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मणिपुर हिंसा के पीड़ित बच्चों का घर बना गुजरात का ‘गोकुलधाम’, 50 मैतेई बच्चों की ली जिम्मेदारी: पढ़ाने के लिए विदेश से बुलाई फैकल्टी

पिछले साल मई में मणिपुर में भड़की हिंसा की गूँज अभी भी कम नहीं हुई है। दोनों पक्षों के बीच हुई हिंसा में कई लोगों के घर जला दिए गए, कई परिवारों ने अपने रिश्तेदारों को खो दिया, कई बच्चों ने अपनी माँ, पिता या दोनों को खो दिया। हिंसा को लेकर देश में काफी हंगामा हुआ था। राजनीति हुई, खूब आरोप-प्रत्यारोप लगाए गए। मणिपुर की राज्य सरकार और केंद्र सरकार ने मिलकर हिंसा को रोकने और हिंसा के बाद गंभीर स्थिति से निपटने के लिए कई कदम उठाए। लेकिन गुजरात की ‘गोकुलधाम’ एक ऐसी संस्था है जिसने असल में कुछ ऐसा किया जिससे हिंसाग्रस्त बच्चों की अंधेरी जिंदगी में उम्मीद की किरण जगमगा उठी।

हम जिस संस्था की बात कर रहे हैं वह आनंद जिले के पेटलाद तालुका के नार गाँव में स्थित ‘गोकुलधाम’ संस्था है। स्वामीनारायण धाम वडताल द्वारा संचालित यह संस्थान कई वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में बच्चों में संस्कार और वैदिक शिक्षा का विकास कर रहा है। यह संस्था अब मणिपुर हिंसा के शिकार 50 मैतेई बच्चों का घर बन गई है। गोकुलधाम संस्था ने ऐसे 50 बच्चों को गोद लिया है, जिन्होंने मणिपुर हिंसा में अपने रिश्तेदारों को खो दिया है या किसी अन्य तरह से पीड़ित हुए हैं। गुजरात की यह संस्था उन बच्चों के लिए उम्मीद की किरण बन गई है जिनका भविष्य हिंसा के बाद बेहद अंधकारमय दिख रहा था। 

हिंसा के शिकार बच्चों ने सुनाई आपबीती 

स्वामीनारायण संप्रदाय द्वारा संचालित इस गोकुलधाम संस्था में वर्तमान में मणिपुर राज्य के 50 मैतेई बच्चे रहते हैं। संस्था इन बच्चों की शिक्षा, आवास और अन्य सभी खर्च वहन कर रही है। दिव्य भास्कर से बात करते हुए पीड़ित बच्चों ने अपनी कहानी बताई।

मणिपुर के थोबल के पास एक गाँव से यहाँ आए मैतेई बच्चे ने कहा, “हिंसा के दौरान मेरे पिता और उनके दोस्त चर्च में छिपे हुए थे। जैसे ही कुकियों को इस बात का पता चला, उन्होंने चर्च को घेर लिया और मेरे पिता पर बम फेंक दिया। इस बम विस्फोट से उनके पेट का पूरा हिस्सा फट गया और एक उंगली भी कट गई। बम फेंकने के बाद कुकियों ने मेरे पिता के सिर के पिछले हिस्से में गोली मारकर हत्या कर दी।”

इसके अलावा एक अन्य बच्चे ने भी अपना दुख व्यक्त करते हुए कहा, ”हर जगह हमले हो रहे थे। वहाँ अब भी शांति थी। एक दिन मैं नहाने गया, तभी कुकी लोगों ने हमारे घर के बगल की एक इमारत में आग लगा दी और फिर मैतेई लोगों को मार डाला। जब मैं बाहर आया तो मेरी माँ सब्जियाँ काट रही थी। जैसे ही उन्हें इस बारे में पता चला, उन्होंने तुरंत जितने संभव हो सके उतने कपड़े लिए और मुझे पहाड़ी इलाके में ले गईं।

इस तरह की हिंसा के शिकार मैतेई समुदाय के 50 बच्चे गोकुलधाम संस्था में शरण ले रहे हैं। अलग राज्य, अलग जलवायु, अलग बोली के बावजूद ये बच्चे संस्थान में खुद को ढाल रहे हैं। इस बारे में अधिक जानकारी लेने के लिए जब ऑपइंडिया ने संस्था से संपर्क किया तो हमारी बातचीत गोकुलधाम के स्वामी सुखदेवप्रसाद दास से हुई। उन्होंने विस्तार से बताया कि यह विचार कहाँ से आया और संगठन इन पीड़ित बच्चों का पालन-पोषण कैसे कर रहा है।

मणिपुर हिंसा के शिकार बच्चों के लिए गोकुलधाम संस्थान

ऑपइंडिया से बातचीत में स्वामी सुखदेवप्रसाद दास ने कहा, ”हमने देश में कठिन हालात देखे हैं, खबरें पढ़कर या देखकर कई लोगों के मन में आया होगा कि ऐसी स्थिति में हम कैसे मदद कर सकते हैं। मणिपुर में इतनी हिंसा हुई, लोग मारे गए, कई लोग बेघर हो गए, कई बच्चों ने अपने परिवार खो दिए। इससे मन विचलित हुआ और ऐसे पीड़ित बच्चों की मदद करने की प्रेरणा मिली। ऐसे कई बच्चे हैं जिनमें से कईयों ने अपने माता-पिता को खो दिया है। कई बच्चे ऐसे भी हैं जिनके माता-पिता दोनों ही नहीं रहे। संस्था में गुरुकुल है और इसमें पहले से ही कई बच्चे पढ़ रहे थे, तो विचार आया कि हम ऐसे पीड़ित बच्चों को यहाँ ला सकते हैं और उनकी मदद कर सकते हैं।”

स्वामी ने आगे कहा, “पिछले करीब एक महीने से हम इन बच्चों को यहाँ लाने और उनकी सारी जिम्मेदारियाँ उठाने की कोशिश कर रहे थे। बच्चों को यहाँ तक ​​लाने में काफी मेहनत करनी पड़ी। महीनों तक कागजी कार्रवाई और अन्य कार्रवाई चलती रही। लेकिन अंत में हम सफल हुए और मैतेई समुदाय के 50 बच्चों को अब संस्थान में ला चुके हैं और संस्थान ने उन्हें उत्कृष्ट शिक्षा प्रदान करने सहित सभी जिम्मेदारियाँ उठाई हैं। स्वामी ने यह भी कहा कि यहाँ आने वाले सभी बच्चों ने छोटी उम्र में हिंसा देखी है, कुछ हद तक संस्थान हिंसा के कारण उनके मस्तिष्क पर पड़ने वाले प्रभाव को दूर करने का प्रयास कर रहा है।

अलग राज्य, जलवायु और भाषा की छत्रछाया में फल-फूल रहे बच्चे

इस बारे में अधिक जानकारी देने के लिए संस्थान के हरिकृष्ण स्वामी ने भी ऑपइंडिया से बात की। बच्चे अलग-अलग पृष्ठभूमि से यहाँ आए हैं और वे संस्थान में कैसे रह रहे हैं, इस पर हरिकृष्ण स्वामी कहते हैं, “यह बच्चों को स्थानांतरित करने जितना चुनौतीपूर्ण नहीं था, लेकिन इससे भी बड़ी चुनौती बच्चों को यहाँ बसाना था। सबसे पहले जलवायु, मणिपुर एक पहाड़ी क्षेत्र है और अधिकांश बच्चे उन स्थानों से आते हैं जो पहाड़ों में रहते हैं। इसलिए माहौल ठीक करने की चिंता थी। शुरुआत में बच्चों को बीमार होने से बचाने के लिए विशेष ध्यान रखा गया।”

स्वामी ने आगे कहा, ”जलवायु के बाद दूसरी चुनौती थी बच्चों की भाषा. कई बच्चे तो ऐसे हैं जो सिर्फ मणिपुरी भाषा ही समझते हैं। हालाँकि, कुछ बच्चों की हिंदी और अंग्रेजी पर बहुत अच्छी पकड़ है। लेकिन देखभाल और प्यार की भाषा हर प्राणी समझता है, इसलिए यहाँ बच्चों का तांता लगा हुआ है। चूँकि हम गुजरात में रहते हैं और वे मणिपुर से हैं, भोजन भी एक अलग विषय था। लेकिन हम बच्चों को अच्छा खाना और उनके पसंदीदा व्यंजन भी देते हैं ताकि वे खुश रहें और उनके दिमाग से पिछली हिंसा की यादें मिट जाएँ।”

बच्चों के लिए विदेश से बुलाई गई फैकल्टी

बच्चों की शिक्षा के बारे में बात करते हुए, स्वामी ने कहा, “वे वर्तमान में परामर्श और प्रशिक्षण से गुजर रहे हैं, जो उनके दिमाग पर हिंसा के नकारात्मक प्रभाव को कम करेगा। उसके लिए अमेरिका, फ्रांस, लंदन जैसे देशों से 6 लोगों को बुलाया गया है। जो उन्हें हर दिन सेशन वाइज क्लास देते हैं। ये बच्चे इतने होशियार हैं कि अगर इन्हें ठीक से पाला जाए तो ये भविष्य में आईएएस, आईपीएस या किसी भी बड़े पद पर जा सकते हैं। हमारा गुजरात में एकमात्र संगठन है जो मणिपुर हिंसा पीड़ित बच्चों को तैयार करता है। इसके अलावा, मणिपुर के कुछ अन्य बच्चों को भी महाराष्ट्र के नासिक में हमारे एक संस्थान में लाया जाएगा, जिसके लिए तैयारी चल रही है।

स्वामी ने ऑपइंडिया को यह भी बताया कि हिंसा के कारण बच्चों के दिमाग पर पड़ने वाले प्रभाव को दूर करने के लिए संस्थान में बच्चों से विभिन्न गतिविधियाँ कराई जाती हैं। जिसमें संस्था ध्यान, खेल, संगीत के साथ-साथ यथासंभव आसान तरीके से शिक्षण भी करा रही है। बातचीत के अंत में उन्होंने कहा, ”ऐसी कठिन परिस्थिति में अगर हम साथ आएँ तो देश किसी भी स्थिति से लड़ने में सक्षम है। आज भारत विश्व में अग्रणी स्थान पर है और सही दिशा में आगे बढ़ रहा है और ऐसे में हमारा कर्तव्य है कि हम देश को मजबूती से आगे बढ़ाएँ।”

मणिपुर में भड़क उठी थी हिंसा की आग 

बता दें कि इसी साल मई में मणिपुर राज्य में हिंसा भड़क उठी थी। हिंसा में कई लोगों की मौत हो गई, जबकि हजारों लोग घायल हो गए। करीब 50 हजार लोगों को अपना घर छोड़कर राहत शिविरों में रहने को मजबूर होना पड़ा। मणिपुर में दो गुटों कुकी और मैतेई के बीच हिंसक झड़प हो गई। 

3 मई को ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन, मणिपुर द्वारा आयोजित आदिवासी एकता मार्च हिंसा में बदल गया। यह मार्च मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की माँग के खिलाफ आयोजित किया गया था, जिसके कारण दोनों समुदायों के बीच हिंसा हुई।

लालू यादव की बहू ऐश्वर्या के साथ घरेलू हिंसा कोर्ट ने मानी: राबड़ी जैसा घर देने को कहा, अब उत्पीड़न हुआ तो मंत्री तेज प्रताप यादव होंगे जिम्मेदार

बिहार सरकार में मंत्री और राजद सुप्रीमो लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव और उनकी पत्नी ऐश्वर्या से जुड़े मामले में कोर्ट ने एक अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने माना है कि ऐश्वर्या के साथ घरेलू हिंसा हुई है। ऐसे में लालू परिवार को ऐश्वर्या के रहने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए।

दरअसल, तेज प्रताप यादव और उनकी ऐश्वर्या राय के तलाक का मामला पटना के फैमिली कोर्ट में चल रहा है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने ऐश्वर्या राय की प्रोटेक्शन को लेकर भी आदेश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने घरेलू हिंसा को लेकर तेज प्रताप को कड़ी चेतावनी भी दी है।

कोर्ट ने आदेश दिया है कि ऐश्वर्या राय के रहने की व्यवस्था उनके पति को करनी होगी। इसके साथ ही उन्हें राबड़ी देवी जैसी सुविधाओं वाला घर उपलब्ध कराना होगा। इस घर का किराया, बिजली एवं अन्य बिल आदि तेज प्रताप यादव को वहन करना होगा। कोर्ट ने इसके लिए तेज प्रताप यादव को एक महीने का समय दिया है।

इसके साथ ही कोर्ट ने तेज प्रताप को सख्त हिदायत देते हुए कहा कि ऐश्वर्या के साथ अब कोई घरेलू हिंसा हुई तो ये उनके पक्ष में नहीं होगा। कोर्ट ने माना कि शादी के बाद तेज प्रताप यादव ने ऐश्वर्या राय का मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न किया है। इसकी की वजह से पटना कोर्ट ने ऐश्वर्या को सुरक्षा प्रदान करने का आदेश दिया है।

इसको देखते हुए कोर्ट ने ऐश्वर्या को ‘प्रोटेक्शन ऑर्डर’ है। इस दौरान अगर ऐश्वर्या राय के साथ किसी तरह का मानसिक या शारीरिक उत्पीड़न होता है तो उसके लिए सीधे तेज प्रताप को जिम्मेदार माना जाएगा। भले ही तेज प्रताप यादव या ऐश्वर्या राय एक साथ नहीं रहते हों, फिर भी किसी भी तरह के उत्पीड़न के लिए तेज प्रताप जिम्मेदार होंगे।

पटना के पारिवारिक न्यायालय ने ये आदेश 27 सितंबर 2023 को सुनवाई के दौरान दिए। यह आदेश अब सामने आया है। मामले की अगली सुनवाई 31 अक्टूबर 2023 को होगी। दरअसल, तेज प्रताप और ऐश्वर्या की शादी 12 मई 2018 को हुई थी। शादी के 6 महीने के भीतर ही तेज प्रताप यादव ने तलाक की अर्जी दाखिल कर दी थी।

ऐश्वर्या राय ने शादी के बाद से अपने पति तेज प्रताप यादव पर मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। इतना ही नहीं, ऐश्वर्या ने अपनी सास और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और ननद एवं राजद सांसद मीसा भारती पर भी मारपीट का आरोप लगाया था।

वहीं, तेज प्रताप ने तलाक की अर्जी दाखिल करते हुए कहा था कि वह साधारण जिंदगी जीने वाले व्यक्ति हैं, जबकि उनकी पत्नी ऐश्वर्या मॉडर्न मिजाज की लड़की है। इसलिए ऐश्वर्या के साथ जिंदगी गुजारना उनके लिए मुश्किल है। उन्होंने यह भी कहा था कि यह शादी उनकी मर्जी के खिलाफ की गई। वह दो राजनीतिक परिवारों के बीच बनाए गए रिश्ते के मोहरा हैं।

‘अब वैसी नहीं हूँ, जैसा पहले लिखा था’: जैनब अब्बास ने हिंदू घृणा पर दी सफाई, कहा- भारत ने निकाला नहीं, मुझे माफ कर दें

भारत और हिंदू विरोधी घृणा पर पाकिस्तानी खेल एंकर जैनब अब्बास की सफाई आई है। उनका कहना है कि अब वे वैसी नहीं है, जैसा पहले लिखती थीं। अपनी करतूतों के लिए माफी माँगते हुए कहा है कि उन्हें भारत ने नहीं निकाला है। ‘सुरक्षा’ वजहों से वह खुद वापस आ गई हैं।

दरअसल ICC (अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल) ने जैनब अब्बास को भारत में चल रहे क्रिकेट वर्ल्ड कप के लिए प्रजेंटर बनाया था। इसी दौरान उनके हिंदू विरोधी पोस्ट सोशल मीडिया में वायरल हो गए थे और नेटिजन्स उनका विरोध कर रहे थे। इसके बाद उन्हें भारत से वापस कर दिया गया था।

भारत से निकाले जाने पर चुप्पी तोड़ते हुए जैनब अब्बास ने एक्स/ट्विटर पर एक नोट शेयर किया है। इसमें उन्होंने कहा है, “मुझे न तो जाने को कहा गया और न डिपोर्ट किया गया है। जिस तरीके से ऑनलाइन प्रतिक्रिया आ रही थी, उससे मैं डरी हुई थी। मेरी सुरक्षा को कोई खतरा नहीं था। लेकिन मेरा परिवार और दोस्त चिंतित थे। जो कुछ हुआ उस पर सोचने के लिए मुझे समय चाहिए था और मैं वापस आ गई।”

जैनब ने शेयर किए नोट में कहा है, “मेरे वायरल हुए पोस्ट से लोगों को हुई तकलीफ को मैं समझ सकती हूँ। इसका मुझे बेहद पछतावा है। मैं बताना चाहती हूँ कि वे (पुराने पोस्ट) मेरे मूल्यों या मैं आज जिस तरह की इंसान हूँ, उसके बारे में नहीं बताते हैं। ऐसी भाषा के लिए कोई बहाना नहीं है। जिनको भी मेरी उस पोस्ट से तकलीफ हुई है, उन सभी से मैं तहे दिल से माफी माँगती हूँ। साथ ही उनकी आभारी हूँ जो इस मुश्किल समय में मेरे लिए चिंतित थे और मेरा समर्थन किया।” जैनब ने वर्ल्ड कप 2023 में मौका मिलने के लिए आभार जताते हुए किसी तरह की धमकी मिलने से इनकार किया है।

गौरतलब है कि जैनब अब्बास का हिंदूफोबिक ट्वीट्स का इतिहास रहा है। उनके एक्स हैंडल का पुराना यूजर नेम ZainabLovessrk था। साल 2014 में शाकाहारियों और भारत में तेज गेंदबाजों की कमी पर उन्होंने ट्वीट किया था। इसमें उन्होंने भारतीयों के शाकाहारी होने का मजाक उड़ाया था। एक और ट्वीट में गाय का मजाक उड़ाया गया था।

अयोध्या की जिस मस्जिद के लिए हिंदू भी दे रहे पैसा, वह अरबी स्टाइल में बनेगी: डिजाइन बदली, पैगंबर मोहम्मद और खलीफाओं का होगा नाम

नवंबर 2022 में एक खबर आई थी कि अयोध्या में बनने वाली मस्जिद के लिए जो चंदा इकट्ठा हुआ है, उसमें 40 फीसदी पैसा हिंदुओं का है। ताजा अपडेट है कि इस मस्जिद की डिजाइन बदल दी गई है। अब अरबी स्टाइल में धन्नीपुर गाँव में मस्जिद बनेगी। पैगंबर मोहम्मद और उनके अब्बा के नाम पर यह होगी। साथ ही चार खलीफाओं के नाम भी होंगे।

नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि जिस जगह पर मुगल अक्रांता बाबर के नाम पर ढाँचा खड़ा कर दिया गया था, वह रामजन्मभूमि ही है। इसके बाद धन्नीपुर में मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन मुस्लिमों को मुहैया कराई गई थी। यह जगह रामजन्मभूमि से करीब 22 किलोमीटर दूर है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस मस्जिद की पहले जो डिजाइन बनाई गई थी, उसमें बदलाव की गई है। अब मध्य-पूर्व और अरब देशों की तर्ज पर यहाँ मस्जिद का निर्माण होगा। इसका फैसला 12 अक्टूबर 2022 को मुंबई में देश की सभी मस्जिदों के संगठन ऑल इंडिया राबता-ए-मस्जिद (एआईआरएम) और इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन की बैठक में किया गया।

रिपोर्ट में बताया गया है कि इस मस्जिद का नाम पैंगबर मोहम्मद और उनके अब्बा के नाम पर ‘मोहम्मद बिन अब्दुल्ला मस्जिद’ होगी। मस्जिद के पाँच दरवाजों का नाम पैगंबर मोहम्मद और उनके उत्तराधिकारी चार खलीफाओं- हजरत अबू बकर, हजरत उमर, हजरत उस्मान और हजरत अली के नाम पर रखी जाएगी। अरब देशों की मस्जिदों की तर्ज पर पाँच मीनारें और गुंबद बनाए जाएँगे।

डिजाइन में बदलाव के बाद इस मस्जिद का आकार पहले से बड़ी होगी और यह अधिक क्षेत्र में फैला होगा। इसके लिए पैसे जुटाने के लिए देश भर में अभियान भी चलाया जाएगा। कहा जा रहा है कि डिजाइन के कारण मस्जिद के लिए चंदा देने को लेकर मुस्लिम समुदाय अधिक उत्साहित नहीं था। इसकी वजह से ही डिजाइन बदला गया है और पैगंबर मोहम्मद का नाम भी इसके साथ जोड़ा गया है।

तहफ्फुज मस्जिद कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष हाजी अराफात शेख के हवाले से बताया गया है कि मस्जिद के लिए पहली ईंट उनकी तरफ से अयोध्या मस्जिद ट्रस्ट के अध्यक्ष जफर फारूकी को दी गई है। यह ईंट अब मुंबई की कई सूफी दरगाहों और अजमेर के गरीब नवाज ख्वाजा की दरगाह पर ले जाई जाएगी। इसके बाद लखनऊ होते ईंट धन्नीपुर गाँव लाई जाएगी। उनके अनुसार यह देश की सबसे बड़ी मस्जिद में से एक होगी। इसमें करीब 9 हजार लोग एक साथ नमाज पढ़ सकेंगे। कुछ रिपोर्टों में यह संख्या करीब 5 हजार बताई गई है।

हाजी अराफात शेख के मुताबिक 6 एकड़ अतिरिक्त जमीन खरीदी जा रही है। इसके बाद मस्जिद परिसर में अस्पताल, कॉलेज, पुस्तकालय, संग्रहालय, सम्मेलन कक्ष और सूचना केंद्र वगैरह भी बनाए जाएँगे। अयोध्या मस्जिद ट्रस्ट के अध्यक्ष फारूकी के अनुसार जल्द ही इस मस्जिद का निर्माण शुरू होगा। इसके लिए ट्रस्ट ने देश भर से चंदा जुटाने का अभियान शुरू किया है।

गौरतलब है कि नवंबर 2022 में मस्जिद ट्रस्ट के सचिव अतहर हुसैन ने बताया था, “अगस्त, 2020 में हमने मस्जिद निर्माण में सहयोग के लिए बैंक डिटेल जारी किए थे। अब तक हमारे पास 40 लाख रुपए का डोनेशन आ चुका है। डोनेशन का करीब 30% हिस्सा कॉर्पोरेट से आया है, 30% मुस्लिम समुदाय से आया है बाकी 40% हिस्सा हिंदू समुदाय की तरफ से आया है।”

250 बंधकों को छुड़ाया, 60+ हमास आतंकियों को मार गिराया, डिप्टी कमांडर सहित 26 को पकड़ा… देखिए इजरायली सेना का ऑपरेशन

इस्लामी आतंकी संगठन हमास (Hamas) ने इजरायल पर अचानक हमला कर सैकड़ों की संख्या में लोगों को बंधक बना लिया था। इस बीच इजरायली सुरक्षा बलों (IDF) ने 250 बंधकों को छुड़ाने की जानकारी दी है। इस ऑपरेशन का वीडियो भी साझा किया है।

करीब एक मिनट के इस वीडियो में इजरायली सुरक्षा बलों को फायरिंग के बीच जवाबी कार्रवाई करते हुए देखा जा सकता है। वे फायरिंग करते हुए आगे बढ़ते हैं और बंकर में प्रवेश करते हैं। वीडियो में कुछ नग्न लोगों को हिरासत में लेते हुए भी सुरक्षा बल दिख रहे हैं।

आईडीएफ ने यह वीडियो शेयर करते हुए एक्स/ट्विटर पर लिखा है, “7 अक्टूबर 2023 को सूफा सैन्य चौकी पर नियंत्रण हासिल करने के लिए फ्लोटिला 13 स्पेशल यूनिट को गाजा सुरक्षा बाड़ से सटे क्षेत्र में तैनात किया गया था। जवानों ने करीब 250 बंधकों को जिंदा बचाया है। इस ऑपरेशन में 60 से अधिक हमास आतंकवादियों को मार गिराया गया था। 26 आतंकवादी पकड़े गए थे। पकड़े गए आतंकवादियों में हमास दक्षिणी नौसेना डिवीजन का उप कमांडर मुहम्मद अबू अली भी शामिल था।”

उल्लेखनीय है कि हमास आतंकियों ने 7 अक्टूबर को इजरायल पर हमला कर कत्लेआम मचाया था। इन हमलों में अब तक 1300 से अधिक लोगों की मौत की जानकारी सामने आ चुकी है। एक म्यूजिक फेस्टिवल को निशाना बनाकर आतंकियों ने करीब 260 लोगों की हत्या की थी। महिलाओं का उनके दोस्तों के शवों के पास रेप किया गया था। एक महिला की नग्न लाश का परेड निकालने का वीडियो भी सामने आया था। इजरायल ने जलाकर राख कर दिए गए छोटे-छोटे बच्चों की भी कुछ तस्वीरें जारी की है।

हमास के हमलों के बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल गाजा में आतंकी ठिकानों पर हमले कर रहा है। इन हमलों में करीब 1500 फिलिस्तीनी आतंकी मारे गए हैं। गाजा की पानी, बिजली, ईंधन की सप्लाई बंद कर दी गई। इजरायली सैनिकों ने पूरे गाजा की घेराबंदी कर रखी है। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि जल्द ही इस इलाके में इजरायली सेना जमीनी अभियान भी शुरू कर सकती है।

मानवीय आधार पर गाजा में सप्लाई बहाल करने की माँग भी इजरायल ने ठुकरा दी है। इजरायल के रक्षा मंत्री याओव गैलेंट ने कहा था, “गाजा को मानवीय मदद? जब तक इजरायली बंधक वापस नहीं आते तब तक ना ही कोई बिजली का स्विच ऑन होगा, ना किसी पानी के पाइप को खोला जाएगा और ना ही कोई भी तेल का टैंकर गाजा में घुसेगा। मानवता, मानववादियों के लिए है। हमें कोई नैतिकता का पाठ ना पढ़ाए।”

डायपर पहने गैर-मुस्लिम बच्चे को हमास के इस्लामी आतंकियों ने मार डाला: ‘आतंक का कोई मजहब नहीं’ कहने वालों को खून सने इस बच्चे की तस्वीर दिखाइए

एक छोटा बच्चा है। उम्र लगभग एक साल के आस-पास। डायपर पहना हुआ। खेल नहीं रहा… पॉलिथिन में लिपटा है, मरा हुआ है… जो डायपर सूसू-पॉटी को सोखने के लिए माँ-बाप ने पहनाई होगी, उसमें सना है उसी का खून। इजरायल में रहने वाले इस यहूदी बच्चे को फिलिस्तीन में रहने वाले हमास के इस्लामी आतंकियों ने मार डाला।

इस्लामी आतंकियों को दूध पीते बच्चों से भी नफरत

“अब तक जितनी भी फोटो हमने पोस्ट की है, उसमें से इसे पोस्ट करना सबसे तकलीफदेह रहा है। जब हम यह लिख रहे हैं, हम काँप रहे हैं। इस फोटो को पोस्ट किया जाए या नहीं, इसको लेकर हम बार-बार असमंजस में थे। फैसला नहीं कर पा रहे थे। अंततः हमने इसे पोस्ट किया ताकि दुनिया को पता चल सके कि हमारे साथ, हमारे बच्चों के साथ क्या-क्या हुआ।”

ऊपर जो लिखा गया है, वो X पर एक हैंडल है @Israel, उसने लिखा है। क्या यह हैंडल आधिकारिक है? हाँ, आधिकारिक है। इस हैंडल को चलाता है इजरायल के विदेश मंत्रालय (X पर इनका हैंडल है @IsraelMFA के नाम से) की डिजिटल डिप्लोमेसी टीम। इतना सब कुछ इसलिए लिखना पड़ रहा क्योंकि कुछ फर्जी फैक्ट चेकर यह बताने में जुट गए हैं कि हमास के इस्लामी आतंकी किसी को नहीं मार रहे, आतंक का कोई मजहब नहीं होता… फलाना-ढिकाना।

बच्चों को सिर्फ गोली नहीं मारते, जलाते भी हैं इस्लामी आतंकी

डायपर पहने बच्चे की मौत अकेली नहीं है। हमास के इस्लामी आतंकियों ने नवजात शिशुओं तक को जला कर मार डाला है। यह सूचना भी आधिकारिक है। इजरायल के प्रधानमंत्री के X हैंडल से शेयर की गई है, अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन को भी ये सारी तस्वीरें दिखाई गई हैं।

यहूदियों पर बर्बरता, जश्न में इस्लामी/वामपंथी

फिलिस्तीन में रहने वाले हमास के इस्लामी आतंकी जहाँ एक ओर इतनी बर्बरता कर रहे, वहीं दूसरी ओर दुनिया भर के कट्टर मुस्लिम और वामपंथी इनके समर्थन में जुटे हैं… कुछ तो जश्न भी मना रहे। ऐसे लोग वो भी हैं, जो पढ़े-लिखे हैं, बॉलीवुड में काम करते हैं।

गाजा पट्टी सिर्फ 400 मीटर दूर एक गाँव है, नाम है – किबुत्ज़ कफ़र अज़ा। यहाँ हमास के इस्लामी आतंकियों ने 100 से ज्यादा लोगों को मार डाला। इनमें 40 बच्चे भी शामिल। 40 बच्चों की मौत और बर्बरता के साथ इस्लामी आतंकियों का नाम जुड़ गया तो फर्जी फैक्ट चेकर अब यह चिल्ला रहे कि इन बच्चों का गला नहीं काटा गया। बस इस पर चुप्पी है कि बच्चे मारे ही क्यों गए? एक लड़की की लाश को अर्द्धनग्न कर पिक-अप वैन में घुमाया गया, उस पर थूका गया तो इस्लामी मजहब को मानने वाली भारत की एक महिला पत्रकार यह एंगल लेकर आ गई कि शायद उस लड़की ने मरते वक्त उतना ही कपड़ा पहना होगा… बस इस सवाल को नहीं उठा पाई कि आखिर मारा ही क्यों हमास के इस्लामी आतंकियों ने?

बांग्लादेश से लोगों को लाते और फर्जी कागजात बनाकर भारत में बसाते थे आदिल, नजीबुल और अबू: ₹20 करोड़ की मिली थी विदेशी फंडिंग, यूपी ATS ने दबोचा

यूपी पुलिस की आतंकवाद निरोधी दस्ते (UP ATS) ने गुुरुवार (12 अक्टूबर 2023) को तीन अवैध बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया। ये सभी मानव तस्करी में शामिल थे। बांग्लादेशियों को भारत में लाकर बसाने के लिए उन्हें विदेशों से 20 करोड़ रुपए की फंडिंग हुई है। ATS ने इन तीनों के खाते से 1.50 करोड़ रुपए बरामद किए हैं। गिरफ्तार आरोपितों के नाम आदिल मोहम्मद अशर्फी उर्फ आदिल उर रहमान, शेख नजीबुल हक और अबू हुरायरा गाजी है।

ATS ने खुलासा किया है कि मानव तस्करी वाले इस सिंडीकेट के सदस्य बांग्लादेशी नागरिकों को सीमा पार कराकर भारत लाते और उन्हें यहाँ बसाते थे। इसके लिए ये भारतीय नागरिकता संबंधित फर्जी दस्तावेज बनाते थे। विदेशों से जो फंडिंग होती थी, उनका इस्तेमाल ये लोग इस काम में करते थे।

ATS के ADG मोहित अग्रवाल ने बताया कि इस संबंध में ATS के वाराणसी यूनिट को सूचना मिली थी। ATS पता चला कि सिंडीकेट का सदस्य आदिल मोहम्मद अशरफी उर्फ आदिल उर रहमान पश्चिम बंगाल से दिल्ली या सहारनपुर जाने की फिराक में है। इसके बाद टीम ने कार्रवाई करते हुए उसे वाराणसी में दबोच लिया। उसके पास से फर्जी आधार कार्ड और पासपोर्ट बरामद हुआ।

पूछताछ में आदिल ने बताया कि ये दस्तावेज उसे पश्चिम बंगाल का रहने वाला शेख नजीबुल हक और अबु हुरायरा गाजी की मदद से मिले थे। उसने बताया कि ये दोनों फिलहाल दिल्ली से सटे यूपी के सहारनपुर में रह रहे हैं। इसके बाद ATS ने सहारनपुर से उन दोनों को दबोच लिया। तीनों ने पूछताछ में अपना गुनाह कबूल कर लिया। इन्होंने बताया कि ये बांग्लादेश के रहने वाले हैं और यूपी में लंबे समय से रह रहे हैं।

सहारनपुर से पकड़े गए दोनों बांग्लादेशी नागरिकों ने बताया कि उन्होंने बांग्लादेशी नागरिक मोहम्मद हबीबुल्लाह मस्बाह उर्फ नजीब के फर्जी दस्तावेज भी बनवाए थे। हबीबुल्लाह को कुछ दिन पहले सहारनपुर से गिरफ्तार किया गया था। इनके पास से अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पार कराने के सबूत भी मिले।

जाँच में यह बात भी सामने आई कि विदेशों से कुछ एनजीओ के FCRA अकाउंट में 20 करोड़ रुपए भेजे गए थे। यह राशि मदरसों और स्कूलों के लिए आई थी। इसका इस्तेमाल मानव तस्करी में हो रहा था। यह सिंडीकेट अवैध घुसपैठ कराने, फर्जी दस्तावेज बनवाने, शरण देने और भारत विरोधी गतिविधियों में इस धन का उपयोग कर रहा था।

बताते चलें कि उत्तर प्रदेश में अवैध रूप से छिपकर रह रहे कई बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं की गिरफ्तारी हो चुकी है। ATS ने इस जुलाई में राज्य के सहारनपुर, मेरठ, हापुड़, गाजियाबाद, अलीगढ़ और मथुरा में कार्रवाई कर तकरीबन 74 रोहिंग्या मुस्लिमों को गिरफ्तार किया था।

जानकारी के मुताबिक, बांग्लादेशी नागरिक और रोहिंग्या मुस्लिमों की संख्या लगभग 4000 थी। पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए घुसपैठी 10 से 15 साल से उत्तर प्रदेश में रह रहे थे। कईयों के पास तो राशन कार्ड और डॉक्यूमेंट भी बने हुए थे।

मंदिर पर पथराव, शिवलिंग-नंदी की मूर्ति को खंडित करने की कोशिश: आनंद के उमरेठ की घटना, नाले में मिला भगवा झंडा; गुजरात पुलिस ने शुरू की जाँच 

नवरात्रि आने वाली है लेकिन उससे पहले आनंद के उमरेठ में एक हिंदू मंदिर पर पथराव की घटना सामने आई है। मंदिर पर लगे भगवा झंडे को उतार कर नाले में फेंक दिया गया और शिवलिंग व नंदी की मूर्ति को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया। हालाँकि, अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि इस कृत्य को किसने अंजाम दिया। फिलहाल गुजरात पुलिस जाँच कर रही है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना आनंद के उमरेठ स्थित ओड बाजार के पास एक झील के किनारे स्थित सिद्धनाथ महादेव मंदिर में हुई। बुधवार (11 अक्टूबर, 2023) की रात कुछ अज्ञात हमलावरों ने यहाँ मंदिर पर पथराव किया। जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिसमें मंदिर के आसपास पत्थर और ईंटें नजर आ रही हैं। 

गुरुवार सुबह जब पुजारी और अन्य श्रद्धालु मंदिर पहुँचे तो उन्हें यह पत्थर नजर आया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। खबरों के मुताबिक इस हमले में शिवलिंग को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की गई।  साथ ही वहाँ फहराए गए भगवा ध्वज का भी अपमान किया गया। अगली सुबह जब झंडा दिखाई नहीं दिया तो भक्तों ने खोजा तो नाले में एक झंडा मिला।

स्थानीय लोगों ने ऑपइंडिया को बताया क्या हुआ?

ऑपइंडिया ने यह जानने के लिए स्थानीय स्रोतों से संपर्क किया कि जिस क्षेत्र में मंदिर स्थित है, वहाँ हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदाय रहते हैं और कुछ साल पहले भी इसी तरह की घटना हुई थी, जिसके कारण मंदिर के चारों ओर बाड़ लगाई गई थी। साथ ही हिंदू युवक भी हर रात मंदिर के पास बैठते हैं।

जानकारी के मुताबिक घटना की रात 11 बजे तक हिंदू युवक मंदिर में बैठे थे। उनके जाने के बाद दोपहर 12 बजे के बाद मंदिर पर पथराव किया गया और वहाँ लगे भगवा ध्वज को तोड़कर नाले में फेंक दिया गया। साथ ही शिवलिंग को भी तोड़ने की कोशिश की गई लेकिन जाल होने के कारण बड़े पत्थर नहीं जा सके। वीडियो में गर्भगृह में छोटे-छोटे पत्थर भी नजर आ रहे हैं। वहीं मंदिर के बाहर स्थापित नंदी की मूर्ति को भी नुकसान पहुँचाने की कोशिश की गई लेकिन पत्थर की मूर्ति आसानी से नहीं टूटी। 

स्थानीय हिंदुओं ने वहाँ के मुस्लिम युवकों पर आरोप लगाया है और कहा है कि इसमें चार युवक शामिल थे। हालाँकि, उनकी पहचान नहीं हो सकी। 

तीन-चार दिन पहले लगाया था भगवा झंडा, 200 मीटर दूर है दरगाह

ऑपइंडिया ने मंदिर के पुजारी से भी संपर्क किया। उन्होंने कहा कि रात में मंदिर पर पथराव किया गया। वहाँ से 200 मीटर की दूरी पर जोरावर बावा की दरगाह है। तीन-चार दिन पहले ही मंदिर में भगवा झंडे लगाए गए थे। बीती रात मंदिर में पथराव किया गया। मंदिर के शिखर पर ईंटें भी फेंकी गईं। पिछले गेट पर भगवा झंडा लगा था, उसे भी फाड़कर नाले में फेंक दिया गया।

उन्होंने कहा कि इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है और पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है। पुजारी ने कहा कि इस तरह की घटना तब हुई है जब नवरात्र नजदीक है, ऐसे में मामले की सख्ती से जाँच  जरूरी है। 

पुलिस ने कहा- शिकायत मिली है, अभी जाँच चल रही है

घटना को लेकर पुलिस का कहना है कि इस मामले में अभी जाँच जारी है। ऑपइंडिया द्वारा संपर्क किए जाने पर उमरेठ पुलिस स्टेशन के पीएसआई घनश्यामसिंह पावरा ने कहा, “मंदिर के बाहर ईंट के टुकड़े पड़े हुए पाए गए।”

उन्होंने कहा, “हमें यह भी लगता है कि यह शराबी तत्वों का काम है क्योंकि गर्भगृह में कोई पथराव नहीं हुआ है या मंदिर को नुकसान पहुँचाने का कोई प्रयास नहीं हुआ है,अभी तक किसी की पहचान नहीं हो पाई है। और मामले में जाँच चल रही है।”

हालाँकि, वायरल वीडियो में मंदिर के गर्भगृह में पत्थर के छोटे-छोटे टुकड़े भी नजर आ रहे हैं, जो संभवत: जाली के कारण बाहर फँसे पत्थर के टुकड़े हो सकते हैं। हालाँकि, जाँच के बाद ही सही तथ्य सामने आ सकेंगे।

कॉन्ग्रेसी मुस्लिम नेता गया काबा, वहाँ मस्जिद के सामने करने लगा राहुल गाँधी का प्रचार… पुलिस ने मारे 99 कोड़े, 8 महीने की सजा: जानें खबर की सच्चाई

सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि एक कॉन्ग्रेस से जुड़े एक भारतीय मुस्लिम को सऊदी अरब में 99 कोड़े मारने की सजा दी गई। अगर कोड़े मारने के बीच में वह शख्स बेहोश हो जाता तो उसे एक सप्ताह की छुट्टी देकर फिर से 99 कोड़े मारने का क्रम शुरू होता। दावा करने वालों ने यह भी कहा कि वह शख्स दो महीने तक जेल में भी रहा है।

दरअसल, वह शख्स अपनी दादी के साथ हज यात्रा पर गया था और वहाँ काबा के सामने राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा का पोस्टर लहराया था। जिस व्यक्ति के बारे में इस तरह की बात कही जा रही है, उसका नाम रजा कादरी है। वह यूथ कॉन्ग्रेस का नेता है। काबा में भारत जोड़ो यात्रा का पोस्टर लहराने के कारण उसे 8 महीने तक जेल में रखा गया। वह 4 अक्टूबर 2023 को भारत आया है।

सोशल मीडिया पर कोड़े लगाने और जेल को लेकर जो दावा किया जा रहा है, वह पूरी तरह सच नहीं है। घटना 8 महीने पुरानी यानी जनवरी 2023 की है। भारत जोड़ो यात्रा के कारण रजा को सऊदी अरब की जेल में रखा गया था, लेकिन दो महीने नहीं बल्कि 8 महीने। वहीं, रजा कादरी ने कोड़े लगाने की बात का कहीं जिक्र नहीं किया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मामला जनवरी 2023 का है जब रजा कादरी अपनी दादी के साथ सऊदी अरब गए हुए थे। रजा कादरी मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले के यूथ कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष हैं। उन्होंने 25 जनवरी को मक्का की मस्जिद अल हरम में काबा के सामने भारत जोड़ो यात्रा का पोस्टर लहराया था। फोटो खिंचवाई और उसे सोशल मीडिया पर डाल दिया।

इसके पश्चात 26 जनवरी की रात सऊदी पुलिस के कुछ लोग उनके होटल आ गए। सऊदी ने उन्हें बताया कि वे वीजा कम्पनी की तरफ से आए हैं और उनका इंटरव्यू लेना चाहते हैं। इसके बाद उन्हें बेहोश करके गिरफ्तार कर लिया गया। होश में आने पर पता चला कि वे सभी सऊदी अरब की पुलिस के लोग थे।

उनको बताया गया उन्होंने मस्जिद के भीतर कॉन्ग्रेस का पोस्टर लहरा कर सऊदी अरब का कानून तोड़ा है। हालाँकि, रजा कादरी ने सऊदी पुलिस से कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। सऊदी पुलिस ने कुछ वीडियो के आधार पर रजा से कहा कि वह एक राजनीतिक एजेंट हैं। इसके पश्चात उनको ढाहबान के सेंट्रल जेल में रखा गया।

दैनिक भास्कर को रजा ने बताया कि उन्हें जेल में खाने के लिए सुबह शाम ब्रेड के मात्र दो-दो टुकड़े मिलते थे। उन्हें जेल में एक अँधेरे कमरे में 2 महीने तक बंद रखा गया और उसके बाद सऊदी पुलिस उनसे पूछताछ करने लगी। सऊदी पुलिस उनको रात भर जगाकर उनसे लाइ डिटेक्टर टेस्ट से पूछताछ करती थी।

रजा कादरी ने बताया कि उन्हें ढाहबान के जेल में छह महीने तक रखने के बाद एक अन्य शुमैसी डिटेंशन सेंटर में भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि इस डिटेंशन सेंटर में भेजे जाने से पहले उनकी मानसिक हालत भी बिगड़ गई थी। रजा ने बताया कि इस जगह पर नरक से भी बदतर माहौल था। यहाँ भारतीयों को सबसे गंदी और बुरी हालत में रखा जाता है। 

उन्होंने आगे बताया कि कुछ दिनों के बाद उनसे एक एजेंट मिलने आया, जिसे उनके परिवार वालों ने भेजा था। एजेंट के प्रयासों से वह 3 अक्टूबर 2023 को सऊदी की जेल से छोड़ दिए गए। रजा को कई प्रकार की मानसिक प्रताड़ना दी गई, लेकिन कोड़े मारने बात सामने नहीं आई है और ना ही इस संबंध में उन्होंने जिक्र किया है।

पाकिस्तानी क्रिकेट टीम का अहमदाबाद में लड़कियों ने नृत्य से किया स्वागत, सोशल मीडिया पर भड़के लोग: बताया- शर्मनाक और गैरजरूरी, BCCI पर भी उठाए सवाल

पाकिस्तानी क्रिकेट टीम आईसीसी विश्व कप (ICC World Cup) में भारत के साथ अपने मैच से पहले गुजरात के अहमदाबाद गुरुवार (12 अक्टूबर, 2023) को पहुँची। इस दौरान गुब्बारों और फूलों की खास सजावट के बीच गुजराती लड़कियों का मशहूर बॉलीवुड गानों पर थिरकने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खासा वायरल हो रहा है।

इसे लेकर नेटिज़न्स गुस्से से उबले हुए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अधिकांश यूजर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल (बीसीसीआई) और केंद्र सरकार के खिलाफ तीखे कॉमेंट कर रहे हैं। दरअसल पाकिस्तानी विकेट कीपर बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान ने हैदराबाद के राजीव गाँधी इंटरनेशनल स्टेडियम में श्रीलंका से जीत के बाद गाजा और हमास के समर्थन में दुआ पढ़ी।

यही नहीं इस दौरान जमकर उनके समर्थन में नारे भी लगे। गौरतलब है कि मोहम्मद रिजवान क्रिकेट वर्ल्ड कप 2023 के लिए भारत आई पाकिस्तानी टीम का हिस्सा हैं।

इसे लेकर एक एक्स यूजर रोशन राय ने इस वेलकम का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “ये है पाकिस्तान की क्रिकेट टीम का गुजरात के अहमदाबाद में स्वागत। अहमदाबाद में अन्य सभी टीमों का स्वागत महज गुलदस्ते और ताली से किया गया, लेकिन पाकिस्तान बनाम भारत मैच से अहमदाबाद में होटलों, बीसीसीआई और अन्य लोगों को पैसा मिल रहा है, इसलिए उनका स्वागत गुब्बारों और डांस से किया जा रहा है। इसलिए साबित हुआ, बीसीसीआई और बीजेपी के लिए पैसा देशभक्ति से बड़ा है।”

एक अन्य यूजर ‘कह के पहनो’ ने एक्स पर पोस्ट किया, “ये घटिया है! पाकिस्तान टीम के स्वागत में नाचती और परफॉर्म करतीं लड़कियाँ! मानो आईसीसी इवेंट के बहाने उन्हें यहाँ खेलने के लिए आने के लिए वीजा देना काफी नहीं था, वे अब इसे तमाशा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह सब किसलिए, बीसीसीआई? प्रचार? पैसा?”

दूसरे एक्स यूजर मिस्टर सिन्हा ने घटना के वीडियो के साथ लिखा है, “अभी कुछ हफ्ते पहले पाकिस्तानी आतंकवादियों ने हमारे तीन सैनिकों को मार डाला और अब तक हजारों सैनिकों-नागरिकों को मार डाला है, हमेशा भारत के टुकड़े-टुकड़े करने का सपना देखते हैं और हम पाकिस्तानी क्रिकेटरों का भव्य स्वागत कर रहे हैं? गरबा, आरती सब कुछ, वो भी गुजरात में? ये आपकी संजीदगी है क्या बीसीसीआई?”

एक अन्य यूजर ने पोस्ट किया, “अगली बार जब कोई आपको यह तर्क दे कि “लेकिन सैनिक सीमा पर लड़ रहे हैं,” तो उन्हें जय शाह के नेतृत्व में बीसीसीआई के भारत में पाकिस्तान क्रिकेट टीम का स्वागत करने का यह वीडियो दिखाएँ।”

एक अन्य एक्स यूजर प्रशांत ने पूछा कि अगर बीसीसीआई को पाकिस्तानी क्रिकेट टीम का खास स्वागत करने में इतनी ही दिलचस्पी है तो पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय श्रृंखला खेलने में क्या दिक्कत है।

एक अन्य एक्स यूजर स्पोटर्स पंडित ने ट्वीट किया, “बीसीसीआई खास समारोह की योजना बना रहा है जहाँ कई बॉलीवुड सितारे इंडिया पाकिस्तान मैच से पहले परफॉर्म करेंगे, क्या यह अन्य सभी टीमों का अपमान नहीं है जो भारत में ICCWorldCup2023 खेलने आई हैं? पहले अहमदाबाद में वेलकम डांस और अब ये।”