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पत्रकार ने पूछा- पीएम मोदी को ‘बॉस’ कहने पर अफसोस हो रहा आपको, ऑस्ट्रेलियाई PM ने दिया ऐसा जवाब की बोलती हो गई बंद

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने पीएम मोदी के बारे में सवाल करने वाले एक रिपोर्टर को डपट दिया। उन्होंने कहा कि ‘तुम्हें चिल्ल होने की जरूरत है’। दरअसल, भारत-कनाडा के बीच खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर बढ़े तनाव के बीच अल्बानीज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे।

इस दौरान पत्रकार ने ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री से पूछा, “आपने कुछ समय पहले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘बॉस’ कहा था। क्या इस समय आपको अपने बयान को लेकर अफसोस हो रहा है?” इस पर अल्बानीज ने कहा कि ‘चिल्ल करो’।

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने पत्रकार को डपटा

एंथनी अल्बानीज ने पहले तो उस पत्रकार के सवाल को ध्यान से सुना, फिर उसे लगभग डपट दिया। अल्बानीज ने कहा, “मैंने नरेंद्र मोदी को बॉस इसलिए कहा था, क्योंकि मैंने सिडनी के उसी सभागार में दुनिया के महानतम रॉकस्टार्स में से एक ब्रूस स्प्रिंगस्टीन को भी परफॉर्म करते देखा है। लेकिन उनसे भी ज्यादा गर्मजोशी के साथ लोगों का प्यार मोदी को मिला।”

प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने आगे कहा, “मैंने इसी आधार पर उन्हें (पीएम मोदी को) बॉस कहा। मैं उनका प्रधानमंत्री के तौर पर वैसा ही स्वागत किया, जैसा मैं बाकियों का करता हूँ।” बता दें कि ब्रूस स्प्रिंगस्टीन को उनके चाहने वाले ‘द बॉस’ कहते हैं।

इंटेलीजेंस के मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं करते बात

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत-कनाडा के बारे बीच जो कुछ भी चल रहा है, उस पर हमारी नजर है। हमारी विदेश मंत्री उस बात पर बयान दे चुकी हैं।” इस बीच, पत्रकारों ने उनसे पूछा कि ‘फाइव आईज’ ग्रुप जिसमें अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और न्यूजीलैंड शामिल हैं, उस प्लेटफॉर्म पर भी बात हुई है? इसके जवाब में उन्होंने साफ कह दिया कि वे इस विषय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में बात नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि यह इंटेलिजेंस का मुद्दा है।

भारत-कनाडा तनाव पर ऑस्ट्रेलिया की नजर

बता दें कि कनाडा में खालिस्तानी आतंकी की हत्या के तीन माह बाद भारत और कनाडा के बीच तनाव बढ़ गया है। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत सरकार पर आरोप लगाया है कि निज्जर की हत्या में भारत का हाथ है।

इसके बाद कनाडा सरकार ने भारत के एक राजनयिक को देश छोड़ने का आदेश दिया। इसके जवाब में भारत ने कनाडा के आरोपों को खारिज कर दिया है और बदले में एक वरिष्ठ कनाडाई राजनयिक को 5 दिनों के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया है।

गणेश पूजा में पुलिस अधिकारी अहद अहमद ने डाला व्यवधान, बुजुर्ग पुजारी-महिला से अभद्रता: लेस्टर की घटना, बागेश्वर बाबा के भक्तों को भी कर चुका है परेशान

ब्रिटेन की राजधानी लंदन के लेस्टर में एक मुस्लिम पुलिस अधिकारी अहद अहमद लगातार हिन्दुओं को परेशान कर रहा है। अहद अहमद ने अब गणेश चतुर्थी मनाते हुए हिन्दू श्रद्धालुओं पर पाबंदी गाने की कोशिश की है और उनसे अभद्रता करते हुए उन्हें परेशान किया है।

अहद अहमद का एक वीडियो भी वायरल हुआ है जिसमें वह एक बुजुर्ग हिन्दू पुजारी को परेशान करते हुए दिख रहा है। हिन्दुओं को परेशान करने के लिए वो कानून-व्यवस्था की आड़ में अपनी मनमानी कर रहा है। अहद इससे पहले भी हिन्दू श्रद्धालुओं को परेशान करता आया है। इससे पहले जुलाई में उसने लंदन में आयोजित पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वर धाम) की कथा में जाने वाले हिन्दुओं को परेशान किया था। इसके भी वीडियो वायरल हुए थे। अहद अहमद सोमाली मूल का मुस्लिम है।

इन सभी घटनाओं की जानकारी ‘Insight UK’ नाम के एक ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर डाला गया है। ये इंग्लैंड में हिन्दुओं का एक सामाजिक संगठन है। इनसाइट ने अहद अहमद के इस कृत्य की आलोचना की है।

इनसाइट यूके ने लिखा है, “लेस्टर में गणेश चतुर्थी के आयोजन को बाधित करने का प्रयास पुलिस अधिकारी अहद अहमद द्वारा बल प्रयोग करके किया गया। हम मानते हैं कि अहमद कृत्य अनावश्यक और निंदनीय है। इससे पहले 23 जुलाई, 2023 को अहद अहमद ने प्रजापति हॉल के बाहर भी बवाल किया था।”

इनसाइट यूके ने यह भी पूछा है कि क्या हिन्दुओं को लेस्टर में अपने त्योहार मनाने का अधिकार नहीं है? वीडियो में साफ़ तौर पर देखा जा सकता है कि अहद अहमद हिन्दू पुजारी के अतिरिक्त एक अन्य हिन्दू व्यक्ति से भी उलझता है और एक हिन्दू महिला से भी बदतमीजी करता है।

लेस्टर पुलिस विभाग ने इस सम्बन्ध में अभी कोई बयान जारी नहीं किया है और ना ही इस अधिकारी के विरुद्ध कोई कार्रवाई की गई है। अहद ने एक हिन्दू व्यक्ति धर्मेश लखानी को हथकड़ियाँ भी लगाई। धर्मेश लेस्टर में एक रेस्टॉरेंट चलाते हैं जो कि इस इलाके का पहला भारतीय रेस्टॉरेंट था।

यह काफी लोकप्रिय होने के साथ ही इस इलाके का एक सांस्कृतिक केंद्र भी है। एक्स पर एक यूजर JIX5A ने इस घटना के साथ ही जुलाई के कुछ वीडियो भी डाले हैं। इन वीडियो में लेस्टर में रामकथा सुनने आ रहे हिन्दू श्रृद्धालुओं को पीटते हुए देखा जा सकता है।

अहद अहमद लगातार हिन्दुओं को निशाना बना रहा है। लेस्टर में बीते एक वर्ष से हिन्दुओं को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। पिछले वर्ष लेस्टर में हिन्दुओं पर मुस्लिमों ने काफी हमले किए थे। उनके घरों एवं दुकानों को निशाना बनाया गया था। लेस्टर में इन हमलों को भारत-पाकिस्तान मैच को आड़ बना कर किया गया था। इतने हमलों के बाद भी ब्रिटेन की पुलिस ने इन मामलों पर कोई ख़ास कार्रवाई नहीं की है। वह इसे ढँकने का प्रयास करते रहे हैं जबकि हिन्दुओं के विरुद्ध हिंसा बढ़ती रही है।

पहले जाकिर ने पिंकी को तेजाब से नहलाया, अब अनीस ने महेश की हत्या कर आँगन में दफनाया: उधार का पैसा माँगने पर दिल्ली में दो सरकारी कर्मचारियों की हत्या

दिल्ली में भारतीय सर्वेक्षण विभाग के एक सीनियर क्लर्क की हत्या कर दी गई है। मृतक का नाम महेश है। महेश की हत्या का आरोप उनके ही साथ काम करने वाले अनीस पर लगा है। मृतक का शव अनीस के सरकारी घर के आँगन में दफन मिला। शव को ठिकाने लगाने के लिए उसे 5 पॉलीथिन में भरा गया था। हत्या की वजह महेश द्वारा अपने साथी रहे अनीस को दिए उधार पैसे माँगना बताया जा रहा है। हत्या 28 अगस्त 2023 को की गई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला दिल्ली के सरोजनी नगर क्षेत्र का है। मृतक महेश यहाँ के सर्वे ऑफ इंडिया डिफेंस विभाग में क्लर्क के पद पर तैनात था। उनके ही साथ अनीस भी काम करता था। दोनों में अच्छी दोस्ती थी। इस दौरान अनीस ने महेश से कुछ काम बताकर 9 लाख रुपए उधार लिए थे। कुछ समय बीत जाने पर महेश अपने पैसों को वापस लेने का दबाव बनाने लगा। हालाँकि, अनीस की मंशा पैसों को न लौटाने की थी। वह किसी न किसी बहाने से आनाकानी करने लगा।

आरोप है कि अनीस और महेश के ऑफिस में एक महिला स्टाफ भी कार्यरत थी। पहले लड़की से अनीस की दोस्ती थी, लेकिन बाद में महेश की नजदीकियाँ हो गईं। इस बात को लेकर महेश और अनीस के बीच एक बार झगड़ा भी हुआ। आखिरकार अनीस ने महेश को रास्ते से हटाने की ठान ली। आरोप है कि वो 20 दिनों से महेश की हत्या की तैयारी कर रहा था।

28 अगस्त 2023 की दोपहर को महेश ने अपने घर फोन कर के बताया कि वो अनीस से मिलने उसके घर जा रहा है। इसके बाद से महेश लापता हो गया। जब महेश के घर वालों ने अनीस से पूछा तो वो अनजान बनने का दिखावा करने लगा। उसने महेश के आने की बात तो कबूल की, लेकिन बताया कि वो कार की चाबी दे कर कहीं और चला गया।

आखिरकार अपनी तरफ से खोजबीन कर के महेश के घर वालों ने 29 अगस्त को उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज करवाई। पुलिस ने मामले की जाँच शुरू की और प्रथम दृष्टया अनीस को ही संदिग्ध मान कर पूछताछ की। शुरुआत में अनीस ने पुलिस को भी गुमराह करने की कोशिश की लेकिन आखिरकार उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया।

अनीस की निशानदेही पर पुलिस ने महेश की लाश को बरामद कर ली है। लाश आरोपित अनीस के सरकारी घर के आँगन में दफन मिली। लाश के ऊपर सीमेंट का प्लास्टर कर दिया गया। शव बुरी तरह से सड़ चुका था। पुलिस की पूछताछ में अनीस ने कबूल किया कि उसने 28 अगस्त को अपने घर आए अनीस की रिंच प्लास से पीट-पीट कर हत्या कर दी।

अनीस ने पूछताछ में बताया कि महेश के तड़पने पर वह और तेजी से उस पर वार कर रहा था। महेश की जान निकल जाने के बाद अनीस बाजार से 5 पॉलीथिन खरीद कर लाया। उसने मृतक की लाश इन्हीं पन्नियों में भरकर उसे अपने घर के आँगन में दफन कर दिया।

महेश के क्षत-विक्षत शव को पुलिस ने सीमेंट का फर्श तोड़ कर बरामद कर लिया है और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अनीस को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया है। मामले की जाँच की जा रही है।

रेलकर्मी जाकिर ने भी अपनी सहकर्मी की हत्या की थी

इसी तरह का एक और मामला कुछ दिन पहले दिल्ली में आया था। रेलवे में काम करने वाले 41 साल के जाकिर ने अपनी सहकर्मी 42 साल की पिंकी से कुछ जरूरी बताकर 11 लाख रुपए उधार लिए थे। जब काफी दिन हो गए तो पिंकी ने उससे पैसे माँगे। इससे खफा जाकिर ने पिंकी ही हत्या कर दी और चेहरे को तेजाब से जला दिया।

पैसे देने के बहाने जाकिर ने पिंकी को ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क ले गया। वहाँ एक सुनसान जगह देखकर उसने पिंकी के सीने पर खंजर घोंप दिया। पिंकी की पहचान ना हो, इसके लिए उसने पिंकी के चेहरे पर तेजाब फेंक जला दिया। पिंकी घर नहीं लौटी तब मदनगीर में उसके घरवाले पुलिस के पास पहुँचे और पूछताछ के बाद मामला खुला।

पिंकी निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर क्लर्क थी और जाकिर टेक्नीशियन था। दोनों 10 साल से एक-दूसरे कोे जानते थे। पिंकी 8 सितंबर 2023 को लापता हो गई। उसकी बेटी ने अगले दिन पुलिस से संपर्क किया। अंबेडकर नगर पुलिस उसकी तलाश कर रही थी, उसी शाम यूपी पुलिस को पिंकी का विकृत शव और कुछ दस्तावेज मिले। 15 सितंबर 2023 को यह मामला सामने आया।

‘AK-47 कहा गया रे?’: सारा अली खान को गणेश पूजा करने पर धमकी दे रहे इस्लामी कट्टरपंथी, लिखा – ‘अल्लाह पाक इस जाहिल को हिदायत दे’

बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान हिन्दू देवी-देवताओं के प्रति श्रद्धा के चलते एक बार फिर कट्टरपंथी मुस्लिमों के निशाने पर आ गई हैं। उन्हें इंस्टाग्राम पर धमकियाँ दे रहे हैं। कह रहे हैं कि उन्हें शर्म आनी चाहिए। उन्हें भला-बुरा कह रहे हैं।

सारा अली खान ने मंगलवार (19 सितम्बर, 2023) को सोशल मीडिया एप इंस्टाग्राम पर अपनी गणेश पूजा की कुछ फोटो डाली थीं। उन्होंने गणेश चतुर्थी के मौके पर अपने घर में गणेश प्रतिमा की स्थापना की है। फोटो में वह भगवान गणेश की प्रार्थना करते हुए नजर आती हैं।

सारा के स्वयं मुस्लिम हो कर भी हिन्दू देवी-देवताओं में श्रद्धा दिखाने को लेकर कट्टरपंथी मुस्लिम भड़क गए हैं। वह पोस्ट के नीचे कमेंट्स में सारा को इस्लाम की हिदायतें दे रहे हैं। एक यूजर तमन्ना शेख ने लिखा, “मुस्लिम होकर गणेश की पूजा करती हो शर्म कर।”

सारा ट्रोल-मुस्लिम
सारा अली खान को कट्टरपंथियों ने एक बार फिर निशाना बनाया है

एक अन्य यूजर हैदर ने सारा समेत भगवान गणेश को भी गालियाँ बकीं जबकि अहद नाम के एक व्यक्ति ने पूछा, “AK-47 कहाँ गया रे।” फराह खान नाम की एक यूजर ने लिखा कि पहले यह निर्धारित कर लो कि तुम मुस्लिम हो या नहीं। शाह जैदी नामक यूजर ने लिखा, “अल्लाह इस जाहिल को हिदायत दे।”

सारा को एक यूजर ने लिखा कि मैं आपको अनफॉलो करती हूँ कि क्योंकि इस्लाम में रह कर ये सब सूट नहीं करता। समीर त्यागी ने लिखा, “शर्म नहीं आई क्या?” सारा अली खान इससे पहले भी कट्टरपंथियों के निशाने पर रही हैं। वह लगातार हिन्दू मंदिरों में दर्शन के लिए जाती रही हैं और उसकी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर डालती हैं। हर बार कट्टरपंथी उनके मुस्लिम होने को लेकर प्रश्न उठाते हैं।

इससे पहले सारा को इसी वर्ष मई में केदारनाथ ज्योतिर्लिंग और जून में उज्जैन के महाकालेश्वर जोतिर्लिंग जाने पर ट्रोल किया गया था। सारा ने महाकालेश्वर में भजन में भी हिस्सा लिया था। सारा अली खान मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर तथा अन्य कई जगह मंदिरों के दर्शन को जाती रही हैं।

उनसे इस विषय में प्रश्न पूछे जाने पर उन्होंने कहा था, “आपको अच्छा लगेगा तो ठीक है नहीं लगेगा तो ऐसा नहीं है कि मैं नहीं जाऊँगी, यह मेरी निजी इच्छा है।” सारा ने यह भी कहा कि में अजमेर शरीफ भी उतनी ही श्रद्धा से जाऊँगी, जितनी श्रद्धा से मैं महाकालेश्वर या बँगला साहिब जाती हूँ। सारा के पिता सैफ अली खान मुस्लिम हैं लेकिन उनकी माँ अमृता सिंह हिन्दू हैं। वह कट्टरपंथियों के दबाव में आए बिना लगातार मंदिर जाती हैं जो कि कट्टरपंथियों को चुभ रहा है। इसलिए वह सारा को गालियाँ देने से भी बाज नहीं आ रहे।

तेलंगाना में कपड़ा धोने और सैलून चलाने वाले मुस्लिमों को फ्री बिजली देगी सरकार, चुनाव से पहले ओवैसी की डिमांड मुख्यमंत्री KCR ने पूरी की

तेलंगाना में कपड़े धोने वाले और नाई का काम करने वाले मुस्लिमों को हर माह 250 यूनिट बिजली मुफ्त दी जाएगी। तेलंगाना के मुख्यमंत्री और भारत राष्ट्र समिति के मुखिया के. चंद्रशेखर राव (KCR) ने इसको आदेश जारी किया है।

इस तरह की छूट अब तक एससी कम्यूनिटी के लोगों को हासिल थी, लेकिन हैदराबाद के सांसद और एआईएमआईएम के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी के निवेदन पर राज्य सरकार ने मुस्लिमों के लिए भी ये छूट जारी कर दी है।

कॉन्ग्रेस ने भी किया है 200 यूनिट बिजली का वादा

केसीआर सरकार ने ये आदेश कॉन्ग्रेस के उस चुनावी वादे को देखते हुए जारी किया है, जिसमें कॉन्ग्रेस ने तेलंगाना में सरकार बनने की सूरत में 200 यूनिट मुफ्त बिजली की घोषणा की है। कॉन्ग्रेस ने इसके लिए गृह ज्योति योजना चलाने का वादा किया है।

हालाँकि, केसीआर सरकार ने अब कपड़ा धोने वाले और नाई का काम करने वालों के लिए इस योजना को लागू कर दिया है। ये लोग चाहे एससी वर्ग के हों या मुस्लिम, इसका लाभ दोनों को मिलेगा।

सरकार की ओर से बताया गया है कि राज्य सरकार की ओर से एससी कम्यूनिटी को दी जा रही सुविधाओं का AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने समर्थन किया है। ओवैसी ने ठीक वैसी ही सुविधाओं की माँग मुस्लिम वर्ग के लोगों के लिए भी की थी, जिसे मुख्यमंत्री केसीआर ने मंजूर कर लिया है।

इस बारे में राज्य सरकार के मुख्य सचिव और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के कमिश्नर ने आदेश जारी किया है। सरकार इस बारे में बाकी जानकारियाँ बाद में साझा करेगी, जिसमें योजना के लाभार्थियों की योग्यता और शर्तों के बारे में जानकारी दी जाएगी।

तेलंगाना में त्रिकोणीय मुकाबला

इस साल के आखिर तक तेलंगाना में विधानसभा चुनाव होने हैं। केसीआर ने राज्य में किसी भी गठबंधन से इनकार कर दिया है। उसका सीधा मुकाबला कॉग्रेस और भाजपा से होगा। वहीं, एआईएमआईएम केसीआर की पार्टी के साथ ही पहले की तरह चुनाव लड़ेगी।

राज्य विधानसभा के चुनाव अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए बड़ी भूमिका तैयार करेंगे, क्योंकि साल 2019 के चुनाव में केसीआर की पार्टी लोकसभा चुनाव में 11 से घटकर 9 सीटों पर आ गई थी।

कॉन्स्टेबल रतनलाल की हत्या में इरशाद अली को जमानत से हाई कोर्ट का इनकार, कहा- सबूतों से कर सकता है छेड़छाड़, गवाहों को दे सकता है धमकी

दिल्ली पुलिस के कॉन्स्टेबल रतनलाल की हत्या के मामले में आरोपित इरशाद अली को जमानत देने से हाई कोर्ट ने इनकार कर दिया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि वह जमानत का दुरुपयोग कर सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है। गवाहों को धमका सकता है।

कॉन्स्टेबल रतनलाल की हत्या साल 2020 में उत्तर पूर्वी दिल्ली में CAA-NRC विरोधी हिंसा के दौरान इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ ने कर दी थी। इस मामले में मोहम्मद अयूब और शाहनवाज को जमानत मिल चुकी है। लेकिन इरशाद और सादिक की अर्जी खारिज हो चुकी है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक इरशाद अली की जमानत अर्जी पर सुनवाई जस्टिस सौरभ बनर्जी की बेंच ने की। आरोपित की तरफ से अधिवक्ता तनवीर और कर्तिक ने दलीलें दी। वहीं अभियोजन पक्ष से अमित प्रसाद ने बहस की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि FIR में IPC की 22 धाराओं सहित पीडीपीपी अधिनियम और शस्त्र अधिनियम जैसे सेक्शन लगे हैं जो केस की गंभीरता को दर्शाती है। साथ ही इरशाद अली की पहचान CCTV फुटेज से भी हुई है।

अदालत ने यह भी बताया कि तमाम गवाहों ने हिंसा में इरशाद अली की संलिप्तता स्वीकारी है। कोर्ट ने माना कि ऐसे में उसे जमानत देने से गवाहों के प्रभावित होने की आशंका है। कोर्ट ने माना है कि वीडियो फुटेज में हिंसा के दौरान इरशाद अली पूरी ताकत और जोश से बाकी लोगों को भड़का रहा था। उसकी इस हरकत को प्री प्लान मानते हुए अदालत ने इसे उसकी जमानत अर्जी ख़ारिज करने का पर्याप्त कारण माना है। हाई कोर्ट के मुताबिक सबूतों के आधार पर आरोपित इस बात से इनकार नहीं कर सकता कि वह हिंसा के दौरान घटनास्थल पर मौजूद नहीं था।

बताते चलें कि सितंबर में ही अदालत ने कॉन्स्टेबल रतनलाल हत्याकांड में आरोपित अयूब और शाहनवाज, मोहम्मद खालिद को जमानत दी थी। हालाँकि सादिक नाम के एक अन्य आरोपित की जमानत अर्जी ख़ारिज हो चुकी है। कोर्ट ने अन्य आरोपितों की जमानत को इरशाद अली को बेल देने के मजबूत आधार नहीं माना। इरशाद अली को दिल्ली पुलिस ने फरवरी 2020 में हुए कॉन्स्टेबल रतनलाल हत्याकांड में 7 सितंबर 2020 को गिरफ्तार किया था। उसके खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट भी दायर हो चुकी है।

‘जीवनसाथी’ को महिला आरक्षण का ‘क्रेडिट’ देने के लिए सोनिया गाँधी ने उन नरसिम्हा राव का भी लिया नाम, जिनके शव को कॉन्ग्रेस दफ्तर न आने दिया

संसद भवन की नई इमारत में चल रहे विशेष सत्र में मोदी सरकार ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पेश किया। इस पर चर्चा के दौरान बुधवार (20 सितंबर, 2023) को कॉन्ग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने अपनी पार्टी का रुख साफ़ किया। सोनिया गाँधी ने महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन किया है। अब साफ़ हो गया है कि इस बिल को पास कराने में मोदी सरकार को कोई दिक्कत नहीं होगी, क्योंकि सत्ताधारी भाजपा और उसके सहयोगी दलों के अलावा इसे प्रमुख विपक्षी पार्टी का भी सहयोग मिल गया है।

सोनिया गाँधी ने लोकसभा में बोलते हुए कहा, “अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने की इजाजत दी इसके लिए मैं आपकी आभारी हूँ। भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस की तरफ से मैं ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ के समर्थन में खड़ी हूँ। धुएँ से भरी रसोई से लेकर रोशनी से जगमगाते हुए स्टेडियम तक, भारत की स्त्री का सफर बहुत लंबा है। लेकिन, आखिरकार उसने मंजिल को छू दिया है। उसने जन्म दिया, उसने परिवार चलाया, उसने पुरुषों के बीच तेज़ दौड़ लगाई और असीम धीरज के साथ अक्सर खुद को हारते हुए, लेकिन आखिरी बाजी में जीतते हुए देखा।”

सोनिया गाँधी ने कहा कि भारत की स्त्री के हृदय में महासागर जैसा धीरज है, उसने खुद के साथ हुई बेईमानी की शिकायत नहीं की। रायबरेली की सांसद ने कहा कि भारत की स्त्री ने खुद के बारे में नहीं सोचा बल्कि नदियों की तरह सबकी भलाई के लिए काम किया और मुश्किल वक्त में हिमालय की तरह अडिग रही। सोनिया गाँधी ने कहा कि स्त्री के धैर्य का अंदाज़ लगाना नामुमकिन है, वो आराम को नहीं पहचानती और थक जाना भी नहीं जानती।

सोनिया गाँधी ने कहा कि हमारे महान देश की माँ है स्त्री, लेकिन उसने सिर्फ हमें जन्म ही नहीं दिया है बल्कि अपने आँसुओं और खून-पसीने से सींच कर हमें अपने बारे में सोचने लायक बुद्धिमान और शक्तिशाली बनाया है। UPA काल में ‘राष्ट्रीय सलाहकार परिषद’ की अध्यक्ष रहीं सोनिया गाँधी ने आगे कहा कि स्त्री की मेहनत, गरिमा और त्याग की पहचान कर के ही हमलोग मनुष्यता की परीक्षा में पास हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज़ादी की लड़ाई और नए भारत के निर्माण के हर मोर्चे पर स्त्री पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिला कर लड़ी है और उम्मीदों, आकांक्षाओं और घर-गृहस्थी के बोझ के नीचे नहीं रही।

उन्होंने इस दौरान सुचेता कृपलानी, सरोजिनी नायडू, अरुणा असफ अली, विजय लक्ष्मी पंडित राजकुमारी अमृत कौर का नाम लेते हुए कहा कि लाखों महिलाओं ने कठिन समय में महात्मा गाँधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और और मौलाना अबुल कलम आज़ाद के सपनों को जमीन पर उतार कर दिखाया है। कॉन्ग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने ये भी कहा कि इंदिरा गाँधी का व्यक्तित्व इस सिलसिले में एक बहुत ही रोशन और ज़िंदा मिसाल है।

सोनिया गाँधी ने कहा, “मेरी ज़िन्दगी का ये बहुत मार्मिक क्षण है। पहली बार स्थानीय निकायों में स्त्री की भागीदारी करने वाला संविधान संशोधन राजीव गाँधी जी ही लेकर आए थे। वो राज्यसभा में 7 वोटों से गिर गया था। नरसिम्हा राव ने बाद में उसे पारित कराया। देश भर के स्थानीय निकायों के जरिए हमारे पास 15 लाख चुनी हुई महिला नेता है। राजीव गाँधी का सपना अभी आधा ही पूरा हुआ है। कॉन्ग्रेस पार्टी इस बिल का समर्थन करती है। हमें इसके पास होने से ख़ुशी है, लेकिन एक चिंता भी है।”

इस दौरान सोनिया गाँधी ने सवाल भी पूछा। उन्होंने प्रश्न किया कि पिछले 13 वर्षों से भारतीय स्त्रियाँ अपनी राजनीतिक जिम्मेदारियों का इंतजार कर ही हैं और उन्हें कुछ वर्ष और इंतजार करने के लिए क्यों कहा जा रहा है? उन्होंने पूछा कितने वर्ष? 2 वर्ष, 4 वर्ष, 6 वर्ष, 8 वर्ष? उन्होंने पूछा कि क्या भारत की स्त्रियों के साथ ये बर्ताव उचित है? उन्होंने कॉन्ग्रेस की तरफ से माँग की कि ये जातिगत जनगणना करा कर SC, ST और OBC महिलाओं की संख्या गिनी जाए। उन्होंने माँग की कि इस बिल को कानून बना कर जल्दी से जल्दी लागू किया जाए।

सोनिया गाँधी आज भले ही नरसिम्हा राव का नाम ले रही हों, लेकिन एक समय ऐसा था जब उनके शव के अंतिम दर्शन के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी का मुख्यालय नहीं खोला गया था। न ही दिल्ली में समाधि बनाने के लिए जगह दी गई। तब प्रधानमंत्री रहे डॉ मनमोहन सिंह उनकी अंतिम यात्रा तक में नहीं गए। दिल्ली में उनका मेमोरियल तब बन पाया, जब मोदी सरकार सत्ता में आई। प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद नरसिम्हा राव को कॉन्ग्रेस कार्यसमिति से भी निकाल बाहर किया गया था।

शराब पीने की उम्र तय है तो सोशल मीडिया के लिए भी होना चाहिए: कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा- आजकल स्कूली बच्चे इसके आदी होते जा रहे हैं

कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने के लिए उम्र को लेकर मंगलवार (19 सितंबर 2023) एक अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि केंद्र सरकार को देश में सोशल मीडिया के इस्तेमाल के लिए उम्र की न्यूनतम सीमा तय करने पर सोचना चाहिए।

हाईकोर्ट ने सुझाव दिया है कि युवाओं, खासकर स्कूली बच्चों के लिए सोशल मीडिया तक पहुँच प्रतिबंधित की जानी चाहिए। इसके साथ ही प्रस्ताव दिया है कि उनके वोट देने के अधिकार की उम्र 18 या 21 तक ही उन तक इसकी पहुँच होनी चाहिए। कोर्ट ने आगे कहा कि स्कूल जाने वाले बच्चे सोशल मीडिया के आदी होते जा रहे हैं और ये देश के लिए बेहतर होगा, यदि ऐसी पहुँच सीमित हो।

कोर्ट इस मामले पर बुधवार (20 सितंबर) को फैसला सुनाएगा। कोर्ट एक्स कॉर्प यानी पहले के ट्विटर इंक की दायर एक रिट अपील पर सुनवाई कर रहा है। इसमें केंद्र सरकार के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें कुछ ट्वीट्स को ब्लॉक करने के लिए कहा गया था।

कर्नाटक हाईकोर्ट के जस्टिस जी नरेंद्र और विजयकुमार ए पाटिल की बेंच ने एक्स कॉर्प (पहले ट्विटर इंक) की 30 जून 2023 के सिंगल जज के आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई कर रही है। दरअसल, सिंगल बेंच ने सोशल मीडिया कंपनी एक्स द्वारा केंद्र सरकार की इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के विभिन्न आदेशों के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी थी। इसके साथ ही आदेशों का पालन न करने पर उस पर 50 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया था।

इस मामले में फिर से सुनवाई शुरू करते हुए हाईकोर्ट की बेंच ने कहा कि हाल ही में स्कूल जाने वाले बच्चे सोशल मीडिया के इतने आदी हो गए हैं कि यह देश लिए बेहतर होगा कि ये उनके लिए प्रतिबंधित हों। जस्टिस जी नरेंद्र ने कहा, “सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाएँ। बहुत कुछ अच्छा होगा। आज स्कूल जाने वाले बच्चे इसके आदी हो गए हैं। मुझे लगता है कि आबकारी नियमों की तरह (इसकी भी) एक उम्र सीमा तय होनी चाहिए।”

आबकारी से कोर्ट का मतलब शराब पीने के लिए निर्धारित कानूनी उम्र से है। सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने के लिए भी एक उम्र सीमा तय करना सही होगा। कोर्ट ने आगे कहा, “बच्चे 17 या 18 साल के हो सकते हैं, लेकिन क्या उनमें यह फैसला लेने की परिपक्वता है कि देश के हित में क्या (अच्छा) है और क्या नहीं? न केवल सोशल मीडिया पर, बल्कि इंटरनेट पर भी ऐसी चीजें हटाई जानी चाहिए, जो मन को विषाक्त करती हैं। सरकार को सोशल मीडिया के इस्तेमाल के लिए एक उम्र सीमा निर्धारित करने पर भी विचार करना चाहिए।”

बेंच ने इस दौरान इशारा किया कि वह अपीलकर्ता की दायर दो अंतरिम अपीलों (आईए) पर बुधवार को आदेश पारित करेगी। इसमें मामले से जुड़े अन्य सबूत जोड़ने की माँग भी शामिल है। बेंच ने आगे कहा कि जाँच का एकमात्र पहलू यह है कि क्या संबंधित सामग्री सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए (1) और (2) का उल्लंघन करती है।

कोर्ट ने आगे कहा, “यदि इन प्रावधानों का उल्लंघन किया जाता है तो अपीलकर्ता (एक्स कॉर्प) को रोक लगाने वाले आदेशों का पालन करना होगा।” इससे पहले, अमेरिका की मल्टी-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म के वकील ने कोर्ट को सूचित किया कि उन्होंने आदेश को चुनौती इस आधार पर दी है कि सोशल प्लेटफॉर्म पर एकाउंट को ब्लॉक करने की कानूनी व्याख्या महज सिंगल जज की टिप्पणियों के आधार पर की गई है।

दरअसल, 10 अगस्त 2023 को चीफ जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की अध्यक्षता वाली बेंच ने एक्स कॉर्प को एक हफ्ते के अंदर 25 लाख रुपए जमा करने का निर्देश देते हुए रोक का एक सशर्त अंतरिम आदेश दिया था। ये सिंगल जज के 30 जून 2023 के आदेश में एक्स पर लगाए 50 लाख रुपए के जुर्माने का 50 फीसदी बनता है।

सिंगल बेंच में दायर इस अपील में एक्स ने 2 फरवरी 2021 और 28 फरवरी 2022 के बीच इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जारी किए गए ब्लॉकिंग आदेशों की एक सीरीज को चुनौती दी थी, जो साल 2022 में खारिज होने को आए थे।

इस बीच एक्स के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए के तहत 10 सरकारी आदेश जारी किए गए थे। इनमें 1474 खातों, 175 ट्वीट, 256 यूआरएल और एक हैशटैग को ब्लॉक करने का निर्देश दिया गया था। ट्विटर ने इनमें से 39 यूआरएल से जुड़े आदेशों को कोर्ट में चुनौती दी थी।

‘हिंदुओं कनाडा छोड़ दो, बंद करो भारतीय उच्चायोग’: जस्टिन ट्रूडो की लगाई आग को भड़का रहा खालिस्तानी आतंकी पन्नू, हिंसा के लिए उकसाया

खालिस्तानी आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के सरगना गुरपतवंत सिंह पन्नू (Gurpatwant Singh Pannu) ने कनाडा में रह रहे हिंदुओं को धमकी दी है। उसकी यह धमकी कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो (Justin Trudeau) के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने बिना किसी सबूत के खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर (Hardeep Singh Nijjar) की हत्या का दोष भारत पर डालने की कोशिश की थी।

19 सितंबर 2023 को जस्टिन ट्रूडो ने कनाडा की संसद में कहा था कि खालिस्तानी आतंकी निज्जर को भारतीय एजेंटों ने मारा था, जिसके हमारे पास सबूत हैं। कनाडा की सरकार ने भारतीय राजनयिक पवन कुमार राय को निष्कासित भी कर दिया था। जवाब में भारत ने भी एक कनाडाई राजनयिक ओलिवर सिल्विस्टर को निष्कासित किया था।

पन्नू के संगठन सिख फॉर जस्टिस ने 25 सितंबर तक कनाडा में स्थित भारतीय उच्चायोग और वाणिज्य दूतावासों को बंद करने की धमकी दी है। वर्तमान में कनाडा की राजधानी ओटावा में भारत का उच्चायोग (High Commission) और वैंकुवर तथा टोरंटो में वाणिज्य दूतावास (Consulates General) हैं।

आतंकवादी पन्नू ने कहा है यदि ऐसा नहीं होता है तो वह दूतावासों पर हमला करेगा। उसने भारत को तोड़ने की भी बात कही है। इन सब बातों को करते हुए उसने एक 2 मिनट का प्रोपेगेंडा वीडियो जारी किया है।

पन्नू पहले भी हिन्दुओं और कनाडा में काम करने वाले भारतीय राजनयिकों की हत्या का ऐलान करते आया है। पन्नू ने एक बयान जारी करके कहा है, “कनाडाई हिन्दुओं तुमने कनाडा के प्रति अपनी निष्ठा नहीं जाहिर की है, तुम्हें कनाडा से वापस भारत जाना होगा।”

पन्नू ने यह भी कहा, “खालिस्तान समर्थक सिख हमेशा से ही कनाडा के प्रति श्रद्धा रखते आए हैं। उन्होंने हमेशा कनाडा का पक्ष लिया है।” पन्नू ने आगामी 29 अक्टूबर को ‘किल इंडिया रेफरेंडम” कराने का ऐलान किया है, जिसमें सिखों से कनाडा में भारत के हाई कमिश्नर संजय कुमार वर्मा को निज्जर की हत्या का जिम्मेदार ठहराने को कहा गया है।

कनाडा में हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा का ऐलान करना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले लगातार भारतीय राजनयिकों के होर्डिंग लगाकर उन्हें मारने की धमकियाँ दी गई हैं। कनाडा में हिन्दू मंदिरों पर भी लगातार हमले हुए हैं। इस प्रकार की हिंसा करने वालों के विरुद्ध जस्टिन ट्रूडो की सरकार ने कोई भी एक्शन नहीं लिया है।

कनाडा में खालिस्तानी भारतीय राजनयिकों की हत्या की धमकी देने वाले होर्डिंग लगा रहे हैं
कनाडा में खालिस्तानी भारतीय राजनयिकों की हत्या की धमकी देने वाले होर्डिंग लगा रहे हैं

कनाडा में पन्नू का आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस कथित जनमत संग्रह आयोजित करवा कर भी खालिस्तान की माँग को हवा देता रहा है।

भारतीय राजनयिकों के विरुद्ध कनाडा में कानूनी कार्रवाई करने का ऐलान करता सिख फॉर जस्टिस का एक पोस्टर
भारतीय राजनयिकों के विरुद्ध कनाडा में कानूनी कार्रवाई करने का ऐलान करता सिख फॉर जस्टिस का एक पोस्टर

कनाडा के सांख्यिकी विभाग के अनुसार, वर्ष 2021 तक कनाडा में लगभग 8.28 लाख हिन्दू थे। इनकी संख्या वर्तमान में इससे अधिक हो सकती है। हिन्दू, कनाडा में तीसरा सबसे बड़ा धार्मिक वर्ग है। कनाडा में सिखों की संख्या 7.7 लाख के आसपास है।

कनाडा में हिन्दू और सिखों, दोनों की ही में बीते 20 वर्षों में तेज बढ़ोतरी हुई है। कनाडा में बसने वाले अधिकांश हिन्दू और सिख पंजाबी मूल के हैं। हाल के वर्षों में देश के अन्य हिस्सों से भी कनाडा में जाकर बसने का चलन बढ़ा है।

जस्टिन ट्रूडो के बयान और दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों के खराब होने के बाद लगातार हिन्दुओं की सुरक्षा के प्रति चिंता जताई जा रही है। अभिनेता रणवीर शौरी ने इसी को लेकर ट्वीट करते हुए अपनी चिंता व्यक्त की थी।

पन्नू की इस धमकी के बाद अभी तक कनाडा की सुरक्षा एजेंसियों ने उस पर कोई कार्रवाई नहीं की है। पन्नू पर कार्रवाई न करना यह बताता है कि कनाडा भारत को तोड़ने की साजिश करने वालों के साथ खड़ा है।

भारत को घेरने के लिए कनाडा ने दुनियाभर का खटखटाया दरवाजा, पर अमेरिका सहित सभी दोस्तों ने खालिस्तानी आतंकी निज्जर पर छोड़ा अकेला

खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या पर भारत को घेरने के लिए कनाडा ने कई देशों का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन अमेरिका सहित सभी मित्र देशों ने उसके अनुरोध को खारिज कर दिया। वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट से यह बात सामने आई है।

वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार कनाडाई पीएम ट्रूडो ने कई देशों से समर्थन माँगा था। संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और ऑस्ट्रेलिया से इस मुद्दे को उठाने और समर्थन का आग्रह किया था। लेकिन भारत के साथ कूटनीतिक गतिरोध पैदा होने की आशंका से सभी देशों ने साथ देने से इनकार कर दिया।

इसकी एक बड़ी वजह​ भारत का दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ते देशों में से एक होना है। साथ ही चीन की विस्तारवादी नीतियों से निपटने में भी भारत की बड़ी भूमिका है। वाशिंगटन पोस्ट के इस लेख में कहा गया है कि कनाडा के सहयोगियों ने भारत के खिलाफ आरोपों में शामिल होने के उसके अनुरोधों को खारिज कर दिया था। ट्रूडो ने कथित तौर पर अमेरिका सहित कनाडा के सभी सहयोगियों से आतंकी निज्जर की हत्या के लिए भारत की निंदा करने का आग्रह किया था।

लेख में पीएम मोदी के नेतृत्व में नई दिल्ली की बढ़ती ताकत और प्रभाव के बारे में बताया गया है। बताया गया है कि कैसे उन्होंने भारत को दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्था में लाने का वादा किया है। उनके इस वादे को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि दुनिया आर्थिक अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध चल रहा है और चीन की रफ्तार भी धीमी हो रही है।

भारत ने हाल ही में मध्य पूर्व-यूरोप को जोड़ने वाले एक प्रोजेक्ट का भी ऐलान किया है। इस आर्थिक गलियारे को चीन के बीआरआई (BRI) के रणनीतिक जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। इसमें गलियारे से जुड़ने वाले देश बगैर किसी लोन के चंगुल में फंसकर इसका फायदा पाएँगे, जबकि बीजिंग अपनी वैश्विक बुनियादी ढाँचा विकास योजना के तहत इससे जुड़ने वाले देशों को कर्ज के जाल में फँसाता रहा है।

रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि फाइव आईज देशों (ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन और अमेरिका का खुफिया गठबंधन) के कई अधिकारियों ने निजी तौर पर निज्जर की हत्या के बारे में चर्चा की थी। लेकिन भारत में जी-20 शिखर सम्मेलन में इसका जिक्र करना सही नहीं समझा।

गौरतलब है कि भारत और कनाडा के बीच राजनयिक संकट जस्टिन ट्रूडो के 18 सितंबर को कनाडाई संसद में किए गए विचित्र दावों से पैदा हुआ है। इसमें उन्होंने कनाडा में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के लिए भारत को दोषी ठहराने की कोशिश की थी। इसके अलावा, कनाडाई विदेश मंत्री मेलानी जोली ने कहा था कि आरोपों देखते हुए कनाडाई सरकार ने एक शीर्ष भारतीय राजनयिक को निष्कासित कर दिया है। ट्रूडो ने कनाडाई संसद में बिना कोई सबूत दिए भारत पर निज्जर की हत्या का आरोप लगाया था।