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‘एक परिवार की पार्टी है कॉन्ग्रेस’: अध्यक्ष का चुनाव हारने के बाद अब I.N.D.I का PM चेहरा बनने की जुगत में शशि थरूर? पहले भी कर चुके हैं बगावत

केरल से कॉन्ग्रेस के सांसद शशि थरूर हमेशा सुर्खियों में बने रहते हैं। कभी किसी विवादास्पद बयान को लेकर तो कभी अपने अनोखे अंदाज को लेकर। केरल के तिरुवनंतपुरम से सांसद थरूर ने सोमवार (16 अक्टूबर 2023) को कहा कि कॉग्रेस पार्टी परिवार के द्वारा चलाई जाने वाली पार्टी है। इससे पहले पार्टी अध्यक्ष के चुनाव में गाँधी परिवार के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं।

तिरुवनंतपुरम में एक कार्यक्रम के दौरान ये सवाल किया गया कि अगर I.N.D.I. गठबंधन सत्ता में आता है तो प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार कौन हो सकता है। इस पर थरूर ने ऐसी बात कही जो पार्टी के लिए शर्मिंदगी साबित हो रही है। उन्होंने कॉन्ग्रेस को एक परिवार की पार्टी बता दिया।

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि एक बार नतीजे आ जाए, क्योंकि यह एक गठबंधन है, एक पार्टी नहीं है। इसलिए गठबंधन के नेताओं को एक साथ मिलकर किसी को चुनना होगा। हालाँकि, मेरा अनुमान है कि कॉन्ग्रेस पार्टी से या तो खड़़गे भारत के पहले दलित प्रधानमंत्री होंगे या फिर राहुल गाँधी, क्योंकि कई मायनों में यह (कॉन्ग्रेस) एक परिवार संचालित पार्टी है।”

उन्होंने आगे कहा, “इसलिए हमें इंतजार करना होगा और देखना होगा। प्रधानमंत्री हमारे बराबर के लोगों में से ही एक होते हैं।” सांसद थरूर ने कहा कि अगले साल लोकसभा चुनावों में आश्चर्यजनक नतीजे आने की संभावना है। उन्होंने अनुमान लगाया कि I.N.D.I. गठबंधन भाजपा के नेतृत्व वाले NDA को हरा सकता है और केंद्र में सत्ता हासिल कर सकता है।

कॉन्ग्रेस के कार्यकाल में केंद्रीय मंत्री रहे थरूर ने खुद को अप्रत्यक्ष रूप से पीएम पद की दौड़ में शामिल करते हुए कहा कि उन्हें जो भी जिम्मेदारियाँ सौंपी जाएगी, उसे वे ईमानदारी से निभाएँगे। बता दें कि शशि थरूर जी-23 गुट के हैं। यह कॉन्ग्रेस के नाराज नेताओं का गुट है, जो पार्टी में लगातार कई बदलाव की माँग करता रहा है।

बता दें कि अगामी लोकसभा चुनावों में पीएम मोदी की नेतृत्व वाली एनडीए गठबंधन सरकार को हराने के लिए देश के अहम विपक्षी दलों ने दिल्ली, मुबंई, पटना सहित कई जगहों पर बैठक की थी। इसमें तैयारियों को लेकर रोडमैप तैयार किया गया था। हालाँकि, पीएम पद को लेकर कोई चेहरा तय नहीं किया है।

लोकसभा अध्यक्ष ने आचार समिति के पास भेजी महुआ मोइत्रा के खिलाफ शिकायत, आरोप- कारोबारी से कैश और तोहफे लेकर सवाल करती थी TMC सांसद

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार (17 अक्टूबर 2023) को तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ ‘सवालों के बदले रिश्वत’ लेने की मिली शिकायत को लोकसभा की आचार समिति को भेज दिया। उन पर ये आरोप भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद निशिकांत दुबे ने लगाए थे। लोकसभा की आचार समिति के अध्यक्ष भाजपा सदस्य विनोद कुमार सोनकर हैं।

दरअसल, गोड्डा से भाजपा के सांसद निशिकांत दुबे ने टीएमसी सांसद मोइत्रा पर संसद में सवाल पूछने के लिए रिश्वत लेने के आरोप लगाए थे और उसकी जाँच की माँग की थी। इस मामले पर उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव और उनके राज्यमंत्री (MoS) राजीव चंद्रशेखर को एक शिकायती पत्र लिखा था।

BJP सांसद दुबे ने महुआ के खिलाफ जाँच के लिए पैनल गठित करने की माँग की है। दरअसल, दुबे ने महुआ पर ये आरोप सुप्रीम कोर्ट के एक वकील के पत्र पर आधार पर लगाया है। इसमें सांसद मोइत्रा और रियल-एस्टेट समूह हीरानंदानी समूह के सीईओ कारोबारी दर्शन हीरानंदानी के बीच ‘रिश्वत के नकारे न सकने वाले सबूत’ का जिक्र किया गया था।

बीजेपी सांसद ने कहा था कि ये आरोप दिसंबर 2005 के ‘कैश फॉर क्वेरी स्कैंडल’ की याद दिलाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल सांसद द्वारा हाल तक संसद में पूछे गए 61 में से 50 सवाल दर्शन हीरानंदानी और उनके समूह के कारोबारी हितों की रक्षा से संबंधित हैं। इस बीच, महुआ मोइत्रा ने सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया है।

स्पीकर बिरला को दुबे द्वारा लिखे गए पत्र के बाद रविवार (15 अक्टूबर 2023) को सांसद मोइत्रा ने जवाबी हमला बोला। उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “मैं एक कॉलेज/यूनिवर्सिटी खरीदने के लिए अपनी सारी गलत कमाई की नकदी और तोहफों का इस्तेमाल कर रही हूँ, जिससे की ‘डिग्री दुबे’ एक असली डिग्री खरीद सकें।”

उन्होंने आगे लिखा, “कृपया ओम बिरला झूठे हलफनामे के लिए उनके (दुबे के) खिलाफ जाँच पूरी करें और फिर मेरी जाँच के लिए समिति गठित करें।” इस बीच हीरानंदानी समूह ने दुबे के इन आरोपों को खारिज किया है। समूह के प्रवक्ता ने कहा कि इस ग्रुप ने हमेशा देश के हित में सरकार के साथ मिलकर काम किया है और आगे भी करता रहेगा।

2035 तक भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन, 2040 तक चाँद पर भारतीय नागरिक: PM मोदी ने स्पेस डिपार्टमेंट की बैठक में ISRO को दिया लक्ष्य, चेस खिलाड़ी प्रज्ञानानंद से मिले S सोमनाथ

भारत की अंतरिक्ष एजेंसी ISRO एक के बाद एक कर के सफलता के नए दास्ताँ लिख रही है, जिसमें ‘चंद्रयान 3’ का चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरना भी शामिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसरो को अब नए और महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि 2035 तक चाँद पर ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ स्थापित करने और और 2040 तक किसी भारतीय को चन्द्रमा की सतह पर भेजने का लक्ष्य होना चाहिए। साथ ही उन्होंने अन्य ग्रहों से संबंधित मिशन पर भी काम तेज़ करने के लिए कहा।

इसमें वीनस ऑर्बिटर मिशन और मार्स लैंडर मिशन भी शामिल है। यानी, शुक्र और मंगल ग्रहों पर पहुँचने के लिए भारत अब तैयार है। केंद्रीय अंतरिक्ष मामलों के मंत्री जितेंद्र सिंह और ISRO प्रमुख एस सोमनाथ के साथ पीएम मोदी ने एक बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने इसमें ‘गगनयान’ और अन्य अंतरिक्ष अभियानों के भविष्य की समीक्षा की। अब पीएम मोदी द्वारा दी गई डेडलाइन के हिसाब से इसरो काम करेगा। इसमें अगले ‘चंद्रयान’ मिशन, नेक्स्ट जनरेशन लॉन्च व्हीकल (NGLV), नए लॉन्चपैड का निर्माण और ह्यूमन सेंट्रिक लेबोरेटरीज की स्थापना शामिल हैं।

इस बैठक में अंतरिक्ष विभाग के अधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने एक पूरा खाका पेश किया कि ‘गगनयान’ मिशन को लेकर अब तक क्या-क्या किया गया है और आगे क्या योजना है। HLVM3 (ह्यूमन रेटेड लॉन्च व्हीकल) के माध्यम से 3 बिना क्रू वाले टेस्ट अभी किए जाने हैं। कुल 20 टेस्ट किए जाने हैं। 21 अक्टूबर को पहला ऐसा मिशन टेस्ट होगा। इसके तहत आउटर स्पेस में भेजकर क्रू मॉड्यूल को वापस धरती पर लाया जाएगा।

इसके बाद ‘व्योममित्र’ नाम के एक हुमानोइड रोबोट को विकसित किया जाएगा, जिसे मिशन में भेजा जाएगा। 2025 में 2-3 खगोलविदों के साथ अंतिम मिशन टेस्ट किया जाएगा। पीएम मोदी ने इस बैठक में अंतरिक्ष में नई ऊँचाइयों को छूने की भारत की क्षमता पर भी बात की। अब तक अमेरिका, रूस और चीन ही अंतरिक्ष में किसी व्यक्ति को भेज पाए हैं। इसके लिए 5.3 टन का एयरक्राफ्ट डिजाइन किया जा रहा है। 2023 में ‘क्रू एस्केप सिस्टम’ की भी टेस्टिंग की जाएगी।

उधर इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने भात के धुरंधर चेस खिलाड़ी प्रज्ञानानंद से भी बातचीत की। उन्होंने इस दौरान एशिया कप में रजत पदक जीतने वाले प्रज्ञानानंद को GSLV रॉकेट का एक छोटा सा मॉडल भेंट किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि चाँद पर भले ही ‘प्रज्ञान’ रोवर सो रहा है लेकिन भारत के प्रज्ञानानंद को देश को गौरव दिलाने के लिए सक्रिय रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रज्ञानानंद युवाओं को अंतरिक्ष सेक्टर ज्वाइन करने के लिए प्रेरित करेंगे। इसी दौरान उन्होंने जनवरी 2024 के मध्य में ‘आदित्य L1’ के अपने लक्ष्य तक पहुँचने की भी जानकारी दी।

अतीक अहमद के ध्वस्त दफ्तर में छिपा रहे थे बम, पुलिस ने बाप-बेटे को दबोचा: माफिया के बेटे के स्वागत जुलूस में भी एक्टिव थे अनीस और रहमान

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में पुलिस ने 7 देशी जिन्दा बम के साथ 2 लोगों को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपित रिश्ते में बाप-बेटे हैं, जो माफिया अतीक अहमद के परिवार वालों के करीबी हैं। इनके नाम अनीस अख्तर और उसका बेटा मोहम्मद रहमान हैं। दोनों आरोपित बमों को ध्वस्त किए गए अतीक अहमद के ऑफिस में छिपाने ले जा रहे थे। पुलिस ने यह कार्रवाई सोमवार (16 अक्टूबर 2023) को की है। दोनों बाप-बेटे 9 अक्टूबर 2023 को उस जश्न और जुलूस में भी शामिल थे, जो अतीक अहमद के 2 बेटों की बाल सुधार गृह से रिहाई के बाद आयोजित किया गया था।

यह मामला प्रयागराज शहर के थाना क्षेत्र खुल्दाबाद का है। यहाँ तैनात सब इंस्पेक्टर अमित कुमार ने शिकायत दर्ज करवाते हुए कहा है कि 16 अक्टूबर को वो कॉन्स्टेबल नीरज यादव के साथ गश्त कर रहे थे। इस दौरान एक मुखबिर ने उन्हें अतीक अहमद के कार्यालय के पास 2 संदिग्ध लोगों की मौजूदगी की सूचना दी। मुखबिर ने दोनों संदिग्धों को आपराधिक मानसिकता वाले और अतीक अहमद के परिवार का करीबी बताते हुए उनके पास अवैध हथियार होने की आशंका जताई।

इस सूचना पर सब इंस्पेक्टर अमित अतिरिक्त पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। सूचना सही पाई गई। वहाँ पुल की आड़ में 2 लोग छिपे दिखे। जब उन्हें पुलिस की आहट मिली तो दोनों भागने लगे। पुलिस ने दौड़ाकर उन दोनों को पकड़ लिया। पकड़े गए पहले संदिग्ध ने अपना नाम 46 वर्षीय अनीस अख्तर उर्फ़ कबाड़ी बताया। उसके हाथ में एक झोला था, जिसमें 4 जिन्दा देशी बम थे। वहीं, दूसरे शख्स ने खुद को अनीस अख्तर का 21 वर्षीय बेटा मोहम्मद रहमान बताया। रहमान के झोले में 3 बम बरामद हुए।

पुलिस की पूछताछ में दोनों आरोपितों ने बताया कि इन बमों को वे अतीक अहमद के ध्वस्त किए गए खंडहरनुमा ऑफिस में छिपाने ले जा रहे थे। इसके साथ ही दोनों ने अतीक अहमद के परिवार द्वारा किए जाने वाले कई आपराधिक कृत्यों में अपनी भागीदारी की बात कबूली। गिरफ्तारी के दौरान आसपास काफी भीड़ जमा हो गई थी। जब पुलिस ने भीड़ में से किसी को गवाही देने के लिए कहा, तब वहाँ अतीक अहमद का नाम सुनकर लोग हटने लगे। पुलिस ने दोनों आरोपितों के खिलाफ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908 की धारा 4/5 के तहत कार्रवाई की है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गिरफ्तार मोहम्मद रहमान मुठभेड़ में मार गिराए गए असद अहमद का साथी रह चुका है। वहीं, रहमान का अब्बा अनीस कबाड़ी पूर्व में अतीक के इशारे पर कई आपराधिक वारदातों को अंजाम भी दे चुका है। वह कबाड़ खरीदने-बेचने का काम करता है। ये बाप बेटे 9 अक्टूबर को उस जुलूस में भी शामिल हुए थे जो अतीक अहमद के दोनों बेटों की बाल सुधार गृह से रिहाई पर निकला था। धूमनगंज में उमेश पाल और उनके दो गनर की हत्या के बाद पुलिस ने अनीश के घर पर भी छापेमारी की थी।

‘अनंत अंबानी में अनुभव नहीं, उम्र भी कम’: मुकेश-नीता के छोटे बेटे की रिलायंस बोर्ड में एंट्री पर विवाद, एडवायजरी फर्म ने कहा- विरोध करें शेयर होल्डर

‘रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड’ (RIL) की हाल ही में सालाना आम बैठक हुई। इसमें कंपनी के चेयरमैन मुकेश अंबानी के तीनों बच्चों को बोर्ड में शामिल करने का फैसला लिया गया है। इस प्रस्ताव पर शेयरहोल्डर्स को गुरुवार (26 अक्टूबर, 2023) तक वोट करना है। इससे पहले एक प्रॉक्सी एडवाइजरी फर्म ने अनंत अंबानी के नाम को लेकर सवाल उठाए हैं।

इस प्रॉक्सी एडवाइजरी फर्म ‘इंस्टीट्यूशनल इंवेस्टर्स एडवाजरी सर्विस’ (IIAS) और ‘शेयरहोल्डर सर्विसेज इंक’ (ISS) ने शेयरहोल्डर्स से अनंत अंबानी की नियुक्ति के खिलाफ वोट देने की अपील की है। ‘ब्लूमबर्ग’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फर्म ने गुरुवार (12 अक्टूबर, 2023) को एक नोट में कहा कि अनंत अंबानी का अनुभव केवल 6 साल का है। ऐसे में बोर्ड में उनके योगदान पर सवाल खड़े होते हैं। हालाँकि, प्रॉक्सी फर्म ने ईशा और आकाश अंबानी की बोर्ड में नियुक्ति का समर्थन किया है। शेयरहोल्डर्स को इस प्रस्ताव पर गुरुवार (26 अक्टूबर, 2023) तक वोट देना है।

मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाले समूह के शेयरधारक तीनों भाई-बहनों की गैर-कार्यकारी, गैर-स्वतंत्र निदेशकों के तौर पर नियुक्ति के लिए वोटिंग करने के लिए तैयार हैं। इस वोटिंग का नतीजा सोमवार (30 अक्टूबर, 2023) को निकलेगा। दरअसल, अगली पीढ़ी के अंबानियों को बोर्ड में शामिल करना उत्तराधिकार योजना का हिस्सा है। आईएसएस की आपत्तियाँ मुंबई के इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर एडवाइजरी सर्विसेज या आईआईएएस की सिफारिशों को ही दोहराती है।

IIAS की 9 अक्टूबर की रिपोर्ट में कहा गया था कि 28 साल की उम्र में गैर-कार्यकारी, गैर-स्वतंत्र निदेशक के तौर पर युवा अंबानी वंशज की नियुक्ति हमारी वोटिंग के दिशानिर्देशों के मुताबिक नहीं है। वहीं IIAS ने ईशा और आकाश को चुनने के प्रस्ताव का समर्थन किया है और उनके नामों पर कोई आपत्ति नहीं जताई है। गौरतलब है अनंत मार्च 2020 से जियो प्लेटफ़ॉर्म सहित रिलायंस समूह की कंपनियों के बोर्ड में काम कर रहे हैं। वो मई 2022 से रिलायंस रिटेल वेंचर्स और जून 2021 से रिलायंस न्यू एनर्जी और रिलायंस न्यू सोलर एनर्जी के बोर्ड में भी हैं।

कंपनी ने साफ किया है कि तीनों अंबानी भाई-बहनों की नियुक्ति 31 दिसंबर, 2023 से पहले प्रभावी होने की उम्मीद है। रिलायंस के संस्थापकों के पास कंपनी में 41 फीसदी से अधिक शेयर हैं, जो उन्हें सबसे अधिक वोटिंग का अंश देता है। इन तीनों प्रस्तावों को प्रभावी होने के लिए बहुमत से वोटिंग की जरूरत होगी।

अक्सर प्रॉक्सी फर्मों की सिफारिशों के आधार पर वोट करने वाले विदेशी और स्थानीय संस्थानों की रिलायंस में करीब 40 फीसदी की हिस्सेदारी हैं। वहीं दूसरी तरफ इंटरनेशनल प्रॉक्सी फर्म ‘ग्लास लेविस’ (Glass Lewis) ने अनंत की नियुक्ति का पक्ष लिया है। कंपनी के एशिया-पैसिफिक रिसर्च डायरेक्टर डिकी विंडारटो (Decky Windarto) ने कहा कि अंबानी के जुड़वा बच्चे आकाश और ईशा की उम्र अनंत से महज तीन साल अधिक है लेकिन सबका पेशेवर अनुभव बराबर है।

रिलायंस में फाउंडर्स की 41 फीसदी हिस्सेदारी है। कंपनी में विदेशी और लोकल इंस्टीट्यूशंस की 40 फीसदी हिस्सेदारी है। ये निवेशक प्रॉक्सी फर्म्स के सुझावों के आधार पर वोट करते हैं। गौरतलब है कि मुकेश अंबानी को 1977 में महज 20 साल की उम्र में रिलायंस के बोर्ड में शामिल किया गया था।

‘जाओ, दिग्विजय सिंह और जयवर्धन सिंह के कपड़े फाड़ो’: भड़के कॉन्ग्रेसियों से बोले कमलनाथ, वीडियो से सामने आया मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस में कलह का आलम

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस 2 बड़े खेमों में बँटी नजर आ रही है। एक खेमे की अगुवाई पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ कर रहे हैं, तो दूसरे की अगुवाई पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह। दोनों पर ही एक-दूसरे के समर्थकों के टिकट काटने के आरोप लग रहे हैं। इस बीच, एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें कमलनाथ कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं से कह रहे हैं कि लोग ‘दिग्विजय सिंह और जयवर्धन सिंह के कपड़े फाड़ें।’ इस मामले में कमलनाथ के घर पर वीरेंद्र रघुवंशी के समर्थकों ने घेरा डाला था और वो लोग उनके वीरेंद्र का टिकट कटने पर सवाल कर रहे थे।

कमलनाथ का वीडियो वायरल, भाजपा ने ली चुटकी

वीरेंद्र रघुवंशी के समर्थकों से कमलनाथ की बातचीत के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिसमें वो कार्यकर्ताओं से कहते दिख रहे हैं कि वो वीरेंद्र सचदेवा को उन लोगों से ज्यादा चाहते हैं। वो दावा करते हैं कि शिवपुरी सीट पर रघुवंशी को ही टिकट देना है। वो अलग-अलग नेताओं के नाम भी लेते हैं। जब कार्यकर्ता वीरेंद्र रघुवंशी के नाम को लेकर जोर देते हैं, तो कमलनाथ साफ तौर पर कहते हैं, “दिग्विजय सिंह और जयवर्धन सिंह के कपड़े फाड़ो।”

मध्य प्रदेश भाजपा के ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर वीडियो का एक हिस्सा जारी कर लिखा गया है, “कॉन्ग्रेस की हार का ठीकरा मिस्टर बँटाधार के सिर पर फूटने वाला है। टिकट बँटवारे से नाराज कार्यकर्ताओं को कमलनाथ की दो टूक – जाओ दिग्विजय सिंह और जयवर्धन के कपड़े फाड़ो।” बता दें कि जयवर्धन सिंह, दिग्विजय सिंह के बेटे हैं और साथ ही कॉन्ग्रेस के विधायक भी हैं।

विरोध प्रदर्शन और आक्रोश से डरे कमलनाथ: भाजपा प्रवक्ता

इसके दो वीडियो भाजपा के मध्य प्रदेश के प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने पोस्ट किया और लिखा, “दलबदल कर कॉन्ग्रेस में आए वीरेन्द्र रघुवंशी का टिकट काटे जाने से उनके समर्थकों ने कमलनाथ का घर घेरा, भारी आक्रोश दिखाया। कमलनाथ ने कहा दिग्विजय सिंह और केपी सिंह के कारण यह सब हुआ। नाथ ने कहा- जाकर दिग्विजय सिंह और जयवर्धन सिंह के कपड़े फाड़ो। यह हालत है कि कमलनाथ प्रदेश अध्यक्ष है और उन्हें टिकटों का होश ही नहीं। कोई भी कन्फ़्यूजन पैदा कर टिकट फाइनल करा रहा है। इस विरोध प्रदर्शन व आक्रोश से श्री कमलनाथ डरे।”

गालियाँ खाने के लिए दिग्विजय सिंह को दी है ‘पॉवर ऑफ अटॉर्नी’

इसी मामले से जुड़ा एक और वीडियो भी वायरल हो रहा है, जो कॉन्ग्रेस से जुड़े कार्यक्रम का है। भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने ये वीडियो शेयर किया है, जिसमें मंच से कमलनाथ बोलते हैं, ‘मैंने बहुत पहले दिग्विजय को ‘पॉवर ऑफ अटार्नी’ दी थी कि आप कमलनाथ के लिए गालियाँ खाइए। गलती हो या न हो।” वहीं, दिग्विजय सिंह कहते हैं कि फॉर्म A और फॉर्म B पर साइन प्रदेश अध्यक्ष (कमलनाथ) के होते हैं, ऐसे में कपड़े उन्हीं के फाड़ो।

इसी के जवाब में फिर से कमलनाथ कहते हैं, “गलती हो या न हो, गालियाँ दिग्विजय सिंह को ही खानी है और वो ‘पॉवर ऑफ अटॉर्नी’ अब भी वैलिड है।”

हालाँकि, इस विवाद के बाद दिग्विजय सिंह ने एक ट्वीट किया और इस विवाद को थामने की कोशिश की। दिग्विजय सिंह ने लिखा, “जब परिवार बड़ा होता है तो सामूहिक सुख और सामूहिक द्वंद्व दोनों होते हैं। समझदारी यही कहती है कि बड़े लोग धैर्यपूर्वक समाधान निकालें। ईश्वर भी उन्हीं का साथ देते हैं जो मन और मेहनत का मेल रखते हैं।”

बता दें कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान समेत 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है। इसके बाद सभी राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। कॉन्ग्रेस के टिकट बँटवारे से कई नेता नाराज हैं। कई लोग टिकट कटने की शिकायत कर रहे हैं। वहीं, पार्टी भी दो फाड़ बँटी नजर आ रही है। ऐसे में दिग्विजय और कमलनाथ की कोशिश है कि वो अपने अधिकतम समर्थकों को टिकट दिला सके। वहीं, जिस वीरेंद्र रघुवंशी का टिकट काटा गया है, वो दलबदल कर कुछ समय पहले ही कॉन्ग्रेस में आए हैं।

बुर्के में भाग रहा था सपा का नेता, योगी की पुलिस ने धर दबोचा: गैंगस्टर मोहम्मद मुजफ्फर ने गोतस्करी से खड़ी कर रखी है करोड़ों की संपत्ति

उत्तर प्रदेश की प्रयागराज पुलिस ने समाजवादी पार्टी के नेता एवं ब्लॉक प्रमुख मोहम्मद मुज़फ्फर को गिरफ्तार कर लिया है। मोहम्मद मुज़फ्फर पर अलग-अलग जिलों में गोहत्या सहित 34 आपराधिक केस दर्ज हैं। शनिवार (14 अक्टूबर 2023) को गिरफ्तारी से बचने के लिए सपा नेता बुर्का पहनकर भाग रहा था। हालाँकि, पुलिस ने उसे दबोच लिया। मुजफ्फर पूरामुफ्ती थाने का हिस्ट्रीशीटर है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार को पुलिस को सूचना मिली कि मोहम्मद मुज़फ्फर एक निकाह में शामिल होने जा रहा है। यह निकाह डॉक्टर शफकत की बेटी का था, जो कि प्रयागराज के बमरौली मोड़ के पास प्रयाग गार्डेन में हो रहा था। डॉक्टर शफकत आरोपित मोहम्मद मुज़फ्फर के दोस्त बताए जा रहे हैं। मुज़फ्फर को पुलिस के आने की पहले से ही भनक लग चुकी थी। उसने मौके से फरार होने के लिए बुर्का पहन लिया और भागने की फ़िराक में था। हालाँकि, पुलिस टीम ने मुज़फ्फर को पहचान लिया और उसे गिरफ्तार कर लिया।

मोहम्मद मुज़फ्फर को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की खबर सुनकर उसके समर्थक बमरौली पुलिस चौकी पर जमा होने लगे। उन्होंने वहाँ हंगामा भी किया। मुज़फ्फर की बीवी ने भी हाईकोर्ट में अपने पति की गिरफ्तारी के बाद किसी अनहोनी की आशंका का प्रार्थना पत्र दे दिया। आख़िरकार रविवार (15 अक्टूबर 2023) को पुलिस ने मोहम्मद मुज़फ्फर को कोर्ट में पेश किया। यहाँ से उसे जेल भेज दिया गया है। मोहम्मद मुज़फ्फर फिलहाल प्रयागराज के ही कौड़िहार ब्लॉक का ब्लॉक प्रमुख है।

जिस केस में मोहम्मद मुज़फ्फर की गिरफ्तारी हुई है, वो 11 मई 2023 को प्रयागराज के ही थाना सोरांव में दर्ज हुआ था। यह केस खुद पुलिस द्वारा दर्ज करवाया गया था जिसमें पुलिस ने 16 गोवंश से लदी एक ट्रक सड़क के किनारे खराब हालत में बरामद की थी। इसमें से 8 गोवंश जीवित थे जबकि 8 की मौत हो गई थी। मृत गोवंश के शरीर पर खरोंच के निशान थे। पुलिस ने इस मामले में अज्ञात ट्रक मालिक के साथ 2 अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली थी। यह FIR IPC 429 के साथ गोहत्या निवारण अधिनियम और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत दर्ज हुई थी।

बताया जा रहा है कि जाँच के दौरान पुलिस को इस मामले में मोहम्मद मुज़फ्फर की संलिप्तता मिली। तब से मुज़फ्फर फरार चल रहा था। आखिरकार रविवार को उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। मुज़फ्फर पर प्रयागराज, चंदौली, वाराणसी, भदोही और कौशाम्बी आदि जिले मिला कर लगभग 34 केस दर्ज हैं। प्रशासन ने मुज़फ्फर की कई बेनामी सम्पत्तियों का भी पता लगाया है। नवम्बर 2022 में मोहम्मद मुज़फ्फर की 10 करोड़ की सम्पत्ति भी कुर्क की गई थी।

हमास के साथ-साथ हिजबुल्ला के ठिकानों पर भी इजरायल का हमला, एकजुटता दिखाने के लिए इजरायल पहुँच रहे अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन, विदेश मंत्री वहीं मौजूद

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन बुधवार (18 अक्टूबर, 2023) को इज़राइल का दौरा करेंगे। पहले से वहाँ मौजूद अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के मुताबिक, राष्ट्रपति जो बायडेन इज़राइल इस क्षेत्र और दुनिया के लिए एक अहम पल में यहाँ आ रहे हैं।

वो इज़राइल के साथ खड़े होने उसके समर्थन की प्रतिबद्धता को दोहराएँगे। इस दौरान अमेरिका और इज़राइल एक ऐसी योजना बनाने पर राजी हुए हैं जो गाजा में मानवीय मदद पहुँचा सके। वहीं दूसरी तरफ इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) लेबनान में मंगलवार (17 अक्टूबर, 2023) सुबह से ही हिजबुल्लाह आतंकवादी ठिकानों पर हमला कर रही है।

अपने दौरे को लेकर राष्ट्रपति बायडेन ने पोस्ट किया, “बुधवार को मैं हमास के क्रूर आतंकवादी हमले के सामने एकजुटता दिखाने के लिए इज़रायल की यात्रा करूँगा। फिर मैं गंभीर मानवीय जरूरतों को लेकर जॉर्डन की यात्रा करूँगा, नेताओं से मिलूँगा और साफ करूँगा कि हमास फिलिस्तीनियों की आज़ादी के हक के लिए नहीं लड़ रहा है।”

रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल में हमास के हमलों में बीच अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को बंकर में जाकर छुपना पड़ा। इजरायली रक्षा मंत्रालय के एक कमांड सेंटर में सोमवार (16 अक्टूबर, 2023) को इन दोनों के बीच बैठक चल रही थी।

इस दौरान रॉकेट हमले का सायरन बज उठा और इनको बंकर में जाना पड़ा। इजरायल में मौजूद अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकन ने अमेरिकी राष्ट्रपति बायडेन के दौरे को लेकर कहा कि वो दोबारा से इजरायल के पक्ष में अपना रुख साफ करेंगे।

वैसे ही जैसे उन्होंने हमास के हमले में कम से कम 30 अमेरिकियों सहित 1400 से अधिक लोगों की हत्या के बाद साफ किया था। इस हमले को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ किया था कि वास्तव में इज़रायल के पास हमास और अन्य आतंकवादियों से अपने लोगों की रक्षा करने और भविष्य के हमलों को रोकने का अधिकार और कर्तव्य है।

अपने दौरे में राष्ट्रपति बायडेन इजरायल के इस संकट का फायदा उठाकर उस पर हमला करने की कोशिश करने वाले दुनिया के किसी भी शख्स, राज्य या गैर-राज्य के लिए हमारा साफ संदेश देंगे कि ऐसा करने की कतई कोशिश न करें।

अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकन ने कहा, “हमास से बंधकों की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रपति हमारे इजरायली भागीदारों के साथ करीबी समन्वय करना जारी रखेंगे। संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल एक ऐसी योजना बनाने पर राजी हुए हैं जो कई देशों और बहुपक्षीय संगठनों द्वारा भेजी जा रही मानवीय मदद को गाजा में नागरिकों तक पहुँचाने में सक्षम बनाएगी।”

एक तरफ अमेरिकी विदेश मंत्री इजरायल में ही हैं, वहीं दूसरी तरफ इजरायली फोर्स आईडीएफ केवल गाजा में सुन्नी आतंकी संगठन हमास पर ही नहीं बल्कि लेबनान के आतंकी संगठन हिजबुल्लाह के ठिकानों पर भी हमला कर रही है। हमास की तरफदारी में ये संगठन इजरायल पर हमला कर रहा है।

IDF को लेबनान की सीमा पर मेटुला शहर की ओर गोलीबारी के रिपोर्ट मिली है। गौरतलब है कि शिया आतंकी संगठन हिजबुल्लाह और हमास दोनों ही का एक ही मकसद इजरायल के खात्मे का है। इन दोनों ही आंतकी संगठन हमास और हिजबुल्लाह के अमेरिका ने आतंकी संगठन होने का ऐलान किया है।

हरामी महुआ: सस्ती भी है, चढ़ती भी मस्त है, फर्र-फर्र अंग्रेजी निकालती है!

तू है मेरी दुल्हन, आज होगा मिलन… मेरी महुआ, ओ मेरी जाना!

मोहम्मद रफी ने जब ये गाना गाया होगा, शायद महुआ की गिरफ्त में होंगे। जिस सुर-तान-दर्द के साथ हर शब्द निकला है, वो बिन महुआ संभव नहीं। महुआ ही जीवन है, महुआ ही प्रेमी भी और प्रेमिका भी… इस गीत ने पूरी दुनिया को बता दिया था। इसके मर्म को जानने-समझने वालों में मैं भी एक था।

झारखंड में पला-बढ़ा। टाटा-रांची जैसे शहरों में नहीं। जंगलों से घिरे गाँव में। इसके अपने नफा-नुकसान रहे। बाल जब पक कर सफेद हो गए हैं तो नुकसान की बात कर जिंदगी को और तकलीफ क्यों देना! इसलिए आज बात खुशियों की। जिंदगी जीने की। आज बात महुआ की।

महुआ से मेरी दोस्ती हाई स्कूल के दिनों में हो गई थी। गजब का मोहपाश था उसका। बिन डोर खींचा चला जाता था मैं उसकी ओर। उसकी मादकता मेरे नथुनों में उतरती चली जाती थी और मैं उसकी आगोश में खुद को ढीला कर सिमट जाता था।

जंगलों के बीच झारखंड के गिरिडीह में जिंदगी मजे में कट रही थी। महुआ के साथ मेरा प्यार परवान चढ़ रहा था। किसी की नजर लग गई लेकिन। एक हरामखोर (मतलब नॉटी) से जीवन में पाला पड़ गया। ज्ञान मिला कि पापी पेट के लिए लंबी पढ़ाई जरूरी है। महुआ का साथ छूट गया।

हरे-भरे जंगलों से निकल मॉल, फ्लाईओवर, कॉन्क्रिट वाले जंगल में आ गया। लोगबाग इसे दिल्ली कहते हैं। शरीर ने तो इस शहर को अपना लिया लेकिन मन महुआ के लिए हमेशा बेचैन रहा। इस बेचैनी को आप ऐसे समझ सकते हैं कि फर्र-फर्र अंग्रेजी वाली कॉल सेंटर के जॉब का इंटरव्यू मैंने महुआ के आगोश में ही दिया था, फ्लाइंग कलर्स (मतलब गर्दा उड़ाके) के साथ पास हुआ था मैं।

सुना है दिल्ली दिलवालों की है! स्कॉच, व्हिस्की, बीयर, वाइन, रम, जिन, वोडका… क्या-क्या नहीं मिलता है यहाँ। पब-बार में बैठ पंजाबी-अंग्रेजी-बॉलीवुड के तड़कते-भड़कते संगीत के साथ गटकने वालों की भीड़ देखते बनती है। क्या कोई भी लेकिन महुआ को टक्कर दे सकता है?

‘स्कूल के टेम पे, आना गोरी डेम पे’ और ‘मोर 18 साल होई गेलक रे, मोर शादी कराय दे, मोर जोड़ी जुमाय दे’ बैकग्राउंड में बज रहा हो, हाथ में सखुआ के पत्तों से बने दोने में महुआ हो, चखने में टंगरी कबाब या रोस्टेड चिकेन की जगह कच्चा प्याज-हरी मिर्च-उबले चने का मिक्स्चर हो, प्याज की पकौड़ी हो… इससे आगे अब लिखा नहीं जा रहा! अफसोस कि महुआ से मिलने की बेचैनी पर अब किसी कुमार कवि को विश्वास ही नहीं। कोई लिख दे तो गाने वाला कोई रफी नहीं। सब लगे पड़े हैं पंजाबी ‘दारू विच प्यार मिला दे’ के पीछे।

झारखंड के मेरे सब दोस्त भी घर-गृहस्थी में बिजी हैं। पहले वाली बात नहीं रही कि कोई आ रहा हो दिल्ली तो ले आया, मन को तर कर लिया! अब बस तरसता रहता हूँ। यहाँ के दोस्त-यार तरस खाकर कहीं-कहीं से जुगाड़ कर महुआ लाते हैं, ब्रांडेड बोतल वाली। उनका दिल रखने को पी तो लेता हूँ लेकिन जो महुआ ब्रांड में लिपट गई, ब्रांड पर बिक गई, वो हरामी हो गई… ऐसा मेरा मानना है।

हरामी तो हालाँकि वो महुआ भी हो गई मेरे लिए, जिसका साथ छूट गया। वो गले से उतर दिल में समा जाती थी। अब मैं उसका बस दिलजला आशिक रह गया हूँ, दिल्ली की सड़कों पर आरोप लगाता हुआ, गुनगुनाता हुआ। महुआ की बेवफाई पर रफी ने भी गाया था, पढ़िए और गुनगुनाइए:

तूने मुझसे किया था कभी वादा
मेरी ताल पे तू दौड़ी चली आएगी
कैसा बंधन है, प्यार का ये बंधन
इसे छोड़ के तू कभी नहीं जाएगी
क्या यही है वफ़ा, मुझे ये तो बता
मेरी महुआ, वो तेरे वादे क्या हुए

सेम सेक्स में शादी कानूनी नहीं, बच्चे गोद नहीं ले सकेंगे समलैंगिक: सुप्रीम कोर्ट, सरकार और पुलिस को भेदभाव नहीं करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक विवाह पर आज मंगलवार (17 अक्टूबर 2023) को अपना-अपना फैसला पढ़ा है। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने साथ रहने वाले LGBTQ जोड़ों को परिवार के रूप में राशन कार्ड देने सहित तमाम सुविधाओं पर विचार करने के लिए एक कमिटी गठित करने के लिए कहा है। CJI ने LGBTQ के अधिकारों की वकालत की। वहीं, बेंच के सदस्य रवींद्र भट्ट ने असहमति जाहिर की। हालाँकि, कोर्ट के 3-5 सदस्य ने इस समुदाय को शादी की मान्यता देने से इनकार दिया। वहीं, इस समुदाय के लोग बच्चों को गोद भी नहीं ले सकेंगे।

CJI ने कहा कि कोर्ट स्पेशल मैरिज ऐक्ट के प्रावधानों को रद्द नहीं कर सकती। यह संसद का काम है। समलैंगिक समुदाय की शादी की मान्यता देने का काम संसद पर छोड़ दिया। हालाँकि भेदभाव रोकने के लिए समलैंगिक समुदाय के लोगों के लिए कोर्ट ने पुलिस को कुछ दिशा-निर्देश भी दिए। इसके साथ ही उन्हें विभिन्न लाभ देने के लिए एक समिति गठित करने के लिए भी कहा।

बेंच के जजों ने बंटा हुआ फैसला दिया। समलैंगिक जोड़े द्वारा बच्चे को गोद का अधिकार CJI ने दिया, लेकिन अधिकांश जज ने इससे असहमति जाहिर की। पाँच जजों की बेंच में जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस नरसिम्हा ने जस्टिस रवींद्र भट्ट के फैसले से सहमति जताई है। अपने फैसले में हिमा कोहली ने सिर्फ जस्टिस भट्ट से सहमति जाहिर की। जस्टिस ने भट्ट ने शादी को मौलिक अधिकार नहीं माना। उन्होंने कहा कि अगर साथ रहना चाहता है तो रह सकता है।

फैसला पढ़ने के दौरान मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा, “विवाह करने के अधिकार को यौन रुझान के आधार पर प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता। उनके इस तरह के अधिकारों की सरकार द्वारा विफलता भेदभाव की तरह है।” उन्होंने कहा, “Queer व्यक्तियों सहित सभी को अपने जीवन की नैतिक गुणवत्ता का आकलन करने का अधिकार है। स्वतंत्रता का अर्थ है वह बनने की क्षमता, जो कोई व्यक्ति बनना चाहता है।”

LGBTQ के पक्ष में तर्क देते हुए CJI चंद्रचूड़ ने आगे कहा, “अदालत ने माना है कि समलैंगिक व्यक्तियों के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता है। विषमलैंगिक जोड़ों को मिलने वाले भौतिक लाभ और सेवाएँ से समलैंगिक जोड़ों को वंचित करना उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन होगा। कानून यह नहीं मान सकता कि केवल विषमलैंगिक जोड़े ही अच्छे माता-पिता हो सकते हैं। इसलिए गोद लेने के नियम समलैंगिक जोड़ों के खिलाफ भेदभाव के लिए संविधान का उल्लंघन हैं।”

दरअसल, समलैंगिक विवाह का विरोध करते हुए केंद्र सरकार ने तर्क दिया था कि यह शहरी अभिजात्य वर्ग का चोंचला है। इस देखते हुए जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि यह सिर्फ शहरी अभिजात वर्ग का मसला नहीं है। यह गाँव के खेतों में काम करने वाली एक महिला से भी संबंधित है। उन्होंने कहा कि शहरों में रहने वाले सभी लोगों को एलिट नहीं कहा जाता है।

इस दौरान सीजेआई ने स्पेशल मैरिज ऐक्ट का भी जिक्र किया। इसी ऐक्ट में संशोधन को LGBTQ की शादी को मान्यता देने की बात कही गई थी। इसको लेकर CJI ने कहा, “यह संसद को तय करना है कि विशेष विवाह अधिनियम की व्यवस्था में बदलाव की आवश्यकता है या नहीं। विवाह के अधिकार में अपना साथी चुनने का भी अधिकार है।”

LGBTQ समुदाय को राहत देते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “केवल यौन पहचान के बारे में पूछताछ करने के लिए समलैंगिक समुदाय के लोगों को पुलिस स्टेशन में बुलाकर कोई उत्पीड़न नहीं किया जाएगा।” उन्होंने कहा, “पुलिस को समलैंगिक व्यक्तियों को अपने मूल परिवार में लौटने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए। पुलिस को एक समलैंगिक जोड़े के खिलाफ उनके रिश्ते को लेकर एफआईआर दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जाँच करनी चाहिए।”

CJI ने आगे कहा, “विषमलैंगिक संबंधों में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को पर्सनल लॉ सहित मौजूदा कानूनों के तहत शादी करने का अधिकार है। समलैंगिक जोड़े सहित अविवाहित जोड़े संयुक्त रूप से एक बच्चे को गोद ले सकते हैं।” इनके अधिकारों के बारे में बात करते हुए सीजेआई ने कमिटी की भी बात कही।

उन्होंने कहा, “हम सॉलिसिटर जनरल के बयान को रिकॉर्ड करते हैं कि केंद्र सरकार साथ रहने वाले समलैंगिकों के अधिकारों और हकदारियों को तय करने के लिए एक समिति का गठन करेगी। समिति निम्नलिखित पर विचार करेगी – राशन कार्डों में समलैंगिक जोड़ों को परिवार के रूप में शामिल करना, समलैंगिक जोड़ों को संयुक्त बैंक खाते के लिए नामांकन करने में सक्षम बनाना, पेंशन, ग्रेच्युटी आदि से मिलने वाले अधिकार।”

सीजेआई की बात को आगे बढ़ाते हुए जस्टिस कौल ने कहा, “प्राचीन काल से ही समान-लिंग संबंधों को न केवल यौन गतिविधियों के लिए बल्कि भावनात्मक संतुष्टि के लिए संबंधों के रूप में मान्यता दी गई है… मैंने कुछ सूफी परंपराओं का उल्लेख किया है…।” उन्होंने शीर्ष न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ से भी अपनी सहमति जताई।

वहीं, जस्टिस भट्ट ने CJI से अपनी असहमति जताई। जस्टिस रविंद्र भट्ट ने कहा, “अदालत मानती है कि शादी सामाजिक घटना है। एक संस्था के रूप में विवाह राष्ट्र से पहले है। इसका मतलब यह है कि विवाह की संरचना सरकार से पहले है। विवाह की शर्तें सरकार की शर्तों से परे हैं।”

दरअसल, 11 मई 2023 को सुनवाई के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके पहले सर्वोच्च न्यायालय ने लगातार 10 दिनों तक सुनवाई की थी। इस मामले में सामाजिक संगठनों और LGBTQ समुदाय के लोगों ने याचिका दाखिल की थी। इस याचिका पर केंद्र सरकार के साथ-साथ सभी राज्य सरकारों को पक्ष बनाया गया था।

पाँच न्यायाधीशों वाली इस पीठ में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के अलावा न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट्ट, न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा शामिल हैं। सामाजिक संगठन LGBTQ समुदाय में आपसी विवाद की माँग का विरोध कर रहे हैं।