हरियाणा के नूहं में 31 जुलाई 2023 को हिंदुओं की ब्रिजमंडल जलाभिषेक यात्रा पर कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा किए गए हमले के बाद हरियाणा सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। राज्य सरकार ने गुरुवार (3 जुलाई 2023) की शाम को इलाके के लगभग 250 झुग्गियों पर बुलडोजर चलाए हैं। ये झुग्गियाँ रोहिंग्या घुसपैठियों के हैं। इस दौरान रैपिड ऐक्शन फोर्स को तैनात किया गया था।
इसके पहले, गुरुवार (3 जुलाई 2023) की रात को सरकार ने नूहं जिले के SP वरुण सिंघला का ट्रांसफर कर दिया। वह हिंसा के दिन छुट्टी पर थे। सिंघला को भिवानी जिले का चार्ज दिया गया है। उनकी जगह नरेंद्र बिजारणिया को नूहं का चार्ज दिया गया है। बिजारणिया भिवानी के SP थे।
हरियाणा सरकार ने तावड़ू में जहाँ बुलडोजर चलाकर झुग्गियों को हटाया है, वहाँ म्यांमार से अवैध रूप से आए हुए रोहिंग्या रह रहे थे। रोहिंग्याओं के 250 से अधिक परिवार पिछले 4 सालों से अधिक समय से हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की जमीन पर अवैध कब्जा कर रह रहे थे। ये यहाँ कूड़ा बिनने और कबाड़ बेचने का काम कर रहे थे।
इसके अलावा, इस इलाके के जिन किसानों की जमीन सरकार ने अधिग्रहित की है, वे भी इन रोहिंग्याओं को किराए पर दे रखे थे और इसके बदले में वे इनसे किराया वसूल कर रहे थे। ये लोग नूहं हिंसा में शामिल थे। पुलिस की FIR में दंगा फैलाने में कई रोहिंग्या युवकों के नाम दर्ज हैं। इनमें से कुछ को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया है।
अवैध रूप से बसाई गई इस बस्ती में म्यांमार और बांग्लादेश से आए घुसपैठिए अवैध रूप से रह रहे हैं। करीब 4 घंटे चली कार्रवाई में 200 से अधिक झुग्गियों को गिरा दिया गया। इस दौरान कुछ मुस्लिम महिलाओं ने विरोध करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस की सख्ती के बाद वे पीछे हट गईं।
कहा जा रहा है कि मेवात के कई इलाकों में ये घुसपैठिए अवैध रूप से रह रहे हैं। तावडू के अलावा नूहं, पुन्हाना, पिनगवां, नगीना और फिरोजपुर झिरका में भी ये घुसपैठिए सैकड़ों की संख्या में झोपड़ी बनाकर रह रहे। उनके उपर भी प्रशासन अब कार्रवाई करने की योजना बना रहा है।
इसके साथ ही, आज शुक्रवार होने के कारण नूहं के मुस्लिमों को जुमे की नमाज अपने घरों में पढ़ने के लिए कहा गया है। नूंह के कलेक्टर प्रशांत पंवार और पुलिस अधीक्षक ने उलेमाओं से कहा कि प्रशासन के इस निर्णय का वे सख्ती से पालन कराएँ। इसके साथ ही गुरुग्राम सहित अन्य इलाकों में जुमे की नमाज खुले में न पढ़ने के लिए कहा गया है।
इलाके में तनाव को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। हिंसा के चलते 4 जिलों- नूहं, पलवल, फरीदाबाद और गुरुग्राम में हालात तनावपूर्ण हुए हैं। जुमे को देखते हुए मस्जिदों के पास पुलिस बल तैनात किए गए हैं। इन चार जिलों में पैरामिलिट्री फोर्स की 20 कंपनियाँ तैनात की गई हैं।
इसके साथ ही राज्य के 9 जिलों में धारा 144 लागू किया गया है। नूहं, पलवल, फरीदाबाद और गुरुग्राम के सोहना, मानेसर और पटौदी में 5 अगस्त 2023 तक इंटरनेट और SMS सेवा बंद की गई है। हालाँकि, CET स्क्रीनिंग टेस्ट को देखते हुए गुरुवार को दोपहर 1 से 4 बजे तक बैन हटाया गया था।
बताते चलें कि नूहं में हुई हिंसा में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में होमगार्ड के गुरसेवक और नीरज शामिल हैं। इसके अलावा, नूहं के शक्ति सैनी, पानीपत के अभिषेक चौहान उर्फ अभिषेक राजपूत, गुरुग्राम के इमाम साद, बादशाहपुर के प्रदीप शर्मा और एक अन्य व्यक्ति शामिल हैं।
इस हिंसा को लेकर पूरे राज्य में पुलिस ने कुल 93 केस दर्ज किए हैं। इनमें अभी तक 186 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि पूछताछ के लिए 78 लोगों को हिरासत में लिया गया है। इनमें ज्यादातर की उम्र 19 से 25 साल के बीच है।
पुलिस द्वारा की जा रही पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि हिंसा के बाद कई आरोपित मेवात की पहाड़ियों में, राजस्थान के जयपुर और उदयपुर तथा उत्तर प्रदेश के मेरठ, आगरा और अलीगढ़ में जाकर छिप गए हैं। पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के लिए दबिश दे रही है।
हिंसा की जाँच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की 8 टीमें और स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) के 3 दल बनाए गए हैं। पुलिस जाँच में अब तक सामने आया है कि यह हिंसा सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई थी।
पुलिस ने सोशल मीडिया पर 2300 से अधिक वीडियो को चिन्हित किया है, जिनके जरिए अफवाह फैला फैलाया गया और हिंसा भड़काई गई। अब पुलिस इन वीडियो के आधार पर भी कार्रवाई करने में जुटी हुई है।
भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी विराट कोहली अपनी दोहरी नीति के लिए सोशल मीडिया यूजर्स के निशाने पर हैं। यह मामला क्रिकेट से जुड़ा न होकर वेस्टइंडीज से उनकी भारत वापसी का है। वापसी चार्टर्ड प्लेन से। कोहली निशाने पर हैं क्योंकि वो प्रदूषण को लेकर दिवाली पर ज्ञान देते हैं।
विराट कोहली ने गुरुवार (3 अगस्त, 2023) को इंस्टाग्राम पर भारत की अपनी वापसी यात्रा की तस्वीरें साझा कीं, जिसमें उनकी चार्टर्ड प्लेन से उड़ान की चर्चा है। पोस्ट में कहा गया है कि ग्लोबल एयर चार्टर सर्विसेज ने स्टार क्रिकेटर के लिए एक विशेष उड़ान की व्यवस्था की और उन्होंने विमान से कुछ तस्वीरें पोस्ट कीं। जिसके बाद से वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर मौजूद ट्विटर यूजर्स के निशाने पर आ गए।
इसकी वजह कोई और नहीं बल्कि विराट कोहली का दिवाली के शुभ अवसर पर पटाखे फोड़ने को लेकर दिया गया प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन सम्बन्धी ज्ञान है। जबकि खुद अकेले यात्रा करने के लिए जब वह चार्टर्ड फ्लाइट लेते हैं तो यह भूल जाते हैं कि उनके चार्टर्ड उड़ानों के कारण होने वाले कार्बन उत्सर्जन की खतरनाक मात्रा पर्यावरण के लिए कितनी हानिकारक है।
बता दें कि दिवाली पर कई दिग्गज सेलिब्रिटी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दीवाली की शुभकामनाएँ देते हैं। इसी कड़ी में कई जो आमतौर पर बकरीद पर जीव हत्या पर मौन रहते हैं लेकिन दिवाली आते ही उनके अंदर वैज्ञानिक से लेकर पर्यावरणविद तक सब जाग जाता है। विराट भी उन्हीं में से एक हैं, जो हिन्दुओं को किस तरह दिवाली का त्यौहार मनाना चाहिए, यह सलाह देते हुए नजर आए थे।
विराट कोहली ने पिछले साल दिवाली पर 18 सेकंड का एक वीडियो पोस्ट किया था। जिसमें उन्होंने कहा था, “मेरी तरफ से आपको और आपके परिवार को बहुत-बहुत शुभकामनाएँ। भगवान आपको इस दिवाली शांति, समृद्धि और खुशी प्रदान करें। कृपया याद रखें कि पटाखे न फोड़ें, पर्यावरण की रक्षा करें और इस शुभ अवसर पर एक साधारण दीए और मिठाई के साथ अपने प्रियजनों के साथ घर पर मस्ती करें। भगवान आप सबका भला करे। अपना ख्याल रखिएगा।”
अब जब वह खुद चार्टर फ्लाइट से यात्रा कर रहे हैं तो प्रदूषण और पर्यावरण का खयाल गायब है। इसको लेकर सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें आड़े हाथों लिया। नारायण हरिहरन नाम के यूजर्स ने लिखा, “कहाँ गया एयर पॉल्यूशन? अच्छा हाँ वह केवल दीपावली पर याद आता है।”
मून ज़ू नाम के यूजर्स ने पोस्ट किया, “वह और उसकी पत्नी अकेले ही कुछ गाँवों की तुलना में अधिक CO2 उत्सर्जन करते हैं, फिर भी त्योहार पर वह आम लोगों को ग्लोबल वार्मिंग पर मुफ्त ज्ञान देते हैं।”
He n his wife single handedly emits more CO2 emission than few villages put together then on festival he dish out free gyan on global warming to commoners.
विराट कोहली की दोमुँही सोच और कृत्य पर कई सोशल मीडिया यूजर्स ने लताड़ लगाई है। लोगों ने इंस्टाग्राम से लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी स्टार क्रिकेटर को उनके डबल स्टैण्डर्ड के लिए घेरा है। यहाँ आप कुछ और ट्वीट देख सकते हैं।
A chartered flight? Thought he’d avoid it as he’s so concerned about air pollution, double standards should be called out.
खेल की बात करें तो विराट कोहली ने वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट सीरीज में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने 500वें अंतरराष्ट्रीय मैच में शानदार शतक जमाया। वेस्टइंडीज सीरीज में कोहली एकदिवसीय श्रृंखला के केवल पहले मैच में ही खेले थे और अन्य वरिष्ठ खिलाड़ियों के साथ, उन्हें टी-20 मैचों के लिए आराम दिया गया है इसलिए वह भारत लौट आए। चार्टर्ड प्लेन से आने लेकिन दीवाली पर ज्ञान बखारने को लेकर अपनी दोहरे चरित्र वाली हरकतों के कारण वह निशाने पर हैं।
मेवात में लगी आग में कट्टरपंथी तत्व अब तक हाथ सेंक रहे हैं। 6 लोग मारे जा चुके हैं, दर्जनों लोग घायल हैं। 93 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। 176 गिरफ्तार हुए हैं। हजारों की संख्या में विस्थापन हुआ है। ये सबकुछ 31 जुलाई को हिंदू समाज की शोभायात्रा पर हुए हमले के बाद से हो रहा है। जिसमें स्थानीय मुसलमान तो शामिल थे ही, बाहर से विशेष तौर पर हमलावर भी आए हुए थे।
नूहं में ये सबकुछ इतने प्लान्ड तरीके से अंजाम दिया गया है कि हमलावर अब विक्टिम बन चुके हैं और विक्टिम बहुसंख्यकों को कोई पूछ ही नहीं रहा है। इस बीच, इंडिया टुडे की एसआईटी टीम ने अंडर कवर ऑपरेशन को अंजाम दिया और स्थानीय मुसलमानों से बातचीत की, जिसमें नूहं के सरपंच एसोसिएशन के मुखिया ने साफ तौर पर बताया कि हिंसा में शामिल लोग उनके भी गांव के हैं।
कैमरे पर लूट, दंगे की गवाही
इंडिया टुडे के मोहम्मद हिज्बुल्लाह की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में सरपंच एसोसिएशन के मुखिया रफीक ने कैमरे पर इस बात को स्वीकार किया है कि लूट में भी और हिंदुओं पर हमले में भी उनके गाँव के लोग शामिल हैं। उनकी उम्र 25 साल, 30 साल, 22 साल, 20 साल है। उसके बाद से वो सभी फरार हैं।
रफीक ने कहा कि 7 लोग इन सब कामों में शामिल हैं, उन्हें हम बचाएँगे नहीं, बल्कि पुलिस को सौंप देंगे। हालाँकि लोगों का नाम उन्होंने लिया नहीं है। आप इंडिया टुडे की रिपोर्ट में इसे खुद 7.00 मिनट के बाद देख सकते हैं।
वहीं, एक अन्य स्थानीय व्यक्ति और दंगों के आई विटनेस इरफान ने कहा कि स्थानीय लोगों के साथ तनाव हुआ ही था कि राजस्थान और हरियाणा के फिरोजपुर झिरका से आए हमलावरों ने पिकअप से यात्रा में चल रही गाड़ी में टक्कर मारी। कई गाड़ियाँ आई थी, और उनके ऐसा करने के बाद ही लड़ाई शुरू हो गई। उन्होंने बाकायदा टी-प्वॉइंट को इसके लिए चुना और हमलों को अंजाम दिया।
इस रिपोर्ट में ये भी दिखाया गया है कि अरावली की पहाड़ियाँ दंगाइयों के लिए किले की तरह काम कर रही है। वो वहाँ पर बैठकर पुलिस के मूवमेंट पर नजर रखे हुए हैं। पुलिस की गाड़ियों को देखते ही वो तितर-बितर हो जाते हैं। इस समय अरावली की पहाड़ियों पर 500 से ज्यादा लोग छिपे हैं। इसमें कुछ स्थानीय ग्रामीण भी हैं, जो पुलिस से छिपे हैं, तो बड़ी संख्या में दंगाई भी। अब ये पुलिस का काम है कि वो ‘मासूम लोगों’ की पहचान करे।
नूहं हिंसा पर इंडिया टुडे के संपादक राजदीप सरदेसाई ने कल एक स्पेशल शो किया। जिसमें नूहं में हुई हिंसा का पूरा ठीकरा वह इन्वेस्टीगेशन के नाम पर हिन्दुओं पर ही फोड़ते नजर आए। अपने शो में जहाँ FIR पढ़ते हुए अल्लाह-हू-अकबर पर वह लड़खड़ाते नजर आए वहीं दो-तीन चुनिंदा वीडियो के आधार पर इस हिंसा के लिए हिन्दू संगठनों को ही जिम्मेदार साबित करने में लगे रहे।
राजदीप सरदेसाई हरियाणा के मेवात के नूहं में 31 जुलाई 2023 को मुस्लिम भीड़ द्वारा जलाभिषेक यात्रा में शामिल हजारों हिंदुओं पर हमले पर लीपापोती करते हुए अपने इन्वेस्टिगेटिव शो में दो नैरेटिव के साथ आए। उनका पूरा जोर इस बात पर है कि बजरंग दल ने यात्रा निकाली, मुस्लिमों को उकसाया और मुस्लिम ग्रुप इसके जवाब में प्रतिक्रिया दे रहा था।
राजदीप सरदेसाई के अनुसार नूहं में हिंदुओं पर हमले को लेकर केवल दो सिद्धांत हैं: 1. बजरंग दल ने मेवातियों को भड़काया और उन्होंने जवाबी कार्रवाई की। 2. मेवाती मुस्लिम गौरक्षकों द्वारा फैलाई गई नफरत के खिलाफ जवाबी हमला करने का इंतजार कर रहे थे।
यह दोनों वही कुतर्क है, जिसके सहारे राजदीप सरदेसाई जैसे लेफ्ट-लिबरल लम्बे समय से अपना एजेंडा पेडल कर लंबे समय से जनता को मूर्ख बनाते आए हैं।
As per @sardesairajdeep, there are only two theories around Nuh attack on Hindus: 1. Bajrang Dal instigated Mewatis and they retaliated 2. Mewatis were waiting to strike back against hate spread by gau rakshaks
इस नैरेटिव के सहारे वह हरियाणा पुलिस की ADG लॉ एंड ऑर्डर से यह सवाल करते नजर आए कि नूहं में हुई हिंसा के लिए कौन जिम्मेदार हैं। अपने एक घंटे के स्पेशल शो में वह कुछ चुनिंदा वीडियो ही चलते नजर आए, जिससे हिन्दू ही अपराधी के रूप में नजर आए। जबकि आजतक की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने सोशल मीडिया पर प्रसारित किए गए 2300 वीडियो की पहचान की है। जिसमें पुलिस का मानना है कि इन्हीं वीडियो ने हिंसा को उकसाने में अहम भूमिका निभाई।
वहीं ADG लॉ एंड ऑर्डर ने अपने बयान में कहा कि जो भी जिम्मेदार हैं, एविडेंस के आधार पर, वह चाहे हिन्दू हों या मुस्लिम, उन पर सख्त एक्शन लिया जाएगा।
अपने पूरे शो में जहाँ राजदीप सरदेसाई नूहं हिंसा के लिए एकतरफा गोरक्षक मोनू मानेसर को जिम्मेदार ठहराते नजर आए वहीं उपद्रवी दंगाई मेवाती मुस्लिमों को पीड़ित साबित करने में पूरा जी जान लगा दिया। जबकि कई रिपोर्ट और पुलिस के बयान के अनुसार मोनू मानेसर वहाँ मौजूद नहीं थे।
Monu Manesar was not in Nuh but Rajdeep blames him for violence. Why we need police investigation when @SardesaiRajdeep gives verdict sitting in newsroom?
So many videos of Muslims planning attack on Hindus. Did Raju show any?
इसी मामले पर उनके शो के बाद बीजेपी के अमित मालवीय ने उन्हें घेरते हुए अपनी टिप्पणी के साथ FIR की कॉपी ट्वीट किया। जिसमें नूहं हिंसा को लेकर कई बातें बेहद साफ हैं। अमित मालवीय ने अपने ट्वीट में लिखा:
“कल राजदीप सरदेसाई ने नूहं में हुए दंगों के लिए मोनू मानेसर को दोषी ठहराते हुए पूरा शो किया, जबकि वह वहाँ मौजूद भी नहीं थे। हालाँकि, वह इस दंगे के लिए मुस्लिम भीड़ को साफ क्लीन चिट देते नजर आए, जो अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाते हुए उपद्रव कर रही थी और हिंसा और आगजनी में लिप्त थी।”
ड्यूटी मजिस्ट्रेट आबिद हुसैन की यह एक एफआईआर बताती है कि कैसे 400-500 की मुस्लिम भीड़ ने 35-40 हिंदू यात्रियों के एक समूह को घेर लिया और उन्हें बचाने गई पुलिस टीम पर भी हमला किया।
Yesterday, Rajdeep Sardesai, the propagandist, did a full show, blaming Monu Manesar for the riots in Nuh, when he was not even present there. He, however, couldn’t get himself to call out the Muslim mobs, which ran amock, raising Allah u Akbar slogans, and indulged in violence… pic.twitter.com/uq8pUdog2h
गौरतलब है कि इस मामले में दर्ज कई एफआईआर ऑपइंडिया को मिली हैं। इनमें से 7 FIR पुलिस पर हुए हमलों के बारे में बताती है। इनसे पता चलता है कि 600-700 की इस्लामी भीड़ ने पुलिसकर्मियों को भी भीषण तरीके से निशाना बनाया था।
हरियाणा के मेवात के नूहं जिले में 31 जुलाई 2023 को हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा पर मुस्लिम भीड़ ने हमला किया था। इस दौरान नल्हड़ महादेव मंदिर में हिंदुओं के बंधक बनने की सूचना मिलने पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून और व्यवस्था) ममता सिंह खुद मौके पर पहुँची थीं। उनकी अगुवाई में पुलिस ने हिंदू श्रद्धालुओं को बचाया था। इसके लिए उन्हें काफी सराहना भी मिली थी।
अब इंडिया टीवी से बातचीत में उन्होंने उस समय के हालात और रेस्क्यू ऑपरेशन के बारे में बताया है। आईपीएस अधिकारी ने उस दिन की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि 35-36 साल के पुलिस करियर में ऐसे मौके कम ही आते हैं, जब आपका सामना इस तरह के हालात से होता है। हालात पर काबू पाना, लोगों को भरोसा दिलाना और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालकर ले जाने जैसी चुनौतियों से एक साथ जूझना पड़ता है।
ममता सिंह ने कहा, “जब मैं मंदिर पहुँची तो स्थिति बहुत क्रिटिकल थी। ढाई-तीन हजार लोग फँसे थे। चारों तरफ से फायरिंग हो रही थी। हमारी फोर्स वहाँ मौजूद थी पर इतनी संख्या में नहीं थी कि इतने लार्ज स्केल पर जिस तरह से फायरिंग हो रही थी, उसमें घेराबंदी कर लोगों को सुरक्षित बाहर लेकर जा सके क्योंकि एग्जिट का एक ही तरफ से रास्ता था।”
आईपीएस अधिकारी ने बताया कि मंदिर में फँसे लोगों में महिलाएँ, छोटे बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल थे। पहाड़ी से फायरिंग हो रही थी। वे जानबूझकर उस हिस्से में फायरिंग कर रहे थे जिधर भीड़ होती थी ताकि नुकसान ज्यादा हो। अंधेरा होने के बाद भी फायरिंग नहीं रुकी तो हमें लगा कि स्थिति अब और खराब हो सकती है। फिर हमने टुकड़ियों में लोगों को निकालने का फैसला किया। कवर फायर देते हुए लोगों को जब हम बाहर निकाल रहे थे तब भी फायरिंग हुई थी। किस्मत से वह फायर एक गाड़ी को लगी। फिर देर रात तक टुकड़ियों में लोगों को बाहर निकालने का सिलसिला चलता रहा।
मंदिर के बाहर की स्थिति का जिक्र करते हुए बताया कि गाड़ियों में आग लगाए जाने के कारण और सीएनजी सिलिंडर्स में ब्लास्ट के कारण मंदिर के बाहर वाली सड़क से लोगों को ले जाना आसान नहीं था। इसलिए खेतों के रास्ते लोगों को बाहर निकालकर ले जाया गया। नल्हड़ मंदिर समेत आसपास के इलाकों में दंगाइयों के इकट्ठा होने में सोशल मीडिया की भूमिका को लेकर ममता सिंह ने कहा है कि कुछ पोस्ट हटाए जा चुके हैं। टेक्निकल टीम अब भी काम कर रही है।
गौरतलब है कि नूहं हिंसा को लेकर सोशल मीडिया के जरिए अफवाह फैलाने वाले करीब 100 सोशल मीडिया अकाउंट्स पर अधिकारियों और मंत्रालयों ने कार्रवाई शुरू की है।
मेवात के नूहं में शोभा यात्रा पर हुए हमले को ऑपइंडिया बड़े पैमाने पर कवरेज कर रहा है। पूरा कवरेज देखने के लिए यहाँ क्लिक करें।
हरियाणा के मेवात के नूहं में 31 जुलाई 2023 को मुस्लिम भीड़ ने जलाभिषेक यात्रा में शामिल हजारों हिंदुओं पर हमला किया था। इस मामले में दर्ज कई एफआईआर ऑपइंडिया को मिली हैं। इनमें से 7 FIR पुलिस पर हुए हमलों के बारे में बताती है। इनसे पता चलता है कि इस्लामी भीड़ ने पुलिसकर्मियों को भी भीषण तरीके से निशाना बनाया था।
होमगार्ड गुरसेव और नीरज की मौत
इंस्पेक्टर अजय कुमार की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147, 148, 149, 186, 342, 332, 353, 307, 302, 379 बी, 120 बी, 427 और शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के तहत FIR दर्ज की गई। अपनी शिकायत में इंस्पेक्टर अजय ने कहा है कि जलाभिषेक यात्रा के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उनकी तैनाती नूहं में की गई थी। मानेसर के डीसीपी मनवीर सिंह के नेतृत्व में एसआई देवेंद्र, पीएसआई अरुण, हेड कांस्टेबल शेरा, कांस्टेबल पवन कुमार, एचजीएच नीरज और एचएसएच गुरसेव भी ड्यूटी पर उनके साथ थे। आईएमटी थाना, मानेसर प्रभारी निरीक्षक देवेंद्र, बिलासपुर थाना प्रभारी निरीक्षक राहुल देव और मानेसर क्यूआरटी टीम भी उनके साथ थी।
नूहं दंगे की एफआईआर का एक हिस्सा
FIR में आगे कहा गया है कि यह टीम साइबर पुलिस स्टेशन नूहं पहुँची तो वहाँ बड़ी संख्या में दंगाइयों ने उन पर हमला कर दिया। उनके हाथों में घातक हथियार थे। दंगाइयों ने सड़क जाम करने के लिए बड़े-बड़े पत्थर रख दिए थे। दंगाइयों ने पुलिसकर्मियों को मारने के लिए पत्थरबाजी और गोलीबारी की। इसी दौरान सड़क पर पत्थर लगने से एसआई अजय की गाड़ी पलट गई।
दंगाइयों ने लाठी, डंडों, रॉड और पत्थरों से पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। उन्होंने पुलिसकर्मियों से मोबाइल फोन और पर्स छीन लिए। पुलिसकर्मियों को खुद को बचाने के लिए हवाई फायर करना पड़ा। इसी बीच दंगाइयों के हमले में होमगार्ड नीरज और होमगार्ड गुरसेव बलिदान हो गए। कांस्टेबल पवन, हेड कांस्टेबल शेरसिंह, एसआई देवेंद्र और पीएसआई अरुण गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें उपचार के लिए सोहाना हॉस्पिटल ले जाया गया।
दंगाइयों ने लगाए ‘अल्लाह-हू-अकबर’ का नारे फिर पुलिस पर बोला हमला
इंस्पेक्टर पंकज कुमार की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 148, 149, 332, 353, 186, 307 और 295 ए और शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। अपनी शिकायत में इंस्पेक्टर कुमार ने कहा कि वह अपने सीनियर अधिकारी के निर्देश पर नूहं में ड्यूटी पर थे। कांस्टेबल पोकर राम, संदीप, संजय, विक्रम और गौरीशंकर भी उनके साथ थे। वे नूहं के अडबर चौक पर तैनात थे। गुरुग्राम के सेक्टर 40 क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर अनिल कुमार भी अपने सहयोगियों के साथ उनके साथ ड्यूटी में थे।
नूहं दंगे की एफआईआर का एक हिस्सा
600-700 दंगाई भीड़ ने तावडू से अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाते हुए उन पर हमला कर दिया। उन्होंने पुलिसकर्मियों पर पथराव शुरू कर दिया और अवैध हथियारों का इस्तेमाल करते हुए गोलियाँ चलानी शुरू कर दीं। इंस्पेक्टर कुमार और इंस्पेक्टर अनिल ने उनसे शांति बनाए रखने का अनुरोध किया। लेकिन दंगाई पुलिसकर्मियों पर पथराव और गोली चलाते थे। दंगाइयों के हाथों में पत्थर, लाठी-डंडे, ईंट समेत अवैध हथियार थे।
एक गोली इंस्पेक्टर अनिल कुमार के पेट में लगी, इससे वह वहीं गिर गए। उनके सहयोगी एएसआई जगबीर सिंह को भी पथराव से चोटें आई। एसआई संजय और अन्य पुलिसकर्मियों ने उन्हें हॉस्पिटल पहुँचाया। इस बीच, इंस्पेक्टर कुमार और उनके सहयोगियों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हवाई फायर किया। इंस्पेक्टर पंकज कुमार ने शिकायत में कहा है कि वह दंगाइयों को पहचान सकते हैं।
पुलिसकर्मियों को मौत के घाट उतारना चाहती थी इस्लामी भीड़
कांस्टेबल रविंदर की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 148, 149, 332, 353, 186, 307 और 435 और शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के तहत FIR दर्ज की गई। अपनी शिकायत में रविंदर ने कहा है कि मेवात में आयोजित धार्मिक जलाभिषेक यात्रा के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए वह नूहं शहर पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर ओमबीर सिंह के साथ झंडा पार्क में तैनात थे।
नूहं दंगे की एफआईआर का एक हिस्सा
जलाभिषेक यात्रा जैसे ही झंडा पार्क पहुँची वहाँ करीब 600-700 दंगाइयों ने श्रद्धालुओं और पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। दंगाइयों के हाथों में पत्थर, लाठी, डंडे और अवैध हथियार थे। दंगाई अलवर-सोहना रोड पर नूहं बस स्टैंड की ओर से यात्रा पर हमला कर रहे थे। कांस्टेबल रविंदर, इंस्पेक्टर ओमबीर और अन्य पुलिसकर्मी गौशाला रोड, नूहं पहुँचे और पुलिस वैन को सड़क के किनारे खड़ा कर दिया।
भीड़ के हमले को कंट्रोल करने के लिए बाकी पुलिसकर्मी वैन से चले गए। लेकिन रविंदर और एक अन्य एसआई वैन में ही रहे। अचानक ही भीड़ ने वैन पर पथराव के साथ ही लाठी-डंडों से हमला कर दिया। भीड़ पुलिकर्मियों को मारने के इरादे से अवैध हथियार से गोली चला रही थी। इसी दौरान, एसआई ने खुद को बचाने के लिए दंगाइयों पर अपनी सरकारी पिस्टल से गोली चला दी। इसके बाद दंगाइयों ने रविंदर को मारने के इरादे से वैन में आग लगा दी। कुछ दंगाइयों की पहचान रिजवान, नईम, शौकीन, सरफराज, तौफीक, इरशाद के रूप में हुई।
करीब 600 मुस्लिमों ने किया पुलिस पर हमला
एसआई अनिल कुमार की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 148, 149, 435, 295 ए, और 307 और शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के तहत एफआईआर दर्ज की गई। एसआई अनिल कुमार ने अपनी शिकायत में कहा है कि वह नूहं में धार्मिक जलाभिषेक यात्रा में ड्यूटी के लिए पुलिस अधिकारी दिनेश यादव और रीडर बाबू लाल के साथ गए थे। जब यात्रा झंडा चौक से गुजरी, तभी 500-600 मेव मुस्लिमों की दंगाई भीड़ ने श्रद्धालुओं और पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। दंगाई लाठी-डंडे, पत्थर और अवैध हथियारों से हमला कर रहे थे।
नूहं दंगे की एफआईआर का एक हिस्सा
दंगाइयों को कंट्रोल करने के लिए पुलिस अधिकारी दिनेश यादव पुलिस वैन से नीचे उतरे और एसआई अनिल कार के अंदर बैठे रहे। तभी भीड़ ने पत्थर और लाठी-डंडों से वैन पर हमला कर दिया। एसआई अनिल ने किसी तरह वैन से निकलकर खुद को बचाया।
दंगाइयों ने पुलिस वैन में लगाई आग
कांस्टेबल बिजेंद्र कुमार की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 148, 149, 435, 295 ए, 307 और शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के तहत एफआईआर दर्ज की गई। इस यात्रा में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उनकी तैनाती नूहं में थी। वह नूहं में दिल्ली-अलवर रोड पर इंस्पेक्टर विश्वजीत के साथ बस स्टैंड की ओर जा रहे थे, तभी 500-600 दंगाइयों ने वाहनों पर हमला करना शुरू कर दिया और उन्हें जला दिया।
नूहं दंगे की एफआईआर का एक हिस्सा
हालात कंट्रोल करने के लिए इंस्पेक्टर विश्वजीत वैन से उतरकर दंगाइयों को समझा रहे थे। तभी दंगाइयों ने वैन पर लाठी, डंडों और पत्थरों से हमला कर उसमें आग लगा दी। इस दौरान इंस्पेक्टर विश्वजीत ने किसी तरह अपनी जान बचाई।
दंगाइयों ने महिला पुलिसकर्मियों पर भी किया हमला
कांस्टेबल रामेंद्र सिंह की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 148, 149, 332, 353, 186, 307 और 435 और शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के तहत FIR दर्ज की गई। वह नूहं में महिला ईआरवी दुर्गा शक्ति में ड्राइवर के पद पर तैनात हैं। रामेंद्र सिंह की शिकायत पर दर्ज एफआईआर में खालिद, सकीर, अबरार, समीरी, बदरुद्दीन, आरिफ, मोएन, जिशान, अशफाक, शाहरुख, सरफुद्दीन को आरोपित बनाया गया है। अपनी शिकायत में कांस्टेबल रामेंद्र ने कहा है कि वह मलाब पॉलीटेक्निक कॉलेज में महिला कांस्टेबल पिंकी और स्टाफ प्रभारी अंजुमन के साथ रूटीन पेट्रोलिंग पर थे।
नूहं दंगे की एफआईआर का एक हिस्सा
इसी दौरान मालब गाँव के पास दंगाइयों ने पुलिस वैन पर हमला कर दिया। हालाँकि वह बचते हुए नूहं शहर की ओर जाने लगे। तभी पुराने बस स्टैंड पर करीब 700-800 दंगाइयों ने उन्हें मारने के उद्देश्य से घेर लिया। दंगाइयों ने उन पर पथराव और गोलीबारी शुरू कर दी। वे किसी तरह वैन को छोड़कर सुरक्षित स्थान पर पहुँचने में कामयाब हुए। हमले के दौरान कांस्टेबल रामेंद्र घायल हो गए। दंगाइयों ने उनकी वैन को जला दिया। आग में जलकर खाक हुई पुलिस वैन में महत्वपूर्ण फाइलें और उपकरण थे।
पुलिसकर्मियों को जान से मारने की कोशिश
कांस्टेबल नीरज की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 148, 149, 332, 353, 186, 307 और 435 और शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के तहत FIR दर्ज की गई थी। कांस्टेबल नीरज सीएस स्टाफ, टौरू के पद पर तैनात हैं। यात्रा के दौरान सब-इंस्पेक्टर कंवरपाल, हेड कांस्टेबल हरि प्रेम और होमगार्ड हासम खान के साथ नूहं में उन्हें तैनात किया गया था।
नूहं दंगे की एफआईआर का एक हिस्सा
अपनी शिकायत में कांस्टेबल नीरज ने कहा कि जब वह पुराने बस स्टैंड पर पहुँचे, तो एक समुदाय के करीब 500-600 दंगाइयों ने श्रद्धालुओं और पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। भीड़ पत्थर, डंडे और अवैध हथियार से हमला कर रही थी। जब एसआई कंवरपाल ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो दंगाइयों ने उनकी गाड़ी पर पथराव शुरू कर दिया। कांस्टेबल नीरज उस समय पुलिस वैन के अंदर थे। दंगाइयों ने दोनों को मारने के लिए गोलीबारी करनी शुरू कर दी। हमला बढ़ता देख वे पुलिस वैन छोड़ किसी तरह बचने में कामयाब रहे।
मेवात के नूहं में शोभा यात्रा पर हुए हमले को ऑपइंडिया बड़े पैमाने पर कवरेज कर रहा है। पूरा कवरेज देखने के लिए यहाँ क्लिक करें।
एलन मस्क ने आज गुरुवार को एक पोस्ट करते हुए महत्वपूर्ण घोषणा कि एक्स (पूर्व में ट्विटर) सत्यापित क्रिएटर्स को मिलने वाले रेवेन्यू में से तब तक कटौती नहीं करेगा जब तक कि भुगतान $1,00,000 (₹ 8259000 ) से अधिक न हो जाए। रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया ‘X’ ने हाल ही में योग्य रचनाकारों के लिए अपना ‘विज्ञापन राजस्व साझाकरण’ कार्यक्रम लॉन्च किया था, जिसमें मस्क ने कहा था कि प्लेटफॉर्म एक साल तक अपने पास कुछ भी नहीं रखेगा, जिसके बाद वे 10 प्रतिशत की कटौती करेंगे।
हालाँकि, अब एलन मस्क की आज (3 अगस्त, 2023) के घोषणा के बाद ऐसा लगता है कि एक्स ने अपनी विज्ञापन और रेवेन्यू नीति बदल दी है और जब तक भुगतान उक्त सीमा से अधिक नहीं हो जाता, तब तक क्रिएटर्स को मिलाने वाली राशि का कुछ भी अपने पास नहीं रखेगा, जिसके बाद रचनाकारों को अपनी कुल कमाई का 10 % देना होगा। हालाँकि, पहले 12 महीने तक सभी के लिए निःशुल्क हैं।
मस्क ने अपने पोस्ट में लिखा, “क्रिएटर्स को सपोर्ट करना अत्यंत महत्वपूर्ण है! यदि आप इसे अफोर्ड कर सकते हैं, तो कृपया इस मंच पर जितने भी रचनाकार आपको दिलचस्प लगें, उन्हें सब्सक्राइब करें। दुनिया के हर कोने से लोग ‘?’ पर अविश्वसनीय सामग्री पोस्ट करते हैं, लेकिन अक्सर कठिन परिस्थितियों में रहते हैं, जबकि प्रति माह कुछ सौ डॉलर भी उनके जीवन को बदल देते हैं। जबकि हमने पहले कहा था कि ?’ 12 महीनों तक कुछ भी नहीं रखेगा, फिर 10%, हम उस नीति में संशोधन कर रहे हैं ? हमेशा के लिए कुछ भी नहीं रखेगा, जब तक कि भुगतान $100,000 से अधिक न हो जाए, फिर 10%। पहले 12 महीने अभी भी सभी के लिए निःशुल्क हैं। Apple 30% लेता है, लेकिन मैं एप्पल के सीईओ टिम कुक से बात करूँगा और देखते हैं कि क्या क्रिएटर्स को मिलने वाली राशि को अधिकतम करने के लिए इसे ? के केवल 30% तक समायोजित किया जा सकता है।”
Super Important to Support Creators!
If you can afford it, please subscribe to as many creators on this platform as you find interesting.
People from every corner of the world post incredible content on ?, but often live in tough circumstances, where even a few hundred…
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अपने यूजर्स को त्वरित लाभ देने के लिए, पिछले सप्ताह ही सोशल मीडिया ‘X’ ने सत्यापित क्रिएटर्स को उनके पोस्ट के उत्तरों में दिए गए विज्ञापनों से उनके कुल विज्ञापन राजस्व का एक हिस्सा देना शुरू किया है। मुख्य टाइमलाइन में दिए गए विज्ञापनों के बजाय, एक्स ने क्रिएटर्स द्वारा पोस्ट के उत्तरों में दिए गए विज्ञापनों से भी कमाई करने की योजना बनाई है। यह क्रिएटर्स को ऐसी चीज़ें पोस्ट करने के लिए प्रोत्साहित करेगा जिससे प्लेटफ़ॉर्म पर यूजर्स की भागीदारी बढ़ेगी।
गौरतलब है कि एक्स के एक ब्लॉग पोस्ट के अनुसार, पिछले तीन महीनों में 500 से अधिक फॉलोअर्स और पोस्ट पर 15 मिलियन इंप्रेशन वाले ब्लू सब्सक्राइबर (पहले ट्विटर ब्लू के नाम से जाना जाता था) और सत्यापित संगठन इस योजना के लिए पात्र हैं।
ब्लॉग के अनुसार, योग्य यूजर्स इस कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं और ऐप सेटिंग्स के भीतर ‘मॉनेटाइजेशन ‘ सेक्शन में जाकर पेमेंट सेट कर सकते हैं। एक्स का कहना है कि वह स्ट्राइप के माध्यम से भुगतान की प्रक्रिया पूरी करेगा, जहाँ से यूजर्स राशि को अपने बैंक खाते में ट्रांसफर कर सकेंगे।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गुरुवार (3 अगस्त, 2023) को वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर में ASI को अपना सर्वे जारी रखने का आदेश दिया। इसके खिलाफ मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया है। हिंदू पक्ष ने भी शीर्ष अदालत में कैविएट याचिका दायर की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इलाहबाद हाई कोर्ट ने ज्ञानवापी परिसर में ASI सर्वे पर लगी रोक हटा दी। हाई कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देने के लिए अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमिटी सुप्रीम कोर्ट पहुँच गई। मस्जिद कमिटी के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में ASI को सर्वे करने की अनुमति न देने की माँग की है।
वकील निजाम पाशा ने इस मामले का उल्लेख अनुच्छेद 370 पर सुनवाई कर रही संविधान पीठ के सामने किया। उन्होंने कहा, “इलाहाबाद हाई कोर्ट का आदेश आज सुबह आया है। उन्हें सर्वेक्षण नहीं करने दें। मैंने आदेश ईमेल कर दिया है।” इसके जवाब में मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने उन्हें जल्द ईमेल देखने का आश्वासन दिया।
The Anjuman Intezamia Masjid Committee moves Supreme Court challenging the Allahabad High Court order allowing ASI to conduct a scientific survey by ASI of the Gyanvapi mosque premises.
Advocate of the Masjid Committee mentions the matter before Supreme Court saying not to allow… pic.twitter.com/R6GgpLGVY4
मुस्लिम पक्ष के अब तक के रुख को देखते हुए हिंदू पक्ष की ओर से पहले ही एक कैविएट याचिका दाखिल कर दी गई थी। गुरुवार (3 अगस्त, 2023) को दाखिल इस याचिका में हिंदू पक्ष ने आग्रह किया है कि यदि मुस्लिम पक्ष ASI को सर्वे करने की अनुमति देने वाले हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका दायर करता है तो उनका पक्ष सुने बिना किसी प्रकार का आदेश पारित न किया जाए। ज्ञात हो कि कोई भी याचिकाकर्ता कैविएट अर्जी यह सुनिश्चित करने के लिए दाखिल करता है कि उसका पक्ष सुने बिना सुने उसके खिलाफ कोई भी प्रतिकूल आदेश पारित न किया जाए।
A caveat application was filed in the Supreme Court today by one of the Hindu petitioners in the Kashi Vishwanath temple-Gyanvapi mosque case seeking to be heard before passing any order in case the Muslim side files plea against the Allahabad High Court order allowing ASI to… pic.twitter.com/2cxUTdOD6M
बता दें कि ज्ञानवापी परिसर को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट कोर्ट ने गुरुवार (3 अगस्त, 2023) को दिए अपने फैसले में ASI सर्वे को जारी रखने को कहा। ज्ञानवापी सर्वेक्षण मामले में हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा, “इलाहाबाद HC ने कहा है कि ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का एएसआई सर्वेक्षण फिर से शुरू होगा। सत्र अदालत के आदेश को हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है।”
वाराणसी की जिला अदालत ने पिछले महीने एएसआई को वज़ुखाना को छोड़कर मस्जिद का सर्वेक्षण करने की मंजूरी दी थी। इसमें एक संरचना है, जिसके बारे में दावा किया गया है कि यह शिवलिंग है। सर्वेक्षण का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या ढाँचा काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर बनाई गई है या नहीं। HC से फैसला आने के बाद सर्वे का काम आज गुरुवार से ही शुरू हो सकता है।
बता दें कि मस्जिद कमेटी की ओर से जिला कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने केस संबंधित हाईकोर्ट में ले जाने का आदेश दिया था। वहीं, अब हाईकोर्ट ने अपने फैसले में मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी है।
इससे पहले मुस्लिम पक्ष की अपील के बाद ज्ञानवापी परिसर के एएसआई सर्वे पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। दरअसल, वाराणसी के जिला जज डॉ. अजय कुमार विश्वेश ने 21 जुलाई को ज्ञानवापी परिसर के सर्वे का आदेश दिया था। जिला कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है। इस प्रकार ज्ञानवापी परिसर के एएसआई पर लगी रोक भी हट गई है।
डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के फैसले के बाद एएसआई की टीम ने 24 जुलाई 2023 को सर्वे का काम शुरू किया था। सर्वे शुरू होते ही मस्जिद कमेटी सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने एएसआई सर्वे पर 26 जुलाई शाम 5 बजे तक रोक लगाते हुए हाईकोर्ट जाने के लिए कहा था। इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई कर 27 जुलाई को फैसला सुरक्षित रख लिया था।
लोकसभा ने गुरुवार (3 अगस्त 2023) को दिल्ली सेवा बिल ध्वनिमत से पारित कर दिया। मतदान के दौरान विपक्षी सांसदों ने सदन से वॉकआउट किया। आम आदमी पार्टी (AAP) के इकलौते लोकसभा सांसद सुशील कुमार रिंकू को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया है। वोटिंग के दौरान जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला बोल रहे थे तब उन्होंने सत्ता पक्ष के सांसदों पर कागज फाड़कर फेंका था। बिल पास होने के बाद लोकसभा को शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।
इससे पहले दिल्ली सेवा बिल 2023 पर लोकसभा में चर्चा के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आम आदमी पार्टी समेत पूरे विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा है कि अरविंद केजरीवाल का बंगला बनाने में हुए भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए इस बिल का विरोध हो रहा है। अमित शाह ने यह भी कहा कि गठबंधन बनने से कोई फायदा नहीं होगा। नरेंद्र मोदी फिर से पूर्ण बहुमत से प्रधानमंत्री बनेंगे।
कॉन्ग्रेस के साथ समन्वय पर बोलते हुए अमित शाह ने कहा, “दिल्ली में विधानसभा की शुरुआत 1993 में हुई थी। कभी भाजपा सत्ता में आई, कभी कॉन्ग्रेस ने शासन किया। कभी केंद्र में कॉन्ग्रेस का शासन था, तब दिल्ली में हमारी सरकार थी। कभी केंद्र में हम सत्ता में और दिल्ली में कॉन्ग्रेस सरकार थी, लेकिन कभी झगड़ा नहीं हुआ।”
गृहमंत्री ने आगे कहा, “उस दौरान सब ठीक चल रहा था। किसी की मंशा अधिकार हथियाने की नहीं थी, बल्कि सेवा करने की थी। कॉन्ग्रेस ने भी भाजपा के साथ झगड़ा नहीं किया। भाजपा ने भी कॉन्ग्रेस से विवाद नहीं किया। दोनों सरकारों के बीच कभी कोई झगड़ा नहीं हुआ।”
उन्होंने आगे कहा, “मुझे यह कहने में कोई झिझक नहीं है कि 2015 में स्थिति बदली और यहाँ एक ऐसे दल की सरकार आई, जिसका मकसद सेवा करना नहीं, झगड़ा करना है। यहाँ समस्या अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग के अधिकार का नहीं है, बल्कि विजिलेंस को हाथ में लेकर जो बंगला बना दिया है इसकी सच्चाई छिपाना है। जो भ्रष्टाचार हो रहा है, इसकी सच्चाई छुपाना है।”
विपक्षी गठबंधन पर भी साधा निशाना
अमित शाह ने विपक्ष के नए-नवेले I.N.D.I.A. गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा है, “मेरी सभी से विनती है कि चुनाव जीतने के लिए किसी पार्टी का समर्थन या विरोध करना, यह सही राजनीति नहीं है। विधेयक और कानून देश की भलाई के लिए लाया जाता है। इसलिए इसका विरोध और समर्थन दिल्ली की भलाई के लिए करना चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा, “दिल्ली की भलाई के लिए बिल का समर्थन करना चाहिए। मेरी अपील है विपक्ष के सदस्यों को दिल्ली के बारे में सोचना चाहिए। गठबंधन की मत सोचिए। गठबंधन से फायदा होने वाला नहीं है। गठबंधन बनने के बाद भी पूर्ण बहुमत से नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनेंगे।”
नेहरू, पटेल, आंबेडकर की सिफारिशों का विरोध कर रहा विपक्ष
इससे पहले गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “विपक्ष का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर इस बिल को लाया गया है। मैं सभी को बताना चाहता हूँ कि आपने सुप्रीम के आदेश का अपना मनपसंद हिस्सा ही पढ़ा है। जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बारे में संसद में बताते हैं तो पूरे हिस्से की जानकारी होनी चाहिए। उसका दूसरा हिस्सा भी पारदर्शिता के साथ सदन में रखना चाहिए।”
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का जिक्र करते हुए कहा, “सुप्रीम कोर्ट के आदेश में पैरा 86, पैरा 95 और विशेषकर पैरा 164 की ओर वह ध्यान दिलाना चाहते हैं। इसमें साफ तौर पर कहा गया है कि संसद को 239 एए के तहत दिल्ली संघ राज्य क्षेत्र के किसी भी विषय पर कानून बनाने का अधिकार है। यह अदालत ने अपने जजमेंट में पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है।”
गृहमंत्री ने आगे कहा, “देश की आजादी के बाद पट्टाभि सीतारमैया समिति ने दिल्ली को राज्य स्तर का दर्जा देने की सिफारिश की थी। हालाँकि, जब सिफारिश संविधान सभा के सामने आई, तब पंडित जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल, राजाजी, राजेंद्र प्रसाद, भीमराव आंबेडकर जैसे नेताओं ने इसका विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि ये उचित नहीं होगा कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए। मैं यह सब इसलिए बता रहा हूँ, ताकि आप लोगों को पता होगा कि आप किसकी सिफारिश का विरोध कर रहे हैं।”
न्यूज 18 के एंकर अमन चोपड़ा लेफ्ट-लिबरल और कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। चोपड़ा को एक मौलाना द्वारा खुलेआम धमकाने का वीडियो सामने आया है। वहीं, लेफ्ट-लिबरल गिरोह भी उन्हें पत्थरबाजों एवं दंगाइयों पर सख्त कार्रवाई करने की प्रशासन से अपील करने पर अपना निशाना बना रहा है।
एक न्यूज रिपोर्टर को दिए बयान में मौलाना ये कहता हुआ नजर आ रहा है, “मैं ऐसे पत्रकारों से कहता हूँ भईया, आपके मोहल्ले में भी लोग हैं। राहत इंदौरी ने कहा था कि लगेगी आग तो आएँगे जद में कई घर, यहाँ पर सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है। अमन चोपड़ा जी आपका मकान भी यहीं है। कभी इसी रास्ते से घर जाओगे। अगर दंगाई मिल गए न तो चंगाई मिल जाएगी उसी दिन।”
Ravish, Anjum and 2BHK gang incited Muslims against Aman Chopra blaming him for the violence.
वायरल वीडियो क्लिप में मौलाना सीधे-सीधे धमकी दे रहा है। इसका अर्थ है कि अमन चोपड़ा भी एक दिन दंगाइयों के शिकार हो सकते हैं। मौलाना को साफ कहते सुना जा सकता है कि ‘तुम्हारे भी पड़ोसी हैं। आप यहीं रहते हैं और इन्हीं रास्तों से गुजरते हैं। एक दिन दंगाई आपको घेर सकते हैं, आपका उनसे आमना-सामना हो सकता है। तब आपको एहसास होगा कि आप किसके खिलाफ बोल रहे हैं’।
इससे पहले, न्यूज 18 के एंकर अमन चोपड़ा को स्व-घोषित सेक्युलर-लिबरल्स ने टारगेट किया था, जो वर्तमान में हरियाणा के नूहं में हिंदुओं के खिलाफ इस्लामी हिंसा की एक और घटना को रफा-दफा करने के लिए बेताब हैं।
बता दें कि 31 जुलाई 2023 को हरियाणा के नूहं में हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा पर मेवात के कट्टरपंथी मुस्लिमों ने बर्बरता से हमला किया था। हालाँकि, मुख्यधारा की मीडिया और उनके सेक्युलर-लिबरल गैंग ने इस हिंसा को ‘रैली के दौरान हुई मामूली झड़प’ के रूप में प्रचारित करने की पूरी कोशिश की, लेकिन सोशल मीडिया वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों ने जल्द ही साबित कर दिया कि यह एक योजनाबद्ध हमला था।
इस हमले दिन यानी 31 जुलाई को अपने शो ‘देश नहीं झुकने देंगे’ में न्यूज 18 के एंकर अमन चोपड़ा ने नूहं हिंसा पर चर्चा की। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला था कि यात्रा हर साल होती है। इस दिन भी सावन का सोमवार था, जो हिंदुओं के लिए एक शुभ दिन है। उन्होंने इस तथ्य का भी उल्लेख किया कि नूहं में हिंदू अल्पसंख्यक हैं।
हिन्दुओं के धार्मिक जलाभिषेक यात्रा पर यह क्रूर हमला किया गया, जिसमें जमकर हिंसा, आगजनी और बर्बरता हुई। इस मुद्दे पर चर्चा करते हुए अमन चोपड़ा ने बड़े पैमाने पर हुए पथराव के मुद्दे पर प्रकाश डाला। उनके शो का विषय ही था, “कितने पत्थरबाज, कब पर्मानेंट इलाज”
चोपड़ा ने पूछा कि नूहं हमला हिंदुओं के मानवाधिकार के हनन का विषय क्यों नहीं है। इस पर कोई बहस क्यों नहीं छेड़ी जा रही, जो वास्तव में नूहं क्षेत्र में अल्पसंख्यक हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पथराव की घटनाएँ चिंताजनक हैं और सरकार को इसका स्थायी समाधान करने की जरूरत है।
अमन चोपड़ा के शो से तिलमिलाए सेक्युलर-लिबरल गैंग ने उन पर हमला कर दिया। उनके बॉस को टैग किया और मुकेश अंबानी पर भी निशाना साधा। यहाँ तक कि ‘पर्मानेंट इलाज’ की तुलना हिटलर के ‘अंतिम समाधान’ से कर डाली।
अजीत अंजुम, साक्षी जोशी, रवीश कुमार, रोहिणी सिंह और राहुल देव ऐसे कुछ नाम हैं, जिन्होंने नूहं हिंसा के मुद्दे पर कवरेज के लिए अमन चोपड़ा पर निशाना साधा। रवीश कुमार ने पोस्ट किया कि विपक्षी नेताओं को मुकेश अंबानी से मिलकर चर्चा करनी चाहिए कि कैसे उनके समूह के स्वामित्व वाला एक समाचार चैनल नफरत फैला रहा है।
रोहिणी सिंह ने न्यूज 18 के चेयरमैन आदिल जैनुलभाई को टैग करते हुए लिखा कि वह अपने चैनल पर रोजाना ‘नफरत’ क्यों फैलने दे रहे हैं। उन्होंने एंकर पर आम नागरिकों को ‘अमानवीय’ बनाने का आरोप भी लगाया।
साक्षी जोशी ने न्यूज़ 18 के शो का एक कोलाज साझा किया। इसमें से अधिकांश अमन चोपड़ा के ‘देश नहीं झुकने देंगे’ शो के थे। इसमें जोशी ने आदिल ज़ैनुलभाई को टैग करके पूछा कि क्या वह उन शो को पहचानते हैं। उन्होंने कहा कि उन एंकरों ने न्यूज 18 को ‘नफरती चैनल’ में बदल दिया है।
एक अन्य हैंडल से साझा किया गया, “अगर अंबानी अब भी अमन चोपड़ा को बर्खास्त नहीं करते हैं, तो उन्हें हत्या और हिंसा में भागीदार माना जाना चाहिए।”
If Ambani still doesn’t sack Aman Chopra, he should be considered an accomplice in the murder and violence.
After all, he’s the one providing platform to the likes of Aman Chopras and Amish Devgans.
राहुल देव तो एक कदम और आगे बढ़ गए। उन्होंने दावा कर डाला कि अमन चोपड़ा हिटलरवादी ‘अंतिम समाधान’ की वकालत कर रहे हैं। इस तथ्य के बावजूद कि चोपड़ा ने पथराव की घटनाओं के खिलाफ ‘पर्मानेंट इलाज’ यानी ‘स्थायी उपचार’ की बात की थी।
राहुल देव ने जोर देकर कहा कि चोपड़ा ‘अंतिम समाधान’ की वकालत कर रहे थे, जैसा हिटलर ने यहूदियों के लिए चाहा था। उनके ट्वीट से संकेत मिलता है कि पथराव (यहाँ हिन्दुओं के जलयात्रा के दौरान मुस्लिम समुदाय द्वारा किया गया) के बारे में सवाल पूछना हिटलर द्वारा यहूदियों को निशाना बनाने के समान है।
मेवात-नूँह की सामुदायिक घटना पर इस चैनल के शीर्षक पढ़िए और महान एंकर की बातें सुनिए। फिर चैनल से पूछिए, क्या है उनका ‘परमानेन्ट इलाज ’? गूगल कीजिए किसने कहा था ‘final solution’ और किया था ६० लाख यहूदियों का संहार। कल सिपाही द्वारा ४ लोगों की रेलगाड़ी में हत्या को भी याद रखिए। pic.twitter.com/bgJKwVOIGT
हालाँकि, राहुल देव के ट्वीट का जवाब देते हुए अमन चोपड़ा ने लिखा कि उन्होंने आपराधिक पत्थरबाज़ों और दंगाइयों के लिए ‘स्थायी इलाज’ की माँग की थी। उन्होंने कहा कि एक समय हिटलर के ‘अंतिम समाधान’ का शिकार हुआ इज़राइल का यहूदी राज्य अब अपने दुश्मनों को उनके घरों से ही ढूंढता है।
उन्होंने पूछा कि आखिर राहुल देव को पथराव और दंगे की समस्या के स्थायी इलाज की माँग से दिक्कत क्यों है? अमन चोपड़ा ने ‘सेक्युलर लिबरल’ गैंग को जवाब देते हुए पूछा कि वे पत्थरबाजों के अपराधों पर लीपा-पोती क्यों करना चाहते हैं?
राहुल सर प्रमाण ??
आज उन्हीं 90 लाख यहूदियों का देश इजरायल दुश्मनों के घर में घुसकर उनका ‘परमानेंट इलाज’ करता है, जिससे भी कुछ ‘बारूदी बुद्धिजीवियों’ को पीड़ा पहुँचती है।
पत्थरबाज़ों के परमानेंट इलाज के विचार से आपको कष्ट का कारण क्या है ?
अमन चोपड़ा ने अपने शो में अपने ऊपर हुए घृणित हमलों का करारा जवाब दिया। इस पर बोलते हुए कि कैसे कुछ अनुभवी पत्रकार अब अपना प्रोपेगेंडा फ़ैलाने के लिए यूट्यूब पर चले गए हैं, उन्होंने पूछा कि जब एक समाचार एंकर ने पथराव और दंगों की निरंतर और व्यापक समस्या के समाधान की माँग की तो वे इतने भड़के हुए क्यों हैं।
पत्थरबाज़ों के साथ ही पत्थरबाज़ी का धर्म ढूँढने वाली ‘वैचारिक पथरी’ के भी ‘परमानेंट इलाज’ की ज़रूरत है।
अमन ने लेफ्ट-लिबरल गिरोह द्वारा कट्टरपंथी मुस्लिमों के अपराधों की लीपापोती करने और पथराव की समस्या को उजागर करने की कोशिश करने वाले पत्रकार को बदनाम करने पर लताड़ा। अमन चोपड़ा ने पूछा कि क्या यूट्यूब पत्रकार चाहते हैं कि भारत के युवा बेरोजगार रहें और पत्थरबाजी करते रहें।
अमन चोपड़ा ने जवाब में कहा, “जो पत्थर फेंका जाता है वह न तो हिंदू होता है और न ही मुसलमान। जब पत्थर फेंका जाता है तो यह किसी की भी जान ले लेता है या अपंग कर देता है, चाहे उनका धर्म-मजहब कोई भी हो। हालाँकि, कुछ एंकर ऐसे भी हैं जो पत्थर को एक विशेष धर्म से जोड़ना चाहते हैं।”
बताते चलें कि हरियाणा के मेवात शोभा यात्रा हमले पर ऑपइंडिया ने गहन रिपोर्टिंग की है और कई झूठों का भी पर्दाफाश कर सच्चाई को सामने लाने की कोशिश की। आप नूहं हिंसा की पूरी कवरेज यहाँ देख सकते हैं।