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22 भाषाएँ, 29 बोलियाँ…100 करोड़ लोग: 9 सालों में ‘जन-जन’ तक पहुँची PM मोदी की ‘मन की बात’, 100वें एपिसोड का UN हेडक्वार्टर में होगा लाइव ब्रॉडकास्ट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मन की बात’ के 100 वें एपिसोड पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी ने जोरो-शोरों से तैयारी की हुई है। प्रधानमंत्री 11 बजे देशवासियों से मन की बात करेंगे। इस कार्यक्रम का लाइव ब्रॉडकॉस्ट संयुक्त राष्ट्र के हेडक्वार्टर्स में भी होगा।

इसके अलावा मीडिया में ये भी बताया जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी ने पीएम मोदी के इस संबोधन को जन-जन तक पहुँचाने के लिए विदेश समेत 4 लाख जगहों पर आयोजन किए हैं। राजभवन से लेकर भाजपा के हर मुख्यमंत्री के आवास पर औ AIR के 500 से ज्यादा केंद्रों पर इसका प्रसारण होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जन-जन से जुड़ने के लिए इसकी शुरुआत की थी। धीरे-धीरे जनता तक जनता की बात पहुँचाने का यह एक सशक्त माध्यम बन गया। 22 भाषाओं और 29 बोलियों में इसे प्रसारित किया जाता है। इसके अलावा इसका ब्रॉडकॉस्ट 11 विदेशी भाषाओं- फ्रेंच, इंडोनेशियन, तिब्बती, बर्मा, बलूची, अरबी, पश्तू, पारसी, दारी और स्वाहिली में भी होता है।

अध्य्यन बताता है कि पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ में अपने साथ कम से कम 100 करोड़ लोगों को जोड़ा और समाज में इससे एक जमीनी बदलाव आ सका। ‘मन की बात’ संस्करणों में स्वच्छता से लेकर स्वास्थ्य पर बातें हुईं जहाँ लोगों को पीएम मोदी खुद छोटे-छोटे मुद्दों पर जागरूक करते नजर आए। सबसे खास बात यह रही कि पीएम की बातों का उनके प्रयासों का असर भी देखने को मिला।

आईआईएम रोहतक के सर्वे के अनुसार, मन की बात ने 100 करोड़ श्रोताओं तक अपनी जगह बनाई। 23 करोड़ लोग तो नियमित इसे सुनते रहे। वहीं सर्वे की मानें तो 96 फीसदी जनसंख्या इस रेडियो प्रोग्राम के बारे में जानती थी। इस संबंध में एक्सिस मॉय इंडिया और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के साथ साझेदारी में इंस्टीट्यूट फॉर कॉम्पिटिटिवनेस (IFC) ने भी एक रिसर्च की है।

इसकी रिपोर्ट में बताया गया है कि इस कार्यक्रम के जरिए आम लोगों को बदलाव लाने वाली योजनाओं में सम्मिलित होने के लिए प्रेरित किया गया। इससे देश और इसके नागरिकों के जीवन पर अच्छा प्रभाव पड़ा। जमीन पर बदलाव लाने वालों को इस कार्यक्रम में सम्मान मिला। ‘Mann Ki Baat: A Decade of Reflections’ नामक इस रिपोर्ट में कहा गया है कि लोगों ने इस कार्यक्रम को सुन कर एक्शन लिया, बदलाव में साथ दिया।

बीवी ने प्रिंसिपल को मारा थप्पड़, शौहर ने स्कूल में घुस धमकाया: सीलमपुर से AAP विधायक अब्दुल रहमान बीवी समेत कोर्ट में दोषी करार, जा सकती है विधायकी

दिल्ली के सीलमपुर से आम आदमी पार्टी के विधायक अब्दुल रहमान (AAP MLA Abdul Rahman) और उसकी पत्नी आसमा को मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के मामले में दोषी करार दिया गया था। राउज एवेन्यू कोर्ट ने साल 2009 के इस मामले सरकारी स्कूल की प्रिंसिपल से मारपीट करने और डराने-धमकाने का दोषी ठहराया।

अब्दुल रहमान और उसकी बीवी आसमा ने सरकारी स्कूल की प्रधानाध्यापक रजिया बेगम को मारा था। गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी देते हुए ड्यूटी करने से रोका था। कोर्ट ने इन्हें भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 353/506 और 34 के तहत दोनों को दोषी माना है।

राउज एवेन्यू कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि अब्दुल रहमान और आसमा, दोनों ने एक समान मकसद से सरकारी स्कूल की प्रिंसिपल के साथ हाथापाई की और उसे चोट पहुँचाई। सरकारी अधिकारी के कामकाज में बाधा डाला। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष दोनों पर लगे इल्जाम को साबित करने में कामयाब रहा।

अब्दुल रहमान की बीवी असमा पर IPC की धारा 332 के तहत भी अपराध सिद्ध हुआ है। हालाँकि, FIR में दर्ज चश्मदीद गवाहों ने से एक ने भी बयान दर्ज नहीं कराया था। कोई मेडिको लीगल केस (MLC) भी नहीं थी। FIR भी एक दिन देर से दर्ज कराई गई।

यह घटना लगभग 14 साल पहले 2009 में जाफराबाद के जीनत महल सर्वोदय कन्या विद्यालय की है। 4 फरवरी 2009 को प्रिंसिपल जीनत महल अपनी ड्यूटी पर थीं। उसी वक्त आसमा स्कूल में आई और जीनत महल को थप्पड़ जड़ दिया। कुछ देर बाद रहमान अपने साथियों के संग आया और प्रिंसिपल के साथ अभद्रता की और धमकी दी।

AAP विधायक और उसकी पत्नी आसमा को अधिकतम सात साल कैद की सजा हो सकती है। नियमों के अनुसार, यदि विधायक को दो साल से अधिक की सजा सुनाई जाती है तो वह दिल्ली विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य हो जाएगा। हालाँकि, रहमान ने कहा कि वह इस मामले की अपील हाईकोर्ट में करेेंगे।

अब्दुल रहमान सीलमपुर से AAP के विधायक है। उन पर एक महिला से छेड़छाड़ और मारपीट का आरोप लगा था। महिला ने मार्च 2021 में जाफराबाद थाने में इसकी शिकायत की थी। इसके बाद मामला दर्ज करके जाँच की जा रही है।

महिला ने आरोप लगाया था कि अब्दुल रहमान ने उसके साथ छेड़छाड़ की थी और जब उसने विरोध किया तो उसके साथ मारपीट की थी। यह घटना जाफराबाद नगर निगम के उपचुनाव के दौरान का है।

अमेरिका में घर में घुस कर ताबड़तोड़ गोलीबारी, 8 साल का बच्चा समेत 5 की हत्या: बच्चों को बचाने के लिए उनके ऊपर लेट गई थीं महिलाएँ, हत्यारे पर ₹41 करोड़ का इनाम

अमेरिका में गोलीबारी की घटनाएँ थमने का नाम नहीं ले रहीं हैं। अब टेक्सास प्रांत के क्लीवलैंड में हुई फायरिंग में 8 साल के बच्चे समेत 5 लोगों की मौत हो गई है। पुलिस आरोपित की तलाश में जुटी हुई है। घटना शुक्रवार (28 अप्रैल 2023) रात की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपित रायफल से फायरिंग कर रहा था। इस पर पड़ोसियों ने उसके घर जाकर कहा कि वे सो रहे हैं इसलिए वह फायरिंग न करे। इस पर वह भड़क गया और कहा कि यह उसका घर है। इसके बाद उसने पड़ोसियों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। घटना के समय घर में कुल 10 लोग थे। इनमें से 5 लोगों की मौत हो गई है। मृतकों में 3 महिलाएँ, एक पुरूष और एक 8 वर्षीय बच्चा शामिल है।

पुलिस ने कहा है कि घटना के बाद दो महिलाएँ बच्चों के ऊपर मृत पाई गईं। कहा जा रहा है कि बच्चों को बचाने के लिए महिलाएँ उनके ऊपर लेट गई थीं। हमले में 3 बच्चे तो बच गए लेकिन महिलाओं की गर्दन गोलियों से छलनी हो गई। इससे उनकी मौत हो गई। पीड़ित परिवार के बयान के आधार पर पुलिस आरोपित की तलाश में जुटी हुई है। पुलिस ने घटना स्थल के पास से एक रायफल भी बरमाद की है।

पुलिस को आरोपित का एक वीडियो भी मिला है। वीडियो में वह रायफल लिए दिखाई दे रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय अदालत ने आरोपित के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। साथ ही उस पर 5 मिलियन यानी करीब 41 करोड़ रुपए का इनाम घोषित किया गया है।

बता दें कि अमेरिका में ‘गन कल्चर’ के चलते फायरिंग की घटनाएँ सामने आती रहती हैं। इससे पहले इसी साल फरवरी में टेनेसी राज्य के मिसिसिपी के ग्रामीण इलाके अर्काबुतला काउंटी में एक शख्स ने अंधाधुंध फायरिंग कर 6 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। आरोपित ने पहले अपनी पूर्व पत्नी की हत्या की इसके बाद अपने सौतेले पिता और उनके घर पर मौजूद एक महिला की हत्या कर दी। इसके बाद उसने चर्च के पास 2 और लोगों की हत्या कर दी थी।

अमेरिका के कैलिफोर्निया में 21-22 जनवरी 2023 की रात मास शूटिंग की घटना में 10 लोगों की मौत हो गई थी। मोंटेरी पार्क इलाके में चीनी नववर्ष को लेकर जश्न मनाया जा रहा था, तभी एक हमलावर ने आंधाधुन गोलियाँ चला दीं। नवंबर 2022 में वर्जीनिया के वालमार्ट के एक स्टोर में हुई फायरिंग में 10 लोगों की मौत हो गई थी।

इसके पहले टेक्सास में 18 साल एक युवक ने AK-47 से अपनी दादी को गोली मारी। फिर स्कूल पहुँचकर अंधाधुंध फायरिंग की। अमेरिका को हिला देने वाली यह घटना 24 मई 2022 को हुई थी। जिसमें 22 लोगों की मौत हो गई थी। अमेरिका में मास शूटिंग जैसी घटनाओं के पिछे यहाँ के गन कल्चर को दोषी ठहराया जाता रहा है। जिसे बदलने के लिए खास प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।

‘शिखा मेरे पिता की नहीं, बल्कि एक पूरे समाज की काटी गई थी’: मुख़्तार अंसारी को सज़ा के बाद CM योगी का कायल हुआ कृष्णानंद राय का परिवार: कहा – माफियाओं का हो रहा सफाया

बीजेपी विधायक रहे कृष्णानंद राय हत्याकांड मामले में माफिया डॉन मुख्तार अंसारी को 10 साल और उसके भाई अफजाल अंसारी को 4 साल की सजा हुई है। अंसारी ब्रदर्स को हुई इस सजा पर कृष्णानंद राय के परिवार का कहना है कि योगी सरकार की नीतियों के कारण ही माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई हो रही है।

दरअसल, मुख्तार और अफजाल अंसारी की सजा पर कोर्ट के फैसले के बाद कृष्णानंद राय के बेटे पीयूष राय ने आज तक से बात की है। इस बातचीत में उन्होंने कहा है कि माफियाओं को सजा हुई है। इसलिए उनके लिए यह दिन बहुत महत्वपूर्ण है। उनकी माँ ने कई सालों तक संघर्ष किया है। पूरा परिवार अंसारी बंधुओं के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा था। उन्होंने कोर्ट के फैसले पर खुशी जताई है। साथ ही कहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार द्वारा लिए जा रहे फैसलों के चलते ही माफियाओं और अपराधियों पर कार्रवाई हो रही है। मुख्तार और अफजाल को हुई सजा के लिए यूपी की बदली हुई परिस्थितियाँ भी जिम्मेदार हैं।

वहीं, एक अन्य बातचीत में पीयूष राय ने कहा है कि उनके पिता की हत्या 18 साल पहले हुई थी। हत्या के दौरान उनके पिता की शिखा भी काटी गई थी। शिखा सिर्फ उनकी नहीं बल्कि एक समाज की शिखा काटी गई थी। आज न्यायपालिका ने उसका शिखा का मान बढ़ाया है।

कृष्णानंद राय के भतीजे आनंद राय ने मुख्तार और अफजाल की सजा पर पूरे परिवार की ओर से कोर्ट और सीएम योगी का आभार जताया है। उन्होंने कहा है कि योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति ने उत्तर प्रदेश को भयमुक्त बना दिया है। अब यूपी में गुंडे और माफियाओं का सफाया हो रहा है। पहले की सरकारों में गुंडे आतताइयों के रूप में काम करते हुए धन उगाही करते थे। लेकिन अब माफियाओं का सफाया हो रहा है।

वहीं, कोर्ट के फैसले के बाद बीजेपी विधायक रहे कृष्णानंद राय की पत्नी अलका राय का बयान भी सामने आया। अलका ने कहा है कि वह न्यायपालिका में विश्वास करती हैं। गुंडों, माफियाओं का राज खत्म हो चुका है। अब या तो ये जेल में रहेंगे या फिर ऊपर चले जाएँगे।

बता दें कि मुख्तार अंसारी और उसके भाई अफजाल अंसारी पर बीजेपी विधायक रहे कृष्णानंद राय की हत्या का आरोप था। यही नहीं, मुख्तार पर कोयला व्यापारी नंदकिशोर रूँगटा का अपहरण और हत्या का आरोप था। इस मामले में गाजीपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट में शनिवार (29 अप्रैल 2023) को सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के तहत मुख्तार अंसारी को 10 साल की सजा के साथ 5 लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई।

वहीं, अफजाल अंसारी को 4 साल की सजा और 1 लाख रुपए का जुर्माना भरना होगा। चूँकि, अफजाल अंसारी बीएसपी सांसद है। ऐसे में उसकी सांसदी जाना भी तय माना जा रहा है।

ये Filmfare नहीं, Unfair अवॉर्ड्स… 7 नॉमिनेशन, लेकिन निर्माता को बुलाया ही नहीं: बोले ‘The Kashmir Files’ के प्रोड्यूसर – ये जनता की फिल्म

मार्च 2022 में रिलीज हुई ‘द कश्मीर फाइल्स’ को जनता का काफी प्यार मिला था और दुनिया भर में इसने 250 करोड़ रुपए कमा कर सनसनी मचा दी थी। अब ‘Filmfare Awards 2023’ में फिल्म को 7 कैटेगरी में नॉमिनेट किया गया था। लेकिन, निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने नॉमिनेशन को ठुकरा दिया। अब फिल्म के निर्माता अभिषेक अग्रवाल ने फिल्मफेयर को अन्यायपूर्ण बताते हुए आरोप लगाया है कि उन्हें समारोह में आमंत्रित तक नहीं किया गया।

अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि उन्होंने दुनिया को एक सच्ची कहानी बताने के लिए ‘The Kashmir Files’ जैसी फिल्म का निर्माण किया और इसका समर्थन किया, जो बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर भी हुई। उन्होंने आश्चर्य जताया कि फिल्म को फिल्मफेयर में 7 नॉमिनेशन मिले, लेकिन समारोह में उन्हें इन्वाइट तक नहीं किया गया। बता दें कि फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में पुरस्कारों का ऐलान हो चुका है और ‘द कश्मीर फाइल्स’ को एक भी अवॉर्ड नहीं दिया गया।

अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि अब समय आ गया है जब मनोरंजन इंडस्ट्री को निर्माताओं को सम्मान देना चाहिए, क्योंकि वही होते हैं जो स्टार्स बनाते हैं। बकौल अभिषेक अग्रवाल, सम्मान और पहचान मिलने पर फिल्म निर्माताओं और बड़ी कहानियाँ कहने के लिए प्रेरणा मिलेगी। अभिषेक अग्रवाल द्वारा निर्मित ‘कार्तिकेय 2’ भी सुपरहिट रही थी और रवि तेजा अभिनीत उनकी अगली फिल्म ‘टाइगर नागेश्वर राव’ को रिलीज से पहले ही अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है।

‘द कश्मीर फाइल्स’ को ‘जनता की फिल्म’ बताते हुए अभिषेक अग्रवाल ने कहा, “फिल्मफेयर में इसे 7 नॉमिनेशंस ख़ुशी की बात है, क्योंकि जनता के दबाव में उन्हें ऐसा करना ही था। उनके पास विकल्प नहीं थे। मेरी फिल्म को 7 नामांकन मिले, लेकिन मुझे कोई इन्वाइट नहीं आया। जनता का प्यार और आशीर्वाद जब तक मेरे साथ है, मैं काम करता जाऊँगा। लेकिन, हमें ये समझना होगा कि जैसे डायरेक्टर-एक्टर के बिना फिल्म नहीं बन सकती, वैसे ही प्रोड्यूसर के बिना भी नहीं बन सकती।

‘मन की बात’ से प्रेरित होकर लोगों ने बदलाव के लिए उठाए कदम, नागरिकों तक बढ़ी सरकार की पहुँच: बिल गेट्स समर्थित रिसर्च रिपोर्ट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 100 एपिसोड पूरे होने वाले हैं। इसी थीम पर एक कन्क्लेव का भी आयोजन हो रहा है, जिसमें कई बड़े नेता और सेलेब्रिटी शामिल हुए। अब एक रिसर्च रिपोर्ट में सामने आया है कि ये कार्यक्रम इससे आम लोगों में केंद्र सरकार की पहुँच बढ़ी है, खासकर युवाओं, महिलाओं और किसानों तक। स्वच्छता, विकास, जल संरक्षण और विकास इस कार्यक्रम के महत्वपूर्ण मुद्दे रहे हैं।

एक्सिस मॉय इंडिया और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के साथ साझेदारी में इंस्टीट्यूट फॉर कॉम्पिटिटिवनेस (IFC) ने ये रिसर्च किया है। इसकी रिपोर्ट में बताया गया है कि इस कार्यक्रम के जरिए आम लोगों को बदलाव लाने वाली योजनाओं में सम्मिलित होने के लिए प्रेरित किया गया। इससे देश और इसके नागरिकों के जीवन पर अच्छा प्रभाव पड़ा। जमीन पर बदलाव लाने वालों को इस कार्यक्रम में सम्मान मिला। ‘Mann Ki Baat: A Decade of Reflections’ नामक इस रिपोर्ट में कहा गया है कि लोगों ने इस कार्यक्रम को सुन कर एक्शन लिया, बदलाव में साथ दिया।

उदाहरण के लिए, 2019 में अदिति बलबीर ने ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में काम करते हुए किफायती रिसॉर्ट्स का कारोबार शुरू किया। माधव भट्ट कुल्लांगलू ने कर्नाटक में अपने एक खेत में झील का निर्माण किया। इससे जमीन के नीचे जल का स्तर बढ़ा और लोगों को फायदा हुआ। 2022 में रामशंकर वर्मा ने यूपी में सौर ऊर्जा से चलने वाला अजान मिल स्थापित किया, जिससे न सिर्फ उनकी आमदनी बढ़ी बल्कि आसपास के लोगों को रोजगार भी मिला।

रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘मन की बात’ लोगों को प्रेरित करता है कि वो सामाजिक बदलाव में अपना योगदान दें। 2014-23 तक आए सभी ‘मन की बात’ के एपिसोड की समीक्षा इस रिसर्च के दौरान की गई। पीएम मोदी ने कई बार ‘भारत’, ‘भारतीयों’ और ‘नागरिकों’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया, जिससे सभी लोग कार्यक्रम से जुड़ाव महसूस करने लगे। स्टार्टअप्स और छोटे कारोबारियों को इससे प्रोत्साहन मिला। इसमें आम लोगों द्वारा किए जा रहे अच्छे कार्यों की भी चर्चा की गई।

‘धर्मांतरण के जाल में फँसीं लड़कियाँ, कई विदेशी जेलों में’: जानिए कौन हैं ‘The Kerala Story’ के निर्माता विपुल शाह, बनाई है ‘नमस्ते लंदन’ सहित कई बड़ी फ़िल्में

फिल्म ‘The Kerala Story’ चर्चा का विषय बनी हुई है। अभी इसका ट्रेलर आया है, जो YouTube पर भी टॉप पर ट्रेंड कर रहा है। इस फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे मुस्लिम युवाओं को प्रशिक्षण देकर हिन्दू-ईसाई युवतियों को फँसा कर उनका इस्लामी धर्मांतरण कराने के लिए भेजा जाता है। निकाह के बाद उनकी तस्करी कर के उन्हें सीरिया भेजा जाता है, आतंकी संगठन ISIS के पास। इस फिल्म के निर्माता विपुल अमृतलाल शाह हैं।

संवेदनशीलता एकतरफा नहीं हो सकती, इसकी आड़ में छिपना बंद करें: ‘The Kerala Story’ के निर्माता विपुल अमृतलाल शाह

उनका कहना है कि ‘The Kerala Story’ वास्तविक घटनाओं पर आधारित है। उन्होंने बताया कि इस चंगुल में फँस चुकी कई लड़कियाँ अफगानिस्तान की जेल में हैं। उन्होंने बताया कि ये ऐसी ही लड़कियों की कहानी है, जो धर्मांतरण के जाल में फँस गईं और उनका जीवन बर्बाद हो गया। उन्होंने बताया कि फिल्म की टीम रिसर्च के दौरान ऐसी लगभग 100 पीड़िताओं से मिली। उनका कहना है कि उनके पास कई वीडियो हैं, जिनमें पीड़िताओं ने अपना दर्द साझा किया है।

बकौल विपुल अमृतलाल शाह, उनका उद्देश्य पीड़ित लड़कियों की कहानी दिखाना है, ये लोगों के ऊपर है कि वो इसे ‘लव जिहाद’ नाम दें या कुछ और। उन्होंने कहा कि हमें इस चीज के पीछे छिपना बंद कर देना चाहिए कि कोई मुद्दा बहुत संवेदनशील है और इससे सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ेगा। उन्होंने पूछा कि क्या ऐसे अपराध करने वाले इस बारे में सोचते हैं? वो बस अपने एजेंडे के अनुरूप काम करते हैं। उन्होंने कहा कि संवेदनशीलता एकतरफा नहीं हो सकती, कोई कुछ करेगा तो कोई उसकी पोल भी खोलेगा।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने सती प्रथा का उदाहरण देते हुए कहा कि ये गलत था तो हिन्दुओं ने इसे हटाया, इसके खिलाफ आवाज़ उठाने वाले भी हिन्दू थे। उन्होंने उम्मीद जताई कि ताज़ा घटनाओं पर मुस्लिम समुदाय आगे आकर निंदा करेगा। उन्होंने कहा कि राजनीतिक पार्टियों द्वारा किसी फिल्म को लेकर कुछ स्टैंड लेने से उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्टैंड लें, लेकिन पीड़ित लड़कियों को मत भूलें। बता दें की विपुल शाह इस फिल्म के निर्माता हैं, जबकि निर्देशक सुदीप्तो सेन हैं।

कौन हैं ‘The Kerala Story’ के निर्माता विपुल अमृतलाल शाह

विपुल अमृतलाल शाह 1999-2002 के बीच सोनी टीवी पर आए सीरियल ‘एक महल हो सपनों का’ का निर्देशन कर के चर्चा में आए थे। ये सीरियल 1000 एपिसोड तक पहुँचा। गुजरती फिल्म ‘दरिया छोरू (1999)’ ने उन्हें अपने गृह राज्य में स्थापित किया। 2002 में आई ‘आँखें’ बॉलीवुड में बतौर निर्देशक उनकी पहली फिल्म थी, जिसमें अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार और सुष्मिता सेन थे। अक्षय-अमिताभ और प्रियंका चोपड़ा को लेकर उन्होंने 2005 में ‘वक्त: द रेस अगेंस्ट टाइम’ बनाई।

लेकिन, उनके करियर की सबसे बड़ी फिल्म 2007 में रिलीज हुई ‘नमस्ते लंदन’ रही, जिसमें अक्षय कुमार और कटरीना कैफ के अलावा ऋषि कपूर मुख्य भूमिकाओं में थे। उनकी अगली फिल्म में अक्षय कुमार और सलमान खान थे, लेकिन ‘लंदन ड्रीम्स (2009)’ सफल नहीं रही। 2010 में उन्होंने अक्षय कुमार-ऐश्वर्या राय के साथ ‘एक्शन रिप्ले’ बनाई। 2018 में आई अर्जुन कपूर-परिणीति चोपड़ा की ‘नमस्ते इंग्लैंड’ बतौर निर्देशक बॉलीवुड में उनकी अंतिम फिल्म थी।

यहाँ ये जानने ज़रूरी है कि ‘आँखें’ के अलावा बाकी फिल्मों के प्रोड्यूसर भी वही थे। इसके अलावा जॉन अब्राहम की ‘फ़ोर्स’ और विद्युत जामवाल की ‘कमांडो’ सीरीज की फिल्मों के निर्माता भी वही हैं। अक्षय कुमार की सुपरहिट फिल्म ‘सींग इज किंग (2008)’ का निर्माण भी उन्होंने ही किया था। ‘कमांडो’ की 3 फ़िल्में आ चुकी हैं और ‘फ़ोर्स’ की तीसरी बन रही है। उन्होंने OTT सीरीज ‘Human (2022)’ का भी निर्देशन किया, जिसमें उनकी पत्नी शेफाली शाह थी।

शेफाली शाह थिएटर, फिल्म इंडस्ट्री और टीवी की एक बड़ी एक्ट्रेस रही हैं। ‘सत्या (1998)’ का गाना ‘कुड़ी सपने में मिलती है’ उन पर फिल्माया गया था। स्टार प्लस पर आने वाले महेश भट्ट कृत ‘कभी कभी (1997)’ से उन्हें पहचान मिली। OTT पर उन्होंने ‘दिल्ली क्राइम (2019)’ के माध्यम से अपनी छाप छोड़ी। ‘The Last Year (2009)’ के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। ‘दिल धड़कने दो (2015)’ में उन्होंने अनिल कपूर की पत्नी का किरदार अदा किया था, जिसके लिए उन्हें कई अवॉर्ड्स मिले थे।

‘बड़ी छिपकलियों की चर्बी से बढ़ेगी यौन ताकत …केवल 4 बूँद जादू कर देंगी’ : वियाग्रा बैन के बाद पाकिस्तानियों ने खोजा ‘विकल्प’, कीमत 600-1200 रुपए

पाकिस्तान में वियाग्रा बैन होने के बाद और आर्थिक तंगी के बीच एक कारोबार ने तेज रफ्तार पकड़ी है। ये कारोबार यौन शक्ति बढ़ाने वाले तेल की ब्रिकी का है जिसे छिपकली की चर्बी निकालकर बिच्छू के तेल के साथ गर्म करके बनाया जाता है और पाकिस्तान में लोग इसे ‘सांडे का तेल’ कहते हैं।

रिपोर्ट्स की मानें तो यह तेल ऐसी छिपकली की चर्बी से बनता है जो रेगिस्तानी इलाकों में मिलती है। यह तेल वैज्ञानिक दृष्टि से कितना कारगर इसका कोई सबूत नही है। इस्लामाबाद के डॉ अहमद सहाब इसे बकवास चीज बताकर इसके असर को खारिज कर चुके हैं। लेकिन पाकिस्तान में इसकी बिक्री धड़ल्ले से हो रही है।

कथिततौर पर इस तेल को बेचने वाले पाकिस्तान में रोड किनारे बैठे मिलते हैं। ये लोग छिपकलियाँ पंजाब और सिंध प्रांत से अवैध ढंग से शिकार करके लाते हैं। जिनका साइज आम छिपकलियों से बड़ा (2 फीट तक का) होता है। रात के समय इनका शिकार जाल लेकर किया जाता है। जब ये पकड़ में आ जाती हैं तो क्रूरता से इनकी पीठ तोड़ी जाती है ताकि ये भाग न पाएँ। फिर प्रदर्शनी की तरह इन्हें सड़कों पर बिछाया जाता है और ग्राहकों को आकर्षित किया जाता है।

तेल बनाने वाले लोग इन छिपकलियों को काटकर इनकी पूँछ के नीचे से एक ग्रंथि (ग्लैंड) निकाल लेते हैं। इसके बाद इसे छोटे पैन में गर्म करते हैं और यही ग्राहक को बाद में दिया जाता है।

एएफपी की रिपोर्ट में इस कारोबार का जिक्र करते हुए उस दुकानदार का बयान भी है जो ऐसे तेल बेचता है। विक्रेता का नाम यासिर अली है। अली ने कहा कि इस तेल की चार बूँदे बहुत असरदार होती हैं। यह तेल यौन शक्ति बढ़ाने में जादू जैसे काम करता है। लोग शीशियों में भरकर ग्राहक की माँग पर इसे देते हैं। इसकी कीमत 600 से 1200 पाकिस्तानी रुपया तय की गई है।

ये तेल बेचने वाले दावा करते हैं कि ये तेल सिर्फ यौन शक्ति नहीं बढ़ाता बल्कि ज्वाइंट के दर्द, बैक के दर्द और बाल झड़ने से भी रोकता है। पुलिस ने कई बार ऐसे कारोबार करने वालों को पाकिस्तान में पकड़ा। लेकिन फिर इन्हें 10 हजार फाइन के बाद छोड़ दिया गया और ये दोबारा छिपकली लाकर अपना धंधा करने लगे।

पाकिस्तान में लड़कियों की कब्र में ताला लगाने को मजबूर हो रहे परिवार वाले, कारण – लाश निकाल कर किया जाता है रेप: गलत निकली मीडिया रिपोर्ट्स

पाकिस्तान में हिन्दू और सिख लड़कियों के यौन उत्पीड़न के मामले अक्सर सामने आते हैं। वहीं कई खबरें बताती हैं कि वहाँ जिंदा तो दूर, मरने के बाद लड़कियाँ सुरक्षित नहीं हैं। दरअसल, पाकिस्तान में शवों के साथ बलात्कार की घटना सामने आती रहती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि ऐसे में मृत लड़कियों की कब्रों पर लोहे के दरवाजे और ताला लगाया जा रहा है। हालाँकि, ये खबर गलत होने की बात सामने आई है।

फैक्ट-चेक में सामने आया है कि इस कब्र की तस्वीर भारत के हैदराबाद से है और कब्र में ग्रिल इसीलिए लगाया गया था, क्योंकि कई लोग पुरानी कब्रों के ऊपर से ही लाश को दफ़न कर देते हैं। इसे सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के सन्दर्भ में शेयर कर दिया गया।

दरअसल, आँकड़ों की मानें तो पाकिस्तान में हर दो घण्टे में एक महिला बलात्कार का शिकार होती है। मरने के बाद कब्र से शव निकाल कर रेप की घटनाएँ सामने आती रही हैं। ताज़ा मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा था कि लड़कियों की कब्र पर ताला लगना पूरे पाकिस्तान को शर्मसार करने वाली घटना है। इन खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व मुस्लिम और अब नास्तिक कार्यकर्ता तथा ‘द कर्स ऑफ गॉड, व्हाई आई लेफ्ट इस्लाम’ पुस्तक के लेखक हैरिस सुल्तान ने लिखा था कि कब्र से शव निकालकर उनके साथ बलात्कार कट्टरपंथी इस्लामवादी विचारधारा के कारण हो रहा है।

हैरिस सुल्तान ने कब्र पर ताले वाली एक फोटो शेयर करते हुए ट्वीट किया था। इस ट्वीट में उन्होंने कहा था, “पाकिस्तान ने यौन रूप से कुंठित एक ऐसा समाज बना दिया है जहाँ लोग अपनी बेटियों को बलात्कार से बचाने के लिए उनकी कब्रों पर ताला लगा रहे हैं। जब आप बुर्के को बलात्कार से जोड़ते हैं तो यह मानसिकता आपको कब्र तक ले जाती है।”

समाचार एजेंसी ANI तक ने ‘डेली टाइम्स’ के हवाले से लिखा कि पाकिस्तान में शवों के साथ हो रही दरिंदगी के मामलों में बेतहाशा बढ़ोतरी हो रही है। इन खबरों में लिखा था कि ऐसे में, मृतक लड़कियों के परिजन मजबूरी बस कब्रों पर दरवाजे और ताला लगा रहे हैं। हालाँकि, कई फैक्ट चेक के बाद सामने आया है कि शेयर की जा रहीं तस्वीरों का पाकिस्तान में कब्र से निकाल आकर शवों से रेप किए जाने का कोई संबंध नहीं है।

बता दें कि पाकिस्तान में शवों के साथ बलात्कार की घटनाएँ सामने आती रहती हैं। ऐसा ही एक मामला साल 2011 में सामने आया था। तब, कब्र की रखवाली करने वाले व्यक्ति मोहम्मद रिजवान को कब्र से शव निकालकर बलात्कार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। रिजवान ने स्वीकार किया था कि उसने 48 महिलाओं के शवों के साथ बलात्कार किया है।

ऐसा ही मामला अगस्त 2021 में सामने आया था। तब, बुखार के कारण मरी एक 14 साल की लड़की के शव के साथ बलात्कार किया गया था। बलात्कारी की पहचान रफीक के रूप में हुई थी। जिस रात लड़की को दफनाया गया था, रफीक ने उसी रात उसकी कब्र खोदकर शव निकाल लिया था। इसके बाद आधा किलोमीटर दूर ले जाकर बलात्कार किया।

पाकिस्तान में शवों के साथ हो रही बलात्कार की घटना के लिए इस्लमामिक कट्टरपंथी विचारधारा को दोषी ठहराया जाता है। लेकिन मनोचिकित्सक मानते हैं कि यह सब नेक्रोफिलिया बीमारी के कारण होता है। इस बीमारी के चलते ही शव के साथ बलात्कार करने की इच्छा उत्पन्न होती है। दरअसल, ग्रीक भाषा में नेक्रो शब्द का अर्थ शव और फीलिया का अर्थ प्यार होता है। इस तरह ‘नेक्रोफीलिया’ का अर्थ मरे हुए लोगों के साथ प्यार करना या उनके साथ सेक्स करना होता है।

‘अतीक अहमद की तरह कोई गोली न मार दे’: चुनाव प्रचार के बीच आजम खान को सताया डर, विरोधियों को कहा ‘राजनीतिक किन्नर’

समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री आजम खान ने एक फिर सनसनीखेज बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मारे गए गैंगस्टर अतीक अहमद की तरह उनकी भी कनपटी पर कोई मारकर चला जाएगा। उन्होंने एक बार फिर मर्यादा को लाँघते हुए भाजपा के विरोधियों को ‘राजनीतिक किन्नर’ कह दिया। दरअसल, आजम खान ने यूपी नगर निकाय चुनाव के प्रचार के दौरान रामपुर में यह बात कही।

चुनाव प्रचार के दौरान आजम खान ने कहा, “मुझसे, मेरी बीवी, मेरी औलाद और चाहने वालों से क्या चाहते हो? कोई आए कनपटी पर गोली चलाकर चला जाए? बस इतना ही तो रह गया है। बचा लो आज भी निजाम-ए-हिंद को… कानून को बचा लो…।”

मतदाताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “आपको कुछ नहीं देना है सिर्फ अपने आप को हौसला देना है। जहां रोके जाओ वहीं बैठ जाओ कि आगे बढेंगे, वापस नहीं जाएँगे। वोट डालेंगे। ये हमारा पैदाइशी हक है। इस हमारे हक को दो बार छीना गया है और तीसरी बार छीना गया तो जान लेना, शायद साँस लेने का हक भी बाकी नहीं रह पाएगा।”

रामपुर नगरपालिका अध्यक्ष पद की उम्मीदवार फातिमा जबी के समर्थन में प्रचार करते हुए आजम खान ने भाजपा सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि लाल किला बिक चुका है, हवाई अड्डे बिक चुके हैं। पूरा देश संविदा पर है। बचा ही क्या, सिर्फ फौज रह गई है। वह भी हुकूमत-ए-हिंद के पास है। वह रहनी चाहिए।

आजम खान ने कहा, “हमने जो तीन साल बाहर काटी है, वो जेल से भी खतरनाक और भयानक गुजरे हैं। इनकी हमारे सामने पर्चा भरने तक की हिम्मत नहीं है। रामपुर वालों, तुम्हारे सब्र की जीत होगी। तुम्हारी खुद्दारी और खैरत की जीत होगी। ये लोग गलत थे और गलत हैं।” भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, “विकास करोगे और विकास लिख नहीं सकोगे। कागज पर तुम्हारे कलम में रोशनाई ही कहाँ है, जो लिख सको।” 

आजम खान ने कहा, “हमने उत्तर प्रदेश पर चार बार कब्जा यूँ ही नहीं किया। घर की मुर्गी दाल बराबर कुछ समझ लो, लेकिन चार बार हुकूमत तुम्हारी (मुस्लिमों की) मजबूत मुट्ठी के बगैर नहीं बनी है।” रामपुर उपचुनाव को लेकर कहा, “चुनौती देते हैं… ऐ आसमां तुझे गवाह करके कहते हैं कि हिंदुस्तान के 150 करोड़ में कोई आओ और रामपुर वालों से चुनाव लड़ो। अगर जीत गए तो पूरा रामपुर खाली कर देंगे। यह चुनाव पुलिस की ताकत पर था।”

सभा में आए लोगों की ओर इशारा करते हुए सपा नेता ने कहा, “बताओ इस महफिल में कोई कमी है? अगर इस गली से चार भोंकने वाले चले गए हैं तो 40 और आ जाएँगे। बस इतना ही हुआ है। मगर हम भी ढेला मार रहे हैं। खजाने के जिस बटन पर उंगली रख दी हमने, उस तिजोरी का ताला खुल गया रामपुर वालों तुम्हारे लिए।”

आजम खान ने अपशब्दों का प्रयोग करते हुए भाजपा के अपने विरोधियों को राजनीतिक किन्नर तक कह दिया। बता दें कि इसी तरह की अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने के कारण कोर्ट ने उन्हें तीन साल की सजा सुनाई थी। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अधिकारियों के लिए अपशब्द कहे थे।