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फिलिस्तीन के राष्ट्रपति ने 8 दिन बाद की इजरायल पर हमास के हमलों की आलोचना, पर कुछ ही घंटों में सरकारी मीडिया ने हटाई टिप्पणी

फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने इस्लामी आतंकी संगठन हमास के इजरायल पर हमले की आलोचना की है। वेनेजुएला के राष्ट्रपति के साथ फ़ोन पर बातचीत में महमूद अब्बास ने कहा कि हमास की कार्यवाही फिलिस्तीनियों का प्रतिनिधित्व नहीं करती है।

दरअसल, फ़िलिस्तीनी राष्ट्रीय प्राधिकरण के अध्यक्ष महमूद अब्बास द्वारा इज़राइल पर आतंकी हमले के लिए हमास की निंदा करने के कुछ घंटों बाद ही इसकी आधिकारिक समाचार एजेंसी WAFA (विकलात अल-अनबा अल-फिलास्टिनिजा) ने रविवार (15 अक्टूबर, 2023) को इस्लामी आतंकवादी संगठन हमास के बारे में उनकी टिप्पणियों को हटा दिया। 

रिपोर्ट के अनुसार, अपने वेनेजुएला समकक्ष निकोलस मादुरो के साथ टेलीफोन पर बातचीत के दौरान अब्बास ने कहा कि हमास फिलिस्तीनियों का प्रतिनिधित्व नहीं करता है और फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (पीएलओ) फिलिस्तीनी लोगों का एकमात्र प्रतिनिधि है।

उन्होंने दोनों पक्षों के नागरिकों की हत्या की भी निंदा की और कैदियों और बंदियों की रिहाई की माँग की। WAFA ने मूल रूप से रिपोर्ट किया था, “राष्ट्रपति ने इस बात पर भी जोर दिया कि हमास की नीतियाँ और कार्य फ़िलिस्तीनी लोगों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं, और फ़िलिस्तीन मुक्ति संगठन की नीतियाँ, कार्यक्रम और निर्णय फ़िलिस्तीनी लोगों का एकमात्र वैध प्रतिनिधि के रूप में हैं।”

हालाँकि, कुछ घंटों के भीतर, फिलिस्तीनी राष्ट्रीय प्राधिकरण की आधिकारिक समाचार एजेंसी ने हमास के संदर्भ हटा दिए

मूल रिपोर्ट को एडिट किया गया था, राष्ट्रपति ने इस बात पर भी जोर दिया कि पीएलओ की नीतियाँ, कार्यक्रम और निर्णय फिलिस्तीनी लोगों को उनके एकमात्र वैध प्रतिनिधि के रूप में दर्शाते हैं, न कि किसी अन्य संगठन की नीतियों को।

वहीं WAFA ने अपने निर्णय के लिए कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। बता दें कि फ़िलिस्तीनी राष्ट्रीय प्राधिकरण की स्थापना 1994 में हुई थी और यह वेस्ट बैंक क्षेत्र में एक स्वशासी निकाय है। 2007 में गाजा पर आतंकी संगठन के नियंत्रण के बाद से इसके राष्ट्रपति महमूद अब्बास हमास के विरोधी रहे हैं।

इजराइल-हमास युद्ध

बता दें कि 7 अक्टूबर को, हमास के सैकड़ों आतंकवादियों ने विभिन्न माध्यमों से इज़राइल में घुसपैठ की, और कुछ ही मिनटों में आयरन डोम पर 5,000 रॉकेटों से हमला कर दिया। उन्होंने कई आम इजरायली नागरिकों का भी अपहरण कर लिया और उन्हें गाजा ले गए।

वहीं इज़रायल-हमास युद्ध के बीच इज़रायली सेना द्वारा हमास पर जवाबी हमले में कथित तौर पर 1,500 से अधिक हमास आतंकवादी मारे गए हैं। हमास आतंकवादियों की तलाश करते समय, आईडीएफ ने कहा कि वह बंधकों की भी तलाश कर रहा था।

हमास के हमले में इज़राइल में मरने वालों की संख्या अब 1,300 से अधिक हो गई है,  3,300 से अधिक घायल हुए हैं, जिनमें मुख्य रूप से आम नागरिक शामिल हैं। हमास द्वारा आतंकी हमले के जवाब में इज़राइल ने गाजा में हमास के खिलाफ एक बड़ा हमला किया, बिजली और पानी की आपूर्ति को प्रतिबंधित कर दिया और क्षेत्र में आवश्यक वस्तुओं के प्रवेश को रोक दिया।

इस बीच, भारत ने ऑपरेशन अजय लॉन्च किया है और अब तक 918 भारतीय नागरिकों को इज़राइल से सुरक्षित निकाल लिया है।

राजदीप सरदेसाई भारत के लिए क्रिकेट खेले अपने पिताजी से जो ज्ञान नहीं ले पाए, ‘जय श्रीराम’ मामले पर पूर्व टेस्ट क्रिकेटर ने ढंग से समझाया

भारत-पाकिस्तान के विश्व कप मुकाबले में अहमदाबाद के क्रिकेट स्टेडियम में ‘जय श्री राम’ का नारा लगाया गया। जिसे लेकर वामपंथी भड़के हुए हैं। इसी मामले में राजदीप सरदेसाई ने इसे आक्रामक नारा बताते हुए एक पोस्ट किया। जिस पर पूर्व भारतीय क्रिकेटर लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने राजदीप सरदेसाई की जमकर क्लास ली। काश राजदीप अपने क्रिकेटर पिता से थोड़ा ज्ञान ले लिए होते तो उन्हें आज जय श्री राम में आक्रामकता नहीं बल्कि आस्था और जीत का उद्घोष दिखाई देता। 

अक्सर विवादों में घिरे टीवी पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने पोस्ट किया कि किसी को पाकिस्तानी खिलाड़ियों का मजाक उड़ाने के लिए आक्रामक नारे के रूप में ‘जय श्री राम’ का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं, जो ज्ञान लाते हैं, शत्रुता पैदा नहीं करते हैं।

हालाँकि, भारतियों के लिए ऐसी टिप्पणी और ‘जय श्री राम’ का इस तरह से वर्णन पूर्व भारतीय क्रिकेटर लक्ष्मण शिवरामकृष्णन को पसंद नहीं आया, उन्होंने 16 साल के लड़के के रूप में पाकिस्तान में उनके साथ हुए दुर्व्यवहार को उजागर करते हुए राजदीप सरदेसाई को मुँह बंद करने को कहा।

शिवरामकृष्णन ने पोस्ट किया,  “16 साल की उम्र में मुझे पाकिस्तान में कैसी-कैसी गालियाँ मिलीं, यह केवल मैं ही जानता हूँ। मेरे रंग से लेकर मेरे धर्म से लेकर मेरे देश और संस्कृति तक। भगवान के लिए यदि आपने इसका अनुभव नहीं किया है, तो कृपया इसके बारे में बात न करें।”

‘जय श्री राम’ को बदनाम करने वाला राजदीप का ट्वीट वामपंथी गिरोह द्वारा अहमदाबाद स्टेडियम में नारे लगाने, अपने समर्थकों के बीच हिंदू विरोधी कट्टरता को बढ़ावा देने और पाकिस्तानियों को इसके शिकार के रूप में पेश करने के एक हथकंडा जैसा है। 

पाकिस्तानी क्रिकेटरों की धार्मिक कट्टरता के विपरीत, ‘जय श्री राम’ के नारे विजय के नारे हैं। वे भगवान राम की महिमा का बखान है और जो किसी अन्य आस्था को खारिज या अपमानित नहीं करते हैं। फिर भी, राजदीप सरदेसाई और उन जैसे कई लोग इसे पाकिस्तानियों का मज़ाक उड़ाने के आक्रामक नारे के रूप में पेश करने की कोशिश करते हैं।

इस तरह से वामपंथी आसानी से इस तथ्य पर पर्दा डाल देते हैं कि पाकिस्तानी क्रिकेटर कट्टरपंथी हैं, जो गैर-मुस्लिमों और उनकी मान्यताओं के प्रति अपनी भड़ास और तिरस्कार को छिपाने का बहुत कम प्रयास करते हैं। इमरान खान ने एक बार कहा था कि भारत के खिलाफ क्रिकेट खेलना उनके लिए ‘जिहाद’ जैसा है। वकार यूनिस ने पिछले साल गर्व से दावा किया था कि रिजवान द्वारा 80,000 से अधिक ‘गैर-मुसलमानों’ के सामने नमाज अदा करने पर उन्हें खुशी महसूस हुई थी।

शोएब अख्तर ने ‘ग़ज़वा-ए-हिंद’ की इस्लामी सर्वोच्चतावादी कल्पना का समर्थन किया था। फिर भी, भारतीय वामपंथी चाहते हैं कि भारतीय इन अपमानों और खुले तौर पर धार्मिक आक्षेपों को सहें, न कि अपने देवताओं में अपनी आस्था की पुष्टि करके कट्टरपंथियों को जवाब दें।

नरेंद्र मोदी स्टेडियम ‘जय श्री राम’ के नारों से गूँज उठा

बता दें कि जैसे ही भारत ने अपने चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान पर शानदार जीत दर्ज की, नरेंद्र मोदी स्टेडियम में भारतीय प्रशंसकों द्वारा पाकिस्तानी विकेटकीपर मुहम्मद रिज़वान का ‘जय श्री राम’ के नारे के साथ स्वागत करने का एक वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया।

वीडियो में, जैसे ही रिज़वान भारतीय शीर्ष गेंदबाज जसप्रित बुमरा की एक गेंद पर बोल्ड होने के बाद पवेलियन की ओर बढ़ता है, सीढ़ियों पर खड़ी भारतीय समर्थकों की भीड़ ‘जय श्री राम’ के नारे लगाती है।

गौरतलब है कि हमास के आतंकी हमलों में 1,300 से अधिक इजरायलियों के मारे जाने के बाद श्रीलंका के खिलाफ जीत को गाजा निवासियों को समर्पित करते हुए रिजवान ने अपने हालिया ट्वीट से काफी हलचल मचा दी थी। तब राजदीप जैसे किसी वामपंथी ने आतंकियों के समर्थन पर कोई कोई टिप्पणी नहीं की थी। उन्हें यहाँ कोई आक्रामकता नजर नहीं आई थी। 

‘कोर्ट न्याय का मंदिर, पर जज नहीं होते भगवान’: हाथ जोड़े-आँखों में आँसू लिए बोल रही महिला से केरल हाई कोर्ट ने कहा- विशेष सम्मान नहीं चाहिए

जज कोई भगवान नहीं हैं। वह बस अपने संवैधानिक उत्तरदायित्वों का पालन कर रहे हैं। इसलिए याचिकाकर्ताओं या वकीलों को उनके सामने हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाना नहीं चाहिए। केरल हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। दरअसल, जस्टिस पीवी कुन्हीकृष्णन (PV Kunhikrishnan) एक मामले की सुनवाई कर रहे थे इसी दौरान एक महिला याचिकाकर्ता हाथ जोड़कर उनके सामने गुहार लगाने लगीं और रोने लगीं। इसी दौरान जस्टिस कुन्हीकृष्णन ने यह टिप्पणी की। 

रमला कबीर बनाम केरल राज्य के एक मामले में सुनवाई के समय न्यायमूर्ति पीवी कुन्हिकृष्णन ने यह टिप्पणी तब की जब एक याचिकर्ता महिला ने हाथ जोड़कर और आँखों में आँसू लिए गिड़गिड़ाने लगीं।

न्यायमूर्ति कुन्हिकृष्णन ने कहा कि भले ही अदालत को न्याय के मंदिर के रूप में जाना जाता है, लेकिन पीठ में ऐसे कोई भगवान नहीं हैं जिन्हें मर्यादा बनाए रखने के अलावा वकीलों या वादियों से किसी भी तरह की ऐसी आवश्यकता हो। न्यायाधीश सिर्फ अपने संवैधानिक कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं और वादियों या वकीलों को अदालत के सामने हाथ जोड़कर बहस करने की आवश्यकता नहीं है। 

जस्टिस जस्टिस पीवी कुन्हीकृष्णन ने कहा, ”सबसे पहले मैं कहना चाहता हूँ कि किसी याचिकाकर्ता या वकील को हाथ जोड़कर गुहार लगाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि जज अपनी संवैधानिक ड्यूटी निभा रहे हैं। आमतौर पर हम अदालत को न्याय का मंदिर कहते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि जज की कुर्सी पर कोई भगवान बैठा है। याचिकाकर्ता या वकील सामान्य शिष्टाचार बरतें, बस इतना ही काफी है। हाथ जोड़ गिड़गिड़ाने की कोई आवश्यता नहीं है।”

क्या है पूरा मामला?

रमला कबीर (Ramla Kabeer) नाम की एक महिला ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और अपने खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की माँग की थी। कबीर पर आरोप है कि उन्होंने आलाप्पुड़ा (उत्तरी) के सर्किल ऑफिसर को फोन पर धमकी दी और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। सुनवाई के दौरान कबीर ने कहा कि उन पर झूठे आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने खुद एक शिकायत दर्ज कराई थी। जिसमें एक प्रार्थना सभा में शोर-शराबे की शिकायत की थी। सर्किल ऑफिसर को इसकी जाँच करने का निर्देश दिया गया था। कबीर का कहना है कि जब मैंने उनसे जाँच की प्रगति जाननी चाहिए तो उन्होंने मुझसे फोन पर अभद्रता की। 

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में वादी, रामला कबीर, धारा 294(बी) (सार्वजनिक स्थान पर या उसके निकट अश्लील गीत या शब्द गाना, सुनाना, या बोलना) के तहत दंडनीय अपराध का आरोप लगाते हुए अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए व्यक्तिगत रूप से अदालत के समक्ष उपस्थित थीं।  

फिर उसने सर्कल इंस्पेक्टर के आचरण के खिलाफ पुलिस शिकायत प्राधिकरण के साथ-साथ पुलिस महानिरीक्षक के समक्ष भी शिकायत दर्ज की। उन्होंने अदालत को बताया कि उसके खिलाफ मामला सर्कल इंस्पेक्टर द्वारा दायर एक जवाबी मामला था।

गौरतलब है कि दलीलें सुनने और अंतिम रिपोर्ट देखने के बाद, अदालत ने प्रथम दृष्टया यह माना कि कथित अपराध नहीं बने थे। इसलिए, कोर्ट ने रमला कबीर के खिलाफ दायर मामला रद्द कर दिया। अदालत ने यह भी कहा कि एफआईआर कबीर द्वारा दायर शिकायत का प्रतिकार थी और इसलिए, सर्कल इंस्पेक्टर के खिलाफ विभागीय जाँच का आदेश दिया गया।

‘…पूरी दुनिया आ जाएगी युद्ध की चपेट में’: खुल कर फिलिस्तीन के समर्थन में उतरा जमीयत, बोले मौलाना मदनी – कब्जा करने वाला देश है इजरायल

इजरायल और फिलिस्तीन के बीच युद्ध चल रहा है गाजा में घुसने के लिए इजरायल की सेना तैयार है। इस दौरान एक नया वीडियो भी सामने आया है, जिसमें बताया गया है कि कैसे 7 अक्टूबर को किब्बुत्ज़ में हमास के आतंकियों ने नरसंहार किया। इस दौरान उन्होंने एक एम्बुलेंस पर भी गोलीबारी की। इस दौरान घर-घर घुस कर नागरिकों पर गोलीबारी की गई। हाल की बात करें तो हमास आतंकियों से बड़ी मात्रा में हथियार बरामद किए गए हैं, जिनमें कई अत्याधुनिक है।

इन सबके बीच भारत के इस्लामी संगठन भी फिलिस्तीन के समर्थन में उतर रहे हैं। जमीयत उलेमा-ए-हिन्द (AM समूह) ने गाजा पर आतंकियों के हमले की निंदा की है। संगठन ने कहा कि तुरंत ही इस संघर्ष को खत्म करने की माँग की और कहा कि संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक ही इस मुद्दे का हल निकाला जा सकता है। भारत ने भी खुल कर कहा है कि हमास ने इजरायल पर आतंकी हमला किया है। जमीयत ने अपनी कार्यसमिति की बैठक ‘न्यायप्रिय अंतरराष्ट्रीय संस्थानों’ से अपील की है कि इसमें हस्तक्षेप किया जाए।

जमीयत के अध्यक्ष और और ‘मुस्लिम वर्ल्ड लीग’ के संस्थापक सदस्य मौलाना अरशद मदनी ने कहा है कि जमीयत हमेशा से फिलिस्तीन के ‘संघर्ष’ का समर्थन रहा है। उन्होंने इजरायल को कब्ज़ा करने वाला देश बताते हुए कहा कि कुछ ताकतों की मदद से फिलिस्तीन की भूमि पर उसने कब्ज़ा कर रखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि फिलिस्तीनी नागरिकों का अस्तित्व इजरायल समाप्त करना चाहता है। मदनी ने इजरायल की सेना को आक्रामक, बर्बर और अत्याचारी करार दिया।

बता दें कि कोलकाता में जमीयत ने फिलिस्तीन के समर्थन में मार्च भी निकाला, जिसकी VHP ने निंदा की। उधर मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि अगर संघर्ष रोका नहीं गया तो युद्ध का दायरा बढ़ सकता है और पूरी दुनिया इसकी चपेट में आ सकती है। उन्होंने फिलिस्तीन की जनता को इजरायल के नाजायज कब्जे और क्रूरता का शिकार बता दिया। उन्होंने फिलिस्तीन की जनता को ‘मातृभूमि के साथ संघर्ष करने वाला’ बताया और कहा कि इजरायल उन पर कहर बरपा रहा है।

लगातार दूसरे दिन ‘वन्दे भारत’ ट्रेन पर पत्थरबाजी, उज्जैन में एक ही जगह बनाया गया निशाना: काँच टूटने से सहमे यात्री

भारतीय रेलवे की ‘वन्दे भारत’ एक्सप्रेस ट्रेनों पर पत्थरबाजी की घटनाएँ अब भी नहीं थम रही हैं। अब मध्य प्रदेश के उज्जैन में ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस ट्रेन’ पर पत्थरबाजी हुई है। बताया जा रहा है कि ये पत्थर एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा फेंका गया। पत्थरबाजी में ट्रेन की खिड़की का काँच टूट गया, जिसकी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर सामने आई हैं। जब शीशा टूटा उस समय कई यात्री ट्रेन के अंदर मौजूद थे। अचानक हुई इस घटना से अचानक उनमें डर का माहौल व्याप्त हो गया।

उक्त घटना चिंतामन स्टेशन व उज्जैन के बीच हुई। बताया जा रहा है कि इससे एक दिन पहले भी इसी तरह की घटना हुई थी, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। RPF (रेलवे प्रोटेक्शन फ़ोर्स) ने इस घटना के संबंध में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज की है। ये ‘वन्दे भारत’ एक्सप्रेस ट्रेन पहले इंदौर से भोपाल तक चलती थी, जिसे अब इंदौर से नागपुर कर दिया गया है। इस घटना से 6 दिन पहले ही ट्रेन के रूट में बदलाव की जानकारी दी गई थी।

लेकिन, लगातार 2 दिन इस पर पत्थरबाजी हुई है। ट्रेन संख्या 20911 को सोमवार (9 अक्टूबर, 2023) से नागपुर तक के लिए बढ़ाया गया है। ये घटना सुबह के साढ़े 6 बजे हुई है। कोच संख्या C6 और C7 को निशाना बनाया गया है। ट्रेन के कर्मचारियों ने RPF पर भी लापरवाही का आरोप लगाया है। हालाँकि, RPF ने आश्वासन दिया है कि सुरक्षा को लेकर अब कड़ाई बरती जाएगी। दोनों दिन एक ही स्थान पर पत्थर फेंके गए हैं।

पहले भी इस ट्रेन को निशाना बनाए जाने की कई घटनाएँ हो चुकी हैं। अगस्त 2023 में मध्य प्रदेश के ही मुरैना जिले में ट्रेन में पथराव करने का एक आरोपित पुलिस के हत्थे चढ़ा था, जिसकी पहचान फिरोज खान के रूप में हुई थी। उसने भोपाल से दिल्ली जाने वाली ‘वन्दे भारत’ एक्सप्रेस पर पथराव किया था। पीएम मोदी द्वारा उद्घाटन के कुछ ही दिन बाद जनवरी 2023 में पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के कुमारगंज के पास अज्ञात लोगों ने ट्रेन पर पत्थर फेंके थे। 

‘इस कारोबारी के इशारों पर काम करती हैं महुआ मोइत्रा’: लोकसभा अध्यक्ष के पास पहुँची TMC सांसद के खिलाफ शिकायत, आरोप – घूस लेकर संसद में पूछती हैं सवाल

लोकसभा में अपने बयानों के कारण अक्सर विवादों में रहने वाली महुआ मोइत्रा पर बड़ा खुलासा हुआ है। महुआ पर आरोप लगे हैं कि वो भले ही TMC की सांसद हैं और कृष्णानगर लोकसभा सीट से जनता द्वारा चुनकर लोकसभा भेजी गई हैं, लेकिन वो पैसों के लिए जनता और राष्ट्र के हित की नहीं बल्कि व्यवसायी दर्शन हीरानंदानी के लिए काम करती हैं। ये आरोप एक मशहूर वकील ने आँकड़ों के साथ लगाए है, जिसपर एक्शन लेने की माँग करते हुए भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा है।

इस मामले में महुआ मोइत्रा ने पलटवार भी किया है और कहा है कि पहले जिन लोगों पर मैंने आरोप लगाए हैं, उनपर कार्रवाई की जाए, फिर मेरे दरवाजे पर आया जाए।

घूस लेकर सवाल पूछना संसद की अवमानना

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लिखे पत्र में सुप्रीम कोर्ट के वकील जय अनंत देहाद्राई का हवाला दिया है। अपने पत्र में भाजपा सांसद ने टीएमसी की सांसद महुआ मोइत्रा पर लोकसभा में सवाल पूछने के नाम पर घूस लेने का आरोप लगाया है। उसे सदन की अवमानना करार देते हुए उन्होंने लिखा कि इसकी तत्काल जाँच कर कार्रवाई की जाए।

‘संसद में सवाल पूछने के लिए लिए पैसे’

निशिकांत दुबे ने अपने पत्र में लिखा है, “मुझे जय अनंत देहाद्राई, अधिवक्ता का एक पत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें उन्होंने महुआ मोइत्रा पर सवाल के बदले रिश्वत लेने का आरोप लगाया है।” बीजेपी सांसद ने पत्र में लिखा है कि एक प्रसिद्ध बिजनेसमैन दर्शन हीरानंदानी के बिजनेस हितों को ध्यान में रखते हुए सवाल पूछे गए। निशिकांत दुबे ने पत्र में लिखा कि महुआ मोइत्रा के हालिया 61 सवालों में से 50 सवाल ऐसे हैं, जो दर्शन हीरानंदानी और उनकी कंपनी के व्यावसायिक हितों की रक्षा करने या उन्हें फायदा पहुँचाने के लिए पूछे गए।

‘सदन में चिल्लाने वाली ब्रिगेड’

निशिकांत दुबे ने आगे कहा, “जब भी संसद सत्र होता है, मोहुआ मोइत्रा और सौगत रॉय किसी न किसी बहाने, हर किसी के साथ दुर्व्यवहार करके सदन की कार्यवाही को बाधित करते हैं। मैं और कई अन्य सांसद हमेशा हैरान रहते थे कि महुआ मोइत्रा के नेतृत्व वाली टीएमसी की ‘चिल्लाने वाली ब्रिगेड’ ऐसी रणनीति क्यों अपनाती है, जो मुद्दों पर बहस करने और चर्चा करने के अन्य सदस्यों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करती है।”

भाजपा सांसद ने कहा कि अब लोकसभा में प्रश्न पूछने के बदले एक व्यवसायी से धन जुटाने और दूसरे व्यावसायिक समूह को निशाना बनाने की महुआ मोइत्रा की मंशा का पर्दाफाश हो गया है।

महुआ मोइत्रा ने किया पलटवार

इस मामले में महुआ मोइत्रा ने प्रतिक्रिया दी है। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने ट्वीट किया, “फर्जी डिग्रीवालों और अन्य बीजेपी दिग्गजों के खिलाफ विशेषाधिकारों के कई उल्लंघन लंबित हैं। स्पीकर द्वारा उनसे निपटने के तुरंत बाद मेरे खिलाफ किसी भी प्रस्ताव का स्वागत है।” उन्होंने आगे लिखा, “मैं अडानी कोयला घोटाले में ईडी और अन्य द्वारा एफआईआर दर्ज करने का भी इंतजार कर रही हूँ।”

कनाडा में आपस में लड़-भिड़े तालिबानी और फिलिस्तीनी, वीडियो आया सामने: प्रदर्शन में शामिल युवती ने हमास की दरिंदगी को बताया जायज 

इजरायल-हमास युद्ध के बीच फिलिस्तीनियों के समर्थन में कनाडा के मिसिसॉगा में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया गया, जिसमें शनिवार (14 अक्टूबर, 2023) को सैकड़ों लोग शामिल हुए। हालाँकि, विरोध में एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब किसी ने तालिबान का झंडा लहराते हुए इसमें शामिल होने का फैसला किया। कई फ़िलिस्तीन समर्थकों ने तालिबान समर्थकों के साथ बहस की और उन्हें यह कहते हुए चले जाने के लिए कहा कि उन्हें विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

जिसका सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो गया है, जिसमें कई लोग जीएमसी ट्रक में दो व्यक्तियों के साथ बहस करते हुए दिखाई दे रहे हैं, दोनों खिड़कियों से तालिबान के झंडे लहरा रहे हैं। जब वे ओंटारियो के मिसिसॉगा में सेलिब्रेशन स्क्वायर पर विरोध मार्च में पहुँचे, तो वे कई फिलिस्तीन समर्थकों से घिरे हुए थे, जिन्होंने उन्हें बताया कि तालिबान समर्थकों को फिलिस्तीन समर्थक विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी।

इस मामले में एक व्यक्ति ने उनसे कहा, “आप अफगानिस्तान में नहीं हैं, आपको ये बात समझनी होगी।” जब फ़िलिस्तीन समर्थक बहस कर रहे थे और उन्हें जाने के लिए कह रहे थे, तो तालिबान समर्थकों ने उनकी आवाज़ को दबाने के स्पष्ट प्रयास में, इंजन को तेज कर दिया। जब उन्होंने आगे बढ़ने की कोशिश की, तो फिलिस्तीन का झंडा लेकर एक महिला विशाल ट्रक के सामने खड़ी हो गई और उन्हें रोक दिया।

वहीं वीडियो रिकॉर्ड कर रहे शख्स ने जब तालिबान समर्थकों से उनकी टिप्पणी माँगी तो उन्होंने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। ड्राइविंग सीट पर बैठे शख्स ने कहा, “मुझे नहीं पता कि क्या कहूँ।”

जबकि इस पूरे टकराव के दौरान, दोनों व्यक्ति अपने गाड़ी की खिड़कियों के बाहर तालिबान के झंडे उठाए हुए थे। बता दें कि फिलिस्तीनी मूल के कनाडाई लोगों से कनाडा का सेलिब्रेशन स्क्वायर खचाखच भरा था और लोग “फ्री फिलिस्तीन” के नारे लगा रहे थे।

गौरतलब है कि मिसिसॉगा में उसी विरोध प्रदर्शन में, एक महिला ने दावा किया कि हमास आतंकवादी संगठन नहीं है, और उन्होंने जो कुछ भी किया है वह जायज है। उन्होंने दावा किया कि हमास द्वारा बच्चों को मारने की खबरें फर्जी हैं। उन्होंने कहा, “हमास एक मुस्लिम समूह है, वे ऐसा कभी नहीं करेंगे।”

इस बीच, गाजा शहर में हमास के ठिकानों पर एक हफ्ते तक बमबारी करने के बाद, इज़राइल रक्षा बलों (आईडीएफ) ने घोषणा की है कि वह गाजा पट्टी में महत्वपूर्ण जमीनी अभियानों की तैयारी पूरी कर लिए हैं। आईडीएफ के अनुसार, वे हमास के आतंक का हवा, जमीन और पानी के रास्ते से मुहतोड़ जवाब देंगे। 

‘आप ये हमें बेचते क्यों नहीं?’: ‘चंद्रयान 3’ वाली तकनीक खरीदना चाहता था अमेरिका, APJ अब्दुल कलाम की 92वीं जयंती पर ISRO प्रमुख का बड़ा खुलासा

हाल ही में मोदी सरकार ने 23 अगस्त को हर साल ‘राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस’ के रूप में मनाए जाने का ऐलान किया, क्योंकि यही वो ऐतिहासिक दिन था जब चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला देश बन कर भारत ने स्पेस के क्षेत्र में एक बड़ी छलाँग लगाई। अब ISRO (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान परिषद) के अध्यक्ष S सोमनाथ ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया है कि अमेरिका चाहता था कि भारत उससे ‘चंद्रयान 3’ की तकनीक साझा करे। उन्होंने भारत की क्षमता की बात करते हुए बताया कि कैसे अब समय बदल चुका है।

इसरो प्रमुख ने कहा कि अमेरिका में बड़े-बड़े रॉकेट मिशनों को अंजाम देने वाले विशेषज्ञों ने जब ‘चंद्रयान 3’ पर भारतीय वैज्ञानिकों को काम करते हुए देखा तो उन्होंने इच्छा जताई कि उनके साथ भी इससे जुड़ी टेक्नोलॉजी शेयर की जाए। एस सोमनाथ ने कहा कि अब समय बदल गया है और भारत सर्वश्रेष्ठ उपकरणों और रॉकेटों के निर्माण में सक्षम है। इस दौरान उन्होंने ये भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब स्पेस सेक्टर को प्राइवेट कंपनियों के लिए भी खोल दिया है। इससे बड़ा फायदा होगा।

‘डॉ APJ अब्दुल कलाम फाउंडेशन’ द्वारा दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति की 92वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में छात्रों को संबोधित करते हुए एस सोमनाथ ने कहा कि नॉलेज और इंटेलिजेंस के मामले में हमारे देश का स्तर दुनिया में सबसे बेहतरीन में से एक है। उन्होंने बताया कि ‘चंद्रयान 3’ मिशन के लिए ‘जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी, नासा-जेपीएल’ को भी रॉकेट्स के निर्माण के लिए बुलाया गया था। उसके 5-6 लोग ISRO मुख्यालय में आए और उन्हें ‘चंद्रयान 3’ के बारे में समझाया गया।

ये सॉफ्ट लैंडिंग से पहले की बात है। उस वक्त अमेरिकी विशेषज्ञों को इसकी डिजाइन और लैंडिंग की प्रक्रिया के बारे में बताया गया। तब उन्होंने कहा कि सब अच्छा होने जा रहा है। NASA द्वारा स्थापित JPL को CALTECH (कैलिफोर्निया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) द्वारा चलाया जाता है। बकौल इसरो प्रमुख, अमेरिकी विशेषज्ञों ने इस दौरान कहा, “इन वैज्ञानिक उपकरणों को देखिए। ये काफी सस्ते हैं। बनाने में भी आसान और तकनीक में बहुत ज़्यादा समृद्ध। आपने इन्हें कैसे बनाया? आप अमेरिका को ये तकनीक क्यों नहीं बेचते?”

इस दौरान छात्रों को प्रोत्साहित करते हुए ISRO के मुखिया S सोमनाथ ने कहा कि आप सब भी रॉकेट व सैटेलाइट बनाने के लिए आगे आइए। उन्होंने इस दौरान चेन्नई की कंपनी Agnikul और हैदराबाद की कंपनी Skyroot का नाम लेते हुए कहा कि भारत में इस वक्त 5 कंपनियाँ रॉकेट्स और सैटेलाइट्स बना रही हैं। उन्होंने बताया कि कैसे पीएम मोदी ने उनसे पूछा था कि चाँद पर भारतीय को आप कब भेजोगे? एस सोमनाथ ने कहा कि यहाँ बैठे छात्रों में से भी वो कोई हो सकता है। उन्होंने इस दौरान कलाम की पंक्तियाँ दोहराते हुए कहा कि हमें सोते हुए नहीं, जागते हुए बड़े सपने देखने चाहिए और उन्हें पूरा करना चाहिए।

इमाम ने हमास के दरिंदों को बताया ‘मसीहा’, यूपी पुलिस ने मौलाना सुहैल अहमद अंसारी को किया गिरफ्तार: साथी आतिफ की तलाश

इजरायल हमास के बीच जारी जंग के दौरान फिलिस्तीन के समर्थन में सोशल मीडिया पर पोस्ट करने पर उत्तर प्रदेश की हमीरपुर पुलिस ने एक मौलाना को अरेस्ट किया है। वहीं उसके साथी की तलाश की जा रही है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने दोनों आरोपितों के खिलाफ समाज में विद्वेष फैलाने और दंगा भड़काने की कोशिश करने के मामले में केस दर्ज किया है। 

पुलिस के मुताबिक हमीरपुर जिले के मौदहा क़स्बा निवासी आतिफ चौधरी और इमाम मौलाना सोहेल अहमद अंसारी ने सोशल मीडिया में इजरायल व फिलिस्तीन के मध्य चल रहे युद्ध को लेकर युवको ने फिलिस्तीन का समर्थन करते हुए तीन स्टेटस पर कई टिप्पणिया की हैं। इस मामले में पुलिस ने फ़िलहाल मौलाना को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मौलाना सोहेल अहमद अंसारी और आतिफ चौधरी ने सोशल मीडिया साइट इंस्टाग्राम पर फिलिस्तीन के समर्थन में पोस्ट डाली थी। इसमें हमास के दरिंदों को मुस्लिमों का मसीहा  बताते हुए उनके समर्थन में आगे आने के लिए अपील किया गया था। यह पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हरकत में आई पुलिस ने दोनों के खिलाफ केस दर्ज किया है। 

पुलिस ने फिलहाल दोनों आरोपितों के सोशल मीडिया एकाउंट से विवादित पोस्ट डिलीट करवा दिया है। पुलिस के मुताबिक दोनों आरोपित मौदहा कस्बे में हैदरगंज के रहने वाले हैं। इन दोनों के खिलाफ दो समुदायों के बीच दंगा भड़काने, सोशल मीडिया पर विवादित बयान देने या पोस्ट करने की धाराओं में केस दर्ज किया गया है। इस मामले में दूसरे आरोपित आतिफ चौधरी को गिरफ्तार करने के लिए दबिश दी जा रही है। वहीं पुलिस गिरफ्तार मौलाना सोहेल अंसारी से पूछताछ कर रही है। 

जुमे की नमाज के बाद पुलिस की गिरफ्त में आए मौलाना

गौरतलब है कि हमास आतंकियों को मसीहा बताने वाले मौलाना सुहैल अहमद अंसारी को शुक्रवार को ही जुमे की नमाज के बाद गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। वहीं, दूसरे आरोपित की तलाश में पुलिस छापेमारी कर रही है।

इस मामले में मौदहा कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक सुरेश कुमार सैनी ने बताया कि इस मामले में मौलाना सुहैल अंसारी समेत दो लोगों के खिलाफ धारा-153ए, 505/2 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। 

बता दें कि इजरायल ने फिलिस्तीन पर हमला तेज कर दिया है। इजरायल ने जमीन स्तर पर भी गाजा में युद्ध को छेड़ दिया है। इजरायल ने फिलिस्तीन की गाजा पट्टी पर रह रहे लोगों को वहाँ से जाने के लिए कहा है। वहीं, अब हमास और इजरायल को लेकर भी भारत में दो गुट हो गए हैं। एक जो इजरायल का समर्थन कर रहा है तो दूसरा फिलिस्तीन और हमास के समर्थन में दलीलें दे रहा है। यह तबका ज़्यादातर भारत में रहने वाले मुस्लिमों और वामपंथियों का है। 

1 दिन में लाउडस्पीकर से 35 लाख अज़ान ठीक, लेकिन 3 शब्द से दिक्कत: जिन भारतीयों का खून बहाता है Pak वो क्यों माँगें माफ़ी, पाकिस्तानी खिलाड़ियों के ‘ज़हर’ का क्या?

आँकड़ों की मानें तो भारत में लगभग 7 लाख मस्जिदें हैं। इस्लाम के हिसाब से दिन भर में 5 बार मस्जिदों से अज़ान दी जाती है। इसके लिए लाउडस्पीकरों का इस्तेमाल किया जाता है। यानी, मस्जिद के आसपास के इलाकों में रह रहे लोग भले ही हिन्दू, जैन, सिख, ईसाई, बौद्ध, पारसी या यहूदी हों – उन्हें अजान सुननी ही सुननी है। अगर अनुमान लगाएँ तो अकेले भारत में 1 दिन में 35 लाख अज़ान होते हैं मस्जिदों से। इसमें कोई कुछ नहीं कर सकता, कहीं शिकायत नहीं हो सकती।

अब उस घटना की बात करते हैं, जिसे मद्देनज़र रखते हुए इन आँकड़ों का जिक्र मैंने किया। शनिवार (14 अक्टूबर, 2023) को भारत और पाकिस्तान के बीच ICC वनडे क्रिकेट वर्ल्ड कप का लीग मैच हुआ। भारत ने पाकिस्तान को 7 विकेट से पटखनी दे दी। जब पाकिस्तान के विकेटकीपर बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान जब आउट होकर पवेलियन की तरफ जा रहे थे तब दर्शकों ने उनकी हूटिंग की। इस दौरान ‘जय श्री राम’ के नारे भी लगे। भारत को पाकिस्तान का ‘बाप’ बताने वाले नारे भी लगे।

मोहम्मद रिजवान कौन हैं? ये पाकिस्तान का वो खिलाड़ी है, जो श्रीलंका के खिलाफ मिली जीत को फिलिस्तीन को समर्पित करता है। जबकि फिलिस्तीनी आतंकियों ने इजरायल में डेढ़ हज़ार लोगों का नरसंहार किया है और भारत सरकार इजरायल के साथ खड़ी है। ये वो खिलाड़ी है, जो मैदान पर नमाज़ पढ़ता है। ताज़ा उदाहरण लें तो नीदरलैंड्स के खिलाफ हुए मैच में उन्होंने मैदान पर नमाज़ पढ़ी। ये वो खिलाड़ी है, जो विदेश में सड़क पर नमाज़ पढ़ता है। अमेरिका के बॉस्टन में उन्होंने कार रुकवा कर सड़क पर नमाज़ पढ़ी थी।

पाकिस्तान से माफ़ी माँगने वाली ब्रीड

हमने प्रतिदिन 35 लाख अज़ान वाले आँकड़े को जाना, भारत-पाकिस्तान मैच में दर्शकों की हूटिंग को लेकर जाना और मोहम्मद रिज़वान के बारे में जानना। अब जानते हैं भारत में बैठे उन लोगों के बारे में जो पाकिस्तान से माफ़ी माँग रहे हैं। क्यों? क्योंकि 110 करोड़ हिन्दुओं के देश में हिन्दू समाज के आराध्य भगवान श्रीराम का नाम लिया गया एक बार। आप सोचिए, 28 लाख नमाज़ प्रतिदिन के बदले 1 बार ‘जय श्री राम’ नारे से इनलोगों को इतनी दिक्कत हो गई कि उस पाकिस्तान से माफ़ी माँग रहे हैं जो भारतीयों का खूब बहाता रहा है।

दर्शकों ने अगर मैदान में ‘जय श्री राम’ कह दिया तो क्या हो गया? इसका अर्थ क्या है? इसका मतलब है – माँ सीता और भगवान राम की विजय हो। इसका ऐसा तो कतई मतलब नहीं है कि दुनिया में राम के सिवा कोई ईश्वर नहीं है और जो राम को न माने वो काफिर है और उसे मार डालो। उन्होंने तो ‘जय श्री राम’ बोलने के लिए लाउडस्पीकर का भी इस्तेमाल नहीं किया था। जहाँ हिन्दू हैं, वहाँ राम का नाम लिया ही जाएगा। हम तो आपस में मिलते-जुलते भी हैं तो ‘राम-राम’ कह कर एक-दूसरे का अभिवादन करते हैं।

आइए, अब आपको मिलवाते हैं उस गिरोह से। सबसे पहले तो तमिलनाडु के मंत्री और DMK नेता उदयनिधि स्टालिन से मिलिए, जिन्होंने सनातन धर्म को डेंगू-मलेरिया बताया था। साथ ही इसे खत्म करने की बात की थी। उस कार्यक्रम में, जिसकी टैगलाइन ही थी ‘सनातन का खात्मा’। आज वो भाईचारे की बात कर रहे हैं। आज उन्हें ‘अतिथि देवो भव’ की याद आई है। यानी, आज पाकिस्तानपरस्ती के लिए वो सनातन धर्म से ही पंक्ति उधार लेकर हिन्दुओं को नीचा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।

उनका ये सिद्धांत तब कहाँ चला जाता है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करने तमिलनाडु जाते हैं और DMK का आईटी सेल ‘गो बाइक मोदी’ ट्रेंड करवाता है। कावेरी नदी को लेकर जब कर्नाटक और तमिलनाडु की एक ही गठबंधन की सरकारें आपस में लड़ती हैं, तब कहाँ चला जाता है उदयनिधि स्टालिन का ‘भाईचारा’? दुनिया भर में जिस धर्म के 120 करोड़ अनुयायी हैं, उसे खत्म करने की बात करना और विरोध के बावजूद उस पर कायम रहना कहाँ तक उचित है? आज उन्हें बहुत सारा ज्ञान याद आ रहा देने को।

इस पूरे विवाद को लेकर पहले तो हिन्दुओं को नीचा दिखाया गया, फिर गुजरातियों को भला-बुरा कहा जाने लगा। गुजरात ने 3 दशकों से कॉन्ग्रेस को सत्ता से बाहर रखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह वहीं से हैं, ऐसे में गुजरात से लेकर घृणा बार-बार दिखाई है विपक्षी नेताओं ने। कभी राहुल गाँधी ‘मोदी’ सरनेम पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हैं तो कभी तेजस्वी यादव गुजरातियों को चोर बताते हैं। गुजरात के प्रति ये खुन्नस ही है कि भारत-पाकिस्तान मैच में ‘जय श्री राम’ नारा लगने को तूल देते हुए उन्हें नीचा दिखाया जाने लगा।

ऐसे मौकों पर ‘इंडिया टुडे’ के पत्रकार राजदीप सरदेसाई अगर न बोलें तो कैसे काम चल सकता है। उन्होंने हिन्दुओं पर खूब ज्ञान झाड़ा। उन्होंने पूछा कि ‘जय श्री राम’ का इस्तेमाल ‘पाकिस्तानी खिलाड़ियों को चिढ़ाने के लिए आक्रामक रूप से’ क्यों किया जाता है? उनकी नज़र में ‘राम-राम’ अलग है और ‘जय श्री राम’ अलग। उन्होंने भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम बताते हुए कहा कि उन्हें ज्ञान लाना चाहिए, दुश्मनी नहीं। हालाँकि, राजदीप सरदेसाई ने ये नहीं बताया कि ‘जय श्री राम’ में आक्रामक क्या है और इससे दुश्मनी कहाँ से आ जाती है?

वहीं खुद को नेहरूवादी बताने वाले आदित्य चटर्जी व शांतनु, कॉन्ग्रेसी प्रवीण चक्रवर्ती, पत्रकार राहुल फर्नांडिस, पार्थ एमएन और न जाने कितने ही लिबरलों ने याद दिलाया कि कैसे 1999 में चेन्नई में पाकिस्तान को स्टैंडिंग ओवेशन मिला था दर्शकों द्वारा। लेकिन, कोई ये नहीं बता रहा कि इसके बाद क्या हुआ था। भारतीय सेना के कैप्टेन सौरभ कालिया का अपहरण कर लिया गया, उन्हें प्रताड़ित किया गया और उनकी हत्या कर दी गई। ‘जाट रेजिमेंट’ के इस जवान को पाकिस्तान ने 15 मई से 7 जून तक लगातार प्रताड़ित किया।

क्या पाकिस्तान को स्टैंडिंग ओवेशन दिए जाने से सब कुछ बदल गया? कारगिल में भारत के 527 जवानों का हत्यारा कौन था? यही पाकिस्तान था। ये भी 1999 की घटना है। इसकी चर्चा क्यों नहीं? आज पाकिस्तान को सिर्फ इसीलिए सॉरी कहा जा रहा है क्योंकि स्टेडियम में किसी ने ‘जय श्री राम’ कह दिया, लेकिन भारत के सैकड़ों निर्दोषों का खून बहाने वाले आतंकियों का पोषक जो पाकिस्तान है, वो आगे भी इन्हीं हरकतों को जारी रखेगा और सॉरी नहीं बोलेगा। हाँ, सॉरी बोलने से भी न तो इतिहास बदल जाएगा और न ही आगे कोई फर्क पड़ेगा।

और हाँ, किसी खिलाड़ी को दर्शकों द्वारा चिढ़ाना कोई नया है क्या? किस खेल में ऐसा नहीं होता है? ऑस्ट्रेलिया में विराट कोहली को कई बार दर्शकों ने बू किया। स्टीवन स्मिथ 2018 के बॉल टैम्परिंग की घटना के बाद दर्शकों द्वारा चिढ़ाए गए। इसमें इस्लाम या संप्रदायवाद का कोई लेना-देना नहीं है। जिसका जैसा व्यवहार रहेगा, उस हिसाब से उसके साथ व्यवहार होगा। पाकिस्तानी टीम कैसे-कैसे बयान देती है? कभी ‘कुफ्र टूट गया’ जैसी बातें की गई थीं, इस्लाम की फतह जैसी बातें की गई थीं, पीएम मोदी को हराने जैसी बातें की गई थीं।

भारत और हिन्दुओं के खिलाफ ज़हर उगलते रहे हैं पाकिस्तानी खिलाड़ी

T20 वर्ल्ड कप 2021 के मैच के बाद पाकिस्तान के गृह मंत्री शेख रशीद, यूट्यूबर मुबाशेर लुकमान और कमेंटेटर बाजिद खान ने इसी तरह के बयान दिए थे। इसीलिए, भारतीय दर्शकों का विरोध पाकिस्तान और उसके खिलाड़ियों से था, किसी मजहब से नहीं। यहाँ कोई धार्मिक आक्रामकता या सांप्रदायिकता नहीं थी, बल्कि पाकिस्तानी खिलाड़ियों और पाकिस्तान के प्रति गुस्सा था। भारतीयों और हिन्दुओं को बार-बार नीचा दिखाने वालों को एक बार ‘जय श्री राम’ सुना दिया गया तो भारत में ही बैठे गद्दार क्यों बिलबिला उठे?

ये गुस्सा उस पाकिस्तान के लिए था, जिनके खिलाड़ियों के बयानों पर यहाँ का लिबरल गिरोह निंदा तक नहीं करता और प्रतिक्रिया में 3 शब्द आते ही सक्रिय हो जाता है। IPL के पहले संस्करण में सबसे ज़्यादा विकेट झटकने वाला सोहैल तनवीर कहता है कि हिन्दुओं की ‘ज़ेहनियत’ ऐसी है कि उन्होंने कर दिया जो भी कहना था। IPL 2009 में न बिकने के बाद उसने हिन्दुओं पर गुस्सा निकाला था। इसके बाद पाकिस्तानी एंकर ‘मुँह में राम, बगल में छुरी’ कहावत बोलते हुए बनियों को भला-बुरा कहता है।

पाकिस्तान का पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी ने घर का टीवी इसीलिए फोड़ दिया, क्योंकि उसकी बेटी भारतीय सीरियल देख कर आरती उतारने की नक़ल कर रही थी। पाकिस्तानी बल्लेबाजी अहमद शहज़ाद मैदान में ही श्रीलंका के बल्लेबाज तिलकरत्ने दिलशान के धर्मांतरण का कोशिश करता है। वो कहता है कि इस्लाम में आ जाओ अगर जन्नत में जाना है तो, वरना आग में जलने के लिए तैयार रहो। पाकिस्तान का पूर्व कप्तान इनम=जामं-उल-हक़ कहता है कि मुसलमान अगर अपनी मुसलमानियत पर आ गए तो दुनिया में एक भी गैर-मुस्लिम नहीं बचेगा।

पूर्व स्पिनर और पाकिस्तान का कोच रहे सक़लैन मुश्ताक ने बताया था कि कैसे उसने युसूफ योहाना को लालच दिया कि वो इस्लाम में परिवर्तित हो जाए तो उसका बैटिंग औसत बढ़ जाएगा और उसने कुरान पढ़ना शुरू किया। फिर वो मोहम्मद युसूफ बना। पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने कई बार बताया है कि कैसे विपक्षी खिलाड़ियों के धर्मांतरण का वो प्रयास करते रहे हैं। पूर्व तेज गेंदबाज वसीम वकार यूनुस है कि मोहम्मद रिजवान हिन्दुओं के बीच नमाज पढ़ कर आया, ये इस खेल को लेकर सबसे अच्छी चीज है।

कुछ लोग ये तर्क दे सकते हैं कि भारत भी वही करेगा जो पाकिस्तान कर रहा है, तो हममें और उनमें अंतर क्या रह जाएगा। लेकिन, असली बात तो ये है कि भारत में क्रिकेट की चर्चा कभी धर्म तक जाती भी नहीं। ऐसा होता तो अफगानिस्तान और बांग्लादेश से मैच के बाद भी ऐसे नारे लगते। यहाँ तो उलटा अफगानी प्लेयरों को सम्मान मिला है। न तो भारतीय खिलाड़ियों ने किसी के धर्मांतरण का प्रयास किया और न ही ग्राउंड में पूजा-पाठ करते हैं वो। फिर आखिर पाकिस्तान के सामने हमेशा झुकने की उम्मीद क्यों रखी जाती है भारतीयों से?

भारत में ‘जय श्री राम’ ही चलेगा, माफ़ी हम नहीं पाकिस्तान माँगे

जिस देश में राम का जन्म हुआ, जहाँ हिन्दुओं ने राम मंदिर के लिए 500 साल का संघर्ष किया है और बलिदान दिया है, जहाँ घर-घर में रामकथा सुनाई जाती है, जहाँ हर क्षेत्र की अलग-अलग रामलीला होती है, जहाँ ‘रामायण’ सबसे ज़्यादा पसंद किया जाने वाला सीरियल है, जहाँ हर माँ-बाप अपने बेटा को राम बनाना चाहता है, जहाँ अयोध्या से लेकर रामेश्वरम तक कई स्थल राम से जुड़े हुए हैं, जहाँ अधिकतर जगहों और लोगों के नाम में ‘राम’ है और जहाँ मरने के बाद भी राम का नाम लिया जाता है – उस देश में राम नाम से इतनी दिक्कत क्यों?

अगर माफ़ी माँगना है तो पाकिस्तान माँगे जिसने उरी, पठानकोट और पुलवामा में भारतीय जवानों की हत्याएँ की। जिसने मुंबई में 26/11 जैसे हमले को अंजाम देकर सैकड़ों लोगों को मौत के घाट उतार दिया। जिसके द्वारा पोषित आतंकियों ने कश्मीर में खून बहाया। जिसकी विचारधारा पर चल कर कश्मीरी पंडितों को घाटी से निकाल दिया गया। जिसने जम्मू कश्मीर के एक बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर रखा है। माफ़ी भारत क्यों माँगे? भारत की तरफ से माफ़ी माँगने की बात करने वाले इस देश का प्रतिनिधित्व नहीं करते, उन्हें पाकिस्तान समर्थक ही समझा जाए।