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बिहार में आँख निकाल हत्या: बेतिया में जिस फोन से माँगी गई फिरौती, वो सिम ताहिर हुसैन के नाम, पुलिस ने बताया प्रेम-प्रसंग का मामला

बेतिया के कुमारबाग ओपी क्षेत्र के रानीपुर रमपुरवा निवासी स्वर्ण व्यवसायी नगनारायण साह के नाबालिग पुत्र आशीष के अपहरण के बाद अब बेरहमी से क़त्ल की बात सामने आई है। गुरुवार (12 अक्टूबर, 2023) की रात 10 बजे के करीब कुमार बाग स्टील प्लांट के पीछे स्थित एक पोखर से छात्र का शव बरामद किया गया था। हालाँकि, पुलिस ने रात में ही शव का पोस्टमार्टम कराया और परिजनों को सौंप दिया। वहीं इस पूरे हत्या के मामले को एक प्रेम प्रसंग के रूप में भी देखा जा रहा है। 

क्या है पूरा मामला 

रिपोर्ट के अनुसार, 11 अक्टूबर, 2023 को आशीष पढ़ाई करने अपने विद्यालय कुमारबाग हाई स्कूल गया था। लेकिन जब छुट्टी के बाद भी घर नहीं लौटा तो उसकी खोज शुरू की गई। उसका बैग और साइकिल स्कूल में ही थी। इसी बीच शाम करीब सात बजे आशीष के पिता के मोबाइल पर फोन आया।

फोन करने वाले ने 20 लाख फिरौती की माँग की। परिजनों द्वारा पुलिस को सूचना देने पर पुलिस हरकत में आई। एसपी डी अमरकेश स्वयं घटना की जाँच करने के लिए पहुँचे। छात्रों से पूछताछ की। वहीं जिस नंबर से फिरौती माँगी गई, जब उसकी जाँच की गई तो पता चला कि सिम मनुआपुल ओपी क्षेत्र के शेख धुरवा के ताहिर हुसैन का है। जबकि घटना कुमारबाग ओपी क्षेत्र रानीपुर रामपुरवा की है। हालाँकि, पुलिस इससे पहले की अपहरण की गुत्थी सुलझाती तब तक छात्र का शव बरामद हो गया। 

प्रेम प्रसंग की वजह से हुई हत्या 

वहीं इस मामले में बेतिया पुलिस ने नया खुलासा करते हुए बताया कि आशीष की हत्या उसके ही क्लास की लड़की के अफेयर में की गई। लड़की का नाबालिग भाई अपने दोस्तों के साथ उसे स्कूल से ले गया था। उसने ही आँखे निकाली और बाद में हाथ-पैर बाँधकर तालाब में फेंक दिया।

वहीं इस मामले में फिरौती को लेकर खुलासा हुआ है कि हत्या में शामिल एक आरोपित को रुपयों की जरूरत थी। उसे पता पता था कि आशीष के परिवार का सोने-चाँदी  का कारोबार है। इसलिए हत्यारों ने आशीष के परिवार को फोन कर 20 लाख रुपए की फिरौती माँगी थी।

पुलिस ने चारो आरोपितों को किया गिरफ्तार 

इस मामले में बेतिया पुलिस ने लड़की के भाई समेत चार को गिरफ्तार कर लिया है। सभी आरोपितों की उम्र 16 साल के आसपास है। वहीं वारदात में इस्तेमाल मोबाइल फोन को भी बरामद कर लिया गया है। 

स्कूल वालों की लापरवाही भी आई सामने 

ग्रामीणों में स्कूल प्रबंधन के खिलाफ भी आक्रोश है। नाराजगी इस बात पर है आशीष स्कूल गया था। दोपहर करीब एक बजे वो स्कूल से निकल कर किसी से मिलने चला गया। 4 बजे स्कूल बंद हुआ तो उसकी साइकिल और बैग वहीं थे, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने न तो परिवार को इसकी जानकारी दी और ना ही पुलिस को बताया कि नौंवी का छात्र क्लास से फरार है।

पुलिस ने बताया प्रेम प्रसंग का मामला 

एसपी डी.अमरकेश ने बताया कि आशीष की हत्या प्रेम-प्रसंग में की गई है। आशीष अपने ही क्लास की एक लड़की से प्यार करता था। जिससे नाराज होकर लड़की के नाबालिग भाई ने अपने गाँव के ही तीन लड़कों के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची। स्कूल से बुधवार को आशीष को अपने साथ बुलाकर ले गए। पुलिस के अनुसार, चारों ने मिलकर उसका हाथ पैर बाँध दिया और पोखर में डालकर उसकी हत्या कर दी।

दिल्ली के जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी कैंपस में हमास का समर्थन, ‘इंतिफादा इंकलाब (जड़ से उखाड़ने)’ के नारे भी: भीड़ में टोपी पहने लड़के, बुर्का पहनीं लड़कियाँ

फिलिस्तीन के इस्लामी आतंकी संगठन हमास द्वारा इजरायल में मानवता के खिलाफ किए गए अपराध के बाद उस पर इजरायल का कहर जारी है। इसको लेकर आतंकियों से सहानुभूति रखने वाले कट्टरपंथियों में बेचैनी है। आज शुक्रवार यानी जुमा को पूरी दुनिया में हमास और फिलिस्तीन के समर्थन में प्रदर्शन किए गए।

भारत के कई शहरों में इजरायल और अमेरिका के खिलाफ नारेबाजी की गई और फिलिस्तीन एवं हमास के प्रति समर्थन दिया गया। इस दौरान ‘अल्लाह हू अकबर’ के भी नारे लगाए गए। दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया में भी कट्टरपंथी छात्र-छात्राओं के गुट ने हमास के समर्थन में प्रदर्शन कर नारे लगाए।

स्वराज्य की पत्रकार स्वाति गोयल द्वारा शेयर किए गए तस्वीरों एवं वीडियो में दिख रहा है कि बुर्का और हिजाब पहनी हुईं छात्राएँ फिलिस्तीन के समर्थन में नारे लगा रही हैं। इसमें उन्होंने एक बैज लगा रखा है, जिसमें लिखा है- ‘हम हमास के साथ हैं’। इस दौरान ‘इंतिफादा इंकलाब’ के नारे भी लगाए गए। इंतिफादा अरबी शब्द है, जिसका अर्थ जड़ से उखाड़ने से है।

हमास ने युद्ध के नियमों की अनदेखी कर इजरायल पर अचानक हमला करके ना सिर्फ सैनिकों की हत्या की, बल्कि छोटे-छोटे शिशुओं की भी गला काटकर और जलाकर मार डाला। महिलाओं का अपहरण कर उनके साथ बलात्कार किया गया। कुछ महिलाओं की हत्या करके उनका जुलूस निकाला गया।

हमास एक कुख्यात आतंकी संगठन है, जो इजरायल में निर्दोष नागरिकों की हत्या करता है। इसका सबूत अभी भी सामने आ रहे हैं। इसके बावजूद जामिया मिलिया इस्लामिया जैसे केंद्रीय विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएँ इस इस्लामी आतंकी संगठन का खुलकर समर्थन कर रहे हैं।

अभी हाल ही में इजरायल के ट्विटर हैंडल ने एक शिशु की तस्वीर शेयर की, जिसमें वह खून से सना दिख रहा है। उसने डायपर पहन रखा है, लेकिन वह भी खून से लाल नजर आ रहा है। इस तस्वीर को शेयर करते हुए लिखा गया, “अब तक जितनी भी फोटो हमने पोस्ट की है, उसमें से इसे पोस्ट करना सबसे तकलीफदेह रहा है।”

हैंडल ने आगे लिखा, “जब हम यह लिख रहे हैं, हम काँप रहे हैं। इस फोटो को पोस्ट किया जाए या नहीं, इसको लेकर हम बार-बार असमंजस में थे। फैसला नहीं कर पा रहे थे। अंततः हमने इसे पोस्ट किया ताकि दुनिया को पता चल सके कि हमारे साथ, हमारे बच्चों के साथ क्या-क्या हुआ।”

दरअसल, गाजा पट्टी सिर्फ 400 मीटर दूर एक गाँव है, नाम है – किबुत्ज़ कफ़र अज़ा। यहाँ हमास के इस्लामी आतंकियों ने 100 से ज्यादा लोगों को मार डाला। इनमें 40 बच्चे भी शामिल हैं। 40 बच्चों की मौत और बर्बरता के साथ इस्लामी आतंकियों का नाम जुड़ गया तो फर्जी फैक्ट चेकर अब यह चिल्ला रहे कि इन बच्चों का गला नहीं काटा गया। बस इस पर चुप्पी है कि बच्चे मारे ही क्यों गए?

एक लड़की की लाश को अर्द्धनग्न कर पिक-अप वैन में घुमाया गया, उस पर थूका गया तो इस्लामी मजहब को मानने वाली भारत की एक महिला पत्रकार यह एंगल लेकर आ गई कि शायद उस लड़की ने मरते वक्त उतना ही कपड़ा पहना होगा… बस इस सवाल को नहीं उठा पाई कि आखिर मारा ही क्यों हमास के इस्लामी आतंकियों ने?

फिलिस्तीन में रहने वाले हमास के इस्लामी आतंकी जहाँ एक ओर इतनी बर्बरता कर रहे, वहीं दूसरी ओर दुनिया भर के कट्टर मुस्लिम और वामपंथी इनके समर्थन में जुटे हैं और प्रदर्शन कर रहे हैं। कुछ तो जश्न भी मना रहे हैं। ऐसे लोगों में वे लोग भी शामिल हैं, जो पढ़े-लिखे हैं, बॉलीवुड में काम करते हैं।

जुमे के दिन बीजिंग में इजरायली राजनयिक पर चाकू से हमला, फ्रांस में अल्लाह-हू-अकबर के नारे के साथ टीचर को उतारा मौत के घाट: वीडियो वायरल

हमास द्वारा इजरायल पर बर्बर आतंकी हमले और उसके बाद इजरायल द्वारा दिए जा रहे करारा जवाब के बीच जहाँ हमास आतंकियों की हिम्मत बढ़ती ही जा रही है। अब दूसरे देशों में भी इजरायलियों को निशाना बनाने की खबरें आने लगी हैं। पहली खबर है बीजिंग से जहाँ एक इजरायली राजनयिक पर चाकू से हमला किया गया है वहीं दूसरे मामले में अल्लाह-हू-अकबर नारे के साथ फ्रांस में एक टीचर को मौत के घाट उतार दिया गया।

बीजिंग में राजनयिक पर हमला  

दरअसल, इजराइल और हमास के बीच चल रहे युद्ध के बीच चीन के बीजिंग में इज़राइल के दूतावास में काम करने वाले एक राजनयिक पर दूतावास के करीब ही चाकू से हमला कर दिया गया। शुक्रवार (13 अक्टूबर, 2023) को हुए इस हमले में राजनयिक को गंभीर चोटें आईं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। यह सब तब हुआ जबकि इज़राइल ने पहले ही दूसरे देशों में रह रहे अपने नागरिकों और राजनयिकों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है क्योंकि हमास के खिलाफ युद्ध के नतीजे के रूप में उन पर हमला किया जा सकता है।

आज शुक्रवार की नमाज का दिन होने के कारण खतरे की आशंका अधिक थी। और हुआ भी कुछ ऐसा ही। हालाँकि, राजनयिक की पहचान अभी उजागर नहीं की गई है। वैसे इस मामले में भी आतंकी हमले के एंगल से इनकार नहीं किया गया है। हमले की घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। 

बीजिंग में हमले की पुष्टि इजराइल के विदेश मंत्रालय ने करते हुए कहा कि राजनयिक को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया और उनकी हालत स्थिर है। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि इजरायली नागरिकों पर यह हमले इजरायल द्वारा गाजा के आतंकवादियों पर इजरायली प्रतिक्रिया के विरोध में हो रहे हैं क्योंकि हमास ने शुक्रवार को दुनिया भर में “एंगर दिवस” मनाने ​​का आह्वान किया, जिसमें इजरायल और दुनिया भर में समर्थकों से गाजा में इजरायल के सैन्य अभियान की प्रतिक्रिया में यहूदियों पर हमला करने का आग्रह किया गया।

फ़्रांस में भी जुमे पर चाकू से हमला, टीचर की मौत 

फ्रांस के एक हाई स्कूल में चाकू से किए गए हमले में एक शिक्षक की मौत हो गई और कम से कम चार अन्य घायल हो गए। इस मामले के बारे में फ्रांसीसी समाचार आउटलेट बीएफएमटीवी के अनुसार, अर्रास हाई स्कूल गैम्बेटा में हमले के दौरान संदिग्ध ने “अल्लाह-हू-अख़बर” के नारे भी लगाए। 

बीएफएमटीवी का कहना है कि हमलावर लगभग 20 साल का था और कोई पूर्व छात्र भी हो सकता था। कथित तौर पर उसके भाई को भी गिरफ्तार किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, कथित पीड़ितों में दो शिक्षक और एक तकनीकी एजेंट शामिल थे, जिनमें से एक घायल हो गया और एक की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इस हमले में मारे गए व्यक्ति एक फ्रांसीसी भाषा के शिक्षक थे, जबकि एक खेल शिक्षक को भी कथित तौर पर चाकू मारकर घायल कर दिया गया है। यह मामला आज शुक्रवार सुबह 11 बजे का है। 

BBC के लिए हमास नहीं है आतंकी, रिपोर्टर ने दिखाई औकात: हिंदू देवी-देवताओं के कार्टून ‘निष्पक्ष पत्रकारिता’, पैगंबर मोहम्मद पर माँगता है माफी

नोआ अब्राहम्स (Noah Abrahams) नाम का एक पत्रकार है। बीबीसी के लिए काम करता था। 12 अक्टूबर 2023 को इस्तीफा दे चुका है। कारण? फिलिस्तीन में रहने वाले हमास आतंकियों ने इजरायल में जो बर्बरता मचाई है, उसके बावजूद बीबीसी इनके लिए आतंकी शब्द का इस्तेमाल नहीं करता है। हमास के हत्यारों के लिए बीबीसी आखिर लिखता क्या है? उत्तर है – अतिवादी, चरमपंथी, फ़लस्तीनी लड़ाके आदि।

नोआ अब्राहम्स की उम्र मात्र 22 साल है। इस्तीफे के बाद नोआ ने वीडियो इंटरव्यू देते हुए कहा कि उनके पास नैतिकता है और वो अपने मूल्यों पर कायम हैं। ‘निष्पक्ष पत्रकारिता’ के नाम पर 101 साल पुरानी संस्था बीबीसी की पोल-पट्टी खोलते हुए उनके पूर्व पत्रकार नोआ ने कहा:

“उचित और अनुचित (हमास को आतंकी बोलने और नहीं बोलने के संबंध में) शब्द को बहुत अधिक उछाला गया। मुझे लगता है कि बीबीसी द्वारा सही शब्दावली (हमास के संबंध में) का उपयोग करने से इनकार करना अनुचित है। उनके द्वारा इन लोगों को आतंकी बोलने के बजाय आजादी के लड़ाके (फ्रीडम फाइटर) बोलना जनता को गुमराह करना है, सच्चाई से मुँह मोड़ना है।”

आतंक पर बीबीसी की पत्रकारिता

बीबीसी ब्रिटेन की जनता के टैक्स से आए पैसों से चलता है। मतलब इसे आप मोटा-मोटी सरकारी मीडिया कंपनी जैसा समझ सकते हैं, भारत के दूरदर्शन की तरह। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक हमास को आतंकी मानते-बोलते हैं। मतलब जनता ने जिसे अपना प्रधानमंत्री चुना, वो हमास को आतंकी कह रहा लेकिन जनता के पैसों पर पलने वाले बीबीसी के लिए हमास के लोग हैं – अतिवादी, चरमपंथी, फ़लस्तीनी लड़ाके आदि। घटना 1, शब्द 3… यह कैसी संपादकीय नीति है?

लंदन की गलियों से दूर इजरायल में अगर कोई संगठन बच्चों का कत्ल कर रहा है, महिलाओं को मारने के बाद नंगा करके उनकी परेड निकाल रहा है,एक ही रात में 5000 से ज्यादा रॉकेट दाग रहा है… बीबीसी के लिए यह सब आतंक की श्रेणी में नहीं आता है। बीबीसी क्योंकि ‘निष्पक्ष पत्रकारिता’ करता है, दुनिया भर में इसका ढिंढोरा पीटा जाता है। सही है। हर संस्था को अपने मानक तय करने का अधिकार होना चाहिए, पॉलिसी निर्धारण में किसी भी तरह का दबाव गलत है।

इजरायल-फिलिस्तीन से दूर भारत में जो इस्लामी आतंकी हत्याएँ करते हैं, उनके लिए बीबीसी क्या शब्द लिखता है, यह भी देख लेते हैं – चरमपंथी, कभी-कभी संदिग्ध चरमपंथी भी (मतलब चरमपंथी है भी या नहीं, यह संदिग्ध है… भले वो किसी की हत्या कर चुका हो)। मतलब देश अलग होने से बीबीसी ने ‘निष्पक्ष पत्रकारिता’ के पैमाने नहीं बदले, इन दो उदाहरणों से यह तो स्पष्ट है।

अब सवाल यह है कि आतंक अगर ब्रिटेन की सीमाओं के अंदर हो, तो यही बीबीसी कैसी रिपोर्टिंग करवाती है, कैसे शब्दों का चयन करती है? इसका जवाब है, नीचे लगी हुई स्क्रीनशॉट:

BBC में आतंक की दो परिभाषा

खबर आयरलैंड की है। खबर के अनुसार आतंकी हमला हुआ भी नहीं है। आतंकी हमला होने की संभावना है। इस संभावना को देखते हुए पुलिस और सुरक्षाबलों से मुस्तैद रहने को कहा गया है। ‘निष्पक्ष पत्रकारिता’ करने वाले बीबीसी की ऐसी क्या मजबूरी रही होगी, जिसके कारण उसे ‘आतंकी हमले की संभावना’ जैसे टर्म लिखना पड़ा? चरमपंथी हमला लिखने में क्या बुराई थी, संपादकीय नीति चरमरा जाती क्या?

बीबीसी की ‘निष्पक्ष पत्रकारिता’ क्या है, ऊपर वाली खबर के कवरेज ने एक लाइन में समझा दी है – अपनों का नाखून भी कटे तो आतंक है, दूर किसी का खून भी बह जाए तो शांति है।

‘सर तन से जुदा’ और बीबीसी की माफी

वापस लौटते हैं नोआ अब्राहम्स (Noah Abrahams) पर। बीबीसी में काम किए बिना उनकी संपादकीय नीति में मैंने खोट निकाल ली है। सिर्फ गूगल सर्च के सहारे। सोचिए जो नोआ वहाँ हर दिन काम करता होगा, संपादकीय मीटिंग, उनकी बहसों, तर्क-वितर्कों का हिस्सा बनता होगा, उसे कितना कुछ मालूम होगा। नोआ का इस्तीफा बीबीसी की ‘निष्पक्ष पत्रकारिता’ के नाम पर जोरदार तमाचा है।

बीबीसी ने अपने पाठकों के साथ हमेशा धोखा किया है, हमास को आतंकी नहीं बोलने और ‘निष्पक्ष पत्रकारिता’ का ढिंढोरा पीटने का इनका यह रोग नया नहीं है। बलात्कार के साथ भगवान राम और माता सीता को जोड़ते हुए कार्टून इसी बीबीसी ने छापे थे। लाठी लिए कुछ गुंडों के सामने भगवान राम को रोते और हाथ जोड़ने वाला कार्टून भी यहीं छपा है। प्रेस की स्वतंत्रता है, होनी भी चाहिए… जिस भारत में राम सबके भगवान हैं, वहाँ बीबीसी पर किसी ने हमला नहीं किया, कोई केस नहीं हुआ।

खबर जब इस्लाम और मुस्लिमों से जुड़ी हो तो बीबीसी क्या करता है, अब सवाल यह है। भगवान राम की तरह क्या यह इस्लामी मजहब के प्रतीकों का कार्टून बना पाता है? बीबीसी ने एक बार एक वीडियो बनवाई थी, इसमें पैगंबर मोहम्मद का चित्र दिखाया गया था। बवाल मच गया। ‘निष्पक्ष पत्रकारिता’ करने वाली बीबीसी ने फौरन वीडियो डिलीट किया। लेकिन यह काफी नहीं था। माफ़ी भी माँगी। इसका कारण तो बीबीसी ने नहीं बताया लेकिन शायद उन्हें शार्ली हेब्दो के ऑफिस में मचे कत्लेआम वाली खबर याद आ गई होगी।

मतलब ‘निष्पक्ष पत्रकारिता’ तो सही है लेकिन… अपनों का नाखून भी कटे तो आतंक है!!!

जुमे पर भारत भर में निकला ‘उम्माह का जिन्न’: हमास-फिलस्तीन के समर्थन में लगे ‘अल्लाहू अकबर’ के नारे, इजरायल के विरोध में सड़क पर कट्टरपंथी-वामपंथी

फिलिस्तीन के आतंकी संगठन हमास पर इजरायल की कार्रवाई के विरोध में देश के कई शहरों में जुमे पर प्रदर्शन किए गए। शुक्रवार यानी जुमे (13 अक्टूबर 2023) को देखते हुए कई शहरों में पुलिस पहले से ही सतर्क थी। हालाँकि, जिस बात की आशंका जाहिर की जा रही थी, वह सही ही साबित हुई। देश के कई शहरों में वामपंथी और इस्लामी कट्टरपंथियों ने फिलिस्तीन और हमास के समर्थन में प्रदर्शन किया।

जुमे पर प्रदर्शन के दौरान इजरायल मुर्दाबाद के नारे लगाए गए और इस दौरान इजरायल के झंडे भी जलाए गए। जम्मू-कश्मीर के बडगाम में जुमे की नमाज के लिए बड़ी संख्या में जुटे। इसके बाद उन्होंने ‘नारा ए तकबीर, अल्लाह हू अकबर’ के नारे लगाए। इसके साथ ही इजरायल और अमेरिका के खिलाफ भी नारे लगाए गए। उनके हाथों में उर्दू और अंग्रेजी में लिखी तख्तियाँ भी थीं।

प्रदर्शन करने वाले लोगों के हाथों में तख्तियाँ थीं। सामने आईं तस्वीरों में दिख रहा है कि उन तख्तियों में से एक पर ईरान के इस्लामी नेता मोहम्मद अली खुमेनेई की तस्वीर बनी हुई थी। एक तख्ती पर अंग्रेजी में ‘या अल्लाह गाजा और फिलिस्तीन में हमारे भाई-बहनों की हिफाजत करना’ लिखा हुआ दिख रहा है।

के चंद्रशेखर राव की पार्टी BRS द्वारा शासित तेलंगाना में भी इजरायल के खिलाफ और फिलिस्तीन एवं हमास के समर्थन में प्रदर्शन किए गए। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में वामपंथी/कट्टरपंथियों ने तख्तियाँ लेकर प्रदर्शन किया। सामने आए वीडियो फुटेज में दिख रहा है कि एक तख्ती पर लिखा है, ‘गाजा कभी खत्म नहीं होगा’।

प्रदर्शनकारियों की हाथों में फिलिस्तीन के झंडे वाली भी तख्तियाँ थीं। कुछ तख्तियों पर उर्दू में कुछ लिखा हुआ था। इनके नीचे ‘नौजवान भारत सभा’ और ‘दिशा स्टूडेंट्स ऑरगेनाइजेशन’ का नाम लिखा हुआ था। इस दौरान ‘इजरायल का बॉयकॉट करो’ और ‘फिलिस्तीनी आवाम का संघर्ष जिंदाबाद’ के नारे लगाए गए।

ये सारे प्रदर्शनकारी डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के नीचे प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान पुलिस एवं कुछ महिला पुलिस इन प्रदर्शनकारियों के हाथों में से तख्तियाँ भी लेने की कोशिश कीं, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने इसे नहीं दी और अपने प्रदर्शन को जारी रखा।

वहीं, ममता बनर्जी की पार्टी TMC द्वारा शासित पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में भी फिलिस्तीन के समर्थन में प्रदर्शन किए गए। माइनॉरिटी यूथ फोरम के सदस्यों ने फिलिस्तीन के समर्थन में प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारी फिलिस्तीन की आजादी के बैनर लहराए। संगठन ने यह भी कहा कि भारत को इजरायल का समर्थन नहीं करना चाहिए। प्रधानमंत्री को भेजने के लिए उन्होंने राज्यपाल को ज्ञापन भी सौंपा।

उधर, एमके स्टालिन के राज्य तमिलनाडु में भी इजरायल के विरोध में प्रदर्शन किए गए। चेन्नई में तमिलनाडु मुस्लिम मुनेत्र कझगम ने फिलिस्तीन और हमास के समर्थन प्रदर्शन किया। इसके अलावा, स्टूडेंट इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया (SIO) ने भी जुमे के दौरान यानी आज 13 अक्टूबर को फिलिस्तीन के समर्थन में पूरे देश में प्रदर्शन करने की बात कही है। यह भी कहा जा रहा है कि प्रतिबंधित इस्लामी संघटन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से संबद्ध सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) फिलिस्तीन की आजादी को लेकर देश भर में प्रदर्शन करने जा रहा है। 

बता दें कि हमास के आतंकी हमले के खिलाफ इजरायल की कार्रवाई के विरोध में पश्चिम एशिया के कई देशों में जुमे पर विरोध प्रदर्शन की आशंका जाहिर की गई थी। भारत में भी एजेंसियाँ सतर्क हैं। दिल्ली-एनसीआर, तेलंगाना, केरल, यूपी, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, जम्मू कश्मीर, कर्नाटक आदि राज्यों में सुरक्षा एजेंसियाँ अलर्ट पर हैं।

दिल्ली में सुरक्षा एजेंसियाँ विशेष रूप से चौकस हैं। ऐसे संगठनों पर विशेष रूप से नजर रखी जा रही है, जो लोगों को भड़का कानून व्यवस्था की स्थिति को खराब कर सकते हैं। इसको देखते हुए नमाज के बाद लोगों को एक स्थान पर एकत्रित नहीं होने के लिए कहा गया है।

इसके अलावा, दिल्ली स्थित इजरायल दूतावास और देश के यहूदी आबादी वाले इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई। दूतावास के अधिकारियों की भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इसके साथ ही देश में माहौल को खराब करने की कोशिश करने वाले सोशल मीडिया हैंडलों पर भी सरकार की पैनी नजर है।

ऑपरेशन अजय शुरू, इजरायल से घर लौटे 212 भारतीयों ने मोदी सरकार का जताया आभार: भारत माता के जयकारों से गूँजा दिल्ली एयरपोर्ट

इजरायल पर इस्लामी आतंकी संगठन हमास के हमलों के बाद शुरू हुई जंग के बीच भारत सरकार ने ‘ऑपेरशन अजय’ शुरू किया है। इसके तहत 13 अक्टूबर 2023 की सुबह 212 भारतीय नागरिक इजरायल से स्वदेश लौटे। सकुशल घर वापसी के लिए इनलोगों ने मोदी सरकार का आभार जताया है। इस दौरान दिल्ली एयरपोर्ट भारत माता के जयकारों से गूँज उठा।

इन भारतीयों को लेकर तेल अवीव से एयर इंडिया के विशेष विमान ने 12 अक्टूबर की रात उड़ान भरी थी। सुबह-सबेरे भारत की जमीन पर इनका स्वागत करने के लिए केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर खुद एयरपोर्ट पर मौजूद थे। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार किसी भी भारतीय को कभी पीछे नहीं छोड़ेगी। हमारी सरकार, प्रधानमंत्री उनकी सुरक्षा के लिए, उन्हें सुरक्षित घर वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम विदेश मंत्री एस जयशंकर, विदेश मंत्रालय की टीम, एयर इंडिया के चालक दल के आभारी हैं जिन्होंने इसे संभव बनाया।”

सुरक्षित घर लौटे भारतीय ने एयरपोर्ट पर वंदेमातरम और भारत माता की जय के नारे लगाए। इसका वीडियो वायरल है। वापसी के लिए भारत सरकार की तारीफ की।

इज़रायल से लौटी एक महिला ने कहा, “जब यह सब शुरू हुआ, उसके दूसरे दिन से ही हम भारत सरकार के संपर्क में थे। वे व्हाट्सएप समूहों पर सक्रिय थे और हमारे साथ संपर्क में थे। वे हमारे साथ सहयोग कर रहे थे, सारी जानकारी मुहैया करा रहे थे।”

एक अन्य भारतीय नागरिक ने कहा, “इज़रायल में युद्ध शुरू होने के बाद हमें भारत से हमारे परिवार और दोस्तों के फोन आने लगे थे, सभी हमारे लिए फिक्रमंद थे। इस ऑपरेशन के जरिए इजरायल से सुरक्षित भारत लाने के लिए मैं भारत सरकार का शुक्रिया अदा करता हूँ।”

भारत लौटे मनोज कुमार ने कहा, “मैं वहाँ पर बतौर पोस्ट डॉक्टोरल फेलो के रूप में कार्यरत था। मेरी पत्नी और 4 वर्ष की बेटी भी साथ थी। तेल अवीव स्थित भारतीय दूतावास का धन्यवाद करता हूँ कि उन्होंने काफी सहयोग किया। साथ ही सुरक्षित रूप से भारत लाने के लिए भारत के विदेश मंत्रालय का धन्यवाद करता हूँ। इज़रायल की सरकार भी दिन-रात काम कर रही है।”

ऑपरेशन अजय के तहत इज़रायल से भारत आई एक अन्य महिला ने कहा, “मेरा बेटा अभी केवल 5 महीने का है। हम जिस स्थान पर थे वह सुरक्षित था। लेकिन आगे की परिस्थिति और अपने बेटे के लिए हमने भारत आने का फैसला लिया। पहली रात हम सो रहे थे तभी एक सायरन बजा, हम वहाँ बीते 2 साल से थे। हमने ऐसी परिस्थिति पहले कभी नहीं देखी थी। हम शेल्टर में गए, हम 2 घंटे के लिए शेल्टर में रहे। अब हम काफी बेहतर महसूस कर रहे हैं, मैं भारत सरकार और प्रधानमंत्री का धन्यवाद करती हूँ।”

वहीं भारत लौटी स्वाति पटेल ने बताया, “यहाँ आकर बहुत अच्छा लग रहा है। वहाँ जब सायरन बजता है तो बहुत डर लगता है। सायरन बजने पर शेल्टर में जाना होता है। यहाँ हम सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। जब भी सायरन बजता था तब हमें 1.5 मिनट में शेल्टर में जाना होता था।”

‘आपकी याचिका में दम नहीं’: न्यूजक्लिक के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ को हाईकोर्ट ने नहीं दी राहत, चीन की दलाली में हुई थी गिरफ्तारी

चीन और पाकिस्तान से पैसा लेकर देश में प्रोपेगेंडा चलाने वाले न्यूज वेब पोर्टल न्यूजक्लिक के मुखिया प्रबीर पुरकायस्थ को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका लगा है। केंद्रीय जाँच एजेंसी CBI द्वारा की गई गिरफ्तारी को उन्होेंने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हालाँकि, दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार (13 अक्टूबर 2023) को उनकी याचिका खारिज कर दी।

प्रबीर पुरकायस्थ के साथ ही संस्था के मानव संसाधन विभाग के प्रमुख अमित चक्रवर्ती को भी गिरफ्तार किया गया है। दोनों आरोपितों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (UAPA Act) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच ने दोनों की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, “मामले में कोई दम नहीं पाते हुए इसे खारिज किया जाता है”। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने 9 अक्टूबर 2023 को इस मामले में अपने फैसले को सुरक्षित रख लिया था। अब इसे खारिज कर दिया है।

पुरकायस्थ और चक्रवर्ती के ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और दया कृष्णन उपस्थित हुए। वहीं, सरकार की ओर से भारत सरकार के सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता उपस्थित हुए। मेहता ने कहा कि यह मामला देश की स्थिरता और अखंडता से समझौता है।

कोर्ट में मेहता ने कहा, “सबसे गंभीर आरोपों में से एक यह है कि वे भारत की उत्तरी सीमाओं के साथ एक नक्शा तैयार करते हैं, जिसमें अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर को भारत का हिस्सा नहीं दिखाया गया है।” उन्होंने यह भी कहा कि आरोपित को गिरफ्तारी के बारे में सूचित किया गया और विशेष अदालत के समक्ष पेश किया गया।

दरअसल, इन पुरकायस्थ और चक्रवर्ती की गिरफ्तारी का विरोध करते हुए सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कोर्ट में दलील दी कि पुलिस ने आज तक आरोपियों को गिरफ्तारी का आधार नहीं बताया है। सिब्बल ने कहा कि उन्हें सिर्फ गिरफ्तारी मेमो दिया गया है। इसके पीछे सिर्फ सामान्य कारण बताए गए।

वहीं, कृष्णन ने तर्क दिया कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 22 कुछ मामलों में गिरफ्तारी और हिरासत के खिलाफ सुरक्षा से संबंधित है और सीआरपीसी प्रावधान जो कहता है कि गिरफ्तार किए गए किसी भी व्यक्ति को अवैध हिरासत में नहीं रखा जाएगा, दोनों का इस मामले में उल्लंघन किया गया था। उन्होंने कहा, “मुझे न तो गिरफ्तारी का आधार दिया गया और न ही मुझे अपने वकील को उपस्थित होने की अनुमति दी गई।”

बताते चलें कि न्यूजक्लिक के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ और अमित चक्रवर्ती इस वक्त न्यायिक हिरासत में हैं। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरदीप कौर ने 10 अक्टूबर 2023 को दोनों आरोपितों को 10 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा था।

एफआईआर में कहा गया है कि आरोपितों ने अवैध रूप से विदेशी से करोड़ों रुपए का फंड लिया और इसका इस्तेमाल भारत की संप्रभुता, एकता और सुरक्षा को बाधित करने के इरादे से इस्तेमाल किया। एफआईआर में कहा गया है कि करोड़ों रुपये की ये धनराशि न्यूज़क्लिक को पाँच वर्षों की अवधि में अवैध तरीकों से प्राप्त हुई थी।

इजरायल का झंडा जला रहा था हमास का समर्थक, उसकी आग में खुद ही जल गया: वायरल हो रहे वीडियो का जानिए पूरा सच

हमास के क्रूर हमलों का इजरायल गाजा पट्टी में सख्ती से जवाब दे रहा है। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें एक व्यक्ति इजरायल का एक बड़ा सा झंडा पकड़े हुए है और दूसरा व्यक्ति उसमें आ लगाकर जैसे ही हटता है। उसके कुछ ही सेकंड में आग भड़कती है और झंडा पकड़े उस व्यक्ति को अपने चपेट में ले लेती है। 

जिसे कई लोगों द्वारा शेयर किया जा रहा ज़्यादातर लोगों ने कैप्शन में लिखा है- “हमास के मौजूदा हालात, देखें- हमास समर्थक ने गलती से खुद को आग लगा ली! कर्म अद्भुत तरीके से कार्य करता है।”

हालाँकि, जब हमने थोड़ी पड़ताल की तो वीडियो पुराना निकला। 2021 में भी इसे कई हैंडलों द्वारा शेयर किया गया है। जिसमें ज़्यादातर मुस्लिम नामों वाले सोशल मीडिया हैंडल हैं। जो इजरायल के विरोध में इस वीडियो को शेयर कर रहे थे।

कहाँ का है वीडियो?

इस वीडियो के बारे में जानकारी देते हुए टाइम्स ऑफ़ इजरायल ने इसे ईरानी वीडियो बताया है। टाइम्स ऑफ़ इजरायल ने लिखा है, “सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे एक वीडियो में दिख रहा है कि ईरान में एक व्यक्ति एक बड़ा सा इजरायली झंडा हाथ में लिए हुए है, जिसमें उसने आग लगा दी है, इससे पहले कि वह कुछ समझ पाता वह खुद ही आग की लपटों में घिरा भागता हुआ नजर आता है।

मजेदार बात यह है कि जब इजरायली झंडा जलाया जा रहा है तब वहाँ फिलिस्तीनी झंडा लिए एक भीड़ मौजूद है। इसके बाद भी जैसे ही आग इजरायली झंडा जलाने वाले व्यक्ति को अपने चपेट में लेती है। उसके भागने के साथ लगाकर भागते ही फिलिस्तीनी झंडाथामे हुए लोगों का एक समूह भी उससे दूर हटता नजर आता है।

सोशल मीडिया के अनुसार, यह वीडियो अल-कुद्स दिवस के विरोध प्रदर्शन के दौरान का बताया जा रहा है।

बता दें कि ईरान ने इस्लामिक क्रांति के वर्ष, 1979 में अल-कुद्स दिवस या जेरूसलम दिवस की शुरुआत की। ईरान में शासन द्वारा इस दिन इजरायल विरोधी भाषणों, घटनाओं और यरूशलेम को इजरायली नियंत्रण से “मुक्त” करने की धमकियों के साथ मनाया जाता है। इसमें ईरानी जनता भी शामिल होकर इजरायल को समाप्त करने जैसी दलीलें देती है और विरोध प्रदर्शन करती है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर वीडियो भले ही अब इजरायल और हमास के बीच चल रही तनातनी के समय वायरल हो रहा है लेकिन वीडियो पुराना है और ईरान का है न कि किसी हमास आतंकी या सपोर्टर का। हाँ, यहाँ भी इजरायल के विरोध और फिलिस्तीन के समर्थन में ही इजरायली झंडा जलाया जा रहा था।

रो रही थी बेटी तो महिला ने कैंसिल कर दी राइड, WhatsApp पर कैब ड्राइवर ने नंगी फोटो और वीडियो की लगा दी झड़ी: बेंगलुरु की घटना

राइड शेयरिंग ऐप के जरिए कैब बुक करने पर राइड कैंसिल करना सामान्य सी बात है। कई बार तो ड्राइवर खुद भी ऐसा करते हैं। कुछ मामलों में राइड कैंसिल करने पर यूजर्स से चार्ज भी वसूला जाता है। लेकिन बेंगलुरु में कैब राइड कैंसिल करने पर महिला कस्टमर के व्हाट्सऐप नंबर पर ड्राइवर ने नंगी तस्वीरों और वीडियो की झड़ी लगा दी।

32 साल की पीड़ित महिला ने इसको लेकर 9 अक्टूबर 2023 को पुलिस से शिकायत की। इसके आधार पर आईपीसी की धारा 354 ए यौन उत्पीड़न और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। आरोपित की पहचान दिनेश के तौर पर हुई है। उसकी तलाश की जा रही है।

महिला के अनुसार उन्होंने 7 अक्टूबर को अपनी बेटी को स्कूल से ले जाने के ऐप के जरिए कैब राइड बुक की थी। उन्होंने बताया, “मेरी बेटी पैदल नहीं चलना चाहती है तो मैंने कैब बुक किया। बुकिंग के तीन मिनट बाद मेरी बच्ची रोने लगी। एक ऑटो दिखने पर मैने राइड कैंसिल कर दी। इसके लिए मेरे से 60 रुपए का चार्ज भी लिया गया।”

लेकिन राइड कैंसिल करते ही महिला की मुश्किलें शुरू हो गई। ड्राइवर उन्हें बार-बार कॉल करने लगा। उनसे कहा कि वह 5 किमी की दूर तय कर चुका है और उनके लोकेशन के करीब ही है। पीड़ित महिला के अनुसार उन्होंने इसके बाद ड्राइवर से माफी भी माँगी। बावजूद दो दिनों तक ड्राइवर उनको अश्लील मैसेज भेजते रहा।

महिला ने बताया कि उन्होंने कैब ड्राइवर से कहा था कि उनकी बच्ची रो रही है। वह जल्दी आए। उन्होंने दो मिनट तक इसके बाद उसका इंतजार भी किया। लेकिन कहीं कैब नजर नहीं आने के बाद उन्होंने ऑटो रिक्शा ले लिया था।

महिला की मजबूरी और माफी के बावजूद ड्राइवर उन्हें लगातार कॉल और मैसेज करता रहा। पीड़ित महिला बेंगलुरु के इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी के पास बासपुरा में एक अपार्टमेंट में रहती हैं। उनके पास व्हाट्सऐप से डाउनलोड की गई फोटो का स्क्रीनशॉट था जो ड्राइवर ने उन्हें भेजा था। उन्होंने बताया, “मुझे रोता देख पड़ोसियों ने मेरा फोन ले लिया और ड्राइवर को डाँटा। पड़ोसियों ने उसे चेतावनी देते हुए कहा कि उनके पास सभी मैसेज के स्क्रीनशॉट हैं। इसके बाद ड्राइवर ने तुरंत सारे मैसेज डिलीट कर दिए।”

पीड़ित महिला ने पूछा है कि राइड कैंसिल करने के बाद ड्राइवर के पास उनका नंबर कैसे गया। पुलिस ने भी एग्रीगेटर से ड्राइवर का डिटेल मुहैया कराने को कहा है। उल्लेखनीय है कि सामान्य तौर पर राइड बुक करने पर न तो कस्टमर के पास ड्राइवर का नंबर आता है और न ही ड्राइवर के डायरेक्ट एक्सेस में कस्टमर का नंबर होता है। एग्रीगेटर कंपनी के ऐप जरिए दोनों की बात होती है।

P20 से आतंकवाद पर PM मोदी का प्रहार, कहा- अब लड़ना ही होगा: खालिस्तान पर थू-थू करवा G20 संसदीय अध्यक्षों के सम्मेलन में नहीं आया कनाडा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में आयोजित जी-20 की पार्लियामेंट्री स्पीकर समिट (P-20 Summit) में शुक्रवार (13 अक्टूबर 2023) को आतंकवाद का मुद्दा एक बार फिर जोर-शोर से उठाया। पीएम मोदी ने यह मुद्दा ऐसे समय में उठाया है जब फिलिस्तीन के आतंकी संगठन हमास ने इजरायल पर हमला करके नवजात शिशुओं से लेकर बुजुर्गों एवं महिलाओं तक को मौत के घाट दिया है।

प्रधानमंत्री ने संसदीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत कई दशकों से आतंकवाद का सामना कर रहा है। आज यह आतंकवाद विश्व के हिस्सों में अलग-अलग रूपों में पहुँच चुका है। इससे दुनिया को इसकी भयावहता का अहसास हो गया है। उन्होंने कहा कि इसमें सबसे दुखद पहलू ये है कि आतंकवाद की परिभाषा को लेकर आम सहमति नहीं बन पाई है।

प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया भर से आए स्पीकर को संबोधित करते हुए कहा, “भारत दशकों से क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म का सामना कर रहा है। आतंकवादियों ने भारत में हजारों निर्दोषों की जान ली है। करीब 20 साल पहले आतंकवादियों ने हमारी संसद को भी निशाना बनाया था। उस समय संसद का सत्र चल रहा था। आतंकियों की तैयारी सांसदों को बंधक बनाने की थी, उन्हें खत्म करने की थी। भारत ऐसे अनेकों आतंकी वारदातों से निपटते हुए आज यहाँ पहुँचा है।”

टेररिज्म को लेकर दुनिया भर के देशों के दोहरे रवैये को लेकर पीएम मोदी ने कहा, “अब दुनिया को भी अहसास हो रहा है कि टेररिज्म दुनिया के लिए आज कितनी बड़ी चुनौती है। टेररिज्म चाहे कहीं भी होता हो, किसी भी कारण से होता हो, किसी भी रूप में होता हो, लेकिन वो मानवता के विरुद्ध होता है। ऐसे में टेररिज्म को लेकर हम सभी को लगातार सख्ती बरतनी ही होगी।”

टेररिज्म की परिभाषा को लेकर एकराय नहीं बनने पर पीएम ने कहा, “टेररिज्म की परिभाषा को लेकर आम सहमति ना बन पाना, ये बहुत दुखद है। आज भी यूनाइटेड में नेशन्स में ‘इंटरनेशनल कन्वेंशन ऑन कॉम्बैटिंग टेररिज्म कन्सेंशस’ का इंतजार कर रहा है। दुनिया के इसी रवैये का फायदा मानवता के दुश्मन उठा रहे हैं। दुनिया भर की पार्लियामेंट्स को… रिप्रेजेंटेटिव्स को सोचना होगा कि इस लड़ाई में हम मिलकर कैसे काम कर सकते हैं।”

वहीं, विदेश में बैठकर भारत में अलगाववाद को हवा देने खालिस्तानी आतंकियों का पक्ष लेने वाला कनाडा इस सम्मेलन में शामिल नहीं हुआ है। कनाडा सीनेट की स्पीकर रेममोंडे गैग्ने ने पहले लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला से संसदीय सम्मेलन पी-20 में हिस्सा लेने की सहमति जताई थी, लेकिन वह इसमें अनुपस्थित रहीं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि भारत ने सभी सदस्य देशों को आमंत्रित किया था। यह उन पर निर्भर है कि वेहिस्सा लेते हैं या नहीं।

दरअसल, कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो ने आरोप लगाया था कि 18 जून 2023 को कनाडा के सरे में मारे गए खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत का हाथ है। इस आरोप के बाद भारत और कनाडा के रिश्ते तल्ख हो गए। भारत ने तो कनाडा के नागरिकों को वीजा देने पर तत्काल रोक लगा दी। इसके साथ ही भारत ने कनाडा से अपने राजनयिकों की संख्या कम करने के लिए भी कहा है।

बता दें कि आतंकवाद को लेकर पीएम मोदी की जीरो टोलरेंस नीति रही है और वैश्विक मंचों पर इस मुद्दे को उठाते रहे हैं। हालिया आतंकी घटना में 7 अक्टूबर 2023 को जब फिलिस्तीन के आतंकी संगठन हमास ने इजरायल पर हर तरफ से हमला करके क्रूरता के सारे पैमाने तोड़ दिए तो इजरायल ने इसका कठोरता से जवाब दिया। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इजरायल की कार्रवाई का समर्थन किया था।

पीएम मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट डाल कहा था, “इजरायल पर आतंकी हमले से काफी आहत हूँ। हमारी प्रार्थनाएँ एवं संवेदनाएँ निर्दोष पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ हैं। इस कठिन परिस्थिति में हम इजरायल के साथ एकजुटता से खड़े हैं।” वहीं, कश्मीर में पाकिस्तान के इस्लामी आतंकवाद के खिलाफ इजरायल भी भारत को समर्थन देते रहा है।