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नूहं के नल्हड़ मंदिर पर हमले को नकारने में लगे हैं वामपंथी-कट्टरपंथी: जिस पुजारी के हवाले से किया जा रहा दावा, उसने ऑपइंडिया से कहा- पहाड़ों से बरसाई जा रही थीं गोलियाँ

मेवात का नल्हड मंदिर। नूहं में हुई हिन्दू विरोधी हिंसा के बाद में भी खासा चर्चा में है। यही वो जगह है, जहाँ 31 जुलाई 2023 को हिन्दुओं ने छिपकर अपनी जान बचाई थी। पीड़ितों का कहना है कि मंदिर परिसर में शरण लेने के बावजूद उन पर गोलियाँ चलाई गईं। इस बीच मंदिर के पुजारी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

वामपंथी और इस्लामी गैंग झूठ एवं भ्रम का हवाई किला खड़ा करके हरियाणा के गृहमंत्री तक को झूठा साबित करने में लगे हैं। दरअसल, हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज ने कहा था कि नहूं के नल्हड़ महादेव मंदिर के अंदर लोगों को बंधक बना लिया गया था।

दरअसल, ‘द वायर’ ने 1 अगस्त 2023 को एक ग्राउंड रिपोर्ट प्रकाशित किया। अपनी रिपोर्ट में पोर्टल ने मंदिर के पुजारी दीपक शर्मा से बातचीत का दावा किया है। द वायर ने पुजारी दीपक शर्मा के हवाले से बताया, “लोगों को बंधक क्या बनाएँगे, परमात्मा की शरण में थे। अचानक पता चला कि माहौल खराब है। स्थिति खराब होने की वजह से अंदर ही फँस गए।”

द वायर की महिला पत्रकार अरफ़ा खानम शेरवानी ने 1 अगस्त 2023 को इस खबर में गृहमंत्री अनिल विज की तस्वीर लगाते हुए शेयर किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि नल्हड मंदिर के पुजारी ने अनिल विज के बयान का खंडन किया है।

द क्विंट ने भी अपनी एक ग्राउंड रिपोर्ट में कहा कि मंदिर के पुजारी ने मंदिर के आसपास शांति का माहौल है। क्विंट की पत्रकार फातिमा खान ने 3 अगस्त को एक वीडियो शेयर किया। इस वीडियो में पुजारी ने ढाई-तीन किलोमीटर दूर हिंसा होने की बात कही। लगभग 3 मिनट के इस वीडियो में पुजारी को नारेबाजी की खिलाफत करने और मिलजुल कर रहने की नसीहत देते भी सुना जा सकता है।

अक्सर हिन्दू विरोधी ट्वीट करने वाली पत्रकार सदफ अमीन ने न्यूज पोर्टल लल्लनटॉप के वीडियो को शेयर करते हुए हरियाणा के गृहमंत्री के बयान को गलत ठहराने का प्रयास किया।

चित्र साभार- सदफ ट्वीटर हैंडल

लल्लनटॉप के जिस वीडियो का हिस्सा सबसे ज्यादा शेयर किया जा रहा है, उसका मूल वीडियो 4 मिनट 34 सेकेंड का है। इस वीडियो में पत्रकार ने पहले मंदिर की वर्तमान हालत और सुरक्षा व्यवस्था दिखाई, फिर लगभग 2 मिनट मंदिर के पुजारी दीपक से बात की। इस वीडियो में भी पुजारी ने मंदिर में कोई घटना न होने की बात कही है।

हाजी मेहरदीन ने इस वीडियो को शेयर किया है। उन्होंने लिखा, “हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज ने कहा था कि नूहं के एक शिव मंदिर मे 4000 लोगों को बंधक बना लिया गया है। इस दावे को शिव मंदिर के पुजारी दीपक शर्मा ने खारिज कर दिया है।”

चित्र साभार- @HajiRangrez786

पुजारी ने ऑपइंडिया से बताई सच्चाई

वायरल हो रहे इन तमाम दावों की पुष्टि के लिए ऑपइंडिया ने 2 अगस्त को पुजारी दीपक शर्मा से बात की। यह बातचीत लगभग आधे घंटे तक चली। आधे घंटे की बातचीत में पुजारी अपने बयान को तोड़-मरोड़ कर और आधा-अधूरा दिखाने से काफी दुखी लगे। थोड़ा नॉर्मल होने के बाद उन्होंने कहा कि 3 तरफ से घिरे पहाड़ों पर से मंदिर पर गोलियाँ बरसाईं गई थीं।

ऑपइंडिया से बातचीत के दौरान पुजारी ने यह भी कहा कि मंदिर परिसर के अंदर हिंसा के दावों की वो पुष्टि नहीं करते। उन्होंने यह भी कहा कि जिस घटना को उन्होंने अपनी आँखों से नहीं देखा, उसका खंडन भी वे नहीं कर सकते। हमने मंदिर परिसर के वायरल हो रहे तमाम वीडियो के बारे में भी पुजारी से पूछा।

इस पर पुजारी दीपक शर्मा ने बताया कि इंटरनेट बंद है वर्ना वो भी उसे देखते और फिर उसी हिसाब से बात करते। जब हमने पुजारी से पूछा कि क्या वो गारंटी ले रहे हैं कि मंदिर परिसर में कुछ भी नहीं हुआ तो उन्होंने कहा, “मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ कि मैं अंदर था और मैंने नहीं देखा।”

ऑपइंडिया के पास मौजूद वीडियो में एक पुलिसकर्मी मंदिर की बॉउंड्री पर चढ़कर लोगों को बचाने के लिए हवाई फायरिंग करता दिखाई दे रहा है। वहीं, एक अन्य वीडियो में मंदिर परिसर में एक घायल व्यक्ति पड़ा दिखाई दे रहा है। लोगों को उसके पैर में पट्टी बाँधते देखा जा सकता है।

मंदिर के पुजारी हमसे बातचीत के दौरान अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंतित दिखे। उन्होंने आसपास के माहौल और हालात की भी बात की। उनका यह भी कहना था कि वो जिन-जिन बातों के चश्मदीद होने का दावा करेंगे, उनमें उनको कानूनी प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ेगा।

सारांश में दीपक शर्मा ने हमें बताया कि वो सिर्फ उन्हीं बातों की गारंटी ले सकते हैं, जो उनकी आँखों के आगे हुआ है। उनका कहना था कि मंदिर परिसर काफी बड़ा है और वो हर तरफ नहीं देख सकते थे। नल्हड मंदिर के पुजारी ने यह भी बताया कि वह कोई बयान देने से पहले कुछ लोगों से सलाह करते हैं। हालाँकि, वो सलाहकार कौन हैं इसका उन्होंने खुलासा नहीं किया।

500 दंगाइयों ने घेर रखा था राम मंदिर, भीतर फँसे थे 40 श्रद्धालु: ड्यूटी मजिस्ट्रेट अदीब हुसैन की शिकायत पर दर्ज FIR में इस्लामी भीड़ के खतरनाक इरादों का खुलासा

हरियाणा के मेवात के नूहं में 31 जुलाई 2023 को मुस्लिम भीड़ ने जलाभिषेक यात्रा में शामिल हजारों हिंदू श्रद्धालुओं पर हमला किया था। ऑपइंडिया को इस मामले में दर्ज कई एफआईआर मिली हैं। ड्यूटी मजिस्ट्रेट अदीब हुसैन की शिकायत पर भी एक FIR दर्ज हुई है। इस एफआईआर में 400-500 इस्लामिक दंगाइयों द्वारा राम मंदिर में श्रद्धालुओं को बंधक बनाने की घटना के बारे में बताया गया है।

एफआईआर में बताया पूरा घटनाक्रम

अदीब हुसैन टौरू पीएचईएस में सब डिवीजनल इंजीनियर हैं। बृजमंडल जलाभिषेक यात्रा के लिए नूहं थाने में बतौर ड्यूटी मजिस्ट्रेट उनकी तैनाती की गई थी। अदीब हुसैन की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 148, 149, 186, 332, 307, 342 और शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के तहत 400-500 अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

नूहं दंगे की एफआईआर का एक हिस्सा

अपनी शिकायत में अदीब हुसैन ने कहा कि वह मैनेजिंग ऑफिसर ओमबीर सिंह के साथ थे। तभी 400-500 दंगाइयों ने श्रद्धालुओं और पुलिसकर्मियों पर पथराव और अवैध हथियारों से गोलियाँ चलानी शुरू कर दी। उनका इरादा जान से मारने का था। दंगाइयों ने सरकारी और निजी वाहनों को जला दिया। हमले के समय हुसैन और ओमबीर सिंह नूहं बस स्टैंड पर थे। उन्हें जानकारी मिली थी कि सैकड़ों दंगाइयों ने 35-40 श्रद्धालुओं पर हमला कर उन्हें वार्ड नंबर 9 में स्थित राम मंदिर में बंधक बना लिया है।

अदीब हुसैन ने अपनी शिकायत में कहा है कि दंगाई श्रद्धालुओं को राम मंदिर परिसर से बाहर नहीं जाने दे रहे थे। जब वे मौके पहुँचे तो 400-500 दंगाइयों ने लाठी, डंडे, पत्थर और अवैध हथियारों के साथ उन्हें मारने के लिए उन पर गोली चलानी शुरू कर दी। इस दौरान अदीब हुसैन ने ओमबीर सिंह व अन्य पुलिस अधिकारियों को दंगाइयों को तितर-बितर करने के लिए उचित बल का उपयोग करने का निर्देश दिया। इसमें उन्हें सफलता भी मिली। दंगाई भाग गए। इसके बाद उन्होंने बंधक बने श्रद्धालुओं को मुक्त कराया।

मेवात के नूहं में शोभा यात्रा पर हुए हमले को ऑपइंडिया बड़े पैमाने पर कवरेज कर रहा है। पूरा कवरेज देखने के लिए यहाँ क्लिक करें।

‘लाल डायरी’ से सीएम गहलोत की मुश्किलें बढ़ाने वाले कॉन्ग्रेस नेता राजेंद्र गुढ़ा के घर पहुँची पुलिस: एक दिन पहले ही POCSO में दर्ज हुआ है मामला, सहयोगियों पर भी कार्रवाई

राजस्थान में अपनी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने पर बर्खास्त हुए पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़़ा (Rajendra Gudha) के घर बुधवार (2 अगस्त 2023) की रात पुलिस पहुँची। पुलिस का कहना है कि गुढ़ा के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज है। कॉन्ग्रेस MLA राजेंद्र गुढ़ा ने ‘लाल डायरी’ के जरिए सीएम अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को लेकर कई बड़े खुलासे करने का दावा किया है।

राजेंद्र गुढ़ा के घर पहुँची पुलिस टीम से ‘आज तक’ ने बात की। इस बातचीत में थाना अधिकारी ने कहा है कि राजेंद्र गुढ़ा के खिलाफ 2 जुलाई 2023 को पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है। यानी एक दिन पहले। इस मामले की जाँच के लिए पुलिस उनके घर पहुँची है।

जब आज तक के रिपोर्ट ने पूछा कि क्या है मामला, क्या हुई थी घटना तो थानाधिकारी ने कहा कि वह पूरे मामले को देखकर बता पाएँगे। बताते चलें कि जोधपुर की पुलिस रात में ही गुढ़ा के घर पहुँच, लेकिन वह स्पष्ट रूप से नहीं पता पा रही है कि यह मामला दरअसल है क्या।

हॉस्पिटल में कब्जा मामले में लटक रही गिरफ्तारी की तलवार

बता दें कि दक्षिण अफ्रीका में रह रहे डॉक्टर बनवारी लाल मील के हॉस्पिटल की जमीन पर कब्जा मामले में राजेंद्र गुढ़ा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इस मामले में पुलिस ने साल 2022 में गुढ़ा के पीए दीपेंद्र सिंह और साले अभय सिंह व बिल्डर सत्यनारायण गुप्ता को गिरफ्तार किया था।

बाद में पुलिस ने राजेंद्र गुढ़ा को भी आरोपित बनाया था। अब इस मामले की जाँच का जिम्मा सीआईडी-सीबी को दिया गया है। ऐसे में माना जा रहा है कि जाँच की अगली कड़ी में गुढ़ा को भी गिरफ्तार किया जा सकता है। विधानसभा में लाल डायरी दिखाने के बाद गहलोत सरकार ने इसकी फिर से जाँच शुरू की है।

प्रदेश के जलदाय मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता महेश जोशी ने गुढ़ा पर मानहानि का दावा करने की धमकी दी है। वहीं, गुढ़ा के नजदीकी माने जाने वाले उदयपुरवाटी नगरपालिका के सभापति रामनिवास सैनी को सरकार ने निलंबित कर दिया है। स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक हृदेश शर्मा ने चार बागवानों की भर्ती में अनियमितता बताकर सैनी के खिलाफ जाँच के आदेश दिए हैं।

राजेंद्र गुढ़ा ने जारी किए ‘लाल डायरी’ के पन्ने

राजेंद्र गुढ़ा ने बुधवार (2 अगस्त, 2023) को जयपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ‘लाल डायरी’ के 3 पन्ने जारी किए थे। गुढ़ा ने दावा किया कि सीएम गहलोत के करीबी और राजस्थान पर्यटन विकास निगम के चेयरमैन धर्मेंद्र राठौड़ ने इन पन्नों में गहलोत के बेटे वैभव गहलोत और भवानी सामोता समेत कई लोगों के लेन-देन के बारे में लिखा है।

भवानी समोता पूर्व RAS अधिकारी हैं और अभी राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव हैं। समोता कॉन्ग्रेस के नेता और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी के करीबी हैं। वे सीपी जोशी के निजी सचिव भी रह चुके हैं।

बता दें कि राजेंद्र गुढ़ा द्वारा विधानसभा में ‘लाल डायरी’ लहराने के बाद से भाजपा राजस्थान की गहलोत सरकार पर हमलावर है। वहीं, अशोक गहलोत की सरकार राजेंद्र गुढ़ा के खिलाफ दर्ज पुराने मुकदमे को खोल रही है। इसके साथ ही उन पर कार्रवाई के जरिए दबाव बनाया जा रहा है।

इस कार्रवाई को लेकर गुढ़ा का कहना है कि उनके खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। इन मुकदमों के जरिए उन्हें जेल में भी डाला जा सकता है। गुढ़ा का कहना है कि यदि उन्हें गिरफ्तार कर जेल में डाला तो ‘सरकार के समाचार समाप्त हो जाएँगे। लोग कहेंगे वन्स अपॉन ए टाइम, देयर वॉज ए अशोक गहलोत (एक समय था, जब अशोक गहलोत थे)’। 

बताते चलें कि साल 2020 में जब अशोक गहलोत सियासी संकट में फँसे थे तो राजेंद्र गुढ़ा ने उनकी भरपूर मदद की थी। गुढ़ा ने बसपा के सभी छह विधायकों को कॉन्ग्रेस में शामिल करवाया था। इसके बाद कॉन्ग्रेस की सरकार बची थी।

राजस्थान में 14 साल की लड़की को कोयले की भट्टी में जलाया, गैंगरेप के बाद हत्या की आशंका: चाँदी के कड़े और जूते से हुई पहचान

राजस्थान के भीलवाड़ा में 14 साल की एक लड़की को कोयला की भट्टी में जलाने का मामला सामने आया है। गैंगरेप के बाद हत्या की आशंका जताई जा रही है। इस मामले में तीन लोगों को हिरासत में लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है। घटना बुधवार (2 अगस्त, 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला भीलवाड़ा जिले के कोटड़ी थाना क्षेत्र के नरसिंहपुरा गाँव का है। मृतक लड़की बुधवार सुबह अपनी माँ के साथ बकरियाँ चराने गई थी। दोपहर में माँ बकरी लेकर घर वापस आ गई। लेकिन लड़की घर नहीं पहुँची। काफी समय बीत जाने के बाद भी जब लड़की घर नहीं पहुँची तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। गाँव के खेतों से लेकर आसपास के रिश्तेदारों तक के घर तलाशने के बाद भी उसका कुछ पता नहीं चल पाया।

दैनिक भास्कर ने मृतक नाबालिग लड़की के भाई के हवाले से कहा है, “रात करीब 10 बजे गाँव के बाहर कालबेलियों के डेरे के पास कोयला की एक भट्टी जलती दिखाई दी। बारिश के दिनों में भट्टी नहीं जलाई जाती है। ऐसे में लोगों को शक हुआ। भट्टी के पास जाकर देखने पर वहाँ लड़की के जूते दिखाई दिए। साथ ही भट्टी में लड़की के हाथ में पहना हुआ चाँदी का कड़ा और हड्डी के टुकड़े मिले। इसके बाद ग्रामीणों कालबेलियों को पकड़कर उनसे पूछताछ की। इस पर तीन लोगों ने गैंगरेप कर भट्टी में जलाने की बात कही।”

इसके बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही 4 थानों की पुलिस व अन्य अधिकारी मौके पर पहुँच गए। रात में ही फोरेंसिक टीम बुलाकर जाँच कराई गई।

इस घटना को लेकर राजस्थान बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी ने ट्वीट कर कहा है, “शाहपुरा, भीलवाड़ा में हैवानियत की हदें पार कर देने वाली हृदय विदारक घटना हुई है। नाबालिग लड़की से गैंगरेप कर आरोपितों ने उसे कोयले की भट्टी में जला दिया। प्रशासन की नाकामी देखिए पुलिस से कोई सहयोग नहीं मिला। परिजनों द्वारा स्वयं जाँच कर मृत बच्ची को ढूँढ़ा।”

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा, “लानत है प्रदेश कॉन्ग्रेस सरकार पर जो महिला अपराध पर दूसरे राज्यों को कोसते हैं। लेकिन अपने राज्यों के अपराध पर बिल्कुल नियंत्रण नहीं। विपक्ष द्वारा बार-बार चेताने पर भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जी को कोई फर्क नहीं पड़ता, वो अपनी घोषणाओं में व्यस्त है।”

मुहर्रम के जुलूस के दौरान मुस्लिम भीड़ ने लगाए ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे, वीडियो वायरल, यूपी पुलिस ने किया 33 उपद्रवियों को गिरफ्तार

मुहर्रम के 10वें दिन शनिवार (29 जुलाई) को निकाले गए ताजिए के जुलूस के दौरान भारत विरोधी और पाकिस्तान समर्थक नारे लगाने के आरोप में जौनपुर जिले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने 33 लोगों को गिरफ्तार किया।

यह कार्रवाई घटना की 30 सेकंड की वीडियो क्लिप के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद की गई, जिसमें मुस्लिमों को अल्लाह-हु-अकबर, नारा-ए-तकबीर और पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते हुए सुना जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना उत्तर प्रदेश के जौनपुर के गोधना गाँव की बताई जा रही है।  

जौनपुर पुलिस ने इस मामले में मंगलवार (1 अगस्त 2023) को एक वीडियो बाइट जारी कर घटना की जानकारी दी। घटना के बारे में बोलते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) ग्रामीण शैलेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि 31 जुलाई को सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया जिसमें 10वीं मुहर्रम के जुलुस के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों को भारत विरोधी और ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाते हुए देखा जा सकता है। ताजिए का यह जुलुस 29 जुलाई को जो जुलूस निकाला गया था। 

उन्होंने कहा कि यह घटना मीरगंज पुलिस थाने की सीमा के अंतर्गत आने वाले गोधना गाँव में हुई।

एएसपी ने आगे बताया कि पुलिस ने तुरंत वीडियो का संज्ञान लिया और 33 लोगों पर धारा 153ए (धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 153बी (राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक आरोप, दावे; यदि सार्वजनिक पूजा स्थल आदि में किया गया हो) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

साथ ही 259ए (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य, जिसका उद्देश्य किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना ), 188 (किसी आदेश की जानबूझकर की गई अवज्ञा को अपराध माना जाता है, जिसे ऐसा करने के लिए कानून द्वारा सशक्त लोक सेवक द्वारा विधिवत प्रख्यापित किया गया है) और आईपीसी की धारा 505(2) (घृणास्पद भाषण) के तहत मामला दर्ज करते हुए कार्रवाई की गई है। 

‘अल्लाह-हू-अकबर’ और ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगा रही थी मुस्लिम भीड़: पुलिस ने रोका तो कर दिया हमला – FIR में दर्ज डिटेल

हरियाणा के नूहं में कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ ने सोमवार (31 जुलाई 2023) को जलाभिषेक यात्रा में शामिल हजारों हिंदू श्रद्धालुओं पर हमला कर दिया था। इस मामले में दर्ज की गई FIR से कई जानकारियाँ सामने आईं हैं। हरियाणा पुलिस के असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर (ASI) धर्मेंद्र द्वारा कराई गई FIR में कहा गया है कि आपत्तिजनक नारे लगाते हुए हिंसक भीड़ ने नल्हड महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं पर हमला किया था।

क्या है FIR में

ASI धर्मेंद्र की तहरीर पर IPC की धारा 148, 149, 295 ए, 332, 353, 186, 188, 427, 435, 307, शस्त्र अधिनियम की धारा 25 और सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम की धारा 4 के तहत केस दर्ज किया गया है। नामजद आरोपितों में लुकमान, साहिल, वाज़िद हुसैन, ज़ाकिर और मुश्ताक हैं। इनके अलावा, 800-900 हमलावर अज्ञात दिखाए गए हैं।

ASI धर्मेंद्र ने अपनी शिकायत में कहा है कि जलाभिषेक यात्रा के दौरान वो ASI अरुण सिंह, हेड कॉन्स्टेबल जितेंद्र, होमगार्ड बीर सिंह, होमगार्ड त्रिलोक, होमगार्ड एजाज, एसपीओ नरेंद्र और ड्राइवर मोहम्मद बिलाल के साथ मंदिर की सुरक्षा में तैनात थे।

शिकायत में आगे बताया गया है कि मंदिर में चल रहे कार्यक्रम के दौरान समुदाय विशेष के लगभग 800 से 900 अज्ञात लोग साजिश के तहत पहुँच गए। वो एक साजिश के तहत धार्मिक कार्यक्रम में उपद्रव मचाने के लिए शिव मंदिर की तरफ बढ़े। ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाती भीड़ के पास लाठी-डंडे, पत्थर और अन्य अवैध हथियार थे।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, उन्होंने अपनी टीम के साथ इस भीड़ को रोकने की कोशिश की, लेकिन भीड़ ने मजहबी नारे लगाते हुए जलाभिषेक के लिए मौजूद श्रद्धालुओं और पुलिसकर्मियों को मारने की नीयत से उन पर हमला कर दिया।

FIR Copy

FIR के मुताबिक, इस गोलीबारी में होमगार्ड बीर सिंह और त्रिलोक घायल हो गए। रोकने की पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद भीड़ ने पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगा कर मंदिर की तरफ बढ़ना जारी रखा। इस बीच पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हवाई फायरिंग की।

हालाँकि, इस फायरिंग के बाद भीड़ ने भागने के बजाय मंदिर की तरफ जा रहीं गाड़ियों को जलाना शुरू कर दिया। ‘अल्लाह-हू-अकबर’ और ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाते हुए हिंसक भीड़ ने वाहनों पर पेट्रोल बम फेंक दिया आग लगा दी।

ज्ञानवापी ढाँचे का जारी रहेगा सर्वे: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी कोर्ट के फैसले को रखा बरकरार, मुस्लिम पक्ष को लगा बड़ा झटका

वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर में एएएसआई द्वारा किए जा रहे सर्वे पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला आ गया है। कोर्ट ने गुरुवार (3 अगस्त 2023) को दिए अपने फैसले में सर्वे को जारी रखने को कहा है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की ओर से फैसला आने के बाद अब ज्ञानवापी परिसर का एएसआई सर्वे नहीं रोकी जाएगी। इस फैसले का इंतजार हिंदू और मुस्लिम, दोनों पक्ष द्वारा किया जा रहा था। 

ज्ञानवापी सर्वेक्षण मामले में हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा, “इलाहाबाद HC ने कहा है कि ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का एएसआई सर्वेक्षण फिर से शुरू होगा। सत्र अदालत के आदेश को हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है।”

वाराणसी की जिला अदालत ने पिछले महीने एएसआई को वज़ुखाना को छोड़कर मस्जिद का सर्वेक्षण करने की मंजूरी दी थी। इसमें एक संरचना है, जिसके बारे में दावा किया गया है कि यह शिवलिंग है। सर्वेक्षण का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या ढाँचा काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर बनाई गई है या नहीं। HC से फैसला आने के बाद सर्वे का काम आज गुरुवार से ही शुरू हो सकता है।

बता दें कि मस्जिद कमेटी की ओर से जिला कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने केस संबंधित हाईकोर्ट में ले जाने का आदेश दिया था। वहीं, अब हाईकोर्ट ने अपने फैसले में मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी है।

रिपोर्ट के अनुसार, ज्ञानवापी परिसर के एएसआई सर्वे पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी थी। दरअसल, वाराणसी के जिला जज डॉ. अजय कुमार विश्वेश ने 21 जुलाई को ज्ञानवापी परिसर के सर्वे का आदेश दिया था। जिला कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है। इस प्रकार ज्ञानवापी परिसर के एएसआई पर लगी रोक भी हट गई है।

डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के फैसले के बाद एएसआई की टीम ने 24 जुलाई 2023 को सर्वे का काम शुरू किया था। सर्वे शुरू होते ही मस्जिद कमेटी सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने एएसआई सर्वे पर 26 जुलाई शाम 5 बजे तक रोक लगाते हुए हाईकोर्ट जाने के लिए कहा था। इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई कर 27 जुलाई को फैसला सुरक्षित रख लिया था।

मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका

हाईकोर्ट के फैसले ने साफ कर दिया है कि जिला कोर्ट के आदेश के तहत चल रही सर्वे की प्रक्रिया को आगे भी जारी रखा जाएगा। इस फैसले से मुस्लिम पक्ष को तगड़ा झटका लगा है।  बता दें कि जिला कोर्ट ने एएसआई को सर्वे का काम पूरा कर 4 अगस्त तक रिपोर्ट देने का आदेश जारी किया था।

वाराणसी के जिला जज डॉ. अजय कुमार विश्वेश की अदालत में 4 अगस्त 2023 को ज्ञानवापी परिसर के एएसआई सर्वे पर सुनवाई होनी है। कल शुक्रवार को जिला कोर्ट में एएसआई की ओर से सर्वे को लेकर स्टेटस रिपोर्ट पेश किया जा सकता है। जिला अदालत राखी सिंह, जितेंद्र सिंह बिशेन एवं अन्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है।

‘हिंदू महिलाओं की इज्जत लूटने के लिए रात का इंतजार कर रही थी कट्टरपंथी मुस्लिम भीड़’: भुक्तभोगी महिला का सनसनीखेज खुलासा

हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा पर हमले के बाद हरियाणा के नूहं में हिंसा फैल गई थी। 31 जुलाई 2023 को धार्मिक शोभायात्रा पर कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा हमला किया गया, जिसमें कई मौत हो गई और पुलिस सहित दर्जनों लोग घायल हो गए। नूहं का मुस्लिम बहुल इलाका अशांति का केंद्र था, जो धीरे-धीरे राज्य गुरुग्राम और सोहना जैसे अन्य क्षेत्रों तक फैल गया।

इस हिंसा के दौरान कई लोगों ने अपने कटु अनुभवों को साझा किया है। इसी कड़ी में, एक हिंदू महिला ने अपने एक साक्षात्कार में उस दिन की दिल दहला देने वाली घटना को बयान किया है। महिला ने बताया कि कैसे स्त्रियाँ अपनी इज्जत बचाने में कामयाब रहीं।

महिला ने अपने इंटरव्यू में बताया, “जब आसपास की झाड़ियों से गोलियाँ चलने लगीं तो हिंदू भाई बाहर थे। बिजली विभाग द्वारा बिजली काट दी गई। वे (मुस्लिम) हिंदू महिलाओं की इज्जत लूटने (रेप) के लिए सूरज डूबने और रात होने का इंतजार कर रहे थे। ये हम ही जानते हैं कि कैसे हमने अपनी इज्जत बचाई।”

घटना के बारे में बताते हुए हिंदू महिला कई बार रो पड़ी। उसने बताया, “हमने अपने भाइयों को मरते देखा। हम जानते हैं कि हमारे भाइयों को कैसे गोली मारी गई। हमारे पास उनके घावों को ढँकने के लिए पट्टियाँ भी नहीं थीं। इसलिए हमने उन पर अपनी चुन्नी और दुपट्टा बाँध दिया।” हिंदुओं पर की जाने चौतरफा गोली-बारी को याद करके महिला अब भी सिहर उठती है।

महिला ने सवालिया लहजे में आगे कहा, “क्या हम मरने के लिए वहाँ गए थे? क्या हम वहाँ दर्शन नहीं कर सकते? ये लोग (मुस्लिम) अपना जुलूस निकालते हैं। क्या हम में से किसी को उन पर आपत्ति है? हमारे पास पीने का पानी तक नहीं था। हमने शिवलिंग पर चढ़ाए जाने वाले जल से अपना गला तर किया।”

महिला ने कहा, “उस दौरान बिजली काट दी गई थी। हम क्या कर सकते थे? वे हिंसा के लिए हम पर आरोप लगा रहे हैं। यदि हम ऐसा करना चाहते तो क्या हम अपने बच्चों को साथ लाते? क्या हम मरने के लिए अपनी माताओं और बुजुर्गों को अपने साथ वहाँ लाएँगे? क्या महिलाओं और बच्चों का हमारे लिए कोई मूल्य नहीं है?”

जीवित बचने के सवाल पर महिला ने बताया, “उस समय तक वहाँ कोई पुलिस नहीं थी। बाद में प्रशासन के पहुँचने के पर हम वहाँ से किसी तरह बच के निकले। हमें अपनी जान बचाने के लिए गाड़ियों के नीचे और खेतों के बीच से रेंगकर निकलना पड़ा। हमें जानवरों की तरह सरकारी बसों में ठूँस दिया गया था।”

उन्होंने कहा, “हमारे जले हुए गाड़ियों के धुएँ से आसमान काला हो गया था। इतना काला कि मौसम ख़राब होने पर भी आसमान में इतना अंधेरा नहीं होता। मैं सरकार और पीएम नरेंद्र मोदी से हाथ जोड़कर अनुरोध करना चाहती हूँ कि हम 2024 में तभी वोट करेंगे, जब आप मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को बर्खास्त करेंगे।”

महिला ने आगे कहा, “हम भाजपा को तभी वोट देंगे, जब यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे योग्य और कुशल किसी व्यक्ति को यहाँ रखेंगे। वर्तमान मुख्यमंत्री 2000-2500 महिलाओं को नहीं बचा सके तो दूसरों को कैसे बचाएँगे? हमने सोमवार का व्रत किया था और पानी भी नहीं पी थी। हम वहाँ बेहोश हो रहे थे।”

कट्टरपंथियों ने पानीपत बजरंग दल के प्रखंड संयोजक अभिषेक चौहान उर्फ अभिषेक राजपूत की हत्या कर दी। अभिषेक को पहले गोली मारी गई, फिर उनका गला काट दिया गया था। अभिषेक की बहादुरी को लेकर एक अन्य महिला ने कहा था कि वह महिलाओं को बचाने के खातिर अपनी जान गँवा दी।

पानीपत की एक महिला ने मीडिया से बात करते हुए खुद को हिंसा की भुक्तभोगी बताया। महिला ने कहा, “उन्होंने (मुस्लिम भीड़ ने) हमारे बस पर पथराव किया। हमारे बच्चे हमें बचाने के लिए नीचे उतरे। निहत्थे होने के बावजूद भी उन्होंने (अभिषेक चौहान ने) हमें बचाने की पूरी कोशिश की। वो डरे नहीं कि उनके हाथ में हथियार नहीं है।”

महिला ने आगे कहा, “बस में सारी औरतें और बच्चे थे। उन्होंने (अभिषेक राजपूत) ने बहादुरी से मुकाबला किया। हमारा बच्चा बलिदान हो गया। हमें गर्व है कि ये बच्चा हमारे पानीपत का था।” लोगों ने अभिषेक के लिए बलिदानी का दर्जा देने की माँग की।

गौरतलब है कि मीडिया में मुस्लिमों और उनके सेक्युलर सहयोगियों ने हिंसा के लिए बार-बार बजरंग दल के सदस्य मोनू मानेसर उर्फ ​​मोहित यादव को दोषी ठहराया। मोनू मानेसर ने एक वीडियो संदेश जारी करके साफ कहा कि वह जुलूस में मौजूद नहीं थे। उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।

वहीं, VHP ने स्थानीय कॉन्ग्रेस विधायक मम्मन खान और आफताब पर हिंसा के उकसाने का आरोप लगाया और इनके द्वारा किए गए कई ट्वीट को साझा किया। विश्व हिंदू परिषद के महासचिव सुरेंद्र जैन ने कहा कि मामन खाँ ने चार महीने पहले विधानसभा में कहा था कि किसी की हिम्मत है तो मेवात में घुसकर दिखा दे।

वीएचपी महासचिव सुरेंद्र जैन ने कहा कि एक और कॉन्ग्रेसी नेता हैं आफताब साहब। उन्होंने कहा कि अगर गाँव में पुलिस वाले आएँ तो उनके हाथ-पैर तोड़ दो। उनकी चिंदी-चिंदी कर दो। उन्होंने कहा कि आफताब मेवात में ही रहते हैं।

जिस पुजारी के वीडियो पर वामपंथी-इस्लामी फैलाए प्रोपेगेंडा, उन्होंने कहा – ‘लोग मुझे यूज कर रहे… घटना को आँखों से नहीं देखा, ये नहीं कहा कि कुछ हुआ नहीं’

हरियाणा के नूहं इलाके में 31 जुलाई (सोमवार) को भड़की हिंसा के बाद एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। यह वीडियो उस नल्हड मंदिर के पुजारी का है, जिसकी तरफ बढ़ रही मुस्लिम भीड़ का जिक्र हरियाणा पुलिस की FIR में भी है। इस वीडियो में पुजारी को कहते सुना जा सकता है कि मंदिर में और उसके आस-पास कुछ हुआ ही नहीं। पुजारी के इसी बयान के आधार पर एक वामपंथी मीडिया गिरोह द्वारा हिन्दू संगठनों पर ही झूठ बोलने और हिंसा की बातें झूठी होने का नैरेटिव गढ़ा जाने लगा।

पुजारी का यह इंटरव्यू लल्लनटॉप ने लिया है। 21 सेकेंड के इस वीडियो को @AG_knocks ने 1 अगस्त 2023 को शेयर किया। इस वीडियो पर लगभग 90 हजार व्यूज आ चुके हैं। वीडियो में पुजारी को कहते सुना जा सकता है, “मंदिर के अंदर कुछ नहीं हुआ। जो भी हुआ, वो मंदिर के बाहर लगभग 1 से डेढ़ किलोमीटर दूर।”

द वायर ने तो इसी बयान के आधार पर बाकायदा एक स्टोरी भी प्रकाशित कर दी है। इस रिपोर्ट में वायर ने हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज को ही गलत ठहरा दिया है। लेकिन 21 सेकंड के वीडियो से पुजारी की पूरी बात को समझा जा सकता है? क्या पुजारी ने जो बोला, उसका गलत अर्थ निकाल कर वायरल किया गया?

ऑपइंडिया ने पुजारी से की बात

इस पूरे मामले की असलियत पता करने के लिए ऑपइंडिया ने नल्हड मंदिर के पुजारी को सम्पर्क किया। पुजारी का नाम दीपक शर्मा है, जिन्होंने खुद को मूल रूप से पंजाब का निवासी बताया। उन्होंने कहा कि वो लगभग ढाई साल से मंदिर में रह कर पूजा अर्चना करते हैं। 21 सेकंड के प्रोपेगेंडा वीडियो के पीछे का सच जानने के लिए हमने उनसे 30 मिनट बात की।

दीपक शर्मा के मुताबिक उन्होंने जो भी बयान दिया, उसका अर्थ यह नहीं लगाया जाए कि घटना हुई ही नहीं थी। सफाई देते हुए दीपक ने कहा कि उनका मतलब ये था कि वो घटना को अपनी आँखों से देख नहीं पाए। बकौल दीपक शर्मा 2 बजे तक सब सामान्य था लेकिन उसके बाद अचानक ही सब अस्त-व्यस्त हो गया।

नल्हड मंदिर के पुजारी दीपक शर्मा ने हमसे बताया कि मंदिर के बाहर गोलियाँ चल रहीं थीं और लोगों में अफरातफरी मची हुई थी। घटना के समय खुद को मंदिर के अंदर पूजा वाली जगह पर बताते हुए उन्होंने कहा कि वो देख नहीं पाए कि मंदिर के अन्य हिस्सों में क्या-क्या हुआ।

दीपक शर्मा का यह भी कहना है कि मंदिर का गर्भगृह वाला इलाका ही CCTV से कवर है। बाकी क्षेत्रों में खराब मौसम की वजह से कैमरों और तारों में खराबी आ गई थी। पुजारी ने इस बात पर भी चिंता जताई कि उन्हें कुछ लोग राजनैतिक स्वार्थों के लिए प्रयोग कर रहे हैं।

ऑपइंडिया से बात करते हुए मंदिर के पुजारी दीपक शर्मा ने कहा कि उन्हें लग रहा है कि उनको कोई फँसाना चाहता है। जब हमने मंदिर के अंदर घायलों के वायरल वीडियो के आधार पर दीपक से सवाल किया तो उन्होंने कहा कि मंदिर के हर हिस्से को देख पाना उनके लिए संभव नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि नूहं में इंटरनेट बंद है वर्ना वो मंदिर के अंदर होने वाले वायरल वीडियो को मँगा कर देखते और उसी हिसाब से स्थिति को और स्पष्ट करते।

बातचीत में पुजारी दीपक शर्मा ने बताया कि मंदिर के तीन तरफ घिरे पहाड़ों से गोलियाँ बरसाईं जा रहीं थीं। खूब शोर-शराबा भी हो रहा था। आपको बता दें कि फिलहाल मंदिर में पैरामिलिट्री ITBP की टुकड़ियाँ तैनात हैं। अभी हालात सामान्य हैं।

कर्नाटक के बाद अब मुंबई में निकला कॉलेज में बुर्का का जिन्न: मुस्लिम छात्राएँ अबाया पहनकर क्लास में जाने पर अड़ीं, कॉलेज ने रोका तो किया हंगामा

मुंबई के एक कॉलेज में मुस्लिम छात्राएँ बुर्का पहनकर पहुँच गई। इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने उन्हें कॉलेज परिसर में घुसने से रोक दिया। बाद में छात्राओं के परिजनों के हंगामे और पुलिस प्रशासन द्वारा समझाने के बाद उन्हें परिसर में घुसने की इजाजत दी गई।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि चेंबूर स्थित आचार्य मराठे कॉलेज कॉलेज के सुरक्षा गार्डों ने बुधवार यानी 2 जुलाई 2023 को बुर्के में आईं छात्राओं को कॉलेज में घुसने से रोक दिया था। उनसे बुर्का हटाकर कॉलेज में घुसने के लिए कहा गया। सुरक्षा गार्डों ने कहा कि कॉलेज की अपनी ड्रेस है, इसलिए बुर्का पहनकर नहीं जाया जा सकता।

कॉलेज के इस फैसले पर विवाद हो गया। छात्राओं ने बुर्का हटाने से इनकार कर दिया। इसके अलावा, उन्होंने फोन करके अपने परिजनों को कॉलेज बुला लिया। इसके बाद मुस्लिम छात्राओं के परिजन कॉलेज पहुँच गए और जमकर हंगामा किया। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने हंगामे की जानकारी पुलिस-प्रशासन को दी। जानकारी मिलते ही पुलिस-प्रशासन मौके पर पहुँची और छात्राओं के परिजनों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे बुर्का हटाने के लिए तैयार नहीं हुए। इसके बाद पुलिस ने मुस्लिम छात्राओं के माता-पिता और कॉलेज प्रशासन से चर्चा कर हल निकालने की कोशिश की।

एक अधिकारी ने कहा कि मुस्लिम छात्राओं ने कहा कि वे अंदर बुर्का हटाने को तैयार हैं, लेकिन कक्षा में स्कार्फ यानी हिजाब पहनेंगी। कॉलेज प्रबंधन क्लास में हिजाब पनने की छूट देने के लिए तैयार हो गया। इसके बाद तनाव शांत हुआ। लड़कियों को कक्षा में जाने से पहले वॉशरूम में बुर्का उतारना होगा।

कॉलेज के प्रिंसिपल विद्यागौरी लेले ने कहा कि लड़कियों को नकाब, हिजाब और बुर्का में प्रवेश दिया जाएगा। इसके बाद उन्हें वॉशरूम में जाकर नकाब, हिजाब और बुरका बदलना होगा। कॉलेज परिसर में स्टूडेंट्स को यूनिफॉर्म में ही रहना होगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जिस किसी छात्रा को कॉलेज का ड्रेस कोड स्वीकार्य नहीं है, वह कॉलेज छोड़ सकता है।

लेले ने कहा कि ड्रेस कोड इस वर्ष से जूनियर कॉलेज में लागू किया गया है। इसके बारे में एक मई को ही पैरेंट्स मीटिंग में जानकारी दे दी गई थी। उसके बाद ही यूनिफॉर्म लागू किया गया है। यह भी बता दिया गया था कि बुर्का, हिजाब, स्कार्फ पहनकर आने पर बैन लगाया जा रहा है। उस समय सभी लोग ड्रेस कोड से सहमत थे, लेकिन अब ये लोग विरोध कर रहे हैं।

उधर, बुर्का को लेकर विरोध प्रदर्शन करने वाली मुस्लिम लड़कियों का कहना था कि वे बुर्का पहने बिना अपने घर से निकलती हैं तो असहज महसूस करती है। उन्होंने यह भी कहा कि बुर्का उनकी धार्मिक प्रथा से भी जुड़ा हुआ मामला है। इसलिए वे क्लास में भी बुर्का पहनना चाहती हैं।

वहीं, विधायक अबू आसिम आजमी और पूर्व मंत्री नसीम खान ने पत्र लिखकर कॉलेज पर कार्रवाई की माँग की है। नसीम खान ने कहा कि संविधान ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और शिक्षा का मौलिक अधिकार देश के हर नागरिक को दिया है। 11वीं और 12वीं क्लास के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा विभाग ने कोई ड्रेस कोड निर्धारित नहीं किया है, इसके बावजूद एनजी आचार्य महाविद्यालय ने ड्रेस कोड लादा है।

बता दें कि बुर्का विवाद की शुरुआत कर्नाटक से हुई थी। इसमें स्कूल-कॉलेज का अपना ड्रेस कोड होने के बावजूद मुस्लिम छात्राएँ क्लास में बुर्का पहनकर बैठने पर अड़ी हुई थीं। हालाँकि, कॉलेज प्रशासन ने इसकी इजाजत नहीं दी। बाद में मामले हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा और लड़कियों को नियमों का पालन करने के लिए कहा गया। इस दौरान कट्टरपंथी इस्लामी संगठन सहित आतंकी संगठन मुस्लिम छात्राओं के साथ खड़े हो गए थे।