सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (4 सितम्बर, 2023) को नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद मोहम्मद अकबर लोन को माफी माँगने के लिए कहा है। दरअसल, अनुच्छेद 370 को निरस्त करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई के 15वें दिन, केंद्र ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद मोहम्मद अकबर लोन से अपने बयानों के लिए माफी माँगते हुए एक हलफनामा माँगा, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान समर्थक नारे लगाए थे। लोन उन याचिकाकर्ताओं में से एक हैं जिन्होंने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा रद्द करने के केंद्र के फैसले को चुनौती दी थी।
#SupremeCourt asks National Conference leader Mohammad Akbar Lone, the lead petitioner in the Article 370 case, to file an affidavit affirming that J&K is an integral part of India and that he owed allegiance to the Constitution of India.#Article370#JammuAndKashmirhttps://t.co/OSWUbnlhsV
सुप्रीम कोर्ट का आदेश केंद्र द्वारा 2018 में जम्मू-कश्मीर विधानसभा के पटल पर लोन द्वारा कथित तौर पर “पाकिस्तान जिंदाबाद” का नारा लगाने पर कड़ी आपत्ति जताने के बाद आया है।
कोर्ट में केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पाँच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ से कहा, “लोन को एक हलफनामा दायर करना होगा जिसमें कहा गया हो कि वह भारत के संविधान के प्रति निष्ठा रखते हैं और जम्मू-कश्मीर देश का अभिन्न अंग है। और अलगाववादी ताकतों और आतंकवाद का विरोध करते हैं।”
मेहता ने भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ से कहा, “लोन को सर्वोच्च न्यायालय में एक हलफनामा दायर करना चाहिए जिसमें कहा गया हो कि वह भारत के संविधान के प्रति निष्ठा रखते हैं और अलगाववादी ताकतों और आतंकवाद का विरोध करते हैं।”
रिपोर्ट के अनुसार, मेहता का बयान तब आया जब कश्मीरी पंडितों के एक संगठन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील बिमल जाद ने पीठ से कहा, “इन याचिकाकर्ताओं को इस मामले का हिस्सा बनने की अनुमति नहीं दी जा सकती।”
तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ के सामने कहा कि सदन के पटल पर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ की लोन की टिप्पणी की अपनी गंभीरता है। यह मामला गैर सरकारी संगठन ‘रूट्स इन कश्मीर’ ने अदालत के समक्ष उठाया था।
मेहता ने कहा कि अदालत को इस नजरिए से देखना चाहिए कि अनुच्छेद 370 को जारी रखने की माँग कौन कर रहा है। मेहता ने कहा कि लोन कोई सामान्य व्यक्ति नहीं हैं बल्कि वह संसद सदस्य हैं और यह पर्याप्त नहीं है कि वह पश्चाताप व्यक्त करें। उन्हें कहना होगा कि मैं जम्मू-कश्मीर या अन्य जगहों पर पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद और किसी भी अलगाववादी गतिविधि का विरोध और आपत्ति करता हूँ। इसे रिकॉर्ड पर आना चाहिए।
रूट्स इन कश्मीर की ओर से पेश हुए वकील ने पीठ को बताया, जिसमें मुख्य न्यायाधीश के अलावा जस्टिस एसके कौल, संजीव खन्ना, बीआर गवई और सूर्यकांत भी शामिल थे, उन्होंने विवरण देते हुए एक अतिरिक्त हलफनामा दायर किया था और कहा था कि लोन ने जो कहा था उसके लिए उन्हें कोई पछतावा नहीं जताया है। .
गौरतलब है कि एक दूसरे वकील ने बताया कि सांसद लोन ने सदन के बाहर कहा था कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर विधानसभा में जो कुछ भी कहा, उस पर कायम हैं। वहीं अनुच्छेद 370 में किए गए बदलावों को चुनौती देने वाली याचिकाओं का विरोध करने वाले अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने भी कहा कि लोन को माफी माँगनी चाहिए।
उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में बुधवार (30 अगस्त, 2023) को एक महिला कॉन्स्टेबल ट्रेन के अंदर गंभीर रूप से घायल स्थिति में में मिली थीं। तब कई मीडिया रिपोर्ट्स में सिपाही से रेप की आशंका जताई गई थी। इलाहबाद हाईकोर्ट ने भी इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई का फैसला किया है। अब महिला सिपाही के भाई ने सामने आ कर अपनी बहन से रेप की खबरों का खंडन किया है। साथ ही उन्होंने अपने परिवार की छवि को धूमिल करने का आरोप लगाया है।
पुलिस ने भी रेप की खबरों को बेबुनियाद बताते हुए आरोपितों की तलाश जारी होने की जानकारी दी है।
क्या है पूरा मामला
साल 1998 बैच की सिपाही व वर्तमान में हेड कॉन्स्टेबल सुमित्रा पटेल की तैनाती सुल्तानपुर जिले में है। फिलहाल उनकी ड्यूटी अयोध्या मेले में लगी है। बुधवार (30 अगस्त, 2023) की सुबह वह गोंडा जिले के मनकापुर रेलवे स्टेशन पर सरयू एक्सप्रेस के अंदर एक सीट के नीचे गंभीर रूप से घायल मिली थीं। सुमित्रा पर किसी धारदार हथियार से हमला किया गया था और आसपास काफी खून बिखरा था। तब कई खबरों में कांस्टेबल के साथ रेप की आशंका जताई गई थी।
महिला सिपाही को अयोध्या स्टेशन पर उतरना था पर वो वहाँ से लगभग 50 किलोमीटर दूर मनकापुर कैसे पहुँच गई इसका खुलासा अभी नहीं हो पाया है।
हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान
इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर ने इस घटना का स्वतः संज्ञान लिया है। एक जनहित याचिका कायम करते हुए उन्होंने केंद्र व राज्य सरकार को नोटिस जारी किया था। साथ ही 4 सितम्बर 2023 (सोमवार) को शासकीय अधिवक्ता एके संड को पूरी जानकारी सहित पेश होने के लिए कहा था। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर तथा न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की बेंच में हुई। आज हुई सुनवाई में पुलिस और रेलवे ने अपना पक्ष रखा।
बेंच ने केस की चल रही जाँच से संतुष्टि जताई। मामले में सुनवाई के लिए अगली तारीख इसी माह की 13 सितंबर को तय की गई है। इसके लिए पहले रात के 8 बजे ही हाईकोर्ट की बेंच बैठी थी और इसमें इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया गया था।
▪️ सरयू एक्सप्रेस ट्रेन में महिला सिपाही के ऊपर हुए हमले के मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में हुई सुनवाई।
▪️ HC में राज्य सरकार और रेलवे ने जवाब दाखिल किया, हाईकोर्ट वर्तमान में चल रही जांंच से संतुष्ट है।
सोशल मीडिया में अपनी बहन के बारे में चल रही रेप की खबरों पर सिपाही सुमित्रा के भाई सचिन कुमार ने नाराज़गी जताई है। उन्होंने अपनी बहन के साथ हुए घटनाक्रम को दर्दनाक बताते हुए उनके बारे में उड़ाई जा रहीं रेप की खबरों को गंदा काम बताया। सचिन ने कहा कि उनकी बहन के साथ रेप या छेड़छाड़ नहीं किया गया है। मीडिया पर खुद व परिवार सहित रिश्तेदारों को भ्रमित करने का आरोप लगाते हुए सचिन ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस के स्टाफ उनके परिवार को बहुत सपोर्ट कर रहे हैं और उन्हें किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं है।
चार दिन पूर्व सरयू एक्सप्रेस ट्रेन में महिला सिपाही हेड कांस्टेबल सुमित्रा पटेल से हुई ट्रेन मे घटना के संबंध मे भाई का बयान – बहन के साथ कोई दुष्कर्म संबंधी घटना नही हुई थी,मीडिया चैनल व सोशल मीडिया पर लोग इस तरह खबरें चलाकर उनके परिवार की छवि धूमिल कर रहे है,पीड़िता का लखनऊ… pic.twitter.com/bZUIxe5DCB
— आदित्य तिवारी / Aditya Tiwari (@aditytiwarilive) September 3, 2023
वहीं लखनऊ जीआरपी की पुलिस अधीक्षक पूजा यादव ने भी मीडिया में चल रही महिला सिपाही के साथ रेप की खबरों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि मेडिकल जाँच में किसी भी तरफ के यौन शोषण की पुष्टि नहीं हुई है। घटना का खुलासा जल्द करने का आश्वासन देते हुए SP जीआरपी ने बताया कि कई टीमों हर बिंदु पर जाँच कर रहीं हैं।
स्थिर है महिला सिपाही की हालत
घायल महिला सिपाही को पुलिस ने पहले अयोध्या के एक स्थानीय अस्पताल में भर्ती करवाया था। यहाँ से बेहतर इलाज के लिए सुमित्रा को अयोध्या में ही दर्शन नगर मेडिकल कॉलेज भेजा गया था। हालत गंभीर होने की वजह से फ़िलहाल सुमित्रा को लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज (KGMC) रेफर कर दिया गया है। यहाँ सिपाही की हालत फ़िलहाल स्थिर बताई गई है। डॉक्टरों की टीम लगातार सुमित्रा की निगरानी कर रही है। सुरक्षा के लिए पुलिस के जवान तैनात हैं।
सरयू एक्सप्रेस में घायल मिली महिला सिपाही से मिलने डीजीपी विजय कुमार और एसीएस होम संजय प्रसाद पहुंचे ट्रामा सेंटर कल ही कोर्ट ने मामले का लिया था स्वतः संज्ञान आज डीजीपी और एसीएस होम पहुंचे ट्रामा सेंटर महिला की हालत बताई जा रही है पहले से स्थिर नहीं हुआ कोई सेक्सुअल हैरेसमेंट pic.twitter.com/7nbYz34YW2
बागेश्वर धाम के महंत पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को धमकी देने के मामले में पुलिस ने अनस अंसारी को गिरफ्तार किया है। उसे उत्तर प्रदेश के बरेली से पकड़ा गया है। आरोप है कि अनस ने इंस्टाग्राम पर लिखा था- बाबा की मौत मंडरा रही है। वहीं बाबा बागेश्वर ने कहा है कि वह ऐसी गीदड़ भभकियों से नहीं डरते हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अनस अंसारी बरेली के हाफिजगंज थाना क्षेत्र के रिठौरा गाँव का रहने वाला है। उसने इंस्टाग्राम पर चैट करते हुए लिखा था, “बाबा की मौत मंडरा रही है और वीडियो ढूँढ़ लो। बच गया साला, नहीं तो मारा जाता।” अनस ने इंस्टाग्राम पर mr_anas2332 के नाम से आईडी बना रखी है। इस चैट स्क्रीनशॉट सामने आने के बाद विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने आरोपित के खिलाफ कार्रवाई की माँग की थी।
इस मामले में बरेली के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) राज कुमार अग्रवाल ने कहा है कि अनस अंसारी ने इंस्टाग्राम पर धीरेंद्र शास्त्री को लेकर भड़काऊ बात लिखते हुए जान से मारने की धमकी दी थी। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 295 ए, 504, और आईटी एक्ट (IT Act) के तहत मामला दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि पुलिस और इंटेलीजेंस इस मामले की तह तक जाने में जुटी हुई है। अनस अंसारी के आतंकी संगठन से जुड़े होने तथा यह धमकी किसी के कहने पर तो नहीं दी गई है, इस बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
वहीं जब धमकी को लेकर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से मीडिया ने सवाल किया तो पहले उन्होंने इसे हँसकर टाल दिया। फिर कहा कि लिखने वाले के हाथ से अगर ईश्वर ने लिखवाया होगा तो उसे कौन रोक पाएगा। उन्होंने आगे कहा कि इस तरह की गीदड़ भभकियों से शेर डरा नहीं करते। अगर कभी मौका मिला तो वह ऐसे लोगों की ठठरी बाँधने के लिए बरेली जरूर जाएँगे।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को सत्ता से बाहर होने का डर है, इसलिए चीन ने अपने नागरिकों को जासूसी का प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया है। यह प्रशिक्षण विदेशियों और जासूसों पर नजर रखने और उन्हें पकड़ने के लिए है। इस बारे में ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ पर प्रकाशित लेख में बताया गया है कि चीन दुनिया के सबसे बड़े जासूसी अभियानों में से एक को अंजाम दे रहा है। उसके इस अभियान का लक्ष्य अमेरिका और उसके सहयोगियों की रक्षा और आर्थिक जानकारी चुराना है।
चीन में हर विदेशी पर रखी जा रही नजर
दरअसल, चीन को लगता है कि उसके दुश्मन हर तरफ हैं। शिक्षण संस्थान हों या मल्टीनेशनल कंपनियाँ, वो हर किसी को शक की निगाह से देख रहा है। ऊपर से चीन में अगर आप विदेशी हैं, तो यकीन मानिए कि आपको देखने वाली हर नजर पारखी है। वो आप पर अच्छे से नजर रख रहे होते हैं, क्योंकि चीन ने अपने नागरिकों को पूरी तरह से जासूसों में बदल डाला है। जासूसी भी ऐसी वैसे स्वत: प्रेरित नहीं, बल्कि चीनी सरकार ने बाकायदा ट्रेनिंग दी है कि आम लोग किस तरह से विदेशी संस्थानों से जुड़े लोगों पर नजर रख सकते हैं।
शी जिनपिंग को सत्ता खिसकने का डर
इस लेख के मुताबिक, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग डरे हुए हैं। उन्हें विदेशी जासूसों से बहुत डर लग रहा है। वो इसीलिए देश के बाहर बहुत ही कम मौकों पर जा रहे हैं। खास बात ये है कि उन्होंने घरेलू परिस्थितियों में उलझे होने की वजह से जी-20 जैसे समूह के शिखर सम्मेलन तक में शामिल होने से मना कर दिया। उन्हें डर है कि चीजें अगर उनके कंट्रोल से बाहर गई, तो उन्हें सत्ता से बाहर होना पड़ेगा। यहाँ तक कि वो इंडोनेशिया में होने वाली आसियान की बैठक में भी नहीं जा रहे हैं।
दिल्ली में होने वाली जी-20 की बैठक में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की जगह वहाँ के प्रीमियर ली कांग (Li Qiang) हिस्सा लेंगे। चीन ने इस संबंध में भारत को जानकारी दे दी है।
किंडर गार्डन से लेकर यूनिवर्सिटी में ट्रेनिंग
चीन ने अपने नागरिकों चाहे वो यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्र हों, या किंडर गार्डन में काम करने वाले कर्मचारी, सभी को ट्रेनिंग देने की व्यवस्था की है। इसी क्रम में पूरी चीन के तियानजिन शहर में एक किंडर गार्डन में काम करने वाले कर्मचारियों को चीन के नए जासूसी विरोधी ‘कानून को समझने और इस्तेमाल’ करने के लिए ट्रेनिंग दी। यही नहीं, अब चीन के खुफिया विभाग ने सोशल मीडिया पर भी अपने पाँव पसार लिए हैं। चीन के स्टेट सिक्यूरिटी मिनिस्ट्री से जुड़े खुफिया विभाग ने सोशल मीडिया अकाउंट भी खोला है, और उस पर पहली पोस्ट की है ‘जासूसी के ख़िलाफ़ संपूर्ण समाज को लामबंद करने का आह्वान’।
कमजोर अर्थव्यवस्था से लगा झटका?
चीन इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। रियल इस्टेट सेक्टर पूरी तरह से तबाह हो चुका है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है। विकास दर घट चुकी है और आंतरिक तौर पर नागरिकों में भी असंतोष बढ़ रहा है। यही नहीं, अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के चीफ ने कुछ समय पहले एक बयान देकर भी चीन के कान खड़े कर दिए थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका अब चीन में अपने जासूसी नेटवर्क को फिर से खड़ा कर रहा है।
विदेशी लोगों से मिलने-जुलने का मतलब है नजर में आना
चीन में इस समय माहौल डरावना है। आप विदेशी कंपनी में काम करते हैं, तो आप संभावित जासूस हो सकते हैं। ऐसे में आप पर नजर रखने के लिए आपके आसपास लोगों का एक घेरा खड़ा कर दिया गया है। यही नहीं, अगर आप विदेशी कंपनियों के साथ साझेदारी जैसा काम करते हैं, तो भी आप सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर रहते हैं। इस समय विदेशी नागरिकों पर चीन ने काफी कड़ाई से नजर रखी है और कई लोगों को जासूसी के आरोपों में गिरफ्तार भी किया है।
अधिकारियों ने इस साल की शुरुआत में यह भी कहा था कि उन्होंने जासूसी के आरोप में एक अमेरिकी नागरिक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, और उन्होंने एक उच्च पदस्थ चीनी अखबार के संपादक को उस समय गिरफ्तार किया था जब वह एक जापानी राजनयिक के साथ भोजन कर रहे थे। हालाँकि, संपादक के परिवार ने आरोपों को झूठा बताया है।
माओ की राह पर जिनपिंग?
माओत्से तुंग की राहत पर जिनपिंग चल रहे हैं। माओ ने चीनियों को इस तरह से तैयार किया था कि अगर चीनियों के बीच कोई क्रांति के विरोध (एंटी कम्यूनिस्ट) वाली सोच भी रखता है, तो उसका दमन कर दिया जाएगा। न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय में आधुनिक चीनी इतिहास के प्रोफेसर चेन जियान ने कहा कि चीन की ये हरकत माओ के समय को दोबारा लाने जैसा है। प्रोफ़ेसर चेन ने कहा कि जासूसी के नाम पर लोगों को निशाना बनाने खासकर वैचारिक विरोधियों का, ये ठीक उसी तरह से है, जैसा माओत्से तुंग ने अपनी ताकत को मजबूत करने के लिए किया था।
सतर्क अमेरिका फूँक-फूँक कर बढ़ा रहा कदम
प्रोफेसर चेन ने कहा कि जिनपिंग कितनी भी कोशिश कर लें लेकिन चीनी समाज उस राह पर नहीं चलेगा, जिस राह पर माओ चीन को ले जाने में सफल हुए थे। हालाँकि, पिछले कुछ समय से अमेरिका ने चीन के खिलाफ बेहद कड़ा रवैया अपनाया है, जिसमें चीनी कंपनियों को बैन करने के साथ ही टिकटॉक ऐप जैसी चीजों को बैन करना शामिल है। अमेरिका ने अपने साथी देशों को भी इंटरनेट और तकनीकी के क्षेत्र में काम करने वाली हुवै जैसी कंपनियों के साथ काम करने से रोकने जैसी कार्रवाई की है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने चाँद पर भेजे गए विक्रम लैंडर की दोबारा सॉफ्ट लैंडिंग कराई है। इसे इसरो की बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। वैज्ञानिकों ने विक्रम लैंडर को लेकर ‘हॉप प्रयोग’ किया। इसके तहत लैंडर 40 सेंटीमीटर की छलाँग लगाते हुए 30-40 सेंटीमीटर की दूरी तय की है।
इसकी जानकारी देते हुए इसरो ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट की है। इसमें लिखा है, “चंद्रयान -3 मिशन: विक्रम लैंडर की चंद्रमा पर फिर से सॉफ्ट लैंडिंग हुई है। विक्रम लैंडर ने अपने मिशन के उद्देश्यों को पूरा कर लिया है। यह सफलतापूर्वक एक हॉप (उछलने की प्रक्रिया) प्रयोग से गुजरा। कमांड देने पर इसने इंजन चालू किए। उम्मीद के मुताबिक खुद को लगभग 40 सेमी ऊपर उठाया और फिर 30 – 40 सेमी की दूरी पर सुरक्षित रूप से लैंडिंग की।”
Chandrayaan-3 Mission: ??Vikram soft-landed on ?, again!
Vikram Lander exceeded its mission objectives. It successfully underwent a hop experiment.
On command, it fired the engines, elevated itself by about 40 cm as expected and landed safely at a distance of 30 – 40 cm away.… pic.twitter.com/T63t3MVUvI
इसरो ने इस पोस्ट में विक्रम लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग के महत्व को बताते हुए आगे लिखा है कि यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे भविष्य में सैंपल रिटर्न यानी चाँद की सतह से सैंपल लाने वाले मिशन और मानव मिशन में मदद मिलेगी। इस समय विक्रम लैंडर के सभी हिस्से सही ढंग से काम कर रहे हैं। छलांग लगाने से पहले विक्रम लैंडर के रैंप, चास्टे और इल्सा पेलोड्स को बंद कर दिया गया था। सॉफ्ट लैंडिंग के बाद फिर से चालू कर दिया गया।
‘सो गया’ चंद्रयान
चंद्रमा में अब रात हो चुकी है। इसलिए चंद्रयान-3 काम नहीं कर सकेगा। ऐसे में उसे स्लीप मोड में डाल दिया गया है। 14 दिन की रात पूरा होने के बाद वहाँ फिर से दिन होगा। इसके बाद चंद्रयान-3 के फिर से काम करने की उम्मीद है। इसको लेकर इसरो ने एक बयान जारी कर कहा था कि रोवर को जो काम सौंपा गया था वो पूरा हो गया है। इसलिए अब उसे स्लीप मोड में डाला गया है। उसके पेलोड बंद कर दिए गए हैं। डेटा को लैंडर के जरिये वैज्ञानिकों को भेज दिया गया है और उसके पेलोड्स बंद कर दिेए गए हैं।
Chandrayaan-3 Mission: The Rover completed its assignments.
It is now safely parked and set into Sleep mode. APXS and LIBS payloads are turned off. Data from these payloads is transmitted to the Earth via the Lander.
Currently, the battery is fully charged. The solar panel is…
जब से उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को खत्म करने की बात की है और इसे डेंगू-मलेरिया बताया है, तब से पेरियार का नाम चर्चा में है। इरोड वेंकटप्पा रामासामी नायकर को ‘पेरियार’ नाम से जाना गया और तमिलनाडु की द्रविड़ राजनीति के नेताओं ने लंबे समय तक सत्ता में रह कर उसे सामाजिक न्याय का मसीहा घोषित कर दिया। उदयनिधि स्टालिन का कहना है कि वो अपने बयान पर कायम है। इस दौरान उन्होंने खुद को पेरियार की विचारधारा का अनुसरण करने वाला भी बताया।
उदयनिधि स्टालिन तमिलनाडु में युवा एवं खेल मामलों के मंत्री हैं। उनके पिता, जो सत्ताधारी DMK के सुप्रीमो हैं, वो राज्य के मुख्यमंत्री हैं। उदयनिधि स्टालिन के दादा करुणानिधि ने 1969-2011 के बीच 5 बार मुख्यमंत्री का पद सँभाला था। पेरियार की बनाई ‘द्रविड़ कझगम’ पार्टी ही बाद में DMK कहलाई और अभिनेता MGR ने इसे तोड़ कर AIADMK बनाया था। एमजीआर भी तमिलनाडु के सीएम रहे। डीएमके की पूरी की पूरी राजनीति ही हिन्दू विरोध और ब्राह्मण विरोध के इर्दगिर्द घूमती है।
अब जब पेरियार की चर्चा हो रही है, ये भी जानने लायक बात है कि कभी सुपरस्टार रजनीकांत ने भी उसके हिन्दू विरोध को लेकर उस पर निशाना साधा था। उनके खिलाफ तमिलनाडु में विरोध प्रदर्शन हुए थे, नेताओं ने बयानबाजी की थी, पुलिस में शिकायत तक दर्ज हुई थी – लेकिन, दक्षिण भारत के सबसे मशहूर अभिनेता ने माफ़ी माँगने से इनकार कर दिया था। उस समय रजनीकांत की राजनीतिक एंट्री की पटकथा भी लिखी जा रही थी, लेकिन तबीयत खराब होने के बाद उन्होंने नई पार्टी के गठन का इरादा छोड़ दिया था।
जब सुपरस्टार रजनीकांत ने पेरियार पर साधा निशान
14 जनवरी, जनवरी 2020 को सुपरस्टार रजनीकांत ने ‘तुगलक’ मैगजीन की 50वीं वर्षगाँठ पर आयोजित कार्यक्रम में कहा था कि पेरियार हिंदू देवी-देवताओं का कट्टर आलोचक था और उसने 1971 में सलेम में अंधविश्वास उन्मूलन सम्मेलन के दौरान भगवान राम और सीता की आपत्तिजनक तस्वीरें भी दिखाई थीं। उन्होंने बताया था कि इसके बाद भी किसी ने पेरियार की आलोचना नहीं की। केवल चो रामास्वामी (तुगलक मैग्जीन के संस्थापक) ने इस मामले को उजागर किया।
विरोध होने के बाद उन्होंने कहा था कि कार्यक्रम में उन्होंने पेरियार को लेकर जो भी बोला वो उस समय मीडिया में भी प्रकाशित हुआ था। रजनीकांत ने स्पष्ट कर दिया था कि इसके सबूत उनके पास अब भी है, इसलिए वे माफी नहीं माँगेंगे। रजनीकांत ने इस दौरान ये जानकारी भी दी थी कि सत्तारूढ़ डीएमके को ये बात पसंद नहीं आई और मैगजीन के उस संस्करण को तमिलनाडु सरकार ने जब्त कर लिया। मगर, चो ने इसे दोबारा छापा। इसके बाद ये मैगजीन ब्लैक में बिकी।
सुपरस्टार रजनीकांत ने इसके बाद बताया था कि उस दौरान जो मैगजीन 10 रुपए की बिकती थी, उसकी बिक्री 50 और 60 रुपए में हुई। उन्होंने तंज कसा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री एम करुणानिधि ने मैगजीन को मुफ्त की पब्लिसिटी दे दी। इसके लिए अगले संस्करण में चो ने उन्हें पब्लिसिटी मैनेजर के तौर पर काम करने के लिए धन्यवाद भी दिया। हालाँकि, इसके बाद मैग्जीन के संस्थापक चो को करुणानिधि का गुस्सा झेलना पड़ा। लेकिन, तब तक वे पूरे देश में लोकप्रिय हो गए थे।
विरोध होने के बाद सुपरस्टार रजनीकांत ने स्पष्ट कहा था, “मैं अपनी बात से पीछे नहीं हटूँगा। क्योंकि मैं इसे साबित कर सकता हूँ।” कोयम्बटूर में उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी। उनके खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट में याचिका भी दौर की गई थी, जिसे ख़ारिज कर दिया गया था। ‘द्रविदार विधुतलाई कझगम (DVK)’ ने ये याचिका दायर की थी। तब रजनीकांत के धुर विरोधी रहे सुब्रमण्यम स्वामी ने भी उन्हें इस प्रकार का कड़ा स्टैंड लेने पर बधाई दी थी और कहा था कि ज़रूरत पड़ी तो न्यायालय में वो उनका साथ देंगे।
तमिलनाडु के सेलम में 1971 में क्या हुआ था
सुपरस्टार रजनीकांत ने बताया था कि राम और सीता की नग्न तस्वीरों को चप्पल से मारा गया था। इस संबंध में 25 जनवरी, 1971 को ‘द हिन्दू’ ने स्थानीय संवाददाता के हवाले से छापा था कि ‘द्रविड़ कझगम’ नामक पार्टी ने अन्धविश्वास के खिलाफ इस कार्यक्रम का आयोजन किया था। इस दौरान भगवान मुर्गा के जन्म से संबंधित एक अश्लील प्रदर्शनी दिखाई गई थी। ऋषियों को तपस्या करते हुए और अप्सराओं को भी दिखाया गया था। इसी दौरान भगवान राम की एक 10 फुट की प्रतिमा को एक गाड़ी पर रखा गया था और दर्जनों लोग इसे चप्पल से पीटते हुए चल रहे थे।
लकड़ी पर भगवान राम का कटआउट बनाया गया था। साथ ही सरकार से माँग की गई थी कि किसी अन्य व्यक्ति की पत्नी को आकर्षित करना अपराध नहीं होना चाहिए। इस सभा में पेरियार ने ये भी कहा था कि किसी दूसरे की पत्नी के साथ प्यार करना, संबंध बनाने से उस महिला के पति को ऐतराज नहीं होना चाहिए। इस पर सवाल पूछे जाने पर तत्कालीन सीएम करुणानिधि ने कहा था कि कुछ लोगों की भावनाएँ आहत हुई होंगी, वो इसे समझ सकते हैं। पेरियार ने इस दौरान विवाहेतर संबंधों की वकालत की थी।
इतना ही नहीं, रैली के अंत में भगवान राम की तस्वीर को जला भी डाला गया था। इस दौरान पेरियार एक ट्रैक्टर पर बैठा हुआ था और इस रैली में पीछे-पीछे चल रहा था। इस दौरान पारित किए गए प्रस्ताव में कहा गया था कि किसी विवाहिता द्वारा किसी गैर-मर्द से संबंध बनाना ‘Tweedledum& Tweedledee’ (बच्चों वाली अंग्रेजी कविता) नहीं है, बल्कि ये ज़रूरी है।
नेहरू ने कहा था – पेरियार को पागलखाने में डालो
1957 में पेरियार ने एक जनसभा में अपने अनुयायियों को ब्राह्मणों के नरसंहार और उनका घर जला डालने के लिए उकसाया। जवाहरलाल नेहरू तब भारत के प्रधानमंत्री थे और के कामराज तमिलनाडु के मुख्यमंत्री। उस साल अक्टूबर में नेहरू ने सीएम को लिखा था कि ये हैरान करने वाला है, क्योंकि इससे सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न हो सकता है, हत्या भी हो सकती है। नवंबर में दूसरे पत्र में उन्होंने कहा कि EV रामासामी नायकर द्वारा लगातार ब्राह्मण विरोधी अभियान चलाए जाने के कारण वो चिंता में हैं।
Periyar garlanded statues of Hindu Gods with slippers. His supporters cut Janeus of others. Now Janeudharu leaders of Congress are supporting Periyar. What next? Rahul Gandhi will get his Janeu cut by Periyar supporters? https://t.co/dJif9c6Lkj
पत्र में जवाहरलाल नेहरू ने लिखा था, “जो पेरियार ने कहा है, वो सिर्फ एक पागल या अपराधी द्वारा ही कहा जा सकता है। मैं उसे पर्याप्त रूप से नहीं जानता, ताकि मैं समझ सकूँ कि वो क्या है। लेकिन, एक बात को लेकर मैं स्पष्ट हूँ कि इस तरह की चीज देश पर बहुत ही निरुत्साही प्रभाव डालने वाली है। सभी समाज विरोधी आपराधिक तत्व यही सोचते हैं कि वो इस तरह की चीजें कर सकें। इसीलिए, मैं आपको सलाह देता हूँ कि इस मामले में कार्रवाई करने में देरी न करें। उसे किसी पागलखाने में डाल कर उसके विकृत दिमाग का इलाज करवाया जाए।”
मणिपुर में एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया से जुड़े 4 पत्रकारों पर FIR दर्ज हुई है। मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कहा है कि एडिटर्स गिल्ड के सदस्य राज्य में हिंसा को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे थे। साथ ही मणिपुर हिंसा पर एडिटर्स गिल्ड की रिपोर्ट को ‘झूठी और मनगढ़ंत’ भी करार दिया है।
मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कहा, “मैं एडिटर्स गिल्ड के सदस्यों को चेतावनी देता हूँ कि अगर वह कुछ करना चाहते हैं, तो घटनास्थल का दौरा करें। जमीनी हकीकत देखें। सभी समुदायों के प्रतिनिधियों से मिलें और फिर जो कुछ सामने आया उसे प्रकाशित करें। केवल कुछ वर्गों से मिलना और किसी निष्कर्ष पर पहुँचना अत्यंत निंदनीय है। राज्य सरकार ने एडिटर्स गिल्ड के सदस्यों के खिलाफ FIR दर्ज की है। ये लोग मणिपुर में और अधिक हिंसा फैलाने की कोशिश कर रहे थे।”
#WATCH | Manipur CM N Biren Singh says, "…I also give a warning to the members of the Editors Guild, if you want to do something, then do visit the spot, see the ground reality, meet the representatives of all communities and then publish what you found. Otherwise, meeting some… pic.twitter.com/hqy5lfwzCE
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के सदस्यों के खिलाफ एफआईआर इंफाल के सामाजिक कार्यकर्ता एन शरत सिंह की शिकायत पर दर्ज हुई है। FIR में एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया की सदस्य सीमा गुहा, संजय कपूर और भारत भूषण को आरोपित बनाया गया है। इन्होंने 7-10 अगस्त तक मणिपुर का दौरा कर वहाँ हुई हिंसा पर रिपोर्ट तैयार की थी। इनके अलावा FIR में एडिटर्स गिल्ड की अध्यक्ष सीमा मुस्तफ़ा का भी नाम है।
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में चुराचाँदपुर जिले के एक जलते हुए घर की तस्वीर प्रकाशित की थी। इसे एक कुकी समुदाय के व्यक्ति का घर बताया था। लेकिन यह वन अधिकारी का कार्यालय था। भीड़ ने 3 मई 2023 को इसमें आग लगा दी थी। शिकायत में कहा गया है कि यह रिपोर्ट कुकी उग्रवादियों के एजेंडे को बढ़ाने के मकसद से जारी की गई थी।
गौरतलब है कि इस तस्वीर को लेकर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने 3 सितंबर को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी गलती स्वीकार की थी। खेद जताते हुए इसमें सुधार कर जल्द ही लिंक अपलोड करने की बात कही थी।
There was an error in a photo caption in the report released on Sep 2. The same is being rectified and updated report will be uploaded on the link shortly. We regret the error that crept in at the photo editing stage
बता दें कि 2 सितंबर 2023 को पब्लिश की गई रिपोर्ट में एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने कहा था कि इस बात के स्पष्ट संकेत हैं कि जातीय संघर्ष के दौरान राज्य सरकार का व्यवहार पक्षपातपूर्ण था। रिपोर्ट के सारांश में मणिपुर सरकार पर की गई टिप्पणी में कहा गया है कि सरकार को जातीय संघर्ष में किसी का भी पक्ष लेने से बचना चाहिए था। लेकिन राज्य सरकार अपना कर्तव्य निभाने में विफल रही।
इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि म्यांमार में तख्तापलट होने के बाद वहाँ से भागकर 4000 लोग मणिपुर आए थे। इनको लेकर सरकार ने सभी कुकी जनजातियों को अवैध अप्रवासी बता दिया था। सरकार की नीतियों के चलते कुकी समुदाय में असंतुष्टि का माहौल था।
दिल्ली में साल 2020 में हुए भीषण दंगों के मामले में उस समय आम आदमी पार्टी के पार्षद रहे ताहिर हुसैन को एक मामले में जमानत मिल गई है। ताहिर हुसैन को कड़कड़डूमा कोर्ट ने पाँच अन्य मामलों में दिल्ली हाई कोर्ट से मिली जमानत का जिक्र किया और कहा कि ताहिर हुसैन को जमानत न देने की कोई वजह नहीं मिलती। कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट से जिन मामलों में जमानत मिली, और जिस मामले में अब कड़कड़डूमा कोर्ट ने जमानत दी है, उनमें काफी समानताएँ हैं, इसलिए हाई कोर्ट के आदेश के बाहर जाकर बेल न देना गलत होगा।
अभी जेल में ही रहेगा ताहिर हुसैन
दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट में एडिशनल सेशंस जज पुलस्त्य प्रमाचला ने उनकी बेल पर सुनवाई की और दिल्ली पुलिस की आपत्तियों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने ताहिर हुसैन को 25 फरवरी 2020 को दयालपुर थाना क्षेत्र के खजुरी खास में अजय गोस्वामी नामक युवक को गोली मारकर घायल करने के मामले में जमानत दी है।
हालाँकि, जमानत मिलने के बाद भी ताहिर हुसैन अभी जेल में ही रहेगा, क्योंकि उसपर दंगों से जुड़े कई केस दर्ज हैं। इसमें यूएपीए के तहत दर्ज मामला भी है, जिसमें ताहिर को जमानत मिलनी बाकी है।
गवाहों को प्रभावित न करने के निर्देश
कड़कड़डूमा कोर्ट ने ताहिर हुसैन को जमानत देते हुए 1,00,000 रुपए की राशि का निजी बांड और इतनी ही राशि की एक जमानत राशि जमा कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि ताहिर हुसैन न ही किसी गवाह को प्रभावित करने की कोशिश करेगा और न ही वो बिना अनुमति के देश से बाहर जा सकता है। इस मामले में ताहिर के केस की पैरवी तारा नरूला नाम की वकील कर रही हैं।
हाई कोर्ट ने 5 मामलों में दी थी जुलाई महीने में जमानत
बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट ने 11 जुलाई, 2023 को उसे 5 मामलों में जमानत दी थी। उस मामले में कॉन्ग्रेस नेता और अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने उसकी तरफ से पैरवी करते हुए कहा था कि गवाहों के शुरुआती बयानों में ताहिर हुसैन का नाम कहीं नहीं आया था और उसके खिलाफ कोई खास एक्ट्स नहीं लगाए गए थे।
इस मामले में निचली अदालत ने कहा था कि ताहिर हुसैन ने साफ तौर पर हिंदुओं पर हमले की साजिश रची और उसे अंजाम तक पहुँचाया। हालाँकि ताहिर हुसैन अब भी जेल में ही रहेगा, क्योंकि दंगों की फंडिंग के लिए उस पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला भी चल रहा है।
हरियाणा के नूहं जिले में 31 जुलाई को हुई साम्प्रदायिक हिंसा के एक और आरोपित को पुलिस ने बुधवार (30 अगस्त 2023) को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपित का नाम वसीम उर्फ़ टीटा है। वसीम पर आरोप है कि उसने नलहड़ मंदिर और साइबर थाने पर हमला करने वाली भीड़ का नेतृत्व किया था।
पेशे से भारी वाहन ड्राइवर पूछताछ में वसीम ने ‘0011’ नाम के व्हाट्सएप ग्रुप की भी जानकारी दी है जिसे बजरंग दल वालों पर हमले की तैयारी के लिए बनाया गया था। हमलावरों ने साइबर थाने को उड़ाने की भी साजिश रची थी। वसीम ने ही वह बस भी लूटी थी जिससे साइबर थाना पर अटैक किया गया था।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वसीम उर्फ़ टीटा 31 जुलाई को हुई नूहं हिंसा के बाद से फरार चल रहा था। उसके अब्बा को लोग अफीमी नाम से जानते हैं। वसीम नूहं सदर थानाक्षेत्र के फ़िरोज़पुर नमक गाँव का रहने वाला है। हिंसा के दौरान वसीम पर झंडा चौक, अडबर चौक, नल्हड़ मन्दिर रोड व थाना साइबर क्राइम नूहं में तोड़फोड़ करने के साथ लूटपाट, पुलिस फोर्स पर हमला और आगजनी जैसी वारदातों को अंजाम देने के आरोप लगे थे। 30 अगस्त को पुलिस को वसीम के चोरी-छिपे गाँव आने की सूचना मिली थी। पुलिस ने दबिश दे कर आरोपित को उसके गाँव से दबोच लिया।
गिरफ्तारी के बाद वसीम को अदालत में पेश किया गया जहाँ से उसे 3 दिनों की पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है। बताया जा रहा है कि पूछताछ में वसीम ने हिंसा में शामिल अपने साथियों के नाम के साथ 0011 नाम के एक व्हाट्सएप ग्रुप की भी जानकारी दी है।
इस ग्रुप में कुल 60 लोग शामिल थे। एडमिन खुद वसीम था जिसने बृजमंडल यात्रा से 1 दिन पहले यानि 30 जुलाई से ही हिंसा की तैयारियाँ शुरू कर दी थीं। इन तैयारियों में बजरंग दल वालों के यात्रा में दिखने पर उन पर हमले का ऐलान और साइबर थाने को उड़ाने जैसी साजिशें शामिल थीं। 0011 के अलावा 20 अन्य व्हाट्सएप ग्रुप भी पुलिस के रडार पर हैं।
पुलिस की अब तक हुई जाँच में यह भी सामने आया है कि हमलावरों की हरकत आवेश में नहीं बल्कि सोची समझी तैयारी के तहत थी। बता दें कि साइबर थाने को उड़ाने के लिए एक बस का भी इंतजाम किया गया था। इसी बस में अलग-अलग गाँवों से हमलावरों को जमा किया गया था।
ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान पीले रंग की यह बस उस समय भी थाने के पास खड़ी है। बस के साइड में अशोक और सामने शुभ लाभ के साथ ऊपर जय बाबा हरीदास की लिखा हुआ है। बस के सभी खिड़की-दरवाजे के काँच टूटे हुए मिले। हमारी ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान साइबर थाने की वो दीवाल भी टूटी दिखी थी जहाँ बस को भिड़ाया गया था। बताया जाता है कि मास्टरमाइंड वसीम ने ही साइबर थाना की दीवाल पर बस से टक्कर मारी थी। हालाँकि, हिंसा के बाद वह ट्रक ड्राइवर बनकर चेन्नई भाग गया था।
हमले में प्रयोग हुई बस
0011 व्हाट्सएप ग्रुप में एक हिट लिस्ट की भी चर्चा हुई थी जो हिंसा के दौरान साजिशकर्ताओं के प्रमुख टारगेट थे। इस लिस्ट में न सिर्फ हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ता थे बल्कि उन जगहों का भी नाम था जहाँ भीड़ को तोड़फोड़ और आगजनी करनी थी। फिलहाल वसीम से हुई पूछताछ के आधार पर सामने आए अन्य आरोपितों की तलाश में पुलिस जुट गई है।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री MK स्टालिन के बेटे और राज्य में युवा एवं खेल मामलों के मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को डेंगू-मलेरिया बताते हुए कहा कि इसे खत्म करना है। वो जिस कार्यक्रम में बोल रहे थे, उसे भी ‘सनातन धर्म के खात्मे’ की मंशा के साथ आयोजित किया गया था। विरोध होने के बाद उन्होंने पेरियार का नाम लिया। पेरियार को ही तमिलनाडु की हिन्दू विरोधी द्रविड़ राजनीति का जनक माना जाता है। पेरियार ने ब्राह्मणों, हिन्दू ग्रंथों और हिन्दू देवी-देवताओं पर कई बार अभद्र टिप्पणियाँ की थीं।
सबसे पहले पेरियार के बारे में जानते हैं। पेरियार भारत के सबसे विवादित शख्सियतों में से एक था, जिसका असली नाम था – इरोड वेंकटप्पा रामासामी। उसने तमिलनाडु में ‘द्रविड़ कझगम’ अभियान की शुरुआत की। तमिलनाडु की स्टालिन सरकार ने 2021 से उसके जन्मदिवस को ‘सामाजिक न्याय दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया। कभी कॉन्ग्रेस में रहे पेरियार ने पार्टी पर ब्राह्मणों को फेवर करने का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया था। पेरियार ने हिंदी भाषा का भी विरोध किया। साथ ही अलग देश ‘द्रविड़नाडु’ की भी माँग की।
पेरियार को पहचान मिली ‘वैकोम सत्याग्रह’ से, त्रावणकोर के एक मंदिर में दलितों को एंट्री दिलाने के लिए हुए आंदोलन से। त्रावणकोर राजपरिवार के खिलाफ हुए इस आंदोलन में पेरियार ने बतौर मद्रास कॉन्ग्रेस अध्यक्ष हिस्सा लिया था। फिर उसने ‘सेल्फ-रेस्पेक्ट मूवमेंट’ चलाया। पेरियार ने विदेश यात्रा की, फिर ‘जस्टिस पार्टी’ की स्थापना की। अन्नादुराई को उसने अपने उत्तराधिकारी के रूप में तैयार किया, हालाँकि जब पेरियार ने अपने उम्र से काफी छोटी लड़की से शादी की तो अन्नादुराई उससे अलग हो गए और DMK की स्थापना की।
आज जब पेरियार को समाजिक न्याय के मसीहा के रूप में पेश किया जा रहा है, हमें ये याद करने की ज़रूरत है कि भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उसके बारे में क्या कहा था। ये वो दौर था, जब पेरियार और कॉन्ग्रेस पार्टी के बीच थोड़ी भी नहीं पटती थी। पेरियार ने एक बार कहा था कि सबसे पहले कॉन्ग्रेस पार्टी तबाह होगी, उसके बाद हिन्दू धर्म तबाह होगा और फिर ब्राह्मणों के प्रभुत्व का अंत होगा। उसने कहा था कि पहली 2 चीजें हो जाएँगी तो तीसरी अपने-आप हो जाएगी। उसने ये भी कहा था कि महात्मा गाँधी की प्रतिक्रिया हमारे अनुरूप नहीं है।
नेहरू ने पेरियार को कहा था ‘पागल’ और ‘विकृत दिमाग’ वाला
यहाँ तक कि पेरियार ने ‘गाँधी को खत्म करने’ की भी बात की थी। यहाँ तक कि उसने महात्मा गाँधी की तस्वीरें जलाने और उनकी प्रतिमाओं को ध्वस्त करने की भी धमकी दी थी। चूँकि पेरियार ने तमिल ब्राह्मणों के नरसंहार के लिए भड़काया था, उस दौरान प्रधानमंत्री रहे नेहरू भी इससे खफा थे। वाकया 4 नवंबर, 1957 का है जब तंजावुर में जातिवाद को मिटाने के नाम पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उस कार्यक्रम में 2 लाख लोग शामिल हुए थे। पेरियार के वजन के बराबर चाँदी के सिक्के एकत्रित किए गए थे।
इसी दौरान पेरियार ने 1000 तमिल ब्राह्मणों के नरसंहार के लिए लोगों को उकसाया। उनकी बस्तियों को जला डालने की बात की। इसके बाद जवाहरलाल नेहरू ने तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्यमंत्री K कामराज को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने पेरियार के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा था। उन्होंने पत्र के साथ समाचारपत्र की कटिंग भी लगाई थी, जिसमें पेरियार ने ब्राह्मणों के नरसंहार और उनके घरों को जलाए जाने की बात कही थी। नेहरू ने लिखा था कि ये हैरान करने वाला है, क्योंकि इससे सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न हो सकता है, हत्या भी हो सकती है।
ये पत्र 23 अक्टूबर, 1957 को लिखा गया था। अगले महीने की 5 नवंबर को नेहरू ने फिर से कामराज को पत्र लिखा। उन्होंने कहा कि EV रामासामी नायकर द्वारा लगातार ब्राह्मण विरोधी अभियान चलाए जाने के कारण वो चिंता में हैं। नेहरू ने याद दिलाया था कि उन्होंने इस बारे में सीएम कामराज को पहले भी लिखा था और उन्हें बताया गया था कि मामला विचाराधीन है। नेहरू ने आशंका जताई थी कि पेरियार न सिर्फ बार-बार इन चीजों को दोहराएगा, बल्कि लोगों को हत्याओं और चाकूबाजी के लिए भी उकसाएगा।
पत्र में जवाहरलाल नेहरू ने लिखा था, “जो पेरियार ने कहा है, वो सिर्फ एक पागल या अपराधी द्वारा ही कहा जा सकता है। मैं उसे पर्याप्त रूप से नहीं जानता, ताकि मैं समझ सकूँ कि वो क्या है। लेकिन, एक बात को लेकर मैं स्पष्ट हूँ कि इस तरह की चीज देश पर बहुत ही निरुत्साही प्रभाव डालने वाली है। सभी समाज विरोधी आपराधिक तत्व यही सोचते हैं कि वो इस तरह की चीजें कर सकें। इसीलिए, मैं आपको सलाह देता हूँ कि इस मामले में कार्रवाई करने में देरी न करें। उसे किसी पागलखाने में डाल कर उसके विकृत दिमाग का इलाज करवाया जाए।”
पेरियार के संबंध में नेहरू का तमिलनाडु के तत्कालीन सीएम को पत्र
इस पत्र में जवाहरलाल नेहरू ने ये भी लिखा था कि कोई अगर उनसे कहे कि कानून तब तक कार्रवाई नहीं करेगा जब तक कि सचमुच में हत्या न हो जाए, तो उन्हें समझ नहीं आता है। साथ ही नेहरू ने लिखा था कि कानून कभी-कभी मूर्ख हो सकता है लेकिन ये इतना भी बेवकूफ नहीं हो सकता है कि वो हत्या के लिए भड़काए जाने के अभियान की अनुमति दे दे। इतना ही नहीं, इसके बाद मद्रास विधान परिषद के सदस्य ए श्रीनिवासन ने EVR की करतूतों के बारे में फिर से नेहरू को बताया और पत्र लिख कर उनका ध्यान खींचा।
इसके बाद नेहरू ने 4 दिसंबर, 1957 को फिर से के कामराज को पत्र लिखा और कहा साथ में MLC द्वारा भेजे गए पत्र को भी संलग्न किया। नेहरू ने लिखा, “मैं देख रहा हूँ कि आप इस अशांति के खिलाफ उचित कदम उठा रहे हैं। जैसा कि मैंने कहा, किसी भी सभ्य देश में ये सबसे बर्बर चीज है जिससे मेरा सामना हुआ है। जिस पत्र को मैंने संग्लन किया है, आशा है कि उनके मन में जो भाव हैं वो और ज़्यादा नहीं बढ़ेंगे। मैं जल्द ही आपसे मिलने की उम्मीद कर रहा हूँ।”
गिरफ्तार हुआ था पेरियार, जेल में लोहिया पहुँचे थे मिलने
1957 में तिरुचिपल्ली में स्पेशल फ़ोर्स के इंस्पेक्टर ने पेरियार के खिलाफ FIR दर्ज कराई। इस FIR में IPC की धारा-117 (10 से अधिक व्यक्तियों के समूह को अपराध के लिए उकसाना) लगाई गई थी। उस समय पेरियार की उम्र 78 साल थी। सोचिए, इस उम्र में भी उसके भीतर इतना ज़हर भरा हुआ था कि उसने ब्राह्मणों के नरसंहार के लिए उकसा दिया। इतना ही नहीं, उसने भारत के संविधान को भी जलाने के लिए लोगों को भड़काया था। उसने संविधान के अनुच्छेद गिनाए थे, जिनके कारण वो इसे जलाना चाहता था।
गिरफ़्तारी के बाद जब पेरियार अस्पताल में था, जब समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया उससे मिलने पहुँचे थे। हालाँकि, पेरियार इतना कट्टर था कि दोनों के बीच बात नहीं बनी। इसका एक कारण ये भी था कि पेरियार घोर उत्तर भारत और हिंदी विरोधी था। डॉ लोहिया द्वारा प्रकाशित पत्र ‘चौखम्भा’ में इसका विवरण छपा था। जी मुरहरि इस दौरान वहाँ पर बतौर दुभाषिया उपस्थित थे। इस दौरान भी पेरियार ने बताया कि नेहरू ने उसे ‘पागल’ कहा है। इस दौरान लोहिया ने पेरियार को समझाया था कि जातिवाद विरोधी आंदोलन को ब्राह्मण विरोध की तरफ नहीं मोड़ना चाहिए।
इस पर पेरियार ने कहा था कि सारे समाचार-पत्र ब्राह्मणों के हाथ में हैं और वो उसे बदनाम करना चाहते हैं। उसने ये भी कहा था कि वो खुद को नियंत्रित रखने की कोशिश करता है। पेरियार की बयानबाजी के कारण सेशन जज ने उसे 6 महीने की सज़ा भी सुनाई थी। आज कॉन्ग्रेस पार्टी पेरियार की विचारधारा पर चल रही DMK के साथ तमिलनाडु की सत्ता में है। महात्मा गाँधी को खत्म करने की बात करने वाले पेरियार को महान बताती है। कॉन्ग्रेसी लोग पेरियार को मसीहा बना कर पेश करते हैं।