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इजरायल ने शुरू किया घर में घुस कर मारना… बिजली-राशन-पानी-गैस सब बंद, 3 लाख सैनिकों ने पूरी गाजा पट्टी को घेरा: PM नेतन्याहू का ऐलान – हमने स्टार्ट कर दिया

इजरायल के रक्षा मंत्री योव गैलेंट ने सोमवार (9 अक्टूबर, 2023) को कहा कि इजरायल ने गाजा पट्टी का ‘सीज’ शुरू कर दिया है। गाजा पट्टी से आतंकवादी समूह हमास द्वारा इजरायल के खिलाफ दशकों में सबसे घातक हमला शुरू करने के 3 दिन बाद उनका देश फिलीस्तीनी क्षेत्र पर ‘घेराबंदी’ के हिस्से के रूप में गाजा पट्टी को ब्लॉक कर दिया है। इस बीच, इजरायल के तीन लाख से अधिक रिजर्व सैनिकों ने अपनी पोजिशन सँभाल ली है और गाजा सीज की कार्रवाई शुरू कर दी है।

योव गैलेंट ने कहा कि उन्होंने गाजा पट्टी पर ‘पूर्ण घेराबंदी’ का आदेश दिया है, उन्होंने कहा कि ‘कोई बिजली, कोई भोजन, कोई गैस’ फिलिस्तीनी क्षेत्र तक नहीं पहुँचेगी। इजरायली रक्षा मंत्री ने कहा कि हम बर्बर आतंकियों से लड़ रहे हैं और उसी के हिसाब से जवाब देंगे। इसके लिए अब पूरी तरह से ‘गाजा पट्टी को सीज’ किया जाता है। योव गैलेंट ने एक वीडियो मैसेज में ये ऐलान किया। गैलंड इजरायली सेना के पूर्व कमांडर रह चुके हैं और बेंजामिन नेतन्‍याहू सरकार में अपने सख्‍त रुख के लिए जाने जाते हैं।

गाजा पट्टी से सटे इलाकों में तीन लाख से अधिक रिजर्व सैनिकों ने मोर्चा सँभाल लिया है और गाजा के सीज के आदेश को मानने की कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी गाजा में हवाई हमलों की तस्वीरें शेयर करते हुए कहा, “हमने शुरू कर दिया है। इजरायल की विजय होगी।”

बता दें कि गाजा पट्टी में करीब 23 लाख लोग रहते हैं। यह तीन तरफ से इजरायल और एक तरफ से मिस्र से घ‍िरा हुआ है। इजरायल और हमास के बीच युद्ध में अब तक 1000 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं और सैकड़ों की तादाद में लोग ज़ख़्मी हुए हैं।

येरुशलम पर भी हमला

इस बीच, हमास ने सोमवार को कई इजरायली शहरों पर रॉकेट हमलों किए, जिसका इजरायली सेना मुँहतोड़ जवाब दे रही है। सोमवार सुबह के बाद शाम को इजरायल पर रॉकेट बरसाए गए हैं। इजरायली डिफेंस फोर्स ने एक्स पर इसकी सूचना दी है। इसमें बताया गया है कि अब येरूशलम पर भी हमले हो रहे हैं और सायरन बज रहे हैं।

इजरायली रक्षा बलों ने कहा कि उसने रविवार रात गाजा पट्टी में हमास और इस्लामी जिहाद के ठिकानों पर 500 हमले किए। वहीं, गाजा से सटे हुए सारे इलाकों में जहाँ हमास के लड़ाके घुस आए थे, सारे इलाके मुक्त करा लिए गए हैं। सेना ने पूरे इलाके को कंट्रोल में ले लिया है। हालाँकि, छिटपुट लड़ाई अब भी जारी है।

लेबनान की तरफ से इजरायल में घुसने वाले कई हमलावर ढेर

इस बीच, इजरायली सेना ने जानकारी दी है कि लेबनान से लगने वाले ब्लू-जोन को पारकर इजरायल में घुस रहे कई हमलावरों को मार गिराया गया है। बता दें कि लेबनान में ताकतवर मिलिशिया संगठन हिज्बुल्ला, जो हमास को मदद देता है, उसने इजरायल पर हमले की घोषणा की थी। हिज्बुल्ला ने कहा था कि वो हमास के संघर्ष में उसके साथ है। इसी क्रम में उसकी तरफ से आतंकियों ने इजरायल में घुसने की कोशिश की, तो इजरायली सेना ने ऐसे कई आतंकियों को ढेर कर दिया है। इजरायली सेना ने कहा कि वो मजबूती से अपनी जमीन की सुरक्षा कर रही है।

ऑस्ट्रिया, जर्मनी के बाद पूरे ईयू ने बंद की फिलीस्तीन को मिलने वाली मदद

हमास के आतंकियों की ओर से इजरायल पर किए गए हमले के बाद यूरोपियन देशों इजरायल से एकजुटता दोहराई है। गाजा पट्टी की सीज की घोषणा के कुछ ही समय बाद ऑस्ट्रिया और जर्मनी ने फिलीस्तीन को जाने वाली मदद पूरी तरह से रोक दिया है। यही नहीं, यूरोपीय यूनियन ने फिलीस्तीन को मिलने वाली ‘हरेक पाई’ को रोकने की घोषणा कर दी है और सभी प्रकार की वित्तीय सहायता को रिव्यू करने के निर्देश दे दिए हैं।

योम कुप्पुर युद्ध के बाद सबसे बड़ा हमला

गौरतलब है कि इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर अचानक हमला किया। इसमें 700 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। 100 से अधिक लोगों अब भी बंधक हैं। इजरायल पर हमास लगातार रॉकेट हमले कर रहा है। बताया जा रहा है कि इस हमले को अंजाम देने से पहले इजरायल को हमास यह विश्वास दिलाने में सफल रहा था कि वह शांति चाहता है। हमास का यह हमला वर्ष 1973 में योम किप्पुर युद्ध के बाद इजरायल पर हुआ सबसे बड़ा हमला है। वहीं, इजरायली पलटवार में 500 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं।

तिलक लगाता और भगवा पहनता था मोहम्मद आसिफ, दलित लड़की को लेकर हुआ फरार: गिरिराज सिंह ने बिहार के प्रशासन को चेताया, सड़क पर उतरे केंद्रीय मंत्री

बिहार के बेगूसराय में ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। आरोप है कि मोहम्मद आसिफ नामक युवक तिलक और भगवा गमछा डालकर रहता था। उसने शादी का झाँसा देकर दलित लड़की को अगवा किया है। मामले में केंद्रीय मंत्री और स्थानीय सांसद गिरिराज सिंह ने पुलिस प्रशासन को लड़की वापस नहीं लाने पर विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला बेगूसराय जिले के बीरपुर थाना क्षेत्र के सरौंजा गाँव का है। यहाँ रहने वाली दलित लड़की गत 5 अक्टूबर, 2023 से लापता है। परिजनों ने गाँव के ही मोहम्मद आसिफ पर उनकी बेटी को अगवा करने का आरोप लगाया है। कहा जा रहा है कि आसिफ ने साधु का भेष धारण कर लड़की को अपने प्यार के जाल में फँसाया था। इसके बाद उसे अगवा कर लिया। (कुछ रिपोर्ट में आरोपित का नाम अशरफ भी लिखा जा रहा है।)

पीड़िता के परिजनों ने मोहम्मद आसिफ के खिलाफ बीरपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। ग्रामीणों का कहना है कि मुकदमा दर्ज होने के 3 बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। दलित लड़की के अगवा होने को लेकर ग्रामीणों ने इकट्ठा होकर पंचायत का आयोजन किया था। इसमें केंद्रीय मंत्री और बेगूसराय सांसद गिरिराज सिंह भी शामिल हुए।

इस दौरान गिरिराज सिंह ने कहा, “लव जिहाद की घटना बेगूसराय में रोज घट रही है। मैंने आज भी डीएम और एसपी से कहा है कि मुझे न्याय दो। यदि न्याय नहीं दिया तो कह दो कि हम बेगूसराय छोड़ दें। हम चले जाएँ किसी दूसरे देश में। किसी दूसरे राज्य में, योगी के राज में चले जाएँ।”

उन्होंने यह भी कहा, “यह लव जिहाद का मामला है। मैंने लोगों को थाने जाने से रोक दिया है, क्योंकि मैं देखता हूँ कि ये सरकार हिंदुओं को ही फँसा देती है। अगर मेरी बेटी नहीं आई तो मैं पूरे जिले में इन लोगों को घुमाकर हिंदुओं को इकट्ठा करूँगा और विरोध प्रदर्शन करूँगा।

गाज़ा में इस्तेमाल हुआ उस जर्मन महिला का क्रेडिट कार्ड, जिसकी लाश को नंगा कर आतंकियों ने निकाली थी परेड: हत्या से पहले हुई थी लूटपाट, माँ को अब भी बेटी के ज़िंदा होने की आस

हमास के आतंवादियों ने इजरायल में घुस कर कत्लेआम मचाया। इस दौरान एक वीडियो सामने आया, जिसमें एक जर्मन महिला की हत्या कर के उसकी लाश को नग्न कर दिया गया और फिर जुलूस निकाला गया। इसमें आतंकी ‘अल्लाहु अकबर’ का नारा लगाकर उसकी बॉडी पर थूकते नजर आए थे। अब उसके परिजनों ने कहा है कि आतंकियों ने उसके साथ लूटपाट की थी। इसके बाद गाजा में उसके क्रेडिट कार्ड का उपयोग किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जर्मनी की टैटू आर्टिस्ट शानी लौक की माँ रिकार्डा ने बेटी के जिंदा होने की उम्मीद जताई है। रिकार्डा ने कहा कि जब उन्होंने आखिरी बार अपनी बेटी को देखा था तब वह हमास के आतंकियों एक कार में बेहोशी की हालत में थी, इसलिए वह अभी यह स्वीकार नहीं कर सकतीं कि उनकी बेटी की मौत हो गई है।

इसके अलावा रिकार्डा ने बेटी के साथ लूटपाट होने की भी बात कही। उन्होंने कहा कि एक बैंक से उन्हें जानकारी मिली है कि शानी लौक का क्रेडिट कार्ड गाजा में उपयोग किया गया है। बता दें कि शानी लौक के सामने आए वीडियो में उसका चेहरा नहीं दिख रहा था। लेकिन, शरीर में बने टैटू को देखकर उसके परिजनों ने उसकी पहचान की थी।

बता दें कि इजरायल पर हमास के हमले के बाद एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें हमास के इस्लामी आतंकी ‘अल्लाहु अकबर’ का नारा लगाते हुए एक महिला के नग्न शव के साथ ट्रक में खुलेआम जश्न मनाते हुए परेड निकाल रहे थे। वीडियो में महिला के शव पर थूकते हुए आतंकियों को देखा गया था। शव के साथ भी अमानवीय व्यवहार किया गया। उक्त मृतका की पहचान जर्मनी की शानी लौक के रूप में हुई थी। वह इजरायल में एक म्यूजिक फेस्टिवल में हिस्सा लेने गई थी। इससे पहले उसकी माँ ने भावुक अपील करते हुए कहा था कि कम से कम उनकी बेटी का शव लौटा दिया जाए।

‘योगी राज में नहीं लगता डर, हमेशा मदद को तैयार रहती है यूपी पुलिस’: रात को 2 बजे भी ई-रिक्शा चलाती हैं बुर्कानशीं नजमा, शौहर की मौत के बाद कर रहीं मेहनत

महिला सुरक्षा को लेकर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने कई कदम उठाए हैं, जिनकी तारीफ़ होती रही है। अब मुरादाबाद जिले से इसका ताज़ा उदाहरण सामने आया है। यहाँ रहने वाली नजमा नामक महिला न केवल दिन बल्कि रात में भी ई-रिक्शा चलाती हैं। नजमा का कहना है कि योगी राज में उन्हें रात में डर नहीं लगता। पुलिस हमेशा मदद करती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नजमा मुरादाबाद के करुला इस्लाम नगर में रहती हैं। साल 2010 में पति की मौत के बाद उनके पास घर चलाने का कोई जरिया नहीं था। बेटा वेल्डिंग का काम करता है, लेकिन उससे भी उतनी अधिक कमाई नहीं हो पाती थी। ऐसे में उन्होंने सिलाई का काम शुरू किया, लेकिन अधिक पैसे नहीं मिल रहा था। इसीलिए, नजमा ने ई-रिक्शा चलाकर पैसे कमाना शुरू किया।

नजमा कहती हैं कि वो दिन हो या रात कभी भी ई-रिक्शा चलाती हैं। उन्हें उत्तर प्रदेश पुलिस और योगी आदित्यनाथ सरकार पर पूरा भरोसा है। इसलिए रात के 2 बजे भी रिक्शा चलाने में डर नहीं लगता। पुलिसकर्मी हमेशा मदद के लिए तैयार रहते हैं। नजमा बुर्का पहनकर ही रिक्शा चलाती हैं। अब वह हज और उमरा करना चाहती हैं। इसलिए भी उन्हें पैसों की जरूरत है। अब वो रिक्शा चलाकर धीरे-धीरे पैसे इकट्ठा कर रही हैं।

नजमा का यह भी कहना है कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनना चाहिए। आज के समय में यह बहुत जरूरी है। उन्होंने सलाह दी कि महिलाओं को किसी को भी दूसरे के पैसों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ई-रिक्शा में महिला ड्राइवर होने के चलते लोग उनका रिक्शा अलग से बुक करके ले जाते हैं।

घर चलाने को लेकर नजमा कहती हैं कि बेटे और उनकी कमाई मिलाकर 800-900 रुपए हो जाते हैं, इसीलिए घर अच्छे से चल जाता है। बता दें कि नजमा मुरादाबाद में रिक्शा चलाने वाली पहली महिला हैं। वह बीते 4 माह से यह काम कर रहीं हैं। इससे अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिल रही है।

‘काफिर बचने नहीं चाहिए’: मंदिरों और RSS दफ्तरों की रेकी के बाद 26/11 दोहराने का था प्लान, ISIS आतंकी शाहनवाज़ ने बनाई थी हिन्दू और यहूदी नेताओं की लिस्ट

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जिस 3 लाख रुपए के ईनामी आतंकी शाहनवाज़ को उसके साथियों के साथ गिरफ्तार किया है, उसने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। वो पूरे भारत में 26/11 की तर्ज पर बड़ा आतंकी हमला करना चाहता था। उसने पूछताछ में खुलासा किया कि मुंबई में हिंदू मंदिर और देश भर के शहरों में RSS परिसर उसके आतंकी मॉड्यूल के निशाने पर थे। उसने हिंदू मंदिरों, देश के कई शहरों की रेकी की थी और अपने काम को अंजाम देने के लिए पूरी तैयारी की थी, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने उसके इरादों पर पानी फेरते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया।

ट्रायल के तौर पर 5 जगहों पर करने वाले थे धमाका

‘सीएनएन-न्यूज18’ की स्पेशल रिपोर्ट के अनुसार, शाहनवाज़ ने खुलासा किया कि उसने अहमदाबाद, सूरत और बड़ौदा में आरएसएस सहित हिंदू-संबद्ध संगठनों से जुड़े 15 जगहों की रेकी की थी। आतंकियों का इरादा हिंदूवादी संगठनों और नेताओं को निशाना बनाना था। यही नहीं, 26/11 जैसे आतंकी हमले की प्रैक्टिस के तौर पर देश भर में 5 जगहों नूहं, मेवात, दिल्ली, लखनऊ और रुद्रप्रयाग में धमाके करने वाला था। उसकी टीम के आतंकी इन धमाकों को अंजाम दे पाते, उससे पहले पूरी प्लानिंग को ध्वस्त कर दिया गया।

शाहनवाज़ और उसके गैंग के लोग ‘मुस्लिमों पर अत्याचार हो रहा है’ वाली थ्योरी में विश्वास रखते थे और उनकी सोच थी “काफिरों को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ना चाहिए।” कई हिन्दू और यहूदी नेताओं की हत्या की भी उन्होंने साजिश रची थी। इसके पीछे पाकिस्तान में बैठे कुछ हैंडलर्स का हाथ होने का भी शक है, जिसकी जाँच चल रही है।

हिंदू लड़की को मुस्लिम बनाकर किया था निकाह

शाहनवाज़ झारखंड के हजारीबाग का रहने वाला है। उसने NIT नागपुर से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी। वो अक्सर दिल्ली आता-जाता रहता था और ISIS के लिए हमलों की प्लानिंग करता रहता था। वो कट्टरपंथियों की बैठकों, कार्यक्रमों में हिस्सा लेता था। इन्हीं सब के बीच में उसकी मुलाकात रिजवान से हुई थी और दोनों मिलकर साथ काम करने लगे। जानकारी के मुताबिक, शाहनवाज ने एक हिन्दू लड़की से निकाह किया है

उसकी बीवी का नाम बसंती पटेल है जो मूल रूप से गुजरात की रहने वाली बताई जा रही है। शाहनवाज ने बसंती को पहले इस्लाम कबूल करवाया फिर उस से निकाह किया। निकाह के बाद बसंती का नया इस्लामी नाम मरियम रखा गया था।

साल 2019-20 से आईईडी बनाने की ट्रेनिंग ले रहा था शाहनवाज

आईएस के आतंकी शाहनवाज ने पूछताछ में राज उगलते हुए कहा कि साल 2019-20 के आसपास, उसने आईईडी तैयार करने की ट्रेनिंग लेनी शुरू की थी। इसके लिए वो विदेशी हैंडलर के संपर्क में था। वो हैंडलर ही रिजवान और शाहनवाज को आईईडी बनाने की ऑनलाइन ट्रेनिंग देता था। इसी हैंडलर ने उसे पुणे शिफ्ट होने के निर्देश दिए थे और चित्तौड़गढ़ मॉड्यूल से संपर्क भी कराया था। सभी लोग पुणे में रहकर मिलते थे और ट्रेनिंग के साथ ही छिपने की जगह की भी पहचान कर रहे थे।

इसी बीच चित्तौड़गढ़ के दोनों आतंकियों की धरपकड़ हो गई, तो वो दिल्ली भाग आया था। यही नहीं, शाहनवाज ही दिल्ली और पुणे में आईएसआईएस मॉड्यूल के बीच संपर्क सूत्र के रूप में काम करता था।

सूत्रों ने बताया कि “शाहनवाज एक अनुभवी आतंकी है। उसके बीते कुछ महीनों में पूरे उत्तर भारत में रेकी की थी। वो ट्रेनिंग सेंटर के लिए जगह की तलाश कर रहा था और छिपने की भी। उसका हैंडल आतंकवादियों को टीम से जोड़ते, जिन्हें शाहनवाज ट्रेनिंग देता। उसके त्योहारों के मौके पर हमलों के लिए कई जगहों की पहचान की थी। एजेंसियों ने उसके ठिकानों से आपत्तिजनक दस्तावेज़ और आईईडी बनाने में इस्तेमाल किए जाने वाले केमिकल बरामद किए थे।

पुणे आईएसआईएस मामले की जांच में सीएनएन-न्यूज18 को यह भी पता चला है कि यह मामला सिमी-इंडियन मुजाहिदीन और आईएसआईएस का मिश्रण है, जहाँ जिसमें इंडियन मुजाहिदीन और सिमी के कैडर शामिल हो चुके हैं. एजेंसियों के अनुसार- हज़ारीबाग़, यूपी और महाराष्ट्र के बीच सीधा संबंध सामने आ रहा है, जिसमें शाहनवाज सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है।

कॉन्ग्रेस का हाथ फिलिस्तीन के साथ, CWC में प्रस्ताव पास कर किया समर्थन: इजरायल में हमास की बर्बरता पर एक दिन में ही मारी पलटी

फ़िलिस्तीनी आतंकवादी समूह हमास द्वारा इज़राइल के लोगों पर क्रूर हमलों की निंदा करने के एक दिन बाद ही कॉन्ग्रेस सोमवार (9 अक्टूबर, 2023) को खुलकर फ़िलिस्तीनियों के समर्थन में उतर आई। 

कॉन्ग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक के दौरान आज पारित एक प्रस्ताव में फिलिस्तीन-इजरायल संघर्ष पर दुख व्यक्त किया गया और युद्धविराम की माँग की गई। CWC के 7 विंदुओं वाले प्रस्ताव में आखिरी विन्दु में फ़िलिस्तीनी लोगों के अधिकारों का समर्थन किया गया है।

कॉन्ग्रेस द्वारा पारित प्रस्ताव के 7वें विन्दु में लिखा गया है, “अंत में CWC मिडिल ईस्ट में छिड़े युद्ध और हजार से अधिक लोगों के मारे जाने पर गहरा दुःख और पीड़ा व्यक्त करती है। CWC फिलिस्तीनी लोगों के जमीन, स्वशासन और आत्मसम्मान एवं गरिमा के साथ जीवन के अधिकारों के लिए अपने दीर्घकालिक समर्थन को दोहराती है। CWC तुरंत युद्धविराम और वर्तमान संघर्ष को जन्म देने वाले अपरिहार्य मुद्दों सहित सभी लंबित मुद्दों पर बातचीत शुरू करने का आह्वान करती है।”  

कॉन्ग्रेस की CWC द्वारा जारी प्रस्ताव

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 7 अक्टूबर, 2023 से हमास और इजरायली रक्षा बलों के बीच लड़ाई में अब तक कुल मिलाकर लगभग 1,200 लोग मारे गए हैं। वहीं इस मामले में कॉन्ग्रेस पार्टी के एक आधिकारिक बयान में इज़राइल और फिलिस्तीन के बीच संघर्ष को सुलझाने के लिए “बातचीत और समझौता” की प्रक्रिया पर जोर दिया गया।

इससे पहले कॉन्ग्रेस सोशल मीडिया एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर रविवार को किए अपने पोस्ट में कहा, “भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस का हमेशा मानना ​​रहा है कि आत्म-सम्मान, समानता और सम्मान के जीवन के लिए फिलिस्तीनी लोगों की वैध आकांक्षाएँ केवल बातचीत और बातचीत की प्रक्रिया के माध्यम से पूरी होनी चाहिए, जबकि इजरायली लोगों के वैध राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को सुनिश्चित करना चाहिए। किसी भी प्रकार की हिंसा कभी भी समाधान नहीं देती है और यह रुकना चाहिए।” 

गौरतलब है कि इजरायल लगातार अपना ऑपरेशन चला रहा है और आतंकियों का सफाया कर रहा है। इजरायली सुरक्षा बलों द्वारा एक्स (पहले ट्विटर) पर दी गई जानकारी के अनुसार, अब तक वह 653 ठिकानों पर हमला कर चुका है। इजरायल ने गाजा की बिजली और पानी की आपूर्ति भी बंद कर दी है।

बता दें कि इजराइल की सेना ने सोमवार को घोषणा की कि उसने हमास के लड़ाकों को खदेड़ने के लिए लड़ाई के तीसरे दिन गाजा पट्टी के पास दक्षिणी इलाकों पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। 

क्रिकेट वर्ल्ड कप की पाकिस्तानी प्रेजेंटर ज़ैनब अब्बास को भारत ने निकाला, माँ काली का उड़ाया था मजाक: हिन्दू घृणा में फँसी तो ‘सुरक्षा’ का बना रही बहाना

ICC (अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल) ने हिंदूफोबिक पाकिस्तानी एंकर जैनब अब्बास को क्रिकेट वर्ल्ड कप के लिए प्रजेंटर बनाया था। लेकिन, अब खबर है कि भारत ने उसे वापस भेज दिया है। दावा किया जा रहा है कि भारत और हिंदू धर्म को लेकर विवादित बयान के साथ ही साइबर क्राइम को लेकर विवाद के चलते यह फैसला लिया गया है।

जैनब अब्बास को डिपोर्ट किए जाने की खबरों को पाकिस्तानी मीडिया द्वारा किए जा रहे दावों से भी बल मिल रहा है। ‘समा टीवी’ ने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा है कि जैनब अब्बास ने सुरक्षा कारणों के चलते भारत छोड़ दिया है। वह फिलहाल दुबई में हैं। उस पर भारत विरोधी ट्वीट्स करने और साइबर क्राइम से जुड़े आरोप हैं। इससे पहले ‘समा टीवी’ ने अपने पोस्ट में उसे भारत से निकाले जाने की बात कही थी। लेकिन, बाद में उस पोस्ट को डिलीट कर दिया था।

बता दें कि इससे पहले एडवोकेट विनीत जिंदल ने जैनब अब्बास के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। साथ ही उसके खिलाफ IPC की धारा 153ए, 295, 506, 121 और IT एक्ट की धारा 67 के तहत मुकदमा दर्ज करने का अनुरोध किया था। साथ ही उन्होंने जैनब के खिलाफ बीसीसीआई सचिव जय शाह को पत्र लिखा था।

बता दें कि आईसीसी द्वारा वर्ल्ड कप का प्रजेंटर बनाए जाने के बाद जैनब अब्बास ने एक्स पर पोस्ट लिखकर खुशी भी जताई थी। लेकिन अब यदि उसे भारत से डिपोर्ट करने की खबर पक्की है तो उसकी खुशियों पर पानी फिर चुका है। जैनब को भारत से बाहर निकाले जाने को लेकर नेटिजेन्स सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

एक यूजर ने लिखा, “हिंदूफोबिक जैनब अब्बास का विश्व कप कॉन्ट्रैक्ट समाप्त हो गया है। उसके हिंदू विरोधी ट्वीट के लिए भिखारी देश पाकिस्तान वापस भेज दिया गया है।”

धीरज सिंह नामक यूजर ने लिखा, “भिखारियों को घी हजम नहीं होता। लात पड़ गई जिहादिन को।”

एक यूजर ने लिखा, “अब रोटी कहाँ खाएगी भिखारी, वहाँ आटा तो होगा नहीं।”

एक यूजर ने पोस्ट कर कहा, “चली गई राक्षसी।”

Naks नामक यूजर ने लिखा, “अब आतंकियों को वीजा नहीं देना चाहिए।”

रो जूट नामक यूजर ने लिखा, “बीसीसीआई ने बहुत बड़ा विकेट हासिल किया है। स्वच्छ भारत अभियान की यह बड़ी जीत है।”

हिंदूफोबिक टिप्पणियों से भरा रहा है जैनब अब्बास का इतिहास

जैनब अब्बास के एक्स हैंडल का पुराना यूजर नेम ‘ZainabLovessrk’ था। उसने साल 2014 में शाकाहारियों और भारत में तेज गेंदबाजों की कमीं को लेकर हिंदूफोबिक ट्वीट किया था, जिसमें उसने भारतीयों के शाकाहारी होने का भी मजाक उड़ाया था। कुछ ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट आप नीचे देख सकते हैं।

जैनब के पुराने ट्वीट का स्क्रीनशॉन देखिए:

जैनब का पुराना ट्वीट वायरल

जैनब ने एक और ट्वीट में गाय का मजाक उड़ाया था। उसके ऐसे कई पुराने ट्वीट्स वायरल हो रहे हैं, जिसमें लोग उससे पूछ रहे हैं कि क्या ये वही जैनब है, जो हिंदूफोबिक हुआ करती थी।

राजस्थान के लिए BJP ने जारी की उम्मीदवारों की पहली सूची, 7 सांसदों को विधानसभा चुनाव में उतारा: दीया कुमारी, राज्यवर्धन सिंह राठौर जैसे नाम भी शामिल

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राजस्थान विधानसभा चुनावों ( Rajasthan Assembly Election 2023) के लिए उम्मीदवारों की पहली सूची 9 अक्टूबर 2023 को जारी कर दी। राजस्थान विधानसभा में 200 सीटें हैं। इनमें से 41 के लिए बीजेपी ने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। राजस्थान में 23 नवम्बर को वोट डाले जाएँगे और 3 दिसंबर 2023 को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, मेघालय के साथ नतीजे आएँगे।

बीजेपी ने मध्य प्रदेश की तरह ही राजस्थान में भी कई सांसदों को मैदान में उतारा है। भाजपा ने 41 सीटों में से 7 सीटों पर वर्तमान सांसदों को उम्मीदवार बनाया है। जिन सांसदों को टिकट दिया गया है उनमें दीया कुमारी, राज्यवर्धन सिंह राठौर, महंत बालकनाथ, किरोड़ी लाल मीणा, नरेन्द्र कुमार, देवजी पटेल और भागीरथ चौधरी शामिल हैं।

सांसद दीया कुमारी जयपुर की विद्याधरनगर से जबकि राज्यवर्धन राठौर जयपुर की ही झोटवाड़ा विधानसभा से चुनाव लड़ेंगे। महंत बालकनाथ को अलवर की तिजारा सीट से उतारा गया है। सांसद नरेन्द्र कुमार को झुंझनूं के मंडावा सीट से टिकट दिया गया है।

इसके अलावा देवजी पटेल को सांचौर जिले की सदर सीट से मैदान में उतारा गया है। अजमेर की किशनगढ़ सीट से सांसद भागीरथ चौधरी को टिकट दिया गया है। राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा को सवाई माधोपुर सीट से उम्मीदवार बनाया गया है।

मध्य प्रदेश और छतीसगढ़ के लिए भी भाजपा की सूची जारी

भाजपा ने राजस्थान की पहली सूची जारी करने के अलावा मध्य प्रदेश और छतीसगढ़ के लिए भी दूसरी सूची जारी कर दी है। इस सूची में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा जैसे नाम शामिल हैं।

मध्य प्रदेश के लिए 57 नामों की दूसरी सूची जारी की गई है। मध्य प्रदेश के लिए जारी की सूची में बुधनी से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और दतिया से गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को टिकट दिया है। मध्य प्रदेश में 17 नवम्बर को मत डाले जाएँगे।

भाजपा ने छतीसगढ़ के लिए भी 64 नामों की दूसरी सूची जारी की है, जिसमें 2 सांसदों को टिकट दिया गया है। सरगुजा से सांसद रेणुका सिंह को भरतपुर सोनहट, जबकि रायगढ़ से सांसद गोमती साय को पत्थलगांव से टिकट दिया है। राजनांदगांव सीट से पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह को भी टिकट दिया गया है।

मध्य प्रदेश में पार्टी पहले ही कई सांसदों को मैदान में उतार चुकी है। पार्टी लोकसभा चुनावों से पहले होने वाले इन चुनावों में पूरी ताकत झोंक रही है और इसीलिए बड़े क्षत्रप भी मैदान में उतारे जा रहे हैं।

मणिपुर में युवक को ज़िंदा जलाने का वीडियो हो रहा वायरल: पुलिस ने बताया – घटना 5 महीने पुरानी, केस दर्ज कर की जा रही है जाँच

मणिपुर हिंसा से जुड़ा एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति को आग में झोंकते देखा जा सकता है। 7 सेकंड के इस वीडियो पर ‘कुकी’ लिखा गया है। ये वीडियो 8 अक्टूबर को मणिपुर के कई व्हाट्सएप्प ग्रुपों में तेज़ी से शेयर की गई, जिसमें काली टी-शर्ट और पतलून पहने एक व्यक्ति को जलते हुए देखा जा सकता है।

हालाँकि, ये साफ नहीं है कि व्यक्ति को जिंदा जला दिया गया, या उसकी हत्या करने के बाद जलाया गया। इस वीडियो के बारे में मणिपुर पुलिस ने कहा है कि ये वीडियो उसी दिन का है, जिस दिन 2 महिलाओं के साथ वीभत्स व्यवहार किया गया था। वायरल हुए वीडियो में मणिपुरी में बोलने वाले कई लोगों की आवाजें सुनी जा सकती हैं – हालाँकि, उनके चेहरे नहीं देखे जा सकते हैं।

थौबल जिले का है वीडियो, जाँच जारी

मणिपुर पुलिस ने बताया है कि ये वीडियो थौबल जिले का है, जो 4 मई को बनाया गया था। जलाया गया व्यक्ति कुकी-जो समुदाय का है। ये घटना मैतेई बहुल इलाके में घटी थी और हिंसा के शुरुआती दिनों की है। पुलिस ने ये भी बताया कि इस वीडियो के बारे में काफी पहले ही केस दर्ज कर लिया गया था और इसकी जाँच की जा रही है।

वहीं कुकी संगठन कुछ और ही दावा कर रहे हैं। ITLF नामक संगठन ने बयान जारी कर के दावा किया है कि ‘मेइती नेक्रो-आतंकियों’ ने कुकी-जो समुदाय के युवकों को ज़िंदा जला डाला। संगठन ने इस घटना की निंदा की है।

बता दें कि 3 मई को मणिपुर में हिंसा फैल गई थी। मणिपुर में 3 मई को कुकी-ज़ोमी बहुल चुराचांदपुर जिले और मैतेई बहुल विष्णुपुर जिले की सीमा से जुड़े क्षेत्रों से शुरू हुई हिंसा पूरे राज्य में फैल गई। इस घटना के दूसरे दिन 4 मई को चुराचांदपुर मेडिकल कॉलेज में मैतेई नर्सों के साथ बलात्कार की अफवाहों के बाद थौबल में भीड़ ने जमकर उत्पात मचाया था, जिसके फर्जी होने की पुष्टि 5 मई को तत्कालीन डीजीपी पी डोंगेल ने की थी। इसी दौरान 4 मई को दो कुकी महिलाओं के साथ बर्बरता हुई, जिसका वीडियो जुलाई माह में वायरल हुआ था।

तवलीन सिंह ने गुरु गोविंद सिंह को बताया हिंदू, SGPC भड़की, कहा- माफी माँगो: खालिस्तानी खतरे पर पर्दा डालने में लगे हैं दोनों

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने 6 अक्टूबर, 2023 को द संडे एक्सप्रेस, दिनांक 24 सितंबर 2023 को प्रकाशित “भारत की कनाडाई समस्या” शीर्षक से तवलीन सिंह द्वारा लिखित एक ऑप-एड पर आपत्ति जताई। एसजीपीसी ने इस लेख पर कई आपत्तियाँ उठाईं, जो मुख्य रूप से दो के इर्द-गिर्द घूमती हैं- पहला श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के बारे में था और दूसरा खालिस्तानी आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरावाले के बारे में था। 

एसजीपीसी ने दावा किया कि तवलीन के ऑप-एड में सिख धर्म को लेकर गलत बातें लिखी गईं थीं। एसजीपीसी ने जो पहला मुद्दा उठाया वह यह दावा था कि श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने मुगल सम्राट के दमन से लड़ने के लिए खालसा की स्थापना की थी, और वह एक ‘हिंदू’ थे। एसजीपीसी ने इस बात पर जोर दिया कि श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ को अकाल पुरख (द टाइमलेस वन) को समर्पित संत-सैनिक भावना के अवतार के रूप में बनाया था और वह किसी विशेष धर्म से जुड़े नहीं थे। गुरु गोबिंद सिंह की शिक्षाओं में इस बात पर जोर दिया गया कि वह न तो हिंदू थे और न ही मुस्लिम।

इसके अलावा, उन्होंने जरनैल सिंह भिंडरावाले के चरित्र-चित्रण पर आपत्ति जताई, खासकर उस बिंदु पर जहाँ उन्होंने कहा कि वह आतंक का राज चलाता था और उसके पास जासूसों का एक कुशल नेटवर्क था जो उससे असहमत लोगों को दंडित करता था। एसजीपीसी का तर्क है कि भिंडरावाले के संघर्ष ने मुख्य रूप से पंजाब के राजनीतिक, आर्थिक और पानी से संबंधित मुद्दों को  केंद्र में रखा। उनका तर्क है कि भिंडरावाले के ऐसे चरित्र-चित्रण उपलब्ध ऐतिहासिक तथ्यों और सन्दर्भों से मेल नहीं खाते। 

इतना ही नहीं एसजीपीसी ने सिंह से माफी माँगने को कहा और दावा किया कि उनका ऑप-एड दुर्भावनापूर्ण लेख था और इसमें सिख समुदाय को नकारात्मक रूप से चित्रित किया गया था। उन्होंने अखबार से तवलीन द्वारा अपने लेख में की गई “गलत बयानी” के खंडन के रूप में अपने न्यूज़ पेपर में सही तथ्यों को प्रकाशित करने के लिए कहा। 

एसजीपीसी के इस दावे का खंडन करते हुए कि श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने हिंदुओं को बचाने के लिए खालसा की स्थापना नहीं की थी, सिख इतिहास विशेषज्ञ पुनीत साहनी ने बताया कि तवलीन सिंह ने जो कहा वह तथ्य थे। उन्होंने गुरु गोबिंद सिंह जी की रचना उग्रदंती का हवाला दिया, जो स्पष्ट रूप से दुर्गा से उनकी सेना को तुर्क और मुगल सेना को नष्ट करने और हिंदुओं के वेदों और धर्म के पुनरुत्थान के लिए मदद करने  का अनुरोध करती है। उग्रदंती का पंजाबी संस्करण यहाँ देखा जा सकता है। जो लोग अनजान हैं, उनके लिए उग्रदंती एक रचना है जो सिख धर्म की पवित्र पुस्तकों में से एक, दशम ग्रंथ का हिस्सा है।

तवलीन सिंह के ऑप-एड ने खालिस्तान आंदोलन को बताया ‘मिथक’ 

जबकि तवलीन सिंह द्वारा लिखे गए ऑप-एड के साथ एसजीपीसी की अपनी समस्याएँ हैं, यह बताना आवश्यक है कि तवलीन ने स्पष्ट रूप से खालिस्तानी अलगाववाद और भारत की संप्रभुता के लिए इसके खतरों को एक ‘मिथक’ कहा था। अपने ऑप-एड में, उन्होंने चर्चा की कि कनाडाई सिखों के संदर्भ में, भारत में खालिस्तान का पुनरुद्धार एक मिथक था। उन्होंने खालिस्तान के अलगाववादी आंदोलन पर ध्यान केंद्रित करने पर भारत सरकार से सवाल किया। उन्होंने दिल्ली के राजनीतिक हलकों में फैली घबराहट पर चिंता व्यक्त की। खासतौर से तब जब कनाडाई सिख खालिस्तान के झंडे उठाते हैं या अन्य देशों, विशेष रूप से कनाडा में खालिस्तान समर्थक विरोध प्रदर्शन में शामिल होते हैं।

तवलीन ने कहा कि भारतीय सिखों के बीच खालिस्तान के लिए कोई महत्वपूर्ण समर्थन नहीं है। वह पंजाब क्षेत्र की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालती हैं, इस बात पर जोर देती हैं कि श्री गुरु गोविंद सिंह ने दमन से लड़ने के लिए खालसा बनाया और इसमें हिंदू और सिख दोनों शामिल थे। तवलीन सिंह लिखती हैं कि जरनैल सिंह भिंडरावाले के शासनकाल के दौरान भी, भारत में सिखों के बीच अलगाव के लिए कोई व्यापक समर्थन नहीं था। इस हिस्से पर भी एसजीपीसी ने आपत्ति जताई है। 

कनाडाई सिखों के बीच खालिस्तान समर्थकों की मौजूदगी और पाकिस्तान के सैन्य शासकों से वित्तीय सहायता की संभावना को स्वीकार करते हुए, तवलीन सिंह का तर्क है कि अगर भारत को अपनी खुफिया एजेंसियों का इस्तेमाल विदेशी धरती पर परेशानी पैदा करने के लिए करना है, तो ऐसा पड़ोसी देशों में किया जाना चाहिए, न कि भारत से बहुत दूर कनाडा जैसे देशों में। 

इसके अलावा, वह आतंकवाद की स्पष्ट परिभाषा और भारत में अल्पसंख्यक समुदायों, विशेषकर मुस्लिमों और सिखों के बीच “अन्याय और अशांति” के तथाकथित मुद्दों पर जोर देते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि भारत सरकार को खालिस्तान के निर्माण पर बहुत ज़्यादा रिएक्ट करने के बजाय इन समुदायों की शिकायतों को दूर करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

एसजीपीसी को जवाब देते हुए तवलीन ने लिखा, “क्या मैं यह सुझाव दे सकती हूँ कि एसजीपीसी कुछ सिख इतिहास की किताबें पढ़े। जहाँ तक ​​माफी की बात है तो एसजीपीसी को दरबार साहिब को हत्यारों की शरणस्थली बनाने की इजाजत देने के लिए सिख समुदाय से माफी माँगनी चाहिए। मुझे पता है। मैं वहाँ थी।”

एसजीपीसी और तवलीन सिंह ने अपने-अपने तरीके से किया खालिस्तानी अलगाववाद का बचाव 

यह देखना दिलचस्प है कि कैसे दो वर्गों ने, एक-दूसरे का विरोध करते हुए, आसानी से खालिस्तानी अलगाववाद और भारत की संप्रभुता और सुरक्षा के लिए उत्पन्न खतरों को नजरअंदाज कर दिया। तवलीन ने दावा किया कि वह 80 के दशक से खालिस्तानी आंदोलन देख रही हैं और उन्हें इस आंदोलन की गहरी जानकारी है। उन्होंने आगे दावा किया कि भिंडरावाले काल के दौरान और उसके बाद खालिस्तानी आंदोलन को कोई समर्थन नहीं मिला या न्यूनतम समर्थन मिला। तवलीन के अनुसार, यह भिंडरावाले के गहरे जासूसी नेटवर्क के कारण था कि वह सिख समुदाय के भीतर खालिस्तानी आंदोलन के खिलाफ उठे आवाजों को दबाने में कामयाब रहा।

ठीक है तवलीन को अपने विचार रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन यह अजीब है कि वह भूल गई कि कैसे खालिस्तानी आतंकवादियों द्वारा दशकों तक हिंदुओं की बेरहमी से हत्या की गई थी। पंजाब से खालिस्तानी आंदोलन को खत्म करने में भारत सरकार को लगभग 30 साल लग गए, इस दौरान हजारों हिंदुओं की हत्या कर दी गई। बम विस्फोट, सामूहिक गोलीबारी, पत्रकारों की हत्याएँ और न जाने क्या-क्या हुआ। खालिस्तानी आंदोलन के कारण हमने एक प्रधानमंत्री और एक मुख्यमंत्री खो दिया। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद 1984 में दिल्ली में हुए राजनीतिक दंगों में हजारों निर्दोष सिख भी मारे गए थे।

तवलीन सिंह ने दावा किया कि वर्तमान भारत सरकार ने खालिस्तानी मिथक को पुनर्जीवित किया और कहा कि भारत में खालिस्तानी अलगाववाद के लिए कोई समर्थन नहीं है। पिछले 8-10 वर्षों में राज्य में जो कुछ हुआ है, उसे देखकर यह सुझाव देना उचित है कि तवलीन को बुलबुले से बाहर आकर कॉफी की गंध महसूस करने की जरूरत है। खालिस्तानी आंदोलन कोई मिथक नहीं है और इसे पंजाब में खुला समर्थन प्राप्त है। दरअसल, 90 के दशक में आंदोलन को दबा दिए जाने के बावजूद इसके लिए समर्थन लगातार बना रहा।

समर्थन के बिना, भिंडरावाले के पोस्टर, अमृतपाल सिंह का उदय, संगीत के माध्यम से युवा पंजाबियों का लगातार ब्रेनवॉश करना और खालिस्तानी आतंकवादी संगठन सिख फॉर जस्टिस को समर्थन संभव नहीं होता। तवलीन शायद इस बात से चूक गईं कि अमृतपाल सिंह कथित तौर पर नशा मुक्ति केंद्र की आड़ में राज्य के खिलाफ लड़ने के लिए एक मिलिशिया खड़ा कर रहा था। क्या यह खालिस्तानी विद्रोह नहीं था, या इसे “मिथक” के नाम पर दबा दिया जाना चाहिए था?

एसजीपीसी का खालिस्तानी अलगाववाद के बचाव का रहा है इतिहास 

गौरतलब है कि एसजीपीसी खालिस्तानी आंदोलन और खालिस्तान समर्थक तत्वों के प्रति नरम रुख रखती है। वे इसे छिपाने की कोशिश भी नहीं करते। वे खालिस्तानी समर्थकों का समर्थन करने और गुरुद्वारा परिसर के अंदर खालिस्तानी आतंकवादियों के बलिदान होने का दावा करते हुए उनके पोस्टर लगाने के लिए जाने जाते हैं। कनाडा द्वारा भारत पर खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर को कनाडा की धरती पर मारने का आरोप लगाने के बाद भी, जिसे भारत ने स्पष्ट रूप से नकार दिया है, एसजीपीसी ने कनाडा के समर्थन में खड़े होने का फैसला किया।

एसजीपीसी और तवलीन दोनों ने खालिस्तानी आंदोलन और उससे उत्पन्न खतरों को नजरअंदाज कर दिया, जिसके लिए दोनों तरह के विचारों की निंदा की जानी चाहिए। खालिस्तान समर्थक तत्वों को कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे देशों में पर्याप्त समर्थन मिला है। पाकिस्तान की फंडिंग से खालिस्तान समर्थक तत्वों को तेजी से पनपने में मदद मिल रही है। ऐसे समय में, यह बात फैलानी कि खालिस्तान आंदोलन सिर्फ एक मिथक है, न केवल समस्याग्रस्त है बल्कि खतरनाक रूप से भ्रामक भी है।