Wednesday, July 17, 2024
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खंडित मूर्तियाँ, नरसिंह की तस्वीर, फूल: सर्वे में कई हिंदू प्रतीकों एवं देवनागरी लिपी मिलने का दावा, ज्ञानवापी के मस्जिद के इमाम ने किया इनकार

हिंदू पक्ष की मुख्य वादिनी राखी सिंह और उनके अधिवक्ता अनुपम द्विवेदी ने बताया कि एएसआई की टीम ने शनिवार को ज्ञानवापी की मौजूदा इमारत की थ्री-डी इमेजिंग की। इमारत की थ्री-डी इमेजिंग के लिए ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (जीएनएसएस) की मदद ली गई।

वाराणसी के ज्ञावापी ढाँचे का सर्व रविवार (6 जुलाई 2023) को भी जारी है। हिंदू पक्ष ने अब तक हुए सर्वे को लेकर दावा किया है कि परिसर में खंडित मूर्तियाँ, टूटे हुए पिलर, खंडित कलाकृतियाँ, त्रिशूल के कई चिह्न और कलश आदि मिले हैं। हालाँकि, एक इमाम ने इस दावे को नकार दिया है।

सर्वे को लेकर सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें वायरल हो रही हैं। यह भी दावा किया जा रहा है कि परिसर में देवनागरी लिपि भी देखी गई है। इसमें क्या लिखा हुआ है, इसके बारे में लिपि विशेषज्ञों ही बता सकते हैं। इसके अलावा, आधे पशु और आधे मनुष्य का चिह्न मिला है, जिसे नरसिंह की मूर्ति बताई जा रही है।

हालाँकि, जाँच करने वाली एजेंसी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संस्थान (ASI) ने इन तस्वीरों की ना ही पुष्टि की है और ना ही खंडन किया है। वहीं, रविवार (6 जुलाई 2023) को ज्ञानवापी के तीनों गुंबदों के नीचे सर्वे का काम चल रहा है। तहखाने के साफ कराया जा रहा है। इस दौरान भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।

हिंदू पक्ष की वादी सीता साहू और उनके अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी ने दावा किया है कि ASI की वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित जाँच में यह स्पष्ट हो जाएगा कि ज्ञानवापी के मुख्य गुंबद के नीचे जमीन के भीतर शिवलिंग दबाया गया है। एएसआई की टीम इसमें आईआईटी कानपुर की मदद लेगी। इसके लिए ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (जीपीआर) तकनीक का सहारा लिया जाएगा।

हिंदू पक्ष की मुख्य वादिनी राखी सिंह और उनके अधिवक्ता अनुपम द्विवेदी ने बताया कि एएसआई की टीम ने शनिवार को ज्ञानवापी की मौजूदा इमारत की थ्री-डी इमेजिंग की। इमारत की थ्री-डी इमेजिंग के लिए ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (जीएनएसएस) की मदद ली गई।

इसके अलावा, ज्ञानवापी के आंतरिक हिस्से की मैपिंग और स्कैनिंग के साथ ही फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी का काम जारी रहा। जाँच में किसी भी तरह के केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया गया है और ना ही खुदाई की गई है। एएसआई की टीम ज्ञानवापी के बाहर और अंदर के एक-एक कोने को देखकर अध्ययन के लिए साक्ष्य जुटा रही है।

वहीं, ज्ञानवापी के मुख्य इमाम मुफ्ती अब्दुल बातिन नोमानी का कहना है कि जो तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, वे ज्ञानवापी की नहीं हैं। नोमानी ने कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद थी और मस्जिद ही रहेगी। उन्होंने कहा कि मुस्लिम वहाँ हर जुमे को नमाज पढ़ने जाते हैं। उन्होंने वहाँ ऐसे कोई निशान नहीं देखे हैं।

उन्होंने कहा, “अगर मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई भी जाएगी तो उसके निशान क्यों छोड़ देंगे। सब जाया कर देंगे। निशान क्यों बाकी रखेंगे।” उन्होंने कहा कि यह सब झूठ है और इसमें किसी तरह की सच्चाई नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके पूर्वजों ने कोई गलती नहीं की है। बता दें कि सीएम योगी ने ज्ञानवापी को लेकर कहा था कि मुस्लिमों को उनके पूर्वजों द्वारा की गई गलती को सुधारना चाहिए।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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