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राजस्थान के सरकारी स्कूल में छात्रों का तिलक पोछा, कलावा तोड़ा, पढ़ाई ‘अल्लामा इकबाल की नज्म’: विरोध के बाद ‘सर्वधर्म’ प्रार्थना

राजस्थान के सीकर जिले में एक सरकारी स्कूल के अंदर प्रार्थना के बदले अल्लामा इकबाल की नज़्म पढ़ाने का मामला सामने आया है। स्कूल का नाम ‘हाई सेकेंड्री स्कूल खंडेला’ है। यहाँ के छात्रों को ‘लब पे आती है दुआ’ नज़्म पढ़ाए जाने पर उनके अभिभावकों ने विरोध दर्ज करवाया है। हिन्दू संगठनों ने स्कूल के अंदर सनातन मान्यताओं के अपमान का आरोप लगाया है। छात्रों को विरोध करने या किसी को इस संबंध में बताने पर नाम काटने की धमकी दी गई थी। स्थानीय प्रशासन पर भी विरोध करने वाले हिन्दू संगठन के सदस्यों पर कार्रवाई का आरोप है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला सीकर के खंडेला का है। यहाँ के हायर सेकेंड्री स्कूल में लगभग 80% छात्र हिन्दू समुदाय के हैं। कक्षा 11 के एक छात्र के अनुसार पिछले 1 माह से स्कूल में सर्वधर्म प्रार्थना के बजाय ‘लब पे आती है दुआ’ की नज़्म पढ़ाई जा रही थी। इस दौरान छात्रों को नमाज़ की मुद्रा में हाथ भी जोड़ने के लिए कहा जाता था। ऐसे करने के लिए बाध्य करने वालों में अब तक टीचर प्यारेलाल मीणा और संविदा पर काम कर रहे एक मुस्लिम अध्यापक का नाम सामने आया है। छात्रों ने इसकी जानकारी अपने परिजनों को दी तो उन्होंने सोमवार (23 अक्टूबर 2023) को स्कूल पहुँच कर विरोध जताया।

झलको सीकर नाम के यूट्यूब चैनल की पत्रकार ने इस मामले पर ग्राउंड रिपोर्ट की है। आरोप है कि अभिभावकों की शिकायत का विद्यालय प्रशासन पर कोई फर्क नहीं पड़ा। स्कूल में अल्लामा इक़बाल की नज़्म ज्यों की त्यों जारी रही। यहाँ तक कि अपने घर शिकायत करने वाले हिन्दू छात्रों को ही प्रताड़ित किया जाने लगा। आरोपित टीचरों द्वारा कुछ छात्रों के तिलक पोछे गए जबकि रामस्वरूप नाम के टीचर द्वारा एक छात्र को कलावा उतार कर स्कूल आने के लिए कहा गया। कुछ छात्रों का आरोप है कि जब सर्वधर्म की प्रार्थना हुआ करती थी तब भी मुस्लिम छात्र अपने हाथ दुआ के अंदाज़ में जोड़े रहते थे।

जब इस मामले की जानकारी हिन्दू संगठनों को हुई तो उन्होंने शुक्रवार (27 अक्टूबर 2023) को स्कूल के बाहर धरना दिया। इस धरने को खंडेला के व्यापारी वर्ग का भी समर्थन मिला। हिन्दू संगठन के सदस्यों का आरोप है कि विरोध के बाद उनके कुछ साथियों का पुलिस ने शांति भंग की धाराओं में चालान करवा दिया था। साथ ही सोशल मीडिया पर मुस्लिम समुदाय के लोगों की तरफ से गंदे-गंदे कमेंट भी किए गए। धरने में छात्रों के साथ उनके माता-पिता भी शामिल हुए। सभी ने आरोपित टीचरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग उठाई।

प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत कर के मामले के समाधान का प्रयास किया। फ़िलहाल स्कूल में नज़्म बंद करवा दी गई है और सर्वधर्म की प्रार्थना करवाई जा रही है। कुछ अभिभावकों ने कहा कि ये सब कुछ खंडेला के एक मुस्लिम वकील सदाऊ के कहने पर हुआ है। उन्होंने बताया कि वकील सदाऊ ही सभी टीचरों को दबाव में लिया है। स्कूल के अंदर कुल लगभग 40 टीचर है।

पुलिस बता रही राजनैतिक मामला

झलको सीकर की पत्रकार से बात करते हुए खंडेला के थाना प्रभारी ने इस मामले को राजनैतिक सोच से प्रेरित बताया है। उनका कहना है कि विवाद की जड़ में सोशल मीडिया पर एक धर्म के खिलाफ डाली गई पोस्ट है जिसमें उन्होंने कुछ आरोपितों को हिरासत में लिया था।

SHO के मुताबिक उसी मामले को तूल देने के लिए हंगामे को खड़ा किया गया है। बकौल थाना प्रभारी अगर स्कूल के अंदर कोई दिक्क्त है भी तो उसकी शिकायत शिक्षा विभाग के अधिकारियों से होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि जब पुलिस ने आपत्तिजनक डालने वालों पर उचित एक्शन ले ही लिया है तो विवाद को तूल देने की जरूरत ही क्या है।

ऑपइंडिया से बात करते हुए बजरंग दल सीकर के पदाधिकारी सुनील कटारिया ने बताया कि फिलहाल स्कूल में नज़्म बंद कर दी गई है। साथ ही उन्होंने बताया कि आरोपित टीचरों के खिलाफ जाँच करवाई जा रही है।

पत्नी बन गई ईसाई, घरेलू हिंसा बता माँग रही थी मुआवजा: हाई कोर्ट ने कहा- धर्मांतरण करते ही विवाह समाप्त, नहीं मिलेगा कोई पैसा

कर्नाटक हाई कोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि धर्मांतरण करते ही विवाह स्वत: समाप्त हो जाता है, भले तलाक हुआ हो या नहीं। साथ ही शादी के बाद धर्मांतरण करने वाली महिला की मुआवजे की याचिका ठुकरा दी है। कोर्ट ने कहा कि घरेलू हिंसा प्रमाणित होने पर ही मुआवजा दिया जा सकता है।

महिला अदालत में घरेलू हिंसा साबित करने में असफल रही। इसके बाद हाई कोर्ट ने सत्र न्यायालय के उस फैसले को भी रद्द कर दिया, जिसमें महिला को जीवनयापन के लिए 4 लाख रुपए देने का आदेश दिया गया था। हालाँकि, निचली अदालत ने भी महिला के घरेलू हिंसा के आरोपों को मानने से इनकार किया था। मुआवजा इस आधार पर देने का आदेश दिया था कि महिला अपना जीवनयापन करने में असमर्थ है।

रिपोर्ट के अनुसार कर्नाटक हाई कोर्ट ने कहा, “घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा अधिनियम, 2005 की धारा 22 के अंतर्गत मुआवजा तभी दिया जा सकता है, जब घरेलू हिंसा साबित हो। इस मामले में महिला ने ईसाई धर्मांतरण कर इससे संबंधित सभी अधिकार खो दिए हैं। ऐसी स्थिति में निचली अदालत ने ₹4 लाख का मुआवजा देकर गलती की है। यह न्यायिक विफलता है।”

कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि महिला ने ईसाई बनने की बात स्वीकार की है। लिहाजा उसका विवाह स्वतः ही समाप्त हो जाता है, भले ही उसके अपने पति से उसका तलाक ना हुआ हो। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि इस संबंध में किसी कोर्ट का कोई स्पष्ट आदेश नहीं है। लेकिन यह एक तथ्य है कि महिला धर्मांतरण कर ईसाई बन चुकी है।

महिला के पति ने कोर्ट को बताया कि उसकी पत्नी द्वारा लगाए गए घरेलू हिंसा के आरोप झूठे हैं और उसने स्वयं ही उसका साथ छोड़ दिया था। उसकी पत्नी की लापरवाही की वजह से अपने दूसरे बच्चे की मौत की जानकारी भी दी। कोर्ट को यह भी बताया कि ईसाई बनने के बाद उसकी पत्नी ने बेटी के धर्मांतरण की भी कोशिश की थी। पति ने कोर्ट को यह भी बताया कि लकवा मारने के कारण वह स्वयं की देखभाल करने में भी सक्षम नहीं है।

‘जुमे पर होगी स्कूलों की छुट्टी, दफ्तरों का भी ऑफ होगा”: मणिपुर में ऐसा ऐलान करने वाले छात्र संगठन पर FIR, बदल रहे थे सरकारी संगठनों के नाम

मणिपुर पुलिस ने अवैध रूप से शुक्रवार के दिन को छुट्टी घोषित करने के आरोप में एक छात्र संगठन के विरुद्ध FIR दर्ज की है। मणिपुर के ज्वाइंट स्टूडेंट्स बॉडी नाम के छात्र संगठन ने 26 अक्टूबर 2023 को कहा था कि अब प्रदेश में छुट्टी शुक्रवार को हुआ करेगी।

मणिपुर के चुराचांदपुर जनपद से संबंध रखने वाले इस छात्र संगठन ने इस संबंध में 26 अक्टूबर को एक पत्र प्रसारित किया था। इस पत्र में कहा गया था छात्र संगठनों ने यह निर्णय लिया है कि मणिपुर के सभी राजकीय दफ्तरों और स्कूलों में छुट्टी शुक्रवार को होगी।

इस पत्र में मात्र शिक्षण संस्थाओं में ही नहीं बल्कि सभी जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, मंडलीय शिक्षा अधिकारी और एडिशनल डिप्टी कमिश्नर दफ्तर में भी शुक्रवार को छुट्टी मनाने की बात की गई थी। साथ ही इस पत्र में सरकारी संस्थाओं के नाम भी बदले गए थे।

इस पत्र के सामने आने के बाद राज्य के मुख्य सचिव विनीत जोशी ने कहा था कि यह कृत्य पूर्णतया अवैध है और मणिपुर में सामुदायिक सौहार्द बिगाड़ सकता है। उन्होंने इस संगठन द्वारा संस्थाओं के नाम बदलने के प्रयास पर भी चिंता जताई थी।

अब इस मामले में मणिपुर पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। मणिपुर पुलिस ने इस मामले में सरकारी कामकाज में बाधा पहुँचाने और सरकारी कर्मचारियों को नुकसान पहुँचाने समेत अन्य धाराओं में FIR दर्ज की है।

वहीं दूसरी तरफ मणिपुर में मई माह से चालू हुई हिंसा के कुछ दिनों तक शांत रहने के बाद अब दोबारा हिंसक प्रवृत्तियाँ सामने आई हैं। 31 अक्टूबर 2023 को भारत-म्यांमार अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट मोरेह में एक पुलिस अफसर की गोली मार कर हत्या कर दी गई।

मारे जाने वाले अफसर का नाम चिन्गथम आनंद कुमार बताया गया है। वह इस इलाके में स्कूलों के मैदान की साफसफाई का काम देख रहे थे जब कूकी आतंकियों ने उन पर फायरिंग कर दी, जिसमें उनकी मौत हो गई।

मणिपुर की सरकार ने मृतक के परिजनों को ₹50 लाख मुआवजा और एक आश्रित को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया है। इस हमले में दो अन्य पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।

मणिपुर के चुनिंदा वीडियो यूँ ही नहीं किए गए वायरल, असम राइफल्स के DG ने बताई वजह: गायब हथियार सबसे बड़ी टेंशन

देश के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में एक अदालती फैसले के बाद भड़की हिंसा को करीब 6 महीने हो चुके हैं। इस दौरान मैतेई और कुकी समुदाय के बीच कई खौफनाक झड़पें देखने को मिली है। हिंसा से निपटने में असम राइफल्स (Assam Rifles) सबसे आगे रही है।

असम राइफल्स के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल पीसी नायर ने राज्य के मौजूदा हालात को लेकर जानकारी दी है। यह भी बताया है कि चुनिंदा और भड़काऊ वीडियो हिंसा को और बढ़ाने के इरादे से लीक किए गए थे। साथ ही बताया है कि गायब हथियार सबसे बड़ी समस्या हैं, क्योंकि इनके गलत हाथों में पड़ने का डर है।

द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में लेफ्टिनेंट जनरल पीसी नायर ने असम राइफल्स पर लगे पूर्वाग्रह के आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। कहा कि मणिपुर में हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि लंबे वक्त से राज्य में इस तरह के हालात नहीं देखे गए थे। इससे पहले 90 के दशक में नगा और कुकी समुदायों के बीच झड़पें हुई थीं। लेकिन इस तरह की हिंसा का स्तर हैरान कर देने वाला है।

उन्होंने कहा, “मैं सोचता हूँ कि हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती मैतेई और कुकी लोगों के हाथ में पड़ गए हथियारों का बड़ा जखीरा है। इसने हालात को विस्फोटक बना दिया है। जब तक ये हथियार वापस नहीं आ जाते ये हमारे लिए मणिपुर में सबसे बड़ी चुनौती है।” उन्होंने इन हथियारों के गलत हाथों में पड़ जाने को लेकर फिक्र जताई है। उन्होंने कहा, “विभिन्न पुलिस स्टेशनों से गायब हुए हथियारों की संख्या 5000 के करीब है। इनमें से लगभग 1600 हथियार बरामद कर लिए गए हैं। यह एक अच्छी बात है। लेकिन सभी गायब हथियारों की बरामदगी में हमें वक्त लगेगा।”

गौरतलब है कि मणिपुर में मई 2023 में भड़की हिंसा के दौरान पुलिस शस्त्रागारों से लूटे हुए 5600 हथियारों में से राज्य सरकार केवल एक चौथाई ही बरामद कर पाई है। इस दौरान लगभग 6.5 लाख रुपए का गोली-बारूद भी गायब हो गया। इनमें 5 फीसदी से भी कम बरामद किया जा सका है।

लेफ्टिनेंट जनरल नायर ने कहा, “मुझे लगता है कि इसे पहले जैसी स्थिति में वापस आने में कुछ वक्त लगेगा। ऐसे समय के दौरान चुनिंदा और भड़काऊ वीडियो उकसाने के इरादे से वायरल की जाती है। ऐसा निजी एजेंडे के तहत किया जाता है। इस तरह की चीजों से लोगों को बचाना जरूरी है।””

डीजी नायर ने आगे कहा कि मणिपुर में हालात धीरे-धीरे सामान्य होने की तरफ लौट रहे हैं। हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि दोनों समुदायों के बीच एक-दूसरे के प्रति हिंसा की भावनाएँ हैं। उन्होंने यह बताया कि अब सभी सुरक्षाबलों के बीच सहयोग है, लेकिन शुरुआती दिन उथल-पुथल भरे थे।

लेफ्टिनेंट जनरल पीसी नायर ने कहा कि लोगों को ये एहसास होना चाहिए कि शांति की आगे की राह के लिए उन्हें बात करनी होगी। उन्हें समझौते की तरफ बढ़ना होगा। मीडिया में सबने देखा होगा की कैसे हमारी सैन्य दल की रसद रोकी गई। कैसे सड़कों पर अवरोध पैदा किया गया। कई बार सैनिकों की आवाजाही में बाधा पड़ी है। पहले इस स्तर पर जाकर ये सब नहीं हुआ था।

इस दौरान पक्षपात के आरोपों को झूठा बताते हुए लेफ्टिनेंट जनरल नायर ने कहा कि असम राइफल्स को एक समय पर दोनों गुटों, मैतेई और कुकी समुदायों के लोगों ने निशाना बनाया था। उन्होंने कहा कि म्यांमार के कई वीडियो चुनिंदा तरीके से प्रसारित किए गए और पूरी तस्वीर नहीं बताई गई। उन्होंने कहा कि जातीय झड़पें शुरू होने के बाद से ही भारत-म्यांमार सीमा पर निगरानी बढ़ा दी गई है।

लेफ्टिनेंट जनरल नायर ने कहा, “हम जमीन के हर इंच पर तैनात नहीं रह सकते। हमारी फोर्स सीमा पर निगरानी कर रही है। अधिक संजीगदी से ये काम किया जा रहा है। गश्त बढ़ा दी गई है। एमबुश बढ़ाया गया है।”

भरी मेट्रो में चिल्लाई ‘अल्लाह-हू-अकबर’, कहा- खुद को उड़ा लूँगी: फ्रांसीसी पुलिस ने बुर्काधारी महिला को गोली मारकर किया काबू, जाँच शुरू

फ्रांस की राजधानी पेरिस में मंगलवार (अक्टूबर 31, 2023) को उस समय सनसनी मच गई, जब मेट्रो में सवारी कर रही एक बुर्काधारी महिला ने खुद को बम धमाके में उड़ाने की धमकी दी और वहीं जोर-जोर से ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाने लगी। उसकी इस हरकत के बाद फ्रांसीसी पुलिस ने उसे काबू करने के लिए उसपर गोली चलाई। इस गोलीबारी में महिला घायल हो गई। पुलिस ने उसे पकड़ने के बाद जाँच की तो पाया कि उसके पास कोई विस्फोटक नहीं था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कट्टरपंथी महिला ने पेरिस के उपनगरीय इलाके में मेट्रो से यात्रा करते समय सभी यात्रियों के सामने ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाए थे। उसने पूरी मेट्रो को ही बम से उड़ाने की धमकी दी थी। उसकी इन बातों से घबराए यात्रियों में से किसी एक ने इस संबंध में पुलिस को तलब किया। जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने पहले मेट्रो स्टेशन को खाली कराया और उसके बाद महिला को पकड़ने के लिए उसे बिब्लियोथेक फ्रेंकोइस मिटर्रैंड स्टेशन पर गोली मारी।

पेरिस के सुरक्षा अधिकारिकों ने बताया कि महिला ने पुलिस के निर्देशों को मानने से इनकार कर दिया था और खुद को बम से उड़ाने की धमकी दिए जा रही थी। पुलिस ने उसे रोकने के लिए ही उसपर गोली चलाई, जो उसके पेट में लगी। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पेट में गोली लगने के बाद उसकी हालत गंभीर लेकिन स्थिर बताई जा रही है।

हालाँकि, पुलिस सूत्रों ने बताया कि महिला के पास से कोई विस्फोटक या अन्य हथियार नहीं मिला। अब पुलिस इस बात की भी जाँच करेगी कि क्या महिला को गोली मारे बगैर गिरफ्तार किया जा सकता था?

बता दें कि यह घटना ऐसे समय में हुई है जब फ्रांस को 13 अक्टूबर के बाद से सुरक्षा अलर्ट के उच्चतम संभावित स्तर पर रखा गया है। उस समय मोहम्मद मोगुचकोव नाम के आतंकी ने डोमिनिक बर्नार्ड नाम के शिक्षक की हत्या कर दी थी। उनकी हत्या अर्रास में गैम्बेटा-कार्नोट स्कूल के बाहर की गई थी। 

इस घटना से फ्रांस में सुरक्षा चिंताएँ बढ़ गई हैं। पुलिस ने कहा है कि वह इस घटना के पीछे के कारणों की जाँच कर रही है। इस घटना से फ्रांस में आतंकवाद के खतरे की भी याद दिला दी है। फ्रांस में अतीत में कई आतंकवादी हमले हुए हैं।

सोमनाथ ट्रस्ट के फिर अध्यक्ष बनें पीएम मोदी, मंदिर और आसपास के क्षेत्रों का 5 साल तक संभालेंगे जिम्मा: श्रद्धालु वहीं से कर सकेंगे अयोध्या के रामलला मंदिर में दर्शन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गुजरात स्थित प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर से संबंधित सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष पद पर फिर से पाँच साल के लिए चुना गया है। यह ट्रस्ट गुजरात के सोमनाथ मंदिर और उसके आसपास के क्षेत्र के विकास के लिए जिम्मेदार है। गाँधीनगर में सोमनाथ ट्रस्ट की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी को सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुना गया। इस बैठक में ट्रस्ट के अन्य सदस्यों ने भी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मंदिर क्षेत्र के विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

प्रधानमंत्री मोदी के फिर से चुने जाने से मंदिर के विकास को और गति मिलने की उम्मीद है। ट्रस्ट के पास कई महत्वपूर्ण विकास योजनाएँ हैं, जिनमें से एक राम मंदिर का लाइव दर्शन कराना है। इस सुविधा के शुरू होने से सोमनाथ पहुँचने वाले भक्तों को अयोध्या गए बिना भी भगवान राम के लाइव दर्शन हो सकेंगे। इसके अतिरिक्त सोमनाथ ट्रस्ट एक नए गेस्ट हाउस, एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और एक पार्किंग का भी निर्माण करा रहा है।

बता दें कि सोमनाथ ट्रस्ट एक गैर-सरकारी संगठन है, जो गुजरात के सोमनाथ मंदिर और उसके आसपास के क्षेत्र के विकास के लिए जिम्मेदार है। इस ट्रस्ट की स्थापना 1951 में हुई थी। ट्रस्ट के 8 सदस्य होते हैं, जिनमें से चार सदस्य गुजरात सरकार द्वारा नामित होते हैं और चार सदस्य केंद्र सरकार द्वारा नामित होते हैं। इस समय सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक में लिया हिस्सा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बैठक के बारे में एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर भी जानकारी दी। उन्होंने लिखा, “गाँधीनगर में श्री सोमनाथ ट्रस्ट की बैठक की अध्यक्षता की। हमने ट्रस्ट के कामकाज से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। समीक्षा की गई कि हम मंदिर परिसर के लिए नवीनतम तकनीक का लाभ कैसे उठा सकते हैं, ताकि तीर्थयात्रा का अनुभव और भी अधिक यादगार हो। ट्रस्ट की ओर से इको फ्रेंडली तरीके से किए जा रहे कार्यों का भी जायजा लिया।”

सोमनाथ ट्रस्ट के सदस्यों की नियुक्ति पाँच साल के लिए की जाती है। ट्रस्ट के पास कई महत्वपूर्ण विकास योजनाएँ हैं, जिनमें से एक राम मंदिर का लाइव दर्शन कराना है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सोमनाथ ट्रस्ट को उम्मीद है कि वह मंदिर को एक विश्व स्तरीय तीर्थस्थल बना सकेगा। सोमनाथ ट्रस्ट का उद्देश्य सोमनाथ मंदिर को एक विश्व स्तरीय तीर्थस्थल बनाना है।

इधर कन्हैया लाल की अस्थियों को विसर्जन का इंतजार, उधर उदयपुर की जनता कॉन्ग्रेस को तिलांजलि देने को तैयार: जानिए जमीन पर कौन से फैक्टर तय कर रहे चुनावी गणित

राजस्थान में विधानसभा चुनाव का शोर है। चुनावी शोर में मेवाड़ रीजन का उदयपुर जिला भी अछूता नहीं है। ये वही उदयपुर है, जो पिछले कुछ समय से काफी चर्चा में रहा। एक दर्जी कन्हैया लाल की उनके दुकान में घुसकर जिहादियों ने इसी उदयपुर में मौत के घाट उतार दिया था, जिसकी न सिर्फ चर्चा पूरे देश में हुई, बल्कि जिहादी मानसिकता के विरोध में खूब प्रदर्शन भी हुए। अब उसी उदयपुर में राजनीतिक पार्टियों ने चुनावी जीत के लिए पूरी ताकत लगा दी है, लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट कहती है कि कॉन्ग्रेस की राह इस बार बेहद मुश्किल है।

कॉन्ग्रेस की मुश्किल राह में अभी तक कन्हैया लाल हत्याकांड का कलंक तो है ही, राजस्थान में युवाओं के साथ लगातार होता धोखा और अशोक गहलोत सरकार की प्रशासनिक विफलता भी है। साथ ही पूरे राजस्थान में सचिन पायलट जैसे युवा नेताओं की मेहनत को अशोक गहलोत जैसे ‘जादूगर’ का खा जाना भी जनता को खल रहा है।

कॉन्ग्रेस की विफलता से जनता नाराज

न्यूज 18 से बातचीत में स्थानीय युवकों का कहना है कि अशोक गहलोत की अगुवाई में कॉन्ग्रेस सरकार ने उदयपुर की हमेशा अनदेखी की है। राज्य में एक के बाद एक पेपरलीक कांड हो रहे हैं। कोई भी भर्ती पूरी नहीं हो पा रही है। बेरोजगारी तेजी से बढ़ रही है तो उदयपुर में कन्हैयालाल जैसे आम आदमी की आतंकवादी हमले में हत्या कर दी जाती है। क्या ऐसे प्रशासन चलता है? आम लोग अशोक गहलोत सरकार द्वारा घोषित मुफ्त की चुनावी रेवड़ियों पर भी नाराजगी जता रहे हैं।

लोगों का कहना है कि अगर प्रशासनिक व्यवस्था अच्छी होती तो न ही पेपर लीक जैसे कांड लगातार होते और न ही कन्हैया लाल जैसों की जान जाती। ऐसे में अशोक गहलोत को चुनावी रेवड़ियों की जरूरत नहीं पड़ती। इकबाल नाम के मुस्लिम युवक का कहना है कि राजस्थान में पहले सांप्रदायिक तनाव नहीं दिखता था, लेकिन अब नेताओं की वजह से राजस्थान का भी चुनावी सांप्रदायीकरण हो गया है।

उदयपुर की दर्दनाक घटना कॉन्ग्रेस के लिए वोटबैंक का मौका: प्रधानमंत्री मोदी

उदयपुर में कन्हैया लाल की हत्या के पूरा हिंदू समाज एकजुट नजर आ रहा है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कन्हैया लाल हत्याकांड की बात चित्तौड़गढ़ की रैली में उठाकर जनता को फिर से याद दिलाई है कि अशोक गहलोत के शासन में कानून व्यवस्था की स्थिति कैसी है। इसके लिए उन्होंने कॉन्ग्रेस की वर्तमान सरकार को दोषी ठहराया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चित्तौड़गढ़ की रैली में कहा था, “उदयपुर में जो हुआ उसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। लोग कपड़े सिलवाने के बहाने आते हैं और बिना किसी डर या खौफ के दर्जी का गला काट देते हैं। इस मामले में भी कॉन्ग्रेस को वोट बैंक नजर आया।”

प्रधानमंत्र मोदी ने राज्य सरकार से पूछा कि उदयपुर के दर्जी हत्याकांड में कॉन्ग्रेस पार्टी ने क्या किया, वोट बैंक की राजनीति की? बता दें कि भाजपा की निलंबित नेता नूपुर शर्मा का समर्थन करने के कारण कन्हैया लाल तेली की हत्या कर दी गई थी, जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया था।

भाजपा की उदयपुर पर खास नजर

भारतीय जनता पार्टी की खास नजर उदयपुर जिले पर है। इसकी कई वजहें हैं, लेकिन एक वजह जो पूरे चुनाव को प्रभावित कर रही है, वो है मुस्लिम तुष्टिकरण की वजह से कॉन्ग्रेस का घिरना और भाजपा का हिंदुत्व कार्ड। उदयपुर की 8 में से 5 विधानसभा सीटें भले ही आरक्षित श्रेणी की रही हों, लेकिन पूरे जिले को प्रभावित करने वाले उदयपुर विधानसभा सीट पर लंबे समय से भाजपा का कब्जा रहा है। यहीं से अमित शाह ने राजस्थान के चुनावी रण की शुरुआत की तो भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी उदयपुर जिले को प्राथमिकता में रखा है।

कॉन्ग्रेस पर वोटबैंक की राजनीति के आरोप

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उदयपुर में 30 जून 2023 को रैली की थी। उन्होंने अशोक गहलोत के पाप गिनाए थे। अमित शाह ने मंच से कहा था, “अशोक गहलोत की सरकार भ्रष्टाचार करने में नंबर-1 पर है। आज आपके पास ये हिसाब माँगने का मौका है कि राजस्थान सचिवालय के अंदर मिला दो करोड़ रुपया और एक किलो सोना किसका है? इस सरकार ने भ्रष्टाचार के सारे रिकॉर्ड तोड़ने का काम किया है।”

अमित शाह ने कहा था, “गहलोत जी ने जितने वादे किए थे, वो सब तोड़ दिए। कन्हैया लाल को सुरक्षा इन्होंने नहीं दी। जब तक वो मर गए तब तक आपकी पुलिस चुप रही। आप तो आरोपियों को पकड़ना भी नहीं चाहते थे… NIA ने पकड़ा। राजस्थान सरकार स्पेशल कोर्ट नहीं बनाती है, वरना तो अभी तक कन्हैया लाल के दोषियों को फाँसी पर लटका चुके होते। इनको शर्म आनी चाहिए, ये वोटबैंक की राजनीति करते हैं।”

कन्हैया लाल की अस्थियाँ माँग रहीं न्याय

दरअसल, 28 जून 2022 को उदयपुर में कन्हैया लाल दर्जी की दो लोगों ने बेरहमी से हत्या कर दी थी। कन्हैया लाल एक हिंदू थे, जिनके बेटे ने भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के समर्थन में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया था। इस पोस्ट के बाद कन्हैया लाल को लगातार धमकियाँ मिल रही थीं। हत्या के दिन दो लोग- मोहम्मद रियाज अंसारी और मोहम्मद गौस दुकान पर आए और कन्हैया लाल पर धारदार हथियारों से हमला कर दिया।

उन्होंने कन्हैया लाल की गला रेतकर हत्या कर दी और फिर उसका वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। इस वीडियो में दोनों हमलावरों ने कन्हैया लाल की हत्या को एक “बयान” के रूप में बताया और कहा कि वे नूपुर शर्मा के समर्थन में हत्या कर रहे हैं।

कन्हैया लाल की हत्या ने पूरे देश में आक्रोश और गुस्से का माहौल पैदा कर दिया। बता दें कि इस घटना के करीब डेढ़ साल बीत जाने के बावजूद अभी तक हत्यारों को सजा नहीं मिली हैं, तो कन्हैया लाल की अस्थियों का विसर्जन भी नहीं हुआ है। इस मामले में एक आरोपित को कोर्ट ने जमानत भी दे दी है।

साल 2018 में भाजपा ने 8 में से 6 सीटों पर हासिल की थी जीत

उदयपुर में आठ विधानसभा सीटें हैं। इन 8 विधानसभा सीटों में से भारतीय जनता पार्टी को 6 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं, कॉन्ग्रेस को सिर्फ 2 सीटों से संतोष करना पड़ा था। उदयपुर जिले में गोगुंडा, खेरवाड़ा, झाडोल, उदयपुर (ग्रामीण), सालुंबर, मावली, उदयपुर और वल्लभनगर विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें से शुरुआती पाँच विधानसभा सीटें साल 2018 के चुनाव में एसटी वर्ग के लिए आरक्षित थी।

इसमें से खेरवाड़ा (सुरक्षित) सीट पर कॉन्ग्रेस के दयाराम परमार ने जीत दर्ज की थी। वल्लभनगर सीट पर कॉन्ग्रेस के गजेंद्र सिंह शक्तावत विजयी हुए थे। गजेंद्र सिंह शक्तावत की कोरोना में हुई असामयिक मृत्यु के बाद उनकी पत्नी ने उप-चुनाव में जीत हासिल की थी। बाकी की 6 विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा था।

उदयपुर विधानसभा सीट पर गुलाबचंद कटारिया का लंबे समय से दबदबा रहा है और वो महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं। उदयपुर जिला कटारिया का गढ़ माना जाता है। कटारिया को बीते फरवरी माह में केंद्र सरकार ने विपक्ष के नेता के पद से मुक्त करके राज्यपाल बना दिया। वो सक्रिय राजनीति से भले दूर हो गए हों, लेकिन उनका असर उदयपुर की राजनीति पर दिखता है।

विपक्षी नेताओं को Apple से मिले ‘सरकार प्रायोजित हैकरों से सावधान’ का नोटिफिकेशन, केंद्र ने दिए जाँच के आदेश: कम्पनी बोली- ये हमेशा सही नहीं होते

एप्पल के आइफोन का प्रयोग करने वाले कुछ विपक्षी सांसदों ने मंगलवार (31 अक्टूबर 2023) को दावा किया कि उनके डिवाइस पर खतरे की नोटिफिकेशन आई है। इस नोटिफिकेशन में लिखा है कि सरकार द्वारा प्रायोजित हैकर्स आपके आइफोन को निशाना बना सकते हैं। यह नोटिफिकेशन iMessage और एप्पल मेल में भेजा गया।

ये नोटिफिकेशन महुआ मोइत्रा, शशि थरूर, सुप्रिया श्रीनेत, पवन खेड़ा, केसी वेणुगोपाल, प्रियंका चतुर्वेदी, राघव चड्ढा, असदुद्दीन ओवैसी सहित कई लोगों को आए हैं। इन सांसदों एवं नेताओं ने केंद्र सरकार, खासकर गृह मंत्रालय पर निशाना साधते हुए उनकी जासूसी का आरोप लगाया है। कॉन्ग्रेस नेता पवन खेड़ा ने एक ऐसे ही मैसेज का स्क्रीनशॉट डालकर लिखा कि ‘मोदी सरकार, आप ऐसा क्यों कर रहे हो’?

वहीं, कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर ने यही स्क्रीनशॉट डालते हुए लिखा, “ये एक एप्पल आईडी से मिला है मुझे। मैं इस बात से खुश हूँ कि कम काम करने वाले अधिकारियों को मेरे जैसे करदाताओं के खर्चे पर व्यस्त रखा जा रहा है। करने को इससे अधिक महत्वपूर्ण कुछ और नहीं है?”

हालाँकि, जासूसी पर चिल्लाने वाले थरूर ने स्वयं ही एक ट्वीट में अपनी निजी ईमेल आईडी उजागर कर दी। इसके पश्चात उन्होंने यह ट्वीट डिलीट किया और दूसरा ट्वीट किया।

वहीं, कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने इस मामले पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। इसमें उन्होंने कहा कि उनके दफ्तर में कई लोगों को इस तरह मैसेज आए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा देश के युवाओं का ध्यान बाँटने की कोशिश कर रही है।

हालाँकि, ऐसा नहीं है कि यह मैसेज मात्र I.N.D.I. गठबंधन के लोगों को ही आए हैं। स्वतंत्र शोध संस्थान आब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) के मुखिया समीर सरन ने भी एक्स (पहले ट्विटर) पर बताया है कि उनको भी इस तरह का मैसेज मिला है।

ऐसे ही मैसेज आर्मेनिया के कुछ लोगों के आईफोन पर भी प्राप्त हुए हैं। आर्मेनिया के पत्रकार आर्तुर पापयान ने भी एक्स पर पोस्ट करके बताया है कि उनके आइफोन पर ऐसे मैसेज आए हैं। उन्होंने आर्मेनिया के सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों से अपना फ़ोन चेक करवाने की अपील की है।

हालाँकि, एप्पल स्वयं अपनी वेबसाइट पर कहता है कि उसके द्वारा आईफोन यूजर्स को भेजे गए सरकार प्रायोजित जासूसी के बारे में मैसेज हमेशा सही नहीं होते हैं। यहाँ तक कि जो मैसेज विपक्ष के सांसदों को आया है उसमें भी लिखा है कि ‘यह मैसेज झूठा हो सकता है, लेकिन आप चेतावनी को गंभीरता से लें’।

एप्पल ने एक बयान जारी करके कहा है, “एप्पल इन नोटिफिकेशन को किसी सरकार प्रायोजित हैकर से नहीं जोड़ता है। ये हैकर अच्छा पैसा पाते हैं और इनके हमले समय के साथ बदलते रहते हैं। ऐसे खतरों को पहचानने के लिए उपयोग किए जाने इंटेलिजेंस मैसेज अक्सर गड़बड़ या अधूरे होते हैं। यह संभव है कि कुछ एप्पल नोटिफिकेशन झूठे हों या कुछ हमले पहचाने ही ना जाएँ।”

गौरतलब है कि यह एप्पल नोटिफिकेशन उसके ऐसे यूजर्स को सावधान करने के लिए कंपनी द्वारा जारी की जाती है, जिन पर किसी सरकार द्वारा प्रायोजित हैकरों ने हमला किया हो। यह जानकारी एप्पल की वेबसाइट पर दिया गया है।

देश के रेल और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि वह सांसदों के उन बयानों से चिंतिंत हैं, जिनमें उन्होंने एप्पल से प्राप्त नोटिफिकेशन के बारे में बात की है। उन्होंने इसको लेकर एप्पल के दावे को भी दोहराया है कि यह सदैव सही नहीं होता। साथ ही मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एप्पल की सुरक्षा तकनीकों के विषय में भी बात की है।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा और निजता की रक्षा करने के लिए पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने इस मामले की जाँच करवाए जाने की घोषणा की है और कहा है, “हमने एप्पल से भी कहा है कि वह जाँच में सहयोग करें”।

भारत का गलत नक्शा पोस्ट करने वाला खालिस्तान समर्थक पंजाबी गायक शुभ की तस्वीर, हाथ में है इंदिरा गाँधी की हत्या की फोटो वाला हुडी: जानिए इसके पीछे की सच्चाई

कनाडा में रह रहे पंजाबी गायक शुभ का एक वीडियो वायरल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसमें वह एक काले रंग की हुडी लहराते हुए दिख रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि शुभ ने जिस हुडी को लहराया है, उस पर पंजाब का मानचित्र और उस मानचित्र में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या की आर्ट बनी हुई थी।

यह हुडी लंदन के एक कन्सर्ट के दौरान की है। हालाँकि, वीडियो का असली सच कुछ और है।

इस सबंध में सबसे पहले पोस्ट शेरे पंजाब यूके नाम के अकाउंट ने एक्स (पहले ट्विट्टर) पर एक वीडियो ट्वीट किया। इसमें लिखा हुआ था, “पंजाबी कलाकार शुभ ने एक हुडी पकड़ी हुई है, जिसमें भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी उर्फ़ मैमुना बेगम का स्वागत शहीद भाई सतवंत सिंह और शहीद भाई बेअंत सिंह कर रहे हैं। #Neverforget84”

शुभ का जो वीडियो वायरल हुआ है

इसके पश्चात यह वायरल हो गया और कई खालिस्तान समर्थक अकाउंट इस वीडियो को शेयर करने लगे।

हालाँकि, ऑपइंडिया के फैक्टचेक में सामने आया है कि शुभ ने जो हुडी पकड़ी हुई थी उस पर सिर्फ पंजाब का नक्शा बना हुआ था, ना कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या से सम्बंधित आर्ट है।

जिस हुडी का दावा किया गया और जो हुडी लहराई शुभ ने

इस हुडी में पंजाब के सभी जिले बने हुए थे, जो कि कन्सर्ट के दौरान किसी दर्शक ने शुभ को दी थी। हालाँकि, शुभ ने जो हुडी लहराई है और जिस हुडी को लेकर दावा किया जा रहा है, वे बिलकुल एक जैसी दिखती हैं। इसलिए यह फर्जी दावा और मजबूत हुआ। हालाँकि, इमेज की गुणवत्ता निष्कर्ष निकालने में बाधा बन रही है।

इंदिरा गाँधी की हत्या की आर्ट वाली जिस हुडी की बात हो रही है, उसे एक खालिस्तान समर्थक ‘अकाल क्लोथिंग’ नाम की कम्पनी ने बनाया है। अकाल क्लोथिंग ने यह वीडियो अपने इन्स्टाग्राम अकाउंट पर भी डाला है। अकाल क्लोथिंग ने शुभ से जुड़े पुराने विवाद को अपनी हुडी का प्रचार करने के लिए उपयोग किया है।

शुभ के हुडी लहराने का वीडियो

इससे पहले शुभ ने अपने इन्स्टाग्राम पर भारत का विवादित नक्शा साझा किया था, जिसमें पंजाब से ऊपर के हिस्से गायब थे। यानी इस मैप में जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश को नहीं दिखाया गया था। इसके साथ ही इसमें उत्तर-पूर्वी राज्यों को भी नहीं दिखाया गया था।

इसके चलते सितम्बर में होने वाला शुभ का इंडिया टूर भी रद्द हो गया था। शुभ के भारत में होने वाले कन्सर्ट के प्रायोजक बनने से बोट कम्पनी ने मना कर दिया था। विराट कोहली ने भी अपने इन्स्टाग्राम अकाउंट से शुभ को अनफॉलो कर दिया था। हालाँकि, शुभ ने इस मामले में बाद में सफाई पेश की थी।

₹100 करोड़ की जमीन आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी को ₹100 में दी, योगी सरकार ने वापस ली: बोले अखिलेश यादव- मुस्लिम होने के कारण बने निशाना

उत्तर प्रदेश शासन ने समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन वापस लेने का फैसला किया है। सरकार की तरफ से आज़म खान पर लीज की शर्तों का पालन नहीं करने का आरोप लगा है। मंगलवार (31 अक्टूबर 2023) को कैबिनेट की मीटिंग में इस निर्णय को मंजूरी दी गई। अब इस जमीन को बेहद कम दाम पर उद्योग लगाने के लिए ग्राम समाज को देने को तैयारी है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस निर्णय की आलोचना की है।

रामपुर से भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने मीडिया को बताया कि यह मामला साल 1990 का है। तब रामपुर में BSA ऑफिस के पास 4,000 बच्चों वाला एक राजकीय मुर्तजा स्कूल हुआ करता था। आज़म खान ने नियमों के खिलाफ जाते हुए स्कूल को खाली करवा कर इसकी पूरी जमीन जौहर ट्रस्ट के नाम करवा दी थी। सपा की दोबारा सरकार बनने पर आज़म ने इस जमीन की लीज अपने निजी रामपुर पब्लिक स्कूल के नाम पर ट्रांसफर करवा ली थी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने इसे हेरा-फेरी माना है। भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने सवाल किया कि 100 करोड़ रुपए की जमीन आजम खान को महज 100 रुपए के सालाना लीज पर कैसे दे दी गई। इसके साथ ही उन्होंने इस कदम को पिछली सरकार द्वारा सभी नियमों को ताक पर रखते हुए 4,000 बच्चों का भविष्य खराब करने वाला बताया है। माध्यमिक शिक्षा विभाग अब जौहर ट्रस्ट से जमीन और भवन को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

इस जमीन को ग्राम समाज को सौंपते हुए अब यहाँ उद्योग धंधे लगाने की घोषणा हुई है। योगी कैबिनेट में लिए गए इस फैसले को जेल में बंद आज़म खान के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। आकाश सक्सेना ने भरोसा दिया है कि किसी भी बच्चे की पढ़ाई या करियर पर बुरा असर नहीं पड़ने दिया जाएगा। यह कार्रवाई सक्सेना की शिकायत पर ही हुई है।

वहीं, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने UP सरकार के इस फैसले की आलोचना की है। उन्होंने योगी सरकार पर आरोप लगाया है कि आज़म खान को मुस्लिम होने के नाते परेशान किया जा रहा है। उन्होंने ऐसे कदमों को एक गलत परम्परा भी बताया। अखिलेश ने अपने सम्बोधन में आज़म खान के नाम में साहब और आदरणीय भी जोड़ा।