पंजाब पुलिस ने स्वतंत्रता दिवस पर राज्य में माहौल खराब करने की साजिश रच रहे एक आतंकी मॉड्यूल का खुलासा किया है। पुलिस ने रविवार (13 अगस्त 2023) को इस मॉड्यूल के तीन आरोपितों- सुखमनप्रीत, प्रदीप और अक्षम को गिरफ्तार कर लिया है। यह मॉड्यूल इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन (ISYF) का है।
इस पूरे मामले में पाकिस्तान में बैठे ISYF के अध्यक्ष लखबीर सिंह रोडे, हरविंदर सिंह रिंदा और कनाडा में बैठे आतंकवादी लखबीर सिंह लांडा का नाम सामने आ रहा है। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के सहयोग से नया मॉड्यूल तैयार किया है। पुलिस ने रविवार को तरनतारन के सरहली थाने में इस मॉड्यूल से जुड़े 8 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
यह गिरोह व्यापारियों, डॉक्टरों और अमीर लोगों को जान से मारने की धमकी देकर पैसे वसूलते थे। इसके साथ पंजाब में आतंकी घटनाओं को अंजाम देने की साजिश रची थी। इसके लिए ड्रोन के जरिए पाकिस्तान से हथियार और गोला-बारूद मँगवाया गया था। इसकी भनक लगते ही आरोपियों को पकड़ने के लिए छापेमारी शुरू कर दी गई।
तरनतारन के SSP विशालजीत सिंह ने बताया कि CIA स्टाफ के प्रभारी इंस्पेक्टर प्रभजीत सिंह के बयान पर इस मॉड्यूल के खिलाफ थाना सरहाली में मामला दर्ज किया गया है। एफआईआर में लखबीर सिंह लंडा (कनाडा), हरविंदर सिंह रिंदा, लखबीर सिंह रोडे (पाकिस्तान), गुरदेव सिंह जैसल, सतबीर सिंह सत्ता (यूरोप) का नाम शामिल है।
इसके लिए पंजाब पुलिस द्वारा रविवार को दर्ज की गई FIR में यादविंदर सिंह यादा, गुरचरण सिंह गुरी शेरों, गुरविंदर सिंह गिंदा, अर्शप्रीत सिंह नूरदी, जोबनजीत सिंह मालिया, सुखमनप्रीत सिंह शेरों, प्रदीप सिंह शेरों का नाम भी इसमें शामिल है। जाँच में इस मॉड्यूल के जुड़े अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं।
हाल ही में संसद में मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश हुआ, जिसमें राहुल गाँधी ने भी भाषण दिया। जहाँ मोदी सरकार ने विश्वासमत आसानी से जीत लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 घंटे से भी ज़्यादा लंबा भाषण देते हुए विपक्ष की बखिया उधेड़ दी और उन्हें ट्रॉल भी किया। राहुल गाँधी ने अपने भाषण के दौरान रामायण के पात्रों रावण और कुम्भकर्ण को लेकर कुछ ऐसा कहा, जिसकी सच्चाई स्पष्ट करनी ज़रूरी है क्योंकि इससे लोग भ्रमित हो सकते हैं।
आइए, पहले जानते हैं कि राहुल गाँधी ने क्या कहा, “रावण 2 लोगों की सुनता था – मेघनाद और कुम्भकर्म। ऐसे ही नरेंद्र मोदी 2 लोगों की सुनते हैं – अमित शाह और गौतम अडानी। लंका को हनुमान ने नहीं जलाया था, लंका को रावण के अहंकार ने जलाया था। रावण को राम ने नहीं मारा था, रावण के अहंकार ने रावण को मारा था। आप पूरे देश में केरोसिन फेंक रहे हो। आपने मणिपुर में केरोसिन फेंकी और फिर चिंगारी लगा दी। अब फिर हरियाणा में कर रहे हो। आप पूरे देश में भारत माता की हत्या कर रहे हो।”
इस दौरान रावण को उसके अहंकार द्वारा मारने या लंका को रावण के अहंकार द्वारा जलाने की बातें बहस का मुद्दा हो सकती हैं कि इन्हें किन अर्थों में कहा गया है और इसकी क्या व्याख्या है, लेकिन रावण सिर्फ मेघनाद और कुम्भकर्ण की सुनता था – ये शायद ही पचे। आइए, यहाँ हम वाल्मीकि रामायण से समझते हैं कि कैसे राहुल गाँधी जो कह रहे हैं उसका एकदम उलटा हुआ था। अर्थात, रावण ने कुम्भकर्ण की सुनी ही नहीं।
कुम्भकर्ण-रावण संवाद: दशानन ने अपने भाई की एक न सुनी
रामायण की कहानी किसी को बताने की ज़रूरत नहीं है और न ही पात्रों का परिचय कराने की। ये तो सभी को पता ही है कि विशाल शरीर वाला कुम्भकर्ण आधे साल सोता ही रहता था और उसे जगाने के लिए बड़े जतन करने पड़ते थे। भगवान श्रीराम से युद्ध में कमजोर पड़ने के बाद रावण ने अपनी सेना के माध्यम से उसे जगाया। कुम्भकर्ण जब रावण के महल में पहुँचे तो वो अपने पुष्पक विमान पर चिंतित बैठा हुआ था। उसने पूछा कि आखिर ऐसी क्या विपत्ति आ गई है कि उसे जगाया गया है?
फिर रावण ने उसे बताया कि वानर-ऋक्ष सेना समुद्र पर पुल बाँध कर आ पहुँची है और कई राक्षस मारे गए हैं। रावण ने जब अपना दुखड़ा रो दिया तो कुम्भकर्ण जोर से हँस पड़ा। उसने कहा कि हम सबने तुम्हें समझाया था लेकिन तुमने अपना हित चाहने वालों की बातों को नज़रअंदाज़ कर के इन दुष्परिणामों को न्योता दिया है। उसने कहा कि जैसे पापियों को नरक मिलता है, वैसे ही तुम्हारे पापों को सज़ा तुम्हारे पास बड़ी जल्दी ही आ पहुँची है। वाल्मीकि रामायण के युद्ध कांड के 63वें सर्ग में आपको रावण एवं कुम्भकर्ण का ये संवाद मिल जाएगा। उदाहरण के लिए, आप इस सर्ग का चौथा, पाँचवाँ और छठा श्लोक देखिए:
प्रथमम् वै महाराज कृत्यमेतदचिन्तितम्। केवलम् वीर्यदर्पेणनानुबन्धो विचिन्तितः।। यः पश्चात्पूर्वकार्याणि कुर्यादैश्वर्यमास्थितः। पूर्वं चोत्तरकार्याणि न स वेद नयानयौ।। देशकालविहीनानि कर्माणि विपरीतवत्। क्रियमाणानि दुष्यन्ति हवीम्ष्यप्रयतेष्विव।।
इसका भावार्थ है, “महाराज, केवल बल के घमंड में आकर तुमने पहले इस पापकर्म की परवाह नहीं की। इसके परिणाम के संबंध में कुछ भी सोच-विचार नहीं किया। जो ऐश्वर्य के अभिमान में आकर पहले करने योग्य कार्यों को पीछे करता है और पीछे करने योग्य कार्यों को पहले कर डालता है, वो नीति-अनीति को नहीं जानता है। उचित देश-काल न होने पर जो कार्य विपरीत स्थिति में किए जाते हैं, वो संस्कारहीन अग्नियों में होम किए गए हविष्य की भाँति केवल दुःख का ही कारण बनते हैं।”
सोचिए, अपने बड़े भाई को समझाने के लिए कुम्भकर्ण ने कितने जतन किए, अगर वो कुम्भकर्ण की सुन लेता तो क्या उसका विनाश होता? इतना ही नहीं, आगे भी कुम्भकर्ण उसे समझाते हुए कहता है कि सचिवों की सलाह लेकर ही राजा को आगे बढ़ना चाहिए। अपनी बुद्धि से सुहृदों की पहचान कर उनकी बात सुनने वाला राजा ही इसका विवेक कर पाता है कि क्या करना है और क्या नहीं – ये कुम्भकर्ण ने उसे समझाया। बता दें कि विभीषण के समझाने पर रावण ने उसे अपमानित किया था और लात मार कर भगा दिया था।
कुम्भकर्ण आगे रावण को समझाते हुए कहता है कि धर्म-अर्थ, अर्थ-धर्म और अर्थ-काम जैसे द्वंद्वों का नीतिज्ञ पुरुष को उपयुक्त समय में ही सेवन करना चाहिए। उसने समझाया कि इन तीनों में धर्म ही श्रेष्ठ है, इसीलिए अर्थ और काम की उपेक्षा करनी भी पड़े धर्म के लिए तो करना चाहिए। उसने कह दिया कि अगर ये समझ नहीं है तो शास्त्रों का अध्ययन व्यर्थ गया। यहाँ ये बताना आवश्यक है कि शास्त्रों के हिसाब से सुबह धर्म का, दोपहर में अर्थ और रात में काम के सेवन का विधान बनाया गया है। हमेशा काम का सेवन करने वाला अधम माना गया है।
रावण ने अपने चतुर मंत्रियों की भी एक न सुनी, उस पर भी कुम्भकर्ण ने उसे लताड़ा। उसने बार-बार सलाह दिया कि अपने मंत्रियों की बात सुननी चाहिए और परिणाम विचार कर कार्य करना चाहिए। साथ ही उसने बताया है कि किन मंत्रियों की बात नहीं सुननी चाहिए – जो पशु की तरह तरह मंत्रिमंडल में सम्मिलित कर लिए गए हों, शास्त्र की बातें न जानते हों, धृष्टतावश बातें बनाते हों, प्रचुर संपत्ति चाहते हों और अर्थशास्त्र का ज्ञान जिन्हें नहीं हो।
कुम्भकर्ण ने रावण को यहाँ तक समझाया है कि दुश्मन को कमजोर समझ कर अपनी रक्षा का प्रबंधन न करने वाला राजा भी पद से हटा दिया जाता है। उसने स्पष्ट कह दिया कि मंदोदरी (रावण की पत्नी) और विभीषण ने उसके हित की बात कही थी। इस पर रावण ने पिछली बातें बिसार कर भावनात्मक बातें की और संकट में पड़े की सहायता वाली बात कही। तब जाकर कुम्भकर्ण ने युद्ध में जाने का निर्णय लिया और एक भाई होने के नाते आश्वासन दिया कि शत्रु उसके मरने के बाद ही रावण तक पहुँच पाएँगे।
रावण ने कुम्भकर्ण की बात नहीं मानी, गलत हैं राहुल गाँधी
तो इससे साफ़ है कि रावण ने कुम्भकर्ण की बात नहीं मानी। जैसा कि इस संवाद से परिलक्षित होता है, पहले भी उसने अपने छोटे भाई की सलाह को नहीं माना था। बार-बार समझाए जाने के बाद वो इमोशनल अत्याचार पर उतर आया और रिश्तों की दुहाई देने लगा। कुम्भकर्ण को भी कहना पड़ा कि वो स्नेहवश ये बातें कह रहा है, जो उसके लिए ही है। कुम्भकर्ण युद्ध में गया और लड़ते हुए मारा गया। रावण की जिद के कारण उसकी भी जान गई, अंत में रावण भी मारा गया।
अब राहुल गाँधी ने कौन सी रामायण पढ़ी है, ये तो समझ से पड़े है। एक तो कुम्भककर्ण ज़्यादातर सोता ही रहता था, ऊपर से रावण ने उसकी सलाह नहीं मानी। फिर, ये बयान किस तरह ठीक हुआ कि रावण हमेशा कुम्भकर्ण की बातें सुनता था? राहुल गाँधी रामायण-महाभारत को पढ़े बिना न सिर्फ इनका अर्थ बदल देना चाहते हैं, बल्कि ऐसे बयानों से युवाओं के मन में भी तरह-तरह की भ्रांतियाँ बैठेंगी और वो सही कथा से दूर होंगे।
अगर राहुल गाँधी ने तुलसीदास की रामचरितमानस भी पढ़ी होती तो उन्हें पता होता कि रावण ने कुम्भकर्ण से कहा – “अजहूँ तात त्यागि अभिमाना। भजहु राम होइहि कल्याना॥” अर्थात – अभी भी अभिमान का त्याग कर के श्रीराम का भजन करो, कल्याण होगा। लेकिन, राहुल गाँधी कुछ ऐसा कह दिया जो न तो वाल्मीकि रामायण में है और न ही तुलसीदास की रामचरितमानस में है। इस प्रसंग से साफ़ है कि राहुल गाँधी की रीलॉन्चिंग फिर फेल हुई।
रावण ने भले ही कुम्भकर्ण की नहीं सुनी, लेकिन राहुल गाँधी को ज़रूर सुननी चाहिए। राहुल गाँधी के आसपास ज़रूर ऐसे लोगों का जमावड़ा है, जो चाटुकारिता के कारण उन्हें सच्चाई नहीं बताते, धन के लालच में रहते हैं, जिन्हें चीजों का ज्ञान नहीं है और गलत सलाह देते हैं। राहुल गाँधी को इनसे दूर रहना चाहिए, क्योंकि कुम्भकर्ण यही बता गया है। रावण से भले ही न सुनी, राहुल गाँधी ज़रूर सुनें कुम्भकर्ण की और अपने आसपास से ऐसे लोगों को हटाएँ।
चुनाव हारने के बाद कॉन्ग्रेस अक्सर ‘नैतिक जीत’ की बात करती है। इसी तरह का दावा एक बार फिर उसने ‘सोशल मीडिया जीत’ को लेकर करना शुरू कर दिया है। रविवार यानी 13 अगस्त 2023 को पार्टी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर कुछ नंबर पोस्ट कर दावा किया गया कि अविश्वास प्रस्ताव के दौरान लोकसभा में राहुल गाँधी के भाषण देखने वालों की संख्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण देखने वालों से कहीं ज्यादा थी।
इस दावे के लिए कॉन्ग्रेस ने 4 अलग-अलग प्लेटफार्म- संसद टीवी, यूट्यूब, एक्स (ट्विटर) और फेसबुक के नंबर दिए। कॉन्ग्रेस ने दावा किया कि चारों प्लेटफॉर्म पर राहुल गाँधी के भाषण को देखने वालों की संख्या क्रमश: 3.5 लाख, 26 लाख, 23 हजार और 73 लाख थी, जबकि नरेंद्र मोदी के भाषण देखने वालों की संख्या क्रमश: 2.3 लाख, 6.50 लाख, 22 हजार और 11 हजार थी।
हालाँकि, ये नंबर पूरी तरह से फर्जी हैं और इनमें से कुछ नंबरों का कोई अर्थ भी नहीं है। कॉन्ग्रेस ने संसद टीवी और यूट्यूब का अलग-अलग उल्लेख किया है, लेकिन तथ्य यह है कि संसद टीवी अपने यूट्यूब चैनल का उपयोग केवल कार्यवाही का लाइव स्ट्रीम करने के लिए करता है। संसद टीवी की वेबसाइट सिर्फ लाइव स्ट्रीम सहित अपने चैनल से YouTube वीडियो को एम्बेड करती है।
संसद टीवी के यूट्यूब चैनल पर राहुल गाँधी के भाषण को 3.55 लाख बार देखा गया, जबकि पीएम नरेंद्र मोदी के भाषण को 2.66 लाख बार देखा गया। गौरतलब है कि राहुल गाँधी ने 9 अगस्त 2023 को लोकसभा को संबोधित किया था, जबकि पीएम का भाषण ध्वनि मत से अविश्वास प्रस्ताव गिरने से पहले 10 अगस्त की शाम को प्रसारित था। यूट्यूब पर राहुल गाँधी का भाषण ज्यादा देर तक रहा। ऐसे में उसे ज्यादा देखा जाना स्वाभाविक है।
भाषणों के वीडियो दोनों राजनेताओं के संबंधित यूट्यूब चैनलों पर भी हैं और ये कॉन्ग्रेस द्वारा उल्लेखित संख्या से मेल नहीं खाते। राहुल गाँधी के यूट्यूब पेज पर उनके भाषण के लाइव-स्ट्रीम किए गए वीडियो को 6.70 लाख बार देखा गया है, जबकि पीएम नरेंद्र मोदी के पेज पर उनके भाषण के लाइव-स्ट्रीम किए गए वीडियो को 18 लाख से अधिक बार देखा गया है।
इसलिए, राहुल गाँधी के संबंधित यूट्यूब चैनल पर उनके भाषण की लाइव स्ट्रीम के व्यूज की तुलना करने पर नरेंद्र मोदी के भाषण के व्यूज कहीं अधिक हैं, यानी राहुल गाँधी के भाषण के व्यूज से लगभग तीन गुना। कॉन्ग्रेस पार्टी यहाँ बिल्कुल फर्जी दावा कर रही है।
गौरतलब है कि लाइव स्ट्रीम के अलावा राहुल गाँधी के यूट्यूब चैनल ने बाद में अलग से वीडियो अपलोड किया और इसे 21 लाख बार देखा गया। वीडियो को कुछ संपादन करने के बाद अपलोड किया गया था और इसे लाइव स्ट्रीम की तुलना में बहुत अधिक दर्शक मिले। शायद इसलिए कि इसे खूब प्रचारित किया गया था।
राहुल गाँधी के यूट्यूब चैनल का स्क्रीनशॉट
सच्चाई ये है कि राहुल गाँधी के चैनल के इस नंबर की तुलना पीएम नरेंद्र मोदी के भाषण के व्यूज से नहीं की जा सकती, क्योंकि वह एक लाइव स्ट्रीम है। इधर, पीएम मोदी के चैनल ने वीडियो को अलग से अपलोड नहीं किया, जैसा कि राहुल गाँधी के चैनल ने किया है। दोनों की लाइव स्ट्रीम की तुलना करें तो पीएम मोदी के भाषण पर ज्यादा व्यूज हैं।
कॉन्ग्रेस ने ट्विटर पर राहुल गाँधी के लिए 23,000 व्यूज और नरेंद्र मोदी के लिए 22,000 व्यूज का दावा किया है, लेकिन ये नहीं बताया है कि ये नंबर किस अकाउंट से लिए गए हैं। अगर हम मान लें कि ये नंबर राहुल गाँधी और पीएम नरेंद्र मोदी के ट्विटर अकाउंट से हैं तो दावा किए गए नंबर बिल्कुल मेल नहीं खाते। राहुल गाँधी के भाषण की लाइव स्ट्रीम वाले ट्वीट को 14 लाख बार देखा गया है। साथ ही 13.5 लाख रीपोस्ट (रीट्वीट), 511 कोट, 37.7 लाख लाइक और 201 बुकमार्क हैं।
वहीं, पीएम मोदी के एक्स (ट्विटर) अकाउंट पर पोस्ट किए गए उनके भाषण को 25 लाख बार देखा गया, 16.3 हजार रीपोस्ट, 853 कोट, 51.7 हजार लाइक और 363 बुकमार्क हैं। स्पष्ट रूप से, ट्विटर पर नरेंद्र मोदी का भाषण देखने वालों की संख्या राहुल गाँधी के भाषण से अधिक है, भले ही पीएम का भाषण राहुल गाँधी के भाषण के एक दिन बाद आया था।
फेसबुक के लिए कॉन्ग्रेस ने दावा किया कि राहुल गाँधी के भाषण को 73 लाख बार देखा गया, जबकि नरेंद्र मोदी के भाषण को केवल 11,000 बार देखा गया। यह एक और सरासर गलत दावा है, क्योंकि नरेंद्र मोदी के आधिकारिक फेसबुक पेज पर उनके भाषण को 64 लाख बार देखा गया है। वहीं, राहुल गाँधी के फेसबुक पेज पर उनके भाषण को देखने वालों की संख्या करीब 80 लाख है।
इस तरह कॉन्ग्रेस द्वारा फेसबुक पर नरेंद्र मोदी के भाषण के व्यूज 11 हजार होने का दावा पूरी तरह से फर्जी है। इस तरह स्पष्ट है कि कॉन्ग्रेस ने ट्विटर और फेसबुक पर पीएम मोदी के भाषण को देखने वालों के लिए गलत आँकड़ों का इस्तेमाल किया है, क्योंकि वास्तविक संख्या उसके दावे से कहीं अधिक है। इसी तरह यूट्यूब के लिए निष्कर्ष पर पहुँचने के लिए गलत चैनलों की तुलना भी की।
व्यूज बनाम लोकप्रियता
फर्जी आँकड़ों का उपयोग करके कॉन्ग्रेस यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि ऑनलाइन स्ट्रीम के दर्शकों के बीच राहुल गाँधी पीएम मोदी से अधिक लोकप्रिय हैं। हालाँकि, सच ये है कि अविश्वास प्रस्ताव जैसे महत्वपूर्ण मौकों पर भाषणों को बड़ी संख्या में लोग देखते हैं और यह किसी भी तरह से लोकप्रियता का परिचायक नहीं है। भारतीय जैसे-जैसे राजनीतिक रूप से अधिक जागरूक हो रहे हैं, वे टीवी और इंटरनेट पर संसदीय कार्यवाही अधिक संख्या में देख रहे हैं।
यह भी तथ्य है कि राहुल गाँधी के भाषण को बड़ी संख्या में लोगों ने देखा, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे अधिक लोकप्रिय हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि भाजपा समर्थकों और दक्षिणपंथी सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं का एक बड़ा वर्ग राहुल गाँधी के भाषणों को उत्सुकता से देखता है। वे ऐसा राहुल गाँधी के दावों और आरोपों का प्रतिकार करने, तथ्यों की जाँच करने या उनकी गलतियों को पकड़ने के लिए करते हैं, ताकि उनका मजाक उड़ा सकें।
लोकसभा में अपनी बहाली के बाद राहुल गाँधी का यह पहला भाषण था। इसलिए उनके भाषण में लोगों की उत्सुकता अधिक थी। दूसरी ओर, वामपंथी अपनी अलग दुनिया में रहने में विश्वास करते हैं। इसलिए इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि उनमें से अधिकांश लोगों ने पीएम मोदी का भाषण नहीं देखा होगा। फिर भी, पीएम मोदी की सोशल मीडिया पहुँच राहुल गाँधी की तुलना में बहुत अधिक है।
भले ही संसद में राहुल गाँधी के भाषण को पीएम मोदी के भाषण से ज्यादा ऑनलाइन देखा गया हो, लेकिन तथ्य यह है कि कॉन्ग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव गिर गया था। प्रधानमंत्री के भाषण के दौरान विपक्षी सांसद वॉकआउट कर गए थे, क्योंकि वे जानते थे कि प्रस्ताव को मतदान के लिए रखने का मतलब नए नामित I.N.D.I.A. गठबंधन के लिए शर्मिंदगी होगी।
हालाँकि, हमेशा की तरह इस बार भी कॉन्ग्रेस पार्टी को हार में भी जीत नजर आ रही है। इस बार नैतिक जीत नहीं तो सोशल मीडिया की जीत है, भले ही वह झूठे आँकड़ों का इस्तेमाल करके दिखाया गया हो।
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में दलित समुदाय की एक नाबालिग लड़की से गैंगरेप के बाद हत्या की खबर है। इस मामले में पीड़ित परिवार ने 5 लोगों को नामजद किया है। इनके नाम शादाब, फारुख, शफी रज़ा, लतीफ़ और लकी मियाँ हैं। शिकायत में पीड़िता का बंदूक के बल पर अपहरण का भी आरोप लगाया गया है। पुलिस ने आरोपित को हिरासत में ले लिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट की प्रतीक्षा की जा रही है। हिन्दू संगठनों ने इस मामले में प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की माँग की है। घटना शनिवार (12 अगस्त 2023) की है।
घटना सीतापुर जिले के थानाक्षेत्र पिसवाँ की है। इस मामले में पीड़ित परिवार की तरफ से दी गई शिकायत में घटना को 12 अगस्त की बताया गया है। मेहनत-मजदूरी कर के परिवार चला रहे मृतका के पिता ने बताया कि रात लगभग 11:30 पर उनकी 12 वर्षीया बेटी बाथरूम करने घर से बाहर निकली थी। इस दौरान शादाब और फारुख ने लड़की को दबोच लिया। वहीं मौजूद शफी रज़ा पर आरोप है कि उसने पीड़िता पर बंदूक तान दी और शोर मचाने पर जान से मार डालने की धमकी दी।
दावा किया गया है कि इस घटना को पड़ोस में रहने वाली एक महिला ने देख लिया जिसके माध्यम से थोड़ी देर में लड़की के अपहरण की जानकारी पीड़ित परिवार तक पहुँची। इस जानकारी पर लड़की के परिजन कुछ अन्य लोगों के साथ खोजबीन में निकले। रात लगभग 2 बजे मृतका की लाश एक पेड़ से लटकी मिली। नीचे खून भी गिरा पाया गया। लड़की के पिता ने फ़ौरन ही पुलिस को फोन किया। बताया गया है कि पुलिस ने लड़की का शव अपने कब्ज़े में लिया और चली गई।
पीड़ित का आरोप है कि पुलिस के जाते ही आरोपित उनके पास आए और धमकी देने लगे। मृतका के पिता के मुताबिक आरोपितों ने उनसे कहा,”साले च**र हो हमारा क्या कर लोगे? तुम्हारी लड़की व बहन को मारा एवं रेप किया। इसी तरह तुम्हारी पत्नी का रेप करेंगे और पत्नी व बेटे को जान से मार डालेंगे।” मृतका के पिता ने सभी आरोपितों को जिला पंचायत लकी मियाँ के गुर्गे बताया है। इसी के साथ शिकायत में पीड़ित ने अपने परिवार को डरा-सहमा लिखा है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।
ऑपइंडिया से बात करते हुए स्थानीय पत्रकार अभिमन्यु सिंह ने इस मामले की ग्राउंड रिपोर्ट का दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले पुलिस ने इस मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की लेकिन बाद में हिन्दू संगठनों द्वारा मामले का संज्ञान लिए जाने के बाद अब पीड़ित परिवार को इंसाफ की उम्मीद जगी है। अभिमन्यु सिंह ने ऑपइंडिया को एक वीडियो भी भेजा जिसमें लड़की का पिता खुद को अनपढ़ बताते हुए पुलिस पर अपनी मर्जी से कुछ लिखवा कर अंगूठा लगवाने देने का आरोप लगा रहे हैं।
थाना पिसावां पुलिस द्वारा विधिक कार्यवाही की जा रही है, आरोपी युवक पुलिस हिरासत में है। पीएम रिपोर्ट के आधार पर कार्यवाही की जायेगी।
एक अन्य वीडियो में मृतका के बाबा ने भी कहा, “मेरी पोती मार डाली गई। वो लोग कह रहे हैं कि जब हम छूट कर आएँगे तो तुम्हे जरूर मार डालेंगे।” इस मामले में सीतापुर पुलिस को मृतका के पोस्टमार्टम रिपोर्ट की प्रतीक्षा है। पुलिस ने आरोपित को हिरासत में ले लिया है। साथ ही बताया गया है कि आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। पुलिस ने इस मामले में IPC की धारा 376- D, 302, 504, 506 के साथ पॉक्सो और SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की है।
ऑपइंडिया से बात करते हुए सीतापुर जिले के महंत बजरंग मुनि ने बताया कि शुरुआती हीलाहवाली के बाद अब पुलिस आरोपितों पर कार्रवाई का भरोसा दे रही है। सीतापुर के एडिशनल एसपी ने इस संबंध में बयान देते हुए कहा कि क़ुतुब नगर चौकी में आकर आज इस संबंध में लोगों ने मुकदमा दर्ज करने की अपील की। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में फाँसी से मौत की वजह सामने आई है, वहीं पुलिस का कहना है कि रेप की पुष्टि नहीं हुई है।
देश भर में स्वतंत्रता दिवस के उत्सव का आगाज हो चुका है। इस बार मोदी सरकार आजादी के जश्न को जन-जन तक पहुँचाने के लिए ‘मेरी माटी, मेरा देश’ नाम से हर घर तिरंगा उत्सव मनाने को बढ़ावा दे रही है। इसी कड़ी में शनिवार (12 अगस्त, 2023) को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हजारों लोगों ने ‘मेरी माटी, मेरा देश’ तिरंगा रैली में भाग लिया। जिसका आयोजन पुलवामा के सरकारी महिला डिग्री कॉलेज में हुआ। यह उत्सव प्रगतिशील भारत के 77 गौरवशाली वर्षों के समृद्ध इतिहास को समेटे हुए था।
#WATCH | Jammu & Kashmir: People in large numbers participated in the 'Meri Maati, Mera Desh' Tiranga Rally carried out in Pulwama.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, महिला कॉलेज से निकाली गई विशाल तिरंगा रैली के दौरान देशभक्ति और राष्ट्रवाद का जोश देखने को मिला। इस रैली में बड़ी संख्या में युवाओं, स्कूली बच्चों, कॉलेज के छात्रों और विभिन्न कार्यालयों के कर्मचारियों, नागरिक समाज के सदस्यों, जन प्रतिनिधियों और आम जनता ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। वहीं इस अवसर पर पुलवामा के उपायुक्त डॉ. बशारत कयूम ने समारोह की अध्यक्षता की। उन्होंने अपने उद्बोधन में बलिदानियों और राष्ट्रीय नायकों के बलिदान को याद किया। इस आयोजन के दौरान हजारों प्रतिभागी जब हाथों में तिरंगा लिए राष्ट्रगान के लिए खड़े हुए, तो उसकी गूँज बहुत दूर तक सुनाई दी।
वहीं समारोह के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, पुलवामा के उपायुक्त डॉ. बशारत कयूम ने कहा कि इस तरह के आयोजन पुलवामा के लोगों की राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। इस भव्य और विशाल आयोजन के लिए उपायुक्त ने पुलवामा के लोगों को बधाई दी और कहा कि ऐसी ऐतिहासिक भागीदारी और सामूहिक सहयोग से आयोजित समारोह प्रेरणादायक और अविस्मरणीय है।
जम्मू-कश्मीर के कई जिलों में निकाली गई विशाल तिरंगा रैली
इससे पहले शुक्रवार (10 अगस्त, 2023) को, ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ के एक भाग के रूप में, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कश्मीर भर के विभिन्न पुलिस प्रतिष्ठानों में एक राष्ट्रव्यापी अभियान “मेरी माटी मेरा देश-मिट्टी को नमन वीरों का वंदन” के तहत भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए।
जम्मू कश्मीर के कई जिलों में आयोजित इस समारोह में देशभक्ति से ओतप्रोत कई गतिविधियाँ हुईं। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने जिला प्रशासन के सहयोग से अवंतीपोरा में एक विशाल तिरंगा रैली का आयोजन किया, जो पुलिस लाइन्स अवंतीपोरा से शुरू होकर आईयूएसटी अवंतीपोरा में समाप्त हुई। इस आयोजन में भी बहुत बड़ी संख्या में कश्मीरियों ने भाग लिया।
वहीं बारामूला में भी पुलिस ने जिले भर के सभी पुलिस प्रतिष्ठानों में तिरंगा रैली का आयोजन किया, जिसमें जिले के एसडीपीओ, एसएचओ, आईसी पीपी और पुलिस कर्मियों ने भाग लिया। उनके साथ ही सीआरपीएफ, बीएसएफ, एसएसबी और स्कूली बच्चों ने भी रैली में प्रतिभाग किया। बता दें कि यहाँ मुख्य समारोह डीपीएल बारामूला में आयोजित किया गया था।
पाकिस्तान के ग्वादर में बड़े विद्रोही हमले की खबर है। बताया जा रहा है कि ये हमला चीन के नागरिकों को निशाना बना कर किया गया है। रविवार (13 अगस्त, 2023) को हुए इस हमले की जिम्मेदारी बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने ली है। हालाँकि पाकिस्तान ने सभी चीनी नागरिकों के सुरक्षित होने का दावा किया है लेकिन BLA का दावा इस से उलट है। मौके पर पहुँचे सुरक्षा बलों के साथ हमलावरों की मुठभेड़ जारी है जिसमें दोनों तरफ से मौतें हुईं हैं।
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना पाकिस्तान के दक्षिण पश्चिमी ग्वादर पोर्ट के पास की है। इस जगह को पाकिस्तान-चीन आर्थिक कॉरिडोर का केंद्र माना जाता है। घटना के समय चीन के नागरिकों को ले जा रहे एक वाहन पर फ़कीर कालोनी के पास हमला हुआ। इस हमले में काफिले पर गोलियों की बौछार हुई। चीनी नागरिकों के साथ चल रहे काफिले के सुरक्षा बलों ने फ़ौरन मोर्चा संभाला। पाकिस्तानी अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने सभी चीनी नागरिकों को सुरक्षित घटनास्थल से निकाल लिया। साथ ही 1 पाकिस्तानी सैनिक और 2 विद्रोहियों की मौत का भी आधिकारिक दावा किया गया है।
हमले के शिकार चीनी नागरिक कॉरिडोर में काम करने वाले इंजिनियर बताए जा रहे हैं। वहीं घटना की जिम्मेदारी लेने वाले बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) का दावा इस से उलट है। BLA ने इस हमले में कुल 13 मौतों का दावा किया है। इसमें 4 चीनी नागरिक और 9 पाकिस्तानी सैनिक हैं। मजीद ब्रिगेड नाम के समूह से जुड़े हमलावर विद्रोहियों में अब तक नवीद बलोच उर्फ़ असलम और मकबूल बलोच के नाम सामने आए हैं। बलोच विद्रोहियों ने इस हमले को अंजाम देने वाले 2 आत्मघाती हमलावरों की तस्वीरें भी जारी की हैं।
#Breaking: BLA claims it killed 13, including 4 Chinese nationals and 9 personnel of Pakistani military, in today’s attack in Gwadar. BLA says two of its Majeed Brigade “fidayeen” took part in the attack.#BLA#Balochistan#Pakistanpic.twitter.com/JaYcEFKK5Y
इस हमले का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में दोनों तरफ से गोलीबारी चल रही है। वहीं दावा किया जा रहा है कि हमलावरों ने स्वचलित हथियारों के साथ ग्रेनेड का इस्तेमाल किया है। फिलहाल हमले के बाद शहर को अलर्ट पर रखा गया है। घटनास्थल पर अतिरिक्त सुरक्षा बल भी भेजे जा रहे हैं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है।
हरियाणा में नूहं में हिंदुओं की ब्रिजमंडल जलाभिषेक पर हमले बाद के बाद रविवार (13 अगस्त 2023) को पलवल के पोंडरी में हिंदू पंचायत का आयोजन किया गया। इसमें जलाभिषेक यात्रा को फिर से शुरू करने की बात कही गई। वहीं, पंचायत में आए देव सेना के प्रमुख ने 20 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर महापंचायत का ऐलान किया।
इस दौरान हरियाणा गोरक्षा दल के नेता आजाद शास्त्री ने इस दौरान राज्य सरकार से 100 हथियारों के लाइसेंस की माँग की। शास्त्री ने कहा, “मेवात में 100 हथियारों के लाइसेंस दिए जाएँ। बंदूकों के नहीं, राइफलों के लाइसेंस मिलने चाहिए क्योंकि राइफल लंबी दूरी तक फायरिंग कर सकती हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “यह करो या मरो की स्थिति है। मैं युवाओं को कह रहा हूँ- खून को गरम रखना पड़ेगा। हमें एफआईआर से नहीं डरना चाहिए। मेरे खिलाफ भी एफआईआर हैं, लेकिन हमें डरना नहीं चाहिए। इस देश का विभाजन हिंदू और मुसलमानों के आधार पर हुआ था। गाँधीजी के कारण ही ये मुसलमान मेवात में रुके रहे।”
गोरक्षा दल के नेता शास्त्री ने फिरोजपुर झिरका विधानसभा क्षेत्र के विधायक मामन खान के खिलाफ FIR दर्ज करके उन्हें गिरफ्तार करने की भी माँग की। उन्होंने कहा कि नूहं में दंगे के लिए विधायक मामन जिम्मेदार हैं। इसके साथ ही उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को भी बदलने की माँग की।
महापंचायत को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए। पलवल जाने वाली सभी सड़कों पर पुलिस ने नाकेबंदी की। अर्धसैनिक बल और पुलिस के जवानों ने नूहं शहर तथा कस्बों में सुबह सात बजे फ्लैग मार्च निकाला। इसके साथ ही हिंसा के दौरान चर्चा में आए नल्हड़ महादेव मंदिर जाने वाली सड़क पर भी सुरक्षा बढ़ाई गई।
महापंचायत में सोनीपत, पलवल, फरीदाबाद, गुरुग्राम और नूहं जिले के लोग पहुँचे हैं। विश्व हिंदू परिषद के नेताओं के अलावा, महापंचायत में बजरंग दल के प्रदेश संयोजक भारत भूषण, सोहना के विधायक संजय सिंह, पलवल से पूर्व विधायक सुभाष चौधरी समेत कई नेता पहुँचेे। पुलिस इस पूरी बैठक की वीडियो रिकॉर्डिंग कर रही है।
बताते चलें कि हिंदू संगठनों ने पहले यह महापंचायत हथीन से सटे नूहं के किरा गाँव में आयोजित करने की तैयारी की थी। हालाँकि, नूहं जिला प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी। इसके बाद हथीन खंड के पोंडरी गाँव में इसे करने का फैसला लिया गया।
जिला प्रशासन ने कुछ शर्तों के साथ ही इस सभा के आयोजन की इजाजत दे दी है। शर्त में कहा गया था कि महापंचायत में 500 से ज्यादा लोगों नहीं आएँगे। इसके अलावा, महापंचायत सिर्फ 2 बजे तक होगी और किसी भी तरह के भड़काऊ भाषण की अनुमति नहीं होगी। पलवल के एसपी लोकेंद्र सिंह ने कहा कि शर्तों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई होगी।
दरअसल, शुक्रवार यानी 11 अगस्त 2023 को विश्व हिंदू परिषद के विभाग मंत्री देवेंदर सिंह ने बताया था कि हिंदू संगठनों ने 28 अगस्त 2023 को यात्रा पूरी करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि यात्रा शांति और उत्साह के साथ पूरी होगी। बता दें कि 31 जुलाई को नूहं में हिंसा के बाद यात्रा अधूरी रह गई थी।
वहीं, महापंचायत में आए देव सेना फरीदाबाद के अध्यक्ष ब्रजभूषण सैनी ने कहा कि 20 अगस्त 2023 को दिल्ली जंतर-मंतर पर महापंचायत होगा। पलवल में हुई महापंचायत का हरियाणा के कुछ संगठनों ने बहिष्कार भी किया। डागर, रावत, सहरावत, तेवतिया खाप ने इसका पूर्ण बहिष्कार किया है। इसकी पुष्टि डागर पाल के प्रधान चौधरी धर्मबीर डागर ने की है।
अनएकेडमी (Unacademy) का एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर वायरल हो रहा है। इसमें एक टीचर पढ़ाते हुए अचानक छात्रों के सामने अपना पूर्वाग्रह या कहें कि किसी पार्टी विशेष से नफरत जाहिर करने लगता है। वायरल वीडियो में वह झल्लाया हुआ नजर आ रहा है। वहीं सोशल मीडिया पर ही कुछ लोगों ने उस टीचर की पहचान बताते हुए उसे करण सांगवान बताया है। जो लॉ टीचर है।
वायरल वीडियो में करण सांगवान कह रहा है, “मुझे भी ऐसा ही लग रहा था कि मैं हँसू या रोऊँ, क्योंकि मेरे पास भी बहुत सारे केस नोट्स हैं, बहुत सारे नोट हमने भी बनाए थे। हर किसी के लिए बहुत मेहनत है कि आप लोगों को भी काम मिल गया। लेकिन, एक चीज याद रखना अगली बार जब भी अपना वोट दो तो किसी पढ़े-लिखे इंसान को अपना वोट देना ताकि ये सब दोबारा जीवन में ना झेलना पड़े। ठीक है चलो, नेक्स्ट टाइम ध्यान रखिएगा। ऐसे इंसान को चुनें जो पढ़ा लिखा हो। जो समझ सके चीजों को, ऐसे इंसान को न चुने जिन्हें सिर्फ बदलना आता हो, नाम चेंज करना आता हो। तो मेक योर डिसीजन प्रॉपर्ली।”
वीडियो में जो कहा गया है उसको लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर संग्राम छिड़ गया है। जहाँ अधिकांश लोग इसे ‘Unacademy’ पर पढ़ाई की जगह कॉन्ग्रेस का प्रोपेगेंडा परोसना बता रहे हैं वहीं कुछ ने एजुकेशन की जगह Unacademy को कॉन्ग्रेस आईटी सेल का अड्डा बताते हुए जवाब माँगा है। इसे सीधा-सीधा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध में पढ़ाने के दौरान वोटिंग अपील के रूप में देखा जा रहा है।
सोशल मीडिया हैंडल ‘THE INTREPID’ ने Unacademy से सवाल पूछते हुए लिखा है, “टीचिंग या प्रोपेगेंडा”? साथ ही अपने पोस्ट में उन्होंने बताया है, “Unacademy का लॉ टीचर ‘करण सांगवान’ अपने छात्रों से वर्तमान सरकार (बीजेपी) को दोबारा वोट न देने की अपील कर रहा है। कानूनों में सुधारों का स्वागत करने के बजाय, ऐसे शिक्षक शिक्षा की आड़ में अपनी व्यक्तिगत विचारधारा को बढ़ावा देने का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं। इस पर कोई स्पष्टीकरण अनएकेडेमी?
"Teaching Or Propaganda" ?
Unacademy Law Teacher 'Karan Sangwan' is urging his students to never vote for the current government (BJP) again.
Instead of welcoming reforms in laws, such teachers never leave a chance to peddle their personal ideology in the garb of education.… pic.twitter.com/879EBjsSkq
‘X’ हैंडल मनीष सिंह ने लिखा, “Unacademy का मोदी विरोधी एजेंडा, शिक्षा के नाम पर परोसी जा रही मोदी जी से नफरत। आपको PM मोदी जी पसंद नहीं हैं तो उनका विरोध करें लेकिन शिक्षा की आड़ में अपना एजेंडा लागू नहीं कर सकते।”
Unacademy का मोदी विरोधी एजेंडा… शिक्षा के नाम पर परोसी जा रही मोदी जी से नफरत ।
आपको PM मोदी जी पसंद नहीं हैं तो उनका विरोध करें लेकिन शिक्षा की आड़ में अपना एजेंडा लागू नहीं कर सकते। pic.twitter.com/4TbJwXSqzb
‘X’ हैंडल बाला ने पोस्ट किया, “अनएकेडेमी का यह टीचर फ़्रस्टेट हो चुका है क्योंकि उसे वह काम करना है जिसके लिए उसे भुगतान मिल रहा है। इसलिए वह लोगों से अपील कर रहा है कि नए बदलाव लाने वाली सरकार यानी बीजेपी को वोट न दें। जबकि आपकी संपूर्ण तनख्वाह शिक्षण पर निर्भर करती है और आपको नोट्स बनाने में कोई समस्या है? वे अच्छे पुराने दिन याद आ रहे हैं जब शिक्षक का काम अपने विद्यार्थियों को पढ़ाना होता था, न कि प्रोपेगेंडा में लिप्त रहना।”
This teacher from @unacademy is frustrated because he has to do the job he is getting paid for. Therefore, he is asking people not to vote for the government that brings new changes i.e. BJP
Your entite paycheck depends on teaching and you have a problem with making notes? ?… pic.twitter.com/WMQT6EaOXD
वहीं इस पूरे मामले पर अंकुर सिंह नामक यूजर ने लिखा है, “अनएकेडेमी कोचिंग प्लेटफॉर्म चला रहा है या कॉन्ग्रेस का आईटी सेल? इसके शिक्षक करण सांगवान एक कॉन्ग्रेस वर्कर है, जो कक्षा के दौरान भी कॉन्ग्रेस का प्रोपेगेंडा चला रहा है। सबसे बुरी बात यह है कि नई भारतीय न्याय संहिता के कारण कानून का पाठ्यक्रम बदल जाएगा। क्या सरकार को अनएकेडेमी के आधार पर फैसले लेने चाहिए?”
Is @unacademy running coaching platform or Congress IT Cell?
Its teacher @kRnSangwan is Congress worker running propaganda during classes
हालाँकि, यह पहला मामला नहीं जब Unacademy अपने प्लेटफॉर्म से इस तरह का प्रोपेगेंडा फैला रहा है। इससे पहले भी ऐसे कई वीडियो वायरल हुए हैं जिसमें Unacademy के टीचर खुलेआम कभी हिन्दू धर्म का विरोध तो कभी शिक्षण के नाम पर राजनीतिक प्रोपेगेंडा परोसते हुए PM मोदी या बीजेपी के खिलाफ जहर उगलते नजर आए।
बिहार के 2 अलग-अलग जिलों से हत्या के 3 मामले सामने आए हैं। पटना में मेदांता की नर्स को चाकुओं से गोद डाला गया है। पुलिस इसे पति द्वारा की गई हत्या बता रही है। वहीं बेगूसराय में उप-मुखिया की गोली मार कर हत्या कर दी गई है। इस मामले में पुलिस ने 7 आरोपितों की पहचान करते हुए 1 को हिरासत में लिया है। दोनों ही घटनाएँ शनिवार (12 अगस्त, 2023) की हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहला मामला बिहार की राजधानी पटना का है। यहाँ सोनी नाम की शादीशुदा महिला मेदांता अस्पताल में नर्स थी। शनिवार को शाम लगभग 3 बजे वह अस्पताल से अपने घर लौट रही थी। तभी कंकड़बाग थाना क्षेत्र में एक युवक पर उन पर चाकुओं से हमला कर दिया। आस-पास मौजूद किसी भी व्यक्ति ने सोनी की मदद का प्रयास नहीं किया। कई चाकू घोंपने के बाद हमलावर आराम से घटनास्थल से चला गया।
सड़क पर गिरी सोनी को उधर से गुजर रही एक महिला अधिकारी ने अस्पताल पहुँचाया। हालाँकि तब तक सोनी ने दम तोड़ दिया था। पुलिस ने प्रथम दृष्टया घटना को पारिवारिक विवाद माना है। हत्या का संदिग्ध सोनी का पति बताया जा रहा है। फिलहाल आरोपित फरार चल रहा है। पुलिस उसकी तलाश में दबिश दे रही है।
बेगूसराय में उपमुखिया की हत्या
वहीं एक अन्य घटनाक्रम में बेगूसराय जिले में एक उप-मुखिया की गोली मार कर हत्या कर दी गई है। मृतक का नाम अजय पासवान है। वह बछवाडी क्षेत्र के रुदौली पंचायत अंतर्गत गाँव भरौली के उपमुखिया थे। घटना के समय अजय पासवान रात का खाना खा कर घर के बाहर खड़े थे। तभी वहाँ पहुँचे कुछ अज्ञात हमलावरों ने अजय पर गोलियाँ बरसा दीं। गोली अजय के सिर में लगी और वो जमीन पर गिर पड़े। मची अफरातफरी के बीच हमलावर मौके से फरार हो गए। अजय को एक स्थानीय अस्पताल में भर्ती करवाया गया लेकिन वहाँ उन्होंने दम तोड़ दिया।
घटना की सूचना के बाद मौके पर पहुँची पुलिस ने केस दर्ज कर के आरोपितों की तलाश शुरू कर दी। दावा किया जा रहा है कि अब तक 7 आरोपित चिन्हित किए गए हैं जिसमें से 1 को हिरासत में भी लिया गया है। पकड़े गए आरोपित से पूछताछ की जा रही है जबकि अन्य हमलावरों की तलाश जारी है। मुख्य आरोपित का नाम मंजीत कुमार है जो मृतक के गाँव का ही है। मंजीत पर पहले से हत्या के मामले दर्ज हैं। कत्ल की वजह मंजीत और अजय में पुरानी रंजिश बताई जा रही है।
इससे पहले बेगूसराय में प्रॉपर्टी डीलर की हत्या कर दी गई थी। FCI ओपी क्षेत्र में होटल रॉयल पैलेस के बाद प्रॉपर्टी डीलर अशोक कुमार को गोलियों से भून डाला गया था। बलिया के सदानंदपुर गाँव निवासी अशोक को 7 गोलियाँ मारी गई थीं।
केरल की सरकार ने केंद्र सरकार द्वारा NCERT के पाठ्यक्रमों से हटाए गए कई चैप्टरों को अपने बोर्ड की पाठ्यपुस्तकों में शामिल करने का निर्णय लिया है। इनमें गुजरात दंगे, गोडसे द्वारा महात्मा गाँधी की हत्या और जवाहरलाल नेहरू के काल का भारत जैसे चैप्टर शामिल हैं। कक्षा 11 और 12 की ये किताबें सप्लीमेंट्री होंगी। इन्हें स्कूलों में बाँटा जाएगा।
राज्य के शिक्षा मंत्री वी शिवनकुट्टी ने शनिवार (12 अगस्त 2023) को इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा, “करिकुलम समिति ने केंद्र सरकार द्वारा स्कूली पाठ्यक्रम से हटाए गए प्रमुख चैप्टरों पर चर्चा की थी और इसकी विस्तार से जाँच करने के लिए एक उप-समिति का गठन किया था।”
उन्होंने आगे कहा, “इस समिति ने केरल में सामान्य शिक्षा विभाग के तहत स्कूलों में इन सभी अध्यायों को पढ़ाने की सिफारिश की है। इन चैप्टरों वाली पाठ्यपुस्तकें तैयार की जा रही हैं। ओणम की छुट्टियों के बाद छात्रों को संशोधित पाठ्यपुस्तकें मिलने लगेंगी। परीक्षाओं के लिए भी संशोधित पाठ्यक्रम का पालन किया जाएगा।”
शिवनकुट्टी ने कहा कि स्कूलों में नई पाठ्यपुस्तकें वितरित की जाएँगी। यह आवश्यक है कि छात्र अपने इतिहास, अर्थशास्त्र और विज्ञान को सही परिप्रेक्ष्य में सीखें। उन्होंने कहा कि केंद्र ने ऐसी सभी सामग्री हटा दी थी और पिनाराई विजयन सरकार ने पहले वादा किया था कि छात्रों को देश की वास्तविक भावना के बारे में पढ़ाया जाएगा।
इससे पहले, केरल राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT) ने उन हिस्सों को पढ़ाने का फैसला किया था, जिन्हें एनसीईआरटी ने कक्षा 11 और 12 की पाठ्यपुस्तकों से हटा दिया था। पूरक पाठ्यपुस्तकों को लाने का निर्णय एससीईआरटी पाठ्यक्रम समिति द्वारा लिया गया था।
केरल की CPI (M) सरकार पाठ्यक्रम को तर्कसंगत बनाने की प्रक्रिया के तहत पाठ्यपुस्तकों से कुछ हिस्सों को हटाने के एनसीईआरटी के फैसले की लगातार आलोचना कर रही थी। वहीं, एनसीईआरटी ने कक्षा 6 से 12 तक के पाठ्यक्रम को तर्कसंगत बनाया था। केरल सिर्फ कक्षा 11 और 12 के लिए एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों पर निर्भर है। अन्य कक्षाओं के लिए एनसीईआरटी पाठ्यक्रम बनाती है।