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2 समलैंगिकों ने सुप्रीम कोर्ट परिसर में ही कर ली सगाई, 1 दिन पहले ठुकरा दी गई थी क़ानूनी मान्यता वाली इनकी माँग

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (17 अक्टूबर 2023) को समलैंगिक शादी यानी सेम सेक्स मैरिज को कानूनी मान्यता देने से इनकार कर दिया। इस याचिका को डालने वाले याचिकाकर्ताओं में शामिल अनन्य कोटिया और उत्कर्ष सक्सेना ने कोर्ट के इस फैसले के एक दिन बाद बुधवार (18 अक्टूबर 2023 ) को कोर्ट के लॉन में सगाई कर ली।

इसे लेकर अनन्य कोटिया ने अपने एक्स हैंडल पर जानकारी दी है। कोटिया ने पोस्ट किया, “कल दुख हुआ। आज मैं अदालत में वापस गया, जिसने हमारे अधिकारों को अस्वीकार कर दिया और अंगूठियों का आदान-प्रदान किया। इसलिए यह सप्ताह कानूनी नुकसान के बारे में नहीं था, बल्कि हमारी सगाई के बारे में था। हम अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।”

वहीं इस पोस्ट को उत्कर्ष सक्सेना ने भी अपने एक्स हैंडल पर रिपोस्ट किया। उत्कर्ष सक्सेना और अनन्य कोटिया की प्रेम कहानी बॉलीवुड फिल्म जैसी है। बस अंतर इतना है कि प्रेम में पड़े ये दोनों ही एक ही सेक्स यानी लड़के हैं। सुप्रीम कोर्ट के वकील उत्कर्ष सक्सेना ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में पीएचडी कर रहे हैं।

उनके साथी अनन्य कोटिया भी लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) में पीएचडी स्कॉलर हैं। दोनों की ये प्रेम कहानी दिल्ली यूनिवर्सिटी कॉलेज के दिनों शुरू हुई थी। ये वो वक्त था, जब भारत में समलैंगिकता (Homosexuality) एक अपराध था।

अनन्य कोटिया अपने लव स्टोरी को वेरी टिपिकल बताते हैं। वह कहते हैं, “हम हंसराज कॉलेज, डीयू में मिले। यह मेरा पहला साल था और उत्कर्ष अपने तीसरे साल में था और हम डिबेटिंग सोसायटी मिले। किसी भी दूसरे कॉलेज के युवाओं की तरह हमें भी प्यार हो गया और हम तब से साथ हैं।”

कोटिया कहते हैं कि लेकिन उनका रिश्ता सामान्य नहीं था, क्योंकि वे बहुत लंबे समय तक किसी के साथ अपना रिश्ता शेयर करने के काबिल नहीं थे। अनन्य ने कहा, “मुझे लगता है कि पहली बार हमने हम दोनों के बारे में बाहर किसी को बताया वो साल 2014 या 2013 था।”

युवा उत्कर्ष वकील के तौर पर इस केस का हिस्सा रहे। इस केस में 2017 में जस्टिस केएस पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ का फैसला काफी अहम रहा। सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से 24 अगस्त 2017 के अपने इस ऐतिहासिक फैसले में ये ऐलान किया कि भारत के संविधान के तहत एकान्तता का अधिकार मौलिक अधिकार है। इस फैसले ने LGBTQ+ अधिकारों में अहम भूमिका निभाई।

इस समलैंगिक कपल का कहना था कि 2018 के ऐतिहासिक फैसले के बाद चीजें बदलने लगीं। वो कहते हैं, “हमने बहुत मुश्किल और लंबी लड़ाई लड़ी। समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के 5 साल बाद देश के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को निर्धारित किया कि समलैंगिक विवाह और नागरिक संघों को कानूनी मान्यता देने का अधिकार खास तौर से संसद और राज्य विधानसभाओं के पास है।”

कोर्ट ने कानूनों के निर्माता के बजाय उनके व्याख्याकार तौर पर अपनी भूमिका पर जोर दिया और कहा कि विवाह से संबंधित मामले विधायी निकायों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने भारत में अनगिनत LGBTQIA+ लोगों को निराश कर दिया है, क्योंकि वे अपने बढ़े हुए हकों और उनकी मंजूरी की उम्मीद कर रहे थे।

रईसुद्दीन ने दामाद रमेश चंद्र को घर बुलाया, फिर मार डाला: रस्सी से घोंट डाला बेटी का भी गला, फेंक दी दोनों की लाशें

मुंबई में हिन्दू युवक से शादी करने पर नाराज एक मुस्लिम लड़की के अब्बा ने अपनी बेटी और दामाद की हत्या कर दी है। 50 वर्षीय आरोपित का नाम गोरा रईसुद्दीन खान है। मृतक पति-पत्नी का नाम करन रमेश चंद्र और गुलनाज है। पुलिस ने इस मामले में कुल 3 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इसमें मृतका का भाई सलमान भी शामिल है। पुलिस 3 नाबालिगों को भी हिरासत में ले कर पूछताछ कर रही है। मुंबई पुलिस ने मंगलवार (17 अक्टूबर, 2023) को इस घटना का खुलासा किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुंबई के RCF थानाक्षेत्र की पुलिस ने 14 अक्टूबर को कुएँ से एक युवक की लावारिस लाश बरामद की थी। यह लाश गोवंडी क्षेत्र के एक सुनसान पड़ी टेलिकॉम फैक्ट्री कैम्पस में मिली थी। तब पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति पर हत्या का केस दर्ज कर के शव और आरोपितों की पहचान के प्रयास शुरू कर दिए थे। पुलिस ने मृतक की तस्वीरों को शेयर कर के उसके बारे में जानकारियाँ जुटानी शुरू कर दीं। कुछ समय बाद पुलिस ने पता लगा लिया कि शव उत्तर प्रदेश के करन रमेश चंद्र का है।

पुलिस ने यह भी पता लगाया कि 22 वर्षीय करन रमेश चंद्र कुछ ही समय पहले अपनी 20 वर्षीया पत्नी गुलनाज के साथ मुंबई आया था। पुलिस ने गुलनाज की तलाश शुरू की तो वो भी गायब मिली। जाँच के दौरान पुलिस को यह जानकारी मिली कि गुलनाज का परिवार अपनी बेटी की करन से शादी से काफी नाराज था। लड़की के अब्बा गोरा रईसुद्दीन खान ने फोन कर के दोनों को मुंबई बुलाया था। इस दौरान रईसुद्दीन ने मामले को सुलझाने का भरोसा दिया था। हालाँकि, इस बुलावे को खान की साजिश माना जा रहा है।

पुलिस ने गोरा रईसुद्दीन और उसके बेटे सलमान को ले कर पूछताछ की। शुरू में झूठ बोलने के बाद अंत में दोनों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया। गोरा और सलमान ने बताया कि इस हत्या में उसका साथी मोहम्मद कैफ भी शामिल था। ये सभी बातचीत के बहाने करन को एक सुनसान इलाके में ले गए। यहाँ इन सबने मिल कर करन की हत्या कर दी और लाश को एक कुएँ में फेंक दिया। जब सलमान और उसके अब्बा गोरा घर लौट कर आए तो गुलनाज अपने पति के बारे में पूछताछ करने लगी।

बताया जा रहा है कि अपनी पोल खुल जाने और शिकायत किए जाने के डर से सलमान और रईसुद्दीन ने गुलनाज को भी गले को रस्सी से घोंट कर मार डाला। रईसुद्दीन ने अपनी बेटी की लाश को भी नवी मुंबई इलाके में फेंक दिया था। पुलिस ने इस घटना में पूछतछ के लिए 3 नाबालिगों को हिरासत में लिया है। सलमान और गोरा रईसुद्दीन के साथ तीसरे आरोपित मोहम्मद कैफ को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। इन तीनों को कोर्ट में पेश कर के विस्तृत पूछताछ के लिए 27 अक्टूबर तक का रिमांड लिया गया है।

‘जब हमारे भगवान नहीं मानते तो यहाँ क्यों आते हो?’: गुजरात के गरबा पंडाल में घुसे मुस्लिम युवक को दबोचा, उज्जैन में आधार कार्ड चेक करके प्रवेश

गुजरात के अहमदाबाद में नवरात्रि के अवसर पर चल रहे गरबा कार्यक्रम में घुसपैठ किए हुए एक मुस्लिम युवक को हिन्दू संगठनों ने पकड़ा है। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। बाद में उसे पंडाल से भगा दिया गया। वहीं, मध्य प्रदेश के उज्जैन में गरबा पंडाल में गैर-हिन्दुओं के प्रवेश को प्रतिबंधित कर दिया गया है। आयोजकों ने बिना आधार कार्ड के पंडाल में इंट्री बैन कर दी है।

पहला मामला गुजरात के अहमदाबाद से है। यहाँ के YMCA क्लब में गरबा कार्यक्रम चल रहा था। इस बीच एक मुस्लिम युवक हिन्दू जैसे कपड़े पहनकर गरबा कार्यक्रम में शामिल हो गया। वहाँ मौजूद बजरंग दल के सदस्यों को उस व्यक्ति पर शक हुआ तो उसे रोककर पूछताछ की। इस दौरान उस व्यक्ति का आधार कार्ड चेक किया गया। आधार कार्ड से मुस्लिम युवक की असलियत सामने आ गई। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

वीडियो में एक हिन्दू कार्यकर्ता कहते हुए सुनाईने कहा, “तुम भगवान में विश्वास नहीं करते तो यहाँ क्यों आए हो? यह कोई डिस्कोथेक नहीं है। यहाँ मत आओ।” बाद में हिन्दू संगठन के लोग मुस्लिम युवक को वहाँ से धक्का देकर भगा देते हैं। हिन्दू संगठनों ने आयोजकों से भी अपील की है कि वो नवरात्रि में गैर हिन्दुओं को गरबा पंडाल में न आने दें।

उज्जैन के गरबा पंडाल में हिन्दू को ही इंट्री

उज्जैन में एक गरबा आयोजक ने पोस्टर लगा कर गैर हिंदुओं से पंडाल में न आने की अपील की है। आयोजन समिति का नाम संकल्प संस्कृति संस्था है, जिसने अपने इस कदम को लव जिहाद पर रोक लगाने के लिए जरूरी बताया है।

इस संस्था के अध्यक्ष बहादुर सिंह राठौर ने आने वाले हिन्दुओं से भी तिलक लगाकर पंडाल में प्रवेश करने की अपील की है। उन्होंने यह भी कहा कि वो किसी धर्म के खिलाफ नहीं हैं और जिसे आना भी है वो अपने परिवार की महिलाओं को साथ लेकर आए।

पंडाल में इंट्री के दौरान लोगों के आधार कार्ड भी चेक किए जा रहे हैं। इस मामले में TOI से बात करते हुए उज्जैन के पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा ने इस निर्णय को आयोजक का व्यक्तिगत फैसला बताया।

जिस बक्सर में था महर्षि विश्वामित्र का आश्रम, वहीं के जनसेवक ने निभाया उनका किरदार: लाल किले वाली रामलीला में मोदी के मंत्री अश्विनी चौबे का अभिनय

दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला परिसर में ‘लव कुश कमेटी’ की तरफ से आयोजित हो रही मशहूर रामलीला में इस बार केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे खास रहे। उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम राम के गुरु महर्षि विश्वामित्र का किरदार निभाया।

बक्सर के सांसद ने इस दौरान महर्षि विश्वामित्र से अपने कनेक्शन के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि उनकी कर्मभूमि बक्सर ऐसा पावन स्थल है जहाँ खुद महर्षि विश्वामित्र ने अपना आश्रम बनाया था। इस वजह से उन्होंने रामलीला में गुरु विश्वामित्र का पात्र निभाने पर खुद को भाग्यशाली कहा। अश्विनी कुमार चौबे मोदी सरकार में केंद्रीय उपभोक्ता मामलों, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण के अलावा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मामलों के राज्य मंत्री हैं।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने आगे कहा कि बिहार के बक्सर से सांसद होने के नाते रामलीला में महर्षि विश्वामित्र जी का किरदार निभाना और भी खास हो जाता है। बक्सर महर्षि विश्वामित्र की तपोस्थली है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ये भगवान विष्णु के प्रथम मनुज अवतार वामनावतार का स्थल है। उन्होंने कहा कि बक्सर की पावन भूमि पर पहुँच कर भगवान विष्णु के मानव अवतार श्रीराम ने गुरु विश्वामित्र के मार्गदर्शन में ताड़का राक्षसी का वध किया था।

केंद्रीय मंत्री ने ये भी कहा कि ये मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की पहली कर्मभूमि है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय संस्कृति को रामलीला मंचन के जरिए नई पीढ़ी तक पहुँचाने की परंपरा अति सराहनीय है। उन्होंने कहा इससे युवा अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ते हैं। इस मंचन से पूरी दुनिया ये संदेश जाएगा कि भगवान राम को उनके गुरु विश्वामित्र ने अच्छी शिक्षा दी थी।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे हास्य कलाकार ब्रजेन्द्र काला के साथ (फोटो साभार: केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे एक्स हैंडल)

उन्होंने कहा कि बीते 9 साल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बक्सर का सर्वांगीण विकास हुआ है। बक्सर पर्यटन के नजरिये से भारत सहित दुनिया के नक्शे में पर पहचाने जाना लगा है।

केंद्रीय मंत्री चौबे ने कहा कि बक्सर के रामायण सर्किट से जुड़ने और भारत की कई दिशाओं से सैलानी यहाँ पहुँचे हैं। गंगा में बड़े क्रूज के चलने से बड़ी संख्या में विदेशी सैलानियों को इस जगह के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को जानने मौका मिला। बक्सर के चारों तरफ सड़कों का जाल बिछने से सैलानियों को पटना से वाराणसी आने में सुविधा हुई। उन्होंने आगे कहा कि रामलीला में अभिनय करने का उद्देश्य भी यही है कि बक्सर के बारे में पूरी दुनिया और युवा पीढ़ी को जानकारी मिले।

उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से आधुनिकता की तरफ बढ़ रही है, इस वजह से पर्यटन के जरिए रोजगार के नए दरवाजे खुल रहे हैं। ऐसे में बक्सर के बारे में अधिक से अधिक प्रचार करने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इस दौरान उन्होंने बॉलीवुड के कलाकारों मुकेश ऋषि और ब्रजेन्द्र काला के साथ हुई आत्मीय मुलाकात के बारे में भी बताया।

कभी सनी लियोनी के साथ डेट तो कभी यूट्यूबर, मर्दाना ताकत की गारंटी भी देता था ‘सेक्स डॉक्टर’ अब्दुल्ला: हेल्थ डिपार्टमेंट की रेड के बाद हुआ फरार

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में राज्य स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सोमवार (16 अक्टूबर 2023) को अब्दुल्ला पठान नाम के एक यूट्यूबर के अस्पताल पर छापेमारी की। इस छापेमारी के बाद खुद को ‘सेक्स डॉक्टर’ बताने वाले अब्दुल्ला का अस्पताल सील कर दिया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल से एलोपैथिक, होम्योपैथिक और आयुर्वेदिक दवाओं के कुल 33 नमूने लिए हैं। इन सभी सैम्पलों को जाँच के लिए लैब भेजा गया है। रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब्दुल्ला का कथित अस्पताल मुरादाबाद के कुंदरकी इलाके में है। अब्दुल्ला ना सिर्फ सेक्स संबंधी, बल्कि किडनी और लीवर की समस्याओं की शर्तिया इलाज का दावा करता था। अब्दुल्ला की परामर्श फीस 200 रुपए थी, जो बीमारी को गंभीर बताकर और दवाओं के लिए मरीज से 5,000 से 50,000 रुपए तक ऐंठ लेता था।

बीमारी ठीक नहीं होने पर अब्दुल्ला पैसे वापसी की भी गारंटी देता था। हालाँकि, जब इन दवाओं से मरीजों को कोई फायदा नहीं होता था तब वे अपने पैसे वापस माँगने लगते थे। ऐसे में अब्दुल्ला पैसे वापसी से साफ़ मना कर दिया करता था। बताया जा रहा है कि अपने द्वारा ठगे गए मरीजों को अब्दुल्ला कहीं भी शिकायत करने की चुनौती भी देता था।

दावा किया जा रहा है कि अब्दुल्ला ने सैकड़ों मरीजों को ठग कर करोड़ों रुपए कमाए हैं। इन पैसों से अब्दुल्ला पठान ने कई सम्पत्तियाँ भी खरीदी हैं। वह सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव है। फेसबुक पर उसके 7,82,000 से अधिक फॉलोअर्स हैं। उसका यूट्यूब चैनल भी है। वह ज्यादातर सेक्स संबंधी समस्याओं को ठीक करने, मर्दाना ताकत बढ़ाने आदि के बड़े-बड़े दावे करता था।

छापेमारी के बाद से अब्दुल्ला फरार चल रहा है। स्वास्थ्य, औषधि और आयुर्वेद विभाग की संयुक्त छापेमारी में अब्दुल्ला पठान के अस्पताल से निर्माता और बिना प्रिंट रेट वाली दवाएँ मिलीं। उसका अस्पताल भी बिना रजिस्ट्रेशन का चल रहा था। बताया जा रहा है कि अब्दुल्ला के खिलाफ 44 से अधिक शिकायतें हुईं थीं, लेकिन वो पैसों के दम पर बचता रहा।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने अब्दुल्ला पठान पर FIR दर्ज करने के लिए पुलिस में शिकायत भी दे दी है। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, फर्जी डॉक्टर अब्दुल्ला पठान ने पहले फिटनेस संबंधी ब्लॉग और वीडियो बनाया करता था। वह WWE (वर्ल्ड रेसलिंग एंटरटेनमेंट) में जाने की इच्छा रखता था।

वह WWE सुपरस्टार द ग्रेट खली से भी मिल चुका है। साल 2020 में आरोपित अब्दुल्ला ने VMate नामक वीडियो-शेयरिंग एप्लिकेशन के साथ एक ब्लाइंड डेट प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था और उसमें जीत भी हासिल की थी। इस प्रतियोगिता के विजेता के तौर पर अब्दुल्ला पठान बॉलीवुड अदाकारा सनी लियोन के साथ डेट पर भी गया था।

आज़म खान, बीवी तंजीम फातिमा और बेटे अब्दुल्ला – सबको 7-7 साल की सज़ा: फर्जी जन्म प्रमाण पत्र का है मामला, कोर्ट बोला – यहाँ से सीधे जेल जाइए

समाजवादी पार्टी के नेता और सजायाफ्ता अपराधी आजम खान, उनके बेटे पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम और आजम खान की बीवी पूर्व सांसद तंजीम फातिमा को 7-7 साल की सज़ा सुनाई गई है। रामपुर की MP-MLA अदालत ने तीनों को दोषी माना है और सज़ा का ऐलान किया है। तीनों दोषियों को सीधे जेल ले जाए जाने का आदेश दिया है। अब्दुल्ला आजम ने फर्जी जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर स्वार विधानसभा सीट से साल 2017 में चुनाव जीता था, क्योंकि चुनाव के समय उनकी उम्र पूरी नहीं हुई थी। उन पर 2 जन्म प्रमाण पत्र रखने के आरोप हैं।

2 जन्म प्रमाण पत्र रखने का आरोप

जानकारी के मुताबिक, अब्दुल्ला आजम ने साल 2017 में जिस जन्म प्रमाण के आधार पर चुनाव लड़ा था, उसमें उनकी जन्मतिथि 30 सितंबर, 1990 दर्शाई गई थी। ये जन्म प्रमाण लखनऊ से साल 2015 में जारी किया गया था। वहीं, दूसरे जन्म प्रमाण पत्र को रामपुर से साल 2012 में जारी किया गया था। उस जन्म प्रमाण पत्र में उनका जन्मदिन 1 जनवरी, 1993 दिखाया गया है, शैक्षणिक प्रमाण पत्रों में भी यही जन्म तिथि दर्शाई गई थी।

रामपुर नगर पालिका द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र में उनका जन्मस्थान रामपुर बताया गया है, जबकि लखनऊ से जारी जन्म प्रमाण पत्र में उनका जन्म स्थान लखनऊ दिखाया गया था।

दो बार रद्द हुई विधानसभा की सदस्यता

इस मामले में भाजपा नेता आकाश सक्सेना की ओर से गंज कोतवाली में 3 जनवरी, 2019 को मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस केस के बाद 16 दिसंबर 2019 को अब्दुल्ला आजम की विधानसभा सदस्यता चली गई थी, लेकिन साल 2022 में उन्होंने फिर से स्वार विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की। इस मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट ने इसी साल उन्हें दोषी पाया और फिर से उनकी विधानसभा सदस्यता चली गई। इस मामले में कोर्ट ने 7-7 की सजा तीनों लोगों को सुनाई है।

रिवीजन दाखिल किया, लेकिन रिजेक्ट किया गया

इस मामले में 16 अक्टूबर को आजम परिवार को कोर्ट ने झटका दिया था। आजम फैमिली की तरफ से इस मामले में समय माँगा गया था और रिवीजन दाखिल किया गया था। इस मामले में रामपुर के एमपी-एमएलए कोर्ट ने एडीजे फर्स्ट कोर्ट को सुनवाई के लिए कहा था, लेकिन कोर्ट ने इस रिवीजन को निरस्त कर दिया था। इसके बाद अब एमपी-एमएलए कोर्ट ने आजम खान, उनकी पत्नी तंजीम फातिमा और अब्दुल्ला आजम को 7-7 साल की सज़ा सुनाई है।

आजम खान की भी विधायकी जा चुकी, हो चुकी है सजा

आजम खान को अब तक दो मामलों में सज़ा हो चुकी है। दिसंबर 2022 में उन्हें कोर्ट ने तीन साल की सज़ा सुनाई थी, जिसके बाद उनकी विधायकी चली गई थी। इस साल की शुरुआत में रामपुर की सीट पर आकाश सक्सेना ने उपचुनाव में जीत हासिल की और पहली बार रामपुर विधानसभा सीट पर कोई हिंदू विधायक बना। आकाश सक्सेना की ही शिकायत पर अब आजम खान, अब्दुला आजम और तंजीम फातिमा को सात-सात साल की सजा सुनाई गई है।

उज्जैन के श्मशान में कमलनाथ की फोटो रख कर 6 लोग कर रहे जादू-टोना, मध्य प्रदेश का CM बनाने के लिए रात के अँधेरे में नींबू और शराब रख कर जलाई जा रही आग

मध्य प्रदेश चुनाव में जीत के लिए कॉन्ग्रेस जादू-टोने सहारा लेने पर उतर आई है। उज्जैन में कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाने के लिए तंत्र साधना कराई जा रही है। इसके लिए कमलनाथ की तस्वीर रखकर 6 तांत्रिक अपनी क्रियाओं में लगे हुए हैं। ये सब कुछ हो रहा है महाकाल की नगरी कहे जाने वाले उज्जैन में। इस समय नवरात्रि का समय चल रहा है, तो देश भर से तंत्र साधक अपने अनुष्ठानों में जुटे हुए हैं।

विजय अनुष्ठान का आयोजन

‘दैनिक भास्कर’ की रिपोर्ट के मुताबिक, कॉन्ग्रेस को जीत दिलाने और कमलनाथ को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने के लिए महाकाल की नगरी उज्जैन में तंत्र साधना की जा रही है। तंत्र क्रिया का वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें कई तांत्रिक कमलनाथ की फोटो लेकर मंत्रोच्चार करते नजर आ रहे हैं। उनके पास पुतलियाँ, हवन सामग्री और नींबू और शराब भी रखी हुई थी। श्मशान के बीच रात के अँधेरे में छह तांत्रिक भगवान भैरवनाथ की मूर्ति के पास तंत्र साधना कर रहे हैं।

खरीद-फरोख्त रोकने के लिए पूजा-पाठ

उज्जैन में तंत्र साधना में जुटे तांत्रिक भय्यू महाराज ने मीडिया से बताया कि जीत के लिए बगलामुखी, भैरवी, भैरव, पुतली साधना के साथ विजय अनुष्ठान किया जाता है। मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस की सरकार बने, इसके लिए ‘विजय अनुष्ठान’ का आयोजन किया जा रहा है। नवरात्रि के पहले दिन रविवार को इंदौर की विधानसभा सीट क्रमांक एक से विधायक संजय शुक्ला की जीत के लिए भी विजय अनुष्ठान किया गया। कमलनाथ के लिए किया गया अनुष्ठान 9 दिन तक चलेगा।

उन्होंने कहा कि पिछले चुनाव में कॉन्ग्रेस के विधायकों को खरीद-फरोख्त हो गई थी, इस बार ऐसा नहीं होगा, क्योंकि पूजा-पाठ कराया जा रहा है।

कॉन्ग्रेस हुई दो फाड़? कमलनाथ-दिग्विजय में कपड़े फाड़ने की होड़!

बता दें कि मध्य प्रदेश चुनाव के लिए कॉन्ग्रेस ने प्रत्याशियों की जब घोषणा की, तो कई दावेदार जिन्हें टिकट नहीं मिला, वो विरोध पर उतर आए। ऐसे ही एक कैंडिडेट के समर्थकों ने जब कमलनाथ को घेरा कि उन्होंने उनके प्रत्याशी का टिकट क्यों काटा, तो कमलनाथ ने कहा कि जाकर दिग्विजय सिंह के कपड़े फाड़ो। यही नहीं, उन्होंने कॉन्ग्रेस के ही एक कार्यक्रम में कहा कि मैंने दिग्विजय को गालियाँ खाने के लिए एक पॉवर ऑफ अटार्नी दी है।

गलती किसी की भी होगी, गालियाँ दिग्विजय सिंह को ही पड़ेंगी। माना जा रहा है कि आपसी तनातनी में दोनों तरफ से एक-दूसरे के समर्थकों का टिकट काटा जा रहा है।

इजरायल से अब जॉर्डन नहीं जाएँगे बायडेन, गाजा के अस्पताल पर हमले के बाद सम्मेलन रद्द: मिस्र-फिलिस्तीन के मुखिया से भी नहीं होगी बात

आतंकी संगठन हमास के इजरायल पर हमले के बाद इजरायल लगातार कार्रवाई करते हुए गाजा पर हमले कर रहा है। अमेरिका इस युद्ध में इजरायल के साथ खड़ा है। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बायडेन इजरायल से एकजुटता दिखाने के लिए तेल अवीव का दौरा कर रहे हैं। वो जॉर्डन भी जाने वाले थे, लेकिन एक अस्पताल पर रॉकेट हमले की वजह से उनका जॉर्डन दौरा रद्द हो गया है।

जानकारी के मुताबिक, इजरायल के दौरे के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति जो बायडेन जॉर्डन की राजधानी अम्मान में जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला, मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फतह अल सीसी और फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास से मिलने वाले थे। इसके लिए अम्मान में अरब समिट का आयोजन किया जाना था।

इस समिट में फिलिस्तीन को मानवीय सहायता पहुँचाने पर बात होने वाली थी। इसी बीच गाजा पट्टी में स्थित एक अस्पताल पर रॉकेट से हमला हो गया, जिसमें 500 से अधिक लोगों के मारे जाने की खबर आई। इस खबर के बाद जो बायडेन की मुलाकात इजरायल तक ही सिमट कर रह गई।

दरअसल, हमास का कहना है कि अस्पताल पर यह हमला इजरायल ने किया है। वहीं, इज़रायली सेना ने कहा कि इस हमले में उसका कोई हाथ नहीं है और गाजा आतंकवादियों द्वारा छोड़े गए एक गलत रॉकेट के कारण विस्फोट हुआ है। ऐसे कई वीडियो सामने आए हैं, जिसमें दिख रहा है कि गाजा से लॉन्च किया गया रॉकेट फेल हो गया। इससे फिलिस्तीनी क्षेत्र में ही विस्फोट हो गया।

गाजा में सहायता पहुँचाने को लेकर होनी थी मुलाकात

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इजरायल को हमास के खिलाफ हरसंभव सहायता की घोषणा की है तो दूसरी तरफ वो गाजा में आम लोगों की सुरक्षा के प्रति भी चिंतित हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि गाजा पर कब्जा करना इजरायल की बड़ी भूल होगी।

ऐसे में वो उत्तरी गाजा से निकलकर दक्षिणी गाजा पहुँचे लोगों को मदद पहुँचाने के लिए जॉर्डन में अरब समिट में हिस्सा लेने वाले थे। इसकी मेजबानी जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला कर रहे थे, लेकिन अस्पताल पर हमले के बाद इन लोगों ने बायडेन से मिलने से इनकार कर दिया।

जो बायडेन ने जारी किया बयान

जो बायडेन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “मैं गाजा के अल अहली अरब अस्पताल में हुए विस्फोट और उसके परिणामस्वरूप हुई जानमाल की भयानक क्षति से क्षुब्ध और बेहद दुखी हूँ। यह समाचार सुनते ही मैंने जॉर्डन के सुल्तान अब्दुल्ला द्वितीय और इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू से बात की।”

उन्होंने आगे कहा, “मैंने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम को इस घटना की विस्तार से जानकारी इकट्ठा करने का निर्देश दिया है। संयुक्त राज्य अमेरिका संघर्ष के दौरान नागरिक जीवन की सुरक्षा के लिए स्पष्ट रूप से खड़ा है और हम इस त्रासदी में मारे गए या घायल हुए मरीजों, चिकित्सा कर्मचारियों और अन्य निर्दोष लोगों के लिए शोक व्यक्त करते हैं।”

मिस्र के रास्ते सहायता पहुँचाना चाहता है अमेरिका

अमेरिका की कोशिश है कि वो राफा क्रॉसिंग से होकर गाजा के लोगों तक मानवीय सहायता पहुँचाए और गाजा में फँसे फिलिस्तीनी-अमेरिकी नागरिकों को बचाए। मिस्र ने राफा क्रॉसिंग बंद कर रखा है। बीच में ये बातें सामने आ रही थीं कि इस क्रॉसिंग को थोड़े समय के लिए खोल दिया जाएगा, लेकिन इसे खोलने पर सहमति नहीं बन पाई।

बता दें कि हमास के हमले में 1400 इजरायलियों की मौत के बाद इजरायल ने हमास के खात्मे का संकल्प लिया है। हमास ने इस हमले में 199 इजरायली नागरिकों को बंधक भी बना लिया था। इजरायल बंधकों को छुड़ाने और हमास को मिटाने के लिए गाजा की घेराबंदी कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने बिजली, पानी, राशन की सप्लाई भी रोक दी है।

क्या है ‘इस्लामिक जिहाद’, जिसके रॉकेट से गाजा के अस्पताल में मरे 500: ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ से निकला है PIJ, हमास की तरह ही इजरायल को नक़्शे से मिटाना है मकसद

गाजा शहर के अल-अहली अरब अस्पताल में मिसाइल हमले में सैकड़ों लोगों के मारे जाने की सूचना के बाद मंगलवार (17 अक्टूबर, 2023) की रात को इजरायली सेना ने कहा कि ये हमला उसने नहीं किया है। साथ ही अपने दावे के समर्थन में पुख़्ता सबूत इजरायल डिफेंस फोर्स ने अपने एक्स हैंडल पर साझा किए।

इसके लिए इज़रायली रक्षा बलों ने गाजा के फिलिस्तीनी सशस्त्र विद्रोही गुट फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद (PJI) को दोषी ठहराया था। सेना का कहना था कि उनकी तरफ छोड़ा जा रहा रॉकेट मिसफ़ायर होकर अस्पताल पर गिरा था। वहीं गाजा में हमास से जुड़े स्वास्थ्य अधिकारियों ने विस्फोट को इज़रायली हवाई हमला करार दिया था। उन्होंने दावा किया कि देर शाम एक हवाई हमले में गाजा के शहर के इस अस्पताल को निशाना बनाया गया था। इजरायल ने इस हमले के लिए जिस गुट को जिम्मेदार ठहराया है वो क्या है, आपको जानने की ज़रूरत है।

इस्लामी जिहाद (PJI) क्या है?

अमेरिकी विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों में विशेषज्ञता वाले थिंक टैंक काउंसिल ‘ऑन फॉरेन रिलेशन्स (OFR)’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘फ़िलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद‘ (PIJ) एक इस्लामी फ़िलिस्तीनी राष्ट्रवादी संगठन है। ये इज़रायल के अस्तित्व का हिंसक विरोध करता है। अमेरिकी विदेश विभाग की आतंकवाद पर 2006 की रिपोर्ट के मुताबिक, 1997 में PIJ के आतंकवादी संगठन होने का ऐलान किया था।

पीआईजे पूरे फिलिस्तीन में एक इस्लामी शासन लागू करने की अपनी प्रतिबद्धता में इजरायली नागरिकों और सैन्य कर्मियों को निशाना बनाता है। हालाँकि, फतह या हमास के उलट पीआईजे राजनीतिक प्रक्रिया में शिरकत नहीं करता है।

कब वजूद में आया ये संगठन

फिलिस्तीनी इस्लामी जिहाद के संस्थापक फतेही शाकाकी (Fathi Shaqaqi) और अब्द अल-अजीज अवदा (Abd al-Aziz Awda) मिस्र में छात्र थे। ये दोनों 1970 के दशक के आखिर तक मिस्र ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ के सदस्य थे। उन्हें लगा कि ब्रदरहुड बहुत उदारवादी होता जा रहा था और फिलिस्तीनी के फायदों के लिए उसकी प्रतिबद्धता काफी नहीं है। इसके बाद इन दोनों ने ‘फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद’ (पीआईजे) बनाने का फैसला किया।

इसके साथ ही पीआईजे इजराइल के उग्रवादी विनाश और एक संप्रभु फिलिस्तीनी राज्य की पुनर्स्थापना के लिए प्रतिबद्ध एक अलग इकाई के तौर पर उभरा। ये बात गौर करने वाली है कि पीआईजे ने सुन्नी समूह होने के बावजूद 1979 की ईरानी क्रांति के दौरान अपनाए गए क्रांतिकारी, धार्मिक शिया नीतियों से प्रेरणा ली थी, जिसने एक इस्लामी शासन की स्थापना की।

इस इस्लामी जिहादी संगठन की स्थापना 1980 के दशक में गाजा पट्टी में इजरायली कब्जे से लड़ने और गाजा और वेस्ट बैंक में मौजूदगी बनाए रखने के लिए की गई थी। ये गाजा में दूसरा सबसे बड़े सशस्त्र समूह है। अक्सर इस्लामिक जिहाद बड़े आतंकी हमास संगठन के साथ मिलकर ही काम करता है।

हालाँकि, हमास ने 2007 से गाजा को काबू में कर यहाँ अपना शासन जमाया। बीते 35 साल में गाजा में हमास की ही तूती बोलती है। ईरान इन दोनों समूहों को फंडिंग करता है, साथ ही हथियारों की सप्लाई करता है। इज़रायल और ‘संयुक्त राज्य अमेरिका’ (USA) दोनों को आतंकवादी संगठन मानते हैं।

क्या है पीआईजे का मकसद

दरअसल, ‘फ़िलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद’ 1948 से पहले के जनादेश वाले फ़िलिस्तीन की भौगोलिक सीमाओं के साथ एक संप्रभु, इस्लामी फ़िलिस्तीनी राज्य को दोबारा से स्थापित करना चाहता है। पीआईजे हिंसक तरीकों से इज़रयल के विनाश की वकालत करता है।

यही नहीं, ये अरब-इजरायल संघर्ष को क्षेत्रीय विवाद के तौर पर नहीं बल्कि एक वैचारिक युद्ध के तौर पर देखता है। PIJ सदस्य हिंसा को मध्य पूर्व के नक्शे से इज़रायल को हटाने का इकलौता तरीका मानते हैं। पीआईजे इज़राइल और फिलिस्तीन के सह-अस्तित्व वाले किसी भी दो-राष्ट्रों वाली व्यवस्था को अस्वीकार करता हैं।

अन्य फिलिस्तीनी अलगाववादी समूहों के उलट पीआईजे बातचीत करने या राजनयिक प्रक्रिया में शामिल होने से इनकार करता है। यह फिलिस्तीनी प्राधिकरण के भीतर राजनीतिक प्रतिनिधित्व की माँग नहीं करता है। यही वजह है कि पीआईजे पर इजरायली ठिकानों पर कई आतंकवादी हमले कर 1993 के इजरायल और फिलिस्तीन ओस्लो समझौते की कोशिशों में रूकावट डालने की कोशिश करने का भी आरोप है।

ये देश है पीआईजे का स्पॉन्सर

अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, ईरान पीआईजे बजट के अधिकांश हिस्से की फंडिंग करता है। वहीं संयुक्त राज्य अमेरिका ने सीरिया पर इस समूह के लिए “सुरक्षित शरणस्थल” देने और पीआईजे मुख्यालय को दमिश्क में रहने की रजामंदी देने का भी आरोप लगाया है।

पीआईजे हमास से कैसे है अलग

पीआईजे एक तरह से हमास का प्रतिद्वंद्वी उग्रवादी समूह है। ये अक्सर हमास से फ़िलिस्तीनियों के समर्थन के लिए प्रतिस्पर्धा करता रहता है। हालाँकि, पीआईजे कोई सामाजिक सेवाएँ नहीं देता है।

इसके अलावा ये इज़राइल के साथ किसी भी तरह की की राजनयिक बातचीत में शामिल होने का इरादा नहीं रखता है। हमास से बहुत छोटे इस आतंकी संगठन पीआईजे के सदस्य इस्लाम के लिए इसके ऐतिहासिक अहमियत की वजह से इस जमीन को बेहद पाक मानते हैं। यही वजह है कि ये समूह हिंसक तरीकों से इज़राइल का पूरी तरह से खात्मा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।

पीआईजे के कौन हैं नेता

मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए फतेही शाकाकी गाजा से मिस्र चला गया। वहाँ ये मिस्र ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ के साथ सक्रिय हो गए। इसके बाद वो काफी वक्त से पीआईजे के आध्यात्मिक नेता रहे अब्द अल-अज़ीज़ अवदा के साथ साथ चला गया। सीरियाई संरक्षण के तहत दमिश्क में बसने से पहले शाकाकी देश निकाले की वजह से मध्य पूर्व में घूमता रहा था। आखिरकार सीरियाई संरक्षण के तहत वो दमिश्क में बस गया।

शाकाकी 1995 में कथित तौर पर इजरायली एजेंटों के हाथों माल्टा में मारे जाने तक इस संगठन का चीफ बना रहा था। इसके बाद उसकी जगह ब्रिटेन में पढ़े फ़िलिस्तीनी रमज़ान अब्दुल्ला शल्लाह ने ले ली। अब्दुल्ला शल्लाह 1990 से 1995 तक दक्षिण फ्लोरिडा के विश्वविद्यालय में मध्य पूर्वी कोर्स पढ़ाया करता था।

अमेरिका की संघीय जाँच एजेंसी के अधिकारियों ने फ़िलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद के आठ नेताओं को 2003 में 50 आरोपों में दोषी ठहराया गया था। इनमें से केवल एक सामी अल-एरियन को गिरफ्तार किया जा सका था और उस पर मुकदमा चलाया गया था। हालाँकि, अल-एरियन ने आतंकवाद से संबंध रखने से इनकार किया था।

क्या है पीआईजे का इतिहास

शाकाकी और अवदा ने 1970 के दशक के आखिर में ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ से अलग हो गए। इसके बाद 1981 तक मिस्र से पीआईजे को तब-तक चलाते रहे जब-तक कि राष्ट्रपति अनवर सादात की हत्या के बाद मिस्र सरकार ने इस समूह को गाजा निर्वासित नहीं कर दिया।

पीआईजे 1987 तक गाजा में रहा। इसके बाद इस आतंकी समूह को गाजा से लेबनान निर्वासित कर दिया गया। इस दौरान लेबनान में रहते हुए पीआईजे के नेतृत्व ने हिज़्बुल्लाह के साथ रिश्ते बनाए। इसके तहत इस समूह ने ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से ट्रेनिंग ली।

साल 1989 में शाकाकी ने PIJ का आधिकारिक मुख्यालय सीरिया की राजधानी दमिश्क में स्थानांतरित कर दिया। तब से ये वहीं बना हुआ है। हालाँकि, अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, पीआईजे के नेताओं की एक छोटी टुकड़ी अभी भी लेबनान में मौजूद है। दक्षिण लेबनान में लगातार इसकी मौजूदगी में पीआईजे और हिजबुल्लाह 1990 के दशक में संयुक्त हमले करते रहे।

मौजूदा वक्त में फ़िलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद एक छोटा, लेकिन बेहद गोपनीय संगठन है। ये 1000 से कम सदस्यों और सीमित जन-समर्थन के साथ भूमिगत तौर पर संचालित होता है। हालाँकि, 2003 में समूह के आठ सीनियर सदस्यों पर अमेरिकी अभियोग ने इसकी ताकत कम कर दी।

किस तरह के हमले करता है पीआईजे

पीआईजे अक्सर आत्मघाती बम विस्फोट करता है जो नागरिकों और सैन्य कर्मियों को निशाना बनाते हैं। हालाँकि, गाजा के चारों ओर सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद होने से इजरायली क्षेत्र के अंदर बार-बार होने वाले हमलों की संख्या कम हो गई है। इस दौरान पीआईजे ने अमेरिकी संपत्तियों या नागरिकों पर कोई सीधा हमला नहीं किया, हालाँकि, कुछ हमलों में अमेरिकी मारे गए। पीआईजे ने धमकी दी है कि अगर अमेरिकी दूतावास को तेल अवीव से यरूशलेम में स्थानांतरित किया गया तो वह अमेरिकी दूतावास पर हमला करेगा।

इस्लामिक जिहाद और हमास के बीच रिश्ता

इजरायली सेना ने मई में कहा कि उसने तीन इस्लामिक जिहाद नेताओं को निशाना बनाया और उन्हें मार डाला, उन्होंने कहा कि वे इजरायल के खिलाफ रॉकेट हमलों और वेस्ट बैंक में इजरायली नागरिकों के खिलाफ अन्य हमलों के लिए जिम्मेदार थे। अतीत में, इस्लामिक जिहाद जिहाद सहित फिलिस्तीनी सशस्त्र समूहों के दागे गए रॉकेट कभी-कभी खराब हो जाते थे और नागरिक इलाकों पर हमला करते थे। हमास और इस्लामिक जिहाद अक्सर इजरायल के खिलाफ एकजुट होते हैं।

वे संयुक्त अभियान में सबसे अहम सदस्य होते हैं। जो गाजा के छोटे से तटीय क्षेत्र में विभिन्न सशस्त्र समूहों के बीच अधिकांश सैन्य गतिविधियों का समन्वय करता है। लेकिन कभी-कभी यह एक तनावपूर्ण रिश्ता भी होता है, खासकर तब जब हमास इज़रायल के खिलाफ हमले या प्रतिशोध को रोकने के लिए इस्लामिक जिहाद पर दबाव डाला है।

इस्लामिक जिहाद अक्सर हमास से स्वतंत्र रूप से कार्य करता है और मुख्य रूप से सैन्य टकराव पर केंद्रित होता है। कुछ अवसरों पर, हमास किनारे पर रहा है क्योंकि इस्लामिक जिहाद का इज़राइल के साथ टकराव हुआ है। अन्य मामलों में, हमास इजरायली सेना से लड़ने में इस्लामिक जिहाद में शामिल हो गया है।

जूनागढ़ के ऐतिहासिक ‘ऊपरकोट किले’ में नमाज पढ़ रहे थे मुस्लिम, वीडियो वायरल: सयाजीराव यूनिवर्सिटी में भी हो चुकी हैं ऐसी कई घटनाएँ

गुजरात के जूनागढ़ में स्थित ऊपरकोट किले में मुस्लिमों के एक समूह द्वारा नमाज पढ़ने का वीडियो वायरल हुआ है। इस पर बजरंग दल ने नाराजगी जताई है। बजरंग दल ने ऐलान किया है कि वो उस जगह पर सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे। बता दें कि जूनागढ़ में ऊपरकोट का किला बेहद महत्वपूर्ण है और यह सैकड़ों साल पुराना है। साल 2020 में गुजरात सरकार ने इसकी मरम्मत कराई थी।

संदेश समाचार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, घटना रविवार (15 अक्टूबर 2023) की है। जूनागढ़ के ऐतिहासिक किले ऊपरकोट में आदि कड़ी वाव (कुआँ) के पास 8 लोगों ने सार्वजनिक तौर पर नमाज पढ़ी। इसके बाद उस घटना की तस्वीरें और वीडियो वायरल हो गए।

इस घटना के बाद पुलिस भी हरकत में आ गई है और मामला दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक, ऊपरकोट किले में नमाज पढ़ने की घटना को लेकर पुलिस ने किला प्रबंधन से सीसीटीवी फुटेज माँगी है, लेकिन प्रबंधन ने फुटेज देने से इनकार कर दिया।

बजरंग दल ने किया तीखा विरोध, लगाया लैंड जिहाद का आरोप

मुस्लिमों द्वारा ऐतिहासिक स्थल ऊपरकोट में नमाज पढ़कर शांति भंग करने के प्रयास में बजरंग दल ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। बजरंग दल ने ऊपरकोट में बुधवार (18 अक्टूबर) शाम 6 बजे सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ करने का ऐलान किया है और लोगों से बड़ी संख्या में जुटने का अनुरोध किया है।

बजरंग दल के गुजरात क्षेत्र के समन्वयक भावेश ठक्कर ने कहा, “जूनागढ़ के भीतर एक ऐतिहासिक विरासत स्थल ऊपरकोट में आदि कड़ी वावनी के पास जिहादी विचारधारा वाले क्षेत्रवादियों द्वारा भूमि जिहाद शुरू किया गया है। बजरंग दल ऊपरकोट के अंदर सार्वजनिक स्थान पर नमाज पढ़ने की मानसिकता का पुरजोर विरोध करता है।”

महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी में कई ऐसे मामले

गौरतलब है कि जिस तरह जूनागढ़ में सार्वजनिक तौर पर नमाज पढ़ने की तस्वीरें वायरल हुई हैं, उसी तरह वडोदरा के महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी (MSU) से भी ऐसे ही वीडियो सामने आए थे। इससे पहले भी विश्वविद्यालय में ऐसी कई घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। कई को लेकर बवाल हुआ था।

इससे कुछ समय पहले ही एमएसयू से ऐसी ही एक और घटना सामने आई थी, जिसमें जालीदार टोपी पहने तीन मुस्लिम युवक शिव मंदिर के पास सार्वजनिक रूप से नमाज/दुआ पढ़ रहे थे। इस घटना का वीडियो भी वायरल हो गया था। उससे पहले चादर ओढ़े एक छात्रा संस्कृत फैकल्टी के पास नमाज पढ़ते देखी गई थी।

जूनागढ़ में मुस्लिमों ने पुलिस पर हमला कर दिया

बता दें कि जूनागढ़ में 16 जून 2023 को हिंसा भड़क गई थी। इस दौरान करीब 500 मुस्लिमों की भीड़ ने पुलिस पर हमला कर दिया था। दरअसल, जूनागढ़ नगर निगम ने माजेवाडी गेट के पास स्थित मंदिरों और दरगाह समेत आठ धार्मिक स्थानों को नोटिस भेजा था, नोटिस मिलने के बाद मुस्लिम समुदाय ने रात 10 बजे के आसपास पुलिस पर हमला कर दिया।

इस दौरान उन्मादी भीड़ ने आसपास के वाहनों को निशाना बनाया था। भीड़ ने बस पर पथराव भी किया था। हिंसा में एक हिंदू की मौत हो गई, जबकि चार पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। इस दौरान ‘पुलिसवालों को मार दो, सब जला दो, कोई जिंदा न बचे’ जैसे नारे लगाए जा रहे थे। जूनागढ़ हिंसा पर ऑपइंडिया की पूरी कवरेज यहाँ पढ़ी जा सकती है।