानी बढ़ा दी गई है।

लेफ्टिनेंट जनरल नायर ने कहा, “हम जमीन के हर इंच पर तैनात नहीं रह सकते। हमारी फोर्स सीमा पर निगरानी कर रही है। अधिक संजीगदी से ये काम किया जा रहा है। गश्त बढ़ा दी गई है। एमबुश बढ़ाया गया है।”

भरी मेट्रो में चिल्लाई ‘अल्लाह-हू-अकबर’, कहा- खुद को उड़ा लूँगी: फ्रांसीसी पुलिस ने बुर्काधारी महिला को गोली मारकर किया काबू, जाँच शुरू

फ्रांस की राजधानी पेरिस में मंगलवार (अक्टूबर 31, 2023) को उस समय सनसनी मच गई, जब मेट्रो में सवारी कर रही एक बुर्काधारी महिला ने खुद को बम धमाके में उड़ाने की धमकी दी और वहीं जोर-जोर से ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाने लगी। उसकी इस हरकत के बाद फ्रांसीसी पुलिस ने उसे काबू करने के लिए उसपर गोली चलाई। इस गोलीबारी में महिला घायल हो गई। पुलिस ने उसे पकड़ने के बाद जाँच की तो पाया कि उसके पास कोई विस्फोटक नहीं था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कट्टरपंथी महिला ने पेरिस के उपनगरीय इलाके में मेट्रो से यात्रा करते समय सभी यात्रियों के सामने ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाए थे। उसने पूरी मेट्रो को ही बम से उड़ाने की धमकी दी थी। उसकी इन बातों से घबराए यात्रियों में से किसी एक ने इस संबंध में पुलिस को तलब किया। जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने पहले मेट्रो स्टेशन को खाली कराया और उसके बाद महिला को पकड़ने के लिए उसे बिब्लियोथेक फ्रेंकोइस मिटर्रैंड स्टेशन पर गोली मारी।

पेरिस के सुरक्षा अधिकारिकों ने बताया कि महिला ने पुलिस के निर्देशों को मानने से इनकार कर दिया था और खुद को बम से उड़ाने की धमकी दिए जा रही थी। पुलिस ने उसे रोकने के लिए ही उसपर गोली चलाई, जो उसके पेट में लगी। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पेट में गोली लगने के बाद उसकी हालत गंभीर लेकिन स्थिर बताई जा रही है।

हालाँकि, पुलिस सूत्रों ने बताया कि महिला के पास से कोई विस्फोटक या अन्य हथियार नहीं मिला। अब पुलिस इस बात की भी जाँच करेगी कि क्या महिला को गोली मारे बगैर गिरफ्तार किया जा सकता था?

बता दें कि यह घटना ऐसे समय में हुई है जब फ्रांस को 13 अक्टूबर के बाद से सुरक्षा अलर्ट के उच्चतम संभावित स्तर पर रखा गया है। उस समय मोहम्मद मोगुचकोव नाम के आतंकी ने डोमिनिक बर्नार्ड नाम के शिक्षक की हत्या कर दी थी। उनकी हत्या अर्रास में गैम्बेटा-कार्नोट स्कूल के बाहर की गई थी। 

इस घटना से फ्रांस में सुरक्षा चिंताएँ बढ़ गई हैं। पुलिस ने कहा है कि वह इस घटना के पीछे के कारणों की जाँच कर रही है। इस घटना से फ्रांस में आतंकवाद के खतरे की भी याद दिला दी है। फ्रांस में अतीत में कई आतंकवादी हमले हुए हैं।

सोमनाथ ट्रस्ट के फिर अध्यक्ष बनें पीएम मोदी, मंदिर और आसपास के क्षेत्रों का 5 साल तक संभालेंगे जिम्मा: श्रद्धालु वहीं से कर सकेंगे अयोध्या के रामलला मंदिर में दर्शन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गुजरात स्थित प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर से संबंधित सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष पद पर फिर से पाँच साल के लिए चुना गया है। यह ट्रस्ट गुजरात के सोमनाथ मंदिर और उसके आसपास के क्षेत्र के विकास के लिए जिम्मेदार है। गाँधीनगर में सोमनाथ ट्रस्ट की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी को सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुना गया। इस बैठक में ट्रस्ट के अन्य सदस्यों ने भी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मंदिर क्षेत्र के विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

प्रधानमंत्री मोदी के फिर से चुने जाने से मंदिर के विकास को और गति मिलने की उम्मीद है। ट्रस्ट के पास कई महत्वपूर्ण विकास योजनाएँ हैं, जिनमें से एक राम मंदिर का लाइव दर्शन कराना है। इस सुविधा के शुरू होने से सोमनाथ पहुँचने वाले भक्तों को अयोध्या गए बिना भी भगवान राम के लाइव दर्शन हो सकेंगे। इसके अतिरिक्त सोमनाथ ट्रस्ट एक नए गेस्ट हाउस, एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और एक पार्किंग का भी निर्माण करा रहा है।

बता दें कि सोमनाथ ट्रस्ट एक गैर-सरकारी संगठन है, जो गुजरात के सोमनाथ मंदिर और उसके आसपास के क्षेत्र के विकास के लिए जिम्मेदार है। इस ट्रस्ट की स्थापना 1951 में हुई थी। ट्रस्ट के 8 सदस्य होते हैं, जिनमें से चार सदस्य गुजरात सरकार द्वारा नामित होते हैं और चार सदस्य केंद्र सरकार द्वारा नामित होते हैं। इस समय सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक में लिया हिस्सा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बैठक के बारे में एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर भी जानकारी दी। उन्होंने लिखा, “गाँधीनगर में श्री सोमनाथ ट्रस्ट की बैठक की अध्यक्षता की। हमने ट्रस्ट के कामकाज से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। समीक्षा की गई कि हम मंदिर परिसर के लिए नवीनतम तकनीक का लाभ कैसे उठा सकते हैं, ताकि तीर्थयात्रा का अनुभव और भी अधिक यादगार हो। ट्रस्ट की ओर से इको फ्रेंडली तरीके से किए जा रहे कार्यों का भी जायजा लिया।”

सोमनाथ ट्रस्ट के सदस्यों की नियुक्ति पाँच साल के लिए की जाती है। ट्रस्ट के पास कई महत्वपूर्ण विकास योजनाएँ हैं, जिनमें से एक राम मंदिर का लाइव दर्शन कराना है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सोमनाथ ट्रस्ट को उम्मीद है कि वह मंदिर को एक विश्व स्तरीय तीर्थस्थल बना सकेगा। सोमनाथ ट्रस्ट का उद्देश्य सोमनाथ मंदिर को एक विश्व स्तरीय तीर्थस्थल बनाना है।