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भारतीय राजनीति का ‘न्यू नॉर्मल’ है सनातन धर्म को गाली देना… उदयनिधि, खड़गे, स्वामी और चंद्रशेखर विपक्ष के इसी प्रयोग का हिस्सा, I.N.D.I.A. में नेतृत्व का यही पैमाना

अब तक आपने ये खबर पढ़ ली ही होगी कि तमिलनाडु के DMK नेता उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को खत्म करने की बात की है। उन्होंने इसे डेंगू-मलेरिया करार दिया। उदयनिधि स्टालिन DMK के प्रथम परिवार से आते हैं। उनके दादा करुणानिधि 1969-2011 के बीच 5 बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे। DMK की स्थापना की। आज उदय के पिता और करुणानिधि के बेटे MK स्टालिन राज्य के मुख्यमंत्री हैं। उस सरकार में उदयनिधि युवा एवं खेल मामलों के मंत्री हैं। साथ ही वो DMK की यूथ विंग के सेक्रेटरी भी हैं। अभिनेता भी रहे हैं, अब फिल्म निर्माता हैं।

कुल मिला कर सीधे शब्दों में कहें तो उदयनिधि स्टालिन DMK का भविष्य हैं, 71 वर्ष के हो चुके उनके पिता उन्हें इसके लिए तैयार भी कर रहे हैं। करुणानिधि का साम्राज्य लंबा-चौड़ा है। 50 वर्षों से भी अधिक समय में उन्होंने अपने परिवार को राजनीति से लेकर उद्योग तक में अच्छी तरह सेट किया था। परिवार के लोग सांसद-विधायक से लेकर मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री तक रहे हैं। तमिलनाडु का ‘सन ग्रुप’ भी इसी परिवार का है। इसके मालिक दयानिधि मारन, करुणानिधि के भांजे के बेटे हैं।

अगर कोई बड़ा से बड़ा नेता भी इस्लाम या ईसाई मजहब को लेकर कोई बयान दे दे, तो उसे निकालने में कोई भी पार्टी देती नहीं करेगी। लेकिन, इन पार्टियों में सुप्रीमो परिवार के लोग भी हिन्दू धर्म को खुलेआम गालियाँ बकते हैं क्योंकि यही उनके लिए सॉफ्ट टारगेट है और अपने वोट बैंक को एकजुट करने का तरीका भी। अगर दंगे भड़क जाएँ, तो ये नेता उस पर अपनी सियासत की रोटियाँ सेंकेंगे। इसीलिए, हिंसा भी कोई रास्ता नहीं है। हिंसा का रास्ता तो उनका है जिनके खौफ के कारण उनकी जरा सी भी नाराज़गी नहीं मोल ले सकते।

तमिलनाडु की हिन्दू विरोधी द्रविड़ राजनीति का भविष्य उदयनिधि स्टालिन

अब वापस आते हैं उदयनिधि स्टालिन के बयान पर। ये हो सकता है कि उनके बयान को पहली बार राष्ट्रीय चर्चा मिल रही हो, लेकिन द्रविड़ नेताओं द्वारा हिन्दू धर्म को लेकर इस तरह की बयानबाजी नई नहीं है। तमिलनाडु में पेरियार और अन्नादुरई को द्रविड़ राजनीति का जनक माना जाता है। ब्राह्मणों को गाली देकर खुद को लोकप्रिय बनाने वाले पेरियार को भारत की आज़ादी भी पसंद नहीं थी, क्योंकि उसका मानना था कि अंग्रेज ब्राह्मण-बनियों के साथ में सत्ता सौंप कर जा रहे हैं। तभी उसके अनुयायियों ने 15 अगस्त, 1947 को ‘शोक दिवस’ मनाया था।

इतना ही नहीं, उसने दक्षिण भारत को अलग देश की मान्यता देने के लिए भारत को खंडित कर ‘द्रविड़नाडु’ बनाए जाने की माँग भी की थी। वहीं तमिल सिनेमा को पहली बार राजनीतिक प्रोपेगंडा के रूप में इस्तेमाल करने वाले अन्नादुरई भी पेरियार के ही चेले थे, लेकिन अलग देश के मुद्दे पर उनकी अपने ही मेंटर से ठन गई थी। वो तमिलनाडु के सीएम बनने वाले पहले द्रविड़ नेता थे। उनके नाम पर ही अभिनेता MGR ने AIADMK बनाई। द्रविड़ राजनीति का एक अहम हिस्सा हिन्दू विरोध बन गया।

तमिलनाडु में DMK और कॉन्ग्रेस एक साथ मिल कर सरकार चला रही हैं। नए विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. में भी DMK सुप्रीमो एमके स्टालिन को कोऑर्डिनेशन कमिटी में रखा गया है। नीतीश कुमार जब विपक्षी एकता की पहल कर रहे थे, तब वो चेन्नई भी गए थे उनसे मिलने। इसी तरह उनके जन्मदिन के कार्यक्रम में भोज खाने के लिए बिहार के उप-मुख्यमंत्री व राजद नेता लालू यादव भी मौजूद थे। कॉन्ग्रेस पार्टी ने उदयनिधि स्टालिन के बयान की कोई निंदा नहीं की है। शायद कॉन्ग्रेस की भी यही रणनीति हो।

सनातन धर्म को लेकर मल्लिकार्जुन खड़गे भी कर चुके हैं गलतबयानी

इसकी आशंका इसीलिए भी व्यक्ति की जा सकती है, क्योंकि पार्टी में मल्लिकार्जुन खड़गे को राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। खड़गे का एक बयान देखिए, “…और ऐसे मोदीजी को और शक्ति मिलेगी देश में, तो समझो फिर इस देश में सनातन धर्म और RSS की हुकूमत आएगी।” उन्होंने 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान ये बयान दिया था। मल्लिकार्जुन खड़गे और उनके मंत्री बेटे प्रियांक खुद को बौद्ध धर्म का अनुयायी बताते हैं। खुद को बीआर आंबेडकर का फॉलोवर बताते हैं।

वैसे तो बौद्ध धर्म सनातन का ही एक अंग है, लेकिन आजकल एक ‘नवबौद्धों’ की टोली सामने आई है जो हिन्दू धर्म को गाली देने को ही बौद्ध धर्म मानती है। जबकि रामायण से लेकर हिन्दू पुराणों की अन्य कथाएँ भी बौद्ध धर्म में अलग-अलग रूपों में मिल जाती हैं। मलिकार्जुन खड़गे को इन्हीं ‘नवबौद्धों’ में गिना जा सकता है। खुद राहुल गाँधी के सोशल मीडिया हैंडलों को देख लीजिए, वहाँ आने वाली रामनवमी-जन्माष्टमी की शुभकामनाओं में श्रीराम-श्रीकृष्ण की तस्वीर रहती ही नहीं है। ऐसे में एक हिन्दू विरोधी को पार्टी का कमान देना आश्चर्यजनक नहीं था।

वहीं उदयनिधि स्टालिन की बात करें तो खुद को नास्तिक बताते रहे हैं, लेकिन दिसंबर 2022 में उन्होंने खुद को न सिर्फ ‘गर्वित ईसाई’ करार दिया था बल्कि ये तक कहा था कि संघी ये जान कर जलेंगे। अब वो सनातन धर्म के खात्मे के मंशे से होने वाले कार्यक्रमों में सनातन धर्म को भला-बुरा कह रहे हैं। उनकी पत्नी कीरुतिगा ईसाई हैं। 2020 में उनकी बेटी की तस्वीर भगवान गणेश की प्रतिमा के साथ आ गई थी, जिसके बाद उदयनिधि स्टालिन को सोशल मीडिया पर सफाई देनी पड़ी थी कि वो और उनकी पत्नी नास्तिक हैं।

सोचिए, विशाल संरचनाओं और समृद्ध कलाकृतियों के लिए जाने जाने वाले तमिलनाडु में हिन्दू विरोध की भावना कैसे कूट-कूट कर भर दी गई है। वही तमिलनाडु, जहाँ का तंजावुर मंदिर 80 टन के पत्थर वाले शिखर के कारण लोकप्रिय है। जहाँ रामेश्वरम में श्रीराम ने शिव की पूजा की। जहाँ मीनाक्षी मंदिर देवी के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है, जहाँ आदि कुम्बेश्वरर मंदिर चोल साम्राज्य की महिमा की याद दिलाता है। वही तमिलनाडु, जहाँ का राजगोपालस्वामी मंदिर वैष्णव पंथ का एक अहम स्थल के रूप में जाना जाता रहा है।

वो तमिलनाडु, जहाँ चल-पंड्या-पल्लव-चेरा राजाओं ने एक से बढ़ कर एक मंदिर बनवाए और शिव, विष्णु, देवी को अपना इष्ट माना – आखिर वहाँ की स्थिति ऐसी कैसे हो गई? क्या एक प्रकार की साजिश चल रही है कि पूरे देश में लोग हिन्दुओं से घृणा करने लगें, सनातन धर्म को गालियाँ बकने लगे? क्या देश की राजनीति में ये एक ‘नया नॉर्मल’ है, स्थापित किया जा रहा है? अब तक तो यही लगता है। सिर्फ मल्लिकार्जुन खड़गे और उदयनिधि स्टालिन ही नहीं, कुछ और नेताओं को भी देख लीजिए।

सनातन धर्म को गाली देने वाले बयान अब ‘न्यू नॉर्मल’

हाल के दिनों में सबसे ज़्यादा चर्चा में रहने वाले नेताओं में समाजवादी पार्टी के स्वामी प्रसाद मौर्य भी हैं, जिन्होंने तुलसीदास और रामचरितमानस के लिए बार-बार विवादित शब्दावली का इस्तेमाल किया। अब उन्होंने कह दिया है कि हिन्दू नाम का कोई धर्म ही नहीं है, ये ब्राह्मण धर्म है। उन्होंने हिन्दू धर्म को धोखा बता दिया। इसी तरह, बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर यादव जो प्रोफेसर होने के बावजूद विधानसभा में शब्दों को ठीक से नहीं बोल पाते, उन्होंने विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में छात्रों के मन में रामचरितमानस को लेकर ज़हर भरा।

विपक्षी बैठक में शामिल होने मुंबई पहुँचीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तिलक लगवाने से इनकार कर दिया। कुछ दिनों पहले उन्होंने नज़रुल इस्लाम को महाभारत का लेखक बताया था। जैसा कि आचार्य प्रमोद कृष्णम् ने कहा है, सच में ऐसा है कि नेताओं में खुद को हिन्दू विरोधी दिखाने की एक होड़ सी लग गई है। शायद विपक्षी गठबंधन का नेता बनने के लिए यही योग्यता तय की गई हो। इसी पैमाने पर नापा जाए सबको। अब देखना ये है कि हिन्दू विरोध का ये क्रम कहाँ जाकर रुकता है।

बात बस इतनी सी है कि सनातन धर्म को लेकर जो-जो बातें कही गईं, इस्लाम या ईसाई के लिए मुँह तक खोल देने पर ईशनिंदा का आरोप लग जाता है। भाजपा नेता नूपुर शर्मा ने उद्धरण भर दे दिया तो राजस्थान के उदयपुर में कन्हैया लाल तेली और महाराष्ट्र के अमरावती में उमेश कोल्हे का ‘सर तन से जुदा’ कर दिया गया। नूपुर शर्मा 1 वर्ष से भी अधिक समय से अपने घर में कैद हैं। पंजाब में ‘बेअदबी’ के आरोप में हत्याएँ हो चुकी हैं। बाइबिल के एक शब्द का कॉमेडी में जिक्र करते पर फराह खान, रवीना टंडन और भारती सिंह जैसी फ़िल्मी हस्तियों को वेटिकन के पादरी से मिल कर माफ़ी माँगनी पड़ी थी।

हिन्दू धर्म की सहिष्णुता का बेजा फायदा उठाया जा रहा है। अगले साल के शुरुआत में राम मंदिर में पान प्रतिष्ठा होनी है और मंदिर का उद्घाटन होना है, ऐसे में देखना है कि नेता इसे किस स्तर तक ले जाते हैं। अब सब हिन्दुओं के ऊपर है। अगर राम मंदिर के लिए देश भर में वैसा माहौल बनता है कि विपक्षी नेता भी कोट के ऊपर जनेऊ पहनने को मजबूर हो जाएँ, तो शायद हो सकता है बयानबाजी का ये दायर थम जाए। लेकिन, उससे पहले ये ‘नया नॉर्मल’ है, इसकी आदत डाल लीजिए। बयानबाजी करने वालों का कद ऐसा है कि उनका कुछ नहीं बिगाड़ा जा सकता फ़िलहाल।

कानून इसीलिए ऐसे नेताओं का कुछ नहीं बिगाड़ सकता क्योंकि हिन्दू धर्म को गाली देना न तो इसकी नज़र में कोई अपराध है और दूसरी बात ये कि इन नेताओं को वकीलों की फ़ौज करने में समय भी नहीं लगता। दूसरा कारण – पैसों और रसूख के मामले में ये इतने प्रभावी हैं कि इनके पीछे हजारों लोग हैं। इसीलिए, कानून-पुलिस नहीं, हिन्दुओं की सामूहिक एकता ही इनकी अप्रासंगिकता का कारण बन सकती है। जो इनके साथ हैं, वो तभी दूर होंगे जब उन्हें लगेगा कि इनकी करतूतें गलत हैं। वरना पुलिस को आदेश यही लोग देते हैं, इनका पुलिस क्या करेगी?

‘चाचा, पड़ोसियों से प्यार करना बुरी बात नहीं’: विराट कोहली ने नहीं लगाया शतक तो टूट गया पाकिस्तानी महिला का दिल, वीडियो में लोगों की हूटिंग भी

भारत-पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच हमेशा से चर्चा का विषय बनता है। एशिया कप में भारत और पाकिस्तान के बीच शनिवार (2 सितंबर, 2023) को खेला गया मैच रद्द हो गया। लेकिन, इस मैच से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

इस वीडियो में पाकिस्तान की एक महिला क्रिकेट प्रशंसक विराट कोहली के लिए अपनी दीवानगी दिखा रही है। रिपोर्टर से बातचीत में पाकिस्तानी महिला फैन कहती है कि वो यहाँ सिर्फ विराट कोहली के लिए आई थी और उनके सेंचुरी की उम्मीद कर रही थी, लेकिन विराट के आउट होने से उसका दिल टूट गया।

‘पड़ोसियों से प्यार करना बुरी बात नहीं, लेकिन बाकियों ने की हूटिंग’

वायरल वीडियो में आप महिला को एक रिपोर्टर के साथ बातचीत करते हुए देख सकते हैं, जो एशिया कप के उद्घाटन मैच के बारे में बात कर रहा था। वह विराट के लिए अपना प्यार व्यक्त करती है, जबकि पाकिस्तान के लिए चीयर करते हुए लोगों से घिरा हुआ था। इस दौरान एक व्यक्ति ने उसे रोकने की कोशिश भी की। हालाँकि, महिला ने उसे यह कहते हुए काट दिया, “चाचा, पड़ोसियों से प्यार करना कोई बुरी बात नहीं है।”

बाद में उनसे विराट और पाकिस्तानी कप्तान बाबर आजम में से किसी एक को चुनने के लिए कहा गया। इस पर उसने विराट कोहली को चुना। यह सुनकर उनके पीछे की भीड़ ने हूटिंग की और ‘बहुत बुरा’ चिल्लाया।

देखिए वायरल वीडियो…

हालाँकि, इंटरनेट पर इस पाकिस्तानी महिला की आम लोगों ने जमकर तारीफ की है। लोगों ने अपने रिप्लाई में उसे क्रिकेट का ‘सच्चा प्रशंसक’ कहा।

शंकर लायका लिखते हैं, “विराट कोहली की तो दुनिया दीवानी है।”

कविता मेहरौलिया लिखती हैं कि ये क्रिकेट की सच्ची फैन है।

विशाल कुमार भी इसे क्रिकेट का कमाल बता रहे हैं।

वहीं, पाकिस्तान के ग्वादर में विराट कोहली के फैन एक सैंड आर्टिस्ट ने उनकी खूबसूरत तस्वीर बनाई। उसका भी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हालाँकि, ये वीडियो कब का है ये सामने नहीं आया है।

इस महिला ने यह भी दिखाया कि महिलाएँ भी क्रिकेट का आनंद ले सकती हैं और वे भी महान खिलाड़ियों के प्रशंसक हो सकते हैं।

‘समय से पहले नहीं होंगे चुनाव’: मोदी सरकार ने विपक्षी प्रोपेगंडा की निकाल दी हवा, नीतीश कुमार भी बना रहे थे माहौल

देश में किसी भी सुधार का बड़े पैमाने पर विरोध होता रहा है। अब जब केंद्र की मोदी सरकार चुनाव सुधार के तहत वन नेशन, वन इलेक्शन की बात कर रही है तो विरोधी दल संविधान का खतरा और समय से पहले चुनाव जैसे तर्क गिना रहे हैं। हालाँकि, मोदी सरकार के प्रवक्ता अनुराग सिंह ठाकुर ने स्पष्ट कर दिया है कि समय से पहले या बाद में चुनाव कराने की सरकार की कोई मंशा नहीं है।

केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा है कि केंद्र सरकार की समय से पहले या बाद में आम चुनाव कराने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने कार्यकाल के आखिरी दिन तक भारत के नागरिकों की सेवा करते रहेंगे।

इंडिया टुडे के साथ विशेष साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि अभी होने वाले विधानसभा चुनावों को संसदीय चुनाव के साथ कराने के लिए उनमें देरी करने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने चुनावों को समय से पहले या बाद में कराए जाने की अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने एक देश, एक चुनाव को लेकर एक समिति गठित की है। समिति अपनी रिपोर्ट देने से पहले इसके सभी हितधारकों से गहन विचार-विमर्श करेगी। उन्होंने कहा, “सरकार चाहती है कि अधीर रंजन चौधरी इस कमेटी का हिस्सा बनें। विपक्ष की आवाज को शामिल करना मोदी सरकार की विशाल हृदयता को दर्शाता है।”

दरअसल, ‘एक देश-एक चुनाव’ पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में बनाई गई कमिटी में 8 सदस्य हैं। इसमें कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी को भी शामिल किया गया था। हालाँकि, चौधरी ने समिति में शामिल होने से इनकार कर दिया है। चौधरी ने कहा कि राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को समिति का हिस्सा नहीं बनाना समझ से परे है। 

अनुराग ठाकुर ने यह भी संकेत दिया कि 18 सितंबर 2023 से शुरू होने वाले संसद के विशेष सत्र के लिए सरकार की बड़ी योजनाएँ हैं। हालाँकि, उन्होंने सत्र के एजेंडे का खुलासा नहीं किया। अनुराग ठाकुर ने कहा कि समय आने पर संसदीय कार्य मंत्री इसके बारे में जानकारी देंगे।

बता दें कि विपक्षी दल केंद्र सरकार द्वारा की गई ‘एक देश, एक चुनाव’ समिति की घोषणा के बाद सियासी घमासान मच गया है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार सत्ता में बने रहने के लिए ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का उपयोग कर रही है। हालाँकि, सरकार ने इससे इंकार किया है।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. की मुंबई में खत्म हुई बैठक के तुरंत बाद केेंद्र द्वारा समय से पहले चुनाव कराने की आशंका जाहिर की। उन्होंने कहा, “हम लोगों को बहुत तेजी से काम करना है। केंद्र वाला तो पहले भी चुनाव करा सकता है।” उन्होंने कहा कि भाजपा-संघ वाले देश का इतिहास बदलना चाहते हैं।

उन्होंने आगे कहा, “लोकसभा का सत्र बुलाया जा रहा है तो इसका मतलब समझ रहे हैं न? इसके बाद का मतलब है कि जल्दी ही चुनाव कराना है। 2020 में जनगणना होनी थी, लेकिन नहीं हुई। जाति आधारित गणना नहीं कराते अलग बात है, लेकिन तीन साल ज्यादा हो गया जनगणना का। इन सब चीजों को सदन में रखा जाएगा कि क्यों नहीं हुआ अभी तक।”

वहीं, कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने कहा, “‘एक देश-एक चुनाव’ का विचार भारतीय संघ और इसके सभी राज्यों पर हमला है।” उधर, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि भाजपा ने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का नया शिगूफा छोड़ा है। इससे आम आदमी को कुछ हासिल नहीं होगा। क्षेत्रीय पार्टियों ने भी इसका विरोध किया है।

‘बलिदानी जवान की विधवा को नहीं मिल रहा मुआवजा’: ‘द वायर’ में याकूत अली की रिपोर्ट निकली फर्जी, पोल खुलने पर बदल दी हेडलाइन

फेक न्यूज फैलाने के लिए कुख्यात वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘द वायर’ का एक और झूठ सामने आया है। ‘द वायर’ ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया था कि मणिपुर हिंसा में बलिदान हुए जवान रंजीत यादव के परिवार को अब तक किसी भी तरह का मुआवजा नहीं दिया गया है। PIB ने वायर के इस दावे को ‘झूठ’ करार दिया है।

‘द वायर’ के याकूत अली ने 1 सितंबर को एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इस रिपोर्ट को ‘मणिपुर हिंसा में बलिदान हुए बीएसएफ जवान की विधवा को अब तक कोई मुआवजा नहीं मिला, जीवनयापन के लिए उन्हें पैसे उधार लेने पड़ रहे हैं’ हेडलाइन के साथ पब्लिश किया गया था।

‘द वायर’ की खबर निकली फेक (फोटो साभार: X/@thewire_in)

अपनी इस रिपोर्ट में प्रोपेगेंडा पोर्टल ने बलिदानी जवान रंजीत यादव की विधवा कौशल्या के हवाले से लिखा था कि उन्होंने मुआवजे के लिए मणिपुर की राज्य सरकार व केंद्र सरकार से दो बार संपर्क किया है, लेकिन उन्होंने अब तक कोई मुआवजा नहीं मिला।

वायर ने यह भी दावा किया था कि कौशल्या यादव का कहना है कि अब घर में कमाने वाला कोई नहीं है, इसलिए उन्हें घर के बाकी 7 सदस्यों के जीवन-यापन के लिए भी कमाना पड़ रहा है। वहीं घर के खर्चों के लिए लोगों से उधार लेना पड़ रहा है।

झूठ फैलाने की ‘मशीन’ द्वारा किए गए इस दावे का प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो की फैक्ट-चेक यूनिट- पीआईबी फैक्ट-चेक (PIB FactCheck) ने जाँच की है। इस जाँच में ‘द वायर’ का यह दावा झूठा साबित हुआ। ‘द वायर’ की रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए PIB ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा है, “द वायर ने दावा किया है कि बीएसएफ के बलिदानी जवान रंजीत यादव के परिवार को कोई मुआवजा नहीं मिला। यह दावा फेक है।”

PIB ने आगे लिखा है, “बलिदानी बीएसएफ जवान के परिवार को स्वर्ण जयंती सीमा प्रहरी कल्याण कवच योजना से 16 लाख रुपए का मुआवजा मिल चुका है।”

‘द वायर’ ने अब अपनी इस रिपोर्ट की हेडलाइन बदलकर ‘मणिपुर में बलिदान हुए बीएसएफ के जवान की विधवा को अमित शाह के 10 लाख रुपए के मुआवजे का इंतजार’ कर दी है। लेकिन सोशल मीडिया के लिए हेडलाइन अब भी पुरानी ही है।

‘द वायर’ की खबर निकली फर्जी, BSF जवान को लेकर फैलाया झूठ

गैंगरेप के बाद जब बच्ची को भट्ठी में डाल कर जलाया, तब वो ज़िंदा थी… 400 पन्नों की चार्जशीट से खुलासा, राजस्थान में हुई थी हैवानियत

राजस्थान के भीलवाड़ा स्थित नरसिंगपुर में एक नाबालिग लड़की से बलात्कार के बाद उसकी हत्या के मामले में पुलिस ने शनिवार (2 सितंबर, 2023) को चार्जशीट दायर किया जिसमें पता चला कि 14 वर्षीय लड़की को जब कोयले की भट्टी में जलाया गया था तब वह जीवित थी। चार्जशीट के अनुसार, लगभग एक महीने के बाद उसके अवशेष राजस्थान के भीलवाड़ा में एक कोयला भट्ठी के अंदर पाए गए थे। नाबालिग के साथ गैंगरेप के बाद जिन्दा जला दिया गया था। 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 400 पृष्ठों से अधिक लम्बी चार्जशीट में 11 अपराधियों में से 9 के नाम शामिल हैं। जिसे जाँच अधिकारी (आईओ) और कोटारी डिप्टी पुलिस अधीक्षक श्याम सुंदर बिश्नोई द्वारा शाहपुरा जिले में यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अदालत में प्रस्तुत किया गया था। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि अपराध में शामिल दो किशोरों के खिलाफ अलग से आरोप पत्र दायर किया जाएगा।

बता दें कि 14 साल की नाबालिग लड़की के साथ गैंग रेप के बाद न सिर्फ उसकी हत्या कर दी गई, बल्कि शव को कोयले की भट्ठी में डाल कर जला दिया गया था। घटना 2 अगस्त को भीलवाड़ा के कोटारी की है, जो अब शाहपुरा जिले का हिस्सा है जबकि इसके बारें में पता 3 अगस्त को लगा था। वहीं इस मामले में राजस्थान के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने दावा किया कि इस भयानक घटना ने जाँच अधिकारी को बहुत मुश्किल में डाल दिया था। यह अपनी तरह का एक कठिन मामला है। 

क्योंकि, नाबालिग किशोरी के कुछ जले हुए शरीर के हिस्सों को भट्टी से निकाला गया था, जबकि अन्य को इधर-उधर ले जाकर फेंक दिया गया था, जिन्हें खोजने और सावधानीपूर्वक एकत्र करने और गहन फोरेंसिक जाँच में पुलिस को बहुत ही कठनाई का सामना करना पड़ा। 

इस मामले में दूसरी बड़ी कठिनाई वैजाइनल स्वाब सैंपल के अभाव में सामूहिक बलात्कार को साबित करना था। पुलिस टीम ने अपराध को साबित करने के लिए फोरेंसिक पेशेवरों से आरोपितों के नमूने इकट्ठा करने में सहायता माँगी। सभी साक्ष्यों के आलोक में यह साबित किया गया कि पीड़िता को आग में जलाने से पहले पेट्रोलियम आदि ज्वलनशील पदार्थ का उपयोग किया गया था। 

क्या है पूरा मामला 

गौरतलब है कि राजस्थान के भीलवाड़ा में बुधवार (2 अगस्त, 2023) को 14 साल की नाबालिग लड़की के साथ गैंगरेप कर कोयला भट्टी में जलाने का मामला सामने आया था। मृतक लड़की अपनी माँ के साथ बकरियाँ चराने गई थी। दोपहर में माँ बकरी लेकर घर वापस आ गई। लेकिन लड़की घर नहीं पहुँची थी। जब काफी समय बीत जाने के बाद भी जब लड़की घर नहीं पहुँची तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। गाँव के खेतों से लेकर आसपास के रिश्तेदारों तक के घर तलाश के बाद भी उसका कुछ पता नहीं चल पा रहा था।

लगातार जारी तलाश के बीच रात करीब 10 बजे गाँव के बाहर कालबेलियों के डेरे के पास कोयला बनाने वाली एक भट्टी जलती दिखाई दी। चूँकि बारिश के दिनों में भट्टी नहीं जलाई जाती है। ऐसे में लोगों को शक हुआ। इस पर भट्टी के पास जाकर देखने पर वहाँ लड़की के जूते पड़े दिखाई दिए। साथ ही भट्टी में लड़की के हाथ में पहना हुआ चाँदी का कड़ा और हड्डी के टुकड़े मिले। इसके बाद ग्रामीणों कालबेलियों को पकड़कर उनसे पूछताछ की। इस पर तीन लोगों ने गैंगरेप कर भट्टी में जलाने की बात कही।

पुलिस की जाँच में यह सामने आया है कि आरोपित नाबालिग लड़की को पकड़कर दोपहर करीब 2 बजे तक उसके साथ गैंगरेप करते रहे। इसके बाद जब उसके लापता होने की सूचना फैली तो आरोपितों ने लड़की को मारने का प्लान बनाया। इसके लिए सबसे पहले उन लोगों ने अपनी पत्नियों को इसकी सूचना दी। फिर पत्नियों की सहायता से लड़की को भट्टी में डालकर जला दिया। बाद में अधजला सिर और छाती का हिस्सा भट्टी से निकाल कर तालाब में फेंक दिया। आरोपितों ने 4 महीने पहले मृतक लड़की के पिता से खेत किराए पर लिया था। इसके बाद वे वहीं झोपड़ी बनाकर रह रहे थे। 

‘हिन्दुओं को गाली देने की लगी है होड़’: कॉन्ग्रेस के प्रमोद कृष्णम् ने स्टालिन को लताड़ा, ISRO का मजाक उड़ाने वाले प्रकाश राज ने अब सनातन धर्म को कहा भला-बुरा

उदयनिधि स्टालिन के बाद अब साउथ के एक्टर प्रकाश राज ने सनातनियों का मजाक उड़ाते हुए उन्हें ‘एंटी ह्यूमन’ कहा है। वहीं, तमिलनाडु सीएम एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि के सनातन विरोधी बयान पर कॉन्ग्रेस नेता प्रमोद कृष्णम ने हमला बोला है। साथ ही सख्त कार्रवाई की माँग की है।

प्रकाश राज ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर ईवी रामास्वामी उर्फ पेरियार और डॉ भीमराव अंबेडकर की फोटो शेयर की है। इसके साथ ही प्रकाश राज ने लिखा है, “हिंदू तनतानी नहीं हैं। तनातनी मानवता विरोधी हैं।” तनतानी या TanaThanis शब्द का उपयोग वामपंथी, इस्लामवादी और ईसाई हिंदुओं और सनातन धर्म का मजाक उड़ाने के लिए करते हैं। ऐसे में उन्होंने न केवल इशारे में सनातन धर्म का मजाक उड़ाने की कोशिश की है बल्कि अपना हिंदू विरोधी चेहरा एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है।

हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने वाला पेरियार

प्रकाश राज ने जिस ईवी रामास्वामी उर्फ पेरियार की फोटो शेयर की है। उसने ताउम्र हिंदू धर्म को लज्जित और अपमानित किया। कभी भगवानों का अपमान किया तो कभी हिन्दुओं के धर्म ग्रंथों को जलाने का संदेश दिया। पेरियार के प्रति हिन्दुओं के प्रति विचार उनके इस एक बयान से भी समझे जा सकते हैं –

“मैंने सब कुछ किया, मैंने गणेश आदि सभी ब्राह्मण देवी-देवताओं की मूर्तियाँ तोड़ डालीं। राम आदि की तस्वीरें भी जला दीं। मेरे इन कामों के बाद भी मेरी सभाओं में मेरे भाषण सुनने के लिए यदि हजारों की गिनती में लोग इकट्ठा होते हैं तो साफ है कि ‘स्वाभिमान तथा बुद्धि का अनुभव होना जनता में, जागृति का सन्देश है।”

तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन के बेटे और राज्य के खेल मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को डेंगू-मलेरिया के मच्छर की तरह खत्म करने की अपील की थी। उसके इस बयान पर कॉन्ग्रेस नेता प्रमोद कृष्णम ने हमला बोला है। उन्होंने एक्स पर लिखा है, “सत्य ‘सनातन’ के बिना भारत की कल्पना नहीं की जा सकती। सनातन को मिटाने का ख़्वाब देखने वाले भारतीय नहीं हो सकते उदयनिधि स्टालिन ने करोड़ों सनातनियों की आस्था पर कुठाराघात किया है। प्रधानमंत्री और गृहमंत्री कार्यालय उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”

वहीं ANI से बातचीत में आचार्य प्रमोद कृष्णम् ने कहा है, “हिंदुओं को गाली देने की नेताओं में एक होड़ सी मची हुई है। सत्य सनातन धर्म को मिटाने की कोशिशें हजारों सालों से हो रहीं हैं। लेकिन सनातन को लोग मिटा नहीं पाए। 1000 साल भारत गुलाम रहा। इस पूरे समय तक लगातार सनातन को मिटाने की कोशिशें हुईं।”

उन्होंने आगे कहा है, “महाराणा प्रताप, गुरु गोविंद सिंह जी महाराज, छत्रपति शिवाजी महाराज कितने ही महापुरुषों का लहू शामिल है सनातन धर्म की शक्ति में। सनातन को मिटाने का जो ख्वाब है वह अंग्रेजों ने भी देखा, मुगलों ने भी देखा। लेकिन सनातन नहीं मिट पाया।”

उद्यनिधि के खिलाफ दर्ज हुई शिकायत

सुप्रीम कोर्ट के वकील विनीत जिंदल ने उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ सनातन धर्म के खिलाफ उत्तेजक, भड़काऊ और मानहानिकारक बयान के लिए दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। इसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 120A, 153A, 295, 504 और आईटी एक्ट की धाराएँ शामिल हैं।

ट्विटर पर वायरल हो रहा बयान

एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर शेयर किए गए उनके भाषण की एक वीडियो क्लिप में उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है, “सनातन धर्म को खत्म करने के लिए इस सम्मेलन में मुझे बोलने का मौका देने के लिए मैं आयोजकों को धन्यवाद देता हूँ। मैं सम्मेलन को ‘सनातन धर्म का विरोध’ करने के बजाय ‘सनातन धर्म को मिटाओ‘ कहने के लिए आयोजकों को बधाई देता हूँ।

‘सनातनम को खत्म करना हमारा पहला काम’

उदयनिधि स्टालिन ने कहा, “कुछ चीजें हैं जिनका हमें उन्मूलन करना है और हम केवल विरोध नहीं कर सकते। मच्छर, डेंगू बुखार, मलेरिया, कोरोना, ये सभी चीजें हैं जिनका हम विरोध नहीं कर सकते, हमें इन्हें मिटाना है। सनातन ​​भी ऐसा ही है। विरोध करने की जगह सनातन ​​को ख़त्म करना हमारा पहला काम होना चाहिए।”

उन्होंने सवालिया लहज़े में पूछा कि “सनातन ​​क्या है? सनातन ​​नाम संस्कृत से आया है। सनातन ​​समानता और सामाजिक न्याय के खिलाफ है। सनातन ​​का अर्थ ‘स्थायित्व’ के अलावा और कुछ नहीं है, जिसे बदला नहीं जा सकता। कोई भी सवाल नहीं उठा सकता। सनातन ​​का यही अर्थ है।”

‘तुष्टिकरण के लिए किसी भी हद तक जा सकता है घमंडिया गठबंधन’: राजस्थान में गरजे अमित शाह, बालाजी के पुजारियों ने कहा – बकवास न करें उदयनिधि स्टालिन

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे और सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन द्वारा सनातन धर्म के खिलाफ दिए बयान की चारो-तरफ आलोचना हो रही है। वहीं रविवार (3 सितम्बर, 2023) को राजस्थान के डूंगरपुर में भाजपा की दूसरी परिवर्तन यात्रा को रवाना करने से पहले एक सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उदयनिधि के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इंडिया गठबंधन पर पलटवार करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का बेटा सनातन धर्म का अपमान करने की बात करता है। ये लोग तुष्टिकरण की राजनीति करते हैं। 

अमित शाह ने कहा, “पिछले दो दिनों से इंडिया गठबंधन ‘सनातन धर्म’ का अपमान कर रहा है। डीएमके और कॉन्ग्रेस के नेता सिर्फ वोट बैंक की राजनीति के लिए ‘सनातन धर्म’ को खत्म करने की बात कर रहे हैं।”

अमित शाह ने इंडिया गठबंधन की नीति और नियति पर सवाल खड़े करते हुए कहा, “सत्ता आपको चाहिए मगर किस कीमत पर आपको सत्ता चाहिए दो दिन से आप सनातन धर्म का अपमान कर रहे हैं। वो कह रहे हैं सनातन धर्म को समाप्त कर देना चाहिए, उन्होंने जनता से पूछा क्या सनातन धर्म समाप्त होना चाहिए?” इस पर लोगों ने जोर से चिल्लाते हुए ना कहा।

वहीं अमित शाह ने इंडिया गठबंधन के तुष्टिकरण की नीति पर प्रहार करते हुए कहा, “इन्होने वोटबैंक की लालच में अल्संख्यकों का पहला अधिकार सिद्ध कर दिया। हालाँकि, यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने हमारे ‘सनातन धर्म’ का अपमान किया है। इससे पहले मनमोहन सिंह ने भी कहा था कि बजट पर पहला हक अल्पसंख्यकों का है, लेकिन हम कहते हैं कि पहला हक गरीबों, आदिवासियों, दलितों और पिछड़ों का है।”     

अमित शाह ने कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए बोला, “आज कॉन्ग्रेस पार्टी कहती है कि मोदी जी जीतेंगे तो सनातन राज करेगा। कुछ दिनों पहले राहुल बाबा ने कहा था कि जो हिंदू संगठन है ये लश्कर-ए-तैयबा से भी ज्यादा खतरनाक हैं। राहुल खुद हिंदू संगठनों की तुलना लश्कर-ए-तैयबा से कर रहे हैं। इनके एक मंत्री ने हिन्दू टेरर शब्द दिया था।”

गृह मंत्री शाह ने जनता से उनकी राय जानने के पूछा, “राहुल बाबा हिन्दू के साथ टेरर शब्द जोड़ रहे हैं, क्या आप सहमत हैं, ये घमंडिया गठबंधन तुषिकरण की राजनीति के लिए किसी भी हद तक जा सकता है अब जिनके नेता ही ऐसे हों, जिनकी पार्टी ऐसी हो वो गहलोत जी क्या कर सकते हैं।”

अमित शाह ने आगे कहा कि जब परिवर्तन यात्रा समाप्त होगी, तब तक गहलोत सरकार की रवानगी तय हो चुकी होगी। वहीं कॉन्ग्रेस पर तुष्टीकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि दंगा कराने वाली गहलोत सरकार को उखाड़ फेंकिए। गहलोत क्या करें, उनका नेतृत्व ही ऐसा है। कॉन्ग्रेस नेता सनातन धर्म को समाप्त करने की बात करते हैं। सनातन धर्म पर ये जितना बोलेंगे, उतना ही कम होते जाएँगे। जैसे 2014 और 2019 में कम हुए, 2024 में दूरबीन लेकर भी नहीं दिखाई देंगे।

वहीं परिवर्तन यात्रा की शुरुआत करते हुए कहा, “आज बेणेश्वर धाम की इस पावन धरा पर भाजपा की ‘परिवर्तन संकल्प यात्रा’ की शुरुआत होने जा रही है। डूंगरपुर की धरती हमेशा वीरों की धरती रही है। यहीं राजस्थान और गुजरात के आदिवासी भाईयों ने महाराणा प्रताप के साथ रहकर वर्षों तक युद्ध करके मुगलों की सेना के दाँत खट्टे किए थे।”

चिलकुर बालाजी मंदिर के मुख्य पुजारी ने भी जताया ऐतराज 

बता दें कि तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन की ‘सनातन धर्म को खत्म कर देना चाहिए’ वाली टिप्पणी पर चिलकुर बालाजी मंदिर के मुख्य पुजारी रंगराजन का भी बयान सामने आया है। ANI की रिपोर्ट में वे कहते हैं, “हमने तमिलनाडु के वर्तमान सीएम के बेटे उदयनिधि स्टालिन का बयान देखा है और कौन हैं वह, एक कैबिनेट मंत्री भी हैं। सबसे पहले, वह एक संवैधानिक पद पर हैं। उनसे बकवास या इस तरह की बातें नहीं की जानी चाहिए… .”

गौरतलब है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे राज्य सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को डेंगू-मलेरिया के मच्छर की तरह खत्म करने की अपील की थी। सनातन धर्म के अपमान और समाज में हिंसा फैलाने की अपील के बाद दिल्ली में उनके खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है। वहीं, कॉन्ग्रेस ने भी उदयनिधि स्टालिन की हाँ में हाँ मिलाते हुए सनातनियों को घृणा फैलाने वाला कहा है।

पिस्टल लेकर दौड़ा काजी अबुल कलाम, साथ में फायर भी झोंके: थाने में मुस्लिम भीड़ का हंगामा, कभी सरकारी कर्मचारी को धमकाया था

मध्य प्रदेश के देवास के एक काजी अबुल कलाम का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह हाथ में पिस्टल लेकर भाग रहा है। यह वीडियो दो दिन पहले हुए बवाल का बताया जा रहा है। दरअसल देवास के जूनियर काजी अबुल कलाम पर फरियादी अमन सोलंकी ने FIR दर्ज कराई थी। अमन सोलंकी ने कहा कि काजी पिस्टल लेकर उनके पीछे दौड़ा और दो फायर किए।

पुलिस के मुताबिक, 31 अगस्त 2023 दिन गुरुवार को दोपहर देवास की सिल्वर पार्क कॉलोनी में काजी का कुछ लड़कों से विवाद हुआ। इसके बाद वह पिस्टल लेकर एक लड़के के पीछे भागा। काजी ने आरोप लगाया कि उसकी बीवी के साथ अभद्रता की गई। सैकड़ों मुस्लिमों के साथ औद्योगिक क्षेत्र थाना जाकर काजी ने हंगामा किया और 8-10 अज्ञात लोगों पर मामला दर्ज करवाया।

उधर, युवकों ने 1 सितंबर 2023 दिन शुक्रवार को काजी के खिलाफ भी जाकर मामला दर्ज कराया और कहा कि काजी ने उनके साथ बदसलूकी की। इसके साथ ही उनके पीछे काजी पिस्टल लेकर दौड़ा और उन पर दो फायर भी किए। इस दौरान हिंदू संगठन काजी पर हत्या का प्रयास के लिए IPC की धारा 307 लगाने की भी माँग करते रहे।

जब पुलिस ने धारा 307 नहीं लगाया तो लोगों ने इंदौर-भोपाल बाईपास को जाम कर दिया। इसी बीच विधायक गायत्री राजे पवार एसपी ऑफिस पहुँची और हिंदू संगठनों को समझाने का प्रयास किया तो वे वापस चले गए। अगले दिन शनिवार को एक बार फिर हिंदू संगठन चमुंडा कॉम्प्लेक्स के पास जमा हुए और काजी पर धारा 307 लगाने की माँग करने लगे।

इसी बीच, शनिवार को दोपहर फरियादी अमन सोलंकी ने कोर्ट में 164 के तहत बयान दर्ज कराया, जिसमें उन्होंने बताया कि काजी उनके पीछे पिस्टल लेकर दौड़ा और फायर दौड़ा। इस मामले में विवेचना में धारा 307 और आर्म्स एक्ट, एट्रोसिटी एक्ट की धाराएँ बढ़ाई गईं। तब जाकर मामला शांत हुआ।

तहसीलदार को धमकाते हुए कहा था- शहर का माहौल बिगड़ जाएगा

जनवरी 2021 में मदरसे का राजस्व शुल्क न जमा करने पर कुर्की करने पहुँची महिला तहसीलदार को काजी अबुल कलाम ने शहर का माहौल बिगाड़ने की धमकी दी थी। देवास के नुसरत नगर में स्थित मदरसे का राजस्व शुल्क 1.66 लाख रुपए जमा नहीं करने पर कार्रवाई के लिए पहुँचे अधिकारियों को काजी और मौलवियों ने दबंगई दिखाते हुए वापस लौटा दिया था।

इसका वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें मौलाना कहता है, “आपको समझना चाहिए कि यह एक धार्मिक जगह है।” वहीं, एक मुस्लिम युवक महिला तहसीलदार पर भड़कते हुए कहता है कि आप को नहीं मालूम कि यह धार्मिक जगह है। आप यहाँ अचानक आ गई। क्या आप माहौल खराब करना चाहती हैं। तो आप किस तरह से यहाँ आ गई। आपको यहाँ आने से पहले यहाँ के लोगों से बात करनी चाहिए थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, देवास के नुसरत नगर में बने मदरसे का शैक्षणिक डायवर्सन करवाया गया था, लेकिन साल 2013-14 से इसका टैक्स जमा नहीं किया गया था। इस मामले को लेकर मदरसे को संचालित करने वाले मौलवी को लगभग चार-पाँच बार नोटिस भी दिया गया, लेकिन उस पर किसी भी नोटिस का कोई फर्क नहीं पड़ा था।

मदरसे के इस रवैए को देखते हुए शनिवार को तहसीलदार पूनम तोमर राजस्व अमले के साथ मदरसे को सील करने पहुँची थी। इस पर बौखलाए लोगों ने अधिकारियों से ही दबंगई दिखाते हुए उन्हें धमकाने लगे। कुर्की करने पहुँची टीम ने उनसे सांकेतिक रूप से एक ही कमरा सील करने की बात कही, लेकिन नाराज काजी अबुल कलाम ने कह दिया कि इससे शहर का माहौल बिगड़ने में देर नहीं लगेगी।

‘अगले 20 वर्षों में विकसित राष्ट्र होगा भारत’: G20 समिट से पहले PM मोदी का इंटरव्यू, बोले – आतंकवाद को जड़ से उखाड़ने और भ्रष्टाचार मिटाने के लिए प्रतिबद्ध

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूज एजेंसी PTI को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में जी-20 सम्मेलन, रूस यूक्रेन युद्ध, भारत में भ्रष्टाचार, जातिवाद और संप्रदायवाद पर चर्चा की है। पीएम मोदी ने कश्मीर, अरुणाचल में जी-20 बैठक पर पाकिस्तान और चीन की आपत्तियों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि देश के हर हिस्से में बैठकें आयोजित करना स्वाभाविक है। जी-20 के शिखर सम्मेलन से पहले उनका ये इंटरव्यू दुनिया के लिए संदेश माना जा रहा है।

भारत का विश्व कल्याण का सिद्धांत बन सकता है मार्ग दर्शक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि लंबे समय तक भारत को एक अरब भूखे पेट वाले देश के रूप में देखा जाता था, अब यह एक अरब महत्वाकांक्षी मस्तिष्क और दो अरब कुशल हाथों वाला देश है। दुनिया का जीडीपी-केंद्रित दृष्टिकोण रहा है, अब मानव-केंद्रित दृष्टिकोण में बदल रहा है। भारत इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सबका साथ, सबका विकास’ विश्व कल्याण के लिए भी एक मार्गदर्शक सिद्धांत हो सकता है।

इन विषयों पर की बात

मोदी ने कहा कि भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बन जाएगा, और भ्रष्टाचार और जातिवाद का देश में कोई स्थान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि भारत की जी20 अध्यक्षता से कई सकारात्मक प्रभाव पड़े हैं, और भारत ने वैश्विक मंच पर एक मजबूत नेतृत्व की भूमिका निभाई है। उन्होंने भारत-चीन संबंधों के बारे में कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे के साथ शांतिपूर्ण और सहयोगपूर्ण तरीके से रहना चाहिए।

पीएम मोदी ने इस खास साक्षात्कार में जी20 शिखर सम्मेलन, आतंकवाद, भ्रष्टाचार और अर्थव्यवस्था सहित कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने चीन-पाक की उन आपत्तियों को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में जी-20 से जुड़ी बैठकों के आयोजन पर सवाल उठाए थे।

जी20 शिखर सम्मेलन

जी20 शिखर सम्मेलन के बारे में बात करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र ने कहा कि भारत इस साल होने वाले शिखर सम्मेलन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि भारत जी20 के माध्यम से वैश्विक अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए काम करेगा। पीएम मोदी ने कहा कि भारत जी20 के माध्यम से आर्थिक सुधार, जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद का मुकाबला, डिजिटलीकरण और स्वास्थ्य जैसे बेहद जरूरी मामलों पर काम कर रहा है।

पीएम मोदी ने यह भी कि भारत जी20 के माध्यम से वैश्विक समुदाय को एकजुट करने और एक बेहतर भविष्य का निर्माण करने के लिए काम करेगा।

आतंकवाद

आतंकवाद के बारे में बात करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि यह एक वैश्विक चुनौती है। उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक मजबूत सहयोगी है। पीएम ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत सरकार कुछ खास कदम उठा रही है, जिसमें आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई, आतंकवादी संगठनों को वित्तपोषित करने वाले स्रोतों को खत्म करने और आतंकवाद के विचारों को फैलाने के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने जैसे कदम उठा रही है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए प्रतिबद्ध है।

भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार के बारे में बात करते हुए, पीएम मोदी ने कहा कि यह भारत की एक बड़ी समस्या है। उन्होंने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए कड़े कदम उठा रही है। पीएम मोदी ने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों को सख्त करने, भ्रष्टाचारियों पर कड़ी कार्रवाई करने और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए जागरूकता बढ़ाने जैसे कदम उठा रही है। पीएम मोदी ने कि सरकार भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए दृढ़ संकल्पित है।

अर्थव्यवस्था

अर्थव्यवस्था के बारे में बात करते हुए, मोदी ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है, और भारत अगले 20 वर्षों में एक विकसित राष्ट्र बन जाएगा। मोदी ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था में सूचना प्रौद्योगिकी, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में अपार संभावनाएँ हैं। उन्होंने कहा कि भारत इसी तरह से चलता रहे, तो भारत अपनी मजबूत अर्थव्यवस्था के आधार पर अगले 20 वर्षों में एक विकसित राष्ट्र बन जाएगा।

‘तुमलोग तेली-कबाड़ी की जगह खान बन जाती हो, पठान लिखने से ऊँची जाति नहीं हो जाओगी’: छात्रा ने की आत्महत्या, इस्लामिया कॉलेज (सरकारी) के टीचरों ने किया प्रताड़ित

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में अपने ही मज़हब के लोगों द्वारा प्रताड़ना के कारण एक मुस्लिम छात्रा ने आत्महत्या कर ली है। आरोप है कि मृतका को मुस्लिम समाज की ‘नीची जाति’ में बता कर टीचरों ने ताना मारा। यह मामला अजीमुद्दीन अशरफ इस्लामिया इंटर कॉलेज का है, जो एक सरकारी शिक्षण संस्थान है। 14 वर्षीया मृतका के चरित्र पर भी आरोपितों द्वारा लांछन लगाने की कोशिश की गई। पुलिस ने मंगलवार (29 अगस्त, 2023) को अध्यपक तौहीद और महिला टीचर वस्फी खातून पर केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

यह मामला बाराबंकी के कोतवाली नगर थाना क्षेत्र का है। कस्बा त्रिलोकपुर बाराबंकी की मूल निवासिनी व मृतका सहित 2 बच्चियों की अम्मी नसरीन बानो ने इस मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई है। शिकायत के मुताबिक, विदेश में कमाई करने के दौरान उनके शौहर की 28 जून, 2018 को हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। घर में कमाई करने वाला कोई न होने के चलते पीड़िता का परिवार भुखमरी के कगार पर पहुँच गया। इन हालात में भी दोनों बेटियों को पढ़ाने का जज्बा पाले नसरीन ने साल 2022 सत्र में शहर के अजीमुद्दीन अशरफ इस्लामिया इंटर कॉलेज में उनके एडमिशन क्रमश कक्षा 9 व 6 में करवाए।

शिकायत में आगे बताया गया है कि 27 मई, 2023 में स्कूल की टीचर वस्फी खातून ने पीड़िता की बड़ी बेटी को कम फीस लाने के लिए पूरी क्लास के आगे बेइज्जत किया। इस दौरान खातून ने छात्रा के लिए ‘फटीचर’ जैसे शब्द का इस्तेमाल किया। जब पीड़िता ने घर में आकर ये सब बताया तो छात्रा की अम्मी ने स्कूल जा कर बेटी को परेशान न करने की गुजारिश की। 23 जुलाई, 2023 को एक बार फिर से वस्फी खातून ने उसी छात्रा के साथ पुरानी हरकत की, जिस पर छात्रा के चाचा ने स्कूल में जा कर मिन्नत की। आरोप है कि इस बात से चिढ़ कर टीचर खातून ने छात्रा को टारगेट ही बना डाला था।

शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में बताया कि स्कूल में होने वाली प्रताड़ना की शिकायत उनकी बेटी लगातार घर पर कर रही थी। एक दिन वस्फी खातून ने कहा, “तुम देहाती लोग गाँव से आ कर तेली, कबाड़ी, जुलाहा की जगह खान पठान बन जाती हो। आधार कार्ड में खान डलवाने से ऊँची जाति की नहीं बन सकती। अगर खान होती तो टीसी में बानो क्यों दर्ज होता?” आरोप है कि इन बातों से छात्रा काफी आहत हुई। 4 अगस्त, 2023 को वस्फी खातून ने एक बार फिर किसी बात के लिए छात्र से पैसे माँगे, जिसे न दे पाने पर ताने सुनाए गए। इसी दिन छात्रा को होमवर्क के बहाने क्लास के बाहर खड़ा कर दिया गया।

मामले की FIR Copy का अंश

4 अगस्त को ही छात्रा ने घर लौटने के बाद पंखे में फाँसी का फंदा लगा कर आत्महत्या कर लिया। मृतका की मौत के बाद कई दिनों तक स्कूल का ही एक अन्य टीचर तौहीद छात्रा को बदनाम करता रहा। उसने मृतका के किसी अन्य छात्र से दोस्ती की अफवाह उड़ाई। इस अफवाह को उड़ाने में वस्फी खातून ने भी सहयोग किया। 12 अगस्त, 2023 को जब मृतका की माँ अपने कुछ रिश्तेदारों के साथ इन चारित्रिक आरोपों को बंद करने की माँग के साथ स्कूल गई तो एक बार फिर से टीचर वस्फी खातून ने लड़की को ‘नीची जाति’ का बोला।

पीड़िता ने टीचर तौहीद और वस्फी खातून के खिलाफ 17 अगस्त, 2023 को ही पुलिस में शिकायत दी थी। हालाँकि, आरोपितों पर फौरी तौर पर कोई एक्शन नहीं लिया गया। 29 अगस्त, 2023 को पुलिस ने वस्फी खातून और तौहीद पर IPC की धारा 306 के तहत केस दर्ज कर लिया है। मामले की जाँच की जा रही है। ऑपइंडिया ने मृतका के चाचा सदरुद्दीन से बात की। सदरुद्दीन ने हमें बताया कि आज कल के दौर में ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं जहाँ वस्फी खातून जैसी सोच के लोग जाति के नाम पर किसी को मरने तक प्रताड़ित करते हैं।

सदरुद्दीन ने यह भी बताया कि अभी तक दोनों आरोपितों में से किसी भी गिरफ्तारी नहीं हुई है।