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राजस्थान में अब पायलट ने खुलकर भरी उड़ान, 11 मई से करेंगे पदयात्रा: कहा- अशोक गहलोत की नेता सोनिया गाँधी नहीं, वसुंधरा राजे हैं

राजस्थान में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। उससे पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) और कभी उनके डिप्टी रहे सचिन पायलट (Sachin Pilot) की लड़ाई अब खुलकर सामने आई है। गहलोत के आरोपों का जवाब देते हुए पायलट ने कहा है कि उन्हें निकम्मा, नाकारा, गद्दार कहा गया। फिर भी वे चुप रहे, क्योंकि वे पार्टी को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहते थे। साथ ही उन्होंने 11 मई से ‘जन संघर्ष यात्रा’ शुरू करने की भी घोषणा की है।

पायलट ने मंगलवार (9 मई 2023) को जयपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई की थी। इस दौरान उन्होंने कहा कि अशोक गहलोत के भाषण को सुनकर ऐसा लग रहा है जैसे उनकी नेता सोनिया गाँधी नहीं, बल्कि वसुंधरा राजे सिंधिया हैं। एक ओर यह कहा जा रहा है कि बीजेपी कॉन्ग्रेस सरकार को गिराने की कोशिश कर रही थी। वहीं दूसरी ओर यह कहा जा रहा है कि वसुंधरा राजे सरकार को बचा रहीं थीं। सीएम अशोक गहलोत को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर वह क्या कहना चाहते हैं। उनके इस बयान को वीडियो में 2:20 मिनट के बाद से सुना जा सकता है।

पायलट ने कहा कि उन्हें निकम्मा, नकारा, गद्दार के साथ ही बहुत कुछ कह गया। वह ढाई साल से यह सब सुन रहे थे। वह पार्टी को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहते थे, इसलिए चुप थे। लेकिन अब अपने ही सरकार के नेताओं को बेइज्जत किया जा रहा है और भाजपा का गुणगान किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अशोक गहलोत ने जो आरोप लगाए हैं वह पहली भी कई बार लगाए जा चुके हैं। सीएम ने पार्टी नेताओं का अपमान किया है। उन्होंने ऐसे नेताओं पर आरोप लगाए हैं जो राजनीति में 40-45 साल से काम कर रहे हैं। उनके क्षेत्र के लोग जानते हैं कि वह कैसे नेता हैं, कैसा काम करते हैं। पायलट ने बताया कि वह 11 मई से पद यात्रा निकालेंगे। यह यात्रा अजमेर से जयपुर तक जाएगी। उन्होंने कहा कि 125 किलोमीटर लंबी यह यात्रा सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि युवाओं के लिए होगी।

गहलोत ने पिछले दिनों दावा किया था कि उनकी सरकार को गिराने के लिए पार्टी के कुछ विधायकों ने अमित शाह से पैसे लिए थे। साथ ही कहा था कि सरकार बचाने में बीजेपी नेता वसुंधरा राजे ने उनकी मदद की थी। उन्होंने कहा था, “जब वह कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष थे तो उन्होंने राज्य में भैरोंसिंह शेखावत के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को गिराने से मना कर दिया था। इसी तरह 2020 की बगावत के वक्त वसुंधरा राजे और मेघवाल ने कहा था कि राजस्थान में धन-बल के बूते चुनी हुई सरकारें गिराने की कोई परंपरा नहीं है।”

वसुंधरा ने गहलोत के इन दावों को झूठ करार दिया था। इसे अपने खिलाफ षड्यंत्र बताया था। उन्होंने कहा था, “अशोक गहलोत ने जितना अपमान मेरा किया है उतना किसी का नहीं किया तो फिर मैं गहलोत की मदद कैसे कर सकती हूँ।” राजे ने कहा कि गहलोत ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वह 2023 में मिलने वाली हार से भयभीत हो गए हैं।

एक मर्डर का राज दबाने के लिए पुलिसकर्मी सहित गवाह की भी हत्या… फिर बिहारी मजदूरों पर बरसाई गोलियाँ: मुख्तार अंसारी ऐसे पैदा करता था खौफ

कभी अपराध ही नहीं भय और आतंक का दूसरा नाम रहे माफिया मुख़्तार अंसारी के आपराधिक जीवन की पड़ताल में ऑपइंडिया की टीम लगभग 1 सप्ताह पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में रही। इस दौरान हमने कही-सुनी बातों पर ध्यान न देकर सीधे उन परिवारों से भी सम्पर्क साधा, जो कहीं न कहीं किसी न किसी रूप में मुख़्तार अंसारी के अपराध से प्रभावित हुए हैं।

मुख़्तार अंसारी द्वारा सताए गए लोगों की तादाद हमें सैकड़ों में बताई गई लेकिन पीड़ित होने के बाद भी अपनी व्यथा बताने का साहस काफी कम लोग ही कर पा रहे थे। उन तमाम पीड़ितों में एक नाम है अशोक सिंह का, जो मऊ जिले के रहने वाले हैं। मुख़्तार अंसारी ने अशोक सिंह के चचेरे भाई अजय उर्फ़ मन्ना सिंह की हत्या मऊ जिले में ही करवा दी थी।

2009 में हुई थी मन्ना सिंह की हत्या

अशोक सिंह ने हमें बताया कि उन्होंने मुख़्तार अंसारी के खिलाफ अपनी आवाज तब भी बुलंद रखी, जब वह आज की तमाम विपक्षी पार्टियों की सरकारों में पूरे रुतबे में हुआ करता था। भाई की हत्या का जिक्र करते हुए अशोक सिंह ने बताया कि 29 अगस्त 2009 को मुख़्तार अंसारी ने उनके भाई अजय उर्फ़ मन्ना सिंह की मऊ शहर में गोली मरवा कर हत्या करवा दी थी। हत्या की वजह उन्होंने अजय द्वारा अपनी मेहनत की कमाई से गुंडा टैक्स न देना बताया।

हत्या के बाद गवाह का भी पुलिसकर्मी सहित कत्ल

अशोक सिंह ने आगे बताया कि उनके भाई मन्ना सिंह की हत्या के चश्मदीद गवाह राम सिंह मौर्य थे। राम सिंह मौर्य की भी 19 मार्च 2010 को मऊ शहर में हत्या करवा दी गई। गवाह राम सिंह मौर्य को सुरक्षा के लिए गनर तौर पर UP पुलिस के कॉन्स्टेबल सतीश मिले थे, जो इस हमले में बलिदान हो गए। इस मामले में भी मुख़्तार अंसारी को आरोपित किया गया था, जिसका केस फ़िलहाल चल रहा है।

जिस शब्बीर को दी नौकरी, उसी ने दिया धोखा

अशोक सिंह के मुताबिक उनके भाई की हत्या के दौरान 2 लोग घायल भी हुए थे। इन घायलों में पहले राजेश राय थे और दूसरे मृतक अजय सिंह उर्फ़ मन्ना के ड्राइवर शब्बीर उर्फ़ राजा। राजेश राय की कुछ दिनों बाद मृत्यु हो गई थी जबकि ड्राइवर शब्बीर ‘पक्षद्रोही’ हो गया था।

पक्षद्रोही मतलब गवाह शब्बीर ने कोर्ट में मुख़्तार अंसारी का पक्ष ले लिया। मतलब जिसकी गोलियों से घायल हुआ, उसी के पक्ष में गवाही दी। अशोक सिंह बताते हैं कि अब शब्बीर अपना निजी इलेक्ट्रिक रिक्शा आदि चलाता है, जो सम्भवतः उसे मुख़्तार अंसारी ने खरीद कर दिया है।

बिहारी मजदूरों पर बरसाई गोलियाँ

अशोक सिंह आगे बताते हैं कि जब उन्होंने अपने भाई के लिए न्याय की लड़ाई में पीछे न हटने का एलान किया, तब उन्हें मुख़्तार फर्जी मामलों में फँसाने की साजिश रचने लगा। बकौल अशोक सिंह मुख़्तार अंसारी ने इस साजिश को अंजाम देने के लिए साल 2014 में आज़मगढ़ के थानाक्षेत्र तरवाँ में अपने ही सहयोगियों के यहाँ काम कर रहे बिहारी मजदूरों पर गोलियाँ बरसा दीं।

इस हमले में एक मजदूर की मौत हो गई थी, जबकि दूसरा घायल हुआ था। बाद में इस केस में अशोक सिंह और उनके चचेरे भाई हरेंद्र सिंह को हत्या का आरोपित बनाया गया था।

इस मामले में तत्कालीन एसएसपी आज़मगढ़ IPS अनंतदेव त्रिपाठी की तारीफ करते हुए अशोक सिंह ने बताया कि उन्होंने सही से जाँच करवाई तो उल्टा केस खुद मुख़्तार पर दर्ज हुआ और वो तथा उनके भाई केस से बरी हुए। अशोक सिंह के अनुसार मुख़्तार अंसारी इसी प्रकार अपने ही लोगों को मरवा कर दूसरों को फँसाने में माहिर है।

अतीक, शहाबुद्दीन ही नहीं विदेशों तक कनेक्शन

अशोक सिंह ने माफिया मुख़्तार अंसारी का आपराधिक नेटवर्क अतीक अहमद और शहाबुद्दीन के साथ जुड़ा बताया। उन्होंने दावा किया कि सही से जाँच होने पर अंसारी गैंग का विदेशी नेटवर्क भी मिलेगा। VHP नेता रूंगटा की हत्या की याद दिलाते हुए अशोक सिंह ने बताया कि मुख़्तार किसी की हत्या करने से पहले उसे अपने विश्वास में लेता था। उन्होंने मुख़्तार की फितरत पीठ में छुरा घोंपने वाली बताया। अशोक सिंह के मुताबिक मऊ दंगों में भी मुख़्तार का बड़ा हाथ था।

गौरतलब है कि मुख्तार अंसारी के आपराधिक कुकर्मों का चिट्ठा खोलने ऑपइंडिया के पत्रकार राहुल पांडेय कई दिनों तक ग्राउंड पर थे। वहाँ उन्होंने मुख्तार के खौफ की कई कहानियाँ दंगों के चश्मदीदों से जानीं। इस दौरान यह भी पता चला कि कैसे मुख्तार के डर से पुलिस सूअर पकड़ने पानी में घुस जाती थी, थाने से फाइलें गायब करवा दी जातीं थी, पत्रकारों को पीटा जाता था, मंदिरों की जमीन कब्जाई जाती थी और उसके द्वारा गोतस्करी जैसे अपराध करवाए जाते थे। आप लिंक पर क्लिक करके उनकी रिपोर्ट पढ़ सकते हैं।

‘द केरल स्टोरी’ पर रोक के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुँचे कपिल सिब्बल, सुनवाई को तैयार हो गए CJI: पश्चिम बंगाल में बैन को फिल्ममेकर्स ने दी चुनौती

फिल्म द केरल स्टोरी (The Kerala Story) पर रोक लगाने को लेकर कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ से इस मामले की जल्द सुनवाई का अनुरोध किया। शीर्ष अदालत उनकी याचिका पर 15 मई 2023 को सुनवाई को राजी हो गया है। सिब्बल ने अपनी याचिका में केरल हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार कर दिया गया था।

वहीं, ‘द केरल स्टोरी’ पर पश्चिम बंगाल में लगे बैन को हटाने की माँग को लेकर फिल्ममेकर्स ने भी सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। फिल्ममेकर्स ने अपनी याचिका में तमिलनाडु सरकार को राज्य में फिल्म दिखाने वाले सिनेमाघरों को सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश देने की भी भी गुहार लगाई है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार (8 मई 2023) को इस फिल्म पर बैन लगाने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि यह फैसला राज्य में नफरत, हिंसा रोकने और शांति बरकरार रखने के लिहाज से लिया गया है। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने दिल्ली के एक सिनेमाहॉल में यह फिल्म देखने के बाद मीडियाकर्मियों से कहा था, “यह मेरी समझ से परे है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) प्रमुख की सहानुभूति आतंकवादी संगठनों के साथ है, न कि केरल की मासूम लड़कियों के साथ। पश्चिम बंगाल इस फिल्म को बैन करके बहुत बड़ा अन्याय कर रहा है।”

गौरतलब है कि केरल हाईकोर्ट ने 5 मई 2023 को इस फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। जस्टिस एन नागरेश और जस्टिस सोफी थॉमस की पीठ ने कहा था कि इस फिल्म में इस्लाम या मुस्लिमों के खिलाफ कुछ भी नहीं है। ‘द केरल स्टोरी’ फिल्म आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) के बारे में है।

अदालत ने यह भी कहा था कि किसी भी याचिकाकर्ता ने फिल्म नहीं देखी है। फिल्म के ट्रेलर को देखकर लगता है कि इसमें किसी समुदाय विशेष के लिए कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है। ऐसी कई फिल्में हैं, जिनमें हिंदू संन्यासियों को तस्कर या बलात्कारी के रूप में दिखाया गया है। लेकिन कोई विरोध नहीं करता। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी ‘The Kerala Story’ की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

द केरल स्टोरी पर चतुराई शबाना आजमी को पड़ी भारी: नेटिजन्स ने समझाया बॉयकाट और बैन का फर्क, इस्लाम परस्तों ने जाहिल तक बता डाला

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने लव जिहाद पर बनी फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ (The Kerala Story) पर बैन लगा दिया है। तमिलनाडु के मल्टीप्लेक्स में फिल्म की स्क्रीनिंग रोक दी है। वहीं, स्व-घोषित उदारवादी और इस्लामवादी लगातार फिल्म के बैन की माँग कर रहे हैं। इसी बीच बॉलीवुड अभिनेत्री शबाना आजमी (Shabana Azmi) ने सुदीप्तो सेन के निर्देशन में बनी फिल्म पर बैन लगाने की माँग करने वालों को गलत ठहराया है।

उन्होंने सोमवार (8 मई 2023) को ट्वीट किया, “जो लोग ‘द केरल स्टोरी’ पर बैन लगाने की बात करते हैं, वे उतने ही गलत हैं, जितने कि वे लोग जो आमिर खान की ‘लाल सिंह चड्ढा’ पर बैन लगाना चाहते थे। एक बार किसी फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से सर्टिफिकेट मिल जाता है तो फिर किसी भी दूसरे कॉन्स्टिट्यूशन अथॉरिटी का कोई रोल नहीं रह जाता।”

शबाना आजमी ने अपने ट्वीट में भले ही ‘द केरल स्टोरी’ पर बैन लगाने की माँग करने वालों को गलत ठहराया हो, लेकिन इस​के जरिए उन्होंने बेहद चतुराई से उन लोगों पर निशाना साधा है, जिन्होंने आमिर खान की फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ (Laal Singh Chaddha) का बॉयकाट किया।

शबाना आजमी को इस चतुराई पर नेटिज़न्स ने जमकर लताड़ा। उन्होंने कहा कि हॉलीवुड की रीमेक ‘लाल सिंह चड्ढा’ पर कभी किसी ने बैन लगाने की बात नहीं की थी। कई लोगों ने बॉलीवुड और उसके ए-लिस्टर्स की हिंदू विरोधी मानसिकता के कारण फिल्म का बॉयकाट करने का आह्वान किया था। बॉयकाट या बहिष्कार का मतलब, बैन नहीं होता है। बैन का अर्थ फिल्म को दिखाने पर रोक लगाना है। वहीं, बहिष्कार का आह्वान विरोध जताने का एक वैध जरिया है, जहाँ लोग अपनी स्वेच्छा से फिल्म देखने नहीं जाते हैं, जिसकी स्क्रीनिंग की जा रही है।

शबाना आजमी के ट्वीट को लेकर कई लोगों ने बैन और बॉयकाट का अर्थ स्पष्ट किया। एक यूजर ने लिखा, “शबाना जी, आपने सही कहा है कि जब किसी फिल्म को सेंसर बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन से सर्टिफिकेट मिल जाता है तो उस फिल्म पर, प्रतिबंध लगाने की माँग करना सही नहीं है। लेकिन आपको बस यह बताना था कि ‘द केरल स्टोरी’ पर प्रतिबंध लगाने की माँग की जा रही है, जबकि ‘लाल सिंह चड्ढा’ के कभी भी बैन की बात नहीं की गई।”

इसके अलावा अन्य यूजर्स ने भी इस चतुराई भरी अज्ञानता पर शबाना आजमी को घेरा।

इसके बाद शबाना आजमी ने मंगलवार (9 मई 2023) को एक न्यूज का स्क्रीनशॉट साझा किया, जिसमें ‘लाल सिंह चड्ढा’ पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक जनहित याचिका दायर करने का जिक्र किया गया है। इस तरह उन्होंने अपनी गलती को सही ठहराने का प्रयास किया।

भले ही यह एक जनहित याचिका थी, लेकिन लाल सिंह चड्ढा पर प्रतिबंध को लेकर वैसी कोई सक्रियता नहीं दिखी थी जैसा द केरल स्टोरी को लेकर दिख रहा है।

वैसे हिंदू नेटिजन्स ने शबाना आजमी को उत्तर देते हुए उनके ट्वीट की तथ्यात्मक त्रुटि से अवगत कराया। लेकिन इस्लाम परस्तो ने उनको उत्तर देने में कोई विनम्रता नहीं दिखाई। AltNews के सह-संस्थापक प्रतीक सिन्हा की माँ निर्झरी सिन्हा ने दावा किया कि ‘द केरल स्टोरी’ एक प्रोपेगेंडा फिल्म है। उसने बैन को सही ठहराया है। ध्यान रहे कि AltNews इस्लामवादियों के पक्ष में माहौल बनाने और उनकी हिंसा को क्लीनचिट देने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाता रहा है।

इसी तरह इरेना अकबर नाम की यूजर्स ने तो शबाना आजमी को ‘जाहिल और बेईमान’ तक कह दिया।

बता दें कि ‘द केरल स्टोरी’ के क्रू मेंबर के साथ-साथ प्रशंसकों को भी धमकियाँ मिल रही हैं। पुणे में इस फिल्म को देखने के लिए लोगों को फ्री राइड देने का एलान करने वाले ऑटो ड्राइवर साधु मगर को भी जान से मारने की धमकियाँ मिल रही हैं। साधु ने पुलिस में देश-विदेश के कुछ अनजान नंबरों की शिकायत देते हुए अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।

‘द केरल स्टोरी बनाने वाले को सरेआम फाँसी देनी चाहिए’: NCP नेता की डिमांड, कभी की थी शहीद इशरत जहाँ एंबुलेंस सेवा की शुरुआत

शरद पवार की पार्टी राष्ट्रवादी काॅन्ग्रेस पार्टी (NCP) के विधायक जितेंद्र आव्हाड (Jitendra Awhad) ने फिल्म द केरल स्टोरी (The Kerala Story) के निर्माता को सार्वजनिक तौर पर फाँसी देने की डिमांड की है। अतीत में हिंदू त्योहारों को दंगों का कारण बता चुके आव्हाड ने कभी आतंकी इशरत जहाँ के नाम पर एंबुलेंस सेवा की शुरुआत भी की थी। हाल में जब पवार ने एनसीपी अध्यक्ष पद छोड़ने का ऐलान किया था तो उनके समर्थन में इस्तीफा देने वालों में भी आव्हाड थे।

जितेंद्र आव्हाड ने कहा है, “द केरल स्टोरी के नाम पर एक राज्य और वहाँ की महिलाओं को बदनाम किया जा रहा। आधिकारिक आँकड़ा 3 का था, लेकिन इसे 32000 के तौर पर पेश किया गया। इस काल्पनिक फिल्म को बनाने वाले को सार्वजिनक रूप से फाँसी देना चाहिए।” उल्लेखनीय है कि द केरल स्टोरी का निर्देशन सुदीप्तो सेन ने किया है जबकि इसके निर्माता विपुल अमृतलाल शाह हैं।

इससे पहले जितेंद्र आव्हाड ने एक ट्वीट में केरल की साक्षरता समेत अन्य मुद्दों का जिक्र करते ‘द केरल स्टोरी’ को ‘झूठी फिल्म’ करार दिया था। उन्होंने लिखा था फिल्म में जैसा दिखाया गया है, सच्चाई उसके उलट है। 32000 महिलाओं का आँकड़ा फिल्म चलाने के लिए बताया जा रहा है। इस फिल्म में यह दिखाने की कोशिश की गई है कि महिलाएँ मूर्ख हैं और उन्हें कुछ भी समझ नहीं आता। फिल्म में महिलाओं को पुरुषों से कमजोर दिखाया गया है। यही फिल्म की सच्चाई है। इस तरह की फिल्में नफरत और हिंसा फैलाकर चुनाव जीतने के लिए बनाई जाती हैं।

बता दें कि 2016 में मुंबई में लश्कर-ए-तैयबा आतंकी इशरत जहाँ के नाम पर एंबुलेंस सेवा शुरू की गई थी। इसकी लॉन्चिंग में भी आव्हाड भी शामिल हुए थे। यही नहीं, आव्हाड हिंदुओं के प्रमुख त्योहार राम नवमी और हनुमान जयंती को दंगों की वजह भी करार दे चुके हैं। न्होंने कहा था कि लगता है जैसे रामनवमी और हनुमान जयंती सिर्फ दंगों के लिए ही मनाई जाती है।

पश्चिम बंगाल में ‘द केरल स्टोरी’ बैन

उत्तर प्रदेश में ‘द केरल स्टोरी’ टैक्स फ्री हो गई है। वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने फिल्म को राज्य में बैन कर दिया है। ममता ने कहा है कि यह फैसला राज्य में नफरत और हिंसा को रोकने तथा शांति बरकरार रखने के लिहाज से लिया गया है।

बता दें कि ‘द केरल स्टोरी’ (The Kerala Story) फिल्म की कहानी ISIS में शामिल की जाने वाली लड़कियों के साथ घटित घटनाओं पर आधारित है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे एक एजेंडे के तहत दूसरे धर्म की लड़कियों को बहलाकर इस्लाम कबूल करवाया जाता है, फिर उन्हें आतंकी बनाकर ISIS में भेज दिया जाता है। फिल्म में अदा शर्मा ने शालिनी उन्नीकृष्णन का रोल निभाया है।

झाड़-फूँक करने घर आया उस्मान अली, करने लगा रेप: महिला ने काट दिया प्राइवेट पार्ट, असम की घटना

असम में उस्मान अली नाम के एक शख्स का महिला ने प्राइवेट पार्ट काट दिया। महिला का कहना है कि उस्मान ने उसके साथ रेप करने की कोशिश की थी। उस्मान अली के झाड़-फूँक करने के बहाने महिला के घर आया था। घटना सोमवार (8 मई 2023) की है। महिला मोरीगाँव जिले के भूरागाँव थाना क्षेत्र के बोरालीमारी की रहने वाली है। वहीं उस्मान असम के ही दरांग जिले का रहने वाला है।

भूरागाँव के पुलिस प्रभारी हेमंत बोरगोहैन के हवाले से न्यूज एजेंसी एएनआई ने बताया है कि घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुँची। घायल उस्मान को बेहतर उपचार के लिए गुवाहाटी भेजा गया है। उन्होंने बताया कि महिला की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जाँच की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक महिला को कोई संतान नहीं है। वह अपनी समस्या लेकर उस्मान के पास जाया करती थी। सोमवार को उस्मान झाड़-फूँक करने उसके घर आया था। इसी दौरान उसने कथित तौर पर रेप का प्रयास किया। खुद को बचाने के लिए महिला भागी और आत्मरक्षा में धारदार वस्तु से उस्मान का प्राइवेट पार्ट काट दिया।

सोशल मीडिया में एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। इसमें उस्मान अस्पताल के स्ट्रेचर पर लेटकर रोता दिख रहा है।

MP के बाद अब UP में भी ‘द केरल स्टोरी’ टैक्स फ्री, कैबिनेट के साथ फिल्म देखेंगे CM योगी आदित्यनाथ: बंगाल में बैन को डिप्टी सीएम ने बताया तुष्टिकरण

मध्य प्रदेश के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी फिल्म ‘द केरल स्टोरी (The Kerala Story)’ को टैक्स फ्री कर दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस फिल्म को अपनी कैबिनेट के साथ देखेंगे भी। उत्तर प्रदेश सरकार ने यह फैसला ऐसे वक्त में लिया है, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में फिल्म पर रोक लगा दी है। इसको अदालत में चुनौती देने की बात फिल्म के निर्माता विपुल अृमतलाल शाह ने कही है।

उत्तर प्रदेश में फिल्म टैक्स फ्री करने की जानकारी CM योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट कर दी है। मंत्रिमंडल के साथ 12 मई 2023 को लखनऊ में वे फिल्म देखेंगे। वहीं UP के उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने इसे फिल्म को बैन करने के लिए बंगाल की ममता सरकार की आलोचना की है।

चित्र साभार- @Myogioffice

उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने राज्य में फिल्म को टैक्स फ्री करने पर ख़ुशी जताई है। उन्होंने कहा, “प्रदेश के लोग इसे देखें और समझें कि हिंदुस्तान के दूसरे भूभाग में किस ढंग से हमारी बहनों के साथ अत्याचार और दुर्व्यवहार हो रहा है। सतर्कता बरतते हुए अपने परिवार को और बच्चों को सँभाले। केरल स्टोरी बनाने वालों को बहुत-बहुत बधाई।”

पाठक ने पश्चिम बंगाल में द केरल फाइल्स पर लगे बैन को तुष्टिकरण बताया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता कभी इसे स्वीकार नहीं करेगी। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश से पहले मध्य प्रदेश में द केरल स्टोरी को टैक्स फ्री किया गया था। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक बयान जारी करते हुए कहा था कि यह फिल्म आतंकवाद और उसकी साजिशों का भंडाफोड़ करती है।

द केरल स्टोरी: मुल्ला के इस्लाम की कहानी, भारत के अंतहीन दुर्भाग्य की कथा

यह भारत के दुर्भाग्य की कथाएँ हैं। अंतहीन दुर्भाग्य की रुला देने वाली आपबीतियाँ। यह किसी मिशनरी या मजहब की बात ही नहीं है। यह भारत को तिल-तिलकर नष्ट करने के प्रयासों की एक सामान्य सी झलक है, जो केरल की पृष्ठभूमि से सिनेमा के परदे पर प्रस्तुत हुई है। मैं ‘द केरल स्टोरी (The Kerala Story) ‘ की बात कर रहा हूँ। एक फिल्म, जो इन दिनों सर्वाधिक चर्चा में हर कहीं हाऊस फुल है। होनी भी चाहिए।

5 मई 2023 को सिनेमाघरों में लगी इस फिल्म को मैंने रिलीज होने के चौथे दिन देखा। यह किसी कोण से किसी भी धर्म विशेष को अपमानित नहीं करती। धर्मांतरण भारत के लिए नया विषय नहीं है। छल और बल से यह होता ही रहा है। अखंड भारत के तीन टुकड़ों में जनसांख्यिकी का विस्तार सदियों के उसी फैलाव का फल है। यह फिल्म केरल में जारी धर्मांतरण के सर्वाधिक भयावह पक्ष को संसार के सामने लाती है।

किसी पारसी, सिख, ईसाई या हिंदू कन्या से किसी मुस्लिम का प्रेम या विवाह कोई नया विषय नहीं है। हर शहर में बीते तीस वर्षों की घटनाएँ और उनके पात्रों का स्मरण कीजिए। उनकी कहानियों के अपडेट लेना समाज के लिए जरूरी है कि वे किस हाल में कहाँ कैसा जीवन जी रही हैं? संभव है कि वे बहुत सुखी परिवारों में अपने बड़े होते बच्चों के साथ हमारे बीच आएँ, जहाँ धर्म कोई बाधा नहीं है।

हो सकता है कि नमाज के साथ पर्यूषण, अग्निपूजा, शबद गायन और रुद्राभिषेक उन परिवारों में सब मिलकर कर रहे हों। तिलक भी लगा हो, टोपी भी सजी हो। हो सकता है वह प्रेम दो धर्मों को एक धारा में लेकर अब तक चल रहा हो। किंतु इसका बहुत उल्टा भी संभव है। कि भावुक कन्या के सिर से प्रेम का भूत साल भर में उतर गया हो। उन्हें अपना धर्म और अपना अतीत छोड़ना पड़ा हो, वे दूसरी या तीसरी बीवी बनी हों। उन्हें इसी जीवन में दोजख के विराट दर्शन हो गए हों। कुछ भी हो सकता है। मगर यह गहरे सामाजिक शोध का विषय है, जिस पर विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों को परिश्रमपूर्वक बहुत गहरे काम की आवश्यकता है।

कोई गैर मुस्लिम कन्या किसी मुस्लिम युवक के साथ विवाह संबंधों में चली गई, उसने इस्लाम कुबूल भी कर लिया लेकिन जीवन चल रहा है, बच्चे बड़े हो रहे हैं, वे हमारे ही समाज में अब स्वीकार्य युगल हैं, बात इतनी सरल भी हो तो कोई बात नहीं। ‘द केरल स्टोरी’ सर्वाधिक भयावह पक्ष इसलिए है कि वहाँ प्रेम एक जाल है, जिसमें फँसाने की सुनियोजित चालें हैं और उनके पीछे कुछ चेहरे हैं, उनके स्पष्ट उद्देश्य हैं।

यह 2014 में सीरिया में इस्लामिक स्टेट (ISIS) के उभार के समय हुई सत्य घटनाओं की कथा है, शालिनी उन्नीकृष्णन इसकी केंद्रीय पात्र है। शालिनी की तीन और सहेलियाँ हैं, जो केरल के कासरगोड जिले के एक नर्सिंग कॉलेज में डिग्री लेने पहुँचती हैं। केरल के एक सिरे पर है तिरुवनंतपुरम और दूसरे सिरे पर है कासरगोड, जो कर्नाटक के मेंगलोर से सटा लगभग शत-प्रतिशत मुस्लिम इलाका है।

आसिफा नाम की एक स्थानीय सहपाठी उन्हें होस्टल में मिलती है। आसिफा उस गिरोह की एक निचली कड़ी है, जिसे गैर मुस्लिम खूबसूरत लड़कियों को गिरोह के दूसरे सहभागी मुस्लिम लड़कों के नजदीक लाना है। उनके मस्तिष्क में अपने मूल धर्म के विरुद्ध बीज बोने हैं और इस्लाम की काल्पनिक महिमा प्रस्तुत करनी है। वह अपने मिशन पर बाहिजाब है। तीनों गैर मुस्लिम लड़कियाँ केवल उसका अगला शिकार हैं, अंतिम नहीं।

इन लड़कियों को प्रेमजाल में फँसाकर ड्रग की लत लगाना अगला चरण है, जिसमें अब आसिफा के कुछ मुस्लिम युवा मित्र और परिजन भी जुड़ गए हैं। ड्रग की चपेट में लाने के बाद आकर्षक गंगा-जमनी माहौल में उनके साथ शारीरिक संबंध बनाना और गर्भवती करना उनके लिए सरल है। ऐसा ही होता है। शालिनी और उसकी एक और सहेली इस दलदल में उतर जाती हैं। तीसरी नेमाह थोड़ा बचकर चलती है। वह ईसाई है।

गर्भवती शालिनी को एक दिन बताया जाता है कि उसका पार्टनर तो विदेश चला गया है। होने वाले बच्चे की खातिर उससे निकाह के लिए अब दूसरा पात्र सामने लाया जाता है। शालिनी की सहेली निकाह के लिए तैयार नहीं होती तो उसके अश्लील वीडियो पहले ही बनाकर रखे गए होते हैं, जो एक दिन इंटरनेट पर डाल दिए जाते हैं। वह आत्महत्या करती है। शालिनी कोलंबो से अफगानिस्तान होकर सीरिया में इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों में जुड़ने जा रहे अपने नए शौहर के साथ रास्ते में एक संतान को जन्म देती है। अभी उसे और धोखे और अपमान से गुजरना शेष है।

हर दृश्य प्रभावी ढँग से अगले दृश्य तक कहानी को लेकर जा जाता है। आप गहरे सन्नाटे से घिरे एक ऐसी कथा को परदे पर देखते हैं, जो हजारों लड़कियों ने अपने जीवन में भोगी और यह सदियों पहले गुलामों के बाजार में बेची गई लड़कियों की बहुत दूर की कहानियाँ नहीं हैं। यह अजमेर की उन बदकिस्मत स्कूली बच्चियों की दारुण कथा भी नहीं है, जिन्हें चालीस साल पहले संगठित गिरोह ने ऐसे ही जालों में फँसाकर जाने कब तक ब्लैकमेल किया था! गूगल और यूट्यूब पर उनकी सत्य कथाएँ देखिए कि वे कौन लोग थे?

अजमेर हो या केरल, वे लड़कियाँ आज भी कहीं न कहीं हैं। यह वर्तमान है और यह उनका भोगा हुआ सच है। वह सब आज भी बंद नहीं हुआ है। शालिनी का जीवन नष्ट करने वाला कथित मुस्लिम प्रेमी केरल में पिज्जा की दुकान चला रहा है। शालिनी उसका अंतिम शिकार नहीं ही होगी। वह आज भी शिकार पर हो सकता है! आसिफा अकेली नहीं होगी। हर शहर में सैकड़ों आसिफाएँ अपने काम पर लगी होंगी। एक ऐसे काम पर, जो अल्लाह ने ही उन्हें दिया है। एक ऐसा अल्लाह, जो उनके अनुसार सर्वश्रेष्ठ है, जिससे किसी भगवान की तुलना करना भी पाप है!

जब दूसरे मुस्लिम युवक के साथ गर्भवती शालिनी का निकाह हो रहा होता है तो उसकी बेबस माँ रोती-पड़ती वहाँ तक आती है। आसिफा उसे ढाँढस बँधाती है। कहती है- अब वह शालिनी नहीं है। वह फातिमा है। आप लौट जाइए। अल्लाह सब ठीक करेगा!

यह सही है कि अल्लाह सब ठीक करेगा मगर इस्लाम के महान दर्शन में अल्लाह किसका ठीक करेगा, क्या वाकई? बार-बार यह बात दोहराई गई है कि काफिरों को दोजख की आग में वह जलाने वाला है और वह आग सामान्य आग से 70 गुना ज्यादा तेज होगी। इसलिए इस्लाम कुबूल करो!

यह फिल्म हर उस परिवार को देखनी चाहिए, जिसके यहाँ बेटी है, जिसके संबंधियों में किसी के यहाँ भी एक बेटी है और जिसके पड़ोस में किसी भी घर में एक बेटी है। यह सबको मिलकर देखना चाहिए। सब बेटियों को भी, जो पढ़ने के लिए स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी तक जाती हैं। अपने गाँव-घर से दूर होस्टल और किराए के कमरों में रहती हैं।

यह तय मानिए कि कोई न कोई उनके शिकार पर किसी नुक्कड़ पर बाइक लिए खड़ा है। वह क्लासरूम में भी हाे सकता है। पड़ोस के फ्लैट में भी। जरूरी नहीं कि वह सीरिया या अफगानिस्तान में आतंकी बनने के लिए ही ले जाने के लिए खड़ा हो। किंतु यह अटल सत्य है कि वह आपसे आपका धर्म, आपका परिवार, आपकी परंपराएँ, आपका अतीत सदा के लिए छीनने के लिए ही घात लगाए है। एक बार आगे बढ़ने के बाद आपसे आपका नाम और आपकी पहचान सब कुछ छिन जाने वाला है।

यह क्यों होगा, यह समझने के लिए इस्लाम का डिजाइन हर गैर मुस्लिम को ठीक से पता होना चाहिए। कोई स्कूल-कॉलेज में यह नहीं पढ़ाएगा, लेकिन धर्मों के तुलनात्मक अध्ययन पर समाज में चर्चाएँ होना जरूरी हैं। घरों में अपने धर्म की सर्वश्रेष्ठ सीखें बच्चों को बताएँ। सामाजिक संगठन और स्टडी सर्कल नियमित रूप से तुलनात्मक अध्ययन की कक्षाएँ शुरू करें। एक युवा मुस्लिम भी प्रेम की ओर पहला कदम बढ़ाते हुए शायद नहीं समझता होगा कि वह जाने-अनजाने उस गैर मुस्लिम लड़की से क्या कुछ छीन लेने वाला है। वह इस्लाम के डिजाइन में एक मामूली टूल है और संगठित सियासी या आतंकी गिरोह हर प्रकार के नटबोल्ट, पाने, पेंचकस से भरीपूरी एक टूलकिट!

और फिल्म को लेकर इसी बिंदु पर आग लगी हुई है। दाढ़ियाँ और टोपियाँ सुलगी हुई हैं। क्योंकि काफिर और मोमिन का दर्शन एक ऐसे विचार से उपजा है, जिसे वे इस्लाम कहते हैं। उसमें एक ऐसे अल्लाह का आविष्कार है, जो काफिरों और बुतखानों को नष्ट करने पर ही अड़ा हुआ बैठा है। सदियों से इस हम्माली में सबको लगाया हुआ है। हर मोमिन का यह प्राथमिक कर्त्तव्य है कि वह इस्लाम को फैलाए। अल्लाह के निकट सबको घसीटकर लाए। छल से बल से, जैसे भी। लड़कियाँ सबसे सरल शिकार हैं। उन्हें प्रेमपूर्वक लाया जाए!

तो फिल्म में कुछ मौलवी हैं, आलिम हैं, मस्जिद है, अजानें हैं, नमाजें हैं, शरिया कानून के रक्तरंजित क्रियान्वयन हैं, अल्लाहो-अकबर का सदाबहार शोर है, जोशीले लड़ाकों के गोली-बम के धूम-धमाके हैं। तारेक फतह जीवन भर कहते रहे कि अल्लाह का इस्लाम अलग है, मुल्ला का इस्लाम अलग। मुल्ला का इस्लाम राजनीतिक इस्लाम है, अल्लाह ने तो आध्यात्मिक टाइप का कोई इस्लाम दिया था।

तारेक फतह की कसौटी पर यह फिल्म मुल्ला के इस्लाम की कहानी है, जो पूरी दुनिया को इस्लामी परचम के नीचे लाने में दिन-रात लगे हैं। चूँकि यह सब चल इस्लाम के नाम पर रहा है, इसलिए इस्लाम की बंद दिमाग जमातों के पेट में मरोड़ें स्वाभाविक हैं। एक सत्य इतनी प्रखरता के साथ परदे पर आ गया है कि दाढ़ी में तिनका ही दिखाई नहीं दिया है। तिनकों की ही दाढ़ियाँ बेहिजाब हो गई हैं!

मैं मानता हूँ कि ज्यादातर मुस्लिम ऐसे नहीं होते। वहाँ भी दया और प्रेम, सहिष्णुता और करुणा रखने वाले आम लोग हैं। अगर ऐसे हैं तो सिनेमा में आधी सीटें इनसे भी भरनी चाहिए। वे भी देखें कि आध्यात्मिक इस्लाम जैसा कुछ अस्तित्व में है तो वह कहाँ है? अगर सिनेमा में आधा सच है तो पूरा सच क्या है, यह निर्दोष संसार के संज्ञान में भी लाया जाए।

मैंने इसे भारत के अंतहीन दुर्भाग्य की कथा कहा। मजहब के नाम पर हुए बँटवारे के बाद पाकिस्तान में गैर मुस्लिम बेटियों की दुर्दशा किससे छिपी है, बांग्लादेश में आए दिन मंदिरों और हिंदू घरों पर हमलों के बारे में किसे नहीं पता और इन दो टुकड़ों के बाद बचे हुए भारत में कश्मीर से बंगाल होकर केरल तक हतभाग्य हिंदुओं के हिस्से में क्या आया है? वे भारत के दुर्भाग्य को अकेले ढोने के लिए जाने कब से अभिशप्त हैं!

शालिनी की निमाह नाम की ईसाई सहेली धोखे से ड्रग की चपेट में लाकर रेप की शिकार बनाई जाती है, वह जैसे-तैसे पुलिस स्टेशन में इस संगठित नेटवर्क की शिकायत रो-रोकर जब कर रही होती है तो उसके पीछे दीवार पर लगी एक तस्वीर पर ध्यान टिकता है। सेक्युलर भारत के आबादी में आधे मुस्लिम-ईसाई हो चुके वामपंथी शासकों वाले केरल नामक राज्य के उस पुलिस अफसर के कार्यालय में लगी उस तस्वीर में महात्मा गाँधी मुस्कुरा रहे हैं!

यह समीक्षा नहीं, एक सकारात्मक टिप्पणी है। फिल्म देखकर किसी प्रकार की राय बनाने के मैं बिल्कुल पक्ष में नहीं हूँ। वैसे भी यह फिल्म इस्लाम की कोई नकारात्मक छवि नहीं दर्शाती। यह केरल की बेटियों का जीवन और भविष्य बरबाद करने में लगे उन संगठित गिराेहों की सत्य कथा काे प्रकट करती है, जो इस्लाम के वेश में सक्रिय हैं। इस्लाम उनके कारण बदनाम हो रहा होगा, सिनेमा में इतनी शक्ति नहीं कि वह सर्वशक्तिमान अल्लाह के सर्वश्रेष्ठ इस्लाम पर एक कण बराबर भी दाग लगा सके! यह असंभव है। भला षड्यंत्र, छल-कपट और आतंक का भी कोई धर्म होता है! कदापि नहीं…

द केरल स्टोरी के क्रू मेंबर को धमकी, कहा- घर से अकेले मत निकलना, ये कहानी दिखाकर अच्छा नहीं किया: मुंबई पुलिस ने दी सुरक्षा

इस्लामी धर्मांतरण की साजिशों को चर्चा में लाने वाली फिल्म द केरल स्टोरी (The Kerala Story) से जुड़े एक क्रू मेंबर को धमकी दी गई है। धमकी सोमवार (8 मई 2023) को एक अनजान नंबर से मैसेज कर भेजी गई। धमकी देने वाले ने कहा है कि फिल्म में ये कहानी दिखाकर अच्छा नहीं किया गया है। मुंबई पुलिस ने क्रू मेंबर को सुरक्षा मुहैया कराई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 8 मई को द केरल स्टोरी के एक क्रू मेंबर को एक अनजान नंबर से मैसेज आया। मैसेज करने वाले व्यक्ति ने धमकाते हुए लिखा,  “अकेले घर से बाहर मत निकलना। तुमने फिल्म में ये कहानी दिखाकर अच्छा नहीं किया।” फिल्म के डायरेक्टर सुदीप्तो सेन ने इसकी शिकायत मुंबई पुलिस से की है। पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते क्रू मेंबर को सुरक्षा मुहैया करवाई। हालाँकि शिकायत कॉपी न मिलने के चलते अभी तक केस दर्ज नहीं किया गया है।

फिल्म से जुड़े किस व्यक्ति को धमकी मिली है, यह स्पष्ट नहीं है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि धमकी फिल्म डायरेक्टर सुदीप्तो सेन को ही दी गई है।

प्रशंसकों को भी मिली हैं धमकियाँ

इससे पहले ‘द केरल स्टोरी’ के प्रशंसकों को भी जान से मारने की धमकियाँ मिल चुकी है। पुणे में इस फिल्म को देखने के लिए लोगों को फ्री राइड देने का एलान करने वाले ऑटो ड्राइवर साधु मगर को भी जान से मारने की धमकियाँ मिल रहीं हैं। साधु ने पुलिस में देश-विदेश के कुछ अनजान नंबरों की शिकायत देते हुए अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।

इसके अलावा राजस्थान के जोधपुर में VHP से जुड़े राजू सरगरा पर भी इसलिए हमला किया गया, क्योंकि वे लोगों से ‘द केरल स्टोरी’ देखने की अपील कर रहे थे। आरोप है कि कट्टरपंथियों ने राजू सरगरा के व्हाट्सएप स्टेटस को देखने के बाद उन पर हमला किया था। स्टेटस में उन्होंने फिल्म का पोस्टर लगाते हुए उसकी तारीफ की थी। राजू को सिर तन से जुदा की धमकियाँ भी मिली हैं।

‘5 साल में 40000 महिला लापता’: द केरल स्टोरी की खुन्नस में गुजरात पर गुमराह कर रहा था मीडिया गिरोह, पुलिस ने आँकड़ों के साथ बता दी हकीकत

द केरल स्टोरी (The Kerala Story) ने इस्लामी धर्मांतरण की साजिशों को चर्चा में ला दिया है। इससे आहत लिबरल और वामपंथी गैंग ने गुजरात को लेकर एक प्रोपेगेंडा शुरू किया था। इसमें राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आँकड़ों का हवाला देकर दावा किया जा रहा था कि गुजरात से 5 साल में करीब 40 हजार महिलाएँ गायब हुईं हैं। आधे-अधूरे तथ्यों के साथ चलाए जा रहे इस प्रोपेगेंडा का गुजरात पुलिस ने खंडन किया है।

वायरल पोस्ट में कहा जा रहा था कि साल 2016 से 2020 के बीच गुजरात से 40 हजार से अधिक महिला लापता हुई हैं। लेकिन सोमवार (8 मई 2023) को गुजरात पुलिस ने सिलसिलेवार ट्वीट में बताया है कि लापता हुई 41,621 महिलाओं में से 39,497 को खोज कर उनके परिवारों से वापस मिलाया जा चुका है।

ट्वीट में गुजरात पुलिस ने बताया है कि लापता महिलाओं की संख्या एनसीआरबी का है। लेकिन इनमें से 95% को बरामद कर उनके परिवार से मिलाया जा चुका है। पुलिस ने इन महिलाओं के लापता होने की वजह पारिवारिक विवाद, घर से भाग जाना, परीक्षा में फेल होना वगैरह बताए हैं। साथ ही कहा है कि जाँच से गुमशुदगी के इन मामलों में यौन शोषण या अंगों के लिए मानव तस्करी से जुड़े होने का सबूत नहीं मिला है।

गुजरात पुलिस बताया है कि गुमशुदगी के मामलों में स्थानीय पुलिस सुप्रीम कोर्ट के तय मापदंडों के अनुसार पड़ताल करती है। लापता लोगों का डाटा राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय के लिए एक खास वेबसाइट पर इसलिए अपलोड किया जाता है ताकि पड़ताल में अन्य राज्यों के पुलिस बल की मदद मिल सके।लापता व्यक्तियों की जाँच सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय मापदंडों के आधार पर की जाती है। लापता हुए लोगों का डाटा एक खास वेबसाइट पर इसलिए पोस्ट किया जाता है जिस से उनकी राष्ट्रीय स्तर पर तलाश में अन्य राज्यों के पुलिस बल का सहयोग मिले। माना जा रहा है कि इस प्रकार की खबर को द केरला स्टोरी फिल्म से कनेक्ट करने की कोशिश की गई। उस फिल्म को केरल में हुईं लव जिहाद की घटनाओं से जोड़ कर बनाया गया था जिसमें लड़कियों का प्रयोग ISIS जैसे आतंकी संगठनों के लिए किया गया था।

भ्रम फैलाने में मीडिया संस्थान भी

गुजरात की 40 हजार महिलाओं के लापता होने की खबर को सोशल मीडिया यूजर्स के अलावा न्यूज़ 24 और न्यू इंडियन एक्सप्रेस जैसे मीडिया संस्थान ने भी प्रचारित किया। इन्होंने रिपोर्ट में 40 हजार से अधिक महिलाओं के लापता होने की जानकारी तो दी, लेकिन बरामद की गईं 39,400 महिलाओं के बारे में नहीं बताया। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे ‘गुजरात स्टोरी’ नाम देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को घेरने की कोशिश की और पूछा कि इसकी कहानी कौन दिखाएगा।

अरफ़ा खानम और सायमा के ट्वीट्स

गौरतलब है कि गुजरात राज्य के खिलाफ ये प्रोपेगेंडा बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘द केरला स्टोरी‘ की रिलीज के बाद किया गया है। यह फिल्म को केरल में हुई लव जिहाद की साजिशों का पर्दाफाश करती है। बताती है कि कैसे लड़कियों का ब्रेन वाॅश कर उनका धर्मांतरण और ISIS जैसे आतंकी संगठनों के लिए इस्तेमाल किया गया।