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बीकानेर से हिंदू छात्रा को लेकर भागी महिला मुस्लिम टीचर चेन्नई में मिली, वीडियो जारी कर कहा था- हम लेस्बियन हैं, एक-दूसरे से प्यार करते हैं

राजस्थान के बीकानेर जिले से गायब हुई 17 वर्षीय हिंदू लड़की और उसकी मुस्लिम टीचर चेन्नई में मिली हैं। पुलिस दोनों को जल्द वापस लाने की बात कह रही है। नाबालिग हिंदू लड़की के परिजनों ने मुस्लिम टीचर निदा वहलीम पर बेटी के अपहरण का आरोप लगाया था। इसके बाद दोनों ने वीडियो जारी कर कहा था कि वे लेस्बियन हैं और एक-दूसरे के बिना नहीं रह सकती।

इस मामले में बीकानेर एसपी तेजस्विनी गौतम का कहना है कि बीकानेर पुलिस और चेन्नई पुलिस के संयुक्त प्रयास के बाद दोनों को पकड़ा गया है। इसमें चेन्नई पुलिस की बड़ी भूमिका रही। हालाँकि एसपी ने यह बताने से इनकार कर दिया है कि दोनों कब, कैसे और कहाँ मिली हैं। लेकिन उन्होंने इस बात की पुष्टि की है कि दोनों सुरक्षित हैं और बीकानेर पुलिस उन्हें जल्द ही वापस लेकर आएगी।

क्या है मामला

बीकानेर जिले के श्रीडूंगरगढ़ तहसील के एजी स्कूल में पढ़ने वाली 17 वर्षीय हिंदू लड़की और उसकी मुस्लिम टीचर निदा वहलीम 30 जून को अचानक गायब हो गईं। इसके बाद लड़की के पिता ने पुलिस को दी शिकायत में कहा था कि महिला टीचर अविवाहित है। वह लगभग 2 माह से छात्रा से नजदीकी बढ़ा रही थी। उन्होंने निदा वहलीम पर अपने भाइयों जुनैद और नावेद के साथ मिलकर बेटी को गायब कराने का आरोप लगाया था। लड़की के पिता ने स्कूल के मालिक अब्दुल गफूर को निदा का रिश्तेदार बताया था। साथ ही स्कूल प्रशासन पर अपनी बेटी के गायब होने की साजिश में शामिल होने आरोप लगाया था।

इसके बाद पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कर दोनों की तलाश के लिए 4 टीमें गठित की थी। उधर मामले की जानकारी मिलने के बाद हिंदू संगठनों ने इसका जमकर विरोध किया था। साथ ही घटना को लव जिहाद बताते हुए आरोपित महिला टीचर पर हिंदू लड़की को बरगलाने और ब्रेनवॉश करने का आरोप लगाया था। 

इसके बाद मंगलवार (4 जून 2023) को दोनों का एक वीडियो सामने आया था। वीडियो में दोनों ने खुद को एक-दूसरे के साथ खुश रहने की बात कही थी। साथ ही अपने-अपने परिजनों से उन्हें परेशान करने के लिए माफ़ी माँगी थी। खुद को लेस्बियन बताते हुए कहा था कि वे किसी लड़के से शादी नहीं कर सकतीं। एक-दूसरे से बहुत प्यार करती हैं। निदा वहलीम ने अल्लाह की कसम खाते हुए कहा था कि वह लड़की को बहला-फुसलाकर नहीं लाई है। वहीं हिंदू छात्रा ने कहा था कि निदा वहलीम पर कोई केस न किया जाए क्योंकि वह अपनी मर्जी से आई है। वीडियो सामने आने के बाद हिंदू लड़की के परिजनों ने कहा था कि उनकी बेटी दबाव में ऐसा कह रही है।

मध्य प्रदेश के पेशाब कांड वाले प्रवेश शुक्ला के घर पर चला बुलडोजर, NSA के तहत हो रही है कार्रवाई: BJP ने जाँच कमिटी बनाई

मध्य प्रदेश के सीधी में मानसिक रूप से कमजोर अनुसूचित जनजाति (ST) के एक व्यक्ति पर पेशाब करने के आरोपित प्रवेश शुक्ला के घर को गिरा दिया गया है। शराब के नशे में इस घटना का वीडियो वायरल होने के देश भर में बवाल हो गया है। इसके बाद राज्य के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बुलडोजर की कार्रवाई की बात कही थी।

प्रवेश शुक्ला पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई हो रही है। उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। प्रशासन ने प्रवेश के कुबरी स्थित घर पर बुलडोजर चला है। प्रशासन ने उसके घर के उस हिस्से को तोड़ दिया है, जिसे अतिक्रमण करके बनाया गया था। इस दौरान प्रशासन ने पेड़-पौधों को भी नहीं छोड़ा और उन्हें भी ध्वस्त कर दिया।

राज्य सरकार की तरफ से कहा गया है कि प्रवेश शुक्ला के खिलाफ जो कार्रवाई होगी, वह पूरे प्रदेश में एक नजीर बनेगा। इसके साथ ही भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने राज्य कोल जनजाति विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रामलाल रौतेल की अध्यक्षता में एक जाँच कमिटी बनाई है। इसमें विधायक शरद कोल, विधायक अमर सिंह और प्रदेश उपाध्यक्ष कांतदेव सिंह को सदस्य बनाया गया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रवेश शुक्ला को भाजयुमो का मंडल उपाध्यक्ष और विधायक प्रतिनिधि बताया जा रहा है। विधायक के बेटे के जन्मदिन पर लगाए गए पोस्टर में भी उसने खुद को विधायक प्रतिनिधि लिखा है। प्रवेश शुक्ला के पिता रमाकांत शुक्ला का कहना है कि उनका बेटा विधायक केदारनाथ शुक्ला का प्रतिनिधि है। वहीं, विधायक का कहना है कि प्रवेश शुक्ला उनका प्रतिनिधि नहीं है।

इस घटना पर भाजपा सरकार द्वारा कठोर कदम उठाए जाने के बाद भी राज्य में खूब राजनीति हो रही है। कॉन्ग्रेस इस घटना को लेकर राज्य की शिवराज सिंह चौहान सरकार पर निशाना साध रही है। कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया ने कहा कि शिवराज सरकार में आदिवासियों पर सबसे ज्यादा अत्याचार हुए हैं। वहीं, घटना सामने आने के बाद ही सीएम और गृहमंत्री ने कठोर कार्रवाई की बात कही थी। 

सेक्स और हिन्दू धर्म का मजाक – बॉलीवुड के हर कंटेंट में यही मसाला: ‘हिप्स एन्ड बूब्स’ से लेकर ‘बिग बॉस’ में चुम्मा-चाटी तक, भारतीय संस्कृति से दूर भागती है इंडस्ट्री

आम लोगों को ज्ञान देने के मामले में भारत की हिंदी फिल्म इंडस्ट्री, जिसे बॉलीवुड भी कहा जाता है – वो सबसे आगे हैं। लेकिन, जब उदाहरण सेट करने की बात आती है तो वो इसके उलट काम करते हैं। जैसे, आपको आम तौर पर बॉलीवुड की अभिनेत्रियाँ महिलाओं के बारे में बात करती हुई मिल जाएँगी और फेमिनिज्म का बीड़ा उठाए कई फ़िल्मी हस्तियाँ मिल जाएँगी। लेकिन, ये वही लोग हैं जिनके गिरोह ने हमेशा से फिल्मों के जरिए महिलाओं एक उपभोग की वस्तु से ज्यादा कुछ नहीं दिखाया गया है।

महिलाओं के बेहूदा चित्रण में बॉलीवुड सबसे आगे रहा है। आप बॉलीवुड के गानों को ही उठा लीजिए। आजकल गानों के बोल और संगीत से ज्यादा चर्चा इस बात की रहती है कि अभिनेत्री को इसमें कितने कम कपड़े पहने हुए दिखाए जाएँगे। अभिनय और कला के ज़्यादा चर्चा इस बात की रहती है कि किस अभिनेत्री ने बिकनी में इंस्टाग्राम पर तस्वीर अपलोड की है। ‘पठान’ फिल्म को ही ले लीजिए, जानबूझकर दीपिका पादुकोण को भगवा बिकनी में दिखाया गया और इस पर कंट्रोवर्सी पैदा की गई।

बॉलीवुड में लंबे समय तक काम करने वाली अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा के एक बयान को देख लीजिए। ‘मिस वर्ल्ड’ रह चुकीं प्रियंका चोपड़ा अमेरिका में गायक निक जोनास के शादी के बाद वहीं रहती हैं और हॉलीवुड में भी सक्रिय हैं। प्रियंका चोपड़ा का जो वीडियो वायरल हुआ है, उसमें वो कहती दिख रही हैं कि बॉलीवुड फ़िल्में केवल ‘हिप्स और बूब्स (जाँघों और स्तन)’ तक ही सिमटी हुई हैं। ये वीडियो एमी अवॉर्ड्स 2016 का है। वीडियो में प्रियंका चोपड़ा डांस करते हुए बताती हैं कि कैसे बॉलीवुड में सिर्फ ‘Hips & Boobs’ चलता है।

इसके बाद कुछ बॉलीवुड के फैंस प्रियंका चोपड़ा की आलोचना करने लगे और कहने लगे कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के साथ कई दिक्कतें हो सकती हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इसका मजाक बनाया जाए। कोई कुछ फिल्मों के नाम गिनने लगा तो किसी ने कह दिया कि प्रियंका चोपड़ा ने भारतीय क्लासिक नृत्य के बारे में नहीं सुना है। कुछ ने प्रियंका चोपड़ा पर व्यक्तिगत हमला करते हुए उन्हें ही फेक बता दिया और उनके मेकअप और व्यवहार पर सवाल उठा दिए

जबकि ज़रूरत ये है कि बॉलीवुड को हम आत्ममंथन करने के लिए मजबूर करें। कितनी बॉलीवुड फिल्मों में आपने भारत के विभिन्न इलाकों के लोक-नृत्यों की प्रस्तुति देखी है? आंध्र प्रदेश की कुचिपुड़ी, असम का बीहू, बिहार का बिदेसिया, हरियाणा का झूमर, हिमचाल प्रदेश का झोरा, जम्मू कश्मीर का रउफ, कर्नाटक का यक्षगान, केरल की कथकली, महाराष्ट्र की लावणी, ओडिशा का गोतिपुआ, बंगाल का लाठी, राजस्थान का घूमर, तमिलनाडु का भरतनाट्यम, उत्तर प्रदेश की कजरी, उत्तराखंड का भोटिया, मध्य प्रदेश का जवारा, छत्तीसगढ़ का गौर मारिया, गोवा का देक्खनी, झारखंड का सरहुल, अरुणाचल प्रदेश का बुइया, मणिपुर का डोल चोलम, मिजोरम का छेरव, नागालैंड का रेंगमा, त्रिपुरा का होजागिरी, सिक्किम का छाम और लक्षद्वीप का लावा – कितनी फिल्मों में ऐसे नृत्य आपको देखने मिलते हैं?

बिहार के अलग-अलग प्रांतों में एक नहीं बल्कि दर्जन भर लोकनृत्य आपको मिल जाएँगी लेकिन कभी बॉलीवुड ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की कोशिश नहीं की। भारत की सबसे बड़ी फिल्म इंडस्ट्री के रूप में लंबे समय तक काबिज रहने के बावजूद बॉलीवुड ने अपना कर्तव्य नहीं निभाया। हाँ, गुजरात का गरबा और पंजाब का भांगड़ा ज़रूर दिख जाता है लेकिन इसे भी गलत तरीके से पेश किया जाता रहा है। अगर बॉलीवुड ने इन परंपरागत लोकनृत्यों को गंभीरता से लिया होता तो इनमें से अधिकतर आज विप्लुत होने की कगार पर नहीं होती।

इसके उलट बॉलीवुड ने क्या चुना? जो पश्चिमी फ़िल्में दिखा रही थीं, उसे ही बॉलीवुड ने आधुनिक मान कर उसकी नक़ल करनी शुरू कर दी। यानी, अमेरिका और यूरोप अपनी फिल्मों के जरिए अपनी स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देते रहे और भारत की मनोरंजन इंडस्ट्री ने भी उनकी ही संस्कृति को बढ़ावा देने का बीड़ा उठा लिया। भारतीय वाद्ययंत्रों का प्रयोग कम होता चला गया। विदेश में गाने फिल्माए जाने लगे। कम कपड़ों में लड़कियों को उपभोग की वस्तु की तरह पेश किया जाने लगा। फिर यही सब चलता रहा।

भारतीय पहनावे और पोशाकों को बॉलीवुड ने अपनी फिल्मों में जरा भी स्थान नहीं दिया। हाल ही में आई ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ को ही देख लीजिए। करण जौहर की फिल्म और प्रेम कहानी के अलावा फैमिली ड्रामा के नाम पर इसे खूब प्रचारित किया गया, लेकिन ट्रेलर में क्या दिखा? वही, अपनी छाती उघाड़ कर चलता हुआ एक लड़का, हीरो के सिक्स पैक एब्स पर फोकस और रेन डांस। अब तो स्थिति ये हो गई है कि बॉलीवुड की हर वेब सीरीज गलियों और सेक्स के बिना पूरी ही नहीं होती।

इस संबंध में सलमान खान ने बड़ी-बड़ी बातें की थी और कहा था कि वो ऐसा कुछ नहीं करेंगे जो भारतीय संस्कृति के खिलाफ हो। इसकी भी पोल खुल गई। TRP और व्यूज की चाहत में ‘बिग बॉस OTT’ लाया गया और फिर इसमें भी वही मसाला परोसा गया – चुम्मा वाला। लिपलॉक और सेक्स सीन के नाम पर अब बॉलीवुड की फिल्मों का प्रमोशन होने लगा है। कोई कामधाम करने वाले हीरो को लाखों की गाड़ियों में चलते हुए और एन्जॉय करते हुए दिखाया जाता है – क्या वास्तविकता में ऐसा संभव है?

JioCinema पर आ रहे ‘बिग बॉस ओटीटी’ के दूसरे सीजन का एक वीडियो खूब वायरल हुआ। इसमें लेबनीज एक्टर जैद हदीद ने भारतीय अभिनेत्री आकांक्षा पुरी को जम कर किस किया। बाद में सलमान खान ने ऑडिएंस से माफ़ी माँगते हुए कह दिया कि वो इस तरह के कंटेंट को अपने शो में समर्थन नहीं करते। आकांक्षा पुरी को शो से निकाला भी गया। लेकिन, इसके नाम पर ‘बिग बॉस ओटीटी’ को बेचने की कितनी कोशिश की गई ये तो सभी ने देखा।

आकांक्षा पुरी ने शो से निकलने के बाद कहा है कि वो तो बस अपना टास्क पूरा कर रही थीं और ये किस भी उसी टास्क का हिस्सा था, जिससे उनकी टीम को उस दिन जीत मिली। उन्होंने कहा कि वो तो टास्क पूरा करने के लिए पूजा भट्ट और साइरस ब्रोचा को किस करने के लिए भी तैयार थीं। वैसे ये आश्चर्यजनक नहीं है, क्योंकि आजकल कई वेब सीरीज में ये आम बात हो गई है। ‘उल्लू’ एप के कंटेंट्स हो या हॉटस्टार पर ‘सिटी ऑफ ड्रीम्स’, लेस्बियन रोमांस नया नॉर्मल है।

आकांक्षा पुरी का कहना है कि जैद हदीद के साथ उनका किस 30 सेकेंड्स चलना था लेकिन बाद में वो बह गए और लगातार किस करने लगे। आकांक्षा पुरी ने सफाई दी है कि उनके मन में जैद हदीद के लिए कोई फीलिंग्स नहीं थीं, इसीलिए उन्होंने अपने होठों का इस्तेमाल करना बंद कर दिया था। इसके बाद जैद ने उन्हें ‘बैड किसर’ तक कह दिया। उन्होंने जैद पर दोष मढ़ते हुए कहा कि ये एक सिंपल सा टास्क था, लेकिन वो पूरे पैशन के साथ किस करने लगे।

शो से बाहर निकलने के बाद आकांक्षा को शादी, किस और हुकअप के लिए अलग-अलग विकल्प दिए और इंटरव्यू में उनकी राय माँगी गई तो उन्होंने सलमान खान से शादी की इच्छा जता दी। हुकअप के संबंध में उन्होंने कहा कि ये जितने ज्यादा लोगों से हो उतना अच्छा है। ऐसे ही लोग लाखों फॉलोवर्स लेकर इंस्टाग्राम पर युवाओं के आदर्श बनते हैं और युवा वही करते हैं, जो ये करते और कहते हैं। तभी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की एक नई ब्रीड खड़ी हो गई हो जो आजकल ‘सक्सेस मन्त्र’ भी बाँटती है।

आजकल बॉलीवुड के विमर्श का वो समूह थोड़ा ऊपर आया है, जिसे अब तक दबा कर रखा गया था। इसी का परिणाम है कि हमें ‘द कश्मीर फाइल्स’ और ‘द केरल स्टोरी’ जैसी फ़िल्में देखने को मिलीं और ये ब्लॉकबस्टर हुईं। इन दोनों के अलावा भी इस्लामी धर्मांतरण और आतंकवाद की समस्या से लेकर भारतीय इतिहास और संस्कृति पर कई फ़िल्में बनीं। अंत में बॉलीवुड ने राष्ट्रवाद के युग के दोहन का भी निर्णय लिया और रामायण के नाम पर ‘आदिपुरुष’ परोस दी।

इसमें हनुमान जी से ‘जलेगी तेरे बाप की’ जैसे डायलॉग्स बुलवाए गए, माँ सीता के कपड़ों का ध्यान नहीं रखा गया और भगवान श्रीराम के व्यवहार को ही बदल दिया गया। मनोज मुंतशिर, जिन्होंने फिल्म के डायलॉग्स लिखे थे, ऐसे सवालों पर निर्देशक से पूछने की सलाह देने लगे। फिल्म बुरी तरह फ्लॉप हुई। सैफ अली खान को रावण के रूप में दिखाया गया। पुष्पक विमान की जगह चमगादड़ ने ले ली और सोने की लंका डरावनी और काली हो गई। ये है इन लोगों के रिसर्च का स्तर।

ऐसे समय में जब हॉलीवुड में एक से बढ़ कर एक फ़िल्में बनती आई हैं, जिसने दुनिया भर की अलग-अलग समस्याओं को फिल्मों के जरिए उकेरा है – बॉलीवुड बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड पर ही अटका हुआ है। इनके लिए हर फिल्म लव स्टोरी है, लड़का-लड़की की कहानी है और सब कुछ इसी के इर्दगिर्द चलता है। एक लड़का और एक लड़की रोमांस करते हैं तो ब्रह्मास्त्र अपने नियम बदल लेता है – रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की फिल्म में यही दिखाया गया।

अगर उदाहरण देने की बात आए तो एक एक प्रोपेगंडा के बॉलीवुड में कई उदाहरण मिल जाएँगे। किस तरह ‘OMG’ फिल्म के जरिए हिन्दू धर्म को बदनाम किया गया, ये किसी से छिपा नहीं है। ‘पाताल लोक’ में एक पुजारी को गन्दी गालियाँ बकते हुए और मांस भक्षण करते हुए दिखाया गया। ‘तांडव’ में हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक बनाया गया। ‘PK’ फिल्म में भगवान शिव का जो चित्रण हुआ, क्या दूसरे मजहबों के आराध्यों को उस तरह से प्रदर्शित करने की हिम्मत भी की जा सकती है?

आपको उस घटना के बारे में पढ़ना चाहिए, जब कैसे फिल्म निर्माता फराह खान, अभिनेत्री रबीना टंडन और कॉमेडियन भारती सिंह को सिर्फ इसीलिए वेटिकन सिटी के प्रतिनिधि बिशप के सामने उपस्थित होकर हस्तलिखित माफ़ी माँगनी पड़ी थी, क्योंकि उन्होंने बाइबिल के कुछ शब्दों का मजाक बना दिया था। यहाँ तो हर एक फिल्म में रामायण-महाभारत की कहानियों को ही गलत तरीके से एक्सप्लेन करने की कोशिश की जाती है और साथ ही उनका रेफरेंस भी गलत तरीकों से दिया जाता है।

आप सोचिए, आजकल के बच्चे रील्स बनाने के नाम पर कम से कम कपड़े पहन कर मोबाइल फोन के सामने अश्लील फ़िल्मी गानों पर ही नाच करते हुए क्यों दिखते हैं, वो स्थानीय लोकनृत्य या फिर लोकगीतों की प्रैक्टिस करते क्यों नहीं दिखते? क्योंकि बॉलीवुड ने उनके मन में बिठा दिया है कि कपड़े उतार कर अश्लील गानों पर डांस करना ही ‘कूल’ और ‘मॉडर्न’ है, बाकी सब तो पुरानी चीजें हैं जिन्हें हमें छोड़ देना है, वरना हम पुराने खयालातों के कहाएँगे।

हॉलीवुड फिल्मों को देखिए, कैसे वो पश्चिमी संस्कृति को लेकर दुनिया भर में जाते हैं और दुनिया के कई फिल्म इंडस्ट्रीज पर उनका प्रभाव है। ‘Apollo 13’ (1995) फिल्म के जरिए चाँद पर जाने की अमेरिकी प्रयास को दिखाया गया। ‘Dances With Wolves (1990)’ में अमेरिका के मूलनिवासियों के जीवन को दिखाया गया। ‘Do The Right Thing (1989)’ में स्ट्रीट पर रहने वाले लोगों का जीवन दिखा। ऐसी अनगिनत फ़िल्में हैं। लेकिन, भारत में ऐसा कुछ नहीं होता।

यहाँ अगर भारत की कहानी पर भी फिल्म बनाई जाती है तो प्रेरणा अमेरिका से ही लेकर आते हैं ये लोग। ‘आदिपुरुष’ में एवं को फर और बेल्ट पहनाया जाता है। वानर सेना को चिम्पांजी बना दिया जाता है। रावण के किरदार को डरावना बना दिया जाता है। रावण भारतीय वाद्ययंत्र नहीं बल्कि गिटार बजाता है। जब सब कुछ यहाँ की किताबों में वर्णित है, गाँव-गाँव में रामलीला होती है, तो ऐसे में प्रेरणा लेने के लिए ‘गेम ऑफ थ्रोन्स’ और ‘लॉर्ड ऑफ द रिंग्स’ सीरीज में घुसना सही है क्या?

कुल मिला कर बात ये है कि बॉलीवुड फिल्मों की 2 ही रेसिपी होती है – अश्लीलता और हिन्दू धर्म का मजाक। कम कपड़ों में हीरोइनें और हिन्दू देवी-देवताओं का कॉमिक चित्रण। जब इस पर आवाज उठाई जाएगी, तो आपको या तो महिला विरोधी बता दिया जाएगा या फिर अभिव्यक्ति की आज़ादी का विरोधी। माँ काली को सिगरेट फूँकने दिखाने और और भगवान शिव को त्रिशूल लेकर भागते हुए दिखाने वाले भला भारतीय संस्कृति और परंपरा का सम्मान करना क्या जानें?

बॉलीवुड जब हॉलीवुड से ही कंटेंट चुरा रहा है तो उसे ये भी सीखना पड़ेगा कि अपनी संस्कृति और परंपरा को बढ़ावा कैसे देते हैं। अपने देश की नीतियों, उपलब्धियों और सरकार के नैरेटिव को कैसे इस तरह आगे बढ़ाते हैं कि सामने वाले को पता तक नहीं चलता और वो उसका अनुसरण करने लगता है। ये ‘हिप्स-बूब्स’ और हिन्दू धर्म के अपमान से निकल कर बॉलीवुड को दिखाना पड़ेगा कि भारतीय परिधान, नृत्य और कलाएँ भी ‘कूल’ और ‘मॉडर्न’ हैं।

जुमे पर पूरे पाकिस्तान में होगा प्रदर्शन, PM का ऐलान: स्वीडन में कुरान जलाने का विरोध, ईसाइयों-चर्चों पर हमले की पहले ही धमकी दे चुका है आतंकी संगठन

पाकिस्तान चाहे कितना भी कहे कि वह कट्टरवाद से पीड़ित है, लेकिन वहाँ सरकार ही इसे बढ़ावा देती है, जिसका परिणाम वहाँ के हिंदू जैस अल्पसंख्यकों को भुगतना पड़ता है। आम देशों से उलट, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shahbaz Sharif) ने राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन की अपील की है। यह अपील स्वीडन में जलाए गए कुरान को लेकर है।

इसके पहले आतंकी संगठनों ने कहा था कि स्वीडन में कुरान जलाए जाने का ‘बदला’ पाकिस्तान में ईसाइयों से लिया जाएगा। यह ऐलान आतंकी संगठन लश्कर-ए-झांगवी ने किया है। पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई का संरक्षण इस आतंकी संगठन को हासिल है।

प्रधानमंत्री शरीफ की अध्यक्षता में हुई बैठक में फैसला लिया गया कि शुक्रवार (7 जुलाई 2023) को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों सहित पूरे देश से रैलियों में शामिल होने का आग्रह किया, ताकि पूरा देश एकजुट होकर ‘उपद्रवियों’ को एक संदेश भेज सके।

पाकिस्तान ने ईद अल-अधा (बकरीद) के जश्न के दौरान स्वीडन में एक मस्जिद के बाहर सार्वजनिक रूप से कुरान जलाने की कड़ी निंदा की है। पाकिस्तान की संघीय सरकार कुरान के अपमान के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करने के लिए शुक्रवार को यौम-ए-तकद्दुस-ए-कुरान (कुरान की पवित्रता की रक्षा करने का दिन) मनाएगी।

इसके पहले पाकिस्तान ने स्वीडन में हुई घटना के दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की माँग की थी। 71 वर्षीय शहबाज शरीफ माँग की थी कि स्वीडिश सरकार अपने देश में मुस्लिम आबादी के खिलाफ इस्लामोफोबिक और हेट स्पीच पर ध्यान दे।

इतना ही नहीं, पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र से इस मसले पर बैठक बुलाने का आग्रह किया था। इस आग्रह के बाद संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने एक आपात बैठक बुलाई है। परिषद के एक प्रवक्ता ने कहा कि इस सप्ताह के अंत में स्वीडन में कुरान जलाने और बढ़ती धार्मिक घृणा बहस होने की संभावना है।

वहीं, 57 इस्लामी मुल्कों के संगठन इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने भी कहा है कि वह इस मुद्दे पर चर्चा के लिए एक ‘आपातकालीन बैठक’ आयोजित की जाएगी। यह बैठक सऊदी अरब में लाल सागर के किनारे स्थित शहर जेद्दा में रविवार (9 जुलाई 2023) को होगी।

बताते चलें कि कुरान के अपमान को लेकर पाकिस्तान और आतंकी संगठनों में होड़ लग गई है। शरीफ सरकार की घोषणा से पहले लश्कर-ए-झांगवी ने ईसाइयों और चर्चों पर हमला करने की धमकी दी है। इसके बाद से पाकिस्तानी ईसाई वहाँ की सरकार से सुरक्षा की माँग कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लश्कर-ए-झांगवी के आतंकी नसीर रायसानी ने एक बयान जारी कर कहा है कि पाकिस्तान में कोई भी चर्च और ईसाई सुरक्षित नहीं रहेगा। स्वीडन में कुरान जलाने की घटना का बदला लेने के लिए ईसाइयों को निशाना बनाकर आत्मघाती बम धमाके किए जाएँगे।

आतंकी संगठन ने कहा है, “स्वीडन में कुरान का अपमान कर ईसाइयों ने मुस्लिमों को चुनौती दी है। अगर कोई ईसाई दूसरे देश में कुरान का अपमान करता है तो जिहाद के रास्ते पर चलने वाला झांगवी पाकिस्तान को ईसाइयों के लिए जहन्नुम बना देगा।”

इस धमकी पर अब तक पाकिस्तान की शहबाज शरीफ की खबर लिखे जाने तक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इससे अलग, खुद देशवासियों से प्रदर्शन का विरोध करने की अपील करके उन पर हमले को एक तरह से मुहर लगा दी है।

यूरोपीय देश स्वीडन में कोर्ट से आदेश मिलने के बाद बकरीद के दिन यानी बुधवार (28 जून 2023) को स्टॉकहोम शहर की सबसे बड़ी मस्जिद के सामने कुरान को फाड़ा और जलाया गया था। इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत अंजाम दिया गया था। इसका वीडियो भी सामने आया था।

इस वीडियो में स्टॉकहोम की एक मस्जिद के सामने दो लोग कुरान को फुटबॉल की तरह पैरों से मारते, उसे जमीन पर फेंकते और पैरों से कुचलते दिखे थे। फिर इराकी प्रदर्शनकारी ने कुरान को फाड़कर आग के हवाले कर दिया था। इस घटना से नाराज 57 इस्लामी मुल्कों ने पिछले दिनों सऊदी अरब में बैठक भी की थी। इराक में स्वीडन के दूतावास पर हमला भी हुआ था।

किसी का नाम गणेश तो किसी का राधे, काम लालच दे हिंदुओं को ईसाई बनाना: सीतापुर हो या इंदौर धर्मांतरण का वही तरीका, 4 गिरफ्तार

मध्य प्रदेश के इंदौर में गणेश और जॉनी पकड़ा गया है। उत्तर प्रदेश के सीतापुर में बेदराम गुड़िया और राधे निषाद विरासत की गिरफ्तारी हुई है। दो अलग राज्यों के शहरों में हुई इस गिरफ्तारी में समानता यह है कि इन पर हिंदुओं को लालच देकर ईसाई बनाने की कोशिश का आरोप है।

उत्तर प्रदेश के सीतापुर में हिंदुओं को ईसाई बनाने की तैयारी बकायदा सभा लगाकर की जा रही थी। लेकिन बजरंग दल कार्यकर्ताओं के अचानक पहुँच जाने के कारण रंग में भंग पड़ गया। विरोध और हंगामे के बाद मौके पर पुलिस आई और दो लोगों की गिरफ्तारी हुई। यह मामला सीतापुर जिले में सकरन थाना क्षेत्र अंतर्गत पकरिया पुरवा गाँव का है। दैनिक भास्कर रिपोर्ट के अनुसार, गाँव के बेदराम गुड़िया के घर पर सभा लगाकर सैकड़ों हिंदुओं को इकट्ठा किया गया था। आरोप है कि पादरी राधे निषाद विरासत ईसाई मजहब की पुस्तकों और यीशु मसीह के नाम पर लोगों का धर्मांतरण कराने की कोशिश कर रहा था।

स्थानीय ग्रामीणों ने इसकी सूचना बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को दी। उन्होंने मौके पर पहुँचकर धर्मांतरण की गतिविधि को रोकने की कोशिश की। लेकिन इससे सभा में मौजूद महिलाएँ भड़क गईं। कई महिलाओं ने लाठी-डंडे लेकर बजरंग दल कार्यकर्ताओं पर हमला कर दिया। इससे कुछ लोगों को चोट भी आई है। मौके पर पुलिस भी पहुँची तो आरोपितों के पास से ईसाइयत से जुड़ी किताबें व कुछ अन्य दस्तावेज भी मिले। इसके बाद पुलिस ने धर्मांतरण के लिए सभा का आयोजन करने वाले मकान मालिक बेदराम गुड़िया और पादरी राधे निषाद विरासत को गिरफ्तार कर लिया।

इंदौर में भी लालच देकर धर्मांतरण की कोशिश

धर्मांतरण का दूसरा मामला मध्य प्रदेश के इंदौर में बाणगंगा इलाके का है। रमा देवी कुर्मी नाम की महिला ने अपने पड़ोसी गणेश और जॉनी नामक एक व्यक्ति पर धर्मांतरण के लिए लालच देने का आरोप लगाया है। आरोप है कि गणेश के घर में हर सप्ताह प्रार्थना सभा होती है। इसमें शामिल होने वाले हिंदुओं को पैसों का लालच दिया जाता है।

रमा देवी ने कहा है कि 30 जून 2023 को जॉनी और उसकी पत्नी शाली उनसे अपने घर में सभा रखने को कहा। इनकार करने पर जॉनी और उसकी पत्नी ने हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करना शुरू कर दिया। बहस के बाद रमा देवी ने दोनों को घर से भगा दिया। इसके बाद 3 जून को जॉनी और उसकी पत्नी शाली एक बार फिर रमा देवी के घर आ धमके। इस बार उनके साथ में गणेश भी था।

आरोप है कि इन लोगों ने रमा देवी को लोन माफ कराने, बच्चों की पढ़ाई और शादी के लिए पैसे देने समेत कई तरह के प्रलोभन दिए। इसके बाद रमा देवी ने फोन कर अपने परिचितों और पुलिस को बुला लिया। पुलिस ने 295-A के तहत मामला दर्ज कर गणेश और जॉर्ज को गिरफ्तार कर लिया है।

रमा देवी का कहना है कि गणेश जिस फैक्ट्री में काम करता था, वहाँ भी लोगों को धर्मांतरण के लिए लालच देता था। इसके चलते फैक्ट्री मालिक ने उसे नौकरी से निकाल दिया था। कोरोना के समय जब उसकी पत्नी का निधन हो गया तो वह उसे दफनाने पर अड़ गया था। रमा देवी के अनुसार एक बार वह पूजा कर रहीं थी तो गणेश ने उनसे कहा कि इस तरह की पत्थर की मूर्ति भगवान नहीं हो सकती। यीशू को भगवान मानकर ईसाई बन जाओ।

पहले रात में, अब दिन में… सुप्रीम कोर्ट से तीस्ता सीतलवाड़ को राहत, 19 जुलाई तक गिरफ्तारी पर रोक: गुजरात सरकार को बदनाम करने की साजिश का मामला

आनन-फानन में आधी रात को कोर्ट लगाकर प्रोपेगंडा एक्टिविस्ट तीस्ता सीतलवाड़ को जमानत देने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अब इसकी अवधि भी बढ़ा दी है। इस दौरान उन्हें गिरफ्तार से सुरक्षा दी गई है। इस मामले में अगली सुनवाई 19 जुलाई 2023 को होगी। गुजरात दंगों में फर्जी साबूत गढ़कर सरकार को बदनाम करने का आरोप सीतलवाड़ पर है।

न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की विशेष पीठ ने मामले में गुजरात सरकार से जवाब माँगा और मामले को अंतिम निपटान के लिए सुनवाई की अगली तारीख 19 जुलाई तय की। शनिवार (1 जुलाई 2023) को हुई एक विशेष सुनवाई में अदालत ने सीतलवाड़ को सात दिनों की अंतरिम जमानत दी थी, जो 8 जुलाई को समाप्त होने वाली थी।

गुजरात सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने शीर्ष अदालत से कहा कि उन्हें कुछ दस्तावेजों का अनुवाद करने के लिए समय चाहिए। वहीं, सीतलवाड़ की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने मामले की तत्काल सुनवाई की माँग की।

सुप्रीम कोर्ट गुजरात हाईकोर्ट की उस आदेश के खिलाफ सीतलवाड़ की अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्हें नियमित जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। हाईकोर्ट के फैसले में कहा गया था कि उन्हें तुरंत आत्मसमर्पण कर देना चाहिए, क्योंकि जमानत पर बाहर रहने से राज्य में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण गहरा जाएगा।

तीस्ता सीतलवाड़ पर गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली गुजरात सरकार के अधिकारियों को फँसाने के लिए दस्तावेज तैयार करने के आरोप हैं। जून 2022 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के एक दिन बाद गुजरात आतंकवाद विरोधी दस्ते ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2022 में मामले में उन्हें अंतरिम जमानत दे दी थी।

बता दें कि इस पूरे मामले की शुरुआत गुजरात हाईकोर्ट के एक फैसले से हुई। गुजरात हाईकोर्ट ने सीतलवाड़़ की जमानत याचिका रद्द कर उन्हें तुरंत आत्मसमर्पण करने का आदेश सुनाया था। उसी दिन शाम में सुप्रीम कोर्ट बैठी और मामले को बड़े बेंच को हस्तानांतरित कर दिया। रात को फिर सुनवाई हुई और तीस्ता सीतलवाड़़ को एक सप्ताह की राहत प्रदान कर दी गई।

दिलचस्प बात ये है कि सीजेआई चंद्रचूड़ ने भरतनाट्यम का प्रोग्राम देखते हुए उनकी याचिका पर अपनी नजर बनाए रखी और सुनिश्चित किया कि अगले दिन यानी रविवार (2 जुलाई) को ही सुनवाई हो जाए। सीजेआई को करीब 7 बजे पता चला था कि जो पीठ तीस्ता की बेल याचिका सुन रही थी, उसने जमानत पर मत अलग दिए हैं। ऐसे में जस्टिस चंद्रचूड़ की इस मामले में एंट्री हुई। उन्होंने दो अन्य जजों को इस पीठ का हिस्सा बनवाया और फिर इस बेल पर मोहर लगी।

गुजरात हाईकोर्ट ने तीस्ता सीतलवाड़़ को तुरंत सरेंडर करने का आदेश देते हुए कहा था कि उन्हें जमानत देने का अर्थ होगा कि दो समुदायों के बीच दुश्मनी को और बढ़ावा देना। 127 पन्नों के आदेश में जस्टिस निर्जर देसाई ने कहा कि अगर तीस्ता सीतलवाड़़ को बेल दे दी जाती है तो इससे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण बढ़ेगा और सामुदायिक वैमनस्य और गहरा होगा।

गुजरात के तत्कालीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई भाजपा नेताओं और अधिकारियों को फँसाने की साजिश तीस्ता सीतलवाड़ ने रची थी। गुजरात उच्च न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि तीस्ता सीतलवाड़ ने पीड़ितों और और गवाहों का अपने फायदे के लिए सीढ़ी की तरह इस्तेमाल किया। उच्च न्यायालय ने कहा कि पत्रकार रहीं तीस्ता सीतलवाड़ ने पीड़ितों और गवाहों का सीढ़ी की तरह इस्तेमाल कर के अपना फायदा कमाया – वो न सिर्फ पद्मश्री से नवाजी गईं, बल्कि उन्हें योजना आयोग के सदस्य का पद भी मिला।

साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और पूरी सरकारी मशीनरी को बदनाम कर के तीस्ता सीतलवाड़़ ने सक्रिय रूप से एक लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को अस्थिर करने के लिए प्रयास किया। इसके तहत विभिन्न अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक झूठे केस दर्ज करवाए गए। पीड़ितों और गवाहों को भड़का कर ऐसा करवाया गया। हाईकोर्ट ने ये भी पाया कि एक समुदाय विशेष की भावनाओं का इस्तेमाल कर के तीस्ता सीतलवाड़़ ने पैसे जुटाए और इन पैसों का इस्तेमाल पीड़ितों के लिए नहीं किया।

गिरफ्तार हुआ जनजातीय व्यक्ति पर पेशाब करने वाला प्रवेश शुक्ला, बुलडोजर भी चलेगा: पीड़ित की पत्नी बोली – किसी का कोई दबाव नहीं

मध्य प्रदेश के सीधी जिले के एक वीडियो से बवाल मचा हुआ है, जिसमें प्रवेश शुक्ला नामक व्यक्ति को जनजातीय समाज के एक शख्स के ऊपर पेशाब करते हुए देखा गया। अब इस मामले में पीड़ित की पत्नी ने बयान आया है। महिला ने कहा कि उनके पति दिन भर इधर-उधर काम-धाम करते थे और खाने-पीने घर आते थे, लेकिन एक दिन पहले वो घर नहीं आए। पत्नी ने कहा कि उन्हें चिंता थी और वो सोच रही थीं। उन्हें नहीं पता था कि वो कहाँ हैं और क्या कर रहे हैं।

महिला ने कहा कि जब उनके पति नहीं आए तो वो रात भर जगी रहीं कि क्यों नहीं आए। उन्होंने कहा कि चाहे वो कैसे भी हों, चिंता हो ही जाती है। उन्होंने कहा कि अगर किसी ने गलत काम किया है तो जो होना है होगा ही। उन्होंने गलत करने वाले को सज़ा देने की भी माँग की। उन्होंने कहा कि उनके घर पुलिस आई थी। उन्होंने कहा कि उन पर पुलिस या किसी का कोई दबाव नहीं है। लेकिन, उन्होंने दोहराया कि अगर कोई गलत करेगा तो सज़ा तो होगी ही।

उधर मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा भी इस मामले को लेकर सख्त हैं। उन्होंने कहा कि जैसे ही घटना संज्ञान में आई, वैसे ही कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया है कि गिरफ़्तारी हो गई है और आरोपित प्रवेश शुक्ला को थाने में रखा गया है। जब उनसे पूछा गया कि आरोपित को थाने में अकड़ कर चलते हुए देखा गया, तो इस पर मिश्रा ने कहा कि उसे लॉकअप में डाला गया है और कानूनी कार्रवाई हुई है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का आदेश है कि उस पर NSA लगे।

बुलडोजर चलाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी के हिसाब से बुलडोजर नहीं चलता है, कानून के हिसाब से चलता है। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण होगा तो बुलडोजर बिलकुल चलेगा, क्यों नहीं चलेगा। MP के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इसे निंदनीय और घृणित कृत्य बताते हुए कहा कि भाजपा सरकार में कानून का राज है। उन्होंने ये भी आश्वासन दिया कि अतिक्रमण पर बुलडोजर चलेगा।

उधर प्रवेश शुक्ला के परिजन इस वीडियो को फर्जी बता रहे हैं। उसके पिता का कहना है कि बेटा ऐसा कर ही नहीं सकता, उन्हें डर है कि कहीं उसकी हत्या न हो जाए। घटना करौंदी गाँव की है। पीड़ित पल्लेदारी का काम करता है। प्रवेश शुक्ला कुबरी का रहने वाला है। भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि आरोपित पार्टी का कार्यकर्ता नहीं है। गिरफ़्तारी के बाद का प्रवेश शुक्ला का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पुलिस वाले उसे थाने के भीतर ले जा रहे हैं।

चीन के महत्वाकांक्षी BRI प्रोजेक्ट को समर्थन देने से भारत ने फिर किया इनकार, देश की अखंडता का दिया हवाला: प्रोजेक्ट में चाइना-पाकिस्तान इकॉनोमिक कॉरिडोर भी शामिल

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के बीच भारत ने एक बार चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) से खुद को अलग कर लिया है। हालाँकि, चीन और रूस ने इस परियोजना का समर्थन किया है। SCO के सभी 8 सदस्यों में अकेला भारत है, जिसने चीन की इस परियोजना का समर्थन नहीं किया है।

बताते चलें कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) द्वारा शुरू की कई इस परियोजना का भारत शुरू से विरोध करता रहा है। इस परियोजना के तहत बनने वाली सड़क पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजरता है। इसके साथ इसमें और भी कई तरह की रणनीतिक समस्याएँ हैं।

दरअसल, 4 जुलाई 2023 को SCO देशों के राष्ट्राध्यक्षों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक हुई। सम्मेलन के अंत में घोषणापत्र (New Delhi declaration) जारी किया गया। इसमें बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI Project) का समर्थन करने वाला एक पैराग्राफ शामिल किया गया था। इसके बाद भारत ने इस पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया।

साल 2023 के SCO घोषणापत्र में BRI को लेकर लिखा है, ‘चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) को कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान समर्थन करते हैं। इसमें यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (बेलारूस, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान का आर्थिक संघ) और BRI को जोड़ने का प्रयास भी शामिल है।’

यह पहली बार नहीं है कि भारत ने ऐसा किया है। इससे पहले साल 2022 में उज्बेकिस्तान के समरकंद में हुई SCO की बैठक के बाद घोषणा पत्र में चीनी प्रोजेक्ट का समर्थन करने वाला एक पैराग्राफ शामिल था। उस दौरान भी भारत ने उस पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था।

समकरंद घोषणा पत्र में BRI को लेकर वही बातें कही गई थीं, जो इस बार भी कही गई है। उस घोषणा पत्र में कहा गया था, ‘कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान चीन की बेल्ट एंड रोड पहल (बीआरआई) के लिए अपना समर्थन देते हैं और इसे संयुक्त रूप से लागू करने के लिए चल रहे काम पर नजर बनाए हैं जिसमें यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन और BRI को जोड़ने का प्रयास शामिल है।’

भारत हमेशा से चीन के BRI प्रोजेक्ट का विरोध करता रहा है। इस परियोजना के जरिए चीन एशिया, मध्य-पूर्व, अफ्रीका और यूरोप से जमीन और समुद्र के जरिए संपर्क बढ़ाने के लिए कई परियोजनाओं पर काम कर रहा है। इसमें पाकिस्तान में चाइना-पाकिस्तान इकॉनोमिक कॉरिडोर भी शामिल है, जिसको लेकर भारत आपत्ति जाहिर करता है। भारत का कहना है कि यह भारत की क्षेत्रीय अखंडता और और संप्रभुता का उल्लंघन करता है।

बताते चलें कि SCO को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार (4 जुलाई 2023) को कहा था कि बेहतर सम्पर्क आपसी व्यापार ही नहीं, आपसी विश्वास भी बढ़ाता है, लेकिन इन प्रयासों में एससीओ चार्टर के मूल सिद्धांतों, विशेष रूप से सदस्य देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना बहुत ही जरूरी है।

मेइती झंडा लेकर मेडल लेने पहुँचा मणिपुर का फुटबॉलर, सोशल मीडिया पर बवाल के बाद कहा- शांति चाहता हूँ: कुवैत को हराकर SAFF चैंपियन बना है भारत

भारतीय टीम ने ने SAFF (साउथ एशियन फुटबॉल फेडरेशन) चैंपियनशिप अपने नाम कर ली है। इसी बीच मेडल सेरेमनी के दौरान एक नया विवाद खड़ा हो गया, जब मणिपुर के 22 वर्षीय फुटबॉलर जैक्सन सिंह ने मेइती हिन्दुओं का झंडा लपेट कर कार्यक्रम में शिरकत की। मणिपुर में ईसाई कट्टरपंथियों ने मेइती हिन्दुओं का नरसंहार किया है और उन पर अभी भी अत्याचार हो रहे हैं। विवाद होने के बाद जैक्सन सिंह ने कहा कि वो अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस बात को उठाना चाहते थे कि मणिपुर में क्या हो रहा है, इसीलिए उन्होंने ऐसा किया।

भारत ने 2023 SAFF चैंपियनशिप में मंगलवार (4 जुलाई, 2023) को कुवैत को हरा कर ट्रॉफी अपने नाम कर ली। इसी के बाद हुए कार्यक्रम में जैक्सन सिंह कई रंगों वाला मेइती समाज का झड़ना ओढ़ कर मेडल लेने पहुँचे। वो मणिपुर के थोउबल जिले से ताल्लुक रखते हैं और भारतीय फुटबॉल टीम में बतौर डिफेंसिव मिडफील्डर खेलते हैं। भारतीय टीम ने 9वीं बार SAFF ट्रॉफी अपने नाम की है और इसमें उनका भी अच्छा योगदान है। इस झंडे को कंगलीपक (Kangleipak) का झंडा भी कहा जाता है।

‘सलाई टेरेट फ्लैग’ के नाम से जाने जाने वाले इस झंडे में 7 रंग होते हैं। ये मणिपुर में प्राचीन काल में मेइती हिन्दुओं के 7 अलग-अलग वंशों का प्रतीक हैं। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के श्री कांतिरवा स्टेडियम में ये मैच और कार्यक्रम आयोजित हुआ था। मणिपुर में मेइती-कुकी का संघर्ष चल रहा है। कुकी सामान्यतः ईसाई हैं। वो नहीं चाहते कि मणिपुर के मूलनिवासियों मेइती समाज को ST का दर्जा मिले। जैक्सन सिंह ने कहा कि वो किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत नहीं करना चाहते, शांति बहाली की उम्मीद में उन्होंने ऐसा किया।

उन्होंने कहा कि वो मणिपुर और पूरे भारत को कहना चाहते हैं कि वो लड़ाई-झगड़े की बजाए शांति से रहें। उन्होंने कहा कि वो शांति चाहते हैं, लेकिन 2 महीने से राज्य में हिंसा चल रही है। उन्होंने कहा कि उनका परिवार सुरक्षित है, लेकिन कई ऐसे परिवार हैं जिन्होंने अपना घर खो दिया और वो प्रताड़ना का शिकार हैं। मेइती समाज मणिपुर का 53% है। जैक्सन के अलावा महेश सिंह और उदांता सिंह भी इस भारतीय फुटबॉल टीम में शामिल हैं। जैक्सन ने इस झंडे को मणिपुर का झंडा बताया

मुख्तार अंसारी पर कॉन्ग्रेस की एक और ‘मेहरबानी’ आई सामने, पंजाब सरकार ने बताया- गैंगस्टर के बेटों को दी गई वक्फ बोर्ड की जमीन

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि सूबे की सत्ता में रहते हुए कॉन्ग्रेस सरकार ने गैंगस्टर मुख्तार अंसारी को बचाने में ‘मदद’ की थी। उन्होंने तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार पर रोपड़ जिले में मुख्तार अंसारी के बेटों को वक्फ बोर्ड की जमीन आवंटित करने का भी आरोप लगाया है। मान ने मंगलवार (4 जुलाई 2023) को मीडिया से बात करते हुए ये आरोप लगाए।

हालाँकि कॉन्ग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थामने वाले पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भगवंत मान के इन आरोपों को खारिज किया है। साथ ही कहा है कि वह कभी भी मुख्तार अंसारी से नहीं मिले। अमरिंदर सिंह के इस जवाब पर पलटवार करते हुए सीएम मान ने कहा कि अमरिंदर सिंह को अपने बेटे रनिंदर सिंह से पूछना चाहिए कि उन्होंने मुख्तार अंसारी से कितनी बार मुलाकात की है। भगवंत मान ने कहा है कि रनिंदर ने मुख्तार से कई बार मुलाकात की है। लेकिन अमरिंदर सिंह लोगों को गुमराह कर रहे हैं।

सीएम भगवंत मान ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार पर रोपड़ में वक्फ बोर्ड की जमीन मुख्तार के बेटों को देने का भी आरोप लगाया। भगवंत मान ने वक्फ बोर्ड की जमीन आवंटन के कागज दिखाते हुए कहा है कि अमरिंदर सिंह को बताना चाहिए कि उनके हस्तक्षेप के बिना मुख्तार के बेटों अब्बास और उमर अंसारी को जमीन कैसे आवंटित की गई। इसके अलावा मान ने तत्कलीन कॉन्ग्रेस सरकार और मुख्तार अंसारी के काले कारनामों से जुड़े कई सबूत जल्द ही पेश करने का दावा किया। 

बता दें कि पंजाब पुलिस ने मुख्तार अंसारी को मोहाली के एक रियल एस्टेट कारोबारी से 10 करोड़ रुपए की फिरौती माँगने के आरोप में गिरफ्तार किया था। भगवंत मान का दावा है कि उत्तर प्रदेश की बांदा जेल में बंद रहे मुख्तार अंसारी को पंजाब पुलिस ऐसे समय में लेकर आई थी, जब उस पर उत्तर प्रदेश की एमपी/एमएलए कोर्ट में केस चल रहा था। उन्होंने आगे कहा है कि अगर मुख्तार अंसारी को यूपी से पंजाब शिफ्ट नहीं किया गया होता तो एमपी/एमएलए कोर्ट में फैसला 3 महीने में ही हो गया होता।

मुख्तार अंसारी को पंजाब ट्रासंफर किए जाने के बाद यूपी पुलिस ने पंजाब सरकार से मुख्तार को सौंपने के लिए 27 बार अनुरोध किया था। लेकिन पंजाब सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया। इसके बाद यूपी पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। शीर्ष अदालत के फैसले के बाद यूपी पुलिस को मुख्तार की कस्टडी मिली थी। सीएम भगवंत मान ने बताया कि पंजाब की पूर्ववर्ती कॉन्ग्रेस सरकार ने मुख्तार को बचाने के लिए वकीलों पर बहुत अधिक पैसा खर्च किया था।

भगवंत मान ने यह भी कहा है कि मुख्तार अंसारी के जेल में रहने के दौरान सरकार का 55 लाख रुपए खर्च हुआ था। उनकी सरकार पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पूर्व उप-मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा से यह पैसा वसूल करेगी। पंजाब सरकार ने मुख्तार को यूपी ट्रांसफर करने से रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे को अपना वकील नियुक्त किया था। दवे को फीस के तौर पर 55 लाख रुपए दिए जाने थे। हालाँकि इसके बाद सरकार गिर गई और यह पैसा दवे को नहीं मिल सका।

इस पैसे को लेकर भगवंत मान ने एक बयान में कहा कि वह वकील दुष्यंत दवे को सरकारी खजाने से पैसा नहीं देंगे, बल्कि तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार के मुखिया से इसकी वसूली होगी। भगवंत मान ने यह भी कहा है कि जब मुख्तार पंजाब की जेल में बंद था तब अमरिंदर सिंह सरकार द्वारा उसे वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जा रहा था। सीएम मान ने दावा किया है कि मुख्तार अंसारी जब रोपड़ जेल में बंद था, तब उसकी पत्नी जेल के पीछे बनी एक कोठी में रहती थी।