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कॉन्ग्रेसी मुस्लिम नेता गया काबा, वहाँ मस्जिद के सामने करने लगा राहुल गाँधी का प्रचार… पुलिस ने मारे 99 कोड़े, 8 महीने की सजा: जानें खबर की सच्चाई

सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि एक कॉन्ग्रेस से जुड़े एक भारतीय मुस्लिम को सऊदी अरब में 99 कोड़े मारने की सजा दी गई। अगर कोड़े मारने के बीच में वह शख्स बेहोश हो जाता तो उसे एक सप्ताह की छुट्टी देकर फिर से 99 कोड़े मारने का क्रम शुरू होता। दावा करने वालों ने यह भी कहा कि वह शख्स दो महीने तक जेल में भी रहा है।

दरअसल, वह शख्स अपनी दादी के साथ हज यात्रा पर गया था और वहाँ काबा के सामने राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा का पोस्टर लहराया था। जिस व्यक्ति के बारे में इस तरह की बात कही जा रही है, उसका नाम रजा कादरी है। वह यूथ कॉन्ग्रेस का नेता है। काबा में भारत जोड़ो यात्रा का पोस्टर लहराने के कारण उसे 8 महीने तक जेल में रखा गया। वह 4 अक्टूबर 2023 को भारत आया है।

सोशल मीडिया पर कोड़े लगाने और जेल को लेकर जो दावा किया जा रहा है, वह पूरी तरह सच नहीं है। घटना 8 महीने पुरानी यानी जनवरी 2023 की है। भारत जोड़ो यात्रा के कारण रजा को सऊदी अरब की जेल में रखा गया था, लेकिन दो महीने नहीं बल्कि 8 महीने। वहीं, रजा कादरी ने कोड़े लगाने की बात का कहीं जिक्र नहीं किया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मामला जनवरी 2023 का है जब रजा कादरी अपनी दादी के साथ सऊदी अरब गए हुए थे। रजा कादरी मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले के यूथ कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष हैं। उन्होंने 25 जनवरी को मक्का की मस्जिद अल हरम में काबा के सामने भारत जोड़ो यात्रा का पोस्टर लहराया था। फोटो खिंचवाई और उसे सोशल मीडिया पर डाल दिया।

इसके पश्चात 26 जनवरी की रात सऊदी पुलिस के कुछ लोग उनके होटल आ गए। सऊदी ने उन्हें बताया कि वे वीजा कम्पनी की तरफ से आए हैं और उनका इंटरव्यू लेना चाहते हैं। इसके बाद उन्हें बेहोश करके गिरफ्तार कर लिया गया। होश में आने पर पता चला कि वे सभी सऊदी अरब की पुलिस के लोग थे।

उनको बताया गया उन्होंने मस्जिद के भीतर कॉन्ग्रेस का पोस्टर लहरा कर सऊदी अरब का कानून तोड़ा है। हालाँकि, रजा कादरी ने सऊदी पुलिस से कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। सऊदी पुलिस ने कुछ वीडियो के आधार पर रजा से कहा कि वह एक राजनीतिक एजेंट हैं। इसके पश्चात उनको ढाहबान के सेंट्रल जेल में रखा गया।

दैनिक भास्कर को रजा ने बताया कि उन्हें जेल में खाने के लिए सुबह शाम ब्रेड के मात्र दो-दो टुकड़े मिलते थे। उन्हें जेल में एक अँधेरे कमरे में 2 महीने तक बंद रखा गया और उसके बाद सऊदी पुलिस उनसे पूछताछ करने लगी। सऊदी पुलिस उनको रात भर जगाकर उनसे लाइ डिटेक्टर टेस्ट से पूछताछ करती थी।

रजा कादरी ने बताया कि उन्हें ढाहबान के जेल में छह महीने तक रखने के बाद एक अन्य शुमैसी डिटेंशन सेंटर में भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि इस डिटेंशन सेंटर में भेजे जाने से पहले उनकी मानसिक हालत भी बिगड़ गई थी। रजा ने बताया कि इस जगह पर नरक से भी बदतर माहौल था। यहाँ भारतीयों को सबसे गंदी और बुरी हालत में रखा जाता है। 

उन्होंने आगे बताया कि कुछ दिनों के बाद उनसे एक एजेंट मिलने आया, जिसे उनके परिवार वालों ने भेजा था। एजेंट के प्रयासों से वह 3 अक्टूबर 2023 को सऊदी की जेल से छोड़ दिए गए। रजा को कई प्रकार की मानसिक प्रताड़ना दी गई, लेकिन कोड़े मारने बात सामने नहीं आई है और ना ही इस संबंध में उन्होंने जिक्र किया है।

पाकिस्तानी क्रिकेट टीम का अहमदाबाद में लड़कियों ने नृत्य से किया स्वागत, सोशल मीडिया पर भड़के लोग: बताया- शर्मनाक और गैरजरूरी, BCCI पर भी उठाए सवाल

पाकिस्तानी क्रिकेट टीम आईसीसी विश्व कप (ICC World Cup) में भारत के साथ अपने मैच से पहले गुजरात के अहमदाबाद गुरुवार (12 अक्टूबर, 2023) को पहुँची। इस दौरान गुब्बारों और फूलों की खास सजावट के बीच गुजराती लड़कियों का मशहूर बॉलीवुड गानों पर थिरकने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खासा वायरल हो रहा है।

इसे लेकर नेटिज़न्स गुस्से से उबले हुए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अधिकांश यूजर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल (बीसीसीआई) और केंद्र सरकार के खिलाफ तीखे कॉमेंट कर रहे हैं। दरअसल पाकिस्तानी विकेट कीपर बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान ने हैदराबाद के राजीव गाँधी इंटरनेशनल स्टेडियम में श्रीलंका से जीत के बाद गाजा और हमास के समर्थन में दुआ पढ़ी।

यही नहीं इस दौरान जमकर उनके समर्थन में नारे भी लगे। गौरतलब है कि मोहम्मद रिजवान क्रिकेट वर्ल्ड कप 2023 के लिए भारत आई पाकिस्तानी टीम का हिस्सा हैं।

इसे लेकर एक एक्स यूजर रोशन राय ने इस वेलकम का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “ये है पाकिस्तान की क्रिकेट टीम का गुजरात के अहमदाबाद में स्वागत। अहमदाबाद में अन्य सभी टीमों का स्वागत महज गुलदस्ते और ताली से किया गया, लेकिन पाकिस्तान बनाम भारत मैच से अहमदाबाद में होटलों, बीसीसीआई और अन्य लोगों को पैसा मिल रहा है, इसलिए उनका स्वागत गुब्बारों और डांस से किया जा रहा है। इसलिए साबित हुआ, बीसीसीआई और बीजेपी के लिए पैसा देशभक्ति से बड़ा है।”

एक अन्य यूजर ‘कह के पहनो’ ने एक्स पर पोस्ट किया, “ये घटिया है! पाकिस्तान टीम के स्वागत में नाचती और परफॉर्म करतीं लड़कियाँ! मानो आईसीसी इवेंट के बहाने उन्हें यहाँ खेलने के लिए आने के लिए वीजा देना काफी नहीं था, वे अब इसे तमाशा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह सब किसलिए, बीसीसीआई? प्रचार? पैसा?”

दूसरे एक्स यूजर मिस्टर सिन्हा ने घटना के वीडियो के साथ लिखा है, “अभी कुछ हफ्ते पहले पाकिस्तानी आतंकवादियों ने हमारे तीन सैनिकों को मार डाला और अब तक हजारों सैनिकों-नागरिकों को मार डाला है, हमेशा भारत के टुकड़े-टुकड़े करने का सपना देखते हैं और हम पाकिस्तानी क्रिकेटरों का भव्य स्वागत कर रहे हैं? गरबा, आरती सब कुछ, वो भी गुजरात में? ये आपकी संजीदगी है क्या बीसीसीआई?”

एक अन्य यूजर ने पोस्ट किया, “अगली बार जब कोई आपको यह तर्क दे कि “लेकिन सैनिक सीमा पर लड़ रहे हैं,” तो उन्हें जय शाह के नेतृत्व में बीसीसीआई के भारत में पाकिस्तान क्रिकेट टीम का स्वागत करने का यह वीडियो दिखाएँ।”

एक अन्य एक्स यूजर प्रशांत ने पूछा कि अगर बीसीसीआई को पाकिस्तानी क्रिकेट टीम का खास स्वागत करने में इतनी ही दिलचस्पी है तो पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय श्रृंखला खेलने में क्या दिक्कत है।

एक अन्य एक्स यूजर स्पोटर्स पंडित ने ट्वीट किया, “बीसीसीआई खास समारोह की योजना बना रहा है जहाँ कई बॉलीवुड सितारे इंडिया पाकिस्तान मैच से पहले परफॉर्म करेंगे, क्या यह अन्य सभी टीमों का अपमान नहीं है जो भारत में ICCWorldCup2023 खेलने आई हैं? पहले अहमदाबाद में वेलकम डांस और अब ये।”

तिरंगे के ऊपर लहराया इस्लामी झंडा, बरेली में मस्जिद के मौलाना की करतूत.. पुलिस ने मोहम्मद अयूब के खिलाफ दर्ज की FIR

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक मस्जिद के मौलाना पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा के अपमान का केस दर्ज हुआ है। आरोपित मौलाना का नाम मोहम्मद अयूब है। आरोप है कि मौलाना अयूब ने मस्जिद पर लगे तिरंगे के ऊपर इस्लामी झंडा लगा दिया था। मौलना की करतूत की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। पुलिस मामले की जाँच में जुटी है। घटना गुरुवार (12 अक्टूबर 2023) की है। हिन्दू संगठनों ने इस हरकत पर कड़ी आपत्ति जताते हुए अयूब के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है।

यह मामला बरेली के हाफिजगंज का है। स्थानीय निवासी उदित शर्मा ने इस मामले की शिकायत पुलिस में की है। उदित शर्मा ने बताया कि गुरुवार को वो किसी काम से बरेली जा रहे थे। रास्ते में कस्बा रिठौरा इंद्रानगर पड़ता है। जब उदित रिठौरा पहुँचे तो सड़क के किनारे उन्हें एक मस्जिद दिखी। इस मस्जिद पर नीचे राष्ट्रध्वज तिरंगा लगा दिखा। तिरंगे के ऊपर हरे रंग का इस्लामी झंडा लहरा रहा था। उदित ने इसकी तस्वीरें खींच लीं। बाद ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं।

हिन्दू संगठनों ने इस मामले में बरेली पुलिस से कड़ी कार्रवाई की माँग की। इस मस्जिद का मौलाना मोहम्मद अयूब है। पुलिस को दी गई तहरीर में उसे मुख्य आरोपित बताया गया है। पुलिस ने शिकायत पर मस्जिद के इमाम मोहम्मद अयूब पर राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 की धारा 2 के तहत FIR दर्ज कर ली। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। मामले की जाँच के लिए सब इंस्पेक्टर संतवीर सिंह को नियुक्त किया गया है।

आरोपित मौलाना बरेली के नवाबगंज थाना क्षेत्र का रहने वाला है। उसके अब्बा का नाम शाहरुख़ है। इस मामले के सामने आते ही हिन्दू संगठनों ने नाराजगी प्रकट की है। बरेली के हिन्दू जागरण मंच के पदाधिकारी हिमांशु पटेल ने मौलाना अयूब पर कठोर कार्रवाई की माँग की। जवाब में बरेली पुलिस ने इंस्पेक्टर हाफिजगंज को जरूरी कार्रवाई के निर्देश देने की जानकारी दी है।

चंडीगढ़ में 70 छात्राओं की अश्लील तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल: आर्टिफिशियल इंटेलीजेन्स के सहारे की गई छेड़छाड़

चंडीगढ़ के एक निजी स्कूल में पढ़ने वाली 70 छात्राओं की एडिट कर के अश्लील तस्वीरें वायरल होने की खबर सामने आई है। तस्वीरों को एडिट करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीकि का इस्तेमाल किया गया है। इन तस्वीरों को स्कूल की आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड किया गया है। पुलिस ने मामले का संज्ञान ले कर केस दर्ज कर लिया है। घटना मंगलवार (10 अक्टूबर, 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला चंडीगढ़ के सेक्टर 11 थानाक्षेत्र का है। कुछ दिन पहले यहाँ के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाली छात्रा के पिता ने अपनी बेटी की आपत्तिजनक तस्वीर स्नैपचैट पर देखी। जब लड़की के पिता ने और तलाश की तब उसी स्कूल की लगभग 70 लड़कियों की आपत्तिजनक तस्वीरें स्नैपचैट पर अपलोड की गईं थी। तस्वीरों को स्कूल की आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड किया गया था। इन तस्वीरों को अश्लील बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का सहारा लिया गया था।

धीरे-धीरे ये जानकारी सभी अभिभावकों तक पहुँच गई। सबने मिल कर सबसे पहले इस मामले की शिकायत स्कूल प्रशासन से की। हालाँकि इस शिकायत के बावजूद स्कूल मैनेजमेंट की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अपुष्ट तौर पर इस घटना में स्कूल के ही एक कक्षा 12 में पढ़ने वाले छात्र की संलिप्तता बताई जा रही है। आख़िरकार मामला पुलिस तक पहुँचा। पुलिस ने फ़ौरन केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी। फ़िलहाल इस मामले में केस अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ दर्ज हुआ है।

एक छात्रा ने अपने अभिभावक को बताया है कि उनके स्कूल में सीनियर छात्रों का एक स्नैपचैट ग्रुप भी है। उस ग्रुप में कुछ छात्राओं की पहले भी अश्लील तस्वीरें शेयर की गईं थीं। चंडीगढ़ पैरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नितिन गोयल ने पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किया। फिलहाल पुलिस की साइबर सेल यूनिट ने स्नैपचैट से आपत्तिजनक तस्वीरों को हटवा दिया है। अभी तक मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस टीमें असल आरोपित तक पहुँचने का प्रयास कर रहीं हैं।

अजमेर से भी सामने आया था ऐसा ही केस

गौरतलब है कि अगस्त 2023 में इसी तरह का एक अन्य मामला राजस्थान के अजमेर से सामने आया था। तब किशनगंज स्थित राजस्थान सेंट्रल यूनिवर्सिटी में एक छात्रा की तस्वीर शेयर किए जाने को लेकर बवाल हुआ था। छात्रों का आरोप था कि यूनिवर्सिटी के सिक्योरिटी ऑफिसर ने एक छात्रा की तस्वीरें एक अन्य गार्ड के साथ शेयर कर उसके बारे में जानकारी जुटाने को कहा था। छात्रा की तस्वीरें दिखाकर गार्ड जानकारी हासिल कर रहे था, तभी हंगामा हो गया था। छात्रों का आरोप था कि 6 माह पहले एक छात्रा की आत्महत्या के मामले में भी इसी सिक्योरिटी इंचार्ज का हाथ था।

छात्राओं ने भी सिक्योरिटी अफसर पर अक्सर अपना पीछा करने का आरोप लगाया था। यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा आरोपित सिक्योरिटी अफसर की बर्खास्तगी का भरोसा दिए जाने के बाद इस मामले का पटाक्षेप हुआ था।

मुस्लिम, यहूदी और ईसाई … महात्मा गाँधी की वो सोच, जिसके कारण भारत में इजरायली दूतावास खुलने में लग गए 45 साल

इजरायल पर इस्लामी आतंकी संगठन हमास के हमले के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) ने इसकी आलोचना की है। भारत अपने मित्र इजरायल के समर्थन में खड़ा है। हालाँकि, हमेशा से स्थितियाँ ऐसी नहीं थीं। महात्मा गाँधी की सोच के कारण भारत ने आजादी के 45 सालों तक इजरायल से राजनयिक संबंध कायम नहीं किए।

महात्मा गाँधी के नाम से विख्यात मोहनदास करमचंद गाँधी की यहूदियों के प्रति सोच के कारण भारत ने आजादी के बाद से ही फिलिस्तीन का समर्थन किया। हालाँकि, आगे चलकर सन 1992 में भारत ने इजरायल के साथ राजनयिक संबंध भी स्थापित किए। दरअसल, महात्मा गाँधी इजरायल के निर्माण के ही पक्ष में नहीं थे।

महात्मा गाँधी ने 26 नवम्बर 1938 को पत्रिका ‘हरिजन’ में लिखा, “यहूदियों के लिए अपने देश की माँग मुझे प्रभावित नहीं करती।” आगे महात्मा गाँधी कहते हैं कि फिलिस्तीन अरबों का उसी तरह से है जैसे इंग्लैंड इंग्लिश लोगों का है और फ़्रांस फ्रेंच लोगों का है। यह गलत और अमानवीय होगा कि यहूदियों को फिलिस्तीनियों पर थोपा जाए।

साभार: हरिजन, वॉल्यूम-6, पेज- 352

महात्मा गाँधी यहूदियों के लिए अलग देश बनाने के विरोध में लिखते हैं, “यहूदियों की धार्मिक किताब में लिखा हुआ फिलिस्तीन कोई भौगोलिक अवस्था नहीं है। यह उनके मन में है। अगर यहूदी फिलिस्तीन में बसना भी चाहते हैं तो ब्रिटिश हथियारों के साये में ऐसा करना गलत है। कोई धार्मिक काम बम या बंदूकों की सहायता से नहीं हो सकता है। यहूदी, फिलिस्तीन में केवल अरबों की दया पर बस सकते हैं।”

गौरतलब है कि प्रथम विश्व युद्ध से पहले तक आज का फिलिस्तीन का इलाका तुर्किये के उस्मानिया साम्राज्य के कब्जे में था। प्रथम विश्व युद्ध में उस्मानिया साम्राज्य हार गया, जिससे इस जमीन पर अंग्रेजों का अधिकार हो गया। अंग्रेजों ने यहूदियों से यह वादा किया था कि उनका साथ देने पर यहूदियों अपनी जमीन मिलेगी।

अंग्रेजों ने अपने वादे को निभाया। आगे चलकर बड़े यहूदी व्यापारियों ने भी फिलिस्तीन में जमीनें खरीदीं। वहाँ पर पूरी दुनिया से यहूदी आकर बसने लगे। द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मनी में हुए यहूदियों के साथ व्यवहार के बाद यह भावना और प्रबल हो गई।

उधर, महात्मा गाँधी यहूदियों पर हुए अत्याचार से पूरी सहानुभूति रखते थे। उन्होंने लिखा है, “मेरी पूरी संवेदनाएँ यहूदियों के साथ हैं। कुछ यहूदी दक्षिण अफ्रीका के दिनों से मेरे मित्र हैं। यहूदी उसी तरह ईसाईयत के अछूत हैं, जिस तरह हरिजनों को हिन्दुओं में बराबर नहीं समझा जाता।”

महात्मा गाँधी ने यहूदियों को अपनी माँगों को पूरा करवाने के लिए सविनय अवज्ञा का रास्ता अपनाने की सलाह दी थी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि यहूदियों के साथ यूरोप में अत्याचार नहीं हुआ होता तो उनके फिलिस्तीन लौटने का प्रश्न ही नहीं उठता था।

जर्मनी में हिटलर द्वारा यहूदियों पर किए गए अत्याचार के बाद जुलाई 1946 में लिखे एक लेख में महात्मा गाँधी कहते हैं, “मेरे विचार में वह (यहूदी) अमेरिका और ब्रिटेन की सहायता से अपने आपको फिलिस्तीनियों पर जबरदस्ती थोप रहे हैं। अब वो ऐसा नंगे आतंकवाद के दम पर ऐसा कर रहे हैं।”

वर्ष 1947 में संयुक्त राष्ट्र ने एक प्रस्ताव को पारित करके इजरायल और फिलिस्तीन के बंटवारे को मान्यता दी थी। भारत ने फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (PLO) को वर्ष 1974 में फिलीस्तीन का आधिकारिक शासक माना था। भारत ऐसा करने वाला पहला गैर-अरब देश था। हालाँकि, भारत ने इजरायल के साथ वर्ष 1992 में पूर्ण राजनयिक सबंध स्थापित किए थे।

बता दें कि इस बंटवारे को लेकर इजरायल और फिलिस्तीन में संघर्ष होता रहा है। 7 अक्टूबर 2023 को फिलिस्तीन के आतंकी संगठन हमास के हमले में अब तक 1,300 इजरायली नागरिकों की मौत हो चुकी है। वहीं, लगभग 3,000 लोग घायल हैं। इजरायल ने भी इसके जवाब में बमबारी की है जिसमें 1,000 से अधिक फिलीस्तीनी आतंकी मारे जा चुके हैं।

पार्वती कुंड अब भी होती है जहाँ महाबली भीम की बोई धान, जागेश्वर धाम की ज्योति से जुड़ा है प्रलय… : जानिए उस आदि कैलाश के रहस्य जिसके PM मोदी ने किए दर्शन

पीएम मोदी आज (12 अक्टूबर, 2023) उत्तराखंड के दौरे पर है। इस दौरान उन्होंने पिथौरागढ़ जिले में मौजूद पार्वती कुंड में पूजा-अर्चना की और अल्मोड़ा के जागेश्वर मंदिर के दर्शन भी किए। ये पृथ्वी के उन पावन स्थलों में हैं जहाँ आदि योगी महादेव और उनकी प्राण प्रिया पार्वती के चरण पड़े थे।

गले में विष धारण करने वाले नीलकंठ पर यकीन दिखाता है कि कहीं कुछ तो है जो सर्वशक्तिमान है। उसी सर्वशक्तिमान के कर्मस्थली की ऐसी रहस्यमयी और अनोखी बातें हैं जो सदियों से चली आ रही हैं। उन पर कुछ बताते हुए मन भाव-विभोर हो उठता है, अहसास होने लगता है जगत के इस भव सागर में आप महज एक छोटे से कण के अलावा कुछ भी नहीं है। बार-बार कुछ ऐसे साक्ष्य याद दिलाते हैं कि सच में ऐसा कुछ हुआ था।

फिर चाहे हम बात करें पार्वती कुंड और आदि कैलाश के रास्ते में खुद उग और कट जाने वाली धान की खेती की या फिर जागेश्वर मंदिर में दुनिया के नष्ट होने की भविष्यवाणी को सच करने वाली पीतल की मूर्ति की हो।

भगवान शिव के प्रेम और समर्पण के साक्ष्य हैं तो आदि कैलाश में उनके वैरागी जीवन के दर्शन होते हैं। आदि कैलाश समुद्र तल से 6,310 मीटर की ऊँचाई पर है इसे छोटा कैलाश भी कहा जाता है। एक तरह से ये तिब्बत में माउंट कैलाश की प्रतिकृति है। यह उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में भारत-तिब्बत सीमा के पास है।

कुमाऊँ हिमालय की शांति में आदि कैलाश हिंदू भक्तों के लिए बहुत महत्व का तीर्थ है। छोटा कैलाश की तलहटी में सुंदर पन्ना जैसी पार्वती झील और गौरी कुंड में इसकी झलक देखी जा सकती है।

आदि कैलाश का पार्वती झील, गौरी कुंड में पड़ने वाला प्रतिबिंब जैसे कहता हो कि ‘पार्वती बोली शंकर से, सुनिये भोलेनाथ जी, रहना है हर एक जन्म में, मुझे तुम्हारे साथ जी, वचन दिजिए न छोड़ेंगे, कभी हमारा हाथ जी’ और लगता है भोलेनाथ उसी वचन को आज तक निभा रहे हैं।

आदि कैलाश को शिव कैलाश, बाबा कैलाश और जोंगलिंगकोंग पीक जैसे कई नामों से जाना जाता है। आदि कैलाश और ओम पर्वत को कैलाश पर्वत के बराबर और उनकी तरह ही पवित्र माना जाता है। महाभारत, रामायण और बृहत पुराण जैसे अधिकांश हिंदू धर्मग्रंथों में इसका उल्लेख मिलता है।

मान्यता हैं कि भगवान शंकर बारात लेकर देवी पार्वती से विवाह करने गए थे और उनका पहला पड़ाव आदि कैलाश था। यह स्थान इतना सुंदर और आकर्षक था कि भगवान शिव जिन्हें केदारनाथ (पर्वतों के भगवान) के नाम से भी जाना जाता है उन्हें इस जगह से प्यार हो गया। उन्होंने इसे अपना दूसरा घर बना लिया।

वो यहाँ अक्सर अपने परिवार, देवी पार्वती या उमा और बच्चों कार्तिक और गणेश के साथ आते थे। आदि कैलाश मंदिर के पास पार्वती सरोवर इस पवित्र कहानी का साक्षी है। वहीं ये भी मान्यता है कि आदि कैलाश वह जगह है जहाँ शिव और पार्वती कैलाश पर्वत पर समाधि लेने के लिए जाते समय रुके थे।

आज भी स्थानीय लोगों की ऐसी मान्यता है कि यहाँ पार्वती मंदिर और कुंड हैं। इसी कुंड में माता पार्वती ने स्नान किया था। इस क्षेत्र का महाभारत में उल्लेख मिलता है और इसका प्रमाण है इतनी ऊँचाई जहाँ इंसान भी मुश्किल से पहुँच पाता हैं वहाँ खुद होने वाली धान की खेती।

आदि कैलाश मंदिर (फोटो साभार: गुरुग्राम के मुकेश यादव के फेसबुक अकाउंट से)

आदि कैलाश सिन ला दर्रे और ब्रह्मा पर्वत के पास है। कुट्टी गाँव से 17 किमी दूर आदि कैलाश जाने का बेस कैंप भगवान शिव मंदिर के साथ पवित्र जोलिंगकोंग झील या पार्वती कुंड के पास है। यहाँ ऑक्सीजन की कमी रहती है। यहाँ थोड़ी ही दूर चलने पर ही साँस फूलना आम बात है। आदि कैलाश जाने के रास्ते में पार्वती कुंड पहला पड़ाव है।

यहाँ से आदि कैलाश के बहुत ही अलौकिक दर्शन होते हैं। फेसबुक पर घुम्मकड़ी जिंदाबाद ग्रुप में मुकेश यादव ने लिखा है कि इसे शब्दों में बता पाना बहुत मुश्किल है। वह लिखते हैं कि यहाँ धान के पौधे दिखते हैं। कहा जाता है कि धान की ये खेती यहाँ महाभारत काल में पांडवों के पाँच भाईयों में से एक महाबली भीम ने की थी। इस धान की खेती के बीच जाने की मनाही है।

पार्वती सरोवर से गौरी कुंड जाने वाले रास्ते में धान की खेती (फोटो साभार: घुमक्कड़ी जिंदाबाद फेसबुक अकाउंट आयुष)

ये शायद भीम के बाहुबल का ही प्रताप है कि ये खेती बगैर नागा यहाँ अब भी खुद-ब-खुद होती रहती है। कहा जाता है कि ये धान कोई नहीं बोता और न ही कोई काटता है मगर फिर भी ये खुद उगकर कट भी जाती है जिसे कोई भी नहीं देख पाता। इसके बाद आदि कैलाश मंदिर की तरफ बढ़ते हुए वहाँ पार्वती कुंड के दर्शन होते हैं। इसके बाद गौरी कुंड आता है।

फेसबुक पर एक अन्य यूजर आयुश फोटो सहित लिखते हैं, “इस फोटो में धान की खेती है जो कि आदि कैलाश यात्रा में आपको पार्वती सरोवर से गौरी कुंड जाने वाले रास्ते में देखने को मिलेगी। इसे मैने खुद जुलाई महीने में अकेले यात्रा के दौरान देखा।”

अल्मोड़ा के जागेश्वर धाम के नजदीक एएसआई के संग्रहालय पर लगा शिलालेख (फोटो साभार: प्रोफेसर मृगेश पांडे )

शिव कण-कण में व्याप्त है इसकी गवाही धरती का जर्रा-जर्रा देता है। देव भूमि कहे जाने वाले उत्तराखंड में तो इसके कई साक्ष्य देखने को मिलते हैं। इस राज्य की मूल निवासी होने की वजह से मैंने भी पग-पग ऐसे निशान देखें हैं जो बगैर आवाज बताते हैं कि हिंदू धर्मग्रंथों में जिन जगहों का उल्लेख है वो वास्तव में हैं। वो काल्पनिक नहीं है।

मेरे जिले अल्मोड़ा का जागेश्वर धाम भी इनमें से एक हैं। हालाँकि यहाँ मुझे एक बार ही जाने का मौका मिला, लेकिन इसकी तस्वीर मेरे मानस पटल पर हमेशा के लिए छप गई। स्कन्द पुराण के मानस खण्ड में जागेश्वर ज्योतिर्लिंग का उल्लेख है।

जागेश्वर धाम मुख्य मंदिर (फोटो साभार: जागेश्वर धाम फेसबुक अकाउंट)

इसके अनुसार, 8वाँ ज्योतिर्लिंग, नागेश, दरुक वन में है। यह देवदार के पेड़ों से जुड़ा है। ये पेड़ इस मंदिर के चारों तरफ फैले हुए हैं। गंगा की जटाओं सरीखी नदी जटा गंगा इसके पास बहती है। इसके अलावा शिव पुराण, लिंग पुराण में भी इस मंदिर का उल्लेख आता है।

स्कंद पुराण और लिंग पुराण के अनुसार, भगवान शिव के 8वें शिव ज्योतिर्लिंग की उत्पत्ति यहीं हुई थी और यहाँ से ही उनकी पूजा शुरू हुई थी। जागेश्वर मंदिर 1870 मीटर पर है। इसके परिसर के अंदर शिव के मुख्य मंदिर सहित यहाँ विभिन्न देवी-देवताओं के छोटे प्राचीन मंदिर मिलाकर कुल 125 मंदिर हैं।

यहाँ कुल 174 मूर्तियाँ हैं जिनमें भगवान शिव और पार्वती की रत्नों से सुसज्जित पत्थर की मूर्तियाँ शामिल हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा साल 2000 में मंदिर के नजदीक संग्रहालय बनाया गया है। इसके मुताबिक ये मंदिर 9वीं से 13वीं शताब्दी ईस्वी तक के हैं।

नवीन चंद्र वर्मा बंजारा की बनाई जागेश्वर धाम की पेंटिग

उत्तर भारत में गुप्त साम्राज्य के दौरान हिमालय की पहाडियों के कुमाऊं क्षेत्र में कत्यूरीराजा थे। जागेश्वर के मंदिरों का निर्माण भी उसी काल में हुआ। इसी कारण मंदिरों में गुप्त साम्राज्य की झलक भी दिखलाई पड़ती है। इस मंदिर के पास में धन के देवता कुबेर का मंदिर भी है।

ऐसा माना जाता है कि आदि शंकराचार्य ने केदारनाथ धाम जाने से पहले जागेश्वर धाम का दौरा किया और कई मंदिरों का जीर्णोद्धार और पुनर्निर्माण करवाया। हालाँकि, इसे लेकर विद्वानों की राय अलग-अलग हैं।

इस मंदिर को लेकर एक मान्यता यह भी है कि जिन औरतों के बच्चे नहीं होते वो जागेश्वर के महामृत्युंजय मंदिर में आकर संतान माँगती है और भोलेनाथ उनकी झोलियों में संतान का सुख डालते हैं। मंदिर के पुजारी कहते हैं कि महिलाएँ महामृत्युंजय मंदिर के सामने दीया हाथ में लेकर संतान की कामना करती हैं।

जागेश्वर मंदिर परिसर में देवदार का अर्धनारीश्वर पेड़ (फोटो साभार: divinetravelalone.com)

जागेश्वर मंदिर के परिसर में तो देवदार का एक पेड़ ऐसा भी है, जिसमें भगवान शिव का परिवार दिखता है। इसे अर्धनारीश्वर कहा जाता है। इस पेड़ में भगवान शिव, माता पार्वती और उनके पुत्र गणेश की आकृति दिखाई पड़ती हैं।

इस सबके बावजूद मुझे इस मंदिर की एक चीज जो आज तक याद है और जिसे आँखे बंद कर में अभी देख सकती हूँ वो हैं यहाँ पीतल की एक मूर्ति इसके हाथों में दीया है और जो जलता रहता है। इसे लेकर कहा जाता है कि जब ये दीया इस मूर्ति के पैरों तक पहुँच जाएगा, तब दुनिया नष्ट हो जाएगी।

मेरी आमा (दादी) कहा करती थी कि ये दीया लगातार नीचे की तरफ खिसकता जा रहा है जो आँखों से देखने पर पता नहीं चलता। वहीं इस ज्योति के बारे में कहा जाता है कि ये ज्योति अनन्त काल से जल रही है और सदैव जलती रहेगी क्योंकि सारी सृष्टि शिवमय है। सृष्टि से पूर्व शिव हैं और सृष्टि के विनाश के बाद भी केवल शिव ही शेष रहेंगे।

जागेश्वर धाम की प्रलय ज्योति (फोटो साभार:फेसबुक अकाउंट जागेश्वर धाम)

प्रोफेसर मृगेश पांडे मुताबिक, कहा जाता है कि जिन जगहों में 12 ज्योतिर्लिंग और उप ज्योतिर्लिंग हैं, वहाँ माँ भगवती के शक्ति पीठ हैं। यहाँ दारूकावने में दारुका नाम के राक्षस का माँ भगवती ने वध किया। इसी वजह ये यहाँ माँ भगवती का शक्ति पीठ है इसे माँ पुष्टि देवी के शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है और नागेश्वर नागेश नाम से ज्योतिर्लिंग भी है।

पुष्टि नागेश शक्ति पीठ के पास लव-कुश नामक हवन कुंड है। कहा जाता है कि वशिष्ठ ऋषि ने लव-कुश से यहाँ पर पूजा करवाने के बाद ये बनवाया था। जनश्रुति है कि श्रीराम यहाँ शिवजी के दर्शन को आए थे।

इस बात के प्रमाण स्वरूप दंडेश्वर में पहाड़ी के शिखर ढाल पर रामपादुका के तौर पर दिखता है। यहाँ के पुजारी षष्टी प्रसाद भट्ट के अनुसार, पूरे भारत में शिव लिंग रूप में पूजा यहीं से शुरू हुई थी। सभी ज्योतिर्लिंग के मूल में जागेश्वर ही है।

इजरायल ने बनाई ‘यूनिटी गवर्नमेंट’, कहा-  हमें नैतिकता का पाठ ना पढ़ाए, जब तक बंधक नहीं रिहा होंगे तब तक गाजा को बिजली-पानी की सप्लाई नहीं

इस्लामी आतंकी संगठन हमास के हमलों के बाद पैदा हुई परिस्थितियों के मद्देनजर इजरायल में ‘यूनिटी सरकार’ का गठन किया गया है। साथ ही इजरायल ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक हमास बंधक बनाए गए लोगों को नहीं छोड़ता तब तक वह गाजा में बिजली, पानी, ईंधन की आपूर्ति को बहाल नहीं करेगा।

आपातकालीन एकता सरकार का गठन प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और विपक्ष के नेता बेनी गान्त्ज ने मिलकर किया। दोनों नेता अब वार कैबिनेट का गठन करेंगे। इस फैसले के बाद गान्त्ज ने कहा है कि हम हमास का नामोनिशान मिटा देंगे। वहीं नेतन्याहू ने कहा है कि हमास का हर आतंकी अपने आप को मरा हुआ समझे।

उल्लेखनीय है कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजरायल पर अचानक ही हमला कर दिया था। इसमें अब तक 1300 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। आतंकियों ने बड़ी संख्या में लोगों को बंधक भी बना लिया था। इसके बाद से जवाबी कार्रवाई में इजरायल ने गाजा में हमास के ठिकानों पर बमबारी कर रहा है। इन हमलों में करीब 1100 आतंकी ढेर हो चुके हैं।

हमास के हमलों के बाद इजरायल के रक्षा मंत्री याओव गैलेंट ने गाजा पर कब्जे के आदेश दिए थे। गाजा को पानी, बिजली और ईंधन की आपूर्ति रोक दी गई थी। अब गाजा में न तो बिजली है और ना ही आपातकाल में जनरेटर चलाने के लिए ईंधन है। गाजा से बाहर निकलने के लिए उपयोग किए जाने वाले दोनों निकासी प्वाइंट भी बंद कर दिए गए हैं। इनमें से एक मिस्र, जबकि एक इजरायल के नियंत्रण में है। पूरे गाजा की इजरायली सैनिकों ने घेराबंदी भी कर रखी है।

गाजा में समस्याएँ गहराने के बाद रेडक्रॉस ने गाजा के भीतर ईंधन के टैंकरों को जाने देने की अपील की थी। रेडक्रॉस का कहना है कि यदि अस्पतालों में बिजली की व्यवस्था नहीं हुई तो लोगों को बचाना मुश्किल हो जाएगा। इजरायल के ऊर्जा मंत्री इजरायल काट्ज ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने एक्स/ ट्विटर पर कहा है, “गाजा को मानवीय मदद? जब तक इजरायली बंधक वापस नहीं आते तब तक ना ही कोई बिजली का स्विच ऑन होगा, ना किसी पानी के पाइप को खोला जाएगा और ना ही कोई भी तेल का टैंकर गाजा में घुसेगा। मानवता, मानववादियों के लिए है। हमें कोई नैतिकता का पाठ ना पढ़ाए।”

हाईकोर्ट को बताया- मंदिर हमेशा मंदिर होता है, भले वो खंडहर हो जाए… फिर भी ठुकरा दी शाही ईदगाह मस्जिद को श्रीकृष्ण जन्मभूमि घोषित करने की माँग

उत्तर प्रदेश की इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले से संंबंधित एक जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है। दरअसल, इस याचिका में मथुरा स्थित शाही ईदगाह मस्जिद को श्रीकृष्ण जन्मभूमि के रूप में मान्यता देने की माँग की गई थी।

मुख्य न्यायाधीश प्रीतिन्कर दिवाकर और न्यायाधीश आशुतोष श्रीवास्तव वाली हाईकोर्ट की पीठ ने पिछले महीने इस मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब बेंच ने बुधवार (11 अक्टूबर 2023) को यह आदेश पारित किया है।

साल 2020 में वकील महक माहेश्वरी ने इस जनहित याचिका को दायर की थी। इसके साथ ही उन्होंने मथुरा स्थित इस शाही ईदगाह मस्जिद को हिंदुओं को सौंपने की भी माँग की थी। उन्होंने इसके पीछे तमाम हिंदू शास्त्रों का भी संदर्भ दिया था।

याचिकाकर्ता ने यह दलील दी थी कि विभिन्न ऐतिहासिक ग्रंथों में इस स्थान को भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि के रूप में दर्ज किया गया है। माहेश्वरी ने यह भी तर्क दिया था कि मथुरा का इतिहास रामायण काल का है, जबकि इस्लाम का उदय सिर्फ 1500 साल पहले हुआ था।

PIL में कहा गया कि भगवान कृष्ण का जन्म कंस के कारागार में हुआ था और वह जन्म स्थान शाही ईदगाह की वर्तमान संरचना के नीचे है। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि 1968 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ ने ईदगाह मस्जिद प्रबंध समिति के साथ एक समझौता किया, जिसमें देवता की संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा बाद में दे दिया गया, जोकि अवैध है।

एडवोकेट महक ने कहा था कि शाही ईदगाह मस्जिद को एक मस्जिद नहीं माना जा सकता, क्योंकि इस्लामी न्यायशास्त्र में दावा है कि जबरन हासिल की गई भूमि पर कभी भी मस्जिद नहीं बनाई जा सकती। वहीं, हिंदू न्यायशास्त्र में कहा गया है कि एक मंदिर हमेशा एक मंदिर ही होता है, भले ही वह खंडहर हो गया हो।

इसलिए जनहित याचिका में अनुरोध किया गया था कि मंदिर की जमीन हिंदुओं को सौंप दी जानी चाहिए और उस स्थान पर मंदिर बनाने के लिए श्रीकृष्ण जन्मभूमि का एक उचित ट्रस्ट बनाया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता ने विवादित संरचना की अदालत की निगरानी में ASI से GPS आधारित खुदाई के लिए अलग से प्रार्थना भी की थी।

बता दें कि इस साल मई में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा अदालत में लंबित श्रीकृष्ण जन्मभूमि से संबंधित सभी मुकदमों को अपने पास स्थानांतरित कर लिया था। हाईकोर्ट ने भगवान श्रीकृष्ण विराजमान और सात अन्य की ओर से दायर एक आवेदन पर यह आदेश दिया था।

वहीं, पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था। सर्वोच्च न्यायालय ने इस पर फैसला इलाहाबाद उच्च न्यायालय पर छोड़ दिया था। इस याचिका में मस्जिद परिसर में वैज्ञानिक सर्वेक्षण की माँग की गई थी।

मदरसे की छात्रा से सद्दाम ने रेप का किया प्रयास, चीखने पर गला दबाकर मार डाला: UP पुलिस ने पैर में मारी गोली, खेत में मिली थी नाबालिग की लाश

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में गुरुवार (12 अक्टूबर, 2023) को पुलिस से मुठभेड़ में सद्दाम नाम के एक व्यक्ति को गोली लगी है। सद्दाम पर मदरसे में पढ़ने वाली 13 साल की एक नाबलिग छात्रा से रेप के प्रयास और हत्या का आरोप था। घायल सद्दाम का पुलिस अभिरक्षा में इलाज करवाया जा रहा है। पुलिस ने आरोपित के खिलाफ कोर्ट में कड़ी पैरवी करने और जल्द से जल्द सजा दिलाने की घोषणा की है।

यह मामला खीरी जिले के थानाक्षेत्र तिकुनियाँ का है। यहाँ के पुलिस अधीक्षक IPS गणेश साहा ने बताया कि 8 अक्टूबर को थाने में एक बच्ची की गुमशुदगी की सूचना मिली थी। इस मामले में केस दर्ज कर के पुलिस जाँच कर रही थी। अगले ही दिन 9 अक्टूबर को लड़की का शव गन्ने के खेत में मिला था। इस घटना के खुलासे के लिए पुलिस की कई टीमें लगाई गईं। जाँच के दौरान मृतका के पड़ोसी सद्दाम का नाम प्रकाश में आया।

पुलिस के मुताबिक 8 अक्टूबर को जब लड़की मदरसे में पढ़ाई कर के अपने घर लौट रही थी तब सद्दाम उसे रास्ते में मिला। उसने लड़की को अपने पास बुलाया। सद्दाम को पहले से पहचानने की वजह से लड़की उसके पास चली गई। थोड़ी देर में सद्दाम लड़की को खींच कर गन्ने के खेत की तरफ जाने लगा। जब लड़की को सद्दाम की नीयत पर शक हुआ और अपने साथ किसी अनहोनी की आशंका लगी तो वो जोर-जोर से चीखने लगी। यह बात किसी और को न पता चल जाए ये सोच कर सद्दाम ने लड़की का गला दबा दिया।

जिससे लड़की की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी। वहीं मौका पा कर सद्दाम भाग निकला। बताया जा रहा है कि पुलिस को सद्दाम की लोकेशन मिली तो उसकी घेराबंदी की गई। खुद को पुलिस से घिरता देख सद्दाम ने पुलिस पर गोली चलानी शुरू कर दी। सद्दाम को सरेंडर का मौक़ा दिया गया लेकिन जब वो नहीं माना तो आत्मरक्षा में पुलिस को भी गोली चलानी पड़ी। गोली सद्दाम के पैर में लगी है।

घायल सद्दाम का इलाज पुलिस कस्टडी में चल रहा है। SP खीरी ने बताया कि सद्दाम के खिलाफ कोर्ट में प्रभावी पैरवी की जाएगी और जल्द से जल्द सजा दिलाने का भी प्रयास किया जाएगा।

बताते चलें कि 8 अक्टूबर, 2023 को पुलिस ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ अपहरण का केस दर्ज किया था। जब लड़की का शव मिला तो कपड़े फटे हुए थे। सिर सहित समेत पूरे शरीर पर चोटों के निशान थे। मृतका की माँ ने कहा कि उसकी बेटी के मुँह में मिट्टी भरी हुई थी।

इजरायल पहला निशाना, पूरी दुनिया पर निजाम है मिशन: जिस हमास के आतंकियों ने किया रेप, काटे सिर, जिंदा जलाया… उनके ‘प्लान’ का Video वायरल

इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने इजरायल में जो बर्बरता दिखाई है उससे पूरी दुनिया सन्न है। लेकिन सोशल मीडिया में वायरल हो रहे एक वीडियो से पता चलता है कि इजरायल केवल पहला निशाना है। हमास का प्लान पूरी दुनिया में ऐसी ही बर्बरता अंजाम देने की है। वह पूरी दुनिया पर अपना निजाम चाहता है।

वायरल वीडियो हमास के कमांडर महमूद अल जहर का है। इसमें वह बता रहा है कि पूरी दुनिया पर राज उनका लक्ष्य है। कोई यहूदी, कोई ईसाई गद्दार नहीं बचेगा। यह वीडियो ‘मेमरी टीवी’ ने दिसंबर 2022 में प्रकाशित किया था। ताजा हमलों के बाद यह इंटरनेट पर फिर से वायरल हो रहा है।

78 साल का महमूद अल जहर (Hamas Commander Mahmoud Al Zahar) 2004 से हमास का सरगना है। वह इस आतंकी संगठन का संस्थापक सदस्य भी है। 2006 में वह फिलिस्तीन की सरकार में विदेश मंत्री भी बना था।

करीब एक मिनट के वायरल वीडियो में महमूद कह रहा है, “इजरायल केवल पहला लक्ष्य है। पूरी पृथ्वी का 510 मिलियन वर्ग किलोमीटर क्षेत्र एक ऐसे निजाम के अधीन आएगा जहाँ कोई अन्याय नहीं होगा। कोई उत्पीड़न नहीं होगा। वे जुल्म और अपराध नहीं होंगे जो सभी अरब देश, लेबनान, सीरिया और फिलिस्तीन के लोग झेल रहे हैं।”

यह बयान बताता है कि हमास का मिशन वह नहीं है जो लिबरल-सेकुलर बुद्धिजीवी बताते हैं। उसका मिशन अन्य इस्लामी कट्टरपंथी संगठनों की तरह ही पूरी दुनिया में इस्लामी निजाम कायम करना है। इजरायल में महिलाओं के साथ रेप, उनकी शवों के नग्न परेड, बच्चों के सिर काटने से लेकर लोगों को जिंदा जलाने तक की घटनाओं को अंजाम देकर भी उसने यही साबित किया है।

खुद महमूद अल जहर भी इजरायल के भीतर बच्चों की हत्या की बात पहले कर चुका है। उसने 2009 में इजरायल पर फिलिस्तीनी बच्चों की हत्या का आरोप लगते हुए कहा था कि इससे अब इजरायल में बच्चों की हत्याएँ जायज हो गई हैं।

गौरतलब है कि हमास ने इजरायल पर 7 अक्टूबर 2023 को अचानक से हमला किया था, जिसमें अब तक 1300 से अधिक लोगों की मौत ही चुकी है। आतंकियों ने एक म्यूजिक फेस्टिवल पर हमला कर 260 लोगों की हत्या की गई थी। महिलाओं का उनकी दोस्तों के शवों के सामने रेप किया था। इस फेस्टिवल में शामिल कई लोगों को आतंकी बंधक बनाकर भी ले गए थे। शानी लौक नाम की महिला के शव का नग्न परेड निकाला था।