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बुर्का पहनी महिला से अभद्रता, इस्लामी भीड़ ने घेर कर किया प्रताड़ित: हिन्दू युवक के साथ घूमने पर बताया ‘इस्लाम पर कलंक’

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू में एक बुर्का पहनी मुस्लिम महिला को इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने घेर लिया। महिला के साथ अभद्रता की गई और उसे इस्लाम का कलंक बता दिया गया। भीड़ ने बुर्का पहनी महिला के साथ बदतमीजी की और उसकी स्कूटी की चाबी भी निकाल ली। यही नहीं, वो बुर्का पहनी मुस्लिम महिला से लगातार उसके अब्बा से बात कराने के लिए दबाव बनाते हैं, जब महिला बताती है कि वो शादीशुदा है, तो उससे उसके शौहर से बात कराने के लिए कहा जाता है।

मुस्लिम भीड़ उसे लगातार ‘इस्लाम पर धब्बा‘ बताती रही। भीड़ में से कइयों ने महिला पर इस्लाम मजहब को बदनाम करने का आरोप भी लगाया। ये मामला बेंगलुरु के गोविंदपुरा इलाके का है। जहाँ महिला के साथ इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ बदतमीजी कर रही है, वहीं अब इस मामले में बेंगलुरु पुलिस ने एक आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। बाकियों की तलाश की जा रही है।

खास पैटर्न के तहत हुआ हमला?

इस मामले से जुड़े दो वीडियो ‘फैक्ट्स’ नाम के ट्विटर हैंडल पर शेयर किए गए हैं, जिसे इस्लामी कट्टरपंथी लोग अपने समाज में फैला रहे हैं। इसे शेयर करने से पहले एडिट किया गया है और थंबनेल टेक्स्ट लिखे गए हैं। पहले वीडियो के थंबनेल टेक्स्ट पर लिखा है- “कर्नाटक, बेंगलुरु। हम कौन? इसको बोलने वाले बोल रहे, मुसलमान का नाम खराब कर रही ये सू%र की बच्ची। काफिर के साथ बिस्तर गरम कर रही ये कुत्ते की बच्ची, हिजाब निकाल के कर।”

दूसरे वीडियो के थंबनेल पर लिखा हुआ है, “कर्नाटक के बेंगलुरु से है ये लड़की। ये मुसलमान का नाम बदनाम कर रही है। ऐसा जाहिल लड़की हसबैंड को धोखा दे रही है काफिर के लिए, लानत है तेरी जैसी लड़की पर। हिजाब निकाल के जाओ सू%र की बच्चियाँ।”

इससे पहले भी हो चुके हैं इस तरह के कई हमले

इस बारे में ऑपइंडिया ने विशेष पड़ताल में बताया था कि कैसे, हिंदू लड़के और मुस्लिम लड़की वाले जोड़ों को टारगेट किया जा रहा है। वो रिपोर्ट आप यहाँ पढ़ सकते हैं। बेंगलुरु के गोविंदपुरा में मुस्लिम महिला पर हुआ ये हमला भी उसी पैटर्न का हिस्सा लगता है। कई ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं, जब हिन्दू मित्र के साथ जा रही मुस्लिम महिलाओं को परेशान किया गया। कई घटनाओं में हिन्दू पुरुषों को पीटा तक गया।

कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ ऐसे बनाती है निशाना

ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसमें हिंदू पुरुष और महिला मुस्लिम थी और उन्हें प्रताड़ित किया गया। कई मामलों में मुस्लिम हमलावरों द्वारा उन महिलाओं के यौन उत्पीड़न हुए, तो सार्वजनिक तौर पर उनके साथ अभद्रता करने, उन्हें पीटने की घटनाएँ हुईं। इसके लिए ‘भगवा लव ट्रैप’ वाली थ्योरी फैलाई जाती है और कहा जाता है कि मुस्लिम महिलाओं को हिन्दू पुरुषों के साथ घूमने से रोका जाए।

ऑपइंडिया ने अपने अंडर कवर ऑपरेशन द्वारा उन घटनाओं को एक्सपोज किया है, जिन्हें व्हाट्सएप्प के माध्यम से पूरी तरह से प्लानिंग करके अंजाम दिया गया। इसके लिए व्हाट्सएप्प ग्रुपों में अंतरधार्मिक कपल्स को निशाना बनाने, उन पर हमले के लिए उकसाने, उनकी खोज करके प्रताड़ित करने की योजनाएँ बनाई गईं और पूरी प्लानिंग करके उन पर हमले किए गए। ऐसी 50 सभी अधिक घटनाएँ सामने आई थीं।

सुपरस्टार रजनीकांत की ‘Jailer’ ने कर डाली ₹600 करोड़ की कमाई: इसमें से ₹180 करोड़ विदेश से, इसे बनाने वाली कंपनी के शेयरों में भी 10% की उछाल

सुपरस्टार रजनीकांत की फिल्म ‘Jailer’ ने इतिहास रच दिया है। फिल्म ने दुनिया भर में 600 करोड़ रुपए की कमाई कर ली है। बड़ी बात ये है कि फिल्म के हिंदी वर्जन को स्क्रीन्स नहीं मिले थे, इसके बावजूद उसने ये कारनामा कर दिखाया है। अब तमिल फिल्मों में इससे ऊपर सिर्फ ‘2.0’ है, जिसने 800 करोड़ रुपए का कारोबार किया था। ये भी सुपरस्टार रजनीकांत की ही फिल्म थी। हालाँकि, इसने उत्तर भारत में बढ़िया कारोबार किया था। अक्षय कुमार इसमें बतौर मुख्य विलेन थे।

जहाँ तक ‘जेलर’ की बात है, इसका किस्सा अलग है। ‘जेलर’ ने 18वें दिन 600 करोड़ रुपए की कमाई का आँकड़ा पार किया। इसकी कुल वर्ल्डवाइड कमाई अब तक 607 करोड़ रुपए हो गई है। रिलीज के तीसरे रविवार (27 अगस्त, 2023) को भी इसने 10 करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार कर डाला। ‘जेलर’ की कुल कमाई में से 218 करोड़ रुपए अकेले तमिलनाडु से आए हैं। वहीं इसने विदेश में भी 180 करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार कर लिया है।

फिल्म ने इसी तरह आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 75 करोड़ रुपए की कमाई का आँकड़ा पार किया। केरल और कर्नाटक से इसने 50-50 करोड़ रुपए से अधिक बटोरने में सफलता पाई है। हालाँकि, उत्तर भारत से इसकी कमाई मात्र 15 करोड़ रुपए ही हो पाई। फिल्म में सुपरस्टार रजनीकांत के अलावा मलयालम सिनेमा के सुपरस्टार मोहनलाल और कन्नड़ सिनेमा के सुपरस्टार डॉ शिवा राजकुमार भी हैं। ‘Jailer’ ने तमिल सिनेमा को एक नई ऊँचाई दी है, जो तेलुगु सिनेमा से काफी पीछे छूट गई थी।

फिल्म ‘जेलर’ की प्रोडक्शन कंपनी ‘सन टीवी नेटवर्क लिमिटेड’ के शेयर्स में भी उछाल आई है। जब 10 अगस्त, 2023 को ‘जेलर’ रिलीज हुई थी, जब ‘सन टीवी’ के शेयर्स 550 रुपए पर ट्रेंड कर रहे थे, जबकि अभी ये 604 रुपए तक पहुँच गया है। इसका अर्थ है कि ‘जेलर’ की प्रोडक्शन कंपनी को रिलीज के बाद 18 दिनों में 9.82% की बढ़ोतरी हुई है। रजनीकांत की ‘अन्नाथे’ भी इसी कंपनी ने कमाई थी, जिसने 250 करोड़ रुपए की कमाई दुनिया भर में की थी।

भारत के ‘गोल्डन बॉय’ नीरज चोपड़ा ने राष्ट्रध्वज का किया सम्मान, तिरंगे की जगह टीशर्ट पर दिया ऑटोग्राफ: दूर खड़े पाकिस्तानी खिलाड़ी को भी अपने झंडे तले बुला लिया

भारत के ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट जेवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) ने वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप (World Athletics Championship) में गोल्ड मेडल (Gold Medal) अपने नाम किया है। इस दौरान उन्होंने साबित कर दिया कि वह महान खिलाड़ी होने के साथ ही बेहतरीन इंसान भी हैं। दरअसल, एक महिला नीरज चोपड़ा के पास आकर तिरंगे पर ऑटोग्राफ माँग रही थी। लेकिन उन्होंने तिरंगे की जगह उसकी टी-शर्ट पर दिया। वहीं मैच के बाद पाकिस्तानी एथलीट अरशद नदीम बिना झंडे के नजर आ रहे थे। ऐसे में नीरज ने उन्हें भारतीय झंडे के नीचे बुला लिया।

खेल पत्रकार जोनाथन सेल्वाराज ने नीरज चोपड़ा की एक फोटो शेयर की है। इस फोटो के साथ उन्होंने लिखा है, “हंगरी की एक महिला नीरज चोपड़ा का ऑटोग्राफ चाहती थी। नीरज ने कहा कि वह निश्चित तौर पर उसे ऑटोग्राफ देंगे। लेकिन, उन्हें पता चला कि महिला तिरंगे पर ऑटोग्राफ चाहती है। इस पर नीरज ने कहा कि वह तिरंगे पर साइन नहीं कर सकते। इसके बाद उन्होंने उस महिला की टी-शर्ट पर ऑटोग्राफ दिया। इससे महिला खुश नजर आई।”

वहीं, नीरज चोपड़ा का एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप के फाइनल का है। मैच में नीरज चोपड़ा ने गोल्ड मेडल जीता। वहीं पाकिस्तानी एथलीट अरशद नदीम ने सिल्वर और चेक गणराज के जैकब वाडलेजिच कांस्य पदक अपने नाम किया। नीरज चोपड़ा और जैकब वाडलेजिच के पास अपने-अपने देशों का झंडा था। लेकिन अरशद नदीम के पास पाकिस्तान का झंडा नहीं था। ऐसे में वह दूर खड़े हुए थे।

इस दौरान जब नीरज चोपड़ा की नजर अरशद नदीम पर पड़ी तो उन्होंने उसे अपने पास बुला लिया। इसके बाद नीरज और अरशद भारतीय झंडे के नीचे नजर आए। वीडियो सामने आने के बाद नीरज चोपड़ा की जमकर तारीफ हो रही है।

दिग्गज जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले भारतीय बन गए। हालाँकि, नीरज चोपड़ा के लिए वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शुरुआत अच्छी नहीं रही। नीरज अपने पहले प्रयास में 12वें नंबर पर थे। क्योंकि नीरज चोपड़ा का थ्रो अमान्य करार कर दिया गया था। लेकिन इसके बाद नीरज चोपड़ा ने अपने दूसरे प्रयास में गजब की वापसी की और 88.17 मीटर का थ्रो करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। 

नीरज ने दूसरे राउंड में की शानदार वापसी

गौरतलब है कि नीरज चोपड़ा पहले राउंड में फ़ाउल रहे लेकिन दूसरे राउंड के बाद 88.17 मीटर दूर भाला फेंककर वह टॉप पर काबिज हो गए। वहीं, जर्मनी के जुलियन वेबर दूसरे राउंड में 85.79 मीटर भाला फेंककर दूसरे पर आ गए, जबकि इस राउंड के बाद चेक रिपब्लिक के जैकब वाडलेजिच 84.18 मीटर के स्कोर के साथ तीसरे नंबर पर रहे। 

भारतीय दिग्गज ने तीसरे राउंड में 86.32 मीटर डिस्टेंस निकाला। वहीं, इस राउंड के बाद पाकिस्तान के अरशद नदीम 87.82 स्कोर के साथ दूसरे नंबर पर आ गए। इस प्रकार फाइनल मुकाबले में पाकिस्तान के अरशद नदीम को सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा।

‘पिछली सरकारों को ISRO पर नहीं था भरोसा’: वैज्ञानिक नंबी नारायणन ने बताया कैसे कॉन्ग्रेस सरकार ने APJ अब्दुल कलाम को भी बजट देने में की थी आनाकानी

चंद्रयान-3 की सफलता के बाद क्रेडिट को लेकर सियासी खींचतान मची हुई है। कॉन्ग्रेस नेहरू से लेकर इंदिरा गाँधी तक को श्रेय देने में जुटी हुई है। इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायणन का एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में उन्होंने कॉन्ग्रेस सरकार के दौर में इसरो की हालत पर बात की। नंबी नारायण ने आरोप लगाते हुए कहा है कि पिछली सरकारों को इसरो (ISRO) पर भरोसा नहीं था। भाजपा ने यह वीडियो शेयर कर कॉन्ग्रेस पर हमला बोला है।

वीडियो में नंबी नारायणन ने कहा है, “इसरो के पास कोई जीप या कार नहीं थी। सिर्फ एक बस थी। वह भी शिफ्ट के हिसाब से चलती थी। ये सब तो ठीक है। लेकिन जब अब्दुल कलाम पीएसएलवी-3 बनाने की कोशिश कर रहे थे, तब मुझे नहीं लगता है कि इतना बजट था जितने की माँग की जा रही थी। हालाँकि, बाद में बहुत अधिक समस्याएँ झेलने के बाद बजट दिया गया था। मैं इसके बारे में कोई शिकायत नहीं कर रहा हूँ लेकिन बात यह है कि सरकार को इसरो पर किसी प्रकार का भरोसा नहीं था।”

उन्होंने आगे कहा है, “इसके बाद जब हम पीएसएलवी के लिए बजट माँगने गए तब भी यही स्थिति थी। उस समय सबसे बड़ी समस्या सरकार की प्राथमिकता को लेकर थी। सरकार को भरोसा नहीं था। लेकिन बाद में समय के साथ इसरो ने अपने प्रदर्शन और सफलता के मामले में अपनी साख स्थापित की। इसरो पूरी तरह से भ्रष्टाचार मुक्त संस्थान के रूप में कार्य करने लगा और समर्पित लोग थे। इसके बाद जो हुआ वह सब जानते हैं।”

वहीं इस वीडियो को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर शेयर करते हुए भाजपा ने कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा। भाजपा ने लिखा, “इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायणन को सुनिए। यह कॉन्ग्रेस पर एक गंभीर आरोप है। कॉन्ग्रेस की अलग-अलग प्राथमिकताएँ थीं। उन्होंने कभी भी इसरो प्राथमिकता नहीं दी।  बजट नहीं दिया। इसरो के पास रिसर्च के लिए आने-जाने के कोई जीप या कार नहीं थी। सिर्फ एक बस थी, जो शिफ्ट के हिसाब से चलती थी। तब से लेकर अब तक प्रधानमंत्री मोदी ने बजट बढ़ाया है। वह हमारे वैज्ञानिकों की सफलता और असफलता दोनों में उनके साथ खड़े हैं। यही कारण है कि भारत ने अंतरिक्ष मिशन में एक लंबा सफर तय किया है।”

जजों की सेवा में आजीवन स्टाफ! मीडिया रिपोर्ट में बताया – जिस प्रस्ताव पर राज्यपाल रहते द्रौपदी मुर्मू ने जताई थी आपत्ति, उसे हेमंत सोरेन सरकार ने फिर पास किया

झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने एक विवादित फैसला लेते हुए हाई कोर्ट के जजों को आजीवन दो सेवा कर्मी (को-टर्मिनस कर्मियों) उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इससे सम्बंधित प्रस्ताव को झारखण्ड सरकार की कैबिनेट ने पास कर राजभवन मंजूरी के लिए भेज दिया है। 

हालाँकि, यह पहली बार नहीं है, हाई कोर्ट में जजों को आजीवन सेवा कर्मी देने का प्रस्ताव पहले भी भेजा गया था जब वर्तमान में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू झारखण्ड की राज्यपाल थीं। तब तत्कालीन राज्यपाल ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई थी। 

क्या है मामला 

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, दरअसल  हाई कोर्ट के न्यायाधीशों को आजीवन दो सेवा कर्मी (को-टर्मिनस स्टाफ) देने का प्रस्ताव कैबिनेट ने पास कर एक बार फिर राजभवन भेजा है। हालाँकि, अभी तक झारखण्ड के वर्तमान राज्यपाल सी पी राधाकृष्णन (C. P. Radhakrishnan) ने इस प्रस्ताव पर क्या निर्णय लिया है वह सामने नहीं आया है। कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को 11 अगस्त को स्वीकृति प्रदान कर राजभवन भेज दिया था।

वहीं झारखंड सरकार द्वारा भेजे गए इस प्रस्ताव में बताया जा रहा है कि इसमें न्यायाधीशों को सेवानिवृत्ति के बाद राज्य सरकार द्वारा दो कर्मचारी उपलब्ध कराए जाएँगे, जिनका खर्च झारखण्ड सरकार वहन करेगी। प्रस्ताव के तहत हाई कोर्ट के न्यायाधीशों को उपलब्ध कराए जाने वाले दोनों कर्मचारियों का चयन भी उन्हीं सम्बंधित जजों पर छोड़ा गया है। 

दैनिक जागरण रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्ताव में यह भी है कि सेवा कर्मी जज की सेवानिवृत्ति की अवधि ले लेकर आजीवन जज की सेवा में जहाँ-जहाँ वे जाएँगे तैनात रहेंगे और जज का निधन हो जाने पर उनकी पत्नी की सेवा में आजीवन रहेंगे। इन सेवा कर्मियों का वेतन राज्य सरकार देगी।

वहीं इस प्रस्ताव के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि जज के सेवाकाल में ही ये सेवा कर्मी नियुक्त होंगे और जज की सेवानिवृत्ति के बाद भी उनके साथ ही रहेंगे। वहीं अगर सेवा काल में जज का तबादला दूसरे राज्य में होता है तो दोनों कर्मी भी उनके साथ जाएँगे। और वेतन यदि सम्बंधित राज्य नहीं देती है तो दोनों सेवा कर्मियों का खर्च झारखण्ड सरकार देगी। 

बता दें कि वर्तमान में हाई कोर्ट के न्यायाधीशों को सेवानिवृत्ति लाभ के अलावा हर महीने लगभग आठ हजार रुपए निजी स्टाफ रखने के लिए दिए जाते हैं, लेकिन अब दो कर्मियों की सेवा दी जाएगी।

तत्कालीन राज्यपाल मुर्मु ने नियमों पर जताई थी आपत्ति

गौरतलब है कि तत्कालीन राज्यपाल (अब राष्ट्रपति) द्रौपदी मुर्मु ने को-टर्मिनस कर्मियों की नियुक्ति को लेकर तैयार झारखण्ड सरकार के प्रस्ताव के आधार पर ही सवाल उठा दिए  थे। दरअसल, झारखण्ड सरकार की कैबिनेट ने यह प्रस्ताव संविधान के अनुच्छेद-229 के आधार पर तैयार किया था, जिसके माध्यम से हाई कोर्ट में कर्मियों की नियुक्ति से लेकर उनकी पेंशन तक की व्यवस्था की जाती है।

जबकि, इस मामले में राजभवन का कहना था कि अनुच्छेद-229 के तहत कोई भी नियम सिर्फ केंद्र सरकार तैयार कर सकती है और कानून के लिए इसे केंद्रीय संसद से पास कराना होगा। ऐसे में इसके तहत सेवा कर्मियों की नियुक्ति का अधिकार राज्य सरकार का नहीं हो सकता है। इसका अर्थ यह भी है कि जब नियुक्ति ही राज्य सरकार नहीं कर सकती तो फिर उनकी सैलरी के लिए राज्य सरकार के कोटे से कैसे प्रबंध होगा। 

नल्हड़ मंदिर में जलाभिषेक, बृजमण्डल शोभायात्रा होगी प्रतीकात्मक: G-20 के चलते सीमित संख्या में जाएँगे श्रद्धालु, VHP ने लिया निर्णय

हरियाणा के नूहं में आज सोमवार (28 अगस्त, 2023) को शोभा यात्रा निकालने के ऐलान के बाद अब विश्व हिन्दू परिषद् ने इसे प्रतीकात्मक रूप से पूरा करने का निर्णय लिया है। हालाँकि, पहले ही हरियाणा  प्रशासन ने इसकी इजाजत नहीं दी थी। वहीं हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी कुछ हफ्ते पहले हुई हिंसा का जिक्र करते हुए कहा था कि यात्रा की इजाजत नहीं दी गई है। इसलिए इसमें भाग लेने के बजाय लोग जलाभिषेक के लिए अपने-अपने इलाकों के मंदिरों में जा सकते हैं। इसके लिए उन्होंने कानून-व्यवस्था हवाला देते हुए इसे राज्य सरकार की जिम्मेदारी बताया है।

वहीं अब विश्व हिन्दू परिषद के नेता विनोद बंसल का बयान भी आ गया है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए बृजमण्डल शोभायात्रा को प्रतीकात्मक रखने का संकेत दिया है। विनोद बंसल ने लिखा, “हमारे नेता (आलोक कुमार) नल्हड़ मंदिर पहुँचने वाले हैं और वह वहाँ वह ‘जलाभिषेक’ करेंगे। हिंदू समुदाय के प्रतिनिधि भी उनके साथ होंगे… कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए सरकार और G-20 की तैयारियों के बीच हमने यात्रा को प्रतीकात्मक रूप से पूरा करने का फैसला किया है।”

बता दें कि इससे पहले हरियाणा के IG (दक्षिण रेवाड़ी रेंज) राजेंद्र कुमार ने भी कहा था कि विश्व हिंदू परिषद को यात्रा न निकालने के लिए समझाया जा रहा है। वहीं, विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता विनोद बंसल ने बयान दिया था, ‘अभिषेक यात्रा 28 को ही यानी सावन के अंतिम सोमवार को निकाली जाएगी। यह तीर्थ यात्रा है और इसके लिए किसी इजाजत की जरूरत नहीं होती।” जिसे अब उन्होंने अपने नए बयान में प्रतीकात्मक रखने का निर्णय लिया है। उनके बयान के अनुसार अब सिमित संख्या में ही श्रद्धालु नल्हड़ मंदिर जाकर जलाभिषेक करेंगे। 

गौरतलब है कि इससे पहले हरियाणा प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर धारा 144 लागू कर, भारी संख्या में पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियाँ नल्हड़ मंदिर के आस-पास से लेकर मस्जिद और नूहं की सीमाओं पर तैनात कर दी थी। साथ ही 28 अगस्त रात 12 बजे तक बल्क एसएमएस और इंटरनेट सेवाएँ बंद कर दी गईं हैं। सोमवार को सभी सरकारी व निजी शैक्षणिक संस्थाएँ, बैंक, दुकानें आदि भी बंद रखने के आदेश जिला उपायुक्त ने दिए हैं। उपायुक्त ने लोगों से अपील की है कि वह धैर्य व शांति का परिचय दें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि में शामिल न हों।

बता दें कि हरियाणा के मेवात के नूहं में 31 जुलाई को इस्लामिक भीड़ के हमले के चलते हिंदुओं की ‘बृजमंडल जलाभिषेक यात्रा’ अधूरी रह गई थी। इस हमले में 6 लोगों की जानें चली गई थीं। वहीं अब G-20 की वजह से सुरक्षा व्यवस्था, शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए प्रतीकात्मक रूप से पूरा किया जा रहा है।

मुस्लिम लड़कियाँ अबाया पहन कर नहीं जा सकेंगी स्कूल: फ्रांस की सरकार ने लगाया बैन – हिजाब, नकाब के बाद एक और प्रतिबंध

फ्रांस की सरकार ने स्कूल में मुस्लिम लड़कियों के अबाया पहनने पर प्रतिबंध (France to ban muslim abaya dresses in schools) का ऐलान किया। इसको लेकर शिक्षा मंत्री गेब्रियल अट्टल ने रविवार (27 अगस्त, 2023) को कहा है कि किसी भी क्लास रूम में छात्रों को देखकर उनके धर्म की पहचान नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार अबाया पहनना फ्रांस के धर्म निरपेक्ष कानून का उल्लंघन है। फ्रांस में पहले से ही स्कूलों में हेडस्कार्फ और नकाब पहने पर प्रतिबंध लगा हुआ है।

फ्रांस के शिक्षा मंत्री गेब्रियल अट्टल ने टीवी चैनल टीएफ1 को एक इंटरव्यू दिया है। इस इंटरव्यू में उन्होंने कहा:

“मैंने फैसला किया है कि अब स्कूलों में अबाया नहीं पहना जा सकता। जब आप किसी क्लास में जाते हैं तो छात्रों को देखने भर से उनके धर्म की पहचान नहीं होनी चाहिए।”

अट्टल ने यह भी कहा है कि स्कूल में मुस्लिम छात्राओं द्वारा पहने जाने वाले अबाया पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। 4 सितंबर से देशभर में क्लास शुरू हो रहे हैं। इससे पहले ही नियम बनाकर स्कूल के प्रमुखों को इस बारे में जानकारी दे देंगे। अट्टल ने अबाया को धार्मिक पहचान बताते हुए कहा है कि इसे पहनने से फ्रांस के धर्मनिरपेक्ष कानूनों का उल्लंघन होता है।

गौरतलब है कि इससे पहले साल 2004 में फ्रांस सरकार ने स्कूलों की ‘यूनिफॉर्म’ को लेकर एक कानून बनाया था। इस कानून के तहत स्कूलों में ऐसे किसी भी प्रतीक चिह्न या कपड़े पहनने पर रोक लगा दी गई थी, जिससे छात्रों की धार्मिक पहचान का पता चलता हो। सीधे शब्दों में कहें तो फ्रांस ने स्कूलों में बड़े क्रॉस, यहूदी किप्पा या इस्लामी हेडस्कार्फ पहनने पर रोक लगा दी थी।

साल 2010 से फ्रांस में सार्वजनिक रूप से पूरे चेहरे पर नकाब पहनने पर भी प्रतिबंध लगा हुआ है। इसके बाद भी मुस्लिम लड़कियाँ स्कूलों में अबाया पहनकर जाती थीं। इसलिए सरकार ने कदम उठाते हुए इस पर बैन का ऐलान किया।

बता दें कि अबाया मुस्लिम महिलाओं द्वारा पहनी जाने वाली एक पोशाक है। आमतौर पर यह ढीला-ढाला सा और काले रंग का होता है। इसे सामान्य कपड़ों के ऊपर ही पहना जाता है। इसमें महिलाओं का शरीर कंधे से पैर तक ढका रहता है। केवल हाथ और पैर की उंगलियों सहित उनका सिर दिखाई देता है। ज्यादातर महिलाएँ अपने बालों को ढँकने के लिए इसके साथ स्कार्फ भी पहनती हैं। 

नीरज चोपड़ा वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियन: पहले भारतीय होने का रचा इतिहास, पाकिस्तानी को पछाड़ा, ओलिंपिक और डायमंड लीग में भी गोल्ड विजेता


भारतीय गोल्डन ब्वॉय नीरज चोपड़ा ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। दिग्गज जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ओलिंपिक गोल्ड, डायमंड लीग में गोल्ड और अब 88.17 मीटर भाला फेंक कर वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2023 में भी गोल्ड हासिल किया है। वहीं, पाकिस्तानी एथलीट अरशद नदीम को सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा।

इस तरह से दिग्गज जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। हालाँकि, नीरज चोपड़ा के लिए वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शुरुआत अच्छा नहीं रही। नीरज अपने पहले प्रयास में 12वें नंबर पर थे। क्योंकि, नीरज चोपड़ा का थ्रो अमान्य करार कर दिया गया था, लेकिन इसके बाद नीरज चोपड़ा ने अपने दूसरे प्रयास में गजब की वापसी की और 88.17 मीटर का थ्रो करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। 

वहीं नीरज के एक बार फिर विश्व विजेता बनते ही उनके गाँव में लड्डू बाँटकर खुशी मनाई गई। नीरज के भाला फेंक प्रतियोगिता जीतते ही घर लाइव मैच देख रहे लोगों ने ताली और सीटी बजाकर जश्न मनाया। नीरज के चाचा भीम चोपड़ा व पिता सतीश चोपड़ा ने गले लगकर एक दूसरे को बधाई दी। 

बता दें कि वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप के इतिहास में गोल्ड जीतने वाले भले ही वह पहले भारतीय हैं, लेकिन यह उनका तीसरा मेडल है। इससे पहले उन्होंने सिल्वर जीता था, जबकि लॉन्ग जंपर अंजू बॉबी जॉर्ज ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था। वहीं इस बार जैवलिन का सिल्वर मेडल पाकिस्तान के नदीम और ब्रॉन्ज मेडल चेक रिपब्लिक के जैकब वाडलेच के नाम रहा।

नीरज ने दूसरे राउंड में की शानदार वापसी

गौरतलब है कि नीरज चोपड़ा पहले राउंड में फ़ाउल रहे लेकिन दूसरे राउंड के बाद 88.17 मीटर दूर भाला फेंककर वह टॉप पर काबिज हो गए। वहीं, जर्मनी के जुलियन वेबर दूसरे राउंड में 85.79 मीटर भाला फेंककर दूसरे पर आ गए, जबकि इस राउंड के बाद चेक रिपब्लिक के जैकब वाडलेच 84.18 मीटर के स्कोर के साथ तीसरे नंबर पर रहे। 

भारतीय दिग्गज ने तीसरे राउंड में 86.32 मीटर डिस्टेंस निकाला। वहीं, इस राउंड के बाद पाकिस्तान के अरशद नदीम 87.82 स्कोर के साथ दूसरे नंबर पर आ गए। इस प्रकार फाइनल मुकाबले में पाकिस्तान के अरशद नदीम को सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा।

‘कोई अनुमति की ज़रूरत नहीं, होकर रहेगा जलाभिषेक’: नूहं में हिन्दू संगठनों को रोकने के लिए सरकार ने कसी कमर, नल्हड़ मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़

हरियाणा के मेवात के नूहं में 31 जुलाई को इस्लामिक भीड़ के हमले के चलते हिंदुओं की ‘बृजमंडल जलाभिषेक यात्रा’ अधूरी रह गई थी। अब हिंदू संगठनों ने सावन सोमवार (28 अगस्त, 2023) को यह यात्रा फिर से निकालने का ऐलान किया है। लेकिन प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी है। जगह-जगह पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा रही है। नूहं समेत आसपास के इलाकों में धारा 144 लगाने के साथ ही इंटरनेट सेवाएँ बंद कर दी गईं।

हरियाणा सीएम मनोहर लाल खट्टर ने कहा है कि नूंह में 28 अगस्त को होने वाली बृजमंडल यात्रा की अनुमति नहीं दी गई है। एक माह पहले ही हिंसक घटना हुई थी। ऐसे में सावधानी रखने की जरूरत है। मंदिरों में पूजा-अर्चना करना सबका अधिकार है। श्रद्धानुसार छूट मिलनी चाहिए। लेकिन लोगों से अपील है कि वे नूहं की तरफ यात्रा करने से बचें। अपने नजदीक में स्थित मंदिर में ही जलाभिषेक कर पूजा करें।

प्रशासन द्वारा यात्रा की अनुमति न मिलने पर हिंदू संगठनों का कहना है कि उन्हें किसी प्रकार की अनुमति की जरूरत नहीं है, जलाभिषेक तो हो कर रहेगा। जलाभिषेक यात्रा को देखते हुए रविवार (27 अगस्त, 2023) को ही प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए कई स्थानों पर बैरिकेडिंग लगा दी है। जगह-जगह पुलिस की तैनाती की गई। नूहं की सीमा भी सील कर दी है। नूहं में 29 अगस्त तक के लिए धारा 144 लगाते हुए इंटरनेट बंद कर दिया गया।

इसके अलावा नूहं जिले की सीमा में प्रवेश करने वाले वाहनों को कड़ी जाँच के बाद ही एंट्री दी जा रही है। ड्रोन के जरिए भी संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। 28 अगस्त को जिले के सभी स्कूल, कॉलेज, बैंक बंद रखने के आदेश जारी किए गए हैं। इसके चलते नूहं में होने वाली डीएलएड परीक्षा भी स्थगित कर दी गई। नूहं जिले से जुड़े पलवल, फरीदाबाद, रेवाड़ी समेत राज्य के अन्य जिलों में भी कड़ी सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।

वहीं सोनीपत में भी किसी भी आसामान्य परिस्थिति से निपटने के कड़े इंतजाम किए गए हैं। सोनीपत पुलिस ने जिले में 29 अगस्त तक के लिए धारा 144 लागू करते हुए 5 से अधिक व्यक्तियों के इकट्ठा होने पर रोक लगा दी।

कानून-व्यवस्था के नजरिए से 32 स्पेशल ड्यूटी मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं। ख़ुफ़िया विभाग LIU को भी पूरी तरह से एक्टिव रहने के निर्देश दिए गए हैं। नूहं के उपायुक्त धीरेन्द्र खडगढा के मुताबिक, सभी प्रशासनिक अधिकारियों को 27 और 28 अगस्त के दिन अपना मुख्यालय न छोड़ने के आदेश जारी किए गए हैं।

वहीं इस आदेश को न मानने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि जो भी बाहरी व्यक्ति इस यात्रा में शामिल होने आएगा उसे सीमा पर ही रोक कर वापस लौटा दिया जाएगा। प्रशासन को इस यात्रा में न सिर्फ हरियाणा के विभिन्न जिलों बल्कि देश के अन्य प्रदेशों से भी लोगों के शामिल होने का अंदेशा है।

नल्हड़ मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

नूहं के दिल्ली-अलवर नेशनल हाइवे पर आमतौर वाहनों की लंबी कतार नजर आती है। लेकिन 28 अगस्त को होने वाली ‘बृजमंडल जलाभिषेक यात्रा’ को देखते हुए सन्नाटा पसरा हुआ है। बहुत कम वाहन चलते हुए दिखाई दिए। वहीं दूसरी ओर 27 अगस्त को नल्हड़ मंदिर में भगवान शिव के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। श्रद्धालु 28 अगस्त को होने वाली जलाभिषेक यात्रा की तैयारियों में जुटे हुए हैं। पुलिस-प्रशासन ने नल्हड़ मंदिर के आसपास व मंदिर के अंदर कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं।

इस यात्रा को लेकर विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा है 28 अगस्त की सुबह 11 बजे यात्रा की शुरुआत होगी। यात्रा करने के लिए अनुमति लेने का सवाल ही नहीं उठता। 28 अगस्त को सावन का आखिरी सोमवार है। हर श्रद्धालु का अधिकार है कि वह अपने इष्ट का जलाभिषेक करे। भारत एक धर्मपरायण देश है। यहाँ किसी भी यात्रा के लिए परमिशन नहीं ली जाती। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या कभी कुंभ के लिए परमिशन ली जाती है?

वहीं VHP नेता आलोक कुमार का कहना है कि 31 जुलाई को जलाभिषेक यात्रा पूरी नहीं हो पाई थी। इसलिए 28 अगस्त को सावन सोमवार के दिन उसे पूरा करना जरूरी है।  मेवात का इलाका संवेदनशील है इसलिए यात्रा को छोटा किया जाएगा। लेकिन यात्रा पूरी होगी। इस यात्रा में वह भी शामिल होंगे।

बेघर महिलाओं को प्लॉट, ₹450 में सिलिंडर, सरकारी भर्तियों में महिलाओं को आरक्षण, ‘लाड़ली बहन’ योजना की राशि में बढ़ोतरी, बिजली बिल माफ़ी… MP में सीएम शिवराज ने किए कई ऐलान

मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। इसी बीच सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कई बड़े ऐलान किए हैं। उन्होंने कहा है कि सावन माह में सभी को ₹450 में सिलेंडर मिलेगा। इसके अलावा प्रदेश की जिन महिलाओं के पास रहने के लिए जमीन नहीं है उन्हें फ्री में प्लॉट दिया जाएगा। बढ़े हुए बिजली बिल माफ होंगे। यही नहीं, रक्षाबंधन को देखते हुए उन्होंने प्रदेश की महिलाओं के खाते में ₹250 रुपए भेजने का ऐलान किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राजधानी भोपाल के जंबूरी मैदान में ‘लाड़ली बहना सम्मेलन’ आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम की शुरुआत में सीएम शिवराज ने महिलाओं के पैर धोए। इसके बाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने  कहा कि गैस सिलेंडर की कीमतों को लेकर बहनों को शिकायत थी। वह लगातार कोशिश कर रहे हैं कि कम कीमतों में सिलेंडर मिले। अब सावन माह में सभी बहनों को 450 रुपए में गैस सिलेंडर मिलेगा। आगे भी कम कीमतों में मिले। इसके लिए स्थायी व्यवस्था की जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा है कि कि प्रदेश की जिन महिलाओं के पास रहने के लिए जमीन नहीं है, उन्हें गाँव में फ्री में प्लॉट दिया जाएगा। शहर में माफिया से खाली कराई गई जमीन पर घर बनाकर उनकी रजिस्ट्री भी महिलाओं के नाम की जाएगी। महिलाओं के आरक्षण में बढ़ोतरी का ऐलान करते हुए उन्होंने कहा है कि शिक्षकों भर्ती में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। अन्य सरकारी भर्तियों में भी महिलाओं का आरक्षण 35% होगा।

सीएम शिवराज ने कहा है प्रदेश में अब बढ़े हुए बिजली बिल की वसूली नहीं होगी। सितंबर में बढ़े हुए बिजली के बिल जीरो हो जाएँगे। गरीब बहनों का बिजली बिल मात्र ₹100 होगा। यही नहीं, रक्षाबंधन को देखते हुए शिवराज सिंह चौहान ने महिलाओं के खाते में ₹250 रुपए भेजने का भी ऐलान किया। कार्यक्रम के दौरान ही उन्होंने ‘सिंगल क्लिक’ के जरिए महिलाओं के खाते में यह राशि भेज दी।

‘लाड़ली बहना’ योजना की राशि में किया इजाफे का ऐलान

रक्षाबंधन को देखते हुए ₹250 रुपए भेजने के साथ ही सीएम शिवराज ने ‘लाड़ली बहना’ योजना की राशि बढ़ाने का भी ऐलान किया। उन्होंने कहा है कि अक्टूबर से हर माह महिलाओं के खाते में 1250 रुपए भेजे जाएँगे। बता दें कि जून 2023 से प्रदेश की महिलाओं को हर माह 1000 रुपए दिए जा रहे थे। शिवराज सिंह इस राशि को बढ़ाकर ₹3000 तक करने का पहले ही ऐलान कर चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि अगले वर्ष से प्रदेश में शराब की दुकानें बंद करने की शुरुआत होगी। उन्होंने कहा है कि नई शराब नीति बनाई जाएगी। इसके हिसाब से जहाँ आधी से अधिक यानि 50% से अधिक महिलाएँ चाहेंगी कि शराब की दुकान न हो। वहाँ शराब की दुकानें बंद की जाएँगी। इसके अलावा सीएम शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश की लड़कियों की पढ़ाई की फीस का जिम्मा भी खुद उठाने का ऐलान किया।