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केरल में ट्रेनिंग, अंडरग्राउंड हो देशभर में PFI का नेटवर्क खड़ा कर रहे थे परवेज और रईस: यूपी ATS ने कई जगहों पर मारे छापे, 70 से अधिक संदिग्धों को उठाया

उत्तर प्रदेश पुलिस की ATS ने प्रतिबंधित इस्लामी कट्टरपंथी संगठन (PFI) से जुड़े सदस्यों की तलाश में कई स्थानों पर छापेमारी की है। शनिवार (6 मई 2023) को प्रदेश के कई जिलों में हुई इस छापेमारी के बाद अब तक 70 से अधिक संदिग्धों के हिरासत में लिए जाने की खबर है। PFI से जुड़े परवेज अहमद और रईस अहमद भी इनमें शामिल हैं। दोनों पर 50-50 हजार का इनाम घोषित है। परवेज और रईस पर भूमिगत हो कर कई राज्यों में PFI के नेटवर्क को खड़ा करने की कोशिश का आरोप है। इन्होंने दिल्ली, UP और केरल में PFI के सेंटरों से ट्रेनिंग ली थी।

UP ATS के मुताबिक सितम्बर 2022 में गिरफ्तार किए गए PFI से जुड़े 8 सदस्यों से हुई पूछताछ में कई नाम का खुलासा हुआ था। इसी क्रम में वाराणसी में परवेज अहमद और रईस अहमद के नाम सामने आए थे। परवेज और रईस CAA-NRC प्रदर्शनों के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय थे। दोनों फरार चल रहे थे। इन पर 153- A, 153- B के साथ UAPA एक्ट के तहत केस दर्ज था। ATS ने पकड़े गए संदिग्धों पर राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने और मज़हबी कट्टरता के प्रचार-प्रसार का आरोप लगाया है।

हिरासत में लिए गए संदिग्धों में मेरठ से समाजवादी पार्टी के नेता अब्दुल खालिक अंसारी भी शामिल हैं। लखनऊ से रिहाई मंच नाम का संगठन चलाने वाले वकील मोहम्मद शोएब को भी हिरासत में लिया गया था। हालाँकि पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया। सबसे अधिक 11 संदिग्ध शामली जिले से हिरासत में लिए गए हैं। ATS ने PFI से जुड़े कुल 211 संदिध चिन्हित कर रखे हैं। इनकी तलाश में दबिश दी जा रही है।

इस छापेमारी के लिए ATS के विभिन्न ज़ोन को मिला कर 30 टीमें तैयार की गईं थी। कार्रवाई को पूरी तरह से गोपनीय रखा गया था। छापेमारी के बाद अलग-अलग जिलों से लगभग 70 लोगों को हिरासत में लिया गया है। छापेमारी 1 दर्जन से अधिक जिलों में हुई है। गौरतलब है कि सितंबर 2022 में केंद्र सरकार ने पीएफआई पर प्रतिबंध लगा दिया था।

₹30 करोड़ में बनी द केरल स्टोरी, 3 दिन में ही कमा डाले ₹35 करोड़: तमिलनाडु के थिएटरों में बैन से फिल्ममेकर्स हैरान, लेंगे लीगल एक्शन

तमिलनाडु मल्टीप्लेक्स में लव जिहाद (Love Jihad) पर बनी ‘द केरल स्टोरी’ (The Kerala Story) फिल्म की स्क्रीनिंग पर रोक लगाने के खिलाफ निर्देशक सुदीप्तो सेन और निर्माता विपुल शाह ने कोर्ट जाने का फैसला लिया है।

ईटाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, फिल्ममेकर्स ने थिएटर मालिकों द्वारा फिल्म पर बैन लगाने के फैसले पर हैरानी जताई है। उनका कहना है कि यह न केवल अवैध है, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार का भी उल्लंघन है। ईटाइम्स के साथ बातचीत में निर्देशक सुदीप्तो सेन ने तमिलनाडु में फिल्म के अवैध बैन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की खबर की पुष्टि करते हुए कहा, “हाँ, हम अदालत जा रहे हैं। आज हम एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करेंगे।”

सच्ची घटना पर आधारित ‘द केरल स्टोरी’ फिल्म का जहाँ कुछ लोग विरोध कर रहे हैं, वहीं दर्शकों का इसे भरपूर प्यार मिल रहा है। सुदीप्तो सेन के निर्देशन में बनी ‘द केरल स्टोरी’ बॉक्स ऑफिस पर ताबड़तोड़ कमाई कर रही है। 30 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने तीन दिनों में 35 करोड़ रुपए से अधिक का बिजनेस कर लिया है।

ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श के मुताबिक, फिल्म ने पहले दिन शुक्रवार (5 मई 2023) को 8.03 करोड़ से खाता खोला। दूसरे दिन शनिवार (6 मई 2023) को इसने 11 करोड़ से ज्यादा की कमाई की। तीसरे दिन रविवार (7 मई 2023) को अदा शर्मा की फिल्म ने 16 करोड़ की कमाई की। इस तरह तीन दिनों में फिल्म ने अपनी लागत से ज्यादा 35.25 करोड़ रुपए कमाए।

बता दें कि तमिलनाडु मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ने अनाउंस किया था कि रविवार (7 मई 2023) से पूरे राज्य में ‘द केरल स्टोरी’ फिल्म की स्क्रीनिंग रोक दी गई है। एसोसिएशन ने कहा था कि यह फिल्म ‘लॉ एंड ऑर्डर के लिए खतरा हो सकती है। तमिलनाडु में नाम तमिलर काची (NTK) ने चेन्नई में शनिवार (6 मई 2023) को ‘द केरल स्टोरी’ की रिलीज के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। इसके अलावा, मनिथनेय मक्कल काची (MMK) के अध्यक्ष और विधायक एमएच जवाहिरुल्लाह ने गुरुवार (4 मई 2023) को तमिलनाडु की स्टालिन सरकार से इस फिल्म पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया था। उन्होंने इसे दशहत फैलाने के उद्देश्य से बनाई गई फिल्म बताया था। वहीं मध्य प्रदेश में इस फिल्म को टैक्स फ्री कर दिया गया है।

जंतर-मंतर पर किसानों ने तोड़े पुलिस बैरिकेड: आए पहलवानों का करने समर्थन, लगाए ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी’ के नारे

दिल्ली के जंतर-मंतर पर किसानों ने सोमवार (8 अप्रैल 2023) को जमकर हंगामा किया। सरकार विरोधी नारेबाजी के साथ-साथ किसानों ने पुलिस बैरिकेड तोड़ डाले। यहाँ बीते 16 दिनों से कुछ पहलवान भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी की माँग को लेकर धरने पर बैठे हैं।

इन पहलवानों के समर्थन में भारतीय किसान यूनियन (BKU) के सदस्यों के जंतर-मंतर पहुँचने के वीडियो सामने आए हैं। वीडियो में पगड़ी लगाए और हाथों में झंडे लिए किसानों को बेरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़ते और नारे लगाते देखा जा सकता है।

संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य हिम्मत सिंह गुर्जर ने इस प्रदर्शन के कई वीडियो ट्वीट किए हैं। इनमें से एक में बैरिकेड पर चढ़े कथित किसानों को ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी, आज नहीं तो कल खुदेगी’ के नारे लगाते सुना जा सकता है। एक अन्य ट्वीट में गुर्जर ने लिखा है, “मोदी जी आपकी दिल्ली पुलिस को समझा ले किसानों के साथ पंगा ना ले। अपनी बेटियों का समर्थन करने जाते हुए किसानों को आज फिर पुलिस ने जंतर-मंतर पर बेरिकेड लगाकर रोकने की कोशिश की। वही हुआ जो कल टिकरी बॉर्डर के बैरिकेडों पर हुआ था। बेरिकेड टूटे और किसान अपनी बेटियों से मिलने जंतर-मंतर के धरने पर पहुँचे।”

उल्लेखनीय है कि रविवार (7 मई 2023) को धरना स्थल पर खाप नेताओं ने महापंचायत बुलाई थी। इसमें WFI अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर कार्रवाई करने के लिए सरकार को 21 मई तक का अल्टीमेटम दिया गया था। खाप पंचायत के फैसले को लेकर राकेश टिकैत ने कहा था कि पहलवानों के समर्थन में प्रत्येक खाप सभी रोज अपने 11-11 सदस्यों को जंतर-मंतर भेजेगी। सभी सदस्य दिनभर किसानों के साथ रहेंगे।

वैसे पहलवानों के कथित समर्थकों द्वारा इस तरह की नारेबाजी का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले 28 अप्रैल को भी ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी’ के नारे लग चुके हैं। इसके अलावा मनुवाद से आजादी, आरएसएस से आजादी, ब्राह्मणवाद से आजादी, मोदी सरकार से आजादी जैसे नारे भी सुनाई पड़ चुके हैं। भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा के साथ पहलवानों के समर्थक बदतमीजी कर चुके हैं।

उल्लेखनीय है कि इन पहलवानों ने भारतीय कुश्ती संघ के प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह (WFI Chief Brij Bhushan Sharan Singh) पर यौन शोषण का आरोप लगाते हुए धरना शुरू किया था। इस संबंध में दिल्ली पुलिस एफआईआर भी दर्ज कर चुकी है। लेकिन धरनारत पहलवानों का कहना है कि जब तक बृजभूषण सिंह की गिरफ्तारी नहीं होती, वे नहीं उठेंगे। इस बीच 4 अप्रैल 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए पहलवानों का केस बंद कर दिया था कि उनकी माँग एफआईआर और सुरक्षा की थी जो अब पूरी हो चुकी है। आगे किसी भी प्रकार की शिकायत या माँग के लिए सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारी पहलवानों को स्थानीय मजिस्ट्रेट के समक्ष जाने की सलाह भी दी है।

‘जो पर्दा नहीं करते उसे अल्लाह जहन्नुम की आग में डाल देते हैं’: जिसे मुस्लिम रूममेट ने पहनाया ‘बुर्का’, उसने कहा मेरा इस्लामी धर्मांतरण भी ‘द केरल स्टोरी’ जैसी

द केरल स्टोरी (The Kerala Story) ने इस्लामी धर्मांतरण की साजिशों को चर्चा में ला दिया है। कई पीड़िताएँ खुद आगे आकर अपनी कहानी बता रही हैं। इनमें से एक केरल की त्रिशुर की रहने वाली अनघा भी है। अनघा का ब्रेन बाॅश उसके मुस्लिम साथियों ने ही किया था। ‘द केरल स्टोरी’ देखने के बाद उसने बताया है कि उसका इस्लामी धर्मांतरण भी उसी तरीके से किया गया था, जैसे इस फिल्म में दिखाया गया है।

अनघा ने रिपब्लिक भारत को बताया, “मैं एक ब्राह्मण परिवार में पैदा हुई। मेरे परिवार में माता-पिता के अलावा दो बहनें भी हैं। मैं एक फिजियोथेरेपिस्ट हूँ और आर्शा विद्या समाजम की फुल टाइम वर्कर हूँ। 5 मई को मैंने The Kerala Story देखी, फिल्म को देखकर मुझे लगा कि इसकी कहानी मेरी लाइफ से काफी मिलती-जुलती है। 2020 में आर्शा विद्या समाजम में आने से पहले मैं इस्लाम को फॉलो करती थी। उसी दौरान मेरा धर्म परिवर्तन हुआ था। उसके बाद मैं आर्शा विद्या समाजम में आ गई।”

न्यूज चैनल से बातचीत में उसने कहा, “मैं आप लोगों से अपनी कन्वर्जन स्टोरी साझा करना चाहती हूँ। उन दिनों मैंने अपने धर्म, देश के असली इतिहास और करेंट अफेयर्स को नजरअंदाज कर इस्लाम को अधिक तवज्जो देना शुरू कर दिया था। उसके बारे में पढ़ने लगी थी। मेरे कॉलेज के दिनों में मैं एर्नाकुलम के हॉस्टल में थी। वहाँ मेरी मुस्लिम रूम मेट मुझसे मेरे धर्म के बारे में पूछती थी। मेरे धर्म पर सवाल उठाती थी। उस समय मैं उसके किसी सवाल का जवाब नहीं दे पाती थी। मैं चुप रहती थी, क्योंकि मुझे मेरे धर्म के बारे में ठीक तरह से गाइडेंस नहीं मिला था।”

अनघा कहती है, “मैंने उन सवालों को लेकर अपने माता-पिता से भी बात की, लेकिन उन्होंने भी मुझे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इसके बाद मैंने सोशल मीडिया पर सर्च करना शुरू किया, लेकिन वहाँ भी मुझे कुछ संतोषजनक नहीं मिला। फिर मुझे हिंदू धर्म की वैलिडिटी पर संदेह होने लगा। वहीं जब मैंने इस्लाम को लेकर अपनी मुस्लिम रूम मेट से सवाल किया तो उसने सभी सवालों का जवाब दिया, क्योंकि उन्हें बचपन से ही इस्लाम की शिक्षा मिली थी। उसने हिंदू धर्म की आलोचना भी की, लेकिन मेरे उसके सवालों का कोई जवाब नहीं था।”

पीड़िता ने आगे बताया, “उसने मुझे बताया कि अल्लाह ही एकमात्र भगवान है। जिस तरह से ‘द केरल स्टोरी’ फिल्म में मुख्य किरदार के साथ होता है, वैसा ही मेरे साथ रियल लाइफ में हुआ। मैं धीरे-धीरे अपनी मुस्लिम दोस्त से प्रभावित होने लगी। मुझे उसकी बातें सही लगने लगी, जिसके चलते मैंने उससे इस्लाम की शिक्षा लेना शुरू कर दिया। उसने मुझे ट्रांसलेटेड कुरान भी दी। इसके अलावा इस्लामिक स्टडी के दौरान उसने मुझे जाकिर नाइक, एमएम अकबर और कुछ लोगों के वीडियो भी दिखाए। उसने बार-बार मुझे इस्लाम कबूल करने के कहा। पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनने की हिदायत दी और कहा कि अगर तुम अपना जिस्म दिखाओगी तो अल्लाह तुम्हें जहन्नुम की आग में डाल देंगे। बुर्के में रहने वाली औरतों की अल्लाह हमेशा मदद करता है।”

बता दें कि केरल की श्रुति का भी इसी तरह धर्मांतरण किया गया था। उसने बताया था कि काॅलेज में ग्रेजुएशन के दौरान मुस्लिम दोस्तों ने उसका ब्रेन वाश किया। धर्मांतरण के बाद उसे रहमत नाम दिया गया था। वहीं इस्लाम कबूलने के बाद अनघा का नाम आइमा अमीरा रखा गया था।

सभी FIR एक साथ कर दें, NSA हटा दें: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी मनीष कश्यप की माँग, विरोधी वकीलों ने ‘आदतन अपराधी’ से लेकर ‘राजनेता’ तक बता डाला

सुप्रीम कोर्ट ने आज (8 मई 2023) यूट्यूबर मनीष कश्यप की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। यूट्यूबर ने अपने ऊपर दर्ज NSA के मामले को हटाने और सारी एफआईआर एक साथ करने को लेकर न्यायालय में गुहार लगाई थी। कोर्ट ने उन्हें कहा कि वो अपनी याचिका हाईकोर्ट में लेकर जाएँ। इस दौरान बिहार सरकार ने मनीष कश्यप को आदतन अपराधी बताया। वहीं तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वकील ने उनको ‘राजनेता’ कहा।

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी परदीवाला की पीठ ने मनीष कश्यप की याचिका पर सुनवाई से मना किया। इस दौरान उनके (यूट्यूबर) वकील मनिंदर सिंह ने कहा कि जो वीडियो मनीष कश्यप ने अपने यूट्यूब चैनल पर दिखाई वो मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित थी। अगर उसकी एनएसए के तहत गिरफ्तारी बनती है तो इस धारा के तहत अन्य पत्रकारों को भी पकड़ा जाना चाहिए।

सिंह ने कहा, “अगर ये पत्रकार जेल में है तो हर पत्रकार जेल में होना चाहिए।” सिंह ने कोर्ट से अपील की कि मनीष के खिलाफ हुई सारी एफआईआर तमिलनाडु में एक साथ क्लब की जाए और उसके बाद उसे बिहार ट्रांसफर किया जाए। उन्होंने मनीपुर पत्रकार की हिरासत का भी हवाला दिया। लेकिन सीजेआई ने उनकी दलीलों पर ये जवाब दिया कि कश्यप ने फेक वीडियोज के जरिए एक स्थिर राज्य में हलचल पैदा की।

वहीं बिहार सरकार ने कोर्ट से कहा कि मनीष पर दर्ज एफआईआर अलग अलग मामलों में हैं।सुनवाई के दौरान बिहार सरकार के वकील ने कहा कि पहली एफआईआर फेक वीडियो को लेकर है, दूसरी घटना पटना एयरपोर्ट पर दिए गए बयान को लेकर हैं, तीसरी एफआईआर हथकड़ी वाले फोटो को लेकर है। वकील ने बताया कि कश्यप एक आदतम अपराधी है जिस पर उगाही और हत्या के प्रयास तक के केस दर्ज हैं।

तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल ने इस दौरान सारी एफआईआर को उस जगह क्लब करने को कहा जहाँ पहली एफआईआर हुई थी। सिब्बल ने कहा कि कश्यप कोई पत्रकार नहीं है वो एक राजनेता हैं जिन्होंने बिहार में चुनाव भी लड़ा हुआ है।

बता दें कि इससे पहले यूट्यूबर मनीष कश्यप उर्फ त्रिपुरारी कुमार तिवारी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) लगाने पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टालिन सरकार से सवाल किया। तमिलनाडु की स्टालिन सरकार ने प्रदेश में आप्रवासी बिहारी मजदूरों के खिलाफ हिंसा की खबरों को फर्जी बताते हुए कश्यप पर कई केस दर्ज किए थे।

इस मामले में तमिलनाडु सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल पेश हुए थे। मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने उनसे सवाल पूछा था, “मिस्टर सिब्बल, इसके लिए NSA क्यों? इस आदमी से इतना प्रतिशोध क्यों?”

इस पर सिब्बल ने कहा था कि वह फर्जी वीडियो बनाकर तमिलनाडु में बिहारियों पर हमले का झूठ फैला रहा था। सिब्बल ने कहा कि सोशल मीडिया पर उसके 60 लाख फॉलोअर्स हैं। वह एक राजनेता है और चुनाव लड़ चुका है। मनीष कश्यप पत्रकार नहीं है।

राजस्थान में घर पर गिरा मिग-21, 3 महिलाओं की मौत: 60 साल में 400 बार क्रैश हो चुका है फाइटर जेट, 200 पायलटों की जा चुकी है जान

मिग 21 (MiG-21) फिर से दुर्घटनाग्रस्त हो गया है। एयरफोर्स का यह फाइटर जेट राजस्थान के हनुमानगढ़ में सोमवार (8 मई 2023) को क्रैश हो गया। विमान बहलोल नगर इलाके में एक घर पर गिरा। इससे 3 महिलाओं की मौत हो गई। पायलट पैराशूट से कूद कर अपनी जान बचाने में कामयाब रहा।

इस हादसे को लेकर स्थानीय सदर थाना प्रभारी में कहा है कि एयरफोर्स का विमान मिग-21 जिस घर पर गिरा वहाँ 3 महिलाएँ और एक पुरुष मौजूद थे। 2 महिलाओं की मौके पर मौत हो गई। एक महिला की हॉस्पिटल में इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं, एयरफोर्स ने एक बयान में कहा है कि MiG-21 ने नियमित प्रशिक्षण के दौरान उड़ान भरी थी। इसी दौरान सूरतगढ़ के पास हादसा हो गया। पायलट खुद को बचाने में सफल रहा। हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए जाँच टीम गठित की गई है।

हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुँच गए। वे प्रशासन ने मुआवजे की माँग कर रहे हैं। इसके लिए लिखित आश्वासन चाहते हैं। परिजनों का कहना है कि जब तक उन्हें लिखित में आश्वासन नहीं मिलता, तब तक वे शव नहीं उठाने देंगे।

गौरतलब है कि मिग-21 विमान के क्रैश होने की यह कोई पहली घटना नहीं है। 60 के दशक में यह विमान वायुसेना में शामिल हुआ था। 1971 में पाकिस्तान के विरुद्ध युद्ध में इस जेट ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लेकिन सेना के बेड़े में शामिल होने के बाद से यह विमान 400 से अधिक बार दुर्घटनाग्रस्त हो चुका है। इन हादसों में 200 से ज्यादा पायलट और करीब 60 नागरिकों की मौत हो चुकी है। 2019 में तत्कालीन एयरचीफ मार्शल बी एस धनोआ ने भारतीय वायु सेना के पुराने पड़ चुके फाइटर जेट्स और हथियारों पर बात करते हुए कहा था कि वायुसेना 40 साल से भी ज्‍यादा पुराने फाइटर जेट्स उड़ा रही है। इतनी पुरानी तो कोई कार भी नहीं चलाता है।

भगोड़ी शाइस्ता परवीन अब ‘माफिया घोषित’: जब दफन हुआ अतीक अहमद तब प्रयागराज में ही थी, जानिए कैसे फेल हो गया कब्रिस्तान पहुँचने का प्लान

उमेश पाल हत्याकांड में फरार चल रही शाइस्ता परवीन को अब यूपी पुलिस ने ‘माफिया’ घोषित कर दिया है। यह जानकारी भी सामने आई है कि जिस दिन उसके शौहर अतीक अहमद और देवर अशरफ को दफनाया गया, वह प्रयागराज में ही थी। जनाजे में शामिल होने के लिए उसने हुलिया बदला था। शूटर साबिर को साथ रखा था। लेकिन पुलिस की सख्ती के कारण कब्रिस्तान पहुँचने का उसका प्लान फेल हो गया।

उसे शरण देने के आरोप में मोहम्मद आतिन को गिरफ्तार किया गया है। इस संबंध में प्रयागराज के धूमनगंज थाने में FIR दर्ज की गई है। इसमें शाइस्ता को ‘माफिया अपराधी’ बताया गया है। 2 मई 2023 को यह एफआईआर SHO धूमनगंज इंस्पेक्टर राजेश कुमार मौर्य ने दर्ज करवाई थी।

एफआईआर में एसएचओ ने बताया है कि दो मई को वह अपनी टीम के साथ अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई पर चर्चा कर रहे थे। इसी दौरान एक मुखबिर से प्रयागराज के ही खुल्दाबाद के रहने वाले मोहम्मद आतिन जफर द्वारा शाइस्ता परवीन को शरण दिए जाने की जानकारी मिली। आतिन का अब्बा जफ़र उल्ला इस समय अतीक के बेटे उमर अहमद के साथ लखनऊ जेल में बंद है। वह अतीक अहमद का पुराना सहयोगी रहा है।

FIR कॉपी का अंश

FIR में बताया गया है कि 15 अप्रैल 2023 को अतीक अहमद की हत्या होने के अगले दिन शाइस्ता और उसका शूटर साबिर वेश बदल कर प्रयागराज आए थे। उनके रुकने का इंतज़ाम आतिन जफ़र ने ही अपने घर पर करवाया था। शाइस्ता अपने शौहर अतीक के जनाजे में शामिल होना चाहती थी, लेकिन पुलिस की सरगर्मी देख उसने प्लान बदल लिया। 17 अप्रैल को शाइस्ता और साबिर आतिन के घर से कहीं और चले गए।

FIR में इस बात का भी जिक्र है कि 2 मई को शाइस्ता द्वारा शूटर साबिर को फिर से मोहम्मद आतिन के घर भेजने की सूचना मिली थी। इसके आधार पर पुलिस ने दबिश दी, लेकिन साबिर भाग निकला। मोहम्मद आतिन को पुलिस ने पकड़ लिया। पुलिस ने आतिन का मोबाइल जब्त कर लिया है। आतिन पर अपराधी को शरण देने की धारा IPC 216 के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी मौजूद है।

गौरतलब है कि 24 फरवरी 2023 को उमेश पाल की हत्या उनके घर के पास कर दी गई थी। शाइस्ता और शाबिर दोनों उमेशपाल की हत्या में वांछित हैं। दोनों पर पुलिस ने 5-5 लाख का इनाम घोषित कर रखा है। अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की 15 अप्रैल 2023 को 3 शूटरों ने पुलिस कस्टडी में हत्या कर दी थी।

पेशावर में फहराया केसरी झंडा, अफगानिस्तान भाग गया दुर्रानी: वो युद्ध जिसके बाद अटक से कटक तक फैला मराठा साम्राज्य

मराठाओं के अदम्य साहस का परिचय इतिहास के पन्नों में स्वर्ण स्याही से दर्ज है। उनके शूरता का ही परिणाम था कि अफगानिस्तान की सीमा तक भगवा पताका लहरा सका और दुर्रानी साम्राज्य का दम निकल गया। मराठाओं ने यह युद्ध पेशावर की धरती पर 8 मई 1758 को नानासाहेब पेशवा के छोटे भाई रघुनाथराव और मल्हारराव होल्कर के नेतृत्व में लड़ा था और ऐतिहासिक जीत हासिल की थी।

पेशावर के युद्ध से इससे पहले अधिकांश मध्य और पूर्वी भारत भी उनके ही नियंत्रण में था। लेकिन इस विजय के बाद उनका साम्राज्य ‘अटक से कटक’ तक फैल गया था।

पुणे की सीमा से लगभग 2000 किलोमीटर दूर हासिल पेशावर के इस युद्ध में हासिल विजय ने मराठाओं के कीर्ति को दूर तक पहुँचाने में बहुत बड़ा योगदान दिया था। इस बड़ी जीत को अपने नाम करने से मात्र दस दिन पहले (28 अप्रैल 1758) मराठाओं ने अटक का युद्ध जीतकर वहाँ भी केसरी झंडा फहरा दिया था।

अटोक पर जीत मराठाओं के साम्राज्य विस्तार के लिए महत्तवपूर्ण पल था। मगर, बावजूद इसके अफगानिस्तान की सीमा पर बजे विजयनाद ने मराठाओं के यश को कोने-कोने तक फैला दिया।

यूँ तो इस युद्ध में लड़ने वाले हर मराठा योद्धा ने अपने अदम्य साहस और शौर्य का परिचय दिया था। लेकिन उनका नेतृत्व करने वाले नानासाहेब पेशवा के छोटे भाई रघुनाथराव और मल्हारराव होल्कर का नाम इस जीत के साथ ही इतिहास के पन्नो में अमर हो गया। इस दौरान इरान के शाह ने भी दुर्रानी साम्राज्य को कुचलने के लिए रघुनाथराव का समर्थन किया था।

बात शुरू होती है 1707 से, 1707 में औरंगजेब के मरने के बाद देश में मराठाओं का विस्तार हो रहा था। इनमें मराठाओं के पाँच बड़े राजवंश थे। पुणे के पेशवा, नागपुर के भोसले, बड़ौदा के गायकवाड़, इंदौर के होल्कर और उज्जैन के सिंधिया।

1526 में बाबर के हमले के भारत में करीब 200 साल बाहर से हमला नहीं हुआ। लेकिन 1738-1739 में नादिर शाह के बाद ये सिलसिला दोबारा शुरू हुआ। लेकिन, 1747 में नादिर शाह की मृत्यु के बाद उसका एक सेनापति अहमद शाह अब्दाली सामने आया। जिसने नादिर की मौत होते ही अपना दुर्रानी नाम से अलग साम्राज्य बना लिया। और यही से अस्तित्व में आया अफगानिस्तान। 

साम्राज्य बनाने के अब्दाली की नीति भारत के लिए बिलकुल वैसी ही थी, जैसे महमूद गजनी की थी। यानी लूटकर अपने देश का खजाना भरना और दूसरे इलाकों पर कब्जा करना।

अब्दाली ने दिल्ली पर सबसे पहला हमला 1748 में किया था। लेकिन दिल्ली पहुँच नहीं पाया और बीच में ही हार का मुँह देखकर वापस लौट गया। पर यहाँ उसके इरादे पस्त नहीं हुए। वे हमले करता रहा, 1749 में उसने दूसरा आक्रमण किया, 1751 में तीसरा, 1752 में चौथा।

इस बीच में पाकिस्तान में वह मुल्तान और लाहौर को मुगलों से छीन चुका था। जिसके कारण मुगल घबरा गए और उन्होंने 1752 में मराठाओं से अहमदिया संधि की। जिसके बाद सतलज के दक्षिण में मराठाओं का दबदबा बढ़ गया और उनपर वहाँ कोई बड़ी चुनौती शेष नहीं थी। पर मराठाओं की नजर पंजाब पर थी और अफगान के निशाने पर भी वही था। ऐसे में दोनों के बीच में देर-सवेर पंजाब को लेकर झगड़े शुरु हो गए और आगे जाकर इन्हीं झगड़ों ने बड़ा रूप लिया।

जब 1758 में पेशावर का युद्ध हुआ। उस समय पेशावर के किला में तैमूर शाह दुर्रानी और जहान खान रहते थे। मगर मराठाओं की सेना से हारने के बाद वे वहाँ से भाग खड़े हुए और अफगानिस्तान चले गए। परिणामस्वरूप पंजाब, उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत और कश्मीर में, मराठा यहाँ प्रमुख खिलाड़ी बने।

इसके बाद मराठा सेना के मुख्य सेनापति मल्हार राव होल्कर पेशावर में 3 महीने तक रहे जिसके बाद उन्होंने तुकोजी राव होल्कर को 10 हजार मराठा सैनिकों के साथ अफगान से पेशावर के किले की रक्षा करने का जिम्मा सौंप दिया। मगर, शायद पेशावर के संरक्षण में इतनी सेना काफी नहीं थी क्योंकि दुर्रानी की सेना ने 1759 में दोबारा इसपर कब्जा कर लिया।

हाथ जोड़ती हिजाब वाली लड़की, ‘हिंदू दोस्त’ का नंबर माँगती भीड़… सोशल मीडिया में 2 Video वायरल, जयपुर की बताई जा रही घटना

सोशल मीडिया में दो वीडियो वायरल हैं। दोनों राजस्थान की राजधानी जयपुर के बताए जा रहे। एक वीडियो में हिजाब वाली लड़की को कुछ लोग घेरे दिख रहे हैं। वह हाथ जोड़ रही है पर भीड़ उसके ‘हिंदू दोस्त’ का नंबर माँग रही है। दूसरे वीडियो में एक बुर्के वाली लड़की एक सड़क से गुजरती दिख रही है। कुछ लोगों का समूह लगातार उसका पीछा कर रहा है। इसमें कई नाबालिग भी दिख रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि ‘हिंदू दोस्त’ से बात करने पर उसके साथ यह सलूक किया गया।

ऑपइंडिया इन वीडियो की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता। लेकिन इनमें से एक वीडियो पर संज्ञान लेने की बात जयपुर पुलिस ने रविवार (7 मई 2023) को ट्वीट कर कही है। 30 सेकेंड का यह वीडियो जयपुर के घाटगेट का बताया जा रहा है। 6 मई को इसे ट्विटर यूजर @warriorbeast73 ने जयपुर पुलिस और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को टैग करते हुए शेयर किया है। यूजर ने हैश टैग #bhagwalovetrap के साथ इसे शेयर किया है। लिखा है कि हिंदू दोस्त के साथ होने पर महिला की मुस्लिमों ने परेशान किया। वीडियो बनाया, जबकि वह ऐसा नहीं करने की गुजारिश कर रही थी।

वीडियो में आप देख सकते हैं कि बुर्के वाली लड़की को कुछ लोग घेरकर खड़े हैं। भीड़ में शामिल कुछ लोग इस्लामी टोपी में भी दिख रहे हैं। लड़की से साथ दिखे लड़के का नंबर माँगा जा रहा है। लड़की हाथ जोड़कर वीडियो न बनाने की गुजारिश करती है। इसके जवाब में भीड़ में से एक व्यक्ति कहता है, “वीडियो तो बनेगी, नंबर दे दो या तो।” इस मामले में जयपुर पुलिस ने मामले को संबंधित अधिकारियों को भेजने की बात कही है। हालाँकि यह वीडियो कब का और कहाँ का है, अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

दूसरा वायरल वीडियो भी जयपुर का ही होने का दावा किया जा रहा है। कुछ नेटीजेंस ने इसे रंगगंज मीना बाजार का तो कुछ इसे मुस्लिम बाहुल्य रामगंज का बता रहे हैं। इस वीडियो में सड़क से गुजर रही बुर्के वाली महिला को घेर कर भीड़ साथ चल रही है। इस भीड़ में कई नाबालिग भी हैं जो महिला पर फब्तियाँ कस रहे हैं। सड़क से गुजर रहे आसपास के अन्य लोग तमाशबीन बने हुए हैं। इस वीडियो के लिए भी दावा किया जा रहा है कि हिंदू दोस्त से बातचीत करने पर मुस्लिम भीड़ महिला को परेशान कर रही है। वैसे इस वीडियो को लेकर भी किए जा रहे दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

हालाँकि इस वीडियो के भी स्थान और समय की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।

गौरतलब है किहाल में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जब मुस्लिम महिला को इस्लामी भीड़ ने हिंदुओं के साथ दिखे जाने पर प्रताड़ित किया है। अप्रैल 2023 में अहमदाबाद के जुहापुरा इलाके से भी इसी तरह का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें एक लड़के के साथ खड़ी मुस्लिम लड़की को कुछ कट्टरपंथी डांट रहे थे। एक अन्य वीडियो UP के मेरठ से वायरल हुआ था, जहाँ एक पार्क में एक लड़के के साथ खड़ी हिजाब पहने एक लड़की को कुछ युवक वीडियो वायरल करने की धमकी दे रहे थे। इसी माह महाराष्ट्र के संभाजी नगर में एक लड़के के साथ घूम रही एक मुस्लिम लड़की को कट्टरपंथियों द्वारा प्रताड़ित करने का वीडियो वायरल हुआ था। लड़की का हिजाब खींचने की कोशिश भी की गई थी।

वसुंधरा राजे ने अशोक गहलोत को बताया झूठा, कहा- सबसे ज्यादा मुझे ही अपमानित किया: राजस्थान के CM ने काॅन्ग्रेसी सरकार बचाने में मदद का किया था दावा

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के दिए हालिया बयान पर बवाल है। उन्होंने कहा कि 2020 में जब सचिन पायलट सहित कुछ विधायक विद्रोह पर आ गए थे तब उन्हें भाजपा नेता वसुंधरा राजे का साथ मिला था। अब इसी बयान को लेकर राजे ने दावा किया है कि सीएम गहलोत झूठ बोल रहे हैं और ये उनका कोई षड्यंत्र है। उन्होंने गृहमंत्री अमित शाह पर लगाए गए आरोपों के कारण भी गहलोत पर निशाना साधा।

राजे ने कहा, “अशोक गहलोत ने जितना अपमान मेरा किया है उतना किसी का नहीं किया तो फिर मैं गहलोत की मदद कैसे कर सकती हूँ।” राजे ने कहा कि गहलोत ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वह 2023 में मिलने वाली हार से भयभीत हो गए हैं।

बता दें कि अशोक गहलोत ने धौलपुर के कार्यक्रम में राजे को लेकर अपना बयान दिया था। इस दौरान गहलोत ने कहा था, “जब वे कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष थे तो उन्होंने राज्य में भैरोंसिंह शेखावत के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को गिराने से मना कर दिया था। इसी तरह 2020 की बगावत के वक्त वसुंधरा राजे और मेघवाल ने कहा था कि राजस्थान में धन-बल के बूते चुनी हुई सरकारें गिराने की कोई परंपरा नहीं है।”

अशोक गहलोत ने यह भी कहा था, “मैं चाहता तो भैरों सिंह की सरकार गिरा सकता था। मैंने यह गलत काम नहीं किया। जो आदमी बीमार है, वह अमेरिका में इलाज करवा रहा है, उसकी हालत बहुत गंभीर थी और उनकी पार्टी के नेता उनके पीछे ही उनकी सरकार गिराने की साजिश कर रहे थे।”

इस दौरान उन्होंने अमित शाह पर निशाना साधते हुए पैसों की लेन-देन के आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि अमित शाह, गजेंद्र सिंह शेखावत और धर्मेंद्र प्रधान ने मिलकर उनकी सरकार गिराने की साजिश रची थी। उन्होंने राजस्थान में पैसा बाँटा था और अब वह उसे वापस नहीं ले रहे। गहलोत ने कहा था, “भाजपा के लोग तीन राज्यों में सरकार गिरा चुके हैं। ऐसे में मैंने अपने विधायकों को कहा था कि जिन लोगों ने शाह से 15 करोड़ रुपए लिए हैं वो लौटा दें। अगर 2 करोड़ खर्च भी हो गया है तो वो उसे AICC से दिलवा देंगे।”

गृहमंत्री अमित शाह पर लगाए सारे आरोपों पर वसुंधरा राजे ने कहा, “उन्होंने उस गृहमंत्री अमित शाह पर आरोप लगाया है, जिनकी ईमानदारी और सत्य निष्ठा सर्व विदित है।” राजे ने कहा कि रिश्वत लेना और देना दोनों अपराध हैं, यदि उनके विधायकों ने पैसा लिया है तो एफआईआर दर्ज करवाएँ। सच तो यह है कि अपनी ही पार्टी में हो रही बग़ावत और रसातल में जाते जनाधार के कारण बौखलाहट में उन्होंने ऐसे झूठे आरोप लगाए हैं।

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि विधायकों की ख़रीद फ़रोख़्त में तो अशोक गहलोत स्वयं महारथी हैं। उन्होंने 2008 और 2018 में अल्पमत में होने के बाद यही काम किया था। उस वक्त न भाजपा को बहुमत मिला था और न ही कॉन्ग्रेस को। उस समय चाहते तो हम भी सरकार बना सकते थे, पर यह भाजपा के सिद्धांतों के खिलाफ था। मगर तब गहलोत ने अपने लेन देन के माध्यम से विधायकों की व्यवस्था कर दोनों समय सरकार बनाई थी। वे 2023 के चुनाव में होने वाली ऐतिहासिक हार से बचने के लिए ऐसी मनगढ़ंत कहानियाँ गढ़ रहें है,जो दुर्भाग्य पूर्ण है पर उनकी ये चाल कामयाब होने वाली नहीं है।