अभी तमिलनाडु के खेल मंत्री उदयनिधि स्टालिन द्वारा सनातन धर्म को खत्म किए जाने और इसे डेंगू-मलेरिया बताने जाने के बाद उपजा विवाद अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि कर्नाटक के गृह मंत्री गंगाधरैया परमेश्वर ने हिन्दू धर्म पर निशाना साधा है। कॉन्ग्रेस नेता G परमेश्वर ने हिन्दू धर्म की उत्पत्ति पर सवाल खड़े कर दिए। हुबली में एक सभा के दौरान उन्होंने कहा कि विश्व के इतिहास में कई धर्म उत्पन्न हुए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे जैन एवं बौद्ध धर्म का जन्म भारत में ही हुआ।
वहीं हिन्दू धर्म की बात करते हुए उन्होंने कहा कि इसका कब जन्म हुआ और और किसने इसे शुरू किया, ये अभी भी सवालों के घेरे में है। G परमेश्वर ने कहा कि भारत में जैन और बौद्ध धर्म का इतिहास रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में इस्लाम और ईसाई मजहब बाहर से आया। साथ ही उन्होंने कहा कि मानवता की भलाई ही सभी धर्मों और मजहबों का सार है। इस पर लोगों ने उन्हें जवाब दिया कि हिन्दू धर्म को सनातन इसीलिए कहा गया है क्योंकि इसका कोई उद्भव नहीं है, ये आदिकाल से है।
Hubbali | Karnataka Home Minister G Parameshwara says, "Many religions have arisen in the history of the world. Jainism and Buddhism were born here. When was Hinduism born and who started it is still a question. Our country has a history of the origin of Buddhism and Jainism.… pic.twitter.com/G3Q7EJAjkX
जी परमेश्वर ने कहा कि हिन्दू धर्म की उत्पत्ति कैसे ही और किसने इसे शुरू क़िया, अभी भी इस सवाल का जवाब तलाशा जाना है। कर्नाटक में भाजपा के संयुक्त प्रदेश प्रवक्ता S पारख ने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी हमेशा बहुसंख्यक समाज के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियाँ करती रहती हैं। वहीं VHP के प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि ये हैरान करने वाला है कि जिस व्यक्ति के नाम में ‘परमेश्वर’ है, हिन्दू धर्म के मूल पर सवाल उठा रहा है। कॉन्ग्रेस ने आधिकारिक रूप से अब तक उदयनिधि स्टालिन के बयान की भी निंदा नहीं की है।
कर्नाटक के भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री CN अश्वनाथ नारायण ने कहा कि वो स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि ये लोग वामपंथियों के प्रभाव में हैं और हमारे देश भारत में हमारी संस्कृति एवं परंपराओं का विध्वंस करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जी परमेश्वर को याद रखना चाहिए कि इस किस्म का अहंकार इन्हें शोभा नहीं देता। उन्होंने कहा कि वो विद्वान हैं, अगर हिम्मत है तो अन्य धर्मों के बारे में बोल कर दिखाएँ। उन्होंने कहा कि अगर G परमेश्वर खुश नहीं हैं तो इस धर्म को छोड़ कर अन्य धर्म में चले जाएँ, किसी ने उन्हें रोका नहीं है।
सनातन धर्म के खिलाफ लगातार बयानबाजी कर रहे तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे और राज्य सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन (Tamil Nadu CM MK Stalin’s son Udhayanidhi Stalin) के खिलाफ उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में FIR दर्ज हुई है। इसी FIR में स्टालिन का समर्थन करने वाले प्रियांक खड़गे को भी नामजद किया गया है।
प्रियांक खड़गे कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे हैं। यह केस राम सिंह लोधी और हर्ष गुप्ता नाम के 2 वकीलों ने रामपुर जिले के थाना सिविल लाइन्स में दर्ज करवाई है। मंगलवार (5 सितंबर 2023) को दर्ज इस FIR में आरोपितों पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने और 2 समुदायों के बीच नफरत फ़ैलाने का आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ताओं ने अपनी तहरीर में बताया कि उदयनिधि स्टालिन ने अपने भाषण में सनातन धर्म की तुलना डेंगू, मलेरिया व कारोना से करते हुए सनातन धर्म के नाश की बातें कहीं हैं। शिकायतकर्ताओं ने उदयनिधि का यह बयान 4 सितंबर 2023 को एक समाचार पत्र में पढ़ने की जानकारी दी है।
दोनों वकीलों ने खुद को सनातन धर्म का अनुयायी बताया और स्टालिन के बयान से खुद को आघात पहुँचने का आरोप लगाया। शिकायत में आगे दोनों वकीलों ने उदयनिधि स्टालिन के बयान को विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता फैलाने वाला और सामाजिक सौहार्द्र को बिगाड़ने वाला बताया है। इस हरकत को जानबूझकर की गई बताते हुए इसकी मंशा लोगों की आस्था को चोट पहुँचाना बताई गई है।
शिकायत में आगे 5 सितंबर 2023 को एक अन्य समाचार पत्र में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे के बयान का भी जिक्र किया गया है। प्रियांक खड़गे पर एक भाषण के दौरान उदयनिधि स्टालिन के बयान का समर्थन करने और सनातन धर्म को बीमारी बताने का आरोप लगाया गया है।
FIR Copy
प्रियांक खड़गे कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज्यमंत्री हैं, जबकि उदयनिधि स्टालिन तमिलनाडु में युवा कल्याण और खेल विकास मंत्री हैं। एडवोकेट हर्ष और राम सिंह ने दोनों आरोपितों पर कार्रवाई की माँग की है।
पुलिस ने इस शिकायत पर उदयनिधि स्टालिन और प्रियांक खड़गे पर IPC की धारा 153A व 295A के तहत FIR दर्ज कर ली है। इंस्पेक्टर नरेश कुमार इस मामले की जाँच कर रहे हैं। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।
बताते चलें कि उदयनिधि स्टालिन की आपत्तिजनक बयानबाजी के बाद पूरे देश में उनके खिलाफ लोगों में गुस्सा है। हजारीबाग़ में स्टालिन के पुतले के पीछे बाँस घुसेड़ कर प्रदर्शन हुआ है। उत्तराखंड में भी उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई है।
हर साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर सोशल मीडिया में एक कहानी वायरल होने लगती है। यह कहानी उर्दू की लेखिका इस्मत चुगताई से जुड़ी है। इसे बीबीसी ने 2018 में जन्माष्टमी के मौके पर प्रकाशित किया था। यह कहानी चुगताई की आत्मकथा ‘क़ाग़ज़ी है पैरहन’ से लिया गया है। यह कहानी उर्दू लेखिका के जन्माष्टमी से जुड़े अनुभवों के बारे में बताती है।
इसमें चुगताई ने पड़ोस के लाला जी के घर में जन्माष्टमी के आयोजन के बारे में बताया है। लाला जी की बेटी सुशी के बारे में बताया है, जिससे बचपने में उनकी दोस्ती थी। यह कबूल किया है कि सुशी गोश्त नहीं खाती थी। लेकिन धोखे से उसे गोश्त खिलाकर लेखिका को बचपन में बड़ा इत्मीनान होता था।
बीबीसी ने उर्दू लेखिका का यह संस्मरण ‘जब इस्मत चुग़ताई पर लगा कान्हा को चुराने का इल्ज़ाम’ शीर्षक से प्रकाशित किया है। इसके अनुसार चुगताई ने आत्मकथा में लिखा है कि जन्माष्टमी के दिन सुशी के घर उन्हें चंदन और चावल का तिलक लगा दिया गया तो वे उसे मिटा देना चाहती थी। इसमें कहा गया है, “फल, दालमोट, बिस्कुट में इतनी छूत नहीं होती, लेकिन चूँकि हमें मालूम था कि सूशी गोश्त नहीं खाती इसलिए उसे धोखे से किसी तरह का गोश्त खिलाके बड़ा इत्मीनान होता था। हालाँकि उसे पता नहीं चलता था, मगर हमारा न जाने कौन-सा जज़्बा तसल्ली पा जाता था।”
चुगताई ने बताया है कि बकरीद के दौरान उनका सुशी से नाता टूट जाता था। बकरे उनके घर के अहाते के पीछे टट्टी खड़ी कर काटे जाते थे और कई दिन तक गोश्त बाँटा जाता था। बीबीसी के मुताबिक चुगताई ने लिखा है कि जन्माष्टमी का जश्न दोस्त सूशी के घर काफी धूमधाम से मनाया जाता था। पकवानों की खुशबू को सूँघकर वह उसके घर जाती हैं। सुशी से पूछती हैं कि क्या है, तो वह जवाब में कहती है- भगवान आए हैं।
इस्मत के मुताबिक, इसी दौरान वहाँ पर सभी को टीका लगी रहीं एक औरत उनके माथे पर भी टीका लगा गई। उन्होंने सुना था कि जहाँ टीका लगता है तो उतना गोश्त जहन्नुम को जाता है। यही सोचकर उसे उन्होंने मिटाना चाहा, लेकिन अचानक वह रुक गई। इस बीच माथे पर टीका लगा होने की वजह से वो बेधड़क पूजाघर में गईं, जहाँ भगवान बिराज रहे थे।
वो लिखती हैं कि पूजाघर में चाँदी के पालने में झूला झूल रहे भगवान श्रीकृष्ण को उठाकर उन्हें अपने सीने से लगा लिया, लेकिन इसी बीच सुशी की नानी ने उन्हें ऐसा करते हुए पकड़ लिया और वहाँ से हटाकर बाहर कर दिया।
वो लिखती हैं कि इस घटना के कई साल गुजरने के बाद जब वो अलीगढ़ से आगरा वापस गई तो वह सुशी की हल्दी की रस्म में गई। इस दौरान वो उसी कमरे में गईं, जहाँ जन्माष्टमी के दिन श्रीकृष्ण का मंदिर बना था। तब इस वाकए को यादकर उन्होंने लिखा, “सुशी ने अलमारी खोली और मिठाई की थाली निकाली। मैं लड्डू हाथ में लेने लगी कि बाहर जाकर कूड़े पर फेंक दूँगी। जो हमसे छूत करे, हम उसका छुआ क्यों खाएँ, लेकिन सुशी ने कहा मुँह खोल और मैंने मजबूरन लड्डू कतर लिया। बाक़ी का बचा हुआ लड्डू सुशी ने मुँह में डाल लिया।”
वो लिखती है कि देर तक हम बचपन की बातों को याद कर हँसते रहे। चलते वक्त सुशी ने एक छोटी सी पीतल की घुटनों चलती भगवान कृष्ण की मूर्ति उनकी हथेली पर रख दी। उन्हें ये मूर्ति देते वक्त दोस्त ने कहा, “ले चुड़ैल! अब तो तेरे कलेजे में ठंडक पड़ी।” इस पर उन्होंने आगे लिखा, “मैं मुस्लिम हूँ और बुतपरस्ती इस्लाम में गुनाह है।” गौरतलब है कि इस्मत चुगतई मशहूर उर्दू लेखिका थीं। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के बदायूँ जिले में वर्ष 1915 में हुआ था और उनकी मौत साल 1991 में हुई थी।
सनातन धर्म को खत्म करने की बात करने वाले तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि के खिलाफ देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इसी क्रम में झारखंड के हजारीबाग में सोमवार (4 सितम्बर 2023) को हिन्दू संगठनों ने उदयनिधि का पुतला दहन किया। विरोध प्रदर्शन के दौरान उदयनिधि के पुतले के पीछे बाँस घुसेड़ दिया गया। साथ ही पुतले पर चप्पल बरसाए गए। उत्तराखंड में भी उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बिहार के हजारीबाग जिले में यह विरोध-प्रदर्शन गाँव बाबू में हुआ। दर्जनों की तादाद में हिन्दू युवाओं का हुजूम जुलूस की शक्ल में पुतले के साथ सड़कों पर उतरा। इस दौरान एक युवक स्टालिन का मुखौटा पहने हुए चल रहा था। उसके गले में चप्पलों की माला थी। इसी दौरान उदयनिधि के पुतले के पीछे एक प्रदर्शनकारी ने बाँस घुसेड़ रखा था। कुछ देर नारेबाजी के बाद स्टालिन के पुतले को चप्पलों और थप्पड़ों से पीटा गया। फिर उसे आग के हवाले कर दिया गया। प्रदर्शनकरियों कहा कि करोड़ों वर्षों से सनातन को कोई मिटा नहीं पाया, बल्कि इसे मिटाने वाले खुद मिट गए।
प्रदर्शन में शामिल एक व्यक्ति ने स्टालिन को 2 कौड़ी का नेता बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान गलती नहीं बल्कि सोची-समझी साजिश के तहत दिए जा रहे हैं। स्टालिन के पुतले को हवा में उछालते हुए एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा, “देखो इसके पिछवाड़े में कैसे बाँस किया जा रहा है। सत्य सनातन धर्म पर अगर तुम कुठाराघात करोगे और हमारे धर्म को मिटाने की बात करोगे तो तुम्हारे पिछवाड़े में इसी प्रकार से बाँस कर देंगे।” इसका वीडियो भी सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है।
This is how you take "Udta hua baans".
Chad H!ndus of Hazaribagh protesting against Udaynidhi Stalin for his insulting remarks on H!nduism. pic.twitter.com/GGBraOXpn9
झारखंड के अलावा उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ उत्तराखंड में भी शिकायत दर्ज करवाई गई है। मंगलवार (5 सितम्बर 2023) को उत्तराखंड के देहरादून जिले के थाना नेहरू कॉलोनी में देवभूमि रक्षा अभियान संगठन ने उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ पुलिस को शिकायत दी। शिकायत करने गए अनिल हिन्दू सनातनी ने ऑपइंडिया को बताया कि उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी तक उनका अभियान जारी रहेगा।
प्रदर्शनकारियों ने कहा, “जिस नेता ने सनातन धर्म पर टिप्पणी की है वो अपने बाप के नाम वाले कॉलम में अज्ञात लिखता है।” एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा, “सनातन धर्म से ही तू पैदा हुआ है। अपने बाप और दादा से पूछ ले।”
18 से 22 सितंबर तक संसद का विशेष सत्र होना है। इसका एजेंडा केंद्र सरकार ने अभी स्पष्ट नहीं किया है। लेकिन कयासों का दौर जारी है। इन कयासों में से एक देश का नाम बदलकर ‘भारत’ रखना भी है। लेकिन मोदी सरकार के मंत्री अनुराग ठाकुर ने इसे खारिज किया है। इसे अफवाह बताया है।
केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान कहा, “मुझे लगता है कि जो कुछ चल रहा है वह महज अफवाह। मैं बस इतना कहना चाहता हूँ कि जो कोई भी भारत शब्द पर आपत्ति जताता है, वह साफ तौर से उसकी मानसिकता को दर्शाता है।” जी20 डिनर पार्टी के लिए राष्ट्रपति भवन के न्योते को लेकर ठाकुर ने कहा, “वे भारत की राष्ट्रपति हैं, इसलिए निमंत्रण पत्र पर भारत के राष्ट्रपति लिखा। ऐसा लिखा तो क्या हो गया?”
उन्होंने कहा, “मैं भारत सरकार में मंत्री हूँ। इसमें नया कुछ भी नहीं है। G20-2023 (ब्रांडिंग, लोगो) पर भारत और इंडिया दोनों लिखा होगा। तो फिर भारत नाम पर आपत्ति क्यों? भारत से किसी को आपत्ति क्यों है? इससे उनकी मानसिकता का पता चलता है कि वे दिल से इंडिया या भारत के खिलाफ हैं। विलायत में जाते हैं तो भारत की निंदा करते हैं। जब वे भारत में होते हैं तो उन्हें भारत के नाम पर आपत्ति होती है।”
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “इसे किसने गिराया है? (भारत शब्द) किसी ने इसे छोड़ा नहीं है। भले ही आप G20 ब्रांडिंग को देखें यह इंडिया 2023 और भारत है। भारत लिखे जाने पर किसी को आपत्ति क्यों होनी चाहिए? यह ब्रांडिंग पिछले एक साल से की जा रही है।”
उल्लेखनीय है कि 5 सितंबर को मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि विशेष सत्र के दौरान देश का नाम ‘India’ हटा कर सिर्फ ‘भारत’ रखे जाने की योजना है। G20 के डिनर के लिए राष्ट्रपति भवन की तरफ से भेजे गए निमंत्रण पत्र में ‘प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया’ की जगह ‘प्रेसिडेंट ऑफ भारत’ लिखे जाने से इसको बल मिला था। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक ट्वीट में लिखा, “भारत का का गणतंत्र: मैं खुश और गर्वित हूँ कि हमरी सभ्यता अमृत काल की तरफ बढ़ रही है।” इसके बाद सोशल मीडिया में भी ‘भारत’ ट्रेंड करने लगा था।
भाजपा के राज्यसभा सांसद सुशील मोदी ने लालू यादव के सावन में मटन खाने पर हमला बोला था। सुशील मोदी का यह बयान JAP नेता पप्पू यादव को रास नहीं आया। उन्होंने सुशील मोदी से सवाल करते हुए कहा है कि नेता सावन में पॉर्न देखते हैं। क्या यह नॉनवेज नहीं है? उन्होंने सुशील मोदी से अपना फोन चेक करवाने के लिए भी कहा।
‘जन अधिकार पार्टी (JAP)’ के नेता पप्पू यादव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई थी। इस दौरान पत्रकारों ने उनसे लालू यादव के सावन में नॉनवेज खाने पर सुशील मोदी द्वारा दिए गए बयान को लेकर सवाल किया। इस पर पप्पू यादव भड़क गए। उन्होंने कहा, “ये जो नॉनवेज-नॉनवेज करते हैं। जरा सुशील भाई से पूछिए कि मंगल, बुध और सावन में इनको माल मिलेगा, तो छोड़ेंगे? नेता पॉर्न देखना छोड़ते हैं? सावन में पॉर्न क्यों देखते हैं नेता लोग, वो नॉनवेज नहीं है। पॉर्न देखना नॉनवेज नहीं है? दारू पीना नॉनवेज नहीं है?”
"सावन में पॉर्न क्यों देखता है नेता लोग? वो नॉनवेज नहीं है?"
पप्पू यादव ने आगे कहा कि सभी नेता लोगों के मोबाइल चेक कीजिए, पता चल जाएगा कि कोरोना में कितने लोगों ने पॉर्न देखा और सावन में हर रोज कितने लोगों ने पॉर्न देखा। उन्होंने यह भी कहा, “सुशील भाई आपसे आग्रह है कि आप अपना भी मोबाइल चेक करा लीजिए, पोर्न देखे हैं कि नहीं।
दरअसल, यह पूरा मामला राहुल गाँधी और लालू यादव के मटन वाले वीडियो से जुड़ा हुआ है। मुंबई में इंडिया गठबंधन की बैठक के बाद कॉन्ग्रेस ने सितंबर को सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया था। इस वीडियो में लालू यादव राहुल गाँधी को बिहार का खास ‘चंपारण मटन’ बनाने का तरीका सिखाते नजर आए थे। इसको लेकर सुशील मोदी ने लालू यादव पर हमला करते हुए कहा था कि इस पाप की सजा उनकी पार्टी आरजेडी को जरूर मिलेगी। उनकी पार्टी नई संसद का चेहरा भी नहीं देख पाएगी।
बता दें कि इससे पहले 22 मार्च, 2023 को पप्पू यादव का एक वीडियो सामने आया था। उसमें उन्होंने कहा था कि विधानसभा से लेकर लोकसभा तक सब नेता पोर्न देखते हैं। उन्होंने यह भी पूछा था कि भोजपुरी फिल्म पोर्न नहीं है तो क्या है? साथ ही कहा था कि 92% लोग पोर्न देखते हैं। अगर ऐसा सच न हो तो नाम बदल दीजिएगा। सभी नेता इसमें शामिल हैं।
इन दिनों सोशल मीडिया पर उत्तराखंड के ऋषिकेश में मजारों को ध्वस्त करने के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। कुछ हैंडलों पर इसे LIVE भी किया गया है। वीडियो वायरल होने के बाद मुस्लिम तबके के कुछ लोग इस मामले में प्रशासन से कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। वहीं ‘देवभूमि रक्षा अभियान’ के स्वामी दर्शन भारती ने अपने संगठन द्वारा मजारों को तोड़े जाने की जिम्मेदारी भी ली है। ऑपइंडिया ने उन लोगों से सम्पर्क किया जिन्होंने मजारों के ध्वस्तीकरण की जिम्मेदारी ली है। उन्होंने अपनी कार्रवाई को पूरी तरह से कानून के दायरे में बताते हुए हमसे अपने काम को एक बड़ी साजिश के खिलाफ संघर्ष का नाम दिया।
ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों में मजारों के खिलाफ हल्लाबोल की शुरुआत करने की जिम्मेदारी एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रभूषण शर्मा ने ली है। ऑपइंडिया से मंगलवार (5 सितंबर, 2023) को हुई बातचीत के दौरान उन्होंने हमें विस्तार से पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस अभियान की शुरुआत उन्होंने पिछले माह 26 अगस्त से की थी।
ऋषिकेश व आस-पास घरों में 200 से अधिक मजारें
चंद्रभूषण शर्मा ने दावा किया कि प्राइवेट नौकरी के दौरान फील्ड में रह कर उन्होंने पाया कि ऋषिकेश व आसपास 200 से अधिक मजारें घरों के अंदर बन चुकी हैं। इन्हें हिन्दू धर्म के पूर्व सैनिक, व्यापारी और यहाँ तक कि मंदिर के पुजारियों तक ने अपने घरों में बनवा रखा था। कुछ मजारें बनाने वालों के घर तक ही सीमित थीं जबकि कई अन्य तो धीरे-धीरे सार्वजनिक रूप ले चुकी थीं। यहाँ कव्वाली आदि बजा कर सालाना उर्स मनाया जा रहा था और बाहरी लोग नमाज़ पढ़ने लगे थे।
मंदिर के पुजारी के रूप मे उन्होंने मनसा देवी मंदिर ऋषिकेश के पुरोहित का नाम लिया जिनके घर लगभग 10 साल से अंदर ही अंदर मजार बनी थी। दावा है कि पुरोहित इसे पीर बाबा-शिव बाबा नाम से प्रचारित करते थे। चंद्रभूषण शर्मा के मुताबिक, शुरुआत में काफी विरोध के बाद आखिरकार पुजारी ने मजार तोड़ने के लिए अपनी सहमति दे दी थी। उन्होंने बताया कि एक पूर्व सैनिक ने तो हाइवे के किनारे ही इतनी बड़ी जमीन में मजार बनवा रखी थी जहाँ कम से कम 3 दुकानें बन जातीं।
ऋषिकेश के कई हिस्सों में फैला है जाल
जिन मजारों को 27 अगस्त से 3 सितंबर के बीच ध्वस्त किया है, वो ऋषिकेश के अमित ग्राम, मनसा देवी वार्ड और सुमन विहार इलाके में हैं। चंद्रभूषण शर्मा ने बताया कि ये अभियान अभी आगे भी तब तक जारी रहेगा जब तक ऋषिकेश मजार मुक्त नहीं हो जाता। साथ ही उन्होंने कहा कि यह काम अपने खुद के पैसे और जनसहयोग से किया जा रहा है जिसमें अगली कार्रवाई की जानकारी किसी को भी नहीं दी जाती। आगे भी अवैध मजारों को वैध तरीके से तोड़ने की बात खुद को इस अभियान में सक्रिय भागीदार बताने वाले ऋषिकेश के अनिल कुमार ने भी कही। हमें बताया गया कि घर के अंदर मजार वाली साजिश से ऋषिकेश शहर और 5 किलोमीटर का इलाका बुरी तरह से प्रभावित है।
अनिल कुमार द्वारा भेजी गई तस्वीर
दरगाहों पर रची जाती है साजिश
चन्द्रभूषण शर्म ने हमें बताया कि जो लोग किसी वजह से छोटी-छोटी बातों से परेशान हो कर दरगाहों पर जाते हैं वहाँ उन्हें घर में मजार बनाने की सलाह दी जाती है। दरगाह के नाम पर चंद्रभूषण ने खासतौर पर रुड़की की पिरान कलियर का नाम लिया। यहाँ उन्हें न सिर्फ घर में मजार बनाने वाले कारीगर दिए जाते हैं बल्कि बाद में अंदर ही अंदर इबादत करने के लिए नमाज़ी टोपी सहित इस्लामी वेशभूषा भी दी जाती है। शर्मा का दावा है कि इसी जगह पर उन्हें इबादत की ट्रेनिंग आदि भी मिलती है।
शर्मा ने बताया कि मंदिर के पुरोहित और सैनिक सहित अन्य व्यापरी भी दरगाहों पर बताए कानून से अंदर ही अंदर इबादत करते थे।
हर ध्वस्तीकरण की लिखित सहमति
हमने चंद्रभूषण शर्मा से सवाल किया कि मजारों पर हथौड़े चलाने पर क्या उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही। इस सवाल के जवाब में शर्मा ने कहा कि उन्होंने इस कार्रवाई की लिखित अनुमति और सहमति उन मकान मालिकों से ले रखी है जिन्होंने किसी की बातों में आ कर घर में मजार बनवा ली थी। शर्मा ने यह भी कहा कि ऋषिकेश को मजार मुक्त करने के अभियान से पहले उन्होंने सभी कानूनी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया था।
सहमति पत्र
घरों में बनी मजारों के ध्वस्तीकरण के अभियान में शामिल एक अन्य व्यक्ति अनिल कुमार ने भी बताया कि उन्होंने घर मालिकों से इसकी अनुमति और सहमति ले रखी थी। अनिल कुमार ने हमें कुछ मकान मालिकों के सहमति पत्र भी भेजे। इस सहमति पत्र में स्वेच्छा और हिन्दू धर्म के सम्मान में अपने घर से मजारों को हटाने की अनुमति लिखी हुई है। साथ ही भविष्य में दोबारा ऐसा कृत्य न करने व कभी न्यायालय आदि न जाने की घोषणा की गई है। सहमति पत्र की शुरुआत ‘श्री गणेशाय नमः’ से की गई है।
कुछ धर्मान्तरित हिन्दू ही हैं साजिश के संचालक
चंद्रभूषण शर्मा ने बताया कि ऋषिकेश में फ़ैल रहा मजारों का जाल पिछले 30 सालों से शुरू हुआ है। पिछले हफ्ते जो मजारें तोड़ी गईं हैं उनमे से कुछ 2 दशक पुरानी हैं। हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 5 से 6 साल के बीच तो अंधाधुंध मजारें बनी हैं। इसके पीछे चंद्रभूषण ने कुछ ऐसे हिन्दुओं को सक्रिय बताया जो अंदर ही अंदर धर्म परिवर्तन कर चुके हैं। नाम न बताने की शर्त पर उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति का जिक्र किया है जो पहले हिन्दू था लेकिन अब वह इस्लामी रंग-ढंग में रहता है। शर्मा ने कहा कि अथाह पैसे का मालिक और बाउंसरों की सुरक्षा में चलने वाला वह व्यक्ति अब हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान कर के लोगों को अपने में मिलाने का प्रयास करता है।
चन्द्रभूषण शर्मा ने इस अभियान में शामिल अपने अन्य साथियों का नाम बताने से इंकार कर दिया। उन्होंने निकट भविष्य में इसे गति देने का भी एलान किया और लोगों से जागरूकता की अपील की।
जिसने बनवाई मजार उसी की बीवी से लव जिहाद
ऑपइंडिया ने इस मामले में देवभूमि रक्षा अभियान के संरक्षक स्वामी दर्शन भारती से बात की। स्वामी दर्शन भारती ने हमें बताया कि ऋषिकेश के जिस अमित ग्राम इलाके में सबसे अधिक मजारें घर में बनी हैं वहाँ के एक मकान में लव जिहाद की घटना घट चुकी है। दर्शन भारती ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि उस हिन्दू परिवार ने लगभग 15 साल पहले घर में मजार बनवाया था जिसका पति इबादत ही करता रह गया और उसकी बीवी मुस्लिम के साथ भाग गई। स्वामी के अनुसार यह घटना लगभग 5 साल पुरानी है।
प्रशासन जता चुका है लाचारी
मजारों के खिलाफ खुद से कार्रवाई के सवाल पर स्वामी दर्शन भारती ने हमें बताया कि उन्होंने इस बाबत पहले प्रशासन से ही बात की थी। उन्होंने दावा किया कि मजारों को निजी मकानों में स्वेच्छा से बने होने की बात कह कर प्रशासन ने किसी भी कार्रवाई में असमर्थता जताई थी। संगठन द्वारा चलाए जा रहे अभियान को उन्होंने कानूनी और अंतिम विकल्प बताया। साथ ही उन्होंने इसे बेहद खतरनाक साजिश बताते हुए कहा कि पहाड़ियों के खिलाफ अंदर ही अंदर पहाड़ी ही खड़े कर दिए गए।
साधु-संतों में मुस्लिमों का डर
धर्मनगरी ऋषिकेश में चुपके से इतनी मजारें बन जाने के पीछे स्वामी दर्शन भारती ने वहाँ तमाम संतों में मुस्लिमों का डर बताया। उन्होंने इस डर को कइयों की मजबूरी कहा और आगे से अवैध मज़ार विरोधी अभियान में शामिल होने की अपील की।
पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय पर हमले की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। अब पंजाब प्रांत के फैसलाबाद जिले में ईसाई पादरी को गोली मारने की घटना सामने आई है। पीड़ित की पहचान एलियाजर सिद्धू के रूप में हुई। आरोप है कि कट्टरपंथी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान के सदस्य पादरी पर इस्लाम कबूलने का दबाव बना रहे थे। मना करने पर उन लोगों ने पादरी को गोली मार दी।
डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, मामला पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में फैसलाबाद जिले की जरानवाला तहसील का है। यहाँ के म्योंग-सांग-नोसेर्थ चर्च में पादरी एलियाजर सिद्धू 2 सितंबर, 2023 की रात करीब 9:30 बजे घर लौट रहा था। इसी दौरान उस पर हमला हो गया। हमले में गोली उसके कंधे पर जा लगी। इससे वह जमीन पर गिर गया। गोली की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुँचे और उसे को हॉस्पिटल में भर्ती कराया। फिलहाल पादरी की हालत स्थिर है और उसे हॉस्पिटल से छुट्टी मिल गई है।
बीएसीएस से बातचीत में पादरी एलियाजर सिद्धू ने कहा है, “मुझ पर आतंकी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान के आतंकियों ने हमला किया। मैं बाइक से जा रहा था। तभी दो लोगों ने बीच रास्ते में बाइक खड़ी कर मुझे जबरन रोक दिया। इसके बाद हमलावरों ने मुझे कलमा पढ़ने के लिए कहा। लेकिन मैंने मना कर दिया। इस पर उन्होंने ‘लब्बैक या रसूल अल्लाह’ का नारा लगाते हुए गोली चला दी। गोली कंधे पर लगी इससे मैं गिर गया।”
पादरी ने यह भी कहा है कि इस हमले से कुछ दिन पहले वह अपने बेटे को स्कूल छोड़ने जा रहा था। इसी दौरान दाढ़ी वाले कुछ लोगों ने उसे धमकी देते हुए कहा था, “जिस तरह से चर्च की दीवार लिखे नारे हटा दिए गए हैं। उसी तरह तुम्हें भी जल्द ही हटा दिया जाएगा।”
गौरतलब है कि गत माह 16 अगस्त को फैसलाबाद के जरानवाला तहसील में ही इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ ने ईसाइयों को निशाना बनाकर हमले किए थे। इस हमले में 21 चर्चों में आगजनी और तोड़फोड़ की गई थी। वहीं ईसाइयों के कई दर्जन घरों पर हमला हुआ था। इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 135 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं करीब 600 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। गिरफ्तार किए गए लोगों में तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान के सदस्य भी शामिल हैं।
असम के उदलगुरी जिले में तैनात सहायक सत्र न्यायाधीश शाह सैयद अहदुर रहमान सोमवार (4 सितंबर, 2023) से हिंदू समुदाय और भारतीय सेना पर किए अपने ट्वीट को लेकर आलोचनाओं के घेरे में है। उनके ये ट्वीट सोशल मीडिया पर वायरल हैं। वो 2002 से असम न्यायिक सेवा के न्यायिक अधिकारी है और इससे पहले राज्य के शिवसागर जिले में उप-विभागीय न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसडीजेएम) के तौर पर अपनी सेवाएँ दे चुके हैं।
शाह सैयद अहदुर्रहमान का ट्वीट
उन्होंने नवंबर 2021 में एक ट्वीट में दावा किया था, “कश्मीर में तैनात भारतीय सेना सांप्रदायिक है। कश्मीर में जिंदगियाँ अहमियत रखती हैं।” सहायक सत्र न्यायाधीश (उदलगुरी) ने कश्मीरी आतंकियों को ‘लड़ाका’ बताते हुए उनके लिए अपना समर्थन जताया था।
शाह सैयद अहदुर्रहमान का ट्वीट
शाह सैयद अहदुर रहमान को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में तैनात भारतीय सशस्त्र कर्मियों की ईमानदारी पर भी सवाल उठाते देखा गया। उन्होंने आरोप लगाया था, “कभी-कभी सेना तटस्थ नहीं होती है। मैंने कश्मीर में पहली बार एक विश्वविद्यालय छात्र के तौर दौरा करते हुए इसका सामना किया।”
ट्वीट कर हिंदू धर्म पर हमले
भारतीय सेना के खिलाफ अफवाह फैलाने के अलावा, उन्हें अपने ट्वीट्स में हिंदू समुदाय को भी निशाना बनाया है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगे भड़कने के दिनों में जज रहमान ने ट्वीट किया था, “ब्राह्मणों, भागो।”
शाह सैयद अहदुर्रहमान का ट्वीट
शाह सैयद अहदुर्रहमान ने इस्लामवादियों के हमले के बाद हिंदू समुदाय का मजाक बनाया था। उन्होंने मजाक उड़ाते हुए कहा, “हिंदू खतरे में है, अलार्म अभी जरूरी हो गया है।”
शाह सैयद अहदुर्रहमान का ट्वीट
उन्होंने ये झूठा दावा भी किया था कि भारत खाड़ी देशों को गोमाँस (बीफ) निर्यात कर रहा है और हिंदू ऐसे कारोबार के टॉप पर हैं। वास्तव में, भारत से केवल कैरबीफ (भैंस का मांस) निर्यात किया जाता है, भाजपा मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2017 में इस तथ्य की पुष्टि की थी।
शाह सैयद अहदुर्रहमान का ट्वीट
इस साल जुलाई के अपने ट्वीट में जज रहमान ने तंज किया, “और आजकल हिंदू ख़तरे में हैं! करीबी मुठभेड़ में उन्हें मुस्लिमों द्वारा गोली मार दी जाएगी।”
शाह सैयद अहदुर्रहमान का ट्वीट
पूर्वाग्रह से ग्रस्त सहायक सत्र न्यायाधीश ने यह भी दावा किया, “देखो में एक जज हूँ और मैं इस नतीजे पर पहुँचा हूँ कि अपराध का ग्राफ देखिए, लोन चुकाने में चूकने वाले सबसे बड़े बकाएदारों में हिंदू हैं। बलात्कार का ग्राफ देखिए, ये हिंदू ही है। जाति के आधार पर अपराध के राष्ट्रीय आँकड़े देखें।” उनके इन ट्वीट्स में उनकी विक्षुब्ध मानसिकता की झलक दिखती है।
ट्विटर पर एक हिंदू हैंडल को जवाब देते हुए, उन्होंने दावा किया, “मुझे तुमसे सबक लेने की जरूरत नहीं है और तुम्हें इतनी फिक्र क्यों हो रही है। कहाँ से तुमने खोजा की भारत हिंदुओं के लिए है, तुम इतना भी नहीं जानते कि हिंदू शब्द के क्या मायने हैं। आलोचना करने से पहले अपने दिमाग को सकारात्मक भावनाओं से साफ करें, आपने वृन्दावन में सेक्स स्लेव क्यों रखे हैं।”
शाह सैयद अहदुर्रहमान का ट्वीट
यही नहीं, जज शाह सैयद अहदुर्रहमान ने गैंगस्टर अतीक अहमद की हत्या को ‘हिंदू आतंकवाद’ का नाम देने से भी गुरेज नहीं किया। उन्होंने कहा, “पलभर में ही आंतकवाद का काम उनके जय श्री राम बोलने से साहसपूर्ण काम में बदल गया। यहाँ जेएसआर का क्या मतलब है, ये हिंदू आतंकवाद है।”
शाह सैयद अहदुर्रहमान का ट्वीट
उन्हें हिंदू साधु-संतों के खिलाफ नफरत उगलते भी देखा गया। उन्होंने दावा किया था, “मौलवी और मुफ्ती कभी भी नफरत फैलाने वाले भाषणों में शामिल नहीं रहे हैं या हिंदू महिलाओं को बलात्कार की धमकी नहीं दी है। शायद कभी नहीं। केवल सम्मानित हिंदू बाबाओं को याद दिलाने के लिए।”
शाह सैयद अहदुर्रहमान का ट्वीट
रहमान ने सुझाव दिया, “सम्मानित हिंदू बाबाओं के लिए बस याद दिलाने के लिए कि हिंदू समुदाय के आध्यात्मिक नेताओं के बीच ऐसी टिप्पणियाँ आम थीं। उन्होंने एक अन्य ट्वीट में यह भी कहा,”अब आध्यात्मिक गुरु संभावित बलात्कारी हैं।”
एक मौजूदा न्यायाधीश की राजनीतिक टिप्पणी
उदलगुरी में सहायक सत्र न्यायाधीश शाह सैयद अहदुर रहमान ने सोशल मीडिया पर राजनीतिक बयान देने में भी कसर नहीं छोड़ी। इसमें उन्होंने अपने न्यायिक पेशे के सहयोगियों को भी नहीं बख्शा। उन्होंने पूर्व भाजपा प्रवक्ता नुपुर शर्मा को घेरने साथ ही अयोध्या फैसले के लिए न्यायमूर्ति अब्दुल नज़ीर के किरदार पर तोहमत लगाई।
शाह सैयद अहदुर्रहमान का ट्वीट
उन्होंने ट्वीट में दावा किया, “सऊदी किंग ने मोदी को फोन किया और आरएसएस आतंकवादियों के बारे में अपनी नाराजगी जाहिर की। मोदी ने अपना मूड बदल लिया।” उन्होंने अन्य मुस्लिमों की तरह ही सोशल मीडिया पर पूर्व भाजपा नेता नुपुर शर्मा के लिए नफरत फैलाते देखा गया। उन्होंने ट्वीट किया, “नुपुर शर्मा को गिरफ्तार करो।”
उन्होंने एक अन्य ट्वीट में दिल्ली पुलिस पर सवाल दागा , “दिल्ली पुलिस, आपको नुपुर को गिरफ्तार न करने के लिए किसने प्रोत्साहित किया।” इस साल फरवरी में, शाह सैयद अहदुर्रहमान को राम जन्मभूमि फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट के एक रिटायर्ड जज के चरित्र हनन में शामिल देखा गया था।
उन्होंने ट्वीट किया, “उन्हें (जस्टिस अब्दुल नज़ीर) यह पहले से पता था, न्यायपालिका पहले ऐसी नहीं थी, इन सज्जन ने राम मंदिर के पक्ष में फैसला देकर न्यायपालिका की रीढ़ को नष्ट कर दिया, जहाँ कोई सबूत नहीं था।”
शाह सैयद अहदुर्रहमान का ट्वीट
दिलचस्प बात यह है कि सोमवार (4 सितंबर) को रहमान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह जानकारी दी कि अतिरिक्त जिला न्यायाधीश/जिला न्यायाधीश के पद के लिए उनके नाम पर विचार किया जा रहा है।
शाह सैयद अहदुर्रहमान की ‘संदिग्ध निष्ठा’
ऑपइंडिया ने पाया कि जज रहमान ने मार्च 2015 में गुवाहाटी में न्यायालय के समक्ष एक याचिका दायर की थी। उन्होंने ये याचिका 2011 में असम न्यायिक सेवा में ग्रेड III अधिकारी से ग्रेड II में पदोन्नति के लिए उनके नाम पर विचार नहीं होने पर दायर की थी।
‘संदिग्ध सत्यनिष्ठा’ की वजह से 2012 में पदोन्नति के लिए उनका नाम सूची में नहीं था। अधिकारियों को जज रहमान पर नजर रखने के लिए भी कहा गया था। याचिकाकर्ता जज रहमान की निगरानी की बात कहने वाले प्राधिकारण ने टिप्पणी थी, ” याचिकाकर्ता जज रहमान को 2009, 2010 और 2011 की एसीआर (वार्षिक गोपनीय रोल) को बारे में सूचना दी गई थी।
शाह सैयद अहदुर्रहमान का ट्वीट
उन्हें वर्ष 2009 और 2010 में ‘अच्छा’ ग्रेड दिया गया था। वर्ष 2011 में उन्हें “ईमानदारीसंदिग्ध” टिप्पणी के साथ “औसत” ग्रेड दिया गया था।” हालाँकि बाद में, ‘ईमानदारी संदिग्ध’ वाली टिप्पणी को किसी तरह से हटा दिया गया, लेकिन अधिकारियों को जज रहमान को निगरानी में रखने के निर्देश को वार्षिक गोपनीय सूची में बरकरार रखा गया।
शाह सैयद अहदुर्रहमान का ट्वीट
सोमवार (4 सितंबर) को हिंदू विरोधी पृष्ठभूमि के बारे में पूछे जाने के बाद, शाह सैयद अहदुर रहमान ने दावा किया कि हिंदू समुदाय से उनके कई दोस्त हैं। उन्होंने कहा, ”मेरे अधिकतर दोस्त हिंदू समुदाय से हैं।” जैसा कि अपेक्षित था, रहमान को तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता और राज्यसभा सदस्य साकेत गोखले जैसे लोग फॉलो करते हैं। जिन्हें पहले प्रवर्तन निदेशालय ने क्राउडफंडिंग धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार किया था।
अनुच्छेद 370 (Article 370) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई पूरी हो गई है। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली 5 जजों की संविधान पीठ ने 16 दिन की सुनवाई के बाद मंगलवार (5 सितंबर, 2023) को फैसला सुरक्षित रख लिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुनवाई पूरी करने से पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि याचिकाकर्ता और केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील यदि किसी भी प्रकार की दलील देना चाहते हैं उन्हें 3 दिन का समय दिया जाता है। उन्हें दलील लिखित रूप में जमा करनी होगी। यह 2 पन्ने से अधिक नहीं चाहिए। केंद्र सरकार ने 5 अगस्त, 2019 को संसद में विशेष प्रस्ताव पारित कर जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 को खत्म कर दिया था। साथ ही राज्य को 2 केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बाँटने का भी फैसला लिया गया था।
इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 20 से अधिक याचिकाएँ दायर की गई थीं। इन याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में 5 जजों की संवैधानिक पीठ बनाई गई थी। इस पीठ में मुख्य न्यायाधीश के अलावा, न्यायमूर्ति एसके कौल, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत शामिल थे।
जम्मू-कश्मीर में 370 को फिर से बहाल करने के पक्ष में वकील कपिल सिब्बल, गोपाल सुब्रमणियम, राजीव धवन, जफर शाह, दुष्यंत दवे ने सुप्रीम कोर्ट में दलीलें दीं। वहीं अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, वकील हरीश साल्वे, राकेश द्विवेदी, वी गिरी ने केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के फैसले को सही बताया।
सुप्रीम कोर्ट ने उठाया था जम्मू-कश्मीर में ‘लोकतंत्र की बहाली’ का मुद्दा
अनुच्छेद 370 को लेकर हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 29 अगस्त को केंद्र सरकार से पूछा था कि जम्मू कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा कब बहाल किया जाएगा? इसके लिए समय सीमा और रोड मैप क्या है और वहाँ चुनाव कब कराए जाएँगे? इस पर सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट से कहा था कि जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया है लेकिन इसे पूर्ण राज्य बनाया जाएगा। इसके लिए काम भी किया जा रहा है।
कोर्ट ने यह भी पूछा था कि कब तक राज्य बनाया जाएगा और वहाँ चुनाव कब तक कराने जा रहे हैं? इसके लिए कोई रोड मैप है? जम्मू-कश्मीर स्थायी रूप से केंद्र शासित प्रदेश नहीं कर सकता। लोकतंत्र की बहाली जरूरी है। इस पर सॉलिसिटर जनरल मेहता ने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। वहीं, लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश ही रहेगा। राज्य की पुलिस और कानून व्यवस्था के अलावा बाकी सभी शक्तियाँ जम्मू-कश्मीर के पास ही हैं।
35A ने छीन लिए लोगों के मौलिक अधिकार
28 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अनुच्छेद 35A को साल 1954 में राष्ट्रपति के आदेश से संविधान में जोड़ा गया था। लेकिन इस अनुच्छेद ने देश के लोगों को 3 मौलिक अधिकार छीन लिए। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि अनुच्छेद 35A ने अनुच्छेद 16(1) के तहत सार्वजनिक नौकरियों में देश के अन्य राज्यों के लोगों से अवसर की समानता के अधिकार से वंचित कर दिया। अनुच्छेद 19(1)(F) लोगों को संपत्ति खरीदने का अधिकार देता है। लेकिन 35A के तहत यह भी नहीं हो सका।
इसके अलावा अनुच्छेद 19(1)(ई) लोगों को देश के किसी भी हिस्से में बसने का अधिकार देता है। लेकिन 35A ने यह अधिकार भी छीन लिया।