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जदयू अध्यक्ष के भोज में मटन खाने पहुँचे महागठबंधन कार्यकर्ता, लेकिन मिलीं लाठियाँ: पुलिस ने खदेड़-खदेड़ कर पीटा

बिहार की सत्ताधारी पार्टी जदयू के अध्यक्ष ललन सिंह की पार्टी में बवाल हुआ है। कार्यकर्ताओं के बीच मटन को लेकर मारपीट की भी खबर है। भगदड़ के बीच स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा। इस दौरान सदर डीएसपी भी घायल हुए हैं।

दरअसल, जदयू अध्यक्ष और मुंगेर सांसद ललन सिंह ने मुंगेर के पोलो मैदान में महागठबंधन के कार्यकर्ताओं के लिए ‘महाभोज सम्मान’ का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम में मटन खाने के लिए महागठबंधन कार्यकर्ता पहुँचे हुए थे। लेकिन पहली लाइन की 2000 सीट फुल हो चुकीं थी। ऐसे में मटन के लिए लालायित कार्यकर्ता पंडाल में घुसने की कोशिश कर रहे थे। तभी कार्यकर्ताओं के बीच मटन को लेकर बहस शुरू हो गई।

इसके बाद मामला बिगड़ता चला गया और बात मारपीट तक पहुँच गई। इस दौरान महागठबंधन के कार्यकर्ताओं ने जेडीयू के प्रखंड अध्यक्ष के साथ भी धक्का-मुक्की की। हालाँकि ,मामला बिगड़ता देख पुलिस ने सक्रियता दिखाई और उपद्रव कर रहे कार्यकर्ताओं को खदेड़ना शुरू कर दिया। पुलिस की सख्ती देख महागठबंधन कार्यकर्ताओं ने वहाँ से भागने में ही अपनी भलाई समझी। लोग गिरते-पड़ते वहाँ से भागते नजर आए। इस दौरान सदर डीएसपी राजेश कुमार सिन्हा की उंगलियों में चोट लगने की बात कही जा रही है।

उधर अपनी पार्टी में कार्यकर्ताओं का हँगामा बढ़ता देख ललन सिंह अपने समर्थकों के साथ पंडाल पर पहुँच गए। इसके बाद उन्होंने हाथ जोड़कर कार्यकर्ताओं से बात की। साथ ही उन्होंने वहाँ आए लोगों का धन्यवाद भी ज्ञापित किया। बता दें कि इस ‘महाभोज सम्मान’ में 35 हजार लोगों के खाने की व्यवस्था और झारखंड से बकरे मँगाने की बात कही जा रही है।

दरभंगा में भी भिड़े थे JDU कार्यकर्ता, मंच छोड़ चले गए ललन सिंह

बता दें कि इससे पहले शनिवार (13 मई 2023) को दरभंगा में आयोजित एक कार्यक्रम में भी जदयू कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए थे। दरअसल, पार्टी के कार्यक्रम में मंत्री संजय झा और जदयू नेता अली अशरफ फातमी के समर्थक अपने-अपने नेता के समर्थन में नारेबाजी करते रहे थे। दोनों के समर्थकों को समझाने की कोशिश की गई। लेकिन वे शांत होने का नाम नहीं ले रहे थे। इसके बाद ललन सिंह मंच छोड़कर वहाँ से जाने लगे। पार्टी नेताओं के लाख मनाने के बाद भी वह नहीं माने और अपनी कार में बैठ रवाना हो गए।

केरल में बिहार के दलित मजदूर की पीट-पीट कर हत्या, हाथ बाँध कर घंटों लाठी से मारा: जनजातीय समाज के युवक की भी हुई थी मॉब लिंचिंग

केरल के मलप्पुरम जिले में चोरी के आरोप में भीड़ ने एक युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी। मृतक की पहचान राजेश माँझी के रूप में हुई। आरोप है कि लोगों ने चोरी के शक में उसे पकड़ा और फिर बाँधकर पिटाई की। पुलिस को आरोपितों के फोन से पिटाई के फोटोज मिले हैं। फिलहाल इस मामले में 9 लोगों को हिरासत में लिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मृतक राजेश माँझी बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के माधवपुर निवासी था। वह मजदूरी के लिए बिहार से केरल गया था। पुलिस का कहना है कि शनिवार (13 मई, 2023) रात को आरोपितों ने राजेश को एक घर के अंदर से पकड़ा था। इसके बाद उसे बाँधकर घण्टों तक पिटाई की।

इसके बाद रास्ते में छोड़कर भाग गए। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुँची, जहाँ राजेश बेहद गंभीर हालत में मिला। पुलिस उसे लेकर स्थानीय मेडिकल कॉलेज पहुँची। लेकिन, इलाज शुरू होने से पहले ही राजेश ने दम तोड़ दिया। पोस्टमार्टम में राजेश माँझी की हड्डियाँ टूटी हुई मिली हैं।

इस घटना पर मलप्पुरम जिला पुलिस प्रमुख सुजीत दास ने कहा है, “पहले तो आरोपितों ने पीड़ित के हाथ बाँध दिए। इसके बाद लाठी और प्लास्टिक के पाइप से उस पर हमला किया। हमने आरोपितों के फोन से तस्वीरों सहित सबूत हासिल किए हैं। आरोपितों ने सीसीटीवी फुटेज सहित अन्य सबूतों को नष्ट करने की कोशिश की।”

कोंडोट्टी एएसपी बीवी विजया भरत रेड्डी ने कहा है, “हिरासत में लिए गए व्यक्तियों का दावा है कि चोरी के असफल प्रयास के बाद प्रवासी कर्मचारी एक घर की पहली मंजिल से गिर गया। युवक के घर से गिरने के बाद उन्होंने उसे पकड़ लिया और करीब डेढ़ घंटे तक मारपीट करते रहे। इस बारे में घर के मालिक से पूछताछ कर रहे हैं।” रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि कथित तौर पर आरोपितों ने राजेश को बाँधकर उसके साथ करीब दो घंटे तक मारपीट करने की बात कबूल ली है।

बता दें कि इसी तरह का मामला साल 2018 में भी सामने आया था। तब पलक्कड़ जिले के रहने वाले मधु नाम के एक जनजातीय व्यक्ति को एक भीड़ ने दुकान में चोरी का आरोप लगाते हुए पकड़ लिया था। इसके बाद वहाँ मौजूद लोगों ने मधु को बुरी तरह से पीट दिया। कुछ देर पहुँची पुलिस ने मधु को कस्टडी में लिया लेकिन तब तक पीड़ित की हालत काफी खराब हो चुकी थी। हॉस्पिटल ले जाते समय रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।

मधु का पोस्टमार्टम करवाया गया तो उसके पूरे शरीर पर पिटाई के निशान मिले। खास तौर पर सिर और पसलियों पर वार किया गया था। मौत की वजह आंतरिक रक्तस्राव बनी थी। जनजातीय युवक की मौत ने न केवल बल्कि देशभर में चर्चा का विषय बन गया था। इस मामले में कोर्ट ने अप्रैल 2023 में शमशुद्दीन, मराइकर, नजीब, हरीश समेत 14 आरोपितों को दोषी करार दिया है।

(अपडेट: इस मामले में नौ लोगों को पकड़ा गया है। सभी आरोपित मुस्लिम समुदाय के हैं। इस लिंक पर क्लिक कर आप विस्तार से खबर पढ़ सकते हैं)

‘The Kerala Story’ ने 10 दिन में दुनिया भर में कमाए ₹150 करोड़, इस मामले में ‘पठान’ को भी पीछे छोड़ा: 2023 की पहली सुपर-डुपर हिट फिल्म

फिल्म ‘The Kerala Story’ ने 10 दिनों में लगभग 136 करोड़ रुपए का कारोबार कर लिया है। फिल्म का दूसरा वीकेंड काफी शानदार रहा। शुक्रवार (12 मई, 2023) को इसने 12.35 करोड़ रुपए का कारोबार किया, वहीं शनिवार को इसका बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 19.50 करोड़ रुपए रहा। ये भारत में नेट कमाई के आँकड़े हैं। रविवार को फिल्म 23 करोड़ रुपए से भी अधिक कमा सकती है और इस तरह 10 दिनों में 136 करोड़ रुपए के आँकड़े को इसने पार कर लिया है।

अगर दुनिया भर की कमाई की बात करें तो इसने 150 करोड़ रुपए के आँकड़े को पार कर लिया है। फिल्म उसी तरह ट्रेंड कर रही है, जिस तरह ‘द कश्मीर फाइल्स’ और ‘कांतारा’ ब्लॉकबस्टर हुई थी। ‘द केरल स्टोरी’ को सुपर-डुपर हिट का तमगा मिल गया है और फिल्म ब्लॉकबस्टर की श्रेणी में भी आ सकती है। इसने कमाई के मामले में शाहरुख़ खान की ‘पठान’ को भी पीछे छोड़ दिया है। ‘पठान’ ने 117.28% का प्रॉफिट कमाया था।

‘पठान’ का बजट 294 करोड़ रुपए के आसपास था, जबकि ‘The Kerala Story’ का कुल बजट इसका लगभग 10वाँ हिस्सा, अर्थात 30 करोड़ रुपए है। इस तरह इसने अब तक प्रतिशत लाभ के मामले में ‘पठान’ को काफी पीछे छोड़ दिया है। 10 दिनों में ‘द केरल स्टोरी’ ने 283% का लाभ कमा कर सबको चौंका दिया है। फिल्म का नेट प्रॉफिट 106 करोड़ रुपए के आसपास है। अभी ‘The Kerala Story’ और भी ज्यादा कमाई करेगी।

कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में फिल्म देर से रिलीज हुई है, ऐसे में वहाँ के आँकड़े आने अभी बाकी हैं। फिल्म का निर्माण विपुल अमृतलाल शाह ने किया है, जबकि सुदीप्तो सेन इसके निर्देशक हैं। वहीं अदा शर्मा ने इसमें मुख्य किरदार निभाया है। अदा शर्मा ने फिल्म को रिलीज की अनुमति देने के लिए सेंसर बोर्ड और सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद दिया। उन्होंने ज्यादा से ज्यादा युवा लड़कियों को ये फिल्म दिखाने की वकालत की। ‘The Kerala Story’ में बताया गया है कि किस तरह हिन्दू लड़कियों को निशाना बना कर धर्मांतरण के जाल में फँसाया जा रहा है।

द मैन, द मिथ, द लीडर… कर्नाटक नतीजों के बाद विराट कोहली ने ऐसे की राहुल गाँधी की तारीफ: जानें वायरल पोस्ट का क्या है सच

कर्नाटक विधानसभा चुनावों में पूर्ण बहुमत पाने के बाद कॉन्ग्रेस पार्टी के शीर्ष नेताओं को देश भर से बधाइयाँ मिल रहीं हैं। इसी दौरान सोशल मीडिया पर एक संदेश वायरल हो रहा है जिसमें दावा किया जा रहा है कि भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली ने कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी को चुनाव में जीत की शुभकामना दी है। इस स्क्रीनशॉट के वायरल होने के बाद तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालाँकि पड़ताल में यह दावा झूठा और स्क्रीनशॉट फर्जी पाया गया है।

क्या है स्क्रीनशॉट में

दरअसल 13 मई 2023 (शनिवार) को डॉ नीमो यादव ने सोशल मीडिया पर एक स्क्रीनशॉट शेयर किया है। इस स्क्रीनशॉट को विराट कोहली के इंस्टाग्राम का स्टेटस बताया जा रहा है। इसमें 17 मिनट पहले पोस्ट दिखा रही है जिसके आगे वेरिफाइड मार्क के साथ विराट कोहली लिखा हुआ है।

स्क्रीनशॉट में राहुल गाँधी की माइक लिए तस्वीर देखी जा सकती है। कैप्शन के तौर पर ‘द मैन, द मिथ, द लीडर राहुल गाँधी’ लिखा हुआ है। इस स्क्रीनशॉट को शेयर करते हुए @niiravmodi ने लिखा, “Virat Kohli is on Fire, hope he doesn’t delete it।”

नीमो यादव के अलावा कुछ अन्य लोगों ने भी विराट कोहली द्वारा राहुल गाँधी को बधाई देने के दावे वायरल स्क्रीनशॉट के माध्यम से किए हैं। इन्ही में से एक शिवम नेहरू भी हैं।

चित्र साभार- @savantshiv1

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कई नेटीजेंस इस वायरल स्क्रीनशॉट को सही मान कर उस पर अलग-अलग तरह के कमेंट भी कर रहे हैं।

फर्जी है वायरल स्क्रीनशॉट

ऑपइंडिया की पड़ताल में यह बात निकल कर सामने आई है कि वायरल हो रहा स्क्रीनशॉट फर्जी और एडिटेड है। विराट कोहली के इंस्टाग्राम पर ऐसी कोई भी स्टोरी नहीं अपलोड हुई है। विराट कोहली द्वारा अपलोड की गई पुरानी स्टोरियों को भी खँगालने पर ऐसी कोई भी स्टोरी नहीं दिखी जिसमें उन्होंने राहुल गाँधी को बधाई दी हो। DNA इंडिया ने भी अपनी पड़ताल में इस स्क्रीनशॉट को फर्जी पाया है।

सिद्धारमैया के घर के बाहर से हटाया गया भगवान श्रीराम और बजरंग बली वाला पोस्टर, चुनाव के दौरान लगाया था: लोगों ने बताया ‘चुनावी हिन्दू’

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में जीत के साथ ही कॉन्ग्रेस नेता सिद्धारमैया के घर के बाहर लगी भगवान श्रीराम और हनुमान जी की तस्वीर को हटा दिया गया है। चुनाव के दौरान कॉन्ग्रेस पार्टी ने अपने घोषणापत्र में लिखा था कि सरकार बनाने के बाद ‘बजरंग दल’ को बैन किया जाएगा। साथ ही इसने हिन्दू संगठन की तुलना प्रतिबंधित आतंकी संगठन PFI से भी की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कॉन्ग्रेस पर बजरंग बली के अपमान का आरोप लगाया था।

इसके बाद कॉन्ग्रेस नेताओं ने भी खुद को हनुमान जी का भक्त दिखाना शुरू कर दिया था। इसी क्रम में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के आवास के बाहर दोनों ही देवताओं की तस्वीरें लगाई गई थीं। लेकिन, अब इन पोस्टरों को हटा दिया गया है। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु स्थित उनके घर के बाहर लगे इस पोस्टर में उनकी फोटो भी थी। कर्नाटक में 135 सीटों के साथ कॉन्ग्रेस को बहुमत मिला है, जबकि भाजपा 66 सीटें ही प्राप्त कर पाई।

इसके बाद लोगों ने कॉन्ग्रेस नेताओं को चुनावी हिन्दू बताना शुरू कर दिया। एक ने तंज कसते हुए लिखा कि कहीं मुस्लिम अपनी वोटिंग वापस लेने की धमकी दे रहे होंगे, इसीलिए ऐसा किया गया है। लोगों ने कहा कि चुनाव के साथ-साथ ही इनकी भक्ति भी खत्म हो जाती है। एक ने ‘भाई, ये तो शुरू होते ही ख़त्म हो गया’ वाला मीम भी शेयर किया। कॉन्ग्रेस पर हिन्दुओं को बेवकूफ बनाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। एक ने याद दिलाया कि इस पार्टी ने कभी भगवान राम का अस्तित्व नकार दिया था।

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस के विधायक दल के नेता का फ़िलहाल चयन नहीं हुआ है। डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया में से किसी एक को मुख्यमंत्री बनाया जाना है। वहीं देश भर के विपक्षी नेता अब 2024 लोकसभा चुनाव के लिए इसे शुरुआत बताते हुए ये कह रहे हैं कि पीएम मोदी अजेय नहीं हैं। डीके शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने पार्टी के लिए कई बार त्याग किया है। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मालिएकर्जुन खड़गे ने सीएम चुनने के लिए तीन सदस्यीय कमिटी भी बना दी है।

बिहार में शराब खोजने निकला ₹60 लाख का हाईटेक ड्रोन, कहाँ गया अब तक कोई अता-पता नहीं: जानकारी देने वाले को मिलेगा इनाम

बिहार में रेल इंजन और पुल चोरी होने जैसी घटनाएँ हो चुकी हैं। इसलिए एक ड्रोन जैसी चीज का लापता होना बड़ी बात नहीं है। हालाँकि, बड़ी बात ये है कि जिस ड्रोन से नीतीश कुमार की सरकार शराबबंदी वाले राज्य बिहार में शराब खोजने का काम करती थी, वही पिछले 10 दिनों से गायब हो गया है। सरकार ने 60 साथ रुपए खर्च करके इस ड्रोन को खरीदा था।

यह ड्रोन पटना से 10 दिन पहले 4 मई 2023 को उड़ाया गया और छपरा के दियारा इलाके में शराब की तलाश कर रहा था। इसी दौरान ड्रोन का संपर्क टूट गया और वह लापता हो गया। लाख कोशिश करने के बाद भी अधिकारी उसका पता नहीं लगा पाए। बिहार सरकार ने इसकी जानकारी देने वाले को 25 हजार रुपए ईनाम देने की घोषणा की है।

फिक्स विंग नाम का यह ड्रोन बिहार का एकमात्र ड्रोन था। यह हवाई जहाज की तरह दिखता था और दियारा की शराब की फैक्ट्रियों को चिन्हित कर अधिकारियों के नंबर पर जीपीएस मैसेज भेजता था। इसके बाद अधिकारी उस इलाके में कार्रवाई करते थे। यह पटना के मद्य निषेध विभाग के कंट्रोल रूम से ऑपरेट होता था।

ड्रोन की उड़ान क्षमता 100 किलोमीटर तक की थी। इसमें हाई रिजॉल्यूशन कैमरे लगे। यह ड्रोन काफी ऊँचाई से भी साफ तस्वीर कैद कर लेता था। जिस इलाके में यह निगरानी करता था, उसे लोग जहाज समझ लेते थे। कहा जाता है कि इसकी कीमत 60 लाख रुपए थे। अब मद्य निषेध विभाग के अधिकारी इसे खोज रहे हैं।

अधिकारियों को आशंका है कि यह तेज हवाल या ऊंचाई पर उड़ने वाले पक्षियों से टकराकर क्रैश हो गया होगा और कहीं दलदली इलाके या घनी झाड़ियों में गिर गया होगा। इसलिए इसे खोजने में समस्या हो रही है। यह ड्रोन से लगभग 500 मीटर की ऊँचाई से तस्वीरें लेता था। इसलिए इसे जमीन से मारकर गिराने की आशंका कम है।

ड्रोन के गुम हो जाने के बाद नीतीश कुमार के सहयोगी रहे और राष्ट्रीय लोक जनता दल (RLJD) के नेता उपेंद्र कुशवाहा ने उन पर तंज कसा है। कुशवाहा ने ट्वीट करके कहा, “माननीय मुख्यमंत्री नीतीश जी, शराब खोजने के चक्कर में पुलिस, अन्य एजेंसियाँ, करोड़ों का बजट सब लापता होते जा रहा है।”

उपेंद्र कुशवाहा ने आगे कहा, “बस लापता नहीं हो रही है तो आपकी ज़िद्द और शराब तथा शराब बंदी के नाम पर ग़रीबों पर चल रही बर्बरता। सावधान होइए, सर । वरना यह जो शराब है न, आपकी कुर्सी को लापता किए बिना मानेगी नहीं, क्योंकि शराब के नशा से बड़ा नशा है गरीबों पर ज़ुल्म ढाने की ज़िद।”

WFI के अधिकारियों पर लगा तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध, ए़़डहॉक कमिटी लेगी सारे निर्णय: ओलंपिक संघ का फैसला, 45 दिन के भीतर होंगे चुनाव

पहलवानों के प्रदर्शन के बीच भारतीय ओलंपिक संघ ने कुश्ती महासंघ के सभी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिया है। कुश्ती महासंघ के अधिकारी अब कोई भी प्रशासनिक कार्य नहीं कर सकेंगे। ओलिंपिक संघ ने इसको लेकर शुक्रवार (12 मई 2023) को एक आदेश जारी किया।

ओलंपिक संघ के संयुक्त सचिव और कार्यवाहक सीईओ कल्याण चौबे ने आदेश जारी कर कहा है कि अब एडहॉक कमिटी कुश्ती महासंघ के सभी कामों को सँभालेगी। इसी के तहत कुश्ती महासंघ से जुड़े निवर्तमान अध‍िकारियों को किसी भी तरह के कामकाज करने से रोक लगाने का आदेश दिया है। यही नहीं, कुश्ती महासंघ के अधिकारियों को ऑफिस के दस्तावेज, वेबसाइट मैनेजमेंट, वित्तीय कामों से जुड़ी चीजें चीजें और लॉगिन डिटेल्स एडहॉक कमिटी को सौंपने के लिए कहा गया है।

गौरतलब है कि ओलंपिक संघ के इस फैसले से पहले एक एडहॉक कमिटी बनाई गई थी। यह कमिटी कुश्ती महासंघ की हर गतिविधि पर नजर रख रही है। यह कमिटी आने वाले दिनों में कुश्ती महासंघ के चुनाव भी कराएगी। कुश्ती महासंघ के अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने को लेकर ओलंपिक संघ द्वारा जारी किए गए आदेश में खेल मंत्रालय के एक पत्र का हवाला दिया गया है। दरअसल, खेल मंत्रालय ने 24 अप्रैल को जारी एक आदेश में ओलंपिक संघ ने कुश्ती महासंघ की गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए एडहॉक कमिटी बनाने का आदेश दिया था।

खेल मंत्रालय के आदेश के बाद ओलंपिक संघ ने 27 अप्रैल को एग्जीक्यूटिव काउंस‍िल की आपातकालीन बैठक हुई। इस बैठक में एडहॉक कमिटी बनाने का फैसला हुआ। इसके बाद इस एडहॉक कमिटी में ओलंपिक संघ के कार्यकारी परिषद के सदस्य भूपेंदर सिंह बाजवा और ओलिंपिक संघ की उत्कृष्ट योग्यता की प्लेयर सुमा श‍िरूर को शामिल किया गया। यही नहीं, कुश्ती महासंघ के चुनाव में पारदर्शिता बरतने के लिए इस कमिटी में सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज को भी शामिल करने के लिए कहा गया है। ज्ञात हो कि एडहॉक कमिटी को 45 दिनों के भीतर चुनाव कराने की जिम्मेदारी दी गई है।

बता दें कि पहलवान भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी की माँग करते हुए धरना दे रहे हैं। बृजभूषण सिंह पर पहलवानों ने यौन उत्पीड़न समेत कई तरह के आरोप लगाए हैं। पहलवानों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत 2 FIR दर्ज हुई है। हालाँकि अब पहलवान WFI अध्यक्ष की गिरफ्तारी की माँग पर अड़े हुए हैं। वहीं, बृज भूषण शरण सिंह अपने कई बयानों में खुद को बेगुनाह बता चुके हैं।

ना BJP हिंदुत्व से भटकी, ना ही हिन्दू नाराज़ हैं… ऐसा होता तो नहीं हारते CT रवि जैसे नेता, हिजाब-मुस्लिम आरक्षण-ईदगाह मैदान सब पर रहा कड़ा स्टैंड

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के परिणाम जारी हो गए हैं। 224 सदस्यीय विधानसभा में कॉन्ग्रेस के जहाँ 135 विधायक होंगे, वहीं भाजपा को 66 सीटों से संतोष करना पड़ा। JDS तो मात्र 19 सीटों पर सिमट गई। कॉन्ग्रेस पार्टी का वोट शेयर 42.9% रहा, जबकि भाजपा 36% वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। जेडीएस 13.3% वोट शेयर ही पा सकी। इस तरह, भाजपा का वोट शेयर लगभग बरकरार रहा जबकि JDS को जितना नुकसान हुआ, कॉन्ग्रेस को लगभग उतना ही फायदा हुआ।

हार-जीत हर राजनीतिक दल के लिए चलता रहता है। लेकिन, भाजपा की हर हार पर आजकल काफी विश्लेषण किया जाता है और इसे मोदी लहर का अंत मान लिया जाता है। याद रखने की ज़रूरत है कि 2019 लोकसभा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस पार्टी ने कर्नाटक, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे बड़े राज्यों में सरकार बनाई थी। फिर 2019 में क्या हुआ, वो बताने की ज़रूरत नहीं है। इसी तरह, ताज़ा हार का भी खूब पोस्टमॉर्टम हो रहा है।

सोशल मीडिया के प्रादुर्भाव के बाद से ही एक अच्छी बात ये रही है कि एक आम आदमी भी अपनी बात को हजारों-लाखों लोगों तक पहुँचा सकता है। लेकिन, इसका एक नुकसान ये भी है कि किसी ऐसे नैरेटिव को भी फैलाया जा सकता है, जो ग्राउंड पर वास्तविकता न हो। भाजपा की ताज़ा हार का कारण लोग ये बता रहे हैं कि पार्टी हिंदुत्व से भटक गई है। दूसरा, ये कहा जा रहा है कि हिन्दू नाराज़ हैं और भाजपा ने उनके साथ धोखा किया है, इसीलिए हिन्दुओं ने उसे वोट नहीं दिया।

यहाँ हम चुनावी परिणामों का विश्लेषण कर के जानते हैं कि क्या सच में ऐसा हुआ? भाजपा के एक नेता हैं CT रवि, कर्नाटक में हिंदुत्व के पोस्टर बॉय के रूप में जाने जाते हैं। सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक उनकी सक्रियता को देखा जा सकता है, खासकर हिंदुत्व से जुड़े मुद्दों पर। वो भाजपा के नेशनल सेक्रेटरी भी हैं। बाबा बदन गिरि की पहाड़ी का नाम सुना है आपने? यहाँ एक मजार भी है, हिन्दू धर्म में दत्तात्रेय के अवतार की मान्यता भी यहीं है।

इसे दक्षिण का अयोध्या भी कहा जाता है, क्योंकि यहाँ नियंत्रण के लिए हिन्दुओं और मुस्लिमों में बड़ा संघर्ष हुआ। इस दौरान CT रवि ने बढ़-चढ़ कर हिन्दू युवाओं का नेतृत्व किया था। चिकमंगलूर में दत्ता जयंती के दिन एक अलग ही माहौल रहता है, लाखों हिन्दू इस पहाड़ी पर दर्शन के लिए पहुँचते हैं। ये मामला 70 के दशक से ही अदालत में चल रहा है। दिसंबर 2022 में यहाँ 21 वर्षों बाद हिन्दू रीति-रिवाज से पूजा-पाठ संपन्न हुआ।

मुस्लिम इसे दरगाह कहते हैं, जबकि हिन्दू पीठ मानते हैं। पिछले साल हुए आयोजन में यहाँ सीटी रवि भी शामिल हुए थे। कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश के बाद दत्ता जयंती मनाने का कार्यक्रम संपन्न हुआ था। चिकमंगलुरु की सीट से CT रवि को कॉन्ग्रेस उम्मीदवार ने 5926 वोटों से हरा दिया। अब आप कहिए, अगर भाजपा की हार का कारण हिन्दुओं की नाराज़गी होती तो क्या एक फायरब्रांड नेता को इस तरह हार का सामना करना पड़ता?

अब चलते हैं गुलबर्गा नॉर्थ सीट पर। क्या आपको पता है कि जब स्कूल-कॉलेजों में बुर्का और हिजाब के पक्ष में उपद्रव खड़ा किया गया तब भाजपा का क्या रुख रहा था? पार्टी ने स्पष्ट रूप से कह दिया कि शैक्षणिक संस्थानों में समान यूनिफॉर्म ही चलेगा और बुर्का-हिजाब की अनुमति नहीं दी जा सकती। न्यायालय में भी राज्य सरकार ने अपने इस स्टैंड का बचाव किया। हिजाब आंदोलन के पक्ष में कॉन्ग्रेस की विधायक कनीज़ फातिमा खुल कर खड़ी थीं।

इस सीट पर भाजपा के चद्रकांत पाटिल को 2712 वोटों से हार का सामना करना पड़ा और कनीज़ फातिमा जीत गईं। इसका अर्थ है कि कॉन्ग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में मुस्लिमों की गोलबंदी हुई होगी। लेकिन, उनके विरोधी उम्मीदवार के पक्ष में हिन्दुओं की गोलबंदी उस तरीके से नहीं हो पाई। अगर कर्नाटक के हिन्दुओं में भाजपा के प्रति नाराज़गी होगी तो इसका अर्थ ये नहीं है कि वो CAA आंदोलन का वहाँ चेहरा रहीं कनीज़ फातिमा को जिता देंगे।

भाजपा हिंदुत्व के मुद्दे से अगर भटकी होती तो क्या उसने मुस्लिम आरक्षण हटाया होता? ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ – इस नारे का अर्थ ये नहीं है कि मुस्लिमों को प्राथमिकता दी जाए, बल्कि विकास योजनाओं और देश को आगे बढ़ाने में सबका भला हो, सबका योगदान हो। मुस्लिम आरक्षण को न सिर्फ भाजपा ने डंके की चोट पर हटाया, बल्कि सुप्रीम कोर्ट में इस पर कड़ा स्टैंड भी लिया।

चलिए, थोड़ा और पीछे चलते हैं कर्नाटक में ही। 2022 के मध्य में ही जिस तरह से बेंगलुरु में स्थित ईदगाह मैदान को लेकर विवाद हुआ था, तब भी कर्नाटक की भाजपा सरकार ने सही स्टैंड लिया था। गणेश चतुर्थी के आयोजन की अनुमति दी गई। मुस्लिम पक्ष हाईकोर्ट पहुँचा और उसने इस फैसले को सही ठहराया। सुप्रीम कोर्ट ने फिर इस फैसले को पलट दिया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले ही वहाँ भगवान गणेश की प्रतिमा की स्थापना भी हो गई थी, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने आयोजन पर रोक लगा दी।

कर्नाटक के शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध को लेकर मुखर रहे वहाँ के शिक्षा मंत्री बीसी नागेश भी हार गए। अगर मुद्दा हिन्दुओं की नाराजगी का ही होता, तो वो नहीं हारते। इसका अर्थ है कि अन्य फ़ैक्टरों ने इस चुनाव में काम किया, जिस पर विश्लेषण हो ही रहे हैं। उन्हें त्रिपुर से कॉन्ग्रेस प्रत्याशी ने हरा दिया। उन्होंने सरकार में रहने के दौरान स्पष्ट किया था कि शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब की अनुमति नहीं दी जा सकती।

कर्नाटक सरकार में रहने के दौरान भी भाजपा ने कभी हिंदुत्व के मुद्दे पर कभी समझौता नहीं किया। जुलाई 2020 में कर्नाटक सरकार ने टीपू सुल्तान पर आधारित कक्षा 7 के पाठ्यक्रम से एक चैप्टर को हटा दिया। 2022 में भी इस संबंध में निर्णय लिया गया। सरकार द्वारा गठित पैनल ने टीपू सुल्तान का महिमामंडन किए बिना उसके बारे में पढ़ाए जाने की वकालत की। इसीलिए, ये आरोप गलत है कि भाजपा हिंदुत्व के मुद्दे से भटक गई।

अक्सर जोश-जोश में ये कह दिया जाता है कि भाजपा अब ‘बजरंग दल’ जैसे संगठनों से खुद को अलग दिखाती रही है। लेकिन, जब कॉन्ग्रेस ने ‘बजरंग दल’ की तुलना आतंकी संगठन PFI से करते हुए अपने घोषणापत्र में इसे प्रतिबंधित करने का वादा किया, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरी भाजपा ने इसके विरोध में दिन-रात एक कर दिया। ‘बजरंग दल’ के समर्थन मे आवाज़ उठाई गई। इसका साफ़ सन्देश है कि हिन्दू हित की बात करने वाले हर तत्व के साथ भाजपा खड़ी है।

एक और अंतिम लेकिन महत्वपूर्ण उदाहरण। फिल्म ‘The Kerala Story’ ने कमाई के मामले में 125 करोड़ रुपए का आँकड़ा पार कर लिया है। हिन्दू महिलाओं को फँसाने, उनके धर्मांतरण, तस्करी और ISIS का सेक्स स्लेव बनाने की घटनाओं का पर्दाफाश करती इस फिल्म की स्क्रीनिंग में खुद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पहुँचे। पीएम मोदी ने इस फिल्म का समर्थन किया। क्या कोई दल जो हिन्दुओं से खुद को अलग दिखाना चाहे, कभी ऐसा करेगा?

जब BJYM नेता प्रवीण नेट्टारू की हत्या हुई तो उसके बाद कुछ दिनों तक ज़रूर भाजपा के खिलाफ गुस्सा देखने को मिला था। लेकिन, राज्य सरकार ने सुनिश्चित किया कि आरोपितों की धर-पकड़ की जाए। साथ ही दिवंगत नेता के परिवार वालों के लिए एक अच्छा घर भी पार्टी फंड से बना कर उन्हें दिया गया। घर के पूजन कार्यक्रम में कई बड़े नेता पहुँचे। इससे कार्यकर्ताओं में सन्देश गया कि पार्टी उनके साथ है, उनके परिवार के साथ है।

भाजपा की हार के कई कारण हो सकते हैं। येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद से हटा कर कम लोकप्रिय बसवराज बोम्मई को लाया गया, कुछ इसे कारण बता रहे। कुछ कह रहे लिंगायत वोट पार्टी को थोक में नहीं मिला। मुस्लिमों का ध्रुवीकरण एक कारण है ही। भ्रष्टाचार के आरोपों का ठीक से जवाब न दे पाना एक कारण बताया जा रहा। एंटी-इंकंबेंसी से लेकर कॉन्ग्रेस द्वारा चुनाव प्रचार को ‘सुपर लोकल’ रखने को भी कारण बताया जा रहा। मीडिया से लेकर पार्टी तक, हर जगह इसका मंथन चलता रहेगा।

17 + 813 + 88 + 1359 + 195 + 1403… नगरपालिका और नगर निगम से लेकर नगर पंचायत तक, पूरी यूपी में ऐसे बजा BJP का डंका: देखें आँकड़े

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanth) के नेतृत्व में नगर निकाय चुनावों जबरदस्त सफलता हासिल की है। भाजपा ने यूपी के सभी 17 मेयर सीटों पर कब्जा कर लिया है। वहीं, नगरपालिका अध्यक्ष के 199 में से 88 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज किया है। इस सफलता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्री मोदी ने सीएम योगी को बधाई दी है।

यूपी भाजपा को जीत की बधाई देते हुए पीएम मोदी ने कहा, “निकाय चुनावों में इस शानदार विजय के लिए यूपी बीजेपी के सभी कार्यकर्ताओं और उम्मीदवारों को बहुत-बहुत बधाई। यह सफलता योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में प्रदेश में हो रहे अभूतपूर्व विकास को लेकर जन-जन के समर्थन को अभिव्यक्त करती है।”

यूपी के मेयर के 17 में से 17 सीटें, नगरपालिका अध्यक्ष के 199 में से 88 सीटें और नगर पंचायत अध्यक्ष के 544 सीटों में से 191 सीटें भाजपा ने जीतकर इतिहास रच दिया है। वहीं, समाजवादी पार्टी को नगरपालिका अध्यक्ष की 35 सीटें, बसपा को 16 सीटें, कॉन्ग्रेस को 4 सीटें, आम आदमी पार्टी को 3 सीटें और अन्य को 52 सीटें मिली हैं।

अगर नगर पंचायत अध्यक्ष की बात की जाए तो 544 में से भाजपा को 191, सपा को 78, बसपा को 37, कॉन्ग्रेस को 14, आम आदमी पार्टी को 6 सीटें और अन्य को 217 सीटें मिली हैं। वहीं, आम आदमी पार्टी को नगर निगम पार्षद की 8 सीटें, नगरपालिका परिषद सदस्य की 30 सीटें 6 और नगर पंचायत सदस्य की 61 सीटें भी मिली हैं।

दरअसल, उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव की तारीखों की घोषणा 9 अप्रैल 2023 को की गई थी। इसमें 17 महापौर (मेयर), 1420 पार्षद, नगरपालिका परिषदों के 199 अध्यक्ष, नगरपालिका परिषदों के 5327 सदस्य, नगर पंचायतों के 544 अध्यक्ष और नगर पंचायतों के 7178 सदस्यों के लिए 4 और 11 मई को मतदान हुए। वोटों की गिनती 13 मई 2023 को हुई थी।

चुनाव के दौरान भाजपा ने तरह-तरह के नारों का प्रयोग किया। इनमें ‘बुलडोजर बाबा चाँप रहे हैं… माफिया हाँफ रहे हैं’, ‘रंगदारी न फिरौती, यूपी नहीं है अब किसी की बपौती’, ‘माफिया नहीं अब महोत्‍सव हमारी पहचान है’ और ‘नो कर्फ्यू नो दंगा, यूपी में सब चंगा’ जैसे स्‍लोगन का खूब प्रयोग हुआ। इन नारों को सुनकर मतदाता खूब उत्साहित नजर आए थे।

कोच्चि में पकड़ी गई ₹12000 करोड़ की 2500 किलो ड्रग्स, रैपर पर लिखा मिला ‘हाजी दाऊद एन्ड सन्स’ : संदिग्ध पाकिस्तानी हिरासत में, 134 बोरे भी बरामद

भारतीय नौसेना ने नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के साथ एक साझा अभियान चला कर केरल के कोच्चि से ड्रग्स की एक बड़ी खेप पकड़ी है। इस अभियान के तहत अब तक 2500 किलोग्राम से भी ज्यादा ड्रग्स पकड़ने का दावा किया जा रहा है। ड्रग का नाम मेथमफेटामिन बताया जा रहा है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इस ड्रग की कीमत करीब 12 हजार करोड़ रुपए आँकी जा रही है। शनिवार (13 मई 2023) को हुई इस कार्रवाई के दौरान एक संदिग्ध को भी हिरासत में लिया गया है जो पाकिस्तान का बताया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस अभियान को ‘ऑपरेशन समुद्रगुप्त’ नाम दिया गया था। बरामद किया गया ड्रग एक बड़े जहाज के जरिए जलमार्ग से लाया जा रहा था। एक जहाज में ड्रग पाकिस्तान और ईरान की समुद्री सीमा के पास लोड किया गया था। बाद में इसे छोटी-छोटी जहाज़ों के जरिए अलग-अलग जगहों पर उतारा जाता है। बरामद ड्रग्स को ‘खुशबू’ और ‘555’ लिखे 134 बोरों में पैक किया गया था। फिलहाल NCB यह भी जानने का प्रयास कर रही है कि ये शब्द या नंबर पैकिंग हैं या कोई कोड।

ड्रग्स का मूल सोर्स पाकिस्तान बताया जा रहा है। इसके रैपर पर हाजी दाऊद एन्ड सन्स लिखा हुआ है। बरामद ड्रग का कुल वजन ढाई टन है। हिरासत में लिए गए संदिग्ध से एजेंसियों की पूछताछ जारी है। बरामद सभी वस्तुओं को मट्टनचेरी घाट लाया गया है। NCB के मुताबिक मामले में आगे की जाँच चल रही है। बताया यह भी रहा है कि NCB और नौसेना को इस कार्रवाई के पहले मालदीव और श्रीलंका से भी इनपुट मिले थे। मेथमफेटामिन की यह भारत में सबसे बड़ी जब्ती बताई जा रही है। यह एक्शन NCB के महानिदेशक संजय कुमार सिंह के नेतृत्व में हुआ। अभियान में DRI गुजरात ATS भी साझीदार की भूमिका में थी।