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जकार्ता से PM मोदी ने दिया ‘वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर’ का मंत्र, ASEAN को बताया भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का स्तंभ

दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के संगठन ASEAN का शिखर सम्मेलन इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में चल रहा है। 7 सितंबर 2023 से 20वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर’ का मंत्र दिया। आसियान को भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का केंद्रीय स्तंभ बताया।

पीएम मोदी ने कहा, “पिछले साल हमने भारत-आसियान मैत्री दिवस मनाया और इसे व्यापक रणनीतिक साझेदारी का रूप दिया। हमारी साझेदारी (भारत-इंडोनेशिया) चौथे दशक में पहुँच गई है। इस शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करना मेरे लिए गर्व और सम्मान की बात है। मैं इस शिखर सम्मेलन के आयोजन के लिए इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो को बधाई देना चाहता हूँ।”

21वीं सदी को एशिया का बताते हुए पीएम मोदी ने कहा है कि वैश्विक विकास में आसियान की भूमिका अहम है। आसियान में सभी देशों की आवाज सुनी जाती है और हम पूरी दुनिया में ग्लोबल साऊथ की आवाज उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मुझे यकीन है कि आज हमारी बातचीत से भारत और आसियान क्षेत्र के भावी भविष्य को और सुदृढ़ बनाने के लिए नए संकल्प लिए जाएँगे।

आसियान को भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का केंद्रीय स्तंभ बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत की इंडो-पैसिफिक पहल में भी आसियान क्षेत्र का प्रमुख स्थान है। वैश्विक अनिश्चितताओं के माहौल में भी हर क्षेत्र में हमारे आपसी सहयोग में लगातार प्रगति हो रही है। उन्होंने वसुधैव कुटुंबकम का जिक्र करते हुए कहा कि ‘वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर’ की भावना भारत की जी-20 अध्यक्षता की थीम है।

इससे पहले जकार्ता में भारतीय समुदाय के लोगों ने प्रधानमंत्री का भव्य स्वागत किया। गौरतलब है कि आसियान की स्थापना 1976 को हुई थी। मौजूदा वक्त में इसमें 10 देश शामिल हैं। इसका उद्देश्य दक्षिण-पूर्वी एशिया में राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक सहयोग स्थापित करना है। आसियान-भारत शिखर सम्मेलन के बाद पीएम मोदी 18वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। इसके बाद वह जी20 शिखर सम्मेलन के लिए दिल्ली लौटेंगे। भारत 9 और 10 सितंबर को जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है।

सनतान विरोधी बातें तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने की, पर नफरत फैलाने की FIR बीजेपी नेता अमित मालवीय पर

बीजेपी आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय पर तमिलनाडु में दर्ज की गई है। उन पर उदयनिधि स्टालिन के बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करने और नफरत फैलाने का आरोप है। उदयनिधि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे हैं।

उदयनिधि की सनातन विरोधी टिप्पणी को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा करते हुए मालवीय ने कथित तौर पर दावा किया था कि द्रमुक नेता और तमिलनाडु के मंत्री ने 80 प्रतिशत आबादी के ‘नरसंहार’ का आह्वान किया है। इसके खिलाफ सत्ताधारी डीएमके नेता की शिकायत पर 6 सितंबर को एफआईआर दर्ज की गई। यह एफआईआर जानबूझकर उदयनिधि की टिप्पणी को गलत तरीके से पेश करने और विभिन्न वर्गों के बीच वैमनस्य पैदा करने के आरोप में दर्ज की गई है।

यह FIR तिरुचिरापल्ली दक्षिण जिला की डीएमके शाखा के सदस्य व वकील केएवी दिनाकरन द्वारा त्रिची नगर पुलिस कमिश्नर को शिकायत दे कर दर्ज करवाई गई है। शिकायत में बताया गया है कि युवा कल्याण एवं खेल मंत्री उदयनिधि स्टालिन 2 सितम्बर 2023 को चेन्नई में तमिलनाडु प्रोग्रेसिव राइटर्स एंड आर्टिस्ट्स एसोसिएशन के सम्मेलन में विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। तब उदयनिधि ने सनातन धर्म के बारे में बात की और अपने भाषण का वीडियो ट्विटर पर शेयर किया था। शिकायत में आगे बताया गया है कि इस वीडियो को काट-छाँट कर गलत तरीके से पेश किया गया।

शिकायत के मुताबिक एडिट किए गए भ्रामक वीडियो से एक झूठा संदेश वायरल किया गया कि उदयनिधि ने सनातन धर्म मानने वाले 80% लोगों के नरसंहार का आह्वान किया है। DMK कार्यकर्ताओं के मुताबिक उदयनिधि स्टालिन ने कभी भी नागरिकों के नरसंहार का आह्वान नहीं किया। बताया गया कि स्टालिन ने सनातन के सिद्धांतों में मौजूद जाति और धार्मिक आधार पर होने वाले भेदभाव पर सवाल खड़ा किया और इससे प्रभावित लोगों की पैरवी की।

FIR Copy

स्टालिन के बयान पर सफाई पेश करते हुए इसी शिकायत में बताया गया है कि स्टालिन का कहना था कि जैसे कोरोना, डेंगू और मलेरिया सामाजिक नुकसान के लिए जिम्मेदार हैं, वैसे ही सनातन धर्म मनुष्यों के लिए हानिकारक है। शिकायतकर्ता ने अमित मालवीय पर अपने व्यक्तिगत लाभ और राजनैतिक स्वार्थ के लिए उदयनिधि स्टालिन के बयान को तोड़-मरोड़ कर वायरल करने का आरोप लगाया है। साथ ही इसे समुदायों के बीच नफरत व हिंसा फैलाने की साजिश करार दिया है।

शिकायतकर्ता दिनाकरन ने यह भी आरोप लगाया है कि अमित मालवीय के नेतृत्व में भाजपा लगातार यह वीडियो वायरल कर रही है, जिससे भाईचारा कमजोर हो रहा है। इस शिकायत पर त्रिची पुलिस ने अमित मालवीय पर IPC की धारा 153 (दंगा भड़काने के इरादे से जानबूझकर किया गया कार्य), 153 (ए) (विभिन्न वर्गों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना और एकता के लिए हानिकारक कार्य करना), 504 (जान-बूझकर इरादे से अव्यवस्था भड़काना), 505 के तहत मामला दर्ज किया है।

बताते चलें कि अपने बयान पर लगातार देशव्यापी विरोध होने के बावजूद उदयनिधि स्टालिन ने माफ़ी माँगने से इनकार किया था। उदयनिधि और उनका समर्थन करने वाले कॉन्ग्रेस नेता प्रियांक खड़गे के खिलाफ उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में FIR भी दर्ज हुई है।

‘G20 की अध्यक्षता सही समय पर सही हाथों में’: भारत आने से पहले बोले ऋषि सुनक- हिंदू होने के कारण भारत के लोगों से हमेशा जुड़ा रहूँगा

राजधानी दिल्ली में 9 और 10 सितंबर को G20 शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इस सम्मेलन में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक भी आएँगे। भारत आने से पहले सुनक ने कहा है कि G20 की अध्यक्षता सही समय पर सही देश के हाथ में है। पीएम मोदी की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा है कि भारत पूरी दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। खालिस्तानियों से निपटने के लिए ब्रिटेन और भारत साथ काम कर रहे हैं।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने समाचार एजेंसी PTI को दिए इंटरव्यू में कहा, “क्रिकेट की बात आती है तो मेरी बेटियाँ भारत का समर्थन करती हैं। वहीं फुटबॉल मैच में इंग्लैंड का समर्थन करती हैं। मुझे अपनी भारतीय जड़ों और भारत से अपने संबंधों पर बेहद गर्व है। मेरी पत्नी भारतीय हैं। एक गौरवान्वित हिंदू होने का मतलब है कि मेरा भारत और भारत के लोगों से हमेशा जुड़ाव रहेगा।”

सुनक ने प्रधानमंत्री बनने के बाद ब्रिटेन में अपनी पहली दीवाली को याद करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री बनने के बाद मैंने सबसे पहले डाउनिंग स्ट्रीट में दीवाली पर एक कार्यक्रम आयोजित किया था। वहाँ कई ब्रिटिश भारतीयों का स्वागत करने का अवसर मिला और इमारत को ऊपर से नीचे तक रोशनी और फूलों से सजाया हुआ देखना अविश्वसनीय था। यह मेरे लिए गर्व और भावुक कर देना वाला क्षण था।”

ब्रिटेन में तेजी से पैर पसारते खालिस्तानियों को लेकर पीएम सुनक ने कहा, “ब्रिटेन में किसी तरह का उग्रवाद स्वीकार नहीं है। मैं किसी भी प्रकार की हिंसक और विभाजनकारी विचारधाराओं को कंट्रोल करने के सरकार की स्थितियों को अच्छी तरह से समझता हूँ। हम खालिस्तान समर्थकों के चलते उत्पन्न खतरे से निपटने के लिए भारत सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “ब्रिटेन की पुलिस किसी भी हिंसक गतिविधि से निपटने में पूरी तरह सक्षम है। भारत में इस तरह की राय है कि खालिस्तान का मुद्दा भारत और ब्रिटेन के आपसी संबंधों को खराब कर रहा है, लेकिन ऐसा नहीं है।” भारत और ब्रिटेन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) यानि मुक्त व्यापार समझौते को लेकर सुनक ने कहा है कि यह समझौता तभी होगा, जब यह ब्रिटेन के हित में होगा। 

सुनक ने PM मोदी की तारीफ करते हुए कहा, “भारत का आकार, विविधता और इसकी असाधारण सफलताओं का अर्थ है कि यह G20 की अध्यक्षता के लिए सही समय और सही देश है। मैं बीते वर्षों से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करता रहा हूँ। भारत जिस प्रकार वैश्विक नेतृत्व कर रहा है, उसे देखना अद्भुत है।” 

‘इंडियन’ नहीं ‘भारत’… अक्षय कुमार ने बदल डाला फिल्म का नाम: बंगाल के कोयला खदान की कहानी, 34 साल पहले हुआ था ‘ग्रेट रेस्क्यू’

जब से मोदी सरकार ने देश के नाम के रूप में ‘भारत’ को प्राथमिकता देनी शुरू की है, तब से ये चर्चा चल रही है कि क्या 18 सितंबर को बुलाए जा रहे संसद के विशेष सत्र में देश का नाम ‘India’ हटा कर इसे सिर्फ भारत कर दिया जाएगा? विपक्षी दल इस पर जहाँ निशाना साधने में लगे हुए हैं, सोशल मीडिया में भी ‘इंडिया’ बनाम ‘भारत’ की बहस चालू है। इसी बहस के बीच अक्षय कुमार की आ रही नई फिल्म भी चर्चा का विषय बनी है। इस फिल्म में अक्षय कुमार सिख के किरदार में दिखाई दे रहे हैं।

अक्षय कुमार ने बुधवार (6 सितंबर, 2023) को अपनी नई फिल्म ‘मिशन रानीगंज: द ग्रेट भारत रेस्क्यू’ का पोस्टर जारी किया। बता दें कि पहले इस फिल्म का नाम ‘मिशन रानीगंज: द ग्रेट इंडियन रेस्क्यू’ रखा गया था, लेकिन ताज़ा विवाद के बीच ‘इंडियन’ को ‘भारत’ कर दिया गया है। ये कहानी भारत में कोयले के खदान में पहले रेस्क्यू ऑपरेशन की कहानी कहती है। ये कहानी पश्चिम बंगाल के रानीगंज कोल माइंस की है, जो 1989 में घटित हुई थी।

इस खादान में 64 ऐसे मजदूर थे जो कोयले की खदान में बाढ़ आने के कारण अंदर ही फँस गए थे। उस समय जसवंत सिंह नाम के एक शख्स ने खुद की जान दाँव पर लगा कर उन्हें बचाया था। उन्हीं के किरदार में अक्षय कुमार दिखने वाले हैं। अक्षय कुमार ने पोस्टर शेयर करते हुए लिखा कि 1989 में एक व्यक्ति ने असंभव को संभव बना दिया। उन्होंने लिखा, “भारत के सच्चे नायक की कहानी 6 अक्टूबर, 2023 को सिनेमा हॉल में देखिए।” उन्होंने फिल्म के 2 और पोस्टर जारी किए।

अक्षय कुमार ने पोस्टर शेयर करते हुए लिखा कि नायक कभी मेडल के लिए इंतजार नहीं करते हैं और वही करते हैं जो सही है। इस फिल्म का टीजर गुरुवार (7 सितंबर, 2023) को रिलीज होने वाला है। इस कहानी को टीनू सुरेश देसाई ने निर्देशित किया है। वो अक्षय कुमार के साथ ‘रुस्तम’ (2016) में काम कर चुके हैं। फिल्म में परिणीति चोपड़ा, कुमुद मिश्रा, पवन मल्होत्रा और रवि किशन जैसे कलाकार हैं। अक्षय कुमार की ‘OMG 2’ हाल ही में अच्छी चली है, ऐसे में उनके लोग इसे उनकी कमबैक फिल्म भी बता रहे हैं।

G20 का केंद्र बना जो ‘भारत मण्डपम्’, वहाँ दुनिया की सबसे ऊँची नटराज प्रतिमा: जानिए तमिलनाडु में शिव के इस रूप के पीछे का इतिहास, तमिलनाडु के जंगल की कहानी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (6 सितंबर) को इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र द्वारा X पर शेयर किए गए भगवान नटराज की तस्वीर को रिपोस्ट किया। इसे शेयर करते हुए पीएम ने कहा कि भारत मंडपम में भव्य नटराज प्रतिमा हमारे समृद्ध इतिहास और संस्कृति के पहलुओं को जीवंत करती है। जैसे ही दुनिया जी-20 (G20) शिखर सम्मेलन के लिए इकट्ठा होगी। ये भारत की सदियों पुरानी कलात्मकता और परंपराओं के सबूत के तौर पर खड़ी होगी।

‘अष्टधातु’ (आठ धातुओं) से बनी दुनिया की सबसे बड़ी नटराज प्रतिमा मंगलवार (5 सितंबर 2023) को भारत मंडपम के सामने स्थापित की गई। ये जगह राष्ट्रीय राजधानी में जी-20 शिखर सम्मेलन का स्थल है। पीएम मोदी ने इस प्रतिमा को भारत के समृद्ध इतिहास और संस्कृति से जोड़ा है और सही मायने में इसके अपना सार्थक अर्थ है।

भगवान नटराज की ये मूर्ति भगवान शिव का प्रतिनिधित्व करती है। इसमें भगवान शिव ऊर्जा और जीवंतता का संचार करने वाले तांडव नृत्य मुद्रा में हैं। तो आइए हम इस मूर्ति अर्थात भगवान शिव के नटराज रूप के बारे में जानने की कोशिश करते हैं।

मशहूर मूर्तिकार राधाकृष्णन ने किया है तैयार

जी-20 शिखर सम्मेलन स्थल पर भारत मंडपम में स्थापित नटराज की अष्टधातु की ये मूर्ति 27 फीट ऊँची और 18 टन वजनी है। ब्रह्मांडीय ऊर्जा, रचनात्मकता और शक्ति का महत्वपूर्ण प्रतीक नटराज की यह प्रतिमा सम्मेलन में आकर्षण बनने जा रही है।

इसे तमिलनाडु के स्वामी मलाई के मशहूर मूर्तिकार राधाकृष्णन स्थापति और उनकी टीम ने रिकॉर्ड 7 महीने में तैयार किया है। चोल साम्राज्य काल से ही राधाकृष्णन की 34 पीढ़ियाँ मूर्तियाँ बना रही हैं। यह प्रतिष्ठित परियोजना संस्कृति मंत्रालय की टीम आईजीएनसीए ने संचालित किया है।

मध्यकालीन युग की नटराज प्रतिमा का है प्रतिरूप

भारत मंडपम में स्थापित नटराज की प्रतिमा मध्यकालीन युग की नटराज प्रतिमा का प्रतिरूप है, जो राष्ट्रीय संग्रहालय नई दिल्ली में चोल कांस्य की गैलरी में रखी गई है। संग्रहालय में रखी नटराज की यह संतुलित मूर्ति 12वीं शताब्दी में चोल राजवंश के संरक्षण में दक्षिण भारत में बनाई गई थी।

यह प्रतिमा 96.0 सेंटीमीटर लंबी, 82.8 सेंटीमीटर चौड़ा और 28.2 सेंटीमीटर ऊँची है। भगवान शिव की नटराज मूर्ति के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, कलात्मक और आध्यात्मिक महत्व है। यहाँ हम इन सभी के बारे में जानेंगे।

ऐतिहासिक महत्व

पुरातत्व, प्रतीकात्मक और साहित्यिक सबूतों से से पता चलता है कि शिव के आनंद तांडव मुद्रा वाली कांस्य प्रतिमाएँ पहली बार 7वीं और 9वीं शताब्दी के मध्य के बीच पल्लव काल में दिखाई दी थीं। पल्लव काल की नटराज की कांस्य मूर्तियाँ लकड़ी की मूर्तियों से प्रभावित थीं। चोल कारीगरों ने धातुओं के साथ प्रयोग करना शुरू कर दिया।

इस तरह से इन कारीगरों ने चिपटी और लंबी पल्लव कालीन मूर्तियों के उलट गतिशील और उभरी हुई आकृतियों का निर्माण करना शुरू कर दिया। इस वजह से इस तरह की नटराज मूर्ति को चोल राजवंश के युग का माना जा सकता है। तंजावुर या तंजाई राजनीतिक और औपचारिक दोनों अर्थों में शाही चोलों की राजधानी थी। इसके अलावा, राजधानी का भौतिक और प्रतीकात्मक केंद्र शिव को समर्पित एक मंदिर था।

इसे राजराजा चोल प्रथम के शासनकाल के दौरान बनाया गया था। यह मंदिर राजघरानों के साथ बहुत नजदीकी से जुड़ा हुआ था। उस वक्त के राजा के नाम पर इस मंदिर का नाम ‘राजराजेश्वर मंदिर’ रखा गया। परिवार और राज्य के देवता के रूप में शिव चोलों और उनकी प्रजा के धार्मिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक जगत में अहम स्थान रखते थे।

हालाँकि शिव को कई दिव्य भूमिकाओं में चित्रित किया गया था, लेकिन यह शिव की नटराज मुद्रा ही थी जो चोल शक्ति का प्रतीक बन गई। अलंकृत और वस्त्रों से सजी इस मूर्ति ने कई अनुष्ठानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दक्षिणी भारत के कई शिव मंदिरों में एक अलग नाताना सभा होती है, जहाँ नटराज की मूर्ति स्थापित की जाती है।

सांस्कृतिक महत्व

चोल काल अपनी धातु की मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है। यह अवधि के दौरान कारीगरों के हासिल किए गए गहरे सौंदर्य और तकनीकी कौशल के लिए जाना जाता है। दक्षिण और उत्तर भारत दोनों में धातु की मूर्तियाँ ‘लॉस्ट-वैक्स’ प्रक्रिया का इस्तेमाल करके बनाई जाती थीं।

जहाँ दक्षिण भारत में ठोस मूर्तियाँ बनाई गईं, वहीं उत्तर भारत में खोखली मूर्तियाँ निर्मित हुईं। दक्षिण में निर्मित अधिकांश धातु की मूर्तियाँ पाँच धातुओं तांबा, चाँदी, सोना, टिन और सीसा की मिश्रधातु से बनी होती थीं। शैव मूर्तिकला में नृत्य करते हुए शिव को या तो क्रोधित या शांत रूप में चित्रित किया गया है।

किसी भी उदाहरण में शिव का नृत्य ब्रह्मांड के निर्माण और विनाश का संकेत देता है। इस नृत्य मुद्रा में शिव को आमतौर पर चार भुजाओं में डंडा, गज प्रतीक, विनाश की प्रतीक ज्वाला और सृजन के प्रतीक डमरू के साथ चित्रित किया जाता है। उनका आगे का दाहिना हाथ अभय मुद्रा में होता है। उन्हें साँप का आभूषण पहने और बौने मुयालाका पर नृत्य करते हुए दिखाया जाता है, जो अज्ञानता और बुराई का प्रतीक है।

नटराज की प्रतिमा का कलात्मक महत्व

नटराज को ‘नृत्य का भगवान’ माना जाता है और उनका नृत्य उनके पंचकृत्य या शिव की पाँच गतिविधियों को बताता है। ये गतिविधियां सृजन, संरक्षण, विनाश, आवरण और अनुग्रह हैं। उनके दाहिने हाथ के अग्रभाग पर भुजंग-वलय रखा हुआ है। ये कुंडलित साँप के आकार का कंगन है। नटराज का बायाँ पैर दाहिनी ओर तिरछा उठा हुआ है और उनका एक पैर हवा में है, जो मोक्ष के मार्ग को दर्शाता है।

शिव की छवि एक प्रभामंडल में घिरी हुई है, जो अग्नि का चक्र है। भगवान के सिर पर कुंडलित बालों (जटामुकुट) का मुकुट है, जो देवी गंगा, एक साँप, रत्नों, फूलों, एक अर्धचंद्र और एक मानव खोपड़ी से सुशोभित है। मुकुट से दोनों तरफ कई जटाएँ उभरकर क्षैतिज रूप से फैलती हुई प्रभामंडल को छूती हैं।

शिव को मोती का हार, पवित्र धागा यज्ञोपवीत और उरसुत्र (छाती का एक बैंड), अंगूठियाँ, पायल और दाहिने कान में एक मकर-कुंडल और बाएँ कान पर पात्र-कुंडल से सजाया जाता है। पहला मकर के आकार की बाली को संदर्भित करता है जो एक पौराणिक मछली जैसा प्राणी है, जबकि बाद वाला नारियल या पामइरा के पत्तों के आकार की बाली को संदर्भित करता है।

मूर्ति का आध्यात्मिक महत्व

पेन्नार और कावेरी नदियों के बीच मंदिरों का शहर चिदंबरम स्थित है। ये ‘नृत्य के भगवान’ नटराज से जुड़ा प्रमुख धार्मिक स्थल है। चोलों का मानना था कि चिदम्बरम शिव का सांसारिक घर और पवित्र स्थान था। वहाँ उन्होंने ‘आनंद का नृत्य’ यानी आनंद तांडव किया था।

मान्यता है कि नटराज के पीछे की केंद्रीय धार्मिक कहानी चिदम्बरम के तिलई जंगल में घटित हुई थी। इसका सातवीं शताब्दी के संत-कवियों के गीतों में कई तरह की दैवीय और राक्षसी गतिविधियों के तौर पर वर्णन किया है। कहा जाता है कि भगवान शिव तिलई के जंगलों में भिक्षाटन के लिए एक भिखारी के रूप में आए थे।

उन्होंने सही ढंग से पूजा-पाठ नहीं करने वाले ऋषियों को छलने और अपमानित किया। इसके बाद उन ऋषि-मुनियों और भगवान शिव के बीच युद्ध हुआ था। इसमें ऋषियों ने उन पर हमला करने के लिए राक्षस और साँप जैसे प्राणियों को भेजा। शिव ने इन दुष्ट शक्तियों को पराजित किया और अपना विजयी ‘आनंद का नृत्य’ किया।

आल इंडिया रेडियो के पाक्षिक पत्र सारंग के 1952 अंक से साभार

लेखों में भी नटराज का होता रहा है जिक्र

ऑल इंडिया रेडियो के पाक्षिक पत्रिका सारंग में मई-दिसंबर 1952 के अंक में भी शिव के मूर्तियों के रूपों पर एक विस्तृत लेख दिया गया है। जगदीश चतुर्वेदी के इस लेख में शिव के नटराज रूप को लेकर लिखा है कि कवि और शिल्पी भाव-गगन में साथ-साथ समान स्तर पर उड़ते हुए दिखाई देते हैं, किन्तु फिर शिल्पी की कल्पना का विहंग कुछ ऊँचा चढ़ता है।

वह सृष्टि का गतिक्रम, उसकी तालबद्धता का स्त्रोत, शिव की आदिशक्ति से प्रवाहित देखता है- उस शक्ति से, जो अखिल ब्रह्मांड की सृष्टि, पालन और संहार करती है; और फिर वह उसे साकार अभिव्यक्ति देता है, एक नवीनतम प्रतीक का सृजन करता है। यह नादन्त नृत्य करती हुई शिव की प्रतिमा है- नटराज, लोक-मानस का शतदल पद्म।

जदयू अध्यक्ष ललन सिंह ने पार्टी दफ्तर से निकाल फिंकवाया I.N.D.I.A. का पोस्टर, उधर AAP का ऐलान – पंजाब में सभी सीटों पर लड़ेंगे: विपक्षी एकता फुस्स

भाजपा के खिलाफ एकजुटता दिखाने की कोशिश करते हुए विपक्षी दलों ने I.N.D.I.A. गठबंधन तो बना लिया है। लेकिन इसमें कहीं से कहीं तक एकता नजर नहीं आ रही है। दरअसल, आम आदमी पार्टी ने राजस्थान के बाद अब पंजाब में भी अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। वहीं जदयू अध्यक्ष ललन सिंह पार्टी कार्यालय में I.N.D.I.A का पोस्टर देखकर भड़क गए और हटाने का फरमान जारी कर दिया।

 मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पंजाब की पर्यटन मंत्री अनमोल गगन मान ने राज्य में कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन की बातों से इनकार किया है। उन्होंने कहा है कि आगामी लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी पंजाब में अकेले चुनाव लड़ेगी। कॉन्ग्रेस के साथ कोई भी गठबंधन नहीं होगा।

उन्होंने आगे कहा है कि पंजाब की जनता ने ईमानदार सरकार बनाई है। यहाँ के कई कॉन्ग्रेस नेताओं पर केस चल रहे हैं। इसलिए लोग कॉन्ग्रेस के साथ किसी भी तरह का गठबंधन स्वीकार नहीं करेंगे। इसलिए AAP अपने मिशन पर चुनाव लड़ेगी। सीटों को बँटवारा किसी भी तरह से नहीं होगा। बता दें कि इससे पहले राजस्थान AAP के प्रदेश अध्यक्ष नवीन पालीवाल ने विधानसभा चुनाव को लेकर कहा था कि उनकी पार्टी सभी 200 सीटों पर चुनाव लड़ने जा रही है। साथ ही उन्होंने जल्द ही प्रत्याशियों के ऐलान की भी कही थी।

I.N.D.I.A. गठबंधन का पोस्टर देख भड़के JDU अध्यक्ष

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के पटना स्थित कार्यालय में I.N.D.I.A. गठबंधन का पोस्टर लगा हुआ था। इस पोस्टर लगने की जानकारी मिलने के बाद ललन सिंह भड़क गए। दरअसल, इस पोस्टर में नीतीश कुमार समेत विपक्ष के कई नेताओं की फोटो लगी हुई थी। लेकिन ललन सिंह और तेजस्वी यादव का चेहरा नदारद था।

इस पोस्टर के लगने की जानकारी मिलने के बाद ललन सिंह ने पहले इसकी फोटो मँगवाई। इसके बाद भड़कते हुए उन्होंने यह पोस्टर हटाने का आदेश जारी कर दिया। साथ ही कार्यालय प्रभारी को कार्यालय के कोई भी पोस्टर न लगाने का निर्देश दिया। हालाँकि अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि यह पोस्टर किसकी ओर से लगाया गया था।

आम आदमी पार्टी (AAP) का कॉन्ग्रेस से गठबंधन की बात से इनकार करना और दो राज्यों में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान करना तथा गठबंधन का पोस्टर देख JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष का भड़कना यह दर्शाता है कि I.N.D.I.A. गठबंधन में एकता नहीं है। दूसरे शब्दों में कहें तो गठबंधन बनने के साथ ही इन राजनीतिक दलों में फूट नजर आ रही है। 

‘भारत शब्द से असहज हो गए हैं कई लोग’: वीरेंद्र सहवाग ने की थी खिलाड़ियों की जर्सी से ‘India’ हटाने की माँग, विरोध होने पर बोले – राजनीति में रुचि नहीं, ठुकराए टिकट

संसद के विशेष सत्र में देश का नाम सिर्फ भारत किए जाने की चर्चा जोरों पर है। इस बीच पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने टीम इंडिया की जर्सी पर ‘भारत’ लिखने की माँग की थी। इसको लेकर लोग उन्हें ट्रोल कर रहे थे और उनकी इस माँग को राजनीति से जोड़ रहे थे। इस पर सहवाग ने कहा कि उनकी कोई राजनीतिक इच्छा नहीं है। उनके लिए सिर्फ भारत ही महत्वपूर्ण है।

वीरेंद्र सहवाग ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा है, “हमारे देश को भारत के नाम से संबोधित करने को लेकर बात होती है तो लोग इसे राजनीतिक चश्मे से देखने की कोशिश करते हैं। यह बेहद हास्यास्पद है। मैं किसी खास राजनीतिक पार्टी का प्रशंसक नहीं हूँ। दोनों ही राष्ट्रीय पार्टियों में अच्छे लोग हैं और दोनों पार्टियों में बहुत सारे अयोग्य लोग भी हैं।”

उन्होंने आगे लिखा, “मैं एक बार फिर से स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मेरी कभी कोई राजनीतिक आकांक्षा नहीं रही और न ही अब कोई आकांक्षा है। अगर मुझे राजनीति करनी होती तो पिछले दो लोकसभा चुनावों में दोनों पार्टियों द्वारा दिए गए ऑफर खुशी-खुशी स्वीकार कर लेता। अगर मुझे राजनीति करनी ही होती तो किसी भी पार्टी से टिकट पाने के लिए मेरी ऑन-फील्ड उपलब्धियाँ ही पर्याप्त थीं।”

सहवाग ने ट्रोलर्स को फटकार लगाते हुए लिखा, “दिल की बात कहना राजनीतिक इच्छा से बिल्कुल अलग है। मेरी एकमात्र रुचि ‘भारत’ है। जहाँ तक बात विपक्ष द्वारा खुद को I.N.D.I.A. कहे जाने की है तो वो खुद को B.H.A.R.A.T भी कह सकते हैं। ऐसे बहुत से रचनात्मक लोग हैं, जो इसके लिए सही फुलफॉर्म भी बता देंगे।”

उन्होंने कॉन्ग्रेस नेताओं के ‘भारत’ नाम का विरोध करने पर आड़े हाथों लिया और कहा, “कॉन्ग्रेस ने भारत जोड़ो यात्रा नामक एक यात्रा भी की थी। दुर्भाग्य से बहुत से लोग ‘भारत’ शब्द से असुरक्षित महसूस करते हैं। मुझे लगता है कि गठबंधन का नाम चाहे जो भी हो, लेकिन चुनावों को मोदी बनाम विपक्ष ही कहा जाएगा। चुनाव में सबसे अच्छे की ही जीत होगी, लेकिन यदि हमारे देश को ‘भारत’ नाम से संबोधित किया जाएगा तो मुझे बहुत अधिक संतुष्टि मिलेगी।”

दरअसल, भारत बनाम इंडिया की चर्चा के बीच वीरेंद्र सहवाग का एक ट्वीट वायरल हो रहा था। यह ट्वीट उन्होंने एशिया कप में भारत-पाकिस्तान मैच के दौरान किया था। इस ट्वीट में उन्होंने ‘BHAvsPAK’ का हैशटैग लगाया था। लोगों ने कहा कि वीरेंद्र सहवाग को शायद पहले से इसका अंदेशा था। इस पर टिप्पणी करते हुए सहवाग ने कहा, “मेरा हमेशा से मानना है कि देश का नाम ऐसा रहना चाहिए, जिससे हमारे भीतर गर्व की भावना आए। हम भारतीय हैं। ‘India’ नाम अंग्रेजों का दिया हुआ है।”

वीरेंद्र सहवाग ने ये भी कहा कि ये काफी पहले किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा, “हमारे देश का नाम फिर से आधिकारिक रूप से केवल ‘भारत’ रखा जाना चाहिए था।” उन्होंने BCCI और इसके सेक्रेटरी जय शाह से अपील की कि ODI क्रिकेट विश्व कप के दौरान भारतीय क्रिकेटरों की जर्सी पर ‘India’ की जगह ‘भारत’ लिखा हो। मंगलवार (5 सितंबर, 2023) को वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम की भी घोषणा हुई है। टीम की जीत की कामना करते हुए सहवाग ने लिखा कि इसे ‘टीम भारत’ कहा जाना चाहिए।

इस दौरान वीरेंद्र सहवाग ने नीदरलैंड्स और म्यांमार का उदाहरण भी दिया। उन्होंने बताया कि कैसे 1996 में हॉलैंड भारत में वर्ल्ड कप खेलने आया था, लेकिन 2003 में जब भारत से उसका मैच हुआ तो वो हॉलैंड नहीं, बल्कि नीदरलैंड्स बन गया था। इसी तरह, सहवाग ने बताया कि कैसे बर्मा ने अंग्रेजों के दिए नाम को त्याग कर वापस अपना नाम म्यांमार रख लिया। उन्होंने याद दिलाया कि कई देश हैं, जो अपने मूल नाम की तरफ लौटे हैं और अपना नाम बदला है।

प्रियंका चोपड़ा के लिए खुशी और गम: चचेरी बहन परिणीति सांसद राघव चड्ढा से करेंगी शादी, जेठानी सोफी टर्नर अपने पति से ले रही हैं तलाक

बॉलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा के लिए ‘थोड़ी खुशी थोड़ा गम’ जैसी स्थिति है। एक तरफ आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्डा से उनकी चचेरी बहन अदाकारा परिणीति चोपड़ा की शादी की तारीख तय हो गई है। वहीं दूसरी तरफ उनकी जेठानी सोफी टर्नर और जेठ जो जोनस ने लम्बे समय तक साथ रहने के बाद तलाक लेने का फैसला लिया है। दोनों ने तलाक के पेपर कोर्ट में लगा दिए हैं। सोफी और जोनस 2 बच्चियों के माता-पिता हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, परिणीति और राघव के वैवाहिक कार्यक्रम 23-24 सितम्बर 2023 को राजस्थान के उदयपुर के होटल लीला पैलेस और द ओबेरॉय उदयविलास में सम्पन्न होंगे। इन होटलों की बुकिंग हो गई है। इसके साथ ही शादी की तैयारियाँ भी शुरू हो गईं हैं।

शादी में शामिल होने वाले कुल मेहमानों की अनुमानित तादाद 200 है। इनमें से 50 गेस्ट VVIP बताए जा रहे हैं। इनमें दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान शामिल हैं। परिणीति की चचेरी बहन प्रियंका चोपड़ा भी अपने पति निक जोनस के साथ इस समारोह में शामिल होंगी।

माना जा रहा है कि बुक किए गए होटलों में हल्दी, मेहंदी और संगीत की रस्म 23 सितम्बर से ही शुरू हो जाएगी। इन होटलों को चेक करने के लिए 2 माह पहले ही सांसद राघव चड्डा अपनी होने वाली बीवी परिणीति के साथ उदयपुर गए थे।

शादी के बाद रिसेप्शन हरियाणा के गुरुग्राम में आयोजित किया जाएगा। 13 मई 2023 को राघव चड्ढा और परिणीति चोपड़ा की सगाई दिल्ली के कपूरथला हाउस में हुई थी। तब आदित्य ठाकरे, पी चिदंबरम और कपिल सिब्बल सहित कई बड़े राजनेता इस कार्यक्रम का हिस्सा बने थे।

जेठ-जेठानी लेंगे तलाक

दूसरी तरफ, प्रियंका चोपड़ा के जेठ और जेठानी लम्बे समय तक साथ रहने के बाद तलाक ले रहे हैं। प्रियंका के जेठ गायक जो जोनस ने मंगलवार (5 सितम्बर 2023) को अभिनेत्री सोफी टर्नर से तलाक के कागजात अदालत में दाखिल कर दिए हैं। ये दोनों 2 बेटियों के माता-पिता हैं जिसमें बड़ी बेटी 3 व छोटी 1 साल की है।

पिछले लगभग 3 माह से जो जोनस अकेले ही दोनों बेटियों की देखभाल कर रहे हैं। माना जा रहा है कि उन्होंने अपनी शादी बचाने की काफी कोशिश की, लेकिन वे नाकाम रहे। तलाक की वजह दोनों की अलग-अलग जीवन-शैली बताई जा रही है। जो को घर रहना और फैमिली के साथ रहना पसंद है, जबकि सोफी को बाहर रहना और पार्टी करना ज्यादा पसंद है। सोफी और प्रियंका के बीच बहुत अच्छी बॉन्डिंग है।

‘उदयनिधि स्टालिन के बयान का देना होगा उचित जवाब’: मंत्रिमंडल की बैठक में PM मोदी का बड़ा बयान, DMK नेता ने की थी सनातन धर्म को खत्म करने की बात

तमिलनाडु के खेल मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को डेंगू-मलेरिया बताते हुए इसे खत्म करने की बात की थी। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर पलटवार किया है। पीएम मोदी ने बुधवार (6 सितंबर, 2023) को कहा कि इस बयान पर उचित जवाब देने की आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने मंत्रियों को ‘India बनाम भारत’ वाले विवाद पर बोलने से भी मना किया और सलाह दी कि जो अधिकृत हैं वही बयान दें। प्रधानमंत्री ने सलाह दी कि इतिहास में न जाएँ, बल्कि जो संविधान में है उसी से डटे रहें।

साथ ही उन्होंने मंत्रियों को मुद्दों की समसामयिक स्थिति पर बोलने की सलाह दी। पीएम ने दिल्ली में होने वाले G20 समिट से पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक को संबोधित करते हुए ये बातें कही। तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी के प्रथम परिवार के सदस्य और मुख्यमंत्री करुणानिधि के बेटे उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म पर टिप्पणी के बाद माफ़ी माँगने से इनकार कर दिया था और खुद को इस पर कायम बताते हुए कहा था कि वो बार-बार सनातन धर्म को खत्म करने की बात कहते रहेंगे।

उधर कर्नाटक के गृह मंत्री गंगाधरैया परमेश्वर ने हिन्दू धर्म पर निशाना साधा है। कॉन्ग्रेस नेता G परमेश्वर ने हिन्दू धर्म की उत्पत्ति पर सवाल खड़े कर दिए। हुबली में एक सभा के दौरान उन्होंने कहा कि विश्व के इतिहास में कई धर्म उत्पन्न हुए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे जैन एवं बौद्ध धर्म का जन्म भारत में ही हुआ। वहीं हिन्दू धर्म की बात करते हुए उन्होंने कहा कि इसका कब जन्म हुआ और और किसने इसे शुरू किया, ये अभी भी सवालों के घेरे में है।

G परमेश्वर ने कहा कि भारत में जैन और बौद्ध धर्म का इतिहास रहा है।जी परमेश्वर ने कहा कि हिन्दू धर्म की उत्पत्ति कैसे ही और किसने इसे शुरू क़िया, अभी भी इस सवाल का जवाब तलाशा जाना है। कर्नाटक में भाजपा के संयुक्त प्रदेश प्रवक्ता S पारख ने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी हमेशा बहुसंख्यक समाज के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियाँ करती रहती हैं। वहीं VHP के प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि ये हैरान करने वाला है कि जिस व्यक्ति के नाम में ‘परमेश्वर’ है, हिन्दू धर्म के मूल पर सवाल उठा रहा है। कॉन्ग्रेस ने आधिकारिक रूप से अब तक उदयनिधि स्टालिन के बयान की भी निंदा नहीं की है।

अमेरिका में मनेगा ‘सनातन धर्म दिवस’: उदयनिधि स्टालिन के बयान के बाद ऐलान, मलेशिया के हिंदू संगम ने लिखा पत्र

द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के नेता उदयनिधि स्टालिन और कॉन्ग्रेस के प्रियांक खड़गे की सनातन धर्म को लेकर की गई टिप्पणियों पर भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी विरोध के स्वर उठने लगे हैं। मलेशिया के एक हिंदू संगठन ने उदयनिधि के बयान पर कड़ा विरोध जताया है। वहीं, संयुक्त राज्य अमेरिका में केंटुकी के लुइसविले शहर की मेयर ने 3 सितंबर 2023 को सनातन धर्म दिवस घोषित कर दिया है।

मलेशिया के हिंदू संगम नाम के हिंदू संगठन ने उदयनिधि के खिलाफ आवाज उठाई है। संगठन ने मलेशिया के भारतीय उच्चायोग को उदयनिधि के खिलाफ शिकायती पत्र दिया। वहीं, अमेरिका में लुइसविले की मेयर बारबरा सेक्सटन ने महाकुंभ अभिषेकम उत्सव के दौरान शहर में हर साल 3 सितंबर को सनातन धर्म दिवस मनाने का आधिकारिक ऐलान किया है।

मलेशिया हिंदू संगम ने जताया एतराज

तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन के बेटे और राज्य सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने चेन्नई का कामराजार एरिना में सनातन उन्मूलन सम्मेलन में विवादित टिप्पणी की थी। सम्मेलन के शीर्षक की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा था कि आयोजनकर्ताओं ने ‘सनातन विरोधी सम्मेलन’ के बजाए ‘सनातन उन्मूलन सम्मेलन’ शब्द का इस्तेमाल किया, जो बहुत अच्छा है।

उन्होंने आगे कहा था, “कुछ ऐसी चीजें होती हैं जिनका महज विरोध ही काफी नहीं होता, हमें उन्हें जड़ से मिटाना होगा। मच्छर, डेंगू, मलेरिया, कोरोना, ये ऐसी चीजें हैं जिनका हम केवल विरोध नहीं कर सकते, बल्कि हमें उन्हें मिटाना होगा। सनातन धर्म भी ऐसा ही है।” उनके इस बयान पर भारत भारत में बवाल हो गया।

मलेशिया के हिंदू संगम ने सोमवार 4 सितंबर को मलेशिया में भारतीय उच्चायोग को पत्र लिखकर कहा, “मलेशिया हिंदू संगम और मलेशिया के हिंदू समुदाय की तरफ से हम उदयनिधि स्टालिन के बयान का सख्त विरोध करते हैं। सनातन रोको कॉन्फ्रेंस में उन्होंने जो बयान दिया, हम उसकी निंदा करते हैं। सनातन उन्मूलन सम्मेलन में दिए गए भाषण में उन्होंने सनातन धर्म की तुलना मच्छरों, डेंगू, मलेरिया और कोरोना से की और कहा कि सनातन धर्म को बढ़ने से रोकना होगा।”

मलेशिया हिंदू संगम ने पत्र में लिखा कि तमिलनाडु के खेल मंत्री एक तरह से एक धर्म के लोगों के नरसंहार का आह्वान कर रहे थे। उन्होंने अपने भाषण में हिंदुत्व यानी सनातन धर्म की शुद्धता को तार-तार कर दिया। यह एक अपमानजनक भाषण था। इसमें एक मंत्री ने ऐसे धर्म के खिलाफ बोला, जिसे भारत में अधिकतर लोग मानते हैं।

पत्र में आगे लिखा है, “मंत्री होने के नाते उन्हें धर्मनिरपेक्ष होना चाहिए और पूरी पारदर्शिता के साथ अपने कार्यों का निर्वहन करना चाहिए। उनके भाषण से पूरी दुनिया के हिंदुओं में नफरत और गुस्से को बढ़ाया है।” इस संगठन ने भारत सरकार से स्टालिन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है।

संगठन ने लिखा, “हम एक बार फिर इस भाषण पर अपनी कड़ी निंदा और असहमति दर्ज करते हैं। हम भारत सरकार से लोगों की संवेदनशीलता का अपमान करने वाले इस कृत्य के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह करते हैं।”

लुइसविले में 3 सितंबर सनातन धर्म दिवस घोषित

संयुक्त राज्य अमेरिका में केंटुकी के लुइसविले के मेयर ने शहर में 3 सितंबर को सनातन धर्म दिवस घोषित किया है। लुइसविले में केंटुकी के हिंदू मंदिर में महाकुंभ अभिषेकम उत्सव के दौरान मेयर क्रेग ग्रीनबर्ग की ओर से डिप्टी मेयर बारबरा सेक्स्टन स्मिथ ने ये आधिकारिक उद्घोषणा पढ़ी।

इस कार्यक्रम में आध्यात्मिक नेता मौजूद रहे थे। इनमें परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के अध्यक्ष चिदानंद सरस्वती, श्री श्री रविशंकर और भगवती सरस्वती के साथ-साथ उपराज्यपाल जैकलीन कोलमैन, डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ कीशा डोर्सी और कई अन्य आध्यात्मिक नेताओं और गणमान्य लोगों ने शिरकत की थी।

उदयनिधि और प्रियांक खड़गे खिलाफ दर्ज हैं एफआईआर

I.N.D.I.A. गठबंधन में डीएमके की सहयोगी पार्टियों ने भी स्टालिन के बयान की निंदा की है। वहीं, देश के 262 मशहूर हस्तियों ने स्टालिन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को एक पत्र लिखकर इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने का निवेदन किया है।

हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोप में डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे के खिलाफ रामपुर में एफआईआर दर्ज की गई है। वहीं, उदयनिधि के खिलाफ दिल्ली में भी एफआईआर दर्ज कराई गई है।