नई दिल्ली में G-20 शिखर सम्मेलन का आयोजन जारी है। इसमें भाग लेने के लिए विश्व के 25 से अधिक शक्तिशाली देशों के राष्ट्राध्यक्ष या उनके प्रतिनिधि दिल्ली पहुँच चुके हैं। इस बीच शुक्रवार (8 सितंबर 2023) को अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने दिल्ली पहुँचते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों ने कई मुद्दों पर चर्चा की।
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन के शुक्रवार, 8 सितंबर 2023 को दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुँचने पर केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री जनरल (सेवानिवृत्त) वीके सिंह ने स्वागत किया। शाम के लगभग 7 बजे दिल्ली पहुँचने की साथ ही बाइडेन सीधे प्रधानमंत्री से मुलाकात के लिए उनके आवास पर पहुँच गए।
राष्ट्रपति के रूप में अपनी पहली भारत यात्रा पर जो बाइडेन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया। इसके साथ ही उन्होंने भारत द्वारा की जा रही जी-20 की अध्यक्षता की सराहना भी की और कहा कि जी-20 की ये बैठक सतत विकास और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। बैठक के बाद राष्ट्रपति बाइडेन और पीएम मोदी ने संयुक्त रूप से बयान दिया।
Great seeing you, Mr. Prime Minister.
Today, and throughout the G20, we'll affirm that the United States-India partnership is stronger, closer, and more dynamic than any time in history. pic.twitter.com/bEW2tPrNXr
दोनों पक्षों ने अपने संयुक्त बयान में कहा, “इस विचार को साझा करना जारी रखते हुए कि वैश्विक शासन अधिक समावेशी और प्रतिनिधि होना चाहिए, राष्ट्रपति बाइडेन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता पर अपने समर्थन की पुष्टि की।” बता दें कि साल 2028-29 में UNSC में भारत फिर से अस्थायी सदस्य बनेगा।
दोनों नेताओं ने स्वतंत्र, खुले, समावेशी और लचीले इंडो-पैसिफिक को बढ़ावा देने में QUAD के महत्व की पुष्टि की। बता दें कि भारत 2024 में अगले क्वाड लीडर्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। इसके साथ ही भारत ने व्यापार कनेक्टिविटी और समुद्री परिवहन पर इंडो-पैसिफिक ओसन इनिसिएटिव (IPOI) का सह-नेतृत्व करने के अमेरिकी फैसले का स्वागत किया।
दोनों नेताओं ने अपनी साझेदारी को मजबूत करने में प्रौद्योगिकी के महत्व पर प्रकाश डाला और महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकी (आईसीईटी) पर भारत-अमेरिका पहल की सराहना की। सितंबर 2023 में iCET की मध्यावधि समीक्षा की योजना बनाई गई है।
दोनों नेताओं ने रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों की भागीदारी को और मजबूत करने का निर्णय लिया। भारत-अमेरिका प्रमुख रक्षा साझेदारी में AI और अंतरिक्ष सहित उभरते डोमेन में विस्तार देने पर सहमति व्यक्त की गई। यह सहयोग विनिर्माण क्षेत्र तक बढ़ाने की बात कही गई, जिसमें जीई एयरोस्पेस और हिंदुस्तान एयरोनॉटिकल लिमिटेड (एचएएल) एक ऐतिहासिक सह-उत्पादन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पहल का नेतृत्व कर रहे हैं।
दोनों देशों के बीच सहयोग विशेष रूप से अगली पीढ़ी के छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर प्रौद्योगिकियों के विकास पर केंद्रित है। अमेरिका ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में भारत को शामिल करने के लिए समर्थन व्यक्त किया और भारत की स्थिति को आगे बढ़ाने के लिए इस परिप्रेक्ष्य को साझा करने वाले भागीदारों के साथ निरंतर प्रयास करने का वादा किया।
नवीकरणीय ऊर्जा पर नज़र रखते हुए, दोनों देशों ने अगस्त 2023 में भारत-अमेरिका नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी एक्शन प्लेटफ़ॉर्म (RE-TAP) की शुरुआत की। दोनों देशों ने अपने संयुक्त बयान में कहा, “इस मंच का उद्देश्य लैब-टू-लैब सहयोग और पायलट नवीन प्रौद्योगिकियों को सुविधाजनक बनाना, नवीकरणीय ऊर्जा और सहायक प्रौद्योगिकियों में नीति और योजना प्रगति को बढ़ावा देना है।”
रक्षा क्षेत्र में अभिनव सहयोग के लिए दोनों नेताओं ने India-U.S. Defence Acceleration Ecosystem (INDUS-X) की सराहना की। इसके अलावा, नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए दोनों नेताओं ने मिलकर काम करने की घोषणा की।
बताते चलें कि शिखर सम्मेलन में उपस्थित लोगों की एक प्रभावशाली सूची में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीस, जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, जापानी प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला डी सिल्वा शामिल हैं।
नई दिल्ली में आयोजित G-20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए दुनिया भर के नेता भारत पहुँच रहे हैं। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने दिल्ली पहुँचकर कहा कि वह पीएम नरेंद्र मोदी का बहुत सम्मान करते हैं। उन्होंने खुद को गौरवान्वित हिंदू बताया और भारत की आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए कहा कि भारत और ब्रिटेन मिलकर खालिस्तान को जड़ से खत्म कर सकते हैं।
शुक्रवार (8 सितंबर 2023) को दिल्ली पहुँचने के बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने ANI से बात करते हुए कहा, “मेरा यहाँ जिस गर्मजोशी से स्वागत हुआ, उसके लिए धन्यवाद। मेरे लिए यहाँ आना शानदार अनुभव है। खासतौर से अक्षिता (पत्नी) के साथ आना व्यक्तिगत रूप से खास है। अब तक की अपनी भारत यात्रा के कुछ घण्टों का भरपूर आनंद लिया है।”
जब उनसे G-20 के जरिए रूस-यूक्रेन युद्ध के समाधान को लेकर पूछा गया तो पीएम सुनक ने कहा, “मुझे लगता है कि भारत के नेतृत्व में हम G-20 में कई चीजों पर चर्चा करेंगे। विश्वास है कि कई मुद्दों पर हम बहुत सही स्थिति में पहुँचेंगे। जी-20 की अध्यक्षता सही समय और सही देश के हाथ में है। यह भारत के लिए बड़ी सफलता है।”
भारत से जुड़ाव को लेकर ऋषि सुनक ने कहा, “मेरी पत्नी बेंगलुरु से है। हमारी शादी बेंगलुरु में हुई। हम एक साथ बहुत सारा समय बिताते थे। यहाँ बहुत सारे हमारे पसंदीदा रेस्टोरेंट हैं। यह एक ऐसा देश है, जहाँ से मेरा परिवार है। मैं इस देश से बहुत प्यार करता हूँ। वैश्विक मंच पर भारत की उपलब्धियों को देखकर मुझे बहुत गर्व होता है।”
प्रधानमंत्री मोदी से अपने संबंधों पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी को लेकर मन में बहुत अधिक सम्मान है। मेरे प्रति उनका व्यवहार भी अच्छा रहा है।” हिंदू धर्म से अपने जुड़ाव को लेकर सुनक ने कहा, “मुझे गर्व है कि मैं हिंदू हूँ। मेरी परवरिश भी इस तरह ही हुई है।”
खालिस्तान की समस्या को लेकर उन्होंने कहा, “ब्रिटेन में किसी भी प्रकार के उग्रवाद या हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। इसलिए हम खालिस्तानियों से निपटने के लिए भारत सरकार के साथ काम कर रहे हैं। हमारे पास खुफिया जानकारी शेयर करने वाली एजेंसियाँ हैं। हम साथ मिलकर इस हिंसक उग्रवाद को जड़ से खत्म कर सकते हैं। खालिस्तानी जो कर रहे हैं, वह सही नहीं है। मैं इसे बर्दाश्त नहीं करूँगा।”
पीएम सुनक ने कहा कि जी-20 एक बड़ी सफलता साबित होगा और इसे सफल बनाने के लिए वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हर तरह से साथ देंगे। दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते को लेकर कहा, “मैं और मोदी जी मिलकर भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार समझौते करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं, क्योंकि हम दोनों सोचते हैं कि यह दोनों देशों के लिए अच्छा होगा।”
अपनी विवादित टिप्पणियों के लिए बदनाम ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फंड (एआईयूडीएफ) के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल एक बार फिर से सुर्खियों में हैं। ऐसे समय में जब हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली असम सरकार राज्य में बहुविवाह को गैरकानूनी घोषित करने पर विचार कर रही है, ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के अध्यक्ष बदरुद्दीन अजमल ने दावा किया है कि मुस्लिम आमतौर पर एक विवाह में विश्वास करते हैं और हिंदू ही बहुविवाह करते हैं। .
बदरुद्दीन अजमलने शुक्रवार (8 सितम्बर, 2023) को मीडिया को दिए बयान में कहा, “बीजेपी और असम के मुख्यमंत्री ने राज्य में रहने वाले मुस्लिम लोगों से उनका सब कुछ छीन लिया है। उनके पास नौकरी या पैसा नहीं है और इसके अलावा, हिमंत बिस्वा सरमा मुस्लिम लोगों को अपने जीवन यापन के लिए सड़कों पर सब्जियाँ बेचने की भी अनुमति नहीं दे रहे हैं। इस प्रकार, मुस्लिम चाहें तो भी एक से अधिक शादी नहीं कर सकते।”
धुबरी लोकसभा सांसद ने अफसोस जताया कि असम में मुस्लिम चाहकर भी एक से अधिक शादी नहीं कर सकते क्योंकि वे बेरोजगार हैं। उन्होंने कहा कि आजकल हिंदू अक्सर कई पत्नियाँ रखते हैं।
अब यहाँ कायदे से एआईयूडीएफ प्रमुख को याद दिलाया जाना चाहिए कि शरिया या मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार, एक मुस्लिम व्यक्ति अपनी पहली पत्नी को तलाक दिए बिना भी दोबारा निकाह कर सकता है और उसे चार पत्नियाँ रखने की अनुमति है, हालाँकि, एक मुस्लिम महिला को ऐसा कोई अधिकार नहीं है। इस बीच, हिंदू कानून के तहत, जो हिंदुओं, सिखों, जैनियों और बौद्धों पर लागू होता है, बहुविवाह की प्रथा निषिद्ध है। दरअसल, हिंदू विवाह कानून के तहत उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 494 और 495 के तहत आपराधिक कार्यवाही का सामना करना पड़ सकता है।
पिछले साल भाजपा नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय और नाइसा हसन, शबनम, फरजाना, समीना बेगम और मोहसिन कथिरी सहित कुछ मुस्लिम महिलाओं ने बहुविवाह और निकाह हलाला की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए याचिकाएँ दायर की थीं।
इन सभी याचिकाओं में माँग की गई है कि मुस्लिम समाज की इन प्रथाओं को असंवैधानिक और अवैध घोषित किया जाए। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि बहुविवाह और निकाह हलाला जैसी प्रथाएँ मुस्लिम महिलाओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती हैं।
जब AIMPLB ने निकाह हलाला और बहुविवाह की वकालत की
दरअसल, जब सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर सुनवाई हुई, तो ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बहुविवाह और निकाह हलाला की बेहद दमनकारी प्रथा के पक्ष में बात की। एआईएमपीएलबी ने इस बात पर जोर दिया कि मुस्लिमों का कानून (शरिया) पवित्र कुरान और हदीस पर आधारित है’ और ऐसी प्रथाओं का मौलिक अधिकारों के साथ तुलना नहीं किया जा सकता है।
इस तथ्य के बावजूद कि ये साड़ी बाते पहले से ही पब्लिक में हैं एआईयूडीएफ प्रमुख की टिप्पणी इस तरह के अपमानजनक बयान देने के उनके इतिहास को देखते हुए कोई आश्चर्य की बात नहीं है। दरअसल इस साल जुलाई में एआईयूडीएफ प्रमुख ने कहा था कि मुस्लिम समुदाय के भीतर बहुविवाह एक गैर-मुद्दा है।
यूसीसी के तहत पुरुषों और महिलाओं दोनों को पहननी होगी साड़ी: बदरुद्दीन अजमल
बता दें कि इसके पहले बदरुद्दीन अजमल की उपरोक्त टिप्पणी समान नागरिक संहिता को लेकर चल रही बहस के बीच आई थी। ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के नेता बदरुद्दीन अजमल ने तब प्रस्तावित कानून को भोजन और पोशाक में एकरूपता के लिए गलत ठहराया था।
14 जुलाई, 2023 को असम के धुबरी जिले में इस मामले पर बोलते हुए उन्होंने दावा किया, ”समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर बहस छिड़ गई है. बिल जल्द ही संसद में पेश किया जाएगा…यूसीसी लागू होने के बाद हम साड़ी पहनना शुरू कर देंगे और आपको भी ऐसा ही करना होगा…”
सांसद बदरुद्दीन बोले, यूसीसी लागू होने पर पांच साल तक पहनेंगे साड़ी, बढ़ाएंगे दाढ़ी और नहीं खाएंगे मांस,देखिए VIDEO pic.twitter.com/XybVK7XJxo
तब उन्होंने बयान दिया था, “यूसीसी लागू होने पर हर किसी को पुरुषों और महिलाओं दोनों को साड़ी पहननी होगी। हम साल भर तक लंबी दाढ़ी रखेंगे और आप भी एक साल तक ऐसा ही करें। ऐसी एकरूपता, ठीक है?”
असम सरकार बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने का कर रही विचार
बदरुद्दीन अजमल का यह अजीब दावा कि हिंदू और मुस्लिम बहुविवाह में विश्वास नहीं करते हैं, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के इस दावे की प्रतिक्रिया के रूप में आया है कि राज्य में बहुविवाह पर प्रतिबंध के पक्ष में जनता का पूरा समर्थन है।
– Update on proposed bill for banning polygamy – We have received a total of 149 suggestions in response to our public notice. Out of these, 146 suggestions are in favor of the bill, indicating strong public support. However, 3 organizations have expressed their opposition to the…
यह जानकारी देते हुए कि राज्य में बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानून का मसौदा अगले 45 दिनों के भीतर तैयार हो जाएगा, असम के सीएम ने 2 सितंबर को कहा था कि राज्य सरकार को एक सार्वजनिक नोटिस के जवाब में 149 प्रस्ताव मिले हैं। प्रस्तावित कानून एक समय में एक से अधिक व्यक्तियों से विवाह करने की प्रथा पर रोक लगाएगा।
गौरतलब है कि बहुविवाह भारत, सिंगापुर और मलेशिया जैसे देशों में पहले से ही मुस्लिमों में स्वीकार्य और कानूनी है। अफगानिस्तान, पाकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात, अल्जीरिया, मिस्र, ईरान, नाइजीरिया और कैमरून जैसे कई इस्लामी देशों में बहुविवाह अभी भी मान्यता प्राप्त और प्रचलित है। ये दुनिया के एकमात्र क्षेत्र हैं जहाँ बहुविवाह अभी भी कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त है।
हालाँकि, भारत में सभी धर्मों और जनसांख्यिकी में बहुविवाह की घटनाओं में गिरावट देखी गई है, लेकिन मुस्लिम समुदाय में यह प्रथा अभी भी प्रचलित है। उदाहरण के लिए, पिछले साल एक 28 वर्षीय मुस्लिम महिला ने अदालत में याचिका दायर कर अपने शौहर को उसकी लिखित सहमति के बिना दूसरी पत्नी रखने से रोकने की माँग की थी।
दुनिया भर के दिग्गज नेता G-20 में शामिल होने के लिए भारत पहुँच चुके हैं। इस वक्त पूरी दुनिया की नजर भारत पर है। ऐसे समय में भी कॉन्ग्रेस के युवराज राहुल गाँधी भारत को कोसने से बाज नहीं आ रहे हैं। दरअसल राहुल गाँधी यूरोप दौरे पर हैं। अमेरिका और ब्रिटेन के बाद अब उनकी ‘नफरती पकवान’ वाली ‘मोहब्बत की दुकान’ बेल्जियम पहुँच गई है, जहाँ उन्होंने एक बार फिर भारत विरोधी बयानबाजी शुरू कर दी है।
कॉन्ग्रेसियों के प्रिय युवा नेता 53 वर्षीय राहुल गाँधी ने बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में कहा कि भारत में बड़े पैमाने पर लोकतांत्रिक संस्थानों पर हमला हो रहा है। देश के संविधान को बदलने की कोशिश हो रही है। अल्पसंख्यकों और दलितों पर हमले हो रहे हैं। सरकार दहशत में है और पीएम मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश करते हैं।
राहुल गाँधी के इस बयान को देखें तो वह भारत में लोकतंत्र, अल्पसंख्यक व दलित, वंचित वर्ग पर हो रहे हमलों का राग अलाप रहे हैं। सवाल यह है कि ‘मोहब्बत की दुकान’ का शिगूफा छोड़ने वाला कोई व्यक्ति यदि अपने भाषण में सिर्फ हमलों और दहशत की बात करेगा तो क्या उसकी दुकान सच में मोहब्बत की है, या फिर नफरत की?
राहुल गाँधी कहते हैं कि लोकतंत्र पर हमला हो रहा है। संविधान बदला जा रहा है। फिर यह भी कहते हैं कि सरकार दहशत में है। अगर सरकार दहशत में है तो फिर वह किसी भी तरह का हमला कैसे कर सकती है? सवाल यह भी है कि कहीं ये हमले चीन परस्त विपक्ष तो नहीं कर रहा है? क्योंकि, राहुल ने ब्रसेल्स में भी शी जिनपिंग के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) की तारीफ कर चीन की ‘बटरिंग’ करने में कोई कसर बाकी नहीं रखी।
राहुल गाँधी आज देश में अल्पसंख्यक और दलितों पर हो रहे हमलों की बात कर रहे हैं, लेकिन शायद उन्हें यह याद नहीं कि उनकी पार्टी ने इस देश में सबसे लंबे समय तक राज किया है। उनके सिपहसालारों की लंबी फौज और ‘गुरु’ सैम पित्रोदा भी उन्हें यह नहीं बताते कि देश में सबसे अधिक दंगे और दलितों पर अत्याचार उनकी पार्टी की सरकार में ही हुए हैं।
देश में अल्पसंख्यकों पर हमले का सबसे बड़ा उदाहरण 1984 के सिख दंगे हैं। इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद हुए ये वही दंगे हैं, जिनमें राजधानी दिल्ली समेत देश भर के कई हिस्सों में कॉन्ग्रेस नेताओं की अगुवाई में सिखों का कत्लेआम हुआ था। इन्हीं दंगों को लेकर राहुल गाँधी के पिता और तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने कहा था कि ‘जब बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है’।
कॉन्ग्रेस सरकार में दलितों के नरसंहार की पूरी लिस्ट है। इस दौरान कॉन्ग्रेस कभी राज्य में तो कभी केंद्र में सत्ता में रही। कई प्रदेश तो ऐसे भी थे, जहाँ केंद्र के साथ-साथ वहाँ भी कॉन्ग्रेस की सरकार थी। तमिलनाडु का कीजवेनमनी, आंध्र प्रदेश का करमचेडु, गुजरात का गोलाना, कर्नाटक का कंबलपल्ली, महाराष्ट्र का खेरलानजी, ओडिशा का लाथोर नरसंहार समेत कॉन्ग्रेस शासन के दौरान देश के अनेक हिस्सों में दलितों के खिलाफ हुई हिंसा के बड़े उदाहरण हैं।
इन तमाम नरसंहार पर न तो कभी राहुल गाँधी की जुबान खुलती है और न ही आज तक किसी कॉन्ग्रेस नेता ने एक शब्द बोला है। राहुल गाँधी दुनिया के सबसे मजबूत लोकतंत्र भारत के खिलाफ लगातार विदेशी धरती पर बदजुबानी करते आ रहे हैं। कॉन्ग्रेस की खोई हुई सियासी जमीन को फिर से पाने के लिए भले ही राहुल गाँधी कोई भी पैंतरा आजमाएँ और पीएम मोदी-भाजपा पर हमला बोलें, लेकिन सच्चाई ये है कि कॉन्ग्रेस की सत्ता में रहते हुए अल्पसंख्यकों और दलितों पर जैसा अत्याचार हुआ, वैसा कभी नहीं हुआ।
बहरहाल, बात यह है कि राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस के युवराज हैं। देश के खिलाफ बयानबाजी करना, घोटालों पर घोटाले करना और दूसरे देशों के हित की सोचना कॉन्ग्रेस की पुरानी आदत रही है। राहुल गाँधी यह सब ऐसे समय में बोल रहे हैं जब देश G-20 शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहा है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन भारत की तारीफ कर रहे हैं। विश्व बैंक खुल कर कह रहा है कि भारत ने 50 साल का काम 6 साल में कर दिया है।
सीधे शब्दों में कहें तो पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत वैश्विक शक्ति बनकर उभर रहा है। यही कॉन्ग्रेस के पूर्व राहुल गाँधी की आँख की किरकिरी बन रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या राहुल गाँधी को तेजी से मजबूत होती भारत की अर्थव्यवस्था, देश के विकास और भारत का लोहा मान रही दुनिया से दिक्कत हो रही है या फिर कारण कुछ और ही है…?
राजस्थान का में करोड़ों रुपए का जल जीवन मिशन घोटाला हुआ है। फर्जी निविदा के जरिए करोड़ों रुपए का गबन किया गया है। हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने केंद्र समर्थित इस योजना के कार्यान्वयन में अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राजस्थान में कई जगहों पर पर तलाशी अभियान चलाया था।
ईडी की ये जाँच राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की दर्ज एक एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। ईडी के एक शीर्ष अधिकारी के मुताबिक, “छापे के दौरान जब्त किए गए दस्तावेजों में घोटाले का आकार 1,000 करोड़ रुपए आँका गया है, लेकिन आँकड़ा इससे अधिक भी हो सकता है।”
इस मिशन के लिए फर्जी पृष्ठभूमि वाली दो कंपनियों को 900 करोड़ रुपए का कॉन्ट्रेक्ट दिया गया था। बाद में दोनों कंपनियों ने महज 500 करोड़ रुपए के बिल का दावा किया है। न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों मालिकों में से एक को पकड़ लिया गया है, जबकि दूसरा अभी फरार है।
ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने न्यूज 18 को बताया कि दो कंपनियों- गणपति ट्यूबवेल कंपनी और श्रीश्याम ट्यूबवेल कंपनी का मालिकाना हक दो कारोबारियों के पास है। ये दोनों आपस में एक-दूसरे से संबंधित हैं। इन कारोबारियों ने नकली और मनगढ़ंत अनुभव प्रमाण पत्र पेश करके ‘जल जीवन मिशन’ का कॉन्ट्रेक्ट हासिल किया था।
दरअसल, इस केस में ईडी ने पिछले हफ्ते एक रिटायर और एक सेवारत सरकारी अधिकारी के घरों में छापेमारी की थी। इस दौरान 2.5 करोड़ रुपए नकद और 1 किलोग्राम की सोने की ईंट जब्त की गई थी। इसके साथ ही बोली प्रक्रिया में धांधली का संकेत देने वाले कई डिजिटल और कागजी सबूत भी बरामद किए गए थे।
‘जल जीवन मिशन’ का मकसद घरेलू नल कनेक्शन के जरिए सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल मुहैया कराना है। इस मिशन को राजस्थान में सार्वजनिक स्वास्थ्य इंजीनियरिंग विभाग (PHED) संचालित कर रहा है। इसके जरिए वहाँ पेयजल की पाइपलाइन बिछाई जा रही है।
मंत्री महेश जोशी ED की रडार पर
इस मामले में राजस्थान के PHED मंत्री महेश जोशी भी ईडी के रडार पर हैं। उन्होंने कहा कि मामला अगस्त में राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने शुरू किया था और ईडी ने इसे अपने हाथ में ले लिया है। उन्होंने आगे कहा कि जैसे-जैसे जाँच आगे बढ़ेगी सब कुछ सामने आ जाएगा।
ईडी के अधिकारी ने बताया कि ये कारोबारी महेश जोशी और कुछ वरिष्ठ नौकरशाहों सहित राजस्थान कुछ मंत्रियों के करीबी हैं। वहीं, मंत्री जोशी ने कहा, “मुझे अभी तक नहीं बुलाया गया है, लेकिन अगर वे ऐसा करते हैं तो मेरे पास दस्तावेज़ तैयार हैं। मैं जाँचकर्ताओं के सामने अपना पक्ष रखूँगा। मैं आरोपों से परेशान नहीं हूँ।”
केंद्रीय एजेंसी के सूत्रों ने कहा कि इस मामले में कई आपत्तियाँ उठाए जाने और विभाग में कई शिकायतें दर्ज होने के बावजूद राज्य सरकार ने कंपनियों के साथ काम जारी रखा। विभाग ने एक प्रारंभिक जाँच का आदेश दिया गया था, लेकिन इन आपत्तियों को दूर करने के लिए मनगढ़ंत दस्तावेजों का एक और सेट पेश करके इसे खत्म कर दिया गया था। सूत्र ने आगे कहा कि ये दोनों कंपनियाँ बोली लगाने के काबिल नहीं थीं, फिर भी उन्हें 900 करोड़ रुपए का ठेका दिया गया।
जल जीवन मिशन घोटाला मामले में 8 अगस्त को राजस्थान सरकार की एसीबी ने प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की गई थी। आरोप टेंडरिंग और कार्य प्रक्रिया में अनियमितता, कच्चे माल की खरीद और पुरानी पाइपलाइन बिछाने से संबंधित हैं। इसमें पाइप बिछाने के काम की गहराई पर भी सवाल उठाए गए हैं।
क्या है जल जीवन मिशन योजना?
जल जीवन मिशन योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में पेयजल की व्यवस्था की जानी थी। इसमें 50 फीसदी खर्च राजस्थान को और 50 फीसदी खर्च केंद्र सरकार को वहन करना था। इसके तहत डीआई डक्टर आयरन पाइपलाइन डाली जानी थी, लेकिन जलदाय विभाग के अफसरों और ठेकेदारों की मिली भगत से एचडीपीई पाइपलाइन डाली गई।
इस काम में करोड़ों रुपए का घोटाला सामने आया है। हरियाणा से चोरी करके लाए गए पाइपों को नया बताकर उन्हें बिछा दिया गया। पाइपलाइन को नई बताकर पैसा उठा लिया गया। इसके अलावा, कई किलोमीटर तक पाइपलाइन नहीं डाली गई। इसकी एवज में करोड़ों रुपए का भुगतान उठा लिया गया।
भाजपा सांसद ने लगाया था आरोप
भाजपा के राज्यसभा सांसद किरोड़ीलाल मीणा ने जून 2023 में राजस्थान में ‘जल जीवन मिशन’ में 20 हजार करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि योजना की 48 परियोजनाओं में फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर दो फर्मों को 900 करोड़ रुपए के टेंडर जारी किए गए थे। उनका दावा था कि ये घोटाला पीएचईडी मंत्री महेश जोशी और विभाग के सचिव ने मिलकर किया है।
भारत की अध्यक्षता में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए वैश्विक नेता नई दिल्ली पहुँच चुके हैं। दिल्ली पहुँचने वालों में इंग्लैंड के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक भी शामिल हैं। उन्हें एयरपोर्ट पर रिसीव करने केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे पहुँचे थे। चौबे ने पीएम सुनक का ‘जय सियाराम’ से स्वागत किया।
प्रधानमंत्री के तौर पीएम ऋषि सुनक की यह पहली भारत यात्रा है। वे तीन दिन यहाँ रहेंगे और जी-20 में भाग लेंगे। दिल्ली पहुँचने के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने खुद को गौरवान्वित हिंदू बताया। उन्होंने बताया कि अपनी भारत यात्रा के दौरान वे किसी मंदिर का भी दौरा करेंगे।
अश्विनी चौबे के मीडिया सलाहकार ने बताया कि स्वागत के दौरान केंद्रीय मंत्री चौबे ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री को उनके पूर्वजों की धरती पर अभिनंदन किया और ‘जय सियाराम’ कहकर अभिवादन किया। इसके अलावा, भारत की बेटी अक्षिता मूर्ति के पति होने के कारण उन्हें भारत के दामाद के रूप में भी स्वागत किया।
चौबे ने पीएम ऋषि सुनक को बताया कि वे बिहार के बक्सर से सांसद हैं। बक्सर प्राचीन काल से ही एक आध्यात्मिक नगर के रूप में विख्यात है। उन्होंने बताया कि इसी जगह पर भगवान श्रीराम और उनके भाई लक्ष्मण ने अपने गुरु ब्रह्मगुरु विश्वामित्र से शिक्षा-दीक्षा लेकर ताड़का नामक असुर का वध किया था।
उधर, भारत में ANI से बात करते हुए ऋषि सुनक ने कहा, “मैं एक गौरवान्वित हिंदू हूँ और मेरा पालन-पोषण इसी तरह हुआ है। मैं ऐसा ही हूँ। मैं अगले कुछ दिनों के लिए यहाँ हूँ तो उम्मीद है कि इस दौरान मैं किसी मंदिर में जाऊँगा।”
#WATCH | G-20 in India: On his connect with Hinduism, UK PM Rishi Sunak to ANI says, "I'm a proud Hindu, and that's how I was raised. That's how I am. Hopefully, I can visit a Mandir while I'm here for the next couple of days. We just had Raksha Bandhan, so from my sister and my… pic.twitter.com/U5RLdZX3vz
ब्रिटिश पीएम ने आगे कहा, “अभी रक्षा बंधन था तो मेरी बहन और चचेरी बहनों ने मुझे राखियाँ भेजीं। जन्माष्टमी को ठीक से मनाने के लिए मेरे पास समय नहीं था। हालाँकि, उम्मीद है कि इस बार किसी मंदिर में जाकर इसकी भरपाई कर लूंगा। यह कुछ ऐसा है जो मेरे लिए महत्वपूर्ण है।”
ऋषि सुनक ने कहा, “मुझे लगता है कि आस्था एक ऐसी चीज है, जो हर उस व्यक्ति की मदद करती है जो अपने जीवन में आस्था रखता है, खासकर जब आपके पास मेरी तरह तनावपूर्ण नौकरी होती है। आपको लचीलापन देने के लिए, आपको ताकत देने के लिए आस्था और विश्वास महत्वपूर्ण है…।”
देश की 6 राज्यों की 7 विधानसभा सीटों में से सभी के नतीजे आ गए हैं। इनमें त्रिपुरा की दो और उत्तराखंड की एक सीट पर बीजेपी ने बाजी मारी है। केरल की पुथुप्पली सीट कॉन्ग्रेस के खाते में गई। वहीं बंगाल की एक सीट पर ममता बनर्जी की तृणमूल कॉन्ग्रेस ने जीत दर्ज की है। उत्तर प्रदेश की घोसी सीट सपा के खाते में गई है।
बता दें कि 5 सितंबर, 2023 को त्रिपुरा की धनपुर और बॉक्सनगर सीट, केरल की पुथुपल्ली विधानसभा, पश्चिम बंगाल की धुपगुड़ी सीट, यूपी की घोसी, उत्तराखंड की बागेश्वर सीट और झारखंड की डुमरी विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए थे।
इनमें से 5 सीट- घोसी, बागेश्वर, डुमरी, बॉक्सानगर और धनपुर पर I.N.D.I.A. गठबंधन की पार्टियों ने एक साथ चुनाव लड़ा था। धुपगुड़ी (बंगाल) और पुथुपल्ली (केरल) सीट पर विपक्षी पार्टियाँ एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में थीं।
आइए जानते हैं कि कौन कहाँ से जीता
उत्तर प्रदेश की घोसी सीट
यहाँ I.N.D.I.A. गठबंधन की ओर से समाजवादी पार्टी (SP) के सुधाकर सिंह ने भाजपा के दारा सिंह चौहान को हराकर चुनाव जीत लिया है। बता दें कि जुलाई में ही दारा सिंह चौहान ने समाजवादी पार्टी से इस्तीफा देकर बीजेपी जॉइन किया था। इसके बाद से घोसी सीट खाली थी। जहाँ उपचुनाव हुए।
झारखंड की डुमरी सीट
पिछले दो दशक तक इस विधासनभा सीट पर जगरनाथ महतो का वर्चस्व रहा है। जगरनाथ महतो के निधन के बाद JMM ने उनकी पत्नी बेबी देवी को मैदान में उतारा था। यहाँ से बेबी देवी जीत गई हैं। जीत के बाद बेबी देवी ने कहा यह जनता की जीत है। मैं उनके सारे अधूरे काम को पूरा करुँगी।
उत्तराखंड की बागेश्वर सीट
उत्तराखंड की बागेश्वर सीट से बीजेपी की पार्वती दास ने जीत हासिल की है। उन्होंने कॉन्ग्रेस के बसंत कुमार को हराया है। बीजेपी ने विधायक चंदन राम दास के निधन के बाद उनकी पत्नी पार्वती दास को इस सीट पर उम्मीदवार बनाया था।
वहीं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बागेश्वर उपचुनाव में जीत के बाद पार्वती दास को शुभकामनाएँ दीं। सीएम ने ट्विटर पर लिखा- राष्ट्रवाद, लोककल्याण एवं सुशासन को समर्पित यह ऐतिहासिक जीत बागेश्वर के चहुँमुखी विकास का नया अध्याय लिखेगी।
त्रिपुरा की बॉक्सानगर और धनपुर सीट
त्रिपुरा की दोनों विधानसभा सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की है। धनपुर से बीजेपी प्रत्याशी बिंदु देबनाथ ने CPI (M) प्रत्याशी कौशिक चंदा को 18 हजार 871 वोटों से हरा दिया है। बॉक्सानगर सीट से BJP के तफज्जल हुसैन ने CPI (M) के मिजान हुसैन को 30 हजार 237 वोटों से हराया है।
बता दें कि बॉक्सानगर में CPI (M) विधायक समसुल हक के निधन के कारण उपचुनाव हुए थे। वहीं केंद्रीय राज्य मंत्री प्रतिमा भौमिक के विधायक पद से इस्तीफे के बाद से धनपुर सीट खाली हुई थी।
केरल की पुथुप्पली सीट
कॉन्ग्रेस के चांडी ओमान ने 37 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से CPI (M) के जैक सी थॉमस को पुथुपल्ली सीट से हरा दिया है। कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री ओमान चांडी के निधन के बाद यह सीट खाली हुई थी।
कॉन्ग्रेस ने इस सीट पर ओमान चांडी के बेटे चांडी ओमान को मैदान में उतारा था। बीजेपी की तरफ से सीनियर नेता लिजिन लाल चुनावी मैदान में थे।
पश्चिम बंगाल की धुपगुड़ी सीट
बंगाल के धुपगुड़ी सीट पर तृणमूल कॉन्ग्रेस ने जीत हासिल की है। यहाँ TMC कैंडिडेट निर्मल चंद्र रॉय और बीजेपी की तापसी रॉय के बीच काउटिंग शुरू होने से खत्म होने तक जबरदस्त टक्कर देखने को मिली। TMC ने मात्र चार हजार वोटों से बीजेपी को हराया है।
इस सीट पर I.N.D.I.A. गठबंधन के सदस्य कॉन्ग्रेस और TMC एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव में उतरे थे। कॉन्ग्रेस ने CPI(M) के उम्मीदवार ईश्वर चंद्र रॉय को समर्थन दिया था।
कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी 7 सितंबर 2023 एक बार फिर 6 दिवसीय विदेशी दौरे पर हैं। सफर के पहले पड़ाव में राहुल गाँधी बेल्जियम की राजधानी और यूरोपीय संघ के मुख्यालय ब्रसेल्स पहुँचे हैं। कॉन्ग्रेस के आधिकारिक हैंडल इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस ने उनके इस सफर का पूरा कार्यक्रम शेयर किया है।
कॉन्ग्रेस सांसद का दोपहर में यूरोपीय संघ के सांसदों से मिलने का कार्यक्रम था, तो शाम को ‘सिविल सोसाइटी’ से मिलने का। उसके बाद उन्हें एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करना था और फिर एक ‘डायस्पोरा मीट’ में जाना था। राहुल गाँधी 8-9 सितंबर को फ्रांस की राजधानी पेरिस, 10-11 सितंबर को नीदरलैंड के हेग और 11-12 सितंबर को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में रहेंगे।
राहुल के विदेशी सफर पर गौर किया जाए तो वे अक्सर भारत विरोधी लोगों से मिलते दिखते हैं। इस साल मई में जब वो अमेरिका गए थे तो उन्होंने वहाँ ‘बे एरिया मुस्लिम कम्युनिटी’ के एक सवाल के जवाब में कहा था कि जिस तरह भारत में मुस्लिमों पर हमला हो रहा है। मैं गांरटी दे सकता हूँ कि सिख, ईसाई, दलित, आदिवासी भी ऐसा ही महसूस कर रहे होंगे’।
उन्होंने वहाँ ये तक कह डाला था, “मैंने अडानी और हिंडनबर्ग रिपोर्ट पर देश की संसद में बोला तो मेरी सांसदी चली गई।” इस दौरान उन्होंने वहाँ पीएम मोदी को लेकर कहा था कि अगर उन्हें भगवान के बगल में बैठा दिया जाए तो वो भगवान को समझाने लगेंगे कि ब्रह्मांड कैसे काम करता है। उनके सेन फ्रांसिस्को के कार्यक्रम में खालिस्तान के समर्थन में नारे लगे।
#WATCH| Congress' Rahul Gandhi in response to a question from 'Bay Area Muslim community' says," The way you (Muslims) are feeling attacked,I can guarantee Sikhs,Christians,Dalits,Tribals are feeling the same. What is happening to Muslims in India today happened to Dalits in… pic.twitter.com/sukYLT9Ctp
इस बार भी उन्होंने कुछ ऐसा ही किया है। वो ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ के सांसदों- अलविना अलमेत्सा और पियरे लारौतुरौ सहित कई लोगों से मिले। कॉन्ग्रेस ने इन बैठकों की तस्वीरें अपने X (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर साझा की हैं।
इन तस्वीरों में दिख रहा है कि राहुल गाँधी और सैम पित्रोदा यूरोपीय यूनियन के सांसदों के साथ बैठे हुए हैं। बताते चलें कि सांसद पियरे वही शख्स हैं, जिन्होंने जुलाई में मणिपुर मुद्दे पर यूरोपीय संघ की संसद में पारित भारत विरोधी प्रस्ताव की पैरवी की थी।
दूसरी तरफ, शुक्रवार (8 सितंबर) को बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स के प्रेस क्लब में राहुल गाँधी ने फिर वही किया है, जो अक्सर विदेशी दौरें में भारत की छवि को लेकर करते हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत में लोकतांत्रिक संस्थाओं के ऊपर बड़े पैमाने पर हमले हो रहे हैं। सत्ताधारी बीजेपी देश के संविधान को बदलने की कोशिश कर रही है।
#RahulGandhi is in Brussels as a part of his reach out program in Europe tour, organised by Indian Overseas Congress
सांसद अलविना अलमेत्सा और पियरे लारौतुरौ बेहद खुशी के साथ राहुल गाँधी के साथ तस्वीरें शेयर कीं। इतना ही नहीं, ‘भारतीय लोकतंत्र के महान शख्स’ बताकर उनकी तारीफ भी की।
पियरे लारौतुरौ ने लिखा, “आज यूरोपीय संसद में राहुल गाँधी का स्वागत करते हुए बहुत सम्मानित महसूस हो रहा है। वो भारतीय लोकतंत्र की महान हस्तियों में से एक हैं और मोदी सरकार के अति-राष्ट्रवाद के खिलाफ वर्षों से लड़ रहे हैं। 7 अलग-अलग समूहों के एमईपी के साथ हमने मानवाधिकारों, सामाजिक न्याय और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई पर एक बहुत ही दिलचस्प चर्चा की।”
गौरतलब है कि मणिपुर मुद्दे पर जुलाई में यूरोपीय संघ की संसद में पारित भारत विरोधी प्रस्ताव के पीछे एमईपी लारौतुरौ अहम व्यक्ति थे। जुलाई में यूरोपीय संघ ने “इंडिया, द सिच्युएशन इन मणिपुर” शीर्षक से ये प्रस्ताव पास किया था।
एक लंबे सोशल मीडिया पोस्ट में शेखी बघारते हुए पियरे ने यह भी साफ कर दिया था कि यूरोपीय संघ का ये प्रस्ताव खास तौर से पीएम मोदी की फ्रांस यात्रा को निशाने पर लेने के लिए पास किया गया था।
साभार एक्स पर @ClaFrancavilla
यूरोपीय संघ की संसद ने 12 जुलाई 2023 को स्ट्रासबर्ग में अपने पूर्ण सत्र में मणिपुर की स्थिति पर तत्काल बहस की। यह चर्चा फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के पीएम नरेंद्र मोदी को बैस्टिल डे परेड में सम्मानित अतिथि के न्योते पर उनकी राजकीय यात्रा से ठीक पहले हुई थी।
ये चर्चा ‘मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामलों पर बहस, लोकतंत्र और कानून का शासन’ के तहत की गई थी। तब यूरोपीय संसद में समाजवादियों और डेमोक्रेट्स के प्रगतिशील गठबंधन का प्रतिनिधित्व करने वाले पियरे ने ‘भारत, मणिपुर की स्थिति’ शीर्षक वाले प्रस्ताव को पेश किया था।
भारत ने इस प्रस्ताव को दृढ़तापूर्वक खारिज कर दिया था और एक कड़ा बयान जारी किया था। तब भारतीय विदेश मंत्रालय ने यूरोपीय संघ की संसद को भारत के आंतरिक मामलों में अनावश्यक तौर पर दखलअंदाजी करने की कोशिश का आरोप लगाया था यूरोपीय संघ की संसद से ‘अपने काम से काम रखने’ की चेतावनी दी थी।
भारतीय विदेश मंत्रालय के 13 जुलाई के इस बयान में यूरोपीय संसद को अपने आंतरिक मुद्दों पर अपना समय देने और ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी थी। राहुल गाँधी ने ब्रसेल्स में जिन अलविना अलमेत्सा से मुलाकात की थी वो भी उन एमईपी में से एक थीं, जो भारत के खिलाफ लाए गए इस प्रस्ताव के पीछे थीं। वो यूरोप में भारत विरोधी मुखर कैंपेनर हैं।
गणतंत्र दिवस से पहले भारत में अलविन्ना अल्मेत्सा का कार्यक्रम
इस साल जनवरी में अलविना पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े संगठन ‘द लंदन स्टोरी’ की एक चर्चा में प्रशांत भूषण और शाहरुख आलम के साथ शिरकत की थी। जुलाई में ईयू पूर्ण सत्र में अलविना ने मणिपुर के हालातों की ‘निगरानी’ करने और इस मामले के शांतिपूर्ण समाधान के लिए बाहरी पर्यवेक्षकों की तैनाती को मंजूरी देने की वकालत की थी।
उन्होंने कहा था कि भारत में मानवाधिकारों और प्रेस की स्वतंत्रता के हालात बदतर हो रहे हैं। इसको लेकर उन्होंने भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने की अपील की थी। इस साल जनवरी में डिसइन्फोलैब ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि अलविना की वार्ता की मेजबानी करने वाले संगठन FTLS की आईएसआई और जमात के साथ गहरी साँठ-गाँठ है।
My deepest condolences to those affected by the violence and human rights violations in Manipur. We must end the violence and find a peaceful resolution to the situation. Here is my complete address to the European Parliament on the situation. pic.twitter.com/bqtoXTw8CR
इस रिपोर्ट में एक लंबा ब्योरा देते हुए बताया था कि कैसे अलविना यूरोपीय संघ में भारत के खिलाफ लॉबी करने की आईएसआई की कोशिशों का हिस्सा रही हैं। अलविना अलमेत्सा भारत के खिलाफ अपने कैंपेन, कॉलम लिखने, लॉबी करने और यूरोपीय संघ में भारतीय हितों के खिलाफ अभियान चलाने में लगातार लगी हुई हैं।
Alviina Almetsa is part of the Leftist Anti-India Lobby.
Sanjiv Bhat, Stan Swamy, Teesta, Prashant Bhushan.. Alviina was connected to all those who hate Modi.
जनवरी 2021 में उन्होंने ईयू ऑब्जर्वर में एक लेख लिखकर भारत में ‘मानवाधिकार’ के हालातों पर दखल देने के लिए ईयू से अपील तक की थी। अपनी भारत-केंद्रित बातचीत और कहानियों में अलविना इन प्लेट्फार्म्स का इस्तेमाल तीस्ता सीतलवाड, संजीव भट्ट से लेकर स्टेन स्वामी जैसे भारत विरोधियों को बढ़ावा देने या समर्थन करने के लिए करती रही हैं।
राहुल गाँधी और उनकी भारत विरोधी ताकतों से मुलाकातें
यह लगभग एक पैटर्न बन गया है कि जब भी राहुल गाँधी विदेश यात्रा पर जाते हैं तो वो भारत विरोधी पैरवीकारों और राजनेताओं से मिलने की कोशिश में रहते हैं। इन मुलाकातों और बैठकों में लगभग हमेशा एक ही बात होती है कि भारत में लोकतंत्र खतरे में है, मानवाधिकारों की स्थिति खराब हो रही है और कॉन्ग्रेस के नेता के तौर में केवल वे ही इन सबका ‘समाधान’ कर सकते हैं।
राहुल और उनके सहयोगियों का दावा है कि भारत में परेशानी केवल मोदी सरकार की वजह से पैदा हो रही है। इस साल की शुरुआत में जब राहुल गाँधी वाशिंगटन डीसी में थे, तब उन्होंने सीएए पर झूठ बोला और गलत सूचना फैलाई थी। उन्होंने कहा था कि वो अच्छी तरह जानते हैं कि डोनल्ड ट्रम्प की भारत यात्रा से ठीक पहले 2020 में दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगे क्यों हुए।
अपने 10 दिन के अमेरिकी दौरे के दौरान राहुल गाँधी को हडसन इंस्टीट्यूट में सुनीता विश्वनाथ के साथ गहन बातचीत करते देखा गया। सुनीता विश्वनाथ ‘हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स (एचआरएचआर)’ की सह-संस्थापक हैं। उन्होंने रशीद अहमद के नेतृत्व वाले आईएएमसी के साथ मिलकर राष्ट्रपति बाइडेन को लिखे एक पत्र पर दस्तख़त किए थे। इसमें बाइडेन से पीएम मोदी के लिए आयोजित राजकीय रात्रिभोज को रद्द करने के लिए कहा गया था।
डिसइन्फो लैब की जाँच से पता चला कि एचआरएचआर ‘हिंदू बनाम हिंदुत्व’ की भ्रामक कहानी को बढ़ावा दे रहा था। इसी संगठन को ‘डिसमेंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व’ यानी दुनिया में हिंदुत्व को ख़त्म करने वाले कार्यक्रम का समर्थन करते हुए भी देखा गया था।
वर्तमान में, भारत में राहुल गाँधी के गठबंधन सहयोगी हिंदुओं के खिलाफ नफरत फैलाने में व्यस्त हैं। राहुल गाँधी के साथ गठबंधन में राज्य स्तर पर सत्ता में बैठे राजनेता ऐलान कर रहे हैं कि हिंदू धर्म एक ‘संक्रामक बीमारी’ है और वे इसे खत्म होते देखना चाहते हैं।
विदेशी ताकतों से देश के आंतरिक मामलों में दखल की माँग
भारत में अपने राजनीतिक फायदे के लिए राहुल गाँधी द्वारा ‘विदेशी मदद’ माँगने के कई उदाहरण हैं। देश में एक के बाद एक चुनावों में हारने के बाद और लोकतांत्रिक तरीके से भारतीय जनता का विश्वास जीतने में नाकाम रहने के बाद उन्होंने वैश्विक वामपंथियों के सामने कहना शुरू कर दिया है कि भारत अराजकता में डूबा हुआ है और यहाँ लोकतंत्र का पतन हो रहा है। सिर्फ वे ही इसे ठीक कर सकते हैं।
अप्रैल 2021 में हार्वर्ड केनेडी स्कूल के इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स में राहुल ने जोर देकर कहा था कि अमेरिकी सरकारी प्रतिष्ठानों को ‘भारत में क्या हो रहा है’ के बारे में ‘और अधिक बोलना’ चाहिए। यूनाइटेड किंगडम में 2022 में ‘आइडियाज फॉर इंडिया’ सम्मेलन में उन्होंने भारत में विदेशी दखल की माँग को दोहराया था।
अपने विवादास्पद भाषण के दौरान राहुल गाँधी ने दो बार विदेशी दखल की अपनी इच्छा जाहिर की थी। पहली बार इसका जिक्र उन्होंने रूस-यूक्रेन मुद्दे की बात करते हुए किया और दूसरा तब कहा था कि जब उन्होंने भारतीय राजनयिकों के यूरोपीय लोगों से आदेश लेने में अनिच्छुक होने की आलोचना की थी। इसी सम्मेलन में उन्होंने लद्दाख की तुलना यूक्रेन से करते हुए कहा था कि इसमें अमेरिकी दखल की जरूरत है।
विश्व बैंक ने जी-20 शिखर सम्मेलन से ठीक पहले मोदी सरकार द्वारा डिजिटल पेमेंट की दिशा में उठाए गए कदमों की जमकर तारीफ की है। वर्ल्ड बैंक ने भारत की प्रशंसा करते हुए अपने जी-20 दस्तावेज में कहा कि डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए भारत ने वित्तीय समावेशन के लक्ष्य को 6 साल में हासिल कर लिया है, जिसे करने में 47 साल लग जाते। यानी मोदी सरकार ने 47 साल के काम को मात्र 6 साल में ही कर दिखाया है। इससे तक़रीबन 41 साल की बचत हुई है।
वर्ल्ड बैंक की इस खबर को प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने सोशल मीडिया एक्स के अकाउंट पर शेयर किया है, जिसमें विश्व बैंक द्वारा भारत सरकार की तारीफ की गई है। PM मोदी के अकाउंट पर किे गए पोस्ट में लिखा है, “डिजिटल पब्लिक इंन्फ्रास्ट्रक्चर द्वारा संचालित वित्तीय समावेशन यानी फिनांशियल इनक्लूशन में भारत की छलांग! विश्व बैंक द्वारा तैयार किए गए एक G-20 दस्तावेज में भारत के विकास पर एक बहुत ही दिलचस्प बिंदु साझा किया गया है। भारत ने केवल 6 वर्षों में वित्तीय समावेशन के लक्ष्य को हासिल कर लिया है, अन्यथा इसमें कम से कम 47 वर्ष लग जाते। हमारे मजबूत डिजिटल भुगतान बुनियादी ढाँचे और हमारे लोगों की भावना को बधाई। यह समान रूप से तीव्र प्रगति और नवप्रवर्तन का प्रमाण है।”
India's leap in financial inclusion, powered by Digital Public Infrastructure!
A G20 document prepared by the @WorldBank shared a very interest point on India's growth. India has achieved financial inclusion targets in just 6 years which would otherwise have taken at least 47…
दरअसल, जी-20 शिखर सम्मेलन के आयोजन की खुशी से सराबोर भारत की प्रशंसा में वर्ल्ड बैंक ने कहा कि भारत ने जन धन बैंक खाते, आधार और मोबाइल फोन (JAM ट्रिनिटी) के उपयोग से वित्तीय समावेशन की दर 80% तक प्राप्त करने में केवल 6 साल का समय लिया है, जिसके लिए इस तरह के डिजिटल पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) के बिना 47 साल लग सकते थे। वर्ल्ड बैंक ने जी-20 के लिए पॉलिसी डॉक्युमेंट तैयार किया है जिसमें उसने भारत में जारी आर्थिक गतिविधियों की खूब तारीफ की है, खासकर डिजिटल इंडिया की।
UPI पर फिदा वर्ल्ड बैंक
यूपीआई प्लेटफॉर्म ने भारत में बड़ी लोकप्रियता हासिल की है। मई 2023 में ही लगभग 14.89 खरब रुपए मूल्य के 9.41 अरब से अधिक लेनदेन किए गए। वर्ल्ड बैंक के दस्तावेज के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में भारत की नॉमिनल जीडीपी का लगभग 50% के बराबर मूल्य का यूपीआई ट्रांजैक्शन हुआ है। डिजिटल पेमेंट इन्फ्रास्ट्राक्चर ने नए ग्राहक पर बैंकों का खर्च लगभग खत्म कर दिया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) के उपयोग से भारत में बैंकों के ग्राहकों को शामिल करने की लागत 23 डॉलर (करीब 1,900 रुपए) से घटकर 0.1 डॉलर (करीब 8 रुपए) हो गई है। वहीं ई-केवाईसी का उपयोग करने वाले बैंकों ने अपनी अनुपालन लागत 0.12 डॉलर से घटाकर 0.06 डॉलर कर दी है।
वर्ल्ड बैंक में रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने डीपीआई का लाभ उठाते हुए दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल गवर्नमेंट-टू-पीपल आर्किटेक्चर में से एक का निर्माण किया। इससे 312 प्रमुख योजनाओं के जरिए 53 केंद्रीय मंत्रालयों के लाभार्थियों को सीधे लगभग 361 अरब डॉलर की रकम भेजी गई है। मार्च 2022 तक भारत ने डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर (DBT) के कारण कुल 33 अरब डॉलर की बचत की, जो जीडीपी के लगभग 1.14 फीसदी के बराबर है।
यूपीआई से देश से बाहर भी पेमेंट करने की सुविधा भी शुरू हो गई है। भारत और सिंगापुर के बीच UPI-PayNow इंटरलिंकिंग शुरू हो चुकी है। यह G-20 की वित्तीय समावेशन प्राथमिकताओं के साथ जुडी है और तेज़, सस्ता और अधिक पारदर्शी सीमा पार भुगतान की सुविधा प्रदान करती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि डीपीआई ने बिजनेस चलाने की जटिलता, लागत और समय में कटौती के जरिए प्राइवेट कंपनियों के लिए बड़े अवसर खोल दिया है।
जन-धन योजना से पड़ा बड़ा फर्क
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) खातों की संख्या में बड़ा उछाल आया। जहाँ मार्च 2015 में 14.72 करोड़ थी वहीं जून 2022 तक तीन गुना होकर 46.2 करोड़ हो गई है। इनमें से 56 फीसदी यानी 26 करोड़ से अधिक खातों की मालिक महिलाएँ हैं।
आसान हुई केवाईसी प्रक्रिया
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर ने केवाईसी (Know Your Customer) प्रक्रिया को आसान बना दिया है। इससे बैंकों की लागत कम हो गई है। बैंकों ने अपनी अनुपालन लागत 0.12 डॉलर से घटाकर 0.06 डॉलर कर ली है। लागत में कमी ने कम आय वाले ग्राहकों के लिए बैंकिंग सेवा को अधिक आकर्षक बना दिया।
गौरतलब है कि वित्तीय समावेशन के लिए जी-20 ग्लोबल पार्टनरशिप (GPFI) दस्तावेज विश्व बैंक ने वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के प्रतिनिधित्व वाले G-20 इंडिया प्रेसीडेंसी के मार्गदर्शन और इनपुट के साथ तैयार किया है।
हरियाणा के अंबाला कैंट में तैनात सेना के जवान पवन शंकर का शव बरामद हुआ है। वे 6 सितंबर 2023 से लापता थे। मूल रूप से यूपी के कानपुर के रहने वाले पवन घर से ड्यूटी ज्वाइन करने निकले थे। लेकिन ड्यूटी पर नहीं पहुँचे। इसी दौरान उनकी पत्नी को व्हाट्सएप पर एक मैसेज मिला। इसमें लिखा था, “आपके पति को खुदा के पास भेज दिया है, पाकिस्तान जिंदाबाद।”
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पवन शंकर अंबाला कैंट में बतौर हवलदार तैनात थे। वह छुट्टी मनाने कानपुर स्थित अपने घर गए हुए थे। छुट्टी पूरी होने पर वह ड्यूटी ज्वाइन करने वापस अंबाला जा रहे थे। लेकिन न तो वह ड्यूटी में पहुँचे और न ही घरवालों को उनके बारे में कुछ पता चल पा रहा था। लगातार उनकी तलाश की जा रही थी।
इस मामले में अंबाला कैंट में पवन शंकर की यूनिट के सूबेदार की शिकायत पर स्थानीय पड़ाव थाने में गुमशुदगी का केस भी दर्ज हुआ था। इसी बीच 6 सितंबर की रात 11:39 पर पवन के नंबर से उनकी पत्नी को एक व्हाट्सएप मैसेज मिला था। इस मैसेज में लिखा था, “मैंने आपके पति को खुदा के पास भेज दिया है। पाकिस्तान जिंदाबाद। इंडियन आर्मी को जो करना है वो कर ले। बचा लो अपने सैनिक को।” इसके बाद उनके व्हाट्सएप पर रात 11:42 बजकर पर लास्ट सीन दिखाई दिया।
मैसेज मिलने के बाद से पुलिस और इंटेलिजेंस जाँच कर रही थी। इसके बाद 7 सितंबर की शाम पवन शंकर का शव कैंट रेलवे स्टेशन से मोहड़ा के बीच पटरी से बरामद हुआ है। पहले रेलवे पुलिस इस शव को अज्ञात मानकर चल रही थी। लेकिन सेना के जवानों ने रेलवे पुलिस से संपर्क कर शव की पहचान की।
इस मामले में अंबाला के SHO जीआरपी धर्मवीर भारती ने कहा है कि शव मिलने की सूचना पवन के परिजनों को दी गई है। अब तक उनका मोबाइल नहीं मिल सका है। रेलवे पुलिस के अलावा सेना भी इस मामले में जाँच कर रही है। कहा जा रहा है कि जवान के सिर और गर्दन के पास गहरा घाव मिला है। मामले में कार्रवाई की जा रही है।