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‘मौसम की तरह यूपी के माफिया भी ठंडे पड़ गए’: CM योगी ने नोएडा को दी ₹1700 करोड़ की 124 परियोजनाओं की सौगात, बोले – संस्कृति पर हो रहा डिजिटल अटैक

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा में कहा है कि यूपी पुलिस ने गेमिंग ऐप के जरिए धर्मांतरण कराने वाले गिरोह को पकड़ा है। यह गिरोह देश के 25 राज्यों में फैला हुआ है। उन्होंने यह भी कहा है कि देश की संस्कृति पर डिजिटल माध्यम से भी हमले हो रहे हैं। सीएम योगी ने गौतम बुद्ध नगर को 1700 करोड़ रुपए की कुल 124 परियोजनाओं की सौगात दी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीएम योगी आदित्यनाथ ने गाजियाबाद में हुए धर्मांतरण का जिक्र करते हुए कहा है कि यूपी पुलिस ने एक ऐसा गिरोह पकड़ा जो गेमिंग ऐप के जरिए धर्मांतरण करा रहा था। यह गिरोह सिर्फ यूपी ही नहीं बल्कि देश के करीब 25 राज्यों में फैला है। गिरोह के लोग गेमिंग ऐप के जरिए भोले-भाले लोगों को अपना शिकार बनाते थे। यूपी सरकार ने दिल्ली और मुंबई में लड़कियों की हत्या होते देखा है। ऐसी ही घटनाएँ जब उत्तर प्रदेश में हुईं तो इस पर अध्यादेश लाया गया। कानून काम कर रहा है। समाज को भी जागरूक होना चाहिए।

सीएम योगी ने यह भी कहा है कि वह बीते कई दिनों से लगातार कार्यक्रमों में व्यस्त थे। इस दौरान वह, बलिया, बलरामपुर, अंबेडकर नगर और गोरखपुर जिले में गए थे। वहाँ बहुत गर्मी थी। लेकिन जब वह पश्चिमी यूपी की तरफ़ आए तो उन्हें लगा कि यहाँ भी गर्मी होगी। लेकिन मौसम की कृपा है कि जैसे उत्तर प्रदेश के माफिया ठंडे हो गए वैसे ही मौसम भी ठंडा हो गया।

उन्होंने आगे कहा है कि वर्तमान में भारत अपनी बड़ी उपलब्धियों को लेकर वैश्विक मंच पर छाया हुआ है। पीएम नरेंद्र मोदी जी की अध्यक्षता में जी 20 की बैठक हो रहीं हैं। जी20 यानि दुनिया के 20 बड़े देश, इन देशों में दुनिया की 65 फीसदी से अधिक आबादी निवास कर रही है। दुनिया के 80 फीसदी संसाधनों और 85 फीसदी GDP पर जिनका अधिकार है और 90 प्रतिशत पेटेंट पर जिन देशों का अधिकार है। उन देशों की अध्यक्षता भारत कर रहा है। भारत तेजी से बढ़ रहा है। 2027 तक भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा। वहीं, दूसरी ओर पाकिस्तान एक-एक रोटी के लिए मोहताज हो रहा है

योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा है कि संस्कृति पर हमले पहले में भी हुए हैं और आगे भी होंगे। युवाओं का काम संस्कृति बचाकर रखना है। युवाओं को संस्कृति बचाने के लिए अभियान का हिस्सा बनने की जरूरत है। संस्कृति पर अब अलग-अलग तरीके से हमले होने लगे हैं। युवा आज के समय में स्मार्टफोन पर 24 घंटे में से 8 घंटे का समय बिताता है और यह भी एक तरीके से संस्कृति पर हमला है। संस्कृति पर डिजिटल माध्यम से भी हमले हो रहे हैं।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा है, “जिन लोगों ने लोकतंत्र को रौंदा था, आज उनके साथ समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय लोक दल, जेडीयू और जेपी के अनुयायी कहे जाने वाले अन्य दलों की साठ-गाँठ हो रही है। भ्रष्टाचार को कारनामों का छिपाने का समाजवादी पार्टी का पुराना इतिहास रहा है। समाजवादी पार्टी ने साल 2004 में कॉन्ग्रेस के बिना माँगे ही अपना समर्थन दे दिया था। कॉन्ग्रेस समर्थन नहीं चाहती थी, लेकिन जबरदस्ती चिपको आंदोलन को रूप में खुद को अग्रणी भूमिका में दिखाने के लिए सपा ने वो काम किया। एक बार फिर से समाजवादी पार्टी अपने उसी इतिहास को दोहराने जा रही है।”

1718 करोड़ की 124 परियोजनाओं की सौगात

योगी आदित्यनाथ ने रविवार (25 जून 2023) को कुल 1718.66 करोड़ की 124 परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। आईएसएम मुख्यरूप से नोएडा को ग्रेटर नोएडा से जोड़ने वाला पर्थला चौक केवल फ्लाईओवर। सेक्टर-142 में एडवंट अंडरपास, सेक्टर-78 में वेदवन पार्क का विकास। नोएडा पुलिस को 55 नग फोर व्हीलर, सेक्टर-123 में 400/132/33 केवी सब स्टेशन। तथा सॉलिड वेस्ट से प्रतिदिन 900 टन क्षमता का टोटिफाइड चारकोल उत्पादन एवं 300 टन क्षमता वाले वायो सीएनजी गैस प्लांट, नोएडा के औद्योगिक सेक्टर-162 एवं 163 हेतु ड्रेन, जलापूर्ति, सीवर लाइन की स्थापना शामिल है।

सुहाना खान ने खरीदी ₹13 करोड़ की जमीन, दस्तावेजों में खुद को बताया ‘किसान’: जिस कंपनी के नाम पर रजिस्टर हुई संपत्ति, उसकी डायरेक्टर माँ-मौसी-नानी

बॉलीवुड में 31 साल पूरे कर चुके शाहरुख़ खान की बेटी सुहाना ने महाराष्ट्र के रायगढ़ स्थित अलीबाग में 12.91 करोड़ की जमीन खरीदी है। अलीबाग समुद्र किनारे स्थित इलाका है, जहाँ कई बीच हैं। सुहाना खान ने ये प्रॉपर्टी तब खरीदी है, जब अभी तक उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में डेब्यू भी नहीं किया है। उनकी फिल्म ‘The Archies’ रिलीज होने वाली है। उन्होंने अलीबाग के थाल गाँव में संपत्ति खरीदी है। सुहाना खान अभी मात्र 23 वर्ष की हैं।

सबसे बड़ी बात ये है कि रजिस्ट्रेशन के दस्तावेजों में सुहाना खान ने खुद को ‘Agriculturist’, अर्थात किसान बताया है। उन्होंने 1.5 एकड़ जमीन खरीदी है, जिसमें 2218 स्क्वायर फ़ीट की संरचना भी बनी हुई है। उन्होंने 3 बहनों से ये संपत्ति खरीदी हैं, जिनके नाम हैं – अंजलि, रेखा और प्रिया खोट। इन तीनों बहनों को अपने अभिभावकों से ये जमीन मिली थी। इन्होंने 77.46 लाख रुपए बतौर स्टाम्प ड्यूटी भी भुगतान किया है।

सुहाना खान ने ये संपत्ति ‘Déjà Vu Farm Pvt Ltd’ के नाम से रजिस्टर्ड कराई है। इस कंपनी की डायरेक्टर शाहरुख़ खान की पत्नी गौरी और गौरी की माँ सविता छिब्बर और बहन नमिता छिब्बर हैं। शाहरुख़ खान की भी अलीबाग में एक आलिशान प्रॉपर्टी है, जहाँ उन्हें अक्सर परिवार और दोस्तों संग पार्टी करते हुए देखा गया है। वहाँ उनका प्राइवेट स्विमिंग पूल और हैलीपैड भी है। ये प्रॉपर्टी समुद्र के किनारे है। सुहाना खान के बारे में बता दें कि उन्होंने न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के Tisch स्कूल से स्नातक किया है।

सुहाना खान को इसी साल अप्रैल मे कॉस्मेटिक ब्रांड Maybelline ने अपना ब्रांड एम्बेस्डर बनाया था। अलीबाग में दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह ने भी संपत्ति ले रखी है। विराट कोहली और अनुष्का शर्मा ने भी वहाँ संपत्ति ख़रीदी है। सुहाना खान की फिल्म ‘The archies’ का निर्देशन एकता कपूर ने किया है। यूजर्स का कहना है कि फिल्म के पोस्टर में कोई भी भारतीय नहीं दिख रहा। आलोचना पर भड़कते हुए एकता कपूर ने इसे नस्लवाद करार दिया

9 साल, 13 देशों ने दिया अपना सर्वोच्च सम्मान… देखें कैसे दुनिया भर में गूँजा मोदी-मोदी, कहाँ-कहाँ किस-किस सम्मान से नवाजे गए PM नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता सातवें आसमान पर है। दुनियाभर में वह जहाँ भी जा रहे हैं उनके स्वागत के लिए लोग पलकें बिछाए दिखाई दे रहे हैं। पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री द्वारा PM मोदी के पैर छूना। फिर अमेरिकी संसद में मोदी-मोदी की गूँज और अब मिस्र में सर्वोच्च सम्मान मिलना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। पीएम मोदी को दुनियाभर के 13 देश अब तक सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित कर चुके हैं।

दरअसल, पीएम मोदी मिस्र की दो दिवसीय यात्रा पर हैं। इस दौरान, रविवार (25 जून, 2023) को मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी ने उन्हें देश के सर्वोच्च राजकीय सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ द नील’ से सम्मानित किया है। इससे पहले 22 मई 2023 को पापुआ न्यू गिनी, फिजी और पलाऊ गणराज्य ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपने-अपने देशों के सर्वोच्च राजकीय सम्मान से नवाजा था।

पापुआ न्यू गिनी के गवर्नर-जनरल सर बॉब डाडे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सर्वोच्च सम्मान ‘ग्रैंड कम्पेनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ लोगोहू’ से सम्मानित किया था। इसी दिन फिजी के प्रधानमंत्री सित्विनी राबुका ने PM मोदी को ‘कम्पेनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ फिजी’ से सम्मानित किया था। यह पुरस्कार फिजी का सर्वोच्च राजकीय पुरुस्कार है। यही नहीं, पलाऊ गणराज्य के राष्ट्रपति सुरंगेल एस व्हिप्स जूनियर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सर्वोच्च सम्मान ‘एबाक्ल अवॉर्ड’ से सम्मानित किया था।

इसके अलावा, दिसंबर 2021 में भूटान ने अपने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ द ड्रक ग्यालपो’ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सम्मानित किया था। साल 2020 में अमेरिकी सरकार ने पीएम मोदी को यूनाइटेड स्टेट आर्म्ड फोर्सेस अवार्ड ‘लीजन ऑफ मेरिट’ से सम्मानित किया था। इसी तरह साल 2019 में बहरीन ने PM मोदी को ‘द किंग हमाद ऑर्डर ऑफ द रेनेसां’ से सम्मानित किया था। उन्हें यह अवार्ड बहरीन के किंग हमद बिन इसा बिन सलमान अल खलीफा ने खाड़ी देशों के साथ संबंध बढ़ाने की मान्यता के तौर पर दिया था।

जून 2019 में मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम सालेह ने PM मोदी को विदेशी गणमान्य नागरिकों को दिए जाने वाला देश का अपना सर्वोच्च सम्मान ‘रूल ऑफ निशान इज्जुद्दीन’ से  सम्मानित किया था। अप्रैल 2023 में रूस ने रूस ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू’ से सम्मानित किया था। अगस्त 2019 में संयुक्त अरब अमीरात पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वहाँ के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने ‘ऑर्डर ऑफ जायद’ पुरस्कार से सम्मानित किया था। यह यूएई का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।

फरवरी 2018 में फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने पीएम मोदी को ‘ग्रैंड कॉलर ऑफ द स्टेट ऑफ फिलिस्तीन’ पुरस्कार से सम्मानित किया था। यह विदेशी गणमान्य नागरिकों को दिया जाने वाला फिलिस्तीन का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। जून 2016 में अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने प्रधानमंत्री मोदी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘अमीर अमानुल्लाह खान पुरस्कार’ से सम्मानित किया था। वहीं, अप्रैल 2016 में सऊदी अरब की यात्रा पर पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सऊदी अरब के किंग सलमान बिन अब्दुलअजीज ने सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘किंग अब्दुलअजीज सैश’ से सम्मानित किया था।

कन्हैया लाल तेली की हत्या पर बनेगी फिल्म, सभी कैरेक्टर्स को समझने के लिए उदयपुर आएगी प्रोडक्शन कंपनी की टीम: इस्लामी कट्टरपंथियों ने गला रेत डाला था

आपको कन्हैया लाल तेली याद हैं? राजस्थान के उदयपुर में दर्जी का काम करने वाले कन्हैया लाल तेली, जिनका गला सिर्फ रेत कर सिर्फ इसीलिए हत्या कर दी गई क्योंकि उन्होंने नूपुर शर्मा का समर्थन किया था। अब इस पूरे प्रकरण पर फिल्म बनने जा रही है। 28 जून, 2022 को हुए इस हत्याकांड को गौस मोहम्मद और रियाज अत्तारी ने अंजाम दिया था। वो फ़िलहाल जेल में हैं। हत्या के बाद उन्होंने हथियार दिखाते हुए हँस कर वीडियो भी बनाया था।

मुंबई स्थित एक फिल्म प्रोडक्शन हाउस ने कन्हैया लाल तेली हत्याकांड पर फिल्म बनाने की योजना बनाई है, जिसके लिए कंपनी की एक टीम उदयपुर आ रही है। बताया जा रहा है कि बुधवार (28 जून, 2023) को उक्त प्रोडक्शन हाउस की टीम राजस्थान के उदयपुर पहुँचेगी। उदयपुर को झीलों का नगर कहा जाता है, लेकिन इस घटना ने जिले के पर्यटन को भी काफी क्षति पहुँचाई थी। कन्हैया लाल के हत्यारों के कनेक्शन अजमेर दरगाह के चिश्तियों से भी सामने आया था।

‘ABP News’ की खबर के अनुसार, कन्हैया लाल तेली के बड़े बेटे यश ने बताया कि ‘जानी फायरफॉक्स’ नामक कंपनी से उन्हें कॉल आया था। इस दौरान निर्देशक अमित जानी ने इस विषय पर फिल्म बनाए जाने की इच्छा प्रकट की थी। यश ने उन्हें परिवार के अन्य सदस्यों से बात करने के लिए कहा। दोबारा बातचीत में परिवार राजी हो गया और फिल्म बनाने की अनुमति दे दी। इसके बाद प्रोडक्शन हाउस की टीम ने उदयपुर दौरे का प्लान बनाया।

टीम उदयपुर पहुँच कर इस प्रकरण से जुड़े सभी कैरेक्टर्स को जानेगी। फिर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस मामले में राजसमंद के उन दो युवकों की कहानी भी दिखाई जाएगी, जिन्होंने बहादुरी दिखाते हुए आरोपितों को पकड़ने में पुलिस की मदद की। उदयपुर के कन्हैया लाल तेली की हत्या का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। हाल ही में पीड़ित हिन्दुओं की व्यथा दिखाती हुई ‘द कश्मीर फाइल्स’ और ‘द केरल स्टोरी’ जैसी कई फ़िल्में ब्लॉकबस्टर साबित हुई हैं।

हाईकोर्ट ने WFI के चुनावों पर लगाई रोक, असम कुश्ती संघ की याचिका पर लिया फैसला

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने इसी साल 11 जुलाई को होने वाले कुश्ती महासंघ के चुनाव पर रोक लगा दी है। यह निर्णय रविवार (25 जून, 2023) को असम कुश्ती महासंघ द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के बाद आया है। हाईकोर्ट ने खेल मंत्रालय को भी आदेश दिया है कि वो अगली तारीख तय होने तक इन चुनावों को स्थगित रखे। असम कुश्ती महासंघ ने अपनी याचिका में WFI, भारतीय ओलम्पिक संघ और खेल मंत्रालय को प्रतिवादी बनाया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, असम कुश्ती संघ ने इन चुनावों की तारीख टालने की याचिका दायर की थी। खेल मंत्रालय और भारतीय कुश्ती महासंघ को पार्टी बनाते हुए असम कुश्ती संघ ने खुद को भारतीय कुश्ती संघ का सदस्य बनने का हकदार बताया था। याचिका में बताया गया था कि उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में 5 नवम्बर, 2014 को भारतीय कुश्ती महासंघ की जनरल काउंसिलिंग की मीटिंग हुई थी। इस मीटिंग में WFI कार्यकारी समिति ने असम कुश्ती संघ को अपना संबद्ध सदस्य बनने योग्य बताया था।

याचिका में आगे बताया गया है कि साल 2014 में पास हुए प्रस्ताव में असम कुश्ती संघ को WFI का मेंबर बनाने की सहमति के बावजूद आज तक उस पर अमल नहीं हुआ है। असम कुश्ती संघ का यह भी कहना है कि जब तक वो WFI से संबद्ध नहीं है तब तक वो निर्वाचक मंडल में अपना कोई प्रतिनिधि नॉमिनेट नहीं कर सकते। इस आधार पर असम कुश्ती संघ ने 11 जुलाई को प्रस्तावित भारतीय कुश्ती महासंघ के चुनाव पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने खेल मंत्रालय, भारतीय ओलंपक संघ और WFI को भी इस बावत निर्देश जारी किए हैं।

इन निर्देशों में अगली तारीख तय होने तक चुनाव न करवाने के लिए कहा गया है। बताते चलें कि पहले भारतीय कुश्ती महासंघ का चुनाव 6 जुलाई को प्रस्तावित था। बुधवार (21 जून 2023) को भारतीय ओलम्पिक संघ ने इसे 5 दिनों के लिए और बढ़ा कर 11 जुलाई कर दिया था। इस पैनल के निर्वाचन मंडल के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 25 जून (रविवार) तक रखी गई थी।

कोचिंग की आड़ में खोल दिया मदरसा: न कुर्सी न मेज अंदर होने लगी नमाज़, गाजियाबाद पुलिस ने मौलवी शौकत अली को दबोचा

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में कोचिंग संस्थान के अंदर सामूहिक नमाज पढ़ाने का मामला सामने आया है। नमाज़ पढ़वाने का आरोप एक मौलवी पर लगा है जिसका नाम शौकत अली है। पुलिस ने केस दर्ज कर के शौकत अली को गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि शौकत आवासीय क्षेत्र में कोचिंग संस्थान चला रहा था। उस पर न सिर्फ अपने छात्रों बल्कि आस-पास के निवासियों को भी कोचिंग के अंदर बुला कर नमाज़ पढ़ाने का आरोप है। घटना 23 जून 2023 (शुक्रवार) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला गाजियाबाद के खोड़ा थानाक्षेत्र के दीपक विहार का है। यहाँ शौकत अली नाम का एक मौलवी आवासीय क्षेत्र में फ्यूचर ट्रैक नाम से कोचिंग संस्थान चलाता है। 23 जून को जुमे (शुक्रवार) के दिन पुलिस टीम दीपक विहार इलाके में गश्त कर रही थी। इस दौरान पुलिस को दोपहर लगभग 1:30 पर फ्यूचर ट्रैक कोचिंग के पास भीड़ दिखी। पुलिस बल मौके पर पहुँचा तो यह भीड़ नमाज़ियों की थी जो कोचिंग संस्थान से निकल रही थी।

शिकायतकर्ता प्रेम सिंह का दावा है कि आस-पास के रहने वाले हिन्दू कोचिंग में नमाज़ का विरोध कर रहे थे। बताया यह भी जा रहा कि कोचिंग को मदरसे के रूप में तब्दील कर दिया गया था। पुलिस ने कोचिंग संचालक की इस हरकत को सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और 2 समुदायों के बीच द्वेष फैलानी वाली माना है। पुलिस ने केस दर्ज कर के शनिवार (24 जून 2023) को गिरफ्तार कर लिया है। मौलवी शौकत अली को कोर्ट में पेश किया गया है। बताया जा रहा है कि मौलवी शौकत न सिर्फ अपने छात्रों को आवासीय इलाके में बनी उस कोचिंग में नमाज़ पढ़ाता था बल्कि धीरे-धीरे वहाँ आसपास के लोग भी जमा होने लगे थे।

दावा है कि आरोपित मौलवी पहले एक मदरसा चलाता था। वह मदरसा बिना अनुमति का था जिसे जनवरी माह में पुलिस ने बंद करवा दिया था। मौलवी ने इस बार किराए का मकान ले कर उसमें कोचिंग संस्थान के नाम पर मदरसे जैसा माहौल बना डाला। इस कोचिंग का स्वरूप मदरसे जैसा था। पुलिस को यहाँ कोई कुर्सी मेज आदि नहीं मिले। जाँच में यह बात भी सामने आई है कि मौलवी शौकत अली ने महज सप्ताह भर पहले ही उस कोचिंग को किराए पर लिया था।

यहाँ न सिर्फ गाजियाबाद बल्कि नोएडा के छात्र भी आ कर नमाज़ पढ़ा करते थे। फ़िलहाल पुलिस सभी पहलुओं पर जाँच कर रही है।

विपक्षी एकता की खीर में नींबू बन टपक गए केजरीवाल: AAP बोली- राहुल गाँधी को अब PM प्रमोट ना करें, कॉन्ग्रेस बोली- जेल के डर से एकजुटता तोड़ रही AAP

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई में विपक्षी नेताओं ने शुक्रवार (23 जून 2023) को पटना में बैठक की थी। बैठक के अभी दो ही दिन बीते कि आपस में आरोप-प्रत्यारोप लगने लगे।

दरअसल, बैठक के दौरान ही आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कॉन्ग्रेस से सवाल पूछा था कि अगर विपक्षी एकता की बात की जा रही है तो उसे केंद्र के दिल्ली सेवा अध्यादेश का विरोध करना चाहिए। हालाँकि, कॉन्ग्रेस ने इस पर कोई आश्वासन नहीं दिया।

इसके बाद बैठक को पलीता लगाते हुए केजरीवाल बैठक के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिंसा नहीं लिए। आम आदमी पार्टी ने तो ये भी साफ दिया कि अब वो उसी बैठक में हिस्सा लेगी, जिसका हिस्सा कॉन्ग्रेस नहीं रहेगी। इसका ये मतलब हुआ कि शिमला बैठक में भी अरविंद केजरीवाल केजरीवाल रहने वाले हैं।

उधर, पटना में बैठक के दौरान जब वामपंथी नेता अपनी बात करने लगे, तब बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बैठक के बीच से ही उठकर चली गई। बंगाल में भी कॉन्ग्रेस द्वारा TMC को चोरों की पार्टी कहने से नाराज हो गई थीं। उन्होंने साफ कहा दिया अब कॉन्ग्रेस को ऐसे आरोप लगाने से बचना चाहिए और TMC के खिलाफ बंगाल में धरना बंद करना चाहिए।

इससे जाहिर होता है कि विपक्षी एकजुटता के नाम पर सभी दल साथ तो दिख रहे हैं, लेकिन उनका दिल नहीं मिल रहा है। हालाँकि, समन्वय बनाने के एक संयोजक चुनने का भी निर्णय लिया गया है। इस संबंध में अगली बैठक हिमाचल प्रदेश के शिमला में 12 जुलाई 2023 को होगी।

इधर बैठक होने और अगली बैठक की तारीख तय होने के बाद भी आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी है। आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने अध्यादेश को लेकर यहाँ तक कह दिया कि कॉन्ग्रेस मुहब्बत की दुकान चला रही है तो उसे बड़ा दिल दिखाना चाहिए।

इसके बाद तो जैसे कॉन्ग्रेस बिफर गई। कॉन्ग्रेस नेता अजय माकन ने कहा कि अरविंद केजरीवाल जेल नहीं जाना चाहते हैं, इसलिए विपक्षी एकता को तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। अजय माकन ने कहा कि एक तरफ AAP कॉन्ग्रेस से समर्थन माँग रही है और दूसरी तरफ उसके नेता पार्टी के खिलाफ बोल रहे हैं।

AAP की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने तो यहाँ तक माँग कर डाली कि विपक्षी दलों को राहुल गाँधी को नेता के रूप में नहीं प्रोजेक्ट करना चाहिए। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी को तीसरी बार नेता के तौर पर प्रोजेक्ट करने से संविधान बचाना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस को आगे बढ़कर घोषणा करनी चाहिए कि वह अब राहुल पर दाँव ना लगाकर विपक्ष को करेगी। 

बताते चलें कि पटना की हुई बैठक में 15 दलों के प्रमुख नेता शामिल हुए थे। उस दौरान जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने उन्हें टोका था। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जब कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया गया था, तब तो आपकी पार्टी ने हमारा समर्थन नहीं किया था और संसद में सरकार का साथ दिया था। हालाँकि, केजरीवाल के रूख में कोई परिवर्तन नहीं आया है।

बताते चलें कि साल 2018 में भी आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने इसी तरह की विपक्षी एकता बनाने की कोशिश की थी। नायडू ने तो इससे ज्यादा दलों के नेताओं को एक मंच पर खड़ा कर दिया था। उस दौरान सभी नेता एक-दूसरे का हाथ थामे भी नजर आए थे। हालाँकि, उस एकता का क्या परिणाम हुआ, ये पूरा देश देख रहा है। 

प्रभास की अगली फिल्म ‘Project K’ में होंगे कमल हासन: कश्मीर पर जनमत संग्रह की कर चुके हैं माँग, ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में राहुल गाँधी के साथ घूमे

अमिताभ बच्चन, प्रभास, दीपिका पादुकोण, दिशा पटानी स्टारर साइंस-फिक्शन थ्रिलर फिल्म ‘प्रोजेक्ट के’ में एक और नाम जुड़ गया है। नाग अश्विन के डायरेक्शन में बनने वाली इस फैंटेसी फिल्म में अब कमल हासन भी नजर आएँगें। वह फिल्म में विलेन कि भूमिका में होंगे। कमल हासन के फिल्म में शामिल होने को लेकर अमिताभ बच्चन और प्रभास ने खुशी जाहिर की है। 

कलम हासन ने ‘प्रोजेक्ट के’ में शामिल होने की पुष्टि करते हुए कहा है, “50 साल पहले जब मैं डांस असिस्टेंट और असिस्टेंट डायरेक्टर था, तब प्रोडक्शन सेक्टर में अश्विनी दत्त का नाम बहुत बड़ा था। हम दोनों 50 साल बाद एक साथ आ रहे हैं। हमारी अगली पीढ़ी का एक शानदार डायरेक्टर इस फिल्म को डायरेक्ट कर रहा है। मेरे को-एक्टर प्रभास और दीपिका भी उसी पीढ़ी में से हैं। मैं अमित जी के साथ पहले भी काम कर चुका हूँ। लेकिन हर बार ऐसा लगता है कि जैसा पहली बार काम करना हो। अमित जी खुद को नए रूप में ढालते रहते हैं। मैं भी उनके जैसे बनने की कोशिश में लगा हुआ हूँ। मैं प्रोजेक्ट के का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूँ।”

वहीं, फिल्म में शामिल होने को लेकर अमिताभ बच्चन ने कमल हासन का स्वागत किया है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, “स्वागत है कमल, तुम्हारे साथ दोबारा काम करना काफी अच्छा होगा। वैसे भी एक अरसा हो चुका है।” प्रभास ने भी वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, “यह एक ऐसा पल होगा जो मेरे दिल में हमेशा के लिए बस जाएगा। ‘प्रोजेक्ट के’ में लीजेंड कमल हासन के साथ काम करने को लेकर मैं बहुत अधिक सम्मानित महसूस कर रहा हूँ। सिनेमा के ऐसे लीजेंड के साथ सीखने और बढ़ने का अवसर मिलना एक सपने के सच होने जैसा है।”

कश्मीर में जनमत संग्रह की माँग कर चुके हैं कमल हासन

बता दें कि साल 2019 में पुलवामा में हुए आतंकी हमले के चंद दिनों बाद ही कमल हासन ने कश्मीर में जनमत संग्रह की वकालत की थी। उन्होंने कहा था, “भारत कश्मीर में जनमत संग्रह क्यों नहीं करा रहा है? भारतीय सरकार किससे डरती है?” यही नहीं उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को आजाद कश्मीर बताते हुए कहा था, “आजाद कश्मीर में वो ट्रेन में जिहादियों की तस्वीर का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि उन्हें हीरो की तरह प्रदर्शित किया जा सके। यह एक मूर्खतापूर्ण कार्य है। भारत भी इसी तरह मूर्खतापूर्ण व्यवहार कर रहा है। यदि हम यह साबित करना चाहते हैं कि भारत एक बहुत अच्छा देश है तो हमें इस तरह का व्यवहार नहीं करना चाहिए।”

भारत जोड़ो यात्रा और सिद्धारमैया के शपथ गृहण में भी दिखे थे कमल हासन

ज्ञात हो कि कमल हासन एक्टर होने के साथ राजनीति में भी उतर चुके हैं। वह ‘मक्कल निधि मय्यम’ (MYM) के अध्यक्ष भी हैं। कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी की तथाकथित ‘भारत जोड़ो’ यात्रा में भी वह राहुल के साथ चलते दिखाई दिए थे। इसके अलावा, मई 2023 में कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया के शपथ ग्रहण समारोह में जब विपक्ष अपनी ताकत दिखाने में जुटा हुआ था, तब भी कमल हासन उस मंच में मौजूद थे।

द केरल स्टोरी को बताया था प्रोपेगेंडा

यही नहीं, कमल हासन ने केरल में इस्लामिक कट्टरपंथियों का सच उजागर करती फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ को प्रोपेगेंडा फिल्म बताया था। उनका कहा था, “मैं प्रोपेगेंडा वाली फिल्मों के खिलाफ हूँ। सिर्फ लोगो (Logo) के रूप में ‘सच्ची कहानी’ लिख देना पर्याप्त नहीं होता। कहानी वास्तव में सच होनी चाहिए और ये (फिल्म) सच नहीं है।”

घरों पर चिपके मिले ‘PFI ज़िंदाबाद’ के साथ-साथ 786 के पोस्टर, पुलिस ने शुरू किया जाँच: नवी मुंबई में प्रतिबंधित संगठन का समर्थन, पटाखे भी बाँध दिए

महाराष्ट्र के नवी मुंबई इलाके कुछ घरों पर प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) के समर्थन में पोस्टर चिपके पाए गए हैं। कुछ पोस्टरों में 786 लिखा हुआ मिला। मामले की जानकारी होते ही पुलिस ने एक्शन लेते हुए स्टीकरों को जब्त कर लिया। घटना 24 जून (शनिवार) रात की है। रविवार (25 जून, 2023) को पुलिस ने बताया कि पोस्टर वाले अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर के जाँच और कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला नवी मुंबई के पनवेल इलाके का है। यहाँ 24 जून की सुबह एक व्यक्ति जब घर से बाहर निकला तो उसे अपनी दीवाल पर कुछ लिखा दिखाई दिया। उसने करीब से देखा तो उसकी दीवाल पर एक पोस्टर लगा हुआ था। इस पोस्टर में हरे रंग की स्याही से अंग्रेजी भाषा में ‘PFI जिंदाबाद’ और 786 लिखा हुआ था। कुछ ही देर में इसी क्षेत्र के 2 अन्य घरों में अगरबत्ती और पटाखे बाँधे जाने की खबर आई। मामले की सूचना पुलिस को दी गई तो वो मौके पर पहुँच कर जाँच में जुट गई।

पुलिस ने फ़ौरन घटनास्थल पर पहुँच कर पटाखों और पोस्टरों को जब्त कर लिया। इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ IPC की धारा 153 A (धर्म, नस्ल, जन्मस्थान, निवास के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना) के तहत FIR दर्ज कर ली गई है। पुलिस घटनास्थल पर लगे CCTV फुटेज सहित अन्य सबूत खंगाल रही है। अभी तक आरोपितों की पहचान नहीं हो पाई है। सोशल मीडिया पर ये पोस्टर वायरल हो रहे हैं।

गौरतलब है कि भारत सरकार ने सितम्बर 2022 में पीएफआई और उससे जुड़े तमाम लोगों पर 5 साल के लिए बैन लगा दिया था। इस संगठन और इसके पदाधिकारियों पर साल 2047 तक भारत को इस्लामी मुल्क बनाने की साजिश रचने सहित विदेशों से फंडिंग लेने का आरोप है। बताया गया था कि PFI में तमाम लोग ISIS की विचारधारा से प्रभावित बताए गए थे।

बागी प्रिगोझिन ने वैगनर सैनिकों को वापस बुलाया, समझौते के बाद रूस में पुतिन के लिए खत्म हो गया संकट? जिस शहर पर कब्ज़ा किया था उसे भी छोड़ा

वैगनर (Wagner) नाम के भाड़े का सैन्य ग्रुप चलाने वाले येवगेनी प्रिगोझिन ने रूसी राष्ट्रपति व्लाडिमीर पुतिन की कठोर कार्रवाई के बाद अपनी सेना को वापस बुला लिया है। माना जाता है कि प्रिगोझिन और पुतिन के बीच एक समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत प्रिगोझिन बेलारूस चले जाएँगे और उन पर लगाए गए सभी आरोप रूस वापस ले लेगा।

मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको की मध्यस्थता में यह समझौता हुआ है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने कहा कि प्रिगोझिन पर मुकदमा नहीं चलाया जाएगा। क्रेमलिन ने हमेशा वैगनर के वीरतापूर्ण कार्यों का सम्मान किया है। वैगनर ग्रुप की सेनाओं को रूसी रक्षा मंत्रालय के अधीन कर लिया जाएगा।

शनिवार (24 जून 2023) की सुबह प्रिगोझिन ने घोषणा की थी कि उसकी सेना ने रूस के दक्षिणी कमान के मुख्यालय वाले शहर रोस्तोव-ऑन-डॉन पर कब्जा कर लिया है। इसके बाद राष्ट्रपति पुतिन ने इस विश्वासघात और पीठ में खंजर घोंपने जैसा बताया था। उन्होंने कहा था कि ऐसा करने वालों को कठोर दंड दिया जाएगा।

इस बीच प्रिगोझिन द्वारा अपने रूसी सेना को ललकारने की बात भी सामने आई थी। प्रोगोझिन ने यह भी दावा किया था कि उनकी सेना ने एक रूसी हेलीकॉप्टर को मार गिराया है। हालाँकि, राष्ट्रपति पुतिन की घोषणा के 12 घंटे के अंदर प्रिगोझिन ने रोस्तोव शहर छोड़ दिया। प्रिगोझिन ने राजधानी मास्को की ओर बढ़ रही अपनी सेना को भी वापस लौटने का आदेश दे दिया।

बेलारूसी राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको की मध्यस्थता में हुए समझौते के बाद प्रिगोझिन ने सेना को वापस भेज दिया। तब तक प्रिगोझिन की सेना मास्को के 125 मील के दायरे में पहुँच गई थी। शनिवार की रात जब प्रिगोझिन शहर से बाहर जा रहे थे, तब लोग उनसे हाथ मिला रहे थे और उनके साथ सेल्फी ले रहे थे।

कौन है वैगनर ग्रुप

वैगनर ग्रुप एक निजी सैन्य कंपनी है, जिसकी स्थापना रूस में की गई थी। इसे साल 2014 में तब प्रमुखता मिली, जब इसने पूर्वी यूक्रेन में रूस समर्थक अलगाववादी ताकतों का समर्थन किया। शुरुआत में यह लगभग 5,000 लड़ाकों के साथ अफ्रीका और मध्य पूर्व में काम कर रहा था, तब से इसका काफी विस्तार हुआ है।

यूके के रक्षा मंत्रालय का अनुमान है कि यूक्रेन में उसके लगभग 50,000 लड़ाके हैं, जो इसे रूस-यूक्रेन संघर्ष में एक महत्वपूर्ण निभाते हैं। वैगनर भारी संख्या में भर्तियाँ करता है। यह भी कहा जा रहा है कि यूक्रेन की जेलों में बंद उसके लगभग 80% सैनिक बाहर निकल आए हैं।

रूस में भाड़े की सेना अवैध है। इसके बावजूद वैगनर समूह एक छद्म सैन्य संगठन के रूप में काम करता है और रूसी शहरों में खुलेआम भर्ती करता रहा है। वैगनर की गतिविधियाँ यूक्रेन से परे फैली हुई हैं। इसके भाड़े के सैनिक सीरिया, लीबिया, मध्य अफ़्रीकी गणराज्य और माली में संघर्षों में शामिल हैं। जहाँ पर इस समूह के सैनिक हैं, वहाँ उन पर हत्या, यातना और युद्ध अपराध के आरोप लगे हैं।