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इधर कन्हैया लाल की अस्थियों को विसर्जन का इंतजार, उधर उदयपुर की जनता कॉन्ग्रेस को तिलांजलि देने को तैयार: जानिए जमीन पर कौन से फैक्टर तय कर रहे चुनावी गणित

राजस्थान में विधानसभा चुनाव का शोर है। चुनावी शोर में मेवाड़ रीजन का उदयपुर जिला भी अछूता नहीं है। ये वही उदयपुर है, जो पिछले कुछ समय से काफी चर्चा में रहा। एक दर्जी कन्हैया लाल की उनके दुकान में घुसकर जिहादियों ने इसी उदयपुर में मौत के घाट उतार दिया था, जिसकी न सिर्फ चर्चा पूरे देश में हुई, बल्कि जिहादी मानसिकता के विरोध में खूब प्रदर्शन भी हुए। अब उसी उदयपुर में राजनीतिक पार्टियों ने चुनावी जीत के लिए पूरी ताकत लगा दी है, लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट कहती है कि कॉन्ग्रेस की राह इस बार बेहद मुश्किल है।

कॉन्ग्रेस की मुश्किल राह में अभी तक कन्हैया लाल हत्याकांड का कलंक तो है ही, राजस्थान में युवाओं के साथ लगातार होता धोखा और अशोक गहलोत सरकार की प्रशासनिक विफलता भी है। साथ ही पूरे राजस्थान में सचिन पायलट जैसे युवा नेताओं की मेहनत को अशोक गहलोत जैसे ‘जादूगर’ का खा जाना भी जनता को खल रहा है।

कॉन्ग्रेस की विफलता से जनता नाराज

न्यूज 18 से बातचीत में स्थानीय युवकों का कहना है कि अशोक गहलोत की अगुवाई में कॉन्ग्रेस सरकार ने उदयपुर की हमेशा अनदेखी की है। राज्य में एक के बाद एक पेपरलीक कांड हो रहे हैं। कोई भी भर्ती पूरी नहीं हो पा रही है। बेरोजगारी तेजी से बढ़ रही है तो उदयपुर में कन्हैयालाल जैसे आम आदमी की आतंकवादी हमले में हत्या कर दी जाती है। क्या ऐसे प्रशासन चलता है? आम लोग अशोक गहलोत सरकार द्वारा घोषित मुफ्त की चुनावी रेवड़ियों पर भी नाराजगी जता रहे हैं।

लोगों का कहना है कि अगर प्रशासनिक व्यवस्था अच्छी होती तो न ही पेपर लीक जैसे कांड लगातार होते और न ही कन्हैया लाल जैसों की जान जाती। ऐसे में अशोक गहलोत को चुनावी रेवड़ियों की जरूरत नहीं पड़ती। इकबाल नाम के मुस्लिम युवक का कहना है कि राजस्थान में पहले सांप्रदायिक तनाव नहीं दिखता था, लेकिन अब नेताओं की वजह से राजस्थान का भी चुनावी सांप्रदायीकरण हो गया है।

उदयपुर की दर्दनाक घटना कॉन्ग्रेस के लिए वोटबैंक का मौका: प्रधानमंत्री मोदी

उदयपुर में कन्हैया लाल की हत्या के पूरा हिंदू समाज एकजुट नजर आ रहा है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कन्हैया लाल हत्याकांड की बात चित्तौड़गढ़ की रैली में उठाकर जनता को फिर से याद दिलाई है कि अशोक गहलोत के शासन में कानून व्यवस्था की स्थिति कैसी है। इसके लिए उन्होंने कॉन्ग्रेस की वर्तमान सरकार को दोषी ठहराया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चित्तौड़गढ़ की रैली में कहा था, “उदयपुर में जो हुआ उसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। लोग कपड़े सिलवाने के बहाने आते हैं और बिना किसी डर या खौफ के दर्जी का गला काट देते हैं। इस मामले में भी कॉन्ग्रेस को वोट बैंक नजर आया।”

प्रधानमंत्र मोदी ने राज्य सरकार से पूछा कि उदयपुर के दर्जी हत्याकांड में कॉन्ग्रेस पार्टी ने क्या किया, वोट बैंक की राजनीति की? बता दें कि भाजपा की निलंबित नेता नूपुर शर्मा का समर्थन करने के कारण कन्हैया लाल तेली की हत्या कर दी गई थी, जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया था।

भाजपा की उदयपुर पर खास नजर

भारतीय जनता पार्टी की खास नजर उदयपुर जिले पर है। इसकी कई वजहें हैं, लेकिन एक वजह जो पूरे चुनाव को प्रभावित कर रही है, वो है मुस्लिम तुष्टिकरण की वजह से कॉन्ग्रेस का घिरना और भाजपा का हिंदुत्व कार्ड। उदयपुर की 8 में से 5 विधानसभा सीटें भले ही आरक्षित श्रेणी की रही हों, लेकिन पूरे जिले को प्रभावित करने वाले उदयपुर विधानसभा सीट पर लंबे समय से भाजपा का कब्जा रहा है। यहीं से अमित शाह ने राजस्थान के चुनावी रण की शुरुआत की तो भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी उदयपुर जिले को प्राथमिकता में रखा है।

कॉन्ग्रेस पर वोटबैंक की राजनीति के आरोप

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उदयपुर में 30 जून 2023 को रैली की थी। उन्होंने अशोक गहलोत के पाप गिनाए थे। अमित शाह ने मंच से कहा था, “अशोक गहलोत की सरकार भ्रष्टाचार करने में नंबर-1 पर है। आज आपके पास ये हिसाब माँगने का मौका है कि राजस्थान सचिवालय के अंदर मिला दो करोड़ रुपया और एक किलो सोना किसका है? इस सरकार ने भ्रष्टाचार के सारे रिकॉर्ड तोड़ने का काम किया है।”

अमित शाह ने कहा था, “गहलोत जी ने जितने वादे किए थे, वो सब तोड़ दिए। कन्हैया लाल को सुरक्षा इन्होंने नहीं दी। जब तक वो मर गए तब तक आपकी पुलिस चुप रही। आप तो आरोपियों को पकड़ना भी नहीं चाहते थे… NIA ने पकड़ा। राजस्थान सरकार स्पेशल कोर्ट नहीं बनाती है, वरना तो अभी तक कन्हैया लाल के दोषियों को फाँसी पर लटका चुके होते। इनको शर्म आनी चाहिए, ये वोटबैंक की राजनीति करते हैं।”

कन्हैया लाल की अस्थियाँ माँग रहीं न्याय

दरअसल, 28 जून 2022 को उदयपुर में कन्हैया लाल दर्जी की दो लोगों ने बेरहमी से हत्या कर दी थी। कन्हैया लाल एक हिंदू थे, जिनके बेटे ने भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के समर्थन में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया था। इस पोस्ट के बाद कन्हैया लाल को लगातार धमकियाँ मिल रही थीं। हत्या के दिन दो लोग- मोहम्मद रियाज अंसारी और मोहम्मद गौस दुकान पर आए और कन्हैया लाल पर धारदार हथियारों से हमला कर दिया।

उन्होंने कन्हैया लाल की गला रेतकर हत्या कर दी और फिर उसका वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। इस वीडियो में दोनों हमलावरों ने कन्हैया लाल की हत्या को एक “बयान” के रूप में बताया और कहा कि वे नूपुर शर्मा के समर्थन में हत्या कर रहे हैं।

कन्हैया लाल की हत्या ने पूरे देश में आक्रोश और गुस्से का माहौल पैदा कर दिया। बता दें कि इस घटना के करीब डेढ़ साल बीत जाने के बावजूद अभी तक हत्यारों को सजा नहीं मिली हैं, तो कन्हैया लाल की अस्थियों का विसर्जन भी नहीं हुआ है। इस मामले में एक आरोपित को कोर्ट ने जमानत भी दे दी है।

साल 2018 में भाजपा ने 8 में से 6 सीटों पर हासिल की थी जीत

उदयपुर में आठ विधानसभा सीटें हैं। इन 8 विधानसभा सीटों में से भारतीय जनता पार्टी को 6 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं, कॉन्ग्रेस को सिर्फ 2 सीटों से संतोष करना पड़ा था। उदयपुर जिले में गोगुंडा, खेरवाड़ा, झाडोल, उदयपुर (ग्रामीण), सालुंबर, मावली, उदयपुर और वल्लभनगर विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें से शुरुआती पाँच विधानसभा सीटें साल 2018 के चुनाव में एसटी वर्ग के लिए आरक्षित थी।

इसमें से खेरवाड़ा (सुरक्षित) सीट पर कॉन्ग्रेस के दयाराम परमार ने जीत दर्ज की थी। वल्लभनगर सीट पर कॉन्ग्रेस के गजेंद्र सिंह शक्तावत विजयी हुए थे। गजेंद्र सिंह शक्तावत की कोरोना में हुई असामयिक मृत्यु के बाद उनकी पत्नी ने उप-चुनाव में जीत हासिल की थी। बाकी की 6 विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा था।

उदयपुर विधानसभा सीट पर गुलाबचंद कटारिया का लंबे समय से दबदबा रहा है और वो महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं। उदयपुर जिला कटारिया का गढ़ माना जाता है। कटारिया को बीते फरवरी माह में केंद्र सरकार ने विपक्ष के नेता के पद से मुक्त करके राज्यपाल बना दिया। वो सक्रिय राजनीति से भले दूर हो गए हों, लेकिन उनका असर उदयपुर की राजनीति पर दिखता है।

विपक्षी नेताओं को Apple से मिले ‘सरकार प्रायोजित हैकरों से सावधान’ का नोटिफिकेशन, केंद्र ने दिए जाँच के आदेश: कम्पनी बोली- ये हमेशा सही नहीं होते

एप्पल के आइफोन का प्रयोग करने वाले कुछ विपक्षी सांसदों ने मंगलवार (31 अक्टूबर 2023) को दावा किया कि उनके डिवाइस पर खतरे की नोटिफिकेशन आई है। इस नोटिफिकेशन में लिखा है कि सरकार द्वारा प्रायोजित हैकर्स आपके आइफोन को निशाना बना सकते हैं। यह नोटिफिकेशन iMessage और एप्पल मेल में भेजा गया।

ये नोटिफिकेशन महुआ मोइत्रा, शशि थरूर, सुप्रिया श्रीनेत, पवन खेड़ा, केसी वेणुगोपाल, प्रियंका चतुर्वेदी, राघव चड्ढा, असदुद्दीन ओवैसी सहित कई लोगों को आए हैं। इन सांसदों एवं नेताओं ने केंद्र सरकार, खासकर गृह मंत्रालय पर निशाना साधते हुए उनकी जासूसी का आरोप लगाया है। कॉन्ग्रेस नेता पवन खेड़ा ने एक ऐसे ही मैसेज का स्क्रीनशॉट डालकर लिखा कि ‘मोदी सरकार, आप ऐसा क्यों कर रहे हो’?

वहीं, कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर ने यही स्क्रीनशॉट डालते हुए लिखा, “ये एक एप्पल आईडी से मिला है मुझे। मैं इस बात से खुश हूँ कि कम काम करने वाले अधिकारियों को मेरे जैसे करदाताओं के खर्चे पर व्यस्त रखा जा रहा है। करने को इससे अधिक महत्वपूर्ण कुछ और नहीं है?”

हालाँकि, जासूसी पर चिल्लाने वाले थरूर ने स्वयं ही एक ट्वीट में अपनी निजी ईमेल आईडी उजागर कर दी। इसके पश्चात उन्होंने यह ट्वीट डिलीट किया और दूसरा ट्वीट किया।

वहीं, कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने इस मामले पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। इसमें उन्होंने कहा कि उनके दफ्तर में कई लोगों को इस तरह मैसेज आए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा देश के युवाओं का ध्यान बाँटने की कोशिश कर रही है।

हालाँकि, ऐसा नहीं है कि यह मैसेज मात्र I.N.D.I. गठबंधन के लोगों को ही आए हैं। स्वतंत्र शोध संस्थान आब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) के मुखिया समीर सरन ने भी एक्स (पहले ट्विटर) पर बताया है कि उनको भी इस तरह का मैसेज मिला है।

ऐसे ही मैसेज आर्मेनिया के कुछ लोगों के आईफोन पर भी प्राप्त हुए हैं। आर्मेनिया के पत्रकार आर्तुर पापयान ने भी एक्स पर पोस्ट करके बताया है कि उनके आइफोन पर ऐसे मैसेज आए हैं। उन्होंने आर्मेनिया के सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों से अपना फ़ोन चेक करवाने की अपील की है।

हालाँकि, एप्पल स्वयं अपनी वेबसाइट पर कहता है कि उसके द्वारा आईफोन यूजर्स को भेजे गए सरकार प्रायोजित जासूसी के बारे में मैसेज हमेशा सही नहीं होते हैं। यहाँ तक कि जो मैसेज विपक्ष के सांसदों को आया है उसमें भी लिखा है कि ‘यह मैसेज झूठा हो सकता है, लेकिन आप चेतावनी को गंभीरता से लें’।

एप्पल ने एक बयान जारी करके कहा है, “एप्पल इन नोटिफिकेशन को किसी सरकार प्रायोजित हैकर से नहीं जोड़ता है। ये हैकर अच्छा पैसा पाते हैं और इनके हमले समय के साथ बदलते रहते हैं। ऐसे खतरों को पहचानने के लिए उपयोग किए जाने इंटेलिजेंस मैसेज अक्सर गड़बड़ या अधूरे होते हैं। यह संभव है कि कुछ एप्पल नोटिफिकेशन झूठे हों या कुछ हमले पहचाने ही ना जाएँ।”

गौरतलब है कि यह एप्पल नोटिफिकेशन उसके ऐसे यूजर्स को सावधान करने के लिए कंपनी द्वारा जारी की जाती है, जिन पर किसी सरकार द्वारा प्रायोजित हैकरों ने हमला किया हो। यह जानकारी एप्पल की वेबसाइट पर दिया गया है।

देश के रेल और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि वह सांसदों के उन बयानों से चिंतिंत हैं, जिनमें उन्होंने एप्पल से प्राप्त नोटिफिकेशन के बारे में बात की है। उन्होंने इसको लेकर एप्पल के दावे को भी दोहराया है कि यह सदैव सही नहीं होता। साथ ही मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एप्पल की सुरक्षा तकनीकों के विषय में भी बात की है।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा और निजता की रक्षा करने के लिए पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने इस मामले की जाँच करवाए जाने की घोषणा की है और कहा है, “हमने एप्पल से भी कहा है कि वह जाँच में सहयोग करें”।

भारत का गलत नक्शा पोस्ट करने वाला खालिस्तान समर्थक पंजाबी गायक शुभ की तस्वीर, हाथ में है इंदिरा गाँधी की हत्या की फोटो वाला हुडी: जानिए इसके पीछे की सच्चाई

कनाडा में रह रहे पंजाबी गायक शुभ का एक वीडियो वायरल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसमें वह एक काले रंग की हुडी लहराते हुए दिख रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि शुभ ने जिस हुडी को लहराया है, उस पर पंजाब का मानचित्र और उस मानचित्र में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या की आर्ट बनी हुई थी।

यह हुडी लंदन के एक कन्सर्ट के दौरान की है। हालाँकि, वीडियो का असली सच कुछ और है।

इस सबंध में सबसे पहले पोस्ट शेरे पंजाब यूके नाम के अकाउंट ने एक्स (पहले ट्विट्टर) पर एक वीडियो ट्वीट किया। इसमें लिखा हुआ था, “पंजाबी कलाकार शुभ ने एक हुडी पकड़ी हुई है, जिसमें भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी उर्फ़ मैमुना बेगम का स्वागत शहीद भाई सतवंत सिंह और शहीद भाई बेअंत सिंह कर रहे हैं। #Neverforget84”

शुभ का जो वीडियो वायरल हुआ है

इसके पश्चात यह वायरल हो गया और कई खालिस्तान समर्थक अकाउंट इस वीडियो को शेयर करने लगे।

हालाँकि, ऑपइंडिया के फैक्टचेक में सामने आया है कि शुभ ने जो हुडी पकड़ी हुई थी उस पर सिर्फ पंजाब का नक्शा बना हुआ था, ना कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या से सम्बंधित आर्ट है।

जिस हुडी का दावा किया गया और जो हुडी लहराई शुभ ने

इस हुडी में पंजाब के सभी जिले बने हुए थे, जो कि कन्सर्ट के दौरान किसी दर्शक ने शुभ को दी थी। हालाँकि, शुभ ने जो हुडी लहराई है और जिस हुडी को लेकर दावा किया जा रहा है, वे बिलकुल एक जैसी दिखती हैं। इसलिए यह फर्जी दावा और मजबूत हुआ। हालाँकि, इमेज की गुणवत्ता निष्कर्ष निकालने में बाधा बन रही है।

इंदिरा गाँधी की हत्या की आर्ट वाली जिस हुडी की बात हो रही है, उसे एक खालिस्तान समर्थक ‘अकाल क्लोथिंग’ नाम की कम्पनी ने बनाया है। अकाल क्लोथिंग ने यह वीडियो अपने इन्स्टाग्राम अकाउंट पर भी डाला है। अकाल क्लोथिंग ने शुभ से जुड़े पुराने विवाद को अपनी हुडी का प्रचार करने के लिए उपयोग किया है।

शुभ के हुडी लहराने का वीडियो

इससे पहले शुभ ने अपने इन्स्टाग्राम पर भारत का विवादित नक्शा साझा किया था, जिसमें पंजाब से ऊपर के हिस्से गायब थे। यानी इस मैप में जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश को नहीं दिखाया गया था। इसके साथ ही इसमें उत्तर-पूर्वी राज्यों को भी नहीं दिखाया गया था।

इसके चलते सितम्बर में होने वाला शुभ का इंडिया टूर भी रद्द हो गया था। शुभ के भारत में होने वाले कन्सर्ट के प्रायोजक बनने से बोट कम्पनी ने मना कर दिया था। विराट कोहली ने भी अपने इन्स्टाग्राम अकाउंट से शुभ को अनफॉलो कर दिया था। हालाँकि, शुभ ने इस मामले में बाद में सफाई पेश की थी।

₹100 करोड़ की जमीन आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी को ₹100 में दी, योगी सरकार ने वापस ली: बोले अखिलेश यादव- मुस्लिम होने के कारण बने निशाना

उत्तर प्रदेश शासन ने समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन वापस लेने का फैसला किया है। सरकार की तरफ से आज़म खान पर लीज की शर्तों का पालन नहीं करने का आरोप लगा है। मंगलवार (31 अक्टूबर 2023) को कैबिनेट की मीटिंग में इस निर्णय को मंजूरी दी गई। अब इस जमीन को बेहद कम दाम पर उद्योग लगाने के लिए ग्राम समाज को देने को तैयारी है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस निर्णय की आलोचना की है।

रामपुर से भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने मीडिया को बताया कि यह मामला साल 1990 का है। तब रामपुर में BSA ऑफिस के पास 4,000 बच्चों वाला एक राजकीय मुर्तजा स्कूल हुआ करता था। आज़म खान ने नियमों के खिलाफ जाते हुए स्कूल को खाली करवा कर इसकी पूरी जमीन जौहर ट्रस्ट के नाम करवा दी थी। सपा की दोबारा सरकार बनने पर आज़म ने इस जमीन की लीज अपने निजी रामपुर पब्लिक स्कूल के नाम पर ट्रांसफर करवा ली थी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने इसे हेरा-फेरी माना है। भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने सवाल किया कि 100 करोड़ रुपए की जमीन आजम खान को महज 100 रुपए के सालाना लीज पर कैसे दे दी गई। इसके साथ ही उन्होंने इस कदम को पिछली सरकार द्वारा सभी नियमों को ताक पर रखते हुए 4,000 बच्चों का भविष्य खराब करने वाला बताया है। माध्यमिक शिक्षा विभाग अब जौहर ट्रस्ट से जमीन और भवन को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

इस जमीन को ग्राम समाज को सौंपते हुए अब यहाँ उद्योग धंधे लगाने की घोषणा हुई है। योगी कैबिनेट में लिए गए इस फैसले को जेल में बंद आज़म खान के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। आकाश सक्सेना ने भरोसा दिया है कि किसी भी बच्चे की पढ़ाई या करियर पर बुरा असर नहीं पड़ने दिया जाएगा। यह कार्रवाई सक्सेना की शिकायत पर ही हुई है।

वहीं, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने UP सरकार के इस फैसले की आलोचना की है। उन्होंने योगी सरकार पर आरोप लगाया है कि आज़म खान को मुस्लिम होने के नाते परेशान किया जा रहा है। उन्होंने ऐसे कदमों को एक गलत परम्परा भी बताया। अखिलेश ने अपने सम्बोधन में आज़म खान के नाम में साहब और आदरणीय भी जोड़ा।

‘मैं तो कॉन्ग्रेसी हूँ…’: MP में कार्तिक आर्यन का चेहरा दिखाकर हो रहा था हाथ साफ, बोले बॉलीवुड स्टार- ये सब फर्जी हैं

बॉलीवुड अभिनेता कार्तिक आर्यन ने कॉन्ग्रेस के कई नेताओं और उनके समर्थकों द्वारा फैलाए जा रहे उनके वीडियो वाले एक विज्ञापन का खंडन किया है। इस एडिटेड वीडियो के जरिए ये कॉन्ग्रेसी दावा कर रहे थे कि कार्तिक आर्यन ने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों में उनका समर्थन किया है। कार्तिक आर्यन को इस फर्जी वीडियो में कहते हुए सुना जा सकता है, “मैं भी तो कॉन्ग्रेसी हूँ।”

ग्वालियर के रहने वाले कार्तिक ने स्पष्ट किया है कि जिस वीडियो को कॉन्ग्रेस के वीडियो के तौर पर प्रसारित किया जा रहा है, वह असल में क्रिकेट वर्ल्ड कप 2023 के लिए डिज्नी हॉटस्टार का कैम्पेन था। कार्तिक आर्यन ने इस संबंध में एक्स (पहले ट्विटर) पर असली ऐड डालकर लिखा कि ‘यही असली एड है और बाकी सब फर्जी है’।

वीडियो में डाले गए फर्जी स्लाइड और वॉइसओवर ताकि यह कॉन्ग्रेस का वीडियो लगे

असली वीडियो में डिज्नी हॉटस्टार पर 2023 वर्ल्डकप के फ्री स्ट्रीम किए जाने की बात हो रही थी। हालाँकि, कॉन्ग्रेस द्वारा चलाए जा रहे वीडियो में इसे राजनीतिक फायदे के लिए अपने चुनाव प्रचार से जोड़ दिया गया। इस विज्ञापन में बोल रहे अभिनेताओं की आवाज को भी वॉइसओवर से बदल दिया गया है।

वीडियो में जहाँ पर कार्तिक एक महिला से कहते हैं, “फ्रेड्डी मैं ही हूँ”। इसे बदलकर कॉन्ग्रेस समर्थकों ने “अरे मैं भी तो कॉन्ग्रेसी हूँ” कर दिया। इसके अलावा, इस वीडियो में कॉन्ग्रेस द्वारा मध्य प्रदेश में किए गए वादों की भी जानकारी दी गई है।

कॉन्ग्रेस नेताओं और उनके समर्थकों ने चला दी फर्जी वीडियो

एक्स पर यूथ कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता और जम्मू-कश्मीर के प्रभारी आबिद मेरे ने लिखा, “बॉलीवुड अभिनेता कार्तिक आर्यन ने मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस को समर्थन दिया है। मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस आ रही है।”

अक्सर फर्जी पोस्ट करने वाले कॉन्ग्रेस समर्थक शान्तनु ने लिखा, “बॉलीवुड एक्टर कार्तिक आर्यन ने मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस और कमलनाथ जी को समर्थन दिया है।” शांतनु ने ट्विटर यूजर सत्यम इनसाइट्स नाम के एक व्यक्ति की आईडी से डाला गया वीडियो उपयोग किया था, अब यह डिलीट हो चुका है।

कार्तिक आर्यन का फर्जी वीडियो डालते कॉन्ग्रेस समर्थक

कॉन्ग्रेस समर्थक रविंदर कपूर ने लिखा, “आखिरकार बॉलीवुड कॉन्ग्रेस के लिए जाग गया है। बॉलीवुड के दिलों की धड़कन कार्तिक आर्यन ने मध्य प्रदेश इलेक्शन में कॉन्ग्रेस को समर्थन दिया है। यह कॉन्ग्रेस की तरफ से एक और बढ़िया कैम्पेन है।”

कार्तिक आर्यन का फर्जी वीडियो डालते कॉन्ग्रेसी

कपूर के वीडियो को ही कोट करते हुए कॉन्ग्रेस समर्थक नाजिया माजिद ने लिखा, “बिलकुल 100%। कार्तिक आर्यन का यह कदम बॉलीवुड के नई पीढ़ी के शिक्षित अभिनेताओं को इस बात के लिए प्रोत्साहित करेगी कि वह कॉन्ग्रेस का समर्थन करें। कार्तिक आर्यन एक इंजीनियर हैं और कुछ पढ़े-लिखे लोगों में से एक हैं। इसलिए वह समझते हैं कि कॉन्ग्रेस क्या है?”

कार्तिक आर्यन का फर्जी वीडियो डालते कॉन्ग्रेसी

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए 17 नवम्बर 2023 को मतदान होगा, जबकि मतगणना 30 नवम्बर 2023 को होगी। भाजपा और कॉन्ग्रेस, दोनों पार्टियाँ इस चुनाव के लिए जोर-शोर से प्रचार में जुटी हुई हैं।

Congress supporters peddle fake video of kartik aryan for MP election actor clarifies

फारूक अब्दुल्ला की बेटी को छोड़ चुके हैं सचिन पायलट, चुनाव में दिए एफिडेविट से खुलासा: पत्नी के नाम की जगह लिखा ‘तलाकशुदा’

कॉन्ग्रेस नेता सचिन पायलट अपनी पत्नी सारा से तलाक ले चुके हैं। इसका खुलासा राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए दाखिल पायलट के हलफनामे से हुआ है। सारा जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला की बेटी हैं और उमर अब्दुल्ला की बहन हैं।

सचिन पायलट ने टोंक से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार के तौर पर 31 अक्टूबर 2023 को अपना पर्चा दाखिल किया। इसमें पत्नी के नाम वाले कॉलम में उन्होंने तलाकशुदा लिखा है। इससे पहले 2018 में चुनावी हलफनामे में उन्होंने सारा को पत्नी बताया था। वैसे यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों ने तलाक कब लिया।

साल 2004 में हुई थी दोनों की शादी

सचिन पायलट और सारा अब्दुल्ला की शादी 15 जनवरी 2004 को हुई थी। दोनों के आरन और विहान नाम के दो बच्चे हैं। सारा अब्दुल्ला और सचिन पायलट की शादी काफी चर्चित रही थी। इनके अलग होने की चर्चा काफी समय से चल रही थी, लेकिन इसकी पुष्टि हुई है सचिन पायलट द्वारा विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी के तौर पर भले गए हलफनामे से। सचिन पायलट ने इसमें बताया है कि उनके दोनों बच्चे उन्हीं पर आश्रित हैं।

साल 2018 में शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुई थीं सारा

सचिन पायलट ने साल 2018 के चुनावी हलफनामे में सारा अब्दुल्ला की संपत्ति की भी जानकारी दी थी, लेकिन इस बार के हलफनामे में उन्होंने खुद को तलाकशुदा बताया है। इससे पहले भी साल 2014 के लोकसभा चुनाव के समय दोनों के तलाक की अफवाहें उड़ी थी, लेकिन तब सचिन ने इसका खंडन किया था। साल 2018 में जब सचिन पायलट उप-मुख्यमंत्री बने थे, तो शपथ ग्रहण समारोह के दौरान सारा अपने पिता फारूक अब्दुल्ला और दोनों बेटों आरन-विहान के साथ शामिल हुईं थी।

बता दें कि सचिन पायलट लंबे समय से राजनीति की दुनिया में हैं। साल 2004 में वो दौसा लोकसभा सीट से सांसद बने थे। साल 2009 में उन्होंने अजमेर लोकसभा सीट से चुनाव जीता था और केंद्रीय मंत्री भी बने थे। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का मुँह देखना पड़ा था, लेकिन साल 2018 में उनकी अगुवाई में कॉन्ग्रेस ने राजस्थान विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी।

हालाँकि शीर्ष नेतृत्व ने उनकी जगह अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री के तौर पर चुना था। पायलट को उपमुख्यमंत्री बनाया गया था। लेकिन कुछ समय बाद ही गहलोत और पायलट के बीच की तनातनी सार्वजनिक हो गई। पायलट की कैबिनेट से भी छुट्टी कर दी गई थी। फिलहाल सचिन पायलट एक बार फिर से टोंक विधानसभा सीट से चुनावी समर में उतर चुके हैं।

सेक्स से मना करती है पत्नी, घर जमाई बनाकर रखना चाहती है: दिल्ली हाई कोर्ट ने नहीं माना ‘मा​नसिक क्रूरता’, तलाक देने से इनकार

दिल्ली हाई कोर्ट ने अपनी पत्नी पर मानसिक क्रूरता का आरोप लगाकर तलाक माँगने वाले व्यक्ति की अर्जी ठुकरा दी है। इस व्यक्ति का कहना था कि पत्नी साथ नहीं रहना चाहती। सेक्स से मना करती है। उसे घर जमाई बनाना चाहती है।

30 अक्टूबर 2023 को हाई कोर्ट ने तलाक देने से इनकार करते हुए कहा कि शादीशुदा जोड़े के बीच मामूली मनमुटाव, थोड़े से चिड़चिड़ेपन और विश्वास की कमी को मानसिक क्रूरता नहीं माना जा सकता है। इससे पहले निचली अदालत ने भी इस जोड़े को तलाक देने से मना कर दिया था। इस जोड़े की शादी साल 1996 में हुई थी। 1998 में उनकी एक बेटी पैदा हुई।

पति का आरोप था कि पत्नी को केवल खुद का कोचिंग सेंटर चलाने में दिलचस्पी थी। कोई न कोई बहाना बनाकर वह उसे छोड़ देती थी और सेक्स से इनकार करती थी। इस केस की सुनवाई के दौरान जस्टिस संजीव सचदेवा की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि हालाँकि यौन संबंध से इनकार करना एक तरह से मानसिक क्रूरता मानी जा सकती है, लेकिन तब जब ये लंबे वक्त तक लगातार और जान-बूझकर किया जा रहा हो।

उन्होंने आगे कहा कि कोर्ट को इस तरह के नाजुक और संवेदनशील मुद्दों का निपटारा करने के लिए खासी सावधानी बरतने की जरूरत होती है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के आरोप केवल उलझन भरे और बगैर स्‍पष्‍टता के बयानों के आधार पर साबित नहीं किए जा सकते हैं। खासकर जब शादी पूरी तरह से रीति-रिवाजों से हुई हो।

तलाक के इस केस में कोर्ट ने देखा कि तलाक माँगने वाला पति याचिका में बताई गई किसी भी तरह की मानसिक क्रूरता की बात को साबित नहीं कर पाया। कोर्ट ने माना कि तलाक का ये केस शादी के रिश्ते में सामान्य मनमुटाव की तरफ इशारा कर रहा था। कोर्ट में सुबूतों से इस बात की पुष्टि भी हुई कि दरअसल कलह सास और बहु के बीच थी।

जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस मनोज जैन की बेंच ने कहा, “इस बात का कोई सकारात्मक संकेत नहीं है कि पत्नी का व्यवहार इस तरह का था कि उसका पति के उसके साथ रहना दूभर हो गया हो। मामूली चिड़चिड़ेपन और यकीन न होना मानसिक क्रूरता से नहीं जोड़ा जा सकता है।”

बेंच ने आगे ये भी कहा कि केवल इस आधार पर कि पत्नी ने पति की पुलिस में आपराधिक शिकायत की थी और इस वजह से उस पर एफआईआर दर्ज हुई, इसे क्रूरता नहीं कहा जा सकता है। कोर्ट ने आगे कहा, “महज इसलिए कि पत्नी ने अपनी शिकायत दूर करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जैसा कि उसके पति ने भी किया था, क्रूरता को बढ़ावा देना नहीं कहा जा सकता है। पति की ओर से पेश किए गए सबूतों को जब संभावनाओं की प्रबलता के पैमाने पर परखा गया, तो वो पत्नी की क्रूरता साबित करने के लिए पर्याप्त रूप से मजबूत नहीं लगे।'”

हाई कोर्ट की बेंच ने कहा, “इस तरह, जो तस्वीर निकल कर सामने आती है, वह बहुत साफ है। दोनों पक्षों के बीच विश्वास, आस्था और प्रेम की कमी हो गई थी, लेकिन इसके बाद भी ये शादीशुदा जोड़ा अपनी शादी को बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहा था।” अदालत ने उनकी शादी के सुधारे न जा सकने वाली हद तक टूटने के हालात की वजह से तलाक देने की पति की याचिका को भी खारिज कर दिया। कोई कोर्ट ने कहा कि ऐसी शक्ति केवल सुप्रीम कोर्ट के पास है और कोई भी पक्ष अधिकार के तौर पर इसकी माँग नहीं कर सकता।

मीडिया संस्थानों पर किया केस महुआ मोइत्रा ने वापस लिया, कारोबारी से पैसे-गिफ्ट लेकर सवाल करने के मामले में घिरी हुई हैं TMC सांसद

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने पैसे लेकर संसद में सवाल पूछने के मामले में मीडिया हाउसों के खिलाफ दायर मानहानि याचिका वापस ले ली है। मानहानि का मामला अब सिर्फ भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और वकील जय अनंत देहाद्राई के खिलाफ चलेगा। महुआ मोइत्रा ने दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष दायर अपनी याचिका से पक्षकार के रूप में मीडिया घरानों को मंगलवार (31 अक्टूबर 2023) को हटाने का अनुरोध किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोइत्रा के वकील ने कहा कि वह इस चरण में किसी तरह की अंतरिम राहत के लिए दबाव नहीं डाल रहे हैं। उन्होंने न्यायमूर्ति सचिन दत्ता को बताया कि मुकदमा सिर्फ दो प्रतिवादियों- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे और सुप्रीम कोर्ट के वकील जय अनंत देहाद्राई के खिलाफ जारी रहेगा।

बता दें कि महुआ मोइत्रा के पूर्व पार्टनर जय अनंत देहाद्राई ने पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि महुआ ने संसद में सवाल पूछने के बदले उद्योगपति दर्शन हीरानंदानी से पैसे ली हैं। इस पत्र के आधार पर निशिकांत दुबे ने महुआ की शिकायत लोकसभा अध्यक्ष से की थी। मीडिया हाउसों ने इस खबर की रिपोर्टिंग की थी। इसके बाद महुआ ने दिल्ली हाईकोर्ट में मानहानि का मामला दर्ज कराया था।

महुआ मान चुकी हैं संसद की लॉगिन-आईडी शेयर करने की बात

अपनी तीखी ज़ुबान के लिए मशहूर तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने दो दिन पहले स्वीकार किया था कि कारोबारी दर्शन हीरानंदानी के साथ उन्होंने अपना संसद का लॉगिन आईडी और पासवर्ड शेयर किया था। शुक्रवार (27 अक्टूबर 2023) एक टीवी इंटरव्यू में ‘कैश फॉर क्वेरी’ की आरोपित सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि ऐसा करके उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है और ये किसी भी तरह से नियमों के खिलाफ नहीं है।

हीरानंदानी ने हलफनामा देकर कहा- दुबई में मिलती थी महुआ

बता दें कि बिजनेस मैन दर्शन हीरानंदानी ने अपने हलफनामे में माना है कि महुआ मोइत्रा उनसे दुबई में आकर मिलती थीं। उन्हें ब्लैकमेल करती थीं। उनका गलत फायदा उठाती थीं। दर्शन हीरानंदानी ने गिफ्ट और पैसा देने की बात भी कही थी। इसी संबंध में बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी शिकायत की थी। इसके बाद ओम बिरला ने इस मामले को संसद की आचार समिति को भेज दिया था।

महुआ ने माँगा 5 नवंबर तक का समय

संसद की आचार समिति ने ‘पैसे के बदले संसद में सवाल पूछने’ के मुद्दे की जाँच कर रही है। टीएमसी सांसद मोइत्रा पर कारोबारी दर्शन हीरानंदानी से नकद और अन्य तरह की मदद लेकर उनके प्रतिद्वंद्वी गौतम अडानी को टारगेट करते हुए और उन्हें फायदा पहुँचाने वाले संसद में सवाल पूछने के आरोप हैं।

महुआ मोइत्रा को संसद की आचार समिति ने 31 अक्टूबर 2023 को पेश होने को कहा था। वहीं, टीएमसी सांसद महुआ ने आचार समिति के अध्यक्ष विनोद कुमार सोनकर को दो पन्नों का लेटर लिख आने से इनकार कर दिया और इसके लिए 5 नवंबर 2023 की तारीख माँग ली।

जिससे ट्यूशन पढ़ता था कुशाग्र, उसके ही बॉयफ्रेंड ने किया 10वीं के छात्र का कत्ल: कानपुर में कारोबारी को ‘अल्लाह हू अकबर’ वाला लेटर भेज माँगे थे ₹30 लाख

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में कक्षा 10 के एक छात्र की हत्या उसकी ही पूर्व ट्यूटर ने कर दी है। मृतक का नाम कुशाग्र कनोडिया है। इस मामले में पुलिस ने छात्र की पूर्व ट्यूटर रचिता वत्स और उसके मंगेतर/बॉयफ्रेंड प्रभात शुक्ला और अंकित नाम के एक अन्य युवक को गिरफ्तार किया है। सोमवार (30 अक्टूबर 2023) को छात्र लापता हो गया था। इसके बाद 30 लाख रुपए की फिरौती माँगी गई थी। मंगलवार (31 अक्टूबर 2023) को छात्र का शव फजलगंज इलाके में मुख्य आरोपित प्रभात शुक्ला के पिता के घर से बरामद हुई है। फिरौती की चिट्ठी भी प्रभात ने ही लिखी थी।

पुलिस की पूछताछ में तीनों ने बताया कि फिरौती वाली चिट्ठी पर ‘अल्लाह हु अकबर’ उन्होंने लोगों को गुमराह करने के लिए लिखा था। प्रभात शुक्ला ही मृतक को बुलाकर अपने साथ ले गया था। पुलिस के हाथ लगे CCTV फुटेज से पता चला कि शुक्ला सोमवार को लगभग 4:30 बजे कनोडिया को लेकर एक स्टोरनुमा कमरे में जाता है और आधे घंटे बाद अकेले निकलता है। लेटर भेजने के लिए प्रयोग हुई स्कूटी को सीज कर दिया गया है। हालाँकि, तीनों आरोपितों से पूछताछ करते हुए पुलिस हत्या के असल कारणों की पड़ताल कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला कानपुर के रायपुरवा थाना क्षेत्र का है। यहाँ साड़ी का कारोबार करने वाले मनीष कनोडिया का मकान है। उनके 2 बेटों में से एक 15 साल का कुशाग्र कक्षा 10 का छात्र था। वह हर दिन की तरह सोमवार को भी कोचिंग करने गया था। जब काफी देर तक कुशाग्र लौटकर नहीं आया, तब उसके परिजनों ने खोजबीन शुरू कर दी। कुशाग्र का फोन भी स्विच ऑफ बता रहा था। जान-पहचान के साथ नाते-रिश्तेदारी में खोजने के बाद जब कुशाग्र का कुछ पता नहीं चला तब परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।

पुलिस केस दर्ज करके कुशाग्र की तलाश कर ही रही थी कि पीड़ित परिजनों को एक धमकी भरा पत्र मिला। पत्र के बीच में अल्लाह हु अकबर लिखा हुआ था। इसके अलावा, इसमें धमकी देते हुए कहा गया था कि ‘मैं नहीं चाहता कि आपका त्यौहार बर्बाद हो। आप मेरे हाथ पे पैसे रखो और लड़का 1 घंटे बाद आपके पास होगा।’ पत्र में लड़के की गाड़ी और मोबाइल फोन, दोनों ही पीड़ित परिवार के घर के बगल बने होटल सिटी क्लब के पास रखा बताया गया। न घबराने की नसीहत के साथ इस पत्र में ‘अल्लाह पर भरोसा’ रखने के लिए कहा गया था।

यह पत्र पीड़ित परिवार में एक युवक ने पहुँचाया था। सिक्योरिटी गार्ड के मुताबिक, चिट्ठी पहुँचाने वाला स्कूटी से आया था। संदिग्ध ने अपने चेहरे को ढँक कर के रखा हुआ था। इस स्कूटी के नंबर पर कालिख पुती हुई थी। पुलिस स्कूटी के आधार पर जाँच करते हुए महिला टीचर रचिता वत्स के घर पर पहुँच गई। वह 1 साल पहले तक मृतक को ट्यूशन पढ़ाया करती थी। हिरासत में लेकर महिला से पूछताछ के बाद कुशाग्र की लाश फज़लगंज स्थित प्रभात के पिता के मकान मेंर मिली।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रचिता वत्स और प्रभात शुक्ला का पिछले पाँच-छह सालों से प्रेम प्रसंग चल रहा था। इसी बीच रचिता वत्स कुशाग्र को ट्यूशन पढ़ाने लगी। प्रभात शुक्ला को संदेह था कि उसकी मंगेतर रचिता वत्स का अपने नाबालिग छात्र कुशाग्र के साथ अवैध संबंध हैं। इसके बाद प्रभात ने कुशाग्र को घर बुलवाकर उसकी हत्या कर दी और मामले को अपहरण का रंग देने कि लिए फिरौती का नाटक किया। आरोपित प्रभात के पिता सुनील कुमार शुक्ला होमगार्ड हैं और फजलगंज थाने में तैनात हैं। शव उन्हीं के घर से बरामद हुआ है। हालाँकि, अवैध संबंधों के कारण हत्या के सवाल पर पुलिस ने कहा कि इस संबंध में जाँच जारी है।

गाजा में ‘स्थायी युद्धविराम’ के पैरोकार सांसद की ब्रिटेन के PM ने की छुट्टी, कहा- उनकी टिप्पणियाँ सामूहिक जिम्मेदारी के सिद्धांतों के विपरीत

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने अपनी ही पार्टी (कंजरवेटिव) के सांसद पॉल ब्रिस्टो को उनके पद से बर्खास्त कर दिया है। पीटरबरो से सांसद ब्रिस्टो विज्ञान, नवाचार और प्रौद्योगिकी विभाग के मंत्री के सहयोगी की भूमिका में थे। उन्होंने पिछले सप्ताह पीएम सुनक को लिखे एक पत्र में गाजा में ‘स्थायी युद्धविराम’ का समर्थन किया था। प्रधानमंत्री से इजरायल और हमास के बीच चल रहे युद्ध पर अपने स्टैंड में बदलाव लाने का आग्रह किया था।

ब्रिटेन की सरकार गाजा में मानवीय सहायता के पक्ष में है। लेकिन वह युद्ध विराम का समर्थन नहीं करती है। उसका कहना है कि इजरायल को अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है। हमास के हमलों के बाद पीएम सुनक ने इजरायल की यात्रा भी की थी।

ऐसे में ब्रिस्टो का पत्र सरकार की सोच के ठीक विपरीत था। अब उन्हें उनके पद से मुक्त भी कर दिया गया है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास 10 डा​उनिंग स्ट्रीट के प्रवक्ता ने कहा है कि ब्रिस्टो की टिप्पणियाँ ‘सामूहिक जिम्मेदारी के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं थी’।

बर्खास्तगी के बाद ब्रिस्टो ने फैसले पर निराशा जताई है। कहा है कि वे अपनी जिम्मेदारी का आनंद ले रहे थे। निराशा के साथ इसे छोड़ रहे हैं। साथ ही यह भी कहा कि अब वे उस मुद्दे पर खुलकर बात कर पाएँगे जिसकी उनकी मतदाताओं को परवाह है।

ब्रिस्टो ने पीएम सुनक को दो पन्नों का लेटर लिखा था। इसमें कहा था कि स्थायी युद्धविराम से जिंदगियाँ बचाई जा सकेंगी और उन लोगों तक मदद पहुँच सकेगी जिन्हें इसकी सबसे अधिक जरूरत है। गाजा के हालात का जिक्र करते हुए उन्होंने यह भी कहा था कि इससे उनके कुछ मतदाता सीधे ‘प्रभावित’ हुए हैं।

गौरतलब है कि 7 अक्टूबर 2023 को इस्लामी संगठन हमास के आतंकियों ने इजरायल पर अचानक हमला कर सैकड़ों लोगों की हत्या कर दी थी। बड़ी संख्या में लोगों को बंधक बना लिया था। इसके बाद से गाजा में आतंकी ठिकानों पर इजरायल लगातार हमले कर रहा है।