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यासीन मलिक की बीवी मुशाल बनी पाकिस्तानी PM की सलाहकार, भारत विरोधी प्रोपेगेंडा के लिए आतंकी की 11 साल की बेटी का भी होता है इस्तेमाल

तिहाड़ जेल में बंद आतंकी यासीन मलिक की प्रोपेगेंडाबाज बीवी मुशाल हुसैन मलिक को पाकिस्तान के अंतरिम प्रधानमंत्री अनवारुल-हक काकर ने अपना सलाहकार बनाया है। उसने 17 अगस्त 2023 को शपथ ली। वह मानवाधिकार मामलों पर पाकिस्तानी पीएम की सलाहकार होगी। यह पहला मौका है जब किसी कश्मीरी आतंकी के परिजन को पाकिस्तान की संघीय सरकार में जगह मिली है। हालाँकि भारत विरोधी प्रोपेगेंडा के लिए उनक इस्तेमाल पाकिस्तान हमेशा से करता रहा है।

शुरुआत में मीडिया में मुशाल को कार्यवाहक सरकार में मंत्री बनाने के चर्चे थे। लेकिन 17 अगस्त को मंत्री के तौर पर जिन 16 लोगों ने शपथ ली उनमें उसका नाम नहीं था। मुशाल सहित 3 लोगों को पीएम के 3 सलाहकार के तौर पर शपथ दिलाई गई। मुशाल हुसैन और यासीन मलिक की 11 साल की बेटी रजिया सुल्तान का भी पाकिस्तान अपने प्रोपेगेंडा के लिए इस्तेमाल करता रहता है। मुशाल एक आर्टिस्ट भी है जो अक्सर अपनी अधनंगी पेंटिंग्स को लेकर चर्चा में रहती हैं।

अधनंगी पेंटिंग की वजह से चर्चा में रहती है मुशाल हुसैन मलिक

यासीन मलिक और मुशाल मलिक की जान पहचान 2005 में हुई थी। दोनों ने साल 2009 में निकाह किया। ये पूरी निकाह सेरेमनी लाइव टेलीकास्ट हुई थी। निकाह के समय मुशाल की उम्र 23 थी और यासीन 42 साल का था। मुशाल हुसैन मलिक अर्धनग्न पेंटिंग बनाती है।

मुशाल 6 साल की उम्र से पेंटिंग बनाती है और उनकी खासियत ही ये है कि वो अधनंगी औरतों की पेंटिंग बनाती है। उनकी कुछ पेंटिंग में जो महिला दिखती है उसे पीठ दिखाते, स्तन छिपाते देखा जा सकता है। वह पेस्टल, चारकोल के अलावा ग्लास पेंटिंग भी करती हैं वरना पहले वो वाटर कलर पेटिंग्स तक सीमित थीं। ऑप इंडिया ने उसके प्रोपेगेंडा वाले कारनामों पर रिपोर्ट भी छापी थी, जिसे यहाँ पढ़ सकते हैं

प्रदर्शन में अपनी बनाई पेंटिंग के साथ मुशाल
प्रदर्शन में अपनी बनाई पेंटिंग के साथ मुशाल (साभार: starsunfolded)

यासीन मलिक की बेटी का भी पाकिस्तान करता है इस्तेमाल

कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान ने आतंकी यासीन मलिक की 11 साल की नाबालिग बेटी का इस्तेमाल भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा में किया था। उसकी बेटी ने कहा था कि उसके अब्बा को कुछ भी नुकसान पहुँचता है तो वो इसका दोष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देगी। उसने कहा कि उसके अब्बा को फर्जी मामले में फँसाया गया है और उसे उम्मीद है कि जल्द ही वो जेल से निकलेंगे। यासीन मलिक की बेटी ने दावा किया कि वो जल्द ही जेल से निकल कर पाकिस्तानियों के बीच में होगा।

कौन है आतंकी यासीन मलिक?

यासीन मलिक वो आतंकी है, जो कश्मीर में कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार में सीधे तौर पर शामिल था। इसके बावजूद मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री रहते उससे मुलाकात की थी और उससे हाथ मिलाया था। उस पर ‘अलगाववादी नेता’ के मुखौटे में कश्मीर में आतंकवाद का समर्थन करने का भी आरोप है। साथ ही उसे भारत में टेरर फंडिंग समेत दूसरे अपराधों के मामले में हिरासत में भी लिया गया था। यासीन मलिक पर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद के अपहरण का भी आरोप है।

चुनावों के ऐलान से पहले ही छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश के मैदान में BJP ने उतार दिए 60 उम्मीदवार, भूपेश बघेल का मुकाबला ‘सांसद भतीजे’ विजय से

छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने गुरुवार (17 अगस्त 2023) को अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी। इस सूची में मध्य प्रदेश विधानसभा के लिए 39 नामों और छत्तीसगढ़ विधानसभा सीट के 21 नामों की सूची जारी की गई है।

छत्तीसगढ़ में दुर्ग से सांसद विजय बघेल को पाटन सीट से मैदान में उतारा गया है। इसी सीट से वर्तमान में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल विधायक हैं। विजय बघेल वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के भतीजे हैं। प्रत्याशी बनाए जाने पर विजय बघेल ने कहा, “जनता के आशीर्वाद से कॉन्ग्रेस को पटखनी देंगे।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को भावी चुनाव को देखते हुए बीजेपी की केंद्रीय चुनाव समिति की मैराथन मीटिंग हुई थी। इसमें छत्तीसगढ़ से डॉक्टर रमन सिंह, बीजेपी अध्यक्ष अरुण साव और नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल समेत कई नेताओं से दिल्ली में चर्चा की गई थी।

इस चर्चा के बाद अगले दिन गुरुवार को 21 नामों का ऐलान कर दिया गया है। 21 सीटों में 10 सीटें अनुसूचित जनजाति की हैं, जबकि एक सीट अनुसूचित जाति वर्ग को दी गई है। भाजपा ने 21 में से 5 महिलाओं को उतारा है।

चुनावी मैदान में चाचा को टक्कर देंगे भतीजे 

इस बार पाटन सीट पर मुकाबला रोमांचक होने वाला है। बात करें पिछले विधानसभा चुनाव की तो साल 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने विजय बघेल को टिकट नहीं दिया था। वहीं, कॉन्ग्रेस की ओर से भूपेश बघेल चुनाव लड़े थे और बीजेपी की ओर से मोतीलाल साहू मैदान में उतरे थे।

मोती लाल साहू को भूपेश बघेल ने भारी मतों से पटखनी दी थी। बाद में भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बन गए। पिछली जीत को देखते हुए ये माना जा रहा है कि पाटन विधानसभा से कॉन्ग्रेस की ओर से सीम भूपेश बघेल ही चुनाव मैदान में होंगे। उनको टक्कर देने के लिए बीजेपी ने उनके भतीजे सांसद विजय बघेल को उतारा है। 

बता दें कि चुनावी जंग में चाचा-भतीजा एक-दूसरे के कट्टर प्रतिद्वंदी हैं। बीजेपी उम्मीदवार विजय बघेल साल 2008 के विधानसभा चुनाव में सीएम भूपेश बघेल को मात दे चुके हैं। इसके बाद भाजपा ने उन्हें दुर्ग लोकसभा सीट से टिकट दिया गया था और कॉन्ग्रेस की प्रतिमा चंद्राकर को भारी मतों से हराकर वे सांसद बने।

जानिए सभी 21 सीटों के बारे में जहाँ बीजेपी ने उतरे हैं उम्मीदवार 

  1. पाटन- अभी यहाँ से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कॉन्ग्रेस से विधायक हैं। इन्होंने बीजेपी के मोतीलाल साहू को हराया था। इस बार पाटन से सांसद विजय बघेल को बीजेपी ने मैदान में उतारा है।
  2. प्रेमनगर- अभी यहाँ से कॉन्ग्रेस के खेलसाय सिंह विधायक हैं, जिन्होंने बीजेपी के विजय प्रताप सिंह को हराया था। यहाँ से इस बार भूलन सिंह मरावी को बीजेपी ने टिकट दिया है।
  3. भटगाँव- अभी यहाँ से कॉन्ग्रेस के पारसनाथ राजवाड़े विधायक हैं। इन्होंने बीजेपी की रजनी त्रिपाठी को हराया था। इस बार लक्ष्मी राजवाड़े को बीजेपी ने टिकट दिया है।
  4. प्रतापपुर- अभी यहाँ से कॉन्ग्रेस के प्रेमसाय सिंह टेकाम विधायक हैं। इन्होंने पूर्व गृहमंत्री रामसेवक पैकरा को हराया था। इस बार शकुंतला सिंह पोर्थे को बीजेपी ने टिकट दिया है।
  5. मरवाही- यहाँ से कॉन्ग्रेस के डॉक्टर केके ध्रुव विधायक हैं। इन्होंने बीजेपी के डॉक्टर गंभीर सिंह को हराया था। इस बार प्रणव कुमार मरपच्ची को बीजेपी ने टिकट दिया है।
  6. रामानुजगंज- अभी यहाँ से कॉन्ग्रेस के बृहस्पत सिंह विधायक हैं। इन्होंने बीजेपी के रामकिशुन सिंह को हराया था। इस बार रामविचार नेताम को बीजेपी ने टिकट दिया है।
  7. लुंद्र- अभी यहाँ से कॉन्ग्रेस के डॉक्टर प्रीतम राम विधायक हैं। इन्होंने बीजेपी के विजयनाथ सिंह को हराया था। इस बार प्रबोध भींज को बीजेपी ने टिकट दिया है।
  8. खुज्जी- अभी यहाँ से कॉन्ग्रेस की विधायक चन्नी साहू हैं। इन्होंने भाजपा के हीरेंद्र कुमार साहू को हराया था। इस बार बीजेपी ने गीता घटी साहू को टिकट दिया है।
  9. खरसिया- अभी यहाँ से कॉन्ग्रेस के उमेश पटेल विधायक हैं, जिन्होंने बीजेपी महामंत्री ओपी चौधरी को हराया था। इस बार महेश साहू को बीजेपी ने टिकट दिया है।
  10. धरमजयगढ़- अभी यहाँ से कॉन्ग्रेस के लालजीत सिंह राठिया विधायक हैं, जिन्होंने लिनव बिरजु राठिया को हराया था। इस बार हरिश्चंद्र राठिया को बीजेपी ने टिकट दिया है।
  11. कोरबा- अभी यहाँ से कॉन्ग्रेस के जयसिंह अग्रवाल विधायक और मंत्री हैं। इन्होंने बीजेपी के विकास महतो को हराया था। इस बार लखनलाल देवांगन को बीजेपी ने टिकट दिया है।
  12. खल्लारी- अभी यहाँ से कॉन्ग्रेस के द्वारिकाधीश यादव विधायक हैं। इन्होंने बसपा की मोनिका साहू को हराया था। इस बार अलका चंद्राकर को बीजेपी ने टिकट दिया है।
  13. अभनपुर- अभी यहाँ से कॉन्ग्रेस के धनेंद्र साहू विधायक हैं। इन्होंने भाजपा के चंद्रशेखर साहू को हराया था। इस बार इंद्र कुमार साहू को बीजेपी ने टिकट दिया है।
  14. राजिम- अभी यहाँ से कॉन्ग्रेस के अमितेश शुक्ला विधायक हैं। इन्होंने बीजेपी के संतोष उपाध्याय को हराया था। इस बार भाजपा ने रोहित साहू को टिकट दिया है।
  15. सिहावा- अभी यहाँ से डॉक्टर लक्ष्मी ध्रुव विधायक हैं, जिन्होंने बीजेपी के पिंकी शिवराज शाह को हराया था। इस बार श्रवण मरकाम को टिकट दी गई है।
  16. डौंडीलोहारा- अभी यहाँ से अनिला भेड़िया विधायक और मंत्री हैं। इन्होंने लाल महेंद्र सिंह टेकाम को हराया था। इस बार देव हलवा ठाकुर को टिकट दिया है।
  17. खैरागढ़- अभी यहाँ से कॉन्ग्रेस के विधायक यशोदा वर्मा हैं। इन्होंने भाजपा के कोमल जंघेल को हराया था। इस बार बीजेपी ने विक्रांत सिंह को टिकट दिया है।
  18. मोहला-मानपुर- अभी यहाँ से कॉन्ग्रेस के इंद्रशाह मंडावी विधायक हैं। इन्होंने बीजेपी के कंचन लाल मौर्य को हराया था। इस बार संजीव साहा को टिकट दिया है।
  19. कांकेर- शिशुपाल शोरी अभी यहाँ से कॉन्ग्रेस के विधायक हैं, जिन्होंने बीजेपी के हीरा मरकाम को हराया था। इस बार बीजेपी ने आशाराम नेताम को टिकट दिया है।
  20. बस्तर- अभी यहाँ से कॉन्ग्रेस के लखेश्वर बघेल विधायक हैं, जिन्होंने बीजेपी के डॉक्टर सुभाऊ कश्यप को हराया था। इस बार मनीराम कश्यप को बीजेपी ने मैदान में उतारा है।
  21. सरायपाली- अभी यहाँ से कॉन्ग्रेस के किस्मत लाल नंद विधायक हैं, जिन्होंने बीजेपी के श्याम तांडो को हराया था। इस बार सरला कोसरिया को बीजेपी ने टिकट दिया है।

मध्य प्रदेश में 39 उम्मीदवारों की सूची

मध्य प्रदेश चुनावों के लिए भाजपा ने 39 नामों की पहली सूची जारी कर दी है। भाजपा एससी मोर्चा के अध्यक्ष लाल सिंह आर्य को मध्य प्रदेश की गोहद विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, पार्टी के राष्ट्रीय सचिव ओमप्रकाश धुर्वे शाहपुरा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे।

हवा में उड़ रहा था विमान, बाथरूम में हो गई पायलट की मौत: हार्ट अटैक से जोखिम में थी 271 यात्रियों की जान, करानी पड़ी इमरजेंसी लैंडिंग

दक्षिण अमेरिका की सबसे बड़ी एयरलाइन्स लाटम (LATAM Airlines) की उड़ान के दौरान ही पायलट की मौत हो गई। रविवार 13 अगस्त 2023 की रात को बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान 271 यात्रियों को लेकर अमेरिका के मियामी से चिली के लिए जा रहा था।

दरअसल, विमान के मुख्य पायलट इवान एंडोर को रात 11 बजे कार्डियक अटैक आया और वह विमान के बाथरूम में गिर पड़े। इसके बाद उनकी मौत हो गई। हालाँकि, मौके की नजाकत दो समझते हुए विमान में मौजूद दो को-पायलट ने स्थिति को संभाला और पनामा में विमान की आपातकालीन लैंडिंग कराई।

तमाम कोशिशों के बाद नहीं बच पाया पायलट

पीआर एजेंसी मायपब्लिस्ट की फेसबुक पोस्ट के मुताबिक, सैंटियागो जाने वाली LATAM एयरलाइंस की फ्लाइट के 56 साल के पायलट इवान एंडोर को रात लगभग 11 बजे गंभीर कार्डियक अरेस्ट हुआ। इस वजह से मियामी से उड़ान भरने के दो घंटे बाद ही पनामा सिटी के टोकुमेन अंतराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर विमान की आपातकालीन लैंडिंग करानी पड़ी। हालाँकि, वहाँ के मेडिकल स्टाफ ने तुरंत पायलट को अपनी मेडिकल सर्विस दी।

विमान की लैंडिग के वक्त यात्रियों में से डॉक्टरों के साथ इसाडोरा नाम की एक नर्स कुछ सहयोगियों के साथ पायलट की मदद के लिए तुरंत दौड़ पड़ी थी। इसाडोरा ने बताया कि पायलट को बचाने के लिए क्रू मेंबर ने हर संभव कोशिश की। हालाँकि, मेडिकल टीम के पास उन्हें बचाने के लिए तत्कालिक दवाओं और मेडिकल उपकरणों की जरूरी सप्लाई नहीं थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, एक यात्री ने बताया कि उड़ान के लगभग 40 मिनट बाद ही एक को-पायलट ने विमान में मौजूद सभी डॉक्टरों से मदद का अनुरोध किया था, लेकिन पायलट एंडोर की हालत बिगड़ती गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए लैंडिंग पर विमान को खाली कराने का फैसला लिया गया।

अफसोस की तमाम कोशिशों के बावजूद पायलट को बचाया नहीं जा सका। पनामा सिटी में विमान के उतरने के बाद पायलट को मृत घोषित कर दिया गया। लाटम एयरलाइंस के मुताबिक पायलट इवान एंडोर 25 साल से विमान उड़ा रहे थे।

मंगलवार (15 अगस्त) को विमान के फिर से उड़ान भरने से पहले इसके सभी यात्रियों को पनामा सिटी के होटलों में ठहराया गया। दरअसल विमान लैंडिग के 12 घंटे तक पनामा एयरपोर्ट पर रहा। पायलट की मौत पर एयरलाइंस ने शोक जताया।

लाटम ग्रुप ने पायलट की मौत पर शोक जताया

इस दुखद घटना पर LATAM एयरलाइंस ने उड़ान के दौरान जिंदगी को बचाने के मकसद से बनाए गए प्रोटोकॉल के बारे में जानकारी दी। अफसोस की बात है कि लैंडिंग पर तत्काल मेडिकल हेल्प के बावजूद पायलट एंडोर को बचाया नहीं जा सका। LATAM ग्रुप ने इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर गहरा दुख जताया और पायलट के शोक संतप्त परिवार के लिए संवेदना जाहिर की।

LATAM ने एक बयान जारी कर पुष्टि की कि सैंटियागो, चिली के लिए उड़ान संख्या 505 को कप्तान के बीमार होने और बाद में मौत हो जाने के बाद रुट डायवर्ट करने पर मजबूर होना पड़ा था। बयान में कहा गया है कि दो को-पायलटों ने बोइंग 787-9 ड्रीमलाइनर को अपने काबू में लेकर इसे पनामा टोकुमेन अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट तरफ मोड़ दिया था।

सत्ता थी तो गुलाम नबी आजाद भी थे तुष्टिकरण के ही ठेकेदार, आज बता रहे कश्मीर में कभी सब हिंदू ही थे: अब्दुल्ला-मुफ्ती की तरह ही किया ‘लैंड जिहाद’

गुलाम नबी आजाद जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री रहे। केंद्र में कई महकमों के मंत्री रहे। कुछ साल पहले तक राज्यसभा में विपक्ष के नेता हुआ करते थे। कॉन्ग्रेस के बड़े नेताओं में उनकी गिनती होती थी। सत्ता में रहते हुए उन्होंने तुष्टिकरण के उस एजेंडे को पूरी तरह लागू किया जिसकी कॉन्ग्रेस जनक रही है। उनकी ‘उपलब्धियाँ’ भी वही हैं जो इस देश में मुस्लिमों के हर राजनीतिक ठेकेदार की होती है।

लेकिन फिलहाल गुलाम नबी आजाद अपने उस बयान को लेकर वायरल हैं, जिसमें वे कह रहे हैं कि 600 साल कश्मीर में सब पंडित ही थे। हिंदू को प्राचीन धर्म बताते हुए कहा है कि भारत के सभी मुस्लिम कन्वर्टेड हैं। उनके भी पुरखे हिंदू थे। कॉन्ग्रेस से अलग होकर डेमोक्रेटिव प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (DPAP) बनाने वाले गुलाम नबी शायद अपने राजनीतिक जीवन के अंतिम दौर में हैं। पर जब उनका राजनीतिक ग्राफ चढ़ान पर था तो उन्होंने जम्मू-कश्मीर में मुफ्ती और अब्दुल्ला की तरह ही तुष्टिकरण, लैंड जिहाद और डेमोग्राफी चेंज को मुकम्मल करने का काम किया।

आगे बढ़ने से पहले जान लीजिए कि 9 अगस्त 2023 को डोडा के चिरल्ला गाँव में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गुलाम नबी आजाद ने क्या कहा था, जिसका वीडियो वायरल है। उन्होंने कहा,

“मैं संसद में भी यह बात कह चुका हूँ। लेकिन बहुत सारी चीजें आप तक नहीं पहुँचती है… हमारे हिंदुस्तान में इस्लाम तो वैसे भी 15 सौ साल पहले ही आया है। हिंदू धर्म बहुत पुराना है। जो लोग (मुस्लिम) बाहर से आए होंगे, वो केवल 10-20 होंगे और वो भी उस वक्त मुगलों की फौज में थे। बाकी तो सब यहाँ (भारत) हिंदू से कन्वर्ट हुए मुसलमान हैं।600 साल पहले कश्मीर में कोई मुस्लिम नहीं था। सब कश्मीरी पंडित थे। सब इस्लाम अपनाकर मुस्लिम बने हैं।”

दिलचस्प यह है कि जिस डोडा जिले में गुलाम नबी आजाद ने यह बात कही है, उनकी पैदाइश भी उसी जिले की है। इस बयान से वे अपने उस अतीत से वैसे ही पीछा छुड़ाने की कोशिश करते दिख रहे हैं, जैसे उन्होंने कॉन्ग्रेस छोड़ी। जिस राज्य ने घाटी से हिंदुओं का सफाया देखा, वहाँ जम्मू क्षेत्र में हिंदुओं को अल्पसंख्यक बनाने के खेल में वे शामिल रहे। जम्मू के हिंदू बहुसंख्यक क्षेत्रों को मुस्लिम बहुल बनाने में फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती के साथ ही गुलाम नबी आजाद का भी अहम योगदान रहा है।

जम्मू क्षेत्र हिंदू बाहुल्य क्षेत्र माना जाता है। कई ऐसे इलाके थे जहाँ एक भी मुस्लिम परिवार नहीं रहता था। लेकिन अब वे मुस्लिम बहुल इलाकों में बदल चुके हैं। इसे बात से समझ सकते हैं कि जम्मू में 2020 आते-आते मस्जिदों की संख्या 3 से 100 हो चुकी थी और आबादी की बात करें तो जम्मू के कई इलाकों में 80 प्रतिशत मुस्लिम हो चुके थे। ये मुस्लिम कभी सीमा पार से आए, तो कभी घाटी से आए, कभी रोहिंग्या की शक्ल में आए, तो कभी बांग्लादेशी घुसपैठिए बनकर। इन्हें वहाँ रहने, बसने और घुसपैठ करने का मौका मिलता रहा और ये मौका उपलब्ध कराया उन्हीं राजनीतिक पार्टियों और उनके धुरंधरों ने, जिनका जिक्र ऊपर किया गया है।

रोशनी एक्ट की आड़ में खेल

जम्मू-कश्मीर में फारूक अब्दुल्ला की सरकार साल 2001 में एक कानून लेकर आई थी। इसे रोशनी एक्ट के नाम से जानते हैं। इस कानून की आड़ में 1990 तक हुए कब्जों को सरकारी मान्यता दी गई। फिर मुफ्ती सरकार ने इस कट ऑफ को 2005 में बढ़ाकर 2004 तक कर दिया। इसका मतलब था कि उस समय एक साल पहले तक जितने भी कब्जे होते, उन्हें मान्यता दी जाती और मामूली ‘फीस’ के नाम पर वो जमीन उस व्यक्ति को दे दी जाती। इस ‘फीस’ से जो पैसा आता, वो जम्मू-कश्मीर के उन हिस्सों में बिजली पहुँचाने में इस्तेमाल होती, जो बिजली से दूर थे। गुलाम नबी आजाद ने मुख्यमंत्री बनने पर इस कट ऑफ को बढ़ाकर 2007 तक कर दिया। इस तरह 2007 तक जम्मू-कश्मीर में लाखों कैनाल जमीन पर अवैध कब्जों को वैधानिकता की चादर ओढ़ा दी गई। रही बात ‘रोशनी’ की, तो वो एक भी गाँव में नहीं पहुँची। लेकिन इसकी आड़ में जमीनों पर इस्लामी कब्जे जमकर हुए।

रिपोर्ट में हुआ था ‘लैंड जिहाद’ पर चौंकाने वाला खुलासा

साल 2020 में ‘एकजुट जम्मू’ नाम की संस्था ने एक फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि फारूक अब्दुल्ला और गुलाम नबी आजाद ने भटिंडी के जंगलों की जमीन पर पहले खुद कब्जा किया। वहाँ पर अपने घर बनाए। बाद में मजहबी लोगों को वहाँ आकर बसने के लिए प्रोत्साहित किया। रिपोर्ट के अनुसार जम्मू में 1990 के बाद 1,00,000 घरों का निर्माण हुआ। 50 लाख कनाल सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हुआ। एक कनाल 505.857 वर्गमीटर के बराबर होता है। 1994 में जम्मू शहर में केवल 3 मस्जिद। लेकिन देखते ही देखते वहाँ 100 से ज्यादा मस्जिद बना दिए गए।

सेकुलरिज्म और अलग पहचान के नाम पर खेल

जम्मू-कश्मीर की दिशा और दशा तय करते रहे ‘खानदानी’ अब्दुल्ला, मुफ्ती, आजाद, द्राबू, किचलू, वाणी परिवार सेकुलरिज्म और कश्मीरियत का राग अलापते हैं। वो सत्ता में रहते हुए सेकुलर ‘दिखने’ की कोशिश करते रहे, लेकिन सेकुलरिज्म की आड़ में धीरे-धीरे जम्मू को भी मुस्लिम बहुल क्षेत्र बना दिया गया। बाहर से लाकर लोगों को बसा दिया गया। साल 2011 में प्रोफेसर एसके भल्ला जम्मू के इस्लामीकरण के मामले को लेकर कोर्ट पहुंचे। इस मामले का उदाहरण तवी नदी के कछार में अतिक्रमण करने वाले 668 लोगों में से 667 का मुस्लिम होना भी है। इन ‘लाभार्थियों’ में रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठिए भी शामिल हैं। ऐसा ही उदाहरण भटिंडी नाम की कॉलोनी से भी समझा जा सकता है। इसे स्थानीय लोग मिनी पाकिस्तान भी कहते हैं, सुन्जवाँ और सिद्धड़ा भी अतिक्रमण के बड़े ठिकाने रहे हैं।

यहाँ बसे लोगों को वोटर बनवा दिया गया। जम्मू के हिंदुओं की आवाज को दबा दिया गया और रोशनी एक्ट की आड़ में जेहादी एजेंडे को पूरा किया गया। ये लोग सत्ता में रहते हैं, तो अपने धर्म और कट्टरता की ‘हवस’ पूरी करते हैं और जब सत्ता हाथ से छिटक जाती है, तो मीडिया में आकर सेकुलरिज्म और भाई चारे का पाठ पढ़ाने लगते हैं।

महिला की छाती का आकार और विस्तार शारीरिक फिटनेस का लिटमस टेस्ट नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट, कहा- बहाली में छाती की नाप लेना अशोभनीय

राजस्थान हाईकोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया के दौरान महिलाओं की ‘छाती का माप’ लेने पर हैरानी जताई और कहा कि यह अपमानजनक है। एक याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच ने सुझाव दिया है कि महिला की छाती माप वाली प्रक्रिया की जगह शारीरिक क्षमता की माप करने का कोई दूसरा तरीका अपनाया जाना चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि किसी महिला की छाती का आकार उसकी ताकत निर्धारित करने के लिए अप्रासंगिक है। छाती का आकार और उसका विस्तार शारीरिक फिटनेस और फेफड़ों की क्षमता के लिटमस टेस्ट का सूचक नहीं हो सकता है। न्यायमूर्ति दिनेश मेहता की पीठ ने जोर देकर कहा कि छाती की माप का मानदंड न केवल ‘वैज्ञानिक रूप से निराधार’ प्रतीत होता है, बल्कि यह ‘अशोभनीय’ भी है।

न्यायमूर्ति ने आगे कहा, “अगर ऐसा है भी तो इस तरह का माप किसी महिला की निजता पर असर डालता है या उसमें दखल देता है। अतार्किक होने के अलावा, इस तरह के मानदंड निर्धारित करना एक महिला की गरिमा, शारीरिक स्वायत्तता और मानसिक अखंडता को बाधित करता है।”

छाती माप की प्रक्रिया के पुनर्मूल्यांकन के निर्देश

रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजस्थान हाईकोर्ट ने शारीरिक मानकों की जाँच की इस प्रक्रिया को महिलाओं की गरिमा और निजता के अधिकार का उल्लंघन माना है। हाईकोर्ट ने कहा कि ये संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का खुला उल्लंघन है। दरअसल, वनरक्षकों की भर्ती में छाती की माप की वजह से बाहर कर दी गईं तीन महिला अभ्यर्थियों ने कोर्ट में याचिका दी थी।

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति दिनेश मेहता की एकल पीठ ने इस संबंध में राजस्थान के मुख्य सचिव, वन सचिव और कार्मिक विभाग के सचिव को इस प्रक्रिया के पुनर्मूल्यांकन के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि शारीरिक क्षमता की जांच के लिए वैकल्पिक तरीकों का पता लगाने के लिए विशेषज्ञों की राय ली जा सकती है।

महिला याचिकाकर्ताओं को नहीं मिली कोई राहत

याचिका में महिला उम्मीदवारों ने बताया था कि उन्होंने शारीरिक दक्षता परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर ली थी, लेकिन निर्धारित छाती माप के मानदंडों को पूरा न कर पाने की वजह से उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। हालाँकि, इस मामले में हाईकोर्ट ने महिला अभ्यर्थियों को कोई राहत नहीं दी।

हाईकोर्ट ने कहा कि चूँकि भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, इसलिए इसमें हस्तक्षेप करने की कोई वजह नहीं बनती है। हाँ, ये जरूर है कि ऐसी अमानवीय और गैर-गरिमामयी तरीकों को प्रचलन से बाहर कर कोई वैज्ञानिक प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

देश मना रहा था 15 अगस्त, प्रयागराज के मदरसे में तिरंगा बिछाकर हो रहा था चाय नाश्ता: तस्वीर सामने आने के बाद 4 पर FIR

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में राष्ट्रध्वज के अपमान का एक मामला सामने आया है। यहाँ एक मदरसे के अंदर तिरंगे को मेज पर बिछाकर खाना खाया गया। इस घटना का एक फोटो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पुलिस ने एक स्थानीय व्यक्ति की शिकायत पर 4 नामजद सहित अज्ञात लोगों पर FIR दर्ज कर लिया है। घटना स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त 2023) की है।

यह मामला प्रयागराज जिले के थाना क्षेत्र होलागढ़ के दहियावाँ बाजार का है। यहाँ के पवन कुमार जायसवाल ने 15 अगस्त (मंगलवार) को पुलिस में शिकायत दी कि दहियावां बाजार में कुछ असामाजिक तत्वों ने तिरंगे पर खाना खाया है। अपने आरोप में पवन ने तौआब अंसारी, नन्हे कुरैशी, संजय और कुलदीप केसरवानी को नामजद किया है। शिकायत में कुछ अन्य अज्ञात लोगों का भी नाम दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता ने इस घटना को देशद्रोह बताते हुए इससे लोगों में आक्रोश पनपने का आरोप लगाया।

ऑपइंडिया के पास मौजूद FIR की कॉपी के अनुसार, पुलिस ने इस मामले में राष्ट्रध्वज अपमान रोकथाम अधिनियम (संशोधित) 2003 की धारा 2 के तहत कार्रवाई की है। घटना की वायरल हो रही तस्वीर में कुछ लोग कुर्सियों पर बैठे हैं और बाकी लोग खड़े हैं। सामने रखी मेज पर केसरिया, सफेद और हरे रंग की पट्टियों वाला कपड़ा बिछा हुआ है। उस पर खाने-पीने का सामान रखा हुआ है। मौके पर मौजूद एक व्यक्ति अपने मोबाइल से फोटो भी खींच रहा है।

जन भावनाओं को भड़काने की साजिश का आरोप

ऑपइंडिया ने इस घटना के बारे में शिकायतकर्ता पवन से बात की। पवन ने हमें बताया कि घटना दहियावाँ बाजार के मदरसा गौसिया इस्लामिया जीनत उल उलूम के अंदर की है। यह मदरसा लगभग 4 साल पुराना है, जिसके प्रबंधन और संचालन का काम तौआब अंसारी और नन्हे कुरैशी देखते हैं।

पवन ने आगे बताया कि जब एक तरफ राष्ट्रवादी लोगों द्वारा तिरंगा यात्रा निकाली गई थी, उसी समय इस फोटो को वायरल करने का मकसद असल में जनभावनाओं को भड़का कर तनाव का माहौल पैदा करना था। नन्हे कुरैशी और तौआब ने अपनी साजिश को अंजाम देने के लिए घटना के समय हिन्दू समुदाय के संजय और कुलदीप को गेस्ट के तौर पर बुलाया था।

इस मामले में नामजद संजय और कुलदीप पर पवन ने आरोप लगाया कि उन्होंने इसी साल मुहर्रम के जुलूस को तय रास्ते से मुड़़वा दिया था, जिससे कोई अप्रिय घटना भी हो सकती थी। बकौल पवन कुमार, लगभग 4 साल पहले एक दिल के मरीज के घर के आगे जोर-जोर से बज रहे मुहर्रम के बाजे को धीमा करने के लिए कहा था तो उन्हें नन्हे कुरैशी ने उन्हें धमकी दी थी।

शिकायतकर्ता पवन ने हमें आगे बताया कि पुलिस ने भी महज धारा 151 में आरोपितों का चालान किया और सभी बाहर आ गए हैं। उन्होंने आरोपितों की गहराई से जाँच करने पर काफी कुछ और निकल कर आने का दावा किया। पवन ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस अब तक फोटो में दिख रहे बाकी लोगों में से किसी की भी पहचान नहीं कर पाई है। शिकायतकर्ता ने मदरसे को सील करने की भी माँग की।

अखिलेश यादव थे CM, मुस्लिमों की आपत्ति के बाद कल्कि मंदिर के निर्माण पर लगा दी रोक: हाई कोर्ट ने आदेश को बताया असंवैधानिक

उत्तर प्रदेश के संभल में कल्कि धाम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने निर्माण पर लगी रोक को असंवैधानिक बताया है। मुस्लिमों की आपत्ति के 2016 में निर्माण पर जिलाधिकारी ने रोक लगा दी थी। उस समय उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा की सरकार थी।

कॉन्ग्रेस नेता और कल्कि धाम के पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम अपनी निजी जमीन पर इस मंदिर का निर्माण करवा रहे थे। लेकिन मुस्लिमों की आपत्ति के बाद संभल के तत्कालीन डीएम ने कानून-व्‍यवस्‍था बिगड़ने का हवाला देकर मंदिर निर्माण पर रोक लगा दी थी। लेकिन इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस रोक को गलत माना है। जस्टिस सलिल कुमार राय और जस्टिस सुरेंद्र सिंह की डिवीजन बेंच ने अब प्रमोद कृष्‍णम को जिला पंचायत में मंदिर का नक्‍शा जमा करवाने का आदेश दिया है। साथ ही मंदिर निर्माण के लिए जिला पंचायत से अनुमति लेने को भी कहा है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का हवाला देते हुए कहा है कि निजी जमीन पर मंदिर निर्माण संविधान के मूल अधिकारों में शामिल है। ऐसे में दूसरे समुदाय (मुस्लिम) की काल्पनिक आपत्ति के आधार पर निर्माण को नहीं रोका जा सकता।

हाई कोर्ट के फैसले पर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा है, “श्री कल्कि नारायण मंदिर के निर्माण पर 2016 में 6 नवम्बर को अखिलेश सरकार ने रोक लगा दी थी। आज खुशी का अवसर है कि माननीय हाई कोर्ट ने श्री कल्कि धाम मंदिर के निर्माण पर लगे रोक को हटा दिया है। मैं माननीय उच्च न्यायालय के इस फैसले का स्वागत भी करता हूँ। माननीय उच्च न्यायालय ने कहा है कि किसी भी व्यक्ति को उसके निजी भूमि पर मंदिर निर्माण से नहीं रोका जा सकता है। यदि ऐसा किया जाता है तो यह उसके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।”

मुस्लिम समुदाय ने जताई थी मंदिर निर्माण पर आपत्ति 

बता दें कि कल्कि मंदिर का शिलान्यास 2016 में किया गया था। यह इलाका मुस्लिम बहुल है। रिपोर्ट के अनुसार निर्माण पर आपत्ति जताते हुए मुस्लिमों ने कहा था कि मंदिर निर्माण स्थल से महज डेढ़ सौ मीटर की दूरी पर मस्जिद है। ऐसे में दोनों समुदायों में आपसी विवाद और कानून-व्यवस्था को खतरा हो सकता। इसके बाद मुस्लिम किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष इनामुर रहमान खान की शिकायत पर तत्कालीन डीएम ने मंदिर निर्माण पर रोक लगा दी थी। इसके बाद आचार्य प्रमोद कृष्णम ने 2017 में इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी। याचिका में उन्होंने डीएम के आदेश को कल्पनाओं पर आधारित बताया था।

अब बिहार में बोरा बेचेंगे शिक्षक, ₹20 रुपए से कम पर बेचने की अनुमति नहीं: शौच सर्वे के बाद शिक्षा विभाग का एक और अजीबोगरीब फरमान

बिहार का शिक्षा विभाग शिक्षकों के लिए नित नए फरमान जारी करता रहता है। जाति सर्वे की जिम्मेदारी के बाद अब बोरे यानी गनी बैग बेचने का काम भी उनके सिर लाद दिया गया है। विभाग ने शिक्षकों को मिड-डे मील के बोरे 10 की जगह 20 रुपए में बेचने का निर्देश दिया है। विभाग ने इसके पीछे तर्क दिया है कि मिड-डे मील के बोरे महंगे हो गए हैं। इस वजह से ये फैसला लिया गया है।

इस संबंध में विभाग के निदेशक (मिड-डे मील योजना) मिथिलेश मिश्रा ने सोमवार (14 अगस्त) को सभी जिला के अधिकारियों को पत्र भेजा है। इसमें उन्होंने राज्य सरकार के संचालित विद्यालय के छात्रों के लिए मिड-डे मील के अनाज वाले खाली बोरों को बेचने का निर्देश दिया गया है।

इतना ही नहीं, सरकारी स्कूलों के हेडमास्टर को मिड-डे मिल चावल और दाल के खाली हुए इन बोरों को कम से कम 20 रुपए में बेचने के बाद इससे मिले पैसे को सरकारी खाते में जमा भी कराना है। शिक्षा विभाग के इस आदेश की खासी चर्चा हो रही है। साथ ही इसको लेकर बिहार सरकार की किरकिरी भी हो रही है।

क्या लिखा है मिड-डे मील के निदेशक ने पत्र में?

आजतक के मुताबिक, बिहार मिड-डे मील योजना के निदेशक मिथिलेश मिश्रा ने योजना के जिला कार्यक्रम अधिकारियों को भेजे पत्र में लिखा है कि साल 2016 में मिड-डे मील के अनाज के खाली बोरों को 10 रुपए प्रति बोरा बेचने का फैसला लिया गया था, लेकिन बीते 7 साल में बोरों की कीमतों में इजाफा हुआ है।

पत्र में सभी जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों को कहा गया है वे खाली बोरों की बिक्री के लिए अपने स्तर से सभी संबंधित लोगों को निदेश देना सुनिश्चित करें।

बिहार मिड-डे मील योजना के निदेशक मिथिलेश मिश्रा का पत्र (साभार -आजतक)

अब इन खाली बोरों को कम से कम 20 रुपए में बेचने का फैसला लिया गया है। इन्हें बेचने के बाद हेडमास्टर इनकी ब्रिक्री से मिले पैसों को जिले में योजना मद के खाते में जमा करेंगे। इसके बाद जिला कार्यालय इस पैसे को इकट्ठा कर चेक के जरिए पूरी राशि को कोषागार चालान के जरिए जमा करेंगे। ये सब करने के बाद निदेशालय को भी इसकी जानकारी देंगे।

‘शिक्षक संघ ने कहा ये शिक्षकों का अपमान है’

बिहार शिक्षा विभाग के इस फरमान को लेकर विरोध की आवाजें उठने लगी हैं। माध्यमिक शिक्षक संघ के महासचिव शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने आरोप लगाया है कि विभाग उन्हें शैक्षणिक कामों से हटाकर कारोबारी बनाने पर तुला है।

उनका कहना था कि इस तरह के फरमानों से शिक्षकों की लगातार बेइज्जती की जा रही है। उन्होंने ये भी कहा कि जब पहले बोरे के दाम 10 रुपए थे तो कोई नहीं खरीदता था। अब इन्हें 20 रुपए में बिक्री करने का प्रेशर बनाया जा रहा है।

बताते चलें कि साल 2018 में बिहार सरकार ने टीचरों को शौचालय सर्वे का भी काम सौंपा था। इसमें टीचरों को घर-घर जाकर शौचालय का सर्वे करना था और उसकी रिपोर्ट बनाकर सरकार को भेजना था। उस समय भी इसका विरोध किया गया था।

रणदीप सुरजेवाला के खिलाफ इंदौर में शिकायत, BJP को वोट देने वालों को बताया था ‘राक्षस’: मंच से गाली देने का वीडियो भी वायरल

कॉन्ग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने भाजपा को वोट देने वालों लोगों और उसके समर्थकों को राक्षस कहा था। इसके साथ ही उन्होंने श्राप भी दिया था। इसको लेकर भाजपा ने गुरुवार (17 अगस्त 2023) को मध्य प्रदेश के इंदौर में सुरजेवाला के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

मध्य प्रदेश भाजपा विधि प्रकोष्ठ के सोशल मीडिया प्रभारी गोविंद सिंह बैस ने इंदौर की जिला अदालत में शिकायत दायर की है। शिकायत में माँग की गई है कि रणदीप सुरजेवाला के खिलाफ धारा 290, 504, 505, 506 और 153 ए के तहत मामला दर्ज किया जाए। इस शिकायत पर अदालत ने पुलिस से जाँच कर 15 सितंबर तक रिपोर्ट देने के लिए कहा है।

मीडिया से बात करते हुए भाजपा नेता और पेशे से वकील गोविंद सिंह बैस ने कहा, “कॉन्ग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला ने हरियाणा में एक बयान दिया था। इसमें उन्होंने सार्वजनिक मंच से देश के सम्मानित मतदाताओं को राक्षस कहकर अपमानित किया था। रणदीप सुरजेवाला के बयान से देश में अशांति का माहौल पैदा हो सकता है। साथ ही लोग खुद को अपमानित महसूस कर रहे हैं। इसलिए उनके बयान के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं के अंतर्गत उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की माँग की है।”

हरियाणा के कैथल में 13 अगस्त 2023 को आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद सुरजेवाला ने कहा था, “भारतीय जनता पार्टी और उसके समर्थक राक्षस हैं। जो बीजेपी को वोट देते हैं, वे भी राक्षस हैं। मैं महाभारत की इस भूमि से आज उन्हें श्राप देता हूँ।” बता दें कि कैथल वही निर्वाचन क्षेत्र है, जहाँ से सुरजेवाला ने साल 2019 में लोकसभा चुनाव लड़ा था। हालाँकि उन्हें 500 वोटों से हार मिली थी।

गौरतलब है कि भाजपा को वोटरों और समर्थकों पर अपमानजनक टिप्पणी करने के बाद सुरजेवाला ने माफी माँगने के बजाय बीजेपी और पीएम मोदी पर हमला करते हुए उन्हें एक बार फिर ‘असुर’ कहा था। उन्होंने ट्वीट कर कहा था, “भरा नहीं जो करुणा से, जिसको जन-जन से प्यार नहीं। शासक नहीं वह असुर है, जिसे किसान, मजदूर, अबला, युवा से प्यार नहीं।”

यही नहीं, रणदीप सुरजेवाला के एक और विवादित बयान का वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में उन्हें महिलाओं को लेकर अपमानजनक टिप्पणी करते सुना जा सकता है। यह वीडियो शेयर करते हुए भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने ट्वीट किया है।

उन्होंने लिखा, “भाजपा को वोट देने वाले 23 करोड़ देशवासियों को राक्षस कहने के बाद अब राहुल गाँधी के करीबी रणदीप सुरजेवाला ने अपने सार्वजनिक भाषणों में बहन-बेटियों को गाली देना भी शुरू कर दिया है। जिस पार्टी के नेता महिलाओं के लिए ऐसी अभद्र भाषा का इस्तेमाल करें, वो महिला सुरक्षा को लेकर कभी गंभीर नहीं हो सकती। इसका स्पष्ट उदाहरण राजस्थान में दिख रहा है।”

वीडियो बनाकर AIMIM नेता अब्दुल्ला की ‘पोल’ खोल रहा था शेख, समलैंगिक पाटर्नर को ₹13 लाख का लालच दे चाकुओं से गोदवाया: हैदराबाद का मामला

हैदराबाद पुलिस ने एक सामाजिक कार्यकर्ता की हत्या के मामले में AIMIM (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन) के म्युनिसिपल चेयरमैन को गिरफ्तार किया है। आरोपित AIMIM नेता का नाम अब्दुल्ला सादी है। मृतक का नाम शेख सैयद बावज़ीर हैे। हत्या के मामले में बुधवार (16 अगस्त 2023) को अब्दुल्ला सादी के अब्बू अहमद सादी और 2 अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है। इस घटना में मृतक और आरोपित में समलैंगिक संबंध भी सामने आए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गिरफ्तार मुख्य आरोपित 30 वर्षीय अब्दुल्ला सादी हैदराबाद के जलपल्ली से म्युनिसिपल चेयरमैन है। बताया जा रहा है कि AIMIM नेता ने शाकिर की हत्या के लिए भाड़े के हत्यारे मँगाए थे। इन कातिलों को हत्या के लिए 13 लाख रुपए दिए गए थे। उनके साथ गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपितों में 20 वर्षीय अहमद बिन हाजेब और 20 वर्षीय मोहम्मद अयूब खान हैं। वहीं, सालेह सादी और उमर सादी नाम के 2 अन्य आरोपित फरार हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।

पुलिस ने बताया कि मृतक शेख सोशल मीडिया के माध्यम से अब्दुल्ला के क्षेत्र का वीडियो अक्सर शेयर किया करता था। इन वीडियो में वो उन इलाकों को दिखाता था, जहाँ ठीक से जरूरी विकास कार्य नहीं हुआ है। आरोप है कि शेख ये सब अब्दुल्ला सादी से पैसे की उगाही के लिए कर रहा था। इस बात से AIMIM नेता अब्दुल्ला काफी नाराज रहता था।

दरअसल, मृतक शेख बावज़ीर पूर्व में सुपारी लेकर अपराध करता था। उस पर अलग-अलग थानों में कुल 9 केस दर्ज हैं। इनमें पॉक्सो की 3 FIR भी शामिल हैं। शेख की अहमद बिन हाजेब से चंचलगुडा जेल में साल 2021 में मुलाकात हुई थी। अहमद पर भी 6 केस दर्ज हैं। जेल में दोनों के बीच अच्छी दोस्ती हो गई।

इंडियन एक्सप्रेस का दावा है कि जेल में भी मृतक शेख और अहमद के बीच समलैंगिक संबंध स्थापित हो गए थे। जेल से निकलने के बाद भी शेख और अहमद में शारीरिक संबंध स्थापित होते रहे। इस बीच गैंग में अयूब खान भी शामिल हो गया। एक बार शेख ने अयूब से जबरदस्ती संबंध बनाने का प्रयास किया। इस घटना के बाद से अयूब और शेख में मनमुटाव हो गया। इसी के चलते अहमद भी शेख से नफरत करने लगा था।

AIMIM नेता ने इन लोगों के बीच के आपसी झगड़े को भाँप लिया। उसने अहमद को शेख के खिलाफ एक हथियार के तौर पर प्रयोग किया। उसने अहमद को 13 लाख रुपए का लालच देकर शेख की हत्या करने के लिए कहा। अहमद तैयार हो गया। 10 अगस्त 2023 की रात को अहमद हाजेब ने शेख को एक पार्टनर से मिलाने का वादा करके अपने ऑफिस बुलाया।

इस साजिश में अयूब खान भी शामिल था। शेख इस जाल में फँस गया और अहमद के पास चला गया। ऑफिस में सबसे पहले अहमद ने शेख की आँखों में लाल मिर्च झोंक दी और फिर चाकुओं में ताबड़तोड़ वार करने लगा। इस हमले में शेख बावजीर की जान निकल गई। शेख बावजीर का अंतिम संस्कार कर दिया गया है।

पुलिस ने इस मामले का खुलासा कर दिया और अब्दुल्ला सादी के साथ अयूब खान और अहमद हाजेब को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। फरार आरोपितों की तलाश की जा रही है।