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आमदनी- ₹4.5 करोड़, खर्च- ₹12.5 करोड़: पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार में डिप्टी CM रहे ओपी सोनी गिरफ्तार, पहले से ही जेल में हैं 3 पूर्व मंत्री

पंजाब में आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले में पूर्व डिप्टी सीएम व कॉन्ग्रेस नेता ओपी सोनी को विजिलेंस ब्यूरो ने अरेस्ट किया है। उनके ऊपर आरोप है कि उन्होंने 2016 से 2022 के दौरान इनकम के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित की।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, विजिलेंस ब्यूरो के एक आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि जाँच के बाद सोनी के खिलाफ अमृतसर रेंज में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (1) (बी) और 13 (2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसका आदेश 10 अक्टूबर 2022 को दिया गया था।

प्रवक्ता ने बताया, “1 अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2022 तक की जाँच अवधि के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री और उनके परिवार की आय 4,52,18,771 रुपए थी जबकि खर्च 12,48,42,692 रुपए था। यानी आमदनी के मुकाबले खर्च 7,96,23,921 रुपए ज्यादा था।”

प्रवक्ता का दावा है कि आरोपित ओपी सोनी ने अपनी पत्नी सुमन और बेटे राघव सोनी के नाम पर आय से अधिक संपत्ति को अर्जित किया हुआ था। अब इस पूरे मामले में विस्तृत जाँच की जा रही है। वहीं ओपी सोनी की गिरफ्तारी के बाद पेशी भी सोमवार को होनी है।

बता दें कि ओपी सोनी कॉन्ग्रेस के सीनियर लीडर हैं और अमृतसर से पाँच बार चुनाव जीत चुके हैं। वह कॉन्ग्रेस की चन्नी सरकार में डिप्टी सीएम रह चुके हैं और कैप्टन सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। उनकी संपत्ति के खिलाफ 10 अक्टूबर 2022 को जारी जाँच आदेश के बाद विजिलेंस ब्यूरो ने यह जाँच की। इस दौरान उनके होटल व अन्य जगहों पर चल रहे निर्माण की भी पैमाइश की गई। बाद में विजिलेंस ब्यूरो ने रविवार को केस दर्ज करके पूर्व डिप्टी सीएम को गिरफ्तार कर लिया गया।

पंजाब में कॉन्ग्रेस नेताओं पर जाँच

उल्लेखनीय है कि विजिलेंस ब्यूरो इस समय कॉन्ग्रेस के पाँच पूर्व विधायकों के खिलाफ जाँच कर रही है। इनके नाम दलवीर सिंह गोल्डी, कुलदीप वैद, सत्कार कौर, मदन लाल जलालपुर और कुशलदीप सिंह ढिल्लों है। इसके अलावा 10 पूर्व मंत्रियों के खिलाफ भी भ्रष्टाचार की जाँच हो रही है। इन नामों में ओपी सोनी, चरणजीत सिंह चन्नी, ब्रह्म मोहिंद्रा, साधु सिंह धर्मसोत, सुंदर शाम अरोड़ा, बलबीर सिंह सिद्धू, गुरप्रीत सिंह कांगड़, भारत भूषण आशु, विजय इंदर सिंगला और संगत सिंह गिलजियां शामिल हैं। इनमें से चार को विजिलेंस ब्यूरो ने अब तक अरेस्ट किया है। इससे पहले अक्टूबर 2022 में, कॉन्ग्रेस के पूर्व मंत्री शाम सुंदर अरोड़ा को अपनी कथित आय से अधिक संपत्ति के मामले को निपटाने के लिए ब्यूरो अधिकारियों को कथित तौर पर 50 लाख रुपए की पेशकश करते हुए गिरफ्तार किया गया था। उससे पहले साधू सिंह की गिरफ्तारी हुई थी।

‘अजान का समय है, DJ बंद करो और रास्ता बदलो’: मुस्लिमों ने OBC हिन्दू परिवार का शादी कार्यक्रम रोका, पुलिस को आकर कराना पड़ा समझौता

झारखंड के बोकारो में एक हिन्दू परिवार द्वारा शादी की रस्म के दौरान मस्जिद के आगे DJ बजाने को ले कर विवाद खड़ा हो गया। इस घटना के बाद दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। विरोध स्वरूप गाँव के मुख्य मार्ग पर ईंटे रख दी गईं। घटना की सूचना पर पुलिस प्रशासन मौके पर पहुँचा और दोनों पक्षों के बीच मामले को शांत करवाया। हालात को काबू में रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। घटना रविवार (9 जुलाई, 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला बोकारो जिले के थाना क्षेत्र पिंड्राजोरा में आने वाले गाँव संथालडीह का है। यहाँ कमल महतो के परिवार में शादी का कार्यक्रम चल रहा था। इसी कार्यक्रम के दौरान कुछ महिलाएँ DJ पर बज रहे गाने के साथ एक विधान पूरा करने गाँव के रास्ते से गुजर रहीं थीं। रास्ते में एक मस्जिद पड़ी जहाँ मौजूद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने अजान का समय बता कर महतो परिवार से DJ बंद करने को कहा। हिन्दू परिवार का आरोप है कि उन्हें मस्जिद की बजाये दूसरे रास्ते से जाने के लिए कहा गया।

इस बात को ले कर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। मुस्लिम युवकों पर बाजा बजा रहे लोगों के साथ हाथापाई और महिलाओं से धक्का-मुक्की करने का भी आरोप लगा। जब इस बात की भनक अन्य ग्रामीणों को लगी तो वो आक्रोशित हो गए। इसी गुस्से में उन्होंने गाँव आने वाले रास्ते को ईंटें रख कर बंद कर दिया। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची। प्रशासनिक अधिकारियों ने दोनों पक्षों को आमने-सामने बिठा कर बातचीत की तो मामले का हल निकला। दोनों ही पक्षों ने सहमति से एक दूसरे से समझौता कर लिया।

इस समझौते के बाद ग्रामीणों का आक्रोश कुछ शांत हुआ। उन्होंने बंद किए गए मार्ग को फिर से खोला। इस बीच हालात देखते हुए गाँव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। DSP पूनम मिंज ने दोनों पक्षों के समझौते की पुष्टि करते हुए गाँव में हालत को सामान्य बताया है।

3 साल से बच्चे से अश्लील तस्वीरें मँगा रहा था BBC का स्टार एंकर, बनाया ड्रग एडिक्ट: माँ ने लगाई न्याय की गुहार, आरोपित के साथ पार्टी करते रहे अधिकारी

BBC के एक एंकर को ऑफ एयर करते हुए उसे निलंबित कर दिया गया है। इसका कारण ये है कि उक्त एंकर कई वर्षों से एक किशोर की अश्लील तस्वीरें मँगा रहा था और इसके लिए पैसे भी दे रहा था। उक्त प्रेजेंटर को एक जाना-पहचाना चेहरा बताया जा रहा है, जिसका शो लाखों लोग देखते थे। पीड़ित की माँ ने कई आरोप लगाए हैं, जिसकी जाँच शुरू कर दी गई है। 19 मई, 2023 को ही इसका खुलासा करते हुए माँ ने कहा था कि उसके बेटे को कैश भेजना बंद करो।

परिवार ने उक्त एंकर के व्यवहार के बारे में BBC को शिकायत की। बाद में पता चला कि उक्त नाबालिग लड़का इन पैसों का इस्तेमाल कोकीन खरीदने के लिए कर रहा था। उसे ड्रग्स की लत लग गई है। परिवार का कहना है कि 3 साल पहले वो एक अच्छा बच्चा हुआ करता था, लेकिन अब वो एक ड्रग एडिक्ट बन गया है। जब ये सब शुरू हुआ उस समय पीड़ित की उम्र 17 साल हुआ करती थी, लेकिन अब वो 20 साल का युवक है। साथ ही ड्रग्स का आदी भी हो गया है।

लड़के की माँ ने अपने बेटे का बैन स्टेटमेंट दिखाते हुए कहा कि BBC का स्टार एंकर उसे पैसे भेजना बंद करे। रोती हुई माँ ने कहा कि कभी-कभी सैकड़ों तो कभी हजारों पाउंड्स रुपए उसके बेटे के बैंक खाते में भेजे गए। बता दें कि वर्तमान दरों के हिसाब से एक पांउड की कीमत 105.90 रुपए बैठती है। इस दौरान बीबीसी प्रेजेंटर ने खुद की पहचान भी नहीं छिपाई और वो वर्कप्लेस से खुद की तस्वीरें भी भेजता था। स्टार एंकर बच्चे से कहता था – ‘परफॉर्म करते हुए वीडियो भेजो’।

अब BBC कह रहा है कि वो हर तरह की शिकायत को गंभीरता से लेता है और इसकी अच्छे से जाँच कर रहा है। BBC ने कहा है कि ये एक पेचीदा मामला है और काफी तेजी से परिस्थितियों में बदलाव हो रहा है, ऐसे में आंतरिक जाँच पूरी होने तक स्टार एंकर को ऑफ एयर कर दिया गया है। बड़ी बात ये है कि आरोप सामने आने के कुछ हफ़्तों बाद उसी एंकर के साथ BBC के कॉर्पोरेट अधिकारियों ने पार्टी की। ब्रिटेन में भी किसी बच्चे से उसकी यौन तस्वीरें माँगना बड़ा अपराध है।

‘बेटी ने किया अब्बा से निकाह, बन गई बाप की चौथी बीवी’: पाकिस्तानी जोड़े की वीडियो वायरल, जानिए रिश्ते की सच्चाई

सोशल मीडिया पर पाकिस्तान का बता कर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में मुस्लिम व्यक्ति एक लड़की के साथ दिख रहा है जिसके बारे में दावा किया जा रहा है कि उसने अपनी ही बेटी से निकाह कर लिया है। कई यूजर्स यह भी दावा कर रहे है कि लड़की का अब्बा पहले से ही 3 बीवीयों का शौहर है। जब इस वीडियो की पड़ताल की गई तो ये सच्चाई कुछ और ही निकल कर सामने आई।

वायरल दावा

बता दें कि वायरल वीडियो को शेयर करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा जा रहा था- “पाकिस्तानी लड़की ने अपने पिता से ही रचा ली शादी, बन गई चौथी बीवी।” एक यूजर ने अपने ट्विटर हैंडल से शेयर करते हुए लिखा था, “पाकिस्तान में एक पिता ने अपनी ही बेटी से शादी रचाई है। दिलचस्प बात यह है कि बेटी ने खुद यह बात कबूल की है कि उसने अपने पिता से शादी की है। बेटी ने पिता से शादी की जो वजह बताई है वह हैरान करने वाली है। दरअसल युवती ने बताया है कि उसने अपने नाम के आधार पर अपने पिता से शादी की है।”

समाचार दर्पणऔर INH 24X7 सहित कई अन्य हैंडलों ने भी इस खबर को कमोबेश इसी एंगल से शेयर किया है।

बाप -बेटी नहीं बल्कि गुरु-शिष्य का रिश्ता

जब इस वीडियो की पड़ताल की गई तो पता चला कि बेटी द्वारा अपने अब्बा से निकाह करने का दावा सच नहीं है। इस प्रेम जोड़े का इंटरव्यू लगभग 2 साल पहले 11 जून 2021 को डेली पाकिस्तान ग्लोबल नाम के यूट्यूब चैनल पर पब्लिश हुआ था।

इस वीडियो में बताया गया कि शौहर का नाम आमिर खान और बेगम का नाम राबिया है। 2 साल पहले आमिर खान 50 साल और उनकी बीवी राबिया 30 साल की थीं। मूल रूप से पाकिस्तान निवासी आमिर खान अमेरिका में रहते हैं जो लोगों को इस्लामी शिक्षा देते हैं।

इंटरव्यू में बताया गया है कि आमिर और राबिया के बीच बाप-बेटी का रिश्ता नहीं है बल्कि आमिर तो इस्लामी उलेमा है जिसके राबिया तालिम लेती थी। अपनी छात्रा को पढ़ाने के दौरान आमिर खान ने प्रपोज किया और राबिया मान गईं। यह स्कूल लाहौर में था तब आमिर खान ने खुद बताया था कि वो 3 बीवियों को तलाक दे चुके है और राबिया उनकी चौथी बेगम हैं।

इन 3 निक़ाहों में 2 लव मैरिज थी और 1 अरेंज थी। पहले की गई शादियों से आमिर खान को 2 बच्चे भी हैं। पहले तलाक दी गईं तीनों बीवियों से आमिर खान ने अपनी केमिस्ट्री मैच न होना बताया। हालाँकि राबिया ने भी खुद को किस्मतवाली बताते हुए अपने टीचर आमिर खान द्वारा बोले गए सोच से खुद को उनसे प्यार की वजह बताया।

आमिर खान ने यह भी बताया कि उनकी बीवी को बुर्का आदि न पहनने के लिए अक्सर ताने मारे जाते हैं। हालाँकि इस दौरान उन्होंने यह भी बताया कि कुछ लड़कियों ने उन्हें सपोर्ट भी किया।

कैसे फैला भ्रम

दरअसल राबिया की एक वीडियो सामने आई थी जिसमें वह बता रही थी कि उनके नाम का अर्थ अरबी में चार है। ऐसे में वो अपने घर की दूसरी नंबर की बेटी हैं मगर नाम को चरितार्थ करने के लिए वो चौथे नंबर की बीवी बन गईं। उनके इसी बयान को लोगों ने थोड़ा गलत समझा और दावा किया जाने लगा कि बेटी ने किया अब्बा से निकाह।

मुस्लिम सहेली ने मुँह में जबरन ठूँसा माँस का पराठा, रोते-रोते घर पहुँची हिन्दू छात्रा: झारखंड के स्कूल की घटना, प्रिंसिपल बोलीं- दोबारा ऐसा नहीं होगा

झारखंड के जमशेदपुर के एक स्कूल में हिन्दू छात्रा को उसकी मुस्लिम सहेली द्वारा जबरन माँस खिलाने का मामला सामने आया है। माँस खिलाने वाली छात्रा ने पीड़िता से कहा था कि वो इस बारे में किसी को न बताए। पीड़ित छात्रा के परिवार वालों ने घटना पर नाराजगी जताई है। मामले को संज्ञान में लेकर स्कूल प्रशासन द्वारा आरोपित छात्रा का नाम स्कूल से काट दिया गया है। पीड़िता के पिता ने भी अपनी बेटी को किसी और स्कूल में पढ़ाने का फैसला किया है। घटना शुक्रवार (7 जुलाई 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला जमशेदपुर के मानगो स्थित सिंबोसिस पब्लिक स्कूल का है। यहाँ शुक्रवार को हाफ डे के बाद एक हिन्दू छात्रा रोते हुए अपने घर पहुँची। छात्रा ने अपने पिता को बताया कि उसकी मुस्लिम सहेली ने जबरन मुँह दबा कर उसे पराठे में भरा माँस खिलाया है। इस घटना की जानकारी होने के बाद पहले पीड़िता के परिवार वाले थाने गए और बाद में स्कूल पहुँचे। स्कूल की प्रिंसिपल ने बताया कि वहाँ माँस और जंकफ़ूड लाने की अनुमति नहीं है। साथ ही कार्रवाई के तौर पर आरोपित छात्रा का नाम स्कूल से काट दिया।

वहीं पीड़िता की माँ ने बताया कि स्कूल में पढ़ने लायक माहौल न होने के चलते वो भी अपनी बेटी का नाम किसी और स्कूल में लिखवाने जा रही हैं। सभी के लिए स्कूल में परेशानी बताते हुए लड़की की माँ ने बाकी हिन्दुओं से अपील की है कि वो अपनी बच्चों का नाम सिंबोसिस पब्लिक स्कूल में न लिखवाएँ। पीड़िता के अभिभावकों का आरोप है कि उनकी बच्ची से पहले भी कई अन्य छात्रों के साथ ऐसी घटना हो चुकी है लेकिन वो इसे किसी को बताने की हिम्मत नहीं जुटा पाए।

आरोपित छात्रा के अब्बा कहीं विदेश में नौकरी करते हैं। पूछताछ में उसने हिन्दू छात्रा को माँस खिलाने की बात कबूल की है। दोनों छात्राएँ क्लास 4 में एक साथ पढ़ती हैं। हिन्दू छात्रा का स्कूल में यह पहला साल था जबकि मुस्लिम छात्रा यहाँ क्लास 1 से पढ़ रही है। वहीं इस मामले में स्कूल की प्रिंसिपल का कहना है कि आरोपित छात्रा ने बताया है कि माँस जबरदस्ती नहीं खिलाया गया है। उन्होंने घटना को गलत बताते हुए दोबारा ऐसा न हो इसका पूरा ध्यान रखे जाने का भरोसा दिया है।

सीरिया में बाइक पर घूम रहा था ISIS का टॉप आतंकी अल-मुजाहिर, अमेरिका ने ड्रोन से लगाया निशाना: मौके पर मौत, Video आया सामने

अमेरिका ने सीरिया में सक्रिय आतंकी संगठन ISIS के एक टॉप आतंकवादी को ड्रोन हमले में मार गिराने का दावा किया है। मारे गए आतंकी का नाम ओसामा अल-मुहाजिर है। 9 जुलाई (रविवार) को अमेरिकी सैन्य अधिकारीयों ने बताया कि यह हमला 7 जुलाई 2023 को किया गया था। इस मुठभेड़ का फुटेज भी जारी किया गया है। अमेरिका ने अपने अभियान में रूस के लड़ाकू विमानों द्वारा बाधा डालने का भी आरोप लगाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शुक्रवार (7 जुलाई) को अमेरिका के रीपर ड्रोन एमक्यू-9 ने आतंकियों की टोह लेने के लिए उड़ान भरी थी। इस दौरान रास्ते में उनका सामना रूसी लड़ाकू विमानों से हुआ। आरोप लगाया गया है कि रूस के जहाज़ों ने लगभग 2 घंटों तक अमेरिकी ड्रोन को परेशान किया। 2 घंटे बाद अमेरिकी ड्रोन ने ISIS के टॉप आतंकी उसामा अल-मुहाजिर को अलेप्पो क्षेत्र में खोज निकाला। वह बाइक से कहीं भाग रहा था। आखिरकार ड्रोन के सटीक निशाने में अल मुहाजिर मारा गया।

अमेरिका ने बताया कि मारा गया आतंकी अल-मुहाजिर सीरिया के उत्तर-पश्चिमी के साथ पूर्वी क्षेत्र में भी सक्रिय था। अमेरिका ने यह भी बताया है कि अल-मुहाजिर को मारने के दौरान किसी आम नागरिक की न तो मौत हुई और न ही कोई घायल हुआ। अमेरिका ने आधिकारिक रूप से रूसी सेना की भी आलोचना की और उनके रवैए को गैर जिम्मेदाराना बताया है। सेंट्रल कमांड के कमांडर ने अपने बयान में साफ तौर पर कहा कि वो सीरिया में ISIS आतंकियों को हर हाल में हराएँगे।

अमेरिका का मानना है कि ISIS सीरिया और ईराक में पहले के मुकाबले काफी कमजोर हो चुका है। हालाँकि वह बचे आतंकियों को क्षेत्रीय शाँति और सुरक्षा के लिए खतरा मानता है। बताया यह भी गया कि कई आतंकी अभी भी आतंकी हमले की योजना को अंजाम देने की फिराक में हैं।

बंगाल में 697 बूथों पर फिर से हो रही वोटिंग, सुरक्षा में हर जगह केंद्रीय बल तैनात: विरोध देख SEC का फैसला, हिंसा में मरने वालों की संख्या 19 हुई

पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव वाले दिन जमकर हिंसा होने के कारण आज बंगाल के कई जिलों में दोबारा मतदान हो रहा है। राज्य चुनाव आयोग ने बताया कि 5 जिलों के करीबन 697 बूथों पर यह वोट डाले जा रहे हैं। इस दौरान बूथों की सुरक्षा के लिए वहाँ केंद्रीय बल भी तैनात है।

जी हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, एक अधिकारी ने बताया कि राज्य चुनाव आयोग ने रविवार शाम को बैठक के बाद वोटिंग वाले दिन हुई हिंसा की खबरों पर गौर किया था और आदेश पारित किया था कि दोबारा री-पोलिंग होगी। अब केंद्रीय बल की कड़ी सुरक्षा में 600 से ज्यादा बूथों पर वोटिंग की जा रही है।

बता दें कि पंचायत चुनाव में दोबारा वोटिंग सोमवार को मुर्शिदाबाद में 175 बूथों पर, मालदा में 112 बूथों पर की जा रही है। इसी तरह नादिया में 89, नॉर्थ 24 परगना में 46 बूथों पर दोबारा मतदान कराया जा रहा है। इसके अलावा साउथ 24 परगना में 36, पूर्व मेदिनीपुर में 31, हुगली में 29, साउथ दिनाजपुर में 18, जलपाईगुड़ी में 14, बीरभूम में 14, पश्चिम मेदिनीपुर में 10, बांकुरा में 8, हावड़ा में 8, पश्चिम बर्धमान में 6, पुरुलिया में 4, 3 पूर्व बर्धमान में, और 1 अलीपुरद्वार में बूथ पर दोबारा वोटिंग हो रही है।

उल्लेखनीय है कि बंगाल में 8 जुलाई को पंचायत चुनाव के लिए मतदान के दौरान भारी हिंसा हुई थी। कही बम फेंके गए थे तो कहीं पोलिंग बूथ पर आगजनी हुई थी। कई मामले आए थे जब लोग बैलट बॉक्स और बैलट पेपर ही तोड़कर भाग गए। ऐसे में राज्य में चुनाव आयोग का काफी विरोध हुआ और फिर जाकर उन्होंने इन सब मामलों पर संज्ञान लिया।

राज्य चुनाव आयोग ने जिलाधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट माँगी। वहीं पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद भी रविवार को नई दिल्ली आए। संभव है कि वो यहाँ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिलकर उन्हें राज्य में पंचायत चुनाव के दौरान हुई हिंसा पर एक रिपोर्ट देंगें। इससे पहले वह ग्रामीण चुनावों की पृष्ठभूमि में हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के बाद एक रिपोर्ट तैयार कर चुके हैं।

टमाटर की सुरक्षा के लिए लगाए बाउंसर… PTI ने जिसे बताया ‘सब्जी विक्रेता’, वो निकला सपा नेता: मीडिया ने बिना जाँचे चलाई खबर

समाचार एजेंसी PTI ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी का एक वीडियो शेयर किया, जिसमें सब्जी की एक दुकान पर 2 बाउंसरों को टमाटर की रखवाली करते हुए देखा जा सकता है। दोनों बाउंसर काले शूट पहने होते हैं और साथ ही ब्लैक गॉगल्स भी लगाए होते हैं। वो ग्राहकों को टमाटर को छूने से भी रोकते हैं। PTI से ‘सब्जी विक्रेता’ ने कहा कि टमाटर की महँगाई के कारण लूटपाट की घटनाएँ हो रही हैं, इसीलिए वाद-विवाद से बचने के लिए बाउंसरों को लगाया गया है।

साथ ही उक्त ‘सब्जी विक्रेता’ ने ये भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासनकाल में जनता महँगाई से त्रस्त है और 160 रुपए किलो टमाटर बिक रहा है, ऐसे में कोई 50 तो कोई 100 ग्राम खरीद रहा है। इसे भाजपा विरोधी गिरोह ने कुछ इस तरह से पेश किया कि प्रधानमंत्री के ही लोकसभा क्षेत्र में महँगाई के कारण ये हालत हो गई है। PTI के इस वीडियो में अंग्रेजी में बताया गया कि कैसे बाउंसर सब्जी की दुकान में टमाटर की रखवाली कर रहे हैं। हालाँकि, इसकी सच्चाई कुछ और है।

वीडियो में ये भी दिखाया गया कि उक्त ‘सब्जी विक्रेता’ बाउंसरों के साथ आता है और बीच में टमाटर का बक्सा होता है। आपको बता दें कि PTI ने जिसे ‘सब्जी विक्रेता’ बता कर पेश क़िया, असल में वो समाजवादी पार्टी का नेता है। तभी ये वीडियो तुरंत अखिलेश यादव के पास भी पहुँच गया और उन्होंने ट्वीट कर के टमाटर को Z+ सिक्योरिटी देने की माँग कर दी। इतना ही नहीं, कई मीडिया संस्थानों ने बिना जाँच-पड़ताल किए ही टमाटर के लिए सब्जी विक्रेता द्वारा बाउंसर लगाने की खबर शेयर कर दी।

किसी ने ये तक नहीं सोचा कि सब्जी का ठेला लगाने वाले एक सामान्य दुकानदार की इतनी आमदनी नहीं होती कि वो दो-दो बाउंसरों का खर्च उठा पाए, वो भी कुछ किलोग्राम के टमाटर के लिए। जिस नेता ने ये सब किया, उसका नाम अजय फौजी है और वो सोशल मीडिया के माध्यम से समाजवादी पार्टी का प्रोपेगंडा फैलाने में लगा रहता है। उसने खुद को ‘दिल से अखिलेसियन’ बता रखा है। साथ ही बायो में उसने इंट्रो के रूप में ‘सदस्य, जिला योजना समिति, उत्तर प्रदेश सरकार’ भी लिख रखा है।

हालाँकि, जब ये सच्चाई सामने आई तो PTI ने इस वीडियो को हटा दिया। साथ ही उसने स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि सब्जी विक्रेता समाजवादी पार्टी का कार्यकर्ता निकला है, ऐसे में उसके द्वारा हमें दी गई सूचना के पीछे की मंशा सवालिया है। समाचार एजेंसी ने स्वीकार किया कि इस वीडियो के स्रोत की पुष्टि करने में वो नाकाम रही। साथ ही कहा कि वो निष्पक्ष रहने की कोशिश करेगा। टमाटर और बाउंसर वाले वीडियो को लेकर अभी भी प्रोपेगंडा जारी है।

बिकनी में अभिनेत्री, साथ में 4 साल का बेटा… इंस्टाग्राम पर अपलोड की तस्वीर तो लोगों ने फटकारा, कहा – बच्चे के सामने ये सब ठीक नहीं

टीवी एक्ट्रेस और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर छवि मित्तल को आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, छवि मित्तल ने इंस्टाग्राम पर बिकनी पहने एक फोटो शेयर की है। इस फोटो में उनका 4 साल का बेटा भी नजर आ रहा है। इस फोटो को लेकर नेटीजेन्स का कहना है कि बच्चों के सामने इस तरह की हरकतें करना ठीक नहीं। हालाँकि कुछ लोगों ने छवि की तारीफ भी की।

छवि मित्तल ने इंस्टाग्राम पर अपनी फोटो शेयर करते हुए अपने बेटे अरहाम हुसैन की तारीफ की है। उन्होंने लिखा है, “यह प्यारा फोटोबॉम्बर मुझसे दूर नहीं जाना चाहता। मैं सच में यह बताना चाहती हूँ कि इसने अलीबाग की पूरी यात्रा को मजेदार बना दिया।” छवि मित्तल ने यह फोटो गुरुवार (6 जुलाई 2023) को इंस्टाग्राम पर शेयर की थी। इस पोस्ट को अब तक 8 हजार अधिक लाइक्स और 200 से अधिक मिल चुके हैं।

इस फोटो को लेकर एक यूजर ने लिखा, “बच्चे के सामने नंगे खड़े होना ठीक नहीं।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “बेशर्मी अपने चरम पर है। संस्कृति का कोई महत्व ही नहीं है।” एक और यूजर ने संस्कृति की बात करते हुए कहा, “यह हमारी संस्कृति नहीं है। प्लीज ये सब मत करिए। माँ देवी के समान होती है। इसलिए उसका अपमान न करिए।”

(फोटो साभार: Chhavihussein का इंस्टाग्राम अकाउंट)

एक नेटिजन ने लिखा, “कृपया अपने बच्चों के सामने सेक्स भी करें। इससे वे पोर्नस्टार का सम्मान करना सीख जाएँगें। क्या बकवास बात है। दुःखद।”

(फोटो साभार: Chhavihussein का इंस्टाग्राम अकाउंट)

एक यूजर ने पूछा, “बच्चे को क्या दिखा रही है?”

(फोटो साभार: Chhavihussein का इंस्टाग्राम अकाउंट)

एक नेटीजन ने कड़ी फटकार लगाते हुए लिखा, “यह सब सोशल मीडिया के लिए है। सब कुछ लोकप्रियता और दिखावे के लिए हो रहा है। महिलाओं को कम कपड़ों में स्वीकार करना  उनका सम्मान नहीं है। पश्चिमी सभ्यता अब भी सत्ता में है और ऐसे लोग उसके गुलाम हैं। मेरी ओर से कोई सम्मान नहीं।”

(फोटो साभार: Chhavihussein का इंस्टाग्राम अकाउंट)

वहीं कुछ यूजर्स छवि की तारीफ करते भी नजर आए।

करोड़ों काँवड़ बनाते हैं बढ़ई, अलीगढ़ की 1000 फैक्ट्रियों में मजदूरों को रोजगार, गरीब राज्य में भी ₹2000 करोड़ का कारोबार: काँवड़ यात्रा के विरोधियों को बताइए

भगवान शिव की भक्ति का महीना आ गया है, रिमझिम बारिश के साथ ही सावन ने दस्तक दे दी है। सावन आने के साथ ही काँवड़ यात्रा भी शुरू हो गई है। गंगा सहित विभिन्न पवित्र नदियों से जल लेकर लोग भगवान भोलेनाथ को अर्पित करने निकल पड़े हैं। झारखंड स्थित वैद्यनाथ धाम हो या फिर हरिद्वार, काँवड़ यात्रा की चहल-पहल से आध्यात्मिक स्थल व्यस्त हो गए हैं। लेकिन, इसके साथ ही शुरू हो गया है हिन्दू विरोधियों द्वारा अलग-अलग तरह का प्रोपेगंडा कर के काँवड़ यात्रा को बदनाम करने का प्रयास।

आपके सामने कई ऐसे लोग आएँगे जो कहेंगे कि भगवान शिव को जल चढ़ाना पानी की बर्बादी है। कोई ट्वीट कर के कह रहा है कि बच्चों के हाथों में काँवड़ की जगह किताब देनी चाहिए तो कोई काँवड़ियों पर गुंडागर्दी का आरोप लगा रहा है। अब कोई काँवड़ यात्रा की वैज्ञानिकता पर सवाल उठाएगा तो कोई पूछेगा कि इससे क्या फायदा होता है? कुछ इसे अंधविश्वास भी बताएँगे। हर साल ऐसा होता है, इस साल भी होगा, लेकिन इस बार हिन्दुओं को जवाबों से लैस रहना चाहिए।

सबसे पहले समझिए कि काँवड़ यात्रा से ये चिढ़ने क्यों? चिढ़ने वाले हैं वामपंथी, इस्लामी कट्टरपंथी और खुद को दलितों के ठेकेदार बताने वाले। असल में ये लोग काँवड़ यात्रा की भीड़ देख कर डरते हैं कि हिन्दुओं में भक्ति भावना आखिर बढ़ क्यों रही है। काँवड़ यात्रा में सभी जातियों के लोग साथ में कदम मिला कर चलते हैं, ये उन्हें बर्दाश्त नहीं होता। साथ ही काँवड़ यात्रियों को उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार द्वारा जो सुविधाएँ मिलती हैं, उसने जले पर नमाज का काम किया है।

काँवड़ बनाने वाले बढ़ई समाज को मिलता है रोजगार, करोड़ों काँवड़ बनते हैं हर साल

इस पर तो बात होती ही है कि कैसे काँवड़ यात्रा में जल चढ़ाने के लिए किसी गाँव या क़स्बा से पूरा समूह निकलता है तो उसमें सभी जाति के लोग शामिल होते हैं और सभी एक-दूसरे को ‘भोले’ (बिहार-झारखंड में ‘बम’) कह कर पुकारते हैं। कोई ‘बच्चा बम’ होता है तो कोई ‘महिला बम’। ध्यान दीजिए, ये Bomb वाला बम नहीं है, वो तो जिहादी बनते हैं। ये ‘बम-बम भोले’ वाला बम है। कोई ‘डॉक्टर बम’ होता है तो कोई ‘इंजीनियर बम’। ‘चाचा बम’ और ‘बाबा बम’ भी मिल जाएँगे आपको।

अब थोड़ा इस यात्रा की जड़ में चलते हैं। यात्रा के लिए सबसे पहली ज़रूरत क्या है – काँवड़। दूसरी ज़रूरत – भगवा कपड़े। तीसरी ज़रूरत – गंगाजल या अन्य पवित्र नदियों का जल। सबसे पहले काँवड़ पर आते हैं। ये काँवड़ बनती किस चीज से है? लकड़ी से। लकड़ियों का काम कौन करता है? बढ़ई, जिसे अंग्रेजी में Carpenter भी कहते हैं। यानी, सावन के एक महीने में (इस बार 2 महीना, क्योंकि ये ‘दोमास है’) बढ़ई समाज की इतनी आमदनी हो जाती है कि साल भर उनकी रोजी-रोटी चल सकती है।

एक नजर आँकड़ों पर डालते हैं। अगर आप मेरठ का उदाहरण लेंगे तो अकेले इस शहर में काँवड़ यात्रा से 500 करोड़ रुपए का कारोबार होता है। इस बार 5 करोड़ तीर्थयात्री काँवड़ लेकर हरिद्वार आ सकते हैं। सोचिए, 5 करोड़ लोगों के पास 5 करोड़ काँवड़ भी तो होंगे। यानी, 5 करोड़ काँवड़ किसी न किसी ने बनाए होंगे? है न? किसी एक आदमी के बस का तो ये है नहीं। यानी, हजारों बढ़इयों को काँवड़ यात्रा में काम मिलता है, रोजगार मिलता है।

अगर हम कम से कम 300 रुपए भी रखें तो 5 करोड़ काँवड़ का दाम 1500 करोड़ रुपए बैठ जाता है। कई काँवड़ तो बहुत महँगे भी होते हैं, ऐसे में ये संख्या 2000 करोड़ रुपए के पार भी जा सकती है। ये भी हो सकता है कि कई काँवड़िए पिछले साल वाला काँवड़ ही इस्तेमाल करें, लेकिन आधे भी नए काँवड़ खरीदते हैं तो केवल काँवड़ का बिजनेस हजार करोड़ रुपए का बैठता है। ध्यान दीजिए, ये तो सिर्फ हरिद्वार जाने वाले काँवड़ियों का आँकड़ा है। कई अन्य भी धाम हैं, जहाँ ये यात्रा चलती है।

उदाहरण के लिए, अब झारखंड में स्थित वैद्यनाथ धाम को ले लीजिए। बिहार-झारखंड के अधिकतर लोग यहीं जल चढ़ाने आते हैं, कई तो हर साल। सामान्यतः भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगा नदी से जल लिया जाता है और से शुरू होती है काँवड़ यात्रा। बिहार से हर साल 40 लाख के करीब लोग काँवड़ लेकर जाते हैं। दिल्ली NCR में ये आँकड़ा 30 लाख का है। सोचिए, वैद्यनाथ धाम में सावन में पहुँचने वाले इन 30 लाख काँवड़ियों से अर्थव्यवस्था को कितना लाभ पहुँचता होगा?

काँवड़ यात्रा की अर्थव्यवस्था फाइव स्टार होटलों या फिर विमानों वाली नहीं है। ये पैसा आम लोगों की जेब से निकलता है और आम लोगों की जेब में जाता है, खासकर गरीब तबके की, व्यापारियों की। जैसे, सड़क पर स्थित ढाबों, छोटे होटलों, धर्मशालाओं और रेस्टॉरेंट्स में कारोबार बढ़ जाता है। बिहार जैसे गरीब राज्य में भी केवल भागलपुर में इस साल इससे 500 करोड़ रुपयों का कारोबार अनुमानित है। मधेपुरा और कटिहार जैसे जिलों में भी 20 करोड़ का कारोबार तो हो ही जाएगा।

अगर पूरे बिहार की बात करें तो वहाँ 2000 करोड़ रुपए का कारोबार अपेक्षित है। सोचिए, एक गरीब राज्य की अर्थव्यवस्था में इस तरह के कारोबार से फायदा होगा या नहीं होगा? जमुई और मुंगेर जैसे जिलों में भी 30-35 करोड़ रुपए के कारोबार की संभावना है इस काँवड़ यात्रा के दौरान। फलाहार बेचने वाले कौन लोग होते हैं? फुटकर दुकानदार ही होते हैं न? पूजा सामग्रियाँ बेचने वाला सामान्य कारोबारी ही होते हैं न? सावन के अंत में रक्षाबंधन और फिर उसके बाद दशहरा, दीवाली और छठ के बारे में तो पता ही है।

अकेले अलीगढ़ में घुँघरू-घंटी की 1000 फैक्ट्रियाँ, मजदूरों को मिलता है काम

हम बात कर रहे थे काँवड़ की। काँवड़ बनाने के लिए चाहिए बाँस, लकड़ी, रंगीन कागज, कपड़ा और घंटी या घुँघरू। अगर आप उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ या एटा में जाएँगे तो पाएँगे वहाँ सैकड़ों परिवारों की आमदनी केवल घंटी और घुँघरू बनाने पर ही निर्भर होती है और वो इस सीजन में अच्छी कमाई करते हैं। अलीगढ़ को ताला उद्योग के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन ये घुँघरू-घंटी उद्योग के लिए भी लोकप्रिय है। काँवड़िए पाँवों में घुँघरू बाँधते हैं, घंटी काँवड़ में लगा दी जाती है।

इनका अपना एक महत्व है, क्योंकि कहा जाता है कि ये तीर्थयात्रियों को साँप-बिच्छू जैसे खतरनाक जीवों से बचाए रखते हैं। सोचिए, अकेले अलीगढ़ में ऐसे 1000 कारखाने हैं जहाँ हजारों मजदूरों को रोजगार मिलता है काँवड़ यात्रा के मौसम में और इससे पहले। सामान्यतः घंटी-घुँघरू पीतल के होते हैं। कच्चे माल की गलाई के बाद ढलाई, घिसाई, पॉलिश, पैकिंग इत्यादि का काम किया जाता है। बड़ी बात तो ये है कि यहाँ कई मुस्लिम मजदूर भी हैं, अर्थात काँवड़ यात्रा मुस्लिमों को भी रोजगार देती है।

जिस तरह काँवड़ बनाने वाले बढ़ई लोगों और घुँघरू-घंटी बनाने वाले मजदूरों को रोजगार मिलता है, ठीक उसी तरह से कपड़ों का कारोबार भी सावन के महीने में खूब परवान चढ़ता है। टेंट हाउस, डीजे संचालक, हलवाइयों और जेनेरेटर मालिकों की बुकिंग बढ़ जाती है। ये बहुत अमीर लोग नहीं होते, बल्कि गाँव-समाज और शहर के ही लोग होते हैं जिनका स्थानीय कारोबार होता है। शिवभक्त भंडारा करते हैं, ऐसे में प्रसाद बनाने में इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री भी बढ़ जाती है।

टीशर्ट, निक्कर, पटका, तौलिया या फिर बटुआ – ये सब की बिक्री भी छोटे दुकानदार ही करते हैं। ‘महाकाल’ लिखे टीशर्ट्स हों या फिर भगवान शिव की तस्वीर वाले, इनकी माँग बढ़ जाती है और बिक्री भी। सबसे बड़ी बात, मंदिर के आसपास फल और बेलपत्र बेचने वाले बहस ही गरीब लोग होते हैं और केवल इन दोनों का कारोबार करोड़ों का होता है। सावन के महीने में जल के साथ बेलपत्र चढ़ाया ही चढ़ाया जाता है। प्रसाद में फल लोग लेते ही हैं। महिलाओं की श्रृंगार की वस्तुएँ भी खूब बिकती हैं।

इनमें सिंदूर सबसे प्रमुख होता है, क्योंकि सुहागिनें इसे एक-दूसरे को लगाती हैं और माँ पार्वती को भी अर्पित करती हैं। कोरोना काल में काँवड़ यात्रा नहीं निकल पाई थी तो कई कारोबारी और ऐसे फुटकर दुकानदार मायूस हो गए थे, उन पर आर्थिक संकट आ गया था। दिल्ली-मेरठ रोड से हरिद्वार जाने वाले काँवड़िए जाते हैं, ऐसे में सबसे ज्यादा कमाई यहीं होती है। इसीलिए, अगर कोई काँवड़ यात्रा का विरोध कर रहा है तो वो अप्रत्यक्ष रूप से गरीबों का विरोध कर रहा है।

काँवड़ यात्रा का विरोध मतलब महीने भर फूल-बेलपत्र बेचने वाली मंदिर के पास बैठी गरीब महिलाओं का विरोध। काँवड़ मतलब हर साल 5 करोड़ से भी अधिक काँवड़ियों के लिए काँवड़ बनाने वाली बढ़इयों का विरोध। काँवड़ यात्रा का विरोध मतलब भगवा कपड़े बेचने वाले छोटे कारोबारियों का विरोध। काँवड़ यात्रा का विरोध मतलब प्रसाद सामग्री या पूजा सामग्री बेचने वाले फुटकर दुकानदारों का विरोध। काँवड़ यात्रा का विरोध मतलब घुँघरू-घंटी की हजारों फ़ैक्ट्रियों में काम करने वाले गरीबों का विरोध।

ऐसे समय में, जब हमारे देश के अधिकतर मंदिरों पर सरकार का कब्ज़ा है और उनसे प्राप्त हुए पैसों का इस्तेमाल सरकार विभिन्न कार्यों में करती है, इसके बावजूद ये मंदिर विपत्ति के काल में स्वेच्छा से गरीबों की मदद करने का निर्णय लेते हैं – तब भी हिन्दू धर्म के खिलाफ इस तरह की अपमानजनक बातें करना अपराध नहीं तो और क्या है? काँवड़ यात्रा श्रद्धा का प्रतीक है, हिन्दू परंपरा है – विरोध न करने के लिए एक यही वजह काफी होनी चाहिए थी, अर्थव्यवस्था वगैरह की बात तो बाद में आती है।

भारत की भूमि पर भारतीय संस्कृति की परंपरा का इतना विरोध क्यों?

आप सोचिए, इस भारत भूमि पर भारत में उपजी संस्कृति की परंपरा का विरोध होता है। भगवान परशुराम या भगवान श्रीराम को प्रथम काँवड़ियों के रूप में मान्यता मिली है, साधु-संत सदियों से काँवड़ यात्रा निकालते रहे हैं, ऐसे में भला कैसे किसी को अधिकार मिल जाता है कि प्राचीन भारतीय इतिहास में जिस परंपरा की जड़ हो उस पर बिना सिर-पैर की बातें कर के कुठाराघात करने का? भगवान के दरबार में सभी भक्त एक होते हैं, जात-पात या धन मायने नहीं रखता – हिन्दू विरोधियों को काँवड़ यात्रा से इसीलिए चिढ़ होती है।

कुछ हिन्दू विरोधी ये कारण लेकर आ सकते हैं कि काँवड़ यात्रा से टॉल टैक्स की वसूली में कमी आ जाती है या फिर वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के कारण सामानों की ढुलाई में समस्या आती है, लेकिन इनसे हुआ नुकसान जितना होता होगा उससे कई गुना काँवड़ यात्रियों के कारण कारोबार पैदा हो जाता है। वैसे भी माल ढुलाई वाले अधिकतर ट्रक वगैरह रात में ही सफर करते हैं। स्थानीय लोग काँवड़ियों की सेवा के लिए खुद कैम्प बना-बना कर जगह-जगह लगे रहते हैं।

जो लोग सड़क पर नमाज के विरोध में चूँ तै नहीं करते, वही काँवड़ यात्रा के विरोध में शिक्षा और विज्ञान जैसी बातें करने लगते हैं। नमाजियों द्वारा तो सड़क घेर कर घंटों ट्रैफिक रोक लिया जाता है, इससे तो कोई कारोबार भी जेनरेट नहीं होता, फिर क्यों ऐसा किया जाता है? कई बार मस्जिदों से निकली भीड़ दंगे करती है, पत्थरबाजी करती है – इसके विरोध में क्यों कोई कुछ नहीं बोलता? जुमे के दिन सुरक्षा व्यवस्था बढ़ानी पड़ती है, इसके कारण पर चर्चा हुई आज तक कभी?

जहाँ तक शिक्षा की बात है, सनातन में अध्यात्म और विज्ञान तो एक-दूसरे के पूरक हैं, दुश्मन नहीं। यहाँ धरती को चपटी नहीं बताया गया है, बल्कि हजारों वर्ष पूर्व ग्रहों-नक्षत्रों के बारे में सटीक जानकारी दी गई है। यहाँ दिन-मास-पहर सभी की गणना के तौर-तरीके वैदिक युग से ही उपलब्ध हैं। गणित और खगोल के सिद्धांत हिन्दू धर्म के प्राचीन साहित्य में मिलते हैं। फिर हिन्दू धर्म के सामने विज्ञान कैसे खड़ा हो गया? दोनों तो साथ में चलते हैं न। योग या ध्यान प्रक्रिया विज्ञान नहीं तो क्या है।