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इस्लाम के नाम पर बना देश, मुस्लिमों के पास हज पर जाने के पैसे नहीं: कंगाल Pak ने बचा लिए 681 करोड़ पाकिस्तानी रुपए

महँगाई और गरीबी से जूझ रहे पाकिस्तान ने अपना हज कोटा (Pakistan Hajj Quota) सऊदी अरब को वापस कर दिया है। पाकिस्तान के बीते 75 सालों के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ। दरअसल, भारी महँगाई के चलते इस साल हज के लिए काफी कम आवेदन आए थे। इसके चलते पाकिस्तान को यह कदम उठाना पड़ा। हज कोटा वापस करने के साथ ही पाकिस्तान सरकार ने करोड़ों डॉलर बचा लिए।

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के धार्मिक मामलों के मंत्रालय ने कहा है कि सरकार ने हज यात्रा के आठ हजार सरकारी योजना कोटे वापस किए हैं। इस तरह से सरकार ने करीब 2.4 करोड़ डॉलर यानी करीब 6,80,95,20,000 करोड़ पाकिस्तानी रुपए (8 मई 2023 के रेट से) बचा लिए हैं। अब पाकिस्तान को हज कोटे के लिए कोई भी शुल्क नहीं देना होगा।

बताया जा रहा है कि यदि पाकिस्तान हज कोटा वापस नहीं करता तो उसे बची हुई राशि को हज जाने वाले लोगों के रहने पर खर्च करना होता। पाकिस्तान को यह पैसा सब्सिडी के रूप में देना पड़ता। लेकिन अब बचा हुआ हज कोटा वापस होने के बाद पाकिस्तान का यह पैसा बच जाएगा।

बता दें कि सऊदी अरब ने इस साल पाकिस्तान को 1,79,000 हज यात्रियों का कोटा दिया था। इसके तहत 89605 हज यात्रियों का कोटा सरकार को तथा शेष कोटा प्राइवेट ऑपरेटरों को दिया गया था। पाकिस्तान में हज कोटा के लिए पर्याप्त आवेदन नहीं आए। ऐसे में सरकार ने ऐलान किया है कि इस साल की हज यात्रा के लिए लकी ड्रॉ नहीं होगा। जब आवेदकों की संख्या अधिक होती थी, तब लकी ड्रॉ के द्वारा हज यात्रियों का चयन होता था।

गौरतलब है कि हज यात्रा के लिए पर्याप्त आवेदन न आने पर पाकिस्तान की सरकार ने पहले हज कोटा प्राइवेट ऑपरेटरों को सौंपने का फैसला किया था। लेकिन विदेशी मुद्रा की किल्लत से जूझ रही सरकार को डर था कि यदि प्राइवेट ऑपरेटर को हज कोटा मिल गया तो वे खुले मार्केट से डॉलर खरीदेंगे। इससे डॉलर की किल्लत और भी अधिक बढ़ जाएगी। इसके बाद पाकिस्तान ने हज कोटा सऊदी अरब को लौटाने का फैसला किया।

मणिपुर हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा – विस्थापितों की हो घर वापसी, यह मानवीय संकट

मणिपुर हिंसा (Manipur Violence) को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र और राज्य सरकार ने कोर्ट से कहा है कि मणिपुर में हालात सामान्य हो रहे हैं। दो दिनों से कोई हिंसा नहीं हुई। वहीं, कोर्ट ने हिंसा के चलते विस्थापित हुए लोगों को लेकर सोमवार (8 मई 2023) को कहा कि उन्हें घर वापस लाया जाए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मणिपुर हिंसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं पर मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने सुनवाई की। इस दौरान केंद्र और राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर के मौजूदा हालातों को मानवीय मुद्दा बताया। साथ ही कहा कि इस बात में कोई संदेह नहीं है कि सरकार काम कर रही है। लेकिन सरकार को राहत शिविरों में उचित व्यवस्था करनी चाहिए। वहाँ रह रहे लोगों को भी राशन और चिकित्सा सुविधाओं जैसी बुनियादी सुविधाएँ दी जानी चाहिए।

मणिपुर की स्थितियों को लेकर कोर्ट को जबाव देते हुए सॉलिसिटर जनरल ने कहा है कि पिछले दो दिनों में राज्य में किसी प्रकार की हिंसा नहीं हुई है। इसलिए कर्फ्यू में ढील भी दी गई। सुरक्षा की दृष्टि से हेलीकॉप्टर और ड्रोन से भी निगरानी की जा रही है। राहत शिविर में रह रहे लोगों को आवश्यक सुविधाएँ मुहैया कराई जा रही हैं।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि राज्य में पैरामिलिट्री फोर्स की 52 कंपनियाँ और असम राइफल्स की 100 से अधिक कंपनियाँ तैनात की गई हैं। हिंसा प्रभावित और अशांत क्षेत्रों में फ्लैग मार्च हो रहा है।

तुषार मेहता ने बताया कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए राज्य सरकार काम कर रही है। केंद्र सरकार भी इस पूरे मामले में नजर बनाए हुए है। केवल धार्मिक स्थलों को ही नहीं, बल्कि राज्य में लोगों और संपत्तियों की भी रक्षा के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

मणिपुर मामला: हाई कोर्ट का आदेश, सुप्रीम कोर्ट के सवाल

इस सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मैतेई समाज को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने को लेकर हाई कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देश पर हैरानी जताई। बेंच ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के ऐसे कई फैसले हैं, जिनके अनुसार हाईकोर्ट किसी भी समाज को एसटी का दर्जा देने का निर्देश नहीं दे सकता है। यह शक्ति हाईकोर्ट के पास नहीं है। ऐसा करना राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र में आता है।

तमाम दलीलों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अब केंद्र और राज्य सरकार को 10 दिन के अंदर स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। मामले की अगली सुनवाई 17 मई 2023 को होगी।

जनजातीय समाज के मार्च के बाद शुरू हुई हिंसा

असल में मणिपुर का मैतेई समाज लंबे समय से माँग कर रहा है कि उसे ‘अनुसूचित जनजाति (ST)’ का दर्जा दिया जाए। हाल ही में उन्होंने अपनी इस माँग को तेज कर दिया।

मैतेई समाज मणिपुर की जनसंख्या का 53% है, यानी आधा से भी ज़्यादा। इसी माँग के विरोध में ‘ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन मणिपुर (ATSUM)’ ने बुधवार (3 मई, 2023) को राज्य के 10 पहाड़ी जिलों में मार्च निकाला था।

मणिपुर हाईकोर्ट ने कहा है कि मैतेई समाज को ST में सम्मिलित करने के लिए राज्य सरकार केंद्र को प्रस्ताव भेजे, जिसके बाद ये हिंसा की घटनाएँ हुईं। जनजातियों और बहुसंख्यक मैतेई समुदाय के बीच हिंसा के कारण 54 से अधिक लोग मारे गए हैं।

हाउसबोट डूबने से केरल में 22 की मौत: राज्य सरकार ने दिया न्यायिक जाँच का आदेश, मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपए आर्थिक सहायता

केरल के मलप्पुरम जिले में एक हाउसबोट डूबने के चलते 22 लोगों की मौत हो गई। रविवार (7 मई 2023) को हुई इस घटना के समय नाव में 31 लोग सवार थे। जिन्दा बचे 9 यात्रियों को नजदीक के अस्पताल में भर्ती करवाया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी और उपराष्ट्रपति ने घटना पर शोक जताते हुए मृतकों के आश्रितों को 2-2 लाख रुपए सहायता की घोषणा की है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने मामले की न्यायिक जाँच के आदेश दिए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला मलप्पुरम जिले के तानुर इलाके में ओट्टुम्पुरम का है। केरल सरकार के मंत्री वी अब्दुर्रहमान के अनुसार रविवार शाम लगभग 7 बजे यह हादसा हुआ। घटना के समय नाव नदी के बीच थी, जिसे किनारे लाने का प्रयास किया जा रहा है। राहत और बचाव कार्यों में फायर ब्रिगेड, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जुटे हुए हैं। हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने न्यायिक जाँच के आदेश दिए हैं।

इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में रात के समय नदी में डूबी नाव के आस-पास सुरक्षाकर्मी राहत और बचाव कार्य करते दिखाई दे रहे हैं।

राहत और बचाव कार्यों में नौसेना की भी मदद ली जा रही है। नौसेना का चेतक हेलीकॉप्टर भी मदद में लगाया गया है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपए आर्थिक सहायता की घोषणा भी की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस हादसे पर दुःख जताते हुए मृतकों के परिजनों को PM राहत कोष से 2-2 लाख रुपए देने का एलान किया है।

राजस्थान में मिला ‘सफेद सोना’, देश का 80% डिमांड पूरा करने में सक्षम: जम्मू-कश्मीर में भी मिला था लीथियम का भंडार, चीन का एकाधिकार होगा खत्म

राजस्थान में लिथियम का बड़ा भंडार मिला है। इससे देश की 80% लिथियम माँग को पूरा किया जा सकता है। इसका मतलब यह है कि भारत को अब लिथियम के लिए चीन जैसे देशों पर निर्भर नहीं रहना होगा। लिथियम का उपयोग मोबाइल, लैपटॉप के साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी में किया जाता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लिथियम का यह विशाल भंडार राजस्थान के नागौर जिले के डेगाना में मिला है। इसकी खोज जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) ने की है। जीएसआई के अधिकारियों का कहना है कि लिथियम का यह भंडार जम्मू-कश्मीर में मिले भंडार से कहीं अधिक बड़ा है। इसी साल फरवरी में जम्मू-कश्मीर में लिथियम के 59 लाख टन भंडार का पता चला था।

मौजूदा समय में दुनिया का सबसे बड़ा लिथियम भंडार 210 लाख टन का है, जो कि बोलीविया में है। इसके बाद अर्जेंटीना, चिली और अमेरिका में भी बड़े भंडार हैं। इसके बावजूद 51 लाख टन लिथियम के भंडार वाले देश चीन का लिथियम के बाजार में एकाधिकार है। भारत अपने कुल लिथियम आयात का 53.76 प्रतिशत हिस्सा चीन से खरीदता है। साल 2020-21 में भारत ने 6000 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य का लिथियम आयात किया था। इसमें से 3500 करोड़ रुपए से अधिक का लिथियम चीन से खरीदा गया था।

लिथियम के लिए भारत अब तक चीन, ऑस्ट्रेलिया और चिली जैसे देशों पर निर्भर है। इस विशाल भंडार के मिलने के बाद चीन का एकाधिकार खत्म होने की बात कही जा रही है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि खाड़ी देशों की ही तरह राजस्थान के साथ-साथ पूरे देश की भी किस्मत चमकने वाली है।

दिलचस्प बात यह है कि जियोलॉजिक सर्वे ऑफ इंडिया की टीम लिथियम की खोज नहीं, बल्कि टंगस्टन की खोज के लिए डेगाना गई थी। लेकिन वहाँ उन्होंने लिथियम का भंडार खोज निकाला। अंग्रेजी शासन के समय इस क्षेत्र में टंगस्टन का बड़ा भंडार था।

क्या है लिथियम

आप जिस मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल करते हैं उसमें लगी बैटरी बनाने में लिथियम का उपयोग किया जाता है। वास्तव में, लिथियम दुनिया की सबसे मुलायम और सबसे हल्की धातु है। इसे चाकू से काटा जा सकता है और यह आसानी से पानी में तैरती भी है। लेकिन इसका महत्व इसके मुलायम होने या पानी में तैरने से नहीं, बल्कि बैटरी में उपयोग होने के चलते बहुत अधिक बढ़ गया है। लिथियम रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदल देता है।

आज घर के सभी चार्जेबल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और बैटरी से चलने वाले हर गैजेट में लगी बैटरी में लिथियम का उपयोग होता है। दुनिया अब ग्रीन एनर्जी की तरफ बढ़ रही है। ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहनों से लेकर अन्य सभी उपकरणों में लगने वाली बैटरी की माँग लगातार बढ़ती जा रही है। पूरी दुनिया में हो रही माँग में वृद्धि के चलते ही इसे ‘व्हाइट गोल्ड’ भी कहा जाता है। एक टन लिथियम की कीमत करीब 57.36 लाख रुपए है।

पश्चिम बंगाल में ‘द केरल स्टोरी’ पर रोक, बोलीं CM ममता बनर्जी- नफरत रोकने और शांति के लिए लगाया है प्रतिबंध

पश्चिम बंगाल में ‘द केरल स्टोरी’ फिल्म को बैन कर दिया गया है। प्रदेश की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि ऐसा फैसला राज्य में नफरत और हिंसा रोकने और शांति बरकरार रखने के लिहाज से लिया गया है।

बता दें कि यह ‘द केरल स्टोरी’ फिल्म की कहानी ISIS में शामिल की जाने वाली लड़कियों के साथ घटित घटनाओं पर आधारित है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे एक एजेंडे के तहत दूसरे धर्म की लड़कियों को बहलाकर इस्लाम कबूल करवाया जाता है, फिर उन्हें आतंकी बनाकर IS भेज दिया जाता है।

फिल्म में अदा शर्मा ने शालिनी उन्नीकृष्णन का रोल निभाया है। शालिनी वो किरदार है जिसे प्यार का झाँसा देकर पहले इस्लाम के करीब लाया जाता है, फिर प्रेगनेंट करके इस्लाम कबूल करवाया जाता है और इसके बाद उसे IS जाने की ट्रेनिंग देकर सीरिया भेज दिया जाता है।

इस फिल्म को लेकर कई राज्यों में बवाल है। कहीं इस फिल्म के पोस्टर फाड़कर नारा-ए-तकबीर और अल्लाहु अकबर के नारे लगाए जा रहे हैं तो कहीं पर इसका पोस्टर लगाने पर धमकी दी जा रही है। तमिलनाडु में तो सरकार से अपील हो रही है कि इस फिल्म को बैन किया जाए जबकि थिएटर मालिकों ने खुद ही इसे चलाने से मना कर दिया है। वहीं अब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने खुद इस पर प्रतिबंध का ऐलान कर दिया है।

याद दिला दें कि इससे पहले ममता बनर्जी ने रामनवमी पर हिंदुओं से कहा था कि वो मुस्लिम इलाकों में न जाएँ क्योंकि ऐसा करने से माहौल बिगड़ सकता है। उन्होंने शिबपुर में भड़की हिंसा के बाद अपने बयान में यह भी कहा था कि रमजान में मुस्लिम कोई गलत काम नहीं करते। उन्होंने मुस्लिम समुदाय के लोगों से ये भी कहा था कि वो अल्लाह से दुआ करें कि दंगा करने वाले किसी कीमत पर न बचें।

‘अभी खत्म नहीं हुई नस्ल, जिंदा है अतीक का बेटा अली’: बदला लेने की ‘द सज्जाद मुगल’ की धमकी, कहा- सरकार बदलेगी… हिसाब पूरा होगा

प्रयागराज पुलिस ने ट्विटर यूजर ‘द सज्जाद मुगल (The Sajjad Mughal)’ के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इस हैंडल से किए गए ट्वीट में माफिया अतीक अहमद का बदला लेने की धमकी दी गई है। अतीक के बेटे अली अहमद की वीडियो लगी ट्वीट में कहा गया है कि सरकार बदलने पर हिसाब पूरा किया जाएगा। यह ट्वीट 25 अप्रैल 2023 को किया गया था। प्रयागराज पुलिस ने अब संज्ञान लेते हुए FIR दर्ज कर ली है।

ट्विटर यूजर सज्जाद कश्मीर के पुंछ का रहने वाला बताया जाता है। उसने 25 अप्रैल को 2 मिनट 20 सेकेंड का एक वीडियो ट्वीट किया है। इस ट्वीट में लिखा है, “अभी नस्ल खत्म नहीं हुई। अतीक का ये बेटा अली जिंदा है। इंशाअल्लाह हालत वक़्त सत्ता बदलेगी, फिर इलाहाबाद भी बोला जाएगा, हिसाब भी पूरा लिया जाएगा।” ट्वीट के साथ जो वीडियो लगा है वह जेल में बंद अतीक के बेटे अली की है।

इस ट्वीट को लेकर आलमगीर की तहरीर पर प्रयागराज पुलिस के साइबर सेल में केस दर्ज किया है। पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। ट्वीट के साथ लगे वीडियो में अली अहमद मुस्लिमों से अपना अमीर चुनने के लिए कहता है। वह कहता है, “जब कुरान के फरमान से हम हटते हैं तो मुसलमानों को ये सब सामना करना पड़ता है।” कुरान के हवाले से अली लोगों से सियासी अमीर चुनने के लिए भी कहता है।

अली अहमद कॉन्ग्रेस सहित तमाम पार्टियों के सेकुलरिज्म पर तंज कसते हुए कह रहा है, “ये धर्मनिरपेक्षता का लबादा ओढ़े जो पार्टियाँ आईं हैं, याद रखना मेरे भाइयों जिस दिन इन्हें ये एहसास हो जाएगा कि मुसलमान इन्हे वोट नहीं देने वाला, उस दिन ये BJP और RSS से खतरनाक हो जाएँगी। हमें BJP से कोई शिकायत नहीं है। जिनसे उम्मीद नहीं होती उनसे शिकायत नहीं होती। अगर हमें शिकायत है तो इन पार्टियों से है, क्योंकि इन्होने हमारा वोट लिया। हमें इस्तेमाल किया।”

सज्जाद का एक यूट्यूब चैनल भी THE SAJJAD MUGHAL के नाम से है। इस पर भी उसका प्रोपेगेंडा देखा जा सकता है। गौरतलब है कि 15 अप्रैल 2023 को अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की प्रयागराज के कोल्विन हाॅस्पिटल के बाहर शूटरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। उससे पहले उमेश पाल की हत्या में वांछित अतीक का बेटा असद एनकाउंटर में ढेर हो गया था। अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन भी उमेश पाल की हत्या के बाद से फरार है। उसे अब यूपी पुलिस ने माफिया घोषित कर दिया है। अतीक के दो बेटे जेल में हैं जबकि दो नाबालिग बेटे बाल सुधार गृह में हैं।

‘मुस्लिम आरक्षण बढ़ाओगे तो कम किसका करोगे?’ : अमित शाह का कॉन्ग्रेस से सवाल, बोले- PM मोदी के खिलाफ बोलकर इन्होंने हमेशा मुँह की खाई

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि कॉन्ग्रेस ने तुष्टिकरण की राजनीति के चलते मुस्लिमों को 4% आरक्षण दिया था। यह असंवैधानिक था। इसलिए भाजपा ने इसे हटा दिया। कॉन्ग्रेस द्वारा मुस्लिमों का आरक्षण बढ़ाने की बात करने को लेकर अमित शाह ने कहा है कि कॉन्ग्रेस को यह बताना चाहिए कि वह मुस्लिम आरक्षण बढ़ाकर 6% करेगी तो कम किसका होगा।

दरअसल, कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले गृह मंत्री अमित शाह ने एएनआई को एक इंटरव्यू दिया है। इसमें उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने को लेकर कहा है कि कॉन्ग्रेस ने जब भी पीएम मोदी के खिलाफ विषैली भाषा का उपयोग किया है, तब उन्हें मुँह की खानी पड़ी है। अब कर्नाटक में भी जनता कॉन्ग्रेस को जवाब देगी।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में सबसे अधिक चर्चित मुस्लिम आरक्षण के मुद्दे को लेकर उन्होंने कहा है कि 4% आरक्षण बीजेपी ने खत्म किया है, इसमें कोई दो राय नहीं है। लेकिन इसे इसलिए खत्म किया गया क्योंकि यह असंवैधानिक था। देश के संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण देने का प्रावधान नहीं है। कॉन्ग्रेस ने तुष्टिकरण की राजनीति करते हुए वोट बैंक का ध्रुवीकरण करने के लिए मुस्लिमों को आरक्षण दिया था। उन्होंने यह भी कहा है कि कर्नाटक सरकार का यह फैसला पूरी तरह से उचित है।

गृह मंत्री ने आरक्षण को लेकर कहा है कि बीजेपी ने बहुत सोच समझकर सारी चीजें की हैं। इसके लिए मधु स्वामी कमेटी बनी थी। इस कमेटी ने बहुत सारे आँकड़ों को इकट्ठा सरकार को सुझाव दिया था। इस कमेटी के सुझाव के बाद सरकार ने स्टेक होल्डर्स, विधायकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से भी बात की। अनुसूचित जनजातियों के आरक्षण के अंदर आरक्षण को लेकर कुछ सीमाएँ तय की गईं हैं। लेकिन कॉन्ग्रेस इसे हटाना चाहती है। पर यह आरक्षण नहीं हटेगा।

कॉन्ग्रेस ने मुस्लिमों के आरक्षण को 4% से बढ़ाकर 6% करने की बात कही है। इस मुद्दे पर बात करते हुए गृह मंत्री ने कहा है बोलने के लिए कुछ भी कहा जा सकता है। अगर कॉन्ग्रेस मुस्लिम आरक्षण 4% से बढ़ाकर 6% करना चाहती है तो उसे यह स्पष्ट करना चाहिए कि कम किसका होगा? ओबीसी का कम करेंगे, एससी, एसटी का कम करेंगे या लिंगायत का कम करेंगे। चुनाव प्रचार खत्म होने से पहले सिद्धरमैया को यह स्पष्ट कर देना चाहिए।

बता दें कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रचार सोमवार (8 मई 2023) को थम जाएगा। राज्य की सभी 224 सीटों पर 10 मई को मतदान होना है। चुनाव परिणाम 13 मई को सामने आएँगे। अब तक सामने आए अधिकांश एक्जिट पोल में सत्ताधारी बीजेपी कॉन्ग्रेस से कहीं अधिक आगे दिखाई दे रही है।

पहले खड़गे, फिर बजरंग दल और अब सोनिया गाँधी… अपने ही जाल में उलझी काॅन्ग्रेस: ‘संप्रभु कर्नाटक’ पर चुनाव आयोग पहुँची BJP

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार सोमवार (8 मई 2023) को समाप्त हो गया। 224 सदस्यीय विधानसभा के लिए 10 मई को वोट डलेंगे। नतीजे 13 मई को आएँगे। बीजेपी सत्ता बरकरार रखने के दावे कर रही है। काॅन्ग्रेस का कहना है कि राज्य में सत्ता विरोधी लहर चल रही है और वह भारी बहुमत से सरकार बनाने जा रही है। जो ओपिनियन पोल सामने आए हैं उनमें कुछ बीजेपी को तो कुछ काॅन्ग्रेस को बढ़त बता रहे हैं। लेकिन इस चुनाव प्रचार के दौरान जिस एक चीज में निरंतरता दिखी, वह है अपने ही नेताओं के बयान और वादों का काॅन्ग्रेस की गले की हड्डी बनना।

सबसे पहले काॅन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को अपने उस बयान के लिए सफाई देनी पड़ी जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘जहरीला साँप’ बता दिया था। फिर बजरंग दल की तुलना प्रतिबंधित इस्लामी संगठन पाॅपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से करके पार्टी फँसी। डैमेज कंट्रोल के लिए पार्टी पहले बजरंग दल पर प्रतिबंध से पीछे हटी फिर सरकार बनने पर राज्य के हर जिले में हनुमान मंदिर बनाने का वादा किया। अब पूर्व अध्यक्ष सोनिया गाँधी के एक बयान पर पार्टी फँस गई है।

सोनिया गाँधी के ‘कर्नाटक की संप्रभुता’ वाले बयान को लेकर बीजेपी ने सोमवार (8 मई 2023) को चुनाव आयोग से शिकायत की। सोनिया के खिलाफ कार्रवाई और कॉन्ग्रेस की मान्यता रद्द करने की माँग की है। केंद्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव के नेतृत्व में बीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने आयोग को ज्ञापन सौंपा है। बीजेपी ने चुनाव आयोग से अपनी शिकायत में कहा है कि कॉन्ग्रेस देश को बाँटने का काम कर रही है।

भूपेंद्र यादव ने इस संबंध में मीडियाकर्मियों से कहा, “उन्होंने (सोनिया गाँधी) जानबूझकर संप्रभुता शब्द का इस्तेमाल किया। कॉन्ग्रेस का घोषणा पत्र टुकड़े-टुकड़े गैंग का एजेंडा है। भारत को कमजोर करने का एजेंडा है। इसलिए वे इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस झूठ की बुनियाद पर यह चुनाव लड़ रही है। भारत की एकता और अखंडता के लिए जिन शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए, वो उसका इस्तेमाल करके प्रचार कर रही है।” केंद्रीय मंत्री ने उम्मीद जताई है कि चुनाव आयोग कॉन्ग्रेस के ‘राष्ट्र विरोधी कृत्य’ के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करेगा।

केंद्रीय मंत्री शोभा करंदजले ने भी सोनिया गाँधी को इस बयान पर घेरा है। उन्होंने ​कहा कि राहुल गाँधी ने भी भारत को टुकड़े-टुकड़े करने की कोशिश ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में की थी। अब सोनिया गाँधी भी यही काम रही हैं। वह टुकड़े-टुकड़े गैंग की मुखिया हैं। हमने माँग की है कि उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।

बता दें कि यह विवाद उस बयान को लेकर है जो कॉन्ग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से शनिवार (6 मई 2023) को कर्नाटक के हुबली में हुई चुनावी रैली में सोनिया गाँधी के भाषण का जिक्र करते हुए ट्वीट किया था।

इसमें कहा गया था कि कॉन्ग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने 6.5 करोड़ कन्नड़ के लोगों को एक कड़ा संदेश दिया। कॉन्ग्रेस किसी को भी कर्नाटक की प्रतिष्ठा, संप्रभुता या अखंडता के लिए खतरा पैदा नहीं करने देगी। इस ट्वीट के साथ पार्टी ने जनसभा को संबोधित करते सोनिया गाँधी की तस्वीर भी साझा की थी।

सरेआम हुई DM की मॉब लिंचिंग, फिर कैसे हो गई आनंद मोहन की रिहाई: सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से माँगा जवाब, रिहाई के लिए नियमों में किया था बदलाव

सुप्रीम कोर्ट ने दिवंगत आईएएस अधिकारी जी कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया की याचिका पर बिहार सरकार और अन्य को नोटिस जारी किया है। इस याचिका में बिहार के पूर्व बाहुबली सांसद आनंद मोहन को जेल से समय से पहले रिहाई को चुनौती दी गई है।

शीर्ष न्यायालय के फैसले पर दलित IAS ऑफिसर की पत्नी ने खुशी जाहिर की। उमा कृष्णैया ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, “हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खुश हैं कि उन्होंने बिहार सरकार और इस मामले में शामिल अन्य लोगों को नोटिस जारी ​किया है। यह केवल मेरा केस नहीं है, बल्कि यह पूरे भारत देश का मुद्दा है। हमें इंसाफ जरूर मिलेगा। मुझे उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सभी लोगों के बारे में सोचकर जरूर अच्छा फैसला देगा।”

दरअसल, गैंगस्टर से नेता बने आनंद मोहन सिंह को अप्रैल 2023 में सहरसा जेल से रिहा कर दिया गया था। बिहार सरकार ने आनंद सिंह सहित 27 दोषियों की जल्द रिहाई की अनुमति देते हुए जेल नियमों में संशोधन किया था। बिहार सरकार द्वारा जेल मैनुअल के नियमों में संशोधन के बाद एक आधिकारिक अधिसूचना में कहा गया था कि 14 साल या 20 साल जेल की सजा काट चुके 27 कैदियों को रिहा करने का आदेश दिया गया है।

बता दें कि 5 दिसंबर 1994 को बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में जिस भीड़ ने डीएम की पीट-पीट कर हत्या की थी, उस भीड़ का नेतृत्व आनंद मोहन कर रहे थे। एक दिन पहले मुजफ्फरपुर में आनंद मोहन की पार्टी के नेता रहे छोटन शुक्ला की हत्या हुई थी। इस भीड़ में शामिल लोग छोटन शुक्ला के शव के साथ प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान मुजफ्फरपुर के रास्ते पटना से गोपालगंज जा रहे डीएम जी कृष्णैया पर भीड़ ने मुजफ्फरपुर के खबड़ा गाँव में हमला कर दिया था। मॉब लिंचिंग में डीएम की मौत हो गई थी।

कृष्णैया तब मात्र 35 वर्ष के थे। शव यात्रा में बीपीपी सुप्रीमो आनंद मोहन, उनकी पत्नी और वैशाली की पूर्व सांसद लवली आनंद, छोटन शुक्ला के भाई और विधायक मुन्ना शुक्ला, विक्रमगंज के पूर्व विधायक अखलाक अहमद, शशिशेखर और अरुण कुमार सिन्हा भी शामिल थे। इन लोगों पर डीएम की हत्या के लिए भीड़ को उकसाने का आरोप था। डीएम कृष्णैया की हत्या मामले में पटना की निचली अदालत ने आनंद मोहन को 2007 में फाँसी की सजा सुनाई थी। आनंद मोहन के साथ पूर्व मंत्री अखलाक अहमद और अरुण कमार को भी मौत की सजा सुनाई गई थी। एक साल बाद 2008 में पटना हाईकोर्ट ने आनंद मोहन की फाँसी की सजा को उम्र कैद में बदल दिया था।

कोल्ड ड्रिंक के कैन में डालकर लटका दिया क्रूड बम, 2 दिन में गोल्डन टेंपल के पास दूसरा धमाका: अब तक नहीं मिला है डेटोनेटर

पंजाब के अमृतसर में स्वर्ण मंदिर से कुछ ही दूर सोमवार (8 अप्रैल 2023) को भी धमाका हुआ। इसमें किसी के घायल होने या किसी नुकसान की खबर नहीं है। पुलिस इसे कम क्षमता वाला क्रूड बम ब्लास्ट बता रही है। विस्फोटक को कोल्ड ड्रिंक के कैन में डालकर लटका दिया गया था। दो दिन के भीतर गोल्डन टेंपल के पास यह दूसरा धमाका है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सोमवार सुबह लगभग 6:30 पर स्वर्ण मंदिर से लगभग 800 मीटर दूर धमाका हुआ। धमाके की आवाज 1 किलोमीटर दूर तक सुनाई दी थी। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर बम डिस्पोजल दस्ते के साथ पुलिस बल पहुँचा और जाँच शुरू कर दी। पुलिस का कहना है कि कम डेंसिटी का यह धमाका क्रूड बम के कारण हुआ। बम कोल्ड ड्रिंक के कैन में डाल कर लटकाया गया था। अब तक हुई जाँच में पुलिस को डेटोनेटर नहीं मिला है।

पंजाब पुलिस के DGP गौरव दयाल का कहना है कि धमाके के बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। पुलिस इस ब्लास्ट को शरारत, आतंकवाद और पर्सनल एंगल से भी जाँच कर रही है। पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था पूरी तरह से सामान्य और नियंत्रण में है। मीडिया से भी तथ्यों को आधिकारिक पुष्टि के बाद प्रकाशित करने का आग्रह किया गया है।

शनिवार को भी हुआ था धमाका

गौरतलब है कि शनिवार (6 मई 2023) को भी अमृतसर के इसी क्षेत्र हेरिटेज स्ट्रीट में ब्लास्ट हुआ था। दोनों धमाकों के जगहों के बीच महज 10 मीटर की दूरी है। पहले धमाके में करीब 6 लोग घायल हुए थे। शुरुआत में इसे रेस्टोरेंट की चिमनी में हुआ ब्लास्ट बताया जा रहा था। लेकिन बाद में घटनास्थल से कुछ संदिग्ध चीजें बरामद होने पर पुलिस ब्लास्ट के एंगल से जाँच कर रही है।