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8,000 फ़ीट की ऊँचाई, रेंग कर जाने का रास्ता: कश्मीर की पहाड़ियों में छिपता था 30 साल से फरार और ₹20 लाख का इनामी आतंकी जहाँगीर

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों ने एक आतंकी ठिकाने को ध्वस्त किया है। मंगलवार (5 सितंबर 2023) को पुलिस, सेना और CRPF की सामूहिक टीम ने हिजबुल मुजाहीदीन के आतंकी जहाँगीर मोहम्मद अमीन उर्फ जहाँगीर सरूरी के ठिकाने को खोज निकाला। जहाँगाीर सरूरी भारत का मोस्ट वॉन्टेड आतंकी है और वह पिछले 30 सालों से फरार चल रहा है।

आतंकी जहाँगीर जहाँ छिप कर रहता था, वह जगह समुद्र तल से लगभग 8,000 फ़ीट की ऊँचाई पर स्थित है। इस ठिकाने से सुरक्षाबलों ने ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़े, कंबल, खाने-पीने के सामान के साथ रोजमर्रा की जरूरतों वाले कुछ सामान बरामद किए हैं। सुरक्षा बलों ने इलाके को घेरकर सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।

टाइम्स नाउ ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में उस पहाड़ी को दिखाया है, जहाँ आतंकी जहाँगीर छिपा करता था। यह गुफा किश्तवाड़ के भदत सरूर क्षेत्र में परीबाग इलाके में मिली है। गुफानुमा इस जगह में हालातों के हिसाब से 6 से 7 लोगों के एक साथ रहने लायक जगह है। पत्थरों की इस प्राकृतिक गुफा में घुसने या बाहर निकलने के लिए बेहद संकरा रास्ता है।

गुफा की बनावट सामरिक दृष्टि से भी काफी जटिल है। किसी समय सुरक्षा बलों से घिर जाने के बाद वहाँ से पोजिशन लेकर काफी देर तक हमले किए जा सकते हैं। गुफा तक पहुँचने के लिए रास्ता भी काफी संकरा और घुमावदार है। गुफा की दूसरी तरफ भी हवा आने-जाने के लिए दरवाजानुमा एक छोटी-सी संरचना है।

बताया जा रहा है कि आतंकी जहाँगीर सरूरी पिछले कुछ महीनों से यही छिपा था। यहीं से वह आने वाले चुनावों में बड़ी आतंकी घटना को अंजाम देने की साजिश रच रहा था। उसके निशाने पर सैनिकों के साथ आम नागरिक भी थे। बताया जा रहा है कि इस इलाके से कई बार सुरक्षा बलों के जवान गुजरे थे, लेकिन उन्हें वहाँ आतंकी के छिपे होने का शक नहीं हुआ।

मंगलवार 5 सितंबर 2023 को सुरक्षा बलों को यहाँ एक आतंकी के छिपने की जानकारी मिली थी। इलाके को जब तक घेरा गया, तब तक आतंकी फरार हो चुका था। इलाके को घेर लिया गया है और सघन तलाशी अभियान जारी है। इस इलाके में कई अन्य ऐसी प्राकृतिक गुफाएँ हैं। सुरक्षाबल उनकी भी तलाशी ले रहे हैं।

बताते चलें कि प्रतिबंधित संगठन हिजबुल मुजाहिदीन का जहाँगीर सरूरी फिलहाल भारत के टॉपमोस्ट आतंकियों की लिस्ट में शामिल है। वह पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी (ISI) के इशारे पर लगभग 3 दशक से भारत में कई आतंकी घटनाओं को अंजाम दे चुका है। जहाँगीर कश्मीर के युवाओं को कट्टरपंथ का पाठ भी पढ़ाता है। उस पर 20 लाख रुपए का इनाम भी घोषित है।

सरूरी 1990 के दशक की शुरुआत में आतंकवाद के रास्ते पर चला था। माना जाता है कि वह किश्तवाड़ जिले के ऊँचाई वाले इलाकों में छिपा है। सरूरी के भाई अब्दुल करीम बट को 3 अगस्त 2023 को आतंकवादियों का सहयोग करने के कारण सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (PSA) के तहत हिरासत में लिया गया था।

‘बलात्कार, अप्राकृतिक यौन संबंध और जबरन धर्मांतरण’: लव जिहाद की शिकार महिला ने माँगी बेंगलुरु पुलिस से मदद, कहा- मेरी जान खतरे में

एक महिला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स का सहारा लेते हुए पोस्ट कर दावा किया कि वह लव जिहाद और यौन शोषण की शिकार है और उसने खुद को खतरे में बताते हुए पुलिस से मदद माँगी। कर्नाटक पुलिस के अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी कि मामले का संज्ञान लेकर जाँच शुरू कर दी गई है।

दरअसल, महिला ने सोशल मीडिया एक्‍स पर पोस्‍ट किया, “सर, मैं लव जिहाद, बलात्कार, अप्राकृतिक यौन संबंध और जबरन धर्म परिवर्तन का शिकार हूँ। कृपया मुझे बेंगलुरु में तुरंत पुलिस सहायता प्रदान करें क्योंकि मेरी जान खतरे में है।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक पुलिस ने महिला के पोस्ट का संज्ञान लेते हुए उससे संपर्क किया और उसे आश्वासन दिया कि प्राथमिकी दर्ज करने के बाद आरोपित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस ने लिया तुरंत एक्शन

बता दें कि सोशल मीडिया पर किये गए पोस्ट में बेंगलुरु पुलिस, कर्नाटक डीजीपी और प्रधानमंत्री कार्यालय को टैग किया गया है।  बेंगलुरु पुलिस ने पीड़िता से आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित पुलिस अधिकारियों को शिकायत दर्ज करने और उसे तत्काल मदद पहुँचाने के लिए अपना पता देने को कहा था।

वहीं पीड़िता ने गुरुवार (7 सितम्बर, 2023) को पोस्ट करते हुए बेंगलुरु के डीसीपी को धन्यवाद दिया। पोस्ट में लिखा है, “धन्यवाद, मैं पुलिस इंस्पेक्टर के संपर्क में हूँ और वह मेरी FIR  को प्राथमिकता दे रहे हैं।  मुझे और मेरे परिवार की सुरक्षा का आश्वासन दिया गया है।”

पीड़िता ने पहले भाजपा अल्पसंख्यक नेता, राज्य समिति सदस्य नाज़िया इलाही खान को भी कई पोस्ट टैग किए थे। पीड़िता ने पोस्ट किया, “मैं लव जिहाद पीड़िता हूँ, क्या आप कृपया मेरा मामला सुन सकती हैं और मेरा केस लड़ सकती हैं।”

पीड़िता ने आगे नाजिया इलाही खान से अपना मेल देखने की अपील की। एक दूसरे पोस्ट में महिला ने कहा, “कश्मीरी आदमी फेसबुक पर दोस्त बना, पैसे ले लिए और अब जब मैंने पैसे वापस माँगे तो वह मुझे नुकसान पहुँचाने की धमकी दे रहा है। बाद में मुझसे शादी करने का भरोसा दिलाकर पैसे माँगता रहा। मेरी मदद करें, मुझे कश्मीर पुलिस से कोई मदद नहीं मिल रही है।”

पीड़िता ने आगे कहा कि मैं मीडिया की कोई दखलअंदाजी नहीं चाहती। पुलिस अच्छी तरह से देखभाल कर रही है। वहीं इस मामले में पुलिस पीड़िता के संपर्क में है और जाँच जारी है।

गौरतलब है कि पीड़िता ने 17 नवंबर 2022 को भी तत्कालीन बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर और वर्तमान भाजपा नेता भास्कर राव को भी एक पोस्ट में कहा था, “अगर मैं कहूँ कि एक हिंदू लड़की से शादी का वादा किया गया और फिर एक कश्मीरी मुस्लिम लड़के ने उसे छोड़ दिया तो क्या आप मदद करेंगे?”

‘सरकार नागरिकों पर मानहानि का मुकदमा नहीं कर सकती’: बचने के लिए अरविंद केजरीवाल ने खुद को बताया ‘जनता’, PM मोदी के डिग्री विवाद में चल रहा केस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री को लेकर सवाल उठाने वाले आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल फँसते नजर आ रहे हैं। इस मामले में आपराधिक मानहानि का मुकदमा झेल रहे केजरीवाल और पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने अहमदाबाद सत्र न्यायालय में अपना जवाब दाखिल किया।

अपने जवाब में आम आदमी पार्टी ने नेताओं ने तर्क दिया कि सरकार या इसके किसी अंग द्वारा नागरिकों पर मानहानि का मुकदमा नहीं किया जा सकता है। इस तरह केजरीवाल ने खुद को आम नागरिक बताकर मुकदम से बचने की कोशिश की। वहीं, कोर्ट की ओर से तलब किए जाने के फैसले को चुनौैती देते हुए AAP नेताओं ने पुनरीक्षण याचिका दाखिल की।

अरविंद केजरीवाल की ओर पेश वकील सोमनाथ वत्स ने कोर्ट में दलील दी कि गुजरात यूनिवर्सिटी सरकार का एक अंग है और इसकी ओर से मानहानि का मुकदमा दर्ज नहीं कराया जा सकता है।

वहीं, संजय सिंह की ओर से पेश वकील फारूख खान ने कहा कि मजिस्ट्रेट को गुमराह किया गया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि सरकार नागरिकों पर मानहानि का मुकदमा नहीं कर सकती है, क्योंकि ऐसा हुआ तो रोज मानहानि के मुकदमे होंगे।

खान ने अपने तर्क में आगे कहा कि शिकायतकर्ता पटेल ने आरोप लगाया है कि राजनीतिक बढ़त के लिए टिप्पणियाँ की गई थीं। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के लिए गुजरात यूनिवर्सिटी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी नहीं है। इसलिए दलील ठीक नहीं है।

फारूख खान ने कहा, “अगर मुझे किसी बात को लेकर आशंका है, भले मैं सही हूँ या नहीं, तो क्या मैं सवाल उठाने का हकदार नहीं हूँ? अगर मेरा दोस्त दिल्ली यूनिवर्सिटी, गुजरात यूनिवर्सिटी, बनारस यूनिवर्सिटी से डिग्री फोटोशॉप करता है तो उसने फर्जीवाड़ा किया है, यूनिवर्सिटी ने नहीं।”

बताते चलें कि 2 सितंबर 2023 को मुख्य जिला एवं सत्र न्यायधीश ने इस याचिका को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जेएम ब्रह्मभट्ट को सौंप दिया था। दरअसल, गुजरात हाईकोर्ट ने 10 दिन के भीतर इस पर फैसला लेने को कहा है। इसके बाद ऐसा किया गया है।

दरअसल, गुजरात यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार पीयूष पटेल ने अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह के खिलाफ अहमदाबाद के मजिस्ट्रेट कोर्ट में आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराया था। अपनी शिकायत में पीयूष पटेल ने कहा था कि अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह ने पीएम मोदी के डिग्री के बहाने गुजरात यूनिवर्सिटी पर अपमानजनक टिप्पणी कीं।

‘बेटे को हाथ लगाने से पहले…’ : ‘जवान’ के इस डायलॉग का समीर वानखेड़े ने दिया धाँसू जवाब, आर्यन खान मामले में NCB के पूर्व जोनल डायरेक्‍टर को मिली बड़ी राहत

शाहरुख खान की फिल्म जवान का एक डायलॉग चर्चा में है वहीं के बेटे आर्यन खान से जुड़े कॉर्डेलिया ड्रग्‍स मामले में NCB के पूर्व जोनल डायरेक्‍टर समीर वानखेड़े को राहत मिली है जिससे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। समीर पर आर्यन खान को बचाने के लिए 25 करोड़ रुपए घूस माँगने का आरोप लगा था। दरअसल, साल 2021 के कॉर्डेलिया क्रूज ड्रग्‍स केस में नारकोटिक्‍स कंट्रोल ब्‍यूरो ने आर्यन खान को ड्रग्‍स का सेवन करने, ड्रग्‍स रखने और ड्रग्‍स खरीदने-बेचने का आरोप लगाया था।

ट्रिब्यूनल ने दी समीर को राहत 

इसी मामले में समीर वानखेड़े पर आरोप है कि उन्‍होंने आर्यन खान को गिरफ्तार करने की साजिश रची और फिर फिरौती के तौर पर 25 करोड़ की डिमांड की। अब सेंट्रल एमिनिस्‍ट्रेटिव ट्रब्‍यूनल (CAT) ने इस जाँच पर ही सवाल उठा दिए हैं। जिससे पूरा मामला ही बदलता नजर आ रहा हैं। 

जहाँ आर्यन को इस मामले में SIT की जाँच के बाद NCB ने क्‍लीन चिट दे दी थी। वहीं अब इस मामले में समीर को भी बड़ी राहत मिलने की खबर है। ‘ईटाइम्‍स’ की रिपोर्ट्स के मुताबिक, CAT ने अपने आदेश में वानखेड़े के ख‍िलाफ जाँच कर रही विशेष जाँच दल में NCB के डिप्‍टी डायरेक्‍टर जनरल ज्ञानेश्‍वर सिंह की मौजूदगी पर सवाल उठाए हैं। दरअसल, क्रूज पर जो छापेमारी हुई थी, उसके लिए समीर वानखेड़े ने जिन अध‍िकारियों से निर्देश लिए थे, उनमें ज्ञानेश्‍वर सिंह भी थे। ऐसे में CAT ने कहा है कि जिस अध‍िकारी ने आदेश दिए, वो खुद कैसे जाँच में शामिल हुआ।

पीठ ने कहा कि वानखेड़े अगर चाहें तो कैट के आदेश को रिकॉर्ड पर रखते हुए हलफनामा दायर कर सकते हैं। न्यायाधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजीत मोरे और सदस्य आनंद माथुर ने 21 अगस्त के अपने आदेश में कहा कि एनसीबी अधिकारी ज्ञानेश्वर सिंह विशेष जाँच दल (एसईटी) का हिस्सा नहीं हो सकते थे जो वानखेड़े के खिलाफ जाँच कर रहे थे। 

अधिकरण ने अपने आदेश में कहा, हमारी राय में प्रतिवादी संख्या चार (ज्ञानेश्वर सिंह) जाँच में सक्रिय रूप से शामिल होने के कारण एसईटी का हिस्सा नहीं हो सकते थे, जिसका गठन जब्ती के दौरान अधिकारियों की ओर से कथित प्रक्रियागत चूक की जाँच करने और उपरोक्त अपराध के संबंध में आगे की कार्रवाई के लिए किया गया था। हालाँकि, कैट ने एनसीबी की इस दलील पर गौर किया कि एसईटी रिपोर्ट प्रारंभिक प्रकृति की है और वानखेड़े के खिलाफ कार्रवाई के संबंध में केंद्र सरकार और एनसीबी द्वारा स्वतंत्र निर्णय लिया जाएगा।

गौरतलब है कि ट्रिब्‍यूनल समीर वानखेड़े की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें ज्ञानेश्वर सिंह की अध्यक्षता वाली SET के निष्कर्षों के मुताब‍िक, उनके खिलाफ सीबीआई द्वारा दर्ज जबरन वसूली और रिश्वतखोरी के मामले को रद्द करने की माँग की गई थी। मामले में समीर वानखेड़े के साथ ही चार अन्य पर शाहरुख़ खान से 2021 में उनके बेटे आर्यन को फँसाने के लिए 25 करोड़ रुपए की रिश्वत की माँग की थी।

‘जवान’ के डायलॉग का क्या है समीर कनेक्‍शन

शाहरुख खान इन आज रिलीज हुई अपनी फिल्‍म ‘जवान’ के प्रचार के सिलसिले में मंदिर-मंदिर घूम रहे हैं। यह फिल्‍म आज गुरुवार (7 सितम्बर, 2023) को जन्‍माष्‍टमी के मौके पर रिलीज हुई है। वहीं पिछले दिनों जब फिल्‍म का ट्रेलर आया, तब अचानक समीर वानखेड़े फिर से चर्चा में आ गए। फिल्‍म में एक डायलॉग है, जहाँ शाहरुख का किरदार कहता है, “बेटे को हाथ लगाने से पहले, बाप से बात कर।”

सोशल मीडिया पर यह डायलॉग खूब वायरल हुआ था। जहाँ फैंस का कहना था कि ऐसा लगता है शाहरुख ने यह डायलॉग समीर वानखेड़े के लिए ही बोला है। वहीं इस डायलॉग के वायरल होने के बाद समीर वानखेड़े ने भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर निकोल लियोन्स का लिखा एक क्रिप्‍ट‍िक पोस्‍ट किया। उन्‍होंने लिखा, “मैंने आग का स्‍वाद लिया है और हर उस पुल की राख पर डांस किया है, जिसे मैंने कभी जलाया है। मुझे आपसे कोई डर नहीं है।”

बता दें कि शाहरुख खान की नवीनतम फिल्म ‘जवान’ में नयनतारा, विजय सेतुपति, सान्या मल्होत्रा, प्रियामणि के साथ-साथ दीपिका पादुकोण और थलपति विजय भी हैं। यह फिल्म एटली द्वारा निर्देशित रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट की प्रस्तुति है। फिल्म की निर्माता गौरी खान हैं, और गौरव वर्मा  सह निर्माता हैं। फिल्म को हिंदी, तमिल और तेलुगु भाषा में रिलीज किया गया है।

ममता बनर्जी ने बंगाल के विधायक-मंत्रियों की ₹40000 बढ़ाई सैलरी: कर्मचारियों की DA बढ़ाने की माँग पर बोलीं- मेरा सिर काट लो

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य के विधायकों और मंत्रियों के वेतन में 40,000 रुपए की मासिक वृद्धि का ऐलान किया है। इस घोषणा के बाद अब बंगाल के विधायकों को हर महीने 50,000 रुपए वेतन के रूप में मिलेंगे। वहीं, मंत्रियों का मासिक वेतन 51,000 रुपए हो जाएगा।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार (7 सितंबर 2023) को विधायकों एवं मंत्रियों को राज्य विधानसभा के मानसून सत्र के आखिरी दिन यह सौगात दी। विधायकों का वेतन बढ़ाने का एलान करते हुए सीएम ममता ने कहा कि देश में सबसे कम बंगाल के विधायकों का वेतन था।

दरअसल, बंगाल के विधायकों को हर महीने वेतन के रूप में 10,000 हजार रुपए मिलते हैं। वहीं, राज्य मंत्रियों को यह मासिक वेतन 10,900 रुपए मिलते हैं, जबकि पूर्ण प्रभार वाले मंत्रियों को 11,000 रुपए वेतन मिलते हैं।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एलान के बाद विधायकों का वेतन बढ़कर 50,000 रुपए महीना हो गया है। वहीं, राज्य मंत्रियों का वेतन 50,900 रुपए महीना और पूर्ण प्रभार वाले मंत्रियों का वेतन 51,000 रुपए हो जाएगा।

कैबिनेट मंत्री, राज्यमंत्री और विधायकों को मासिक वेतन के अलावा जो अन्य भत्ते मिलते थे, उनमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। वहीं, ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री के वेतन में भी किसी तरह का बदलाव नहीं किया है। ममता का कहना है कि वह लंबे समय से वेतन नहीं ले रही हैं। इसलिए इसमें संशोधन की जरूरत नहीं है।

राज्य के विधायकों को वेतन, भत्ते और समिति की बैठकों में भाग लेने के लिए अब तक कुल मासिक 81,000 रुपए मिलते थे। बढ़ोतरी के बाद अब से उन्हें कुल एक लाख 21 हजार रुपए मिलेंगे। इसी तरह मंत्रियों को मिलने वाला कुल मासिक भुगतान 1.10 लाख रुपए से बढ़कर लगभग 1.50 लाख रुपए प्रतिमाह हो जाएगा।

ममता बनर्जी ने राज्य के मंत्रियों और विधायकों का वेतन तो बढ़ा दिया, लेकिन राज्य सरकार के कर्मचारियों द्वारा लंबे से महंगाई भत्ते में की जा रही वृद्धि की माँग पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। राज्य सरकार के कर्मचारी लंबे समय से केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बराबर बढ़े हुए महंगाई भत्ते और एरियर की माँग कर रहे हैं।

मार्च 2023 में बंगाल के सरकारी कर्मचारियों ने महंगाई भर्ता और एरियर की माँग में बढ़ोतरी को लेकर प्रदर्शन किया था। तब ममता बनर्जी ने कहा था, “आप (आंदोलनकारी सरकारी कर्मचारी) कितना चाहते हैं? आपको कितना संतुष्ट करेगा? आप मेरा सिर काट दें, लेकिन केंद्र के बराबर महंगाई भत्ता नहीं दे पाऊँगी।”

D मतलब डेंगू, M मतलब मलेरिया, K मतलब… बेटे उदयनिधि के बचाव में उतरे CM स्टालिन तो तमिलनाडु BJP अध्यक्ष ने समझा दिया DMK का मतलब

सनातन धर्म को लेकर आजतक देश में अनर्गल बयानबाजी का दौर जारी है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि द्वारा दिए गए बयान के बाद उनके सांसद ने ए राजा ने भी सनातन धर्म को लेकर गलत बयानबाजी की है। इसको लेकर तमिलनाडु भाजपा ने सत्ताधारी डीएमके पर हमला बोला है।

उदयनिधि द्वारा सनातन धर्म की तुलना डेंगू और मलेरिया के मच्छर से करने के बाद ए राजा ने इसकी तुलना HIV और कुष्ठ रोग से कर दी। राजा ने कहा कि सनातन की वास्तविक तुलना सामाजिक कलंक वाले इन बीमारियों से की जानी चाहिए। वहीं, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने अपने बेटे के बयान का बचाव किया है।

अब तमिलनाडु भाजपा ने डीएमके पर निशाना साधा है। तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने कहा कि अगर तमिलनाडु से किसी चीज को खत्म करने की जरूरत है तो वह डीएमके है। उन्होंने D का मतलबद डेंगू, M का मतलब मलेरिया और K का मतलब कोसु बताया।

अन्नामलाई ने X (पूर्व में ट्विटर) पर सीएम स्टालिन को संबोधित करते हुए एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो के साथ-साथ उन्होंने लिखा है, “हमें यकीन है कि आगे चलकर ये लोग इन घातक बीमारियों को डीएमके के साथ जोड़ देंगे।”

अन्नामलाई ने कहा, “हम द्रमुक के नाटक को जानते हैं। अपनी सत्ता के पहले साल में आप सनातन धर्म का विरोध करते हैं, दूसरे साल में आप कहते हैं कि सनातन धर्म को खत्म कर दो। तीसरे साल में आप सनातन धर्म को जड़ से खत्म करना चाहते हैं। लेकिन चौथे साल में आप कहते हैं कि आप हिंदू हैं और आपके 90% सदस्य हिंदू हैं। पांचवें वर्ष आप कहते हैं कि आप भी हिंदू हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “तमिलनाडु ने कई दशकों से यह नाटक देखा है। जब चुनाव आता है तो आप अमर, अकबर, एंथोनी बन जाते हैं जो श्री राहुल गाँधी पिछले 17 वर्षों से असफल रूप से कर रहे हैं। वह एक राज्य में अमर बन जाते हैं, दूसरे राज्य में अकबर और दूसरे राज्य में एंथोनी बन जाते हैं। 2024 में DMK का सफाया हो जाएगा। यह मैं नहीं कह रहा हूँ। आपके बेटे ने कहा है, क्योंकि DMK का D का मतलब डेंगू, M का मतलब मलेरिया और K का मतलब कोसु है।”

उधर, तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन गुरुवार 7 सितंबर को एक ताजा बयान जारी कर कहा कि वह पार्टी नेतृत्व के मार्गदर्शन में अपने खिलाफ सभी कानूनी मामले लड़ेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि डेंगू-मलेरिया से सनातन की तुलना करके वे अपना प्रचार नहीं कर रहे हैं, बल्कि उनके सिर की कीमत लगाकर संत अपना प्रचार कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “इन संतों को आज बहुत अधिक प्रचार की आवश्यकता है। ऐसा ही एक संत सामने आया है और उसने मेरे सिर पर ₹10 करोड़ की कीमत लगा दी है। मेरे सिर की कीमत से ज्यादा मुझे आश्चर्य इस बात का है कि ऐसे व्यक्ति के पास 10 करोड़ रुपए कैसे हो सकते हैं जो यह दावा करता है कि उसने सब कुछ त्याग दिया है।”

वहीं, अपने जवाबी वीडियो में अन्नामलाई ने कहा कि उदयनिधि ने 2022 में ईसाई होने का दावा किया था। अन्नामलाई ने कहा, “अब वह कहते हैं कि उन्हें इस पर कोई विश्वास नहीं है। आपके विचारक, द्रविड़ कड़गम के अध्यक्ष के वीरमणि कहते हैं कि सनातन धर्म हिंदू धर्म है। क्या आप उनके खिलाफ बयान देकर कह सकते हैं कि सनातन धर्म हिंदू धर्म नहीं है?”

दरअसल, सनातन धर्म मिटाने की बात कही थी। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए जा रहे उनके भाषण की एक वीडियो क्लिप में उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है, “सनातन धर्म को खत्म करने के लिए इस सम्मेलन में मुझे बोलने का मौका देने के लिए मैं आयोजकों को धन्यवाद देता हूँ। मैं सम्मेलन को ‘सनातन धर्म का विरोध’ करने के बजाय ‘सनातन धर्म को मिटाओ‘ कहने के लिए आयोजकों को बधाई देता हूँ।”

उदयनिधि ने कहा था, “कुछ चीजें हैं जिनका हमें उन्मूलन करना है और हम केवल विरोध नहीं कर सकते। मच्छर, डेंगू, मलेरिया, कोरोना ये सभी चीजें हैं जिनका हम विरोध नहीं कर सकते, हमें इन्हें मिटाना है। सनातन ​​भी ऐसा ही है। विरोध करने की जगह सनातन ​​को ख़त्म करना हमारा पहला काम होना चाहिए।”

उन्होंने सवालिया लहज़े में पूछा था, “सनातन क्या है? यह संस्कृत भाषा से आया शब्द है। सनातन समानता और सामाजिक न्याय के खिलाफ होने के अलावा कुछ नहीं है। सनातन का क्या अभिप्राय है? यह शाश्वत है, जिसे बदला नहीं जा सकता, कोई सवाल नहीं कर सकता है। यही इसका मतलब है। सनातन ने लोगों को जातियों के आधार पर बाँटा है और इसे बदला नहीं जा सकता।”

जी-20 शिखर सम्मेलन से पहले PM मोदी ने लिखा ब्लॉग, कहा- इसे दुनिया के अंतिम छोर तक ले जाना है, किसी को भी पीछे नहीं छोड़ना है

देश की राजधानी दिल्ली में 9 और 10 सितंबर 2023 को जी-20 शिखर सम्मेलन होना है। इससे ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी बेवसाइट पर एक ब्लॉग लिखा है। इसमें बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों के समूह जी20 को लेकर अपने इरादों के बारे में बताया है।

‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के भारतीय परंपरा से उन्होंने इस ब्लॉग की शुरुआत की है। इसका शीर्षक है- मानव-केंद्रित वैश्वीकरण: हमें जी20 को दुनिया के अंतिम छोर तक ले जाना है, किसी को भी पीछे नहीं छोड़ना है। प्रधानमंत्री के ब्लॉग को नीचे हूबहू उनके ही शब्दों में पढ़ें;

‘वसुधैव कुटुम्बकम’- हमारी भारतीय संस्कृति के इन दो शब्दों में एक गहरा दार्शनिक विचार समाहित है। इसका अर्थ है, ‘पूरी दुनिया एक परिवार है।’ यह एक ऐसा सर्वव्यापी दृष्टिकोण है जो हमें एक सार्वभौमिक परिवार के रूप में प्रगति करने के लिए प्रोत्साहित करता है।

एक ऐसा परिवार जिसमें सीमा,भाषा और विचारधारा का कोई बंधन ना हो। जी-20 की भारत की अध्यक्षता के दौरान, यह विचार मानव-केंद्रित प्रगति के आह्वान के रूप में प्रकट हुआ है। हम One Earth के रूप में, मानव जीवन को बेहतर बनाने के लिए एक साथ आ रहे हैं।

हम One Family के रूप में विकास के लिए एक-दूसरे के सहयोगी बन रहे हैं और One Future के लिए हम एक साझा उज्जवल भविष्य की ओर एक साथ आगे बढ़ रहे हैं। कोरोना वैश्विक महामारी के बाद की विश्व व्यवस्था इससे पहले की दुनिया से बहुत अलग है। कई अन्य बातों के अलावा, तीन महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं।

पहला, इस बात का एहसास बढ़ रहा है कि दुनिया के जीडीपी-केंद्रित दृष्टिकोण से हटकर मानव-केंद्रित दृष्टिकोण की ओर बढ़ने की आवश्यकता है। दूसरा, दुनिया ग्लोबल सप्लाई चेन में सुदृढ़ता और विश्वसनीयता के महत्व को पहचान रही है। तीसरा, वैश्विक संस्थानों में सुधार के माध्यम से बहुपक्षवाद को बढ़ावा देने का सामूहिक आह्वान सामने है। जी-20 की हमारी अध्यक्षता ने इन बदलावों में उत्प्रेरक की भूमिका निभाई है।

दिसंबर 2022 में जब हमने इंडोनेशिया से अध्यक्षता का भार सँभाला था, तब मैंने यह लिखा था कि जी-20 को मानसिकता में आमूलचूल परिवर्तन का वाहक बनना चाहिए। विकासशील देशों, ग्लोबल साउथ के देशों और अफ्रीकी देशों की हाशिए पर पड़ी आकांक्षाओं को मुख्यधारा में लाने के लिए इसकी विशेष आवश्यकता है।

इसी सोच के साथ भारत ने ‘वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट’ का भी आयोजन किया था। इस समिट में 125 देश भागीदार बने। यह भारत की अध्यक्षता के तहत की गई सबसे महत्वपूर्ण पहलों में से एक रही। यह ग्लोबल साउथ के देशों से उनके विचार, उनके अनुभव जानने का एक महत्वपूर्ण प्रयास था।

इसके अलावा, हमारी अध्यक्षता के तहत न केवल अफ्रीकी देशों की अब तक की सबसे बड़ी भागीदारी देखी गई है, बल्कि जी-20 के एक स्थायी सदस्य के रूप में अफ्रीकन यूनियन को शामिल करने पर भी जोर दिया गया है।

हमारी दुनिया परस्पर जुड़ी हुई है, इसका मतलब यह है कि विभिन्न क्षेत्रों में हमारी चुनौतियाँ भी आपस में जुड़ी हुई हैं। यह 2030 एजेंडा के मध्य काल का वर्ष है और कई लोग चिंता जता रहे हैं कि सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के मुद्दे पर प्रगति पटरी से उतर गई है।

एसडीजी के मोर्चे पर तेजी लाने से संबंधित जी-20 2023 का एक्शन प्लान भविष्य की दिशा निर्धारित करेगा। इससे एसडीजी को हासिल करने का रास्ता तैयार होगा। भारत में प्राचीन काल से प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर आगे बढ़ना हमारा एक आदर्श रहा है और हम आधुनिक समय में भी क्लाइमेट एक्शन में अपना योगदान दे रहे हैं।

ग्लोबल साउथ के कई देश विकास के विभिन्न चरणों में हैं और इस दौरान क्लाइमेट एक्शन का ध्यान रखा जाना चाहिए। क्लाइमेट एक्शन की आकांक्षा के साथ हमें ये भी देखना होगा कि क्लाइमेट फाइनेंस और ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी का भी ख्याल रखा जाए।

हमारा मानना है कि जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने के लिए पाबंदियों वाले रवैए को बदलना चाहिए। ‘क्या नहीं किया जाना चाहिए’ से हटकर ‘क्या किया जा सकता है’ वाली सोच के साथ आगे बढ़ना होगा। हमें एक रचनात्मक कार्यसंस्कृति पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।

एक टिकाऊ और सुदृढ़ ब्लू इकोनॉमी के लिए चेन्नई एचएलपी हमारे महासागरों को स्वस्थ रखने में जुटी है। ग्रीन हाइड्रोजन इनोवेशन सेंटर के साथ, हमारी अध्यक्षता में स्वच्छ एवं ग्रीन हाइड्रोजन से संबंधित एक ग्लोबल इकोसिस्टम तैयार होगा। वर्ष 2015 में हमने इंटरनेशनल सोलर अलायंस का शुभारंभ किया था।

अब, ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस के माध्यम से हम दुनिया को एनर्जी ट्रांजिशन के योग्य बनाने में सहयोग करेंगे। इससे सर्कुलर इकोनॉमी का फायदा ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचेगा। क्लाइमेट एक्शन को लोकतांत्रिक स्वरूप देना, इस आंदोलन को गति प्रदान करने का सबसे अच्छा तरीका है।

जिस प्रकार लोग अपने स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर रोजमर्रा के निर्णय लेते हैं, उसी प्रकार वे इस धरती की सेहत पर होने वाले असर को ध्यान में रखकर अपनी जीवनशैली तय कर सकते हैं। जैसे योग वैश्विक जन आंदोलन बन गया है, उसी तरह हम ‘लाइफस्टाइल फॉर सस्टेनेबल इनवायरमेंट’ (LiFE) को भी प्रोत्साहित कर रहे हैं।

जलवायु परिवर्तन के कारण, खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती होगी। इससे निपटने में मोटा अनाज या श्रीअन्न से बड़ी मदद मिल सकती है। श्रीअन्न क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर को भी बढ़ावा दे रहा है। इंटरनेशनल इयर ऑफ मिलेट्स के दौरान हमने श्रीअन्न को वैश्विक स्तर पर पहुँचाया है। द डेक्कन हाई लेवल प्रिंसिपल्स ऑन फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रिशन से भी इस दिशा में सहायता मिल सकती है।

टेक्नोलॉजी परिवर्तनकारी है, लेकिन इसे समावेशी भी बनाने की जरूरत है। अतीत में तकनीकी प्रगति का लाभ समाज के सभी वर्गों को समान रूप से नहीं मिला। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने दिखाया है कि कैसे टेक्नोलॉजी का लाभ उठाकर असमानताओं को कम किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, दुनिया भर में अरबों लोग जिनके पास बैंकिंग सुविधा नहीं है, या जिनके पास डिजिटल पहचान नहीं है, उन्हें डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) के माध्यम से साथ लिया जा सकता है।

डीपीआई का उपयोग करके हमने जो परिणाम प्राप्त किए हैं, उन्हें पूरी दुनिया देख रही है, उसके महत्व को स्वीकार कर रही है। अब, जी-20 के माध्यम से हम विकासशील देशों को डीपीआई अपनाने, तैयार करने और उसका विस्तार करने में मदद करेंगे, ताकि वो समावेशी विकास की ताकत हासिल कर सकें।

भारत का सबसे तेज गति से बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाना कोई आकस्मिक घटना नहीं है। हमारे सरल, व्यावहारिक और सस्टेनेबल तरीकों ने कमजोर और वंचित लोगों को हमारी विकास यात्रा का नेतृत्व करने के लिए सशक्त बनाया है। अंतरिक्ष से लेकर खेल, अर्थव्यवस्था से लेकर उद्यमिता तक, भारतीय महिलाएँ विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं।

आज महिलाओं के विकास से आगे बढ़कर महिलाओं के नेतृत्व में विकास के मंत्र पर भारत आगे बढ़ रहा है। हमारी जी-20 प्रेसीडेंसी जेंडर डिजिटल डिवाइड को पाटने, लेबर फोर्स में भागीदारी के अंतर को कम करने और निर्णय लेने में महिलाओं की एक बड़ी भूमिका को सक्षम बनाने पर काम कर रही है।

भारत के लिए, जी-20 की अध्यक्षता केवल एक उच्च स्तरीय कूटनीतिक प्रयास नहीं है। मदर ऑफ डेमोक्रेसी और मॉडल ऑफ डाइवर्सिटी के रूप में हमने इस अनुभव के दरवाजे दुनिया के लिए खोल दिए हैं। आज किसी काम को बड़े स्तर पर करने की बात आती है तो सहज ही भारत का नाम आ जाता है।

जी-20 की अध्यक्षता भी इसका अपवाद नहीं है। यह भारत में एक जन आंदोलन बन गया है। जी-20 प्रेसीडेंसी का हमारा कार्यकाल खत्म होने तक भारत के 60 शहरों में 200 से अधिक बैठकें आयोजित की जा चुकी होंगी, इस दौरान हम 125 देशों के लगभग 100,000 प्रतिनिधियों की मेजबानी कर चुके होंगे।

किसी भी प्रेसीडेंसी ने कभी भी इतने विशाल और विविध भौगोलिक विस्तार को इस तरह से शामिल नहीं किया है। भारत की डेमोग्राफी, डेमोक्रेसी, डाइवर्सिटी और डेवलपमेंट के बारे में किसी और से सुनना एक बात है और उसे प्रत्यक्ष रूप से अनुभव करना बिल्कुल अलग है। मुझे विश्वास है कि हमारे जी-20 प्रतिनिधि इसे स्वयं महसूस करेंगे।

हमारी जी-20 अध्यक्षता विभाजन को पाटने, बाधाओं को दूर करने और सहयोग को गहरा करने का प्रयास करती है। हमारी भावना एक ऐसी दुनिया के निर्माण की है, जहाँ एकता हर मतभेद से ऊपर हो, जहाँ साझा लक्ष्य अलगाव की सोच को खत्म कर दे।

जी-20 अध्यक्ष के रूप में, हमने वैश्विक पटल को बड़ा बनाने का संकल्प लिया था, जिसमें यह सुनिश्चित किया गया कि हर आवाज सुनी जाए और हर देश अपना योगदान दे। मुझे विश्वास है कि हमने कार्यों और स्पष्ट परिणामों के साथ अपने संकल्प पूरे किए हैं।

कॉन्स्टेबल रतनलाल की हत्या में जुलाई में पकड़ाया था मोहम्मद खालिद, सितंबर में मिल गई जमानत: कोर्ट ने कहा- दूसरों के मुकाबले इस पर लगे आरोप गंभीर नहीं

2020 के हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों के दौरान हेड कांस्टेबल रतन लाल की हत्या में शामिल होने के आरोपित मोहम्मद खालिद को जमानत मिल गई। बुधवार (6 सितंबर, 2023) को, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलत्स्य प्रमाचला की अदालत ने आरोपित मोहम्मद खालिद को जमानत देते हुए 15 हजार रुपए का मुचलका भरने का निर्देश दिया। 

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, एएसजे प्रमाचला ने कहा कि उन्हें आरोपित मोहम्मद खालिद की भूमिका अन्य सह आरोपितों से ज़्यादा गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा, “…समान प्रकार के आरोपों वाले सह-अभियुक्त व्यक्तियों को बिना किसी विशिष्ट भूमिका के उस भीड़ का हिस्सा होने के कारण इस मामले में पहले ही जमानत दे दी गई है।” 

अदालत ने यह भी कहा कि जिन लोगों पर सीसीटीवी कैमरों को नुकसान पहुँचाने का मामला था, उन्हें भी दिल्ली की उच्च न्यायालय ने जमानत दे दी।

आरोपित के वकील मोहम्मद हसन के मुताबिक, खालिद दिसंबर 2018 से देहरादून में रह रहा था। उन्होंने आगे कहा कि खालिद के बैंक लेनदेन से पता चलता है कि वह उक्त घटना की तारीख पर देहरादून में एक गैस स्टेशन पर मौजूद था।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रमाचला ने फैसला सुनाया, “अगर यहाँ अन्य आरोपित पर लगाए गए अपराध के आरोपों की तुलना करती हूँ, तो मुझे यह अन्य सह-अभियुक्तों पर लगाए गए आरोप से ज़्यादा गंभीर नहीं लगती, जिन्हें जमानत दी गई है।”

बता दें कि इसी साल जुलाई, 2023 में गिरफ्तार किया गया मोहम्मद खालिद हेड कांस्टेबल रतन लाल की हत्या के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक मोहम्मद अयाज का भाई है। अयाज़ को भी दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इसी साल 21 जून को गिरफ्तार किया था। 

इससे पहले, यह बताया गया था कि पूछताछ के दौरान, आरोपित खालिद ने स्वीकार किया था कि उसने 2020 में अपने बड़े भाई मोहम्मद अयाज़ और कई दोस्तों के साथ चाँद बाग में सीएए/एनआरसी विरोधी रैली में भाग लिया था। 

अभियोजन पक्ष ने कहा है कि आरोपित मोहम्मद खालिद पुलिस पर हमले की साजिश का हिस्सा था। विशेष लोक अभियोजक ने इस आधार पर जमानत याचिका का विरोध किया कि खालिद ने पुलिस पर हमले की साजिश रचने के लिए मीटिंग के लिए अपनी प्रॉपर्टी उपलब्ध कराई थी। 

हालाँकि, अदालत ने कहा कि खालिद को उस बैठक के बाद के CCTV फुटेज में नहीं देखा गया था। अदालत ने कहा कि एक गवाह जिसने बैठक से बाहर आकर खालिद के घरेलू नौकर की पहचान की, उसने अपने बयान में खालिद का उल्लेख नहीं किया।

24 फरवरी 2020 को हुई थी कांस्टेबल रतन लाल की हत्या

बता दें कि दिल्ली दंगों के दौरान हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की हत्या 24 फ़रवरी को कर दी गई थी। पुलिस ने इस मामले में 1100 पन्नों की चार्जशीट दायर की थी।

पुलिस ने चार्जशीट में खुलासा किया था कि इससे 2 दिन पहले 22 फ़रवरी को ही 50 लोगों के एक समूह ने बैठक की थी, जहाँ हिंसा की पूरी साज़िश रची गई। दंगाइयों ने अपने घर के बच्चों व बुजुर्गों को पहले ही घर के भीतर रहने को बोल दिया था और ख़ुद हथियार लेकर निकले। इसी मीटिंग की चर्चा कोर्ट में सरकारी वकील द्वारा की गई थी।

बताया गया तब कि ये लोग 23 फरवरी को भी हंगामे के लिए निकले थे, लेकिन उस दिन ज्यादा कुछ नहीं किया गया और ये सभी वापस आ गए। 24 फरवरी को सारे उपद्रवी एक बार फिर से घर से बाहर निकले और हिंसा शुरू कर दी। इस हिंसा में शाहदरा के डीसीपी अमित शर्मा, एसपी अनुज शर्मा और हेड कांस्टेबल रतनलाल गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बाद में इलाज के दौरान रतनलाल की मौत हो गई थी।

उनकी मौत के बाद पूरे देश में एक आक्रोश की लहर दौड़ गई थी और सभी ने एक सुर में इस घटना की निंदा की थी। इस मामले में 5 मास्टरमाइंड हैं, जिनमें सलीम खान, सलीम मुन्ना और शादाब का नाम शामिल है। ‘आज तक’ की ख़बर के अनुसार, इस मामले की जाँच के लिए गठित एसआईटी ने कुल 17 आरोपितों को गिरफ़्तार किया था।

गौरतलब है कि पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट में पुख्ता सबूत पेश किए हैं। जानकारों का कहना है कि पुलिस का पक्ष इस मामले में काफी मजबूत है और सुनवाई के बाद आरोपितों के गुनाहों का साबित होना तय है। चार्जशीट में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल की वीडियो फुटेज और फोन कॉल डिटेल्स के साथ-साथ मौके पर उपस्थित गवाहों, पुलिसकर्मियों और अन्य चश्मदीदों के बयान भी जोड़े गए थे। बता दें कि इस मामले में क़रीब 60 लोग गवाह के रूप में अपना बयान दर्ज करा चुके हैं।

पुलिस ने चार्जशीट में ये भी कहा है कि रतनलाल की हत्या एक गहरी साजिश का हिस्सा थी। 24 फरवरी को मौजपुर क्रॉसिंग के पास हिन्दुओं और मुस्लिमों के बीच झड़प से दोपहर 12 बजे के क़रीब हिंसा भड़क उठी थी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘टाइम्स नाउ’ को बताया कि 5000 लोग वहाँ जुट गए थे और पत्थरबाजी भी हो रही थी। 1 बजे एक बड़ी भीड़ ने चाँदबाग में डीसीपी और अन्य पुलिस अधिकारियों पर हमला बोल दिया, जिसमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल थे। इसी भीड़ के डरा हमले में कांस्टेबल रतनलाल की मौत हो गई थी।

‘तेरा धर्म भ्रष्ट कर दिया…’: शिफत अंसारी ने अपनी दलित दोस्त को खिलाया गोमांस, नदीम-शोएब से करवाया रेप; ब्लैकमेल कर माँगे ₹5 लाख

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक दलित युवती से गैंगरेप का मामला सामने आया है। इस मामले में शिफत नाम की लड़की के अलावा शोएब और नदीम के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में नशीला पदार्थ खिलाकर दुष्कर्म करने और फिर अश्लील वीडियो बनाकर 5 लाख रुपए के लिए ब्लैकमेल करने का भी आरोप है।

पीड़िता ने अपनी शिकायत में यह भी दावा किया है कि आरोपितों ने उसे गोमांस खाने के लिए भी मजबूर किया गया। शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस शिफत और उसके पुरुष साथियों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। घटना शनिवार (2 सितम्बर 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला बरेली के बारादरी थाने का है। पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया है कि वो हुसैनबाग निवासी शिफत नाम की एक लड़की से पहले से ही परिचित थी। शिफत ने कुछ दिन पहले कुछ जरूरी काम बताकर पीड़िता। से 30 हजार रुपए उधार लिए थे।

पीड़िता का कहना है कि 1 सितम्बर 2023 को उसने अपने पैसे वापस माँगे तो शिफत ने उसे अगले दिन 2 सितम्बर को डीडीपुरम स्थित टपरी कैफे पर बुलाया। यहाँ शिफत के साथ शोएब और नदीम पहले से ही मौजूद थे। तीनों कुछ जरूरी काम बताकर रजनी होटल चले गए और पीड़िता को वहीं आकर पैसे लेने के लिए कहा।

लगभग 2 घंटे बाद जब पीड़िता रजनी होटल पहुँची तो रिसेप्शनिष्ट ने उन्हें कमरे में शिफत के होने की बातकर कर अंदर जाने को कहा। कमरे में शिफत के साथ मौजूद शोएब और नदीम ने पीड़िता को कोल्ड ड्रिंक में कुछ नशीला पदार्थ मिला के पिला दिया। तीनों ने उसे नशे की हालत में गोमांस का कबाब भी खिलाया।

पीड़िता जब बेसुध हो गई तो शोएब और नदीम ने उसके साथ रेप किया। होश आने पर तीनों ने गैंगरेप के दौरान लड़की की अश्लील वीडियो बनाने की जानकारी दी। उन्होंने कहा, “हमने तेरा धर्म भ्रष्ट कर दिया है। अब तू अपने 30 हजार रुपए भूल जा और हमें 5 लाख रुपए कहीं से भी लाकर दे।” पैसे न देने पर वीडियो वायरल करने की धमकी दी गई।

जब पीड़िता इतने पैसे नहीं जुटा पाई तो तीनों आरोपितों ने उसका आपत्तिजनक वीडियो उसके मंगेतर को भेज दिया। तीनों पर आरोप है कि वो पीड़िता पर दूसरे मुस्लिम युवकों से शारीरिक संबंध बनाने का दबाव दे रहे हैं। आरोपित शोएब बी फार्मा का छात्र है, जबकि नदीम सैलून चलाता है। इन दोनों की दोस्त शिफत अंसारी क्लास 12 पास है।

डिप्टी SP आशीष प्रताप सिंह के मुताबिक, आरोपित कश्मीर भागने की तैयारी में थे। वहाँ नदीम का सैलून है। शिकायत के आधार पर तीनों आरोपितों के खिलाफ SC/ST एक्ट, गैंगरेप, धमकी और रंगदारी जैसी धाराओं में FIR दर्ज कर ली गई है। उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। वहीं, लड़की को मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा गया है।

मेरे बेटे को जेल तो CM स्टालिन के बेटे को क्यों नहीं: मनीष कश्यप की माँ ने राष्ट्रपति को लिखी चिट्ठी, कहा- उदयनिधि पर भी लगे NSA

तमिलनाडु में यूपी-बिहार के आप्रवासी मजदूरों का मुद्दा उठाने के कारण वहाँ के स्टालिन सरकार के निशाने पर आए यूट्यूबर मनीष कश्यप की माँ ने राष्ट्रपति को एक चिट्ठी लिखी है। तमिलनाडु के साथ ही बिहार सरकार ने मनीष कश्यप पर NSA लगाकर जेल में डाल दिया है। कश्यप की माँ ने अपनी चिट्ठी में स्टालिन सरकार और उदयनिधि के बयान को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

मनीष कश्यप की माँ मधु देवी ने बुधवार 6 सितंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र लिखकर तमिलनाडु पुलिस द्वारा उनके बेटे के खिलाफ कथित तौर पर दो राज्यों के बीच तनाव पैदा करने के लिए लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) पर सवाल उठाए। वहीं, उन्होंने डीएमके नेता और राज्य के मंत्री उदयनिधि स्टालिन द्वारा ‘सनातन धर्म के उन्मूलन’ की बात करने पर कोई कार्रवाई नहीं किए जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए और भी बड़ा खतरा बताया।

पत्र में मनीष कश्यप की माँ मधु देवी ने कहा कि उनके बेटे ने अपने यूट्यूब वीडियो के माध्यम से तमिलनाडु में कुछ बिहारी मजदूरों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाया था। हालाँकि, तमिलनाडु पुलिस ने इसे झूठा पाया और छह अलग-अलग मामले दर्ज किए। उनके बेटे के खिलाफ सख्त एनएसए लगाने के अलावा एफआईआर भी दर्ज की गई।

इसके अलावा, पत्र में उल्लेख किया गया है कि विचाराधीन वीडियो इस साल 15 फरवरी से तमिलनाडु से प्रसारित किया जा रहा था, केवल यह जोड़ा गया कि देश के प्रिंट मीडिया ने 21 फरवरी के बाद इसके बारे में समाचार लेख प्रकाशित किए। इसके बाद, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने भी इस मुद्दे को उठाया और अंततः राजनेताओं ने इस खबर पर टिप्पणी की।

मधु देवी ने कहा कि तमिलनाडु और बिहार सरकार ने मनीष कश्यप को फँसाने की साजिश रची, जबकि उनका ‘विवादास्पद’ वीडियो मार्च में सामने आया था। उन्होंने कहा, “मेरे बेटे ने भी मार्च में बिहारी प्रवासी मजदूरों की खबर पर एक वीडियो बनाया और बिहार सरकार से सवाल किया कि बिहारी मजदूरों के साथ ऐसा भेदभाव क्यों किया जाता है, लेकिन बिहार सरकार और तमिलनाडु सरकार ने मिलकर सख्त एनएसए लागू कर दिया।” पत्र में लिखा है।

मनीष कश्यप की माँ द्वारा लिखी गई चिट्ठी (साभार: सच तक)

उन्होंने पत्र में आगे कहा, “अगर मेरे बेटे की वजह से दो राज्यों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हुई तो एक मुख्यमंत्री का बेटा, जो तमिलनाडु में मंत्री भी है, उस उदयनिधि स्टालिन के बयान पर तो पूरे देश में टकराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती थी, फिर भी उन्हें NSA में गिरफ्तार करके जेल में क्यों नहीं डाला जा रहा है? अगर संविधान सबके लिए बराबर है तो तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के बेटे पर भी NSA लगाई जाए।”

उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में प्रवासी मजदूरों के साथ जो घटना हुई थी, उसकी जाँच सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित स्वतंत्र कमिटी द्वारा कराई जाए। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री के बेटे उदयनिधि को भी वही सजा दी जाएगी, जो भारत के एक आम नागरिक द्वारा गलती करने पर कोर्ट द्वारा उसे दी जाती है।