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बुर्के में भाग रहा था सपा का नेता, योगी की पुलिस ने धर दबोचा: गैंगस्टर मोहम्मद मुजफ्फर ने गोतस्करी से खड़ी कर रखी है करोड़ों की संपत्ति

उत्तर प्रदेश की प्रयागराज पुलिस ने समाजवादी पार्टी के नेता एवं ब्लॉक प्रमुख मोहम्मद मुज़फ्फर को गिरफ्तार कर लिया है। मोहम्मद मुज़फ्फर पर अलग-अलग जिलों में गोहत्या सहित 34 आपराधिक केस दर्ज हैं। शनिवार (14 अक्टूबर 2023) को गिरफ्तारी से बचने के लिए सपा नेता बुर्का पहनकर भाग रहा था। हालाँकि, पुलिस ने उसे दबोच लिया। मुजफ्फर पूरामुफ्ती थाने का हिस्ट्रीशीटर है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार को पुलिस को सूचना मिली कि मोहम्मद मुज़फ्फर एक निकाह में शामिल होने जा रहा है। यह निकाह डॉक्टर शफकत की बेटी का था, जो कि प्रयागराज के बमरौली मोड़ के पास प्रयाग गार्डेन में हो रहा था। डॉक्टर शफकत आरोपित मोहम्मद मुज़फ्फर के दोस्त बताए जा रहे हैं। मुज़फ्फर को पुलिस के आने की पहले से ही भनक लग चुकी थी। उसने मौके से फरार होने के लिए बुर्का पहन लिया और भागने की फ़िराक में था। हालाँकि, पुलिस टीम ने मुज़फ्फर को पहचान लिया और उसे गिरफ्तार कर लिया।

मोहम्मद मुज़फ्फर को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की खबर सुनकर उसके समर्थक बमरौली पुलिस चौकी पर जमा होने लगे। उन्होंने वहाँ हंगामा भी किया। मुज़फ्फर की बीवी ने भी हाईकोर्ट में अपने पति की गिरफ्तारी के बाद किसी अनहोनी की आशंका का प्रार्थना पत्र दे दिया। आख़िरकार रविवार (15 अक्टूबर 2023) को पुलिस ने मोहम्मद मुज़फ्फर को कोर्ट में पेश किया। यहाँ से उसे जेल भेज दिया गया है। मोहम्मद मुज़फ्फर फिलहाल प्रयागराज के ही कौड़िहार ब्लॉक का ब्लॉक प्रमुख है।

जिस केस में मोहम्मद मुज़फ्फर की गिरफ्तारी हुई है, वो 11 मई 2023 को प्रयागराज के ही थाना सोरांव में दर्ज हुआ था। यह केस खुद पुलिस द्वारा दर्ज करवाया गया था जिसमें पुलिस ने 16 गोवंश से लदी एक ट्रक सड़क के किनारे खराब हालत में बरामद की थी। इसमें से 8 गोवंश जीवित थे जबकि 8 की मौत हो गई थी। मृत गोवंश के शरीर पर खरोंच के निशान थे। पुलिस ने इस मामले में अज्ञात ट्रक मालिक के साथ 2 अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली थी। यह FIR IPC 429 के साथ गोहत्या निवारण अधिनियम और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत दर्ज हुई थी।

बताया जा रहा है कि जाँच के दौरान पुलिस को इस मामले में मोहम्मद मुज़फ्फर की संलिप्तता मिली। तब से मुज़फ्फर फरार चल रहा था। आखिरकार रविवार को उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। मुज़फ्फर पर प्रयागराज, चंदौली, वाराणसी, भदोही और कौशाम्बी आदि जिले मिला कर लगभग 34 केस दर्ज हैं। प्रशासन ने मुज़फ्फर की कई बेनामी सम्पत्तियों का भी पता लगाया है। नवम्बर 2022 में मोहम्मद मुज़फ्फर की 10 करोड़ की सम्पत्ति भी कुर्क की गई थी।

हमास के साथ-साथ हिजबुल्ला के ठिकानों पर भी इजरायल का हमला, एकजुटता दिखाने के लिए इजरायल पहुँच रहे अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन, विदेश मंत्री वहीं मौजूद

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन बुधवार (18 अक्टूबर, 2023) को इज़राइल का दौरा करेंगे। पहले से वहाँ मौजूद अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के मुताबिक, राष्ट्रपति जो बायडेन इज़राइल इस क्षेत्र और दुनिया के लिए एक अहम पल में यहाँ आ रहे हैं।

वो इज़राइल के साथ खड़े होने उसके समर्थन की प्रतिबद्धता को दोहराएँगे। इस दौरान अमेरिका और इज़राइल एक ऐसी योजना बनाने पर राजी हुए हैं जो गाजा में मानवीय मदद पहुँचा सके। वहीं दूसरी तरफ इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) लेबनान में मंगलवार (17 अक्टूबर, 2023) सुबह से ही हिजबुल्लाह आतंकवादी ठिकानों पर हमला कर रही है।

अपने दौरे को लेकर राष्ट्रपति बायडेन ने पोस्ट किया, “बुधवार को मैं हमास के क्रूर आतंकवादी हमले के सामने एकजुटता दिखाने के लिए इज़रायल की यात्रा करूँगा। फिर मैं गंभीर मानवीय जरूरतों को लेकर जॉर्डन की यात्रा करूँगा, नेताओं से मिलूँगा और साफ करूँगा कि हमास फिलिस्तीनियों की आज़ादी के हक के लिए नहीं लड़ रहा है।”

रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल में हमास के हमलों में बीच अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को बंकर में जाकर छुपना पड़ा। इजरायली रक्षा मंत्रालय के एक कमांड सेंटर में सोमवार (16 अक्टूबर, 2023) को इन दोनों के बीच बैठक चल रही थी।

इस दौरान रॉकेट हमले का सायरन बज उठा और इनको बंकर में जाना पड़ा। इजरायल में मौजूद अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकन ने अमेरिकी राष्ट्रपति बायडेन के दौरे को लेकर कहा कि वो दोबारा से इजरायल के पक्ष में अपना रुख साफ करेंगे।

वैसे ही जैसे उन्होंने हमास के हमले में कम से कम 30 अमेरिकियों सहित 1400 से अधिक लोगों की हत्या के बाद साफ किया था। इस हमले को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ किया था कि वास्तव में इज़रायल के पास हमास और अन्य आतंकवादियों से अपने लोगों की रक्षा करने और भविष्य के हमलों को रोकने का अधिकार और कर्तव्य है।

अपने दौरे में राष्ट्रपति बायडेन इजरायल के इस संकट का फायदा उठाकर उस पर हमला करने की कोशिश करने वाले दुनिया के किसी भी शख्स, राज्य या गैर-राज्य के लिए हमारा साफ संदेश देंगे कि ऐसा करने की कतई कोशिश न करें।

अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकन ने कहा, “हमास से बंधकों की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रपति हमारे इजरायली भागीदारों के साथ करीबी समन्वय करना जारी रखेंगे। संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल एक ऐसी योजना बनाने पर राजी हुए हैं जो कई देशों और बहुपक्षीय संगठनों द्वारा भेजी जा रही मानवीय मदद को गाजा में नागरिकों तक पहुँचाने में सक्षम बनाएगी।”

एक तरफ अमेरिकी विदेश मंत्री इजरायल में ही हैं, वहीं दूसरी तरफ इजरायली फोर्स आईडीएफ केवल गाजा में सुन्नी आतंकी संगठन हमास पर ही नहीं बल्कि लेबनान के आतंकी संगठन हिजबुल्लाह के ठिकानों पर भी हमला कर रही है। हमास की तरफदारी में ये संगठन इजरायल पर हमला कर रहा है।

IDF को लेबनान की सीमा पर मेटुला शहर की ओर गोलीबारी के रिपोर्ट मिली है। गौरतलब है कि शिया आतंकी संगठन हिजबुल्लाह और हमास दोनों ही का एक ही मकसद इजरायल के खात्मे का है। इन दोनों ही आंतकी संगठन हमास और हिजबुल्लाह के अमेरिका ने आतंकी संगठन होने का ऐलान किया है।

हरामी महुआ: सस्ती भी है, चढ़ती भी मस्त है, फर्र-फर्र अंग्रेजी निकालती है!

तू है मेरी दुल्हन, आज होगा मिलन… मेरी महुआ, ओ मेरी जाना!

मोहम्मद रफी ने जब ये गाना गाया होगा, शायद महुआ की गिरफ्त में होंगे। जिस सुर-तान-दर्द के साथ हर शब्द निकला है, वो बिन महुआ संभव नहीं। महुआ ही जीवन है, महुआ ही प्रेमी भी और प्रेमिका भी… इस गीत ने पूरी दुनिया को बता दिया था। इसके मर्म को जानने-समझने वालों में मैं भी एक था।

झारखंड में पला-बढ़ा। टाटा-रांची जैसे शहरों में नहीं। जंगलों से घिरे गाँव में। इसके अपने नफा-नुकसान रहे। बाल जब पक कर सफेद हो गए हैं तो नुकसान की बात कर जिंदगी को और तकलीफ क्यों देना! इसलिए आज बात खुशियों की। जिंदगी जीने की। आज बात महुआ की।

महुआ से मेरी दोस्ती हाई स्कूल के दिनों में हो गई थी। गजब का मोहपाश था उसका। बिन डोर खींचा चला जाता था मैं उसकी ओर। उसकी मादकता मेरे नथुनों में उतरती चली जाती थी और मैं उसकी आगोश में खुद को ढीला कर सिमट जाता था।

जंगलों के बीच झारखंड के गिरिडीह में जिंदगी मजे में कट रही थी। महुआ के साथ मेरा प्यार परवान चढ़ रहा था। किसी की नजर लग गई लेकिन। एक हरामखोर (मतलब नॉटी) से जीवन में पाला पड़ गया। ज्ञान मिला कि पापी पेट के लिए लंबी पढ़ाई जरूरी है। महुआ का साथ छूट गया।

हरे-भरे जंगलों से निकल मॉल, फ्लाईओवर, कॉन्क्रिट वाले जंगल में आ गया। लोगबाग इसे दिल्ली कहते हैं। शरीर ने तो इस शहर को अपना लिया लेकिन मन महुआ के लिए हमेशा बेचैन रहा। इस बेचैनी को आप ऐसे समझ सकते हैं कि फर्र-फर्र अंग्रेजी वाली कॉल सेंटर के जॉब का इंटरव्यू मैंने महुआ के आगोश में ही दिया था, फ्लाइंग कलर्स (मतलब गर्दा उड़ाके) के साथ पास हुआ था मैं।

सुना है दिल्ली दिलवालों की है! स्कॉच, व्हिस्की, बीयर, वाइन, रम, जिन, वोडका… क्या-क्या नहीं मिलता है यहाँ। पब-बार में बैठ पंजाबी-अंग्रेजी-बॉलीवुड के तड़कते-भड़कते संगीत के साथ गटकने वालों की भीड़ देखते बनती है। क्या कोई भी लेकिन महुआ को टक्कर दे सकता है?

‘स्कूल के टेम पे, आना गोरी डेम पे’ और ‘मोर 18 साल होई गेलक रे, मोर शादी कराय दे, मोर जोड़ी जुमाय दे’ बैकग्राउंड में बज रहा हो, हाथ में सखुआ के पत्तों से बने दोने में महुआ हो, चखने में टंगरी कबाब या रोस्टेड चिकेन की जगह कच्चा प्याज-हरी मिर्च-उबले चने का मिक्स्चर हो, प्याज की पकौड़ी हो… इससे आगे अब लिखा नहीं जा रहा! अफसोस कि महुआ से मिलने की बेचैनी पर अब किसी कुमार कवि को विश्वास ही नहीं। कोई लिख दे तो गाने वाला कोई रफी नहीं। सब लगे पड़े हैं पंजाबी ‘दारू विच प्यार मिला दे’ के पीछे।

झारखंड के मेरे सब दोस्त भी घर-गृहस्थी में बिजी हैं। पहले वाली बात नहीं रही कि कोई आ रहा हो दिल्ली तो ले आया, मन को तर कर लिया! अब बस तरसता रहता हूँ। यहाँ के दोस्त-यार तरस खाकर कहीं-कहीं से जुगाड़ कर महुआ लाते हैं, ब्रांडेड बोतल वाली। उनका दिल रखने को पी तो लेता हूँ लेकिन जो महुआ ब्रांड में लिपट गई, ब्रांड पर बिक गई, वो हरामी हो गई… ऐसा मेरा मानना है।

हरामी तो हालाँकि वो महुआ भी हो गई मेरे लिए, जिसका साथ छूट गया। वो गले से उतर दिल में समा जाती थी। अब मैं उसका बस दिलजला आशिक रह गया हूँ, दिल्ली की सड़कों पर आरोप लगाता हुआ, गुनगुनाता हुआ। महुआ की बेवफाई पर रफी ने भी गाया था, पढ़िए और गुनगुनाइए:

तूने मुझसे किया था कभी वादा
मेरी ताल पे तू दौड़ी चली आएगी
कैसा बंधन है, प्यार का ये बंधन
इसे छोड़ के तू कभी नहीं जाएगी
क्या यही है वफ़ा, मुझे ये तो बता
मेरी महुआ, वो तेरे वादे क्या हुए

सेम सेक्स में शादी कानूनी नहीं, बच्चे गोद नहीं ले सकेंगे समलैंगिक: सुप्रीम कोर्ट, सरकार और पुलिस को भेदभाव नहीं करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक विवाह पर आज मंगलवार (17 अक्टूबर 2023) को अपना-अपना फैसला पढ़ा है। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने साथ रहने वाले LGBTQ जोड़ों को परिवार के रूप में राशन कार्ड देने सहित तमाम सुविधाओं पर विचार करने के लिए एक कमिटी गठित करने के लिए कहा है। CJI ने LGBTQ के अधिकारों की वकालत की। वहीं, बेंच के सदस्य रवींद्र भट्ट ने असहमति जाहिर की। हालाँकि, कोर्ट के 3-5 सदस्य ने इस समुदाय को शादी की मान्यता देने से इनकार दिया। वहीं, इस समुदाय के लोग बच्चों को गोद भी नहीं ले सकेंगे।

CJI ने कहा कि कोर्ट स्पेशल मैरिज ऐक्ट के प्रावधानों को रद्द नहीं कर सकती। यह संसद का काम है। समलैंगिक समुदाय की शादी की मान्यता देने का काम संसद पर छोड़ दिया। हालाँकि भेदभाव रोकने के लिए समलैंगिक समुदाय के लोगों के लिए कोर्ट ने पुलिस को कुछ दिशा-निर्देश भी दिए। इसके साथ ही उन्हें विभिन्न लाभ देने के लिए एक समिति गठित करने के लिए भी कहा।

बेंच के जजों ने बंटा हुआ फैसला दिया। समलैंगिक जोड़े द्वारा बच्चे को गोद का अधिकार CJI ने दिया, लेकिन अधिकांश जज ने इससे असहमति जाहिर की। पाँच जजों की बेंच में जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस नरसिम्हा ने जस्टिस रवींद्र भट्ट के फैसले से सहमति जताई है। अपने फैसले में हिमा कोहली ने सिर्फ जस्टिस भट्ट से सहमति जाहिर की। जस्टिस ने भट्ट ने शादी को मौलिक अधिकार नहीं माना। उन्होंने कहा कि अगर साथ रहना चाहता है तो रह सकता है।

फैसला पढ़ने के दौरान मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा, “विवाह करने के अधिकार को यौन रुझान के आधार पर प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता। उनके इस तरह के अधिकारों की सरकार द्वारा विफलता भेदभाव की तरह है।” उन्होंने कहा, “Queer व्यक्तियों सहित सभी को अपने जीवन की नैतिक गुणवत्ता का आकलन करने का अधिकार है। स्वतंत्रता का अर्थ है वह बनने की क्षमता, जो कोई व्यक्ति बनना चाहता है।”

LGBTQ के पक्ष में तर्क देते हुए CJI चंद्रचूड़ ने आगे कहा, “अदालत ने माना है कि समलैंगिक व्यक्तियों के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता है। विषमलैंगिक जोड़ों को मिलने वाले भौतिक लाभ और सेवाएँ से समलैंगिक जोड़ों को वंचित करना उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन होगा। कानून यह नहीं मान सकता कि केवल विषमलैंगिक जोड़े ही अच्छे माता-पिता हो सकते हैं। इसलिए गोद लेने के नियम समलैंगिक जोड़ों के खिलाफ भेदभाव के लिए संविधान का उल्लंघन हैं।”

दरअसल, समलैंगिक विवाह का विरोध करते हुए केंद्र सरकार ने तर्क दिया था कि यह शहरी अभिजात्य वर्ग का चोंचला है। इस देखते हुए जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि यह सिर्फ शहरी अभिजात वर्ग का मसला नहीं है। यह गाँव के खेतों में काम करने वाली एक महिला से भी संबंधित है। उन्होंने कहा कि शहरों में रहने वाले सभी लोगों को एलिट नहीं कहा जाता है।

इस दौरान सीजेआई ने स्पेशल मैरिज ऐक्ट का भी जिक्र किया। इसी ऐक्ट में संशोधन को LGBTQ की शादी को मान्यता देने की बात कही गई थी। इसको लेकर CJI ने कहा, “यह संसद को तय करना है कि विशेष विवाह अधिनियम की व्यवस्था में बदलाव की आवश्यकता है या नहीं। विवाह के अधिकार में अपना साथी चुनने का भी अधिकार है।”

LGBTQ समुदाय को राहत देते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “केवल यौन पहचान के बारे में पूछताछ करने के लिए समलैंगिक समुदाय के लोगों को पुलिस स्टेशन में बुलाकर कोई उत्पीड़न नहीं किया जाएगा।” उन्होंने कहा, “पुलिस को समलैंगिक व्यक्तियों को अपने मूल परिवार में लौटने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए। पुलिस को एक समलैंगिक जोड़े के खिलाफ उनके रिश्ते को लेकर एफआईआर दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जाँच करनी चाहिए।”

CJI ने आगे कहा, “विषमलैंगिक संबंधों में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को पर्सनल लॉ सहित मौजूदा कानूनों के तहत शादी करने का अधिकार है। समलैंगिक जोड़े सहित अविवाहित जोड़े संयुक्त रूप से एक बच्चे को गोद ले सकते हैं।” इनके अधिकारों के बारे में बात करते हुए सीजेआई ने कमिटी की भी बात कही।

उन्होंने कहा, “हम सॉलिसिटर जनरल के बयान को रिकॉर्ड करते हैं कि केंद्र सरकार साथ रहने वाले समलैंगिकों के अधिकारों और हकदारियों को तय करने के लिए एक समिति का गठन करेगी। समिति निम्नलिखित पर विचार करेगी – राशन कार्डों में समलैंगिक जोड़ों को परिवार के रूप में शामिल करना, समलैंगिक जोड़ों को संयुक्त बैंक खाते के लिए नामांकन करने में सक्षम बनाना, पेंशन, ग्रेच्युटी आदि से मिलने वाले अधिकार।”

सीजेआई की बात को आगे बढ़ाते हुए जस्टिस कौल ने कहा, “प्राचीन काल से ही समान-लिंग संबंधों को न केवल यौन गतिविधियों के लिए बल्कि भावनात्मक संतुष्टि के लिए संबंधों के रूप में मान्यता दी गई है… मैंने कुछ सूफी परंपराओं का उल्लेख किया है…।” उन्होंने शीर्ष न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ से भी अपनी सहमति जताई।

वहीं, जस्टिस भट्ट ने CJI से अपनी असहमति जताई। जस्टिस रविंद्र भट्ट ने कहा, “अदालत मानती है कि शादी सामाजिक घटना है। एक संस्था के रूप में विवाह राष्ट्र से पहले है। इसका मतलब यह है कि विवाह की संरचना सरकार से पहले है। विवाह की शर्तें सरकार की शर्तों से परे हैं।”

दरअसल, 11 मई 2023 को सुनवाई के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके पहले सर्वोच्च न्यायालय ने लगातार 10 दिनों तक सुनवाई की थी। इस मामले में सामाजिक संगठनों और LGBTQ समुदाय के लोगों ने याचिका दाखिल की थी। इस याचिका पर केंद्र सरकार के साथ-साथ सभी राज्य सरकारों को पक्ष बनाया गया था।

पाँच न्यायाधीशों वाली इस पीठ में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के अलावा न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट्ट, न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा शामिल हैं। सामाजिक संगठन LGBTQ समुदाय में आपसी विवाद की माँग का विरोध कर रहे हैं।

‘सरकारी जमीन पर बनाई मस्जिद-कब्रिस्तान-ईदगाह, रोहिंग्या को भी बसाया’: अलीगढ़ का ‘लैंड जिहाद’ CM योगी तक पहुँचा, दावा- कोर्ट के आदेश पर भी नहीं हटा कब्जा

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में भाजपा के एक नेता ने ग्राम पंचायत की जमीन पर ‘लैंड जिहाद’ होने का आरोप लगाया है। भाजपा नेता ने इस जमीन पर मुस्लिमों द्वारा अवैध कब्ज़ा कर के ईदगाह, मस्जिद और कब्रिस्तान बना लेने का दावा किया है। उन्होंने इस बाबत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भी लिखा है। सोमवार (16 अक्टूबर, 2023) को लिखे गए इस पत्र में शिकायतकर्ता ने कब्ज़ा की गई जमीन से देश विरोधी गतिविधियाँ संचालित होने की जानकारी दी है।

यह शिकायती पत्र डॉ निशित शर्मा ने लिखा है। निशित भाजपा में अलीगढ़ के जिला प्रवक्ता और मीडिया प्रभारी रह चुके हैं। जिस जगह का उन्होंने जिक्र किया है वो तहसील कोल क्षेत्र के गाँव चिलकौरा की है। यह गाँव अलीगढ़ शहर से सटा हुआ है। शिकायत में उन्होंने बताया है कि गाँव पंचायत की जमीन पर मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा साल 2010 से अवैध कब्ज़ा शुरू किया गया था। तब के लेखपाल (राजस्व निरीक्षक) ने अवैध कब्जेदारों पर केस भी दर्ज करवाया था लेकिन उसको पिछली सरकार ने दबा दिया।

शिकायत में आगे बताया गया है कि साल 2017 में गाँव चिलकौरा के निवासियों ने वहाँ हुए अवैध कब्ज़े की शिकायत हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) के जरिए की थी। इस PIL पर हाईकोर्ट ने अलीगढ़ प्रशासन को 6 माह की समयसीमा देते हुए जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। निशित शर्मा का आरोप है कि उच्च न्यायलय के आदेश के बावजूद करवाई न होने पर ग्रामीणों ने अदालत में अवमानना का केस दर्ज किया। इस केस के बाद अलीगढ़ के डीएम के साथ कोल के SDM व तहसीलदार को तलब किया गया था।

आरोप है कि हाईकोर्ट में तलब किए जाने के बाद तहसीलदार कोल ने अधिकतर मामलों को निस्तारित करने का शपथ पत्र जमा किया था। हालाँकि, निशित के मुताबिक, असली हालत चिंताजनक हैं। उनका दावा है कि चारागाह की जमीन पर मुस्लिम समुदाय द्वारा मस्जिद, ईदगाह, कब्रिस्तान और अवैध तौर पर मकान बना लिए गए हैं। इस जमावड़े को शिकायतकर्ता ने हरियाणा के नूहं मेवात वाले पैटर्न पर आबादी बढ़ाने की साजिश बताया है। निशित का ये भी दावा है कि अवैध कब्ज़े वाली सड़क को CAA विरोधी हिंसा में दंगे भड़काने के लिए इस्तेमाल किया गया है।

शिकायत के अंत में निशित ने अवैध कब्ज़े की जमीन का इस्तेमाल कर रोहिंग्या और बांग्लादेशियों को भी संरक्षण मिलने की बात कही है। साथ ही कब्जेदारों को इस्लामी कट्टरपंथी कहते हुए मुख्यमंत्री से न सिर्फ जमीन से अवैध कब्ज़ा हटवाने का आदेश देने बल्कि इसके पीछे जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई किए जाने की भी माँग की गई है। सबूत के तौर पर भाजपा नेता ने कुछ बिल्डिंग और इबादतगाहों की तस्वीर भी अपने फेसबुक पर शेयर की है।

यहाँ एक इबादतगाह के आगे कुछ बकरियाँ खड़ी दिखाई दे रहीं हैं। साथ ही एक अन्य तस्वीर में कई मकान बने दिख रहे जिसके साथ खुली नाली निकल रही है। निशित ने अपनी शिकायत में CM योगी आदित्यनाथ को टैग किया है। उन्होंने लिखा, “अलीगढ़ में ग्राम पंचायत चिलकौरा की भूमि पर तैयार हो रहा एक और मेवात। चारागाह की जमीन पर अवैध कॉलोनी , मस्जिद ,कब्रिस्तान हो चुका तैयार। प्रशासन ने की कोर्ट की अवमानना। वर्षों तक अधिकारी रहे मौन। महाराज योगी आदित्यनाथ जी को पत्र लिख कर की प्रार्थना। दंडित करें इन सबको। भूमि मुक्त हो।”

हत्या कर कैफे में मजे कर रहा था ‘अल्लाह का लड़ाका’, ब्रसेल्स पुलिस ने मार गिराया: स्वीडन के लोगों को गोली मार लिया था कुरान जलाने का ‘बदला’

जिस ब्रसेल्स में यूरोपियन यूनियन का मुख्यालय स्थित है, वहाँ पर 2 स्वीडिश नागरिकों की हत्या कर दी गई। जिस पर हत्या का शक है, बताया जा रहा है कि उसे पुलिस ने मार गिराया है। ये एक आतंकवादी हमला था। सोमवार (16 अक्टूबर, 2023) को वहाँ स्वीडन के 2 नागरिकों की हत्या कर दी गई थी। वहीं अगले ही दिन सुबह पुलिस ने इस हत्याकांड को अंजाम देने वाले आतंकवादी को मार गिराया। बेल्जियम के आंतरिक मामलों की मंत्री अन्नेलिएस वेरलिंडेन ने इस संबंध में जानकारी दी है। जिस समय पुलिस पहुँची, हत्यारा एक कैफे में बैठा हुआ था।

पुलिस को देख कर उसने गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके बाद पुलिस ने भी जवाब दिया। मंगलवार की सुबह स्थानीय समय के अनुसार 5 बजे के करीब बेल्जियम के प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर डी क्रू ने बताया कि आतंकवादी ट्यूनीशिया का रहने वाला था। उन्होंने बताया कि वो अवैध तरीके से बेल्जियम में रह रहा था। सिटी सेंटर के ग्रैंड पैलेस से कुछ ही दूरी पर ये घटना हुई। बेल्जियम और स्वीडन के बीच एक फुटबॉल मैच हो रहा था, जिसके बीच में ये घटना हुई। ये इलाका सेंट कैथरीन से कुछ ही दूरी पर स्थित है, जहाँ शहर के बड़े-बड़े बार और रेस्टॉरेंट हैं।

हालाँकि, इस हत्याकांड के बाद स्वीडन-बेल्जियम के बीच मैच को रद्द कर दिया गया। डी क्रू ने बताया कि हत्यारे ने स्वीडन के फुटबॉल समर्थकों को निशाना बनाया। बेल्जियम के कई इलाकों में जहाँ-जहाँ स्वीडन के नागरिकों की संख्या ज़्यादा है, वहाँ-वहाँ सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। बता दें कि स्वीडन में कुरान जलाए जाने की घटनाओं के कारण इस्लामी कट्टरपंथी स्केंडिनेविया में स्थित इस देश का विरोध करते रहे हैं। स्टॉकहोम में भी हिंसा की घटनाएँ हुई थीं, जिसके बाद स्वीडन में अलर्ट जारी करना पड़ा था।

यूरोपियन संघ ने कर्मचारियों को घर से काम करने के लिए कहा था। EU की इमारतों को बंद कर दिया गया है और कार पार्किंग को भी बंद कर दिया गया है। शैरबीक स्थित एक कैफे में कथित हत्यारे के एनकाउंटर की बात कही जा रही है। उसके पास से ऑटोमैटिक हथियार भी मिले, जिनका हत्या में इस्तेमाल किया गया हो सकता है। उसे अस्पताल ले जाए जाते समय उसकी मौत हुई। पूरे बेल्जियम में आतंकवाद को लेकर उच्च-स्तरीय अलर्ट जारी किया गया है।

2 स्वीडिश नागरिकों की हत्या करने वाले की पहचान 45 वर्षीय अब्देसलेम के रूप में हुई है। यूरो 25 क्वालीफ़ायर मैच से पहले हुई इस घटना से पूरे यूरोप में भय का माहौल बन गया। स्टेडियम में फैंस को बंद रहने को कहा गया और पुलिस हमलावर को ढूँढती रही। 50,000 दर्शकों की क्षमता वाला बॉडोइन स्टेडियम उस समय खचाखच भरा हुआ था। हत्यारे ने खुद को आतंकी संगठन ISIS से जुड़ा हुआ और ‘अल्लाह का लड़ाका’ बताया था। उसने दावा किया कि वो मुस्लिमों की तरफ से बदला ले रहा है। उसने ‘अल्लाहु अकबर’ का नारा भी लगाया।

दिल्ली के 40 विभाग, 10 हजार सिविल डिफेंस वॉलंटियर: दीवाली से पहले बेरोजगार कर सकती है केजरीवाल सरकार, सैलरी के लिए कर रहे हैं प्रदर्शन

दिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार 10 हजार से अधिक सिविल डिफेंस वॉलटिंयर की सेवा समाप्त कर सकती है। इन लोगों को इस साल अप्रैल से सैलरी नहीं मिली है। सैलरी जारी करने की माँग को लेकर ये लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। केंद्रशासित प्रदेश के 40 विभागों में ये वॉलंटियर अपनी सेवा दे रहे हैं।

द टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बता है कि राजस्व विभाग ने विभिन्न रूटीन ड्यूटी में लगे 189 सिविल डिफेंस वॉलंटियर को हटाने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि सभी वॉलंटियर्स की सेवा समाप्त कर उनकी बहाली की सही कानूनी स्थिति का पता करने को कहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अक्टूबर के अंत तक इनलोगों को नौकरी से निकाला जा सकता है। साथ ही बताया गया है कि सीएम केजरीवाल ने इनकी सैलरी तुरंत जारी करने को भी कहा है।

सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भविष्य में ऐसी बहालियों में उचित प्रक्रिया का पालन करने के निर्देश भी सीएम केजरीवाल ने दिए हैं। उन्होंने एडहॉक नियुक्ति अब नहीं करने को कहा है। इस मामले पर अभी दिल्ली सरकार की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

वॉलिंटियर्स से सरकार को शिकायत

एक अनुमान के मुताबिक इन वॉलिंटियर्स को वेतन के लिए दिल्ली सरकार सालाना 400 करोड़ रुपए देती है। इनमें से 280 करोड़ रुपए का वेतन बस में चलने वाले मार्शलों के खातों में जाता हैं। इसको लेकर अधिकारियों का कहना है कि उनकी ड्यूटी नागरिक सुरक्षा अधिनियम के मुताबिक नहीं है।

एक अधिकारी के मुताबिक, “इन वॉलिंटियर्स की उनकी अनिवार्य जिम्मेदारियों और कार्यों के विरुद्ध तैनाती को विभिन्न विभागों द्वारा अवैध करार दिया गया था और उनका वेतन रोक दिया गया था।” वेतन नहीं मिलने के विरोध में सिविल डिफेंस वॉलिंटियर्स ने हाल ही में कई विरोध प्रदर्शन किए हैं।

एक सप्ताह पहले ही मंगलवार (10 अक्टूबर,2023) दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की बसों में मार्शल के तौर पर तैनात कई सिविल डिफेंस वॉलिंटियर्स ने बकाया भुगतान न करने पर आईएसबीटी कश्मीरी गेट और तीस हजारी कोर्ट के बीच एक सड़क को जाम कर दिया था।

गौरतलब है कि दिल्ली के 10,792 सिविल डिफेंस वॉलिंटियर्स में से 8,574 को परिवहन विभाग ने डीटीसी और क्लस्टर बसों में बस मार्शल के तौर पर नियुक्त किया है। इसके अलावा राजस्व, एमसीडी, पर्यावरण, खाद्य एवं आपूर्ति, व्यापार एवं कर और चुनाव अन्य विभाग भी इन वॉलिंटियर्स की सेवा का इस्तेमाल करते हैं।

जब भगत सिंह और चंद्रशेखर आज़ाद को भी करनी पड़ी थी ‘घर-वापसी’… ‘क्रांतिदूतों’ की दास्ताँ की छठी क़िस्त, शुरू से अंत तक बाँधे रखती है स्वतंत्रता आंदोलन की अनछुई कहानियाँ

भारतीय सशस्त्र क्रांति के नायकों से परिचित करवाती ‘क्रांतिदूत’ शृंखला की पुस्तकों में एक कड़ी और जुड़ गई है। ‘सर्वभाषा ट्रस्ट प्रकाशन’ से प्रकाशित होने वाली ‘क्रांतिदूत’ शृंखला की छठी कड़ी है – ‘घर वापसी’। भावनाओं को शब्दों में लिखने की जो कला है, वो डॉ मनीष श्रीवास्तव जी को बहुत अच्छे से आती है। ‘क्रांतिदूत’ शृंखला में उनका लेखन जैसे हर एक कड़ी के साथ निखरता ही जा रहा है। क्रांति नायकों की भावनाओं से पाठकों को जोड़ने का कार्य जो उन्होंने इस शृंखला के माध्यम से किया है, वो शायद साहित्य जगत में अब तक किसी ने नहीं किया है।

यही कारण है कि उनकी ये पुस्तक शृंखला पाठकों में अत्यधिक लोकप्रिय है। लगभग 150 पृष्ठों की इस पुस्तक का मूल्य 349 रुपए है, जिसे ऑनलाइन माध्यमों अथवा प्रकाशक से क्रय किया जा सकता है। ‘घर वापसी’ कथा है क्रांति पथ पर निकले उन नायकों की जिन्होंने भारत भूमि की सेवा में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने माँ की ममता, पिता का संसार और अपनी दुनिया का त्याग करके इस राष्ट्र के लिए एक उज्ज्वल भविष्य की चिंता में अपना जीवन लगा दिया।

लेकिन, रिश्तों के बंधन इतनी सरलता से छोड़े नहीं छूटते, उनकी याद इन्हें एक बार वापसी के लिए मना ही लेती है। भगत सिंह के घर त्यागने से उनकी दादी को लगा कि उनके द्वारा विवाह की ज़िद करने के कारण उनका भगत घर छोड़कर चला गया है। उनकी दादी इस बात से परेशान होकर बीमार रहने लगीं, तब भगत सिंह को वापस लौटना ही पड़ा। घर त्यागने से लेकर घर वापसी तक के जीवन में भगत सिंह में कई परिवर्तन हो चुके थे।

कानपुर में उन्हें गणेश शंकर विद्यार्थी जैसा गुरु मिल चुका था, तो चंद्रशेखर आज़ाद और बटुकेश्वर दत्त जैसा साथी भी मिला था। यहीं उनका परिचय ‘हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन’ से हुआ, जो भविष्य में उनकी दिशा और दशा तय करने वाला था। कुछ समय कानपुर में रहकर उन्होंने प्रताप प्रेस के लिए काम किया, जहाँ उन्हें अपने विचारों को रखने का मौका मिला। यहीं दल के लिए काम करते हुए उन्होंने पुलिस का ध्यान अपनी ओर खींच लिया और फिर उन्हें कानपुर छोड़ना पड़ा।

‘क्रांतिदूत’ शृंखला में अब तक भगत सिंह, सुखदेव, यशपाल आदि शिष्य बनते आए हैं और जयचंद्र विद्यालंकार, भाई परमानंद आदि उनके गुरु हैं। कानपुर से निकलकर भगत सिंह अलीगढ़ आ गए हैं और यहाँ वो नेशनल स्कूल में प्रधानाचार्य हैं। अब वो स्वयं गुरु हैं और अब उनके कंधे पर ये जिम्मेदारी आ गई है कि भविष्य के युवाओं के लिए वे स्वयं मार्ग तैयार करें। यहाँ वो समय निकालकर अपने विद्यार्थियों को अनुशीलन समिति के कार्यों के बारे में बताते हैं।

वो बताते हैं कैसे प्रफुल्ल चाकी और खुदीराम बोस की मृत्यु का बदला लिया गया और कैसे श्रीश चंद्र पॉल और श्रीश मित्रा ने रोडा कांड को अंजाम दिया। इन सब को पढ़ते हुए आँखों के सामने एक बड़े परदे पर किसी फिल्म को देखने जैसा अनुभव हो रहा था। हमें इन क्रांतिदूतों के आदर्शों को इनके कारनामों को और अधिक जानने की जिज्ञासा होती है। पर तभी भगत सिंह को अपनी दादी के बीमार होने का संदेश प्राप्त होता है और वो घर के लिए निकल जाते हैं।

जिस समय भगत सिंह अपनी दादी की सेवा में लगे थे इधर काकोरी कांड हो जाता है। योजना से जुड़े सभी साथियों को पुलिस ने पकड़ लिया होता है और उन्हें फाँसी की सजा सुना दी जाती है। केवल चंद्रशेखर आज़ाद पुलिस की पकड़ से बहुत दूर कहीं अज्ञातवास में अपना जीवन व्यतीत कर रहे होते हैं। अज्ञातवास में चंद्रशेखर आज़ाद के कारनामे सबसे अधिक अचंभित करने वाले हैं। आज़ाद जी का स्वाभिमान, उनका बचपन और उनकी मित्रता के किस्से पढ़ते हुए आप पलकें झपकाना भूल जाते हैं।

जिस समय काकोरी षड्यंत्र मामले में पुलिस उन्हें हर दिशा में ढूँढ रही थी चंद्रशेखर आज़ाद जी डिप्टी पुलिस अधिकारी से अपने लिए चरित्र प्रमाणपत्र बनवा लाए थे। अज्ञातवास में रहते हुए उन्होंने गैरेज में मेकेनिक का काम ढूँढ लिया था और वहीं मजदूरों की बस्ती में रहने लगे थे। बस्ती के मजदूरों को काबुलीवाला पठान उधार पैसे देता था और उनसे मनमाना ब्याज वसूलता था। एक बार उसका सामना हरिशंकर तिवारी से हो गया। अब आप पूछेंगे कि हरिशंकर तिवारी कौन है?

तो उसके लिए तो आपको किताब पढ़नी ही पड़ेगी। एक मित्र इस शृंखला में आने वाले सभी क्रांतिदूतों के नामों की सूची बनाते हैं, इस बार हमारा भी विचार बना की सभी के नाम लिखें जाएँ। लगभग 50 नामों को हमने लिखा भी, फिर गिनती करना छोड़ दिया। हर क्रांतिदूत की एक अलग कहानी है और उन सब की कहानियों से हमें जोड़तीं है मनीष श्रीवास्तव जी की लिखीं ‘क्रांतिदूत’ शृंखला की ये पुस्तकें। ‘हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन’ की शुरुआत कैसे हुई और इसका मसौदा किसने तैयार किया?

जब अनुशीलन समिति पहले से ही सशस्त्र क्रांति के नायकों के संगठन का कार्य सँभाल रही थी, तब हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन की क्या आवश्यकता थी? ऐसे कई प्रश्न उठेंगे आपके मन में और उन सभी के उत्तर इस शृंखला में मिलते जाएँगे। डॉ मनीष श्रीवास्तव का लेखन भावनात्मक है, केवल इस शृंखला के लिए ही नहीं इससे पहले लिखी गयीं पुस्तकों में भी उनकी यही शैली रही है। पिछली पुस्तकों में जहाँ प्रेम और खालीपन में उलझे रिश्ते हैं, यौन शोषण से बच्चे के मन पर पड़े गहरे घाव हैं, वहीं ‘क्रांतिदूत’ कहानी है उन नायकों की जिन्होंने भविष्य के लिए अपने वर्तमान को खो दिया।

‘घर वापसी’ आपको शुरू से अंत तक बाँधे रखती है। आज़ाद जब दस वर्ष बाद अपनी माताजी से मिलने पहुँचते हैं और उनकी गोद में सर रखकर सोते हैं। अपने बेटे के लिए परेशान होती उस माता की ममता आपकी पलकों को भिगो देती है। बस यही है अंतिम घर वापसी, इसके बाद आज़ाद अमर हो गए। ‘क्रांतिदूत’ शृंखला की अगली पुस्तक का इंतजार रहेगा, इंतजार रहेगा भगत और आज़ाद के जीवन से जुड़े किस्सों का, उनके विचारों का और उनकी अपनी कहानी का।

इस कथा में बहुत से क्रांतिदूतों से परिचय हुआ, उन सभी के विषय में और अधिक जानने की जिज्ञासा बनी रहेगी। प्रतीक्षा रहेगी ‘क्रांतिदूत’ की अगली कड़ी ‘यारियाँ’ की!

‘पोस्ट नहीं था भड़काऊ, बरामद हथियार लाइसेंसी’: मोनू मानेसर को मिली जमानत, जानिए फिर भी जेल में ही अभी क्यों रहेगा गोरक्षक

गोरक्षक मोनू मानेसर को जमानत मिल गई है। यह जमानत फेसबुक पर कथित भड़काऊ पोस्ट करने के मामले में मिली है। बावजूद मानेसर को अभी जेल में ही रहना होगा, क्योंकि पदौदी में हत्या का प्रयास और राजस्थान के नासिर-जुनैद की हत्या का केस भी उस पर जल रहा है।

31 जुलाई 2023 को नूहं में हिंदुओं की बृजमंडल जलाभिषेक यात्रा पर मुस्लिम भीड़ ने हमला किया था। इसके बाद से इस्लामी और लिबरल गैंग लगातार मानेसर को उसके फेसबुक पोस्ट को लेकर निशाना बना रहा था। इस संबंध में नूहं की साइबर क्राइम थाना पुलिस ने 26 अगस्त को उसके खिलाफ अवैध हथियार रखने और 295 IPC (भड़काऊ बयानबाजी) का केस दर्ज किया था। 12 सितंबर को उसे गुरुग्राम से गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल वह गुरुग्राम की भोंडसी जेल में बंद है।

कथित भड़काऊ पोस्ट के मामले में 16 अक्टूबर 2023 को अमित वर्मा की अदालत ने 1 लाख रुपए के मुचलके पर मोनू मानेसर को जमानत दी। न्यूज 18 को उसके वकील सोमदत्त शर्मा ने बताया है कि कोर्ट ने माना कि मोनू मानेसर ने फेसबुक पर जो लिखा था उससे किसी की भावना आहत नहीं होती। इसके अलावा उसके पास से बरामद हथियार भी लाइसेंसी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बहस के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने बताया कि मोनू मानेसर ने वीडियो में जो हथियार दिखाए थे वो लाइसेंसी थे। साथ ही अदालत को बताया कि उसका वीडियो किसी समुदाय या मजहब के खिलाफ नहीं था। हालाँकि नूहं पुलिस ने हथियारों का लाइसेंस रद्द किए जाने का हवाले दे जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने उसे जमानत दे दी।

बताते चलें कि राजस्थान के भरतपुर जिले में मोनू मानेसर पर नासिर जुनैद हत्याकांड का केस दर्ज है। इसके अलावा हरियाणा के पटौदी में भी मोनू पर हत्या के प्रयास की FIR हुई थी। इस दोनों मामले में अभी मोनू को जमानत नहीं मिल पाई है।

हरियाणा के पटौदी में 7 फरवरी 2023 को 2 समुदायों के बीच पत्थरबाजी हुई थी। इस पत्थरबाजी में मोनू मानेसर पर फायरिंग का आरोप लगा था। मोनू की गिरफ्तारी के बाद गुरुग्राम की पटौदी पुलिस ने उसे रिमांड पर लेकर स्कॉर्पियो, एक राइफल और चार जिंदा कारतूस बरामद किए थे। इस केस में मोनू के वकील ने कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की है। वहीं 16 फरवरी 2023 को हरियाणा के भिवानी में 2 जली हुई लाशें मिली थीं। ये लाशें नासिर और जुनैद की बताई गईं थी। इस मामले में मृतकों के परिजनों ने मोनू मानेसर को मुख्य आरोपित बताया था।

कुत्ता चोर, गंदी बातें… क्या दिलजले आशिक के ‘इंतकाम’ की आग से जली हैं महुआ मोइत्रा? इशारों-इशारों में TMC सांसद ने कुछ बताया-कुछ छिपाया

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद हैं महुआ मोइत्रा। आरोप संसद में ब्रांडेड गिफ्ट और पैसे लेकर सवाल पूछने का है। जवाब में टीएमसी सांसद ने कुछ लोगों और मीडिया संस्थान को लीगल नोटिस भेजा है। सोशल मीडिया में एक बूझो तो जानो टाइप का पोस्ट किया है।

महुआ मोइत्रा ने अपने पोस्ट में कुत्ता चोरी, अश्लील मैसेज भेजने की बात की है। ठुकराए आशिक की चर्चा की है। कभी खुद के काफी करीब रहे एक मित्र का जिक्र किया है। ऐसा लगता है कि टीएमसी सांसद यह बताना चाहती हैं कि इस पूरे प्रकरण के पीछे कोई ‘दिलजला आशिक’ है जो ठुकराए जाने के बाद ‘इंतकाम’ पर उतर आया है।

मोइत्रा ने 16 अक्टूबर 2023 के इस क्रिप्टिक पोस्ट में इशारों इशारों में काफी कुछ कहा है। कहा है कि उनके खिलाफ चल रहे कैंपेन के पीछे मिस्टर ए (अडानी समूह तरफ इशारा) है और उसकी मदद उनका ठुकराया प्रेमी कर रहा है। वैसे ये ठुकराया प्रेमी कौन है, इसके बारे में टीएमसी सांसद ने नहीं बताया है।

उन्होंने एक्स ट्विटर पर किए पोस्ट में कहा है, “मिस्टर ए (शायद अडानी) आपकी यह ओछी हरकत जबर्दस्त है? क्या आप फर्जी डिग्री वाले सांसद और एक नाराज ठुकराए प्रेमी के सहारे मुझ पर हमला कर रहे हैं?”

मोइत्रा ने अपनी पोस्ट में कहा, “जब तक ईडी और सीबीआई कोयला घोटाले में भारतीयों के लूटे गए 13000 करोड़ रुपए वसूल नहीं लेती मैं चुप नहीं बैठूँगी। मुझे बताया गया है कि आपसे और आपके घोटालों से पीएम मोदी भी तंग आ चुके हैं।”

टीएससी सांसद मोइत्रा ने कथित तौर पर उन्हें ‘बदनाम’ करने के लिए भाजपा के लोकसभा सांसद निशिकांत दुबे, सुप्रीम कोर्ट के वकील जय अनंत देहाद्राई, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और कई मीडिया संस्थानों को कानूनी नोटिस भी भेजा है।

वकील देहाद्राई को भेजे नोटिस में कहा गया है कि वे कभी करीबी दोस्त थे। इसमें कहा गया है कि अनबन के बाद, देहाद्राई ने कथित तौर पर मोइत्रा को कई घिनौने, दुर्भावनापूर्ण और अश्लील संदेशों के साथ बार-बार धमकी दी। उनके आधिकारिक आवास में घुसपैठ कर निजी सामान चुरा लिए। इन सामानों मोइत्रा का कुत्ता भी शामिल था, जिसे बाद में वापस कर दिया गया था।

नोटिस में यह भी कहा गया है कि देहाद्राई के बार-बार परेशान करने के बाद मोइत्रा ने उनकी पुलिस में शिकायत भी की थी। महुआ मोइत्रा का यह ट्वीट और लीगल नोटिस भेजे जाने की बात तब सामने आई है जब सोशल मीडिया में यह बातें चल रही हैं कि उन्होंने अपने ‘पूर्व प्रेमी’ को प्यार में धोखा दिया था। इसके बाद इस ‘पूर्व प्रेमी’ ने उनके कथित गलत कार्यों की जानकारी लीक कर दी।

सूत्रधार एक्स हैंडल (पहले ट्विटर) वाले यूजर ने लिखा, “उसका (महुआ मोइत्रा का) पूर्व प्रेमी एक हलफनामे के जरिए पूरा इतिहास लिखता है। यदि यह झूठ है, तो वह झूठी गवाही के लिए जेल जाएगा। लेकिन वह एक वकील है। साफ तौर पर मैडम का खेल ख़त्म हो गया है। अडानी समूह कहता रहा कि हम पर बाहरी और आंतरिक ताकतों का हमला है। इससे यह साबित हो रहा है।”

एक्स पर एक अन्य यूजर सिद ने लिखा है, “ठीक है, महुआ की ये फोटोज उनके एक्स ने लीक की? मैं इस पर हँस रहा हूँ कि उसने पैसों के लेन-देन से जुड़ी कुछ जानकारी भी लीक की है। प्यार व्यार सब धोखा है दोस्तों।” इसके जवाब में बीफिटिंग फैक्ट्स ने एक्स हैंडल पर लिखा है, “ठुकरा के मेरा प्यार मेरा इंतकाम देखेगी। जय अनंत।”

सुप्रीम कोर्ट के वकील जय अनंत देहाद्राई की सीबीआई में दायर की गई शिकायत के बाद अडानी समूह ने एक आधिकारिक बयान जारी कर दोहराया है कि कुछ समूह और लोग कंपनी की प्रतिष्ठा और हितों को नुकसान पहुँचाने के लिए उसकी बदनामी के अभियान में लगे हुए हैं। अडानी समूह के प्रवक्ता ने कहा है,“एक चौंकाने वाले घटनाक्रम में, 15 अक्टूबर, 2023 को, सुप्रीम कोर्ट के एक वकील जय अनंत देहाद्राई ने एक शपथ पत्र के रूप में एक माननीय द्वारा एक विस्तृत आपराधिक साजिश के कमीशन को रिकॉर्ड में लाते हुए सीबीआई के पास शिकायत दर्ज की।”

इसमें आगे कहा गया है, “संसदीय प्रश्नों के माध्यम से गौतम अडानी और उनकी कंपनियों के समूह पर आरोप लगाए गए। ऐसा बदले की भावना से किया गया। इसके लिए मोइत्रा ने हीरानंदानी से रिश्वत और अनुचित लाभ प्राप्त किया।” अडानी ग्रुप कहा है, “यह घटनाक्रम 9 अक्टूबर, 2023 के हमारे बयान की पुष्टि करता है कि कुछ समूह और व्यक्ति हमारे नाम, सद्भावना और बाजार की स्थिति को नुकसान पहुँचाने के लिए ओवरटाइम कर रहे हैं। इस विशेष मामले में एक अधिवक्ता की शिकायत से पता चलता है कि अडानी समूह और हमारे अध्यक्ष गौतम अडानी की प्रतिष्ठा और हितों को नुकसान पहुँचाने की यह व्यवस्था 2018 से चली आ रही है।”

गौरतलब है बीजेपी के लोकसभा सांसद निशिकांत दुबे ने तृणमूल सांसद मोइत्रा पर गंभीर आरोप लगाए थे। इन आरोपों में कहा गया कि मोइत्रा ने संसद में खास सवाल पूछने के लिए कारोबारी दर्शन हीरानंदानी से नकद और तोहफे लिए थे। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिख कर कार्रवाई की माँग की है। ये आरोप अधिवक्ता जय अनंत देहाद्राई द्वारा दी गई सूचनाओं पर आधारित है।