Home Blog Page 1635

पुलिस वालों को जिंदा जलाने आई थी मुस्लिम भीड़, थाने को घेर चिल्ला रहे थे – ‘उन्हें जिंदा जला दो’: नूहं मंदिर पुलिस उप-निरीक्षक की FIR में हर डिटेल

हरियाणा के मेवात के नूहं में 31 जुलाई को मुस्लिम भीड़ ने श्रावण सोमवार पर जलाभिषेक यात्रा में भाग लेने गए हजारों हिंदू भक्तों पर हमला किया। ऑपइंडिया को इस मामले में दर्ज कई एफआईआर मिली हैं। पुलिस उप-निरीक्षक (PSI) सूरज की शिकायत पर दर्ज FIR में इस्लामिक दंगाइयों द्वारा साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन नूहं पर हमले और पुलिस कर्मियों को जलाने की कोशिश के बारे में बताया गया है।

एफआईआर में बताया पूरा घटनाक्रम

पुलिस उप-निरीक्षक (PSI) की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 148, 149, 332, 353, 186, 427, 435, 436, 395 और 397 और शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के तहत FIR दर्ज की गई है। अपनी शिकायत में PSI सूरज ने बताया है कि वह साइबर क्राइम सेल नूहं में PSI सुधीर, हेड कॉन्स्टेबल गुलशन, कॉन्स्टेबल रघुबीर सिंह, कॉन्स्टेबल रविकांत और कॉन्स्टेबल शुभम के साथ थे।

पुलिस उप-निरीक्षक (PSI) सूरज के अनुसार हजारों दंगाइयों की भीड़ ने अचानक पुलिस स्टेशन का घेराव किया और पथराव शुरू कर दिया। भीड़ ‘उन्हें जिंदा जला दो’ के नारे लगा रही थी। हमले के समय एसआई दिग्विजय सिंह सदर तावडू और उनके साथी बोलेरो में बैठे थे। वे किसी तरह भागने में कामयाब रहे और पुलिस स्टेशन के अंदर आकर छिप गए। इस दौरान दंगाई पत्थरबाजी करते रहे।

नूहं दंगे की एफआईआर का एक हिस्सा

दंगाइयों ने पुलिस स्टेशन की दीवारों और मुख्य द्वार को तोड़ने के लिए पीले रंग की एक बस (कथित तौर पर अपहृत बस) का इस्तेमाल किया। फिर वे पुलिस स्टेशन की दीवारों और छत पर चढ़ गए और अवैध हथियारों का उपयोग कर पुलिसकर्मियों को मारने के उद्देश्य से उन पर गोलियाँ बरसानी शुरू कर दीं।

नूहं दंगे में दर्ज एक एफआईआर

पीएसआई सूरज और उनके साथी खुद को बचाने के लिए दीवार के पीछे छिप गए। कॉन्स्टेबल प्रदीप ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आँसू गैस के गोले का इस्तेमाल किया, लेकिन इस्लामिक भीड़ हमला करती जा रही थी। पुलिसकर्मियों को आत्मरक्षा में सरकार द्वारा अनुमति प्राप्त हथियारों का उपयोग करके हवाई फायर करना पड़ा। पुलिस ने कुल 105 राउंड फायरिंग की।

पीएसआई सूरज ने 20 राउंड फायर किए, जिसमें से दस राउंड अपनी बंदूक से और दस राउंड एएसआई संजय की बंदूक से दागे गए। पीएसआई सुधीर ने भी 20 गोलियाँ चलाईं। इसमें से दस गोलियाँ उनकी बंदूक से व 10 पीएसआई भजनलाल की सरकारी बंदूक से थीं। एएसआई सुरेश ने दस राउंड फायरिंग की। हेड कॉन्स्टेबल ने एसएलआर से 25 राउंड फायरिंग की। कॉन्स्टेबल रघुवीर ने एसएलआर का इस्तेमाल कर 25 राउंड फायरिंग की। कॉन्स्टेबल शुभम ने कार्बाइन से 15 राउंड फायरिंग की।

फायरिंग के बाद भी दंगाई पुलिस स्टेशन पर लगातार हमले कर रहे थे। कुछ देर बाद भीड़ ने वाहनों को जलाना शुरू कर दिया। पेट्रोल का उपयोग करके सरकारी और निजी दोनों वाहनों को जला दिया गया। दंगाइयों ने पुलिस स्टेशन परिसर के अंदर खड़े वाहनों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया।

इस दौरान एक बाइक सहित पाँच वाहन जल गए। वहीं दस वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। दंगाई एक प्लास्टिक कूलर, एक इन्वर्टर, एक बैटरी, एक लैपटॉप और एएसआई सुरेश का वॉलेट भी लूट कर ले गए। वॉलेट में 5,000 रुपए नकद और कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज थे। दंगाइयों ने मेस की दीवारों, पुलिस स्टेशन और वॉशरूम की छतों पर पानी की टंकियों को भी नुकसान पहुँचाया।

जैसा ही अतिरिक्त पुलिस बल थाने पहुँचा वैसे ही दंगाई पुलिसकर्मियों को जान से मारने की धमकी देकर भाग गए। इस हमले में हेड कॉन्स्टेबल सुरेंद्र और कॉन्स्टेबल शुभम घायल हुए हैं।

मेवात के नूहं में शोभा यात्रा पर हुए हमले को ऑपइंडिया बड़े पैमाने पर कवरेज कर रहा है। पूरा कवरेज देखने के लिए यहाँ क्लिक करें।

मंदिर पर हर तरफ से हो रहा था हमला, 4000 फँसे भक्त जान बचाने को भाग रहे थे इधर-उधर: पुलिस भी छिपने को हुई थी मजबूर, सामने आए कई वीडियो

हरियाणा के नूहं में 31 जुलाई 2023 को ब्रिजमंडल जलाभिषेक यात्रा पर कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ द्वारा किए गए हमले के डरावने वीडियो सामने आने लगे हैं। नल्हड़ के महादेव मंदिर में छिपे लगभग 4-5000 स्त्री-पुरुष और बच्चों पर चारों तरफ से फायरिंग की गई थी। यहीं पर महिलाओं को बचाने की कोशिश करने वाले अभिषेक चौहान उर्फ अभिषेक राजपूत की हत्या कर दी गई थी।

सामने आए वीडियो में दिख रहा है कि मंदिर के तीन ओर पहाड़ हैं। इन पहाड़ों पर से कट्टरपंथियों द्वारा मंदिर में आए श्रद्धालुओं पर गोलियाँ बरसाई जा रही हैं। गोली से बचने के लिए लोग कारों के पीछे छिपते नजर आ रहे हैं। वहीं, हरियाणा पुलिस का का एक जवान भी छिपने की कोशिश करता हुआ नजर आ रहा है।

मंदिर पर हमले और लोगों द्वारा बचने की कोशिश करते हुए कई वीडियो सामने आए हैं। इसी तरह एक और वीडियो सामने आया है, जिसमें एक दर्शनार्थी को गोली लगी है और वह मंदिर की फर्श पर गिरा हुआ है। लोग उसके घाव पर कपड़े बाँधने की कोशिश कर रहे हैं।

इसके साथ ही एक और वीडियो सामने आया जिसमें एक सफेद रंग की हुंडई वेन्यू कार दंगाइयों की भीड़ को लीड कर रही है। इस कार का नंबर PB 31 W 4831 है। कार के पीछे भीड़ आपत्तिजनक नारे नारे लगा रही है। भीड़ ‘नारा एक तकबीर अल्लाह हू अकबर’ चिल्ला रही है। वहीं, कार में मौजूद शख्स भीड़ को गाइड कर रहा है। इस दौरान पुलिस की गाड़ी भी दिख रही है, लेकिन भीड़ को इससे डर नहीं है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, यह वीडियो दिल्ली-अलवर हाईवे का है। यह हाइवे हरियाणा नूहं शहर के बीच से होकर गुजरता है। हिंसा वाले दिन दोपहर 12 बजे दंगाई होडल चौक पर इकट्ठा हुए और फिर हाईवे पर लगभग 2 किलोमीटर चलते हुए तिरंगा पार्क पहुँचे थे। इस तरह 20-25 की संख्या सैकड़ों में बदल गई।

मंदिर के सेवादार अमरपाल का कहना है कि मंदिर में आए यात्री वापस जा रहे थे। तभी मंदिर के गेट के आगे पहाड़ पर से फायरिंग की जाने लगी। कुछ यात्रियों की गाड़ियों को आग लगा दी गई। वे गाड़ी छोड़कर वापस मंदिर में आने लगे। इस तरह मंदिर में लगभग 4000 लोग इकट्ठा हो गए। अमरपाल के मुताबिक, उस दौरान मंदिर में गिने-चुने पुलिसवाले थे।

पहाड़ियों से गोलीबारी और सीमित संख्या में मौजूद पुलिसवाले स्थिति को नहीं संभाल पा रहे थे। वे फोन पर अधिकारियों से लगातार मदद माँगते रहे। हालाँकि मंदिर के पास फोर्स पहुँचने में 6 घंटे लग गए। शाम को 6 बजे वहाँ फोर्स पहुँची। इस बीच एक पुलिस वाला लोगों की जान बचाने के लिए पहाड़ों की तरफ हवाई फायरिंग करके हमलावरों को डराने की कोशिश कर रहा है, लेकिन हमलावरों को इससे फर्क नहीं पड़ा।

मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि यात्रा के वक्त मंदिर में फोर्स तैनात थी, लेकिन यात्रा जैसे ही आगे बढ़ी फोर्स भी उनके साथ आगे बढ़ गई। शहर के तिरंगा चौक पर दंगे के बाद यात्रा में शामिल लोग जान बचाकर वापस मंदिर आ गए, लेकिन उनके साथ फोर्स नहीं लौटी। संभवत: वह अपनी जान बचाने की जुगत में लग गई।

इस हमले में अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, 100 से अधिक लोग घायल हैं, जिनमें कुछ पुलिस वाले भी शामिल हैं। तनाव को देखते हुए 5 अगस्त की आधी रात तक नूहं, फरीदाबाद, पलवल, गुरुग्राम में मानेसर, पटोदी और सोहना इलाके में इंटरनेट बंद कर दिया गया है।

जॉर्ज जोसेफ ट्रेन में कॉलेज की लड़की को दिखाने लगा लिंग, पीड़िता ने वीडियो बना कर दिया वायरल: पब्लिक ने दबोचा, केरल रेलवे पुलिस ने किया गिरफ्तार

जॉर्ज जोसेफ 51 साल का है। गिरफ्तार कर लिया गया है। क्यों? क्योंकि वो चलती ट्रेन में एक कॉलेज छात्रा को अपना लिंग दिखा रहा था। यह गिरफ्तारी केरल की कासरगोड रेलवे पुलिस ने बुधवार (2 अगस्त, 2023) को की है। यह मामला अब सोशल मीडिया पर भी वायरल है

वायरल वीडियो से लिया गया स्क्रीनशॉट

इस मामले में पीड़ित छात्रा ने सोशल मीडिया पर भी आपबीती सुनाई:

“मैं इस घटना के बाद से ही सदमे में थी और मुझे लगता है कि कभी भी किसी अन्य लड़की के साथ ऐसा दोबारा नहीं हो। मैं उस आदमी को बेनकाब करने के बारे में निश्चित नहीं थी, इसलिए मैंने वीडियो साझा नहीं किया लेकिन मुझे लगता है कि यह करना सही है। जब वह अपने जीवन में दोबारा अपनी ज़िप हटाएगा तो उसे वह डर होना चाहिए।”

पीड़िता के बयान के अनुसार, घटना कन्नूर और पय्यान्नूर के बीच कोयंबटूर-मंगलौर इंटरसिटी एक्सप्रेस में हुई। जॉर्ज जोसेफ नाम का व्यक्ति अपने सामने की सीट पर बैठी लड़की के सामने अपना लिंग दिखाने लगा। पीड़ित लड़की ने जल्द ही इस घिनौने काम की वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू कर दी।

वीडियो में, जब लड़की ने आरोपित से पूछताछ करना शुरू किया तो व्यक्ति को भागने की कोशिश करते हुए देखा जा सकता है। आरोपित जॉर्ज जोसेफ की भागने की कोशिश नाकाम रही, सह-यात्रियों ने उसे पकड़ लिया और रेलवे पुलिस के हवाले कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, छात्रा की शिकायत के आधार पर कन्नूर के कूवेरी के जॉर्ज जोसेफ को गिरफ्तार कर लिया गया है। यह घटना कोयंबटूर-मंगलुरु इंटरसिटी एक्सप्रेस में उस समय हुई, जब ट्रेन 31 जुलाई को कन्नूर जिले से गुजर रही थी। इस मामले में IPC के सेक्शन 119a के तहत मामला दर्ज किया गया है।

गौरतलब है कि इस मामले में जहाँ रेलवे पुलिस ने आरोपित जॉर्ज जोसेफ को गिरफ्तार कर लिया है, वहीं कई लोगों ने छात्रा के मजबूती से प्रतिक्रिया देने का साहस दिखाने के लिए सराहना की। नंदिता शंकर उर्फ ​​मस्तानी जिन्होंने हाल ही में केएसआरटीसी बस में इसी तरह की घटना साझा की थी, ने टिप्पणी की कि उन्हें उस लड़की पर गर्व है।

83.3% की हत्या इस्लामी भीड़ ने की फिर भी नूहं दंगों में मुस्लिमों को पीड़ित बता रहा वामपंथी और विदेशी मीडिया

31 जुलाई को हरियाणा के मेवात के नूहं में इस्लामी भीड़ ने हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा पर हमला किया था। इस हमले में 5 लोगों की मौत हो गई। इनमें चार हिंदू हैं। होमगार्ड के एक मुस्लिम जवान की हत्या भी भीड़ हिंदू नाम के कारण कर दी। इसके अलावा गुरुग्राम में एक हत्या हुई है। घायलों में भी हिंदुओं की संख्या मुस्लिमों की अपेक्षा कहीं अधिक है। यही नहीं, आगजनी और तोड़फोड़ भी हिंदुओं के वाहनों और संपत्तियों में ही हुई। इसके बाद भी देश के वामपंथी मीडिया गिरोह से लेकर विदेशी मीडिया तक मुस्लिमों को ही पीड़ित दिखाने की कोशिश में जुटा हुआ है।

इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा लगाई गई हिंसा की आग में मौत का शिकार बने लोगों में 2 होमगार्ड के जवान, 1 मिठाई की दुकान में काम करने वाला हिंदू, यात्रा में शामिल होने गए 2 हिंदू, 1 गुरुग्राम की मस्जिद का मौलाना शामिल है।

नीरज (होमगार्ड) 

31 जुलाई को नूहं में मुस्लिमों द्वारा हिंदुओं पर हमले के बाद गुरुग्राम से पुलिस टीम भेजी गई थी। इस टीम में नीरज खान भी शामिल थे। नूहं के रास्ते में ही इस्लामिक भीड़ ने पुलिस टीम पर पथराव और फायरिंग कर दी। दंगाइयों का सामना करते हुए नीरज ने बलिदान दिया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में नीरज के शरीर पर गंभीर और बड़े पैमाने पर चोट मिली हैं। इसका मतलब है कि इस्लामवादियों ने उन पर बेरहमी से हमला किया था।

मूल रूप से गुरुग्राम के रहने वाले नीरज के पिता चिरंजीलाल ने कारगिल युद्ध में पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। उनका कहना है कि उन्हें गर्व है कि नीरज कर्तव्य निभाते हुए बलिदान हुए। वहीं, नीरज की पत्नी ने इस हिंसा को रोकने की अपील की है। वह नहीं चाहतीं कि कोई और महिला विधवा हो।

गुरुसेवक (होमगार्ड)

नीरज की तरह गुरुसेवक भी हिंसा रोकने नूहं जा रहे थे। वह उसी वाहन में थे, जिसमें नीरज थे। इस्लामी भीड़ के हमले में वह भी बलिदान हो गए। गुरुसेवक की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उनके लीवर पर चोट की बात सामने आई है। इसका मतलब है कि इस्लामी भीड़ ने उन पर इतना भयंकर हमला किया था कि उनके लीवर तक को नुकसान पहुँच गया। गुरुसेवक मूल रूप से फतेहाबाद के टोहाना खंड के फतेहपुरी गाँव में रहते थे। वह अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे।

शक्ति (मिठाई की दुकान में काम करते थे)

शक्ति सैनी मेवात के मुस्लिम बाहुल्य गाँव भाड़स के रहने वाले थे। वह शोएब मिष्ठान भंडार नामक मिठाई की दुकान में काम करते थे। ऑपइंडिया से बातचीत में शिवसेना शिंदे गुट के नेता रितुराज ने इस बात की आशंका जताई थी कि हमले के दौरान शक्ति दुकान में ही मौजूद थे। भीड़ दुकान से उनका अपहरण कर कहीं और ले गई। इसके बाद हत्या कर बड़कली चौराहे में फेंक दिया।

अभिषेक (जल चढ़ाने गए थे नूहं)

पानीपत के रहने वाले अभिषेक भी उन लोगों में से एक हैं, जो इस्लामी भीड़ के हमले में काल के गाल में समा गए। वह बजरंग दल के प्रखंड संयोजक थे। दंगाइयों ने पहले अभिषेक को गोली मारी। इसके बाद तलवार से गला काटकर उनका सिर पत्थर से कुचल दिया। अभिषेक जिस बस से जा रहे थे, उसी बस में महिलाएँ भी थीं। वह महिलाओं को बचाने आगे आए थे। इसी दौरान हमलावरों ने गोली चला दी, जो अभिषेक को जा लगी। गोली लगते ही अभिषेक जमीन पर गिर पड़े।

वहाँ मौजूद अभिषेक के चचेरे भाई महेश ने मदद के लिए लोगों को पुकारा, लेकिन आसपास कोई नहीं था। महेश अपने घायल भाई अभिषेक को कहीं सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोशिश कर रहे थे। इस बीच भीड़ में से एक हमलावर बाहर आया और उसने तलवार चलाकर अभिषेक की गर्दन काट दी और भाग गया। इसके बाद महेश को भी वहाँ से भागना पड़ा। लगभग 1 घंटे बाद पुलिस आई और अभिषेक को अस्पताल पहुँचाया गया। तब तक अभिषेक की मौत हो चुकी थी।

प्रदीप (जल चढ़ाने गए थे नूहं)

31 जुलाई 2023 को नल्हड़ मंदिर पर हुए हमले में प्रदीप कुमार बच गए थे। पुलिस उन्हें बचाकर पुलिस लाइन ले आई थी। लेकिन घर लौटते समय वह कट्टरपंथियों की भीड़ का निशाना बन गए। 1 अगस्त की रात करीब 2 बजे पुलिस उन्हें थाने की सीमा तक छोड़कर चली गई थी। प्रदीप अपने दोस्त कपिल व हिंदू संगठन की महिलाओं के साथ घर वापस आ रहे थे। इसी दौरान 200-300 लोगों की भीड़ ने घेर कर उन पर पत्थरबाजी शुरू की। इसके बाद प्रदीप को खींचकर कार से बाहर निकाल लिया। इसके बाद पीट-पीटकर मार डाला।

प्रदीप के साथ रहे कपिल त्यागी इस बात को लेकर हैरान हैं कि मुस्लिम भीड़ को उनकी सटीक मुखबिरी कैसे हुई। जबकि वह सीधे पुलिस लाइन से निकले थे। मृतक प्रदीप कुमार गुरुग्राम में बजरंग दल के पदाधिकारी थे। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जिला बागपत के रहने वाले बताए जा रहे हैं। गुरुग्राम में वो छोटा-मोटा काम करके अपना और अपने परिवार का गुजारा करते थे।

मौलाना हाफिज साद (एक मात्र मुस्लिम मृतक)

मौलाना हाफिज साद गुरुग्राम की मस्जिद में रहता था। नूहं में भड़की हिंसा की आग गुरुग्राम तक पहुँच गई थी। इसी दौरान 31 जुलाई और 1 अगस्त की दरमियानी रात सेक्टर 57 में स्थित एक निर्माणाधीन और विवादास्पद मस्जिद (जिस पर कोर्ट से रोक भी लगी है) में हमला कर आग लगा दी गई। इस हमले में हाफिज साद की मौत हो गई।

नूहं दंगों के कारण 6 की गई जान: 5 हिंदू, 1 मुसलमान

ऊपर की फोटो याद रखें। वामपंथी मीडिया जो प्रोपेगेंडा फैला रहा है, यह तस्वीर उसकी काट है। नूहं में हिंसा के आँकड़ों को देखें तो मरने वालों में 83.3% हिंदू हैं। इसके बाद भी हिंदुओं को हिंसक, अहिष्णु समेत तमाम तरह की उपमाएँ देने वाला वामपंथी-लिबरल मीडिया गिरोह और भारत के खिलाफ दुष्प्रचार फैलाने का हर वक्त रास्ता ढूँढ़ने वाला विदेशी मीडिया मुस्लिमों को पीड़ित बता रहा है। जबकि सच्चाई यह है कि हिंदुओं की शांतिपूर्ण धार्मिक यात्रा पर पथराव, आगजनी और गोलीबारी इस्लामवादियों ने ही की। वहीं, हिंदू निहत्थे थे।

गुरुग्राम की मस्जिद में आग लगाने वाले कौन थे, इसकी पुष्टि अब तक नहीं हुई है। चूँकि मस्जिद निर्माणाधीन थी, ऐसे में हो सकता है कि यह कृत्य भी इस्लामवादियों की भीड़ ने ही किया हो। या फिर हिंसा भड़काने के लिए जानबूझकर की गई हरकत भी हो सकती है।

हेट स्पीच नहीं होनी चाहिए… बजरंग दल और VHP की रैलियों पर रोक नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने कहा – CCTV लगाओ, वीडियो रिकॉर्ड करो

नूहं हिंसा और आगजनी के बाद बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद (वीएचपी) की रैलियों पर रोक लगाने के मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। 2 अगस्त 2023 को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हिंसा को लेकर हरियाणा, दिल्ली और यूपी सरकार को नोटिस जारी किया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी भी तरह की हेट स्पीच नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि सरकार और प्रशासन सुनिश्चित करे कि हिंसा न हो। साथ ही संवेदनशील जगहों पर सीसीटीवी लगाए जाएँ और मॉनिटरिंग की जाए।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वकील सीयू सिंह ने सुप्रीम कोर्ट से माँग की थी कि वहाँ लगातार भड़काऊ भाषण हो रहे हैं। वकील ने बुधवार (2 अगस्त 2023) दिल्ली में 27 जगह होने जा रहे कार्यक्रमों पर रोक की माँग की। वकील ने माँग की कोर्ट से कि रैली, प्रदर्शन, भाषणों और सभाओं पर रोक लगाई जाए।

इस माँग पर सर्वोच्च अदालत ने पूछा कि कौन-सी रैली में भड़काऊ भाषण दिए गए हैं? सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि सरकार ये सुनिश्चित करे कि कोई हिंसा या हेट स्पीच ना हो। कोर्ट में अब इस मामले पर शुक्रवार (4 अगस्त, 2023) को सुनवाई होगी। 

रिपोर्ट के अनुसार, वरिष्ठ वकील सीयू सिंह ने पहले जस्टिस अनिरुद्ध बोस की कोर्ट में लंबित एक रिट याचिका में इंटरलोक्युटरी एप्लीकेशन दिया था। उन्होंने कोर्ट को बताया कि नूहं हिंसा के विरोध में दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में 27 जगहों पर मार्च का ऐलान किया गया है। वकील ने इस पर रोक लगाने की माँग की थी।

बता दें कि वकील सीयू सिंह ने चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के सामने इस मामले को मेंशन किया था। चीफ जस्टिस ने हालाँकि मामले में सीधे सुनवाई से इनकार कर दिया था और कहा कि तय प्रक्रिया के मुताबिक रजिस्ट्री को ईमेल भेजें। इसके बाद सुनवाई पर विचार किया जाएगा। 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अखबारों में कई जगह हिंसा की रिपोर्ट है। कोर्ट ने शांति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस फोर्स लगाने की जरूरत पर टिप्पणी की। साथ ही निर्देश दिया कि सीसीटीवी और वीडियो को रिकॉर्ड में रखें।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस एसवी भट्टी की पीठ ने केंद्र और राज्य सरकार को आदेश दिया कि वह सुनिश्चित करें कि सर्वोच्च अदालत के 21 अक्टूबर 2022 और अप्रैल 2023 के 11 सदस्यीय पीठ के फैसले (हेट स्पीच) के दिशानिर्देशों का अनुपालन करें। इस फैसले के तहत पुलिस को सुओ-मोटो हेट स्पीच पर FIR दर्ज करने का निर्देश है।

गौरतलब है कि हरियाणा के नूहं में सोमवार (31 जुलाई, 2023) को हिन्दू जलाभिषेक यात्रा पर मुस्लिम भीड़ ने हमला किया था। नूहं में आज भी कर्फ्यू जारी है, इंटरनेट सेवा बंद है। जाँच के आधार पर 116 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

‘मौत को करीब से देखा, भगवान का नाम जपने लगे’: नूहं हिंसा पर पुजारी ने कहा- हिंदुओं का सफाया करना चाहते थे हमलावर, ऐसा फिल्मों में ही देखा था

हरियाणा के नूहं में 31 जुलाई 2023 को हिंदुओं की ‘ब्रिजमंडल यात्रा’ पर इस्लामिक भीड़ ने हमला कर दिया था। इस हमले के दौरान हजारों लोग मंदिर और आसपास के इलाके में फँस गए थे। उनमें से एक थे करनाल के हनुमान मंदिर के पुजारी अजीत शास्त्री। पुजारी ने कहा है कि उन्होंने नूहं में जो देखा, वैसा तो सिर्फ फिल्मों में होता है। मुस्लिमों का प्लान मंदिर में फँसे हिंदुओं का सफाया करना था।

एनबीटी से हुई बातचीत में अजीत शास्त्री ने कहा, “हमले के समय हालात इतने खराब हो चुके थे कि बता पाना मुश्किल है। हमारी धरती है, हमारा मंदिर है और मेवात तो हरियाणा का ही क्षेत्र है। लेकिन, जहाँ मुस्लिम बहुसंख्यक रहते हैं वहाँ तो जाने की सोच भी नहीं सकते। नूहं में जो कुछ भी देखा, इससे पहले सिर्फ फिल्मों में ऐसा देखा था। सच कहूँ तो मैंने उस दिन मौत को बेहद करीब से देखा।”

पुजारी ने आगे कहा, “दोपहर करीब 12 बजे पत्थरबाजी शुरू होते ही वहाँ अफरा-तफरी का माहौल हो गया था। पत्थरबाजी बढ़ती जा रही थी। इसलिए हम लोग नल्हड़ के शिव मंदिर में फँसकर रह गए। पहले तो वहाँ कुछ पुलिसकर्मी थे, लेकिन भीड़ को हिंसक होता देखकर वे भी वहाँ से चले गए। मंदिर में भारी संख्या में लोग फँसे हुए थे।”

उन्होंने यह भी कहा है, “भीड़ को जब यह पता चल गया था कि लोग मंदिर में फँसे हुए हैं तब मंदिर में ही फायरिंग शुरू कर दी। कुछ लोगों को गोली भी लगी। कई वाहनों में एक साथ आग लगा दी गई। पहाड़ी से हो रही फायरिंग और पत्थरबाजी से बचाने के लिए हम लोगों ने पुलिस को फोन किया था। लेकिन 7 बजे तक कोई नहीं आया।”

हमलावरों के मकसद को बताते हुए उन्होंने कहा, “मंदिर पर हमला कर रही भीड़ का एक ही मकसद था… जो लोग यहाँ फँसे हुए थे, वे बचकर जाने न पाएँ। वहाँ हालात बेकाबू होते जा रहे थे। करीब 8 बजे पुलिस के आने के बाद हम लोगों की जान बच पाई। वहाँ हर जगह फोर्स तैनात कर दी गई थी। तब कहीं जाकर हम लोग वहाँ से निकल पाए।”

अजीत शास्त्री का यह भी कहना है कि नल्हड़ गाँव में मुस्लिमों की आबादी बहुत अधिक है। वे लोग वहाँ के मंदिरों पर कब्जा करने और उन्हें हटाने की कोशिश में लगे रहते हैं। इन मंदिरों पर कब्जा न हो इसके लिए विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल समेत अन्य संस्थाएँ यहाँ काम करती हैं।

पुजारी ने कहा कि इस बार की ‘बृजमंडल यात्रा’ में संख्या अधिक थी। करीब 15-20 हजार लोग जुटे थे, लेकिन इस इलाके से मुस्लिमों का प्रभाव कम न हो इसलिए उन्होंने पहले से ही प्लानिंग बना ली थी। जब हिंदू तीन अलग-अलग मंदिरों में जा रहे थे। तभी मुस्लिमों ने हमला किया गया।

बताते चलें कि इसी मंदिर के बाहर महिलाओं की रक्षा करते हुए पानीपत बजरंग दल के प्रखंड संयोजक अभिषेक चौहान को कट्टरपंथियों ने गोली मार दी थी। इसके बाद भीड़ में से निकलकर एक कट्टरपंथी ने तलवार से गला काटकर उनकी हत्या कर दी थी।

महिलाओं-बच्चों को बचाने के लिए निहत्थे लड़े अभिषेक चौहान’: भावुक महिलाओं ने माँगी बलिदानी का दर्जा, मामा बोले- अब बहन को क्या कहूँगा

हरियाणा के नूहं में 31 जुलाई 2023 (सोमवार) को जलाभिषेक यात्रा के दौरान मुस्लिम भीड़ ने हिंदू श्रद्धालुओं पर हमला कर दिया। इस हमले में पानीपत से आए बजरंग दल के प्रखंड संयोजक अभिषेक राजपूत उर्फ अभिषेक चौहान की मौत हो गई थी। दंगाइयों ने अभिषेक को पहले गोली मारी। उसके बाद गला काटकर उनके सिर को पत्थरों से कुचल दिया। इस घटना के गवाह अभिषेक के चचेरे भाई हैं।

22 साल के मृतक अभिषेक के चचेरे भाई महेश ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि जैसे ही वो अपने भाई के साथ शिव मंदिर से बाहर निकले, वैसे ही हमलावर भीड़ को अपनी तरफ बढ़ते देखा। भीड़ के पास तलवारें, बंदूकें और पत्थर थे। भीड़ ने लोगों को पीटना शुरू कर दिया और वाहनों में आग लगा दी।

इसी दौरान हमलावरों ने गोली चला दी, जो अभिषेक को जा लगी। गोली लगते ही अभिषेक जमीन पर गिर पड़े। महेश ने अपने भाई की मदद के लिए लोगों को पुकारा, लेकिन आसपास कोई नहीं था। इसलिए कोई नहीं आया। 25 वर्षीय महेश ने आगे बताया कि वो अपने घायल भाई अभिषेक को कहीं सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोशिश कर रहे थे।

इस बीच भीड़ में से एक हमलावर बाहर आया और उसने अभिषेक की तलवार चलाकर गर्दन काट दी और भाग गया। इसके बाद मुझे भी वहाँ से भागना पड़ा। लगभग 1 घंटे बाद पुलिस वाला आया और अभिषेक को अस्पताल पहुँचाया। तब तक अभिषेक की मौत हो चुकी थी।

महिलाओं को बचाते बलिदान हुआ अभिषेक

पानीपत की एक महिला ने मीडिया से बात करते हुए खुद को हिंसा की भुक्तभोगी बताया। महिला ने कहा, “उन्होंने (मुस्लिम भीड़ ने) हमारे बस पर पथराव किया। हमारे बच्चे हमें बचाने के लिए नीचे उतरे। निहत्थे होने के बावजूद भी उन्होंने हमें बचाने की पूरी कोशिश की। वो डरे नहीं कि उनके हाथ में हथियार नहीं है।”

महिला ने कहा, “बस में सारी औरतें और बच्चे थे। उन्होंने (अभिषेक राजपूत) ने बहादुरी से मुकाबला किया। हमारा बच्चा बलिदान हो गया। हमें गर्व है कि ये बच्चा हमारे पानीपत का था।” लोगों ने अभिषेक के लिए बलिदानी का दर्जा देने की माँग की।

अभिषेक का शव लेने से परिजनों का इंकार

अभिषेक के मामा राजेंद्र चौहान का कहना है कि अभिषेक अपने परिवार में अकेला कमाने वाला था। उसी की कमाई से घर का घर चलता था। उन्होंने कहा कि पता नहीं अब उनकी बहन का परिवार कैसे चलेगा। राजेंद्र चौहान ने कहा कि 12वीं पढ़ने के दौरान ही कमाने के लिए अभिषेक ने कार मैकेनिक का काम शुरू कर दिया था।

आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई के साथ अभिषेक राजपूत के परिवार वालों को 1 करोड़ रुपए मुआवजा और घर के एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी की माँग की जा रही है। हालाँकि, प्रशासन ने अपने स्तर पर कोई भी आश्वासन मुआवजा या नौकरी का देने से मना कर दिया है।

ऑपइंडिया से बात करते हुए पानीपत के बजरंग दल जिला संयोजक बॉबी ने बताया कि अभिषेक राजपूत का अंतिम संस्कार हो गया है। उनके अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए और आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की। अभिषेक की हत्या के मामले में 13 लोगों को नामजद किया गया है।

21 महीने की बच्ची से रेप, प्राइवेट अंगों के साथ क्रूरता… फिर हत्या: इस्माइल उर्फ ​​यूसुफ सलीम को कोर्ट ने सुनाई मौत की सजा

सूरत जिला न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसले में 21 महीने की बच्ची के अपहरण, बलात्कार और हत्या के दोषी को मौत की सजा सुनाई है। बुधवार (2 अगस्त, 2023) को कोर्ट ने इस्माइल उर्फ ​​यूसुफ सलीम हाजत को इस जघन्य अपराध के लिए मौत की सजा सुनाई।  

इस साल की शुरुआत में सूरत के सचिन इलाके में एक छोटी बच्ची के अपहरण, बलात्कार और हत्या के अपराध के दोषी इस्माइल यूसुफ हाजत को मौत की सजा सुनाई गई है। गौरतलब है कि दोषी इस्माइल उर्फ ​​यूसुफ सलीम हाजत ने न सिर्फ मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म किया, बल्कि अपनी हवस मिटाने के लिए बच्ची के कोमल अंगों के साथ क्रूरता भी की। जिसके चलते आखिरकार लड़की की मौत हो गई। 

21 महीने की बच्ची से बलात्कार और हत्या 

गौरतलब है कि इसी साल फरवरी महीने में सूरत के गाँव में रहने वाली 21 महीने की मासूम बच्ची की उसी गाँव में पड़ोस में रहने वाले 23 साल के इस्माइल नाम के युवक ने हत्या कर दी थी। दोषी इस्माइल उर्फ ​​यूसुफ सलीम हाजत अक्सर बच्ची के घर आता-जाता था। 27 फरवरी 2023 की शाम भी वह हर दिन की तरह बच्ची को खेलाने के लिए ले गया। 

जब इस्माइल देर तक नहीं लौटा तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। इसी बीच बच्ची का शव खुली जगह पर झाड़ियों में मिला। परिवार द्वारा तुरंत सूचना दिए जाने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों सहित पुलिस का काफिला मौके पर पहुँचा। वहाँ घटना के बाद आसपास के लोग भी जुट गए। मौके पर पहुँची पुलिस को बच्ची के माता-पिता ने बताया कि बच्ची को पड़ोस में रहने वाला इस्माइल खेलाने के लिए ले गया था। लिहाजा, पुलिस की गहन जाँच के बाद कुछ ही घंटों में दोषी इस्माइल उर्फ ​​यूसुफ को पकड़ लिया गया। 

11 दिन में पेश किया गया आरोप पत्र

जब यह घटना सामने आई तो सरकार, प्रशासन से लेकर पुलिस तक अलर्ट मोड में आ गई। महज 11 दिन की अल्प अवधि में आरोपित के खिलाफ आरोप पत्र पेश किया गया। मामले में पुलिस ने 85 दस्तावेजी सबूत पेश किए और 48 गवाहों के बयान लिए। बता दें कि इस मामले में आख़िरकार 431 पेज की चार्जशीट दायर की गई। 

पुलिस जाँच के दौरान कई चौंकाने वाली जानकारियाँ भी सामने आईं। उदाहरण के तौर पर दोषी इस्माइल यूसुफ हाजत के मोबाइल फोन से 200 से ज्यादा अश्लील फोटो और वीडियो मिले थे। इसके अलावा उसकी सर्च हिस्ट्री चेक करने पर पता चला कि उसने एक छोटे बच्चे को कैसे मारा जाए, इस पर भी सर्च किया था। 

मौत की सजा की माँग 

गौरतलब है कि इससे पहले 31 जुलाई को हुई सुनवाई में कोर्ट ने तमाम सबूतों के आधार पर आरोपित इस्माइल को दोषी करार दिया था। जिसके बाद सजा सुनाने के लिए 2 अगस्त का दिन तय किया गया था। 

बता दें कि सरकारी वकील ने इस मामले को दुर्लभतम मामलों में से एक माना और दोषी के लिए मौत की सजा की माँग की थी। इसके साथ ही सूरत में एक बच्ची के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या करने वाले इस्माइल के खिलाफ सीआरपीसी 73 के तहत कार्रवाई कर एकांत कारावास की प्राथमिक सजा की भी माँग की गई थी।

‘शोभायात्रा में हथियार लेकर कौन जाता है?’ – चर्चा में सांसद राव इंद्रजीत, कॉन्ग्रेस का हाथ छोड़ मुख्यमंत्री बनने का था ख्वाब

हरियाणा के मेवात क्षेत्र के नूहं में 31 जुलाई 2023 को कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ द्वारा हिंदुओं पर किए हमले में 6 लोगों की मौत की मौत हो गई है। इस हिंसक घटना पर गुरुग्राम से भाजपा सांसद राव इंद्रजीत सिंह ने हिंदुओं पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू हथियारबंद थे और उनकी तरफ से भी उकसावे की कार्रवाई हुई।

राव इंद्रजीत सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा है, “किसने हथियार दिए उनको (हिंदुओं को) इस जुलूस में ले जाने के लिए? जुलूस में कोई तलवार लेकर जाता है? लाठी-डंडे लेकर जाता है? यह गलत है। इस तरफ से भी उकसावे की कार्रवाई हुई। मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि दूसरी तरफ से कोई उकसावे की कार्रवाई नहीं हुई।”

राव इंद्रजीत का यह बयान चर्चा में है। हरियाणा सरकार नूहं हिंसा के पीछे साजिश होने की बात कह रही है। यहाँ तक कि प्रत्यक्षदर्शी और शासन-व्यवस्था में लगे कर्मचारी भी घटना को सुनियोजित हिंसा करार दे रहे हैं, लेकिन राव इंद्रजीत का बयान हिंदुओं पर ही सवाल खड़ा कर रहा है। हालाँकि, यह पहली बार नहीं है जब दंगों के दौरान उनका बयान चर्चा में आया हो।

इससे पहले जून 2014 में मेवात के टौरू में हुई हिंसा के बाद राव इंद्रजीत पर हिंसा भड़काने का आरोप लगा था। तब राव इंद्रजीत राजस्थान के टोंक-सवाई माधोपुर से सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया और हरियाणा भाजपा के तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष रामबिलास शर्मा के साथ मेवात के पथेरी गाँव पहुँचे थे। वहाँ उसी मंच पर राव इंद्रजीत भी थे, जिससे रामबिलास शर्मा ने कहा था, “तनाव लेने का नहीं, देने का समय आ गया है।”

कौन हैं राव इंद्रजीत सिंह?

राव इंद्रजीत सिंह फिलहाल हरियाणा की गुरुग्राम लोकसभा सीट से सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री हैं। लंबे समय से गुरुग्राम का प्रतिनिधित्व करते आ रहे हैं। इनका इतिहास देखें तो साल 1977 से लगातार 4 बार कॉन्ग्रेस की टिकट पर विधायक रहे। यही नहीं, 1998 से लेकर 2009 तक कॉन्ग्रेस के टिकट पर लोकसभा सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री रहे।

अन्य पिछड़ा वर्ग से आने वाले राव इंद्रजीत सिंह यादव साल 2014 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा में शामिल हो गए। इसके बाद भाजपा की टिकट पर वह एक बार फिर लोकसभा पहुँचे। राव इंद्रजीत के विरोधियों का आरोप है कि मोदी लहर को देखते हुए उन्होंने साल 2014 में कॉन्ग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थामा था।

भाजपा में आते ही जाग उठे थे CM बनने के अरमान:

राव इंद्रजीत के विरोधियों द्वारा उन पर लगाए गए आरोप कई बार सही भी लगते हैं। मोदी लहर में भाजपा में शामिल होना और फिर सांसद बनते ही मुख्यमंत्री बनने की बातें करना उनकी अवसरवादिता को दर्शाता है। साल 2018 में इंद्रजीत ने सीएम बनने की अपनी मंशा जाहिर कर दी थी।

सीएम बनने के सवाल पर उन्होंने कहा था, “मुझे देखना है कि सीएम बनने के लिए लोग मुझ पर दबाव डालते हैं या नहीं। पहले भी मैं मुख्यमंत्री बनना चाहता था। पिछली बार यानि 2014 के लोकसभा चुनाव में लोगों ने मुझे इस उम्मीद से वोट दिया था कि राव इंद्रजीत मुख्यमंत्री बनेंगे।”

झूठ फैलाते पकड़ा गया ‘कॉन्ग्रेसी’ पत्रकार पुनीत, नूहं में हिन्दू की लुटी दुकान का दोष हिन्दुओं पर ही मढ़ा… पोल खुलने पर भी दिखा रहा बेशर्मी

हरियाणा के नूहं में 31 जुलाई 2023 को हिन्दुओं के ब्रिजमंडल जलाभिषेक यात्रा के दौरान मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया था। हिंसा से संबंधित ‘मिनी पाकिस्तान’ कहे जाने वाले मेवात के नूहं से कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इस बीच कट्टरपंथी मुस्लिमों के बचाव में कुख्यात गिरोह भी सक्रिय हो चुका है।

यह गैंग हिन्दुओं को ही हमलावर और मुस्लिमों को पीड़ित दिखाने के लिए साजिशें रचना शुरू कर चुका है। इन्हीं में से एक कथित पत्रकार पुनीत कुमार सिंह भी हैं। पुनीत ‘बोलता हिंदुस्तान’ नाम का प्रोपोगेंडा पोर्टल चलाते हैं। उन्होंने कई फेक न्यूज फैलाने की कोशिश की।

पुनीत ने मंगलवार (1 अगस्त 2023) को एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने बीबीसी की ग्राउंड रिपोर्ट का हवाला दिया। रिपोर्ट में बताया गया है कि विकास गर्ग नाम के व्यक्ति की दुकान में तोड़फोड़ हुई थी। पुनीत ने आरोप लगाया कि दुकान को मुस्लिमों की दुकान समझकर हिन्दू संगठनों के सदस्यों इसमें तोड़-फोड़ की।

पुनित ने लिखा, “नूहं में हिंदू ‘विकास गर्ग’ की दुकान को मुस्लिम की दुकान समझकर भगवा गुंडों ने तहस-नहस कर दिया।” इसी के साथ पुनीत ने मृत शायर राहत इंदौरी के एक ‘शेर’ की कुछ पंक्तियाँ – ‘लगेगी आग तो आएँगे घर कई जद में, यहाँ पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है।’ भी लिखा।

पुनीत कुमार सिंह का वो ट्वीट जो अब डिलीट कर लिया गया है

कुल मिलाकर पुनीत यह कहना चाहते थे कि नूहं के दंगे हिंदुओं की वजह से हुए और हिन्दू ही इसका खामियाजा भुगत रहे हैं। अब डिलीट हो चुके ट्वीट में इस कथित पत्रकार ने नूहं से बीबीसी की एक वीडियो रिपोर्ट भी संलग्न की थी।

इस वीडियो में क्षतिग्रस्त दुकान के मालिक विकास गर्ग ने बीबीसी को बताया कि उनकी ’24×7 बेकरी एंड कैफे’ नाम की दुकान में सोमवार को तोड़फोड़ की गई थी। विकास ने घटना का समय सोमवार की दोपहर 3:30 बजे से 3:45 बजे बताया।

बीबीसी की रिपोर्ट में विकास ने बताया, “जब यात्रा गुजर रही थी तो यहाँ दंगा भड़क गया। मैं अपनी दुकान में ताला लगाकर चला गया था। इस दौरान मेरी दुकान लूट ली गई। दुकान का काउंटर, शीशे, LED और 7 फ्रिज क्षतिग्रस्त हो गए हैं। दुकान में रखे लगभग 7.5 लाख रुपए नकद रखे हुए थे। सारा सामान चुरा लिया गया है।”

विकास ने यह भी बताया कि उन्होंने अपने रेस्तरां को बनाने के लिए कई सालों की कड़ी मेहनत की थी। उनके इस नुकसान की भरपाई नहीं हो सकती है। इसी वीडियो के आधार पर पुनीत ने विकास गर्ग की दुकान को हिन्दू संगठन के सदस्यों द्वारा लूटे जाने का दावा किया।

पुनित ने अपने ट्वीट में हिंदुओं के लिए ‘भगवा गुंडों’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल भी किया। हालाँकि, पुनीत का ये दावा फर्जी निकला। विकास की दुकान के बाहर लगे बोर्ड पर दुकान के मालिकों के नाम स्पष्ट रूप से विकास गर्ग और सचिन गर्ग लिखे हुए थे। इसलिए मुस्लिम की दुकान समझकर हिंदुओं को तोड़-फोड़ वाला नैरेटिव फिट नहीं बैठता।

पुनीत ने अपने खास एजेंडे को फैलाने की कोशिश की। पोल खुलने और कई ट्विटर यूजर्स द्वारा आइना दिखाने के बाद फर्जी न्यूज़ विक्रेता ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया। एक अन्य पत्रकार आदित्य राज कौल ने पुनीत कुमार सिंह के डिलीट ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए गुरुग्राम में लोगों से फर्जी खबर पर ध्यान न देने की अपील की है।

पत्रकार आदित्य राज कौल ने लिखा, “गुरुग्राम में लोगों को फर्जी खबरों पर विश्वास नहीं करना चाहिए। फर्जी सूचनाओं पर आधारित कुछ ट्वीट्स से हरियाणा में दहशत फैल रही है। ट्वीट डिलीट कर दिया गया है, इसके बावजूद इसे फॉरवर्ड किया जा रहा है। आशा है कि पुलिस मेवात हिंसा को गुरुग्राम तक फैलाने की साजिश की जाँच करेगी। सतर्क रहें। घबराएँ नहीं।”

इधर फजीहत होने के बाद पुनीत ने आधी रात को अपनी सफाई में एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने कहा कि जानकारी पता होने के बाद ट्वीट डिलीट कर लिया गया है। पुनीत का कहना है कि उन्हें हिन्दुओं द्वारा हिन्दू की दुकान लूटे जाने की जानकारी एक विश्वसनीय पत्रकार ने दी थी।

फर्जी अफवाह वाला ट्वीट डिलीट करने के बाद भी पुनीत खुद को एक जिम्मेदार नागरिक बता रहे हैं। लोगों के बीच भ्रामक सूचना और समाज में नफरत फैलाने के बावजूद पुनीत ने माफ़ी नहीं माँगी और बेशर्मी पर अड़े रहे।

इसके उलट, वह दूसरे पत्रकारों पर फर्जी न्यूज़ चलाने और पैसे की उगाही के आरोप लगाते रहे। अपने विवादास्पद ट्वीट में लिखी गई राहत इंदौरी की लाइनों को भी पुनीत ने अहिंसक बताया। फिलहाल सोशल मीडिया पर कथित पत्रकार पुनीत की गिरफ्तारी की माँग उठ रही है।

इस पत्रकार को लोग कॉन्ग्रेस के फंड पर पलने वाला पत्रकार कहते हैं।