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मुंबई की बिलाल मस्जिद में फिलिस्तीन के समर्थन में पोस्टर और नारे, इजरायल के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर पर जुटे वामपंथी

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में फिलिस्तीन के समर्थन में पोस्टर लगाए गए हैं। यहाँ की एक मस्जिद में फिलिस्तीनियों के लिए दुआ भी पढ़ी गई है। इस दौरान इजरायल के विरोध में नारेबाजी भी की गई। वहीं वामपंथी संगठनों ने 16 अक्टूबर, 2023 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर फिलिस्तीन के पक्ष में प्रदर्शन का भी ऐलान किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मुंबई की जिस मस्जिद में फिलिस्तीन के समर्थन में पोस्टर चिपकाए गए हैं उसका नाम बिलाल मस्जिद है। यह मस्जिद पायधुनी पुलिस स्टेशन ठाणे क्षेत्र में है। इस पोस्टर में लिखा गया है कि फिलिस्तीन का समर्थन करने के लिए आपका मुसलमान नहीं बल्कि इंसान होना जरूरी है। साथ ही एक अन्य जगह पर लिखा, “Free Palestinian और We stand with Palestine।” मस्जिद में आए लोगों ने फिलिस्तीन जिंदाबाद और इजरायल मुर्दाबाद के नारे भी लगाए।

मस्जिद के इमाम हजरत मोईन मियाँ ने इस दौरान फिलिस्तीन में मारे गए लोगों के हक में दुआ भी पढ़ी। बिलाल मस्जिद के इमाम ने कुछ अन्य लोगों के साथ दुआ पढ़ी। अपनी दुआ में उन्होंने कहा, “फिलिस्तीन में अमन दाखिल हो, मजलूमों को मदद फरमा। शहीदों को जन्नत फरमा। इजरायल की जाहिलियत खत्म कर।”

दुआ के बाद सबने मिल कर मस्जिद-ए-अक्सा जिंदाबाद, फिलिस्तीनी मुस्लिम जिंदाबाद, जालिम इजरायली मुर्दाबाद, बैतूल मुखड्डस जिंदाबाद, हिंदुस्तान के मुसलमान जिंदाबाद जैसे नारे भी लगाए। इस मौके पर मुंबई पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे।

इसके अलावा मुंबई में रज़ा अकादमी ने भारत सरकार से अपनी विदेश नीति में बदलाव करने की माँग की। रजा अकादमी के मोइद्दीन अब्बास रिजवी ने फिलिस्तीनियों को पीड़ित और इजरायल को हमलावर बताते हुए भारत सरकार से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की। ऑपइंडिया से बात करते हुए रज़ा अकादमी के एक सदस्य ने कहा कि उनके संगठन द्वारा जुमे की नमाज़ के बाद अमन की दुआ की अपील की गई है।

इधर दिल्ली में वामपंथी संगठनों ने फिलिस्तीन के समर्थन में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया है। वामपंथी छात्र संगठन AISA की दिल्ली प्रदर्शन महासचिव नेहा ने अपने X हैंडल पर इस प्रदर्शन की जानकारी दी है। पोस्ट में नेहा ने प्रदर्शन का समय 2 बजे दिया गया है।

AISA पदाधिकारी ने इस प्रदर्शन को नागरिक विजिल का नाम दिया है। इजरायल के संघर्ष को नेहा ने साम्राज्यवादी हमला बताया है। शेयर किए गए पोस्टरों में एकतरफा इजरायल से ही गाजा में हमले बंद करने के लिए कहा गया है।

देवरिया के जिस देवेश दुबे के माँ-बाप, भाई-बहन सबको मार डाला, उन्होंने अखिलेश यादव से मिलने से किया इनकार: कहा- सपा राज में ही हुआ हमारा उत्पीड़न

देवरिया के फतेहपुर नरसंहार में मारे गए अपने माँ-बाप, भाई-बहन को खोने वाले पीड़ित परिवार के देवेश दुबे ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिलने से इनकार कर दिया। दरअसल, अखिलेश यादव ने कहा था कि वो देवरिया के दोनों पीड़ित परिवारों से मुलाकात करेंगे। इसके बाद वो आज देवरिया के फतेहपुर गाँव पहुँचे। उन्होंने देवेश दुबे के परिजनों की तस्वीर पर माला चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी, इसके बाद वो प्रेम चंद यादव के घर चले गए और परिवार से मुलाकात की।

सपा राज में हुआ था उत्पीड़न, किस मुँह से मिलने आ रहे?

देवेश दुबे का कहना है कि साल 2014 में प्रेम चंद यादव ने दबंगई से हमारी जमीन का बैनामा करा लिया था, हमारी कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई थी। हम उस दिन को भुला नहीं पा रहे हैं। देवेश दुबे का कहना है कि अखिलेश यादव के राज में ही हमारा उत्पीड़न हुआ, हमारी जमीन का फर्जी तरीके से बैनामा करा लिया गया। अब सबकुछ खत्म हो गया है, तो वो किस मुँह से मिलने आ रहे हैं। मैं उनसे नहीं मिलने वाला। देवेश ने कहा कि कई सपा नेताओं ने उनसे संपर्क कर कहा था कि वो अखिलेश यादव से मिल लें, लेकिन मैंने तय किया है कि मैं अखिलेश यादव से नहीं मिलूँगा।

अखिलेश यादव ने दी मृतकों को श्रद्धांजलि, प्रेमचंद यादव के परिवार से मिले

अखिलेश यादव देवरिया जिले के फतेहपुर गाँव पहुँचे और सबसे पहले दुबे परिवार के मृतकों को श्रद्धांजलि दी। वो पीड़ित परिवार के जर्जर घर में भी गए। इसके कुछ देर बाद वो वहाँ से निकले और दूसरे टोले में स्थित प्रेम चंद यादव के घर पहुँचे और परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने प्रेमचंद यादव की पत्नी और बच्चों से मुलाकात की, साथ ही हत्याकांड में आरोपित रामजी यादव के भी परिजनों से मिले और हरसंभव मदद का भरोसा दिया। मृतक प्रेमचंद यादव समाजवादी पार्टी के नेता थे और जिला पंचायत सदस्य रहे थे।

प्रेमचंद यादव की बेटी ने की ये अपील

इस मामले में प्रेमचंद यादव की बेटी ने मीडिया से अपील की थी कि उनका घर न गिराया जाए। ये घर उनके दादा ने बनवाया था, जो फौजी थे। उन्होंने कहा कि पहले सभी घरों की पैमाइश हो, और कानून के मुताबिक जो सही हो वो किया जाए। अकेले उनके घर पर बुलडोजर न चलाया जाए, वर्ना वो रहेंगे कहाँ? प्रेम चंद यादव की बेटी ने अखिलेश यादव के आने पर कहा कि वो दोनों पक्षों को न्याय दिलाएँ। उनके (दुबे परिवार) के साथ तो बहुत लोग खड़े हैं, हमारे साथ कोई नहीं खड़ा। बेटी ने कहा कि जैसे पापा अब तक हमारा ख्याल रखते थे, अब अखिलेश यादव हमारा ख्याल रखें।

गाँधी जयंती के दिन दुबे परिवार का हुआ था नरसंहार

बता दें कि गाँधी जयंती के दिन देवरिया में 2 अक्टूबर को 15 साल के गाँधी दुबे, 10 साल की नंदिनी दुबे, उनके पिता और माता के साथ ही एक अन्य बहन को प्रेम यादव के परिवार के लोगों ने मार डाला था। दुबे परिवार के सभी लोगों को पहले बुरी तरह पीटा गया, फिर गोली मारी गई और गला काट दिया गया। एक भाई गंभीर रूप से घायल था, जिसकी जान बच गई। इस नरसंहार के समय सबसे बड़े बेटे देवेश श्राद्ध कर्म करवाने के लिए घर से बाहर गए हुए थे, इसलिए बच गए

अब ओलंपिक में भी मिलेगा T20 का मजा, 128 साल बाद क्रिकेट की फिर से एंट्री: क्या भारत को 2036 की मिलेगी मेजबानी, PM मोदी बोले- तैयार हैं हम

सन् 1900 के बाद अब पहली बार क्रिकेट भी ओलंपिक गेम्स में शामिल होने जा रहा है। 2028 के ओलंपिक खेलों का हिस्सा क्रिकेट भी होगा। ये भारत के लिए भी अच्छी खबर है, क्योंकि क्रिकेट यहाँ दशकों से लोगों के बीच लोकप्रिय है और इसने सुनील गावस्कर, कपिल देव सचिन तेंदुलकर, MS धोनी और विराट कोहली जैसे लोकप्रिय चेहरे दिए। बता दें कि 2028 के ओलंपिक गेम्स का आयोजन अमेरिका के लॉस एंजेल्स में होने वाला है। ओलंपिक खेलों के लिए तैयारियाँ वर्षों पहले शुरू हो जाती हैं। क्रिकेट के अलावा बेसबॉल/सॉफ्टबॉल, स्क्वाश, फ्लैग फुटबॉल और लाक्रोस को भी ओलंपिक में जोड़ा गया है।

ओलंपिक खेलों में क्रिकेट को शामिल किए जाने के संबंध में ‘इंटरनेशनल ओलंपिक कमिटी (IOC)’ ने आधिकारिक ऐलान कर दिया है। इसके लिए ICC (इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल) लंबे समय से प्रयास कर रहा था। साथ ही ICC को IOC में शामिल किए जाने की माँग भी की जा रही है। मुंबई में सोमवार (16 अक्टूबर, 2023) को IOC का 141वाँ सेशन आयोजित हुआ, जिसमें इस आदेश पर मुहर लगाई गई। बता दें कि टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ओलंपिक खेलों के दर्शकों की संख्या 300 करोड़ से भी अधिक है। सन् 1900 में ओलंपिक में क्रिकेट ग्रेट ब्रिटेन और फ्रांस के बीच खेला गया था।

इसीलिए, ओलंपिक में क्रिकेट को शामिल किएजाने के बाद इसकी लोकप्रियता दुनिया भर में फैलेगी। इसके लिए नए मौके आएँगे। इसका ये फायदा होगा कि जिन देशों में क्रिकेट लोकप्रिय नहीं है वहाँ भी नई पीढ़ी इसे सीखेगी। ICC अध्यक्ष ग्रेग बर्कले ने भी इस पर ख़ुशी जताई है। भारत के लिए भी ये अच्छी खबर है, क्योंकि इस खेल में 3 (2 बार वनडे, 1 बार T20) बार विश्व कप जीत चुका भारत इसमें गोल्ड मेडल के लिए दावेदारी पेश करेगा।

ICC वनडे वर्ल्ड कप 2023 का आयोजन भी भारत में हो रहा है। हालाँकि, क्रिकेट के T20 फॉर्मेट को ओलंपिक में शामिल किया गया है। IOC अध्यक्ष थॉमस बच ने इसे अमेरिका की संस्कृति के अनुरूप बताते हुए कहा कि हुए कहा कि इससे नए खिलाड़ियों और खेल कम्युनिटी से जुड़ने का मौका मिलेगा। उन्होंने T20 की लोकप्रियता की बात की। साथ ही मौजूदा वर्ल्ड कप को भी बड़ी तरह से सफल करार दिया। 2028 के ओलंपिक में क्रिकेट में महिला एवं पुरुष प्रतियोगिता के लिए अलग-अलग 6 टीमें आपस में भिड़ेंगी।

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा था कि 2036 के ओलंपिक के आयोजन के लिए भारत तैयार है। इसके बाद चर्चा है कि क्या उस साल भारत को ओलंपिक की मेजबानी मिल रही है? ओलंपिक सत्र के ही अधिवेशन में पीएम मोदी ने कहा, “सबके सामने 140 करोड़ भारतवासियों की भावना ज़रूर रखना चाहूँगा। भारत अपनी धरती पर ओलंपिक के आयोजन के लिए बहुत उत्साहित है। 2036 में भारत में ओलंपिक का सफल आयोजन हो, इसके लिए भारत अपने प्रयासों में कोई कमी नहीं रखेगा। ये 140 करोड़ भारतीयों का वर्षों पुराना सपना है।” भारत 2029 के यूथ ओलंपिक के लिए भी दावा ठोक रहा है।

जो कोठी में जाती वह बाहर नहीं आती… नाले से मिले थे 19 नर कंकाल: हाई कोर्ट ने निठारी कांड में मौत की सजा पाए मोनिंदर पंढेर और सुरेंद्र कोली की किया बरी

इलाहबाद हाईकोर्ट ने सोमवार (16 अक्टूबर, 2023) को बहुचर्चित निठारी कांड में सुरेंद्र कोली को 12 मामलों में बरी कर दिया है। इन सभी 1 दर्जन मामलों में कोली को निचली अदालत से मौत की सजा सुनाई गई थी। वहीं इसी कांड के एक अन्य आरोपित मोनिंदर सिंह पंढेर को 2 केसों में बरी किया गया है। पंढेर को भी इन दोनों केसों में मृत्युदंड मिला था।

यह फैसला जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस सैयद आफ़ताब हुसैन रिज़वी की बेंच ने सुनाया। सितंबर 2023 माह में इस केस की सुनवाई के बाद बेंच ने अपना निर्णय सुरक्षित रखा था।

बचाव पक्ष की वकील मनीषा भंडारी ने तर्क किया कि आरोपितों के खिलाफ कोई चश्मदीद गवाह नहीं है और दोनों को परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर सजा सुनाई गई है। मनीषा भंडारी के अनुसार मोनिंदर पंढेर अगले 24 घंटों में जेल से बाहर आ सकते हैं।

जानकारी के मुताबिक निठारी कांड में CBI की तरफ से सुरेंद्र कोली पर कुल 16 और मोनिंदर सिंह पंढेर पर कुल 6 केस दर्ज किए गए थे। इनमें से सुरेंद्र कोली को 13 केसों में गाजियाबाद जिले की सीबीआई कोर्ट ने मई 2022 में मृत्युदंड की सजा दी थी। 3 केसों में उसे सबूतों के आभाव में बरी कर दिया गया था।

सुरेंद्र कोली को अलग-अलग मामलों में 13 फरवरी 2009, 12 मई 2010, 28 अक्टूबर 2010, 22 दिसंबर 2010, 24 दिसंबर 2012, 7 अक्टूबर 2016, 16 दिसंबर 2016, 24 जुलाई 2017, 8 दिसंबर 2017, 2 मार्च 2019, 6 अप्रैल 2019, 16 जनवरी 2021 और 19 मई 2022 को गाजियाबाद सीबीआई कोर्ट द्वारा फाँसी की सजा सुनाई गई थी। जबकि मोनिंदर पंढेर को इसी अदालत द्वारा 13 फरवरी 2009 और 8 दिसंबर 2017 को मृत्युदंड मिला था।

एक मामले में 9 सितंबर 2014 में उसे मेरठ जेल में फाँसी भी दी जाने वाली थी। हालाँकि, सुबह 4 बजे जेल प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट का आदेश मिला और कोली की फाँसी टल गई। बाद में इस सजा को देरी की वजह से उम्रकैद में तब्दील कर दिया गया था।

वहीं अपने खिलाफ दर्ज कुल 6 मामलों में से 4 में मोनिंदर पंढेर गाजियाबाद ट्रायल कोर्ट से पहले ही बरी हो चुका था। 2 केसों में उसे फाँसी की सजा दी गई थी। अब हाईकोर्ट ने उन दोनों केसों में भी पंढेर को बरी कर दिया है। पंढेर और सुरेंद्र कोली ने खुद को मिली सजा के खिलाफ इलाहबाद हाईकोर्ट में 2 अलग-अलग अपीलें दाखिल की थीं।

क्या था निठारी कांड?

दरअसल, पेशे से उद्योगपति और नोएडा सेक्टर 31 निठारी कोठी नंबर डी-5 निवासी मोनिंदर सिंह पंढेर का परिवार पंजाब में रह रहा था। बताया जा रहा है कि पंढेर अपने घर पर कॉलगर्ल बुलाया करते थे। इस दौरान अल्मोड़ा उत्तराखंड का मूल निवासी सुरेंद्र कोली साल 2003 से उनके घर में खाना बनाने का काम करने लगा। 7 मई 2006 को मोनिंदर पंढेर ने एक लड़की को नौकरी दिलाने के नाम पर कोठी पर बुलवाया। वह घर नहीं लौटी को उसके परिजनों ने इसकी शिकायत पुलिस में दर्ज क्वाई।

पुलिस ने मोनिंदर पंढेर के घर के आसपास तलाशी की तो पास के नाले में 19 कंकाल मिले। ये कंकाल महिलाओं और बच्चों के बताए गए। पुलिस ने मोनिंदर पंढेर और सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार करके पूछताछ की तो दोनों ने कई बच्चियों और महिलाओं का बलात्कार करने का खुलासा किया।

सुरेंद्र कोली द्वारा बच्चों के मांस खाने की भी जानकारी दी गई। पीड़ित परिवारों ने मोनिंदर और पंढेर पर मानव अंगों की तस्करी का भी आरोप लगाया था। थोड़े समय बाद यह मामला नोएडा पुलिस से CBI को ट्रांसफर हो गया था। कोर्ट में CBI ने पंढेर और सुरेंद्र कोहली के खिलाफ अलग-अलग केसों में चार्जशीट दाखिल की थी।

अग्निवीर अमृतपाल की मौत में फायदा खोज रही कॉन्ग्रेस-AAP-अकाली, परिवार और देश की सेना दोनों को कर रही बदनाम

हाल ही में भारतीय सेना के जवान अमृतपाल सिंह का गोली लगने के कारण निधन हुआ। इसके बाद विपक्षी दल ओछी राजनीति पर उतर कर तरह-तरह के दावे करने लगे। अमृतपाल सिंह की सेना में भर्ती ‘अग्निवीर’ के रूप में हुई थी। उनके निधन के बाद सेना के 2 जवान पार्थिव शरीर को उनके घर छोड़ने आए थे। मानसा के कोटली गाँव में उनका अंतिम संस्कार हुआ। हालाँकि, उन्हें ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ न दिए जाने का आरोप लगाते हुए विपक्षी दलों के नेताओं ने राजनीति शुरू कर दी।

कॉन्ग्रेस पार्टी ने अमृतपाल सिंह की अंतिम यात्रा की तस्वीर शेयर करते हुए अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से लिखा, “पंजाब के रहने वाले अमृतपाल सिंह ‘अग्निवीर’ के तौर पर सेना में भर्ती हुए। वो कश्मीर में तैनात थे, 10 अक्टूबर को गोली लगने से वे शहीद हो गए। दुखद ये है कि देश के लिए शहीद होने वाले अमृतपाल जी को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई भी नहीं दी गई। उनका पार्थिव शरीर एक आर्मी हवलदार और दो जवान लेकर आए।”

भारतीय सेना पर कॉन्ग्रेस, AAP और ‘अकाली दल’ की ओछी राजनीति

कॉन्ग्रेस ने ये आरोप भी लगाया कि इसके अलावा आर्मी की कोई यूनिट तक नहीं आई। पार्टी ने लिखा कि यहाँ तक कि उनके पार्थिव शरीर को भी आर्मी वाहन के बजाए प्राइवेट एंबुलेंस से लाया गया। साथ ही इसे देश के बलिदानियों का अपमान करार दिया। अब भारतीय सेना ने आधिकारिक बयान जारी कर के सब कुछ क्लियर कर दिया है, जिसके बारे में हम आगे जानेंगे। लेकिन, उससे पहले देखिए कैसे सेना के एक जवान की मौत के बाद लाश के ऊपर गंदी राजनीति की गई।

बठिंडा से सांसद और अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल ने भी इस मामले पर बयान दिया। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने लिखा, “जम्मू कश्मीर के पूँछ में अमृतपाल सिंह के बलिदान के बाद व्यथित हूँ। प्राइवेट एम्बुलेंस में बॉडी लाकर परिवार को दे दिया गया, गार्ड ऑफ ऑनर तक नहीं दिया गया। बताया जा रहा है कि ये सब इसीलिए हुआ, क्योंकि अमृतपाल सिंह ‘अग्निवीर’ थे। हमें सभी सैनिकों को समान नज़र से देखना चाहिए। उन्हें सैन्य सम्मान दिया जाना चाहिए।”

पंजाब की सत्ताधारी ‘आम आदमी पार्टी’ (AAP) इन सबमें कहाँ पीछे रहने वाली थी। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मदद की घोषणा तो की, लेकिन उस दौरान भी भारतीय सेना को निशाना बनाया। उन्होंने लिखा कि अमृतपाल सिंह के बलिदान को लेकर भारतीय सेना की जो भी नीति हो, पंजाब सरकार की सभी बलिदानियों को सम्मान देने की नीति है। साथ ही उन्होंने इस मामले को केंद्र सरकार के समक्ष उठाने की भी बात कही। एक तरह से उन्होंने पंजाब सरकार की नीति को अच्छा और भारतीय सेना की नीति को खराब कह दिया बिना सोचे-समझे।

अमृतपाल सिंह को लेकर सेना को जारी करना पड़ा बयान

इस तुच्छ राजनीति का असर ये हुआ कि इस पर भारतीय सेना को बयान जारी कर के सफाई देना पड़ा। बुधवार (11 अक्टूबर, 2023) को हुई इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए भारतीय सेना ने कहा कि इस संबंध में तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और कुछ ग़लतफ़हमी हुई है। भारतीय सेना ने बताया कि संतरी की ड्यूटी के दौरान अमृतपाल सिंह ने खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली, जो उनके परिवार और देश की सेना के लिए एक बड़ी क्षति है।

इंडियन आर्मी ने बताया, “पहले से चले आ रहे नियमों के हिसाब से पार्थिव शरीर का मेडिकल कराए जाने और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद अंतिम संस्कार के लिए उनके घर भेजा गया। साथ में सेना के लोग थे। सुविधाओं और प्रोटकॉल्स के मामले में ‘अग्निपथ योजना’ के पहले और बाद भर्ती हुए सैनिकों को लेकर कोई भेदभाव नहीं किया जाता है। आत्महत्या या खुद से चोट पहुँचने से हुईं मौतों की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के संबंध में भी मृतकों को उचित सम्मान दिया जाता है और उनके परिवार के प्रति हमारी गहरी संवेदना हमेशा रहती है।”

भारतीय सेना ने बताया कि ऐसे मामलों में 1967 के आदेश के हिसाब से सैन्य अंतिम संस्कार नहीं किया जाता है। इस नीति के तब से अब तक बिना किसी भेदभाव के पालन किया जा रहा है। 2001 से अब तक हर साल 100-140 ऐसे आत्महत्या या खुद से जख्मी होने के बाद हुई मौतों के मामले आते रहे हैं, और हर मामले में इस नियम का अनुसरण किया गया। लेकिन, इसका निधन के बाद दी जाने वाली वित्तीय सहायताओं पर कोई फर्क नहीं पड़ता और अंतिम संस्कार के लिए धनराशि उपलब्ध कराए जाने को प्राथमिकता दी जाती है।

भारतीय सेना ने दोहराया कि संस्था और परिवार पर ऐसी क्षति का गहरा असर पड़ता है। साथ ही कहा कि ऐसे शोक के समय में समाज को परिवार के सम्मान, प्राइवेसी और गरिमा बनाए रखते हुए उनके साथ संवेदना जतानी चाहिए। साथ ही स्पष्ट किया कि भारतीय सेना प्रोटोकॉल्स और और नीतियों के पालन के लिए जानी जाती रही है और आगे भी ये ऐसा करती रहेगी। इंडियन आर्मी ने कहा कि वो समाज के हर हिस्से का सम्मान करते हैं और स्थापित प्रोटोकॉल्स का पालन करते हुए ऐसा करते हैं।

यहाँ सोचने वाली बात ये है कि अगर इस मामले को लेकर कॉन्ग्रेस, AAP और अकाली दल ने गंदी राजनीति न की होती और भारतीय सेना पर उँगली न उठाई होती तो एक जवान के आत्महत्या वाली बात मीडिया में आती ही नहीं। ये परिवार के लिए कितना दुःखद होगा, ये सोचने वाली बात है। सेना इसे क्षति मानती है, इसे बलिदान के रूप में देखा जा रहा था – लेकिन इन राजनीतिक दलों ने मोदी सरकार और उसकी योजना को बदनाम करने के चक्कर में परिवार और मृतक के बारे में नहीं सोचा।

‘वे 70 साल के हैं, इसे तत्काल सुने’: न्यूजक्लिक वाले प्रबीर पुरकायस्थ की अर्जी लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुँचे कपिल सिब्बल, CJI बोले- पहले कागज दिखाएँ

वेबपोटर्ल न्यूजक्लिक (NewsClick) के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ (Prabir Purkayastha) और एचआर हेड अमित चक्रवर्ती ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। दोनों ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। हाई कोर्ट ने गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत इनकी गिरफ्तारी को खारिज करने से इनकार किया था।

पुरकायस्थ की तरफ से कपिल सिब्बल ने 16 अक्टूबर 2023 को याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के सामने सूचीबद्ध करने का आग्रह किया। लेकिन सीजेआई ने कहा कि दस्तावेजों को देखने के बाद ही वे इस संबंध में कोई फैसला करेंगे। उन्होंने सिब्बल से कोर्ट के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा।

न्यूजक्लिक पर चीनी फंडिंग से देश विरोधी प्रचार को बढ़ावा देने का आरोप है। इस मामले में पुरकायस्थ और चकवर्ती को दिल्ली पुलिस ने कई घंटों की पूछताछ के बाद 3 अक्टूबर 2023 को गिरफ्तार किया था। इसे दोनों ने हाई कोर्ट में चुनौती ती थी, लेकिन राहत नहीं मिली।

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में पुरकायस्थ ने अपनी गिरफ्तारी को अवैध और असंवैधानिक बताया है। कहा है कि यूएपीए एक दमनकारी कानून है। सरकार अक्सर इसका दुरुपयोग खुद से असहमत रहने वाले लोगों को निशाना बनाने के लिए करती है। उनका यह भी कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए पुलिस के पास कोई सबूत नहीं है।

पुरकायस्थ की गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए सिब्बल ने शीर्ष अदालत से कहा कि वे पत्रकार हैं। 70 साल से अधिक उनकी उम्र है। वे हिरासत में हैं। लिहाजा इस मामले की तत्काल सुनवाई होनी चाहिए।

गौरतलब है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने पुरकायस्थ और चकवर्ती की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि उनकी याचिका सुनवाई योग्य नहीं हैं। जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच ने 13 अक्टूबर 2023 याचिका खारिज करते हुए कहा कि इसमें कोई दम नहीं है।

‘मुस्लिम बन जाओ, फिर कुछ भी करो जन्नत में ही जाओगे’: पाकिस्तान के हिन्दू क्रिकेटर ने वीडियो शेयर कर बताया – मेरे साथ रोज यही होता था

गुजरात के अहमदाबाद स्थित नरेंद्र मोदी स्टेडियम में शनिवार (14 अक्टूबर, 2023) को भारत और पाकिस्तान के बीच ICC वनडे क्रिकेट वर्ल्ड कप का लीग मैच हुआ। इस मैच में भारत ने पाकिस्तान को 7 विकेट से पटखनी दे दी। उस दौरान जब पाकिस्तानी विकेटकीपर बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान आउट होकर वापस पवेलियन लौट रहे थे, तब कुछ दर्शकों ने ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए। इसके बाद भारत का ही लिबरल गिरोह चढ़ गया और पाकिस्तान से माफ़ी माँगने लगा। इसी बीच पाकिस्तान के हिन्दू खिलाड़ी दानिश कनेरिया ने एक वीडियो शेयर किया है।

उस पर हम बात करेंगे लेकिन इससे पहले जानिए कि कैसे मोहम्मद रिजवान खुद क्रिकेट में मजहब घुसाते रहे हैं। उन्होंने नीदरलैंड्स के खिलाफ इसी टूर्नामेंट में हुए मैच के दौरान नमाज़ पढ़ी थी। इससे पहले वो T20 वर्ल्ड कप के दौरान भी ग्राउंड में नमाज़ पढ़ चुके हैं, जिसके बाद एक टीवी डिबेट के दौरान पूर्व पाकिस्तानी तेज़ गेंदबाज वकार यूनुस ने कहा था कि वो हिन्दुओं के बीच ऐसा कर के आए, जो बहुत अच्छी बात है। इतना ही नहीं, वो अमेरिका के बॉस्टन में भी सड़क पर कार रुकवा कर नमाज़ पढ़ चुके हैं।

हालाँकि, पाकिस्तानी खिलाड़ियों द्वारा इस तरह की हरकतें करने की ये कोई पहली घटना नहीं है। आपको श्रीलंका के सलामी बल्लेबाज तिलकरत्ने दिलशान याद होंगे, जो ‘दिलस्कूप’ शॉट के लिए जाने जाते थे। वनडे में 10,000 और टेस्ट में 5000 रनों के आँकड़े को पार कर चुके तिलकरत्ने दिलशान और पाकिस्तानी बल्लेबाज अहमद शहजाद का एक वीडियो सामने आया था। मामला 30 अगस्त, 2023 (शनिवार) का था। उस दिन श्रीलंका और पाकिस्तान के बीच एक वनडे मैच हुआ था।

ये वीडियो उस दौर का है, जब पाकिस्तान टेस्ट और वनडे सीरीज खेलने के लिए श्रीलंका पहुँचा हुआ था। अगस्त महीने में 2 टेस्ट और 3 वनडे मैच खेले गए थे। टेस्ट सीरीज में श्रीलंका ने जहाँ पाकिस्तान को क्लीन स्वीप कर दिया था, वहीं वनडे सीरीज में भी पाकिस्तान ने पहला मैच तो जीत लिया लेकिन बाकी के दोनों मैच जीत कर श्रीलंका सीरीज विजेता बना। ये वाकया अंतिम ODI मैच का है। पाकिस्तान की टीम ने दाम्बुला के इस मैच में पहले बल्लेबाजी की थी और 102 पर ऑलआउट हो गई थी।

बारिश के कारण डकवर्थ-लुइस (DLS) से मैच का फैसला हुआ और चेज के दौरान तिलकरत्ने दिलशान अर्धशतक बना कर नॉटआउट रहे। श्रीलंका के बल्लेबाज और पाकिस्तानी फील्डर्स सफल चेज के बाद जब पवेलियन लौट रहे थे, उसी दौरान अहमद शहज़ाद ने दिलशान से बातचीत की जो कैमरे में कैद हो गई। दिलशान से अहमद शहज़ाद ने कहा था, “अगर आप गैर-मुस्लिम हैं और आप मुस्लिम बन जाते हैं तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप अपने जीवन में क्या कर रहे हैं, आप सीधे जन्नत में जाएँगे।”

इस दौरान तिलकरत्ने दिलशान ने क्या जवाब दिया ये तो क्लियर नहीं है, लेकिन इसके बाद अहमद शहज़ाद को बोलते हुए सुना गया, “फिर आप आग में जलने के लिए तैयार रहिए।” बता दें कि दिलशान बौद्ध हैं। 16 वर्ष की उम्र में उन्होंने इस्लाम छोड़ दिया था। पहले उनका नाम तुवान मोहम्मद दिलशान हुआ करता था। हालाँकि, ये नाम होने के बावजूद वो बचपन में अपनी सिंहला माँ का धर्म ही फॉलो करते थे। अब पाकिस्तान के पूर्व खिलाड़ी दानिश कनेरिया ने इस वीडियो को फिर से शेयर कर के कहा है कि खेल के मैदान से लेकर ड्रेसिंग रूम और डाइनिंग टेबल तक, उनके साथ रोज ये होता रहा है।

याद दिला दें कि पाकिस्तान के पूर्व स्पिनर दानिश कनेरिया ने अपनी टीम के पूर्व साथी और कप्तान शाहिद अफरीदी पर क्रिकेट खेलने के दौरान हिंदू होने के कारण उनसे दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया था। कनेरिया ने अफरीदी को चरित्रहीन, जालसाज और झूठा इंसान बताया था। पूर्व क्रिकेटर दानिश कनेरिया ने कहा था कि साल 2013 में उन पर लगाए गए स्पॉट फिक्सिंग के आरोप झूठे थे, उन्हें हिन्दू होने की वजह से फँसाया गया था।

नवरात्रि की कलश यात्रा पर कट्टरपंथी भीड़ का हमला, 5 साल का बच्चा भी घायल: मस्जिद के पास पहुँचते ही चलने लगे ईंट-पत्थर

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में हिन्दू समाज की नवरात्रि कलश यात्रा के दौरान हमले की खबर है। हमले का आरोप तबरेज और उसके साथियों पर लगा है। अलीगढ़ की ही तरह इस हमले में भी मस्जिद के पास हमलावरों के जुटने का आरोप है। हिंसा के दौरान हमलावरों ने 5 साल के बच्चे को भी निशाना बनाया है। पीड़ित मासूम का इलाज अस्पताल में चल रहा है। वहीं अब तक 4 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। घटना रविवार (15 अक्टूबर, 2023) की है।

यह घटना कुशीनगर के थानाक्षेत्र कुबेरस्थान की है। यहाँ के गाँव लक्ष्मीपुर के निवासी नरेश शाह ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में उन्होंने बताया कि रविवार को उनके गाँव में आयोजित होने वाली दुर्गापूजा की कलश यात्रा निकलने वाली थी। इस कलश यात्रा में तमाम श्रद्धालुओं के साथ नरेश का 5 वर्षीय पोता पियूष भी शामिल हो गया। जैसे ही यह यात्रा पश्चिम टोला में मस्जिद के पास से होते हुए मुबारक नाम के व्यक्ति के घर के आगे पहुँची इसे रोक लिया गया। रोकने वाला अरोपित मुबारक का बेटा था।

शिकायत में बताया गया है कि मुबारक के बेटे ने यात्रा में बज रहे DJ का विरोध किया। साथ ही उसने अपने घर के आगे से आ रही यात्रा पर भी आपत्ति जताई। इस विरोध पर श्रद्धालुओं ने DJ बंद कर दिया। आरोप है कि इसके बावजूद अचानक ही मुबारक के बेटे ने चुन्नू, तबरेज, इंतजार के बेटे और कुछ अन्य अज्ञात लोगों ने एक साथ कलश यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं पर हमला बोल दिया। इस कलश यात्रा में महिलाएँ भी शामिल थीं। हमले के दौरान श्रद्धालुओं को माँ-बहन की गालियाँ भी दी गईं।

आरोप है कि हमलावरों ने ईंट-पत्थर भी चलाए। इसी पथराव में कलश यात्रा में शामिल 5 साल के पियूष को सिर में चोट आई और वो वहीं अचेत हो कर गिर पड़ा। हालात गंभीर देखते हुए आनन-फानन में पीड़ित बच्चे को अस्पताल ले जाया गया।

ऑपइंडिया से बात करते हुए पियूष के दादा नरेश ने अपने पोते की हालात को फिलहाल स्थिर बताया। शिकायत में इस बात का भी जिक्र है कि आरोपितों ने पीड़ितों को जान से भी मारने की धमकी दी थी। मामले की सूचना पर तत्काल पुलिस बल मौके पर पहुँचा।

इस मामले में पुलिस ने मुबारक और इंतज़ार के बेटे सहित चुन्नू और तबरेज को नामजद किया गया है। इसके अलावा FIR में कुछ अज्ञात आरोपितों का भी जिक्र है। सभी आरोपितों पर IPC की धारा 147, 308, 323, 336, 504 व 506 के तहत FIR दर्ज कर ली गई है।

ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। कुशीनगर के एडिशनल SP के मुताबिक अब तक 4 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस की तरफ से गाँव में शांति और हालात को काबू में बताया गया है। फिर भी एहतियातन गाँव में पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। मामले में आगे की जाँच की जा रही है।

मेरे लोगों को टिकट नहीं दिया, कॉन्ग्रेस छोड़ रहा हूँ: दिग्विजय सिंह का ‘इस्तीफा’ वायरल, जानिए क्या बोले मध्य प्रदेश के पूर्व CM

मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए नवरात्र के पहले दिन कॉन्ग्रेस ने उम्‍मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। इसमें 144 प्रत्‍याशियों के नाम है। हालाँकि, इस लिस्‍ट के आने के कुछ ही देर बाद तब हंगामा मच गया जब पूर्व मुख्‍यमंत्री व राज्‍यसभा सांसद दिग्विजय सिंह का इस्‍तीफा सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

जिसके बाद सोशल पर यह प्रश्न किया जाने लगा कि क्या मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया? ऐसा इसलिए पूछा जा रहा है, क्योंकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पत्र जमकर वायरल हो रहा है। जिसमें इस्तीफे की बात थी, हालाँकि, दिग्विजय सिंह ने कॉन्ग्रेस से इस्तीफे की बात को सिरे से खारिज कर दिया

क्या है पूरा मामला?

सोशल मीडिया एक्स पर कॉन्ग्रेस प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफे से जुड़ा हुआ दिग्विजय सिंह का एक पत्र वायरल हुआ। 

वायरल हुए लेटर में लिखा हुआ है, “अपने पाँच दशक के राजनीतिक सफर में कई अनुभव मुझे कॉन्ग्रेस में रहते हुए मिले। एक साधारण कार्यकर्ता से लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक का सफर मैंने कॉन्ग्रेस पार्टी में रहते हुए तय किया। पार्टी ने मुझे राष्‍ट्रीय महासचिव से लेकर राज्‍यसभा सदस्य जैसे महत्‍वपूर्ण पद तक पहुँचाने का काम किया, जिसके लिए मैं आजीवन आभारी रहूँगा, लेकिन गत कुछ महीनों से शीर्ष नेतृत्‍व में उदासीनता देखकर मैं आहत हूँ। मध्‍य प्रदेश में पार्टी कार्यकर्ता केंद्र‍ित दल न होकर अब विशेष नेता केंद्रित हो गई है। जिसकी वजह से खुद को असहज पा रहा हूँ।

दिग्विजय सिंह का वायरल हुआ पत्र

मध्‍य प्रदेश चुनाव को लेकर प्रत्‍याशियों के चयन में मेरे द्वारा दिए गए नामों पर विचार नहीं किया गया है। निष्‍ठावान कार्यकर्ताओं को तरजीह नहीं दिए जाने से मेरे स्‍वाभिमान को ठेस पहुँची है। मैं अब ऐसे पड़ाव पर पहुँच गया हूँ जहाँ मुझे लगता है कि मैं अब ऐसे अन्यायपूर्ण माहौल में नही रह सकता।

मैं उन सभी के प्रति आभार व्‍यक्‍त करता हूँ जिन्‍होंने वर्षों से मेरी विभिन्‍न पार्टी भूमिकाओं में मेरा समर्थन किया है। भारी मन से मैं पार्टी के साथ अपना जुड़ाव खत्‍म करने के अपने फैसले की घोषणा करता हूँ। कॉन्ग्रेस की प्राथमिक सदस्‍यता समेत सभी पद से इस्‍तीफा देता हूँ। इसे स्‍वीकार करें।”

हालाँकि, इस पत्र के वायरल होने के कुछ ही देर बाद उन्होंने इस पत्र के फेक होने का दावा करते हुए कॉन्ग्रेस से इस्तीफे की बात को झूठ करार दिया।  

इस्‍तीफे को लेकर क्‍या बोले दिग्विजय सिंह

कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने अपने इस्तीफे की बात को ख़ारिज करते हुए कहा कि भाजपा झूठ बोलने में माहिर है। मैंने 1971 में कॉन्ग्रेस की सदस्यता ली थी। पद के लिए नहीं, बल्कि विचारधारा से प्रभावित हो कर जुड़ा था और जीवन की आखिरी साँस तक कॉन्ग्रेस में रहूँगा। इस झूठ की मैं पुलिस में शिकायत दर्ज करा रहा हूँ। 

कॉन्ग्रेस नेता ने इस मामले में डीजीपी मध्य प्रदेश को पत्र लिखकर FIR दर्ज करने को कहा है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर अपनी शिकायत पोस्ट करते हुए लिखा,”महोदय क्या आप इन झूठे लोगों पर FIR दर्ज़ करेंगे?”

अलीगढ़ में राम बारात पर पथराव: दावा- मस्जिद के पास जमा हुए थे हमलावर, फरसा-तलवार से हिंदू श्रद्धालुओं पर हमला

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से साम्प्रदायिक तनाव की खबर है। राम बारात में शामिल श्रद्धालुओं ने मुस्लिम कट्टरपंथियों पर हमले का आरोप लगाया है। हमले में लोहे के रॉड और तलवारों का इस्तेमाल होने की खबर है।

आरोपितों के नाम दानिश कुरैशी, यूनिस खान, सलमान, हारून, नासिर, वाहिद, फरीद, कैफ, कलुआ, शमशाद, शाहिद, उवैद, उजैफ, दिलशाद, बिलाल, तल्हा, हनीफ, ज़ाकिर, मौसिम, बाबू, जीशान, जाविद, अतीक, निज़ाम और राजुद्दीन आदि बताए गए हैं। पुलिस ने दोनों पक्षों की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। घटना रविवार (15 अक्टूबर 2023) की है।

घटना अलीगढ़ के चंडौस थाना क्षेत्र की है। सुनील शर्मा ने पुलिस को दी शिकायत में बताया है कि हर साल की तरह इस बार भी परंपरागत तरीके से रामलीला के बाद राम बरात निकाली गई थी। जब बारात कसेरू अड्डा से गुजरी तो उस पर 100-150 असमाजिक तत्वों ने हमला बोल दिया। वे बारात को रोकना चाहते थे। हमलावरों के हाथों में तलवार, तमंचे, डंडे, फरसा आदि थे। शिकायतकर्ता के अनुसार हमला सुनियोजित था और हमलावर एक मस्जिद के पास जमा हुए थे।

ऑपइंडिया के पास शिकायत की कॉपी मौजूद है। इसके अनुसार बारात पर पथराव भी किया गया। अचानक हुए हमले के बाद श्रद्धालुओं में भगदड़ मच गई। शिकायत के अनुसार हिंसा में विष्णु नाम का युवक घायल हुआ है। दावे के मुताबिक उस पर फरसे से हमला किया गया था। शिकायतकर्ता के अनुसार कम से कम 25 लोग हमले में घायल हुए हैं। पीड़ित ने बताया कि उनके पास प्रशासन द्वारा दी गई अनुमति है, जिसमें रूट मैप भी तय था।

हिन्दू पक्ष ने प्रशासन पर भी ढिलाई का आरोप लगाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस घटना से दोनों समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए। मौके पर मौजूद पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने भीड़ को तितर-बितर किया। तनावपूर्ण हालात को देखते हुए कई लोगों ने अपनी दुकानें बंद कर ली। घटना के बाद हिन्दू संगठनों ने थाने के आगे प्रदर्शन किया।

हमले के सामने आए वीडियो में शोभायात्रा में चल रहे वाहन के शीशे भी क्षतिग्रस्त दिखाई दे रहे हैं। इस हिंसा का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। अलीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक IPS कलानिधि नैथानी ने बताया कि राम बारात के साथ DSP और SDM भी चल रहे थे। हालात बिगड़ने से पहले ही पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए स्थिति सामान्य की। दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर हिंसा का आरोप लगा कर तहरीर दी है।

फिलहाल हालात शांतिपूर्ण हैं। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। DIG अलीगढ़ शलभ माथुर के मुताबिक CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों को जाँचा जा रहा है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि थोड़े समय के लिए हुए विवाद के बाद राम बारात बिना किसी व्यवधान के पूर्ण हुई। में पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है।