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छत्तीसगढ़ में रेवड़ी की तरह बाँटे गए डिप्टी कलेक्टर और DSP के पद: आयोग के चेयरमैन और कॉन्ग्रेस नेताओं के परिजनों की नियुक्ति पर HC की रोक

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में इसके चेयरमैन, सत्ताधारी पार्टी कॉन्ग्रेस के नेताओं और अधिकारियों के रिश्तेदारों के सेलेक्शन पर हाईकोर्ट हैरान है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के बिलासपुर ने इस मामले में सुनवाई करते हुए ऐसे 18 अधिकारियों की नियुक्तियों पर रोक लगा दी है।

हाईकोर्ट ने हैरानी जताई कि छत्तीसगढ़ पीएससी में अधिकारी और नेताओं के बेटे-बेटियों सहित रिश्तेदारों को डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी जैसे पद दिए गए हैं। लाभ पाने वाले लोगों में कॉन्ग्रेस नेता राजेंद्र शुक्ला की बेटी और सुधीर कटियार की बेटी-दामाद शामिल हैं।

छत्तीसगढ़ पीएससी के चेयरमैन को पार्टी बनाने के बारे में पूछा

केस की सुनवाई बिलासपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा की डिवीजन बेंच में हुई। उन्होंने सुनवाई के दौरान पूछा कि इतने गंभीर मामले में पीएससी के चेयरमैन को पक्षकार क्यों नहीं बनाया गया।

इसके बाद याचिकाकर्ता के वकील ने चेयरमैन के पद के संवैधानिक होने की मजबूरी गिनाई गई। हालाँकि, कोर्ट ने साफ कहा है कि इन नियुक्तियों को रोका जाए और इस केस के साथ नोट भी अटैच किया जाए।

सत्ताधारी कॉन्ग्रेस पार्टी के नेताओं के नजदीकी रिश्तेदारों पर भी जताई हैरानी

पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक ननकीराम कंवर ने इस मामले में याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने छत्तीसगढ़ पीएससी को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है।

हाईकोर्ट ने कहा कि अधिकारियों की छोड़िए, यहाँ छत्तीसगढ़ पीएससी के चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी के 5-5 नजदीकी रिश्तेदारों का चयन हुआ है। हाईकोर्ट ने चेयरमैन, अधिकारी और सत्ताधारी दल के नेताओं के करीबियों के 18 पदों की नियुक्ति की जाँच कराने के निर्देश दिए।

इन लोगों की नियुक्तियों पर सवाल

बिलासपुर हाईकोर्ट में दाखिल याचिका के मुताबिक, इन 18 लोगों को बड़े और अहम पद बाँटे गए हैं और करोड़ों का भ्रष्टाचार भी किया गया है। आरोप पत्र के मुताबिक, छत्तीसगढ़ पीएससी चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी के बेटे नितेश की नियुक्ति डिप्टी कलेक्टर के पद पर, बहू निशा कोशले डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुई है।

इसके अलावा, उनके बड़े भाई के बेटे साहिल का चयन डीएसपी के पद पर हुआ है। इनके सरनेम भी छिपाए गए हैं। यही नहीं, उनके भाई की बहू दीपा अजगले की नियुक्ति जिला आबकारी अधिकारी के पद पर और बहन की बेटी सुनीता जोशी को श्रम अधिकारी बनाया गया है।

इसके अलावा, कॉन्ग्रेस नेता के ओएसडी के साढू भाई की बेटी खुशबू बिजौरी को भी डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयनित किया गया है। कॉन्ग्रेस नेता राजेंद्र शुक्ला की बेटी स्वर्णिम शुक्ला को डिप्टी कलेक्टर का पद दिया गया है। कॉन्ग्रेस नेता सुधीर कटियार के दामाद शशांक गोयल और बेटी भूमिका कटियार को भी डिप्टी कलेक्टर पद दिया गया है।

भास्कर में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, राज्यपाल के सचिव अमृत खलको की बेटी नेहा खलको और उनके बेटे निखिल खलको दोनों को ही डिप्टी कलेक्टर का पद दिया गया है। इसके अलावा कॉन्ग्रेस नेता के ओएसडी के रिश्तेदार की बेटी प्रज्ञा नायक और बेटे प्रखर नायक को भी डिप्टी कलेक्टर बनाया गया है।

बताते चलें कि छत्तीसगढ़ पीएससी 2021 का अंतिम परिणाम 11 मई 2023 को जारी हुआ था। इसमें 171 पदों पर भर्ती की गई है, जिनमें 15 लोगों का चयन डिप्टी कलेक्टर के लिए हुआ है। इस मेरिट लिस्ट में पीएससी चेयरमैन के रिश्तेदारों और कॉन्ग्रेस नेताओं के करीबियों को जगह मिली।

रिजल्ट सामने आने के बाद विवाद शुरू हो गया। भाजपा नेता इन नियुक्तियों को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। आरोप लगाया कि साल 2019-2023 तक छत्तीसगढ़ की सभी भर्तियाँ विवादित रही हैं। इसके बाद से अब लोक सेवा आयोग आरोपों के घेरे में है।

लोकसभा से पास हुआ ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’, विरोध में पड़े मात्र 2 वोट: महिला आरक्षण के पक्ष में 454 वोट, सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में बनेगा आयोग

संसद भवन की नई इमारत में चल रहे विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल पेश किया गया। लोकसभा ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ को पास कर दिया है। इसके लिए वोटिंग कराई गई। बिल के पक्ष में जहाँ 454 वोट पड़े, वहीं बिल के खिलाफ मात्र 2 सांसदों ने ही वोट दिया। संविधान संशोधन वाला बिल दो तिहाई से पास होना चाहिए, ये बिल उससे ज़्यादा के आँकड़े से पास हुआ है। इसके साथ ही लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण दिए जाने का रास्ता अब साफ़ हो गया है। अब इसे राज्यसभा से पास कराए जाने की ज़रूरत है।

वोटिंग के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सदन में मौजूद रहे। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि सरकार तकनीकी चीजों में इस बिल को फँसा कर नहीं रखेगी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि सभी 3 कैटेगरी में, यानी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और सामान्य – महिलाओं को 33% आरक्षण मिलेगा। उन्होंने कहा कि सीटों के आरक्षण के निर्धारण का कार्य पारदर्शी तरीके से किया जाएगा। उन्होंने राहुल गाँधी से पूछा कि अगर वायनाड महिला आरक्षण के दायरे में आ गया तो आप क्या करेंगे, आप कहेंगे कि हम राजनीति कर रहे हैं।

बता दें कि राहुल गाँधी केरल के वायनाड से ही सांसद हैं। इसी तरह उन्होंने हैदराबाद लोकसभा सीट का भी नाम लिया, जहाँ से AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी सांसद हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए परिसीमन आयोग ज़रूरी है, जिसमें एक अर्ध-न्यायिक अथॉरिटी, जो हर राज्य में जाए, अध्ययन करे और पारदर्शी तरीके से परिसीमन करे। उन्होंने कहा कि हमारे देश की चुनावी प्रक्रिया के लिए परिसीमन आयोग के गठन की आवश्यकता है।

उन्होंने जानकारी दी कि सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज को इसका अध्यक्ष बनाया जाएगा। अमित शाह ने इस दौरान सांसदों से ये भी कहा कि बिल में अगर कुछ आपत्तियाँ हैं तो उनमें बाद में सुधार किया जा सकता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि 2024 के लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद जनगणना और परिसीमन की कार्यवाही शुरू कर दी जाएगी। उधर राहुल गाँधी ने भी जातिगत जनगणना की बात की और कहा कि पुरानी संसद से नई संसद में ट्रांसफर के वक्त राष्ट्रपति को भी आमंत्रित किया जाना चाहिए था।

खालिस्तानियों की पैरवी करते दिखे पूर्व राजनयिक, कनाडा के पत्रकार ने जस्टिन ट्रूडो को सुनाई खरी-खरी: राजदीप सरदेसाई के शो में वाकया

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने 18 सितंबर 2023 को खालिस्तानी आतंकवादी हरजीत सिंह निज्जर को मारने का झूठा आरोप लगाकर भारत के साथ राजनयिक युद्ध शुरू कर दिया। उन्होंने एक सोची-समझी चाल के तहत कनाडा की संसद में बिना कोई सबूत पेश किए ये आरोप लगाए थे।

इस आरोप के साथ ही भारत और हिंदुओं के खिलाफ खालिस्तानियों का विरोध बढ़ गया है। कनाडा के खालिस्तान समर्थक सांसद जगमीत सिंह ने एक बार फिर एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर छुपे तौर पर धमकी डाली है। उसने कहा, “मैं नरेंद्र मोदी को जवाबदेह ठहराने सहित न्याय की खोज में कोई कसर नहीं छोड़ूँगा।”

इसके अलावा, आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस के प्रमुख गुरपतवंत पन्नू ने भी हिंदुओं को कनाडा छोड़ने की चेतावनी जारी की है। उसने कहा कि खालिस्तानी सिख हमेशा कनाडा के साथ खड़े रहे हैं और आगे भी रहेंगे। जब खालिस्तानी आतंकवाद और इस्लामवाद जैसे विषयों की बात आती है तो भारतीय मीडिया ईमानदार रवैया नहीं अपनाता है।

इस शो में एक पूर्व भारतीय राजदूत केसी सिंह खालिस्तानियों को कवर फायर दे रहे थे, जबकि एक कनाडाई पत्रकार जस्टिन ट्रूडो की आलोचना कर रहे थे। इस दौरान कनाडाई पत्रकार ट्रूडो की नीतियों, उनकी सरकार की साजिशों और खालिस्तानियों को बढ़ावा देने जैसी बातों का खुलासा कर रहे थे। ये बात आसानी से लोगों को भी समझ आ रही थी।

एक्स यूजर @ramprasad_c ने राजदीप सरदेसाई के साथ बहस की एक क्लिप पोस्ट की। इसमें पूर्व राजनयिक केसी सिंह को पंजाब में खालिस्तानी आतंकवादी आंदोलन का पक्ष लेते हुए देखा गया, जबकि कनाडाई पत्रकार डेनियल बॉर्डमैन को भारत का बचाव करते हुए और जस्टिन ट्रूडो की हरकतों की आलोचना करते हुए देखा गया।

बहस शुरू करने से पहले राजदीप सरदेसाई का मुख्य सवाल था, “भारत को कनाडा की दी गई हालिया चुनौती से कैसे निपटना चाहिए।” उन्होंने पूर्व राजदूत केसी सिंह से पूछा कि क्या कनाडा ने खालिस्तानी आतंकवादी होने के आरोपितों को पनाह देने की वो लाइन पार कर ली है, जिसके बाद उसका रवैया स्वीकारा नहीं जा सकता।

इस पर केसी सिंह ने अपने जवाब में कहा, “पंजाब में जो होता है और कनाडा में जो होता है, उसे हमें जोड़ना होगा। सिख प्रवासियों के बीच अपने दिमाग में खालिस्तान की कल्पना रखने वाले लोगों का एक छोटा-सा अंश है। अगर खालिस्तान बनाना है तो इसे पंजाब में बनाना होगा।”

उन्होंने आगे कहा कि साल 2015 से यह सब हो रहा है, जब बेअदबी (गुरुग्रंथ साहिब की) हुई थी, वरना ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद यह सब शांत हो गया था। उन्होंने कहा कि किसी ने इसके बारे में नहीं सोचा। आनंदपुर साहिब प्रस्ताव को भुला दिया गया और इस प्रस्ताव बनाने वाले भाजपा के सहयोगी थी। उसका नाम है अकाली दल है।

दरअसल 1 जून 2015 को ‘गुरुग्रंथ साहिब की बीड़’ कोटकपुरा के गाँव बुर्ज जवाहर सिंह वाला से लापता हो गई थी। इसके बाद कई ऐसी घटनाएँ हुईं, जिन्हें गुरुग्रंथ साहिब का अपमान माना गया था। इसी का जिक्र पूर्व राजनयिक सिंह इस शो में कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भाजपा की सहयोगी अकाली दल यह भावना पैदा की कि सिखों पर अत्याचार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “अकाली दल इसे संभालने में सक्षम नहीं है तो उसने ये नजरिया गढ़ डाला की कि सिखों पर अत्याचार किया जा रहा है। उन्होंने इसे परंपरागत तौर से संभाला और फिर किसान आंदोलन आया। उन्हें किसने खालिस्तानी करार दिया? ये केंद्र सरकार का प्रतिनिधि (अकाली दल) था, जो सीमा पर उन्हें खालिस्तानी कह रहा था और आखिरकार में वो कोई खालिस्तानी नहीं थे। वो पंजाब और हरियाणा के एक साथ काम करने वाले किसान थे।”

इस दौरान उन्होंने खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह पर भी टिप्पणी की और कहा कि उन्होंने ही पंजाब में विवाद को जन्म दिया था। उन्होंने सवाल किया, “उसे ऑपरेट करने की मंजूरी किसने दी? यह बहुत अहम है कि हम देखें कि पंजाब में क्या हो रहा है।” एक तरह से उन्होंने इशारा किया कि भारत के खिलाफ कनाडा के मौजूदा कदम के को दोष देना बेकार है।

उन्होंने आगे कहा, “वे वहाँ कुछ नहीं करेंगे। उन्हें वहाँ जनमत संग्रह कराने दीजिए। उन्हें वैंकूवर में खालिस्तान बनाने दीजिए। जहाँ तक हमारा सवाल है, मैं इस बात से सहमत हूँ कि कनाडाई पीएम ने जरूरत से ज्यादा दखल दिया है। वे विश्वसनीय सबूतों की बात कर रहे हैं। वह सबूत क्या है? आप किसी देश की संसद में किसी विदेशी देश पर उंगली उठाना नहीं शुरू कर सकते हैं, जब तक कि आपके पास वास्तव में कोई सबूत नहीं हो। यह यहाँ एक राजनीतिक खेल है और वहाँ भी एक राजनीतिक खेल है।”

कनाडाई पत्रकार ने बताई जस्टिन ट्रूडो की सच्चाई

इस बीच, कनाडाई पत्रकार डेनियल बॉर्डमैन ने कहा कि देश में उच्च पदस्थ उदारवादी अधिकारी खुले तौर पर भारत की साजिश के सिद्धांतकार हैं। उन्होंने कहा, “मैं ऐसे लोगों को जानता हूँ जो रिपब्लिकन पार्टी में मौजूद हैं। वे न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ गठबंधन में हैं। यह वोट बैंक की राजनीति का हिस्सा है।”

बॉर्डमैन ने कहा, “जस्टिन ट्रूडो जो सोचते हैं, उस पर यकीन करते हैं। वह भले ही दुनिया का सबसे चालाक शख्स न हों, लेकिन वह अपनी विचारधारा पर कायम रहते हैं। यह एक तरह का अंतर्विरोधी वामपंथ है और वे वोक हैं। पश्चिम की तरह हमारे शिक्षा जगत में और हमारे ‘विशेषज्ञों’ के अंदर भारत-विरोधी तत्व मौजूद हैं।”

कनाडाई पीएम और उनकी विचारधाराओं की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा, “उनका सर्कल एक तरह से अंतर्विरोधी जैसा है, जो भारत और इसकी घटनाओं के बारे में इस तरह के विचार रखते हैं। इस तरह से ये फैसलों पर असर डालता है। मैं नहीं मानता कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के बारे में है। हमने हाल ही में चीन घोटाले में सबूत देखे हैं।”

बॉर्डमैन ने कहा कि कनाडा के एक मौजूदा अधिकारी के परिवार को चीन द्वारा धमकी देने के सबूत सामने आए और सरकार ने एक हफ्ते तक कोई कार्रवाई नहीं की। बाद में कनाडा की जनता को कार्रवाई करने के लिए सरकार को मजबूर करना पड़ा। उन्होंने कहा, “(भारत के) इस मामले में कोई सबूत नहीं है। हम अपने भू-राजनीतिक सहयोगी और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्रों में से एक के साथ लड़ाई शुरू करने जा रहे हैं? यह पागलपन है।”

बेबुनियाद है भारत पर कनाडा के आरोप

कनाडाई सरकार ने भारत पर सरे में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया है। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा था कि देश के सुरक्षा बल 18 जून को सरे में एक गुरुद्वारे के बाहर दो अज्ञात बंदूकधारियों द्वारा कनाडाई नागरिक निज्जर की गोली मारकर हत्या के मामले में भारत सरकार के संभावित संबंध की जाँच की जा रही है।

ट्रूडो ने यह भी कहा कि उन्होंने जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने उन्होंने इस मुद्दे को उठाया था। हालाँकि, कनाडा के दावों का विदेश मंत्रालय (एमईए) ने जमकर खंडन किया। MEA ने कहा, “हम संसद में कनाडा के प्रधानमंत्री के बयान के साथ-साथ विदेश मंत्री के बयान को भी अस्वीकार करते हैं। MEA ने अपने बयान में कहा कि कनाडा में हिंसा के किसी भी कृत्य में भारत सरकार के जुड़े होने के आरोप बेतुके हैं।”

कौन था खालिस्तानी आतंकी नज्जर?

हरदीप सिंह निज्जर एक खालिस्तानी आतंकवादी था। जालंधर के गाँव भार सिंहपुरा के इस आतंकी की भारत सरकार को तलाश थी। वो 1990 के दशक से खालिस्तानी आतंकवादी संगठन से जुड़ा हुआ था। उसका नाम हाल ही में भारत सरकार के नामित आतंकवादियों की सूची में जोड़ा गया था।

दरअसल पंजाब के जालंधर में एक हिंदू पुजारी की हत्या की साजिश में नाम आने के बाद 2022 में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने निज्जर पर 10 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था, क्योंकि खालिस्तान टाइगर फोर्स (KTF) का हाथ था और वो इसका चीफ था। इसके अलावा वो खालिस्तानी आतंकवादी संगठन सिख फॉर जस्टिस से भी जुड़ा हुआ था।

यही नहीं, वह यूएपीए के तहत भारत सरकार की नामित आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू का सहयोगी था। ये भारत से भागकर फर्जी नाम रवि शर्मा से 10 फरवरी 1997 को टोरंटो पहुँचा था। ये कनाडा में गुरु नानक सिख गुरुद्वारा साहिब का अध्यक्ष था।

वह कथित तौर पर हाल ही में ‘जनमत संग्रह’ के लिए ऑस्ट्रेलिया गया था। एनआईए ने उस पर भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों की साजिश का भी केस दर्ज किया था। इस साल 18 जून को सरे में दो अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।

‘RSS पर बैन लगाओ, भारत के साथ सारे व्यापार रोको’: खालिस्तानियों को मिला इस्लामी संगठन का साथ, कनाडा के मुस्लिम काउंसिल ने कहा – ‘भारत के राजदूत को निकालो’

अज्ञात हमलावरों द्वारा मारे गए खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर को अपने देश का नागरिक मानते हुए कनाडा सरकार ने 19 सितंबर को भारत के एक शीर्ष राजनयिक को निष्कासित कर दिया था। भारत से अपने अच्छे राजनयिक रिश्तों को आघात पहुँचाते हुए कनाडा की ट्रूडो सरकार ने इस हत्या में भारत सरकार के एजेंटों की भूमिका होने की आशंका जताई थी। कनाडा की सरकार के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये से बने हालात का फायदा भारत विरोधी विदेशी ताकतों ने अपने हिसाब से उठाने की कोशिशें शुरू कर दीं हैं।

इस मामले में अब नेशनल काउंसिल ऑफ कैनेडियन मुस्लिम्स (एनसीसीएम) की इंट्री हुई है। NCCM ने ‘विश्व सिख संगठन’ (WSO) के साथ मिल कर जस्टिन ट्रूडो के नेतृत्व वाली कनाडाई सरकार को भारत के खिलाफ 4 सूत्री माँगों का फरमान सुनाया है। इन माँगों में भारत में कनाडा के राजदूत को तुरंत वापस बुलाना, कनाडा में भारतीय राजदूत को निष्कासित करना, भारत और कनाडा के बीच व्यापारिक वार्ता पर रोक लगाना और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर प्रतिबंध लगाना शामिल हैं।

NCCM ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्रम एकाउंट पर इस बावत एक पोस्ट साझा की है। पोस्ट में लिखा, “आज एनसीसीएम के सीईओ स्टीफन ब्राउन और कनाडा के विश्व सिख संगठन निदेशक मुखबीर सिंह ने मिल कर कनाडा सरकार से भारतीय एजेंटों द्वारा हरदीप सिंह निज्जर की हुई कथित हत्या पर कार्रवाई की माँग की।” एक अन्य फेसबुक पोस्ट में एनसीसीएम ने लिखा, “हम एक साथी कनाडाई के हत्यारों को न्याय के कटघरे में लाने की माँग करते हैं।” कनाडा के इस्लामी और चरमपंथी सिख संगठन ने मिल कर भारत से सभी तरह से राजनयिक संबंधों को खत्म करने की भी माँग की है।

NCCM की मीडिया एडवाइजरी

एनसीसीएम का यह बयान ट्रूडो के बयान के तुरंत बाद आया है। सबसे हैरानी की बात ये है कि इस भारत विरोधी इस्लामी समूह ने अपनी सोच वाले विश्व सिख संगठन के साथ मिल कर ओटावा के हाउस ऑफ कॉमन्स में प्रेस कांफ्रेंस भी की। कनाडा के हाउस ऑफ कॉमन्स में NCCM गैंग किस हैसियत से संवाददाता सम्मेलन कर रहा है ये एक बड़ा सवाल है। यह सवाल वर्तमान ट्रूडो प्रशासन के नेतृत्व क्षमता पर भी सवाल खड़े करता है।

दरअसल, NCCM और WSO जैसे कई अन्य संगठन हैं जो परोक्ष तौर पर ट्रूडो सरकार को कठपुतली की तरह नचा रहे हैं। इन्ही असामाजिक समूहों के दबाव में वर्तमान कनाडा सरकार आत्मघाती कदम उठा रही है।

गणपति पूजा में चप्पल में दिखीं फराह खान, लोगों ने टोका तो बोलीं – मैं तो घर से बाहर थी: लोग बोले – चप्पल पहन कर पूजा कौन करता है?

गणपति उत्सव के मौके पर चप्पल पहन कर पूजा करने पहुँचीं बॉलीवुड डायरेक्टर फराह खान को लोगों ने सोशल मीडिया पर ट्रोल कर दिया। फराह खान बॉलीवुड अभिनेता राजकुमार राव के घर पहुँची थीं, जहाँ उनकी पत्नी चित्रलेखा ने गणेश प्रतिमा की स्थापना की है।

फराह के साथ बॉलीवुड अभिनेत्री हुमा कुरैशी भी मौजूद थीं। फराह ने इसकी फोटो इंस्टाग्राम पर डाली तो लोगों ने उन्हें टोक दिया। फराह खान ने जो तस्वीर पोस्ट की, उसमें वो हुमा और चित्रलेखा के साथ दिखाई दे रही हैं। उन्होंने इस दौरान चप्पल पहनी हुई थी।

इसी बात को लेकर उनसे यूजर्स ने सवाल किया कि गणपति की पूजा चप्पल पहन कर क्यों की गई। इसी बात पर फराह खान प्रश्न करने वालों को सफाई पेश करने लगीं। फराह ने प्रश्न पूछने वाले को कहा कि वह फोटो खींचे जाने के समय घर के बाहर थीं लेकिन इस बात पर ध्यान दिलाने के लिए धन्यवाद।

फराह खान का जवाब
फराह खान का जवा

जहाँ फराह खान ने इसका यह जवाब दिया तो वहीं एक अन्य यूजर ने कमेंट करने वाले को लिखा कि उसका दिमाग ज़हरीला है, उसकी नज़र चप्पल पर ही पड़ी। लोगों ने यह भी चिंता जताई कि कहीं उनके गणपति पूजा के कारण फतवा ना जारी कर दिया जाए। एक यूजर वकार अली ने लिखा ‘जाओ माफ़ किया’।

इससे पहले बॉलीवुड अभिनेत्री सारा खान को भी कट्टरपंथियों ने गणपति पूजा के कारण काफी भला बुरा कहा और उनके मुस्लिम होने को लेकर प्रश्न उठाए। सारा ने भी गणपति स्थापना की है जिसकी फोटो उन्होंने डाली थी।

सारा अली खान अकेली नहीं हैं जिन पर कट्टरपंथियों ने प्रश्न उठाए हों, अभिनेता शाहरुख़ खान को भी इस्लामी कट्टपंथियों ने गणपति स्थापना के कारण काफी ट्रोल किया है। ट्विटर पर इस्लामवादियों ने लिखा, “अल्लाह एक है तो ये सब ड्रामा क्यों कर रहे हो, यह सब शिर्क है।” एक अन्य व्यक्ति ने शाहरुख से यह निर्णय लेने को कह दिया कि वह हिन्दू हैं या फिर मुस्लिम।

शाहिद अफरीदी के दामाद शाहीन ने फिर से किया निकाह, मेहंदी और रिसेप्शन भी: पाकिस्तान के कप्तान बाबर आज़म ने गले लगा कर दी बधाई

पाकिस्तान के कराची में मुल्क के तेज गेंदबाज़ शाहीन शाह अफरीदी ने पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी की बेटी अंशा से दूसरी बार निकाह रचाया। ये कार्यक्रम मंगलवार (19 सितंबर, 2023) की रात को आयोजित किया गया था। इससे पहले इसी साल की शुरुआत में दोनों ने इस्लामी तौर-तरीकों से निकाह किया था। उस समारोह में दोनों परिवार और उनके कुछ करीबी रिश्तेदार ही शामिल हुए थे। इस बार अधिक संख्या में लोगों को न्योता दिया गया था।

इस दौरान पाकिस्तान की क्रिकेट टीम के कप्तान बाबर आज़म भी इस समारोह में पहुँचे और उन्हें शाहीन शाह अफरीदी के गले लगते हुए भी देखा गया। एशिया कप में हार को लेकर इससे पहले मीडिया इन दोनों के बीच विवाद की बातें चला रहा था। एशिया कप में भारत और श्रीलंका से हार के बाद पाकिस्तान को बाहर का रास्ता देखना पड़ा था। शाहीन शाह अफरीदी ने बाबर आज़म के साथ बैठ कर बात करते हुए अपनी तस्वीर शेयर की और लिखा – ‘फैमिली’। कई अन्य पाकिस्तानी हस्तियाँ भी इस निकाह समारोह में मौजूद रहीं।

ये भी बताया जा रहा है कि शाहिद अफरीदी की बेटी की कराची में मेहंदी सेरेमनी भी हुई। शाहिद अफरीदी के आवास पर ही ये कार्यक्रम हुआ। 2021 में ही शाहीन और अंशा की सगाई हो गई थी। अब फिर से निकाह और मेहंदी के बाद रिसेप्शन भी आयोजित किया जाएगा। ये कार्यक्रम इस्लामाबाद में होगा। कार्यक्रम के बाद शाहीन अफरीदी वर्ल्ड कप 2023 के लिए भारत पहुँचेंगे। अक्टूबर 3 से ये खेल प्रतियोगिता शुरू होगी। एशिया कप में बुरी हार के बाद पाकिस्तानी टीम पर सवाल उठ रहे हैं। ऊपर से भारत के चैंपियन बनने के कारण वहाँ के लोग भी अपने खिलाड़ियों को खरी-खोटी सुना रहे।

वहीं बाबर आज़म ने भी इस समारोह में शाहीन शाह अफरीदी के साथ अपनी तस्वीर शेयर करते हुए उन्हें बधाई दी। इससे पहले कराची में 3 फरवरी, 2023 को शाहीन शाह अफरीदी और अंशा ने निकाह किया था। DHA गोल्फ एन्ड कंट्री क्लब में रिसेप्शन का आयोजन किया गया जहाँ पाकिस्तान क्रिकेट टीम के खिलाड़ी मौजूद रहे। इससे पहले पाकिस्तानी क्रिकेटर शादाब खान ने भी निकाह किया था। शान मसूद और हैरिस रउफ ने भी पिछले 1 साल के भीतर ही निकाह किया है।

खेल रही थी 5 साल की बच्ची, सुनसान जगह पर ले जाकर 7 साल के बच्चे ने किया रेप: खून से लथपथ पहुँची घर, ग्रामीण बोले- मोबाइल पर देखता था गंदे वीडियो

उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले में एक 7 वर्षीय नाबालिग लड़के पर 5 साल की बच्ची से रेप का आरोप लगा है। आरोपित और पीड़िता दोनों पड़ोसी हैं। पुलिस ने रेप की धारा और पॉक्सो एक्ट में FIR दर्ज कर लिया है। पीड़िता के साथ आरोपित बच्चे को भी मेडिकल परीक्षण के लिए अस्पताल भेजा गया है। घटना की शिकायत मंगलवार (19 सितंबर 2023) को की गई है। मामले की जाँच चल रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना कानपुर देहात जिले के अकबरपुर थाना क्षेत्र की है। यहाँ के एक गाँव की महिला ने मंगलवार को अपनी 5 वर्षीया बच्ची के साथ दुष्कर्म की शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में महिला ने बताया है कि घटना के दिन उनकी बेटी खेलने के लिए घर से बाहर गई थी। इस दौरान 7 वर्षीय लड़का उसे अपने साथ सुनसान जगह पर ले गया। यहाँ उसने बच्ची से रेप किया। लड़की रोते हुए घर पहुँची तो परिजनों ने इसकी वजह पूछी। बच्ची खून से लथपथ थी।

इस मामले को गाँव स्तर पर ही सुलझाने की कोशिशें की गई। पीड़िता की माँ का आरोप है कि उन्होंने आरोपित बच्चे के घर शिकायत भी की थी। लेकिन इसका आरोपित बच्चे के परिवार पर कोई फर्क नहीं पड़ा और वे पीड़िता की माँ से ही झगड़ने लगे। गाँव वालों का कहना आरोपित बच्चा अपनी से बड़ी उम्र के लड़कों के साथ रहता था। मोबाइल पर गंदे वीडियो देखता था।

पुलिस ने पीड़ित परिवार की तहरीर पर रेप की धारा 376 व पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया। मेडिकल रिपोर्ट की प्रतीक्षा की जा रही है। थाना प्रभारी सतीश सिंह का कहना है कि इस केस को लेकर कानूनी सलाह ली जा रही है। इसकी वजह उन्होंने आरोपित का 7 वर्ष की उम्र का होना बताया। थाना प्रभारी के मुताबिक केस की जाँच में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

खालिस्तानी गायक ‘शुभ’ का टूर कैंसल, विराट कोहली ने किया अनफॉलो: भारत ने कनाडा के लिए जारी की एडवाइजरी, कहा- सतर्क रहें

सोशल मीडिया पर भारत का बिगड़ा हुआ नक्शा साझा करने और खालिस्तानी विचारों को हवा देने वाले पंजाबी मूल के कनाडाई गायक शुभनीत सिंह ‘शुभ’ के भारत में होने वाले सभी कार्यक्रम रद्द हो गए हैं। इससे पहले कई कंपनियों ने उसके कार्यक्रमों का प्रायोजक बनने से इंकार कर दिया था।

शुभ के कार्यक्रम रद्द होने का निर्णय कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के खालिस्तानी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप भारत पर लगाने के अगले दिन ही आया है। ट्रूडो के बयान के बाद भारत में खालिस्तान विरोधी भावनाएँ अपने चरम पर हैं।

सोशल मीडिया पर लगातार माँग की जा रही थी कि 23-25 सितम्बर 2023 के बीच होने वाले शुभ के कॉन्सर्ट को रद्द कर दिया जाए। अब यह सूचना आई है कि मुंबई समेत बेंगलुरु, दिल्ली और हैदराबाद में होने वाला उसका आयोजन रद्द हो गया है। शुभ का यह कार्यक्रम भारत में ‘स्टिल रोलिन’ नाम से होना था।

शुभ द्वारा साझा किया गया भारत का बिगड़ा हुआ नक्शा
शुभ द्वारा साझा किया गया भारत का बिगड़ा हुआ नक्शा

इस बात की जानकारी शुभ के कार्यक्रम के टिकट बेचने वाली कम्पनी बुकमायशो ने दी है। बुकमायशो ने कहा है कि वह अब सभी उन लोगों के पैसे लौटाएगी, जिन्होंने इस कार्यक्रम का टिकट लिया था। पैसे लौटाने की प्रक्रिया 7-10 दिनों के भीतर पूरी कर ली जाएगी।

इससे पहले स्मार्ट उपकरण बनाने वाली कम्पनी बोट ने भी शुभ के कार्यक्रम से आयोजक की भूमिका से हाथ खींच लिए थे। बोट ने एक बयान जारी करके इस बात की जानकारी दी थी। इसके पश्चात बुकमायशो से भी इस बात के लिए जोर दिया गया था कि वह शुभ के कार्यक्रम की टिकट नहीं बेचे।

शुभ ने अपने इन्स्टाग्राम अकाउंट पर भारत का ऐसा नक्शा साझा किया था जिसमें जम्मू कश्मीर, पंजाब, उत्तर-पूर्व समेत देश का एक बड़ा हिस्सा गायब था। इसी को लेकर भारत में शुभ का विरोध हो रहा था। इस बीच भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली ने भी अपने अकाउंट से शुभ को अनफॉलो कर दिया है।

भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने मुंबई में शुभ के आयोजन स्थल पर लगे हुए पोस्टर फाड़ दिए। लगातार हो रहे विरोध के कारण के अब इस शो को कैंसल कर किया गया है और शुभ भारत नहीं आएगा।

विदेश मंत्रालय ने जारी की कनाडा में रहने वाले भारतीयों को सलाह

भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक ट्रेवल एडवायजरी जारी करके कनाडा में रहने वाले भारतीयों और वहाँ पढ़ने वाले छात्रों को सतर्क रहने को कहा है। बताते चलें कि ऐसा ही ट्रैवल एडवाजयरी कनाडा ने भी भारत को लेकर जारी की है।

भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी की गई एडवायजरी में कहा गया है, “कनाडा में बढ़ती भारत विरोधी गतिविधियों, घृणा अपराधों और आपराधिक कृत्यों के चलते सभी भारतीयों से अपील की जाती है कि वे सतर्क रहें। बीते कुछ समय में भारतीय राजनयिकों और भारत विरोधी एजेंडा का विरोध करने वाले व्यक्तियों को धमकी दी गई।”

विदेश मंत्रालय ने भारतीयों से स्वयं को दूतावासों से जुड़े रखने और अपना पंजीयन कराने की सलाह भी दी है। विदेश मंत्रालय ने छात्रों को विशेष रूप से सतर्क रहने और वहाँ सावधानियाँ बरतने को कहा है।

भारत के विदेश मंत्रालय की तरफ से यह चेतावनी, कनाडा के चेतावनी जारी करने के बाद आई है। कनाडा ने भारत की यात्रा कर रहे अपने नागरिकों से सावधानी बरतने और जम्मू-कश्मीर की यात्रा से बचने को कहा था।

जस्टिन ट्रूडो के खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर पर दिए गए बयान और भारत के एक राजनयिक को निष्कासित करने के निर्णय के बाद दोनों के बीच कूटनीतिक लड़ाई तेज होती जा रही है। शुभ के कार्यक्रम का रद्द होना और भारतीयों के लिए एडवायजरी इसी कड़ी के तहत है।

भोलेनाथ की नगरी वाराणसी में ‘शिवमय’ होगा अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, PM मोदी करेंगे उद्घाटन; त्रिशूल जैसा फ्लड लाइट तो डमरू-बेलपत्र और गंगा घाट जैसा होगा डिजाइन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा क्षेत्र और भगवान शिव की नगरी के रूप में प्रसिद्ध वाराणसी में अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम बनेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इसकी आधारशिला रखेंगे। 23 सितंबर 2023 को इसकी आधारशिला रखने के कार्यक्रम में सचिन तेंदुलकर, सुनील गावस्कर जैसे महान खिलाड़ी भी शामिल होंगे। इस क्रिकेट स्टेडियम को भगवान शिव से प्रेरित डिजाइन में बनाया जा रहा है, जो अपने आप में अनूठा स्टेडियम होगा।

शिवमय होगा अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम

वाराणसी में बनने वाला ये स्टेडियम लगभग 27 माह में बनकर तैयार होगा। इस स्टेडियम में भगवान शिव से जुड़े प्रतीकों को डिजाइन के तौर पर शामिल किया जा रहा है। इस स्टेडियम में लगने वाले फ्लड लाइट्स को त्रिशूल की आकृति में बनाया बनाया जाएगा।

स्टेडियम के छत को चंद्रमा, स्वागत के लिए बेलपत्र तो गुंबद डमरू की थीम पर डिजाइन तैयार किया जा रहा है। वहीं, बैठने के लिए बनाई जाने वाली सीढ़ियाँ काशी के गंगा घाटों की तर्ज पर बनाई जाएँगी।

लागत 400 करोड़ से ज्यादा, दर्शक क्षमता 45 हजार से अधिक

ये क्रिकेट स्टेडियम लगभग 31 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में गंजारी इलाके में बनाया जाएगा। इसे बनाने के लिए 330 करोड़ रुपए से अधिक की लागत आएगी। इस स्टेडियम में करीब 30 हजार दर्शकों के बैठने की क्षमता होगी। यह उत्तर प्रदेश का तीसरा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम होगा। अभी उत्तर प्रदेश में लखनऊ और कानपुर में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम हैं।

जनसभा को संबोधित कर सकते हैं पीएम मोदी

जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23 सितंबर की सुबह 11-12 बजे के बीच एक जनसभा को संबोधित कर सकते हैं। अपने इस वाराणसी दौरे पर न सिर्फ क्रिकेट स्टेडियम की सौगात देंगे, बल्कि 1200 करोड़ की लागत से बने 16 अटल विद्यालयों को भी जनता को समर्पित करेंगे।

इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रोड शो भी कर सकते हैं। चूँकि अगले साल लोकसभा चुनाव भी होने हैं, ऐसे में वो इस रोड शो के माध्यम से चुनावी बिगुल भी बजा सकते हैं।

जो मॉडल बनी ‘मिस पाकिस्तान यूनिवर्स’, उसके पीछे मुल्क के प्रधानमंत्री ने ही लगा दी ISI: मुल्ले-मौलवी भी बता रहे शर्मनाक, कह रहे – हमारा नाम खराब किया

पाकिस्तान में 24 साल की एरिका रॉबिन ने ‘मिस यूनिवर्स पाकिस्तान 2023’ बनने पर बवाल छिड़ गया है। तारीफों की जगह उन्हें आलोचनाओं और तरह-तरह के तंजों का सामना करना पड़ रहा है। उनकी बेइज्जती की जा रही है। इससे उनके नवंबर में अल साल्वाडोर में होने जा रही 72वीं ग्लोबल मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता में शामिल होने पर भी सवालिया निशान लग गया है।

मालदीव में गुरुवार (14 सितंबर, 2023) को आयोजित मिस यूनिवर्स पाकिस्तान प्रतियोगिता में जीत हासिल करने वाली इस मॉडल की अपने ही देश में जमकर मुखालफत हो रही है। इसमें केवल मजहबी नेता ही नहीं, बल्कि वहाँ के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवारुल हक काकड़ भी शामिल हैं।

सब मिलकर पाकिस्तान यूनिवर्स 2023 के पीछे पड़ गए हैं और इंटेलिजेंस एजेंसी ISI को इन्वेस्टीगेशन के ऑर्डर तक दे दिए गए हैं। एरिका ने इस खिताब को पाने के लिए हीरा इनाम (24), जेसिका विल्सन (28), मलिका अल्वी (19) और सबरीना वसीम (26) को पीछे छोड़ा था। अब उसका ये ताज जीतना दकियानूसी पाकिस्तान के लिए शर्म की बात बन गई है।

मिस यूनिवर्स पाकिस्तान का अपमान

गौरतलब है कि बेहद रूढ़िवादी मुस्लिम-बहुल देश ने पाकिस्तान ने पहले कभी वैश्विक मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता में शिरकत नहीं की। ‘इंडिपेंडेंट‘ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मजहबी नेताओं से लेकर कार्यवाहक प्रधानमंत्री तक सभी ने प्रतियोगिता और रॉबिन के इस इवेंट में भाग लेने पर लानत-मलानत की है।

कार्यवाहक पीएम अनवारुल हक काकड़ की सरकार ने देश की खुफिया एजेंसी से प्रतियोगिता के आयोजकों की जाँच करने को कहा है। उनका कहना है कि वे सरकार की मंजूरी के बगैर देश के नाम पर प्रतियोगिता कराने में कैसे कामयाब हो पाए। काकड़ ने मालदीव प्रतियोगिता के आयोजन को ‘शर्मनाक कृत्य’ और ‘पाकिस्तान की महिलाओं का अपमान और शोषण’ कहा है।

कौन हैं एरिका रॉबिन?

रॉबिन के पास बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की डिग्री है और उन्होंने जनवरी 2020 में अपने पेशेवर मॉडलिंग करियर की शुरुआत की थी। तब उनकी तस्वीरें ‘दिवा मैगज़ीन पाकिस्तान’ सहित कई पत्रिकाओं में दिखाई दीं। उन्होंने हाल ही में उन्होंने ‘वॉयस ऑफ अमेरिका’ को बताया था कि उन्हें अपने कंधों पर बहुत सारी जिम्मेदारी महसूस होती है क्योंकि उनका मानना है कि यह पहली बार होगा कि पाकिस्तान से वैश्विक मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता में कोई प्रतिभागी शामिल होगी।

तब उन्होंने कहा था, “मैं ऐसा कुछ नहीं करूँगी जिससे देश की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचे।” अब गुरुवार (21 सितंबर, 2023) को मालदीव के रा एटोल में ब्रेनिया कोटेफारू रिसॉर्ट में विजेता होने का ऐलान होते ही पाकिस्तान के सीने पर साँप लोट गया। सब उनकी इस उपलब्धि की तारीफ की जगह उन्हें उलाहने देने में बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं।

पाकिस्तान के एक इस्लामी स्कॉलर तकी उस्मानी ने माँग की कि सरकार प्रतियोगिता के आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई करे और इस विचार से पीछा छुड़ाए कि रॉबिन पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व कर रही थी।

पाकिस्तान में सूचना और प्रसारण मंत्री मुर्तज़ा सोलांगी ने एक्स (पहले ट्विटर) पर पोस्ट किया, “पाकिस्तान की सरकार और देश का प्रतिनिधित्व देश और सरकारी संस्थान करते हैं। हमारी सरकार ने ऐसी किसी भी गतिविधि के लिए किसी भी गैर-मुल्क और गैर-सरकारी शख्स या संस्था को नामित नहीं किया है और ऐसा कोई भी शख्स, संस्था और देश पाकिस्तान की सरकार का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता है।”

वहीं एक अन्य राजनेता मुश्ताक अहमद खान ने इस घटना को ‘पाकिस्तान का अपमान’ कहा। उन्होंने ‘X’ (ट्विटर) पर पोस्ट किया, “पाकिस्तान में इस सौंदर्य प्रतियोगिता के आयोजक कौन हैं? यह शर्मनाक काम कौन कर रहा है?”

कैसे पहुँची थी मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता में?

दुबई की एजेंसी युगेन ग्रुप ने मार्च में पहली मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता के आयोजन का ऐलान किया था। इसके लिए उसने पाकिस्तान की युवतियों से आवेदन माँगे थे। रिपोर्टों के अनुसार, एजेंसी के पास मिस यूनिवर्स बहरीन और मिस यूनिवर्स मिस्र फ्रेंचाइजी का भी स्वामित्व है। इसके लिए रॉबिन ने अप्लाई किया और शीर्ष 10 प्रतियोगियों में जगह बनाई। इसके बाद शीर्ष पाँच में जगह बनाई।

अपनी जीत के बाद कराची के एक ईसाई परिवार में पैदा हुई रॉबिन ने कहा था, “मैं पहली मिस यूनिवर्स पाकिस्तान बनकर सम्मानित और विनम्र महसूस कर रही हूँ और मैं पाकिस्तान की सुंदरता को दिखाना चाहती हूँ। हमारे पास एक खूबसूरत संस्कृति है जिसके बारे में मीडिया बात नहीं कर रहा है।”