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टिकट कटने पर भाजपा छोड़ कॉन्ग्रेस में चले गए थे पूर्व CM जगदीश शेट्टार: अब चेले ने ही दोगुने वोट से दे दी मात, BJP की जीत

कर्नाटक विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा छोड़कर कॉन्ग्रेस में शामिल हुए पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार (Jagdish Shettar) चुनाव हार गए हैं। उन्हें भाजपा के प्रत्याशी महेश टेंगीनकई ने हराया है। जगदीश शेट्टार वहाँ के प्रभावशाली लिंगायत समुदाय से आते हैं।

जगदीश शेट्टार हुबली धारवाड़ सेंट्रल सीट से चुनाव मैदान में थे। दरअसल, इस चुनाव में भाजपा ने उनका टिकट काट दिया था। इसके बाद वे पार्टी से बगावत करके कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए थे। इसी सीट से वे पहले भाजपा के विधायक थे। इतना ही नहीं, भाजपा की सरकार में वे मुख्यमंत्री भी बने थे।

जगदीश शेट्टार लिंगायत समुदाय के बड़े नेताओं में इन्हें शामिल किया जाता है। भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा के बाद लिंगायत समुदाय में शेट्टार का प्रभाव काफी माना जाता है। जगदीश शेट्टार को हराने वाले भाजपा के महेश टेंगीकनई चुनाव प्रचार के दौरान खुद को उनका चेला बताते रहे हैं।

यह सीट लिंगायत बहुल है और टेंगीनकई भी लिंगायत हैं। कहा जाता है कि उनकी भी यहाँ अच्छी पकड़ है। खबर लिखे जाने तक, जगदीश शेट्टार वोट के मामले में दूसरे नंबर पर थे। निर्वाचन आयोग के आँकड़ों के अनुसार, इस सीट से चुनाव जीतने वाले उनके शिष्य महेश को कुल 64,910 वोट मिले हैं, जो कुल वोट का 66.9 प्रतिशत है।

वहीं, कॉन्ग्रेस नेता जगदीश शेट्टार को कुल 29,340 वोट मिले हैं। यह कुल वोटों का 30.24 प्रतिशत है। इस सीट पर कुल 16 उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें से 6 लोगों ने निर्दलीय चुनाव लड़ा था। शेट्टार लगातार 6 बार से विधायक रहे हैं और इस सीट से तीन बार जीत चुके हैं।

बता दें कि कर्नाटक कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार को कनकपुरा सीट से बड़ी जीत मिली है। उन्होंने अपने विरोधी उम्मीदवार को 1.5 लाख से अधिक वोटों से हराया है। यह उनकी लगातार 8वीं जीत है। डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार भी हैं। वहीं, पूर्व सीएम सिद्धारमैया भी वरुणा सीट से चुनाव जीत गए हैं।

बागेश्वर धाम के कार्यक्रम पर आतंकी हमले का साया! बिहार पहुँचे धीरेन्द्र शास्त्री का केंद्रीय मंत्री ने किया स्वागत, मनोज तिवारी ने गाड़ी ड्राइव कर होटल तक पहुँचाया

बागेश्वर धाम के पुजारी और कथावाचक पंडित धीरेंद्र शास्त्री बिहार के पटना पहुँच चुके हैं। पटना पहुँचने पर उनका भव्य स्वागत किया गया। धीरेंद्र शास्त्री 13 मई 2023 से 17 मई 2023 तक 5 दिवसीय हनुमंत चरित्र सुनाएँगे। रिपोर्टों के अनुसार कार्यक्रम में लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं के पहुँचने की उम्मीद है। बिहार पुलिस ने इस कार्यक्रम को लेकर अलर्ट भी जारी किया हुआ है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

पटना एयरपोर्ट पर भारी संख्या में पंडित धीरेंद्र शास्त्री के समर्थक मौजूद रहे। पटना में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और बीजेपी सांसद राम कृपाल यादव ने उनका स्वागत किया। भव्य स्वागत से गदगद पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने भोजपुरी में उपस्थिति लोगों का हाल चाल पूछा। बीजेपी सांसद मनोज तिवारी खुद गाड़ी चलाकर धीरेंद्र शास्त्री को होटल तक ले गए। पटना आने से पहले पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने वीडियो जारी कर बिहार के लोगों से कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की। बागेश्वर बाबा पटना के नौबतपुर स्थित तरेत पाली मठ पर हनुमान कथा कहेंगे।

5 दिवसीय कार्यक्रम में हर दिन शाम को 4 बजे से लेकर 7 बजे तक कथा का आयोजन होगा। 15 मई को धीरेंद्र शास्त्री दिव्य दरबार लगाएँगे। इसमें बिना टोकन और नंबर के भक्तों की अर्जी सुनी जाएगी। बिहार में बागेश्वर सरकार के कार्यक्रम को लेकर राजनीति भी खूब हुई। सत्ताधारी दल के लोग और अन्य नेता बागेश्वर सरकार के कार्यक्रम का विरोध कर रहे थे। विरोध की शुरुआत राजद सुप्रीमो लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव और बिहार सरकार में मंत्री सुरेंद्र यादव ने की थी। अपने ही मंत्रियों और नेताओं के विरोध के बावजूद बिहार सरकार ने बागेश्वर बाबा के कार्यक्रम को मंजूरी दे दी।

आयोजकों ने पटना के गाँधी मैदान में कार्यक्रम की अनुमति माँगी थी लेकिन भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर वहाँ प्रशासन ने कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी। इसके बाद आयोजन समिति ने नौबतपुर के तरेत पाली मठ में कथा और कार्यक्रम की अनुमति माँगी। इस स्थल पर पटना जिला प्रशासन ने कथा और दिव्य दरबार की अनुमति दे दी। हालाँकि जिला प्रशासन ने कार्यक्रम के दौरान आतंकी हमले का भी अलर्ट जारी किया है। रिपोर्टों के मुताबिक कार्यक्रम के दौरान आतंकी आईईडी धमाका करने की प्लानिंग कर रहे हैं। जिला प्रशासन ने कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की हुई है।

सचिन तेंदुलकर के नाम और फोटो-आवाज का इस्तेमाल कर दिया जा रहा झाँसा, पूर्व क्रिकेटर ने मुंबई पुलिस में दर्ज कराई FIR

पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) नाम पर फर्जी विज्ञापन चलाया जा रहा है। कई व‍िज्ञापनों में उनकी आवाज, फोटो और नाम का इस्तेमाल किया जा रहा था। इसको देखकर ‘भारत रत्न’ पूर्व क्रिकेटर भड़क गए हैं। उन्होंने इसकी पुलिस में शिकायत की है। उनकी शिकायत पर मुंबई पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है।

तेंदुलकर ने मुंबई को अपनी शिकायत में बताया कि उनकी आवाज, फोटो और नाम का इस्तेमाल कर लोगों को झाँसा देने का काम किया जा रहा है। यह सब इंटरनेट के माध्यम से हो रहा है। इसके बाद पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 426, 465 और 500 के तहत मामला दर्ज कर लिया।

बता दें कि पिछले साल नवंबर में बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन ने भी अपनी आवाज आदि के इस्तेमाल को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। अमिताभ बच्चन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने अदालत से कहा था कि बीते कुछ समय से अमिताभ बच्चन की पर्सनैलिटी का दुरुपयोग किया जा रहा है। इस वजह से उन्हें अदालत आने के लिए मजबूर होना पड़ा।

उन्होंने कोर्ट में व्हाट्सएप लकी ड्रॉ सहित अमिताभ के नाम से कई अन्य और विज्ञापनों का हवाला दिया। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा था कि मैसर्स स्वैग शर्ट्स, https://www.swagshirts99.com/ नामक वेबसाइट बनाकर टी-शर्ट बेच रहा है। इसमें अमिताभ बच्चन की फोटो लगी हुई है। इसी प्रकार ग्वालियर का एक पोस्टर विक्रेता अमिताभ बच्चन की फोटो वाले पोस्टर बेच रहा है।

अमिताभ बच्चन का कहना था कि कई कम्पनियाँ उनके नाम, फोटो और आवाज का दुरुपयोग कर रही हैं। इसलिए, उन्होंने कोर्ट में याचिका दायर कर बिना अनुमति के उनकी पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी का उपयोग करने पर रोक लगाने की माँग की थी।

उन्होंने यह भी कहा है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनके नाम से एक लॉटरी एड भी चल रहा है, जिसमें प्रमोशनल बैनर पर उनकी फोटो और KBC का लोगो लगा हुआ है। यह बैनर लोगों को सिर्फ भ्रमित करने के लिए बनाया गया है। इसमें कोई भी सच्चाई नहीं है।

इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए टेलीकॉम डिपार्टमेंट और अथॉरिटी को आदेश जारी किया था। अपने आदेश में उन्होंने कहा था कि अमिताभ बच्चन का नाम, फोटो और उन पर्सनैलिटी ट्रेट्स को तुरंत हटाया जाए, जो पब्लिक डोमेन में उपलब्ध हैं।

कोर्ट ने टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स से उन फोन नंबर्स के बारे में भी जानकारी देने को कहा, जो अमिताभ बच्चन के नाम और आवाज का अवैध उपयोग कर रहे हैं। इसके साथ ही, इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स से उन ऑनलाइन लिंक्स को भी हटाने को कहा है, जो अमिताभ की पर्सनैलिटी राइट्स को नुकसान पहुँचा रहे हैं।

‘भाजपा को न बिकें कॉन्ग्रेस विधायक, भले जाना पड़े जेल’: TMC नेता की कर्नाटक चुनाव परिणामों पर नसीहत… नेटीजेंस ने कहा- अभी से बोली लगना शुरू

तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता साकेत गोखले ने कर्नाटक में कॉन्ग्रेस विधायकों को अजीब सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में वो भाजपा को वोट देने के बजाय जेल जाना ज्यादा पसंद करें। गोखले ने कहा कि नवनिर्वाचित कॉन्ग्रेस विधायक भाजपा को अपना वोट न बेचें। शनिवार (13 मई 2023) को एक ट्वीट के माध्यम से उन्होंने कहा कि कोई कदम उठाने से पहले कॉन्ग्रेस विधायकों को उन लोगों के बारे में सोचना चाहिए जिन्होंने उन्हें वोट किया है।

साकेत गोखले तृणमूल कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। शुरुआती रुझानों कर्नाटक विधानसभा चुनाव में त्रिशंकु परिणाम दिखाई देने पर उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी के विधायकों को नसीहत दे डाली। प्रवर्तन निदेशालय (ED) का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जीत कर विधानसभा पहुँच रहे कॉन्ग्रेस विधायकों को किसी भी हाल में अपना वोट नहीं बेचना चाहिए भले ही इसके बदले उन्हें जेल ही क्यों न जाना पड़े। गोखले ने कॉन्ग्रेस विधायकों से कहा कि भाजपा का समर्थन करने से पहले उन्हें उन वोटरों के बारे में सोचना चाहिए जिन्होंने उन्हें विधानसभा पहुँचाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साकेत गोखले पर क्राउड फंडिंग में अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। उन पर चंदे से जुटाई गई 1.07 करोड़ रुपए की राशि के दुरुपयोग की जाँच ED कर रही है। गोखले अहमदाबाद की एक विशेष अदालत से 6 मई 2023 को मिली जमानत पर हैं।

नेटीजेंस ने उड़ाया मजाक

TMC नेता साकेत गोखले द्वारा यह ट्वीट किए जाने के बाद सोशल मीडिया पर नेटीजेंस उनका मजाक उड़ा रहे हैं। गिरीश ने लिखा, ‘कॉन्ग्रेस MLA की अभी से बोली लग रही है।’ वहीं अंकित जायसवाल का कहना है कि 5 करोड़ मिलेगा तो वो बिक जाएँगे क्योंकि सभी साकेत गोखले की तरह जिद्दी नहीं होते।

चित्र साभार- @SaketGokhale

रुझानों में कॉन्ग्रेस बहुमत की ओर

कर्नाटक विधानसभा चुनाव परिणाम में अब तक सामने आए रुझानों में कॉन्ग्रेस पार्टी पूर्ण बहुमत की तरफ बढ़ती दिख रही है। कॉन्ग्रेस पार्टी 130 से 135 सीटें हासिल करती दिखाई दे रही है तो वहीँ भाजपा 60 से 65 सीटों में सिमटती दिख रही है। तीसरे नंबर पर JDS है जो 20 से 25 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। अन्य 5 से 10 सीटों पर आगे चल रहे हैं।

जालंधर की लोकसभा सीट पर आगे निकली AAP, पूर्व कॉन्ग्रेस नेता ने ही ढहाया कॉन्ग्रेस का किला: ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में गई थी सांसद की जान

पंजाब की जालंधर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव की मतगणना में आम आदमी पार्टी लगातार बढ़त बनाए हुए है। खबर लिखते समय आप प्रत्याशी ने जालंधर में लगभग 42 हजार वोटों से बढ़त बना रखी थी। कॉन्ग्रेस प्रत्याशी यहाँ दूसरे नंबर और भाजपा तीसरे स्थान पर चल रही है। यह सीट कॉन्ग्रेस सांसद संतोख सिंह चौधरी के निधन से खाली हुई थी। जनवरी 2023 में संतोख सिंह की मौत तब हुई थी जब वो राहुल गाँधी के साथ भारत जोड़ो यात्रा में शामिल हुए थे।

जानकारी के मुताबिक इस उपचुनाव में आम आदमी पार्टी ने जालंधर से सुशील कुमार रिंकू को मैदान में उतारा। रिंकू पूर्व में कॉन्ग्रेस के ही नेता थे। हालाँकि इन उपचुनावों से पहले उन्होंने आम आदमी पार्टी ज्वाइन कर ली। उनके सामने कॉन्ग्रेस ने करमजीत कौर चौधरी को चुनावी मैदान में उतारा था। करमजीत कौर दिवंगत कॉन्ग्रेस सांसद संतोख चौधरी की पत्नी हैं। वहीं भाजपा के टिकट पर इंदर इक़बाल सिंह अटवाल प्रत्याशी हैं। वहीं शिरोमणि अकाली दल ने सुखविंदर सुखी को मैदान में उतारा है। इन सभी के अलावा नेशनल जस्टिस पार्टी के डॉक्टर सुग्रीव सिंह भी चुनाव मैदान में हैं।

यहाँ कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी में सीधा मुकाबला था जिसमें आप पार्टी काफी आगे निकलती दिखाई दे रही है। अब तक जारी आँकड़ों के मुताबिक भाजपा प्रत्याशी को लगभग 1 लाख वोट, कॉन्ग्रेस प्रत्याशी को लगभग डेढ़ लाख वोट और आप पार्टी के प्रत्याशी को लगभग 1 लाख 87 हजार वोट मिल चुके हैं। वहीँ शिरोमणि अकाली दल के प्रत्याशी को लगभग 86 हजार वोट मिले हैं। नेशनल जस्टिस पार्टी सैकड़े से आगे निकल कर हजार के आँकड़े को छूने के लिए संघर्ष कर रही है। फिलहाल उन्हें लगभग 700 वोट मिले हैं।

गौरतलब है कि जनवरी 2023 में राहुल गाँधी भारत जोड़ो लेकर जालंधर पहुँचे थे। यहाँ उसके साथ कॉन्ग्रेस सांसद संतोख सिंह चौधरी भी शामिल हुए थे। यात्रा के ही दौरान अचानक ही संतोख चौधरी की तबीयत बिगड़ी थी जिसके बाद उन्हें अस्पताल पहुँचाया गया। बाद में संतोख चौधरी का देहांत हो गया था। जालंधर सीट पर 2009 के बाद से कॉन्ग्रेस के ही प्रतिनिधियों ने जीत हासिल की थी। 2009 में यहाँ से मोहिंदर सिंह केपी जीते थे। इसके बाद 2014-2019 में यहाँ से संतोख सिंह चौधरी ही जीते थे।

फ़ारूक़ अब्दुल्ला के कमरे में नटराज की मूर्ति देख भड़का श्रीनगर का मेयर जुनैद मट्टू: बताया गैर-इस्लामी और मुर्तद, कहा – ये मस्जिद अल-नवाबी का अपमान

श्रीनगर के मेयर जुनैद अजीम मट्टू ने नेशनल कांफ्रेंस के मुखिया फ़ारूक़ अब्दुल्ला पर गैर इस्लामिक होने का आरोप लगाया है। इस बावत उन्होंने एक फोटो भी ट्वीट किया है जिसमें उनके पास भगवान नटराज की मूर्ति रखी हुई है। जुनैद ने इस बात से भी नाराजगी जताई है कि मदीना स्थित मस्जिद अल नवाबी की तस्वीर नटराज के नीचे कैसे रखी गई है। मट्टू ने यह ट्वीट फारुख अब्दुल्ला के उस बयान पर दिया है जिसमें उन्होंने कश्मीरी युवाओं से कुरान की शिक्षाओं पर अमल करने की अपील की थी।

दरअसल 12 मई (शुक्रवार) को द कश्मीर वाला नामक समाचार पोर्टल पर फ़ारूक़ अब्दुल्ला का एक बयान प्रकशित हुआ था। तब उन्होंने कश्मीर के युवाओं को पैगाम दिया था कि वो नमाज़ पढ़ें और कुरान पर अमल करें। इस दौरान अब्दुल्ला ने बताया कि हर कश्मीरी चाहता है कि उसके राज्य का पुराना दर्जा बहाल हो। अब्दुल्ला ने कश्मीर में अराजकता और बेरोजगारी में बढ़ोत्तरी होने का आरोप लगाते हुए युवाओं ने इस्लामी शिक्षाओं का पालन करने को कहा। उन्होंने कहा था कि अगर क़ुरान पढ़ नहीं सकते तो कम से कम उसे सुनो।

फ़ारूक़ अब्दुल्ला के इस्लामी शिक्षाओं पर चलने की सलाह के बयान पर श्रीनगर के मेयर जुनैद अजीम ने पटलवार किया है। जुनैद ने फारुख अब्दुल्ला की ही हरकतों को गैर इस्लामी बता दिया। उन्होंने 12 मई 2023 को किए गए अपने ट्वीट में 3 तस्वीरों को शेयर किया है। एक तस्वीर में सोफे पर बैठे फ़ारूक़ अब्दुल्ला के पीछे 2 युवा खड़े दिख रहे हैं। सोफे के बगल टेबल रखा है और उस टेबल पर भगवान नटराज की बड़ी सी मूर्ति रखी हुई है। मूर्ति के नीचे एक छोटी ही तस्वीर मदीना स्थित मस्जिद अल नवाबी की है।

अपने ट्वीट में जुनैद ने फारुख अब्दुल्ला को मुर्तद (इस्लामी उसूलों को त्याग देने वाला) और गुस्ताख़ ए रसूल बताया है। उन्होंने आगे लोगों से फ़ारूक़ अब्दुल्ला के हॉल की तस्वीरें देखने की अपील की है। मट्टू ने लोगों से कहा कि कोई एक ऐसा मुस्लिम का घर दिखाए जहाँ मस्जिद अल नवाबी का ऐसे अपमान हो रहा हो। अपने ट्वीट में जुनैद अजीम मट्टू ने फारुख अब्दुल्ला द्वारा कश्मीर के युवाओं को दी जा रही इस्लामी शिक्षाओं पर अमल की बातों को नाटक बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि वो अपने नाटक में कुरान या नमाज़ की बातों का जिक्र न करें।

जुनैद ने फ़ारूक़ अब्दुल्ला पर आरोप लगया है कि वो खुद इस्लामी कानूनों को नहीं मानते लेकिन मज़हबी उपदेशक बनने की कुचेष्टा कर रहे हैं। जुनैद ने अपने ट्वीट के अंत में अरबी में कुछ लाइनें लिखी हैं।

जिस शफी बेल्लारे पर BJYM नेता प्रवीण नेट्टारू की हत्या का आरोप, उसने भी लड़ा कर्नाटक में चुनाव: पुत्तूर में भारी मतों से हारा SDPI नेता

देश में प्रतिबंधित इस्लामी कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) की राजनीतिक शाखा सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (SDPI) ने शफी बेल्लारे को भी मैदान में उतारा है। शफी बेल्लारे भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के नेता प्रवीण नेट्टारू की हत्या के आरोपियों में से एक है।

SDPI ने शफी बेल्लारे को कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले के पुत्तूर विधानसभा सीट से मैदान में उतारा है। निर्वाचन आयोग के अनुसार, अभी तक सामने आए रुझान में शफी बेल्लारे को लगभग 1770 मत लिए हैं और वह चौथे स्थान पर है। इस सीट पर उसका वोट शेयर लगभग 1.65 प्रतिशत है।

शफी बेल्लारे को विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाए जाने की घोषणा SDPI के कर्नाटक प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल मजीद ने इस साल फरवरी में की थी। उस दौरान टाइम्स नाउ पर एक डिबेट के दौरान SDPI प्रवक्ता ने कहा था कि उनकी पार्टी का मानना है कि शफी बेल्लारे बेगुनाह है और उसे राजनैतिक कारणों से फँसाया गया है।

उस डिबेट में भाजपा नेता एस प्रकाश ने SDPI की इस घोषणा को घृणित बताया था। उन्होंने PFI और SDPI को आतंकी संगठन बताते हुए इन्हें जनता द्वारा कड़ा जवाब मिलने की बात कही थी। प्रकाश ने यह भी कहा था कि सिर्फ घोषणा करने से कोई विधायक नहीं बन जाता।

सामने आ रहे चुनावों परिणामों में भी भाजपा नेता एस प्रकाश की बात सही साबित होती दिख रही है। एक हत्यारेे को पुत्तूर की जनता ने नकार दिया है। अभी तक के आंकड़ों से पता चलता है कि उसके विधानसभा क्षेत्र में सिर्फ 1770 लोगों ने उसका समर्थन किया है।

शफी बेल्लारे उन हत्यारोपियों में से एक है, जिसने भाजपा नेता की हत्या की थी। 26 जुलाई 2022 को सुल्लिया तालुक में पड़ने वाले गाँव बेल्लारे में भाजपा नेता प्रवीण नेट्टारू को कुल्हाड़ी से काट डाला गया था। हमलावर बाइक पर सवार हो कर आए थे।

इस हत्याकांड की देश भर में आलोचना हुई थी। इसको देखते हुए जाँच कुछ ही समय बाद NIA को सौंप दी गई थी। इस मामले में NIA ने शफी बेल्लारे सहित 20 आरोपितों को गिरफ्तार किया था और उनके खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल किया था। शफी बेल्लारे पर आरोप है कि उसने प्रवीण की मुखबिरी की थी और हत्यारों को उनके बारे में बताया था।

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस को अपने विधायकों के बिकने का डर, बेंगलुरु लाने के लिए फ्लाइट-चॉपर-रिजॉर्ट का किया इंतजाम: रिपोर्ट्स

कर्नाटक में रुझानों में आगे निकलने के बाद अब कॉन्ग्रेस ने अपने जीतने वाले विधायकों को एक जगह इकट्ठा करना शुरू कर दिया है। पार्टी ने विधायकों की खरीद-फरोख्त के डर से अपने प्रत्याशियों को बेंगलुरु बुलाया है। वहीं कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को सारी स्थिति संभालने को कहा गया है।

टाइम्स नाऊ की खबर में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि कॉन्ग्रेस ने फ्लाइट और हेलीकॉप्टर भी बुक कर दिए हैं ताकि जीतने वाले विधायकों को बेंगलुरु पहुँचाया जा सके। रिपोर्ट के अनुसार, विधायकों के लिए कुछ खास व्यवस्थाएँ की गई हैं, उन्हें रखने के लिए रिजॉर्ट का इंतजाम किया गया है। ताकि कोई पार्टी उन्हें खरीद न सके या फिर उनके विधायक भी लालच में दूसरे पाले में न जा सकें।

बता दें कि कर्नाटक विधानसभा चुनावों के नतीजों की तस्वीर में लगातार कॉन्ग्रेस आगे चल रही है। लेकिन बावजूद इसके उन्हें अपने पार्टी के विधायकों पर भरोसा नहीं है। साल 2019 में चुनाव के बाद कॉन्ग्रेस और जेडीएस के 17 विधायकों ने अपनी पार्टियों से इस्तीफा देकर भाजपा को ज्वाइन किया था। इसके बाद कुमारस्वामी सरकार गिर गई थी और भाजपा ने अपनी सरकार राज्य में बनाई थी।

इस समय सामने आ रहे मतगणना के रुझानों में 224 विधानसभा सीट में कॉन्ग्रेस को 110 सीटों से ज्यादा मिलती दिख रही हैं। ऐसे में लगातार सवाल उठ रहा है कि स्थिति कहीं 2019 जैसी न हो। फिलहाल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता जश्न में डूबे हुए हैं। उन्होंने चुनाव से पहले आरोप लगाए थे कि ईवीएम साउथ अफ्रीका से आई है। अब उन्हें उसका भी ख्याल नहीं है। महासचिव प्रियंका गाँधी ने मंदिर जाकर पूजा अर्छना की है।

कर्नाटक चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस ने रोया था EVM का रोना, मतगणना में बढ़त पाते ही पार्टी भूल गई अपने आरोप: महासचिव प्रियंका गाँधी सीधे मंदिर पहुँचीं

कर्नाटक विधानसभा चुनावों की मतगणना में बढ़त मिलने के बाद दिल्ली से लेकर बंगलुरु तक कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है। कहीं लड्डू बाँटे जा रहे हैं तो कहीं ढोल-नगाड़े के साथ नृत्य किया जा रहा है। बढ़त हासिल होते ही कॉन्ग्रेस अपने उन आरोपों पर चुप्पी साध ली है, जो उसने मतगणना से पहले लगाए थे।

उधर पार्टी की महासचिव प्रियंका गाँधी हिमाचल प्रदेश के पौराणिक जाखू मंदिर में जाकर भगवान हनुमान की पूजा-अर्चना की। इसके बाद वे अपने आवास पर वापस लौट गईं। बताते चलें कि कर्नाटक चुनाव में बजरंग बली का मद्दा भाजपा ने जमकर उठाया था।

दरअसल, कर्नाटक में चुनाव से दो दिन पहले 8 मई 2023 को कॉन्ग्रेस ने चुनाव आयोग को पत्र लिखा था। अपने पत्र में पार्टी में चिंता जाहिर की थी कि साउथ अफ्रीका में इस्तेमाल की गई ईवीएम का प्रयोग कर्नाटक चुनाव में होने वाला है। पार्टी ने यह आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण माँगा था।

कॉन्ग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए चुनाव आयोग ने कहा था कि कि कर्नाटक चुनाव में इस्तेमाल होने वाली सारी ईवीएम नई हैं। ये बात कॉन्ग्रेस भी जानती है। आयोग ने कहा कि जब भी ईवीएम आती है तो उस पूरे प्रक्रिया का वीडियोग्राफी होती है और हर पॉलिटिकल पार्टी के लोगों को वहाँ चश्मदीद बनने के लिए बुलाया जाता है।

कॉन्ग्रेस को फटकार लगाते हुए ईसीआई ने कहा कि कॉन्ग्रेस बहुत अच्छे से जानती है कि ईवीएम कहाँ से आई हैं। कॉन्ग्रेस इतने समय से राष्ट्रीय पार्टी है और विभिन्न चुनावों में भाग लिया है। उससे तो उम्मीद की जाती है कि उसे निर्वाचन आयोग के प्रोटोकॉल्स के बारे में पता होगा।

आयोग ने बताया था कि न केवल प्रतिनिधियों को बुलाकर दिखाया जाता है कि ईवीएम आई कहाँ से, बल्कि उन्हें ईवीएम की यूनिक आई़डी की लिस्ट भी दी जाती है। इतना ही नहीं उसे असेंबल करने से पहले उसे रैंडम चेक किया जाता है। उसे चालू किए जाने के बाद फिर उसे पार्टी के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में चेक किया जाता है।

बताते चलें कि साल 2014 में केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद और भाजपा के बढ़ते कदम पर विपक्षी दल हमेशा ईवीएम का रोना रोते हैं। कभी वे ईवीएम हैक करने का आरोप लगाते हैं, तो कभी ईवीएम टैंपर करने का तो कभी ईवीएम में हेरफेर करने का।

इसी के तहत चुनाव से पहले ही कॉन्ग्रेस ने ईवीएम का रोना रोना शुरू कर दिया था। अगर कर्नाटक चुनाव में भाजपा को बढ़त मिली होती तो कॉन्ग्रेस इस मुद्दे को लेकर चिल्लाती रहती। हालाँकि, राज्य में कॉन्ग्रेस को बढ़त हासिल है और वह भी बहुमत के आँकड़े के पार तक। ऐसे में उसने ईवीएम के अपने आरोपों को भूला दिया।

‘पूरे देश में चल रही है द केरल स्टोरी, आपने क्यों रोकी स्क्रीनिंग?’: SC ने पूछा बंगाल और तमिलनाडु सरकार से सवाल, कहा- फिल्म अच्छी है या बुरी लोग तय करेंगे

लव जिहाद का पर्दाफाश करती फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ पर प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर पश्चिम बंगाल की ममता सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। उच्चतम न्यायालय ने तमिलनाडु सरकार को भी नोटिस जारी कर के जवाब माँगा है जहाँ कानून-व्यवस्था के चलते सिनेमाघरों के मालिकों ने इस फिल्म को लगाने से मना कर दिया है। इस मामले की सुनवाई शुक्रवार (12 मई 2023) को हुई थी जिसमें अगली सुनवाई इसी माह की 17 तारीख को तय की गई है।

दरअसल पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में फिल्म की स्क्रीनिंग रोके जाने के बाद फिल्म निर्माताओं ने इसे कोर्ट में चुनौती देने का ऐलान किया था। इसी बावत यह याचिका दाखिल हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस याचिका पर चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने सुनवाई की। फिल्म निर्माताओं की तरफ से एडवोकेट हरीश साल्वे ने पक्ष रखा जबकि पश्चिम बंगाल सरकार ने अपना वकील अभिषेक मनु सिंघवी को बनाया है। एडवोकेट हरीश साल्वे ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि द केरल स्टोरी को सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ फिल्म सर्टिफिकेशन द्वारा हरी झंडी मिली है लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार ने फिर भी इसे राज्य में बैन कर दिया।

हरीश साल्वे ने कोर्ट को यह भी बताया कि 2 राज्यों में फिल्म रुकने की वजह से हर गुजरते दिन के बाद फिल्म निर्माताओं को नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस दलील पर मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने ममता सरकार के वकील से फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की वजह पूछी। उन्होंने सवाल किया कि जब यह फिल्म देश के बाकी हिस्सों में चल रही है तो इसे पश्चिम बंगाल में रोका क्यों गया ? उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म अच्छी है या बुरी इसे लोगों को तय करने दिया जाए। वहीं जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने भी टिपण्णी करते हुए कहा कि यह फिल्म उन राज्यों में भी चल रही है जहाँ जनसंख्या का अनुपात समान है तो खास तौर पर इसे पश्चिम बंगाल में ही क्यों रोका गया ?

उच्चतम न्यायालय ने तमिलनाडु सरकार से भी राज्य में फिल्म की स्क्रीनिंग न होने पर सवाल किया है। हालाँकि तमिलनाडु सरकार के वकील अमित आनंद तिवारी ने कहा कि राज्य में फिल्म पर बैन नहीं है। इस जवाब के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या सिनेमा घरों में होने वाले हमलों की जवाबदेही राज्य सरकार की नहीं है ? बताते चलें कि तमिलनाडु के थिएटर मालिकों ने द केरल स्टोरी को माहौल बिगड़ने के डर से अभी तक नहीं चलाया है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने दोनों राज्यों को 17 मई 2023 (बुधवार) तक अपना जवाब कोर्ट में दाखिल करने का आदेश दिया है।