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रोहिंग्या ने 99 हिंदुओं का किया था नरसंहार, 8 महिलाओं ने मुस्लिम बनने की शर्त कबूल कर बचाई थी जान: UN जाँचकर्ता ने माना ‘अंतरराष्ट्रीय अपराध’

संयुक्त राष्ट्र के एक जाँचकर्ता ने कहा है कि वर्ष 2017 में म्यांमार में हुए 99 हिन्दुओं के नरसंहार को अंतरराष्ट्रीय अपराध माना जा सकता है। यह नरसंहार रोहिंग्या मुस्लिम आतंकियों ने किया था। आतंकियों ने हिंदू बच्चों, महिलाओं और पुरुषों को मारकर जमीन में दबा दिया था।

म्यांमार में मानवाधिकारों की जाँच करने वाले अधिकारी निकोलस कोमजियान से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस विषय में प्रश्न पूछा गया। इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर अपराध है और इसे अंतरराष्ट्रीय अपराध माना जा सकता है।

गौरतलब है कि अगस्त 2017 में रोहिंग्या मुस्लिम आतंकियों ने अलगाववादी से त्रस्त रखाईन प्रांत के एक गाँव में घुसकर हिन्दुओं का नरसंहार कर दिया था। यह नरसंहार अराकान रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी (ARSA) ने किया था। इसका मुखिया कराची में जन्मा अताउल्लाह अबू उमर जुनूनी है।

मारे गए इन हिन्दुओं की लाशें बाद में एक सामूहिक कब्र में पाई गई थीं। इस दौरान रोहिंग्या मुस्लिमों ने कुछ महिलाओं को छोड़ दिया था और उन्हें डरा-धमकाकर इस्लाम में परिवर्तित करा दिया था। बाकी सभी को मारकर इस कब्र में दफना दिया था।

इस मामले में एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी कहा था कि म्यांमार में हिन्दुओं का नरसंहार हुआ है। एमनेस्टी ने अपनी पड़ताल के बाद बताया था कि नकाबपोश मुस्लिम आतंकियों ने रोहिंग्या मुस्लिमों के साथ मिलकर सुबह-सुबह गाँव में घुसकर हिन्दू महिलाओं, बच्चों और पुरुषों को घेर लिया था।

इसके बाद उनके घरों में लूटपाट की गई। हिंदुओं के हाथ-पैर बाँध दिए गए। इसके बाद पुरुषों को अलग करके सबसे पहले उनका नरसंहार कर दिया गया। इनमें से आठ हिन्दू महिलाओं और उनके बच्चों को इस शर्त पर छोड़ दिया गया कि वे इस्लाम स्वीकार कर लेंगी।

एमनेस्टी ने बताया कि रोहिंग्या मुस्लिम आतंकियों ने तलवारों से महिलाओं और बच्चों के भी गले काटे। इस मानवाधिकार संस्था ने बताया कि दो गाँवों में कुल 99 हिन्दुओं की हत्या की गई थी। एक गाँव में 53 मारे गए थे। इनकी लाशें मिल गई थीं। वहीं, दूसरे गाँव में 46 लोगों की हत्या की गई थी, लेकिन उनकी लाशें कभी नहीं मिलीं।

रोहिंग्या आतंकियों ने इसके अतिरिक्त भी अन्य कई मौकों पर हिन्दुओं को निशाना बनाया था। रोहिंग्या आतंकी ने रखाईन प्रांत के हिंदुओं पर आरोप लगाया था कि वे म्यांमार की बौद्ध सरकार का समर्थन कर रहे हैं और उनके अलगाववादी विचारधारा के खिलाफ सरकार की सहायता कर रहे हैं।

अब एमनेस्टी समेत अन्य जाँच को मानते हुए संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि यह अंतरराष्ट्रीय अपराध माना जाना चाहिए। गौरतलब है कि म्यांमार में रोहिंग्या आतंकियों की गतिविधियों के कारण ही वहा नकी सेना लगातार कार्रवाई करती आई है।

साँप को हाथों में उठाया, कान से सटाया, मुँह पकड़कर देने लगा साँस… मध्य प्रदेश के कॉन्स्टेबल का देखिए Video, दावा- कीटनाशक से बेहोश था, CPR देकर बचाई जान

मध्य प्रदेश के एक पुलिसकर्मी का वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें पुलिसकर्मी को साँप को अपने हाथ में उठाकर कान से सटाते और मुँह पकड़कर साँस देते देखा जा सकता है। पुलिसकर्मी का दावा है कि साँप कीटनाशक वाले पानी से बेहोश हो गया था। उसने सीपीआर देकर उसकी जान बचा दी।

वीडियो में दिख रहे पुलिसकर्मी की पहचान अतुल शर्मा के तौर पर बताई जा रही है। वह नर्मदापुरम के हरचंद सेमरी चौकी में बतौर कॉन्स्टेबल तैनात हैं। बताया जाता है कि उन्हें तवा कॉलोनी में एक साँप के मिलने की सूचना मिली थी। मौके पर पहुँचकर पाया कि साँप बेसुध था। वह चलने फिरने में भी अक्षम था। अतुल शर्मा ने बताया कि साँप के शरीर में गन्दा पानी चला गया था, जिसमें कीटनाशक मिला हुआ था।

अतुल शर्मा लम्बे समय से वन्यजीवन संरक्षक का काम कर रहे हैं। उन्होंने मीडिया को बताया कि वे 2008 से लेकर अब तक 500 से ज्यादा साँपों का जीवन बचा चुके हैं। लेकिन यह पहला मौका था जब उन्होंने साँप को सीपीआर दी है। वायरल वीडियो में दिखता है कि सीपीआर देने के कुछ समय बाद साँप हरकत करने लगता है। साँप के सही होने के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने ‘राधे-राधे’ का उद्घोष भी किया।

बताया गया कि लोगों ने साँप को निकालने के लिए घर में कीटनाशक मिला हुआ पानी भर दिया था जो कि साँप ने पी लिया। अतुल शर्मा ने साँप के पेट से पानी भी निकाला और उसे साफ़ पानी दिया। साँप के सही हालत में आने के बाद उन्होंने उसे जंगल में छोड़ दिया।

हालाँकि, पशु चिकित्सकों का कहना है कि साँप को इस तरीके से सीपीआर देना संभव नहीं है। साँप ने वातावरण के अनुसार अपने आप को ढाल लिया होगा, इसलिए वह वापस सही हालत में आ गया होगा।

अतुल शर्मा ने मीडिया को बताया है कि जिस साँप को उन्होंने सीपीआर दी है, वह धामन प्रजाति का था और इसमें जहर नहीं होता। इसे रैट स्नेक भी कहा जाता है। अतुल साँप की प्रजाति पहचान गए थे इसलिए उन्होंने उसे बिना डरे सीपीआर दिया।

अतुल शर्मा मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के रहने वाले हैं। उन्हें साँप पकड़ने में दक्षता हासिल है, वह यह काम 12वीं कक्षा से करते आ रहे हैं। पुलिस में भर्ती होने के बाद भी वह रेस्क्यू करते हैं।

UP की महिला पुलिस टीम ने गौ-तस्कर इनामुल का किया एनकाउंटर, पैर में लगी गोली: नारी शक्ति का किया गया सम्मान

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस-प्रशासन को अपराधियों से सख्ती से निपटने के आदेश दिए हैं। इसके बाद कई अपराधियों ने आत्मसमर्पण कर दिए। पकड़ने के क्रम में जिन्होंने पलटवार किया, उन्हें पुलिस ने ढेर भी कर दिया। इस बीच, कुशीनगर में ऐसा पहली बार हुआ, जो अब तक नहीं हुआ था। यहाँ महिला पुलिस की टीम ने एक गौ-तस्कर का एनकाउंटर कर उसे पकड़ लिया। गौ-तस्कर का नाम इनामुल उर्फ बिहारी है। उस पर 25 हजार रुपए का ईनाम भी घोषित था।

मामला कुशीनगर के रामकोला थाना इलाके का है। बरवापट्टी थाने की महिला SHO सुमन सिंह के नेतृत्व में टीम ने एनकाउंटर को अंजाम दिया। यह एनकाउंटर बीते गुरुवार (19 अक्टूबर 2023) की रात को हुआ, जब पूरा देश नारी शक्ति की पूजा का त्योहार नवरात्रि मना रहा था। अपराधियों के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत मेहदीगंज अमडरिया नगर के पास चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। इसमें थाना कोतवाली, पडरौना, रामकोला, बरवापट्टी, खड्डा, कप्तानगंज और स्वाट की टीमें संयुक्त रूप से शामिल थीं।

इस दौरान एक व्यक्ति बाइक से आता हुआ दिखाई दिया। पुलिस ने उसे रुकने का इशारा किया, लेकिन उस व्यक्ति ने पुलिस पर ही गोली चला दी। इसके बाद महिला पुलिसकर्मियों की टीम ने मोर्चा संभाल लिया और इनामुल को एनकाउंटर में घायल कर गिरफ्तार कर लिया। जाँच में पता चला कि इनामुल 25 हजार रुपए का ईनामी बदमाश है और उस पर कई मामले दर्ज हैं। वो गौ-तस्करी के मामले में वांछित था। इनामुल के पास से कट्टा, कारतूस और मोटरसाइकिल बरामद हुए हैं।

एडीजी ने किया महिला शक्ति को सम्मानित

इस अभियान में पुरुष पुलिसकर्मियों से भी आगे महिला शक्ति रहीं। इस अभियान की अगुवाई बरवापट्टी की एसएचओ सुमन सिंह कर रही थीं। वहीं, बदमाश का एनकाउंटर करने वाली टीम में एसआई चंदा यादव के अलावा एसआई प्रिंसी पाण्डेय, आरक्षी संगीता यादव और आरक्षी प्रियंका सिंह की अहम भूमिका रही। इस एनकाउंटर को अंजाम देने वाली टीम को मिशन शक्ति के तहत एडीजी ने सम्मानित भी किया।

केवल प्रधानमंत्री को ही नहीं मिला है राम मंदिर का न्योता, आपके घर तक भी पहुँचेगा निमंत्रण का ‘अक्षत’: 5 लाख गाँव में लाइव देख सकेंगे प्राण-प्रतिष्ठा

ज्यादा पुरानी बात नहीं है जब रामजन्मभूमि पर रामलला के अधिकार को खारिज करने वाले तंज किया करते थे कि मंदिर वही बनाएँगे पर तारीख नहीं बताएँगे। अब जब अयोध्या राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा की तिथि 22 जनवरी 2024 सामने आ गई है तो उनके पेट में मरोड़ उठ रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निमंत्रण क्यों दिया। पर लिबरल सेकुलर जमात का अंग विशेष तो इस खबर से झुलसने वाला है कि प्राण-प्रतिष्ठा का निमंत्रण दिल्ली के लोक कल्याण मार्ग के 7 नंबर बंगले (प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास) की परिधि में ही सिमटा नहीं रहेगा। यह देश के 5 लाख गाँव में घर-घर तक पहुँचने वाला है।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कामेश्वर चौपाल ने ऑपइंडिया को बताया है कि राम मंदिर के अनुष्ठान का कार्यक्रम अयोध्या में 16 जनवरी 2024 से शुरू हो जाएगा। 22 जनवरी को प्राण-प्रतिष्ठा होगी। इस दौरान करीब 5 हजार संत-महात्मा और कला, शिक्षा जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले करीब 5 हजार लोग भी उपस्थित होंगे। प्राण-प्रतिष्ठा के बाद अगले दो दिनों तक उत्सव मनाया जाएगा।

अक्षत के रूप में भेजा जाएगा प्राण-प्रतिष्ठा का निमंत्रण

चौपाल के अनुसार प्राण-प्रतिष्ठा का निमंत्रण देश के 5 लाख गाँवों तक जाना है। इसके लिए देश के 50 प्रमुख केंद्रों से नवंबर में लोगों को अयोध्या बुलाया गया है। ये लोग अयोध्या से ‘अक्षत’ लेकर इन केंद्रों तक जाएँगे। इन्हीं केंद्रों से प्राण-प्रतिष्ठा के लिए निमंत्रण के रूप में अक्षत 5 लाख गाँवों में वितरित किया जाएगा। 22 जनवरी को इन गाँवों में लोगों को अपने देवस्थल में एकत्र होने को कहा जाएगा। वहाँ वे एक साथ प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम लाइव देख सकेंगे।

उल्लेखनीय है कि बिहार विधान परिषद के सदस्य रह चुके कामेश्वर चौपाल विश्व हिंदू परिषद (दक्षिण बिहार) के प्रांतीय अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने ही अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के नींव की पहली ईंट 9 नवंबर 1989 को रखी थी। 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जब रामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट का गठन किया गया था तो उन्हें भी इसमें जगह दी गई थी।

प्राण-प्रतिष्ठा का निमंत्रण पाकर धन्य हुआ: पीएम मोदी

25 अक्टूबर 2023 को ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को श्री राम जन्मभूमि मंदिर में भगवान श्री रामलला सरकार के श्री विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा में शामिल होने का निमंत्रण मिला था। प्रधानमंत्री ने इसके बारे में जानकारी देते हुए एक्स ट्विटर पर पोस्ट कर बताया था, “जय सियाराम! आज (25 अक्टूबर) का दिन बहुत भावनाओं से भरा हुआ है। अभी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारी मुझसे मेरे निवास स्थान पर मिलने आए थे। उन्होंने मुझे श्रीराम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर अयोध्या आने के लिए निमंत्रित किया है। मैं खुद को बहुत धन्य महसूस कर रहा हूँ। ये मेरा सौभाग्य है कि अपने जीवनकाल में, मैं इस ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बनूँगा।”

22 जनवरी 2024 को ही प्राण-प्रतिष्ठा क्यों

कामेश्वर चौपाल ने बताया कि हिंदू परंपरा में गृह प्रवेश उत्तम योग में ही होता है। राम मंदिर के लिए हिंदुओं ने काफी लंबा संघर्ष किया। 22 जनवरी को उत्तम योग होने के कारण इसे नवनिर्मित राम मंदिर के गर्भगृह में प्राण-प्रतिष्ठा के लिए चुना गया है। उल्लेखनीय है कि प्रभु श्रीराम का जन्म अभिजीत योग में हुआ था। अन्य तिथियों के मुकाबले यह योग 22 जनवरी को लंबे समय तक रहेगा। यही कारण है कि प्राण-प्रतिष्ठा के लिए इस तिथि को सबसे उपयुक्त माना गया है।

क्या होता है अभिजीत योग

अभिजीत योग प्रतिदिन आता है। हालाँकि इसकी अवधि अलग-अलग होती है। कभी क्षणिक तो कभी काफी देर तक यह योग बना रहता है। इसे दिन का सर्वोत्तम या अत्यंत शुभ मुहूर्त माना जाता है। मान्यता है कि इस योग में किसी कार्य को शुरू करने से उसके सफल होने की संभावना अधिक होती है।

भव्य राम मंदिर में कब से कर सकेंगे दर्शन?

ऑपइंडिया को कामेश्वर चौपाल ने बताया है कि 25 जनवरी 2024 से आम लोग भी भव्य राम मंदिर में प्रभु का दर्शन कर पाएँगे। हालाँकि गर्भगृह में कौन सी मूर्ति स्थापित की जाएगी, यह निर्णय अभी नहीं हुआ है। तीन अलग-अलग मूर्तियों का निर्माण किया जा रहा है। इसी तरह प्राण-प्रतिष्ठा किनके निर्देशन में होगा और यजमान कौन होंगे, इस बारे में भी अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है।

देश भर के कार सेवकों को कराया जाएगा विशेष दर्शन

चौपाल ने बताया कि 1984 में राम जन्मभूमि पर मंदिर के लिए आंदोलन का शंखनाद होने के बाद से 2019 में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक, देश भर के जिन-जिन लोगों ने इस संघर्ष में भाग लिया है, उनको विशेष तौर पर मंदिर में दर्शन कराया जाएगा। देश के अलग-अलग हिस्सों से अलग-अलग तिथि पर कारसेवकों को निमंत्रित कर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट उन्हें दर्शन कराएगा। इसी कड़ी में नेपाल और उत्तर बिहार के कारसेवकों को 2 फरवरी तो दक्षिण बिहार और झारखंड के कारसेवकों को 3 फरवरी 2024 को दर्शन करवाया जाएगा।

तमिलनाडु में गवर्नर हाउस पर फेंका बम, बमबाजी में समय से पहले रिहाई नहीं होने पर था नाराज: BJP ऑफिस और थाने पर भी कर चुका है हमला

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई स्थित राजभवन के मुख्य द्वार पर एक शख्स ने दो पेट्रोल बम फेंक दिए। यह शख्स एक हिस्ट्रीशीटर है और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। यह घटना बुधवार (25 अक्टूबर 2023) को दोपहर करीब 2:45 बजे हुई। पुलिस ने बताया कि आरोपित ने राजभवन के विपरीत दिशा से पेट्रोल बम फेंके।

हालाँकि, ये दोनों बम नहीं फटे और मुख्य द्वार के सामने लोहे के बैरिकेड के पास सड़क पर गिर गए। राजभवन पर पेट्रोल बम फेंकने के बाद हमलावर भागने की कोशिश कर रहा था, जिसे पुलिसकर्मियों ने पीछा करके गिरफ्तार कर लिया। उसकी पहचान करुक्का विनोद के रूप में हुई है। उसके पास से दो जिंदा बम भी बरामद हुए हैं।

अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (दक्षिण) प्रेम आनंद सिन्हा ने बताया, “कोई आग नहीं लगी… केवल बत्ती पर कुछ लौ थी। पेट्रोल की बोतल गिरकर टूट गई। उसे पकड़ लिया गया है और उसके पास कुछ और बोतलें मिलीं, जिन्हें जब्त कर लिया गया है। घटना को अंजाम देने से विनोद ने शराब पी थी।” सिन्हा ने बताया कि हमले के मकसद के बारे में पता लगाया जा रहा है।

राज्यपाल के फैसले से खफा था विनोद

रिपोर्ट के मुताबिक, करुक्का विनोद तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि से खफा था। दरअसल, जेल में रहते हुए विनोद ने समय से पहले रिहाई की माँग करते हुए राज्यपाल के पास एक याचिका भेजी थी। इस याचिका को राज्यपाल ने खारिज कर दिया था। इतना ही नहीं, राज्यपाल द्वारा मुस्लिम कैदियों को रिहा नहीं करने से भी वह नाराज था।

उसने बताया कि इन दोनों कारणों से वह राज्यपाल से बदला लेना चाहता था और उसने इसी वजह से बम फेंका। दरअसल, विनोद तीन दिन पहले ही जेल से बाहर आया है और मौका पाते ही राज्यपाल को निशाना बनाने के लिए राजभवन पर हमला कर दिया। उसके पास कुल 4 बम थे। इसमें से दो बम फेंक दिए। बाकी दो बम बरामद हो गए हैं।

राजभवन ने की हमले की निंदा

घटना के बाद से पूरे इलाके की सीसीटीवी फुटेज की भी जाँच की जा रही है, ताकि किसी अन्य संदिग्ध की पहचान की जा सके। तमिलनाडु राजभवन ने हमले की निंदा की है और कहा है कि यह एक ‘गंभीर सुरक्षा उल्लंघन’ है। राजभवन ने घटना की भी जाँच और सभी अपराधियों की गिरफ्तारी की माँग की है।

ग्रेटर चेन्नई पुलिस कमिश्नर के यहाँ इस हमले की शिकायत दर्ज कराई गई है। राज्यपाल के उप सचिव द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में कहा गया है कि लगातार गंदी-गंदी गालियाँ देकर और जान से मारने की धमकी देते हुए राज्यपाल पर लगातार हमले किए जा रहे हैं। इसके लिए तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी पर सवाल उठाए गए हैं।

शिकायत में कहा गया है, “माननीय राज्यपाल पर ये मौखिक हमले और धमकियाँ ज्यादातर डीएमके और उसके सहयोगियों के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं द्वारा सार्वजनिक बैठकों में और उनके सोशल मीडिया के माध्यम से की गई हैं।” शिकायत में राज्यपाल पर पिछले हमलों का भी विवरण दिया गया है। इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि इन सब मामलों में राजभवन ने शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कभी भी FIR दर्ज नहीं की गई और ना ही अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

राजभवन पर पेट्रोल बम फेंकने की घटना पर तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष अन्नामलाई ने तमिलनाडु सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि राजभवन पर पेट्रोल बम फेंका जाना तमिलनाडु में कानून व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को दर्शाता है। भाजपा नेता ने कहा कि डीएमके सरकार में राज्य भर के अपराधी सड़कों पर उतर आए हैं।

भाजपा दफ्तर से लेकर पुलिस स्टेशन तक पर फेंक चुका है बम

तेनाम्पेट के रहने वाले 42 साल के विनोद का आपराधिक इतिहास है। उसने फरवरी 2022 में चेन्नई स्थित भाजपा कार्यालय पर भी पेट्रोल बम फेंका था। पूछताछ में उसने बताया था कि वह NEET परीक्षा को लेकर भाजपा के स्टैंड से दुखी था। इसके विरोध में उसने भाजपा ऑफिस पर बम फेंका था।

इतना ही नहीं, विनोद ने साल 2015 में सरकार द्वारा संचालित TASMAC शराब की दुकान पर भी बम फेंका था। इसी साल 2017 में तेन्नमपेट पुलिस स्टेशन के सामने पेट्रोल बम फेंके थे। जानकारी के मुताबिक, करुक्का विनोद आदतन अपराधी है। उस पर 14 केस दर्ज हैं, जिसमें 4 हत्या की कोशिश जैसे गंभीर मामले भी हैं।

Karachi to Noida: सीमा हैदर पाकिस्तानी नहीं भारत की जासूस… फिल्म के टीजर में लप्पू-झींगुर और सन्नी देओल का हैंड-पंप भी

पाकिस्तान से नोएडा के सचिन के इश्क में गिरफ्तार होकर भारत पहुँची सीमा हैदर को लेकर बनी फिल्म ‘कराची टू नोएडा (Karachi to Noida)’ मूवी का टीजर रिलीज हो गया है। तीन मिनट के जानी फायरफॉक्स प्रोडक्शन के इस टीजर में दिखाया गया है कि इसमें सीमा के किरदार के नाम सायमा हैदर खान है।

गौरतलब है कि प्रोड्यूसर अमित जानी ने अगस्त में सीमा हैदर बनने वाली फिल्म की स्क्रिप्ट पर काम शुरू करने की बात कही थी। फिल्म ‘कराची टू नोएडा’ में सीमा हैदर (Seema Haider) का किरदार फरहीन फलर ने निभाया है। सीमा के पति सचिन मीणा का रोल आदित्य राघव ने किया है।

सीमा हैदर के पाकिस्तानी पति के किरदार में बॉलीवुड एक्टर एहसान खान हैं। मूवी के अन्य कलाकारों में ‘गदर 2’ के मेजर मलिक रोहित चौधरी को कराची पुलिस कमिश्नर के किरदार में तो याया खान मनोज बक्शी को पाक आर्मी अफसर के किरदार में दिखाया गया है।

अमित जानी के साथ भारत सिंह की को-प्रोड्यूस इस मूवी में पाकिस्तान के कराची से लेकर भारत के नोएडा तक के कई सीन हैं। इसमें लप्पू और झींगुर सा सचिन वाले मशहूर वाकये को भी दिखाया गया है। इस फिल्म का निर्देशन जयंत सिन्हा ने किया है। कहा जा रहा है कि इस फिल्म में कुछ ऐसे डायलॉग हैं, जो विवाद पैदा कर सकते हैं।

फिल्म के डायलॉग जो बवाल पैदा कर सकते हैं, उसमें से कुछ हैं:

“जिसे तू मुमताज समझ रहा था वो हिन्दोस्तानी जासूस थी, साले लप्पू वो नहीं तू है तू।”
“मादर$@ वो हमारे डिफेंस मैकेनिज्म को चुना लगा गई और तू कहता है तुझे कुछ नहीं मालूम”
“ये बिरयानी जो तेरे सामने रखी है न, इसमें सब कुछ है… चावल है, जाफरान है… बस नहीं है तो गोश्त।”
“तेरा मर्द कौन से सन्नी देओल है, उसने कौन से हैंड-पंप उखाड़े हैं?”

फिल्म के गाने, कहानी और डायलॉग भी अमित जानी ने लिखे हैं। टीजर में इस फिल्म में सीमा को रॉ के एजेंट के तौर पर दिखाया गया है। गौरतलब है कि सीमा हैदर और सचिन की दोस्ती पबजी गेम खेलते हुए हुई। इसके बाद सीमा नेपाल के रास्ते भारत और फिर चार बच्चों सहित नोएडा आ गई।

पीएम श्री स्कूल शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बना हरियाणा, सीएम खट्टर ने किया लोकार्पण, प्ले-वे स्कूल कहलाएँगे ‘बाल वाटिका’

हरियाणा पीएम श्री (PM SHRI) स्कूल चालू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। प्रदेश में 124 पीएम श्री स्कूलों का लोकार्पण प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और केन्द्रीय शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने किया है। केंद्र सरकार ने पहले चरण में इन 124 स्कूलों के लिए 85 करोड़ की धनराशि उपलब्ध करवाई थी। दूसरे चरण में 128 अन्य स्कूलों को मॉडर्न बनाया जाएगा।

पीएम श्री स्कूल को केन्द्रीय कैबिनेट ने सितम्बर 2022 में मंजूरी दी थी, जिसके अंतर्गत देश भर में 14,400 से अधिक स्कूलों को मॉडर्न बनाया जाना है। देश भर में लगभग 3,893 स्कूलों को इसके लिए चयनित किया गया है। हरियाणा के अतिरिक्त अभी अन्य कोई भी प्रदेश अभी इस योजना में इतनी जल्दी स्कूलों को अपग्रेड किया है।

पीएम श्री स्कूलों को पाँच वर्षों में 2 करोड़ रुपए दिए जाने हैं। इससे स्कूलों में स्मार्ट क्लास, लाइब्रेरी, कम्प्यूटर लैब और खेल के मैदान जैसी सुविधाएँ विकसित की जाएँगी। इससे छात्रों के विकास में सहायता मिलेगी। दरअसल, पीएम श्री के जरिए शिक्षा के स्तर में सुधार और छात्रों के विकास पर फोकस किया जा रहा है।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और केन्द्रीय शिक्षा मंत्री ने निपुण एप भी लॉन्च किया। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इस मौके पर कहा, “शिक्षा के बिना मनुष्य पूर्ण नहीं हो सकता। इसलिए शिक्षा की आवश्यकता सभी को है। हमने शिक्षा का स्तर सुधारा है ताकि युवाओं में देशप्रेम, संस्कार और राष्ट्र प्रेम की भावनाएँ जागृत हो सकें।”

मुख्यमंत्री खट्टर ने बताया कि हरियाणा में 4,000 प्ले-वे स्कूल चालू किए गए हैं। इन स्कूलों को अब ‘बाल वाटिका’ के नाम से जाना जाएगा। मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से अपील की है कि वे कक्षा में साधारण तरीके से बच्चों को चीजें सिखाएँ, ताकि उन्हें बच्चे चीजों को आसानी से समझ सकें।

हरियाणा में पीएम श्री और बाल वाटिका स्कूलों के अलावा राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूलों को भी अपग्रेड किया जा रहा है। इन स्कूलों को सीबीएसई (CBSE) से सम्बद्ध किया गया है। पीएम श्री स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे अगले वर्ष से इन स्कूलों में पढ़ेंगे।

खट्टर सरकार प्रदेश में पाँच लाख टैबलेट बाँट चुकी है। इन टैबलेट में 34 अलग-अलग विषयों से सम्बंधित सॉफ्टवेयर इनस्टॉल किए गए हैं। आने वाले समय में इन्हें प्रदेश के कक्षा 10 से कक्षा 12 तक के विद्यार्थियों में बाँटा जाएगा। मुख्यमंत्री खट्टर ने बच्चों के अभिभावकों से अपील की है कि वह इन टैबलेट के उपयोग पर ध्यान दें।

केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने हरियाणा में शिक्षकों की स्थानातंरण नीति की तारीफ़ की। उन्होंने कहा कि इसमें पहले बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार होता था, लेकिन मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने इसे ऑनलाइन कर दिया है। इसकी वजह से भ्रष्टाचार बंद हो गया है।

मोगैम्बो, डॉक्टर डैंग या गेंडास्वामी नहीं, ‘अल्लाहु अकबर’ चिल्लाने वाला ‘सर कलम’ है भारत का दुश्मन: कंगना रनौत ने ‘तेजस’ में दिखाया नारी शक्ति पर कैसे बनाते हैं फिल्म

2 महत्वपूर्ण संस्थाएँ हैं भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए – ‘एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA)’ और एक ‘हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), जो मिल कर भारतीय वायुसेना और नौसेना के लिए लड़ाकू विमानों का निर्माण करती रही है। जहाँ ADA भारत के रक्षा मंत्रालय के ‘डिफेंस रिसर्च एन्ड डेवलपमेंट (DR&D)’ के अंतर्गत आती है, वहीं HAL का एक भाग है – ‘एयरक्राफ्ट डिजाइन एन्ड रिसर्च सेंटर (ADRC)’। DR&D और ADRC ने मिल कर ही ‘तेजस’ फाइटर एयरक्राफ्ट का निर्माण किया है।

ये हलके वजन वाले लड़ाकू विमानों में गिना जाता है, जिनमें हवा में रहते हुए ही ईंधन भरा जा सकता है। बड़ी बात कि ये एक स्वदेशी लड़ाकू विमान है। जिन हथियारों को बड़े-बड़े विमान ढोते हैं, उन्हें ‘तेजस’ भी आसानी से अपने साथ लेकर जा सकता है। ये न सिर्फ एयर टू एयर, बल्कि एयर टू ग्राउंड मार करने में भी सक्षम है। ये एक सुरक्षित दूरी से दुश्मन के विमानों को मार गिरा सकता है। यहाँ हम ‘तेजस’ विमान की बात इसीलिए कर रहे हैं, क्योंकि ये शब्द बहुत चर्चा में है। कंगना रनौत इसी नाम की एक फिल्म लेकर आई हैं।

‘तेजस की समीक्षा’: कैसी है कंगना रनौत की फिल्म की कहानी?

इसमें कंगना रनौत ने भारतीय वायुसेना की अधिकारी ‘तेजस गिल’ का किरदार निभाया है। एक सिख महिला अधिकारी, जो एक खतरनाक रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम देती है और आतंकवादियों का काम तमाम करती है। इसमें उनका साथ देती है ‘आफिया’ नाम की एक मुस्लिम अधिकारी। फिल्म की शुरुआत में ही बता दिया गया है कि न सिर्फ इसके मुख्य किरदार का नाम ‘तेजस’ है, बल्कि ये फिल्म ‘तेजस’ फाइटर एयरक्राफ्ट के इर्दगिर्द भी घूमने वाली है। ‘तेजस गिल’ के ट्रेनिंग वाले दिन, परिवार के साथ गुजारे गए समय और फिर वायुसेना में सेवा को अच्छी तरह उकेरा गया है।

सबसे पहले बात करते हैं फिल्म की कहानी की। ‘तेजस’ की कहानी क्या है ये तो आपको फिल्म देख कर ही पता चलेगा, यहाँ हम सिर्फ ये बता रहे हैं कि कहानी कैसी है। ‘तेजस’ की कहानी में एक्शन है, इमोशन है, थ्रिल है और टुकड़ों में सस्पेंस भी है। इसमें 26/11 का मुंबई हमला है, पाकिस्तान के आतंकवादी हैं, राम मंदिर है और एक छोटी सी प्रेम कहानी भी है। लेकिन, ‘तेजस’ में कुछ भी जबरदस्त ठूँसा हुआ नहीं लगता। इसमें महिला शक्ति का महत्व दिखाने के लिए डायलॉग्स हैं, देशसेवा का जोश भर देने वाले भी संवाद हैं।

लेकिन, ‘तेजस’ की सबसे बड़ी हाइलाइट है – हवाई युद्ध। आप सिनेमाघर में इस दृश्य का इंतज़ार करेंगे क्योंकि आपको पता होगा कि ये आने वाला है, जब ये दृश्य आएगा तो आपकी नज़रें एक सेकेण्ड के लिए भी स्क्रीन से हटीं तो आपको ऐसा लगेगा कि बहुत कुछ छूट गया। बॉलीवुड में शायद ही किसी फिल्म में इससे पहले एयर वॉरफेयर को इस तरह से दर्शाया गया हो। ‘तेजस’ एयरक्राफ्ट के साथ हवाई कलाबाजियाँ, महिला पायलट्स, पाकिस्तानी वायुसेना से हवा में ही युद्ध और कंगना रनौत का इन दृश्यों में अभिनय – सब प्रभावशाली है।

इस मामले में फिल्म कुछ नया दिखाती है, एक शुरुआत करती है जो आगे कई अन्य फिल्मों की कहानी का आधार बनेगी। ऐसा नहीं है कि पाकिस्तान में घुस कर आतंकियों का सफाया करते हुए इससे पहले किसी सैनिक को नहीं दिखाया गया है फिल्मों में, लेकिन ‘तेजस’ में 2 चीजें नई हैं, खास हैं – महिलाओं द्वारा ऑपरेशन को लीड करना और हवाई युद्ध को बारीकी से दिखाना। अब जब देश स्वदेशी हथियारों और फाइटर जेट्स से लैस हो रहा है, रूस-यूक्रेन व इजरायल-हमास युद्ध से जूझती दुनिया में भारत के लोग अपनी रक्षा क्षमताओं को पर्दे पर देखना ज़रूर पसंद करेंगे।

जहाँ तक कंगना रनौत के अभिनय की बात है तो एक्शन दृश्य उनके लिए कोई नई बात नहीं है। कई फिल्मों में वो ये कर चुकी हैं और यही कारण है कि वो काफी सहजता से एक वायुसेना अधिकारी के किरदार को निभाती हैं। उनकी कड़ी ट्रेनिंग और तगड़ी रिसर्च का ही कमाल है कि आपको पर्दे पर तो कंगना रनौत दिखती हैं, लेकिन हाव-भाव किरदार के होते हैं। फिर धीरे-धीरे वो किरदार कंगना पर हावी होता चला जाता है और फिल्म खत्म होने-होने तक आप किरदार को देखने लगते हैं। ये कंगना रनौत के अभिनय का कमाल है, लेकिन हाँ, ये उनके लिए या दर्शकों के लिए कोई नई बात नहीं है।

कंगना रनौत के अलावा इस फिल्म में अंशुल चौहान का भी अच्छा किरदार है, जो उनकी साथी पायलट की भूमिका में हैं। असल में ये कहानी ‘तेजस गिल’ और ‘आफिया’ की ही है – एक मुस्लिम और एक सिख सैनिक की। इस किरदार का इस्तेमाल फिल्म में एक हल्का-फुल्का क्षण लाने के लिए भी किया गया है। फिल्म की शुरुआत में भी एक कॉमिक दृश्य डाला गया है, जो कि इस तरह की थ्रिलर और देशभक्ति फिल्म में ज़रूरी है ताकि दर्शकों का मनोरंजन भी होता रहे। यहाँ ‘तेजस’ के बैकग्राउंड संगीत का जिक्र करना आवश्यक है।

खासकर कंगना रनौत वाले दृश्यों में जिस तरह से पार्श्व संगीत का इस्तेमाल किया गया है, वो काबिले तारीफ़ है। BGM आपको कभी-कभी सीट से उछलने के लिए भी मजबूर कर देता है, अंतर ये है कि पुरुष सुपरस्टार्स को देखते समय तो ये आम है लेकिन कंगना रनौत महिला प्रधान फिल्मों को एक नया मोड़ देने जानी जाती रही हैं। ‘दिल है राँझना’ एक वीर रस वाला गाना है। ‘दंगल-दंगल’, ‘जियो रे बाहुबली’, ‘हुड़-हुड़ दबंग’ या ‘चक दे इंडिया’ आपने सुना है, सभी पुरुष अभिनेता और पुरुष गायकों के हैं – इस बार कुछ नया है, रिफ्रेशिंग है।

‘तेजस’ सिर्फ एक युद्ध को दिखाने वाली फिल्म नहीं है, बल्कि इसमें पिता-पुत्री की बॉन्डिंग भी दिखती है, एक पारिवारिक माहौल भी दिखता है और रेस्टॉरेंट में भोजन करता प्रेमी जोड़ा भी दिखता है। इस्लामी आतंकवाद के कारण कैसे परिवार और प्यार मातम में बदल जाता है – ये भी दिखाया गया है। फिल्म का एक डायलॉग है कि आतंकवाद सबके लिए पर्सनल होना चाहिए। यानी, सभी को इसे व्यक्तिगत समस्या के रूप में लेना चाहिए। खासकर के इस्लामी आतंकवाद, जिसे पाकिस्तान में पोषण और प्रश्रय मिलता है।

कंगना रनौत की ‘तेजस’ वास्तविकता दिखाने में नहीं बरतती कोताही

सबसे प्रशंसा योग्य चीज ये है कि कौन लोग इन आतंकी घटनाओं को अंजाम देते हैं, इसे छिपाया नहीं गया है। क्या आपने कभी किसी ‘डॉक्टर डैंग’, ‘मोगैम्बो’ या ‘प्रलयनाथ गेंडास्वामी’ को भारत का दुश्मन देखा है वास्तविकता में? किसी अख़बार में पढ़ा? इसीलिए, ‘तेजस’ का विलेन ‘ख़ातूनी’ या फिर ‘सर कलम’ वास्तविक है। कोई ‘ख़ातूनी’ कहीं बैठ कर भारत में किसी बड़े हमले की स्क्रिप्ट लिख रहा होता है तो कोई ‘सर कलम’ भारतीय नागरिकों का गला रेतता है – ये तो आप अक्सर खबरों में देखते होंगे न? जो वास्तविकता है, उसे न ढँकना ही तो साहित्य और सिनेमा का काम है।

कंगना रनौत इस मामलों में वास्तविक रूप से बहादुर हैं। वो ट्रेंड बदलने का काम करती हैं, नए ट्रेंड को स्थापित करने का काम करती हैं – अच्छे के लिए। ‘अल्लाहु अकबर’ और ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ जैसे नारों को वो अपनी फिल्मों में छिपाती नहीं हैं। जब कोई आतंकी सरगना ये बोलता है कि वो हिन्दू महिलाओं को दबोचना चाहता है, तो हमें कश्मीर की याद आ जाती है जहाँ ये नारा लगता था कि सभी हिन्दू पुरुष घाटी से चले जाएँ, लेकिन अपनी महिलाओं को यहीं छोड़ कर। इस सोच को भला क्यों छिपाना? नहीं छिपाएँगे, तभी तो लोग जागरूक होंगे, तभी तो इस पर वार होगा।

कोई आतंकी सरगना कहता है कि वो पुजारी को मरते हुए देखना चाहता है। ये भी वास्तविक है। अगस्त 2001 के अंत में 2 हिन्दू पुजारियों का अपहरण कर के आतंकियों ने उनका सिर कलम कर दिया था। ये घटना कश्मीर के सूरनकोट-पुँछ रोड स्थित धुन्धक पुल के पास हुई थी। वहाँ स्थित काली मंदिर के पुजारी नरोत्तम दास और बाबा देवी दास का ‘सर तन से जुदा’ कर दिया गया था। इस सोच को आप इस फिल्म में भी देखेंगे, इसके पीछे कौन हैं ये भी। वही सब, जो बॉलीवुड आज तक छिपाता रहा है।

कुल मिला कर कहें तो घर में घुस कर मारने वाले ‘नया हिंदुस्तान’ को दिखाने वाली फिल्मों के क्रम में ‘तेजस’ एक नया अध्याय जोड़ने वाली है। एक ऐसा हिंदुस्तान, जहाँ की सरकार दुश्मन वार करने से हिचकती नहीं और जहाँ की सुरक्षा एजेंसियों के हाथ बँधे हुए नहीं हैं। जहाँ डोजियर पर डोजियर नहीं सौंपे जाते, बल्कि सीधा एक्शन होता है। ‘तेजस’ में हल्का-फुल्का सेक्युलरिज्म भी है, लेकिन ये बॉलीवुड से जाते-जाते जाएगा। ‘तेजस’ बड़े पर्दे पर अनुभव करने वाली फिल्म है। उद्घाटन से पहले आपको राम मंदिर को देखने का मौका मिल रहा है, ‘तेजस’ के क्लाइमैक्स का ये एक रोचक हिस्सा है।

कौन हैं इजरायली सेना के बदू मुस्लिम, जो हमास से लड़ रहे जंग: इस्लामी ऑटोमन आक्रमण के दौरान दिया यहूदियों का साथ, इजरायल के निर्माण में भी निभाई भूमिका

हाल ही में एक खबर आई है कि फिलिस्तीन का इस्लामी आतंकी संगठन हमास (Palestine’s Islamic Terrorist Organisation Hamas) के हमले में इजरायल के 4 बदू मुस्लिम (Bedouin Muslims) सैनिक मारे गए हैं। हमास ने बड़ी संख्या में बदू मुस्लिम सैनिकों और नागरिकों को बंधक बनाया है और उन्हें अपने साथ गाजा ले गए हैं। बदू मुस्लिमों को बदुईन या बदावी भी कहा जाता है।

अब प्रश्न उठा है कि आखिर मुस्लिम होने के बाद भी हमास इन्हें निशाना क्यों बना रहा है। सवाल ये भी पूछा जा सकता है कि बदू मुस्लिम इजरायल की सेना में क्यों शामिल हैं और उसकी तरफ से क्यों लड़ रहे हैं? यह बदू समुदाय कौन है और आखिर इसकी वर्तमान में स्थिति क्या है?

बदू असल में इजरायल के दक्षिणी हिस्से में फैले नेगेव रेगिस्तान का एक घुमंतू समुदाय है। अरबी भाषा में बदू का मतलब घुमंतू होता है। यह मुख्यतः फिलिस्तीनी अरबी समाज है, जिसका खेती और पशुपालन मुख्य पेशा रहा है। ये काफी मजबूत और ईमानदार माने जाते हैं। अरबी मुस्लिम समाज से इनका खास वास्ता नहीं होता।

इनके बारे में कहा जाता है कि ये रहस्यमयी प्रकृति के होते हैं और अपने बारे में बात करना या जानकारी साझा करना पसंद नहीं करते हैं। यही कारण है कि इजरायल के निर्माण के शुरुआत से ही ये वहाँ की सेना के लिए खुफिया जानकारियाँ देते आ रहे हैं। इन्हें शारीरिक ही नहीं, दिमागी तौर पर भी बेहद मजबूत माना जाता है।

बदू मुस्लिमों के बारे में कहा जाता है कि रेगिस्तान में रहने के कारण वे रेत पर पाँव के निशान देखकर बता सकते हैं कि गुजरने वाला शख्स पुरुष था या महिला। इतना ही नहीं, तेज आँधी में भी ये लोग सटीक निशाना लगा सकते हैं। ये समुदाय बाज पालता है और उसका कई तरह से इस्तेमाल करता है।

16वीं सदी में तुर्की के सुल्तान ने इजरायल पर कब्जा कर लिया तो वहाँ के लोगों को अपनी सुरक्षा की चिंता होने लगी। इसके बाद यहूदियों ने उन्हें अपनी सुरक्षा में तैनात करना शुरू कर दिया। इजरायल के निर्माण के समय भी बदू मुस्लिमों ने इस्लामी देशों के रवैये के खिलाफ जाकर इजरायल का समर्थन किया था और उसकी मदद की थी।

बदू मुस्लिम इजरायल में इसके निर्माण के समय से ही रहते आ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, वर्तमान में इजरायल में लगभग 2 लाख बदू मुस्लिम रहते हैं। इनमें से बड़ी संख्या में बदू दक्षिणी इजरायल में रहते हैं, जहाँ इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने 7 अक्टूबर 2023 को बर्बर हमला किया था।

हमास के आतंकी हमले में अब तक 19 बदू मुस्लिम मारे जा चुके हैं। बदू इजरायल की सेना के साथ भी जुड़े हैं। ध्यान देने वाली बात ये है कि इजरायल अन्य फिलिस्तीनियों को अपनी सेना में भर्ती नहीं करता है। वहीं, बदू समुदाय को सेना में शामिल किया जाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, बदू समुदाय ने इजरायल के निर्माण के समय इजरायली सुरक्षा बलों को महत्वपूर्ण ख़ुफ़िया जानकारी जुटा कर दी थी। इनको चरवाहा होने के कारण इलाके की अच्छी भौगोलिक जानकारी थी। यह रेगिस्तान में रहने वाली जनजाति होने के कारण इजरायल के नेगेव और सिनाई जैसे इलाकों की अच्छी जानकारी रखते हैं।

बदू समुदाय को रेगिस्तान की जिन्दगी से निकाल कर इजरायल ने साल 1965 में उन्हें शहरों की कॉलोनियों में बसाया था। इस तरह वे मॉडर्न जिन्दगी को जान सके। बदू मात्र इजरायल में ही नहीं, बल्कि अन्य अरब देशों में भी रहते हैं। सऊदी अरब, इराक, जॉर्डन, अल्जीरिया, सूडान, सीरिया जैसे देशों में इनकी बड़ी आबादी है।

इजरायल के भीतर बदू समुदाय की सेवाओं का काफी सम्मान किया जाता है। इजरायल में 154 बदू सैनिकों की याद में एक स्मारक भी बनाया गया है। यहाँ इनके परिवार वाले इन्हें श्रृद्धांजलि देने के लिए पहुँचते हैं। इसे मेमोरियल ऑफ़ ब्रोकन हर्ट्स कहा जाता है।

एक रिपोर्ट बताती है कि हर वर्ष लगभग 450 बदू इजरायली सेना में अपनी सेवाएँ देने के लिए आते हैं। हालाँकि, इन्हें इजरायल के अन्य यहूदियों की तरह अनिवार्य मिलिट्री ट्रेंनिंग से छूट है। यह स्वयं की इच्छा पर सेना में आते हैं। पूरी दुनिया में बदू मुस्लिमों की संख्या लगभग 40 लाख है और इनमें से अधिकांश इस्लाम के सुन्नी तबके से ताल्लुक रखते हैं।

‘शाहिद अफरीदी ने इस्लाम कबूलवाने के लिए प्रेशर बनाया… नमाज के लिए कॉल करता था, मुझ हिंदू के साथ खाना नहीं खाता था’ – पढ़िए पाकिस्तान क्रिकेट के पतन की कहानी

  • शाहिद अफरीदी वो मेन व्यक्ति है, जो कई बार बोला कि इस्लाम कबूल कर लो।
  • मैं हिंदू हूँ, इस कारण से मेरे साथ खाना नहीं खाते थे।
  • सुबह वाली नमाज के समय कॉल करते थे। नमाज पढ़ने के लिए उठाते थे।
  • मुझे सपोर्ट इसलिए नहीं किया क्योंकि मैं हिंदू हूँ। एक हिंदू इनके रिकॉर्ड तोड़ दूँगा, इसलिए सपोर्ट नहीं किया।
  • अगर इस्लाम कबूल कर लेता तो शायद कप्तान बन जाता… लेकिन मैं इतना गिर नहीं सकता। मेरे लिए मेरा धर्म ही सब कुछ है।

पाकिस्तान में हिंदू होने की सजा क्या होती है, इसका जीता जागता सबूत है ऊपर लिखी बातें। यह सब किसी आम इंसान के साथ नहीं हुआ बल्कि पाकिस्तानी हिंदू क्रिकेटर दानिश कनेरिया ने अपने जीवन में इसे भोगा है। एक स्तर तक पहुँच कर नाम कमा चुके स्टार क्रिकेटर के साथ अगर ऐसा भेदभावपूर्ण रवैया पाकिस्तान में अपनाया जा सकता है तो आम हिंदूओं के साथ वहाँ क्या होता होगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

‘आजतक’ को दिए एक इंटरव्यू में कनेरिया ने इस बात का खुलासा किया है। इतना सब कुछ भोगने-झेलने के बावजूद उन्होंने कहा कि उनके लिए उनका धर्म सबसे अहम है और वो सनातन संस्कृति और हिंदू धर्म के लिए आवाज उठाते रहेंगे। कनेरिया ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान टीम के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी ने कई बार उन पर इस्लाम कबूलने के लिए दबाव डाला था। उनसे कहा जाता था कि ऐसा करने पर वो लंबे वक्त तक पाकिस्तानी क्रिकेट टीम में खेल पाएँगे।

‘मैं सनातनी, मेरा धर्म सबसे बढ़कर’

कनेरिया ने कहा, “मेरे लिए मेरा धर्म, सनातन धर्म सबसे बढ़कर है। उससे ऊपर मेरे लिए कुछ भी नहीं। मेरे जिंदगी में राम भगवान का चरित्र है। उनके जीवन ने हमें यही सिखाया है कि सनातन और सनातन धर्म के लिए आवाज उठाओ। जहाँ कुछ गलत हो रहा है, मैं वही कह रहा हूँ। पाकिस्तान में लोगों के साथ जो परिस्थिति है, वही कह रहा हूँ।”

‘शाहिद अफरीदी ने बहुत सताया’

दानिश कनेरिया ने अपने करियर को लेकर कहा, “मेरा करियर भगवान की कृपा से अच्छा जा रहा था। मैं अच्छा कर रहा था। मैं चौथा सबसे अधिक विकेट लेने वाला पाकिस्तानी खिलाड़ी था। मैं काउंटी क्रिकेट भी खेल रहा था। मुझे इंजमाम-उल-हक ने अच्छा सपोर्ट किया। वह एक अकेले इंसान थे, जिन्होंने एक कैप्टन के तौर पर मेरा सपोर्ट किया।”

उन्होंने आगे कहा, “उनके अलावा शोएब अख्तर ने साथ दिया। लेकिन शाहिद अफरीदी और बाकि लोगों ने मुझे बहुत सताया। वो मेरे साथ खाना नहीं खाते थे। कनवर्जन की बात करते थे। शाहिद आफरीदी मेन है, जो मुझे बहुत दफा इस्लाम कबूल करने को कहते थे।”

दानिश कनेरिया की इस बात को वीडियो में 6:31 से 7:30 तक सुना जा सकता है।

‘मुझे फँसाया गया’

पाक के पूर्व क्रिकेटर कनेरिया ने कहा, “वो इंग्लैंड काउंटी का मैच था, जिसमें मुझ पर स्पॉट फिक्सिंग का आरोप लगा। मैंने 8 साल के बाद इसे स्वीकार भी किया। लेकिन मेरी स्वीकृति सिर्फ अन्नू भट्ट नाम के बुकी से मिलने को लेकर थी, लोगों ने उसे स्पॉट फिक्सिंग में शामिल होना समझ लिया। यह क्लियर करना बहुत जरूरी है।”

उन्होंने आगे कहा, “इन लोगों ने बहुत दबाव डाला कि आप ये स्वीकार करो कि सब आपने किया है। भाई मैंने किया नहीं, मुझे पता नहीं क्या हुआ… तो मैं क्या स्वीकार करूँ। शार्जिल खान जैसे खिलाड़ियों ने मैच फिक्स किया, लेकिन पीसीबी ने उन्हें वापस बुलाया। मुझे पीसीबी ने कभी सपोर्ट नहीं किया, क्योंकि मैं हिंदू था। सपोर्ट इसलिए भी नहीं किया क्योंकि अगर मैं खेलता तो इनके रिकॉर्ड तोड़ देता। और आपको पता है कि आज तक के पाकिस्तान के इतिहास में कोई भी हिंदू टॉप पर नहीं आया है।”

इस बात को वीडियो में 7:33 से लेकर 8:50 तक सुना जा सकता है।

एक हिंदू खिलाड़ी होने के कारण कैसे-कैसे परेशान किया जाता था, इसको लेकर दानिश कनेरिया ने बताया, “सुबह को पाकिस्तान टीम के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी के फोन आते थे। फज्र की नमाज (सुबह 5 बजे के आसपास वाली) के लिए। मुझे भी कॉल करते थे। 1-2 दिन के बाद मैंने कहा मुझे कॉल मत करना। लेकिन मेरे लिए वो परेशानी पैदा करते थे। भगवान को लेकर तंज करते थे।”

शाहिद आफरीदी वही क्रिकेटर है, जो अपनी बेटी से भी मजहब के दायरे में ही रहकर प्यार करता है। ‘काफिर (गैर-मुस्लिम)’ जैसा कोई काम करने पर वो अपनी बेटी को सजा देता है। भारतीय टीवी सीरियल देख कर आरती की तरह हाथ घुमा रही अपनी बेटी के सामने ही टीवी तोड़ देने वाला कट्टर मजहबी शख्स है अफरीदी

पीएम मोदी की तारीफ

इस इंटरव्यू के दौरान कनेरिया ने पीएम मोदी की खासी तारीफ की। उन्होंने यह भी कहा कि मौका मिलेगा तो वो भारत की नागरिकता ले सकते हैं। उन्होंने पीएम मोदी से उन पर लगे क्रिकेट बैन को हटाने में मदद करने की अपील भी की।

गौरतलब है कि दानिश कनेरिया हिंदू धर्म को लेकर जो तंज करता है, उस पर अपनी बात बहुत ही स्पष्टता से रखते हैं। इन्होंने प्रशांत भूषण को बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत को लेकर किए गए उनके ट्वीट पर जम कर सुनाया। इससे पहले वो ‘The Wire’ की तथाकथित पत्रकार आरफा खानम शेरवानी को भी हिंदू संस्कृति पर बोलने पर आईना दिखा चुके हैं।

पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व क्रिकेटर दानिश प्रभाशंकर भाई कनेरिया ने 61 टेस्ट मैच खेले और 261 विकेट लिए हैं। वो पाकिस्तान की तरफ से ऐसे चौथे गेदबाज हैं, जिन्होंने सबसे अधिक विकेट लिए हैं। ऐसे रिकॉर्ड के बावजूद सिर्फ हिंदू होने के कारण उनके क्रिकेटिंग करियर को खत्म कर दिया गया।