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2 नवंबर को अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार करेगी ED: अपने ही CM का मंत्री आतिशी ने बाँच दिया ‘भविष्य’, शराब घोटाले में होनी है पूछताछ

दिल्ली सरकार में मंत्री आतिशी ने दावा किया है कि 2 नवम्बर 2023 को आम आदमी पार्टी के मुखिया एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) गिरफ्तार कर लेगी। उन्होंने यह दावा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान किया है। दरअसल, केजरीवाल को ED ने 2 नवम्बर 2023 को घराब घोटालेे में पूछताछ के लिए बुलाया है।

PMLA (प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत ED द्वारा जारी किए गए समन पर आतिशी ने कहा, “2 नवम्बर को दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविन्द केजरीवाल को समन किया है। हर तरफ से खबर आ रही है कि 2 नवम्बर को जब अरविन्द केजरीवाल को बुलाएँगे, तब ED उन्हें भी गिरफ्तार करके जेल में डाल देगी।”

आतिशी ने आगे कहा, “आज भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी आम आदमी पार्टी को खत्म करना चाहते हैं। यही कारण है कि झूठे आरोप बनाकर और केस लगाकर आम आदमी पार्टी के नेताओं को एक-एक करके गिरफ्तार किया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि केजरीवाल को इसलिए गिरफ्तार किया जाएगा, क्योंकि वो प्रधानमंत्री के खिलाफ बोलते हैं।

आतिशी ने कहा कि अरविन्द केजरीवाल के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ED अरविन्द केजरीवाल को गिरफ्तार करने के बाद I.N.D.I.A गठबंधन के अन्य नेता जैसे कि झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन, बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, केरल के सीएम पिनाराई विजय और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के लिए ED और CBI का दुरुपयोग किया जाएगा।

हालाँकि, अभी आधिकारिक तौर पर ऐसी कोई सूचना नहीं है कि अरविद केजरीवाल को गिरफ्तार किया जाएगा। उनके विरुद्ध कोई वारंट भी नहीं जारी हुआ है। उन्हें ED शराब घोटाला मामले में हुई पैसों की हेराफेरी को लेकर पूछताछ करने के लिए बुला रही है। हालाँकि, आतिशी गिरफ्तार की आशंका को देखते हुए पहले ही आरोप लगाने शुरू कर दिए हैं।

बता दें कि शराब घोटाले में दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह को पहले ही ED गिरफ्तार कर चुकी है। मनीष सिसोदिया को शराब घोटाला मामले में 9 मार्च 2023 को लम्बी पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद से वह जेल में बंद हैं। तब से कोर्ट भी उन्हें जमानत देने से इनकार करता आ रहा है।

‘कब्जा, प्रतिरोध’ – हमास स्टाइल अपना रहे पाकिस्तानी आतंकी, मजदूर मुकेश और SHO अहमद की हत्या को ठहरा रहे जायज, लेटर वायरल

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में उत्तर प्रदेश के एक गरीब मजदूर और श्रीनगर में एक पुलिस अफसर मसरूर अहमद पर हमले की जिम्मेदारी इस्लामी आतंकी समूह लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटे समूह ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF)’ ने ली है। सोशल मीडिया पर TRF के बयान की एक फोटो वायरल हो रही है। TRF ने इसमें इस्लामी आतंकी समूह हमास जैसी भाषा अपनाई है।

TRF के आतंकियों ने 30 अक्टूबर 2023 को उत्तर प्रदेश के मजदूर मुकेश को पुलवामा के नौपोरा इलाके में मार दिया था। उस पर आतंकियों ने उस दौरान हमला किया था, जब वह सब्जी लेने जा रहा था। इससे पहले 29 अक्टूबर को श्रीनगर के ईदगाह के पास मैदान में क्रिकेट खेल रहे जम्मू-कश्मीर पुलिस के अफसर मसरूर अहमद पर पिस्टल से फायरिंग की गई थी।

अब इस्लामी आतंकी समूह TRF ने इसकी जिम्मेदारी लेते हुए एक बयान जारी किया है। TRF ने इस बयान में भारत सरकार को कश्मीर पर कब्जा करने वाली फ़ोर्स बताते हुए मसरूर अहमद वानी को उसका प्यादा और मुकेश कुमार को भारत सरकार का मददगार बताया है। TRF ने कहा है कि जो लोग कश्मीर में मजदूर बनकर आते हैं, वे भारत सरकार का कब्जा कश्मीर पर मजबूत करने में मदद करते हैं।

आगे TRF ने कहा है कि वह यह सब नहीं होने देंगे और जम्मू कश्मीर पर कब्ज़ा करने वाली शक्ति की मदद करने वालों के साथ सख्ती से निपटेंगे। यह आग पूरे भारत को अपने कब्जे में ले लेगी। हालाँकि, यह बात अलग है कि आतंकियों ने जिस मुकेश कुमार को मारा वह एक ईंट भट्ठे पर काम करता था और गरीब मजदूर था। वह उत्तर प्रदेश के उन्नाव का रहने वाला था।

गौरतलब है कि TRF ने जिस प्रकार की भाषा अपने बयान में उपयोग की है, ऐसी ही भाषा इस्लामी आतंकी समूह हमास भी इजरायल के विरुद्ध उपयोग करता है। TRF की तरह ही हमास के आतंकी इजरायल को फिलिस्तीन पर कब्जा करने वाला बताते हैं और उसके नागरिकों की हत्या को जायज करार देते हैं।

हमास आतंकियों के अलावा इनके समर्थक (कट्टर इस्लामी और वामपंथी) भी इजरायल के लिए ऐसी ही भाषा गढ़ते हैं। ये पूरे इजरायल को ही अवैध बताते हैं। यहूदियों की हत्या को जायज ठहराते हैं, हमास को आतंकी बताने की जगह आजादी के लड़ाके लिखते हैं। कॉन्ग्रेस पार्टी की सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) भी हमास को आतंकी के बजाय प्रतिरोधी सेना मानती है।

दरअसल, 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल में हमला करके सैकड़ों नागरिकों की हत्या करने वाले हमास ने भी तर्क दिया था कि वह फिलिस्तीन पर कब्जे के खिलाफ लड़ाई के लिए निर्दोष नागरिकों को मार रहे हैं। इजरायल-फिलिस्तीन से हजारों किलोमीटर दूर इस्लामी आतंकी संगठन TRF भी गरीब मजदूर की हत्या को जायज बता रहा। हालाँकि, उसका भारत सरकार या सेना से किसी तरह का संबंध नहीं था।

गौरतलब है कि बीते कुछ समय में कश्मीर में छोटे-मोटे काम करने वाले गैर-मुस्लिम मजदूरों पर हमले बढ़े हैं। इससे पहले जुलाई 2023 में बिहार के तीन मजदूरों को कश्मीर में मार दिया गया था। अक्टूबर 2022 में भी उत्तर प्रदेश से कश्मीर गए दो मजदूरों को मार दिया गया था।

भारत सरकार और सेना की लश्कर-ए-तैयबा तथा हिजबुल मुजाहिद्दीन जैसे इस्लामी आतंकी संगठनों पर सख्ती के बाद अब वे मुखौटे नामों से आतंकी गतिविधियाँ चला रहे हैं। TRF भी इसी तरह का एक इस्लामी आतंकी संगठन है। इसके अलावा PAFF (पीपल्स एंटी फासिस्ट फोर्सेस) नाम का एक इस्लामी आतंकी संगठन भी सामने आया है।

जिस घर में नहीं था राशिद, उसको जलाने में हिंदुओं को फँसाया: कोर्ट से दिल्ली दंगों में संदीप बरी, पुलिस की गवाही में भी झोल

27 अक्टूबर 2023 को दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने 2020 के हिंदू विरोधी दंगों के मामले में एक हिंदू शख्स को सभी आरोपों से बरी कर दिया। इस केस में संदीप कुमार पर आगजनी, तोड़फोड़ और लूट के आरोप लगाए गए थे। कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एएसजे) पुलस्त्य प्रमाचला ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में नाकाम रहा है और गवाहों के बयान भरोसेमंद नहीं थे।

अभियोजन पक्ष का दावा था कि हिंदू भीड़ ने करावल नगर के शिव विहार स्थित राशिद के घर को जला दिया था और इसमें संदीप कुमार भी शामिल थे। यह घटना 25 फरवरी 2020 की है। भीड़ पर लूटपाट, तोड़फोड़ और एक दोपहिया वाहन को जलाने का आरोप लगाया गया था।

इस मामले में संदीप कुमार को बरी करते हुए अदालत ने कहा, “अभियोजन पक्ष तोड़फोड़, लूटपाट, घरेलू समानों और मोटरसाइकिल की क्षति को साबित करने में सफल रहा। लेकिन इसका जिम्मेदार भीड़ या आरोपित के इसमें शामिल होने को लेकर कोई ठोस साक्ष्य नहीं रख पाया।”

अदालत ने कहा कि राशिद की गवाही भरोसेमंद नहीं है, क्योंकि घर में हुई तोड़फोड़ के समय वह मौजूद नहीं था। वह 25 फरवरी की घटना के 3-4 दिन बाद अपने घर लौटा था और उसे अपनी मोटर साइकिल जली हुई मिली थी। घर की पहली मंजिल पर भी सामान क्षतिग्रस्त और जले हुए थे।

कोर्ट ने कहा कि राशिद ने पत्नी के गहने गायब होने के आरोप लगाए हैं। यदि यह भी मान लिया जाए कि उनके घर में तोड़फोड़ और लूटपाट की गई है, तब भी अभियोजन पक्ष के गवाह तीन (PW3) के साक्ष्य से यह साबित नहीं होता कि इसके लिए भीड़ जिम्मेदार थी। PW3 का भले यह कहना हो कि भीड़ ने ऐसा किया पर यह उसकी व्यक्तिगत जानकारी पर आधारित नहीं है।

अदालत ने कहा कि घटनास्थल पर मौजूद होने का दावा करने वाले दोनों पुलिसकर्मियों ने कहा था कि उन्होंने भीड़ और उसमें शामिल संदीप संदीप कुमार को भी देखा था। लेकिन उनकी गवाही भरोसे योग्य नहीं है। इनमें से एक पुलिसकर्मी PW5 ने तोड़फोड़ की किसी खास घटना का कोई जिक्र नहीं किया। उसने एक सामान्य बयान दिया था कि उसने शाम करीब 7 बजे गली नंबर में 11 में 30-40 लोगों की भीड़ तोड़फोड़ और आगजनी करते हुए देखा था।

इस पुलिसकर्मी का कहना था कि उसने भीड़ को पुलिस स्टेशन जाते समय देखा था। वहीं, दूसरे पुलिसकर्मी PW6 ने अपनी गवाही में कहा था कि वह भीड़ इकट्ठा होने की सूचना मिलने पर गली नंबर 11 पहुँचा था। उसके मुताबिक जब सूचना मिली थी वह शिव विहार तिराहे पर था और कोई अन्य पुलिस अधिकारी उस समय वहाँ नहीं था। उसने करीब तीन मिनट में गली नंबर 11 में पहुँचने और शाम के करीब 7 बजे 30-40 लोगों की भीड़ देखने की बात गवाही में कही थी।

अदालत ने दोनों पुलिस अधिकारियों के बयानों के विरोधाभास पर गौर किया। PW5 के मुताबिक, नाला रोड पर शाम के करीब 6-6.30 के बीच वह PW6 से मिला था। वहीं PW6 के अनुसार ने वह गली नंबर 11 में पहुँचने के बाद PW5 से मिला था। PW5 का कहना था कि पुलिस स्टेशन जाते समय वह PW6 से मिला। इसका मतलब हुआ कि वह 11 नंबर गली में यदि कोई दंगा हुआ था तो उस समय PW6 से नहीं मिला था।

यह संभावना भी नहीं है कि एक ही पुलिस स्टेशन के दो अधिकारी भीड़ की हिंसा वाली जगह एक साथ मौजूद हों और वहाँ होने वाली घटनाओं को लेकर उनमें भ्रम हो। यह बेतुका है कि एक ही थाने के दो पुलिस अधिकारी, एक ही जगह पर साथ मौजूद रहने के बाद भी कथित हिंसा को लेकर अलग-अलग बातें करें। बयानों की इन विसंगतियों को देखते हुए अदालत ने गली नंबर 11 में दोनों पुलिसकर्मियों के मौजूद होने के दावे को ही संदेहास्पद माना।

इसके अलावा अदालत ने यह भी पाया कि एक पुलिस अधिकारी ने 29 फरवरी को संदीप कुमार की पहचान करते हुए अपना बयान दर्ज करवाया। वहीं दूसरे अधिकारी ने दावा किया कि उसने आरोपित को केवल 1 अगस्त 2020 को देखा था। बयानों में इस तरह के विरोधाभास ने उनकी गवाही की विश्वसनीयता को और कम कर दिया।

आरोपित संदीप कुमार पर आईपीसी की धारा 147/148/427/436/ 380/506/454 के साथ धारा 149 आईपीसी के तहत आरोप लगा गए थे। सबूतों की कमी के आधार पर अदालत में उन्हें इन सभी आरोपों से बरी कर दिया।

दिल्ली हिंदू विरोधी दंगे 2020

भारत की राजधानी दिल्ली में बड़े पैमाने पर 24 और 25 फरवरी 2020 को हिंदू विरोधी दंगे हुए थे। ये शाहीन बाग और अन्य क्षेत्रों में इस्लामवादियों के सीएए विरोधी विरोध प्रदर्शनों से फैलाई गई दुश्मनी, नफरत और क्रोध का चरम था। शाहदरा, मौजपुर, भजनपुरा, ब्रह्मपुरी और पूर्वोत्तर दिल्ली के अन्य हिस्सों में इस्लामवादियों ने हिंसा की। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। इन दंगों में संपत्ति का भारी नुकसान हुआ था। दंगों में दिल्ली पुलिस के एक हेड कॉन्सेटबल के साथ इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक कॉन्सेटबल की भी हत्या कर दी गई थी।

(नुपूर जे शर्मा द्वारा मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई इस रिपोर्ट को विस्तार से पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें)

‘तुष्टिकरण की राजनीति करने वाले मानवता के दुश्मनों संग खड़े हो जाते हैं’: PM मोदी ने ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ पर पुष्पांजलि अर्पित कर सरदार पटेल को किया याद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने लौहपुरुष के नाम से विख्यात सरदार वल्लभभाई पटेल की 148वीं जयंती पर गुजरात में ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ पर पुष्पांजलि अर्पित की और उन्हें याद किया। इस अवसर पर पीएम मोदी ने एकता की शपथ लेते हुए देशवासियों को भी राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सुरक्षा की शपथ दिलाई। दरअसल, सरदार पटेल आजादी के बाद भारत के एकीकरण में अहम भूमिका निभाई थी। इसलिए जन्मदिन को राष्ट्र राष्ट्रीय एकता दिवस (National Unity Day) के तौर पर मनाया जाता है।

इस अवसर पर पीएम मोदी ने कहा, “सरदार पटेल की जयंती पर हम उनकी अदम्य भावना, दूरदर्शी राजनेता और असाधारण समर्पण को याद करते हैं, जिसके साथ उन्होंने हमारे देश की नियति को आकार दिया। राष्ट्रीय एकता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता हमारा मार्गदर्शन करती रहती है। हम उनकी सेवा के सदैव ऋणी रहेंगे।”

उन्होंने कहा, “आज मेरे सामने लघु भारत का स्वरूप दिख रहा है। राज्य अलग है, भाषा अलग है, परंपरा अलग है, लेकिन यहाँ मौजूद हर व्यक्ति एकता की मजबूत डोर से जुड़ा हुआ है। 15 अगस्त को दिल्ली के लाल किले पर होने वाला आयोजन, 26 जनवरी को दिल्ली के कर्तव्यपथ पर परेड और 31 अक्टूबर को Statue Of Unity के सानिध्य में माँ नर्मदा के तट पर राष्ट्रीय एकता दिवस का ये मुख्य कार्यक्रम, राष्ट्र उत्थान की त्रिशक्ति बन गए हैं।”

पीएम ने कहा कि देश की एकता और विकास यात्रा में सबसे बड़ी रुकावट तुष्टिकरण की राजनीति है। भारत ने बीते कई दशकों में देखा कि तुष्टिकरण करने वालों को आतंकवाद, उसकी भयानकता, विकरालता कभी दिखाई नहीं देती। तुष्टिकरण करने वालों को मानवता के दुश्मनों के साथ खड़े होने में संकोच नहीं हो रहा है।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “तुष्टिकरण की राजनीति करने वाले आतंकी गतिविधियों की जाँच में कोताही करते हैं। वो देश विरोधी तत्वों पर सख्ती करने से बचते हैं। तुष्टिकरण की ये सोच इतनी खतरनाक है कि वो आतंकियों को बचाने के लिए अदालत तक पहुँच जाती है। ऐसी सोच से किसी समाज या देश का भला नहीं हो सकता।”

पीएम ने कहा कि आज ऐसा कोई लक्ष्य नहीं है, जो भारत पा न सके। ऐसा कोई संकल्प नहीं है, जो हम भारतवासी मिलकर सिद्ध न कर सकें। बीते 9 वर्षों में देश ने देखा है कि जब सबका प्रयास होता है, तो कुछ भी असंभव नहीं रह जाता। उन्होंने कहा, “किसने सोचा था कि कश्मीर कभी धारा 370 से मुक्त भी हो सकता है! लेकिन, आज कश्मीर और देश के बीच ये दीवार गिर चुकी है।”

दुनिया भर में भारत की बढ़ती ताकत को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है। आज भारत उपलब्धियों के नए शिखर पर है। G20 के सफल आयोजन को लेकर उन्होने कहा कि भारत के सामर्थ्य को देखकर दुनिया हैरान हो गई है। उन्होंने दुनिया भर में विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की साख को नई ऊँचाई पर ले जाने की बात कही।

सरदार की पटेल की जयंती यानी राष्ट्रीय एकता दिवस या नेशनल यूनिटी डे पर देश भर में रैलियाँ निकाली गईं। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने एकता की शपथ ली और लोगों को दिलाई । दिल्ली के पटेल चौक पर आयोजित एक खास समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, गृहमंत्री अमित शाह एवं अन्य नेताओं ने सरदार पटेल की जयंती पर उन्हें याद किया।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दिल्ली के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में Run4Unity को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा, “सरदार वल्लभभाई पटेल जी को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम एकता, अखंडता और समावेशिता के मार्ग पर चलें। इन आदर्शों को सरदार साहब बहुत महत्व देते थे।”

वहीं, लखनऊ में आयोजित ‘रन फॉर यूनिटी’ को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हरी झंड़ी दिखाकर रवाना किया। इसमें भारी संख्या में युवाओं ने हिस्सा लिया। इस मौके पर उन्होंने कहा, “मेरे युवा साथियों, सरदार पटेल की जयंती एकजुटता के संकल्प का दिन है, एकता के संकल्प का दिन है और अखंडता बनाए रखने का संकल्प लेने का भी दिन है। इसलिए मैं आप सब लोगों को एकता का संकल्प भी लेने का आग्रह करूँगा।”

गौरतलब है कि गुजरात के भरुच के निकट नर्मदा जिले में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी भारत के प्रथम उप प्रधानमन्त्री तथा प्रथम गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल को समर्पित एक स्मारक है। इसे गुजरात के तत्कालीन मुख्यमन्त्री रहे नरेन्द्र मोदी ने 31 अक्टूबर 2013 को सरदार पटेल के जन्मदिन के मौके पर इस मूर्ति के निर्माण शुरू करवाया था। उन्होंने ही पीएम बनने के बाद साल 2018 में ‘स्टैचू ऑफ यूनिटी’ को देश को समर्पित किया था

यह विश्व की सबसे ऊँची मूर्ति है जिसकी लम्बाई 182 मीटर (597 फीट) है। यह स्मारक सरदार सरोवर बाँध से 3.2 किमी की दूरी पर साधू बेट नामक जगह पर नर्मदा नदी पर एक टापू है। भारत सरकार ने 2014 में ऐलान किया था की कि 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस या राष्ट्रीय एकता दिवस के तौर पर मनाया जाएगा।

वीडियो कॉल पर बीवी का आइब्रो देख भड़क गया मोहम्मद सालिम, सऊदी अरब से फोन पर ही दे दिया तीन तलाक: कानपुर की घटना

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से 3 तलाक का एक मामला सामने आया है। सऊदी अरब में कमाने गए एक व्यक्ति ने फोन करके अपनी बीवी को तीन तलाक दे दिया। तलाक की वजह पीडिता द्वारा आईब्रो बनवा है। पीड़िता ने अपने शौहर सहित ससुराल के कुल 5 लोगों पर दहेज़ के लिए प्रताड़ना देने का भी आरोप लगाया है। पुलिस ने इस मामले में मंगलवार (31 अक्टूबर 2023) को FIR दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है।

यह मामला कानपुर के बादशाही नाका थाना क्षेत्र का है। यहाँ रहने वाली पीड़िता का निकाह 17 जनवरी 2023 को प्रयागराज के फूलपुर इलाके के मोहम्मद सालिम से हुआ था। इस निकाह में लड़की के घर वालों ने अपनी हैसियत के मुताबिक दहेज दिया था और बारात की अच्छे से आवभगत की थी। आरोप है कि लड़की पक्ष की तमाम कोशिशों के बावजूद पीड़िता की सास मुज़फ़्फ़री, ननद रुखसार और देवर साकिब व सैफ दहेज़ से संतुष्ट नहीं थे।

शिकायत में पीड़िता ने बताया है कि उनके शौहर सहित ससुराल के बाकी तमाम लोग दहेज में कार की माँग कर रहे थे। निकाह के 3 माह बाद पीड़िता के शौहर मोहम्मद सालिम कमाने के लिए सऊदी अरब चला गया। इसके बाद पीड़िता के ससुराल के बाकी सदस्य उसे खाने-पीने के अलावा पहनने और ओढ़ने के लिए भी परेशान करने लगे। ससुराल वालों की करतूतों को पीड़िता ने सहा और अपने शौहर के घर लौटने पर सब ठीक हो जाने की उम्मीद बनाए रखी।

पीड़िता ने आरोप लगाया है कि उसकी ससुराल के बाकी सदस्य उनके शौहर को भड़काते थे। साथ ही पीड़िता को आए दिन तलाक देने की धमकी भी दी जाती रही। इस बीच 4 अक्टूबर 2023 को पीड़िता के शौहर ने रात लगभग 9:30 पर IMO एप के जरिए वीडियो कॉल की। थोड़ी देर की बातचीत में मोहम्मद सालिम ने पीड़िता पर उसकी मर्जी के खिलाफ आइब्रो बनवाने का आरोप लगाया। पीड़िता की कोई सफाई काम नहीं आई और आखिरकार आरोपित शौहर ने फोन पर उसे तीन तलाक दे दिया।

शिकायत के अंत में पीड़िता ने महज एक साल में ही बेसहारा हो जाने की दलील दी और पुलिस से आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़िता ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज करवाई है। तहरीर के आधार पर मोहम्मद सालिम, मुजफ़्फ़री, रुखसार, साकिब और सैफ को नामजद आरोपित बनाया है। सभी पर दहेज़ अधिनियम व तीन तलाक कानून के तहत कार्रवाई की गई है।

आइब्रो बनवाना अजाब का सबब

ऑपइंडिया ने इस मामले में पीड़िता से बात की। पीड़िता ने बताया कि अब वो दुबारा अपनी ससुराल नहीं जाना चाहती। पीड़िता के पिता की मौत हो चुकी है और भाई बाहर कमाने गए हैं। वो अब अपनी माँ के साथ मायके में कुल 4 बहनों के साथ रह रही है। पीड़ित परिवार को आर्थिक संकट से भी गुजरना पड़ रहा है। मोहम्मद सालिम सऊदी अरब में रहकर गाड़ी चलाने का काम करता है।

महिला का कहना है कि उसका शौहर आइब्रो बनवाना गुनाह समझता था और इसे अजाब बताया। सालिम अपनी बीवी को हर बात के लिए टोका करता था। पीड़िता ने कहा कि उसने आइब्रो नहीं बनवाया था, इसके बावजूद इसका आरोप लगाकर उसके शौहर ने फोन पर तीन तलाक दे दिया।

पटाखे, पेट्रोल, पॉलि​थीन… केरल की प्रार्थना सभा में ब्लास्ट के बाद मौके पर ही था डोमिनिक मार्टिन, मोबाइल में वीडियो भी बनाया

केरल के एर्नाकुलम में याहोवा के साक्षी (Jehova’s Witness) की प्रार्थना सभा में धमाका करने वाले डोमिनिक मार्टिन ने पुलिस पूछताछ में नए खुलासे किए हैं। जाँच में सामने आया है कि ब्लास्ट करने के बाद भी मार्टिन मौके पर था। उसने इस घटना की अपने मोबाइल से रिकॉर्डिंग भी की थी।

यहोवास विटनेस नाम के ईसाई समूह की प्रार्थना सभा में 29 अक्टूबर 2023 को हुए सीरियल धमाके में 3 लोगों की मौत हो गई थी। करीब 50 लोग घायल हैं। डोमिनिक मार्टिन ने फेसबुक लाइव कर धमाकों की जिम्मेदारी ली थी और इसके बाद थ्रिसूर के एक थाने में आत्मसमर्पण कर दिया था। वह खुद भी याहोवा समुदाय का सदस्य है, लेकिन उनकी शिक्षाओं से नाखुश था।

पुलिस की जाँच में सामने आया है कि मार्टिन ने त्रिपुनित्र इलाके से IED बनाने के लिए पटाखे खरीदे थे। पटाखों के साथ 7-8 लीटर पेट्रोल भी खरीदा था। उसने बम तैयार कर पॉलिथीन में रखे थे। धमाके के बाद प्रार्थना हॉल से जाँच एजेंसियों को बैटरियों का मलबा और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट जैसी चीजें मिली हैं।

धमाके वाले दिन वह अपनी पत्नी से यह कह कर सुबह पाँच बजे घर से निकला कि वह एक दोस्त से मिलने जा रहा है। उसके घर से निकलने की CCTV फुटेज भी सामने आई है, जिसमें वह एक स्कूटर पर दिखता है। इसके बाद वह सुबह 7:30 बजे प्रार्थना स्थल पर पहुँचा। आधे घंटे के बाद वह प्रार्थना हाल के अंदर गया और जिन प्लास्टिक के थैलों में उसने बम रखे थे वे चार जगहों पर प्लांट कर दिए। प्रार्थना शुरू होने के बाद उसने एक रिमोट कंट्रोल से IED में धमाका कर दिया।

धमाके के कुछ ही घंटों बाद उसने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। पुलिस को उसने विस्फोटक खरीदने की रसीद और प्रार्थना हाल में रिकॉर्ड किया गया वीडियो भी दिखाया।

केरल पुलिस आज (31 अक्टूबर 2023) उसे कोर्ट में पेश करेगी। उस पर UAPA के तहत मामला दर्ज किया गया है। जाँच एजेंसियाँ इस घटना में विदेशी लिंक की भी तलाश कर रही हैं। शुरूआती जाँच में यह सामने आया है कि डोमिनिक इस धमाके के लगभग 2 माह पहले ही दुबई से केरल वापस लौटा था। इसलिए उसके दुबई में संबंधों की जाँच की जा रही है।

यह भी देखा जा रहा है कि कहीं यह धमाके किसी बड़ी साजिश का हिस्सा तो नहीं है। दरअसल, जाँच एजेंसियाँ मार्टिन के दावों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। इस धमाके में घायल हुए 21 लोगों का इलाज चल रहा है। घायलों में कुछ लोग गंभीर हालत में हैं। धमाके में मरने वाली 12 वर्षीय बच्ची लिबीना की माँ और भाई भी अस्प्ताल में वेंटीलेटर पर जिन्दगी की जंग लड़ रहे हैं। धमाके में मरने वाले लोगों की आज ऑटोप्सी जाँच होगी।

‘कुत्ते गाड़ी साफ कर… साले घर से उठवा लूँगा’: CM योगी को धमकी देने वाले सपा विधायक शहजिल इस्लाम पर ST-SC में मुकदमा दर्ज

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में समाजवादी पार्टी के विधायक शहजिल इस्लाम पर अपने ड्राइवर को पीटने को लेकर FIR दर्ज हुई है। पीड़ित नाम धर्मेंद्र है, जो दलित (SC) समुदाय से ताल्लुक रखता है। पिटाई की वजह पीड़ित द्वारा विधायक की गाडी को ठीक से साफ़ नहीं करना बताया जा रहा है। इस दौरान विधायक ने पीड़ित को जातिसूचक शब्द बोले और जान से मार डालने की धमकी भी दी। शनिवार (28 अक्टूबर 2023) की इस घटना की पुलिस जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भोजीपुरा विधानसभा से सपा विधायक शहजिल इस्लाम को ट्रेन से शुक्रवार (27 अक्टूबर 2023) की रात लखनऊ से बरेली आना था। पीड़ित ड्राइवर धर्मेंद्र और विधायक का गनर सलीम आधी रात को ही बरेली रेलवे जंक्शन पहुँच गए थे। ट्रेन लेट होने की वजह से वह अगले दिन शनिवार की सुबह पहुँचे। ट्रेन से उतरकर जैसे ही शहजिल इस्लाम अपनी कार के पास आए, वो ड्राइवर धर्मेंद्र पर भड़क गए।

बकौल धर्मेंद्र, विधायक ने उनसे कहा, “कुत्ते गाड़ी साफ कर। तुम धोबी कपड़े ही साफ़ करना जानते हो, गाड़ी नहीं चला पाते।” धर्मेंद्र ने सपा विधायक द्वारा खुद के खिलाफ बोले जा रहे शब्दों पर आपत्ति जताई। इस बात से भड़के शहजिल इस्लाम ने धर्मेंद्र को थप्पड़ मार दिया। इसके बाद शहजिल इस्लाम ने कहा, “घर से उठवा लूँगा। साले जानता नहीं मुझे।”

इसके बाद सपा MLA शहजिल इस्लाम अपने गनर सलीम के साथ गाड़ी लेकर चले गए। उन्होंने पीड़ित धर्मेंद्र को बरेली स्टेशन पर ही छोड़ दिया। इस घटना के तुरंत बाद धर्मेंद्र ने 112 नंबर पर कॉल करके पुलिस बुलाई। मामला जंक्शन क्षेत्र का होने की वजह से धर्मेंद्र को GRP थाने भेज दिया गया। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

जीआरपी बरेली में धर्मेंद्र ने सपा विधायक के खिलाफ तहरीर दी। डिप्टी SP जीआरपी देवी दयाल सिंह ने विधायक शहजिल इस्लाम पर हुई कार्रवाई की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि पीड़ित ने तहरीर में कहा है कि रात में गाड़ी स्टेशन के बाहर ओस की वजह से भीग गई थी। इसी बात पर शहजिल इस्लाम गाडी को गंदा बताने लगे। आरोपित विधायक पर IPC की धारा 323, 504 के साथ SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।

विवादित रहा है MLA शहजिल इस्लाम का इतिहास

गौरतलब है कि अपने दलित ड्राइवर को पीटने के आरोपित सपा विधायक शहजिल इस्लाम का इतिहास विवादों से भरा रहा है। अप्रैल 2022 में शहजिल ने एक कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धमकी दी थी। तब उन्होंने कहा था, “अगर उनकी जुबान खुली तो हमारी बंदूकों से गोलियाँ निकलेंगी।” इस आपत्तिजनक बयानबाजी के बाद 7 अप्रैल 2022 को शहजिल इस्लाम के अवैध पेट्रोल पम्प पर प्रशासन ने बुलडोजर चलवा दिया था। हालाँकि इस कार्रवाई का नोटिस शहजिल को 2 साल पहले ही मिल गया था।

नोएडा में कुत्ता ने फिर मनुष्यों में करवाई मारपीट: मोबाइल फेंके जाने के बाद रिटायर्ड IAS ने महिला को मारा थप्पड़, फिर खुद भी पिटे

उत्तर प्रदेश के नोएडा के एक सोसायटी में फिर से कुत्ते को लेकर मारपीट की घटना सामने आई है। इसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है। वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि एक महिला और एक पुरुष के बीच लिफ्ट में बहस हो रही है।

पुरुष का मोबाइल महिला फेंक देती है। उसके बाद महिला को पुरुष थप्पड़ मार देते हैं। फिर दोनों में हाथापाई होने लगती है। एक अन्य वीडियो में थप्पड़ मारने वाले पुरुष को एक अन्य पुरुष पीटते दिख रहा है।

रिपोर्टों के अनुसार घटना सोमवार (30 अक्टूबर 2023) की है। वीडियो में महिला जिस पुरुष का मोबाइल फेंकते दिख रही है, वे एक रिटायर्ड IAS अधिकारी बताए जा रहे हैं। विवाद नोएडा के सेक्‍टर 108 में स्थित पार्क लॉरेट हाउसिंग सोसायटी में लिफ्ट में कुत्ते ले जाने को लेकर हुआ था। बताया जाता है कि महिला कुत्ते को लिफ्ट में अपने साथ ले जाने पर आमादा थी, जबकि पूर्व IAS अधिकारी इसका विरोध कर रहे थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला नोएडा के सेक्टर 39 थाना क्षेत्र का है। लिफ्ट में कुत्ते को ले जाने पर अमादा महिला के साथ एक अन्य लड़की भी थी, जिसने कुत्ते की जंजीर अपने हाथों में पकड़ रखी थी। इसी दौरान उसी लिफ्ट में पूर्व IAS अधिकारी आर पी गुप्ता भी मौजूद थे जिन्होंने कुत्ते की मौजूदगी का विरोध किया। इसी बात को ले कर दोनों पक्षों में बहस हो गई।

बहस के दौरान केपी गुप्ता महिला का वीडियो बनाने लगे। वीडियो बनता देख कर महिला ने उनका मोबाइल छीनकर फेंक दिया। इस बात पर केपी गुप्ता भड़क गए और उन्होंने महिला को थप्पड़ मार दिया। इसके बाद दोनों में हाथापाई होने लगी। एक अन्य वायरल वीडियो में एक पुरुष रिटायर्ड आईएएस पर हमला करते दिख रहा है। इस व्यक्ति को लिफ्ट में बहस करने वाली महिला का पति बताया जा रहा है।

नोएडा पुलिस ने वायरल वीडियो का संज्ञान लिया है। दोनों पक्षों से पुलिस ने बात की है। पुलिस ने वीडियो की जाँच के बाद जरूरी कार्रवाई की बात कही है।

बताते चलें कि नवंबर 2022 में नोएडा प्रशासन ने पालतू कुत्तों को ले कर कड़े नियम बनाए थे। इसमें कुत्ते द्वारा सार्वजानिक स्थान पर गंदगी करने पर खुद ही साफ करने और 10 हजार रुपए का भी प्रावधान किया गया है। साथ ही 31 जनवरी 2023 तक सभी पालतू कुत्ते-बिल्लियों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया था। इसी आदेश में पालतू कुत्तों को स्ट्रेलाईजेशन व एण्टीरेबीज वैक्सीनेशन न लगवाने वाले मालिकों को 1 मार्च 2023 से प्रतिमाह 2000/- रुपए का जुर्माना भी भरने के निर्देश थे।

पहले Tata को बंगाल से भगाया, फिर जमीन छीनी, अब मिलेगा ₹766 करोड़ का हर्जाना: 11% सालाना सूद भी ममता बनर्जी की सरकार से वसूलेगी कंपनी

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को टाटा ग्रुप ने बड़ा झटका दिया है। राज्य सरकार को ₹766 करोड़ का हर्जाना टाटा मोटर्स को देना होगा। इस पर 2016 के 1 सितंबर से सालाना 11 प्रतिशत ब्याज हर्जाना चुकाने की तारीख तक भरना होगा।

तीन सदस्यीय न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) ने यह फैसला सुनाया है। टाटा मोटर्स ने पश्चिम बंगाल के उद्योग, वाणिज्य और उद्यम विभाग की प्रमुख नोडल एजेंसी WBIDC से हर्जाना माँगा था।

यह मामला बंगाल के सिंगूर में लगने वाली टाटा की बहुचर्चित नैनो कार प्लांट से जुड़ा है। 2006 में जब प्लांट लगाने के लिए जमीन का अधिग्रहण किया गया था तब राज्य में वाम दलों की सरकार थी। उस समय विपक्ष की नेता ममता बनर्जी के विरोध के बाद टाटा की यह परियोजना बंद हो गई थी।

बाद में जब 2011 में ममता बनर्जी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सरकार बनी तो उसने अधिग्रहित जमीन टाटा मोटर्स लेकर उसके मालिकों को वापस करने का फैसला किया। इसे टाटा ग्रुप ने कलकत्ता हाई कोर्ट में चुनौती दी। जून 2012 में हाई कोर्ट ने भूमि पट्टा समझौते के अनुसार जमीन पर कंपनी का अधिकार माना। इसके बावजूद जमीन टाटा मोटर्स को वापस नहीं मिली। इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार अगस्त 2012 में सुप्रीम कोर्ट गई। अगस्त 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने नैनो प्लांट के लिए जमीन अधिग्रहण को अवैध बता इसे उनके मालिकों को वापस देने का निर्देश दिया।

शीर्ष अदालत के फैसले के बाद जमीन लीज समझौते के एक क्लॉज का हवाला देते हुए हर्जाने के लिए टाटा मोटर्स ट्रिब्यूनल चली गई। करीब सात साल बाद ट्रिब्यूनल ने उसके पक्ष में फैसला सुनाया है। इस क्लॉज के मुताबिक जमीन अधिग्रहण अवैध घोषित होने पर कंपनी को निवेश में हुए नुकसान की भरपाई की जिम्मेदारी राज्य सरकार की थी। ट्रिब्यूनल ने इस केस पर खर्च हुए 1 करोड़ रुपए का भुगतान भी टाटा मोटर्स को करने का निर्देश WBIDC को दिया है।

गौरतलब है कि वर्ष 2006 में पश्चिम बंगाल की वामपंथी सरकार ने टाटा मोटर्स को नई फैक्ट्री लगाने के लिए सिंगूर में 997 एकड़ जमीन उपलब्ध करवाई थी। यह जमीन स्थानीय किसानों से अधिग्रहित की गई थी।

टाटा मोटर्स इस जमीन पर अपनी नई गाड़ी नैनो की फैक्ट्री लगाने वाला था। टाटा नैनो, टाटा मोटर्स के चेयरमैन रतन टाटा का सपना थी। वह आम भारतीयों को ₹1 लाख में एक गाड़ी उपलब्ध करवाना चाहते थे। यह गाड़ी काफी मशक्कत के बाद डिजाइन की गई थी और इसका निर्माण सिंगूर प्लांट में किया जाना था।

तत्कालीन वामपंथी सरकार का टाटा मोटर्स को अपने राज्य में बुला कर जमीन देना और फैक्ट्री लगाने में सहायता देना एक सकारात्मक कदम के तौर पर देखा गया था। लेकिन ममता बनर्जी, अरुंधती रॉय और मेधा पाटकर जैसे नेताओं और एक्टिविस्टों ने इस मामले का राजनीतिकरण कर दिया।

ममता बनर्जी ने अपनी सियासत चमकाने के लिए जमीन अधिग्रहण के विरुद्ध कई प्रदर्शन किए। भूख हड़ताल भी की। टाटा मोटर्स के खिलाफ गुस्से को भड़काने के कारण बंगाल में टाटा मोटर्स के शोरूम पर भी हमले हुए थे। ममता बनर्जी ने एक रैली के दौरान यहाँ तक कह दिया था कि वह नैनो गाड़ी में सफ़र नहीं करेंगी, क्योंकि यह लोगों के खून से बनाई गई होगी।

ममता बनर्जी के विरोध के कारण टाटा मोटर्स को अंत में यहाँ से बनी बनाई फैसिलिटी हटानी पड़ी थी। इस जमीन पर लगाई गई फैक्ट्री को टाटा मोटर्स ने बाद में गुजरात के सानंद में शिफ्ट कर दिया था। टाटा मोटर्स तब तक इस फैक्ट्री के लिए सिंगूर में बड़े निवेश कर चुका था।

युद्ध इजरायल और हमास का, बवाल बिहार के चंपानगर में: फिलिस्तीन के समर्थन में विवादित पोस्ट कर रहा था मुर्तजा, समझाने आए लोगों पर किया हमला

इस्लामी आतंकी संगठन हमास के हमलों के बाद इजरायल जवाबी कार्रवाई कर रहा है। पर कुछ लोग इसमें भी मजहब देख रहे हैं जो विवाद का कारण बन रहा है। ऐसे ही एक फिलिस्तीन समर्थक की विवादित पोस्ट की वजह से बिहार के पूर्णिया जिले के चंपानगर में बवाल हो गया।

दरअसल विवादित पोस्ट करने वाले मोहम्मद फाउजान मुर्तजा को प्रीतम कुमार नाम का एक युवक 28 अक्टूबर 2023 को समझाने गया। जवाब में प्रीतम की पिटाई कर दी गई। 29 अक्टूबर को पुलिस पर मुर्तजा के खिलाफ कार्रवाई न करने का आरोप लगा कर हिंदू संगठन के लोग सड़क पर उतर गए। पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल 26 नामजद और 30 अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया है। विवादित पोस्ट करने वाले फाउजान मुर्तजा को गिरफ्तार कर लिया गया है। इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चंपानगर के प्रीतम कुमार का कहना है कि इजरायल-हमास के बीच चल रहे युद्ध के बीच फाउजान मुर्तजा पिछले 3 दिनों से आपत्तिजनक पोस्ट कर रहा था। शनिवार की रात प्रीतम अपने 2 साथियों के साथ मुर्तजा को समझाने गए थे। इस दौरान मुर्तजा ने अपने कुछ सहयोगियों के साथ उन पर हमला कर दिया। सिर में चोट लगने की वजह से प्रीतम घायल हो गए।

प्रीतम ने इस मारपीट की शिकायत पुलिस में की। पुलिस ने मुर्तजा को हिरासत में लिया। आरोप है कि थोड़े समय बाद मुर्तजा को छोड़ दिया गया। इसके विरोध में 29 अक्टूबर को लोगों ने एकजुट होकर सड़क पर प्रदर्शन किया और मुर्तजा पर कड़ी कार्रवाई की माँग की। हिन्दू संगठन से जुड़े लोग भी इस विरोध में शामिल हुए। उन्होंने मुर्तजा पर देश विरोधी कार्य करने और पुलिस पर इसे अनदेखा करने का आरोप लगाया। विरोध में चंपानगर बाजार भी बंद रहा।

चंपानगर के SDPO ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि मोहम्मद फाउजान को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं विरोध-प्रदर्शन के दौरान दर्ज हुई FIR पर पुलिस ने जाँच कर कार्रवाई की बात कही है। बताया जा रहा है कि लगभग 6 घंटे चले इस विरोध-प्रर्दशन में सड़क पर टायर जलाए गए थे। फाउजान के हमले के घायल प्रीतम ने मीडिया से बात की है। प्रीतम ने बताया कि जब वो आरोपित को समझाने गए तो उसने कहा, “मेरा मोबाइल है हम कुछ भी स्टोरी लगाएँ। इंडिया के बारे में लगाएँ या पाकिस्तान के बारे में। आप से क्या मतलब है।”

प्रीतम ने खुद पर हमले में मुर्तजा के अलावा जाहिद, साहिल और मुनाजिर को भी शामिल बताया है। हिन्दू संगठनों ने मुर्तजा का इंस्टाग्राम प्रोफ़ाइल भी लोगों को दिखाया है। मुर्तजा ने अपनी प्रोफ़ाइल फोटो में चाँद-तारे वाली फोटो डाल रखी है। प्रशासन ने इलाके में अतिरिक्त फ़ोर्स तैनात कर दी है। इलाके में फ्लैग मार्च किए जाने की भी जानकारी दी गई है। पुलिस द्वारा हालात को पूरी तरह से नियंत्रण में बताया गया है।