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केंद्र में हो BJP तो कंट्रोल में रहती है कीमतें, कॉन्ग्रेस राज में बढ़ती है महँगाई : आँकड़े झूठ नहीं बोलते, इसलिए 1991 से लेकर अब तक के नंबर्स आपके लिए

मौसमी सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते विपक्ष महँगाई का ढिंढोरा पीट रहा है। शुक्रवार (7 जुलाई 2023) को कॉन्ग्रेस का समर्थन करने वाले कई सोशल मीडिया हैंडल्स ने ‘ModiFlation’  हैशटैग के साथ महँगाई के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश की। दावा किया जा रहा है कि PM मोदी के सत्ता सँभालने के बाद से महँगाई में 2-3 गुना की बढ़ोतरी हुई है। साल 2013 की महँगाई से तुलना करते हुए कॉन्ग्रेस और उनके समर्थक यह कह रहे हैं कि BJP सरकार महँगाई रोकने में नाकाम रही है।

बीते कुछ हफ्तों में महँगाई बढ़ने की बात तेजी से हो रही है। हालाँकि ऐसा पहली बार नहीं है कि मानसून के दौरान सब्जियों की कीमत बढ़ी हो। दरअसल, भारी बारिश के चलते किसान अपनी सब्जियाँ बाजार तक नहीं पहुँचा पा रहे हैं। साथ ही जो सब्जियाँ बाजार में पहुँचती हैं वे मौसम की मार के चलते जल्द ही खराब भी हो रही हैं। ऐसे में कीमतों का बढ़ना स्वाभाविक है। लेकिन राजनीतिक पार्टियों और उनके समर्थकों को यह ‘आपदा में अवसर’ की तरह नजर आ रहा है। इसलिए वे ‘मौसमी महँगाई’ का शोर मचाकर केंद्र सरकार पर निशाना साधने की कोशिश कर रहे हैं।

क्या सच में महँगाई बढ़ गई है?

महँगाई-महँगाई के शोर के बीच के आँकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि बीजेपी के सत्ता में रहते हुए महँगाई में कमी आई है। वहीं, कॉन्ग्रेस के सत्ता में आते ही कीमतें में इजाफा होना शुरू हो जाता है। बीते 10 वर्षों में भी महँगाई दर में कमी ही देखने को मिली है। महँगाई बढ़ने और घटने की सच्चाई जानने के लिए ऑपइंडिया ने साल 1991 से लेकर अब तक के विश्व बैंक के आँकड़ों का अध्ययन किया है। दूसरे शब्दों में कहें तो मनमोहन सिंह के वित्त मंत्री बनने से लेकर नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री के कार्यकाल तक के आँकड़ें देखे हैं।

इन आँकड़ों के अनुसार, साल 1991 से लेकर 1995 तक कॉन्ग्रेस सत्ता में थी। इस दौरान 1991 में महँगाई दर 13.90% रही। वहीं 1992 में 11.80%, 1993 में 6.33%, 1994 और 1995 में महँगाई दर 10.20 प्रतिशत थी। साल 1996 में जनता दल के सत्ता में आते ही महँगाई दर 10% के नीचे पहुँच गई। उस साल महँगाई दर 8.98 प्रतिशत थी। वहीं साल 1997 में घटते हुए 7.16 प्रतिशत पहुँच गई।

जब केंद्र में रहती है बीजेपी तो नियंत्रण में रहती है महँगाई, स्रोत: वर्ल्ड बैंक

मार्च 1998 में सत्ता बीजेपी के हाथों में आई। इस साल महँगाई दर बढ़कर 13.20% पहुँच गई। लेकिन, बाद के वर्षों में बीजेपी ने महँगाई पर ऐसा कंट्रोल किया कि एक बार भी 5% के आँकड़ों को पार नहीं कर सकी। जहाँ 1998 में महँगाई 13% से अधिक थी, वहीं 1999 में यह तेजी से गिरकर 4.67% पर पहुँच गई। इसके बाद 2000 में 4.01%, 2001 में 3.78%, 2002 में 4.30%, 2003 में 3.81% और 2004 में 3.77% रही।

इसके बाद, कॉन्ग्रेस सत्ता में आई और ‘महान अर्थशास्त्री’ मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाया गया। साल 2005 मनमोहन सिंह के कार्यकाल का पहला वर्ष था। इस साल महँगाई दर बढ़कर 4.25% पहुँच गई। वास्तव में साल 1991 के बाद से कॉन्ग्रेस के सत्ता में रहते हुए पहली और आखिरी बार हुआ था कि महँगाई दर 5% के नीचे रही हो। साल 2006 में महँगाई 5.8% पहुँच गई। इसके बाद लगातार बढ़ते हुए 2007 में 6.37%, 2008 में 8.35%, 2009 में 10.90%, 2010 में 12%, 2011 में 8.91%, 2012 में 9.48% और 2013 में 10% रही।

मई 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने। इसके कुछ महीनों बाद ही महँगाई 10% से घटकर 6.67% पर पहुँच गई। वहीं 2015 में, 5 प्रतिशत से नीचे यानी 4.91% हो गई। इसके बाद 2016 में महँगाई दर 4.95%, 2017 में 3.33%, 2018 में 3.94% और 2019 में 3.73% रही।

साल 2020 में पूरी दुनिया कोविड-19 महामारी से जूझ रही थी। ऐसे समय में तमाम देशों में महँगाई बढ़ना लाजिमी था। लेकिन भारत में अर्थव्यवस्था और महँगाई दोनों पर नियंत्रण बनाए रखा गया। वास्तव में उस साल महँगाई दर 6.62% रही। इसके बाद 2021 में 5.13%, 2022 में 6.70% रही। वहीं साल 2023 के रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया का अनुमान है कि महँगाई दर 5.1% रहेगी।

इन आँकड़ों से स्पष्ट पता चलता है भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के केन्द्र की सत्ता में रहते हुए महँगाई ज्यादातर समय 5% के नीचे ही रही। वहीं 2014 में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के सत्ता में आने के बाद महँगाई न केवल 5% के ऊपर रही बल्कि 10 और 12% के आँकड़ों को भी पार गई।

कॉन्ग्रेस के सत्ता में रहते हुए साल 2010 में महँगाई दर 12% पहुँच गई थी। ऐसे समय में बॉलीवुड फिल्म ‘पीपली लाइव’ में भी महँगाई के चलते देश की हालत दिखाई गई थी। यही नहीं फिल्म का गाना ‘सखी सैंया तो खूब ही कमात हैं, महँगाई डायन खाए जात है’, लंबे समय तक लोगों की जुबान पर चढ़ा हुआ था। दरअसल, तब महँगाई दर आज की तुलना में करीब ढाई गुना अधिक थी। बेशक आज टमाटर समेत अन्य मौसमी सब्जियों के चलते ‘मौसमी महँगाई’ अधिक नजर आ रही है। लेकिन आँकड़ों को देखने से यह स्पष्ट हो जाता है कि महँगाई का यह शोर सिर्फ राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए मचाया जा रहा है। बीते 10 वर्षों की महँगाई की सच्चाई यह है कि साल 2013 में महँगाई 10% थी और इस साल के अंत तक 5.1% रहने का अनुमान है। 

ज्योति मौर्या से ‘अफेयर’ में फँसे मनीष दुबे: DIG ने जाँच में माना विभाग की छवि खराब करने का दोषी, सस्पेंड करने की सिफारिश

PCS अधिकारी ज्योति मौर्या पिछले कई दिनों से अपने कथित अफेयर को लेकर चर्चा में हैं। उनके पति आलोक मौर्या का आरोप है कि उनका अफेयर होमगार्ड जिला कमांडेंट मनीष दुबे से चल रहा है और दोनों उनकी हत्या की साजिश रच रहे हैं। अब इस मामले में विभागीय जाँच में मनीष दुबे को दोषी पाया गया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार होमगार्ड के डीआईजी संतोष सिंह ने अपनी जाँच रिपोर्ट में मनीष दुबे को विभाग की छवि धूमिल करने का दोषी माना है। उनको सस्पेंड करने की सिफारिश की है। डीआईजी होमगार्ड ने अपनी रिपोर्ट होमगार्ड के डीजी बीके मौर्या को सौंप दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक जाँच रिपोर्ट में मनीष दुबे के 3 अलग-अलग मामलों का जिक्र किया गया है।

आलोक मौर्य ने होमगार्ड संगठन को अपनी पत्नी और मनीष दुबे के बीच हुई बातचीत की कुछ रिकॉर्डिंग भी सौंपी है। इन सबूतों को फॉरेंसिक जाँच के लिए लैब भेजा गया है। माना जा रहा है कि रिकॉर्डिंग प्रमणित होने के बाद मनीष और ज्योति की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। जाँच के दौरान मनीष दुबे का गाजियाबाद से महोबा ट्रांसफर कर दिया गया था। वहीं दूसरी तरफ ज्योति ने खुद को बरेली चीनी मिल से कहीं और ट्रांसफर करने की माँग की है। इस माँग के पीछे ज्योति ने अपने खिलाफ चल रही तमाम खबरों को वजह बताया है।

आज तक की रिपोर्ट के अनुसार मनीष दुबे के खिलाफ जिन तीन मामलों का जिक्र किया गया है, उनमें एक ज्योति मौर्या से जुड़ा है। दूसरा मामला अमरोहा जिले का है। यहाँ की एक महिला होमगार्ड ने भी दुबे के खिलाफ शिकायत की थी। तीसरी शिकायत मनीष दुबे की पत्नी का है, जिसमें उन्होंने दहेज माँगने का आरोप लगाया है।

गौरतलब है कि जून 2023 में ज्योति के पति आलोक मौर्या ने एक शिकायत देते हुए अपनी पत्नी के होमगार्ड कमांडेंट मनीष दुबे से अफेयर का आरोप लगाया था। सफाई कर्मचारी आलोक मौर्या ने आरोप लगाया था कि उनकी पत्नी जो पीसीएस अधिकारी हैं, साल 2020 से जिला कमांडेंट मनीष दुबे के संपर्क में हैं। दोनों मिलकर उनकी हत्या की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से भी न्याय की गुहार लगाते हुए कुछ चैट भी सार्वजनिक किए थे। हालाँकि ज्योति ने अपने पति के तमाम आरोपों को खारिज कर दिया था। उन्होंने आलोक पर झूठ बोल कर शादी करने का आरोप लगाया था।

रख विश्वास, तू है शिव का दास… ‘OMG 2’ के टीजर में आस्तिक की भूमिका में पंकज त्रिपाठी: ‘हर हर महादेव’ की गूँज, अक्षय कुमार बने भगवान शिव

फिल्म ‘OMG 2’ का टीजर ‘Viacom 18 Studios’ ने रिलीज कर दिया है। इसमें अक्षय कुमार के साथ-साथ पंकज त्रिपाठी मुख्य भूमिका में दिख रहे हैं। ये फिल्म 2012 में आई ‘OMG – Oh My God!’ का सीक्वल है। जहाँ उस फिल्म का निर्देशन उमेश शुक्ला ने किया था, इस बार डायरेक्शन की बागडोर अमित राय के हाथों में है। अमित राय 2010 में ‘रोड टू संगम’ फिल्म का निर्देशन कर चुके हैं, जिसे उस समय एक दर्जन से भी अधिक अवॉर्ड्स मिले थे।

‘OMG 2’ के टीजर में शुरुआत में आवाज गूँजती है – “ईश्वर है या नहीं, इसका प्रमाण इंसान आस्तिक या नास्तिक होकर दे सकता है, पर भगवान अपने बनाए हुए बन्दों में कभी भेद नहीं करता – फिर चाहे वो नास्तिक कांजीलाल मेहता हो या आस्तिक कांतिशरण मुद्गल।” साथ ही बैकग्राउंड में भगवान शिव के स्तोत्र की पंक्तियाँ ‘ॐ अथात्मानं शिवात्मानं श्री रुद्ररुपं ध्यायेत्’ बजती हुई सुनाई देती है। इसमें अक्षय कुमार की एंट्री गंगा नदी में स्नान करते हुए होती है।

बताया जा रहा है कि इसमें अक्षय कुमार भगवान शिव के किरदार में दिखेंगे, जैसे फिल्म के पहले हिस्से में उन्होंने श्रीकृष्ण का रोल निभाया था। टीजर में आगे कहा जाता है, “…और तकलीफ में लगाई हुई पुकार उसे हमेशा अपने बन्दों तक खींच ही लाती है।” पंकज त्रिपाठी इसमें पूजा-पाठ करने वाले और ईश्वर में विश्वास रखने वाले व्यक्ति के रूप में दिखाई देते हैं, जिनके परिवार पर कोई विपत्ति आ जाती है। फिल्म में यामी गौतम एक वकील की भूमिका में हैं।

“जिसकी रक्षा के लिए जो चाल बदल दे काल का, कोई उसका क्या बिगाड़े जो भक्त हो महाकाल का” – अक्षय कुमार की एंट्री के साथ ये गाना भी बजता सुनाई देता है। फिर अक्षय कुमार कहते हैं – “रख विश्वास, तू है शिव का दास”। गाने में ‘हर हर महादेव’ भी गूँजता है। इसमें एक दृश्य में अक्षय कुमार को एक ट्रेन के किनारे ध्यान मुद्रा में बैठे हुए भी दिखाया गया है। ट्रेन से निकलती पानी से उनका अभिषेक हो रहा होता है और पीछे आकाश में अर्धचंद्र भी जगमगा रहा होता है।

टीजर के एक दृश्य में नंदी बैल को भी दिखाया गया है। टीजर को लेकर लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया आ रही है। एक व्यक्ति ने पूछा कि ट्रेन से निकलने वाले गंदे पानी से शिव जी का अभिषेक कैसे हो सकता है? वहीं कइयों ने भगवान शिव के रूप में अक्षय कुमार के किरदार की सराहना की। किसी ने गंगा नदी में उनकी एंट्री की तारीफ़ की, तो किसी ने पूछा कि वो गंगा में थूकते क्यों दिखाई दे रहे हैं? अक्षय कुमार के फैंस इस टीजर को खासा पसंद कर रहे हैं और उनकी एंट्री सीन की तारीफ कर रहे हैं।

सब कुछ बहा, लेकिन जल प्रलय में खड़ा रहा मंडी का 300 साल पुराना मंदिर: लोगों को याद आए केदारनाथ, पंचमुखी शिव प्रतिमा के कारण नाम पड़ा पंचवक्त्र

हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब जैसे कई राज्यों में बाढ़ से हालात खराब हैं। सोशल मीडिया में कई वीडियो वायरल हैं जिनमें उफनाती ​नदियों को सब कुछ बहाकर ले जाते हुए देखा जा सकता है। पर इस जल प्रलय के बीच भी हिमाचल प्रदेश के मंडी का 300 साल पुराना शिव मंदिर खड़ा है। इस मंदिर ने लोगों को 2013 के केदारनाथ आपदा की याद दिला दी है जब इस तरह जल सैलाब के बीच भी मंदिर सुरक्षित रहा था।

बाढ़ से पैदा हुए हालात की जानकारी हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दी है। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा 11 जुलाई 2023 (मंगलवार) को दी गई जानकारी के मुताबिक अब तक राज्य को कुल 4000 करोड़ का नुकसान हुआ है। भूस्खलन और बाढ़ से 20 लोगों की मौत हो चुकी है। आने वाले 10 दिनों तक सभी प्रशासनिक अधिकारियों को अलर्ट रहने के निर्देश जारी किए गए हैं। राहत और बचाव कार्यो के लिए कई जगहों पर हेलीकॉप्टर की मदद ली जा रही है। कुल्लू सहित लाहौल स्पीति और चन्द्रतल इलाके में लगभग 229 पर्यटकों के फँसे होने की सूचना है, जिन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक इस बारिश ने पिछले 50 वर्षों के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से हिमाचल की बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करे की माँग की है। बाढ़ से परवाणू, रोहड़ू, ठियोग, रामपुर, छैला और कुमारहट्टी आदि इलाकों में सड़कों को नुकसान पहुँचा है, जिन्हें खोलने के प्रयास किए जा रहे हैं।

सुरक्षित रहा शिव मंदिर

जल प्रलय से नुकसान और मौतों के बीच मंडी का ऐतिहासिक पंचवक्त्र मंदिर चर्चा में है। यह मंदिर ब्यास नदी और सुकेती खड्ड के किनारे बना हुआ है। उफनाती नदियों ने पुल, पहाड़ और बड़े-बड़े मकानों को धाराशायी कर दिया है। लेकिन इस मंदिर को कोई नुकसान नहीं हुआ है। य​ह मंदिर 300 साल से अधिक पुराना है। राजा सिद्ध सेन ने इसका निर्माण करवाया था। पंचमुखी शिव की प्रतिमा के कारण इस मंदिर का नाम पंचवक्त्र है। इस मंदिर की काफी मान्यता है।

सोशल मीडिया में वायरल हुए वीडियो में देखा जा सकता है ब्यास नदी में आए जल सैलाब से मंदिर चारों ओर से पानी से घिरा हुआ है। मंदिर का शिखर और उसके बगल का परिसर नजर आ रहा है। कई लोग इस घटना को केदारनाथ में जून 2013 को आई बाढ़ से जोड़ रहे हैं। तब बादल फटने से हुई भारी जनहानि के बीच मुख्य मंदिर सुरक्षित रहा था। तब मंदिर और धारा के बीच एक शिला आने के कारण केदारनाथ मंदिर सुरक्षित रहा था। 

कहीं मतगणना केंद्र पर ही बम ब्लास्ट तो कहीं BJP प्रत्याशियों पर हमला: बंगाल में काउंटिंग के दिन भी हिंसा, 133 पीड़ितों ने भाग कर असम में ली शरण

भारी हिंसा के बीच पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव संपन्न हुआ था, जिसमें हमने देखा कि कैसे राज्य भर में दंगे हुए और कहीं मतपेटियों को जला डाला गया तो कहीं उन पर पानी डाल दिया गया। अब मंगलवार (11 जुलाई, 2023) को मतगणना हो रही है, जिसमें सत्ताधारी TMC (तृणमूल कॉन्ग्रेस) आगे चल रही है। उधर भाजपा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से जवाब माँगा है कि क्या यही लोकतंत्र है? पार्टी ने इस पूरे चुनाव के दौरान हुई हिंसा को लोकतंत्र की हत्या करार दिया।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने पूछा कि अब नीतीश कुमार और राहुल गाँधी कहाँ हैं, पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा पर वो चुप क्यों हैं? उधर TMC के गुंडों पर भाजपा की महिला काउंटिंग एजेंट पर हमला कर के उसके कपड़े फाड़ डालने का आरोप लगा है। उसके पति को भी गुंडों ने पीटा, जो जख्मी हालत में सड़क पर पड़े रहे। उनके शरीर से काफी खून भी बह रहा था। हावड़ा के निश्चिंता में भाजपा के उम्मीदवार की पिटाई की गई, क्योंकि उन्होंने चुनाव वाले दिन बूथ कब्जाने का विरोध किया था।

इसी तरह बिष्णुपुर में भाजपा के जिला परिषद उम्मीदवार अनूप पैलान पर जानलेवा हमला किया गया। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने जानकारी दी है कि बंगाल हिंसा से पीड़ित 133 लोगों ने असम के धुबरी जिले में शरण ली है। उनके लिए राहत कैम्प लगा कर उन्हें भोजन और मेडिकल सुविधाएँ दी जा रही हैं। उधर भानगर में खुद राज्यपाल CV आनंद बोस पोलिंग सेंटरों का निरीक्षण करने पहुँचे। वेस्ट बर्धमान में 62 में से 25 ग्राम पंचायतों में टीएमसी आगे चल रही है।

कुल 3317 सीटों में से 350 पर TMC को आगे दिखाया जा रहा है, जबकि भाजपा महज 10 सीटों पर आगे है। मतदान के दिन जिस तरह से कई बूथों पर कब्ज़ा कर के फर्जी वोटिंग की गई, उसके बाद इन आँकड़ों पर सवाल उठने लाजिमी हैं। नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने टीएमसी पर ‘डायमंड हार्बर मॉडल’ लागू करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा उम्मीदवारों को मतगणना केंद्रों पर जाने से रोका जा रहा है। डायमंड हार्बर में फकीरचंद कॉलेज के सामने काउंटिंग सेंटर में ही ब्लास्ट की घटना सामने आई।

म्यांमार से घुसे 11 लोग मणिपुर में पकड़े गए, हिंसा प्रभावित चुराचांदपुर के जिला अस्पताल में करा रहे थे बम और गोली के घाव का इलाज

मणिपुर में म्यांमार (Myanmar) के 11 नागरिकों को पकड़ा गया है। ये वैध दस्तावेज के बिना भारत में घुसे हैं। इनकी गिरफ्तारी 10 जुलाई को हिंसा प्रभावित चुराचांदपुर जिले से हुई है। पकड़े गए सभी लोग मणिपुर (Manipur) की सीमा से लगते म्यांमार के तमू (Tomu) शहर के रहने वाले हैं। चुराचांदपुर (Churachandpur) जिला हॉस्पिटल में ये बम और गोली से हुए घावों का इलाज करवा रहे थे। यह स्पष्ट नहीं है कि इन्हें ये चोटें कैसे आई थी।

यह मामला 16 जून को तब सामने आया जब चुराचांदपुर पुलिस स्टेशन के प्रभारी को अस्पताल में म्यांमार के नागरिकों का इलाज चलने के बारे में जानकारी मिली। द फ्रंटियर मणिपुर की रिपोर्ट के अनुसार 28 जून के मेडिकल दस्तावेजों से कम से कम म्यांमार के 5 नागरिकों का जिला अस्पताल में इलाज होने की पुष्टि होती है। इनकी पहचान थर्गयी (15 जून से 28 जून तक एडमिट रहा), खैपी (15 जून को एडमिट हुआ), लुलमिनलाल (15 जून को एडमिट), कोनम (17 जून को एडमिट) और लोकी (17 जून को एडमिट) के तौर पर की गई है। 20 अप्रैल को म्यांमार के तीन अन्य नागरिकों को इसी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इनकी पहचान अवंगफ्योवाई, नगाम्बोई और डेविड थेटपिंग के रूप में की गई है।

आईएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, ऐसी आशंका है कि मणिपुर के चुराचांदपुर और बिष्णुपुर जिलों में हिंसा के दौरान ये लोग घायल हुए थे। घायलों में लोकी की हालत सबसे गंभीर बताई जा रही है, जिसके पेट में काफी नुकसान हुआ है। उसका ICU में इलाज चल रहा है। बताते चलें कि मणिपुर में हिंसा के दौरान मैतेई समूह ने कुकी विद्रोहियों को म्यांमार से मदद मिलने का भी आरोप लगाया था।

गौरतलब है कि मणिपुर में हिंसा का प्रमुख कारण म्यांमार और बांग्लादेशी से आए अवैध घुसपैठिए भी हैं। मैतेई समुदाय इसको लेकर अपनी पहचान पर खतरा बता रहा है। दरअसल, उत्तर पूर्व भारत म्यांमार के साथ 1,643 किलोमीटर की सीमा साझा करता है। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, म्यांमार के लगभग 52,000 शरणार्थी पूर्वोत्तर राज्यों में बसे हुए हैं। इनमें से 7800 मणिपुर में शरणार्थी हैं। इन्हें शरणार्थी का दर्जा मिला हुआ है। इसके अलावा, म्यांमार और बांग्लादेश से बड़ी संख्या में अवैध प्रवासी भी मणिपुर में बसे हुए हैं। इनके आँकड़े सरकार का पास नहीं हैं। मैतेई संगठनों का दावा है कि म्यांमार और बांग्लादेश से बड़े पैमाने पर अवैध आप्रवास के कारण उन्हें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

वैसे म्यांमार से मणिपुर में घुसपैठ का ये पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी पुलिस ने जून 1, 2019 को भारत-म्यांमार सीमा के पास स्थित मोरेह शहर से 9 रोहिंग्याओं को फर्जी आधार कार्ड के साथ गिरफ्तार किया था। इसके अलावा इम्फाल के तुलीहाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से 10 अगस्त 2019 को रोहिंग्या समुदाय के 6 लोगों की गिरफ़्तारी की गई थी। ये घुसपैठी फ़र्ज़ी दस्तावेज़ों के ज़रिए नई दिल्ली से यहाँ पहुँचे थे। तब राज्य के मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री बिरेन सिंह ने रोहिंग्याओं की घुसपैठ पर चिंता जताई थी।

लड़की के कमर में ​हाथ डाल नाच रहा था पादरी, वीडियो शेयर कर लिखा- धर्मांतरित हिंदुओं सोचो: तमिलनाडु पुलिस ने स्टंट मास्टर कनाल कन्नन को किया गिरफ्तार

कनाल कन्नन (Kanal Kannan) दक्षिण भारतीय फिल्मों के प्रसिद्ध स्टंट मास्टर हैं। उन्हें तमिलनाडु पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वजह उन्होंने सोशल मीडिया में एक ऐसा वीडियो शेयर किया था, जिसमें एक लड़की के साथ एक पादरी नाचते हुए नजर आ रहा था। वीडियो शेयर करते हुए उन्होंने तमिल में लिखा था कि विदेशी धर्मों की यही वास्तविक स्थिति है। धर्मांतरित हिंदुओं को इसके बारे में सोचना चाहिए और पाश्चाताप करना चाहिए।

इस पोस्ट को लेकर कन्नन को 10 जुलाई को गिरफ्तार किया गया। उनके खिलाफ सत्ताधारी डीएमके के एक नेता ने शिकायत दर्ज कराई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला नागरकोइल जिले का है। 18 जून 2023 को स्टंट मास्टर ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया था। इस वीडियो में एक पादरी खुद से काफी छोटी उम्र की लड़की के कमर में हाथ डालकर डांस कर रहा था। वीडियो के बैकग्राउंड में तमिल गाना बज रहा था।

इस ट्वीट को लेकर कन्याकुमारी के रहने वाले ऑस्टिन बेनेट ने कन्नन के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। ऑस्टिन बेनेट DMK पार्टी से जुड़े और आईटी टीम के सदस्य हैं। ऑस्टिन की शिकायत पर कनाल कन्नन के खिलाफ नागरकोइल साइबर थाने में 2 धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। इसी मामले में पुलिस ने कन्नन को सोमवार को पूछताछ के लिए बुलाया। सवाल-जवाब के बाद उनको गिरफ्तार कर लिया गया।

तमिलनाडु के संगठन हिन्दू मुन्नानी ने तमिलनाडु पुलिस की इस कार्रवाई का विरोध किया है। गिरफ्तारी के विरोध में संगठन ने पुलिस स्टेशन के आगे प्रदर्शन किया। मीडिया से बात करते हुए हिंदू मुन्नानी के प्रदेश राज्य प्रवक्ता एलंगोवन ने इसे फर्जी केस करार दिया है। उन्होंने कहा कि जिस वीडियो को शेयर करने की वजह से कन्नन को गिरफ्तार किया गया है, वह पहले से ही वायरल है। हिन्दू मुन्नानी ने इस कार्रवाई को अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताते हुए कहा कि DMK इस पर राजनीति कर रही है।

एलंगोवन ने तमिलनाडु सरकार की हिन्दू विरोधी मामलों में शिकायतों पर ख़ामोशी को लेकर भी सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि अपनी विचारधारा से अलग सोच रखने वाला हर व्यक्ति तमिलनाडु सरकार द्वारा परेशान किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल कन्नन को पेरियार विरोधी बयानबाजी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। सितंबर 2022 में मद्रास हाई कोर्ट ने इस मामले में उन्हें सशर्त जमानत प्रदान की थी।

14 साल की ‘बहन’ से निकाह करना चाहता था शिबू अली, नहीं मानी तो फंदे से लटकाकर मार डाला: अम्मी ने दर्ज कराई शिकायत, बिहार के छपरा की घटना

बिहार के छपरा में 14 साल की लड़की की हत्या का मामला सामने आया। मृतक की पहचान मुस्कान के रूप में हुई। हत्या का आरोप पड़ोस में रहने वाले ‘भाई’ शिबू अली और उसके घरवालों पर लगा है। मुस्कान के परिजनों का आरोप है कि शिबू और उसके घरवाले उनकी बेटी से निकाह कराने का दबाव डाल रहे थे। इनकार करने पर फंदे से लटकाकर उसकी हत्या कर दी। कई मीडिया रिपोर्टों में मृतका और निकाह के लिए दबाव बनाने वाले शिबू अली के बीच भाई-बहन का रिश्ता बताया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला छपरा के मढ़ौरा थाना क्षेत्र के जादौली बथाना गाँव की है। मृतक लड़की के परिजनों का कहना है कि शिबू अली मुस्कान से एकतरफा प्यार करता था। इसको लेकर शिबू के परिजन उन पर निकाह का दबाव बनाते थे। लेकिन वह शिबू के साथ मुस्कान का निकाह कराने के लिए तैयार नहीं थे। इससे नाराज होकर ही शिबू और उसके परिजनों ने मुस्कान की हत्या कर दी।

मुस्कान की माँ अजमेरी खातून द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत में कहा गया है कि रविवार (9 जुलाई 2023) शाम वह घर से बाहर गई हुई थी। उसकी नाबालिग बेटी घर में ही थी। जब वह वापस घर लौटी तो पड़ोसी निजामुद्दीन, गयासुद्दीन, आवदा खातून को अपने घर से बाहर निकलते देखा। उनसे अपने घर में घुसने का कारण पूछा तो वे बिना जवाब दिए चले गए। इसके बाद अजमेरी घर के अंदर गई तो अपनी बेटी को मृत पाया। चिल्लाकर शोर मचाया तो आसपास के लोगों ने आरोपितों को पकड़कर पुलिस को सौंप दिया। लेकिन मुख्य आरोपित शिबू अली मौके से फरार हो गया। 

घटना के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेते हुए पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। साथ ही शिबू अली, निजामुद्दीन, गयासुद्दीन और आवदा खातून के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर 3 लोगों को गिरफ्तार किया है। एसपी गौरव मंगला का कहना है कि इससे पहले भी आरोपितों और मृतका व उसके परिजनों के बीच कहासुनी हो चुकी है। मृतका के परिजनों के बयान के आधार पर पुलिस मामले की जाँच कर रही है। 

कॉन्स्टेबल रतन लाल की हत्या में वांटेड मोहम्मद खालिद मणिपुर से गिरफ्तार: बताया- मेरे घर पर हुई थी सीक्रेट मीटिंग, लाठी-लोहे के रॉड जमा करने का हुआ था फैसला

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मोहम्मद खालिद को मणिपुर से गिरफ्तार किया है। 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों के दौरान हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल की हत्या में उसकी तलाश थी। उस पर एक लाख का इनाम रखा गया था। पूछताछ में उसने दंगों से पहले अपने घर पर सीक्रेट मीटिंग होने की बात कबूली है। बताया है कि इस मीटिंग में लाठी, लोहे के रॉड वगैरह इकट्ठा करने का फैसला किया गया था।

क्राइम ब्रांच के स्पेशल कमिश्नर रवींद्र सिंह यादव ने बताया है, “मोहम्मद खालिद के मणिपुर में छिपे होने की सूचना मिली थी। इस पर कार्रवाई करते हुए उसे भारत-म्यांमार सीमा के पास से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान उसने खुलासा किया है कि साल 2020 में दिल्ली के चाँद बाग इलाके में हुए सीएए और एनआरसी विरोधी प्रदर्शन में वह अपने बड़े भाई मोहम्मद अयाज व अन्य सहयोगियों के साथ शामिल हुआ था। दंगे को लेकर उसके घर पर एक सीक्रेट मीटिंग हुई थी। इस मीटिंग में रास्ता जाम करने के लिए लाठियाँ और लोहे की रॉड जमा करने का फैसला हुआ था।”

हिंसा के दौरान दंगाइयों ने जाफराबाद मेट्रो स्टेशन की ओर जाने वाली सड़क जाम कर दी थी। साथ ही चाँद बाग में धरने वाली जगह पर भारी संख्या में भीड़ इकट्ठी कर वजीराबाद की सड़क को भी जाम करने की कोशिश हुई। जब पुलिस ने रोकने की कोशिश की तब खालिद और उसके भाई अयाज समेत अन्य दंगाइयों ने पथराव करते हुए पुलिस पर हमला कर दिया। इससे हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल की मौत हो गई और कई अन्य पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।

इस मामले में पुलिस ने मोहम्मद खालिद के खिलाफ दिल्ली के दयालपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया था। वह बीते 3 साल से फरार चल रहा था। दंगों में उसकी भूमिका और लंबे समय से फरारी के चलते पुलिस ने उस पर 1 लाख रुपए का इनाम भी रखा था। उसके भाई अयाज को इसी साल 21 जून को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। अयाज हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल की हत्या के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक है।

गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में फरवरी 2020 में दिल्ली में दंगे भड़क उठे थे। दंगे में मुस्लिमों ने मुख्य रूप से हिंदुओं को निशाना बनाते हुए गोलीबारी, पेट्रोल बम, चाकू, तलवार, पत्थरबाजी समेत अन्य तरह से हमले किए थे। इस दंगे में 50 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। सैकड़ों लोग घायल हुए थे। गौरतलब है कि दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों के दौरान 24 फरवरी 2020 को मुस्लिम भीड़ ने मौजपुर इलाके में पुलिस बल पर हमला किया था। दिल्ली पुलिस के 42 वर्षीय हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल इसी हमले में बलिदान हो गए थे। 

अब नहीं होती पत्थरबाजी, शांति से चल रहे स्कूल: 370 पर सुप्रीम कोर्ट से मोदी सरकार, पंचायत चुनाव और G20 बैठक का भी जिक्र

सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई होने वाली है। इसी क्रम में केंद्र सरकार ने भी एफिडेविट दायर कर अपने फैसले का बचाव किया है। केंद्र सरकार ने कहा है कि 2019 के बाद से ही जम्मू कश्मीर में शांति, उन्नति और समृद्धि का ऐसा है जैसा पहले कभी नहीं रहा। साथ ही बताया गया है कि घाटी में 3 दशक की अस्थिरता के बाद जन-जीवन सामान्य हो गया है। बता दें कि अगस्त 2019 में अनुच्छेद-370 को निरस्त किया गया था।

इसके साथ ही राज्य को दो हिस्से में विभाजित किया गया था। जम्मू कश्मीर और लद्दाख – इन दोनों को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया। अब मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर एफिडेविट में कहा है कि स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों का संचालन सुचारु रूप से हो रहा है। न तो किसी प्रकार का धरना प्रदर्शन हो रहा है और न ही पिछले 3 वर्षों से इनके कामकाज में किसी प्रकार की बाधा डाली गई है। सब शांतिपूर्वक चल रहा है।

इस एफिडेविट में मोदी सरकार ने ये भी साफ़ कर दिया है कि पहले जो रोज के रोज हड़ताल, बंद, हमलों और पत्थरबाजी की घटनाएँ होती थीं अब वो बंद हो गई हैं। इस एफिडेविट में ये जानकारी भी दी गई है कि लोकतांत्रिक तरीके से किए गए संवैधानिक बदलावों के बाद जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं। उदाहरण देते हुए समझाया गया है कि पहली बार जम्मू कश्मीर में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था को लागू किया गया है।

केंद्र की मोदी सरकार ने एफिडेविट में बताया है कि नवंबर-दिसंबर 2020 में जिला विकास परिषदों के लिए चुनाव संपन्न कराए गए। साथ ही सर्वोच्च न्यायालय को एक बड़ी जानकारी ये भी दी गई है कि आज जम्मू कश्मीर में गाँव और शहरों की पंचायतों में 34,000 चुने हुए प्रतिनिधि हैं जो जमीनी लोकतंत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। साथ ही आतंकी नेटवर्क के खिलाफ हुई कार्रवाई के संबंध में भी जानकारी दी गई है। बताया गया है कि प्रदेश का आम आदमी भी इस शांति और अस्थिरता को अनुभव कर रहा है।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को ये समझाने का भी प्रयास किया है कि कैसे मई 2023 में G-20 के टूरिज्म ग्रुप की बैठक जिस तरह से श्रीनगर में आयोजित की गई, वो जम्मू कश्मीर के इतिहास में पर्यटन के क्षेत्र में ऐतिहासिक क्षण था। भारत ने गौरव के साथ दुनिया भर को दिखाया कि आतंकियों के प्रभाव वाले इलाकों को एक ऐसे क्षेत्र में बदला जा सकता है जहाँ अंतरराष्ट्रीय अतिथियों की बैठक हो, वैश्विक कार्यक्रम हों।