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6 बीवी-16 बच्चे, फिर भी 65 साल के हिसाम हुसैन ने स्कूल जाने वाली लड़की से की 7वीं शादीः सास को प्रमोशन, विरोध के बाद ब्राजील के मेयर ने पार्टी छोड़ी

ब्राजील के एक करोड़पति मेयर हिस्साम हुसैन देहैनी ने 65 वर्ष की उम्र में 7वीं बार शादी की है। उनकी नई बीवी की उम्र मात्र 16 साल है और वो एक स्कूली छात्रा है। बताया जा रहा है कि इससे पहले वो 6 बार शादी कर चुके हैं। उनकी पहली शादी 43 वर्ष पहले 1980 में हुई थी। हिस्साम हुसैन देहैनी के अब तक 16 बच्चे भी हो चुके हैं। उन्हें अब अपनी राजनीतिक पार्टी से भी इस्तीफा देना पड़ा है। ड्रग्स लेने के आरोप भी उन पर लग चुके हैं।

हिस्साम की नई बीवी कयने रोड कमार्गो (Kauane Rode Camargo) एक चाइल्ड ब्यूटी क्वीन रही हैं। अप्रैल 2023 की शुरुआत में ही उससे शादी की। सन् 2000 में हिस्साम को 100 दिनों के लिए हिरासत में लिया गया था। उन पर ड्रग्स की तस्करी का मामला चलाया गया था। उन पर आरोप लगे थे कि वो एक ड्रग्स लैब चलाते हैं और पुलिस के साथ सेटिंग कर के ड्रग तस्करों को बचाते हैं। उनकी संपत्ति भारतीय रुपए में 23 करोड़ रुपए से अधिक आँकी गई है।

वो Cidadania पोलिटिकल पार्टी का हिस्सा थे, लेकिन अब उन्हें इस्तीफा देना पड़ा है। 12 अप्रैल, 2023 को उन्होंने ताज़ा शादी की है। इससे पहले उन्होंने अपनी होने वाली बीवी के 2 रिश्तेदारों को बड़े पदों पर काबिज किया। उनकी नई बीवी की माँ को जहाँ कल्चर-टूरिज्म का म्युनिसिपल सेक्रेटरी बना दिया गया, वहीं उनकी चाची को सेक्रेटरी जनरल डायरेक्टर का पद दिया गया। देहैनी दूसरी बार मेयर बने हैं। उनकी बेटियों और पूर्व बीवियों को भी सरकारी पद दिए गए हैं।

बता दें कि ब्राजील कम उम्र में शादी के मामले में दुनिया भर में पाँचवें नंबर पर आता है। अगर माता-पिता की इजाजत हो तो वहाँ लड़की 16 की उम्र में शादी कर सकती है। इस तरह अब अरौकेरिया की फर्स्ट लेडी अभी भी स्कूल में पढ़ती हैं। मेयर हुसैन का कहना है कि दोनों एक-दूसरे को खुश रखते हैं। उनकी नई शादी के बाद ब्राजील में उनका विरोध होने लगा था और यही उनके इस्तीफे का कारण बना। वो राजनेता होने के साथ-साथ कारोबारी भी हैं।

अयोध्या में ‘टेंट सिटी’ भी बसा रही योगी सरकार, राम मंदिर से बस 1 किमी होगी दूर: 15000 वर्गमीटर में श्रद्धालुओं के लिए बनेंगे 200 तम्बू

उत्तर प्रदेश की धर्मनगरी अयोध्या को सरकार सिर्फ धर्मस्थल के तौर पर ही नहीं, बल्कि पर्यटन स्थल पर विकसित करने की योजना बना रही है। योगी आदित्यनाथ सरकार (Yogi Adityanath Government) ने राम मंदिर से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर 200 ‘टेंट सिटी’ बनाने का फैसला किया है। इनमें अगले साल के अंत से ठहरा जा सकता है।

अयोध्या आने वाले पर्यटकों के लिए 15,000 वर्गमीटर के दायरे में बनाया जा रहा टेंट सिटी यह अयोध्या में आने वाले कई नए होटलों की योजना का हिस्सा है। इनमेें प्रमुख पाँच सितारा होटल भी शामिल हैं। बता दें कि अयोध्या में राममंदिर का पट खुलने की तारीख तय हो गई है।

अयोध्या घुमने आने वाले पर्यटकों के लिए टेंट सिटी सालों भर खुला रहेगा। यह सिटी पर्यटकों को भारत की एक अलग झलक पेश करेगा। बता दें कि अगले दशक तक तैयार होने वाले टेंट सिटी को PPP मॉडल पर विकसित किया जा रहा है। इसमें उत्तर प्रदेश सरकार भूमि प्रदान करेगी और लाइसेंस शुल्क वसूल करेगी।

न्यूज 18 द्वारा हासिल किए गए दस्तावेजों के अनुसार, “प्रस्तावित टेंट सिटी आने वाले लोगों को एक अद्वितीय और आरामदायक शिविर अनुभव प्रदान करेगा। इससे वे शहर की संस्कृति और आध्यात्मिकता में खुद को समायोजित कर पाएँगे। इस परियोजना का उद्देश्य प्राकृतिक परिवेश और क्षेत्र के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को संरक्षित करते हुए आधुनिक सुविधाओं की पेशकश करना है।”

दस्तावेज में कहा गया है कि सरयू नदी पर बसा अयोध्या दुनिया के सबसे प्राचीन शहरों में से एक है। यहाँ पर प्राचीन मंदिर और शानदार घाट हैं, जो भारत के समृद्ध इतिहास और संस्कृति को प्रदर्शित करता है। दस्तावेज़ में कहा गया है कि एक तम्बू का न्यूनतम आकार 250 वर्ग फुट होगा।

योगी आदित्यनाथ की सरकार टेंट सिटी में हाई क्वालिटी सर्विस की योजना बना रही है। इनमें कम-से-कम 200 टेंटों में टॉयलेट, रिसेप्शन/फ़ोयर क्षेत्र, रेस्तरां, रसोई, भोजन क्षेत्र और वीआईपी लाउंज के साथ कई मनोरंजक गतिविधियाँ शामिल हैं।

यूपी सरकार का कहना है, “निजी पार्टी टेंट सिटी क्षेत्र में संचालन, टेंट की बिक्री, रेस्तरां, मनोरंजक गतिविधियों से राजस्व की हकदार होगी और लाइसेंस समझौते पर हस्ताक्षर करने के दो महीने के भीतर संचालन शुरू करने के लिए कहा जाएगा।”

7 साल में सगाई-12 में निकाह, 10 गोली मारी-चाकू से आँखें निकाली… कहानी दिल्ली में रह रहीं खात्रा हाशमी की, तालिबान ने बनाया ‘जिंदा लाश’

अफगानिस्तान में तालिबान का राज आने के बाद महिलाओं की स्थिति खासी दयनीय हो गई है। तालिबान से पीड़ित रहीं एक महिला अधिकारी ने अपना दर्द बयाँ किया है। वो फ़िलहाल दिल्ली में रह रही हैं। पैसों के लालच में उसके अब्बू ने मात्र 7 साल की उम्र में बड़े उम्र के व्यक्ति के साथ उसकी शादी तय कर दी थी और 12 साला की उम्र में निकाह करा दिया था। अब्बू द्वारा न पढ़ाने-लिखाने के बावजूद वो अपनी मेहनत से अफगानिस्तान में पुलिस अधिकारी बनीं।

हालाँकि, अफगानिस्तान में एक महिला का इस तरह से तरक्की करना तालिबानियों को रास नहीं आया और वो फोन कॉल कर-कर के धमकियाँ देने लगे। 2020 के शुरुआत में पुलिस थाने से घर जाते समय उन पर गोलीबारी की गई। 9 गोलियाँ उनके शरीर पर लगीं। ये वो समय था, जब तालिबान मुल्क पर कब्जे की तरफ तेजी से बढ़ रहा था। उनके शरीर में 10 बार चाकू से वार किया गया। बेहोशी की हालत में उनकी दोनों आँखें निकाल ली गईं। महिला ने कहा कि अब वो ‘ज़िंदा लाश’ बन कर रह गई हैं।

उक्त महिला का नाम खात्रा हाशमी है, जो फ़िलहाल ‘नेशनल एसोसिएशन फॉर ब्लाइंड (NAB)’ के लिए काम करती हैं। ‘दैनिक भास्कर’ से बात करते हुए उन्होंने बताया कि जब उनके साथ ये दरिंदगी हुई थी, तब वो गर्भवती थीं। जब उन्हें होश आया, तो वो पूरी तरह अंधी हो चुकी थीं। वो अपना पहला वेतन भी अपने आँखों से नहीं देख पाई थीं। मात्र 3 महीने की नौकरी के बाद उनके साथ ये वीभत्स्ता हुई थी। उनके शरीर में अब भी बुलेट के टुकड़ों की वजह से दर्द रहता है, जिसका इलाज भी चल रहा है।

उनकी 2 साल की बेटी भी है, जो उनके साथ ही रहती है। उनका कहना है कि महिलाओं-बच्चों की तालिबान से हिफाजत के लिए ही पुलिस फ़ोर्स जॉइन किया था, लेकिन हुआ कुछ और ही। उनका कहना है कि तालिबानी ये नहीं चाहते कि महिलाएँ नौकरी करें, वो चाहते हैं कि लड़कियाँ घर में कैद रहें। 3 नकाबपोश तालिबानियों ने उन पर हमला किया था। उनके पहले पति, दो बेटे और एक बेटी अफगानिस्तान में ही रहती है।

तालिबानी उनसे पूछने आते हैं कि उनकी अम्मी लौटी या नहीं। दिल्ली में खात्रा हासमी ने दूसरी शादी भी की है। पहले पति की उम्र 80 साल से अधिक हो गई है और वो उन्हें तलाक भी दे चुके हैं। फिर भी वो और बच्चे पैदा करना चाहते थे। उन्होंने बताया कि उन बच्चों से मिलने का उनका दिल करता है, लेकिन ये सम्भव नहीं हो पाता। खात्रा हाशमी को तालिबानी अब भी खोज रहे हैं। जब उन पर हमला हुआ था, तब उन्होंने अपनी साँसें रोक ली थीं और तालिबानी उन्हें मरा हुआ समझ कर चले गए थे।

लखनऊ की सड़क पर स्कूल जाती बच्ची के पीछे पड़ा था पुलिसकर्मी शहादत अली, महिला ने पकड़ा तो बोला- मेरे बच्चे के साथ पढ़ती है: Video

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें एक पुलिसकर्मी को एक छात्रा के साथ छेड़छाड़ करते हुए देखा जा सकता है। उक्त पुलिसकर्मी की पहचान शहादत अली के रूप में हुई है। वीडियो में देखा जा सकता है कि साइकिल से छात्रा जा रही होती है और शहादत अली अपनी स्कूटी लेकर उसके बगल में जा रहा होता है। एक अन्य महिला ने उसकी हरकत को देख लिया और उसे फटकार लगाई।

जिस व्यक्ति ने ये वीडियो बनाया, वो स्कूटी पर बैठा हुआ था जिसे एक महिला चला रही थी। ये लोग पीड़ित छात्र और उस पुलिसकर्मी के पीछे से गुजर रही थी। वीडियो में उक्त व्यक्ति को ये कहते हुए सुना जा सकता है कि गाड़ी में कोई नंबर प्लेट भी नहीं है। वीडियो में महिला उक्त पुलिसकर्मी से पूछती है, “आप कौन भाई साहब? जानते हैं आप उनको (छात्रा को)?” इस पर वो पुलिसकर्मी जवाब देता है कि छात्रा उसके बच्चे के साथ पढ़ती है।

इस पर महिला उसे रुकने और गाड़ी साइड में लगाने के लिए कहती है। हालाँकि, उसने स्कूल का नाम गलत बताया। इस पर महिला ने कहा कि ये पुलिसकर्मी रोज लड़कियों का इसी तरह से पीछा कर रहा है। साथ ही उसकी हेलमेट उतारने को भी कहा, ताकि उसकी पहचान सामने आए। पुलिसकर्मी ने हेलमेट उतारा भी। जब महिला ने पूछा कि उसकी गाड़ी में नंबर क्यों नहीं है, तो उसने कहा कि ये बैटरी वाली गाड़ी है। इस पर महिला ने पूछा कि क्या बैटरी वाली गाड़ी में नंबर नहीं होता?

वायरल वीडियो के सामने आने के बाद यूपी पुलिस ने भी बयान दिया है। लखनऊ पुलिस ने कहा, “प्रकरण को संज्ञान में लेकर उक्त पुलिसकर्मी के विरुद्ध थाना कैंट में अभियोग पंजीकृत कर विधिक कार्यवाही की जा रही है। विभागीय कार्यवाही हेतु प्रक्रिया प्रचलित है।” इस वीडियो को लेकर लोगों ने कहा कि छोटी-छोटी बच्चियों के साथ इस तरह की हरकत कर के शहादत अली वर्दी को शर्मसार कर रहा है। उसे निलंबित कर गिरफ़्तारी की माँग भी की जा रही है।

ईस्ट डीसीपी ने इस मामले में कहा कि इस प्रकरण का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इस संबंध में कैंट थाने में एक तहरीर मिली है और उसके आधार पर सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर लिया गया है।

लखनऊ पूर्वी के डीसीपी ने आगे बताया कि मुख्य आरक्षी शहादत अली को पुलिस हिरासत में ले लिया गया है। इस मामले में आगे की जाँच जारी है और आरोपित पुलिसकर्मी शहादत अली को निलंबित किया जा सकता है।

‘अनुशासन पाठ’ के बाद जंतर-मंतर पर पहलवानों से मिलीं पीटी उषा, बोले बजरंग पुनिया- बृजभूषण सिंह के जेल जाने तक हम यहीं रहेंगे

भारतीय कुश्ती संघ के प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह (WFI Chief Brij Bhushan Sharan Singh) के खिलाफ दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना दे रहे पहलवानों से मिलने पीटी उषा (PT Usha) पहुँची। वहाँ उन्होंने पहलवानों से मुलाकात की अपना धरना खत्म करने का आग्रह किया।

पीटी उषा भारतीय ओलंपिक संघ (IOC) की अध्यक्ष हैं। कुछ दिन पहले उन्होंने पहलवानों के धरने को अनुशासनहीनता बताया था। पीटी उषा ने कहा था कि पहलवान सड़कों पर आकर भारत की छवि धूमिल कर रहे हैं। उन्होंने पहलवानों की आलोचना की थी।

इस पर पहलवान साक्षी मलिक ने पीटी उषा पर ही सवाल दाग दिया था। साक्षी मलिक ने 27 अप्रैल 2023 को कहा, “मैं पीटी उषा का सम्मान करती हूँ। उन्होंने हमें प्रेरित किया है, लेकिन मैं मैम से पूछना चाहती हूँ कि महिला पहलवानों ने आगे आकर उत्पीड़न का मुद्दा उठाया है। क्या अब हम विरोध भी नहीं कर सकते?”

इन सबके बीच पीटी उषा के धरना स्थल पर पहुँचीं और पहलवानों से मुलाकात कीं। पीटी उषा से मुलाकात को लेकर बजरंग पुनिया ने कहा, “उन्होंने (पीटी उषा) कहा कि वे हमारे साथ खड़ी हैं और हमें न्याय दिलाएगी। वह पहले एक एथलीट हैं और फिर कुछ और।”

मुलाकात को लेकर बजरंग पुनिया ने आगे बताया, “उन्होंने (पीटी उषा) ने कहा कि वह हमारी समस्या पर गौर करेंगी और जल्द से जल्द इसका समाधान करेंगी। बृजभूषण शरण सिंह के जेल जाने तक हम यहीं रहेंगे।”

इधर, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मिल रही पुलिस सुरक्षा को पहलवानों ने लेने से मना कर दिया। पहलवानों ने कहा कि अगर वे जंतर-मंतर पर भी सुरक्षित नहीं है, तो वे कही भी सुरक्षित नहीं है। वे यहाँ शांतिपूर्वक धरना दे रहे हैं। उन्हें किसी से भी कोई दिक्कत नहीं है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जब दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ FIR दर्ज की थी, तब पहलवान विनेश फोगाट ने कहा था कि धरना दे रहे हरियाणा के पहलवानों को दिल्ली पुलिस पर भरोसा नहीं है।

पहलवान साक्षी मलिक ने तो यहाँ तक कह दिया था, “हम अपना बयान सुप्रीम कोर्ट में दर्ज कराएँगे। उनको (बृजभूषण शरण सिंह) को जेल में डालने और सभी पदों से हटाने के बाद ही हमारा प्रदर्शन खत्म होगा।” पहलवान बृजभूषण शरण सिंह ने सांसद की सदस्यता छोड़ने की भी माँग रहे हैं।

वहीं, बृजभूषण शरण सिंह ने मंगलवार (2 मई 2023) को पहलवानों को लेकर कहा कहा, “जिन अध्यक्ष के घर आप आते थे, शादी में बुलाते थे, घुल-मिलकर रहते थे, तब आपने (पहलवानों ने) कोई गोपनीय शिकायत नहीं की। आपको तब सारी दिक्कत हो जाती है, जब मैं एक पॉलिसी लेकर आता हूँ।”

उन्होंने कहा, “ओलंपिक में कौन जाएगा, कौन नहीं जाएगा, ये नियम बनाता हूँ, तब आपको तकलीफ होती है। कुश्ती में सामान्य परिवार के बच्चे आते हैं। कहीं न कहीं उनके माता-पिता अपनी जरूरतों में कटौती करके बादाम-घी का इंतजाम करते हैं। वे भी उम्मीद रखते हैं कि उनका बेटा नेशनल, इंटरनेशनल खेलेगा।”

भाजपा सांसद ने आगे कहा, “जिस मोदी जी की आज ये निंदा कर रहे हैं, जिस योगी जी की आज ये निंदा कर रहे हैं, दुनिया का कोई देश खिलाड़ियों को इतनी सहूलियत या पैसा नहीं देता, जितना हमारा देश देता है। कई देश तरसते हैं कि काश, हमें भारत से मौका मिलता।ठ

बता दें कि पहलवानों के धरना स्थल पर ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी’ के आपत्तिजनक नारे लगाए गए थे। इतना ही नहीं, कुछ पहलवानों और उनके समर्थकों ने सोशल मीडिया पर एक कपड़ा को निचोड़ते हुए दिखाया था और लिखा था कि ‘मोदी को भी ऐसे ही निचोड़ देंगे।’ पहलवानों के कुछ समर्थकों ने यह भी कहा कि कृषि बिल वापसी को लेकर वे अपनी ताकत दिखा चुके हैं।

‘हिम्मत है तो कुरान का अपमान करके दिखाओ’: इस्लामी धर्मांतरण करने वाले पूर्व किकबॉक्सर एंड्रू टेट की चुनौती, लोगों ने फोटो-वीडियो की लगा दी झड़ी

पूर्व किकबॉक्सर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर एंड्रू टेट ने सोमवार (1 मई, 2023) को लोगों को चुनौती दी कि वो कुरान का अपमान कर के दिखाएँ। बता दें कि ईसाई परिवार में जन्मे एंड्रू टेट ने इस्लामी धर्मांतरण कर लिया है और वो मुस्लिम बन गए हैं। इसके बाद उनकी कट्टरता साफ़-साफ़ झलक रही है। दरअसल, SatanCon नाम की एक वेबसाइट ने बाइबिल के पन्नों को फाड़ते हुए वीडियो बनाया था और शैतान की प्रशंसा में कसीदे पढ़े थे।

इसी खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए एंड्रू टेट ने लिखा, “अगर इतने ही बहादुर हो तो कुरान का अपमान करने की कोशिश कर के देखो।” इसके बाद सोशल मीडिया यूजर ने उनकी चुनौती स्वीकार कर ली और कुरान का अपमान करते हुए कई तस्वीरों और वीडियोज पोस्ट किए। साथ ही ट्विटर पर #AndrewTateQuranChallenge भी ट्रेंड करने लगा। इसी हैशटैग के साथ तस्वीरें और वीडियोज पोस्ट किए जाने लगे। इसके बाद एंड्रू टेट की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

पवित्र इस्लामी किताब कुरान को जलाते हुए भी तस्वीरें और वीडियोज डाले जा रहे हैं। कुछ ने तो कुरान के ऊपर सूअर का माँस रख कर उन तस्वीरों और वीडियोज को पोस्ट किया। एक ने कुरान को सूअर के मुँह में रखा हुआ दिखाया। इस तरह के कई अपमानजनक कंटेंट पोस्ट किए गए। बता दें कि SatanCon एक प्लेटफॉर्म है, जहाँ बाइबिल विरोधी जुड़े हुए हैं। इसने अमेरिका के बॉस्टन में 2023 में 3 दिवसीय कार्यक्रम भी आयोजित किया है।

एक ‘शैतान के मंदिर’ के 10 साल पूरे होने की सालगिरह मनाई गई और वहीं इस कार्यक्रम को भी आयोजित किया गया। दिसंबर 2022 में जबसे एंड्रू टेट ने इस्लाम कबूला है, कई मुस्लिम उनके फैन हो गए हैं। वो बलात्कार और मानव तस्करी के आरोपों में रोमानिया में गिरफ्तार भी हो चुके हैं। रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट स्थित उनके निवास पर आतंकवाद विरोधी एजेंसी का छापा भी पड़ा था। हाल ही में ग्रेटा थन्बर्ग के साथ भी उन्होंने लड़ाई कर ली थी।

इससे पहले भी कुरान जलाए जाने की कई घटनाएँ हो चुकी हैं। जनवरी 2023 में डच नेता एडविन वगसवेल्ड ने नीदरलैंड्स में कुरान का अपमान किया था और फिर उसे जला डाला था। वो कट्टर दक्षिणपंथी समूह ‘Patriotic Europeans Against the Islamisation of the West (PEGIDA)’ से ताल्लुक रखते हैं। इसी तरह स्वीडन में तुर्की के विरोध में आयोजित एक प्रदर्शन में कुरान जलाया गया था। इसके खिलाफ मुस्लिमों ने जम कर हंगामा किया था।

PFI ने ₹10000 करोड़ का फंड माँगा, कॉन्ग्रेस ने घोषणा-पत्र में उतना ही दिया: कर्नाटक चुनाव में प्रतिबंधित इस्लामी संगठन का SDPI भी हाथ के साथ

2023 कर्नाटक विधानसभा चुनाव में प्रतिबंधित संगठन PFI के राजनीतिक इकाई SDPI ने कॉन्ग्रेस पार्टी को समर्थन देने का ऐलान किया है। बता दें कि SDPI पर बैन नहीं है। ‘सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया’ के नाम से ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ चुनावों में हिस्सा लिया करता है। SDPI अब PFI से अपने संबंधों को नकारता है, ताकि उस पर बैन न लगे। अब उसने 100 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया था।

कॉन्ग्रेस के लिए घर-घर जाकर चुनाव प्रचार करेंगे SDPI कार्यकर्ता

लेकिन, अब उसने कहा है कि वो मात्र 16 सीटों पर ही अपने उम्मीदवार उतारेगा। पार्टी का कहना है कि ये निर्णय इसीलिए लिया गया है, ताकि भाजपा को हराने में कॉन्ग्रेस की मदद की जा सके। ‘टाइम्स नाउ’ से बात करते हुए SDPI के नेशनल जनरल सेक्रेटरी इलियास थुम्बे ने कहा कि भाजपा को हराने के लिए योजना बनाई गई है, उसी के तहत ये निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि जमीनी स्थिति कॉन्ग्रेस की जीत के लिए मुफीद नजर आ रही है।

साथ ही उन्होंने कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार की भविष्यवाणी भी की। उन्होंने बताया कि पार्टी कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर कॉन्ग्रेस और JDS के लिए चुनाव प्रचार करने को कह दिया गया है। कॉन्ग्रेस पार्टी ने भी अपने चुनावी घोषणापत्र में ‘बजरंग दल’ को प्रतिबंधित करने का वादा कर के मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति पर आगे बढ़ने का फैसला लिया है। SDPI पिछले चुनाव में भी कॉन्ग्रेस की मदद कर चुका है।

घोषणापत्र में कॉन्ग्रेस पार्टी ने मानी PFI की बात

एक और बात जानने लायक है कि चुनावी घोषणापत्र में कॉन्ग्रेस पार्टी ने उस माँग को मान ली है, जो 1 साल पहले PFI ने उसके सामने रखी थी। फरवरी 2022 में PFI ने माँग की थी कि बजट में अल्पसंख्यकों के लिए 10,000 करोड़ रुपए की व्यवस्था की जाए। दक्षिण कन्नड़ के मिट्टूर में हुई बैठक में ये माँग रखी गई थी। आरोप लगाया गया था कि अल्पसंख्यकों के बजट में काफी कमी आई है। इससे मुस्लिमों की प्रगति रुक जाने का आरोप भी लगाया गया था।

अब कॉन्ग्रेस पार्टी ने अपने घोषणापत्र में लिखा है कि अल्सपंख्यकों के लिए बजट में 10,000 करोड़ रुपए की व्यवस्था की जाएगी। ये PFI की माँगों के अनुरूप ही है। हालाँकि, पार्टी ने इसमें बौद्ध, जैन ईसाई और अन्य का भी जिक्र कर दिया है। घोषणापत्र में आरोप लगाया गया है कि मौजूदा भाजपा सरकार वोटों का ध्रुवीकरण कर के सत्ता पाने के लिए अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित कर रही है। साथ ही संविधान की दुहाई भी दी गई है।

शरद पवार ने NCP का नया अध्यक्ष चुनने को बना दी कमिटी, पर मान-मनौव्वल भी जारी: धड़ाधड़ इस्तीफे दे रहे हैं पार्टी नेता

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री शरद पवार ने अपनी पार्टी राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। इसको लेकर पार्टी में घमासान मचा हुआ है। पार्टी ने पवार से अपने फैसले पर विचार करने के लिए कहा है। वहीं, बदलते घटनाक्रम के बीच NCP के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक जारी है।

इसी बीच NCP के राष्ट्रीय महासचिव जितेंद्र आव्हाड ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। आव्हाड ने कहा, “मैंने राष्ट्रीय महासचिव के अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और मैंने अपना इस्तीफा एनसीपी प्रमुख शरद पवार को भेज दिया है। पवार साहब के ऐलान (पार्टी प्रमुख के पद से इस्तीफा देने) के बाद ठाणे एनसीपी के सभी पदाधिकारियों ने भी इस्तीफा दे दिया है।”

जितेंद्र आव्हाड ने शरद पवार द्वारा अपना इस्तीफा वापस नहीं लेने पर पद छोड़ा है। उनका कहना है कि वे शरद पवार के बिना अपने पद पर नहीं रहेंगे। आव्हाड को पवार को का बेहद भरोसेमंद माना जाता है। वहीं, मुंबई के यशवंत राव ऑडिटोरियम में एनसीपी नेताओं की बैठक चल रही है। इसमें अजित पवार, सुप्रिया सुले के अलावा प्रफुल्ल पटेल, जयंत पाटिल, छगन भुजबल हिस्सा ले रहे हैं।

मीटिंग में पहुँचने से पहले जब अजित पवार से अध्यक्ष बनने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “अगर अध्यक्ष बनने के लिए भी कहा जाएगा तो मैं मना कर दूँगा।” कहा जात रहा है कि अजित महाराष्ट्र विधानसभा मे प्रतिपक्ष के नेता हैं और वह खुद अध्यक्ष बनने के बजाय अपने नजदीकी को अध्यक्ष बनवा सकते हैं।

उधर NCP नेता जयंत पाटील ने कहा, “कई जिलाध्यक्षों और पदाधिकारियों ने व्हाट्सएप पर इस्तीफे भेजे हैं। मैंने जितेंद्र आव्हाड का इस्तीफा नहीं देखा है। हालांकि, ठाणे शहर एनसीपी प्रमुख आनंद परांजपे ने अपना इस्तीफा भेज दिया है।”

उधर, एनसीपी के नेता शरद पवार को मनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। नेताओं का कहना है कि NCP का अर्थ शरद पवार है और शरद पवार का अर्थ NCP है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि पवार अध्यक्ष पद का दिया गया इस्तीफा वापस नहीं लेते हैं तो उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष बने रहने के लिए आग्रह किया जाएगा है।

उधर, कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि शरद पवार के इस्तीफा देने से गठबंधन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। शिवसेना (ठाकरे) गुट के संजय राउत का कहना है, “शरद पवार का इस्तीफा देश की राजनीति के लिए बड़ा झटका है। हम तय करेंगे कि आने वाले दिनों में क्या होगा। हम पूरी घटना पर नजर बनाए हुए हैं।”

बता दें कि अगले साल लोकसभा चुनाव के साथ-साथ महाराष्ट्र में विधानसभा के भी चुनाव होने हैं। ऐसे में शरद पवार के इस्तीफे के बाद महाराष्ट्र की राजधानी पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा। लोकसभा सीटों की संख्या के मामले में महाराष्ट्र देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है। वहीं, विधानसभा की कुल 288 सीटें हैं।

एनसीपी राज्य की महाविकास आघाड़ी गठबंधन का हिस्सा है। इस गठबंधन में एनसीपी के अलावा कॉन्ग्रेस और शिवसेना (ठाकरे) मुख्य पार्टियाँ हैं। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में महाराष्ट्र में MVA की सरकार रही थी। इसके बाद एकनाथ शिंदे ने विद्रोह कर दिया था। 

बम विस्फोट, 71 मौतें, कॉन्ग्रेस राज में सारे आरोपित बरी… PM मोदी ने कर्नाटक में याद किया राजस्थान, कहा – आतंक के आकाओं को बचाती है कॉन्ग्रेस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान बुधवार (3 मई, 2023) को मूडबिद्री में पहुँचे, जहाँ उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी पर निशाना साधा। इस दौरान उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस कर्नाटक में शांति की दुश्मन है और विकास की भी दुश्मन है। उन्होंने कहा कि जब कॉन्ग्रेस होती है, वहाँ के निवेशक भागने लग जाते हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस पर आतंक के आकाओं को बचाने और तुष्टिकरण को बढ़ाने का भी आरोप लगाया।

पीएम मोदी ने याद दिलाया कि राजस्थान में क्या हुआ। वहाँ हुए एक बम धमाके की उन्होंने याद दिलाई, जिसमें 50 से भी अधिक लोग मारे गए थे। पीएम मोदी ने कहा कि इतना भयंकर षड्यंत्र हुआ, लेकिन वहाँ की कॉन्ग्रेस सरकार की पुलिस ने ऐसा काम किया कि ये धमाका करने वाले सारे के सारे दोषी जेल से छूट गए और निर्दोष साबित हो गए। उन्हें सज़ा नहीं दिलवाई गई। पीएम मोदी ने कहा कि तुष्टिकरण की यही नीति कॉन्ग्रेस की एकमात्र पहचान है।

पीएम मोदी ने पूछा, “क्या ऐसी कॉन्ग्रेस को आपलोग सत्ता में आने देंगे?” इसके बाद लोगों ने ‘नहीं’ कहा। पीएम मोदी ने पूछा, “क्या कर्नाटक को बर्बाद होने देंगे? क्या आप अपने भविष्य को तबाह होने देंगे?” उन्होंने कहा, “देश भर में जहाँ कहीं भी लोग शांति और प्रगति चाहते हैं, वहाँ सबसे पहला काम ये करते हैं, जो-जो राज्य के लोग जग जाते हैं और आगे बढ़ना चाहते हैं, सबसे पहले वो अपने राज्य से कॉन्ग्रेस को बाहर कर देते हैं – जाओ भाई, बहुत हो गया।”

पीएम मोदी ने कहा, “दुनिया के हर कोने में भारत की वाहवाही हो रही है। ये आपके एक वोट के कारण हो रहा है। आपके एक वोट ने दिल्ली में मजबूत सरकार बनाई, आपके एक वोट ने दिल्ली में स्थिर सरकार बनाई जिसके कारण आज दुनिया में देश का नाम बन रहा है। ये आपके वोट की ताकत है। पूरा देश हमारे सैनिकों का आदर करता है, उनका सम्मान करता है जबकि कॉन्ग्रेस हमारी सेना का अपमान करती है, हमारे सैनिकों का अपमान करती है, हमारे सेना के वरिष्ठ लोगों को गालियाँ देने तक का पाप करती है।”

याद दिला दें कि जयपुर में 13 मई, 2008 को बम ब्लास्ट हुआ था। ये बम ब्लास्ट मंदिरों के बाहर और मुख्य बाजारों में हुए थे। 9 बम पूरे जयपुर में फिर किए गए थे, जिनमें से 8 फटे और लोगों की जानें गईं। 1293 गवाह और कई सुबूत पेश हुए, फिर भी सारे आरोपित बरी होने में कामयाब रहे। आरोपितों में शाहबाज हुसैन, मोहम्मद सैफ, मोहम्मद सरवर आजमी, सैफुर्रहमान और मोहम्मद सलमान का नाम मुख्य रूप से शामिल था।

समलैंगिक विवाह को मान्यता नहीं, सामाजिक फायदा देने पर करेंगे विचार: सुप्रीम कोर्ट को केंद्र ने बताया, Same Sex Marriage पर कमिटी बनाने को तैयार

समलैंगिक विवाह (Same Sex Marriage) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई जारी है। केंद्र सरकार इस तरह के किसी भी विवाह का डटकर विरोध कर रही है। हालाँकि, केंद्र ने बिना मान्यता के समलैंगिकों की समस्याओं पर विचार को तैयार है। इसके लिए उसने प्रशासनिक स्तर पर एक कमेटी बनाने की बात अदालत को बताई।

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की पाँच न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ के सामने केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (SG Tushar Mehta) पेश हुए। उन्होंने बुधवार (3 मई 2023) को सुनवाई के दौरान कहा कि कि सरकार समलैंगिकों की समस्याओं पर सकारात्मक है।

तुषार मेहता ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि केंद्र सरकार कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता मे एक कमिटी बनाने को तैयार है। इस कमिटी के सामने समलैंगिकों समस्याओं को रखा जा सकता है। उन्होंने कहा, “किसी विशेष रिश्ते को ‘विवाह’ के रूप में मान्यता देने का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है।”

तुषार मेहता ने कहा कि समाज में कई तरह के रिश्ते मौजूद हैं। कानून हर रिश्ते को रेगुलेट नहीं करता है। उन्होंने कहा, “यहाँ तक कि हेरोसेक्सुअल जोड़ों के लिए भी अंतरंग संबंधों को सरकार द्वारा मान्यता नहीं दी जाती है।”

वहीं. याचिकाकर्ता की ओर से पेश अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि इस मामले के कानूनी पहलू भी हैं। इसे सिर्फ प्रशासनिक स्तर पर हल नहीं निकल सकता। सिंघवी ने कहा कि विवाह का सिद्धांत कानूनी पहलू है, जो अदालत के क्षेत्राधिकार में है।

दरअसल, पिछली सुनवाई में 27 अप्रैल 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि समलैंगिक जोड़ों को उनकी वैवाहिक स्थिति की कानूनी मान्यता के बिना ऐसे कौन-कौन से सामाजिक फायदे हैं, जिन्हें दिया जा सकता है। कोर्ट ने इसकी जानकारी के साथ अदालत में आने के लिए केंद्र को कहा था।

इसके बाद केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दी। समलैंगिक विवाह को मान्यता देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देने वाले याचिकाकर्ताओं का कहना है कि विशेष विवाह अधिनियम, 1954 (Special Marriage act) में बताए गए विवाह को ‘पुरुष और महिला’ के बीच के बजाय ‘जीवनसाथी’ के रूप में परिभाषित की जाए।