उत्तराखंड के नैनीताल में चल रहे एक अवैध मदरसे को सील कर दिया गया है। जोली कोट क्षेत्र में स्थित इस मदरसे को लेकर कुछ चौंकाने वाले खुलासे हुए, जिसके बाद वहाँ की पुलिस-प्रशासन में हड़कंप मच गया। इस मदरसे में छापेमारी के दौरान प्रशासन को कई अनियमितताएँ भी मिली हैं। 2010 से ही ये मदरसा यहाँ संचालित किया जा रहा था, यानी पिछले 13 वर्षों से। जिलाधिकारी वंदना सिंह को इसके बारे में शिकायतें प्राप्त हुई थीं।
इसके बाद हल्द्वानी की सिटी मजिस्ट्रेट ऋचा सिंह और तहसीलदार संजय सिंह को मौके पर भेजा गया। जब टीम यहाँ चेंकिंग के लिए पहुँची तो 24 बच्चे रहते हुए मिले। चौंकाने वाली बात ये है कि ये सभी बीमार थे। बच्चे काफी बीमार थे, लेकिन उनके इलाज के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। उनके हाथ-पाँव में चोट के निशान भी मिले हैं। बच्चों ने बताया है कि उनके साथ मारपीट की जाती थी, उनमें से कई भाग भी गए। सफाई व्यवस्था के निरीक्षण में भी कई गड़बड़ियाँ मिलीं।
सिटी मजिस्ट्रेट ऋचा सिंह ने बताया कि कमरे भी गंदे थे और बच्चों के पीने के लिए साफ़ पानी तक उपलब्ध नहीं था। उनके रहने के लिए कोई साफ़ जगह नहीं थी। यहाँ तक कि उन्हें खाने के लिए भोजन तक ठीक से नहीं मिलता था। मदरसे में गन्दगी का ढेर लगा हुआ था। मदरसा सील करने के बाद सभी बच्चों के अभिभावकों को बुलाया गया है और उनके साथ छात्रों को घर भेजा जा रहा है। जाँच की जा रही है कि बच्चों के शरीर पर चोट के निशान के क्या-क्या कारण हैं।
उत्तराखंड: नैनीताल के पास चल रहा अवैध मदरसा सील, डीएम ने दिया सख्त आदेश, जांच-पड़ताल के बाद हुई कार्रवाई https://t.co/wTXXd8EG89
— Ravinder Chaudhary | रविंद्र चौधरी (@iMightyWarrior9) October 8, 2023
उत्तराखंड में लगभग 50 मदरसे ऐसे बताए जा रहे हैं, जिन्हें नियम-कानून का पालन किए बिना अवैध तरीके से संचालित किया जा रहा है। हालिया दिनों में ये पहला मौका है, जब पहाड़ी राज्य में मदरसा सील करने की कार्रवाई की गई हो। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार इसे लेकर सख्त है। उत्तर प्रदेश में तो पहले ही मदरसों में राष्ट्रगान से लेकर स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में पढ़ाने का निर्णय लिया गया है। वहाँ मदरसों के सिलेबस में गणित और विज्ञान अनिवार्य है।
इजरायली सीमावर्ती समुदायों पर हमास के हमले से मरने वालों की अनुमानित संख्या बढ़कर लगभग 600 हो गई है। इजरायली सेना के अनुसार, रविवार (8 अक्टूबर 2023) तक इजरायल में 600 से अधिक लोग मारे गए हैं, जिनमें से 44 सैनिक भी शामिल हैं। यह संघर्ष शुक्रवार को शुरू हुआ, जब हमास ने इजरायल पर 5000 से अधिक रॉकेट दागे। इजरायल ने जवाबी कार्रवाई में गजा में हमास के ठिकानों पर हवाई हमले किए।
वहीं, इजरायली कैबिनेट ने आधिकारिक तौर पर युद्ध की घोषणा कर दी है और इस विषय से जुड़े कानून को पास कर दिया है।
सीमाई इलाकों में ज्यादा नुकसान
आतंकवादी हमलों के बाद घायलों और मृतकों को संभालने वाले स्वयंसेवी समूह जका (ZAKA) के एक प्रवक्ता ने हिब्रू मीडिया को बताया कि 600 से अधिक इजरायली मारे गए हैं। कई शव तब मिले हैं जब इजरायली सेना हमास के बंदूकधारियों के साथ लड़ाई जारी रखे हुए है, और उन्हें सीमा पर रिहायशी इलाकों से बाहर निकाल रही है। इस संघर्ष ने दोनों पक्षों के लिए एक विनाशकारी स्थिति पैदा कर दी है। इजरायल में, कई इमारतें और बुनियादी ढाँचा क्षतिग्रस्त हो गया है। गाजा और आसपास के इलाकों में हजारों लोग बेघर हो गए हैं।
स्टेट ऑफ वॉर की घोषणा
इस बीच, अब इजरायली कैबिनेट ने आधिकारिक तौर पर युद्ध की घोषणा की कर दी है। साल 1973 के बाद पहली बार इजरायल आधिकारिक तौर पर किसी युद्ध को लड़ रहा है। इजरायल की सुरक्षा कैबिनेट ने हमास के एक बड़े हमले के बाद आधिकारिक तौर पर युद्ध में जाने के लिए मतदान किया है, जो 1973 के बाद से नहीं देखा गया है।
Israel’s security cabinet has voted to officially go to war following a major attack by Hamas in a move that has not been seen since 1973.
इजराइली विदेश मंत्रालय ने कहा है कि रविवार को मिस्र के शहर अलेक्जेंड्रिया में इजराइल के दो पर्यटकों और उनके स्थानीय गाइड की गोली मारकर हत्या कर दी गई। रविवार सुबह हुए हमले में एक अन्य इजरायली घायल हो गया, जिसे इजराइली विदेश मंत्रालय ने स्थानीय’ बताया है। दशकों बाद इजरायली नागरिकों पर मिस्र की तरफ से ये पहला हमला है। दोनों में सिनाई प्रायद्वीप को लेकर हुए समझौते के बाद से युद्ध विराम लागू है।
हमास के आतंकवादियों ने किस तरह से नृशंस हत्याओं को अंजाम दिया है और हत्या करके लोगों की भावनाओं को रौंदा है, उसका एक वीडियो हमास की तरफ से ही जारी किया गया है, जिसमें आतंकियों ने एक परिवार की 18 साल की लड़की की निर्मम हत्या कर दी, फिर उस पूरे परिवार को उनके ही घर में बंधक बना लिया। गोलीबारी के समय उनकी खराब मानसिक स्थिति के बावजूद वीडियो शूट किया और फिर वायरल कर दिया। हमास की कोशिश है कि वो इजरायली लोगों के हौसलों पर चोट करे।
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Israeli family heartlessly paraded on camera by Hamas terrorists while being taken hostage. One daughter ruthlessly executed, leaving her siblings in traumatic disbelief.
इजरायल रक्षा बलों के प्रवक्ता, रियर एडमिरल डैनियल हगारी का कहना है कि सेना ने कल से शुरू हुई लड़ाई के दौरान दक्षिणी इजरायल और गजा पट्टी में 400 से अधिक फिलिस्तीनी आतंकवादियों को मार डाला और दर्जनों को पकड़ लिया। उन्होंने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, “इस समय तक, (किबुत्ज) कफर अजा में सेनाएं लड़ रही हैं, बड़ी संख्या में कस्बों में तलाशी चल रही है। सभी शहरों में आईडीएफ बल हैं, ऐसा कोई शहर नहीं है जिसमें आईडीएफ बल नहीं है।”
हगारी का कहना है कि आईडीएफ का मिशन गाजा सीमा पर कस्बों से सभी निवासियों को निकालना, इजरायली क्षेत्र में लड़ाई को समाप्त करना, सुरक्षा अवरोध में उल्लंघनों को नियंत्रित करना और पट्टी में आतंकवादी स्थलों के खिलाफ हमले जारी रखना है।
इजरायल का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें हमास आतंकी ‘अल्लाहु अकबर’ का नारा लगाते हुए एक महिला के नग्न शव के साथ ट्रक में खुलेआम जश्न मनाते हुए परेड निकाल रहे हैं। वीडियो में महिला के शव पर थूकते हुए आतंकियों को देखा जा सकता है। शव के साथ भी अमानवीय व्यवहार किया गया। उक्त मृतका की पहचान जर्मनी की शानी लौक के रूप में हुई है, जो इजरायल में एक म्यूजिक फेस्टिवल में हिस्सा लेने गई थी। उनकी माँ ने भावुक अपील करते हुए कहा है कि कम से कम उनकी बेटी का शव लौटा दिया जाए।
जहाँ एक तरफ पूरी दुनिया इस घटना की निंदा कर रही है, खुद को पूर्व पत्रकार बताने वाली इरेना अकबर ने हमास के उन आतंकियों का बचाव किया है जिसने जर्मन महिला की हत्या की। उन्होंने इस्लाम का बचाव करते हुए लिखा कि इसमें किसी महिला पर हमला करना युद्ध का नियम नहीं है, इसीलिए ये निंदनीय है। ये अलग बात है कि इस्लामी आक्रांताओं के हमलों से लेकर ISIS के दौर तक, महिलाओं को सेक्स स्लेव बनाए जाने का लंबा इतिहास रहा है।
‘इंडियन एक्सप्रेस’ में काम कर चुकीं इरेना अकबर ने अजीब सा तर्क देते हुए कहा कि महिला का शव पूरी तरह नग्न नहीं था, क्योंकि उसके शरीर के ऊपरी और निचले हिस्से ढँके हुए थे। सवाल ये है कि क्या अब इस पर बहस की जाएगी कि महिला कितनी नग्न थी, ऐसी घटना में संवेदनहीनता का परिचय देकर कितना नग्न किया गया था इसका प्रतिशत निकाला जाएगा? इरेना अकबर का आगे का तर्क, या यूँ कहें कि कुतर्क और भी ज़्यादा संवदेनहीन नजर आता है।
वो लिखती हैं कि शानी लौक का इंस्टाग्राम हैंडल देखने पर पता चलता है कि वो अक्सर बिकनी व ‘शरीर दिखाने वाले अन्य वस्त्र’ पहनती थीं, इसीलिए ये संभव हो सकता है कि जब उनकी हत्या की गई तब वो इन्हीं कपड़ों में हों। इतना लिखने के बाद बड़ी बेशर्मी से इरेना अकबर ने लिखा कि वो मृतका का अपमान नहीं करना चाहतीं, न ही उन्हें नीचा दिखाने का उनका कोई इरादा है। उन्होंने इंस्टाग्राम हैंडल को ‘सबूत’ बताते हुए दवा किया कि वो ‘तर्क’ दे रही हैं।
इसके बाद इरेना अकबर ने हमास आतंकियों को क्लीन-चिट देते हुए संभावना जता दी कि महिला को उनलोगों ने नग्न नहीं किया था। सोचिए, यहाँ ये चर्चा नहीं की जा रही है कि एक निर्दोष महिला की हत्या क्यों की गई, बल्कि इस पर बचाव किया जा रहा है आतंकियों का कि उन्होंने महिला को नग्न किया या नहीं, कितने कपड़े उतारे। फिर उलटा उन्होंने इस्लाम का हवाला देकर आतंकियों को सलाह दे डाली कि उन्हें एक कपड़े से महिला का शरीर ढँक देना चाहिए था।
उन्होंने उल्टा उन ‘गैर-मुस्लिमों’ से ही सवाल कर डाला कि जब वो ईरान की पुरानी तस्वीरें शेयर कर के बिकनी पहनने को ही महिलाओं की स्वतंत्रता मानते हैं तो फिर उन्हें एक महिला को नग्न किए जाने से दिक्कत क्यों है? इरेना अकबर ने शानी लौक की इंस्टाग्राम वाली तस्वीर शेयर की। साथ ही उनकी लाश की नग्न तस्वीर को एडिट कर कवर कर दिया और इस्लाम में ‘मृतक के सम्मान’ का हवाला दिया। यानी, ‘अल्लाहु अकबर’ चिल्लाते हुए हत्या और महिला को नग्न परेड कराना ठीक है उनके हिसाब से, नहीं एक तस्वीर को एडिट कर शरीर ढँक देने से वो आतंकियों का बचाव कर के भी ‘महान’ बन गईं?
The woman, whose body was being taken in a pick-up truck, has been identified as Shani Louk, a German-Israeli dual citizen who was reportedly attending a music festival.
First, this is NOT an etiquette of war in Islam to attack women, and hence this is condemnable.
याद कीजिए, ये वही इरेना अकबर है जिन्होंने कोविड-19 महामारी के लिए खुदा का शुक्रिया किया था और यह दावा किया था कि यदि कोरोनावायरस नहीं होता तो भारतीय मुसलमान डिटेन्शन कैंप में होते। इरेना अकबर ने कहा था, “यदि कोरोनावायरस नहीं होता तो भारतीय मुसलमान डिटेन्शन कैंप में होते। हालाँकि मैं वायरस की शुक्रगुजार नहीं हूँ जिसने मेरी आंटी की जान ली, जिसने मेरे अब्बू को आईसीयू में पहुँचा दिया और कई घरों में ट्रेजेडी का कारण बन गया। मैं इस तथ्य पर बात कर रही हूँ कि जब ‘फासीवादी’ अपने प्लान बना रहे थे तब अल्लाह ने अपना प्लान बना दिया।“
इरेना अकबर हमेशा से ही ऑनलाइन मंचों पर घृणास्पद बयान देने के लिए जानी जाती रही है। फरवरी 2020 में अकबर ने दलितों पर यह आरोप लगाया था कि उन्होंने गुजरात दंगों के दौरान मुस्लिमों का गैंगरेप और उनकी हत्या की थी। अकबर हिंदुओं के द्वारा चलाए जा रहे व्यापार के बहिष्कार की बात भी कर चुकी है। उसने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा जामिया के पक्ष में आवाज न उठाने पर घोर निराशा भी व्यक्त की थी।
इजरायली सुरक्षा बल अब कहर बनकर हमास और अन्य आतंकी संगठनों पर टूट पड़े हैं। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, अब तक 400 से अधिक आतंकी ढेर हो चुके हैं। टॉप अधिकारी के हवाले से ये जानकारी सामने आई है कि टारगेटेड हमलों में अब तक आतंकी संगठन हमास और उससे जुड़े 400 से अधिक लोग ढेर हो चुके हैं।
वहीं, लेबनान सीमा के पार भी ऑपरेशन जारी है। इस बीच, एक महिला ने हमास से अपनी 85 वर्षीय दादी को रिहा करने की माँग की है, जिन्हें हमास के आतंकी इजरायल के अंदर से उठाकर गजा पट्टी में लेकर चले गए थे।
ऑपरेशन हो रहा तेज, आतंकी हो रहे ढेर
इजरायल रक्षा बलों के प्रवक्ता, रियर एडमिरल डैनियल हगारी का कहना है कि सेना ने कल से शुरू हुई लड़ाई के दौरान दक्षिणी इज़राइल और गाजा पट्टी में 400 से अधिक फिलिस्तीनी आतंकवादियों को मार डाला, और दर्जनों को पकड़ लिया। उन्होंने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, “इस समय तक, (किबुत्ज) कफर अजा में सेनाएँ लड़ रही हैं, बड़ी संख्या में कस्बों में तलाशी चल रही है। सभी शहरों में आईडीएफ बल हैं, ऐसा कोई शहर नहीं है जिसमें आईडीएफ बल नहीं है।”
इन चार लक्ष्यों पर काम कर रही आईडीएफ
हगारी का कहना है कि आईडीएफ का मिशन गाजा सीमा पर कस्बों से सभी लोगों को निकालना, इजरायली क्षेत्र में लड़ाई को समाप्त करना, सीमा पर बाड़ को फिर से बनाने के साथ घुसपैठ रोकना और गजा पट्टी के भीतर आतंकी ठिकानों को नष्ट करना है। हम अपने लक्ष्य से बिल्कुल नहीं हटेंगे और दुश्मनों को नेस्तनाबूद करके ही दम लेंगे।
हमास ने 85 साल की दादी को भी बंधक बनाया, वापसी की गुहार
इस बीच, एक इजरायली महिला ने गजा पट्टी में हमास आतंकवादियों के हाथों बंधक बनाई गई अपनी 85 वर्षीय दादी की रिहाई की माँग की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीर साझा कर मार्मिक अपील की है। बता दें कि हमास के आतंकियों ने शनिवार (07 अक्टूबर 2023) को इजरायल के सीमाई इलाकों पर हमला किया और कई इजरायली लोगों को बंधक बना लिया। इन बंधकों में दर्जनों बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल हैं।
The name of this old lady is Yaffa Adar. She is 85yrs old and the grandma of Adva who wrote the post below.
एडवा अदार नाम की महिला सोशल मीडिया पर लिखती हैं, “यह मेरी दादी हैं, उन्हें पकड़ लिया गया और गाजा ले जाया गया है। उसका नाम याफ़ा अदार है और वह 85 वर्ष की है। शायद उन्हें एक कोने में मरने के लिए फेंक दिया गया हो। उन्हें मदद की जरूरत है।”
कनाडा का सरकारी टीवी चैनल कैनेडियन ब्रॉडकास्टिंग कारपोरेशन (CBC) हमास के हमलावरों को आतंकी नहीं कहेगा। वह इजरायल द्वारा वर्ष 2005 में गाजा की जमीन पर से कब्ज़ा हटाने के निर्णय को भी जनता नहीं बताएगा। यह दिशानिर्देश CBC के पत्रकारों को लिखित रूप से दिए गए हैं।
सोशल मीडिया पर किए गए एक दावे के अनुसार, CBC के पत्रकारों को एक मेल के माध्यम से दिशानिर्देश दिया गया है कि किसी भी स्थिति में हमास के आतंकियों को वह आतंकी ना कहें। भले ही वह किसी सरकारी बयान का हवाला दे रहे हों तो लोगों को बाद में यह स्पष्ट करें कि वह आतंकी नहीं हैं।
This media email is doing the rounds. CBC staff are instructed not to call Hamas “terrorists”… and not to mention that Israel ended the “occupation” of Gaza in 2005 by withdrawing unilaterally. It argues that because Israel continues to control the border, that still counts as… pic.twitter.com/fnyQTxJWlU
इसमें यहाँ तक लिखा ही कि कनाडा की सरकार भी यदि हमास के आतंकियों को आतंकी कहे तो भी उसे ना माने। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2005 में गाजा से इजरायली नागरिकों तथा सुरक्षा बालों बलों को हटाने जाने वाले कदम को भी CBC नहीं बताएगा। उसका मानना है कि इजरायल ने अब भी फिलीस्तीनी भूमि पर अधिकार कर रखा है।
हमास के आतंकियों ने 7 अक्टूबर, 2023 के दिन इजरायल के दक्षिणी हिस्से में हमला बोल कर लगभग 400 लोगों को मार दिया है। हमास के आतंकियों और इजरायली सुरक्षा बलों के बीच अब भी लड़ाई जारी है। इजरायल ने गाजा पट्टी में हवाई हमले किए हैं। इजरायल ने अपने नागरिकों को सीमावर्ती इलाकों से निकालना चालू कर दिया है और आगे 24 घंटों में यह कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी।
ऐसा पहली बार नहीं है जब CBC समेत पश्चिमी मीडिया आतंकियों को आतंकी कहने से झिझक रहा हो। इससे पहले भारत और कनाडा के बीच विवाद की जड़ बने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर को भी कनाडाई मीडिया में एक्टिविस्ट और सिख नेता बताया था।
हरदीप सिंह निज्जर एक खालिस्तानी आतंकी था जिसकी 18 जून 2023 को कनाडा के सरे में हत्या हो गई थी। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने इस हत्या के आरोप भारत पर लगाए थे। भारत ने इन आरोपों को ख़ारिज करते हुए कनाडा के नागरिकों को वीजा बंद कर दिए थे और उसे आतंकियों का शरणदाता बताया था। CBC सहित पश्चिमी मीडिया में निज्जर को कहीं पर प्लम्बर, कार्यकर्ता, सिख नेता, अलगाववादी नेता और अन्य नाम दिए गए थे। स्पष्ट रूप से उसको आतंकवादी नहीं कहा गया। यह तब है जब निज्जर के विरुद्ध दो बार इंटरपोल का नोटिस जारी हो चुका था और वह भारत में आतंकी गतिविधियों के संचालन के लिए वांछित था।
बिहार पुलिस की संवेदनहीनता का एक और उदाहरण सामने आया है। बिहार के मुजफ्फरपुर में पुलिसकर्मियों ने सड़क दुर्घटना में में मारे गए एक व्यक्ति का शव बिना अस्पताल भिजवाए ही सीधे नदी में फेंक दिया। उसके शव को अमानवीय तरीके से नदी में फेंका गया। जानकारी के अनुसार, मुजफ्फरपुर के फकुली इलाके में राष्ट्रीय राजमार्ग 22 पर एक अधेड़ व्यक्ति की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। उसे एक अज्ञात ट्रक ने कुचल दिया था। ट्रक से कुचले जाने के कारण व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई।
बाद में घटनास्थल पर पहुँची पुलिस ने शव को ना ही अस्पताल में भेजा और ना ही उसका पंचनामा किया। शव को सीधे सड़क से उठा कर कुछ पुलिसकर्मियों ने अमानवीय तरीके से डंडे से पुले के ऊपर से नदी में फेंक दिया।
बिहार पुलिस की शर्मनाक करतूत, सड़क दुर्घटना में मृत शख्स के शव को उठाकर नहर में फेंका.
पुलिस के इस कृत्य को आसपास मौजूद लोगों ने अपने फ़ोन में रिकॉर्ड कर लिया और वायरल कर दिया। वीडियो वायरल होने पर पुलिस की आलोचना हुई। वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि रक्तरंजित शव को पुलिसकर्मी डंडे के सहारे से पुल के ऊपर से नदी में फेंक देते हैं। इस वीडियो की पुष्टि नहीं हो सकी है। वीडियो के वायरल होने के बाद पुलिस ने रात को शव वापस निकलवाया और पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। पुलिस के पहले शव के अपमान और फिर उसे वापस निकालने के कृत्य की भी वीडियो बन गई।
वीडियो वायरल होने के बाद लोग दोषी पुलिसकर्मियों के ऊपर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस का इस मामले में कहना है कि शव को तो पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया था, लेकिन सड़क पर पड़े अवशेषों को नदी में फेंका गया।
हालाँकि, वायरल हो रहे वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि एक पुलिसकर्मी शव को पैर से पकड़ कर उसे नदी में फेंकने के लिए पुल की रेलिंग पर रखते हैं। इसके पश्चात शव को दूस्रापुलिस कर्मी डंडे के सहारे से नदी की तरफ पलट देता है। वीडियो में घटनास्थल पर काफी लोग भी खड़े भी दिखाई देते हैं। जिले के एसएसपी ने कहा है कि वह दोषी पुलिसकर्मियों पर जांच के उपरान्त कार्रवाई करेंगे।
इजरायल आज चौतरफा हमला झेल रहा है। जहाँ एक तरफ फिलिस्तीन के हमास आतंकियों ने जल, थल और नभ से यहूदी देश में घुसपैठ कर नरसंहार शुरू कर दिया, वहीं लेबनान से आतंकी संगठन हिज़्बुल्ला ने रॉक्स दागे। हमास ने 5000 रॉकेट दाग कर इस युद्ध की शुरुआत की, जिसके बाद इजरायल ने अपने नागरिकों की रक्षा के लिए कुछ भी करने की बात कहते हुए तगड़ी जवाबी कार्रवाई की। इजरायल एक छोटा सा देश है, यहूदी भी अल्पसंख्यक हैं, ऐसे में सवाल उठता है कि इस्लामी मुल्कों को ये इतना क्यों खटकता है?
इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए हमें थोड़ा इतिहास में जाना होगा। इस्लामी मुल्कों से घिरे इस देश ने न सिर्फ तकनीक के मामले में खुद को दुनिया के सबसे उन्नत देशों में शुमार किया है, बल्कि सामरिक सुरक्षा के मामले में भी खुद को काफी सुदृढ़ किया है। इसकी एंटी-मिसाइल तकनीक ‘आयरन डोम’ की भी काफी चर्चा होती है, जो कई रॉकेट हमलों को एक साथ नेस्तनाबूत करने की क्षमता रखता है। हालाँकि, इस बार इजरायल के लिए कड़ी परीक्षा की घड़ी है क्योंकि इसके 300 से अधिक नागरिक मारे जा चुके हैं।
6 Day War: जानिए कैसे इजरायल ने इजिप्ट, सीरिया और जॉर्डन को हराया
आज जो इजरायल की सीमाएँ हैं, उसका इतिहास बहुत हद तक 1967 में हुए अरब-इजरायल युद्ध तक जाता है। तब इजरायल ने एक साथ सीरिया, मिस्र और जॉर्डन को हरा कर खुद को स्थापित किया था। अरब ने इस नए देश को उजाड़ने की पूरी कोशिश की, लेकिन वो नाकाम रहा। इस युद्ध को ‘6 Day War’ के नाम से जाना जाता है, क्योंकि ये 6 दिनों तक चला था। ये 5 से 10 जून, 1967 तक चला था। इससे पहले 1948 में उनके बीच युद्ध हुआ था, जो अगले ही साल युद्धविराम समझौतों के बाद खत्म हो गया था।
लेकिन, तनाव बरकरार रहा था। इसके बाद आता है 1956 का समय, जब सीनाई प्रयद्वीप और अरब के अकाबा की खाड़ी को जोड़ने वाले समुद्री रास्ते (Straights Of Tiran) को लेकर जंग छिड़ गई। भूमध्य सागर और लाल सागर के बीच स्थित इस संकरे समुद्री रास्ते में इजिप्ट ने इजरायली जहाजों को रोक दिया था, जिसके बाद ये युद्ध हुआ। इसके बाद इजरायली जहाजों को फिर से अनुमति मिली, साथ ही UN इमरजेंसी फ़ोर्स की स्थापना हुई। इस तरह से अरब और इजरायल का तनाव नया नहीं है।
1967 के युद्ध में इजरायल ने सबसे अपने अपनी वायुसेना के माध्यम से इजिप्ट पर एयर स्ट्राइक किया, उसके बाद थल सेना के माध्यम से आक्रमण किया। इजरायल ने न सिर्फ सीनाई प्रयद्वीप पर अपना नियंत्रण स्थापित किया, बल्कि गाजा पट्टी को भी अपने कब्जे में ले लिया। पहले इन दोनों पर इजिप्ट का कब्ज़ा था। इतना ही नहीं, इजरायल ने जॉर्डन से वेस्ट बैंक और ईस्ट जेरुसलम भी ले लिया। साथ ही सीरिया से पहाड़ी क्षेत्र गोलन हाइट्स का नियंत्रण भी इजरायल की सेना के पास चला गया।
इस तरह इस युद्ध में इन तीनों इस्लामी मुल्कों को बड़ी भौगोलिक क्षति पहुँचा कर इजरायल ने एक तरह से पूरे मिडिल-ईस्ट का नक्शा बदल दिया। जब तक UN ने समझौता कराया, इजरायल का काम हो चुका था। 1948 में पहले अरब-इजरायल युद्ध के दौरान इस छोटे से यहूदी देश को मिटाने की जो कोशिश शुरू हुई थी, वो आज भी जारी है। वहीं 1956 वाले युद्ध को ‘Suez Crisis’ के नाम से जाना जाता है। तब स्वेज़ नहर को मिस्र के तत्कालीन राष्ट्रपति जमाल अब्देल नसर ने इस नहर का संचालन करने वाली ब्रिटिश-फ्रेंच स्वामित्व वाली कंपनी का राष्ट्रीयकरण कर दिया था।
उसके बाद इजरायल ने गाजा पट्टी के माध्यम से हमला बोला, पीछे से UK और फ्रांस भी पहुँचे। इजरायल के जहाज ‘स्ट्रेट्स ऑफ़ तिरान’ के माध्यम से आने-जाने लगे, जिसे इजिप्ट ने पहले रोक रखा था। इजरायल को तभी से एहसास है कि उसके अस्तित्व पर बहुत बड़ा खतरा मँडरा रहा है। जहाँ तक 6 दिन वाले युद्ध का सवाल है, उसके पीछे भी कई कारण हैं। इनमें मुख्य है – फिलिस्तीन के आतंकियों को सीरिया ने संरक्षण देना शुरू कर दिया था और उसके माध्यम से इजरायल में गुरिल्ला युद्ध को अंजाम देता था।
अप्रैल 1967 में इजरायल और सीरिया सीधे आमने-सामने आ गए, जिसमें सीरिया के 6 फाइटर जेट्स तबाह हो गए। इसके बाद सोवियत यूनियन ने इजिप्ट को ख़ुफ़िया सूचना दी कि इजरायल उसकी उत्तरी सीमाओं की तरफ सेना को पूरी तैयारी के साथ भेज रहा है। ये सूचना पुष्ट नहीं थी, लेकिन इजिप्ट एक्शन में आ गया। उसने अपनी फ़ौज को सीनाई पेनिनसुला की तरफ मार्च करने का आदेश दिया। वहाँ से UN की पीसकीपिंग फ़ोर्स को हटा दिया गया।
मई 1967 में एक बार फिर से मिस्र के राष्ट्रपति जमाल अब्देल नसर ने इजरायली जहाजों के लिए तिरान जलडमरूमध्य में आवागमन को रोक दिया। इसी महीने में उन्होंने जॉर्डन की किंग हुसैन के साथ एक रक्षा समझौते पर भी हस्ताक्षर किया। उस समय डेमोक्रेटिक पार्टी के लिंडन बी जॉनसन अमेरिका के राष्ट्रपति हुआ करते थे। उनके नेतृत्व में अमेरिका ने भी तिरान के समुद्री रास्ते को कब्ज़ा मुक्त कराने का अभियान चलाया। ये योजना सफल नहीं हुई और जून 1967 में इजरायल के नेताओं ने स्ट्राइक करने के लिए वोटिंग की।
इसके साथ ही 5 जून को ऑपरेशन भी शुरू हो गया और इजरायली वायुसेना हरकत में आ गई। इजिप्ट के खिलाफ हवाई हमले किए गए, जिसे ‘ऑपरेशन फोकस’ कहा गया। इसके लिए करीब 200 फाइटर जेट्स का इस्तेमाल किया गया जिन्होंने भूमध्य सागर से होकर इजिप्ट पर हमला बोला। जमीन पर ही इजिप्ट की 90% वायुसेना को तबाह कर दिया गया। उसके 18 एयरफील्ड्स बर्बाद कर दिए गए। दिन खत्म होने-होने तक पूरे मिडिल-ईस्ट के आसमान पर इजरायल ही मँडरा रहा था और एक तरह से उसका एकाधिकार आ गया था।
हवाई हमलों के फायदा उठाने हुए उसी दिन गाजा पट्टी और सीनाई प्रायद्वीप में भी इजरायल की जमीनी सेना घुसी। इजिप्ट की सेना बिखर गई और उन्हें भारी क्षति पहुँची। उधर जॉर्डन के पास गलत खबर पहुँच गई कि इजिप्ट जीत रहा है और उसने इजरायल पर बमबारी शुरू कर दी। इसके बाद ईस्ट जेरुसलम और वेस्ट बैंक में घुस कर इजरायली सेना ने तगड़ा पलटवार किया। आखिरकार 7 जून को जेरुसलम पर इजरायल का कब्ज़ा हुआ और वेस्टर्न वॉल (2000 वर्ष प्राचीन यहूदियों के ‘सेकेण्ड टेम्पल’ का अंश) में यहूदी प्रार्थना सभा आयोजित की गई, साथ ही जीत का जश्न भी मनाया गया।
युद्ध का अंतिम चरण इजरायल की उत्तर-पूर्वी सीमा पर लड़ा गया। 9 जून को इजरायल भारी गोलीबारी के बाद सीरिया के गोलन हाइट्स में घुसा। अगले दिन वहाँ उसका नियंत्रण स्थापित हो गया। उसी दिन संयुक्त राष्ट्र ने समझौता करा कर युद्ध विराम करवाया। हालाँकि, तब तक 132 घंटे चले इस युद्ध में 20,000 अरब और 800 इजरायली मारे जा चुके थे। मिस्र के राष्ट्रपति को अपमानजनक तरीके से इस्तीफा देना पड़ा। हालाँकि, समर्थन में हुई रैलियों के बाद वो फिर वापस आ गए थे।
इस हार ने पूरे अरब जगत को सन्न कर दिया था। इससे इजरायल के भीतर एक आत्मविश्वास और वहाँ की जनता में गौरव का संचार हुआ। अगस्त 1967 में सूडान के खार्तूम में अरब नेताओं की मुलाकात हुई। उन्होंने आपस में समझौता किया कि इजरायल को कभी मान्यता नहीं दी जाएगी। इजरायल में गाजा पट्टी के साथ-साथ करीब 10 लाख फिलिस्तीनी भी आ गए थे, जिनमें से कई भाग खड़े हुए। इजरायल ने 1982 में सीनाई प्रायद्वीप और 2005 में गाजा पट्टी शांति समझौते के तहत लौटा दी, लेकिन गोलन हाइट्स पर उसका नियंत्रण बना रहा।
1967 का इजरायल-अरब युद्ध और उसके पीछे की कहानी
सोचिए, यहूदी वो समाज है जिसके 60 लाख लोगों को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाज़ी जर्मनी के हिटलर ने मरवा दिया था, उसके बाद भी ये समाज उठ खड़ा हुआ। इसे खत्म करने की कोशिशें आज भी जारी हैं। 1948 के युद्ध में जमाल अब्देल नसर की उम्र 30 साल थी और वो तब मेजर हुआ करते थे। इजरायल की जीत के बावजूद फल्लुजा पॉकेट (गाजा से 30 किलोमीटर दूर स्थित एक गाँव) में इजिप्ट की फ़ोर्स ने सरेंडर करने से इनकार कर दिया था।
पहले अरब-इजरायल युद्ध के नायक थे इजरायल के दक्षिणी फ्रंट पर ऑपरेशन को अंजाम दे रहे इटझाक राबिन। 1948 के युद्ध को आज भी ‘अल-नकबा’ यानी बड़ी तबाही के रूप में जाना जाता है, क्योंकि तब भी साढ़े 7 लाख फिलिस्तीनियों को इजरायल के नियंत्रण से भागना पड़ा था। यही वो युद्ध था जिसके कारण सेना ने सत्ताओं पर कब्ज़ा करना शुरू कर दिया। सीरिया में भी कई बार मिलिट्री ने सत्ता पर कब्ज़ा किया। 1948 के युद्ध के 4 साल बाद इजिप्ट में भी नसर ने किंग को तख़्त से उतार कर सत्ता कब्ज़ा ली।
वहीं इजरायल में राबिन 1967 में सेनाध्यक्ष बने। दोनों तभी से सुलग रहे थे। ये वो समय था, जब सोवियत यूनियन इजिप्ट की मदद किया करता था, उसकी वायुसेना को आधुनिक बनाने के लिए तकनीक और हथियार दिए गए। वहीं इजरायल के उस समय भी अमेरिका के साथ संबंध अच्छे तो थे, लेकिन वो फ़्रांस से लड़ाकू विमान और ब्रिटेन से तोप खरीदा करता था। 1967 तक इजरायल ने दुनिया की सबसे ताकतवर सेनाओं में से एक तैयार कर लिया था और परमाणु बम बनाने की ओर अग्रसर था।
भले ही उस समय अरब एकता की बातें चलती थीं, लेकिन जॉर्डन और सऊदी अरब के शासकों में एक असुरक्षा की भावना थी कि जिस तरह इजिप्ट और सीरिया में राजाओं को हटा कर सेना ने सत्ता कब्ज़ा ली है, वैसी क्रांतियाँ वहाँ न होने लगें। जॉर्डन के राजा थे किंग हुसैन, जिनके दादा अब्दुल्ला को जेसुसालमन में अल-अक्सा मस्जिद के बाहर एक कट्टर फिलिस्तीनी ने ही मार डाला था। 1948 में ब्रिटेन से उस क्षेत्र से वापस जाने के दौरान अब्दुल्ला और यहूदी संस्था ‘ज्यूइश एजेंसी’ में जमीन के बँटवारे को लेकर काफी बातचीत हुई थी, बाद में जॉर्डन और इजरायल थोड़े करीब भी आए थे।
1967 के युद्ध के बाद इन अरब देशों में भी उथल-पुथल मची थी। इजिप्ट में हमने देखा कि कैसे राष्ट्रपति का इस्तीफा हुआ, फिर प्रदर्शनों के बाद वो वापस आए। सीरिया में 1970 में वायुसेना कमांडर हाफिज उल असद ने सत्ता कब्ज़ा लिया और राष्ट्रपति बने। उनकी मौत के बाद 2000 में उनके बेटे बशर राष्ट्रपति बने। ये युद्ध इजरायल की रणनीतिक तैयारियों के लिए जाना गया, जहाँ उसने 48 घंटों में ढाई लाख प्रशिक्षित सैनिकों को काम पर लगा दिया।
2 दिनों के भीतर अधिकतर इजरायली सैन्य यूनिफॉर्म में थे। उस दौरान लेवी एशकोल इजरायल के प्रधानमंत्री हुआ करते थे। हालाँकि, उन्हें रक्षा मंत्रालय युद्ध के नायकों में से एक मोशे डायन को सौंपना पड़ा था। 1969 में हार्ट अटैक से उनकी मौत की वजह भी यही चीजें मानी गईं। एक आँख वाले डायन ही थे, जिन्होंने कहा कि पहले युद्ध होगा, राजनीति बाद में देखी जाएगी। 1956 के संघर्ष में अमेरिका ने इजरायल को कब्ज़ाए हुए इलाके लौटाने को कहा था, इसी तरह 1967 में पहली गोली न चलाने की सलाह दी थी। आज अमेरिका उस दौर से ज़्यादा इजरायल के करीब है और खुल कर उसके साथ है।
उत्तर प्रदेश के रायबरेली में एक नाबालिग लड़की ने प्रेमी के प्यार में अंधे होकर अपनी माँ को ही जहर पिला दिया, वो भी चाय में मिला कर। माँ उसे बॉयफ्रेंड से मिलने से रोकती थी। पता चला है कि नाबालिग लड़की अपनी माँ को बॉयफ्रेंड के कहने पर चाय में नींद की गोलियाँ मिला देती थी, जब माँ सो जाती थी, तो वो बॉयफ्रेंड को घर में बुला लेती थी। इसी तरह से उसकी रंगरेलियाँ लंबे समय से चल रही थी, लेकिन इस बार उसने जहर ही पिला दिया।
हालाँकि, जब उसकी माँ चाय पीने के बाद बेहोश हो गई तो लड़की घबरा गई और उसने पड़ोसियों से मदद माँगी। पुलिस ने बताया कि 48 वर्षीय महिला संगीता यादव को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और अब वह खतरे से बाहर हैं। पुलिस ने बताया कि 16 साल की आरोपित लड़की ने अपने प्रेमी से बाजार से जहर लाने को कह।
रायबरेली के एसपी आलोक प्रियदर्शनी ने कहा कि उन्होंने लड़की और उसके प्रेमी पर आईपीसी की धारा 328 (ज़हरीला पदार्थ खिला कर नुकसान पहुँचाना) के तहत मामला दर्ज किया है। एसपी ने कहा कि वे लड़की से पूछताछ कर रहे हैं, लेकिन उसका प्रेमी फरार था। हालाँकि, बाद में वो भी पकड़ा गया।
घर में बंद करने की दी धमकी, बेटी ने दिया जहर
डीह के थाना प्रभारी जीतेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि लड़की के पिता दूसरे जिले में काम करते हैं और वह अपनी माँ के साथ रहती है। उन्होंने कहा, “लड़की उसी गाँव (पूर्वा) में रहने वाले एक लड़के के साथ रिश्ते में है। लड़की की अपनी माँ के साथ नियमित बहस होती थी, क्योंकि वह लड़के के साथ उसकी मुलाकातों पर आपत्ति जताती थी।”
शुक्रवार (6 अक्टूबर, 2023) को संगीता ने अपनी बेटी को चेतावनी दी कि वह लड़के से मिलना बंद कर दे, नहीं तो वह उसे घर में बंद कर देगी। इस मामले में पुलिस ने पीड़ित माँ की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की है।
हमास के इजरायल पर हमले के विश्व भर के वामपंथी और कट्टर मुस्लिम उसे सही बताने में जुट गए हैं। हमास द्वारा महिला के शव को फिलीस्तीन में नग्न घुमाने से लेकर निहत्थे नागरिकों को मारने और उन्हें अगवा करने को सही बताने वालों में सामान्य मुस्लिमों के अलावा दुनिया भर में जाने वाले कट्टर मुस्लिम हस्तियाँ भी शामिल हैं।
इस हमले का समर्थन करने वालों में अमेरिकी- लेबनानी पॉर्न स्टार मिया खलीफा, भारतीय अभिनेत्री स्वरा भास्कर, पूर्व अभिनेत्री गौहर खान और पाकिस्तान की कमेटी का चेयरमैन अहमद हसन बोल्दाक शामिल हैं।
अभिनेत्री स्वरा ने अपने इन्स्टाग्राम पर स्टोरी लगाकर फिलीस्तीन का समर्थन किया है। स्वरा ने लिखा है कि अगर किसी ने इजरायल की पूर्व में आलोचना नहीं की है तो अब उसे हमास के हमले पर दुखी नहीं होना चाहिए। उन्होंने हमास के हमले की कोई आलोचना नहीं की है।
वहीं अभिनेत्री गौहर खान ने हमास द्वारा महिलाओं को मारने और उनके शवों की परेड की आलोचना करने के बजाय लिखा है, “दमन करने वाला कब से पीड़ित हो गया?” हालाँकि, लोग गौहर को अब इस पोस्ट के बाद उन्हें ट्रोल कर रहे हैं।
Since when did the oppressor become the oppressed ????? Convenient eyesight of the world !!!!! Blind to years n years of history of oppression .
लेबनानी-अमेरिकी पॉर्न स्टार मिया खलीफा ने भी हमास के इस हमले का समर्थन किया है। मिया ने इजरायल में हमला करते हमास के फिलीस्तीनी आतंकियों कि एक फोटो डाल कर लिखा है कि यह पुनर्जागरण की एक तस्वीर है।
मिया ने यह भी लिखा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन की पसंदीदा आदत अरब देशों के बच्चों पर बम मारना है। मिया का कहना है कि जो बायडेन ने वर्ष 2016 में सीरिया और ईराक के ऊपर 24,000 बम गिराए थे। वह बात अलग है कि बायडेन तब उप-राष्ट्रपति थे।
Joe Biden’s fav hobby is b*mbing Arab children, we haven’t forgotten the 24,000 he dropped between Syria and Iraq in 2016 alone https://t.co/GcbYpMJRmZ
मिया ने लिखा है कि अगर आप इजरायल के समर्थन में हैं तो आप गलत पक्ष ले रहे हैं। लोगों ने इसके जवाब में कहा है कि मिया एक पॉर्न स्टार हैं और उन्हें कम से कम ‘नैतिकता’ पर ज्ञान देने की आवश्यकता नहीं है। गौरतलब है कि पॉर्न फिल्मों में काम करने के कारण मिया खलीफा अपने देश लेबनान वापस नहीं जा सकती।
I don’t take political advice from whores who are banned from their own country
इसके अतिरिक्त स्वयं को पाकिस्तान के ‘मजहबी सद्भाव के लिए शान्ति समिति’ (National Peace Committiee For Interfaith Harmony) का चेयरमैन बताने वाला अहमद हसन बोल्डाक भारत को हमास जैसे ही हमले की धमकी दे रहा है।
भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा हमास के इस आतंकी हमले की आलोचना करने वाले ट्वीट के रिप्लाई में लिखा है, “भारत, तैयार रहो! पाकिस्तान तुम्हारा गर्व भी इसी तरीके से जल्दी ही तोड़ेगा।” विडम्बना की बात यह है कि भारत का घमंड तोड़ने वाला यह व्यक्ति पाकिस्तान में शान्ति के लिए काम करने का दावा करता है।
Chairman of the National Peace Committee for interfaith Harmony in Pakistan just threatened India with War pic.twitter.com/ATqrtGEdPj
खुद को छात्र संगठन स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (SFI) की महासचिव दिप्शिता ने भी फिलीस्तीन का खुले तौर पर समर्थन किया है। उनके अभिभावक संगठन कम्युनिस्ट पार्टी के मुखिया सीताराम येचुरी ने भी फिलीस्तीन का समर्थन किया है और हमास के हमले का कहीं जिक्र तक नहीं किया है।
इजरायल पर हमास के हमले के बाद पूरा देश एकजुट हो गया है। पूर्व प्रधानमंत्री और अब विपक्ष के प्रमुख नेता नफ्ताली बेनेट ने सरकार को खुला समर्थन दिया है और जंग के मैदान में जाकर आतंकियों के खिलाफ लड़ाई के लिए हथियार उठा लिए हैं वो रिजर्व ड्यूटी के तौर पर सेना से जुड़ चुके हैं। इजरायल में विपक्षी नेता सरकार के साथ एकजुट हैं। वहीं, भारत सरकार ने इजरायल को खुलकर समर्थन दिया है।
रिजर्व सैनिकों को जुड़ने के आदेश
इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट शनिवार (7 अक्टूबर, 2023) को रिजर्व बलों में शामिल होकर आतंकियों से लोहा लेने मोर्चे पर पहुँच गए हैं। उन्होंने शनिवार को घोषणा की कि आतंकवादियों द्वारा देश के क्षेत्रों में घुसपैठ, इजरायली नागरिकों की हत्या और अपहरण के बाद हमास को ‘उन्मूलन’ करने का समय आ गया है। इजरायली रक्षा बलों (आईडीएफ) द्वारा आतंकवादी हमलों के मद्देनजर रिजर्व सैनिकों को बुलाने की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद बेनेट को आर्मी रिजर्व में शामिल किया गया।
Naftali Bennett, a former prime minister of Israel, arrives for reserve duty.
He has joined Israel’s soldiers on the frontlines to defend Israel. May he and all the soldiers stay safe.pic.twitter.com/2kuDAuazBy
इज़रायली अधिकारियों के अनुसार, कम से कम 300 लोग मारे गए हैं और सैकड़ों अन्य घायल हुए हैं। इज़रायली सेना की रिपोर्ट है कि हमास ने अब तक कम से कम 5000 रॉकेट लॉन्च किए हैं। वहीं, इजरायली एयरफोर्स ने कहा है कि वो हमास के सैन्य ठिकानों को निशाना बना रही है।
A short while ago, IAF fighter jets struck a compound belonging to the head of the intelligence department in the Hamas terrorist organization.
बता दें कि इजरायल में अनिवार्य सैन्य सेवा है। इसके तहत युवक और युवतियों को तय समय के लिए सेना में ड्यूटी देनी पड़ती है। यही नहीं, उन्हें पूरी जिंदगी में कभी भी, जब तक वो फिट हैं, इमरजेंसी की स्थिति में सेवा देने के लिए बुलाया जा सकता है। ये इजरायल के सभी नागरिकों के लिए बाध्यकारी नियम है। ऐसे में नफ्ताली बेनेट अपनी दूसरी प्रतिबद्धताओं की दुहाई देकर बच सकते थे, लेकिन उन्होंने देश की सुरक्षा को चुना और इस्लामी आतंकवादियों के खिलाफ युद्ध में अपनी सेना की तरफ से कूद पड़े।