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नूपुर शर्मा के बाद अब अमृतांशु गुप्ता! मोहम्मद ज़ुबैर ने एक और निर्दोष को इस्लामी कट्टरपंथियों के सामने झोंका, सहवाग-वेंकटेश से खार खाए गिरोह ने खोजा नया ‘शिकार’

फेक न्यूज की फैक्ट्री मोहम्मद जुबैर ने अब पीआर मैनेजर अमृतांशु गुप्ता को निशाना बनाने की ठानी है। जुबैर ने अमृतांशु की डिटेल्स सोशल मीडिया पर शेयर कर दी, ताकि उसकी ट्रोल आर्मी अमृतांशु को अपना शिकार बना सके। ये ठीक उसी तरह का पैटर्न है, जिसकी शिकार बीजेपी नेता नुपूर शर्मा बनी थी। इसके लिए मोहम्मद जुबैर ने पूर्व भारतीय क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद के ट्विटर हैंडल को मैनेज करने वाले डिजिटल स्ट्रेटजिस्ट और सलाहकार अमृतांशु गुप्ता पर अपनी ट्रोल सेना उतार दी।

मोहम्मद जुबैर ने अपने ट्वीट में कहा कि वेंकटेश प्रसाद के हैंडल से जो ट्वीट उसे एक्सपोज करने के लिए किए गए थे, वो अमृतांशु ने किए थे, क्योंकि वही वेंकटेश प्रसाद का सोशल मीडिया मैनेज करते हैं। चूँकि वेंकटेश प्रसाद के एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ में ट्वीट किए गए थे, जो जुबैर को नागवार गुजरे थे। जुबैर ने अमृतांशु की डिटेल्स शेयर करते हुए लिखा, “यही व्यक्ति वेंकटेश प्रसाद से लेकर वीरेंद्र सहवाग के ट्विटर/इंस्टा हैंडल मैनेज करता है। स्मृति ईरानी का ऑपइंडिया वेबसाइट के लिए इंटरव्यू करता है।”

जुबैर का ट्वीट

जुबैर ने आशीष नेहरा के साथ गौरव कपूर के 2017 के साक्षात्कार का एक वीडियो भी साझा करते हुए लिखा कि अमृतांशु गुप्ता ने भुगतान किए गए ट्वीट के लिए पूर्व क्रिकेटर से संपर्क किया होगा। हालाँकि, वीडियो में आशीष नेहरा ने कहीं भी अमृतांशु का नाम नहीं लिया है।

जुबैर ने ‘आउटलुक’ मैगजीन का एक आर्टिकल भी शेयर किया और कहा, “सेलेब्स अपने सोशल मीडिया अकाउंट को मैनेज करने के लिए ‘प्रोफेशनल्स’ को हायर करते हैं जो उनके नाम से लिखते हैं।”

वेंकटेश प्रसाद ने लगाई थी जमकर लताड़

बता दें कि हाल ही में वेंकटेश प्रसाद को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कॉन्ग्रेस नेताओं, वामपंथियों और इस्लामवादियों के घनिष्ठ और शातिर लेफ्ट लॉबी ने निशाना बनाया था। लेकिन, जब जुबैर ने वेंकटेश प्रसाद को घेरने की कोशिश की, तो उन्होंने जुबैर को एक्सपोज कर दिया था।

पूर्व भारतीय क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद ने सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने के लिए मोहम्मद जुबैर को जमकर लताड़ लगाई थी। इसके बस कॉन्ग्रेसी, वामपंथी और इस्लामवादी एकजुट होकर फर्जी फैक्ट-चेकर जुबैर के बचाव में उतर आए। दरअसल, वेंकटेश प्रसाद ने ‘भ्रष्ट और अहंकारी व्यक्ति द्वारा पूरे संस्थान को खराब करने’ को लेकर एक पोस्ट किया था। बाद में उन्होंने यह पोस्ट डिलीट कर दिया था। इसको लेकर फेक खबर फैलाने के लिए कुख्यात ऑल्टन्यूज के सह-संस्थापक जुबैर ने उन पर निशाना साधा था।

हालाँकि, जब वेंकटेश प्रसाद ने हटाए गए ट्वीट को दोबारा पोस्ट किया, तो संदिग्ध ‘फैक्ट चेकर’ को भी शर्मिंदा होना पड़ा, जिसका इस्तेमाल उन्होंने भारतीय क्रिकेटर को निशाना बनाने के लिए किया था। वेंकटेश प्रसाद के ट्वीट को गलत अर्थ में पेश करने में मोहम्मद ज़ुबैर सबसे आगे था, इसीलिए वेंटकेश प्रसाद ने उसे लताड़ लगाई थी।

जब वापसी का कोई रास्ता नहीं बचा तो जुबैर ने वेंकटेश प्रसाद के मीडिया मैनेजर अमृतांशु गुप्ता को ढूँढ लिया और अमृतांशु गुप्ता पर अपनी ट्रोल आर्मी उतार दी। यह उसकी पिछली हरकतों की तरह ही है, जिसमें वो ऑनलाइन लिंचिंग करता है।

नुपूर शर्मा जैसा कांड दोहराने की कोशिश!

बता दें कि भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा तब इस्लामी कट्टरपंथियों का निशाना बनी थीं, जब मोहम्मद जुबैर जैसे इस्लामिक कट्टरपंथियों ने पैगंबर मुहम्मद और इस्लाम पर अपने विचार रखने के लिए उन्हें धमकियाँ दिलवाई थी। इस मामले में काफी विवाद हुआ था। दरअसल, शर्मा ‘टाइम्स नाउ’ पर एक बहस पैनल का हिस्सा थी, जिसमें ज्ञानवापी परिसर में शिवलिंग मिलने और इस खोज के बाद हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाने पर चर्चा हो रही थी।

इस कार्यक्रम के दौरान इस्लामवादियों ने दावा किया था कि ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के वुज़ुखाने के अंदर जो शिवलिंग मिला है, वह कोई शिवलिंग नहीं बल्कि एक फव्वारा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आलोचकों ने बार-बार कहा था कि ज्ञानवापी परिसर के अंदर पाया गया शिवलिंग एक फव्वारा था, न कि हिंदू भगवान की मूर्ति।

हिंदू देवी-देवताओं पर की गई अवमानना ​​और तिरस्कार के जवाब में, भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा ने उनसे हिंदू देवताओं का अपमान बंद करने को कहा और पैगंबर मुहम्मद और इस्लाम पर अपनी टिप्पणियों की पुष्टि के लिए इस्लामी धर्मग्रंथों और पवित्र कुरान का हवाला दिया। लेकिन, इसके बाद उनके वीडियो का एडिटेड हिस्सा जुबैर एंड कंपनी की तरफ से वायरल कर दिया गया था। उसी डिबेट में तस्लीम रहमानी ने क्या कहा, इसे छिपा लिया गया। इसके बाद कन्हैया लाल और उमेश कोल्हे हत्याकांड सामने आया था। नूपुर शर्मा के समर्थन के कारण दोनों को मार डाला गया था।

मॉरीशस के PM ने वाराणसी पहुँच परिवार समेत किया बाबा विश्वनाथ का दर्शन, गंगा में विसर्जित की ससुर की अस्थियाँ: घाट पर पूजा-अर्चना भी

G20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के बाद मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जुगनाथ सोमवार (11 सितंबर, 2023) को वाराणसी पहुँचे। यहाँ उन्होंने अपने परिवार के साथ बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए। इससे पहले उन्होंने दशाश्वमेध घाट पर अपने ससुर की आत्मा की शांति के लिए अनुष्ठान किया। फिर मणिकर्णिका घाट पर अस्थियों का विसर्जन किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जुगनाथ सुबह 11 बजे वाराणसी एयरपोर्ट पहुँचे थे। वहाँ योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्री अनिल राजभर ने उनका स्वागत किया था। इसके बाद वह ताज होटल के लिए रवाना हुए थे। वहाँ रास्ते में स्कूली बच्चों द्वारा हाथों में झंडा व पारंपरिक गीत-नृत्य के साथ उनका स्वागत किया गया।

इसके बाद वह अपने परिवार के साथ दशाश्वमेध घाट पहुँचे। जहाँ उन्होंने अपने साले और पत्नी के साथ ससुर की आत्मा की शान्ति के लिए पूजा-पाठ की। फिर नाव में सवार हो मणिकर्णिका घाट पहुँचे। यहाँ उन्होंने घाट के सामने गंगा की धारा में अपने ससुर का अस्थि कलश विसर्जित किया।

इसके बाद वह श्री काशी विश्वनाथ मंदिर पहुँचे। मंदिर में 60 बटुकों और डमरू दल ने मंत्रोच्चार के बीच डमरू बजाकर उनका स्वागत किया। मंदिर आगमन पर श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुनील वर्मा ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जुगनाथ को स्मृति चिह्न के तौर पर मंदिर का काष्ठ मॉडल यानि लड़की का मॉडल भेंट किया।

भारत से थे प्रविंद जग्नाथ के पूर्वज

मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रवींद जुगनाथ का उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रसडा के रहने वाले थे। भारत में मॉरीशस के उच्चायुक्त रहे जगदीश्वर गोवर्धन ने कहा था कि प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ के पूर्वज 1873 में गिरमिटिया मजदूर के रूप में कोलकाता से जलमार्ग के रास्ते मॉरीशस गए थे। अब उनकी 5वीं पीढ़ी के व्यक्ति प्रवींद वहाँ के प्रधानमंत्री हैं।

बताया जाता है कि मॉरीशस के पीएम प्रविंद जुगनाथ के पूर्वज ‘अहीर’ जाति से थे। जुगनाथ ने अपने पूर्वजों से मिलने की इच्छा भी जाहिर की थी। इसके लिए उन्होंने पीएम नरेंद्र से भी आग्रह किया था। इसके बाद उनके पूर्वजों की तलाश शुरू की गई थी। लेकिन इसमें सफलता नहीं मिल पाई।

‘पाकिस्तानी होने के नाते लज्जित हूँ’: सऊदी-भारत में समझौतों से भड़का पाकिस्तान, ‘भीख’ की उम्मीद में बैठे मुल्क को क्राउन प्रिंस ने नहीं दिया भाव

जी-20 की बैठक के लिए भारत पहुँचे सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) भले ही एक दिन ज्यादा भारत में रुके हों, लेकिन इससे पाकिस्तानियों को मिर्ची लग गई है। भारत में रुके MBS ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक की और दोनों देशों के बीच कई अहम समझौतों को अंजाम दिया। भारत के साथ सऊदी अरब ने 100 बिलियन डॉलर के निवेश को लेकर भी बात की। लेकिन यही बात अब पाकिस्तान को अखर रही है।

दरअसल, पाकिस्तान लंबे समय से सऊदी अरब से मिलने वाली ‘भीख’ पर निर्भर रहता था। उसकी जब भी हालत खराब होती है, तो वो मुस्लिम देश होने के नाम पर सऊदी अरब के सामने कटोरा लेकर पहुँच जाता है। हाल ही में सऊदी अरब ने कहा था कि वो पाकिस्तान की मदद करेगा, लेकिन भारत में आकर उसने पाकिस्तान से ज्यादा अहमियत भारत को दी है। भारत के साथ रक्षा क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने के लिए सऊदी अरब से हामी भरी है, तो भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप के बीच इकोनॉमिक कॉरिडोर बनाने पर भी वो सहमत हुआ है, ऐसे में पाकिस्तान को लग रहा है कि सऊदी अरब उसकी मदद बंद कर देगा।

पाकिस्तान को उम्मीद थी कि सऊदी अरब पाकिस्तान में 25 अरब डॉलर का निवेश करेगा, और इन पैसों से वो अपने कर्ज की भरपाई करने की कोशिश करेगा। सोमवार (11 सितंबर, 2023) को ही पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवर-उल-हक काकर ने कहा है कि कि सऊदी अरब का निवेश खनन, कृषि और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में आएगा, और यह कर्ज में डूबे देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ाने के प्रयास का हिस्सा है। लेकिन, मोहम्मद बिन सलमान का भारत में रुकना पाकिस्तानियों के लिए मानो किसी बड़े सदमे से कम नहीं है।

वहीं, जी-20 के पहले ही दिन भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) की घोषणा से पाकिस्तानी नागरिकों में सरकार के खिलाफ आक्रोश पैदा हो गया है। कई लोगों ने इसे ‘आखिरी चेतावनी’ के बताते हुए सरकार से संभलने को कहा है।

पाकिस्तान आने वाला निवेश भारत चला गया क्या?

‘हिंदुस्तान टाइम्स‘ की खबर के मुताबिक, एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर वजाहत एस खान नाम के एक यूजर ने लिखा, “डीजी-आईएसआई का आधिकारिक बायो बताता है कि उन्हें पढ़ना पसंद है। शायद उन्हें इसे पढ़ना चाहिए, और फिर बॉस से पूछना चाहिए कि क्या सऊदी अरब से आने वाला 25 बिलियन डॉलर इस नए ‘सऊदी-भारतीय आर्थिक गलियारे’ (एसआईपीईसी) का हिस्सा बनने जा रहा है?”

‘पाकिस्तानी होने के नाते लज्जित हूँ’

एक अन्य यूजर ने पाकिस्तान के लिए इसे आखिरी चेतावनी बताया। और कहा कि पाकिस्तान को बचना है तो उसे संभलना पड़ेगा। एक यूजर ने लिखा, “एक पाकिस्तानी के रूप में, मैं आज शर्म की गहरी भावना महसूस किए बिना नहीं रह सकता। हमारा राष्ट्र बेहतर नेतृत्व, जवाबदेही और उज्जवल भविष्य का हकदार है। यह बदलाव का समय है और उन मूल्यों के प्रति नए सिरे से प्रतिबद्धता है जो वास्तव में हमारा प्रतिनिधित्व करते हैं।”

‘हमें अपना घर संभालने की जरूरत’

एक एक्स-यूजर ने लिखा, “अब समय आ गया है कि हम अपना घर व्यवस्थित करें और अपनी प्राथमिकताएँ ठीक करें। इच्छाधारी सोच और घटिया स्तर राजनीति हमें कहीं नहीं ले जाएगी। शायद हमारी सीमाओं का पुनर्मूल्यांकन और उन पर सवाल उठाने से वह बदलाव आ सकता है जिसकी हमारे देश को ज़रूरत है।”

बता दें कि इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEEC) एक प्रस्तावित व्यापार और निवेश गलियारा है जो भारत को मिडिल ईस्ट और यूरोप को जोड़ेगा। गलियारे को चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का मुकाबला करने का एक तरीका माना जाता है, जिसकी ऋण-जाल कूटनीति और पर्यावरणीय प्रभाव के लिए आलोचना की गई है। यह नए व्यापार और निवेश के अवसर पैदा करेगा, कनेक्टिविटी में सुधार करेगा और आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा।

ये आर्थिक गलियारा भारत की चीन पर निर्भरता को कम करने और क्षेत्र में अपने रणनीतिक स्थिति को बेहतर बनाने में भी मदद करेगा। भारत से सऊदी अरब-तुर्की होते हुए यूरोप तक सीधे माल की आवाजाही होगी, जो चीन के सिल्क रोड की अहमियत को कम कर देगा।

भारत को इस्लामी देशों के समूह में शामिल करने के लिए बेचैन थीं इंदिरा गाँधी: सिख राजदूत को हटा कर मुस्लिम तक को भेजा, लेकिन OIC ने पाकिस्तान को चुना

G20 शिखर सम्मेलन की सफल अध्यक्षता के बाद वैश्विक स्तर पर पर भारत की एक अलग ही छवि बनकर सामने आई है। दुनियाभर के दिग्गज नेता भारत और पीएम मोदी की तारीफ कर चुके हैं। यही नहीं, भारत को G7 में शामिल करने की चर्चा हो रही है। लेकिन, एक वक्त स्थिति ऐसी भी थी कि भारत इस्लामी देशों के संगठन में शामिल होना चाहता था।

दरअसल, साल 1969 में इस्लामिक देशों ने ‘ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक को-ऑपरेशन (OIC)’ नामक अपना एक संगठन बनाने का फैसला किया था। इसमें शामिल होने के लिए कई देशों में होड़ मची हुई थी। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस होड़ में भारत भी शामिल था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने औपचारिक तौर पर इस संगठन में शामिल होने के लिए आवेदन किया था। लेकिन, पाकिस्तान के विरोध के बाद भारत इस्लामिक देशों के संगठन का हिस्सा नहीं बन पाया था।

एक दौर वह था जब भारत इस्लामिक देशों के संगठन में शामिल होना चाहता था। वहीं प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत का एक दौर ऐसा भी आया जब OIC ने खुद भारत को ‘विशिष्ट अतिथि’ के रूप में आमंत्रित किया था। इसके बाद तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भारत के प्रतिनिधि के रूप में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) गई थीं।

यही नहीं, अब OIC में सबसे अधिक दबदबा रखने वाले सऊदी अरब के साथ प्रधानमंत्री वन-टू-वन मीटिंग कर रहे हैं। G20 के बाद सऊदी अरब के प्रिंस मोहम्मद बिल सलमान बिन अब्दुलअजीज अल साउद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई। इसमें दोनों देशों के बीच ग्रिड कनेक्टिविटी के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर हुआ है। इसके तहत समुद्र के नीचे बिजली ट्रांसमिशन लाइन डालकर भारत और सऊदी अरब के बीच पावर ग्रिड बनाया जाएगा।

क्या है OIC

साल 1969 में मुस्लिम देशों ने अपना स्वयं का अंतर्राष्ट्रीय संगठन बनाने का फैसला लिया था। इस संगठन को लेकर कहा गया था कि यह मुस्लिम देशों की आवाज उठाएगा। इसे ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कॉन्फ्रेंस नाम दिया गया था। हालाँकि, बाद में साल 2011 में इसका नाम बदलकर ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक को-ऑपरेशन यानी इस्लामिक सहयोग संगठन रख दिया गया है। यह संगठन 57 इस्लामिक देशों का संगठन है। इस्लाम के खिलाफ होने वाली किसी भी छोटी सी छोटी गतिविधि के खिलाफ आवाज उठाता है।

क्या हुआ था भारत के साथ

वापस साल 1969 में लौटें तो इस्लामिक देशों के संगठन बनने की पहली बैठक मोरक्को में हुई थी। इसलिए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने मोरक्को में भारत के राजदूत गुरबचन सिंह को बातचीत करने का नेतृत्व सौंपा था। पूर्व विदेश सचिव जेएन दीक्षित लिखते हैं कि जैसे ही इंदिरा गाँधी को एहसास हुआ कि इस्लामी देशों की बैठक में बातचीत करने में सिख को भेजना एक गलती है, उन्होंने अपनी गलती सुधारते हुए फकरूद्दीन अली अहमद के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल मोरक्को भेज दिया। लेकिन, यह प्रतिनिधिमंडल मोरक्को नहीं पहुँच पाया।

वास्तव में इंदिरा गाँधी खुद इस्लामिक देशों के संगठन में शामिल होने के लिए खुद को धर्मनिरपेक्ष दिखाना चाहती थीं। इसलिए उन्होंने एक सिख को हटाकर मुस्लिम को भेजने का फैसला किया था। यदि OIC चार्टर की शुरुआती पंक्तियों को देखें तो पता चलता है कि इंदिरा गाँधी के नेतृत्व वाला भारत इस्लामिक देशों के साथ ‘उठने-बैठने’ को कितना अधिक बेताब था। दरअसल, चार्टर की शुरुआत में ही लिखा था, “अल्लाह के नाम पर, सबसे दयालु हम इस्लामी सहयोग संगठन के सदस्य देश हैं। एकता और भाईचारे के इस्लामी मूल्यों के हिसाब से चलने और दुनिया में इस्लाम की भूमिका को पुनर्जीवित करने हेतु प्रयास करने के लिए दृढ़ निश्चय करते हैं।”

अब सवाल यह है कि जब भारत OIC का सदस्य बन इस्लाम का काम करने को बेताब था फिर सदस्य कैसे नहीं बन पाया। दरअसल, तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति याह्या खान को जब पता चला कि भारत OIC में शामिल होने जा रहा है, तो वह भड़क गए और बीमारी का बहाना बनाकर मोरक्को से जाने की धमकी दे दी। पाकिस्तान की धमकी के बाद इस्लामिक देशों के पास एक ही विकल्प था – या तो भारत या फिर पाकिस्तान।

फिर क्या था, इस्लामिक देशों ने इस्लाम के मूल्यों को ध्यान में रखते हुए पाकिस्तान को OIC का सदस्य बना दिया। बात यहीं तक खत्म हो जाती तो शायद अच्छा होता। लेकिन, इस्लामिक देशों ने पाकिस्तान से माफी माँगी और फिर हर बात का दोष भारत पर मढ़ दिया। खासतौर से भारतीय राजदूत पर जो कि एक सिख थे। यही नहीं, भारत को चालाक, धोखेबाज कहते हुए प्रतिनिधिमंडल को बैठक में जाने से भी रोक दिया।

G20 के बाद ‘रजनी डिप्लोमेसी’, ‘टकलू बॉस’ बन सुपरस्टार से मिले मलेशिया के PM: ‘जेलर’ की ₹650 करोड़ कमाई के बाद रजनीकांत की 171वीं फिल्म की घोषणा

सुपरस्टार रजनीकांत ने कुआलालम्पुर में मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से मुलाकात की है। दक्षिणी कुआलालम्पुर के पुत्रजया में स्थित ‘Bangunan Perdana Putra’ इमारत स्थित प्रधानमंत्री दफ्तर में ये बैठक हुई। अनवर इब्राहिम ने लोगों की कठिनाइयों को दूर करने के लिए चलाई जा रही योजनाओं के लिए सम्मान देने पर सुपरस्टार रजनीकांत का धन्यवाद किया। अनवर इब्राहिम ने कहा कि उन्होंने उन सामाजिक मुद्दों को लेकर बात की, जिसके लिए वो लड़ाई कर रहे हैं।

मलेशिया के प्रधानमंत्री का कहना है कि सुपरस्टार रजनीकांत की अगली फिल्मों में इन मुद्दों को लेकर चीजें दिखाई जाएँगी। मलेशियन मीडिया संस्थान ‘मलय मेल’ ने अपनी खबर में लिखा कि फैंस द्वारा ‘सुपरस्टार’ कहे जाने वाले रजनीकांत को ‘मुथु’ (1995), पदैयप्पा (1999), ‘शिवाजी द बॉस’ (2007) और ‘एंथिरन द रोबोट’ (2010) जैसी फिल्मों के लिए जाना जाता है। मलेशिया के पीएम और रजनीकांत ने एक-दूसरे को गले लगाया, साथ ही हाथ मिला कर अभिवादन किया।

इस दौरान इब्राहिम अनवर ने ‘शिवाजी: द बॉस’ फिल्म में रजनीकांत का स्टाइल (‘टकलू बॉस’ वाला दृश्य) कॉपी भी किया। इसके बाद दोनों हँसने लगे। उन्होंने कहा कि रजनीकांत एशिया और वैश्विक सिनेमा के मंच पर एक जाना-पहचाना नाम है। उन्होंने प्रार्थना की कि रजनीकांत सामाजिक और फिल्मों के क्षेत्र में इसी प्रकार अग्रणी रहें। बता दें कि मलेशिया में 20 लाख से भी अधिक तमिल लोग रहते हैं, जो वहाँ की संख्या का 6.7% है। हाल ही में नई दिल्ली में संपन्न हुई G20 के भव्य आयोजन के बाद रजनीकांत और मलेशियन पीएम की ये मुलाकात चर्चा का विषय बनी हुई है।

हाल ही में रिलीज हुई सुपरस्टार रजनीकांत की फिल्म ‘जेलर’ ने दुनिया भर में 650 करोड़ रुपए का कारोबार किया है। ‘सन पिक्चर्स’ के अध्यक्ष कलानिधि मारन ने इसके बाद उनसे मिल कर उन्हें चेक सौंपा और एक कार भी गिफ्ट किया था। सोमवार (11 सितंबर, 2023) को रजनीकांत की 171वीं फिल्म (Thalaivar 171) की भी घोषणा हुई है, जिसका निर्देशक लोकेश कनगराज करेंगे। वो ‘कैथी’, मास्टर और विक्रम जैसी फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। इस फिल्म का निर्माण भी ‘सन पिक्चर्स’ करेगी।

क्या है भारत, अरब और यूरोप वाला इकोनॉमिक कॉरिडोर: जानिए कैसे चीन के BRI को लगेगा झटका, 4000 km के सड़क-रेल-शिपिंग नेटवर्क से बढ़ेगा कारोबार

भारत वैश्विक व्यवस्था में बेहद अहम भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भारत न सिर्फ अपने पारंपरिक प्रतिद्वंदियों से आगे निकलने की होड़ कर रहा है, बल्कि वैश्विक शक्तियों के बीच संतुलन बनाकर खुद के बनाए रास्ते पर चल रहा है। वो नए समझौते भी कर रहा है, तो नए साझेदार भी बना रहा है। पुराने साथियों को छोड़ भी नहीं रहा, और नए साथियों को नाराज भी नहीं कर रहा है। भारत अभी जी-20 का अध्यक्ष देश है। जी-20 के शिखर सम्मेलन के दौरान भारत ने इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रोजेक्ट की घोषणा की, जिसकी वजह से चीन-पाकिस्तान जैसे पारंपरिक विरोधियों की नींद उड़ गई है।

जी हाँ, G-20 सम्मेलन के पहले दिन भारत ने इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर का ऐलान किया। इस प्रोजेक्ट में मध्य पूर्व और यूरोपीय देशों के अलावा अमेरिका भी अहम साझीदार है। इस प्रोजेक्ट को चीन के महत्वाकांक्षी BRI प्रोजेक्ट का न सिर्फ जवाब माना जा रहा है, बल्कि ये भारत की कूटनीतिक ताकत का सबूत भी पेश कर रहा है।

एक समय तो ये कहा जा रहा था कि भारत जी-20 के मंच पर शायद ही कोई आम सहमति बना पाए, लेकिन भारत ने न सिर्फ ऐसा कर दिखाया, बल्कि जी-20 से दूर रहे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को तगड़ा झटका भी दे दिया। इसी जी-20 के मंच से भारत की अगुवाई में जिस इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर का ऐलान हुआ है, उसके पूरे होने के बाद चीन को ऐसा झटका लगेगा, जिससे वो शायद ही कभी उभर पाए।

अब सबसे पहले ये जानना जरूरी है कि ये इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर आखिर है क्या और ये किस तरह से चीन की वैश्विक ताकत बनने की महत्वाकांक्षा को तहस-नहस करने में सक्षम है।

इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर

इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEEC) एक प्रस्तावित व्यापार और निवेश गलियारा है जो भारत को मिडिल ईस्ट और यूरोप को जोड़ेगा। गलियारे को चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का मुकाबला करने का एक तरीका माना जाता है, जिसकी ऋण-जाल कूटनीति और पर्यावरणीय प्रभाव के लिए आलोचना की गई है। यह नए व्यापार और निवेश के अवसर पैदा करेगा, कनेक्टिविटी में सुधार करेगा और आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा।

गलियारा भारत की चीन पर निर्भरता को कम करने और क्षेत्र में अपने रणनीतिक स्थिति को बेहतर बनाने में भी मदद करेगा। भारत से सऊदी अरब-तुर्की होते हुए यूरोप तक सीधे माल की आवाजाही होगी, जो चीन के सिल्क रोड की अहमियत को कम कर देगा।

चीन के बीआरआई प्रोजेक्ट के असर को खत्म कर देगा इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर

1- इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर एशिया और यूरोप के बीच व्यापार और निवेश के लिए एक वैकल्पिक मार्ग प्रदान करेगा।

2- इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर चीनी प्रभाव से पूरी तरह से मुक्त होगा, इसके सदस्य देशों पर चीनी कर्जजाल में फँसने का कोई जोखिम नहीं होगा।

3- इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर बीआरआई की तुलना में अधिक पर्यावरण के अनुकूल होगा, जिसकी पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव के लिए आलोचना की जाती है।

4- इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर से क्षेत्रीय सहयोग और एकीकरण को बढ़ावा मिलेगा, इससे तनाव और संघर्षों को कम करने में मदद मिलेगी।

5- इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर एक बड़ा उपक्रम है। यदि ये सफल रहा, तो यह एशिया और यूरोप में व्यापार और निवेश के भविष्य को आकार देने में मदद कर सकता है, और यह चीन की बीआरआई को विफल करने में मदद कर सकता है।

चीनी कर्ज के मकड़जाल में नहीं फँसेंगे सदस्य देश

इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर का सबसे बड़ा फायदा ये है कि इस प्रोजेक्ट में चीनी प्रोजेक्ट्स की तरह सरकारी पैसे नहीं लगेंगे और न ही किसी सरकार पर चीन जैसा कोई कर्ज होगा। क्योंकि इस पूरे प्रोजेक्ट की फंडिंग ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इन्वेस्टमेंट (पीजीआईआई) करेगा। पूरे 600 अरब डॉलर का ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इन्वेस्टमेंट (पीजीआईआई) जी-7 (पहले जी-8) देशों का फंड है, जिसका चीन सदस्य नहीं है।

हालाँकि, भारत भी इसका सदस्य नहीं है, लेकिन पर्यवेक्षक की हैसियत से भारत इसमें लगातार शामिल होता रहा है। जी-7 की पिछली बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए थे, वहीं से जी-20 को जोड़ते हुए भारत से यूरोप के बीच इस कॉरिडोर को बनाने का रास्ता साफ हुआ। पहले इटली भी चीन के BRI का हिस्सा था, लेकिन अब इटली भी इससे बाहर निकल रहा है।

भारत को यूरोप से कैसे जोड़ेगा इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर?

भारत के पश्चिमी तटीय क्षेत्र से सऊदी अरब और आगे तुर्की से होते हुए फ्रांस, इटली जैसे यूरोपीय देशों को ये कॉरिडोर जोड़ेगा। भारत और सऊदी अरब के बीच जल मार्ग से सामान जाएगा, इसके बाद सऊदी अरब से सड़क और रेल मार्ग से सामान आगे बढ़ेगा। भारत और सऊदी अरब के बीच एक प्रस्तावित सड़क मार्ग भारत के पश्चिमी तट से शुरू होगा और सऊदी अरब के पूर्वी तट पर समाप्त होगा। यह मार्ग भारत को यूरोप के बाजारों तक पहुंच प्रदान करेगा।

यह मार्ग लगभग 4000 किलोमीटर लंबा होगा और इसमें लगभग 10 साल लगेंगे। इस मार्ग को बनाने की अनुमानित लागत 10 अरब डॉलर है। ये पहला पार्ट होगा, तो दूसरे पार्ट में खाड़ी क्षेत्र को यूरोप से जोड़ा जाएगा। इस कॉरिडोर में रेलवे, शिपिंग नेटवर्क और सड़क परिवहन मार्ग शामिल होंगे।

इस प्रोजेक्ट से भारत, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जर्मनी, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और यूरोपीय संघ को अंतरराष्ट्रीय व्यापार में पहले की तुलना में काफी ज्यादा फायदा होगा। समझौते के तहत इस कॉरिडोर में रेल और बंदरगाहों से जुड़ा नेटवर्क का निर्माण भी किया जाएगा, जिसमें सातों देश ‘पार्टनरशिप फॉर ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट’ के तहत इन्वेस्टमेंट करेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्या कुछ कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर की लॉन्चिंग के समय कहा, “भारत कनेक्टिविटी को क्षेत्रीय सीमाओं में नहीं मापता। सभी क्षेत्रों के साथ कनेक्टिविटी बढ़ाना भारत की मुख्य प्राथमिकता रहा है। हमारा मानना है कि कनेक्टिविटी विभिन्न देशों के बीच आपसी व्यापार ही नहीं, आपसी विश्वास भी बढ़ाने का स्रोत है।” उन्होंने कहा, “आज जब हम कनेक्टिविटी का इतना बड़ा इनिशिएटिव ले रहे हैं, तब हम आने वाली पीढ़ियों के सपनों के विस्तार के बीज बो रहे हैं।”

बौखलाया चीन खंबा नोचे

इस बात से चीन को इतनी मिर्ची लगी है कि वो बौखला गया है। इस प्रोजेक्ट पर तो चीन ने चुप्पी साथ ली, लेकिन जी-20 की कथित थिंक-टैंक्स के माध्यम से भारत को धमकाने की कोशिश कर रही है। चाइना इंस्टीट्यूट ऑफ कंटेम्परेरी इंटरनेशनल रिलेशंस नाम के एक थिंक-टैंक ने अपने लेख में कहा कि भारत ने “जी20 के मंच का इस्तेमाल अपने स्वयं के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए किया है, जो वैश्विक मुद्दों पर सहयोग की बजाय विभाजन को बढ़ावा देने के लिए है।”

थिंक टैंक ने कहा कि चीन विरोधी मुद्दों को उठाकर भारत ने ‘जी20 की एकता को तोड़ा और चीन के हितों को नुकसान पहुँचाया।’ बता दें कि जी-20 के शिखर सम्मेलन के पहले ही दिन भारत ने इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर की घोषणा की थी। अब चीन सीधे-सीधे इस पर बोलता, तो खुद ही फंस जाता। ऐसे में उसने जी-20 के माध्यम से इशारों -इशारों में कहा कि भारत ने जी-20 का इस्तेमाल चीन के खिलाफ किया।

नाम – सद्दाम हुसैन, टार्गेट – हिन्दू लड़कियाँ… फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बना कर फँसाता था, धर्मांतरण करा कर बेच देता था: अश्लील वीडियो से करता था ब्लैकमेल

झारखंड की गिरडीह पुलिस ने सोशल मीडिया पर महिलाओं को प्रेम जाल में फँसा कर उनका शोषण करने वाले सद्दाम हुसैन को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के दौरान सद्दाम एक महिला को ट्रेन में बिठा कर उसकी मर्जी के खिलाफ कोलकाता ले जा रहा था। पीड़िता को सही सलामत मुक्त करवा लिया गया है। रविवार (10 सितंबर, 2023) को गिरफ्तार आरोपित से पूछताछ की जा रही है। अब तक सद्दाम द्वारा कई महिलाओं की जिंदगी खराब किए जाने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि सद्दाम लड़कियों को धर्मांतरण पर मजबूर कर के उन्हें अलग-अलग शहरों में बेच देता था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सद्दाम गिरडीह के गाँवा थानाक्षेत्र के बादीडीह का निवासी है। निमियाघाट इलाके की एक पीड़िता 9 सितंबर, 2023 (शनिवार) को गिरडीह के साइबर थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में पीड़िता ने बताया था कि शादीशुदा और बाल-बच्चेदार सद्दाम हुसैन सोशल मीडिया पर खुद को कुँवारा बताता है। वह फर्जी प्रोफ़ाइल बनाता है और लड़कियों को अपने चंगुल में फँसाने की फिराक में रहता है। इसी जाल में पीड़िता ने खुद को फँसा बताया। वह सद्दाम की बातों में आ गई। सद्दाम ने पीड़िता को होटल में मिलने के लिए बुलाया था और वो विश्वास कर के चली आई।

आरोप है कि यहाँ सद्दाम ने पहले पीड़िता की माँग सिन्दूर से जबरन भर दी। बाद में उसने महिला से रेप किया और इस दौरान आपत्तिजनक फोटो और वीडियो बना लिए। सद्दाम इन्हीं तस्वीरों के सहारे लड़की को ब्लैकमेल करने लगा। कुछ दिनों बाद वह पीड़िता को अपने साथ कोलकाता ले जाने की जिद करने लगा। जब महिला ने इसका विरोध किया तो न सिर्फ उसके आपत्तिजनक फोटो वीडियो वायरल करने बल्कि उसके पूरे परिवार को खत्म करने की भी धमकी दी गई। लड़की के मुताबिक, सद्दाम की इन धमकियों में पीड़िता के परिवार की अन्य महिलाओं से भी बलात्कार करना भी शामिल था।

सद्दाम की धमकियों से तंग आ कर और कोलकाता जाने पर खुद को मजबूर किए जाते हुए देख पीड़िता ने इसकी शिकायत गिरडीह के साइबर थाने में की। साथ ही मामले की सूचना गिरडीह के पुलिस अधीक्षक दीपक शर्मा को भी दी गई। पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए महिला की तलाश शुरू की। आखिरकार उसे पारसनाथ रेलवे स्टेशन ने सकुशल बरामद कर लिया गया। पीड़िता के साथ मौजूद सद्दाम को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस की पूछताछ में सद्दाम का लम्बा आपराधिक इतिहास निकल कर सामने आया है। वह पहले भी कई लड़कियों को अपना शिकार बना चुका है। दावा किया जा रहा है कि आरोपित लड़कियों को पहले धर्म-परिवर्तन पर मजबूर करता था और बाद में उन्हें अलग-अलग शहरों में बेच दिया करता था।

मिली जानकारी के मुताबिक, सद्दाम हुसैन पहले भी पीड़िता की तरह कई शादियाँ कर चुका है। उस पर सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत पहले भी केस दर्ज हैं। वह पहले भी जेल जा चुका है। हालाँकि बावजूद उसने अपराध करना नहीं छोड़ा। पुलिस अधीक्षक गिरडीह दीपक कुमार शर्मा ने सद्दाम या उनके जैसे किसी अन्य द्वारा किसी भी रूप में प्रताड़ित महिलाओं को पुलिस से सम्पर्क कर के अपनी समस्या बताने की सलाह दी है। साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया के प्रयोग के दौरान भी सावधानी बरतने की अपील की है।

केजरीवाल सरकार ने पटाखों पर लगाया प्रतिबंध, इस बार भी सूनी रहेगी दिल्ली वालों की दिवाली: बोले AAP के मंत्री – दीया जलाइए

दिल्ली वालों की दिवाली इस बार भी सूनी रहने वाली है। केजरीवाल सरकार ने सोमवार (11 सितंबर, 2023) को आदेश जारी कर पटाखों के बनाने, भण्डारण और बिक्री पर रोक लगा दी है। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने इसकी जानकारी देते हुए लोगों से दीये जलाकर दिवाली मनाने की अपील की।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा, “दिल्ली में खासतौर से दिवाली के अवसर पटाखे जलाने से जो प्रदूषण पैदा होता है, उसे रोकने के लिए सीएम केजरीवाल ने सभी तरह के पटाखों के निर्माण, भंडारण, बिक्री, ऑनलाइन डिलीवरी और जलाने पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया है। पुलिस को दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से यह निर्देश जारी करने के लिए कहा गया है कि किसी भी तरह का लाइसेंस जारी न किया जाए।”

पत्रकारों ने गोपाल राय से हिंदू त्योहारों पर ही रोक लगाने को लेकर सवाल किया। इस पर उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि जो बदली हुई परिस्थितियाँ हैं उसमें हमें धूमधाम से श्रद्धा के साथ त्योहार मनाना जरूरी है। उतना ही सब लोगों की जिंदगी बचाना जरूरी है। इसलिए पिछले 2 साल से यह निर्णय लिया जा रहा है। दिल्ली के लोगों द्वारा सहयोग भी मिल रहा है। हमारी लोगों से अपील है कि दीये जलाकर धूमधाम से हम दिवाली मनाएँ।”

उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली में सर्दी के मौसम में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। जनवरी से लेकर अगस्त के महीने तक दिल्ली का औसत AQI काफी कम रहा है। 10 सितंबर को दिल्ली में एक्यूआई 45 था। लेकिन धीरे-धीरे अक्टूबर के महीने में सर्दी बढ़ने के साथ दिल्ली के वातावरण में नमी आती है और यहाँ के पार्टिकल मैटर जमा होने शुरू होते हैं। इसमें दिल्ली के बाहर और दिल्ली के अंदर का प्रदूषण यहाँ की हवा को जहरीला बना देते हैं।

गोपाल राय ने दिल्ली के प्रदूषण को नियंत्रित करने को लेकर प्लानिंग की जानकारी देते हुए कहा कि प्रदूषण रोकने के लिए दिल्ली सरकार ने एक्शन प्लान बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत 12 सितंबर को दिल्ली सचिवालय में एक्सपर्ट्स के साथ मीटिंग होगी। 14 सितंबर को ऑल डिपार्टमेंट्स के अधिकारियों की बैठक होगी। इसमें विंटर एक्शन प्लान तैयार किया जाएगा।

LLB छात्रा से रेप की कोशिश-दुपट्टे से गला घोंटने का प्रयास, विरोध करने पर भाई को चाकू मारा: भीड़ ने सुल्तान को बाँधकर पीटा

उत्तर प्रदेश के बागपत में एलएलबी की एक छात्रा से रेप की कोशिश की गई। लड़की को बचाने आए उसके चचेरे भाई को चाकू मार दिया गया। इसके बाद नाराज लोगों ने आरोपित सुल्तान की बाँध कर पिटाई की। पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर ली है। जिस होटल में रविवार (10 सितंबर 2023) को यह घटना हुई, वहाँ के स्टाफ पर भी बिना पहचान पत्र आरोपित को कमरा देने का आरोप है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला बागपत कोतवाली थाना क्षेत्र का है। यहाँ सिसाना गाँव की रहने वाली LLB की एक छात्रा रविवार को कुछ सामान खरीदने बागपत बाजार गई थी। घर लौटने के दौरान पीड़िता बाजार के एक चौराहे पर सवारी वाहन का इंतजार कर रही थी। तभी लड़की के पड़ोसी गाँव का निवासी एक मुस्लिम युवक सुल्तान वहाँ पहुँचा। आरोप है कि उसने पीड़िता को लिफ्ट देने के बहाने अपनी कार में बिठाया और फिर घर के बजाय स्टारलाइट नाम के गेस्ट हाउस में ले गया। यहाँ आरोपित ने छात्रा से रेप का प्रयास किया।

बताया जा रहा है कि छात्रा के विरोध के चलते सुल्तान अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाया। इस बात से नाराज हो कर उसने छात्रा की पिटाई की। यह बात किसी ने पीड़िता के चचेरे भाई को बता दी। वह होटल पहुँचा और अपनी बहन को वहाँ से साथ ले जाने का प्रयास करने लगा। इस दौरान सुल्तान ने पीड़िता के चचेरे भाई पर चाकू से वार किया। चाकू लड़की के भाई के सिर में लगा और वो घायल हो गया। आरोपित ने लड़की का भी गला उसके दुपट्टे से घोंटने का प्रयास किया।

घटना की जानकारी मिलते ही लड़की के परिजन मौके पर पहुँचे। भीड़ आरोपित सुल्तान को बंधक बना कर ले गई। आरोप है कि आरोपित को गोशाला ले जाया गया और बाँधकर पीटा गया। फ़िलहाल उसका इलाज दिल्ली में चल रहा है। मामला 2 समुदायों का होने की वजह से आसपास में तनाव फ़ैल गया। पुलिस ने दोनों पक्षों की तहरीर पर केस दर्ज कर लिया है। मामले की जाँच की जा रही है। बिना पहचान पत्र के कमरा देने वाले होटल पर भी कार्रवाई की जा सकती है।

बागपत पुलिस के मुताबिक सुल्तान की पिटाई करने के आरोप में 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इन आरोपितों के नाम तरुण सिंह, अरुण सिंह, जॉनी सिंह और सचिन सिंह हैं। इन सभी पर IPC की धारा 307, 364, 342, 504 के तहत कार्रवाई की गई है। सुल्तान को साथ ले जाने में प्रयोग वैगन आर कार को भी जब्त कर लिया गया है। साथ ही वो हॉकी स्टिक भी बरामद कर ली गई है, जिससे कथित तौर पर सुल्तान की पिटाई की गई थी।

‘भारत की 1 इंच जमीन पर भी चीन का कब्ज़ा नहीं’: लद्दाख के LG ने राहुल गाँधी के दावों पर दिया करारा जवाब, बोले ब्रिगेडियर मिश्रा – हमारे जवान पूरी तरह तैयार

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने दावा किया था कि चीन ने भारत की जमीन कब्जा ली है, जिसके बाद लद्दाख के राज्यपाल ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) BD मिश्रा ने उन्हें कराया जवाब दिया है। राहुल गाँधी के बयान पर प्रतिक्रिया माँगे जाने पर उप-राज्यपाल ने कहा कि वो किसी के बयान पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे, लेकिन लेकिन वो तथ्य बताएँगे जो कि उन्होंने खुद अपनी आँखों से देखा है। उन्होंने साफ़-साफ़ कहा कि चीन ने भारत की 1 वर्ग इंच की जमीन पर भी कब्ज़ा नहीं किया है।

ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) बीडी मिश्रा ने कहा कि सन् 1964 में क्या हुआ वो उस समय की बात थी, लेकिन आज के समय में भारत अंतिम इंच तक अपनी जमीन को नियंत्रण में रखे हुए है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वो नेताओं के बयान पर प्रतिक्रिया नहीं देंगे, जो तथ्य है बस वही बता रहे हैं। LG ने कहा कि हमारे सुरक्षा बल किसी भी प्रकार की घटना से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर कोई कुछ भी गड़बड़ी करता है तो उस पर कड़ा जवाब दिया जाएगा।

बता दें कि 25 अगस्त, 2023 को राहुल गाँधी कारगिल पहुँचे थे। वहाँ एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि ये एक स्ट्रैटेजिक लोकेशन है, ऐसे में एक चीज स्पष्ट है कि चीन ने भारत की जमीन कब्जाई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी झूठ बोलने का आरोप लगा दिया था। उन्होंने कहा था कि ये जमीन का मसला है और चीन हमारी और जमीन ले लेना चाहता है। लद्दाख में राहुल गाँधी ने बाइक भी चलाई थी। अब LG ने उनके इन आरोपों को नकार दिया है।

इतना ही नहीं, मुंबई में हुई विपक्षी दलों के गठबंधन I.N.D.I.A. की बैठक के बाद हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी राहुल गाँधी ने अपने इस आरोप को दोहराया था कि चीन ने भारत की जमीन कब्जाई है। साथ ही उन्होंने भारत सरकार पर चीन के साथ इसके लिए समझौता करने तक के आरोप लगा दिए थे। उन्होंने केंद्र सरकार पर लद्दाख की जनता से धोखा का आरोप मढ़ा था। भाजपा ने भी उन पर हमला बोलते हुए पूछा था कि वो चीन के प्रवक्ता की तरह व्यवहार क्यों कर रहे हैं?