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दिल्ली के कल्याण मंत्री के ठिकानों पर ED की रेड, पूछताछ के लिए हाजिर नहीं होंगे CM केजरीवाल: भगवंत मान के साथ MP में करेंगे रोड शो

दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज (2 नवंबर 2023) ईडी के सामने पेश नहीं होंगे। खबर आई है कि वो पंजाब सीएम भगवंत मान के साथ मध्यप्रदेश के सिंगरौली में रोड शो करेंगे। वहीं दूसरी ओर खबर है कि प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने आज (2 नवंबर 2023) उन्हीं के एक और मंत्री के आवास पर छापा पड़ा।

मंत्री का नाम राजकुमार आनंद है। बताया जा रहा है कि ये रेड हवाला के जरिए आए पैसों को लेकर मारी गई। ईडी टीम मंत्री के सरकारी आवास समेत 9 ठिकानों पर तलाशी करने पहुँची। इस दौरान अर्धसैनिक बलों के अधिकारी घर के बाहर तैनात रहे।

मालूम हो कि राजकुमार आनंद पटेल नगर से विधायक हैं। पिछले वर्ष गुजरात चुनाव के दौरान जब भगवान राम-कृष्ण पर विवादित टिप्पणी के बाद आप के पूर्व मंत्री राजेंद्र पाल गौतम को केजरीवाल के मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा था, उसी समय समाज कल्याण मंत्री का पद राजकुमार आनंद को मिला था। इसके अलावा वह श्रम रोजगार, एससी-एसटी, सहकारी समितियों के कामकाज को भी देखते हैं।

उनके आवास पर छापेमारी की खबर सुनने के बाद आप विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा, “राजकुमार आनंद का कसूर यह है कि वह आप विधायक हैं और पार्टी से मंत्री हैं। ब्रिटिश काल में भी अगर आपको किसी के घर की तलाशी लेनी होती थी तो कोर्ट से सर्च वारंट की जरूरत होती थी। अंग्रेजों का भी मानना ​​था कि अगर आप पुलिस या किसी एजेंसी को किसी के घर में घुसकर तलाशी लेने का अधिकार दे देंगे तो आतंक का माहौल बन जाएगा। कोर्ट ने सर्च वारंट दिया लेकिन आज ईडी को कोर्ट वारंट की जरूरत नहीं है, ईडी के अधिकारी तय करते हैं कि उन्हें किसके घर छापा मारना है। छापे केवल विपक्षी नेताओं के परिसरों पर मारे जाते हैं…।”

वहीं, समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार भाजपा नेता हरीश खुराना ने इस छापे की खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा,

“केवल अरविंद केजरीवाल ही नहीं बल्क उनकी पूरी कैबिनेट घोटाले करने में व्यस्त है। ईडी ने कानून के अंतर्गत कार्रवाई की है। रिपोर्ट्स बता रही हैं कि ये मामला हवाला और कस्टम का है। कुछ दस्तावेज जब्त किए गए हैं, जिनके आधार पर आज ईडी ने छापेमारी की… कुछ देर में आम आदमी पार्टी की ओर से सिलसिला शुरू हो जाएगा कि यह साजिश और बदले की कार्रवाई है राजनीति, हम पीड़ित हैं। उन्हें समझना होगा कि कार्रवाई कानून के मुताबिक है… अगर आपने कुछ गलत नहीं किया है तो डरने की जरूरत नहीं है। अगर आप भ्रष्ट हैं तो आपका डर वाजिब है… घबराहट बताती है कि पूरी सरकार भ्रष्ट है…।”

खबरों के अनुसार, ईडी की यह जाँच डॉयरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस की ओर से पेश एक चार्जशीट से जुड़ी है। ये केस हवाला लेनदेन के अतिरिक्त 7 करोड़ से अधिक कस्टम चोरी का है। हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि इस केस में एक स्थानीय अदालत ने डीआरआई की शिकायत का संज्ञान लिया था जिसके बाद आप मंत्री और अन्य के खिलाफ ये मामला दर्ज हुआ।

राजस्थान में 5 साल पर सरकार बदलने की परंपरा, सर्वे भी बता रहे सत्ता में लौट रही BJP: कॉन्ग्रेस के लिए अबकी बहुमत दूर

राजस्थान उन प्रदेशों में से एक है, जहाँ अूममन हर 5 साल पर सरकार बदल जाती है। इस बार भी प्रदेश की जनता का मूड उस परंपरा को बनाए रखने का दिख रहा है। टाइम्स नाउ नवभारत और ईटीजी के ताजा सर्वे के मुताबिक राज्य में बीजेपी की सरकार बनेगी। कॉन्ग्रेस बहुमत से काफी दूर रहेगी। राजस्थान की 200 सदस्यीय विधानसभा के लिए 25 नवंबर को वोट डाले जाएँगे। नतीजे 3 दिसंबर को आएँगे।

सर्वे के अनुसार बीजेपी को 114 से 124 सीटें मिल सकती है। पार्टी को 43.80 फीसदी वोट मिलने का अनुमान लगाया गया है। वहीं सत्ताधारी कॉन्ग्रेस 68-78 सीटों पर सिमट सकती है। उसका वोट प्रतिशत 41.90 फीसदी रहने की उम्मीद है। अन्य पार्टियों को 6 से 10 सीट मिलने का अनुमान लगाया गया है। इनका वोट 14.30 फीसदी रहने के आसार हैं।

यह सर्वे अक्टूबर महीने के अंत में किया गया है। इस दौरान 21,136 लोगों से रायशुमारी की गई। लगभग 105 लोगों की राय हर विधानसभा क्षेत्र में जानी गई। 30 फीसदी लोगों से संपर्क फोन के जरिए, जबकि 70 फीसदी लोगों से उनकी राय मौके पर जाकर पूछी गई।

सर्वे के अनुसार ढूंढाड क्षेत्र की 58 सीटों में से 36 से 40 बीजेपी तो कॉन्ग्रेस को 16 से 20 सीटें मिल सकती हैं। अन्य के खाते में भी 1 से 3 सीट जाने का अनुमान लगाया गया है। इसी तरह मेवाड़ की कुल 43 सीटों में बीजेपी को 21-27 तो कॉन्ग्रेस को 15 से 19 सीटें मिलती दिख रही हैं। अन्य को 1 से 3 सीट मिलने का अनुमान है।। मारवाड़ की कुल 61 सीटों में से 31 से 37 सीट बीजेपी को मिल रही हैं। कॉन्ग्रेस को 21 से 27 के बीच सीटें मिल सकती है। अन्य को एक से 5 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है।

टाइम्स नाउ नवभारत और ईटीजी के ऑपिनियन पोल राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 फोटो साभार : timesnownews.com

हाड़ौती क्षेत्र में 17 सीटें हैं। बीजेपी को 11 से 13 तो कॉन्ग्रेस को 3 से 7 सीट मिलने का अनुमान है। शेखावटी की 21 सीटों में से बीजेपी को 10 से 12 तो कॉन्ग्रेस को 7 से 11 सीटें मिल सकती हैं।

अरविंद केजरीवाल की ED तो महुआ मोइत्रा की लोकसभा एथिक्स कमेटी के सामने पेशी, बोले बीजेपी MP- दोनों 2 नंबरी

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा से आज यानी 2 नवंबर 2023 को दो अलग-अलग मामलों में पूछताछ होनी है। सीएम केजरीवाल से जहाँ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) शराब घोटाला मामले में पूछताछ करेगा। वहीं टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा को भी लोकसभा एथिक्स कमेटी के समक्ष पेश होना है। उनपर आरोप है कि उन्होंने पैसों के बदले संसद में खड़े होकर सवाल पूछे और दुबई के कारोबारी को अपना संसद का लॉग-इन दिया।

दोनों नेताओं के साथ आज होने जा रही पूछताछ से पहले भारतीय जनता पार्टी के सांसद डॉ निशिकांत दुबे ने अपने ट्विटर पर एक तंज कसा है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा- “2नों 2 नंबरी 2 नवंबर को हाजिर हों।” उनके इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया यूजर्स नीचे केजरीवाल और महुआ की फोटो लगा रहे हैं, दोनों को टैग कर रहे हैं। एक यूजर लिखता है- “सर दोनों 2 नंबरी को 2 नवंबर को तिहाड़ भेज दो।”

बता दें कि जिस शराब घोटाले मामले में दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल से आज पूछताछ होनी है उस मामले में मनीष सिसोदिया और AAP के सांसद संजय सिंह पहले से ही जेल में बंद हैं। ऐसे में जब खबर आई कि ईडी 2 नवंबर को केजरीवाल से पूछताछ करने वाली है तो दिल्ली सरकारी की मंत्री आतिशी ने दावा किया कि मुख्यमंत्री को ईडी गिरफ्तार करने वाली है। हालाँकि वास्तविकता में आधिकारिक तौर पर ऐसी कोई सूचना नहीं आई थी और न ही कोई वारंट जारी किया गया था। फिर भी दिल्ली सरकारी की मंत्री ने ऐसे आरोप लगाए।

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा की बात करें तो उन्हें आज संसद की आचार समिति के समक्ष पेश होना है। उनके खिलाफ शिकायत भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने की थी। उन्होंने कहा था कि महुआ मोइत्रा ने दुबई के कारोबारी दर्शन हीरानंदानी से कैश और गिफ्ट्स लेकर उन्हें संसद का लॉग इन दिया, जिसके जरिए गौतम अडानी के बारे में सवाल हुए।

इस मामले में दर्शन हीरानंदानी, भाजपा सांसद के आरोपों को स्वीकार कर चुके हैं। वहीं 1 नवंबर को ये भी खबर आई कि केन्द्रीय सूचना एवं प्रौद्यिगिकी मंत्रालय (IT Ministry) ने महुआ मोइत्रा पर पैसे लेकर संसद में प्रश्न पूछने के आरोपों की जाँच कर रही संसदीय आचार समिति को बताया कि सांसद महुआ मोइत्रा की संसद की लॉगिन आईडी का इस्तेमाल दुबई से कम से कम 49 बार हुआ है। 

डॉक्टर ने ब्रेथ एनालाइजर की जगह कागज में फूँक मरवा कर घोषित कर दिया शराबी, बिहार की घटना: वीडियो वायरल

बिहार में एक से बढ़कर एक ‘गजब’ जीव हैं। रक्सौल के सरकारी अस्पताल का ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक डॉक्टर शराबियों का टेस्ट जुगाड़ से कर रहा है कि उसने शराब पी है या नहीं। जी हाँ, कागज में फूँक मरवा कर डॉक्टर ने 9 लोगों को शराबी घोषित कर दिया, जिसके बाद उन लोगों को जेल भेज दिया गया। अब इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

ये मामला रक्सौल अनुमंडल अस्पताल का है। जहाँ 11 लोगों को शराब सेवन के आरोपों में पकड़ा गया था। इसमें से 9 लोगों द्वारा शराब के सेवन की पुष्टि कागज की कुप्पी में फूँक से कर ली गई। चूँकि ब्रेथ एनालाइजर अस्पताल में मौजूद नहीं था, इसलिए ये देसी जुगाड़ अपनाया गया। इस ‘खास’ जाँच में फँसे 9 लोगों को अब जेल भेज दिया गया है, जबकि 2 लोगों में शराब की ‘पुष्टि’ नहीं हो पाने की वजह से उन्हें छोड़ दिया गया।

स्थानीय मीडिया के मुताबिक, ये घटना 30 अक्टूबर, 2023 की है। बता दें कि ब्रेथ एनालाइजर न होने पर शराब के सेवन की जाँच खून की जाँच के माध्यम से हो सकती थी। हालाँकि इसकी व्यवस्था भी इस अस्पताल में नहीं थी और सैंपल लेकर उन्हें मुजफ्फरपुर लैब में भेजना पड़ता। ऐसे में डॉक्टर साहब ने फूँक से ये पता लगाने की तरकीब निकाल ली कि शराब सेवन की पुष्टि बदबूदार फूँक से हो भी जाए और काम भी चल जाए।

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ राजीव रंजन ने सफाई दी कि हमारे अस्पताल में शराब जाँच की सुविधा ही नहीं है। वहीं, रक्सौल थाना प्रभारी नीरज कुमार ने कहा कि थाने का ब्रेथ एनालाइजर खराब हो गया था, इसलिए जाँच के लिए अस्पताल भेजा गया था। वहीं, वरिष्ठ अधिकारी डॉ अंजनी कुमार सिंह ने कहा है कि इस घटना की जाँच के लिए कमेटी का गठन किया गया है।

अब पायलट नहीं कर पाएँगे माउथवॉश और परफ्यूम का इस्तेमाल, वर्ना डीजीसीए देगी सजा; जारी किया गाइडलाइन

भारत में पायलटों को अब विमान में टूथपेस्ट का उपयोग करने से मना किया गया है। यह दिशानिर्देश नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्वारा जारी किया गया है और यह पायलटों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है। डीजीसीए ने यह भी कहा कि पायलटों को विमान में माउथवॉश का उपयोग करने से भी बचना चाहिए। अगर वो ऐसा करते हैं, तो फिर उन्हें सजा दी जा सकती है।

विमानन नियामक डीजीसीए ने संशोधित नियम जारी किए हैं, जिसमें शराब के लिए बनाए नए नियम में शराब के सेवन के लिए विमान कर्मियों की मेडिकल जाँच की प्रक्रिया से संबंधित नियमों में कई बदलाव किए गए हैं। इसके इस्तेमाल से ब्रेथ एनालाइजर का टेस्ट पॉजिटिव हो सकता है। कोई भी क्रू मेंबर्स जो ऐसी दवा ले रहा है, उसे टेकऑफ से पहले कंपनी के डॉक्टर से परामर्श करना होगा।

डीजीसीए ने कहा कि इन सबके इस्तेमाल से ब्रेथ एनालाइजर का टेस्ट पॉजिटिव हो सकता है। कोई भी क्रू मेंबर्स जो ऐसी दवा ले रहा है, उसे टेकऑफ से पहले कंपनी के डॉक्टर से परामर्श करना होगा। सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट में परफ्यूम शब्द का इस्तेमाल नहीं है। डीजीसीए ने कहा फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी वाले ब्रेथ एनालाइजर का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही एजेंसियों की निगरानी एवं निरीक्षण की एक प्रक्रिया शुरू की गई है।

पैसेंजर के रूप में ट्रैवल कर रहे ऑपरेटिंग क्रू मेंबर के लिए बोर्डिंग एयरपोर्ट पर ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट कराना जरूरी होगा। जब कोई पायलट या क्रू मेंबर्स ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट में पॉजिटिव मिलता है तो कड़ी सजा का प्रावधान है। सजा इस बात पर भी निर्भर करेगी कि गलती पहली बार हुई या बार-बार हो रही है। नियम लैंडिंग और टेकऑफ दोनों टेस्ट होंगे।

एक रिपोर्ट के अनुसार, इस साल की पहली छमाही में 33 पायलट और 97 केबिन क्रू सदस्य अपने अनिवार्य अल्कोहल परीक्षण में विफल रहे। वहीं 2022 में इस अवधि के लिए 14 पायलट और 54 केबिन-क्रू सदस्यों को ड्यूटी के दौरान नशे में धुत पाया गया।

मॉरीशस में भारत ने बनाया मिलिट्री बेस: हिन्द महासागर में चीन की चुनौती से निपटने की तैयारी, पानी में नज़र रखेंगे टोही विमान

भारत मॉरीशस के अगलेगा द्वीप का विकास कर रहा है। यहाँ भारत ने अपना मिलिट्री बेस लगभग पूरा कर लिया है। दरअसल, ये मॉरीशस के मुख्य द्वीप से लगभग 1,100 किलोमीटर की दूरी पर दो द्वीपों का समूह है।

भारत का यहाँ मिलिट्री बेस बनाने का मकसद खास तौर से चीन की गतिविधियों के जवाब में हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत करना है। हालाँकि भारत की तरफ से इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगलेगा द्वीप पर जेटी, रनवे और विमानों के ठहरने के लिए हैंगर सहित जरूरी बुनियादी ढाँचे का निर्माण पूरा हो चुका है। द्वीप की हालिया सैटेलाइट इमेज भारत के इस दावे का समर्थन करती है। इस दौरान विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन 1 और 2 नवंबर, 2023 तक पोर्ट लुइस की आधिकारिक यात्रा पर हैं।

वे यहाँ भारत से मॉरीशस में गिरमिटिया मजदूरों के आगमन की 189वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में शिरकत करने पहुँचे हैं। इन मजदूरों को भारत से लाकर यहाँ मजदूरी करवाई गई थी। इस दौरान विदेश राज्य मंत्री मुरलीधरन ने मॉरीशस के आईटी मंत्री दरसानंद बालगोबिन के साथ संयुक्त रूप से एक उपग्रह विकसित करने के लिए इसरो और मॉरीशस रिसर्च एंड इनोवेशन काउंसिल के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर भी किए।

इस मौके पर उन्होंने कहा कि यह आकाश की सीमाओं को तोड़ते हुए एक रोमांचक अंतरिक्ष अन्वेषण सफर की शुरुआत है। उन्होंने आगे कहा कि यह समझौता ज्ञापन दुनिया के फायदे के लिए अंतरिक्ष, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल करने की भारत की प्रतिबद्धता का एक उदाहरण है।

उन्होंने ये भी कहा कि विश्वास है कि समझौता ज्ञापन से आपसी सहयोग बढ़ेगा। देश के विदेश राज्य मंत्री मुरलीधरन ने पोर्ट लुइस में भारत और मॉरीशस के राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगाँठ समारोह शॉपिंग कार्निवल’ का भी उद्घाटन किया।

मॉरीशस की रणनीतिक स्थिति को देखते हुए भारत कथित तौर पर यहाँ बोइंग पोसीडॉन 8आई (P-8I) समुद्री गश्ती और टोही विमान तैनात करने पर विचार कर रहा है। खास तौर से भारत चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के बढ़ते क्षेत्रों के जवाब में हिंद महासागर क्षेत्र में पीएलए नौसेना की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ये तैनाती कर रहा है।

इसके अलावा अमेरिका में बने इन विमानों का इस्तेमाल पनडुब्बियों की आवाजाही पर नज़र रखने के लिए किया जा सकता है। बता दें कि चीन बीते एक दशक से भी अधिक वक्त से हिंद महासागर में पनडुब्बियों की तैनाती कर रहा है।

अगलेगा द्वीप पर नया रनवे फोटो साभार: swarajyamag.com

हिंद महासागर में मॉरीशस रणनीतिक तौर से काफी अहम क्षेत्र में है। अफ्रीकी महाद्वीप के पास होने से इस देश के जरिए हिंद महासागर के बड़े इलाके पर नजर रखी जा सकती है। इस देश के रेयूनियों द्वीप पर फ्रांस का बड़ा मिलिट्री बेस है। तो मॉरीशस के उत्तर-पूर्व के डिएगो गार्सिया में अमेरिकी और ब्रिटिश मिलिट्री का बेस है।

भारत ने मार्च 2015 में मॉरीशस के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) साइन किया था। उसी के तहत अगलेगा द्वीप के विकास का काम यहाँ किया गया है। इस समझौते के तहत इस द्वीप पर समुद्री और हवाई परिवहन सुविधाओं में सुधार पर खासा ध्यान दिया गया है।

हालाँकि, भारत आधिकारिक तौर पर कहता आ रहा है कि इस सुविधा का मकसद मॉरीशस की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को बढ़ाने में मदद करना है। सैन्य ठिकाने की बात भारत ने आधिकारिक तौर पर नहीं कही है, लेकिन पोर्ट लुइस में मंगलवार (31 अक्टूबर, 2023) को भारतीय उच्चायोग के सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर मॉरीशस द्वीप के मुख्य बंदरगाह पर आईएनएस शारदा के पहुँचने के ऐलान ने बहुत कुछ साफ कर दिया है।

इसमें कहा गया, “भारतीय नौसेना का जहाज़ शारदा आज 189वें अप्रवासी दिवस के उपलक्ष्य में पोर्ट लुइस हार्बर में पहुँचा। जहाज की यात्रा के दौरान, भारतीय नौसेना और राष्ट्रीय तटरक्षक बल के कर्मचारी पेशेवर बातचीत, संयुक्त बंदरगाह, समुद्री प्रशिक्षण और संयुक्त ईईजेड निगरानी में शामिल होंगे।”

पिछले कुछ साल में इस द्वीप पर 10,000 फुट का रनवे और एक घाट का निर्माण किया गया है। ये मॉरीशस के मुख्य द्वीप से 1,100 किलोमीटर उत्तर में है। भारत और मॉरीशस के बीच खासे अच्छे रिश्ते हैं। ये देश अपना नेशनल डे गाँधीजी की नमक सत्याग्रह के वर्षगाँठ के दिन 12 मार्च को मनाता है।

गौरतलब है कि अगस्त 2021 में कतर की मीडिया अल जजीरा की रिपोर्ट में दावा किया था कि भारत मॉरीशस के अगलेगा द्वीप पर सैन्य ठिकाना बना रहा है। रिपोर्ट में तब उसने दावा किया था कि अगलेगा में बनाई जा रही एक हवाई पट्टी का इस्तेमाल पक्के तौर पर भारतीय नौसेना के समुद्री गश्ती मिशन के लिए होगा। उससे पहले ऑस्ट्रेलिया के लोवी इंस्टिट्यूट ने भी ऐसा ही दावा किया था।

कश्मीर के मंदिरों के दर्शन के लिए जा रहे चम्पारण के 100 युवा, साथ लेकर जा रहे 20000 चम्पा के पौधे: बिहार के उद्योगपति ने उठाया ‘सद्भावना यात्रा’ का बीड़ा

अगस्त 2019 में मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद-370 को निरस्त करने का निर्णय लिया। इसके बाद से ही लगातार न सिर्फ आतंकियों का सफाया जारी है, बल्कि वहाँ कई विकास कार्य भी चल रहे हैं। जम्मू कश्मीर को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास चल रहे हैं। इसी क्रम में बिहार के उद्योगपति राकेश पांडेय ‘चम्पारण-कश्मीर सद्भावना यात्रा’ निकाल रहे हैं। इसके तहत बिहार के चम्पारण क्षेत्र के 100 युवाओं को कश्मीर की निःशुल्क यात्रा कराई जा रही है।

इसके तहत बिहार के पूर्वी चम्पारण स्थित ‘बापूधाम’ रेलवे स्टेशन से 100 युवाओं का समूह दिल्ली के लिए निकला। दिल्ली पहुँचने के बाद उन्हें कश्मीर के लिए ले जाए जाने की तैयारी चल रही है। राकेश पांडेय के बारे में बता दें कि वो कई देशों में फैली कंपनी ‘ब्रावो फार्मा’ नामक कंपनी चलाते हैं। इसी के तहत उनका ‘ब्रावो फाउंडेशन’ चलाते हैं, जिसके तत्वाधान में ये यात्रा निकाली जा रही है। 100 युवाओं को विमान के माध्यम से पहले दिल्ली से श्रीनगर ले जाया जाएगा।

इन युवाओं को शंकराचार्य मंदिर, त्रेहगाम शिव मंदिर, शारदा पीठ, खीर भवानी मंदिर और मार्तण्ड सूर्य मंदिर जैसे आध्यात्मिक धरोहरों का दर्शन कराया जाएगा। उन्हें बताया जाएगा कि कश्मीर भी भारत की सनातन संस्कृति से जुड़ा हुआ है और ये सनातन की प्राचीन स्थली रही है। इन युवाओं को प्रेरित किया जाएगा कि वो कश्मीर को भी अपने कार्यक्षेत्र के रूप में चुनें, पर्यटन या व्यापार वगैरह के लिए वहाँ आएँ। ये 100 युवा अपने साथ 20,000 चम्पा के पौधे भी चम्पारण से लेकर जा रहे हैं।

उद्देश्य ये है कि जब ये 20,000 चम्पा के पौधे कश्मीर में लहलहाएँगे तो देश की सांस्कृतिक एवं भौगोलिक एकता का प्रतीक बनेंगे। राकेश पांडेय बिहार के मोतिहारी स्थित नरसिंह बाबा प्रांगण में भव्य परशुराम प्रतिमा का भी निर्माण करवा रहे हैं। साथ ही चम्पारण में वो फैक्ट्री भी लगवा रहे हैं, जिससे रोजगार उत्पन्न होगा और इलाके की अर्थव्यवस्था बदलेगा। मोतिहारी के MS कॉलेज, LND कॉलेज, पटना स्थित IIT और वीमेंस कॉलेज में भी उनके सौजन्य से कई कार्य चल रहे हैं।

हिंदुत्व से लेकर दलित-जनजातीय एवं महिलाओं तक, MP में हर मोर्चे पर पिछड़ी कॉन्ग्रेस: यूँ ही नहीं आ गई ‘कपड़े फाड़ने’ की नौबत

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और कॉन्ग्रेस ने पूरी ताकत झोंक दी है। भाजपा ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ अपने अन्य हैवीवेट चेहरों को मैदान में उतार दिया है। वहीं, कॉन्ग्रेस अब भी अपने दो सबसे पुराने और विश्वसनीय चेहरों के दम पर ही मैदान में है। ये अलग बात है कि इन दो ‘मजबूत’ चेहरों में ही कपड़े फाड़ने की नौबत आ चुकी है। दोनों एक-दूसरे के समर्थकों से कह रहे हैं कि वो जाकर सामने वाले के कपड़े फाड़े।

वहीं, कमलनाथ ने तो दिग्विजय सिंह के लिए ये कह दिया कि ‘मैंने दिग्विजय सिंह को गाली खाने के लिए पॉवर ऑफ अटार्नी दी है’। खैर, मध्य प्रदेश में चुनावी मुद्दों की बात करें तो विकास, भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, वादाखिलाफी, जनजातीय मुद्दे, महिला आरक्षण, ओबीसी आरक्षण और हिंदुत्व के साथ ही धार्मिक केंद्रों के विकास भी खास चुनावी मुद्दों में शामिल हैं।

मध्य प्रदेश का चुनावी गणित

मध्य प्रदेश में कुल 230 विधानसभा सीटें हैं, जिन्हें मोटे तौर पर 7 हिस्सों में बाँटा जा सकता है। चंबल रीजन में 34 विधानसभा सीटें हैं। वहीं, बुंदेलखंड में 26, बघेलखंड में 30, महाकोशल में 47, भोपाल रीजन में 20, निमाड़ रीजन में 18 और मालवा रीजन में 55 विधानसभा सीटें हैं। मध्य प्रदेश की 230 सीटों में से 35 सीटें एससी वर्ग के लिए आरक्षित हैं तो एसटी वर्ग के लिए 47 विधानसभा सीटें।

पुराने चेहरों पर टिकी है कॉन्ग्रेस की लीडरशिप

मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस अपने दो पुराने चेहरों- कमलनाथ और दिग्विजय सिंह को ही आगे करके चुनाव लड़ रही है। कमलनाथ मुख्यमंत्री पद के चेहरे हैं, लेकिन खींचतान में दिग्विजय सिंह अपने पूरे लाव-लश्कर के साथ कमलनाथ को दबाव में लेते दिख रहे हैं। कॉन्ग्रेस के बड़े चेहरों में पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी और केसी वेणुगोपाल हैं।

वहीं, रणदीप सुरजेवाला को केंद्र और राज्य की टीमों के साथ समन्वय बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। कॉन्ग्रेस के पास जनजातीय चेहरे के तौर पर कांतिलाल भूरिया हैं, जो पूर्व केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। उन्हें कॉन्ग्रेस ने चुनाव प्रचार कमेटी का अध्यक्ष भी बनाया है।

भाजपा ने फिर से बनाया मोदी को चेहरा, कई ‘बड़े’ सूरमा भी खड़े

भारतीय जनता पार्टी के चुनावी कैंपेन का प्रमुख चेहरा निर्विवाद रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। उनका साथ दे रहे हैं भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और मौजूदा गृहमंत्री अमित शाह। उसके साथ मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष भी चुनाव की कमान संभाल रहे हैं।

राज्य की लीडरशिप में शिवराज सिंह चौहान बिना किसी शक के बड़े चेहरे हैं, लेकिन कोई कमीं न छूट जाए, इसके लिए केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को भी बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। भाजपा के पास भूपेंद्र यादव और अश्विनी वैष्णव जैसे महारथी भी हैं तो रॉयल चेहरे के तौर पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी पूरी ताकत झोंक दी है। ग्वालियर संभाव में उनकी पकड़ अब भी काफी मजबूत मानी जाती है।

मध्य प्रदेश का चुनावी इतिहास

मध्य प्रदेश के चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो साल 2018 में भारतीय जनता पार्टी सत्ता में होने के बावजूद 230 में से 109 ही सीटें जीत पाई थी। वहीं कॉन्ग्रेस ने 114 सीटों पर जीत हासिल करके बहुमत पाया था। कमलनाथ के नेतृत्व में सरकार बनी, जो ज्योतिरादित्य सिंधिया की अगुवाई में कॉन्ग्रेस में बगावत होने के बाद गिर गई।

साल 2018 में मत प्रतिशत भाजपा और कॉन्ग्रेस का लगभग बराबर 41 प्रतिशत था। भाजपा ने 35 एससी सीटों में से 18 पर जीत हासिल की थी। वहीं, कॉन्ग्रेस को 17 सीटें मिली थीं। एसटी वर्ग के लिए आरक्षित 47 सीटों में से 30 पर कॉन्ग्रेस को जीत मिली थी तो 16 सीटों पर भाजपा को और एक सीट अन्य के खाते में गई थी।

उससे पहले साल 2013 की बात करें तो भाजपा ने 165 सीटों पर जोरदार जीत दर्ज की थी। कॉन्ग्रेस को महज 58 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं, सात सीटों पर अन्य पार्टियों एवं निर्दलीयों को जीत मिली थी। इस चुनाव में भाजपा को एकतरफा 45 प्रतिशत से अधिक वोट मिले थे, जबकि कॉन्ग्रेस महज 36 प्रतिशत वोट ही हासिल कर पाई थी। अन्य के हिस्से में 19 प्रतिशत वोट गए थे।

साल 2019 के लोकसभा चुनाव की भी बात करें तो मध्य प्रदेश की 29 सीटों में से 28 पर भाजपा को जीत मिली थी, तो कॉन्ग्रेस को महज एक सीट से संतोष करना पड़ा था। लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा को 59 प्रतिशत वोट मिले थे, तो कॉन्ग्रेस को महज 35 प्रतिशत ही वोट मिल पाए थे।

मध्य प्रदेश में मतदाता वर्ग का ये है गणित

चुनाव आयोग और इंडिया टुडे के मुताबिक, मध्य प्रदेश में कुल 82 सीटें रिजर्व हैं, जिनमें 35 एससी वर्ग के लिए हैं तो 47 सीटें एसटी वर्ग के लिए। जाति आधारित मतदाता वर्ग की बात करें तो मध्य प्रदेश में 15 प्रतिशत वोटर सामान्य वर्ग के हैं, तो ओबीसी सर्वाधिक 38 प्रतिशत हैं।

वहीं, मध्य प्रदेश में 16 प्रतिशत वोटर एससी वर्ग से हैं तो एसटी, जिसमें जनजातीय वर्ग आता है। कुल 21 प्रतिशत मतदाता हैं। राज्य में 7 प्रतिशत मतदाता मुस्लिम हैं। वहीं, 3 प्रतिशत मतदाता बौद्ध, ईसाई, सिख के साथ अन्य वर्ग के हैं।

मध्य प्रदेश के चुनावी मुद्दे

मध्य प्रदेश में सबसे बड़ा वोटर वर्ग ओबीसी वर्ग का है। राज्य में 38 प्रतिशत ओबीसी निर्णायक भूमिका में हैं। वहीं, 21 प्रतिशत एसटी वर्ग भी सत्ता में बड़ी भूमिका निभाता है। ऐसे में मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान, जो खुद ओबीसी वर्ग से आते हैं वो भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री हैं।

शिवराज सिंह चौहान सभी वर्गों में लोकप्रिय हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद भी ओबीसी वर्ग से ही आते हैं। वहीं, कॉन्ग्रेस की लीडरशिप में कमलनाथ और दिग्विजय सिंह, दोनों ही सामान्य वर्ग के हैं। भाजपा में इनकी काट के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया, नरोत्तम मिश्रा जैसे बड़े चेहरे हैं।

महिलाओं के मुद्दे : कॉन्ग्रेस ने महिलाओं के लिए कुछ मुफ्त की घोषणाएँ की हैं, जबकि शिवराज सिंह चौहान का मुख्य वोटर वर्ग महिलाओं को माना जाता है। वो महिलाओं में काफी लोकप्रिय भी हैं, क्योंकि उनकी अगुवाई में भाजपा सरकार ने महिलाओं को केंद्र में रखकर कई योजनाएँ चलाई हैं। इसमें मध्य प्रदेश सरकार ने साल 2023-24 के बजट का एक तिहाई हिस्सा महिलाओं को केंद्र में रखकर तैयार की गई योजनाओं के लिए घोषित किया है।

शिवराज सिंह चौहान की देखरेख में लाडली बहन योजना चलती है, जिसके तहत अभी तक 1250 रुपए प्रति माह की सहायता महिलाओं को दी जाती थी, इसे बढ़ाकर 3000 रुपए प्रति माह करने का ऐलान किया गया है। शिवराज चौहान ने चुनाव के बाद लाडली बहन योजना की लाभार्थी महिलाओं को 450 रुपए में गैस सिलेंडर देने का वादा किया है, जबकि कॉन्ग्रेस का वादा 500 रुपए में सिलेंडर देने का है। केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण बिल पास करके पहले ही इस मोर्चे पर बाजी मार ली है, और कॉन्ग्रेस कोटे के अंदर कोटा की माँग करके महिला मतदाताओं को लुभाने की कोशिश कर रही है।

केंद्र-राज्य सरकार की योजनाओं का भाजपा को मिल रहा लाभ : भारतीय जनता पार्टी की डबल इंजन सरकार की योजनाओं का बड़ा वर्ग मध्य प्रदेश में है। राज्य में प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, पीएम-किसान योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, पीएम गरीब कल्याण योजना और आयुष्मान भारत योजना के करोड़ लाभार्थी भाजपा के आत्मविश्वास को मजबूत कर रहे हैं।

वहीं, कॉन्ग्रेस बच्चों के लिए मंथली स्कॉलरशिप 500 से 1500 रुपए देने का ‘वादा’ कर रही है। कॉन्ग्रेस ने योजनाओं की काट में 100 यूनिट मुफ्त बिजली, 200 यूनिट बिजली आधे दाम पर और हर महिला को 1500 रुपए प्रति माह के अलावा बेरोजगार युवाओं को भत्ता देने का चुनावी वादा किया है।

आदिवासियों के मुद्दे : मध्य प्रदेश में ओबीसी वर्ग अगर सबसे ताकतवर है भी तो भी आदिवासियों का महत्व इस बात से समझ सकते हैं कि एसटी वर्ग के लिए आरक्षित सीटों में जो बाजी मारता है, वही राज्य में सरकार बनाता है। मध्य प्रदेश में 21 प्रतिशत आबादी एसटी वर्ग की है, जिसके लिए प्रियंका गाँधी वाड्रा ने पेसा (Panchayat Extension to Scheduled Areas-PESA)) के विस्तार का वादा किया है। वहीं, भाजपा के पास देश को पहली जनजातीय राष्ट्रपति देने का गौरवगान है।

ये बड़ा फर्क आपको चुनावी समर में भी दिखेगा। यही नहीं, साल 2021 के सितंबर माह में अमित शाह ने राजा शंकर शाह और उसने बेटे रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस पर जबलपुर में कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रानी कमलापति के नाम पर भोपाल के हबीबगंज रेलवे स्टेशन का ही नामकरण कर दिया है। राज्य में शिवराज सिंह चौहान सरकार जनजातीय हितों को ध्यान में रखकर कई योजनाएँ चलाती हैं।

आदिवासियों के मामले में पेशाब कांड बड़ा चर्चित रहा था। इस मामले में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पीड़ित को न सिर्फ अपने घर बुलाया, बल्कि गंगाजल से उनके पैर भी धोए थे। कॉन्ग्रेस ने इस मामले को उठाने की कोशिश तो की, लेकिन वो इस मुद्दे को भुना नहीं पाई। वहीं, भाजपा ने आरोपित व्यक्तियों पर कड़ी कार्रवाई की और आरोपित जिस विधायक से जुड़ा था, उसे इस बार टिकट ही नहीं दिया है।

ओबीसी आरक्षण : कॉन्ग्रेस एक तरफ ओबीसी का आरक्षण बढ़ाने के नाम पर चुनावी वादे किए जा रही है और आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक करने की माँग कर रही है, साथ ही वादा भी कर रही है, लेकिन इसके कानूनी पहलुओं पर वो बात नहीं करना चाहती। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में ओबीसी वर्ग के लिए तमाम योजनाएँ चला रही है। ओबीसी वर्ग के चेहरे के तौर पर भाजपा में कई कद्दावर नेता मौजूद हैं।

हिंदुत्व : मध्य प्रदेश में हिंदुत्व बड़ा चुनावी मुद्दा है। हिंदुत्व और विकास की राजनीति के सहारे करीब दो दशकों से मध्य प्रदेश की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी को चुनौती देने की कोशिश कॉन्ग्रेस जरूर कर रही है, लेकिन हकीकत ये है कि उज्जैन में महाकाल कॉरिडोर से लेकर छिंदवाड़ा के हनुमान कॉरिडोर तक भाजपा ही भारी पड़ रही है। वहीं, रही सही कसर हिंदुत्व और सनातन पर कॉन्ग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों खासकर डीएमके के नेता उदयनिधि स्टालिन के बयान की तो इसके बाद से कॉन्ग्रेस बैकफुट पर आ चुकी है।

खास बात ये है कि भोपाल में इंडी गठबंधन अपनी पहली संयुक्त रैली करने वाला था, लेकिन स्टालिन के बयान के बाद बैकफुट पर आई कॉन्ग्रेस वो रैली करने की हिम्मत तक नहीं जुटा सकी। फिर मध्य प्रदेश के चुनाव समर के दौरान ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चित्रकूट के तुलसी पीठ जाना अपने आप में भाजपा के हिंदुत्व के बारे में काफी कुछ बता जाता है।

मध्य प्रदेश के चुनाव में मुस्लिम मतदाता कहाँ हैं?

मध्य प्रदेश में कुल 7 प्रतिशत मतदाता मुस्लिम हैं। इतने कम मतदाता होने की वजह से मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस भी मुस्लिमों को नहीं पूछ रही है, वहीं भाजपा की सरकार ने समावेशी विकास कार्यक्रम चलाए हैं। भाजपा का नारा ही है- ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ का।

वहीं, विडंबना देखिए कि जो कॉन्ग्रेस हर समय मुस्लिमों की बात करती रही है, वो खुद भाजपा के सॉफ्ट हिंदुत्व पर उतर आई है और मध्य प्रदेश में मुस्लिमों को पूरी तरह से भुला दिया है। यही वजह है कि भोपाल जैसे मुस्लिमों की अच्छी खासी आबादी वाले क्षेत्रों में भी भाजपा की मजबूत पकड़ है।

बागी और अन्य पार्टियाँ कहाँ?

मध्य प्रदेश में सीधी टक्कर भारतीय जनता पार्टी और कॉन्ग्रेस की है, लेकिन बाकी पार्टियाँ भी खेल बिगाड़ने में जुटी हुई हैं। कहाँ तो इंडी गठबंधन के नाम पर समाजवादी पार्टी भी कॉन्ग्रेस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चुनाव लड़ना चाहती थी, लेकिन कॉन्ग्रेस से मिली दुत्कार के बाद उसे अलग राह पकड़ने पर मजबूर होना पड़ा।

समाजवादी पार्टी ने मध्य प्रदेश में अकेले दम पर चुनाव लड़ने का फैसला कर दर्जनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। वहीं, बहुजन समाज पार्टी भी मध्य प्रदेश में चुनाव लड़ रही है। इसके अलावा छोटे-मोटे कई दल भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। ऐसे में एक तरफ भाजपा का अकेले होना और दूसरी तरफ कई पार्टियों का अलग-अलग चुनाव लड़ना भी भाजपा को ही मजबूती देता दिख रहा है।

बात बागियों की करें तो बगावत हरेक पार्टी में हुई है। भाजपा में होने वाली बगावतों को थामने के लिए एक बड़ी टीम रही तो इसका ज्यादा असर नहीं पड़ता दिख रहा। वहीं, कॉन्ग्रेस में बागियों के तेवर ऐसे रहे कि करीब आधा दर्जन सीटों पर उसे अपने कैंडिडेट ही बदलने पड़े। फिर कई सीटों पर सपा के साथ उसकी ‘फ्रेंडली फाइट’ भी उसे ही नुकसान पहुँचाती दिख रही है।

कितने मतदाता, कब मतदान और नतीजे कब?

चुनाव आयोग द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, मध्य प्रदेश में कुल 5 करोड़ 61 लाख 36 हजार 229 मतदाता हैं, जिसमें 11 लाख 29 हजार 513 मतदाता पहली बार विधानसभा चुनाव में वोट देंगे। इन मतदाताओं की औसत उम्र 18-19 साल है। मध्य प्रदेश में इस बार 5.05 लाख दिव्यांगजन, 1373 मतदाता थर्ड जेंडर के और 6 लाख 53 हजार 640 लाख मतदाता वरिष्ठ नागरिक हैं, जिनकी उम्र 80 वर्ष से अधिक है। इनका मतदान दोनों ही पार्टियों पर निर्णायक असर डालने वाला है।

इस बार चुनाव आयोग ने पूरे राज्य में मतदान केंद्रों की संख्या घटा कर 64 हजार 523 कर दिया है, जबकि साल 2018 के विधानसभा चुनाव में 65 हजार 367 मतदान केंद्र बनाए गए थे। मध्य प्रदेश में 17 नवंबर 2023 को मतदान होना है। 3 दिसंबर 2023 को चुनाव परिणाम घोषित किया जाएगा।

‘कट्टर इस्लामी सोच के खिलाफ खड़े हों गीता-उपनिषद मानने वाले हिन्दू’: जिसने बनाई हमास, उसके ही बेटे ने कहा- इजरायल के पीछे एकजुट हो दुनिया

आतंकी संगठन हमास की स्थापना करने वाले शेख हसन यूसुफ के सबसे बड़े बेटे मोसाब हसन यूसुफ ने मंगलवार (31 अक्टूबर, 2023) को कहा कि वक्त आ गया है कि इस आतंकी संगठन के खिलाफ खड़ा हुआ जाए। हसन यूसुफ ने हमास आतंकवादियों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए भारत के लोगों और हिंदुओं की तारीफ की है। उन्होंने ‘सन ऑफ हमास’ नाम से किताब भी लिखी है।

टाइम्स नाउ को दिए इंटरव्यू में 45 वर्षीय मोसाब हसन यूसुफ ने कहा कि कट्टर मुस्लिम किसी और के साथ नहीं रह सकते हैं और न ही वे ऐसा करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “हिंदुओं को कोई परेशानी नहीं है, ईसाई और यहूदी भी सह-अस्तित्व में हैं। हिंसा केवल कट्टर मुस्लिमों की ओर से ही क्यों आती है?”

उन्होंने आगे कहा, “मुझे बाकी दुनिया से कोई परेशानी नहीं है। भारतीयों को कोई दिक्कत नहीं है। ईसाई, यहूदी, हम सभी सह-अस्तित्व में हैं। हमास और किसी भी अन्य इस्लामी आंदोलन को ख़त्म करने की ज़रूरत है। हमें इसे बहुत खुले तौर पर और स्पष्ट तरीके कहना होगा। आतंकवाद स्वीकार नहीं है।”

फिलिस्तीन के आतंकी संगठन हमास से अलग होने के बाद युसूफ इजरायल की सिक्योरिटी एजेंसी शिन बेट के लिए जासूसी का काम कर चुके हैं। 2000 के दशक की शुरुआत में दूसरे इंतिफादा (विद्रोह) के दौरान आतंकवादी हमलों को नाकाम करने और शिन बेट की मदद करने की उनकी कोशिशों के लिए उन्हें “ग्रीन प्रिंस” का खिताब दिया गया।

उन्हें हमास के फाउंडर शेख हसन यूसुफ ने छोड़ दिया था। शेख हसन को 60 अन्य हमास नेताओं के साथ बीते महीने अक्टूबर में वेस्ट बैंक में रेड के दौरान गिरफ्तार किया गया था।

मोसाब हसन यूसुफ ने खुलासा किया कि उन्होंने कट्टर इस्लामी विचारधारा को खारिज कर दिया और हिंसा को न कहने के लिए उन्हें लगभग मौत से गुजरना पड़ा है। उन्होंने कहा, “मेरे देश ने मुझसे किनारा कर लिया। मुझे शैतान करार दिया गया। ऐसा इसलिए है क्योंकि मैंने हिंसा, रक्तपात और आत्मघाती बम हमलों को ना कहा है। वे हर उस शख्स के साथ यही करते हैं जो उनके तरीके से अलग होता है। मैं दोनों पक्षों को जानता हूँ और इस हक के आधार पर मैं कहता हूँ कि हमें इजरायल के पीछे एकजुट होना होगा।”

इंटरव्यू में आगे यूसुफ ने यह भी कहा कि हमास की मानसिकता को खत्म करने की जरूरत है। युसूफ ने कहा, “उन्हें यह बताने की ज़रूरत है कि ये जिंदगी जीने का तरीका नहीं है। उन्होंने क्रूरता भरे काम किए हैं। हम ऐसे समूह को स्वीकार नहीं करते जो इस्लामिक राज्य बनाने के लिए पूरी मानवता पर हावी होना और शासन करना चाहता है। धरती किसी एक मजहब की नहीं है। यह हमास या कट्टर मुस्लिमों का नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा, “हमास ‘स्वतंत्रता सेनानी’ नहीं है जैसा कि कई लोग दावा कर रहे हैं। वे जोकरों का एक समूह हैं जो सबको इनकार कर जी रहे हैं। हमास का नागरिकों पर क्रूर हमले करने का एक लंबा इतिहास रहा है।” इस दौरान हमास फाउंडर के बेटे ने भगवान कृष्ण, गीता और उपनिषदों को मानने वाले भारतीयों और हिंदुओं से कट्टर इस्लामी विचारधारा के खिलाफ आवाज उठाने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, “भारत में मेरी सेना, जो लोग कृष्ण और गीता और उपनिषदों को समझते हैं, उन्हें कमर कसने और दुनिया में इस अल्पसंख्यक समुदाय को दिखाने की जरूरत है कि कट्टर मुस्लिमस्वीकार्य नहीं हैं। जिस तरह से वे हिंसा फैलाते हैं और जिस तरह से वे अपना एजेंडा हासिल करना चाहते हैं वह स्वीकार्य नहीं है। भारतीयों को आगे बढ़ना चाहिए, हिंसा के रास्ते नहीं। लेकिन उन्हें दृढ़ रहना चाहिए और किसी भी तरह की इस्लामी दखलअंदाजी को स्वीकार नहीं करना चाहिए।”

उन्होंने यह भी कहा कि हमास सिर्फ एक राजनीतिक आतंकवादी समूह नहीं है। यह एक मजहबी आतंकवादी समूह है। युसूफ ने कहा, “अगर यह एक राजनीतिक समूह होता, तो हम उन पर समझौता करने और समाधान निकालने और हिंसा छोड़ने के लिए पर्याप्त दबाव डाल सकते थे। लेकिन हमास झुक नहीं सकता क्योंकि वे मरना पसंद करते हैं न कि अपनी विचारधारा छोड़ना। वे खुद को जिहादी मानते हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि हमास का एकमात्र मिशन इजरायल को नेस्तानाबूद करना है। हमास फाउंडर के बेटे ने कहा, “वे अपने इस्लामिक राज्य बनाने की शर्त के तौर पर 10 मिलियन यानी एक करोड़ इजरायलियों को स्थानांतरित होने के लिए मजबूर करना चाहते हैं। हम उन्हें वह नहीं दे सकते जो वे माँग रहे हैं।”

मोसाब हसन यूसुफ ने इस दौरान ये भी खुलासा किया कि गाजा पट्टी में हमास के मौजूदा फिलिस्तीनी नेता याह्या सिनवार अल-शिफा अस्पताल के नीचे छिपे हुए हैं। यूसुफ ने यह भी कहा कि वह खुद को बचाने के लिए अस्पताल में मरीजों को ढाल के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं।

इससे पहले फॉक्स न्यूज के इंटरव्यू में युसूफ ने कहा था,”गाजा को हमास से मुक्त कराकर इजरायल फिलिस्तीनी लोगों पर सबसे बड़ा उपकार कर रहा है।”

गौरतलब है कि 7 अक्टूबर को, 2,500 से अधिक हमास आतंकवादियों ने जमीन, हवा और समुद्र से इज़रायल पर हमला किया। इसमें 1,400 लोग मारे गए, जिनमें से अधिकांश आम नागरिक थे। इसके साथ ही 30 बच्चों सहित 230 लोगों का अपहरण कर लिया था। वहीं हमास के हमले के बाद इजरायल ने गाजा पर जवाबी हमला किया जो अभी तक जारी है।

‘बजरंग बली की गदा से होगा तालिबान का इलाज’: राजस्थान के ‘योगी’ को CM योगी ने बताया अपना ही रूप, बोले – यूपी में हुआ होता कन्हैया लाल जैसा हत्याकांड तो…

राजस्थान के विधानसभा चुनाव में भी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जलवा सिर चढ़ कर बोल रहा है। अलवर में नाथ संप्रदाय के एक और योगी है – बाबा बालकनाथ। योगी आदित्यनाथ उनके लिए चुनाव प्रचार करने बुधवार (1 नवंबर, 2023) को पहुँचे, जहाँ उन्होंने इस्लामी कट्टरपंथ के खिलाफ भी आग उगला। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि तालिबान का इलाज हनुमान जी की गदा से होगा। उन्होंने राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार पर तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि इस बार जनता इसे सबक सिखाएगी।

सीएम योगी ने इजरायल-हमास युद्ध का भी जिक्र किया। उन्होंने याद किया कि कैसे उदयपुर में कन्हैया लाल तेली की हत्या कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार में अयोध्या में भव्य राम मंदिर बन रहा है, जबकि कॉन्ग्रेस इस मुद्दे का समाधान नहीं चाहती थी। उन्होंने कहा कि कश्मीर में भी अनुच्छेद-370 को निरस्त कर के आतंकवाद का खात्मा किया गया। उन्होंने कहा कि इजरायल अपनी रक्षा के लिए चुन-चुन कर निशाना साध रहा है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गाजा में इजरायल तालिबानी मानसिकता को कुचलने का काम कर रहा है, आतंकवाद सभ्य समाज के लिए सबसे दबा कलंक है। बता दें कि बाबा बालकनाथ अलवर के तिजारा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। उनके लिए चुनाव प्रचार करते हुए सीएम योगी ने भाजपा सरकार की योजनाओं का जिक्र किया और कॉन्ग्रेस सरकार में लूट-खसोट को मुद्दा बनाया। सीएम योगी की उपस्थिति में बाबा बालकनाथ ने नामांकन का पर्चा भी भरा।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राजस्थान का मुख्यमंत्री आवास अब ‘फतवा हाउस’ बन चुका है, जहाँ से सनातन धर्म के विरोध में ऐलान किए जाते हैं। उन्होंने याद किया कि कैसे राजस्थान में श्रीराम के जयकारों पर प्रतिबंध लगा दिए जाते हैं और धार्मिक कार्यक्रमों पर सख्त कानून लागू कर दिए जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर कन्हैया लाल हत्याकांड यूपी में हुआ होता तो हत्यारों का क्या अंजाम होता ये बताने की जरूरत भी नहीं है।

उन्होंने ध्यान दिलाया कि कैसे राजस्थान में गोवंश को भी नुकसान पहुँचाया जाता है। उन्होंने कहा कि आज भारत एक नए भारत के रूप में है। सीएम योगी ने बताया कि कैसे यूपी में बुलडोजर ने गुंडागर्दी खत्म कर दी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इसी तरह राजस्थान में भाजपा की सरकार आते ही सभी गुंडे घरों में कैद हो जाएँगे। उन्होंने बाबा बालकनाथ को अपना ही रूप बताते हुए उन्हें आते देने की अपील की। उन्होंने बिना नाम लिए तिजारा से कॉन्ग्रेस प्रत्याशी इमरान खान पर भी निशाना साधा। बता दें कि बाबा बालकनाथ भी नाथ संप्रदाय से ही आते हैं।