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नीतीश कुमार के ‘हृदय परिवर्तन’ से यशवंत सिन्हा भौंचक: कहा- जब मैं विपक्ष का राष्ट्रपति उम्मीदवार था तो फोन नहीं उठाया, आज बना रहे पॉलिटिकल ब्रिज

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार (23 जून, 2023) को राजधानी पटना में तमाम विपक्षी दलों की बैठक बुलाई, जिसमें जम्मू कश्मीर के उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती से लेकर तमिलनाडु के स्टालिन और पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी तक शामिल हुईं। इनके अलावा वामपंथी दलों के नेता, राहुल गाँधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और लालू यादव भी इसमें शामिल हुए। अब यशवंत सिंह ने विपक्षी एकता की इस बैठक पर निशाना साधा है।

यशवंत सिन्हा को संयुक्त विपक्ष ने 2022 में राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उन्हें द्रौपदी मुर्मू के हाथों बड़ी हार का सामना करना पड़ा। उस समय नीतीश कुमार भाजपा गठबंधन का हिस्सा थे और उन्होंने मिलने के लिए यशवंत सिन्हा को समय नहीं दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ टिप्पणियाँ कर के सुर्खियाँ बनाने वाले यशवंत सिन्हा को अब तक इसका मलाल है। राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने TMC से इस्तीफा भी दे दिया था।

यशवंत सिन्हा ने ट्वीट कर कहा, “ये केवल एक साल पहले की ही बात है, जब राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव हो रहा था और नीतीश कुमार ने मेरे फोन कॉल्स को रिसीव करना भी ठीक नहीं समझा था। अब वो विपक्षी एकता के झंडाबरदार बन गए हैं। ह्रदय परिवर्तन के अत्यंत महत्वपूर्ण 12 महीने।” एक अन्य ट्वीट में उन्होंने बिहार में हाल ही में पुलों के ध्वस्त होने की घटनाओं को लेकर भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को निशाना बनाया।

उन्होंने लिखा, “अब जब बिहार में नदियों पर बने वास्तविक पुल गिरते जा रहे हैं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के बीच ब्रिज बनाने का बीड़ा उठाया है। उन्हें शुभकामनाएँ। लेकिन, ये बिहार के लोगों का दुर्भाग्य है।” हाल ही में बिहार के किशनगंज में एक पुल ध्वस्त हो गया। इससे पहले सहरसा में 1700 करोड़ रुपए की लागत से बन रहा पुल दोबारा ध्वस्त हुआ था। सीएम नीतीश कुमार पर विपक्षी भाजपा भी आरोप लगा रही है कि वो अब सरकार चलाने में विफल साबित हो रहे हैं।

यशवंत सिन्हा ने जुलाई 2022 में भी बताया था कि नीतीश कुमार उनके फोन कॉल्स नहीं उठा रहे हैं। वो बतौर राष्ट्रपति उम्मीदवार समर्थन माँगने के लिए उन्हें कॉल कर रहे थे। ज्ञात हो कि अटल बिहारी वाजपेयी जब प्रधानमंत्री हुआ करते थे, तब उनकी कैबिनेट में नीतीश कुमार और यशवंत सिन्हा दोनों ही मंत्री थे। यशवंत सिन्हा ने कहा था कि वो बिहार से ही हैं, ऐसे में नीतीश कुमार द्वारा उनके कॉल्स न उठाना आश्चर्यजनक है।

पैर फिसला, खंभा पकड़ते ही लगा करंट, चिल्लाई- मेरे बच्चों को हटाओ: साक्षी आहूजा के साथ नई दिल्ली रेलवे स्टेशन की पार्किंग में क्या हुआ था

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर रविवार (25 जून 2023) को साक्षी आहूजा नाम की एक महिला की करंट लगने से मौत हो गई। मृतका दिल्ली के प्रीत विहार इलाके की रहने वाली थीं। घटना के दिन 35 वर्षीया साक्षी परिवार के साथ छुट्टियाँ मनाने के लिए जा रही थीं। लेकिन, स्टेशन के पास उनका पाँव लड़खड़ा गया और उन्होंने संभलने के लिए एक खंभा पकड़ा। इस पिलर में भारी बरसात और जलभराव के कारण करंट आ रहा था। जब साक्षी ने इसे पकड़ा तो उन्हें बहुत जोर झटका लगा। इसके बाद वह नीचें गिर गईं और फिर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस ने इस मामले में केस को दर्ज करके अपनी जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साक्षी के पति टोयटा कम्पनी में नौकरी करते हैं। साक्षी खुद एक स्कूल में टीचर थीं। दोनों के 2 बच्चे हैं। इनमें एक 9 साल का बेटा और 7 साल की बेटी है। साक्षी ने पूरे परिवार के साथ अपने एक रिश्तेदार के घर चंडीगढ़ घूमने का प्लान बनाया था। इन्हीं तैयारियों के चलते 25 जून को साक्षी, उनके बच्चों, माता-पिता व बहन माधवी का रिजर्वेशन वन्दे भारत एक्सप्रेस में हुआ था। घटना के दिन यह परिवार नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुँचा और पहाड़गंज की तरफ से एंट्री करने लगा।

साक्षी को छोड़ने उनके 2 भाई अपनी कारों से आए थे जो परिवार को उतार कर पार्किंग की तरफ चले गए। इधर बरसात की वजह से प्लेटफॉर्म जाने वाले रास्ते पर पानी भरा था। इसी की वजह से साक्षी सड़क के बजाय डिवाइडर पर चढ़ कर आगे बढ़ रहीं थीं। जैसे ही साक्षी प्रीपेड टैक्सी बूथ के पास पहुँची उनका पैर सड़क पर बिछे बिजली के तार पर पड़ा।

बताया जा रहा है कि यह तार एक बिजली के खम्बे से कनेक्टेड था जिसे साक्षी ने लड़खड़ाते हुए गिरने से बचने के लिए पकड़ा था। तार में करंट था जिसकी वजह से साक्षी जमीन पर गिर कर तड़पने लगीं। साक्षी की बहन माधवी उन्हें बचाने के लिए दौड़ीं तो उन्हें भी करंट लगा।

मृतका की रिश्तेदार अंजू ने बताया कि करंट लगने के बाद काफी देर तक साक्षी जमीन पर पड़ी रहीं। वहीं अपने बच्चों को पीछे ले जाने के लिए कहा। इस दौरान कुछ टैक्सी वालों ने साक्षी को बचाने का प्रयास किया तो उन्हें भी झटके लगे।

थोड़े ही समय में पुलिस मौके पर पहुँची। पुलिस ने साक्षी और माधवी को अस्पताल में भर्ती करवाया। डॉक्टरों ने साक्षी को मृत घोषित कर दिया। वहीं माधवी को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। मृतका के परिजनों ने पुलिस पर देरी से पहुँचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “हमें किसी भी तरह का मुआवजा नहीं चाहिए, मुआवजे से हमारी बेटी वापस नहीं आ जाएगी। हमें हमारी बेटी ही वापस चाहिए।” साक्षी के देवर ने कहा कि उनकी भाभी ने ही बाकी सदस्यों की जान बचाई। घटनास्थल पर टैक्सियों की पार्किंग होती है।

हालाँकि पुलिस ने आरोपों का खंडन करते हुए तत्काल मौके पर जाने और अस्पताल में भर्ती किए जाने की बात कही है। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। पुलिस CCTV फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जमा कर रही है। जहाँ साक्षी को करंट लगा है वहाँ से कुछ नए लगाए गए खम्बों को भी बिजली की सप्लाई जाती है। पुलिस का कहना है कि जाँच के दौरान स्टेशन ने मेंटिनेंस विभाग के कर्मियों को बुला कर सवाल-जवाब किया जाएगा।

देश के सारे प्रधानमंत्री देखे, खुद के 14 बच्चे; फिर भी ‘बेटा PM मोदी’ को देंगी 25 बीघा जमीन: 100 साल की माँगीबाई का Video वायरल

माँगीबाई तंवर की उम्र करीब 100 साल है। वह मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के छोटे से गाँव हरिपुरा जागीर में रहती हैं। 14 बच्चों की इस माँ को सबसे प्रिय अपना वह ‘बेटा’ है जो इस देश के प्रधानमंत्री हैं। यही कारण है कि वह अपनी 25 बीघा जमीन पीएम मोदी को देना चाहती हैं।

दरअसल, मोदी सरकार के 9 साल पूरे होने पर बीजेपी कार्यकर्ता विकासकारी योजनाओं के पत्रक बाँटने 22 जून 2023 को हरिपुरा जागीर गाँव पहुँचे थे। इसी दौरान जब वे माँगीबाई के घर पहुँचे तो उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि पीएम मोदी का पत्रक हो तो देना, किसी अन्य व्यक्ति का हो तो उन्हें पत्रक नहीं चाहिए। बीजेपी कार्यकर्ताओं ने माँगीबाई तंवर से हुई बातचीत का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। अब यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

वीडियो वायरल होने के बाद आजतक ने माँगीबाई से बात की है। इस बातचीत में माँगीबाई ने कहा है कि पीएम मोदी उनके बेटे जैसे हैं। उन्होंने ही गेहूँ, चावल, खाद-बीज दिया है। फसल खराब होने पर मुआवजा देते हैं। बीमार पड़ने पर इलाज कराते हैं। उन्हें सरकार ने तीर्थ यात्रा करवाई। रहने के लिए घर दिया और विधवा पेंशन भी मिल रहा है।

माँगीबाई ने यह भी कहा है कि उन्होंने पीएम मोदी को टीवी पर तो देखा है, लेकिन आज तक मिल नहीं पाईं हैं। उन्होंने पीएम को आमने-सामने नहीं देखा है। माँगीबाई पीएम मोदी मिलकर उन्हें आशीर्वाद देकर पेंशन बढ़ाने की माँग करना चाहती हैं। माँगीबाई ने बताया कि उनके 14 बच्चे हैं। 12 बेटियाँ और 2 बेटे। लेकिन उनके लिए सबसे प्रिय बेटा पीएम मोदी ही हैं। उनके 14 बेटे जितने काम आ रहे हैं उससे कहीं अधिक तो पीएम मोदी उनके काम आ रहे हैं। इसलिए वह अपनी 25 बीघा जमीन पीएम मोदी को देना चाहती हैं।

माँगीबाई तंवर का कहना है कि पीएम मोदी ही सबको पाल-पोष रहे हैं। उन्होंने अपने घर पर पीएम मोदी की फोटो लगा रखी है। हर रोज सुबह उठने के बाद वह प्रधानमंत्री की तस्वीर देखती हैं। माँगीबाई अपने बेटों से प्रधानमंत्री मोदी को ही वोट देने के लिए कहती हैं। उनका यह भी कहना है कि सबको कोरोना से बचाने में पीएम मोदी का ही हाथ है। प्रधानमंत्री लोगों को भला करते-करते बूढ़े हो गए हैं।

न मुस्लिम बनी, न किया निकाह: हिरोइन ने वायरल तस्वीरों का बताया ‘सच’, कहा- राम मेरे बाॅयफ्रेंड, फैजान अंसारी को ज्यादा जानती भी नहीं

‘गंदी बात’ फेम गहना वशिष्ठ ने उनके धर्मांतरण और निकाह की खबरों पर स्पष्टीकरण दिया है। गहना ने कहा है कि पिछले दिनों जो फैजान के साथ उनकी तस्वीर देखकर अंदाजे लगाए गए थे, वो गलत थे। उन्होंने कहा कि वायरल होती फोटो वेब सीरीज की शूटिंग के वक्त की है। उन्होंने किसी से कोई शादी नहीं की है और फैजान को तो वो सिर्फ शूट के दौरान मिलीं।

अपने इंस्टा पोस्ट में गहना ने लिखा, “मैं गहना वशिष्ठ यह स्पष्ट कर दूँ कि मेरी कभी किसी के साथ शादी नहीं हुई है। ये सिर्फ एक वेब सीरीज शूट था। इसके अलावा कुछ भी नहीं। मैं यह भी स्पष्ट कर दूँ कि मैं फैजान को बहुत ज्यादा जानती ही नहीं हूँ। उनके साथ शूट के लिए वो मेरी दूसरी मुलाकात थी और अपनी बर्थडे पार्टी में हम तीसरी बार मिले थे। सच बताऊँ तो मुझे उनका पूरा नाम तक नहीं पता है। वो कहाँ से ताल्लुक रखते हैं और बाकी सब चीजें।”

अपने पोस्ट में एक्ट्रेस ने खुलासा किया कि उनका लंबे समय से एक ही ब्वॉयफ्रेंड है और उसका नाम ‘राम’ है। ऐसे में किसी और से शादी करने का सवाल ही नहीं है, वो भी ऐसे शख्स से जिसे वो जानती तक नहीं।

बता दें कि 11 जून को खबर आई थी कि अभिनेत्री गहना वशिष्ठ ने अपने बॉयफ्रेंड फैजान अंसारी के साथ निकाह कर लिया है। खबरों में ही बताया गया था पिछले कई दिनों से दोनों एक-दूसरे को डेट कर रहे थे। हालाँकि उस समय कोई आधिकारिक बयान नहीं आया था लोगों ने फोटो देखकर ही कयास लगाए थे।

गौरतलब है कि गहना वशिष्ठ फ़िलहाल पॉर्न फिल्मों की शूटिंग और उन्हें बेचने के मामले में जमानत पर बाहर हैं। गहना वशिष्ठ का असली नाम ‘वंदना तिवारी’ है। उन्हें पॉर्न रैकेट केस में मुंबई के वर्ली से 2021 में गिरफ्तार किया गया था। उन पर 3 अन्य पुरुषों के साथ मिल कर गैंगरेप के भी आरोप हैं। पीड़िता ने कहा था कि उसे जबरन पॉर्न फिल्म शूट करने को मजबूर किया गया, जिसकी निर्देशक गहना वशिष्ठ थीं। बाद में सफाई देते हुए अभिनेत्री ने कहा था कि बोल्ड और इरोटिक फिल्मों को पॉर्न नहीं कहा जा सकता।

दलित परिवार की शादी में घुस गए मुस्लिम, महिलाओं संग जबरन नाचने लगे… अभद्रता करने से रोका तो बकने लगे गालियाँ, छतों से बरसाए पत्थर

राजस्थान के अलवर जिले में एक दलित परिवार के घर शादी के कार्यक्रम में मुस्लिम समुदाय के युवकों द्वारा हंगामे की खबर है। आरोप है कि शादी के कार्यक्रम में जबरन बाइक ले जाने और महिलाओं के साथ अभद्रता करने से रोकने पर वैवाहिक कार्यक्रम पर पत्थरबाजी की गई है। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर हालात को काबू किया। विवाद कर रहे लगभग 1 दर्जन उपद्रवियों को हिरासत में लिए जाने की खबर है। घटना शनिवार (24 जून, 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला अलवर जिले के थाना क्षेत्र रामगढ़ का है। यहाँ शनिवार की रात खोह गाँव में दलित समुदाय के बाबूलाल मेघवाल की बेटी की शादी थी। इस दौरान बज रहे DJ पर बिंदोरी का कार्यक्रम चल रहा था। आरोप है कि इस बीच कुछ मुस्लिम युवक भी वहाँ पहुँच गए। उन्होंने महिलाओं के साथ नाचना शुरू कर दिया जिसका दुल्हन के घर वालों ने विरोध किया। एक पीड़ित जय किशन ने बताया कि उपद्रवी बाइकों पर सवार हो कर आए थे जो तेज रफ्तार में शादी के कार्यक्रम में घुस गए।

बताया जा रहा है कि खुद को मना करने से आरोपित नाराज हो गए। उन्होंने लड़की के घर वालों को देख लेने की धमकी देते हुए अपने कुछ अन्य साथियों को बुला लिया। इस दौरान पीड़ितों को गंदी-गंदी गालियाँ दी गईं और जातिसूचक शब्द बोले गए। इस बीच उपद्रवी छतों पर चढ़ गए और उन्होंने शादी के कार्यक्रम में मौजूद लोगों पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। घटना में कुछ लोग घायल हुए हैं जिनका इलाज करवाया गया है। इस मामले की जानकारी मिलते ही मौके पर भारी पुलिस बल पहुँचा।

पुलिस ने 5 आरोपितों पर शांतिभंग की धारा 151 के तहत कार्रवाई की है। वहीं कुल लगभग 1 दर्जन लोगों को हिरासत में लिए जाने की सूचना है। अन्य आरोपितों पर विभिन्न धाराओं के साथ SC-ST एक्ट में भी कार्रवाई की गई है। पीड़ित जयकिशन के मुताबिक, उन लोगों के साथ इस से पहले भी 2-3 बार उन लोगों के साथ मारपीट की घटनाएँ हुई हैं लेकिन वो सब खुद को समझा कर चुपचाप सह लेते थे। फ़िलहाल पुलिस पूरे मामले की जाँच कर रही है।

मनोज पर चढ़ाई कार, इलाज के बहाने उठाकर ले गए और नहर में फेंक दियाः मोहम्मद दिलखुश और मोहम्मद उस्मान गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से 25 जून 2023 (रविवार) को मोहम्मद दिलखुश और मोहम्मद उस्मान नाम के 2 व्यक्तियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इन दोनों पर आरोप है कि इन्होंने इसी माह 22 जून को मनोज कुमार नाम के एक मजदूर को पहले अपनी कार से एक्सीडेंट में घायल किया फिर उसे इलाज के बहाने गाड़ी में बिठाया और बाद में उसकी बॉडी नहर में फेंक दी। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त कार भी बरामद कर ली है। साथ ही मामले की जाँच की जा रही है।

यह मामला मुजफ्फरनगर जिले के थानाक्षेत्र छपार का है। 22 जून 2023 को मनोज की पत्नी ने पुलिस थाने में शिकायत दी थी कि उसका पति अभी घर नहीं लौटा है। शिकायत के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी। आखिरकार पुलिस को मोहम्मद दिलखुश और मोहम्मद उस्मान का पता चला, जिसके बाद उन्हें खोजा गया और उनसे सवाल-जवाब हुए।

पूछताछ में मोहम्मद दिलखुश ने बताया कि उसके पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है। मगर 22 जून को वह अपनी स्विफ्ट गाड़ी (उत्तराखंड नंबर UK 07 DU 2840 वाली) चलाकर मुजफ्फरनगर से रोहना जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में गाड़ी मनोज से टकरा गई। घटना में मनोज गंभीर रूप से घायल हो गया। दिलखुश ने घायल मनोज को अपने वाहन में पीछे बैठाया लेकिन बीच रास्ते में उसकी मौत हो गई।

मनोज को मृत देख दिलखुश ने घटना की जानकारी अपने साथी मोहम्मद उस्मान को दी। इसके बाद उस्मान आया। दोनों ने मिलकर कोई सुनसान जगह खोजी और फिर मनोज के शव को चरथावल के पास नहर में फेंक दिया।

पुलिस के मुताबिक मनोज के शव को 24 घंटे बाद नहर से बरामद किया गया। खराब मौसम और भारी बारिश के चलते मनोज के शव को तलाशने में दिक्कत आई। पुलिस की मौजूदगी में गोताखोरों द्वारा शव के खोजबीन की वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।

पुलिस के मुताबिक मामले में जाँच और अन्य कानूनी कार्रवाई की जा रही है। दोनों की गिरफ्तारी के साथ घटना में प्रयोग हुई स्विफ्ट कार भी पुलिस ने बरामद कर ली है।

‘लिव इन हराम, निकाह से पहले किस पर 100 कोड़े’: हाई कोर्ट ने ‘इस्लाम’ का दिया हवाला, हिंदू लड़की+मुस्लिम लड़का को राहत देने से इनकार

निकाह से पहले किसी तरह का यौन संबंध, यहाँ तक कि चूमना और छूना भी हराम है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे एक जोड़े (हिंदू लड़की+मुस्लिम लड़का) की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही। अदालत ने इस्लाम का हवाला देते हुए जोड़े को राहत देने से इनकार कर दिया।

लाइव लाॅ की रिपोर्ट के अनुसार हाई कोर्ट ने कहा, “इस्लाम में निकाह से पहले या निकाह से इतर यौन संबंधों की इजाजत नहीं है। वास्तव में निकाह से पहले किसी भी प्रकार का यौन, वासनापूर्ण, स्नेहपूर्ण कार्य मसलन चूमना, छूना, घूरना वगैरह इस्लाम में हराम है। इन्हें जिना का हिस्सा माना जाता है।” जस्टिस संगीता चंद्रा और जस्टिस नरेंद्र कुमार जौहरी की बेंच ने कहा, “कुरान में व्यभिचार के लिए अविवाहित पुरुष और महिला के लिए सौ कोड़े की सजा है। साथ ही विवाहित पुरुष और महिला के लिए ‘सुन्नत’ के अनुसार पत्थर मारकर हत्या करने की सजा है।”

दरअसल लड़की की माँ अपनी बेटी के संबंधों के विरोध में थी। उनकी शिकायत पर पुलिस ने लड़का और लड़की के खिलाफ FIR दर्ज की थी। इसको चुनौती देते हुए लड़की ने अदालत में याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने इस्लाम का हवाला देते हुए इस संबंध को मान्यता देने से इनकार कर दिया। याचिका में लड़की ने पुलिस पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस केस में याचिकाकर्ता लखनऊ के हसनगंज थानाक्षेत्र की रहने वाली 29 वर्षीया एक लड़की है। उसने मोहम्मद रिज़वान नाम के एक 30 वर्षीय युवक के साथ खुद को लिव इन रिलेशनशिप में बताया था। लड़की का आरोप था कि उनकी माँ दोनों के रिश्ते से खुश नहीं हैं। लड़की की माँ ने पुलिस में FIR दर्ज करवा के आरोप लगाया था कि पुलिस उन्हें और रिज़वान को प्रताड़ित कर रही है। याचिका में लड़की ने खुद को बालिग और अपने निर्णय को पूरी तरह से सोच-समझ कर लिया गया बताया था।

इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा और न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार जौहरी ने इसे एक सामाजिक परेशानी बताया। उन्होंने कहा कि इसके लिए याचिका दाखिल करने की जरूरत नहीं थी। कुरान का हवाला देते हुए न्यायाधीशों ने कहा कि इस्लाम में निकाह से पहले सेक्स, छूना और यहाँ तक कि किसिंग भी हराम मानी जाती है। अदालत द्वारा बताया गया कि इस्लाम में एक्स्ट्रा मैरिटल सेक्स और पैरामेट्रियल सेक्स पर पुरुष को 100 कोड़े और महिला को मौत की सजा का प्रावधान है।

कोर्ट ने इस्लाम में शादी से पहले बनाए गए संबंध को ‘जिना’ बताया है। जिना का जिक्र कुरान में है। अपनी टिप्पणी में हाई कोर्ट ने यह भी बताया कि याचिकाकर्ता ने कहीं भी इस बात का जिक्र नहीं किया है कि दोनों निकट भविष्य में शादी करने वाले हैं। याचिकाकर्ता पक्ष कोर्ट में स्पष्ट रूप से यह भी साबित नहीं कर पाया कि पुलिस द्वारा उनका उत्पीड़न किया जा रहा है। अदालत ने याचिकाकर्ता को यह भी सलाह दी कि अगर उन्हें परिजनों से किसी प्रकार का खतरा है तो वो पुलिस में आवेदन दे सकते हैं।

केरल के बड़े यूट्यूबर निकले टैक्स चोर: आयकर विभाग की छापेमारी से ₹25 करोड़ के गबन का खुलासा, ₹2 करोड़ तक की सालाना कमाई

केरल के कोच्चि और कोझिकोड इलाके में लोकप्रिय यूट्यूबर्स के घरों और कार्यालयों पर आयकर (आईटी) विभाग ने छापेमारी की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आईटी डिपार्टमेंट ने शुक्रवार को दस पॉपुलर यूट्यूबर्स पर छापा मारा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को यूट्यूबर्स द्वारा इकट्ठा किए जा रहे रेवेन्यू की कोई जानकारी नहीं थी। इसलिए विभाग ने इस रेड को एक सर्वे के तौर पर किया ताकि वो आर्थिक संबंधी जानकारी जुटा सकें।

बताया जा रहा है कि इस रेड का मकसद यूट्यूबर्स के बीच इनकम टैक्स रूल्स को लेकर जानकारी देना है ताकि कर गबन करने के अपराध में उनपर कोई एक्शन न हो। इस रेड से विभाग को जानकारी हुई कि करीबन 25 करोड़ का टैक्स चोरी हुई। कुछ यूट्यूबर्स तो ऐसे भी थे जिन्होंने बिलकुल टैक्स नहीं मिला। ऐसे यूट्यूबर्स को विभाग द्वारा नोटिस जारी किया गया है।

बता दें कि केरल में जिन यूट्यूबर्स के घर आयकर विभाग ने छापेमारी की है। इनमें एक एक्सट्रेस और टीवी होस्ट पियरले माने भी हैं। पियरले के ऑनलाइन 2.5 मिलियन से अधिक सब्सक्राइबर्स हैं। इनके अलावा व्लॉगर्स सुजीत भक्तन, अर्जौ, जयराज जी नाथ, अखिल और अन्य कुछ गेमर्स के आवासों पर भी टीम ने छापा मारा गया। अधिकारियों को छापे के दौरान यह पता चला कि यूट्यूबर्स अपनी वीडियोज के जरिए 1 करोड़ से 2 करोड़ रुपए तक कमा रहे हैं।

वहीं सोशल मीडिया पर ये खबर आने के बाद कुछ लोगों ने इसे 2024 के चुनावों से जोड़ दिया है। कहा जा रहा है कि जहाँ तक है 2024 चुनावों कनेक्शन इन इलेक्शन से जुड़ा हो सकता है।

जंतर-मंतर वाले पहलवानों का आंदोलन खत्म, साक्षी-विनेश ने सोशल मीडिया से लिया ब्रेक: कहा- अब कोर्ट में बृजभूषण से लड़ेंगे

बृजभूषण सिंह के खिलाफ चल रहे पहलवानों के प्रदर्शन पर अब विराम लग गया है। महिला पहलवान विनेश फोगात और साक्षी मलिक ने नोट जारी करते हुए बताया कि चूँकि सरकार ने अपनी कही बात पर अमल किया और मामले में चार्जशीट दाखिल हुई, तो इससे अब उन लोगों को थोड़ी राहत आई है इसलिए वे इस लड़ाई को आगे कोर्ट में लड़ेंगे। इसी के साथ दोनों पहलवानों ने ये भी कहा है कि वो कुछ दिन के लिए सोशल मीडिया से ब्रेक ले रही हैं।

विनेश और साक्षी द्वारा किए गए ट्वीट में लिखा गया, “थोड़े दिन के लिये सोशल मीडिया से ब्रेक ले रही हूँ.. आप सबका धन्यवाद।”

उल्लेखनीय है कि विनेश फोगाट ने 26 जून को नोट जारी करते हुए बताया, “सरकार के साथ 7 जून को हुई वार्ता में सरकार ने जो पहलवानों के साथ वादे किए उन पर अमल करते हुए सरकार ने उस कड़ी में महिला कुश्ती खिलाड़ियों द्वारा महिला उत्पीड़न एवं यौन शोषण के संबंध में की गई शिकायतों के मामले में छह महिला पहलवानों द्वारा दर्ज FIR की दिल्ली पुलिस जाँच पूर्ण करके 15 जून को कोर्ट में चार्जशीट पेश कर दी गई है। इस केस में पहलवानों की कानूनी लड़ाई सड़क की जगह कोर्ट में जारी रहेगी जब तक न्याय नहीं मिल जाता। “

नोट में आगे कहा गया कि कुश्ती संघ के सुधार के संबंध में नई कुश्ती संघ के चुनाव की प्रक्रिया वादे के अनुसार शुरू हो गई है। जिसके चुनाव 11 जुलाई को होना तय है के संबंध में सरकार ने जो वादे किए हैं उस पर अमल किए जाने का भी इंतजार रहेगा।

कुश्ती महासंघ के चुनाव नहीं होंगे 11 जुलाई को

बता दें कि भले ही पहलवानों के पोस्ट में WFI के चुनावों के लिए 11 जुलाई तारीख बताई जा रही है। लेकिन ताजा जानकारी यह है कि गुवाहाटी हाईकोर्ट ने इसी साल 11 जुलाई को होने वाले कुश्ती महासंघ के चुनाव पर रोक लगा दी है

असम कुश्ती संघ ने इन चुनावों की तारीख टालने की याचिका दायर की थी। खेल मंत्रालय और भारतीय कुश्ती महासंघ को पार्टी बनाते हुए असम कुश्ती संघ ने खुद को भारतीय कुश्ती संघ का सदस्य बनने का हकदार बताया था। याचिका में बताया गया था कि उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में 5 नवम्बर, 2014 को भारतीय कुश्ती महासंघ की जनरल काउंसिलिंग की मीटिंग हुई थी। इस मीटिंग में WFI कार्यकारी समिति ने असम कुश्ती संघ को अपना संबद्ध सदस्य बनने योग्य बताया था।

याचिका में आगे बताया गया है कि साल 2014 में पास हुए प्रस्ताव में असम कुश्ती संघ को WFI का मेंबर बनाने की सहमति के बावजूद आज तक उस पर अमल नहीं हुआ है। असम कुश्ती संघ का यह भी कहना है कि जब तक वो WFI से संबद्ध नहीं है तब तक वो निर्वाचक मंडल में अपना कोई प्रतिनिधि नॉमिनेट नहीं कर सकते। इस आधार पर असम कुश्ती संघ ने 11 जुलाई को प्रस्तावित भारतीय कुश्ती महासंघ के चुनाव पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने खेल मंत्रालय, भारतीय ओलंपक संघ और WFI को भी इस बावत निर्देश जारी किए हैं।

बच्चों के सामने महिलाओं ने नंगी होकर किया डांस, किस भी किया: LGBTQ प्राइड मार्च के नाम पर अमेरिका में अश्लीलता

एलजीबीटीक्यू यानी कि लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल, ट्रांसजेंडर और क्वीर (LQBTQ) कम्युनिटी प्राइड मंथ मना रही है। इस दौरान ये लोग दुनियाभर के अलग-अलग हिस्सों में ‘प्राइड परेड’ निकालते और पार्टी करते हैं। अमेरिका के न्यूयॉर्क में प्राइड पार्टी के दौरान महिलाएँ अर्द्धनग्न अवस्था में नाचते-गाते दिखाई दीं। बड़ी बात यह रही कि यह सब बच्चों के सामने हो रहा था।

दरअसल, न्यूयॉर्क के वाशिंगटन स्क्वायर पार्क में प्राइड परेड आयोजित की गई थी। इस परेड के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। वायरल वीडियोज में पुरुष और महिलाएँ मस्ती करते दिखाई दे रहे हैं। वहीं, कुछ वीडियो में महिलाएँ टॉपलेस दिखाई दे रहीं हैं। इससे उनके ब्रेस्ट खुले तौर पर नजर आ रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि अर्धनग्न महिलाओं के बीच छोटे-छोटे बच्चे भी नजर आ रहे हैं।

इसको लेकर नेटिजन्स कड़ी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि बच्चों के सामने ऐसी हरकतें करने से उनकी मानसिक स्थिति पर प्रभाव पड़ सकता है। एक पत्रकार ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, “यह न्यूयॉर्क शहर है। यहाँ के वाशिंगटन स्क्वायर पार्क में कई लोग नग्न होकर पार्टी कर रहे हैं। यह सब बच्चों के सामने हो रहा है। व्हाट द फ़*”

एक अन्य व्यक्ति ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन पर निशाना साधते हुए लिखा, “LGBTQ कम्युनिटी के लोग वाशिंगटन स्क्वायर पार्क में बच्चों के सामने किस और डांस कर रहे हैं। आधिकारी खुले तौर पर ऐसा क्यों होने दे रहे हैं? इसके बाद भी बायडेन कहते हैं कि ये लोग अमेरिका में ‘प्रताड़ित’ हैं।”